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शिकार के लिए खेत के आसपास लगाए गए फंदे में फंस कर हुई थी तेंदुए की मौत, शिकार के लिए बिछाया था फंदा, 24 घंटे में दो शिकारी गिरफ्तार, इस तरह खुला राज…

कटनी  जिले के रीठी वन परिक्षेत्र में तार के फंदे में फंसकर तेंदुए की मौत के मामले में वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के अंदर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दरअसल, देवरी-पटो‍हा तालाब के जंगल में एक किसान के खेत के पास करीब 3 से 4 वर्ष उम्र के नर तेंदुए का शव मिला था। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। आशंका जताई गई कि जंगली सूअर और हिरण के शिकार के लिए खेत के आसपास तार का फंदा बिछाया गया था, जिसमें तेंदुआ फंस गया और उसकी दर्दनाक मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन परिक्षेत्र अधिकारी महेश पटेल ने उच्च अधिकारियों के निर्देशन में टीम गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू की। कड़ी मशक्कत और पूछताछ के बाद टीम ने 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया है। वहीं, इस शिकार की घटना में और कितने लोग शामिल हैं, इसकी जांच वन विभाग द्वारा अभी जारी है। त्वरित कार्रवाई के लिए वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने रीठी वन अधिकारी और पूरी टीम की सराहना की है।

बिहार का स्वाद पहुंचेगा दुनिया तक, BRICS की वेलकम किट में शामिल हुए सत्तू और मखाना

पटना भारत इस बार अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है जिसमें दुनिया के कई धुरंधर देश शामिल हो रहे हैं। दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 12 और 13 सितम्बर को दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन किया गया है। यह सम्मेलन बिहार के लिए इसलिए बेहद खास है क्योंकि इसमें हमारे राज्य का सत्तू और सुपर फूड मखाना को जगह मिली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 25 अन्य देश शामिल हो रहे हैं। सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट डालकर सीएम सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री को बिहार की ओर से धन्यवाद दिया है। सीएम ने कहा है कि दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के वेलकम कीट में शामिल सत्तू और मखाना हमारे स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं। इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने लोकल टू ग्लोबल के संकल्प को साकार किया। यह नए बिहार की नई पहचान है। बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने है। वेलकम कीट में क्या-क्या है ब्रिक्स सम्मेलन में 25 देशों के प्रतिनिधियों के अलावे दुनिया भर के पत्रकार और मेहमान आ रहे हैं जिन्हें वेलकम कीट में भारत की खासियत वाला उपहार दिया जा रहा है। इस कीट के बैग में बिहार के सत्तू और मखाना मौजूद है जिसके लिए विदेश मंत्रालय ने बिहार सरकार के साथ समन्वय बनाकर खास तौर पर तैयार करवाया है। इसमें ओडिशा की कॉफी और गुजरात का स्टॉल शामिल है। बैक में एक मेटल वाला बोतल कॉफी मग और छोटा सा बैग भी है। बैग में ब्रिक्स सम्मेलन की डायरी, पेन और स्मृति चिन्ह डाला गया है। सम्मेलन में इन देशों के मेहमान 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के अलावा 25 देश हिस्सा ले रहे हैं। इसमें ब्रिक्स के 11 सदस्य देश, 10 ब्रिक्स सहयोगी देश और पांच देश विभिन्न क्षेत्रीय समूहों के अध्यक्ष होने के नाते इसमें शामिल हैं। इन प्रमुख नेताओं में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अलसीसी, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद शामिल हैं। यूएई की तरफ से अबूधाबी के क्राउन प्रिंस बिन जायद अल नाहयान हिस्सा लेंगे। बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यात्रा की संभावना से इनकार किया है। सम्मेलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा के जबरदस्त प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने खतरों से निपटने के लिए आसमान से जमीन तक सुरक्षा ग्रिड तैयार की है। आसपास के दफ्तरों को बंद कर दिया गया है तो पूरे शहर के स्कूलों में छुट्टियां कर दी गई हैं।

पंजाब में सियासी खींचतान के बीच दिल्ली पहुंचे भारत भूषण आशु, सचिन पायलट से की मुलाकात

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) के महासचिव सचिन पायलट से नई दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारत भूषण आशू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सचिन पायलट से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठनात्मक मामलों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनाए जाने के बाद पिछले कुछ दिनों में प्रदेश कांग्रेस के कई प्रमुख नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं। पंजाब कांग्रेस में समन्वय बढ़ाने की कोशिश पायलट से मुलाकात करने वालों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रमुख हैं। इन मुलाकातों को पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। भारत भूषण ने पायलट के साथ मुलाकात के बाद कहा कि दोनों के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन से जुड़े विषयों और प्रदेश में कांग्रेस को और मजबूत करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। उन्होंने पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद संगठन को मजबूत करने के प्रयासों में सहयोग का संकेत दिया। चुनाव से पहले सभी धड़ों को एक करना चुनौती कांग्रेस हाईकमान ने पांच सितंबर को भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया था। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर लंबे समय से मतभेद सामने आते रहे हैं। पायलट के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न धड़ों को साथ लेकर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी आगे बढ़ाने की है। पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करने और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। ऐसे में पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ पायलट की लगातार हो रही मुलाकातों को खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रेलवे की कैटरिंग नीति में बड़ा बदलाव, स्टॉल आवंटन में सिफारिश की गुंजाइश होगी कम

अंबाला  रेलवे बोर्ड ने नौ वर्ष पुरानी कैटरिंग नीति में बदलाव किया है। स्टेशन पर खाने-पीने का सामान या दूध का स्टाल लगाने वालों को ई-आक्शन से स्टाल लेने होंगे। इसमें किसी की सिफारिश या पुराने तरीके से आवंटन की गुंजाइश कम होगी। रेलवे बोर्ड ने कैटरिंग नीति-2017 में संशोधन करते हुए सभी श्रेणियों के स्टेशनों पर मिल्क स्टाल तथा ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों पर जनरल माइनर यूनिट्स (जीएमयू) के आवंटन के लिए नई व्यवस्था लागू की है। सबसे बड़ा असर मिल्क स्टाल पर पड़ेगा। जोनल रेलवे को मिल्क स्टाल के लिए अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार करनी होंगी। बोर्ड की ओर से 28 मई 2018 को जारी मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा। चार श्रेणी के स्टेशनों पर जीएमयू भी ऑनलाइन ए-वन, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों की जनरल माइनर यूनिट्स के लिए भी ई-आक्शन जरूरी होगा। इन इकाइयों के लिए पात्रता मानदंड भी नए परिशिष्ट में निर्धारित हैं। इन इकाइयों के अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार होंगी। इसके लिए 10 जनवरी 2018 को जारी जीएमयू के मानक बोली दस्तावेज को आधार बनाया जाएगा। यह है जमानत राशि के नियम ई-आक्शन में बोली दाताओं के लिए जमानत राशि के नियम भी स्पष्ट कर दिए हैं। वार्षिक बोली मूल्य का 10 % ईएमडी के रूप में जमा करना होगा। सफल बोलीदाता को कुल लाइसेंस शुल्क का 10 % सुरक्षा जमा के तौर पर देना होगा। ईएमडी को सुरक्षा जमा में समायोजित किया जाएगा। बची राशि ई-आक्शन के दो सप्ताह में ऑनलाइन जमा करनी होगी। यात्रियों के लिए क्यों अहम है बदलाव बदलाव का सीधा संबंध यात्रियों से भी है। रेलवे की मंशा है कि ठेके की प्रक्रिया पारदर्शी हो। इससे छोटे कारोबारियों को भी अवसर मिलेगा। क्रिस करेगा व्यवस्था में बदलाव रेलवे बोर्ड ने सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) को ई-आक्शन माड्यूल में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था को ऑनलाइन बोली प्रणाली में भी शामिल किया जाएगा।  

छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम, सुकमा से धमतरी तक दो दिन बारिश; रायपुर में बादलों का डेरा

रायपुर. प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई. गुरुवार को रायपुर में करीब 3 बजे के बाद अचानक तेज हवा के साथ तेज बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली. मौसमी सब-डिविजनल वर्षा सामान्य रही और इसमें 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश के वितरण और तीव्रता में वृद्धि होने की संभावना है. इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में रहा. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? रायपुर में 11 सितंबर को आकाश सामान्यतः मेघमय रहने के साथ कुछ बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. शहर में अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है.  इन इलाकों में हुई बारिश  प्रदेश में गुरुवार को पखांजूर में 5 सेमी, सोनहत और मालखरौदा में 4-4 सेमी, बिहारपुर और सूरजपुर में 3-3 सेमी बारिश हुई. रघुनाथनगर, चांदो, बास्तानार, प्रेमनगर, बलरामपुर, बकावंड और दौरा कोचली में 2-2 सेमी वर्षा दर्ज की गई. रायपुर में भी 1 सेमी बारिश हुई. कई जिलों मे अलर्ट जारी मौसम विभाग ने आज सुबह कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है. सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरीऔर गरियाबंद में आकाशीय बिजली गिरने और वर्षा की संभावना जताई है.

2024 की हार से BJP ने लिया सबक, यूपी के 18,900 कमजोर बूथों पर ‘हाइपर-लोकल’ रणनीति

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए भाजपा अब पूरी तरह से एक्टिव हो गई है. सीएम योगी आदित्यनाथ अलग-अलग इलाकों में जनसभाएं कर भले ही सियासी माहौल बनाने में जुटे हों, लेकिन भाजपा एक रिकवरी प्लान पर भी काम कर रही है. इसके तहत 2024 में जिन विधानसभा सीटों पर हार मिली है, उनके एक-एक बूथ की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।  भाजपा सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए 'हाइपर-लोकल' मोड में उतर गई है. मकसद बिल्कुल साफ है, हर बूथ, हर नंबर और हर वोट पर ध्यान देना. पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली हार को सिर्फ़ एक बड़ी राजनीतिक हार के तौर पर नहीं देख रही है. उसने डेटा की गहराई से जांच की है और उन खास पोलिंग बूथों की पहचान की है, जहां 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के बीच उसका सपोर्ट बेस कम हुआ।  भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने 2022 में जिन 18,900 बूथों पर जीत हासिल की थी, 2024 के चुनाव में उन्हीं बूथों पर वोट कम मिले हैं. यह संख्या अब पार्टी की संगठनात्मक रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है. इसीलिए भाजपा ने पहले इन बूथों का हिसाब-किताब करने, कमजोर जगहों की पहचान कर उन्हें मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए रिकवरी प्लान बनाया है।  भाजपा के सामने ग्रामीण बूथों की चुनौती भाजपा की बूथ स्तरीय कवायद से मिली सबसे अहम जानकारी भौगोलिक है. भाजपा ने जिन 18,900 बूथों को चिह्नित किया है, उनमें से लगभग 80 फीसदी बूथ ग्रामीण इलाकों के हैं. खासकर छोटे गांवों और बिखरी हुई बस्तियों वाले बूथ हैं। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जैसे शहरी केंद्र अपेक्षाकृत ज़्यादा मज़बूत रहे. इससे साफ है कि भाजपा का आधार ग्रामीण इलाकों में घट रहा है, जिसे दुरुस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं।  भाजपा के सामने अब सिर्फ़ पूरे राज्य में राजनीतिक संदेश पहुंचाने की चुनौती नहीं है; चुनौती यह पहचानना है कि कौन-से ग्रामीण समुदाय दूर हो गए, वे क्यों दूर हुए और उन्हें वापस कैसे लाया जाए।  वॉर रूम से जमीनी लड़ाई तक का प्लान यूपी में भाजपा की रणनीति डेटा एनालिसिस से आगे बढ़कर संगठन को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने की ओर बढ़ रही है.  भाजपा के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े 16 से 22 सितंबर के बीच फिर से यूपी का दौरा करेंगे. उनकी समीक्षा में जिन मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा होगी, उनमें वे बूथ शामिल हैं जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और उन्हें वापस जीतने की रणनीति बनाना शामिल है।  भाजपा की यह प्रक्रिया असल में एक पॉलिटिकल फीडबैक लूप है: बूथ की पहचान करना, सामाजिक बदलाव को समझना, स्थानीय मुद्दों की पहचान करना, और उसके बाद संगठन को फिर से खड़ा करके दोबारा से बूथ को वापस जीतना. भाजपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव का नतीजा पूरे राज्य के औसत आंकड़ों से तय नहीं होता; यह हज़ारों अलग-अलग बूथों पर जीत-हार से तय होता है, जहां वोटों के अंतर को मापा जा सकता है, वोटरों की पहचान की जा सकती है और संगठन की कमियों को सुधारा जा सकता है।  भाजपा का यूपी में रिकवरी प्लान भाजपा के यूपी में नए गणित का आधार बूथ प्रबंधन है. यूपी में 18,900 का आंकड़ा सिर्फ़ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह 2024 में मिली हार को माइक्रो-लेवल पर चुनावी रिकवरी प्लान में बदलने की भाजपा की रणनीति है. अवध और पूर्वांचल सबसे ज़्यादा जोखिम वाले इलाके हैं. ग्रामीण बूथ मुख्य चुनावी मैदान हैं, तथा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को एकजुट करना एक अहम चिंता है।  बसपा के कमज़ोर होने से विपक्ष के वोट ट्रांसफर का पैटर्न बदल गया है. इसके अलावा बुंदेलखंड जैसे इलाकों में स्थानीय मुद्दे अभी भी अहम हैं. भाजपा अब इसी गणित को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है ताकि 2027 में दोबारा वापसी कर सके।  अवध और पूर्वांचल में भाजपा की चुनौती डेटा से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में हर जगह नुकसान एक जैसा नहीं था. अवध क्षेत्र में भाजपा ने 2022 में इलाके की 154 विधानसभा सीटों में से 101 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में वह इनमें से सिर्फ़ 51 सीटों पर आगे थी।  यह कुल मिलाकर 50 सीटों का नुकसान है, 2022 के नतीजों के मुकाबले 49.5 फीसदी की गिरावट. अमेठी, फैज़ाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर जिलों में यह नुकसान साफ़ तौर पर देखा गया, जिससे अवध भाजपा के चुनावी नक्शे में सबसे ज़्यादा दबाव वाले इलाकों में से एक बन गया है। अवध की तरह ही पूर्वांचल इलाके में भी भाजपा को झटका लगा था. 2022 में भाजपा ने पूर्वांचल इलाके की 102 विधानसभा सीटों में से 53 सीटें जीती थीं. इसके दो साल बाद, लोकसभा चुनाव के दौरान वह सिर्फ़ 36 सीटों पर आगे थी। यह कुल मिलाकर 17 सीटों या 32.1 फीसदी की गिरावट रही।  बूथ-लेवल पर यह गिरावट खास तौर पर जौनपुर, गाज़ीपुर, मछलीशहर, चंदौली और ग्रामीण प्रयागराज में देखी गई। भाजपा जिन राजनीतिक वजहों पर गौर कर रही है, उनमें गैर-यादव ओबीसी वोटरों के एक हिस्से का समाजवादी पार्टी की तरफ़ जाना शामिल है, जहां अखिलेश यादव का 'पीडीए' फार्मूला प्रभावी रहा।  पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में नफा-नुकसान पश्चिमी इलाके में भी गिरावट देखी गई, हालांकि अवध और पूर्वांचल के मुकाबले नुकसान कम था. पश्चिमी यूपी में भाजपा ने 2022 में 76 विधानसभा सीटों में से 57 सीटें जीती थीं; 2024 में वह 43 सीटों पर आगे रही. इस तरह कुल 14 सीटों या 24.6 फीसदी का नुकसान हुआ।   रुहेलखंड में 2022 के चुनाव में भाजपा ने 52 सीटों में से 30 सीटें जीती थीं. 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी बढ़त घटकर 22 सीटों पर आ गई, यानी कुल आठ सीटों या 26.7 फीसदी की गिरावट हुई। पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड को मिलाकर कुल 128 विधानसभा सीटें हैं; भाजपा ने 2022 के चुनाव में इनमें से 87 सीटें जीती थीं और 2024 के लोकसभा चुनाव में 65 सीटों पर बढ़त बनाए रखीच।  वहीं, बुंदेलखंड की तस्वीर कुछ अलग हैय 2022 में भाजपा ने 19 में से 14 विधानसभा सीटें जीती थीं, … Read more

रांची-जमशेदपुर NH-33 की रहस्यमयी तैमारा घाटी, नेटवर्क गायब और घड़ी हो जाती है उलटी!

रांची रांची और जमशेदपुर को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे 33 (NH 33 Jharkhand) हमेशा से अपने खूबसूरत नजारों और घुमावदार रास्तों के लिए जाना जाता है। इसी हाईवे पर राजधानी रांची से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी स्थित है 'तैमारा घाटी(Mystery Of Taimara Ghati)'। चारों तरफ ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों और हरियाली से घिरी यह घाटी(Jharkhand Tourism) दिखने में जितनी मनोरम है, इससे जुड़े रहस्य और दावे उतने ही हैरान करने वाले हैं। समय और तारीख बदलने का रहस्य तैमारा घाटी की सबसे अजीब बात यहां मोबाइल और घड़ियों में होने वाले अचानक बदलावों को माना जाता है। स्थानीय लोगों और वहां से गुजरने वाले यात्रियों का दावा है कि घाटी के लगभग एक किलोमीटर के दायरे में प्रवेश करते ही मोबाइल का नेटवर्क गायब हो जाता है। इतना ही नहीं, फोन में दिख रही तारीख और समय अपने आप बदल जाते हैं। कई बार मोबाइल की घड़ी वर्तमान समय से पीछे या आगे चली जाती है, और कैलेंडर में साल बदल जाता है। क्षेत्र के एक स्थानीय स्कूल के शिक्षकों के अनुसार, समय में होने वाले इस उतार-चढ़ाव के कारण डिजिटल बायोमेट्रिक मशीन पर हाजिरी लगाना नामुमकिन हो जाता है, क्योंकि मशीन में तारीखें गलत दर्ज होने लगती हैं। इस तकनीकी गड़बड़ी की वजह से स्कूल में रजिस्टर पर ही हाजिरी लगानी पड़ती है। घाटी को पार करते ही मोबाइल का समय अपने आप ठीक हो जाता है। हादसे और सफेद साड़ी वाली स्त्री का दावा तैमारा घाटी को कई लोग दुर्घटनाओं के क्षेत्र के रूप में भी जानते हैं। यहां हुए सड़क हादसों को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि सड़क पर अचानक सफेद लिबास में एक आकृति दिखाई देती है, जिसे बचाने के प्रयास में तेज रफ्तार गाड़ियां अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हो जाती हैं। इन दुर्घटनाओं को रोकने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से हाईवे के किनारे एक मंदिर का निर्माण भी कराया गया है। क्या है वैज्ञानिक तर्क और अफवाह? इस रहस्यमयी घटना के पीछे अलग-अलग राय हैं। कर्क रेखा का प्रभाव: कुछ लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र से कर्क रेखा (Tropic of Cancer) गुजरती है। उनका तर्क है कि इसके कारण यहां चुंबकीय या भौगोलिक प्रभाव उत्पन्न होता है, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और नेटवर्क को प्रभावित करता है। मात्र एक अफवाह: दूसरी तरफ, कई स्थानीय निवासी और यात्री इन दावों को पूरी तरह नकारते हैं। उनका मानना है कि समय का बदलना और रहस्यमयी घटनाओं की बातें केवल सुनी-सुनाई बातें और अफवाहें हैं। हालांकि, आज यह फोरलेन सड़क बेहद खूबसूरत दिखाई देती है और बारिश के मौसम में पर्यटक यहां रुककर प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। लेकिन इसके बावजूद, तैमारा घाटी से जुड़ी यह पहेली आज भी लोगों के बीच उत्सुकता और चर्चा का विषय बनी हुई है।  

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: मेडिकल PG छात्रों का मानदेय बढ़ा, 1 जनवरी से नई दरें लागू

पटना बिहार के सरकारी चिकित्सा एवं दंत महाविद्यालयों में पीजी पाठ्यक्रम में अध्ययनरत छात्रों के मानदेय में बिहार सरकार द्वारा महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी संकल्प के अनुसार एक जनवरी, 2026 से पीजी छात्रों के संशोधित मानदेय की नई दरें लागू होंगी। नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रथम वर्ष के पीजी छात्रों को ₹92,800, द्वितीय वर्ष के छात्रों को ₹1,02,000 तथा तृतीय वर्ष के छात्रों को ₹1,12,200 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। 82 हजार की जगह म‍िलेगा 92,800 रुपये इससे पूर्व पीजी प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्रों को क्रमशः ₹82,000, ₹90,200 और ₹99,220 मानदेय प्रतिमाह दिया जा रहा था। मानदेय में यह वृद्धि राज्य के सरकारी चिकित्सा एवं दंत महाविद्यालयों में पीजी पाठ्यक्रम में अध्ययनरत छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पीजी छात्रों को उनके प्रशिक्षण एवं सेवाकाल के दौरान बेहतर आर्थिक सहयोग मिलेगा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन को प्रोत्साहन मिलेगा राज्य सरकार का यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अध्ययनरत पीजी छात्रों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ बिहार में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए विशेष प्रयास स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि पीजी छात्र भविष्य के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मानदेय में वृद्धि से उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा और चिकित्सा शिक्षा के प्रति बेहतर वातावरण तैयार होगा। हमारा लक्ष्य चिकित्सा संस्थानों की संख्या बढ़ाने के साथ ऐसे विशेषज्ञ चिकित्सकीय मानव-बल को तैयार करना है, जो राज्य के लोगों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सके। पीजी छात्रों के मानदेय में यह वृद्धि इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता, मेडिकल कालेजों में आधारभूत संरचना और चिकित्सकीय मानव संसाधन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। बेहतर प्रशिक्षण, बेहतर सुविधाएं और बेहतर मानव-बल के माध्यम से बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है।

हरियाणा पुलिस का गैंगस्टरों पर बड़ा एक्शन, 144 LOC और 54 रेड कॉर्नर नोटिस जारी

चंडीगढ़ हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए विदेश में छिपे वांछित अपराधियों और उनके नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है। एसटीएफ अब तक 27 गैंगस्टरों को निर्वासन या प्रत्यर्पण के माध्यम से भारत ला चुकी है। इनमें वर्ष 2025 में सात और वर्ष 2026 में अब तक 14 अपराधी शामिल हैं। चार अगस्त 2026 को एक सक्रिय वांछित अपराधी को संयुक्त अरब अमीरात से भारत लाया गया। यह वर्ष 2026 में एसटीएफ की 13वीं सफल कार्रवाई रही। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि हरियाणा पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ शून्य सहनशीलता (जीरो टालरेंस) की नीति पर काम कर रही है। विदेश में बैठकर हरियाणा में अपराध संचालित करने वालों के साथ उनके स्थानीय सहयोगियों, हथियार आपूर्तिकर्ताओं और आर्थिक मददगारों पर भी कार्रवाई की जा रही है। विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय तथा खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान से अपराधियों के पूरे नेटवर्क की पहचान की जा रही है। विदेश में मौजूद 12 गैंगस्टर हिरासत में पुलिस महानिरीक्षक सथीश बालन के अनुसार, एसटीएफ मानव और तकनीकी खुफिया तंत्र के माध्यम से विदेश में छिपे अपराधियों की गतिविधियों, यात्रा विवरण और ठिकानों का पता लगा रही है। फर्जी पासपोर्ट, पहचान दस्तावेज और जैव-आंकड़ों का विश्लेषण भी किया जा रहा है। विदेशों में मौजूद 12 गैंगस्टरों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। अगस्त 2023 से अब तक की प्रमुख कार्रवाई 144 लुक आउट सर्कुलर जारी। 54 रेड कार्नर नोटिस जारी। 53 इंटरपोल संदर्भ भेजे गए। 93 पासपोर्ट रद कराए गए। नौ अस्थायी गिरफ्तारी अनुरोध और 16 प्रत्यर्पण अनुरोध भेजे गए। बदमाशों की सूचना देने वालों को दस हजार अमेरिकी डालर का ईनाम एसटीएफ अपराधियों से जुड़े बैंक लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी और यूएसडीटी के माध्यम से होने वाले वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। उनके डिजिटल निशानों और सामाजिक मीडिया गतिविधियों पर निगरानी रखकर संपर्क, नए सदस्यों की भर्ती और आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। विदेश में छिपे चार वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने पर प्रत्येक के लिए 10 हजार अमेरिकी डालर (करीब साढ़े नौ लाख रुपये) के इनाम के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के साथ समन्वय पुलिस महानिदेशक के अनुसार हरियाणा पुलिस ने पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ मजबूत अंतरराज्यीय समन्वय तंत्र बनाया है। इसके तहत अपराधियों, शूटरों, हथियार आपूर्तिकर्ताओं और आर्थिक मददगारों से जुड़ी सूचनाएं साझा की जा रही हैं तथा जरूरत के अनुसार संयुक्त कार्रवाई की जा रही है। गैंग के संबंधों और आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी जानकारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी के ओसीएनडी मंच पर भी साझा की जा रही है। पुलिस का लक्ष्य विदेश में बैठे अपराधियों के साथ-साथ उनके स्थानीय और वित्तीय नेटवर्क को भी एक साथ कमजोर करना है।

Jharkhand SIR: दूसरे राज्य में जन्मे मतदाताओं को राहत, अपने राज्य के दस्तावेज कर सकेंगे पेश

 रांची  यदि आप झारखंड में निवास कर रहे हैं और आपका जन्म दूसरे किसी राज्य में हुआ है तो विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए वहां का भी बना आपका दस्तावेज मान्य होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम सम्मिलित होने के लिए उसका भारत का नागरिक होना, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना तथा संबंधित अर्हता तिथि (वर्तमान एसआइआर के लिए एक अक्टूबर 2026) को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करना आवश्यक है। उनके अनुसार, झारखंड की मतदाता सूची में ऐसे मतदाता भी पंजीकृत हैं, जिनका जन्म अथवा पूर्व निवास किसी अन्य राज्य में रहा है। दावा-आपत्ति एवं सुनवाई की प्रक्रिया के क्रम में यदि ऐसे मतदाताओं को आयु, जन्म अथवा अन्य विवरण के सत्यापन के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस प्राप्त हुआ है, तो वे इससे संबंधित भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के लिए मान्य दस्तावेज के रूप में अपने संबंधित राज्य के द्वारा जारी किए गए दस्तावेज को प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित दस्तावेज का झारखंड से ही निर्गत होना आवश्यक नहीं है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता अपने जन्म स्थान, आयु अथवा पारिवारिक संबंध के सत्यापन के लिए वंशावली अथवा सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत पारिवारिक सूची, खतियान, शैक्षणिक दस्तावेज सहित निर्वाचन आयोग द्वारा एसआइआर के लिए निर्धारित अन्य मान्य दस्तावेज अपने संबंधित राज्य से प्रस्तुत कर सकते हैं। इन दस्तावेज का परीक्षण संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि नोटिस प्राप्त होने पर निर्धारित समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर उपलब्ध मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करें। उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले में प्रस्तुत दस्तावेज का नियमानुसार परीक्षण करते हुए पात्रता के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र अथवा विदेशी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।