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ईंधन की अवैध बिक्री पर सख्ती, डब्बों में पेट्रोल-डीजल बेचने पर होगी कार्रवाई

दंतेवाड़ा. पश्चिम एशिया में उपजे मौजूदा संकट और उससे उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ा फैसला लिया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग (मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर, अटल नगर) द्वारा जारी निर्देशों के तहत राज्य में पेट्रोल और डीजल की खुले में बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। कलेक्टर खाद्य शाखा दंतेवाड़ा द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य शासन ने ईंधन की आपूर्ति और वितरण को सुचारू बनाए रखने के लिए नए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी निर्देशों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) की तेल कंपनियों और अन्य समानांतर कंपनियों के पेट्रोल-डीजल रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) संचालकों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि: पेट्रोल और डीजल का विक्रय सीधे केवल उपभोक्ता के वाहन की टंकी में ही किया जाएगा। कोई भी रिटेल आउटलेट संचालक किसी भी व्यक्ति को ड्रम, केन (Jerrycan) या बोतल जैसे खुले बर्तनों में पेट्रोल-डीजल नहीं बेचेगा। यदि कोई संचालक इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चूंकि वर्तमान में रबी सीजन की फसल कटाई का काम चल रहा है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियां भी शुरू होने वाली हैं, ऐसे में आम जनता और विकास कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के लिए शासन ने कुछ महत्वपूर्ण मामलों में छूट का प्रावधान भी किया है। इन क्षेत्रों को मिलेगी नियमों से राहत: कृषक (किसान): खेती-किसानी और ट्रैक्टर/थ्रेशर आदि के लिए किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए। शासकीय एवं निर्माण कार्य: जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित रेलवे, सड़क निर्माण और भवन निर्माण जैसे समय-सीमा में पूरे होने वाले सरकारी कार्य। अत्यावश्यक सेवाएं: अस्पताल, मोबाइल टावर संचालन और अन्य जरूरी इमरजेंसी सेवाएं। कैसे मिलेगी खुले में ईंधन लेने की अनुमति? विज्ञप्ति के अनुसार, शासकीय कार्यों और अत्यावश्यक सेवाओं के लिए खुले में (ड्रम या केन में) डीजल-पेट्रोल की आवश्यकता होने पर सीधे ईंधन नहीं मिलेगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM द्वारा मांग का उचित परीक्षण किया जाएगा। एसडीएम की रिपोर्ट और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद ही कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित कार्यों हेतु रिटेल आउटलेट से निर्धारित मात्रा में ईंधन विक्रय की विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

योगी सरकार देने जा रही पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय की सौगात

योगी सरकार देने जा रही पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय की सौगात  आयुष शिक्षा को नई उड़ानः देवीपाटन, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित होंगे संस्थान चार मंडलों में जमीन पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज है, बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में  आयुष शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी -योगी   भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं सीएम योगी लखनऊ,  योगी सरकार आयुष चिकित्सा प्रणाली को मजबूत बनाने और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने पांच नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालयों की स्थापना का निर्णय लिया है। ये आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालय गोंडा, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित किए जाएंगे, जहां विद्यार्थियों को आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। योगी सरकार के निर्णय से न केवल प्रदेश में आयुष शिक्षा का दायरा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। नए महाविद्यालयों के माध्यम से युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होगा। चार मंडलों में जमीन पहले से उपलब्ध प्रमुख सचिव, आयुष रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को भी मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं ताकि प्रदेशवासियों को सुरक्षित, सस्ती तथा प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालय के लिए पांच मंडलों में जमीन को चिन्हित कर लिया गया है। देवीपाटन मंडल में गोंडा के विकास खंड वजीरगंज के ग्राम कोडर में लगभग 14.82 एकड़ भूमि, मीरजापुर मंडल में सदर तहसील के ग्राम अकोढ़ी में 13.83 एकड़ भूमि, मेरठ मंडल के लिए गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील के ग्राम सैदपुर हुसैनपुर डलना में 11 एकड़ भूमि, आगरा मंडल में किरावली तहसील के ग्राम अकबरा में 13.5 एकड़ भूमि और बस्ती मंडल में हर्रैया तहसील के ग्राम जोगापुर में 15 एकड़ भूमि महाविद्यालय की  स्थापना के लिए चिन्हित की गयी है। इनमें से चार मंडलों में जमीन पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज है, जबकि बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शिक्षा संस्थान शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी किए जाएंगे विकसित आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी. ने बताया कि सभी पांच मंडलों में आयुष महाविद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध हो गयी है। वहीं वर्तमान में राजकीय एकीकृत आयुष महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का नक्शा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नए आयुष महाविद्यालय केवल शिक्षा संस्थान नहीं होंगे, बल्कि शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी विकसित किए जाएंगे। यहां आयुर्वेदिक औषधियों, योग चिकित्सा, जीवनशैली आधारित उपचार और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भारतीय चिकित्सा परंपरा को वैज्ञानिक आधार पर और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। नए आयुष महाविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही मंडल में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्रों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। महाविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, चिकित्सालय, अनुसंधान सुविधाएं और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिससे आयुष शिक्षा को नई गुणवत्ता और पहचान मिलेगी।

दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना: 80% से अधिक अंक पर छात्रों की माताओं को हर महीने 2100 रुपये

हिसार  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड व सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे 10वीं-12वीं की परीक्षा में 80 प्रतिशत या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं तो मां को दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत महिलाओं को हर माह 2100 रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के 148 पीएमश्री व माडल संस्कृति स्कूलों की लिस्ट जारी की है। मुख्यालय ने आदेश दिए हैं कि सूची में शामिल स्कूलों में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों की लिस्ट तैयार की जाए जिन्होंने इस साल 10वीं-12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। हिसार जिले के 12 स्कूलों का नाम इसमें शामिल है। 17 प्वाइंटों पर मांगी होनहार की रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए 17 बिंदुओं का एक फार्म तैयार किया है। जिसे समस्त डीईओ को जारी कर दिया गया है। प्रति कालम में होनहार के बारे में पूछा गया है, जिसमें नाम, पता, स्कूल का नाम, प्राप्त अंक, जन्म सहित अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। उपरोक्त फार्म को कक्षा टीचर व स्कूल मुखिया की तरफ से सत्यापित कर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजनी होगी। जिसके बाद रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी। प्रदेश स्तर पर स्कूलों की संख्या अंबाला से 8 स्कूल, भिवानी से 7 स्कूल, चरखी दादरी से 3 स्कूल, फरीदाबाद से 5 स्कूल, फतेहाबाद से 6, गुरुग्राम से 4, हिसार से 12, झज्जर से 7, जींद से 7, कैथल से 6 स्कूल, करनाल से 8, कुरुक्षेत्र से 5, नूंह से 12 स्कूल, पलवल से 7, पंचकूला से 6 स्कूल, पानीपत से 6 स्कूल, रेवाड़ी से 5 स्कूल, रोहतक से 6 स्कूल, सिरसा से 7 स्कूल, सोनीपत से 7 स्कूल और यमुनानगर से 9 स्कूल शामिल हैं, जो कि सरकारी स्कूल की श्रेणी में है।   मुख्यालय की ओर से हमें पत्र मिला था। जिसमें हमसे पीएमश्री व माडल संस्कृति स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों के नाम मांगे गए थे, जिन्होंने 10वीं व 12वीं परीक्षा में 80 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए हो। बीईओ को आदेश जारी कर दिए गए हैं।     – रामरतन, जिला शिक्षा अधिकारी, हिसार  

बस्तर में विकास कार्यों का जायजा ले रहे उप मुख्यमंत्री अरुण साव, निर्माण कार्यों का लगातार निरीक्षण

उप मुख्यमंत्री अरुण साव का बस्तर में निर्माण कार्यों का निरीक्षण जारी  मिशन अमृत के तहत निर्माणाधीन इंटेक-वेल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का लिया जायजा, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का काम भी देखा  रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के चौथे दिन आज सुकमा में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था को मजबूत करने बनाए जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने योजना के तहत शबरी नदी पर निर्माणाधीन इंटेक-वेल के कार्यों को भी देखा। उन्होंने पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार के कार्यों को भी तेजी से पूर्ण करते हुए जनवरी-2027 से मिशन अमृत की इस योजना से सुकमा में जल की आपूर्ति प्रारंभ करने के निर्देश दिए। केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 के तहत नगर पालिका द्वारा 86 करोड़ की लागत से सुकमा शहर की पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इसका 54 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से कहा कि सुकमा की आगामी 25 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया जा रहा है। निर्माण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना है। काम में तेजी बरकरार रखते हुए नियत समय में इसे पूर्ण करना है।  उप मुख्यमंत्री साव ने लोक निर्माण विभाग द्वारा सुकमा के कुम्हाररास में 11 करोड़ 62 लाख रुपए की लागत से बनाए जा रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से दिसम्बर तक इसे पूर्ण करने को कहा। करीब 10 एकड़ में बन रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में फुटबॉल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक, इंडोर बैडमिंटन कोर्ट, प्रशासनिक भवन, बॉक्स-क्रिकेट, स्वीमिंग-पूल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके निर्माण से सुकमा की खेल प्रतिभाओं को अपने कौशल को निखारने एक सर्वसुविधायुक्त अधोसंरचना और सुविधाएं मिलेंगी। अब तक इसका 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।  तीनों कार्यों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर अमित कुमार भी उप मुख्यमंत्री के साथ थे।

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसानों को मिल रहे बेहतर परिणाम

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसानों को मिल रहे बेहतर परिणाम कम लागत, अधिक दक्षता और बेहतर उत्पादन से बढ़ रहा किसानों का भरोसा रायपुर,  कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग प्रदेश के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इनके प्रयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिल रहा है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कंचनपुर के प्रगतिशील किसान राम लखन राजवाड़े ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग से मिले सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि में विभिन्न फसलों की खेती करने वाले राजवाड़े ने बताया कि उन्होंने पत्ता गोभी, धान तथा अन्य फसलों में नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया, जिससे फसलों की वृद्धि और विकास में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए।उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। परिणामस्वरूप फसल को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है। धान की फसल में भी बेहतर वृद्धि तथा विकसित बालियों के रूप में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ाने में सहायक हैं। इनके प्रयोग से उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है, जिससे खेती की लागत में कमी आती है। साथ ही पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होने से पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। राज्य सरकार एवं कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी प्रदान की जा रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के कृषि क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। नैनो उर्वरकों का सफल उपयोग करने वाले किसान अब अन्य कृषकों को भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

‘आपन सरस्वतिया’ अभियान: ड्रोन और श्रमदान से नदी को पुराना स्वरूप लौटाने की कोशिश

गढ़वा बिना किसी भारी-बरकम सरकारी बजट के, सिर्फ जनसहभागिता के दम पर गढ़वा की सरस्वतिया नदी को उसका पुराना गौरव लौटाने की कोशिशें अब एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी हैं. गढ़वा शहर में जहां अभियान के 14 दिन पूरे हो गए, वहीं मेराल में भी इस मुहिम ने एक हफ्ता (7 दिन) का सफर तय कर लिया. इस शानदार कामयाबी के बाद, आज सोमवार से शुरू हो रहे नए सप्ताह के साथ नदी को उसका प्राकृतिक स्वरूप देने और सफाई के काम को और तेज करने की तैयारी है. ड्रोन कैमरे और गूगल अर्थ से तैयार हो रही कार्ययोजना प्रशासन और आम जनता के इस साझा प्रयास की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन कैमरे और गूगल अर्थ की मदद से पूरी कार्ययोजना तैयार की जा रही है. गढ़वा के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने गढ़वा और मेराल दोनों इलाकों का खुद मुआयना किया. गढ़वा में इस मुहिम को गति देने के लिए सहीजना निवासी दीपक कुमार पाठक प्रमुख सहयोगी के रूप में सामने आए, जिनकी एसडीएम ने सराहना की. मेराल में 100 से अधिक लोग कर रहे हैं श्रमदान वहीं मेराल में बीडीओ सह अंचलाधिकारी यशवंत नायक के नेतृत्व में पूर्व जिला परिषद सदस्य संजय भगत, विधायक प्रतिनिधि लालमोहन और पूर्वी-पश्चिमी मेराल के मुखियाओं समेत लगभग 100 से अधिक लोग और स्थानीय मीडियाकर्मी इस अभियान में श्रमदान कर रहे हैं. सामाजिक आंदोलन बन चुका है ‘आपन सरस्वतिया’ एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि आपन सरस्वतिया’ अब सिर्फ एक सफाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बन चुका है. यह इस बात का सबूत है कि अगर समाज और प्रशासन साथ मिल जाएं, तो बिना किसी विशेष सरकारी बजट के भी इतने बड़े बदलाव किए जा सकते हैं. यह पूरी तरह से गढ़वा के लोगों की जिम्मेदारी और उनका अपना अभियान है. एसडीएम ने जिले के अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यवसायियों और सक्षम नागरिकों से अपील की है कि सोमवार से शुरू हो रहे नए हफ्ते में इस अभियान से और अधिक संख्या में जुड़ें ताकि सरस्वतिया नदी को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त और स्वच्छ बनाया जा सके. ‘आपन सरस्वतिया’ अभियान की 5 बड़ी बातें आधा दर्जन जेसीबी से सफाई:- नदी में सालों से जमी गाद (डी-सिल्टिंग), झाड़-झंखाड़, बांस और अन्य अवरोधों को हटाने के लिए 6 जेसीबी मशीनों और दो ट्रैक्टरों को काम पर लगाया गया है. अतिक्रमण पर चला पीला पंजा:- नदी के बहाव को रोकने वाली कई स्थाई और अस्थाई अवैध संरचनाओं (अतिक्रमण) को ध्वस्त कर दिया गया है. मेराल में 50 फीट चौड़ाई का लक्ष्य:- मेराल क्षेत्र में नदी को कम से कम 50 फीट या उससे अधिक की न्यूनतम चौड़ाई देने का काम तेजी से चल रहा है. हाईटेक मॉनिटरिंग: – तेनार गांव के नागेंद्र प्रजापति निशुल्क ड्रोन सेवा देकर नदी के प्रवाह क्षेत्र का डिजिटल मूल्यांकन करने में मदद कर रहे हैं. कॉर्पोरेट और जनता का साथ:- रेहला स्थित ग्रासिम इंडस्ट्री ने सफाई के बाद छिड़काव के लिए 20 बोरी ब्लीचिंग पाउडर उपलब्ध कराया है, ताकि नदी के किनारों को सैनिटाइज किया जा सके.  

मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन बना मिसाल, ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

भोपाल मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और जल आत्मनिर्भरता की दिशा में चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर संचालित यह अभियान जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का सफल मॉडल बनकर उभरा है, जिसकी सराहना अब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी होने लगी है। भोपाल स्थित भारत भवन में आयोजित सात दिवसीय ‘सदानीरा समागम’ में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा इक्वाडोर के राजनयिकों ने हिस्सा लिया। सभी देशों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश के जल संरक्षण मॉडल की सराहना करते हुए इसे वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक आवश्यकता बताया और अपने-अपने देशों में इस तरह की पहल लागू करने की इच्छा जताई। साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस वराईओनाइडेस ने जल संकट को वैश्विक चुनौती बताते हुए जन-जागरूकता आधारित अभियानों की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने जलवायु परिवर्तन को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल की सराहना की और कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत और फिजी के सरोकार समान हैं।  मेक्सिको दूतावास की संस्कृति प्रमुख वनेसा एड्रियन ने जल संरक्षण को साझा वैश्विक जिम्मेदारी बताते हुए नदियों और जल स्रोतों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की अवधारणा की प्रशंसा की। नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने कहा कि यह आयोजन प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का बोध कराता है और भारत-नेपाल की सांस्कृतिक समानताओं को भी मजबूत करता है। त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायुक्त चंद्रदत्त सिंह ने इस पहल को पर्यावरणीय जागरूकता का प्रभावी माध्यम बताया, जबकि इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जॉर्ज विनिशियो अनरंगो ने घोषणा की कि वे मध्यप्रदेश के अनुभवों से प्रेरणा लेकर अपने देश में भी जल संरक्षण पर केंद्रित ‘सदानीरा संगम’ जैसा आयोजन करेंगे। मध्यप्रदेश सरकार के अनुसार प्रदेश में अब तक 2 लाख 12 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण एवं पुनर्जीवन कार्य पूरा किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 3 लाख 66 हजार तक पहुंचाना है। जनभागीदारी और नवाचार पर आधारित यह अभियान जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिला रहा है। 

पंचायत चुनाव की तैयारियों को झटका, आरक्षण रोस्टर पर फैसला लंबित; 15 जून तक आएंगे निर्देश

पटना. बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन आरक्षण रोस्टर जारी नहीं होने से संभावित उम्मीदवारों और आम लोगों के बीच अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोग लगातार आरक्षण सूची का इंतजार कर रहे हैं. इसी बीच विभागीय सूत्रों से बड़ी जानकारी सामने आई है कि 15 जून तक पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण गाइडलाइन जारी की जा सकती है. प्रखंड से जिला स्तर तक तेज हुई चुनावी तैयारी पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. विभाग द्वारा प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है. वहीं, ईवीएम मशीनों के सुरक्षित रख-रखाव के लिए स्टोर की व्यवस्था को लेकर भी जगहों का चयन किया जा रहा है. 2006 और 2016 के आरक्षण रोस्टर का हो रहा अध्ययन विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2006 और 2016 के पंचायत आरक्षण रोस्टर को राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है. वर्ष 2016 का रोस्टर 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार किया गया था, जबकि 2006 का रोस्टर जनगणना से पहले का है. अब दोनों रोस्टर का तुलनात्मक अध्ययन कर नया पंचायत आरक्षण रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है. 15 जून तक हो सकती है बड़ी घोषणा सूत्रों की मानें तो राज्य स्तर से 15 जून तक आरक्षण संबंधी गाइडलाइन जारी होने की संभावना है. गाइडलाइन जारी होने के बाद सभी प्रखंडों से आरक्षण सूची मांगी जाएगी. इसके बाद जिला प्रशासन सूची को अंतिम रूप देकर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेगा. आयोग की स्वीकृति मिलने के बाद ही पंचायतों के लिए आरक्षण सूची आधिकारिक रूप से लागू होगी और उसी आधार पर चुनाव कराया जाएगा. दावा-आपत्ति की प्रक्रिया लगभग पूरी चुनावी तैयारियों के तहत दावा-आपत्ति के निपटारे का काम भी लगभग पूरा कर लिया गया है. प्रशासन का दावा है कि आरक्षण प्रक्रिया को जल्द अंतिम रूप देकर चुनाव संबंधी आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी. महाराजगंज प्रखंड की 16 पंचायतों में होगा चुनाव महाराजगंज प्रखंड की 16 पंचायतों में मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और जिला परिषद सदस्य पदों के लिए चुनाव कराया जाना है. चुनावी सरगर्मी के बीच संभावित प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं, लेकिन आरक्षण स्पष्ट नहीं होने से अंतिम रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं. क्या बोले बीडीओ? महाराजगंज प्रखंड के बीडीओ बिंदु कुमार ने बताया कि प्रखंड की सभी 16 पंचायतों के लिए वर्ष 2006 और 2016 के आरक्षण रोस्टर को पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है. आगे की कार्रवाई राज्य स्तर से जारी होने वाली गाइडलाइन के अनुसार की जाएगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरक्षण गाइडलाइन और रोस्टर जारी होते ही पंचायत चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी. इसके बाद संभावित उम्मीदवार खुलकर चुनावी मैदान में उतरेंगे और गांवों में चुनावी गतिविधियां तेज हो जाएंगी.

अंतर्राष्ट्रीय समपार फाटक जागरूकता सप्ताह के तीसरे दिन भोपाल मंडल में सुरक्षा जागरूकता अभियान रहा जारी

अंतर्राष्ट्रीय समपार फाटक जागरूकता सप्ताह के तीसरे दिन भोपाल मंडल में सुरक्षा जागरूकता अभियान रहा जारी मिसरोद, हरदा, खिरकिया एवं रुठियाई स्टेशन के समपार फाटक पर सड़क उपयोगकर्ताओं को किया जागरूक भोपाल  संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में अंतर्राष्ट्रीय समपार फाटक जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत 06 जून से 12 जून 2026 तक विशेष जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के तीसरे दिन भी मंडल के विभिन्न समपार फाटकों पर सड़क उपयोगकर्ताओं को समपार सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के अंतर्गत संरक्षा विभाग द्वारा 08 जून 2026 को मिसरोद स्टेशन के समपार फाटक संख्या 246 पर 50 सुरक्षा पंपलेट वितरित किए गए तथा 50 सड़क उपयोगकर्ताओं की काउंसिलिंग की गई। इसी प्रकार हरदा स्टेशन के समपार फाटक संख्या 204 पर 60 पंपलेट वितरित कर 60 लोगों को समपार सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई। खिरकिया स्टेशन के समपार फाटक संख्या 196 पर 30 पंपलेट वितरित किए गए तथा 30 व्यक्तियों की काउंसिलिंग की गई। वहीं रुठियाई स्टेशन के समपार फाटक संख्या 71 पर 50 पंपलेट वितरित किए गए तथा 60 सड़क उपयोगकर्ताओं को समपार फाटक सुरक्षा नियमों के संबंध में जागरूक किया गया। रेल प्रशासन सभी सड़क उपयोगकर्ताओं से अपील करता है कि समपार फाटकों पर निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करें, बंद फाटक को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षित रेल संचालन में सहयोग प्रदान करें। जनसहभागिता एवं जागरूकता से ही समपार दुर्घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।  

रेल मंत्रालय अलर्ट मोड पर, लुधियाना हादसे के बाद पूरे देश में बढ़ाई गई निगरानी

लुधियाना. लुधियाना रेलवे स्टेशन पर दिल्ली से माता वैष्णो देवी (कटड़ा) जा रही स्पेशल ट्रेन का 6 जून को कोच टूट गया था। इसके बाद स्टेशन पर हड़कंप मच गया था। इसके बाद पूरे मामले की रेलवे द्वारा जांच की गई। कनीकी टीम और इंजीनियरों द्वारा की गई जांच में सामने आया कि ट्रेन के कोच के कई हिस्सों में जंग लगा हुआ था और जो कि बाहर ने नजर नहीं आ रहा था। इसके बाद ट्रेन चलने से कोच में दरार आ गई और वह टूट गया। इस घटना के बाद रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है और अगले 7 दिन में देश में सभी ICF कोचों की जांच करने के आदेश दिए हैं। इस दौरान अगर किसी भी कोच में जंग पाया जाएगा या जो कोच अनफिट होंगे उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा। इसके साथ ही बड़े अधिकारियों द्वारा खुद जाकर री-चेकिंग की जाएगी। कोच के संवेदनशील हिस्सों की आसानी से पहचान करने के लिए रेलवे द्वारा वीडियो जारी किया गया है ताकि कर्मचारी ट्रेनिंग लेकर अच्छे से चैकिंग कर सकें। इसके साथ ही रेलने ने बदलाव किया है कि जिन खराब कोचों को रिपेयर करने में अधिक खर्च आएगा या जो ज्यादा जंग लगने के कारण खराब हालत में हैं उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाएगा और उनकी रिपेयर नहीं की जाएगी। वहीं आंखों से न दिख पाने वाले जंग को चैक करने के लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है।