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प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाने, फसलों और जनहानि का आकलन करने के आदेश

आंधी-बारिश को लेकर मुख्यमंत्री सख्त, अधिकारियों को राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाने, फसलों और जनहानि का आकलन करने के आदेश सीएम योगी ने बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने तथा टूटे तारों, खंभों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा  लखनऊ  प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी आंधी, बारिश और तेज हवाओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। रविवार को कई जिलों में आंधी, बारिश और तूफान की घटना के बाद मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, राहत आयुक्त कार्यालय तथा संबंधित विभागों को लगातार निगरानी बनाए रखने और किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जिन जनपदों में तेज आंधी, बारिश, ओलावृष्टि अथवा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि अथवा पशुहानि हुई है, वहां प्रभावित परिवारों को तत्काल अनुमन्य राहत राशि वितरित की जाए। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समयबद्ध सहायता पहुंचनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए। जहां भी कृषि क्षति की सूचना मिले, वहां राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर आकलन करे तथा शासन को रिपोर्ट उपलब्ध कराए, ताकि किसानों को नियमानुसार सहायता प्रदान की जा सके। मुख्यमंत्री ने विद्युत विभाग को भी आंधी और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने तथा टूटे तारों, खंभों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर स्थिति का जायजा लें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य संचालित करें।  जनता से सावधानी बरतने की अपील  मुख्यमंत्री ने जनता से भी अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतें, अनावश्यक रूप से खुले स्थानों में न जाएं तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

योगी सरकार की पारदर्शी एवं तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली का सफल उदाहरण

शांतिपूर्वक सम्पन्न हुई संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 योगी सरकार की पारदर्शी एवं तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली का सफल उदाहरण 72 जिलों के 1011 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित हुई परीक्षा, लगभग 90 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने किया प्रतिभाग एआई, फेस रिकग्निशन, बायोमैट्रिक अटेंडेंस, 22 हजार सीसीटीवी कैमरे और लाइव कमांड कंट्रोल सिस्टम से हुई निगरानी लखनऊ, उत्तर प्रदेश में संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026  प्रदेश के 72 जिलों के 1011 परीक्षा केन्द्रों पर सफलतापूर्वक, शांतिपूर्ण एवं शुचितापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी को सौंपी गई थी। परीक्षा में पंजीकृत 4,44,958 अभ्यर्थियों में से लगभग 90 प्रतिशत अभ्यर्थी दोनों पालियों में शामिल हुए। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश में पारदर्शी, नकलविहीन और तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली का मॉडल बनकर उभरा है। प्रदेश के 72 जिलों में स्थापित 1011 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 पूरी शुचिता, पारदर्शिता और शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि परीक्षा में कुल 4,44,958 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 2,72,659 महिला, 1,72,297 पुरुष तथा 2 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी शामिल थे। प्रथम पाली में सामान्य ज्ञान एवं भाषा विषय की परीक्षा तथा द्वितीय पाली में अभिरुचि परीक्षण एवं विषय योग्यता की परीक्षा आयोजित की गई। दोनों पालियों में लगभग 90 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई। कासगंज और पीलीभीत में सर्वाधिक 95 प्रतिशत तथा गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में 84 प्रतिशत उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि परीक्षा की निगरानी के लिए बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी में अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया, जहां से प्रदेश के सभी 1011 परीक्षा केन्द्रों की लाइव मॉनिटरिंग की गई। इसके लिए लगभग 22 हजार सीसीटीवी कैमरे और 5651 बायोमैट्रिक मशीनें लगाई गई थीं। परीक्षा के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक, फिंगर प्रिंट आधारित बायोमैट्रिक सत्यापन और रियल टाइम अटेंडेंस सिस्टम का उपयोग किया गया, जिससे केवल वास्तविक अभ्यर्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि आधुनिक एआई सिस्टम के माध्यम से परीक्षा केन्द्रों के स्ट्रांग रूम, प्रवेश एवं निकास द्वारों तथा परीक्षा कक्षों की लगातार निगरानी की गई। किसी भी संदिग्ध गतिविधि अथवा अनाधिकृत व्यक्ति की उपस्थिति पर तत्काल कंट्रोल रूम को अलर्ट प्राप्त हुआ और संबंधित केन्द्र से तुरंत संपर्क स्थापित कर स्थिति का सत्यापन किया गया। गोपनीय सामग्री के बॉक्स खोले जाने की सूचना भी सीधे कंट्रोल रूम में प्राप्त होती रही। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पहली बार परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता को और मजबूत बनाने के लिए विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों को जीपीएस आधारित बॉडी बॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए गए। इन कैमरों के माध्यम से प्रतिनिधियों की लाइव लोकेशन, परीक्षा केन्द्रों के निरीक्षण तथा गोपनीय सामग्री से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी कंट्रोल रूम से की गई। 29 और 30 मई को आयोजित बैठकों का भी सीधा प्रसारण विश्वविद्यालय स्तर पर देखा गया। मंत्री ने बताया कि सभी परीक्षा केन्द्रों को VoIP (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) आधारित संचार प्रणाली से जोड़ा गया था। इसके माध्यम से आयोजक विश्वविद्यालय और परीक्षा केन्द्रों के बीच सुरक्षित एवं त्वरित संवाद स्थापित किया गया। परीक्षा के दौरान प्राप्त विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक अलर्ट का रियल टाइम समाधान सुनिश्चित किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। पिछले वर्षों में प्रदेश ने भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 का सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में अब परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह तकनीक आधारित, पारदर्शी, जवाबदेह और अभ्यर्थी हितैषी बन चुकी है। उन्होंने बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय, विश्वविद्यालय प्रशासन, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा परीक्षा आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में नवाचार और पारदर्शिता की इस प्रक्रिया को आगे भी निरंतर जारी रखेगी।

बिहार में शराबबंदी के बीच अंतरराष्ट्रीय तस्करी का नया नेटवर्क उजागर

मुजफ्फरपुर बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद धंधेबाजों का नेटवर्क तेजी से पैर पसार रहा है। अब तस्करों का दायरा सिर्फ दूसरे राज्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे सीधे विदेशों से भी शराब की खेप मंगवाने से नहीं डर रहे हैं। मुजफ्फरपुर में भूटान से तस्करी कर लाई गई विदेशी शराब की एक बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद पुलिस और उत्पाद विभाग की नींद उड़ गई है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह नया ट्रेंड एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। भूटान से बंगाल सीमा पार कर मुजफ्फरपुर पहुंची खेप उत्पाद विभाग ने मुजफ्फरपुर में छापेमारी कर भूटान निर्मित शराब के 115 कार्टन जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ है कि धंधेबाज भूटान से चोरी-छिपे सीमा पार कर पहले पश्चिम बंगाल में दाखिल हुए थे। इसके बाद किशनगंज, फारबिसगंज, पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा फोरलेन के रास्ते होते हुए इस बड़ी खेप को मुजफ्फरपुर लाकर स्टॉक किया गया था। जांच टीम अब उस गाड़ी और उसके मालिक की पहचान करने में जुटी है, जिसके जरिए इतनी लंबी दूरी तय कर शराब यहाँ पहुँचाई गई। तीन बड़े धंधेबाज फरार, छापेमारी इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी के पीछे स्थानीय नेटवर्क का हाथ सामने आया है। मामले में अहियापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले तीन कुख्यात धंधेबाजों—लखपत पासवान, सुशील झा और निखिल कुमार के नाम उजागर हुए हैं। शनिवार को जांच टीम ने इन फरार आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, हालांकि फिलहाल तीनों पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और गिरफ्तारी के लिए तलाश जारी है। 150 की बोतल को 1200 में बेचने का खेल पकड़े गए नेटवर्क से शराब तस्करी का एक बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है। उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि भूटान जैसे टैक्स-फ्री देश से महज 150 रुपये मूल्य की 750 एमएल शराब मंगवाई जाती थी। इसके बाद धंधेबाज इसमें पानी, रंग और जानलेवा स्पिरिट मिलाकर इसकी मात्रा को सवा से डेढ़ लीटर (यानी एक से दो बोतल) तक बढ़ा देते थे। इस मिलावटी शराब को असली दिखाने के लिए बोतलों पर रॉयल चैलेंज (Royal Challenge), रॉयल स्टैग (Royal Stag) और मैकडॉवेल नंबर वन (McDowells No. 1) जैसे नामी ब्रांड्स के नकली रैपर और स्टिकर चिपका दिए जाते थे। इसके बाद इस मिलावटी और जानलेवा शराब को बाजारों में 1200 रुपये प्रति बोतल तक की ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। टैक्स-फ्री राज्य और देश निशाने पर उत्पाद विभाग के अनुसार, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करों का एक बहुत बड़ा सिंडिकेट बिहार में सक्रिय है। हाल के दिनों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के तस्करों की गिरफ्तारियों से पता चला है कि अब शराब की बोतलों से बारकोड को खरोंचकर भेजा जा रहा है, ताकि जांच में उस दुकान का पता न चल सके जहाँ से शराब खरीदी गई। इसके अलावा, मुनाफे को अधिकतम करने के लिए धंधेबाज अब चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश, दमन और दीव जैसे टैक्स-फ्री राज्यों को निशाना बना रहे हैं, जहां शराब बेहद सस्ती मिलती है। भूटान से शराब की खेप पकड़े जाने का बिहार में यह पहला मामला है, जो इसी रणनीति का हिस्सा है। अंधापन और मौत दे रही यह शराब शराब की मात्रा बढ़ाने के लिए धंधेबाजों द्वारा धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही स्पिरिट मानव शरीर के लिए बेहद घातक है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विशेषज्ञ सह इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेजेज साइंस, प्रो. अरविंद कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि शराब में मिलाई जाने वाली स्पिरिट काफी घातक होती है। जब इसे मात्रा बढ़ाने के लिए डायलूट किया जाता है, तो यह 'मिथाइल अल्कोहल' का रूप ले लेती है। इसके सेवन से व्यक्ति हमेशा के लिए अंधा हो सकता है। यदि स्पिरिट की मात्रा थोड़ी भी अधिक हो जाए, तो व्यक्ति की मौके पर ही जान जाने का पूरा खतरा रहता है। भूटान से लाई गई शराब को डायलूट कर एक से दो बोतल बनाने का धंधा किया जा रहा था। तीन धंधेबाजों का नाम सामने आया है। जिनके विरुद्ध अभियोग दर्ज कर गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है। दीपक कुमार सिंह, उत्पाद इंस्पेक्टर

भारतीय राजनीति में पहली बार! डिप्टी सीएम अरुण साव बने विधायक दूल्हे की बैलगाड़ी के सारथी

भारतीय राजनीति में पहली बार "डिप्टी सीएम अरुण साव बने विधायक दूल्हे की बैलगाड़ी के सारथी छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव बने विधायक दीपेश साहू की बैलगाड़ी में निकली बारात के सारथी बेमेतरा/रायपुर  छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव निकले बैलगाड़ी में सारथी बनकर दूल्हे राजा हैं भाजपा विधायक दीपेश साहू। बेमेतरा में आयोजित सामूहिक मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम में बेमेतरा विधायक दीपेश साहू ने सामूहिक विवाह सम्मेलन में विवाह करने का फैसला किया और बारात के सारथी बनने राजधानी रायपुर से बेमेतरा पहुंचे डिप्टी सीएम अरुण साव, बैलगाड़ी में निकली बारात के सारथी बने डिप्टी सीएम अरुण साव।

सूर्या चौहान केस: हत्या के बाद पुलिस कार्रवाई में मुख्य आरोपी ढेर

गाजियाबाद  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सूर्य चौहान की हत्या मामले ने जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। इस मामले में मुख्य आरोपी असद का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ का बकरीद से पहले का एक बयान खासी चर्चा में है। बकरीद के मौके पर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से सख्त निर्देश जारी किए गए थे। खुले में नमाज पढ़ने और सार्वजनिक स्थल पर पशुओं की कुर्बानी देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया था। सीएम योगी ने इससे पहले महिलाओं की सुरक्षा के मामले पर यमराज वाला बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि बेटियों के साथ छेड़खानी और व्यापारियों के खिलाफ अपराध करने वालों को यह सोचना चाहिए कि अगले चौराहे पर यमराज इंतजार कर रहे होंगे। असद ने सीएम योगी की बात नहीं मानी। लगातार बढ़ी थी मांग सूर्या चौहान की हत्या के बाद से लगातार मामले में एक्शन की मांग हो रही थी। सूर्या की मां और भाई लगातार इस मामले में मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर की मांग कर रहे थे। इस बीच गाजियाबाद पुलिस ने कांड के मुख्य आरोपी असद को ढेर कर दिया। 17 वर्षीय छात्र सूर्य प्रताप चौहान उर्फ सूर्या के हत्यारों पर लगातार एक्शन जारी है। गाजियाबाद पुलिस की ओर से असद पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 28 मई को 17 वर्षीय किशोर पर चाकू से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उसकी मौत हो गई थी। सूर्या की मौत के बाद से सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार के कड़े निर्देश के बाद भी हत्याकांड को अंजाम दिए जाने को लेकर चर्चा गरमाई। मामले में खोड़ा पुलिस पर भी सवाल खड़े हुए। हालांकि, मामले में सरकार की ओर से अपराधियों के खिलाफ सख्त एक्शन के निर्देश पहले ही जारी किए गए थे। ऐसे में पुलिस लगातार एक्शन में दिखी। सीएम ने लगातार दिया हैं संदेश सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुंडे और माफियाओं को पिछले दिनों लगातार एक संदेश दिया है, अगर अपराध करोगे तो कार्रवाई के लिए भी तैयार रहना होगा। सीएम योगी ने लखनऊ से लेकर मऊ तक के कार्यक्रमों के दौरान साफ तौर पर कहा कि प्रदेश में आज कोई बेटी की सुरक्षा में सेंध नहीं लगा सकता है। प्रदेश में आज कोई व्यापारी से जबरन गुंडा टैक्स नहीं ले सकता है। प्रदेश में बेटियां नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं। अगर कोई गुंडा बेटियों को छेड़ने का प्रयास करता है, तो अगले चौराहे पर यमराज उसका टिकट काटने के लिए बैठे रहते हैं। यही बात उन्होंने अपराध करने वालों को भी कही थी। हालांकि, बकरीद के दिन सुनियोजित साजिश रचते हुए जिस प्रकार से असद ने अपने साथियों के साथ मिलकर सूर्या को मार डाला। यह एक प्रकार से सीएम योगी आदित्यनाथ की लगातार अपील को नजरअंदाज किए जाने के तौर पर देखा गया। अब इस मामले में योगी सरकार का सख्त एक्शन सामने आया है। असद के एनकाउंटर के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि, 17 वर्षीय किशोर की हत्या मामले में आरोपी के एनकाउंटर के बाद पीड़ित परिवार संतोष जता रहा है। ब्रजेश पाठक का आया बयान सूर्या चौहान की हत्या मामले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सूर्या के हत्यारों को गिरफ्तार किया था। जवाबी कार्रवाई में मुख्य आरोपी मारा गया। डिप्टी सीएम ने कहा कि इस हत्याकांड और अपराध में शामिल हत्यारों एवं अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सीएम योगी ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। रीना भाटी ने भी बोला हमला सूर्या केस में खोड़ा नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष रीना भाटी ने कहा कि परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद थी। योगी सरकार ने कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखा। यह एनकाउंटर एक कट्टरपंथी सोच वाले व्यक्ति के साथ हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर कोई भी ऐसी विचारधारा पर चलेगा, तो उसका भी यही हश्र होगा।  

उच्च शिक्षा विभाग ने दी मंजूरी, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होंगी नई कक्षाएं

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार और विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 शासकीय महाविद्यालयों में नए संकाय एवं विषय प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की है। इस संबंध में विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा, श्री अनुपम राजन ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश छह शासकीय महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय प्रारंभ किया जाएगा। इसके अंतर्गत भौतिकी, रसायन विज्ञान, प्राणीशास्त्र, गणित एवं वनस्पति विज्ञान विषयों का संचालन किया जाएगा। जिन महाविद्यालयों में विज्ञान संकाय प्रारंभ किया जा रहा है, उनमें शासकीय महाविद्यालय देवेंद्रनगर, केसली, रहली, गढ़ाकोटा, शाहगढ़ और जावर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, शासकीय महाविद्यालय ढाना में स्नातक स्तर पर इतिहास विषय प्रारंभ करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है। शासकीय महाविद्यालय देवेंद्रनगर में स्नातकोत्तर स्तर पर राजनीतिक शास्त्र, शासकीय महाविद्यालय बम्हनी में स्नातकोत्तर स्तर पर राजनीतिक शास्त्र, हिन्दी एवं समाजशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय नईगढ़ी राजनीतिक शास्त्र, भूगोल एवं समाजशास्त्र, शासकीय कन्या महाविद्यालय बासौदा में स्नातकोत्तर स्तर पर भौतिकी, रसायन शास्त्र, प्राणीशास्त्र, गणित एवं वनस्पति शास्त्र, शासकीय महाविद्यालय बंडा में स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र, हिन्दी, इतिहास, वनस्पति शास्त्र, प्राणी शास्त्र एवं रसायन शास्त्र, शासकीय महाविद्यालय रहली स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, समाजशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय गढ़ाकोटा में हिन्दी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, समाजशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय शाहगढ़ में हिन्दी साहित्य, राजनीतिक शास्त्र, भूगोल एवं इतिहास, विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। उच्च शिक्षा विभाग के इस निर्णय से प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा। साथ ही, उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों की ओर उनका पलायन भी कम होगा। विभाग का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।  

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित “गोरस” मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध, पशुपालक और किसान आसानी से कर सकेंगे डाउनलोड

भोपाल  प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पशुपालकों एवं किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुओं के संतुलित आहार प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में पशुपालन एवं डेयरी विभाग निरंतर नवाचार कर रहा है। इसी क्रम में विभाग द्वारा "गोरस मोबाइल ऐप" विकसित किया गया है। यह ऐप पशुपालकों को वैज्ञानिक आधार पर पशुओं के आहार प्रबंधन की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इस ऐप के उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी। इससे पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। प्रदेश के पशुपालक एवं किसान गूगल प्ले स्टोर से इस ऐप को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप विकसित करने का उद्देश्य मध्यप्रदेश में दो करोड़ से अधिक गायों और भैंसों का पालन किया जाता है, लेकिन अधिकांश पशुपालक अभी भी पारंपरिक तरीके से पशुओं को आहार देते हैं। वैज्ञानिक पद्धति से संतुलित पोषण न मिलने के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप दूध उत्पादन में 20 से 30% तक की कमी आती हैं। पशुपालकों की इन समस्याओं के समाधान के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा "गोरस मोबाइल ऐप" विकसित किया गया है। पशुपालक जैसे ही अपने पशु से संबंधित जानकारी, जैसे नस्ल, वजन, दुग्ध उत्पादन, दुग्ध उत्पादन का चरण तथा वर्तमान पशु आहार आदि दर्ज करेंगे, ऐप उनके पशु के लिए संतुलित आहार की मात्रा और प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही ऐप यह भी बताएगा कि आहार प्रबंधन में सुधार करने पर एक ब्यांत के दौरान पशुपालक को कितना आर्थिक लाभ हो सकता है। ऐप वर्तमान में दिए जा रहे आहार के कारण होने वाले संभावित नुकसान की जानकारी भी देगा। विभाग की यह पहल प्रदेश में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित "गोरस" मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। यह ऐप पूरी तरह नि:शुल्क है। पशुपालक एवं किसान इसे अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड कर विभिन्न प्रकार की उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऐप की प्रमुख विशेषताएं यह ऐप पूरी तरह से हिंदी भाषा में विकसित है, जो गाय एवं भैंसों के लिए संतुलित आहार संबंधी सुझाव प्रदान करता है। साथ ही, उपलब्ध चारे के संयोजन के आधार पर अधिकतम दुग्ध उत्पादन और न्यूनतम लागत का दर्शाता है। इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी यह कार्य करने में सक्षम है। सबसे खास बात यह है कि ये ऐप 28 से अधिक स्थानीय चारे की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है। मौसम विशेषकर गर्मी तथा गर्भावस्था की स्थिति के अनुसार स्वचालित सुझाव देता है। गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी एवं संकर नस्लों के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है। इसके अलावा पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ का आकलन प्रदान करता है और अवर्णित गायों एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार संबंधी सलाह देता है। ऐसे करें डाउनलोड "गोरस" मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए पशुपालकों को अपने मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर पर जाना होगा। वहां "गोरस ऐप" सर्च करें। ऐप दिखाई देने पर उसे डाउनलोड करें। डाउनलोड होने के बाद इंस्टॉलेशन की अनुमति दें और "इंस्टॉल" विकल्प पर क्लिक करें। आवश्यक सुरक्षा अनुमति प्रदान करने के बाद ऐप को खोलकर उपयोग किया जा सकता है। विभाग द्वारा विकसित किया गया ऐप पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने तथा वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग द्वारा "गोरस" मोबाइल ऐप विकसित कराया गया है। उन्होंने बताया कि यह ऐप सरल एवं सहज हिंदी भाषा में तैयार किया गया है और गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। पशुपालक एवं किसान इसे आसानी से डाउनलोड कर इसका लाभ उठा सकते हैं।  

फ्यूल सरचार्ज से महंगी हुई बिजली, बढ़कर आएगा बिल

 लखनऊ  बढ़ती महंगाई की मार से परेशान बिजली उपभोक्ताओं को जून में 10 प्रतिशत ज्यादा बिल भी देना होगा। भीषण गर्मी के चलते मई में कहीं अधिक बिजली का उपभोग होने से उपभोक्ताओं का वैसे ही जून में बढ़कर बिल आना था। अब बिजली कंपनियां मार्च माह के ईंधन अधिभार शुल्क(फ्यूल सरचार्ज) के लिए मई के बिल के साथ जून में सभी श्रेणियों के लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं से 1610 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूली भी करेंगी। इस संबंध में पावर कारपोरेशन ने आदेश जारी किया है। उपभोक्ताओं को जुलाई में भी जून के बिल के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। चूंकि विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में विद्युत खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट अनुमोदित किया है और पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने 5.94 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दिखाते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डाला है, इसलिए विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मुख्य्मंत्री योगी आदित्यनाथ तथा ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से अधिभार शुल्क के तौर पर बिजली के बिल में की गई 10 प्रतिशत वृद्धि पर रोक लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि बिजली कंपनियों ने विद्युत उत्पादन कंपनियों से दो वर्ष पुराने बकाए को जोड़ते हुए बिल तैयार कराया है। इसमें पुराने बकाए का 1400 करोड़ रुपये शामिल है। संबंधित आदेश में लिखा है कि अधिभार 20 प्रतिशत वसूला जाना चाहिए, जिससे यह लगता है कि जुलाई में भी उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलना जा सकता है। वर्मा ने आयोग से मांग की है कि ईंधन अधिभार वसूलने पर रोक लगे। उन्होंने कहा है कि मार्च में महंगी बिजली खरीदने की विस्तृत जांच हो। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस निकल रहा है। ऐसे में ईंधन अधिभार बढ़ाने की स्थिति में उपभोक्ताओं पर भार डालने के बजाय उसे सरप्लस से ही समायोजित (एडजस्ट) किया जाए। उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालने के मामले को वह जल्द ही आयोग के समक्ष उठाएंगे। वह ईंधन अधिभार निर्धारण संबंधी नियमों में आवश्यक संशोधन की मांग करेंगे। उल्लेखनीय है कि मई में ईंधन अधिभार के एवज में 1.52 प्रतिशत बिजली का बिल कम हुआ था। इससे पहले अप्रैल में 2.14 प्रतिशत अधिक बिल देना पड़ा था।  

गोरखपुर में पर्यटन को नई उड़ान: रामगढ़ताल के बाद अब चिलुआताल तैयार

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में एक नया टूरिस्ट स्पॉट तैयार है। सीएम योगी आदित्यनाथ दो जून को इसका लोकार्पण करेंगे। गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, 20.39 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए चिलुआताल के पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण के काम का लोकार्पण करेंगे। गोरखपुर के दक्षिणी छोर में रामगढ़ताल योगी सरकार द्वारा कराए गए कायाकल्प से गोरखपुर के टूरिज्म का हॉट स्पॉट बना हुआ है तो अब उत्तरी छोर पर चिलुआताल पर्यटकों को लुभा रहा है। चिलुआताल घाट के पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा हो गया है। पर्यटन विभाग के उप निदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव के मुताबिक चिलुआताल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 20 करोड़ 39 लाख रुपये की परियोजना को मूर्त रूप दिया गया है। उल्लेखनीय है कि चिलुआताल भी रामगढ़ताल की तरह दशकों से उपेक्षित पड़ा रहा। योगी सरकार ने पहले रामगढ़ताल का कायाकल्प कर उसे वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया तो अब चिलुआताल को संवारा गया है। कार्यदायी संस्था के रूप में यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से कराए गए कार्यों में 570 मीटर पाथवे निर्माण, घाट की सीढ़ियों का निर्माण, ताल किनारे रेलिंग, सोलर लाइट, इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, बेंच, 400 मीटर एप्रोच रोड, 500 मीटर साइड वाल एवं नाली निर्माण, गेट के सुपर स्ट्रक्चर का कार्य, कैरेट बोल्डर और स्टोन पिचिंग, दुकान, टॉयलेट ब्लॉक का निर्माण आदि शामिल है। रामगढ़ताल के नौका विहार की तरफ विकसित होने से चिलुआताल की आभा निखरकर सामने आ रही है। लोग सुबह-शाम टहलने के लिए आना शुरू कर दिए हैं। सीएम योगी के विजन से विकसित चिलुआताल टूरिस्ट स्पॉट मनोरंजन के साथ रोजगार का केंद्र भी बनेगा। सात दुकानें यहां बनकर तैयार हो गईं हैं। घाट पर एक तरफ लोग सर्वाधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थल पर मनोरंजन करेंगे वहीं लोग यहां लगी दुकानों पर जायके का आनंद भी ले सकेंगे। यही नहीं, चिलुआताल में भी रामगढ़ताल की तर्ज पर लोगों को बोटिंग करने की सुविधा मिलेगी।

54 हजार 923 ग्रामों एवं 425 नगरीय निकायों में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण

भोपाल  मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing Operation-HLO) का फील्ड कार्य 30 मई 2026 को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। राज्यभर में 01 मई 2026 से प्रारंभ हुए इस व्यापक अभियान के दौरान प्रत्येक ग्राम एवं नगरीय क्षेत्र में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर मकानों तथा उनमें निवासरत परिवारों से निर्धारित जानकारी संकलित की गई। इस चरण में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 33 प्रश्नों के माध्यम से मकानों की स्थिति, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों संबंधी जानकारी मोबाइल एप के जरिए डिजिटल रूप से एकत्रित की गई। जनगणना 2027 की यह प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यमों पर आधारित रही, जिसके अंतर्गत फील्ड कार्य की सतत मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से की गई। इससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा समयबद्धता सुनिश्चित हुई। सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य मती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में यह कार्य 55 जिलों, 425 नगरीय निकायों तथा 449 तहसीलों के अंतर्गत 54 हजार 923 ग्रामों में संपादित किया गया। मकान सूचीकरण ब्लॉकों में 1 लाख 44 हजार से अधिक प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों द्वारा कार्य किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 15 हजार प्रगणक एवं पर्यवेक्षक रिजर्व के रूप में तैनात किए गए थे। निर्धारित समयसीमा में पूरे प्रदेश में मकानों की गणना का कार्य पूर्ण होना प्रशासनिक समन्वय एवं जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जनगणना के दौरान संकलित की गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के तहत पूर्णतः गोपनीय रहेंगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति-निर्माण, विकास योजनाओं के निर्माण तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु किया जाएगा। भारत सरकार द्वारा संपूर्ण जनगणना प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत निर्धारित समय पर संबंधित आंकड़े जारी किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण के पूर्व राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया संचालित की गई थी। इस अवधि में प्रदेश के 7 लाख से अधिक परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की, जो नागरिक सहभागिता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। जनगणना 2027 के द्वितीय चरण के अंतर्गत जनसंख्या की गणना (Population Enumeration-PE) का कार्य फरवरी 2027 में संपादित किया जाएगा। इस चरण में परिवारों के सभी सदस्यों से निर्धारित सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्रित की जाएगी। जनगणना अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, पर्यवेक्षकों, प्रगणकों एवं प्रदेशवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया द्वारा जनजागरूकता और प्रचार-प्रसार में निभाई गई सक्रिय भूमिका से जनसहभागिता को व्यापक बल मिला। निदेशक जनगणना कार्य, मध्यप्रदेश  संजीव वास्तव एवं सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य मती शिल्पा गुप्ता ने जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल एवं समयबद्ध संपादन पर प्रदेश के सभी नागरिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फरवरी 2027 में आयोजित होने वाले जनगणना के द्वितीय चरण में भी प्रदेशवासियों का इसी प्रकार सक्रिय एवं सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा, जिससे इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सकेगा।