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भोपाल गैस कांड के चार दशक बाद यूनियन कार्बाइड साइट की दोबारा जांच, मिट्टी-पानी में तलाशे जाएंगे जहरीले रसायन

भोपाल  दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में शामिल भोपाल गैस त्रासदी के चार दशक बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की मिट्टी और पानी की एक बार फिर वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि इतने वर्षों बाद भी परिसर में प्रदूषण की स्थिति क्या है और जमीन के नीचे अथवा परिसर में मौजूद तालाबों के पानी में जहरीले रासायनिक तत्व तो मौजूद नहीं हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि फैक्ट्री परिसर की जमीन का इस्तेमाल गैस पीड़ितों के स्मारक, अस्पताल या अन्य कार्यों के लिए किया जा सकता है या नहीं। सरकार ने परीक्षण का जिम्मा गुजरात की एक कंपनी को सौंपा है। कंपनी जल्द ही अलग-अलग स्थानों से नमूने लेकर जांच शुरू करेगी। इस पूरी प्रक्रिया पर करीब 2.65 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 87 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित है स्मारक और अस्पताल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रासायनिक कचरा हटाए जाने के बाद इसी वर्ष जनवरी में यूनियन कार्बाइड परिसर की खाली जमीन पर गैस त्रासदी के पीड़ितों की स्मृति में स्मारक और अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। फैक्ट्री परिसर में कुल 87 एकड़ जमीन है। अब इस जमीन के भविष्य के उपयोग से पहले एक बार फिर पर्यावरणीय स्थिति का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। जांच में मिट्टी के साथ भूजल और परिसर में बने तालाबों के पानी के नमूनों की भी जांच की जाएगी, ताकि किसी तरह के रासायनिक अवशेष की मौजूदगी का पता लगाया जा सके। 2010 की जांच में मिले थे पारा और कीटनाशक इससे पहले वर्ष 2010 में राष्ट्रीय पर्यावरणीय शोध संस्थान (नीरी), नागपुर ने परिसर की मिट्टी की जांच की थी। इसके अलावा फैक्ट्री परिसर के बाहर भूजल के 30 नमूने लेकर उनका परीक्षण किया गया था। तब कुछ नमूनों में पारा (मर्करी) समेत कुछ कीटनाशक निर्धारित मात्रा से अधिक पाए गए थे। ऐसे में चार दशक बाद होने वाली नई जांच से यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा समय में परिसर और उसके आसपास प्रदूषण की स्थिति क्या है। टेंडर पर भी उठे सवाल वहीं, एक संगठन से जुड़ी रचना ढींगरा ने जांच के लिए कंपनी के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अदालत ने इसके लिए ग्लोबल टेंडर किए जाने की आवश्यकता बताई है। सरकार की ओर से गुजरात की कंपनी को जांच का काम सौंपा गया है। अब नई जांच की रिपोर्ट पर यह तय होगा कि त्रासदी के चार दशक बाद यूनियन कार्बाइड परिसर की 87 एकड़ जमीन को स्मारक और अस्पताल जैसे सार्वजनिक उपयोग में लाने के लिए पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित माना जा सकता है या नहीं।

योगी सरकार का बड़ा प्रयास, 1,600 करोड़ से अधिक की 65 परियोजनाओं से बदलेगी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मेडिकल एजुकेशन के अभूतपूर्व विस्तार के बाद योगी सरकार अब चिकित्सा संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रही है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों में करीब 1,606.83 करोड़ रुपये की 65 परियोजनाएं शिलान्यास और लोकार्पण के लिए तैयार हैं। इनमें करीब 1,400.70 करोड़ रुपये की 44 परियोजनाएं शिलान्यास तथा करीब 206.13 करोड़ रुपये की 21 परियोजनाएं लोकार्पण से संबंधित हैं। इन परियोजनाओं की खासियत यह है कि सरकार का फोकस केवल नए भवन बनाने तक सीमित नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में बढ़ी सीटों के अनुरूप छात्रावास, लेक्चर थिएटर और परीक्षा भवन से लेकर नर्सिंग कॉलेज, ट्रॉमा सेंटर, एमसीएच सेंटर, संक्रामक रोग चिकित्सालय, ट्रांसप्लांट यूनिट, सीवरेज और जलापूर्ति जैसी सुविधाओं को भी विकसित किया जा रहा है। यानी मेडिकल एजुकेशन के विस्तार के साथ उससे जुड़ा पूरा सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की दिशा में काम हो रहा है।  लखनऊ में 855 करोड़ से 1010 बेड का नया अस्पताल प्रस्तावित परियोजनाओं में सबसे बड़ी परियोजना लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की है। संस्थान के गोमतीनगर विस्तार स्थित नए परिसर में निर्मित बेसमेंट के ऊपर 1010 शैय्या के अस्पताल भवन का निर्माण करीब 855.04 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित है। यह अकेली परियोजना प्रदेश के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े विस्तार का संकेत देती है। इसी तरह, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भी करीब 43.68 करोड़ रुपये की लागत से बहुमंजिला रोगी सहायक आधुनिक कैंटीन प्रस्तावित है। कानपुर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालयों में नया जनरेटर और करीब 49.40 करोड़ रुपये से नया संक्रामक रोग चिकित्सालय बनाने की तैयारी है।  मेरठ में ट्रॉमा से मातृ-शिशु स्वास्थ्य तक बड़ा विस्तार मेरठ मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सुविधाओं और कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें मौजूदा लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर को 100 बेड के लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर के रूप में विकसित करने पर करीब 48.15 करोड़ रुपये तथा बाल रोग विभाग में एमसीएच सेंटर के निर्माण पर करीब 34.82 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसके अलावा सीवरेज व्यवस्था, महिला एवं पुरुष पीजी छात्रावास, जलापूर्ति सिस्टम, 10 एमएलडी एसटीपी और बिजली संबंधी बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा। इस तरह यहां मरीजों के इलाज के साथ मेडिकल छात्रों और चिकित्सकों के लिए जरूरी कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी समानांतर काम होगा।  मेडिकल सीटें बढ़ीं तो हॉस्टल और अकादमिक सुविधाएं भी बढ़ेंगी योगी सरकार की रणनीति में मेडिकल सीटों के विस्तार के अनुरूप अकादमिक और आवासीय सुविधाएं विकसित करना महत्वपूर्ण हिस्सा है। झांसी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस यूजी सीटों में वृद्धि को देखते हुए बहुमंजिला भवन में लेक्चर थिएटर, वातानुकूलित पुस्तकालय, कॉन्फ्रेंस हॉल और कैफेटेरिया के साथ परीक्षा हॉल के निर्माण पर करीब 28.44 करोड़ रुपये खर्च प्रस्तावित है। इसके साथ 272 बेड के यूजी बालिका छात्रावास के निर्माण पर करीब 26.89 करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित है। एटा में बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल तथा परिसर की दूसरी आधारभूत सुविधाओं के निर्माण की तैयारी है। कुशीनगर में 100 बेड गर्ल्स हॉस्टल, 100 बेड बॉयज हॉस्टल और एसटीपी जैसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। अयोध्या मेडिकल कॉलेज में 100 शैय्या इंटर्नशिप हॉस्टल, 100 शैय्या बॉयज हॉस्टल और 100 शैय्या यूजी गर्ल्स हॉस्टल सहित अन्य निर्माण प्रस्तावित हैं।  नर्सिंग एजुकेशन के विस्तार पर भी जोर प्रदेश में चिकित्सकों के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग मानव संसाधन तैयार करने पर भी योगी सरकार का विशेष जोर है। प्रस्तावित शिलान्यास परियोजनाओं में गोंडा मेडिकल कॉलेज में करीब 9.93 करोड़ रुपये से नर्सिंग कॉलेज की स्थापना शामिल है। वहीं लोकार्पण के लिए तैयार परियोजनाओं में बहराइच, अयोध्या और हरदोई के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं। सहारनपुर मेडिकल कॉलेज में करीब 20.82 करोड़ रुपये की लागत से 60 सीट का बीएससी नर्सिंग कॉलेज और ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान में करीब 20.82 करोड़ रुपये से कॉलेज ऑफ नर्सिंग भी सूची में शामिल हैं।  मरीजों के इलाज से लेकर मेडिकल छात्रों की सुविधा तक परियोजनाओं का दायरा मेडिकल कॉलेजों के क्लासरूम और अस्पतालों से कहीं आगे है। जौनपुर के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में चिकित्सकों के आवास, टाइप-1, टाइप-2 और टाइप-4 आवास, 200 क्षमता के दो व्याख्यान कक्ष, इंटर्न पुरुष छात्रावास, फैकल्टी पार्किंग, फायर फाइटिंग सिस्टम, गेस्ट हाउस और अन्य कैंपस सुविधाओं से जुड़े कई काम प्रस्तावित हैं। मिर्जापुर के मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस छात्रों के लिए 160 क्षमता और छात्राओं के लिए 140 क्षमता के छात्रावास के साथ चार व्याख्यान कक्षों में ध्वनिरोधक निर्माण कार्य प्रस्तावित है। बस्ती में ओपेक चिकित्सालय कैली में क्लीनिकल ब्लॉक का निर्माण प्रस्तावित है, जबकि लोकार्पण की सूची में इसी अस्पताल परिसर में गेस्ट हाउस, बैंक, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और शवगृह जैसे नए भवन भी शामिल हैं। शाहजहांपुर में इमरजेंसी विभाग के जीर्णोद्धार एवं निर्माण के साथ नर्सिंग कॉलेज की स्थापना से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।  तैयार परियोजनाओं से तत्काल बढ़ेंगी सुविधाएं योगी सरकार की मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति का दूसरा पहलू उन परियोजनाओं को जनता और मेडिकल छात्रों के उपयोग के लिए समर्पित करना है, जिनका निर्माण पूरा हो चुका है। 206.13 करोड़ रुपये की 21 परियोजनाएं लोकार्पण के लिए सूचीबद्ध हैं। कानपुर मेडिकल कॉलेज में बढ़ी यूजी सीटों के अनुरूप मेडिकल रिकॉर्ड सेक्शन और यूजी बॉयज हॉस्टल विस्तार के लिए तैयार है। मानसिक रोग विभाग में एमडी साइकियाट्री पाठ्यक्रम के लिए विभाग का विस्तार तथा डी-एडिक्शन वार्ड ब्लॉक भी लोकार्पण सूची में है। मेरठ मेडिकल कॉलेज में 100 बेड गर्ल्स हॉस्टल, 100 बेड बॉयज हॉस्टल, 100 बेड इंटर्न हॉस्टल, परीक्षा भवन विस्तार और लेक्चर थिएटर जैसी परियोजनाएं तैयार हैं। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बहुमंजिला डबल सीटेड गर्ल्स छात्रावास भी इस सूची में शामिल है।  किडनी, लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट की दिशा में भी कदम सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। संस्थान के मुख्य चिकित्सा भवन की छठी और सातवीं मंजिल पर किडनी, लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन यूनिट स्थापित करने की परियोजना लोकार्पण सूची में शामिल है, जिसकी लागत करीब 18.22 करोड़ रुपये दर्ज है। इसी संस्थान के 200 बेड राम प्रकाश गुप्ता मेमोरियल मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में रेडियोलॉजिकल ब्लॉक के पास 100 मरीजों के लिए … Read more

यूपी राइजः योगी सरकार के विजन ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ को धरातल पर उतार रहे प्रदेश के युवा

रायबरेली उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है। सरकार के विजन 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' को धरातल पर उतारने के लिए फिरोज़ गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, रायबरेली में 'यूपी राइज: संवाद, संकल्प, सफलता' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला बनाना है। इस कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्र- छात्राओं ने प्रतिभाग किया।  विश्व में सबसे बड़ी युवा वर्कफोर्स उत्तर प्रदेश के पास, 50 फीसदी स्टार्टअप का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में- मनीष खेमका कार्यक्रम में ग्लोबल टैक्सपेयर्स ट्रस्ट के चेयरमैन एवं जीएसटी ग्रीवांस रिड्रेसल कमेटी के सदस्य मनीष खेमका ने युवाओं को यूपी के मजबूत स्टार्टअप ईकोसिस्टम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्व में सबसे बड़ी युवा वर्कफोर्स उत्तर प्रदेश के पास है। यह हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड है। यूपी के युवा अब 'जॉब सीकर' नहीं, 'जॉब क्रिएटर' बन रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले राज्य में पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या मात्र 120 के आसपास थी, जो आज 24 हजार से अधिक हो चुकी है। इनमें 50 फीसदी स्टार्टअप का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। 8 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स खड़े हो चुके हैं। सरकार ने स्टार्टअप नीति 2026 के माध्यम से नीतिगत रास्ते आसान किए हैं। युवाओं को ₹20,000 प्रति माह का सस्टेनेंस एलाउंस, ₹10 लाख तक का प्रोटोटाइप अनुदान, और ₹15 लाख तक की सीड कैपिटल दी जा रही है। 65 विभागों के 4,675 से अधिक पुराने नियमों व अनुपालनों को समाप्त कर बिजनेस आसान बनाया गया है। इसीलिए राज्य में कारखानों की संख्या 14 हजार से बढ़कर 31 हजार से अधिक हो चुकी है। यूपी अब भारत में बिजनेस करने के लिए शीर्ष अनुकूल राज्यों में शामिल है, जिसका युवाओं को पूरा लाभ उठाना चाहिए।  कार्यक्रम में एआई कंसल्टेंट, टेक्निकल आर्किटेक्ट व मोबिलिटी विशेषज्ञ लता रस्तोगी और मनीष नाथ ने छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नई तकनीकों और विभिन्न उभरते स्टार्टअप के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न लाभकारी योजनाओं के बारे में बताते हुए छात्रों को इनका लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।   12 स्टार्टअप आइडिया हुए शॉर्टलिस्ट, प्रेजेंटेशन देने वाले विजेता हुए सम्मानित प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही योगी सरकार की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार समेत महिला सशक्तीकरण से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इस आयोजन में कुल 12 बेहतरीन स्टार्टअप आइडिया को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें कृषि स्कैन, व्यापार सेतु, स्मार्ट केयर, जल रिसाव निवारण, लैब सेतु, मोबाइल सहयोगात्मक रोबोट समेत अन्य शानदार स्टार्टअप आइडिया शामिल रहे। सबसे बेहतर प्रेजेंटेशन देने वाले विजेता नवनीत यादव- टीम मोबाइल सहयोगी रोबोट को 25,000 पुरस्कार साथ ही उपविजेता ऋषभ श्रीवास्तव, शोज़ाब रिज़वी, टीम लैब सेतु को भी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यूपी राइज कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली छात्रों को सीधे बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप तथा रोजगार के अवसर मिलेंगे।

सीखते कदम, बढ़ती दक्षता: मिशन कर्मयोगी से संवरेगा शिक्षा विभाग का कार्यबल

लखनऊ योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था के साथ उसे गति देने वाले मानव संसाधन को भी दक्ष और सक्षम बनाने की नीति पर आगे बढ़ रही है। विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कार्मिकों का निरंतर क्षमता विकास अब कार्यसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। इसी क्रम में मिशन कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को न्यूनतम दो कोर्स अनिवार्य रूप से पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से जिन कार्मिकों ने अभी तक कोई कोर्स पूरा नहीं किया है अथवा जिनके कोर्स अपूर्ण हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षण पूरा कराने को कहा गया है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देशों के अनुसार कार्यालयाध्यक्ष स्वयं भी कोर्स पूरा करेंगे और अपने अधीनस्थ कार्यरत समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण पूरा कराने की जिम्मेदारी निभाएंगे। इस व्यवस्था से विभागीय प्रशिक्षण को केवल उच्च कार्यालयों तक सीमित रखने के स्थान पर विद्यालय स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है। ज्ञात हो कि मिशन कर्मयोगी के माध्यम से नियमित प्रशिक्षण की यह व्यवस्था शिक्षा विभाग के कार्मिकों में नई दक्षताओं, कार्यकुशलता और निरंतर सीखने की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है। दक्षता के विविध आयामों पर प्रशिक्षण राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) के निदेशक एवं मिशन कर्मयोगी के बेसिक शिक्षा के नोडल डॉ. मुकेश चंद्र बताते हैं कि कार्मिकों की सुविधा के लिए छह कोर्स चयनित कर उन्हें साझा किए गए हैं। इनमें ‘स्क्रीन टाइम प्रबंधन एवं डिजिटल जीवनशैली’, ‘इंग्लिश वोकैबुलरी: कॉमनली मिसयूज्ड एंड कन्फ्यूज्ड वर्ड्स’, ‘पूर्व प्राथमिक स्तर के लिए प्रभावी शिक्षण विधियां’, ‘योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस’, ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट’ और ‘बेसिक्स ऑफ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट’ शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के चयन में डिजिटल जीवनशैली, प्रभावी शिक्षण, तनाव प्रबंधन और कार्यस्थल से जुड़ी दक्षताओं जैसे अलग-अलग पहलुओं को शामिल किया गया है। इससे कार्मिकों को अपनी भूमिका के अनुरूप नई जानकारी और कार्य-कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। अधूरे प्रशिक्षण को पूरा कराने पर विशेष जोर निर्देशों के अनुसार ऐसे कार्मिकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने अभी तक कोई कोर्स पूर्ण नहीं किया है अथवा जिनके कोर्स अपूर्ण हैं। कार्यालयाध्यक्षों को इनके प्रशिक्षण को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है। योगी सरकार की इस कार्यसंस्कृति में सीखना, बेहतर कार्यान्वयन की आधारभूमि के रूप में देखा जा रहा है। मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कार्मिकों को बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को लगातार अपडेट करने का अवसर मिल रहा है। कार्यालय से विद्यालय तक पहुंचेगा क्षमता विकास निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण संबंधी संदेश को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने के साथ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इससे विभागीय कार्यालयों से लेकर विद्यालयों तक कार्यरत मानव संसाधन को एक साझा क्षमता विकास प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिलेगी। योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ उसके मानव संसाधन की दक्षता और क्षमता बढ़ाने को भी प्राथमिकता दे रही है। मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कार्मिकों को निरंतर सीखने और अपने कार्य-कौशल को विकसित करने का अवसर मिल रहा है। दक्ष और संवेदनशील मानव संसाधन ही सरकार की शिक्षा नीतियों को प्रभावी रूप से धरातल तक पहुंचाने की शक्ति बनता है। संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मिशन कर्मयोगी के माध्यम से विभागीय कार्मिकों के सतत क्षमता विकास को गति दी जा रही है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक कार्मिक निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करे और सीखने की इस प्रक्रिया को अपने कार्य से जोड़े। विशेष रूप से अपूर्ण अथवा अब तक प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले कार्मिकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास हो रहे पूर्ण : केंद्रीय मंत्री चौहान

रायपुर  छत्तीसगढ़ में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास के सपने को साकार करने की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा। सक्ती में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के राज्यस्तरीय गृह प्रवेश समारोह में 2 लाख नवनिर्मित आवासों का गृह प्रवेश कराया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से उनके नए घरों की चाबी सौंपी गई। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की बड़ी सौगात दी। उन्होंने नवगठित सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने तथा बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा भी की। केंद्रीय मंत्री  चौहान ने अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति संबंधी पत्र मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय को सौंपा। छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन 1600 से अधिक पीएम आवास हो रहे पूर्ण : केंद्रीय मंत्री  चौहान केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण इसी संकल्प को जमीन पर साकार करने वाली महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास निर्माण का कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है और प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास पूर्ण किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विकास कार्यों की सराहना की। केंद्रीय मंत्री  चौहान ने कहा कि सरकार जो कहती है, उसे पूरा करके दिखाती है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों को नई गति मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के आवास, सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से गरीब परिवारों को केवल पक्की छत ही नहीं मिल रही, बल्कि उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, निःशुल्क राशन, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन में व्यापक बदलाव लाने का कार्य किया जा रहा है। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर कर रहे काम केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है। प्रदेश अब केवल धान के कटोरे के रूप में ही नहीं, बल्कि तेजी से सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बना रहा है। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि में आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सक्ती में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना से क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत खेती, फसल विविधीकरण और कृषि संबंधी वैज्ञानिक मार्गदर्शन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा। गरीब का पक्का घर हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि  चौहान का छत्तीसगढ़ के प्रति विशेष स्नेह रहा है और उनके प्रत्येक प्रवास से प्रदेश को विकास की नई सौगातें मिली हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आज अपने नए पक्के घर में प्रवेश कर रहे 2 लाख हितग्राही परिवारों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आवास सर्वे-2011 और आवास प्लस सर्वे के अंतर्गत आवासों के लक्ष्य की स्वीकृति मिल चुकी है। अब आवास प्लस-प्लस सर्वे में शामिल शेष पात्र परिवारों के लिए भी आवास स्वीकृत करने का अनुरोध केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से किया गया है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। 13.85 लाख बहनें बनीं लखपति दीदी मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में हमारी माताओं-बहनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बिहान के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे बड़े बदलाव का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को लाभान्वित किया जा रहा है और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है। महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु पोर्टल का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि बिजली बिल समाधान योजना के अंतर्गत अब तक 750 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया बिजली बिल माफ किए जा चुके हैं। ग्रामीण विकास के कई अभिनव अभियानों का शुभारंभ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत निर्मित 2 लाख आवासों के गृह प्रवेश के साथ ही विभिन्न ग्रामीण विकास अभियानों और नवाचारों का भी शुभारंभ किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से गृह प्रवेश की चाबी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन का शुभारंभ किया गया। विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत ‘धार अपार’ और ‘सुघ्घर बाड़ी’ अभियान प्रारंभ किए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 270 नवीन इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टरों का विमोचन किया गया। साथ ही इन्क्यूबेशन प्रोग्राम ‘अथ उद्यमिता की ओर’ के अंतर्गत चैलेंज फंड इवेंट का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में आजीविका के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों एवं डीलर … Read more

पक्के घर में कदम रखते ही चेहरे पर आई मुस्कान, 5,596 परिवारों के साकार हुए अपने आशियाने के सपने

रायपुर  आकांक्षी विकासखंड लखनपुर के ग्राम पंचायत गोरता में आज उस समय खुशी का माहौल बन गया, जब प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत निर्मित पक्के मकानों में हितग्राहियों ने विधिवत गृह प्रवेश किया। छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर हितग्राही परिवारों को उनके नए आशियाने की चाबी सौंपी और उन्हें सुखद एवं सुरक्षित गृहस्थ जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मंत्री श्री अग्रवाल ने विधिवत पूजन एवं फीता काटकर गृह प्रवेश कराया तथा प्रतीकात्मक रूप से हितग्राहियों को ‘खुशियों की चाबी’ प्रदान की। अपने पक्के घर का सपना साकार होने पर हितग्राही परिवारों के चेहरे पर खुशी और संतोष साफ नजर आया। लंबे समय से सुरक्षित और पक्के आवास की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के लिए यह दिन नई उम्मीद, सम्मान, स्थायित्व और आत्मविश्वास की शुरुआत लेकर आया। मंत्री ने सौंपी ‘खुशियों की चाबी’, परिवारों के चेहरे पर खिली मुस्कान गृह प्रवेश कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने हितग्राही जुगेंद्र राजवाड़े एवं उनकी पत्नी फूलमती को उनके नवनिर्मित पक्के आवास की चाबी सौंपी। जैसे ही परिवार को अपने नए घर की चाबी मिली, परिवार के सदस्यों के चेहरे खुशी से खिल उठे। हितग्राही परिवार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पक्का घर मिलने पर शासन एवं प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। इसी क्रम में अन्य हितग्राहियों जोगेंद्र राजवाड़े, छीहारो और संतोष सहित अन्य परिवारों को भी मंत्री श्री अग्रवाल ने ‘खुशियों की चाबी’ प्रदान की। उन्होंने हितग्राहियों को नए घर के लिए बधाई देते हुए कहा कि पक्का आवास केवल चार दीवारों का निर्माण नहीं, बल्कि परिवार के सुरक्षित भविष्य, सम्मान और स्थायी आशियाने की मजबूत नींव है। अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूरा करने हितग्राहियों को किया प्रेरित कार्यक्रम के दौरान पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने ग्रामवासियों से संवाद भी किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत शेष आवासों को शीघ्र पूर्ण करने के लिए हितग्राहियों को प्रेरित किया। अधिकारियों ने हितग्राहियों से चर्चा कर आवास निर्माण की प्रगति की जानकारी ली तथा अपूर्ण आवासों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में जनपद पंचायत लखनपुर की अध्यक्ष शशिकला सिंह, उपाध्यक्ष श्री कामेश्वर राजवाड़े, ग्राम पंचायत के सरपंच एवं पंच, जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी खुशबू शास्त्री सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, एबीपी फेलो और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। ‘हर पात्र परिवार को पक्का घर’ के संकल्प को मिल रही गति प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य ऐसे पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्का एवं सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है, जिनके पास स्वयं का पक्का घर नहीं है। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक जीवन, बेहतर आवासीय सुविधा और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम गोरता में आयोजित गृह प्रवेश कार्यक्रम ने इस संकल्प की जमीनी तस्वीर प्रस्तुत की। जब हितग्राही परिवार अपने नए घर में प्रवेश कर रहे थे, तब पूरे गांव में उत्साह और प्रसन्नता का वातावरण देखने को मिला। 5,596 आवासों में एक साथ गूंजी गृह प्रवेश की खुशियां सरगुजा जिले में आज प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G), प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) एवं मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (MMAY-G) के तहत निर्मित कुल 5,596 आवासों में गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 4,967, पीएम जनमन योजना के 398 तथा मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 231 आवास शामिल हैं। विकासखंडवार आंकड़ों के अनुसार अंबिकापुर में कुल 1,235 आवासों में गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 1,170, पीएम जनमन योजना के 41 तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के 24 आवास शामिल हैं। इसी प्रकार बतौली में कुल 737 आवासों में गृह प्रवेश हुआ, जिनमें PMAY-G के 642, PM-JANMAN के 81 और मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 14 आवास शामिल हैं। लखनपुर विकासखंड में कुल 1,033 आवासों में गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 978, पीएम जनमन योजना के 11 और मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 44 आवास शामिल हैं। लुंड्रा में कुल 685 आवासों में गृह प्रवेश हुआ, जिनमें PMAY-G के 450, PM-JANMAN के 142 और मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 93 आवास शामिल हैं। इसी तरह मैनपाट विकासखंड में कुल 577 आवासों में गृह प्रवेश कार्यक्रम हुआ। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 469, पीएम जनमन योजना के 83 तथा मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 25 आवास शामिल हैं। सीतापुर में कुल 626 आवासों में गृह प्रवेश हुआ, जिनमें PMAY-G के 593, पीएम जनमन योजना के 24 और मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 9 आवास शामिल हैं। उदयपुर विकासखंड में कुल 703 आवासों में गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 665, पीएम जनमन योजना के 16 तथा मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 22 आवास शामिल हैं। जिले के विभिन्न विकासखंडों में एक साथ आयोजित गृह प्रवेश कार्यक्रम ने हजारों ग्रामीण परिवारों के जीवन में नई उम्मीद और खुशियां भर दीं। जिन परिवारों के लिए पक्के घर का सपना लंबे समय से एक आकांक्षा था, आज वही सपना उनके अपने घर की चौखट पर साकार हुआ। पक्की छत, सुरक्षित दीवारों और अपने घर की चाबी के साथ इन परिवारों को न केवल आवास मिला, बल्कि सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य का भरोसा भी मिला। शासन की आवास योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को पक्का आशियाना उपलब्ध कराने का यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।  

मुख्य सचिव ने समाधान ऑनलाइन के साथ की विभागीय कार्यों की समीक्षा

भोपाल  मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल ने मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान अंतर्गत धार में समाधान ऑनलाइन के साथ विभागीय कार्यों एवं सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की समीक्षा की। मुख्य सचिव  बर्णवाल ने निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में अधिकारी स्वयं शिकायतकर्ता से बात करें और शिकायतों का एक्टिव रिव्यू शुरू करें। सौ दिवस या उससे अधिक समय से लंबित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रत्येक शिकायत की समीक्षा कर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। समाधान ऑनलाइन में शिकायतकर्ता जुबे खां की पुलिस प्रकरण से संबंधित शिकायत सुनी गई। प्रकरण का निराकरण हो चुका था। मुख्य सचिव ने संबंधित थाने द्वारा की गई देरी को लेकर पुलिस अधीक्षक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक को थानों की समीक्षा करने तथा प्रकरणों में चालान लंबित नहीं रखने और प्रत्येक कार्य के लिए समय-सीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए। शिकायतकर्ता सुरेश कुमावत के घर जलने के प्रकरण में राशि मिलने में हुए विलंब पर मुख्य सचिव ने संबंधित समय के नायब तहसीलदार एवं रीडर की एक-एक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए। पेयजल योजना अंतर्गत शिकायतकर्ता पप्पू मंडलोई की पाइपलाइन फूटने की शिकायत 107 दिवस से लंबित थी। मुख्य सचिव ने नल-जल योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए सिस्टम विकसित करने तथा जिला पंचायत सीईओ को लगातार निगरानी रखते हुए प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करने के निर्देश दिए। निशक्त विवाह प्रोत्साहन योजना से संबंधित शिकायतकर्ता मती बसंती पिता पहाड़ की शिकायत का निराकरण हो चुका था। मुख्य सचिव ने सामाजिक न्याय विभाग को निर्देशित किया कि इस प्रकार की सभी लंबित शिकायतों का एक सप्ताह में निराकरण सुनिश्चित करें। स्वरोजगार योजना में सब्सिडी नहीं मिलने की शिकायतकर्ता दीप कुमार दांगी तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की किस्त प्राप्त नहीं होने की शिकायतकर्ता कशिश जाधव की शिकायत भी सुनी गई। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान एंबुलेंस के समय पर नहीं पहुंचने की शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टर को संबंधित प्रकरणों में एंबुलेंस की राशि काटने के निर्देश दिए। महिला एवं बाल विकास विभाग को एनआरसी में बच्चों को भर्ती कराकर उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने सबसे अधिक लंबित शिकायत वाले विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर शिकायतों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। प्रत्येक विभाग की अलग-अलग समीक्षा करते हुए अधिकारियों को शिकायतों के निराकरण के साथ उनकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देने को कहा। बैठक में स्वामित्व योजना की तैयारियों, प्लॉट रजिस्ट्री प्रदान करने तथा अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान सचिव मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन डॉ. सुदाम खाड़े, इंदौर संभागायुक्त  भास्कर लक्षकार, कलेक्टर  राजीव रंजन मीना, पुलिस अधीक्षक  सचिन शर्मा और अन्य जिला अधिकारी उपस्थित रहे।  

सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े विकास कार्यों से क्षेत्र में बढ़ेंगी सुविधाएं

रायपुर   केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सक्ती जिले के ग्राम जेठा में आयोजित कार्यक्रम में जिले को लगभग 122 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। दोनों अतिथियों ने 121 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक की लागत के कुल 38 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें लगभग 79.25 करोड़ रुपए की लागत के 23 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा लगभग 42.46 करोड़ रुपए की लागत के 15 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इन कार्यों से जिले में सड़क संपर्क के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रशासनिक और ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी। भूमिपूजन किए गए प्रमुख कार्यों में लगभग 25.82 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा, बरतुंगा, तुलसीडीह, अण्डा, चरौदा होते हुए सपिया नहरपार तक 22 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण तथा लगभग 15.30 करोड़ रुपए की लागत से छुहीपाली से कटेकोनी बड़े-कर्राखई-ठाकुरपाली होते हुए सेमराडीह तक 12 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण शामिल है। इसके साथ ही अण्डी-किरकार-जगमहन से सातबहिनिया तक सड़क, नगझर-नवापारा मार्ग और गुरेराडीह किरारी से केसला मुख्य मार्ग सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं का भूमिपूजन किया गया। शिक्षा और युवाओं के लिए शासकीय कन्या महाविद्यालय सक्ती के नवीन भवन, बेदराम शासकीय महाविद्यालय मालखरौदा में अतिरिक्त भवन तथा नवीन लाइवलीहुड संस्थान भवन का भूमिपूजन किया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए विभिन्न ग्रामों में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन तथा महिलाओं के लिए महतारी सदनों के निर्माण कार्यों की भी आधारशिला रखी गई।  लोकार्पित प्रमुख कार्यों में लगभग 14.35 करोड़ रुपए की लागत से मालखरौदा क्षेत्र में कलमी नहरपार से चिखली, छोटेकोट, बड़ेकोट, सिंघरा होते हुए बेल्हाडीह तक सड़क तथा लगभग 11.35 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा से कठरापाली, निमोही, सिंघीतराई, बेनीपाली होते हुए ओड़ेकेरा मुख्य मार्ग तक पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण शामिल है। बुंदेली-अड़भार मार्ग का भी लोकार्पण किया गया। इसके अलावा जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्थापित सोलर ड्यूल पंप, चन्द्रपुर एवं हसौद के नवीन तहसील कार्यालय भवन, डभरा, चन्द्रपुर एवं जैजैपुर के नवीन पुलिस थाना भवन, अड़भार पुलिस चौकी भवन, सुलौनी हाईस्कूल भवन, गोपालपुर प्रशिक्षण भवन तथा गोबरा में महतारी सदन सहित अन्य विकास कार्य जनता को समर्पित किए गए। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद मती कमलेश जांगड़े सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

योगी सरकार का बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत अभियान जारी: हर मोर्चे पर लगातार मुस्तैदी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए अभियान और तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखते हुए बचाव अभियान, भोजन वितरण, राहत शिविर, चिकित्सा सेवाओं और आवश्यक राहत सामग्री की व्यवस्था कर रहा है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक गुरुवार को 8 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि अब तक 21,350 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा चुका है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर अब तक 2,385 नाव एवं मोटरबोट का इस्तेमाल कर चुका है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया जा रहा है। इन शिविरों में 2,972 लोग रह रहे हैं। गुरुवार को 72 हजार से अधिक लंच पैकेट वितरित योगी सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। गुरुवार को ही 72,620 लंच पैकेट और 9,937 बाढ़ राहत किट वितरित किए गए। अब तक 9.31 लाख से अधिक लंच पैकेट और 1.49 लाख से अधिक खाद्यान्न पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों तक समय पर भोजन पहुंचाने में प्रशासन को मदद मिल रही है। बाढ़ के दौरान बीमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में 1165 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए अब तक 7.22 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 2.97 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। अब तक बाढ़ से कोई जनहानि नहीं हुई है और न ही पशुहानि दर्ज की गई है। पशुओं की भी चिंता, 6 हजार क्विंटल से अधिक भूसा वितरित योगी सरकार की राहत व्यवस्था में प्रभावित परिवारों के साथ उनके पशुधन का भी ध्यान रखा जा रहा है। उनके लिए अब तक करीब 6,956 क्विंटल भूसा वितरित किया जा चुका है। प्रभावित जिले अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कौशाम्बी, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

एथलेटिक्स में MP के खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन, इंडियन फाइनल सीरीज़ में बढ़ाया प्रदेश का मान

भोपाल  नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 10 सितंबर 2026 को आयोजित इंडियन एथलेटिक्स फाइनल सीरीज़ में मध्यप्रदेश के एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा और मजबूत खेल क्षमता का परिचय दिया। विभिन्न एथलेटिक्स स्पर्धाओं में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 2 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य सहित कुल 5 पदक अर्जित किए। खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। पोल वॉल्ट में देव मीना का स्वर्णिम प्रदर्शन पुरुष पोल वॉल्ट स्पर्धा में मध्यप्रदेश के स्टार एथलीट देव मीना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5.40 मीटर की ऊंचाई पार कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। देव ने प्रतियोगिता में तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास और बेहतरीन लय का प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। देव मीना का लगातार बेहतर होता प्रदर्शन मध्यप्रदेश की एथलेटिक्स प्रतिभाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उनके इस प्रदर्शन से प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर गौरवान्वित होने का अवसर मिला है। नितिका आक्रे ने पोल वॉल्ट में लहराया परचम महिला पोल वॉल्ट स्पर्धा में मध्यप्रदेश की प्रतिभाशाली एथलीट नितिका आक्रे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4.10 मीटर की ऊंचाई पार कर स्वर्ण पदक जीता। नितिका ने प्रतियोगिता में शानदार तकनीक और दमदार प्रदर्शन के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। समरदीप सिंह गिल ने शॉट पुट में जीता रजत पुरुष शॉट पुट स्पर्धा में मध्यप्रदेश के समरदीप सिंह गिल ने 19.59 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक अपने नाम किया। समरदीप ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने एशियन गेम्स के लिए चयनित एथलीट करमवीर सिंह से आगे रहते हुए यह उपलब्धि हासिल की। हाई जंप में आदित्य रघुवंशी का शानदार प्रदर्शन पुरुष हाई जंप स्पर्धा में मध्यप्रदेश के आदित्य रघुवंशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2.15 मीटर की ऊंचाई पार की और रजत पदक हासिल किया। आदित्य ने प्रतियोगिता के दौरान निरंतरता और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए पोडियम पर अपनी जगह बनाई। 1500 मीटर में सुनील दावर ने जीता कांस्य पुरुष 1500 मीटर दौड़ में मध्यप्रदेश के एथलीट सुनील दावर ने 3:43.68 के समय के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। सुनील ने प्रतिस्पर्धी दौड़ में शानदार गति और धैर्य का परिचय देते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। कुलदीप कुमार ने हासिल किया चौथा स्थान पुरुष पोल वॉल्ट में मध्यप्रदेश के एक अन्य एथलीट कुलदीप कुमार ने भी प्रभावी प्रदर्शन किया। कुलदीप ने 5.10 मीटर की ऊंचाई पार करते हुए प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया। खेल मंत्री  कैलाश सारंग ने दी खिलाड़ियों को बधाई सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने इंडियन एथलेटिक्स फाइनल सीरीज़ में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर हर्ष व्यक्त करते हुए सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मंत्री  सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की बढ़ती क्षमता और मेहनत का प्रमाण है। खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। मध्यप्रदेश की एथलेटिक्स प्रतिभाओं ने बढ़ाया प्रदेश का मान इंडियन एथलेटिक्स फाइनल सीरीज़ में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन प्रदेश में विकसित हो रहे मजबूत खेल वातावरण और खिलाड़ियों की निरंतर मेहनत का परिणाम है। एक ही प्रतियोगिता में विभिन्न स्पर्धाओं में खिलाड़ियों द्वारा पदक हासिल करना प्रदेश की एथलेटिक्स प्रतिभाओं की व्यापक क्षमता को दर्शाता है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश ने सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को शानदार उपलब्धि के लिए बधाई दी है। विभाग ने खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं दी हैं।