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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टले, 2027 के बाद वोटिंग कराने के पीछे क्या है रणनीति?

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की 'गांव की सरकार' लखनऊ के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है. यूपी के पंचायत चुनाव को 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था, लेकिन योगी सरकार के फैसले के बाद सियासी सस्पेंस गहरा गया है. कार्यकाल समाप्त होने पर प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने के सरकार के निर्णय लिए जाने के बाद कहा जाने लगा है कि 2027 के बाद ही सूबे में पंचायत चुनाव हो सकेंगे।  योगी सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय लिए जाने के साथ ही पंचायत चुनाव की तस्वीर लगभग साफ हो गई थी. आयोग की सिफारिशें आने, सीटों का आरक्षण तय किए जाने और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव संपन्न कराने की प्रक्रिया में ही नौ महीने से अधिक समय लगेंगे।  यूपी में जब आरक्षण की प्रक्रियाएं पूरी होंगी तो उस समय प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी रहेगी. यही वजह है कि योगी सरकार ने सोमवार को ग्राम प्रधान के कार्यकाल खत्म होने से पहले ही उन्हें ही प्रशासक नियुक्त कर दिया है. इसके चलते ही माना जा रहा है कि यूपी में पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकेंगे।  योगी सरकार ने प्रधानों को बनाया प्रशासक उत्तर प्रदेश में साल 2021 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए थे, जिसमें 58,189 ग्राम प्रधान चुने गए थे. इन प्रधानों का कार्यकाल मंगलवार यानी 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा था, लेकिन समय पर चुनाव नहीं होने के चलते योगी सरकार ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया.  इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को भी सरकार प्रशासक बनाने का निर्णय जल्द ही ले सकती है।   उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को ही छह महीने के लिए प्रशासक बनाने का निर्णय पहली बार हुआ है, इससे पहले जब भी समय पर पंचायत चुनाव नहीं हो पाते थे, तो सहायक विकास अधिकारी को ग्राम पंचायत का प्रशासक बनाया जाता रहा है, लेकिन पहली बार ग्राम प्रधान को नियुक्त किया गया है. हालांकि प्रधान अब प्रशासक बनकर भी कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे. विशेष स्थितियों में निर्णय के प्रस्ताव जिलाधिकारी उस पर स्वीकृति के बाद कर सकेंगे।  विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव ग्राम प्रधान के बाद बीडीसी, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष को भी योगी सरकार प्रशासक नियुक्त कर सकती है, क्योंकि इनके भी कार्यकाल खत्म हो रहे हैं. यूपी में मौजूदा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मई से जुलाई 2026 के बीच खत्म हो रहा है. नियम के मुताबिक चुनाव हो जाने चाहिए थे, लेकिन योगी कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' फॉर्मूले के तहत हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है, जो सूबे में आरक्षण का निर्धायण करेगी।  ओबीसी आयोग को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में रैपिड सर्वे कर पिछड़ों के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक आंकड़ों की जांच करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है. इस तरहह नवंबर 2026 तक तो ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आएगी. इसके बाद सीटों का नए सिरे से आरक्षण तय होगा और मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को दुरुस्त किया जाएगा. जब ये पूरी प्रक्रिया खत्म होगी, तब तक साल 2026 बीत चुका होगा और दहलीज पर खड़ा होगा 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव. ऐसे में विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव हो सकेंगे।  यूपी में पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे भावी प्रधानों, बीडीसी सदस्यों और जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदारों को बहुत बड़ा झटका लगा है. चर्चा थी कि साल 2026 के मध्य तक पंचायत चुनाव का बिगुल फूंक दिया जाएगा, लेकिन अब जो सियासी और कानूनी समीकरण बने हैं, उसने साफ कर दिया है कि यूपी में पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे।  योगी सरकार ने क्यों कदम पीछे खींच लिए? योगी सरकार अगर समय रहते हुए पंचायत चुनाव करा सकती थी. लेकिन ओबीसी आयोग के गठन में देरी किए जाने के चलते मामला फंस गया. कोर्ट के हस्ताक्षेत्र के बाद ही योगी सरकार ने ओबीसी आयोग का गठन किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव को टालने के पीछे सिर्फ कानूनी पेच नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सियासी रणनीति भी है।  मार्च 2027 में उत्तर प्रदेश में सत्ता का 'महामुकाबला' यानी विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल विधानसभा के फाइनल से ठीक पहले पंचायत चुनाव का भारी जोखिम नहीं उठाना चाहती है.  इसकी एक बड़ी वजह यह है कि पंचायत चुनाव के नतीजो को 2027 के चुनाव से जोड़ा जाता. साल 2021 के पंचायत चुनाव में बीजेपी को सपा से कड़ी टक्कर मिली थी और कई जिलों में निर्दलीयों का बोलबाला रहा था. योगी सरकार नहीं चाहती कि 2027 के मुख्य चुनाव से ऐन पहले किसी भी तरह का 'एंटी-इंकंबेंसी' या नकारात्मक संदेश जनता के बीच जाए।  पंचायत चुनाव किसी पार्टी के सिंबल पर कम और स्थानीय रसूख, परिवार और चेहरे पर ज्यादा लड़े जाते हैं. एक-एक सीट पर बीजेपी या सपा के कई-कई कार्यकर्ता ताल ठोक देते हैं., अगर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले टिकट न मिलने पर कार्यकर्ता बागी हो गए, तो इसका सीधा नुकसान 2027 के मुख्य चुनाव में उठाना पड़ सकता है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पहले ही पंचायत चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।  बीजेपी और सपा में शह-मात का खेल योगी सरकार के इस कदम पर अब यूपी की सियासत गरमा गई है. मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि बीजेपी को अपनी जमीन खिसकने का अहसास हो गया है, इसलिए वो ओबीसी आरक्षण और सर्वे के बहाने चुनाव को टाल रही है. सरकार के ही सहयोगी दलों (जैसे ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद) के बयानों से भी पहले ही यह संकेत मिल रहे थे कि बिना पूरी तैयारी के चुनाव कराना मुमकिन नहीं है।  उत्तर प्रदेश में अब 'गांव की सरकार' का फैसला, लखनऊ की 'बड़ी सरकार' बनने के बाद ही होगा. योगी सरकार ने बेहद चतुराई से कानूनी पेच का सहारा लेकर 2027 के सेमीफाइनल को टाल … Read more

MP Power Generating Company का महा-रिकॉर्ड, 600 दिन बिना रुके चलती रही अमरकंटक यूनिट

चचाई पॉवर प्लांट का महा-रिकॉर्ड लगातार 600 दिनों से चल रही है अमरकंटक की यह यूनिट मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी इतिहास में पहली बार अमरकंटक मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। अमरकंटक थर्मल पॉवर स्टेशन चचाई की 210 मेगावॉट क्षमता वाली यूनिट ने लगातार 600 दिनों तक बिना किसी बाधा के निरंतर बिजली उत्पादन करने का एक अभूतपूर्व महा-रिकॉर्ड स्थापित किया है। कंपनी के इतिहास में आज तक किसी भी जनरेटिंग यूनिट ने इतने लंबे समय तक बिना बंद हुए उत्पादन नहीं किया है। प्लांट की यह ऐतिहासिक यात्रा 1 अक्टूबर 2024 से शुरू हुई थी, जो आज भी सफलतापूर्वक निरंतर जारी है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्लांट के नेतृत्व और पूरी तकनीकी टीम को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने विश्वास जताया है कि अमरकंटक थर्मल पॉवर स्टेशन भविष्य में भी उत्कृष्टता की इस भावना को बनाए रखेगा और राज्य की प्रगति के लिए सफलता के कई नए कीर्तिमान गढ़ेगा। प्रदर्शन के बेमिसाल आंकड़े इस असाधारण संचालन अवधि के दौरान यूनिट ने तकनीकी और कार्यकुशलता के मोर्चे पर नए मानदंड स्थापित किए हैं। प्लांट उपलब्धता कारक 98.81% दर्ज किया गया, जो इसकी निरंतर उपलब्धता को दर्शाता है। प्लांट लोड फैक्टर 95.6% के बेहद उच्च स्तर पर रहा, जो बेहतरीन बिजली उत्पादन क्षमता का प्रमाण है। सहायक बिजली खपत मात्र 9.28% रही, जिससे बिजली की बचत और कार्यकुशलता प्रमाणित होती है। कुशल नेतृत्व और टीम के समर्पण का परिणाम बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी लंबी अवधि तक बिना किसी तकनीकी खराबी, ग्रिड ट्रिपिंग या फोर्स आउटेज के थर्मल प्लांट को चलाना एक असाधारण तकनीकी चुनौती होती है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय सूक्ष्म और सटीक योजना, मजबूत प्रिवेंटिव मेंटेनेंस (निवारक रखरखाव) प्रथाओं, लगातार की जा रही कड़ी डिजिटल निगरानी और चचाई प्लांट की ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस टीम के कुशल नेतृत्व और अटूट समर्पण को दिया है। मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को मिला सीधा लाभ इस उल्लेखनीय उपलब्धि से न केवल अमरकंटक पॉवर स्टेशन का नाम देश के अग्रणी बिजली घरों में शामिल हुआ है, बल्कि इससे मध्यप्रदेश के आम उपभोक्ताओं को भी बड़ी राहत मिली है। यूनिट के लगातार चालू रहने से राज्य को बिना किसी रुकावट के निरंतर और सस्ती बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी मजबूती मिली है। यह रिकॉर्ड प्रदर्शन अब मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग के अन्य बिजली उत्पादन केंद्रों के लिए भी एक अनुकरणीय मानदंड का काम करेगा।  

नर्मदापुरम की बड़ी उपलब्धि, प्रदेश का इकलौता जिला जहां होता है चारों प्रकार का रेशम उत्पादन

नर्मदापुरम बना प्रदेश का एकमात्र जिला जहां चारों प्रकार का होता है रेशम उत्पादन मालाखेड़ी, पचमढ़ी, मढ़ई के रेशम केंद्रों से हजारों किसानों को हो रहा लाभ भोपाल  प्रदेश में रेशम उद्योग को नई पहचान मिल रही है। नर्मदापुरम जिले ने रेशम उत्पादन में प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले में मलबरी, टसर, ईरी और मूंगा, चारों प्रकार का रेशम उत्पादित हो रहा है। नर्मदापुरम प्रदेश का पहला जिला है जहां चारों प्रकार के रेशम का उत्पादन होता है। जिले के रेशमी वस्त्र अब फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी बिक रहे हैं। मालाखेड़ी बना रेशम उत्पादन का मुख्य केंद्र जिले का मुख्य रेशम केंद्र मालाखेड़ी सिल्क कैंपस में संचालित है। यहाँ "फार्म से फेब्रिक" तक पूरी प्रक्रिया होती है।     वर्ष 2025 में मालाखेड़ी केंद्र में 742 किलोग्राम मलवरी रेशम धागा उत्पादन हुआ।     32 महिलाओं को 5.78 लाख रुपये की मजदूरी दी गई, जबकि 415 किलोग्राम धागे की ट्विस्टिंग में 10 महिलाओं को 2.50 लाख रुपये मिले।     मालाखेड़ी में मध्यप्रदेश की पहली ककून मंडी संचालित है। यहाँ से 13,781 किलोग्राम ककून पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के व्यापारियों को भेजे गए, जिससे किसानों को 51.99 लाख रुपये की आय हुई।     मालाखेड़ी में तैयार प्राकृत ब्रांड की साड़ियां और परिधान शोरूम में भी बिक रहे हैं। पचमढ़ी और मढ़ई में विस्तार     पचमढ़ी रेशम केंद्र में 5 एकड़ क्षेत्र में मूंगा रेशम का पौधरोपण कर 500 नग ककून उत्पादन किया जा रहा है।     मढ़ई रेशम उत्पादन केंद्र को सिल्क टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ पर्यटक रेशम पालन की प्रक्रिया देखने आते हैं। जिले में 28 केंद्र सक्रिय नर्मदापुरम में कुल 16 मलबरी रेशम केंद्र और 12 टसर रेशम केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इनसे हजारों किसान और स्थानीय महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। 2025 में जिले में मलबरी रेशम ककून उत्पादन 15,426.5 किलोग्राम रहा, जिससे 255 हितग्राहियों को लाभ मिला। टसर ककून उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 2.68 लाख किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। रेशम से दवाइयाँ भी बन रहीं मालाखेड़ी रेशम विकास केंद्र में अब रेशम के धागे से दवाइयाँ और मेडिकल उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। फाई ब्रोहित कंपनी और सरदार वल्लभ भाई पटेल पॉलिटेक्निक कॉलेज के साथ अनुबंध कर यहाँ पाउडर, क्रीम, सेरी बैंडेज और सिजेरियन बैंडेज बनाए जा रहे हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर रेशम केंद्रों के फिर से शुरू होने से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। जिससे लखपति दीदियों की संख्या में भी वृद्धि होगी। नर्मदापुरम की यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती दे रही है और जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।  

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, भोपाल में ड्रोन कैमरों से हो रही लाइव मॉनिटरिंग

भोपाल   मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अगर आप अपनी गाड़ी किसी व्यस्त सड़क किनारे पार्क करने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। भोपाल पुलिस अब आसमान से आप पर नजर रख रही है। राज्य में अपनी तरह की इस पहली पहल में, ट्रैफिक पुलिस ने नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़े करने वालों को पकड़ने और उनका चालान काटने के लिए ड्रोन-माउंटेड कैमरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस हाई-टेक मुहिम की शुरुआत सोमवार से औपचारिक रूप से कर दी गई है। सबसे ज्यादा फोकस एमपी नगर और वीआईपी रोड जैसे भारी ट्रैफिक वाले और संकरे रास्तों पर किया जा रहा है। इन इलाकों में भी बढ़ाई गई चौकसी ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, शहर की करीब एक-तिहाई सड़कें केवल अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों के कारण जाम रहती हैं। इसी को देखते हुए ड्रोन सर्विलांस का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब एमपी नगर और वीआईपी रोड के अलावा बागसेवनिया, मिसरोद और नर्मदापुरम रोड के कुछ हिस्सों पर भी ड्रोन से निगरानी की जा रही है। पहले इन ड्रोन का इस्तेमाल केवल दुर्घटना स्थलों के दस्तावेज़ीकरण के लिए किया जाता था, लेकिन अब इनका उपयोग सीधे नियम तोड़ने वालों की पहचान करने और उनके वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए ई-चालान जेनरेट करने के लिए हो रहा है। कंट्रोल रूम से हो रही है लाइव मॉनिटरिंग अतिरिक्त आयुक्त मोनिका शुक्ला ने बताया कि औपचारिक चालान की कार्रवाई शुरू करने से पहले एक महीने तक इसका कड़ा ट्रायल किया गया था। फिलहाल विभाग के पास दो हाई-टेक ड्रोन हैं, जिनमें से एक का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बड़ी सभाओं के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए भी किया जा रहा है। वहीं पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि इन ड्रोन से मिलने वाली लाइव फीड सीधे कंट्रोल रूम को ट्रांसफर होती है। इससे न सिर्फ नो-पार्किंग वालों पर कार्रवाई होगी, बल्कि कहीं भी जाम लगने पर तुरंत पुलिस बल को मौके पर भेजा जा सकेगा। साथ ही, ये ड्रोन क्षतिग्रस्त डिवाइडर जैसी सड़क इंजीनियरिंग की कमियों को पहचानने में भी मदद करेंगे।

आबकारी नीति के सख्त पालन के निर्देश, उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कलेक्टर्स को दिए आदेश

कलेक्टर्स आबकारी नीति का कड़ाई से कराएं पालन: उप मुख्यमंत्री देवड़ा नियमों का उल्लंघन करने वाली मदिरा दुकानों पर होगी सख्त कार्रवाई भोपाल  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने जिलों के कलेक्टर्स को आबकारी व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शासन ने वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। उप मुख्यमंत्री देवड़ा निर्देश दिए हैं कि आबकारी विभाग अब अवैध रूप से संचालित शॉप बार, समय सीमा के उल्लंघन और ओवर रेटिंग जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य व्यापी विशेष अभियान चलाया जाए। नियमों की अनदेखी करने वाले मदिरा ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।  उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश में राजपत्र में प्रकाशित नियमों के अनुसार आबकारी नीति का कड़ाई से पालन कराया जाएं। उन्होंने आबकारी विभाग की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय ने सभी जिला अधिकारियों को बिंदुवार दिशा-निर्देश जारी कर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार के इस कदम से अवैध रूप से मदिरा का विक्रय और उपभोग कराने वाले तत्वों पर शिकंजा कसेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि नीतिगत प्रावधानों में प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह 'ऑफ श्रेणी' का घोषित किया गया है, जिसके तहत दुकान परिसर या उसके आसपास मदिरा सेवन की सुविधा उपलब्ध कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने नियमों के उल्लंघन करने की शिकायतों की सघन जांच के लिए विशेष दलों का गठन कर औचक निरीक्षण के बाद अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को बंद करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि इसके साथ ही, मदिरा दुकानों के निर्धारित समय से पहले खुलने और बंद होने के तय वक्त के बाद भी देर रात तक मदिरा की बिक्री किए जाने के मामलों को गंभीरता से लिया गया है। राजपत्र में निर्धारित समय सीमा का कड़ाई से पालन कराने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें गश्त करेंगी। वहीं, उपभोक्ताओं से तय मूल्य से अधिक राशि वसूलने यानी ओवर रेटिंग की शिकायतों पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक दुकान पर विक्रय दरों का प्रदर्शन अनिवार्य किया गया है। उन्होंने निर्देशित किया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मदिरा की वास्तविक दरों के सत्यापन के लिये दुकानों पर क्यूआर कोड चस्पा किए जाएं। कोई भी ठेकेदार यदि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर मदिरा बेचता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ राजपत्र के प्रावधानों के तहत भारी जुर्माना और लाइसेंस निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई की जाएं। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा है कि प्रदेश के पवित्र घोषित किए गए नगरों और क्षेत्रों में मदिरा की अवैध बिक्री पर भी पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गये हैं। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में पूर्व से ही मदिरा दुकानों को पूरी तरह बंद रखने के आदेश लागू हैं। अब वहां किसी भी प्रकार के शराब के अवैध परिवहन या बिक्री को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।  

5 से 21 जून तक BJP का मेगा जनसंपर्क अभियान, प्रबुद्ध और व्यापारियों के सम्मेलन भी होंगे

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 26 मई को 12 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस मौके पर मध्य प्रदेश भाजपा '12 साल विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के' अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष जनसंपर्क होगा, जिसमें प्रत्येक जिले में समाज के कम से कम 500 प्रबुद्ध व्यक्तियों (ओपिनियन मेकर्स) से सीधा संपर्क साधा जाएगा। सांसद अपनी लोकसभा की हर विधानसभा में और विधायक अपने क्षेत्र के हर मंडल में एक-एक दिन का समय बिताएंगे। इस दौरान वे मोदी सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच रखेंगे। पदाधिकारियों को भी करनी होगी मुलाकात विधायकों, सांसदों से लेकर राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारियों को भी ओपिनियन मेकर्स से मुलाकात करनी होगी। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत प्रत्येक मंडल में सघन पौधरोपण किया जाएगा। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। सांसद और विधायक अपने क्षेत्रों में 'प्रगति पथ यात्रा' और 'विकसित भारत संकल्प सम्मेलन' के जरिए जनता से जुड़ेंगे। स्वच्छता अभियान चलाकर प्लास्टिक कचरे की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर होगा समापन 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ अभियान का समापन होगा। इस दौरान पार्टी द्वारा प्रत्येक मंडल में स्थानीय योग अभ्यास समूहों के सहयोग से योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। जहां संभव होगा, वहां 1 सप्ताह का योग प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का समन्वय नंदिता पाठक, राघवेंद्र शर्मा और मानसिंह यादव करेंगे। उपलब्धियों की प्रदर्शनी एवं सभागार बैठकें 15 जून से 18 जून के बीच प्रत्येक जिले में मोदी सरकार की उपलब्धियों पर आधारित 3 दिवसीय प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान ऑन-द-स्पॉट चित्रकला प्रतियोगिता, वॉक्स पॉप वीडियो रिकॉर्डिंग और लाभार्थियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम भी होंगे। साथ ही जिलों में प्रबुद्धजन और व्यापारी वर्ग की व्यापक उपस्थिति वाली सभागार बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्राकृतिक खेती कार्यशालाएं 19 जून से 20 जून तक किसानों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक जिले में दो स्थानों पर प्राकृतिक खेती कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यशालाओं में विशेषज्ञों और अनुभवी व्यक्तियों द्वारा प्रत्यक्ष प्रदर्शन और व्याख्यान दिए जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी अर्चना सिंह और जयपाल सिंह चावड़ा की टोली को सौंपी गई है।

Heatwave से परेशान लोगों के लिए खुशखबरी, इस दिन से मौसम देगा राहत; IMD का अपडेट

 लखनऊ यूपी इस वक्त आग उगलती गर्मी की चपेट में है. सुबह होते ही सूरज ऐसा तप रहा है मानो आसमान से अंगारे बरस रहे हों. दोपहर की सड़कें सुनसान पड़ने लगी हैं, बाजारों में भीड़ कम हो गई है और लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं. नौतपा की शुरुआत के साथ ही प्रदेश में गर्मी ने अपने सबसे खतरनाक तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. लेकिन इसी तपिश के बीच अब लोगों के लिए राहत की खबर भी सामने आई है. मौसम विभाग ने आखिर वह तारीख बता दी है, जब इस भीषण गर्मी से लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।  मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक फिलहाल अगले तीन दिनों तक गर्मी से राहत मिलने के आसार बेहद कम हैं. हालांकि 29 मई के बाद मौसम करवट ले सकता है और तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है. यही वजह है कि भीषण गर्मी से परेशान लोग अब 29 मई का इंतजार करने लगे हैं।  इस सोमवार से नौतपा की शुरुआत हुई है. भारतीय परंपरा में नौतपा को साल का सबसे गर्म दौर माना जाता है. मान्यता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तभी नौ दिनों तक चलने वाला यह दौर शुरू होता है. इस बार नौतपा ने शुरुआत से ही अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. प्रदेश के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है. बांदा पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के सबसे गर्म इलाकों में शामिल रहा. यहां तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. सड़कें दोपहर में तवे की तरह तपती दिखाई दीं. इसके अलावा झांसी में 46 डिग्री, उरई में 45.8 डिग्री, आगरा में 45.5 डिग्री, प्रयागराज में 45.4 डिग्री और हमीरपुर में 45.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया. राजधानी लखनऊ भी गर्मी से बेहाल नजर आया. यहां अधिकतम तापमान 42.3 डिग्री तक पहुंच गया।  दोपहर की सड़कें हुईं सुनसान भीषण गर्मी का असर अब आम जिंदगी पर साफ दिखने लगा है. दोपहर 12 बजे के बाद शहरों की सड़कें खाली नजर आने लगी हैं. लोग जरूरी काम न होने पर घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों और सड़क किनारे काम करने वाले लोगों को हो रही है. गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों को झुलसा रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी के चलते डिहाइड्रेशन, चक्कर आने और हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।  अस्पताल हाई अलर्ट पर गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्यभर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. सरकार की तरफ से एडवाइजरी जारी की गई है कि लोग दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बिना जरूरी काम के बाहर न निकलें. हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. मौसमी फल, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस लेने की सलाह भी दी गई है।  लखनऊ में सिग्नल पर लगाई गई हरी शेड राजधानी लखनऊ में गर्मी से राहत देने के लिए प्रशासन ने अलग-अलग प्रयोग शुरू कर दिए हैं. हजरतगंज इलाके में ट्रैफिक सिग्नलों के ऊपर हरे रंग की शेड लगाई गई है ताकि धूप में खड़े लोगों को कुछ राहत मिल सके. वहीं लखनऊ के ही 1090 चौराहे पर दिनभर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है. कई जगह फॉगिंग जैसी व्यवस्था भी की गई है ताकि सड़कों का तापमान कम किया जा सके. गोंडा में बिजली विभाग के कर्मचारी ट्रांसफार्मरों को बचाने के लिए लगातार मशक्कत कर रहे हैं. एक ट्रांसफार्मर के पास बड़ा पंखा लगाया गया है और पाइप के जरिए लगातार पानी डाला जा रहा है ताकि वह ओवरहीट होकर खराब न हो जाए. बिजली विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि हर आधे घंटे में कूलिंग करनी पड़ रही है. लगातार बढ़ती बिजली खपत ने मशीनों की परीक्षा भी बढ़ा दी है।  पूर्वी यूपी में सबसे ज्यादा खतरा मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए गंभीर हीटवेव की चेतावनी जारी की है. दिन के समय लू चलने और रात में भी गर्म हवाएं परेशान करने की संभावना जताई गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कई दिनों तक रात में तापमान ऊंचा रहने से शरीर को रिकवरी का समय नहीं मिल पाता, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. अयोध्या में नौतपा का धार्मिक असर भी दिखाई दे रहा है. मंदिरों में भगवान को गर्मी से राहत देने के लिए विशेष पूजा और शीतल भोग लगाए जा रहे हैं. अयोध्या संत समिति के महामंत्री पवन दास शास्त्री ने बताया कि सनातन परंपरा में नौतपा का विशेष महत्व माना जाता है. उन्होंने कहा कि इस दौरान दान-पुण्य और पूजा-पाठ को विशेष फलदायी माना जाता है. वाराणसी में गर्मी से राहत पाने के लिए बच्चे गंगा नदी में तैराकी सीख रहे हैं. दरभंगा घाट पर आयोजित स्विमिंग कैंप में बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं. अभिभावकों का कहना है कि इससे बच्चों को गर्मी से राहत भी मिल रही है और वे जरूरी लाइफ स्किल भी सीख रहे हैं। 

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर, यूपी सरकार ने शुरू की नई व्यवस्था

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने या घर-जमीन का दाखिल खारिज कराने के लिए भाग-दौड़ नहीं करना होगा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सर्टिफिकेट बनवाने में संकट खत्म करने के लिए प्रदेश के सभी नगर निगम में वन डे गवर्नेंस सेंटर चालू करने का फैसला किया है। प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने मंगलवार को इस पहल का ऐलान किया। सरकार इन वन डे गवर्नेंस सेंटर पर आम लोगों के कई जरूरी काम एक ही दिन में निबटाने की योजना बना रही है, जिसमें प्रमाण पत्र जैसी सेवाओं को रखा जाएगा। कैबिनेट मंत्री एके शर्मा ने लखनऊ में एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार नगर निकायों की सेवाओं को तेज, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर में भी इस व्यवस्था को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। लखनऊ में सेंटर बन गया है। यह कार्यक्रम लखनऊ महापौर के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में नगर विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं, जन सुविधाओं और शहरी विकास योजनाओं पर चर्चा की गई। यूपी में लागू होगा गुजरात मॉडल एके शर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत देना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद नगर निगमों में नागरिक सेवाओं का निस्तारण पहले से अधिक तेजी से हो सकेगा। मंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात में वन डे गर्वनेंस सिस्टम शुरू किया था। हम लोगों ने उस पर काम किया था। वही मॉडल यहां लाना चाहते हैं। अभी लखनऊ के साथ प्रयागराज, वाराणसी में इस पर काम हो रहा है। हम चाहते हैं कि वही मॉडल पूरे यूपी में लागू हो जाए। किसी भी नागरिक को दो दिन, चार दिन, एक हफ्ते या महीने तक दौड़ना न पड़े। कोई आएगा तो उसे बैठाएंगे और आधे घंटे में प्रमाण पत्र दे देंगे। किसी का मामला बहुत पेचीदा होगा तो उसको कह देंगे कि वह लंच करके दो घंटे बाद आए। उसके आने पर हम उसी दिन उसका प्रमाण पत्र दे देंगे। सीनियर सिटीजन के लिए खास सुविधा शर्मा ने कहा कि जो लोग ऑनलाइन सेवा का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, उन्हें इससे काफी सुविधा हो जाएगी। यह व्यवस्था लखनऊ नगर निगम ने खड़ी की है। आधुनिक सोच के साथ व्यवस्था शुरू हुई है। लखनऊ के सेंटर में सीनियर सिटिजन के बैठने की शानदार व्यवस्था है। चाय समेत हर तरह की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आज स्मार्ट सिटी बना रहे हैं तो वन डे गवर्ननेंस सिस्टम भी जरूरी है। मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा स्मार्ट सिटी के साथ ही वैश्विक सिटी बनाना है।

’राज्यपाल डेका ने की पीएम जनमन योजना की समीक्षा’

रायपुर ’राज्यपाल  डेका ने की पीएम जनमन योजना की समीक्षा’ राज्यपाल  रमेन डेका ने आज लोक भवन में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन योजना) की समीक्षा बैठक ली। बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन स्तर मे सुधार लाने योजनाओं का लाभ उन तक प्राथमिकता से पहुंचाना सुनिश्चित करें।                बैठक में पीएम जनमन योजना के तहत 11 महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की गई। राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों की प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में प्राथमिकता तय कर तेजी से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन स्तर, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।  ’राज्यपाल  डेका ने की पीएम जनमन योजना की समीक्षा’           राज्यपाल ने जनजातीय क्षेत्रों की सड़कों की खराब स्थिति पर भी नाराजगी जताई और अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ सड़क निर्माण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्र का भ्रमण करें और यह जानें कि पीएम जनमन योजना के तहत उनके विभाग अंतर्गत सबसे बेहतर कार्य कहां हो रहे हैं।                   बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन अभियान चलाने तथा लोगों को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से जनजातीय समुदायों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर उनके स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है।                  राज्यपाल ने बताया कि जनजातीय बच्चों के नेत्र परीक्षण और मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए एम्स के साथ एमओयू किया गया है। उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाई जानी चाहिए। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में शौचालय निर्माण के लिए राइस मिल एसोसिएशन, जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेने और डीएमएफ निधि के उपयोग का सुझाव दिया। साथ ही बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित करने और पेयजल समस्या के समाधान हेतु नवाचार अपनाने के निर्देश दिए।                राज्यपाल ने बड़े किसानों के खेतों में डबरी निर्माण, फिश फार्मिंग और प्रधानमंत्री आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे जल संरक्षण और वाटर रिचार्ज को बढ़ावा मिलेगा। बैठक में वन क्षेत्रों के स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग को सहकारिता के माध्यम से करने, आंगनबाड़ी भवन निर्माण में तेजी लाने तथा मोबाइल टावर स्थापित कर इंटरनेट सुविधा बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने निजी कंपनियों के सहयोग से दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा विस्तार के निर्देश दिए। उन्होंने क्रेडा द्वारा सौर ऊर्जा के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातीय बाहुल्य गांवों को रोशन करने क लिए किए गए कार्याे की सराहना की।              राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों क्षेत्रों के उन बच्चों का भी सर्वे कराने के निर्देश दिए जो स्कूल और विशेष रूप से उच्च शिक्षा संस्थानों में अध्ययनरत हैं। उन्होंने कहा कि इन विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति, आवश्यकताओं और सुविधाओं का आकलन कर उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाए।           राज्यपाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों में उन कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाए जिनकी वर्तमान समय में अधिक मांग है। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कौशल विकास प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को पीएम जनमन योजना के तहत प्राथमिकता सूची तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों की जीवनशैली और आवश्यकताओं को समझने के लिए तीन माह के भीतर विस्तृत सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सभी विभागों और संबंधित संस्थाओं का सामूहिक योगदान आवश्यक है। जहां भी कमियां हैं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। राज्यपाल ने बैठक में की गई चर्चा पर कार्रवाई की रिपोर्ट अगली समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।         बैठक के दौरान राज्यपाल को छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर आधारित वर्ष 2024-25 का प्रतिवेदन सौंपा गया। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन  मनोज कुमार पिंगुआ, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर प्रसन्ना, प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास  सोनमणि बोरा, सहित अन्य विभागों के सचिव उपस्थित थे।

वन विभाग में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने आईटी ट्रेनिंग हॉल का लोकार्पण

भोपाल  प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन ने भोपाल स्थित वन भवन में अत्याधुनिक आईटी ट्रेनिंग हॉल का लोकार्पण किया। यह पहल वन विभाग में नवाचार और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  सेन ने कहा कि बदलते समय के साथ शासन-प्रशासन में तकनीक आधारित कार्यप्रणाली को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। आईटी ट्रेनिंग हॉल के माध्यम से विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को डिजिटल तकनीकों, ई-गवर्नेंस प्रणाली और आधुनिक सॉफ्टवेयर आधारित कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इससे विभागीय कार्यों में दक्षता, पारदर्शिता और त्वरित निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।  सेन ने कहा कि वन विभाग द्वारा तकनीक आधारित नवाचारों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। डिजिटल कार्य संस्कृति को सशक्त बनाने के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण हॉल तैयार किया गया है। इससे विभागीय कार्यों के बेहतर प्रबंधन, डेटा विश्लेषण तथा सूचना आदान-प्रदान में सुविधा होगी। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।