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छत्तीसगढ़ में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि

रायपुर  विश्व ऊदबिलाव दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। गरियाबंद जिले के उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव (ओटर) की प्रमाणिक उपस्थिति दर्ज की गई है। यह सफलता प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी)  अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन तथा वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त शोध प्रयासों से संभव हुई है।         गरियाबंद वनमंडल के डीएफओ  वरुण जैन के सहयोग से लगाए गए कैमरा ट्रैप में ऊदबिलाव के स्पष्ट चित्र प्राप्त हुए हैं। इससे यह प्रमाणित हुआ है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है और यह दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बना हुआ है। स्वस्थ जल स्रोतों के जैव संकेतक हैं ऊदबिलाव ऊदबिलाव स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोतों में निवास करने वाला संवेदनशील वन्यजीव है। यह नदियों, तालाबों और अन्य मीठे जल स्रोतों की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण जैव संकेतक माना जाता है। इसकी उपस्थिति किसी क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाती है।           विश्वभर में ऊदबिलाव की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से भारत में तीन यूरेशियन ऊदबिलाव, स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव और एशियाई स्मॉल-क्लॉड ऊदबिलाव प्रजातियां पाई जाती हैं। विशेष बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है। विश्व ऊदबिलाव दिवस का उद्देश्य            हर वर्ष 27 मई को विश्व ऊदबिलाव दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ऊदबिलाव प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और उनके सामने मौजूद खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करना है। प्राकृतिक आवास का नुकसान, जल स्रोतों का प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार एवं तस्करी और मानव-वन्यजीव संघर्ष आदि ऊदबिलाव के लिए प्रमुख खतरे हैं। छत्तीसगढ़ में संरक्षण के लिए लगातार हो रहा शोध           छत्तीसगढ़ में ऊदबिलाव संरक्षण की दिशा में वर्ष 2021 से निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसके बाद राज्य शासन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा को ऊदबिलाव पर शोध और संरक्षण अध्ययन का दायित्व सौंपा गया। छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के नेतृत्व में कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग में कैमरा ट्रैप एवं मैदानी अध्ययन के माध्यम से ऊदबिलाव की उपस्थिति, व्यवहार, आवास और प्रजनन संबंधी जानकारी संकलित की जा रही है। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की शोधकर्ता मती निधि सिंह के नेतृत्व में तैयार अध्ययन रिपोर्ट वन विभाग को सौंपी गई है। अध्ययन से राज्य के विभिन्न जिलों में ऊदबिलाव की उपस्थिति के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। जनजागरूकता से बढ़ी संरक्षण की उम्मीद            वन विभाग और विज्ञान सभा द्वारा स्कूलों, कॉलेजों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव यह है कि अब स्थानीय मछुआरे और ग्रामीण ऊदबिलाव के संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील हुए हैं तथा कई क्षेत्रों से इनके रेस्क्यू की सूचना स्वयं लोगों द्वारा दी जा रही है। वन विभाग की अपील: जल स्रोतों को रखें स्वच्छ           वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने आमजन से अपील की है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखें और प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक, कांच तथा अन्य अपशिष्ट न फैलाएं। जंगलों में आग लगने की स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना दें। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊदबिलाव का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता से ही यह संभव है। स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित जल स्रोतों के संरक्षण से ही इस दुर्लभ वन्यजीव का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

सरकारी डिजिटल सेवाओं को अधिक सरल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने पर हुआ मंथन

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम द्वारा नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने के उद्देश्य से सोमवार को एक दिवसीय “यूएक्स4जी एडवांस्ड लेवल वर्कशॉप” का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य सरकार के प्रमुख डिजिटल पोर्टलों जैसे आरसीएमएस, संपदा और एमपी ई-सेवा पर नागरिकों को बेहतर डिजिटल अनुभव उपलब्ध कराना था। कार्यशाला में सरकारी डिजिटल सेवाओं को अधिक सरल, आधुनिक और सहज बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से पोर्टलों की उपयोगकर्ता पहुंच बढ़ाने और नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।कार्यशाला का संचालन नेशनल ई-गवर्नेंस डिविजन के सहयोग से किया गया। इस दौरान  अजीत विसेन, सु सबा और  आकर्षण चौहान ने यूआई/यूएक्स ट्रांसफॉर्मेशन और सरकारी डिजिटल सेवाओं में नवाचार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की। कार्यशाला में व्यावहारिक सत्रों और सामूहिक चर्चाओं के माध्यम से सरकारी पोर्टलों को अधिक नागरिक हितैषी बनाने के लिए सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें विभिन्न विभागों के 25 अधिकारियों एवं डिजाइनरों ने सहभागिता की। 

कोयला उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और आधारभूत संरचना विस्तार पर हुई सकारात्मक चर्चा

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन स्थित उनके कार्यालय में केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री  सतीश चंद्र दुबे ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा, खनिज क्षेत्र के विस्तार तथा आधारभूत संरचना विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत और सकारात्मक चर्चा हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ में कोयला उत्पादन बढ़ाने, खनन क्षेत्रों में बुनियादी अधोसंरचना को सुदृढ़ करने, रेल एवं लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी के विस्तार तथा औद्योगिक गतिविधियों को और गति देने के विषय पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन, कोयला गैसीकरण, सौर ऊर्जा विकास तथा खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और केंद्र सरकार के सहयोग से ऊर्जा, खनन एवं औद्योगिक विकास के क्षेत्र में राज्य नई संभावनाओं की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेश अनुकूल वातावरण तैयार करते हुए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह,  छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के प्रबंध संचालक  रजत बंसल, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक  हरीश दुहन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पानी की समस्या से नाराज ग्रामीणों का बड़ा फैसला, बोले- पहले पानी, फिर वोट

नरसिंहपुर इन दिनों चांवरपाठा विकासखंड में पेयजल समस्या अत्यंत गंभीर रूप धारण कर चुकी है। बेतहाशा गिरते जमीनी जल स्तर के कारण क्षेत्र के हैंडपंपों ने पानी की जगह हवा उगलना शुरू कर दिया है। जहां कहीं थोड़ा-बहुत पानी मिल भी रहा है, वह लाल-पीला और दूषित है, जिससे ग्रामीण गंभीर बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं। इस भीषण जल संकट से विकासखंड का ग्राम मानकपुर बिजोरा बुरी तरह प्रभावित है। अनेक बार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से सूचित करने के बावजूद जब समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। ग्राम सभा में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता से त्रस्त होकर ग्रामीणों ने गांव में एक विशाल ग्राम सभा का आयोजन किया। इस बैठक में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। वर्षों से चली आ रही इस भीषण पेयजल किल्लत पर गंभीर चर्चा के बाद, ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने साफ कह दिया है कि जब तक ग्राम बिजोरा में मां नर्मदा का जल पहुंचाकर समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया जाता, तब तक ग्रामवासी ग्राम पंचायत, विधानसभा और लोकसभा सहित आगामी सभी चुनावों का पुरजोर बहिष्कार करेंगे और किसी भी मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे। नेताओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध चुनाव बहिष्कार के साथ ही ग्रामीणों ने यह भी फैसला लिया है कि जब तक पानी की समस्या दूर नहीं होती, तब तक गांव का कोई भी व्यक्ति किसी भी राजनीतिक दल के नेता को अपने निजी या सार्वजनिक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं करेगा। नेताओं के गांव में प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे आश्वासनों के झांसे में नहीं आने वाले और अपने हक के लिए यह निर्णायक लड़ाई मिलकर लड़ेंगे। गर्मी में भूमि पड़ी रहती है खाली, खेतों और घरों में मचा हाहाकार पानी की कमी के कारण किसान ठंड के सीजन में खेतों में आधा-आधा नोजल चलाकर किसी तरह एक-दो एकड़ में हल्की सिंचाई करते हैं और अपना गुजारा चलाते हैं। गर्मी आते ही हजारों एकड़ भूमि पानी के अभाव में खाली पड़ी रहती है। मार्च के बाद से ही हैंडपंप जवाब देने लगते हैं। गांव में स्थिति इतनी बदतर है कि लोगों को अपने स्वयं के ट्रैक्टरों से सुदूर खेतों में बने कुओं/स्रोतों से टैंकर भरकर पानी लाना पड़ रहा है। मर्रावन से लेकर अमथनु तक लगभग 45 ग्राम हर साल गर्मी में पानी की इस विकट समस्या से जूझते आ रहे हैं। फिर पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है।   ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की जुबानी  हमें वर्षों से केवल झूठे आश्वासन मिले हैं, लेकिन गांव की मूल समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। अब ग्रामवासी चुप नहीं बैठेंगे। हम अपने मौलिक अधिकार (पानी) के लिए एकजुट होकर यह निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं और जब तक पानी नहीं आता, तब तक कोई चुनाव नहीं होगा। – वृन्दावन पटेल, सेवानिवृत्त शिक्षक      पिछले 25 वर्षों से हर एक जनप्रतिनिधि के सामने पानी का मुद्दा उठाया गया, लेकिन नतीजा सिफर रहा। वन विभाग ने जो तालाब बनवाया था, वह 15 साल पहले टूट गया। पंचायत ने जल भराव के लिए गहरीकरण कराया, तो बाद में तार फेंसिंग (बाउंड्री) करके वहां प्रवेश वर्जित कर दिया गया। – सतीश पटेल, मीडिया प्रभारी, किसान संघ      पानी की कमी के कारण किसान ठंड के सीजन में खेतों में आधा-आधा नोजल चलाकर किसी तरह एक-दो एकड़ में हल्की सिंचाई करते हैं और अपना गुजारा चलाते हैं। गर्मी आते ही हजारों एकड़ भूमि पानी के अभाव में खाली पड़ी रहती है। मार्च के बाद से ही हैंडपंप जवाब देने लगते हैं। – यशवंत पटेल, वरिष्ठ पदाधिकारी, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ गांव में स्थिति इतनी बदतर है कि लोगों को अपने स्वयं के ट्रैक्टरों से सुदूर खेतों में बने कुओं/स्रोतों से टैंकर भरकर पानी लाना पड़ रहा है। मर्रावन से लेकर अमथनु तक लगभग 45 ग्राम हर साल गर्मी में पानी की इस विकट समस्या से जूझते आ रहे हैं। फिर पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। – द्वारका प्रसाद झारिया, सरपंच ग्राम पंचायत मानकपुर बिजोरा  

’प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की आत्मीय यात्रा पर आधारित है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक’

रायपुर  ’‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय’ मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए। यह पुस्तक प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के साथ  चौहान के सार्वजनिक जीवन, आत्मीय संबंधों और कार्य अनुभवों पर आधारित है, जिसमें नेतृत्व, जनसेवा और व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रेरक एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है।  कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  शिवराज सिंह चौहान को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जनप्रतिनिधियों के अनुभवों, कार्यशैली और जनसेवा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनसेवा, सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। इस पृष्ठभूमि में सार्वजनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रेरित करेगी तथा नेतृत्व और समाजसेवा के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्रदान करेगी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीगण, देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

काम में बेवजह देरी करने वाली एजेंसियों पर होगी सख्त कार्रवाई

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में ई-प्रगति पोर्टल में दर्ज राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाई जाए और आ रही बाधाओं को तत्काल दूर कर नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में बेवजह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ई-प्रगति पोर्टल की 5 प्रमुख परियोजनाएं          समीक्षा बैठक में विशेष रूप से पोर्टल पर दर्ज राज्य की 5 अति-महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। वर्किंग वुमेन हॉस्टल, उसलापुर (बिलासपुर), वर्किंग वुमेन हॉस्टल, कोनी (बिलासपुर), 4G स्टेशन DVN मोबाइल टॉवर स्थापना (बिलासपुर), मोबाइल टॉवर हेतु विद्युत अधोसंरचना परियोजना (बिलासपुर) और सिकारसर कोडार रिसीवर लिंक कैनाल (गरियाबंद जिला) साप्ताहिक मॉनिटरिंग और कड़े प्रशासनिक निर्देश           मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट ई-पोर्टल पर फोटो जियोटैग (Photo Geo-tag) के साथ अनिवार्य रूप से अपलोड करें, ताकि कार्यों की वास्तविक स्थिति की पारदर्शी मॉनिटरिंग हो सके। उन्होंने जिलों में मोबाइल टॉवर स्थापना के मार्ग में आ रही भूमि आवंटन या अन्य तकनीकी दिक्कतों को संबंधित कलेक्टरों से समन्वय कर शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर ई-प्रगति पोर्टल की परियोजनाओं की दैनिक समीक्षा करने और उनमें तेजी लाने को कहा है।          इस समीक्षा बैठक में मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, जल संसाधन विभाग तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से राज्य के 21 जिलों के कलेक्टर शामिल हुए, जिनमें बीजापुर, कांकेर, कोरबा, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, नारायणपुर, रायगढ़, सुकमा, बलौदाबाजार-भाटापारा, बलरामपुर, धमतरी, गरियाबंद, जशपुर, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, दंतेवाड़ा एवं कोण्डागांव शामिल हैं।

योगी सरकार की होमस्टे नीति से यूपी पर्यटन को नई उड़ान, गांव-शहर में बढ़ रहा आकर्षण

योगी सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट, होमस्टे नीति से यूपी में बदल रहा पर्यटन का स्वरूप किफायती होमस्टे और फार्मस्टे के लिए आए 3 हजार से ज्यादा आवेदन, 900 रजिस्टर्ड बड़े शहरों के साथ बुंदेलखंड, झांसी, बांदा जैसे जिले भी बन रहे पर्यटन का हब पर्यटकों को सस्ते में रुकने की व्यवस्था के साथ, स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम के कायाकल्प, मथुरा-वृंदावन समेत अन्य जिलों में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड आमद से राज्य में सस्ते दरों पर ठहरने की अच्छी व्यवस्था की मांग बढ़ी है। इसे योगी सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति से साकार किया जा रहा है। इसके जरिए पर्यटकों को महंगे होटलों की जगह कम दाम पर ठहरने की जगह का विकल्प मिल रहा है, साथ ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी खुल रहे हैं। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति लागू होने के बाद से यूपी में होमस्टे और फार्मस्टे तेजी से बढ़ रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेशभर से 3000 से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं, जबकि करीब 900 होमस्टे और फार्मस्टे रजिस्टर्ड हो चुके हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत से आवेदनों की संख्या में भी तेजी आई है, जो यह दिखाता है कि लोग अब पर्यटन से जुड़े कारोबार को लेकर ज्यादा भरोसा और रुचि दिखा रहे हैं। बुंदेलखंड समेत तमाम जिलों में होमस्टे मॉडल का विस्तार पर्यटन विभाग के मुताबिक वाराणसी, मथुरा, आगरा, अयोध्या, प्रयागराज और लखनऊ में होमस्टे और फार्मस्टे शहरी श्रेणी में आगे चल रहे हैं। वहीं अधिकारियों के मुताबिक ग्रामीण होमस्टे मॉडल में सबसे ज्यादा तेजी अब बुंदेलखंड क्षेत्र में देखने को मिल रही है। बांदा, हमीरपुर, महोबा और झांसी जैसे जिले नए पर्यटन केंद्र बनकर उभर रहे हैं।  इसके अलावा बाराबंकी, बहराइच, पीलीभीत और लखीमपुर भी तेजी से ग्रामीण पर्यटन स्थलों के रूप में पहचान बना रहे हैं। मथुरा-वृंदावन और आगरा के ग्रामीण इलाकों में भी होमस्टे और फार्मस्टे को लेकर यात्रियों और स्थानीय लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। पर्यटक और श्रद्धालु ठहरने की किफायती व्यवस्था मिलने के बाद ग्रामीण परिवेश की तरफ भी रुख कर रहे हैं। रोजगार मिला और पलायन रोकने का प्रयास अधिकारियों का कहना है कि यह नीति छोटे जिलों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे कारोबार को भी बढ़ावा दे रही है। कई परिवार अब अपने खाली कमरों को आय के साधन में बदल रहे हैं, जिससे उन्हें काम के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ रहा। यह मॉडल रिटायर्ड लोगों, बुजुर्ग दंपतियों, महिलाओं द्वारा संचालित परिवारों और खाली घरों वाले परिवारों के लिए अतिरिक्त कमाई का अच्छा जरिया बनता जा रहा है। पर्यटन का लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि पर्यटन की असली ताकत तब दिखती है, जब उसका लाभ सीधे गांवों और स्थानीय परिवारों तक पहुंचे। होमस्टे और फार्मस्टे मॉडल न केवल पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की वास्तविक संस्कृति, स्थानीय खान-पान, परंपराओं और ग्रामीण जीवन से जोड़ रहे हैं, बल्कि खाली घरों को आय के साधन में बदलकर गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार कर रहे हैं। इससे युवाओं में अपने ही जिले में पर्यटन आधारित कारोबार को लेकर रुचि बढ़ रही है। हमारी कोशिश है कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े शहरों और होटलों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे। कैसे कराएं पंजीकरण बीएंडबी एवं होम स्टे नीति के अंतर्गत इकाइयों का पंजीकरण एक सरल और पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया है। नई और पहले से संचालित दोनों प्रकार की इकाइयां निर्धारित पोर्टल पर जाकर आसानी से पंजीकरण करा सकती हैं। इससे पर्यटन विभाग के रिकॉर्ड में आपकी इकाई शामिल हो जाती है और नीति के सभी लाभ प्राप्त होते हैं। पंजीकरण के लिए आधिकारिक पोर्टल https://up-tourismportal.in/application/bnb/login है। नीति के अंतर्गत पात्र इकाइयां: शहरी होमस्टे ऐसे आवासीय भवन, जिनमें भूस्वामी स्वयं निवास करता हो एवं उसके पास अपने प्रयोग के बाद अतिरिक्त कमरे उपलब्ध हो, जिन्हें यह पर्यटकों को आवास के लिए उपलब्ध कराना चाहे। ऐसे कमरों की संख्या अधिकतम 6 हो सकती है और कुल 12 बेड की व्यवस्था किसी एक आवासीय इकाई में हो सकती है। बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) के लिए नियम पर्यटन विभाग द्वारा बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) इकाइयों से जुड़ी व्यवस्था को भी स्पष्ट किया गया है। ऐसे आवासीय भवन जिनमें भूस्वामी स्वयं निवास न करता हो एवं उसके पास 01 से 06 तक कमरे उपलब्ध हो, जिन्हें वह पर्यटकों को आवास के लिए उपलब्ध कराना चाहे। ऐसे कमरों की संख्या अधिकतम 06 (कुल 12 बेड) हो सकती है। बीएंडबी इकाई में एक केयरटेकर रखना अनिवार्य होगा, जो इकाई के रखरखाव एवं संचालन का कार्य करेगा। ग्रामीण होमस्टे के लिए नियम ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे आवासीय भवन, जिनमें भूस्वामी स्वयं निवास करता हो एवं उसके पास अपने प्रयोग के बाद कुछ कक्ष उपलब्ध हों, जिन्हें वह पर्यटकों को आवास के लिए उपलब्ध कराना चाहे, ऐसे कक्षों की संख्या 06 (कुल 12 बेड) तक हो सकती है। पर्यटन विभाग के जरिए प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार भी बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे के जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई तरह के फायदे भी मिल रहे है। इससे घर बैठे लोगों को आय का एक अतिरिक्त जरिया मिल रहा है। इस नीति के तहत बिजली बिल, जल कर, गृह कर और सीवर कर का भुगतान आवासीय दरों पर करना होता है। प्रधानमंत्री मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत छत पर सौर पैनल लगाने के लिए सौर ऊर्जा सब्सिडी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही पर्यटन विभाग के मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान द्वारा आठ सहायक कर्मचारियों को निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से इकाई का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

योगी सरकार के विजन को गति देंगे टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट, यूपी के युवाओं को मिलेंगे वैश्विक अवसर कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य आईटीआई संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलेगा टाटा टेक्नोलॉजीज, डेलॉयट तैयार करेगा भविष्य की स्किल रणनीति पीपीपी मॉडल के माध्यम से कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए योगी सरकार लगातार कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को नए आयाम दे रही है। इसी क्रम में सोमवार को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग कपिल देव अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में वैश्विक परामर्शदाता कंपनी डेलॉयट और तकनीकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी टाटा टेक्नोलॉजी ने प्रदेश के युवाओं के लिए तैयार किए जा रहे भावी रोडमैप और योजनाओं का विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। आधुनिक तकनीक से लैस होंगे यूपी के आईटीआई बैठक में टाटा टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के आधुनिकीकरण और उन्हें ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (सीओई) के रूप में विकसित किए जाने की प्रगति साझा की। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि आधुनिक मशीनों, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 आधारित तकनीकों के जरिए युवाओं को उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार प्राप्त कर सकें। डेलॉयट तैयार करेगा भविष्य की स्किल रणनीति वहीं डेलॉयट के विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा की रणनीतिक भूमिका पर प्रस्तुतीकरण दिया। डेलॉयट ने भविष्य के रोजगार रुझानों (फ्यूचर जॉब ट्रेंड्स), उद्योगों की मांग और निवेश आधारित रोजगार सृजन मॉडल का विश्लेषण करते हुए सुझाव दिया कि स्किल डेवलपमेंट योजनाओं को सीधे औद्योगिक निवेश और नई तकनीकों से जोड़ा जाए, जिससे युवाओं को अधिक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। योगी सरकार का फोकस- हुनरमंद और आत्मनिर्भर युवा बैठक के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए वैश्विक संस्थाओं की विशेषज्ञता का पूरा लाभ उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट जैसी संस्थाओं का सहयोग प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजनाओं और सुझावों को तेजी से धरातल पर लागू किया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश का हर युवा आधुनिक कौशल से लैस होकर आत्मनिर्भर बन सके और राज्य की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभा सके। पीपीपी मॉडल से कौशल विकास को मिलेगी नई दिशा बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं बल्कि इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल बनाना है, जिससे उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी स्किल कैपिटल के रूप में उभर सके।

महिला वित्त एवं विकास निगम की 80वीं संचालक मंडल की बैठक में हुए बड़े फैसले

भोपाल  महिला सशक्तिकरण की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए महिला वित्त एवं विकास निगम को नई कार्य संस्कृति और परिणामोन्मुखी भूमिका में लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। महिला-बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया की अध्यक्षता में मंत्रालय में मध्यप्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम की 80वीं संचालक मंडल समिति की बैठक हुई। बैठक में जिसमें निगम की कार्यप्रणाली, लंबित प्रस्तावों, महिला रोजगार, कौशल विकास और संस्थागत सुधारों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में मंत्री सुभूरिया ने स्पष्ट कहा कि महिला-बाल विकास विभाग का मूल उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि महिलाओं का वास्तविक आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण है। उन्होंने निर्देश दिए कि महिला वित्त एवं विकास निगम को प्रदेश की महिला वर्क-फोर्स तैयार करने वाली प्रमुख संस्था के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए निगम एक व्यापक ऑनलाइन पोर्टल तैयार करेगा, जिसमें महिलाओं की कौशल दक्षता का परीक्षण कर उन्हें कुशल, अर्द्ध-कुशल और अकुशल श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। मंत्री सुभूरिया ने कहा कि अकुशल एवं अर्द्ध-कुशल महिलाओं को व्यवस्थित प्रशिक्षण देकर विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थानों की मांग के अनुरूप रोजगार से जोड़ा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि निगम महिला श्रमिकों, कारीगरों और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित महिलाओं का “रिसोर्स पूल” विकसित करे, जिससे प्रदेश के विभागों और संस्थाओं को आवश्यकता अनुसार प्रशिक्षित महिला वर्क-फोर्स उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में यह भी तय किया गया कि महिला वित्त एवं विकास निगम अब केवल वित्तीय गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कौशल विकास, बाज़ार संपर्क, तकनीकी प्रशिक्षण और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। मंत्री सुभूरिया ने अन्य राज्यों में महिला वित्त विकास निगमों की कार्यपद्धति का अध्ययन कर बेहतर मॉडल अपनाने के निर्देश दिए। बैठक में निगम के सुदृढ़ीकरण को लेकर पूर्व में प्रस्तावित “चैनल पार्टनर” व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। मंत्री सुभूरिया ने स्पष्ट किया कि निगम को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाते हुए केवल गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण संस्थानों और विशेषज्ञ एजेंसियों को ही जोड़ा जाए। कौशल विकास और फाइनेंशियल लिटरेसी कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए हाई-क्वालिटी संस्थानों के एम्पैनलमेंट पर जोर दिया गया। बैठक में IPE Global Limited के साथ हुए महत्वपूर्ण एमओयू की भी समीक्षा की गई। “देवी अहिल्याबाई नारी सशक्तिकरण मिशन” के तहत यह पहल प्रदेश की युवा महिलाओं को वेतन आधारित रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 1.6 लाख महिलाओं को रोजगार से जोड़ना, 50 हजार महिलाओं को बाज़ार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देना तथा 500 से अधिक कंपनियों में जेंडर डाइवर्सिटी प्रथाओं को बढ़ावा देना है। मंत्री सुभूरिया ने निगम के प्रशासनिक ढांचे में अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए भी सख्त निर्देश दिए। संचालक मंडल ने निर्णय लिया कि निगम के ऐसे कर्मचारी जो अन्यत्र अटैच हैं, उन्हें तत्काल नोटिस जारी किए जाएं तथा एक माह के भीतर मूल पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण नहीं करने की स्थिति में उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की जाए। बैठक में महिला बाल विकास, सचिव श्रीमती जी.वी. रश्मि, आयुक्त महिला बाल विकास श्रीमती निधि निवेदिता सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।  

ब्रह्मपुरी में प्रशासन का सख्त एक्शन: पीले पंजे से हटाए गए अवैध कब्जे, सिंहस्थ को लेकर बढ़ी सख्ती

खंडवा आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर ओंकारेश्वर के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार सुबह नगर परिषद, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने शासकीय जमीन पर बने बड़े अतिक्रमणों को बुलडोजर से हटाया। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग, आईकार्ड व्यवस्था तथा अन्य विकास कार्यों हेतु जमीन खाली कराई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कई स्थायी निर्माणों और बाउंड्रीवाल को हटाया गया। सिंहस्थ की तैयारियां और कलेक्टर के निर्देश कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए ओंकारेश्वर में विकास कार्यों की तैयारी तेज कर दी गई है। ब्रह्मपुरी क्षेत्र में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाकर वहां पार्किंग और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सके। उन्होंने कहा कि पूर्व में हटाए गए अतिक्रमण वाले क्षेत्रों को समतल किया जा रहा है और वास्तविक विस्थापितों के पुनर्वास की कार्रवाई भी शीघ्र की जाएगी। धर्मशालाओं और गौशाला पर चला बुलडोजर सीएमओ मोनिका पारधी ने बताया कि मंगलवार को पागलदास बाबा गौशाला और दिनेश दयाराम लोवंशी धर्मशाला की बाउंड्रीवाल को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इसके अलावा लोवंशी धर्मशाला, राजपूत धर्मशाला और सोनी धर्मशाला को भी नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। आगामी दिनों में भी जारी रहेगा अभियान पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर वार्ड क्रमांक-7 ब्रह्मपुरी क्षेत्र में अवैध पक्के और कच्चे निर्माण तथा दुकानों को हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी। हटाए गए स्थानों का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधा और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंगलवार को कुछ अतिक्रमण हटाए गए हैं और आने वाले दिनों में भी अभियान लगातार जारी रहेगा।