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सीएम योगी ने शाकम्भरी देवी दुर्घटना के घायलों और पीड़ित परिवारों को सहायता देने के निर्देश दिए

सीएम योगी ने दिए शाकम्भरी देवी खोल दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा देने के निर्देश आने वाले श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु यथासंभव व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश, कोई भी श्रद्धालु दर्शन से वंचित न हो मुख्यमंत्री ने मां शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ खोल में अचानक जलप्रवाह के कारण हुई दुर्घटना की समीक्षा की बाबा भूरा देव मंदिर एवं मां शाकम्भरी देवी मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की सीएम योगी ने भूरा देव से मां शाकम्भरी देवी मंदिर तक एलिवेटेड ब्रिज एवं रोड का निर्माण कार्य शारदीय नवरात्रि तक पूर्ण करने का करें प्रयास: सीएम समयबद्धता एवं गुणवत्ता की जाए सुनिश्चित, बाबा भूरा देव मंदिर के समीप उचित स्थान पर बनाई जाए पार्किंग व्यवस्था: मुख्यमंत्री पुल के निर्माण होने तक खोल में आवागमन हेतु किए जाएं वैकल्पिक उपाय, आपदा की स्थिति में समय से हो अलर्ट: मुख्यमंत्री सहारनपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जनपद सहारनपुर भ्रमण के दौरान बाबा भूरा देव मंदिर एवं मां शाकम्भरी देवी मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर स्थलीय निरीक्षण किया। इसके पश्चात उन्होंने मां शाकम्भरी देवी खोल में अचानक जलप्रवाह के कारण हुई दुर्घटना के संबंध में समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने अचानक बाढ़ आने से हुई जनहानि एवं धनहानि की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने दुकानदारों के आर्थिक नुकसान का आकलन कराकर उन्हें नियमानुसार मुआवजा देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु यथासंभव व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए, ताकि कोई भी श्रद्धालु दर्शन से वंचित न हो।  मण्डलायुक्त डॉ रूपेश कुमार एवं जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने मुख्यमंत्री को पीपीटी के माध्यम से घटना की विस्तृत जानकारी दी। मुआवजे के संबंध में जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि जनहानि होने पर संबंधित परिजनों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। पुलिस व्यवस्थाओं के दृष्टिगत पुलिस उप महानिरीक्षक अभिषेक सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन द्वारा सीएम योगी को जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने एलिवेटेड रोड के निर्माण की प्रगति जानी। उन्होंने निर्देश दिए कि अतिरिक्त श्रमिक लगाकर शारदीय नवरात्रि तक इसे पूर्ण करने का प्रयास किया जाए, अन्यथा दिसंबर माह तक प्रत्येक दशा में इसे अवश्य पूरा कर लिया जाए। निर्माण में समयबद्धता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। पुल निर्माणाधीन रहने तक आमजन की सुविधा के दृष्टिगत खोल के अंदर से आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए तथा खोल का चैनलाइजेशन किया जाए। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान निर्देश दिए कि भूरा देव मंदिर के समीप उचित स्थान पर पार्किंग व्यवस्था बनाई जाए। खोल में जलभराव की स्थिति में आमजन को सुरक्षित रखने के लिए खोल के दोनों तरफ बोल्डर का प्रयोग किया जाए। आपदा की स्थिति में समय से अलर्ट किया जाए तथा आपदा में हानि होने की स्थिति में इसकी सूचना शासन को यथाशीघ्र दी जाए, जिससे उच्च स्तर पर राहत कार्य समय रहते किए जा सकें। उन्होंने कहा कि आपदा मनुष्य के नियंत्रण में नहीं होती, लेकिन तकनीक का प्रयोग कर जनहानि तथा धनहानि को कम किया जा सकता है। बैठक में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग कपिल देव अग्रवाल, राज्यमंत्री संसदीय कार्य एंव औद्योगिक विकास जसवंत सैनी, जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी, महापौर डॉ. अजय सिंह, विधायक रामपुर मनिहारान देवेन्द्र निम, विधायक गंगोह किरत सिंह, विधायक नगर राजीव गुम्बर, एमएलसी श्रीचन्द शर्मा, जिलाध्यक्ष अजीत राणा, महानगर अध्यक्ष शीतल विश्नोई, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा, पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी, पूर्व विधायक नरेश सैनी, एडीजी भानू भास्कर, मण्डलायुक्त डॉ रूपेश कुमार, पुलिस उप महानिरीक्षक अभिषेक सिंह, जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन, मुख्य विकास अधिकारी सुमित राजेश महाजन, एसपी देहात मयंक पाठक एवं संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

सुशासन तिहार में गूंजी शिकायत, मुंगेली में पंचायत सचिव की नियुक्ति पर उठे सवाल

मुंगेली. छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन तिहार के तहत नगर पंचायत जरहागांव में आयोजित शिविर में कई ऐसे शिकायतें भी सामने आई हैं, जिन्होंने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर नगर पंचायत में ग्राम पंचायत सचिव के कथित समायोजन को लेकर जांच की मांग उठी है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री आवास योजना के एक आदिवासी हितग्राही ने आवास स्वीकृत होने के बावजूद तीन माह तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं होने का आरोप लगाया है। वहीं बिजली बिल गड़बड़ी का एक पुराना मामला भी एक बार फिर प्रशासन के सामने पहुंच गया है। सचिव समायोजन पर सवाल, “बैकडोर एंट्री” की चर्चा तेज सुशासन तिहार शिविर में प्रांशु कुमार नामक युवक ने आवेदन देकर ग्राम पंचायत सचिव विकास साव के नगर पंचायत जरहागांव में कर्मचारी के रूप में समायोजन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि ग्राम पंचायत सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारी होते हैं, जबकि नगर पंचायत नगरीय प्रशासन विभाग के अधीन संचालित होती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर किस शासनादेश, नियम अथवा वैधानिक प्रक्रिया के तहत यह समायोजन किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब देशभर में सोशल मीडिया में बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों को लेकर लगातार बहस चल रही है, तब बिना किसी खुली भर्ती प्रक्रिया के किसी पद पर समायोजन की खबर युवाओं के बीच असंतोष पैदा कर रही है। क्षेत्र में इसे कथित पिछले दरवाजे से भर्ती के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में नियमानुसार प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है तो यह उन बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय होगा जो वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं का इंतजार कर रहे हैं। आवेदन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। आवास स्वीकृत लेकिन तीन माह बाद भी कार्य शुरू नही – शिविर में एक और महत्वपूर्ण मामला नगर पंचायत जरहागांव निवासी रामकुमार ध्रुव ने उठाया। रामकुमार ध्रुव अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं और उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उनका आवास लगभग तीन माह पूर्व स्वीकृत हो चुका है, लेकिन अब तक उन्हें निर्माण कार्य प्रारंभ करने के लिए आवश्यक कार्य आदेश अथवा भवन अनुज्ञा नहीं दी गई है। रामकुमार ध्रुव का कहना है कि कभी जमीन संबंधी आपत्ति तो कभी अन्य कारण बताकर उन्हें लगातार कार्यालयों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि स्वीकृति मिलने के बावजूद उन्हें योजना के वास्तविक लाभ से अब तक वंचित रखा गया है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज्य में आदिवासी वर्ग के उत्थान और कल्याण को लेकर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। धरती आबा और जनमन जैसी योजनाओं का उद्देश्य भी इसी वर्ग को मुख्यधारा के विकास से जोड़ना है। ऐसे में एक आदिवासी हितग्राही को स्वीकृत आवास का लाभ नहीं मिल पाना कई सवाल खड़े कर रहा है। बरसात का मौसम नजदीक होने के कारण हितग्राही की चिंता और बढ़ गई है। एक साल बाद भी नहीं सुलझा बिजली बिल विवाद? सुशासन तिहार शिविर में एक और महत्वपूर्ण शिकायत नगर पंचायत निवासी पूर्णिमा जायसवाल ने दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च 2025 में गलत मीटर रीडिंग दर्ज किए जाने के कारण उनके नाम पर करीब 52 हजार रुपये से अधिक का बिजली बिल जारी कर दिया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने बिजली विभाग और कलेक्टर जनदर्शन में भी कई बार शिकायत की थी। उनका आरोप है कि बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा त्रुटि स्वीकार किए जाने के बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लगातार बदलते बिल और रीडिंग की गड़बड़ी के कारण वे लंबे समय से परेशान हैं। अब उन्होंने सुशासन तिहार में एक बार फिर निष्पक्ष जांच और वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी करने की मांग की है। अब जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें नगर पंचायत जरहागांव में उठे इन मामलों ने स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कथित समायोजन की वैधता, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही को लाभ मिलने में आ रही बाधाएं और बिजली बिल गड़बड़ी का लंबित विवाद अब प्रशासन के संज्ञान में पहुंच चुका है। मामले में अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी ने कहा है कि शिकायतें प्राप्त हुई हैं। सभी बिंदुओं की जांच कराई जाएगी और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके परिणामों पर टिकी हुई हैं।

गोमाता के साथ हिमाकत करने वाले चेलों को समझाएं, वरना ऐसी दुर्गति होगी कि कई पीढ़ियां याद करेंगीः सीएम योगी

सीएम योगी की दो-टूक, दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी स्वीकार्य नहीं  मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान से विस्थापित 1645 परिवारों एवं पूर्व सैनिकों/ लीजधारकों को वितरित किए भूमिधरी अधिकार पत्र मौलवी-मौलाना हमें न बताएं, गाय हमारी माता है, जन्म-जन्मांतर का नाता है, गाय को पशु बोलने वाले मौलानाओं की बुद्धि पशु वालीः मुख्यमंत्री गोमाता के साथ हिमाकत करने वाले चेलों को समझाएं, वरना ऐसी दुर्गति होगी कि कई पीढ़ियां याद करेंगीः सीएम योगी बिजनौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गाजियाबाद की घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए दो-टूक कहा कि दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी कतई स्वीकार्य नहीं है। जो अपनी नालायक औलाद को समझा नहीं पा रहा है, वह गलती कर रहा है। कुछ मौलवी-मौलाना बयान दे रहे हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करो। हम उन्हें बता दें कि गाय हमारी माता है, जन्म-जन्मांतर का नाता है। माता-पुत्र के बीच कुछ भी घोषित करने की आवश्यकता नहीं। किसी पुत्र को यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि मां का सम्मान करो। हम मां और गाय. दोनों के प्रति एक जैसा सम्मान का भाव रखते हैं। पशुवत तुम्हारी बुद्धि व सोच है, जो हमारी गोमाता को पशु बोलते हो। यह तुम्हारा दोगलापन है, जो गोकशी को प्रश्रय देते हो। सीएम ने कड़ी चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर गोमाता का चित्र लगाकर बकरीद की बधाई देने वाले अपने चेलों को समझा लो कि गोमाता के साथ हिमाकत की तो ऐसी दुर्गति होगी कि कई पीढ़ियां याद करेंगी। यूपी में गोहत्या का मतलब तो तुम जान ही रहे हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में कई परिवारों के जीवन में खुशियों की नई रोशनी फैलाई। उन्होंने पाकिस्तान से विस्थापित 1645 परिवारों एवं पूर्व सैनिकों/लीजधारकों को भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित किए। बिजनौर ने इतिहास बनते और बिगड़ते भी देखा महात्मा विदुर की पावन धरती बिजनौर को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महाभारत की धरती है। महाभारत से हमें प्रेरणा मिलती है कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। जो स्वार्थ के लिए धर्म को नष्ट करता है, धर्म उसे भी नष्ट कर डालता है। यह उद्घोषणा दुनिया में अक्षरशः साबित हो रही है। यह भारत के इतिहास को बनाने वाली धरा है। इसने इतिहास को बनते और बिगड़ते भी देखा है। पूर्व सांसद कुंवर सर्वेश सिंह का स्मरण किया सीएम योगी ने पूर्व सांसद कुंवर सर्वेश सिंह का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी विरासत को कुंवर सुशांत सिंह संभाल रहे हैं। पाकिस्तान से विस्थापित हजारों परिवारों, जिनकी पुश्तैनी संपत्ति पर पाकिस्तान की मजहबी कट्टरता ने 1946, 47 व 48 में जबरन कब्जा कर निर्दोष हिंदुओं व सिखों का कत्लेआम किया था। वर्ष-दशक बीतते गए,  आज चौथी पीढ़ी में यह अवसर आया है, जब हम विस्थापित परिवारों को जमीन पर मालिकाना हक दे रहे हैं। अभी 1645 विस्थापित परिवारों यानी 8-10 हजार लोगों को जमीन के कागज प्राप्त हो रहे हैं। जो शेष हैं, उनके लिए भी कार्यवाही चल रही है।  कोई आक्रांता हमें न बताए, गाय व गंगा हमारी मां हैं  सीएम योगी ने कहा कि गोमाता राष्ट्रमाता हैं। इसी तरह हमारी मां गंगा के बारे में परिचय देने की आवश्यकता नहीं है। हम सब गंगा मां की आरती व पूजा करते हैं। अपने को गंगा पुत्र मानकर सम्मानित महसूस करते हैं। हमारे तीर्थ गंगा तट पर हैं, हमारे सभी संस्कार मां गंगा के तट पर संपन्न होते हैं। कोई आक्रांता हमें न बताए, हमारे संस्कार हैं कि हमने गाय व गंगा को माता माना है।  मजहबी निर्ममता के विरोध में नहीं निकलती मौलाना की आवाज सीएम ने कहा कि पाकिस्तान में मजहबी निर्ममता के शिकार बने विस्थापितों के बारे में मौलाना व मौलवी की कभी आवाज नहीं निकली। काश, वे बोलते कि इनकी संपत्ति को वहां कट्टरपंथियों ने हड़प लिया। वक्फ के नाम पर यहां हिंदूओं की जमीनों पर कब्जा है। ये लोग इन संपत्तियों को विस्थापितों को फ्री में देने की घोषणा करते तो हम मानते कि इनकी भी कुछ संवेदना है। मुंह में कुछ और पीछे कुछ, यही दोगला चरित्र होता है।  किसी मौलाना ने हिंदुओं के कत्लेआम पर मुंह नहीं खोला  सीएम योगी ने खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के कत्लेआम पर एक भी मौलवी-मौलाना ने कुछ नहीं कहा। बांग्लादेश में हिंदू 22 फीसदी से घटकर 7 और पाकिस्तान में 14 से घटकर महज 2 प्रतिशत रह गया। मौलाना पाकिस्तान या बांग्लादेश की सरकारों की निंदा नहीं करते। ये मौलाना जुमे की नमाज में यही घोषणा कर देते कि पाकिस्तान भारत का दुश्मन है और घटिया स्तर पर काम कर रहा है। भारत के बहादुर जवान दुश्मन के ठिकाने पर जाकर उन्हें सबक सिखाने का ठीक काम कर रहे हैं। लेकिन, किसी मौलवी-मौलाना ऐसा नहीं किया।  सरकार सजग थी, वरना पश्चिमी उप्र में हमारे त्योहार सपने हो गए थे सीएम ने बकरीद पर होने वाली हरकतों पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि गनीमत है कि सरकार ने पहले से ही कदम उठाए हैं, तब त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से हो पा रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले रामनवमी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, कांवड़ यात्रा सपना हो गई थी। बेटी स्कूल नहीं जा पा रही थी, जबकि व्यापारी असुरक्षित था।  अहिंसा व करुणा मानवता के भूषण, किंतु खर-दूषण के सामने शस्त्र उठाना होगा सीएम ने कहा कि हमारी संवेदना सामान्य नागरिकों के प्रति है। पीएम मोदी के नेतृत्व में 12 वर्षों से बिना मत-मजहब देखे समान रूप से सभी को शासन की योजनाओं का लाभ दिया गया। ऐसे में देश भी अपेक्षा करता है कि उनकी संवेदना दिखाई दे, लेकिन यह गायब है। अहिंसा और करुणा मानवता के भूषण हैं, किंतु शस्त्र उठाना होगा यदि सामने खर-दूषण हैं। सीएम ने भगवान श्रीकृष्ण व श्रीराम का स्मरण कराते हुए कहा कि हम सज्जनों के लिए ही सज्जन बनें, दुर्जनों के लिए नहीं। श्रीराम का भी यही लक्ष्य था कि धरती को राक्षस विहीन कर देंगे। नागरिकों, गरीबों, बहन-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करने वालों से लड़ना होगा। देश के खिलाफ द्रोह करने वालों के खिलाफ कठोरता व निर्ममता से लड़ने को तैयार होना होगा।  कई-कई पीढ़ियां चली गईं, आखिर क्या कर रही थीं कांग्रेस व सपा  सीएम ने कहा कि पाकिस्तान से विस्थापित इन 1645 परिवारों … Read more

लमही में मुंशी प्रेमचंद संग्रहालय और फिरोजाबाद के ग्लास म्यूजियम कार्य में आएगी तेजी

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम, प्रदेशभर के संग्रहालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए करोड़ों रुपये जारी लमही में मुंशी प्रेमचंद संग्रहालय और फिरोजाबाद के ग्लास म्यूजियम कार्य में आएगी तेजी संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय पहचान को नई ऊर्जा देने की दिशा में प्रयास जारी किसी भी परियोजना में लापरवाही पाए जाने पर कार्यदायी संस्था पर होगी कठोर कार्रवाई- मंत्री जयवीर सिंह लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने संग्रहालयों के सुदृढ़ीकरण, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि जारी कर प्रदेश के सांस्कृतिक बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। वाराणसी, फिरोजाबाद, देवरिया, लखनऊ, झांसी और कुशीनगर में संचालित महत्वपूर्ण संग्रहालय परियोजनाओं को गति देते हुए सरकार ने इनके विकास और क्यूरेशन कार्यों के लिए पहली किश्त जारी कर दी है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि योगी सरकार की प्राथमिकता केवल विकास परियोजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित और आधुनिक रूप में पहुंचाना भी है। इसी उद्देश्य से सभी कार्यदायी संस्थाओं को गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में अधोमानक सामग्री या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कार्यदायी संस्था के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिरोजाबाद ग्लास म्यूजियम के लिए 4.40 करोड़ रुपये उन्होंने बताया कि साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की स्मृतियों को सहेजने के लिए वाराणसी के लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद स्मृति संग्रहालय एवं पुस्तकालय के आंतरिक साज-सज्जा और क्यूरेशन कार्य के लिए 2.60 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। वहीं फिरोजाबाद में ग्लास म्यूजियम के क्यूरेशन कार्य के लिए 4.40 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। देवरिया में मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप राजकीय आस्थान पुरानी कचहरी परिसर में शहीद स्वर्गीय रामचंद्र विद्यार्थी स्मृति स्थल विकास, क्यूरेशन और आंतरिक साज-सज्जा के लिए 30 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह परियोजना क्षेत्र के ऐतिहासिक और राष्ट्रवादी गौरव को नई पहचान देगी। राजधानी लखनऊ में भी राज्य संग्रहालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। संग्रहालय की चिल्ड्रेन गैलरी, विभिन्न गतिविधियों, वर्कशॉप और लैंडस्केप विकास के लिए लगभग 1.98 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। झांसी के राजकीय संग्रहालय के विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए 3 करोड़ रुपये तथा कुशीनगर के राजकीय बौद्ध संग्रहालय के सौंदर्यीकरण एवं विकास के लिए 15 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। इससे प्रदेश के बौद्ध और ऐतिहासिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही लखनऊ राज्य संग्रहालय परिसर में स्थित ओल्ड कोठी में कैफेटेरिया एवं कोठी के एक्सटेंशन भाग में नवनिर्मित लाइब्रेरी की स्थापना के लिए 4.59 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा राज्य संग्रहालय लखनऊ भवन के बेसमेंट कक्षों के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिक स्टोरेज सिस्टम की स्थापना के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 4.60 करोड़ रूपये की धनराशि जारी की गई है। इस परियोजना का कार्य प्रगति पर है।  इसी प्रकार राज्य संग्रहालय लखनऊ परिसर में सीवर लाइन एवं रेन वाटर हारवेस्टिंग प्लांट एवं नलकूप बोरिंग स्थापना संबंधी कार्य के लिए 1.74 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। राज्य संग्रहालय लखनऊ में विदेशी मूर्ति कला, वीथिका की मूर्तियों को स्थानातंरित कर संग्रहालय परिसर में दूसरी जगह प्रदर्शित किए जाने के लिए 1.59 करोड़ रूपये की धनराशि जारी की गई है। इस परियोजना का कार्य 95 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश की अग्रणी पहचान, CM डॉ. यादव ने दिया प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन को श्रेय

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश के अग्रणी होने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के दर्शन और मार्गदर्शन को है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भविष्य की जरूरतों के अनुसार दी गई अंतर्राज्यीय परियोजनाओं को मंजूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदानीरा समागम में जल संवर्धन की प्रदर्शनी का किया अवलोकन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दर्शन और मार्गदर्शन के कारण मध्यप्रदेश जल संरक्षण और जल संचयन के कार्यों में देश में अग्रणी है। प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण में किये जा रहे अच्छे कार्य के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने राज्यों को अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं के बलबूते भविष्य की आवश्कताओं का अनुमान लगाते हुए आवश्यक जल के प्रबंध के लिए भी सजग बनाया है। मध्यप्रदेश, केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए दी गई मंजूरी से वृहद स्तर पर लाभान्वित होगा। मध्यप्रदेश इस वर्ष गुड़ी पड़वा से ही प्रारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख कुओं बावड़ियों, पोखरों, जलाशयों और अन्य जलसंरचनाओं को उपयोगी बनाने के महत्वपूर्ण कार्य में लगा है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की शाम भारत भवन के बहिरंग में 27 मई से 2 जून तक आयोजित सदानीरा जल गंगा संवर्धन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन भी किया। मेपकास्ट (मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद) के सहयोग से लघु चित्रों में जल, भूगर्भीय जल स्रोत, मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान और जलचर-जलीय जीवन के प्राण तत्व नामक प्रदर्शनियों के साथ ही 'वीर भारत न्यास' और 'मेपकास्ट' द्वारा प्रकाशित अंतर्जलि यात्रा, जिलों के भूजल एटलस और अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में फिजी, साइप्रस, मैक्सिको सहित अन्य देशों के उच्चायुक्त और राजदूत भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अनेक नदियों का उद्गम स्थल है। प्रदेश की नदियां प्रवाहित होते हुए गंगा-यमुना जैसी नदियों में जाकर मिलती हैं। यह प्रदेश का सौभाग्य है कि हमारे विंध्याचल और सतपुड़ा के पर्वत मध्यप्रदेश को परमात्मा की अनुपम कृति हैं। वनांचलों से जल धाराएं आती हैं जो नदियों को समृद्ध बनाती हैं। नर्मदा मैया के साथ ही ताप्ती, बेतवा, चंबल जैसी नदियां अपार जल राशि से समृद्ध हैं। चंबल नदी का जल प्रदेश की गणना देश की स्वच्छ नदियों में करवाता है, इसके कारण घड़ियाल भी इसी नदी में सर्वाधिक पाए जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदि काल से जल सहेजने के कार्य चल रहे हैं। राजा भोज के काल की तकनीक की चर्चा करें तो भोपाल की बड़ी झील श्रेष्ठ जल संरक्षण प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें आबादी को हानि पहुंचाए बिना जल सहेजने, उसके उपयोग और अतिरिक्त जल की निकासी का श्रेष्ठ प्रबंध किया गया। प्रदेश में जनता की भागीदारी से जल गंगा संवर्धन अभियान का संचालन चल रहा है। प्रदेश में कृषि उत्पादन में वृद्धि का आधार भी यही जल और उसका उचित प्रबंधन है। भूगर्भ के जल भण्डारण का कृषि क्षेत्र में संतुलन के साथ उपयोग किस तरह किया जाए यह विज्ञान के सहयोग से संभव है। मेपकास्ट द्वारा इस क्षेत्र में किये जा रहे अनुसंधान महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीर भारत न्यास और सहयोगी संस्थाओं को इस सार्थक आयोजन के लिए बधाई दी। इस अवसर पर केंद्रीय भू-जल बोर्ड के प्रतिनिधि अशोक विश्वास, मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी भी उपस्थित थे। वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह प्रदान किए। कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल सहित बड़ी संख्या में जल संरक्षण क्षेत्र के विद्वान, विद्यार्थी, सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि और अन्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जुड़े कलाधर्मी उपस्थित थे।  

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर लर्निंग आउटकम के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण आज से शुरू

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बेहतर अधिगम परिणामों के लिए राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण आज  से प्रदेश सरकार के राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (SIEMAT) तथा लोक  शिक्षण संचालनालय के असेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में AICUF (ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन) में होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में दिया जाएगा प्रशिक्षण भोपाल प्रदेश के शासकीय स्‍कूलों में पढ़ाई कर रहे व‍िद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने एवं बेहतर अधिगम परिणामों के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण 2 जून से शुरू होगा। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार के राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (SIEMAT) तथा लोक शिक्षण संचालनालय के असेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के सभी जिलों से चयनित शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 2 जून 2026 से AICUF (ऑल इंडिया कैथोलिक यूनिवर्सिटी फेडरेशन) में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। प्रदेश के 1,872 शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में होंगे शामिल प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 1,872 शिक्षक शामिल होंगे। 12 विषयों में प्रत्येक जिले से चयनित 3-3 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत ये शिक्षक अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करते हुए मूल्यांकन एवं अधिगम सुधार की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा में मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक मूल्यांकन तकनीकों, उच्च गुणवत्ता वाले (Diagnostic Assessment), प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा परिणामों के विश्लेषण तथा Values, Aptitude and Behaviour Test के निर्माण संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। सटीक आकलन होगा संभव प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान एवं कॉमर्स सहित कुल 12 विषयों के लिए प्रत्येक जिले से चयनित शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इस पहल से विद्यालयों में आयोजित मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक, प्री-बोर्ड एवं वार्षिक परीक्षाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों का अधिक सटीक आकलन संभव हो सकेगा, जिससे उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारात्मक योजनाएं तैयार की जा सकेंगी। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को परीक्षा परिणामों के विश्लेषण के आधार पर शैक्षणिक नियोजन एवं अधिगम सुधार रणनीतियों का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की विषयगत समझ, अधिगम स्तर और परीक्षा प्रदर्शन में सकारात्मक सुधार होने की संभवनाएं रहेंगी। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरुप विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर राज्य में मूल्यांकन सुधार की मजबूत शैक्षणिक टीम के रूप में कार्य करेंगे तथा विद्यार्थियों को बेहतर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।  

खाद के लिए नहीं लगानी पड़ रही लाइन, मुड़ैसा की किसान सरिता बोलीं- सरकार की व्यवस्था से खेती हुई आसान

खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे किसान, सोसाइटियों में सुगमता से मिल रहा खाद, मुड़ैसा की महिला किसान सरिता ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जताया आभार रायपुर  छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी का सीजन शुरू होते ही राज्य सरकार द्वारा किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के स्पष्ट निर्देश हैं कि राज्य के अन्नदाताओं को कृषि कार्यों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। सरकार की इस किसान-हितैषी नीति और सुगम व्यवस्था का सीधा लाभ अब धरातल पर दिखने लगा है। सोसाइटियों और वितरण केंद्रों में किसानों को बिना किसी परेशानी के खाद (उर्वरक) उपलब्ध हो रहा है, जिससे किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर है। इसी कड़ी में अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम मुड़ैसा की रहने वाली महिला किसान श्रीमती सरिता ने खाद की आसान और समयबद्ध उपलब्धता पर राज्य सरकार के प्रति गहरा संतोष और आभार व्यक्त किया है। 10 एकड़ में करती हैं खेती, सुगमता से मिला खाद ग्राम मुड़ैसा निवासी कृषक श्रीमती सरिता ने बताया कि उनके पास लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिस पर वे खेती-बाड़ी करती हैं। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही खेतों की तैयारी का समय आ गया है। अपनी इसी तैयारी के तहत वे खाद लेने के लिए वितरण केंद्र पहुंची थीं। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें खाद मिलने में कोई परेशानी नहीं हुई। विभागीय कर्मचारियों और सुचारू व्यवस्था के चलते उन्हें अपनी जरूरत का खाद आसानी से और बिना किसी दिक्कत के मिल गया। रोपा के समय की संभावित परेशानी से मिली मुक्ति आमतौर पर जब धान की रोपाई का मुख्य समय आता है, तब खाद की मांग अचानक बढ़ जाती है और किसानों को खाद प्राप्त करने में भीड़ का सामना करना पड़ता है। श्रीमती सरिता जैसी जागरूक महिला किसान सरकार की अग्रिम भंडारण नीति का लाभ उठा रही हैं। उन्होंने बताया, खेती-बाड़ी का दिन अब आ गया है और ऐसे में खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। रोपा लगाने के समय खाद की बहुत आवश्यकता पड़ती है और कई बार उस पीक समय में खाद आसानी से नहीं मिल पाती। लेकिन इस बार व्यवस्था इतनी अच्छी है कि मुझे अभी ही बिना किसी समस्या के खाद मिल गई है। अब मैं निश्चिंत होकर अपनी खेती के काम में लग सकती हूँ।" मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद समय पर और बिना किसी असुविधा के खेती-किसानी की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत पूर्ती होने से श्रीमती सरिता बेहद प्रसन्न हैं। उन्होंने इस सुगम एवं पारदर्शी व्यवस्था के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया है। किसान हितैषी शासन का संकल्प मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कृषि विभाग को खाद-बीज के अग्रिम उठाव और सुचारू वितरण के निर्देश दिए गए हैं। शासन का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी किसान खाद-बीज की कमी के कारण खेती में न पिछड़े। समय पर संसाधन उपलब्ध होने से निश्चित ही राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसान आर्थिक रूप से अधिक सशक्त होंगे।

पंजाब ने GST संग्रह में दिखाई रफ्तार, मई महीने में 14.59 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी

चंडीगढ. पंजाब ने जीएसटी संग्रह के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ते हुए मई 2026 में 14.59 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वित्त, आबकारी एवं कराधान मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को बताया कि राज्य का सकल जीएसटी संग्रह बढ़कर 2,400.52 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि मई 2025 में यह आंकड़ा 2,094.81 करोड़ रुपये था। इस प्रकार, एक वर्ष में जीएसटी संग्रह में 305.71 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। चीमा ने कहा कि राज्य की यह उपलब्धि आर्थिक गतिविधियों में तेजी, कर अनुपालन में सुधार और कराधान विभाग की सख्त प्रवर्तन कार्रवाई का परिणाम है। उन्होंने बताया कि जहां देशभर में सकल जीएसटी राजस्व वृद्धि करीब 3.2 प्रतिशत रही, वहीं पंजाब ने 14.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य की नकद संग्रह वृद्धि 6.57 प्रतिशत रही, जबकि कुल जीएसटी संग्रह में कहीं अधिक बढ़ोतरी हुई है, जो मजबूत राजस्व आधार और बेहतर कर प्रशासन का संकेत है। वित्त मंत्री ने बताया कि कर चोरी रोकने के लिए गठित स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट्स (एसआईपीयू) ने मई महीने में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 182.69 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और 178.76 करोड़ रुपये की वसूली की। यह सफलता डेटा एनालिटिक्स, खुफिया सूचनाओं, सत्यापन अभियानों और फील्ड स्तर पर चलाए गए विशेष ऑपरेशनों के कारण मिली है। वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार सार्वजनिक राजस्व की सुरक्षा और ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फर्जी बिलिंग और संगठित कर चोरी के नेटवर्क के खिलाफ सरकार की जीरो टालरेंस नीति आगे भी जारी रहेगी। 85 करोड़ के फर्जी बिलिंग रैकेट पकड़ा चीमा ने बताया कि कर चोरी के खिलाफ अभियान के दौरान विभाग ने 85.4 करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग रैकेट का भी पर्दाफाश किया है। इस मामले में लुधियाना स्थित एक फर्म के निदेशक को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने फर्जी लेन-देन के जरिए 15.56 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल किया था। जांच में सामने आया कि कर चोरी के लिए कागजों पर मौजूद फर्जी फर्मों, नकली बिलों, फर्जी डेबिट नोट और मनगढ़ंत परिवहन रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस धोखाधड़ी से जुड़े लाभार्थियों से करीब तीन करोड़ रुपये की वसूली भी की गई।

CG की सरकारी कंपनी अब शेयर बाजार में, पावर ट्रांसमिशन कंपनी लाएगी IPO

रायपुर. छत्तीसगढ़ पावर ट्रांसमिशन कंपनी (CSPTCL) जल्द अपने आईपीओ (Initial Public Offering) लाने की तैयारी में है, जिसके जरिए कंपनी आम निवेशकों से पूंजी जुटाएगी. आईपीओ सफल होने पर यह राज्य सरकार की पहली ऐसी कंपनी बन जाएगी, जिसके शेयर स्टॉक मार्केट में ट्रेड होंगे. इस पर कंपनी में उच्च स्तर पर चर्चा चल रही है. इससे पहले छत्तीसगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी भी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हो चुकी है, हालांकि उसके शेयरों में कारोबार नहीं होता. कंपनी ने वर्ष 2014-15 और 2015-16 में बॉन्ड जारी कर निवेशकों से पूंजी जुटाई हैं. अब छत्तीसगढ़ पावर ट्रांसमिशन कंपनी के आईपीओ लाने की तैयारी के साथ कंपनी अपनी हिस्सेदारी का एक भाग आम निवेशकों के लिए उपलब्ध कराएगी. आईपीओ के बाद कंपनी के शेयर शेयर बाजार में लिस्टेड होंगे और उनकी खरीद-बिक्री की जा सकेगी। कंपनी के व्यावसायिक प्रदर्शन के आधार पर शेयरों की कीमत में उतार-चढ़ाव होगा, जिससे उसका मार्केट कैपिटलाइजेशन भी बढ़ेगा। सूचीबद्ध होने से कंपनी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और निवेशकों का व्यापक आधार मिलेगा। इसके साथ ही आम लोग भी कंपनी के हिस्सेदार बन सकेंगे। कंपनी के लाभ में वृद्धि होने पर वह अपने शेयरधारकों को डिविडेंड के रूप में उसका हिस्सा भी वितरित कर सकेगी। पावर ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी राजेश कुमार शुक्ला ने जानकारी दी कि देश के कई राज्यों की सरकारी पावर कंपनियां अपना आईपीओ लांच कर आम लोगों से पैसे जुटा रही हैं. केंद्र सरकार की ऊर्जा कंपनियां पहले से स्टॉक मार्केट में लिस्टेड हैं. छत्तीसगढ़ ट्रांसमिशन कंपनी के भी आईपीओ लाने के विषय में उच्च स्तर पर चर्चा चल रही है. यह शासन स्तर का मामला है.

सुकमा: प्रार्थना सभा के दौरान भड़का विवाद, दो गुटों की हिंसक झड़प में कई घायल

सुकमा. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के तोंगपाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत पालेम के ग्राम सदरापाल में एक कथित हिंसक घटना सामने आई है। यह गांव घने जंगलों में बसा आदिवासी क्षेत्र बताया जा रहा है। स्थानीय जानकारी के अनुसार 31 मई 2026 को लगभग सुबह 11 से 12 बजे के बीच एक कच्चे मिट्टी के घर में कुछ लोग प्रार्थना कर रहे थे। बताया जा रहा है कि वहां करीब 20 से 30 लोग मौजूद थे। इसी दौरान गांव के कुछ लोगों का एक समूह वहां पहुंचा और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि इस समूह ने लाठी-डंडों से प्रार्थना कर रहे लोगों पर हमला कर दिया। घटना में करीब 8 लोगों के घायल होने की सूचना है, जिनके सिर पर चोट लगने की बात सामने आई है। घायलों की स्थिति को लेकर अभी आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। सूत्रों के अनुसार हमले में शामिल लोगों के रूप में कवासी गंगा, कवासी बुदरा, कवासी महादेव और माड़वी हड़मा के नाम सामने आए हैं, हालांकि पुलिस या प्रशासन की ओर से अभी तक इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बताया जा रहा है। घटना को लेकर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं। इसके पीछे कुछ उकसाने वाली गतिविधियां या बाहरी प्रभाव हो सकता है, लेकिन इन दावों की किसी भी आधिकारिक जांच एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। घायलों को उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में भेजे जाने की बात सामने आई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि जांच के बाद ही वास्तविक कारण और परिस्थितियों का पता चल सकेगा। पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इस घटना को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है, लेकिन फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।