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UP की अर्थव्यवस्था पर मंत्री जयवीर सिंह का बड़ा दावा, बोले- GDP ग्रोथ 11% से ऊपर

सूरज की रोशनी से बदली जिंदगी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना बनी सोनसाय बाकड़े के लिए राहत और बचत का माध्यम 4-5 हजार रुपए का मासिक बिजली बिल घटकर 120 से 500 रुपए तक पहुंचा, केंद्र एवं राज्य सरकार से मिली 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी रायपुर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना ग्रामीण परिवारों तथा आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बीजापुर जिले के मांझीगुड़ा निवासी सोनसाय बाकड़े हैं, जिनके जीवन में इस योजना ने नई रोशनी और आर्थिक राहत लेकर आई है। कभी हर महीने भारी-भरकम बिजली बिल की चिंता से परेशान रहने वाले बाकड़े आज सौर ऊर्जा के माध्यम से न केवल बिजली खर्च में बड़ी बचत कर रहे हैं, बल्कि निर्बाध बिजली सुविधा का लाभ भी उठा रहे हैं। सोनसाय बाकड़े बताते हैं कि पहले उनके घर का बिजली बिल प्रतिमाह लगभग 4 से 5 हजार रुपए तक पहुंच जाता था। बढ़ते बिजली खर्च के कारण परिवार का मासिक बजट प्रभावित होता था और कई बार बिजली बिल जमा करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता था। लगातार बढ़ते खर्च के बीच उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना की जानकारी मिली। योजना के लाभ और सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के बारे में जानने के बाद उन्होंने अपने घर में सोलर पैनल लगाने का निर्णय लिया। योजना के तहत बाकड़े को केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से कुल 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस सहायता से उनके घर में सोलर पैनल स्थापित किए गए। लगभग तीन माह पूर्व लगाए गए इन सोलर पैनलों से अब उनके घर में नियमित और पर्याप्त बिजली की आपूर्ति हो रही है। सबसे बड़ी राहत यह रही कि जहां पहले हर महीने हजारों रुपए का बिजली बिल आता था, वहीं अब यह घटकर केवल 120 रुपए से 500 रुपए तक सीमित हो गया है। इससे परिवार को आर्थिक रूप से काफी सहारा मिला है। अब घरेलू जरूरतों के लिए बिजली उपयोग करते समय अतिरिक्त खर्च की चिंता नहीं रहती। बाकड़े का कहना है कि सौर ऊर्जा अपनाने से न केवल आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति जैसी समस्याओं से भी काफी हद तक छुटकारा मिला है। अब उनका परिवार पंखा, टीवी, मोटर और अन्य घरेलू उपकरणों का उपयोग बिना किसी परेशानी के कर पा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना को आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण परिवारों के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए जिलेवासियों से अधिक से अधिक संख्या में इस योजना का लाभ लेने की अपील की। उनका मानना है कि यह योजना सिर्फ बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सोनसाय बाकड़े ने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह पहल आम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई ऊर्जा भर रही है।

जनभागीदारी का नया अध्याय शुरू, ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान आज से आरंभ

आज से आरंभ हुआ जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले अभियान जनजातीय वर्ग के लिए 25 सेवाओं के “लाभार्थी संतृप्ति” शिविर होंगे आयोजित भोपाल  जनजातीय वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 18 से 25 मई तक राष्ट्रव्यापी सूचना, शिक्षा एवं संचार अभियान “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों को सफलतापूर्वक शिविर लगाने एवं लक्षित समूह को लाभ पहुँचाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त सह संचालक जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान जनजातीय समुदाय के हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों की सभी जनपद पंचायतों के चयनित ग्रामों में लाभार्थी संतृप्ति शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें योजनाओं से लाभान्वित भी किया जाएगा। अभियान के तहत आयोजित शिविरों में 18 विभागों की कुल 25 सेवाओं का लाभ जनजातीय वर्ग के ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र हितग्राही अनुसार शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। अभियान को सफल बनाने के लिये जिले के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिविरों के आयोजन के लिये अपर संचालक श्रीमती रीता सिंह को राज्‍य स्‍तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। जबकि जिला स्‍तर पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्‍त/जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मध्‍यप्रदेश में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष अभियान के तहत कुल 267 विकासखंडों के 11 हजार 377 ग्राम लाभान्वित होंगे। वहीं पीएम जनमन योजना के तहत कुल 122 विकासखंडों के 5 हजार 113 ग्राम लाभान्वित होंगे।

वेटरनरी स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी, सरकार ने बढ़ाया इंटर्नशिप स्टाइपेंड

पशु चिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में अध्ययनरत पशु चिकित्सा के छात्रों के इंटर्नशिप भत्ते को 4,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के पशु चिकित्सा छात्रों को बड़ा आर्थिक सहारा मिलेगा और उनका मनोबल भी बढ़ेगा। दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशाल जनसंख्या, बड़ी पशुधन संख्या और विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र वाला राज्य है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण, विभिन्न पशु महामारियों के नियंत्रण और उन्मूलन तथा उन्नत नस्लों के संवर्धन में पशु चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, आचार्य नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी तथा सरदार वल्लभभाई पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी में अध्ययनरत पशु चिकित्सा छात्रों को अब बढ़ा हुआ इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा। सरकार के अनुसार वर्तमान में इन छात्रों को 4,000 रुपये प्रतिमाह इंटर्नशिप भत्ता दिया जा रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। इस निर्णय से तीनों विश्वविद्यालयों में अनुमोदित 300 छात्रों को लाभ मिलेगा। पशुपालन मंत्री ने कहा कि हरियाणा, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में अधिक इंटर्नशिप भत्ता दिए जाने का अध्ययन करने के बाद यह फैसला लिया गया है। प्रस्ताव लागू होने पर सरकार पर लगभग 4.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा, जिसकी व्यवस्था विश्वविद्यालयों को दिए जाने वाले शासकीय अनुदान के गैर-वेतन मद से की जाएगी। इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा, शिक्षा के प्रति रुचि और कार्य के प्रति उत्साह बढ़ेगा तथा समानता के सिद्धांत को भी मजबूती मिलेगी। मंत्री धर्मपाल सिंह ने इसे “समानता के सिद्धांत” के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

मध्यप्रदेश सरकार ला रही नई Attendance व्यवस्था, कर्मचारियों की हर मूवमेंट पर रहेगी नजर

भोपाल   मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए नई खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के 5.50 लाख सरकारी कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद यह काम एमपीएसईडीसी को सौंप दिया गया है। साथ-ही साथ सरकारी ऑफिसों में मशीनों की खरीदी और वेंडर चयन का काम भी शुरु हो गया है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। एमपीएसईडीसी जो सिस्टम तैयार कर रहा है, उसमें कर्मचारी के मशीन पर पंच करते ही उसका लॉग-इन सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। इसमें ऑटोमेशन फीचर को भी ऐड किया जा रहा है। जिसके जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। शुरुआत में ये सॉफ्टवेयर मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल और राजधानी के विभागाध्यक्ष कार्यालयों से होगी। इसके बाद इसे कमिश्नर कार्यालय, कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी दफ्तरों में लागू किया जाएगा। अब लगेगी शॉर्ट लीव और हॉफ डे नए सॉफ्टवेयर के आने के बाद कर्मचारियों के पंच करते ही सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के लिए पंच लग जाएगा। इसका समय सीधे क्रेंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगा। साथ ही यदि कोई कर्मचारी अपनी सीट से जाता है तो ये सॉफ्टवेयर अपने आप शॉर्ट लीव और हॉफ डे दर्ज कर देगा। ये सिस्टम खुद ही बता देगा कि कौन कर्मचारी डेस्क पर है और कौन फ्रील्ड पर है। बदलेंगे ये 2 पुराने नियम मोहन सरकार अपने कर्मचारियों से जुड़े दो बड़े नियमों में भी बदलाव करने जा रही है। वर्षों पहले 'दो ही बच्चे अच्छे' वाली जो बंदिशें लगाई थी, उसे हटाने पर सहमति बन गई है। आदेश कभी भी जारी हो जाएंगे। जिसके बाद उन सैकड़ों कर्मचारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार हट जाएगी, जिन्होंने जाने अनजाने में दो से अधिक बच्चे पैदा किए हैं। सरकार का यह फैसला राहत देने वाला होगा। दूसरी तरफ कुछ शर्तों के साथ अधिकारी, कर्मचारियों के लिए गिफ्ट लेना पहले से आसान हो जाएगा। ये एक वर्ष के भीतर अपनी एक सैलरी के बराबर गिफ्ट ले सकेंगे। ज्यादा कीमती गिफ्ट लेने पर कार्रवाई के दायरे में आएंगे। अधिकारी, कर्मचारियों को निवेश भी सोच समझकर ही करना होगा। गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाया तो खैर नहीं निवेश की जाने वाली रकम, कमाई से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ये सभी प्रावधान नए सिरे से तैयार किए जा रहे सिविल सेवा आचरण नियमों में किया जा रहा है। संशोधित सेवा नियम जारी होने बाकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार उक्त नियमों में संशोधन कर एक तरफ जहां राहत देने जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाने से रोकने को लेकर भी कई कड़े प्रावधान किए जाने पर विचार चल रहा है।

गाड़ियों की रफ्तार से छोटा पड़ रहा चंडीगढ़, पार्किंग के लिए जगह कम पड़ने लगी

चंडीगढ़  फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए ने जब चंडीगढ़ को धरातल पर उतारा तो कुछ लोग इसमें जरूरत से अधिक खाली स्पेस देखकर छोड़कर चले गए। दूर-दूर तक इक्का-दुक्का वाहन ही दिखते थे। लेकिन यह किसी ने नहीं सोचा था कि इतना खुला शहर भी वाहनों के जंजाल में फंसकर हांफने लगेगा। ली कार्बूजिए शायद 60 वर्ष बाद का भविष्य देखते हुए शहर को गढ़ रहे थे लेकिन जनसंख्या और वाहनों का विस्फोट उनके गढ़े मॉडल से कहीं आगे निकल चुका है। चंडीगढ़ देश में सर्वाधिक कारों के घनत्व वाला शहर बन चुका है। यह समृद्धि गौरव का विषय होने के साथ ही गंभीर समस्या भी बन चुकी है। पांच लाख की आबादी के लिए बसाए गए चंडीगढ़ में हर तीन मिनट में एक नई कार सड़क पर उतर रही है। दस हजार नंबरों की नई सीरीज दो महीने में ही खत्म हो रही है। जमीनी हकीकत यह है कि अब पार्किंग के लिए जगह नहीं बची है। ग्रीन बेल्ट हो या साइकिल ट्रैक सभी पार्किंग की भेंट चढ़ चुकी हैं। कड़वी सच्चाई यह है कि इंसाफ के मंदिर कहे जाने वाले हाईकोर्ट हो या डिस्ट्रिक्ट कोर्ट यहां पर कारों की दोहरी लाइनें लगने लगी हैं। अभी आबादी 12 लाख, 2051 में 23 लाख होगी अभी चंडीगढ़ की आबादी 12 लाख है। 2051 तक यह बढ़कर दो गुना होगी। ट्राइसिटी में 2051 तक आबादी 45 लाख प्रोजेक्टेड है। प्रशासन न तो नई गाड़ियों के सड़क पर उतरने की रफ्तार को कम कर पाया है, न ही कोई योजना पार्किंग स्पेस देने की बना पाया। सड़क, पार्क, ग्रीन बेल्ट, फुटपाथ और खेल के मैदान हर जगह कारें खड़ी दिखाई देती हैं और प्रशासन मूकदर्शक बन इस बिगड़ती स्थिति को देख रहा है। ज्यादातर पार्क बन गए पार्किंग स्थल घनी आबादी वाले इलाकों में पार्किंग की समस्या सबसे ज्यादा है। वहां तेजी से लोग दोपहिया से चारपहिया की तरफ जा रहे हैं। इन इलाकों में पहले ही पार्किंग की जगह नहीं है, ऐसे में लोगों ने कालोनियों के छोटे-छोटे पार्कों में गाड़ियां खड़ी कर उसे पार्किंग बना दिया है। आलम यह है कि अब पार्कों में भी जगह नहीं बची है। ऐसे में सड़कों पर गाड़ियां खड़ी होने लगी हैं। शहर में बढ़ते वाहन और पार्किंग स्पेस विवरण (Description) आंकड़े / स्थिति (Data / Status) कार घनत्व (Car Density) 731 कारें प्रति 1,000 लोगों पर (पूरे देश में सबसे अधिक) शहर में कुल वाहन 10 लाख से अधिक वाहन मौजूद रोजाना सड़कों पर उतरने वाले नए वाहन 175 से अधिक गाड़ियां प्रतिदिन पड़ोसी शहरों (पंचकूला-मोहाली) से रोजाना आने वाले वाहन 1.5 लाख वाहन प्रतिदिन सरकारी गाड़ियां (पेट्रोल-डीजल) 3,724 वाहन पेड पार्किंग (Paid Parking) की स्थिति 89 स्थल (कुल 22,725 कारों के लिए स्पेस) फ्री पार्किंग (Free Parking) की स्थिति 200 स्थल (इसके बावजूद स्पेस की भारी कमी) पिछले वर्षों का रिकॉर्ड (संभावित 2022/23) 38,659 नई कारें पंजीकृत हुईं    

इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा: केंद्र सरकार ने 4800 नए EV चार्जिंग स्टेशन को दी मंजूरी

लखनऊ पेट्रोल-डीजल, सीएनजी के महंगे होते जाने के बीच इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) वालों के लिए गुड न्यूज है। सफर के दौरान बैटरी खत्म होने का उनका तनाव कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश समेत आठ राज्यों में 4800 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने की मंजूरी दे दी है। ये नए चार्जिंग स्टेशन हाईवे, एक्सप्रेसवे, पेट्रोल पंप और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएंगे। उत्तर प्रदेश को केंद्र सरकार ने 714 चार्जिंग स्टेशन दिया है और इसके लिए बजट भी जारी कर दिया गया है। इन्हें लगाने का काम अगले छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण के लिए पहले चरण में 500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही केंद्र ने अगले चरण के लिए भी राज्यों से प्रस्ताव मांगे हैं। यूपी में पहले से मौजूद चार्जिंग स्टेशन के जाल को इस चरण के पूरा होने के बाद बढ़ती मांग और लंबे सफर की जरूरतों के लिए हिसाब से मजबूती मिलेगी। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के साथ ही वाहनों के होने वाले प्रदूषण में कमी लाने के लिए इलेक्ट्रानिक वेहकिल (EV) को बढ़ावा देने की लगातार कोशिश कर रही है। लेकिन इस बदलाव में रेंज एंजाइटी यानी इलेक्ट्रानिक व्हीकल में सफर करने वालों का वह डर एक बड़ी बाधा है, जो उन्हें गाड़ी की बैटरी खत्म होने और बीच रास्ते में फंस जाने की आशंका के चलते डराता है। अब जब ईरान-अमरीका-इजराइल युद्ध के चलते दुनिया एक नए तरह के संकट से जूझ रही है, सरकार ने एक बार फिर ईवी को बढ़ावा देने की नीति पर जोर दिया है। इस नीति के तहत रास्तों पर पर्याप्त चार्जिंग पॉइंट की व्यवस्था करने की कोशिश प्रमुख है। इसी कोशिश के तहत केद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश समेत आठ राज्यों और पीएसयू को कुल 4800 नए चार्जिंग स्टेशन बनाने की मंजूरी दी। इनमें उत्तर प्रदेश में 714 चार्जिंग स्टेशन खुलेंगे। जिनके लिए 61.33 करोड़ रुपए स्वीकृ़त किए गए हैं। इसी तरह राजस्थान में 591 चार्जिंग स्टेशन खुलेंगे। 81.12 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। आंध्र प्रदेश में 577 चार्जिंग स्टेशन खुलेंगे। इनके लिए 39.79 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। गुजरात में 56 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 1.74 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है। केरल में 335 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 63.12 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। तेलंगाना में 169 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 10.24 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। सबसे ज्यादा चार्जिंग स्टेशन कर्नाटक में बनेंगे। यहां 1243 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 123.26 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। तमिलनाडु में 498 चार्जिंग स्टेशनों के लिए 34.61 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इस तरह कुल 4800 नए चार्जिं

गर्मी की जगह बारिश और ठंडी हवाओं का असर, झारखंड में तापमान सामान्य से नीचे

रांची झारखंड में भी क्लाइमेट चेंज का प्रभाव साफ दिख रहा है. 1 मार्च से अब तक मौसम का असामान्य पैटर्न देखने को मिल रहा है. जिस मई महीने में तेज गर्मी पड़नी चाहिए थी, उस समय पांच जिलों को छोड़कर 19 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है. इससे तापमान सामान्य से कम बना हुआ है और लोगों को गर्मी का एहसास नहीं हो रहा है. मौसम विभाग के अनुसार, अप्रैल के शुरुआती दिनों में जबरदस्त गर्मी पड़ी थी और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया था, लेकिन इसके बाद मौसम में बदलाव आ गया है. मई के महीने में दो-तीन जिलों को छोड़कर किसी भी जिले का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं रहा. राज्य में औसत तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है. जिलों में बारिश का हाल 6 जिलों बोकारो, हजारीबाग, लातेहार, रामगढ़, रांची और सिमडेगा जिलों में सामान्य से 100 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की गई है. वहीं चतरा, गढ़वा, लोहरदगा और साहिबगंज में सामान्य से कम बारिश हुई है. मई के अंतिम सप्ताह तक बदला रहेगा मौसम मौसम केंद्र ने पूर्वानुमान जारी किया है कि मई महीने के अंतिम सप्ताह तक मौसम बदला रहेगा. 23 मई तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तेज हवा, बारिश और गर्जन के साथ वज्रपात की संभावना बनी रहेगी. 19 और 20 मई को संताल परगना वाले इलाके के साथ-साथ मध्य झारखंड सहित राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है. मौसम विशेषज्ञ के अनुसार वरीय मौसम वैज्ञानिक (रांची केंद्र) अभिषेक आनंद के अनुसार, झारखंड में बदलता मौसम क्लाइमेट चेंज का असर है, हालांकि इसके पीछे कई अन्य कारण भी हैं. इसी वजह से पूरे राज्य में एक जैसा मौसम नहीं दिख रहा है. पहले बारिश सामान्य होती थी और उसमें खतरा कम रहता था, लेकिन अब तेज हवा, भारी बारिश और वज्रपात जैसी घटनाएं बढ़ गई हैं. सुबह में तेज धूप और गर्मी रह रही है. अभिषेक आनंद ने लोगों से अपील की है कि मौसम खराब होते ही सतर्क रहें, सुरक्षित स्थान पर चले जाएं और वज्रपात के दौरान मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करने तथा सेल्फी लेने जैसी गतिविधियों से बचें.

जयपुर में ‘अमृत महोत्सव उद्घोष’ के दौरान विधानसभा का नया प्रतीक चिह्न हुआ जारी

जयपुर राजस्थान विधानसभा ने अपने 75वें स्थापना वर्ष के ऐतिहासिक मौके पर अपनी एक नई और अनूठी पहचान दुनिया के सामने पेश की है। जयपुर में आयोजित 'अमृत महोत्सव उद्घोष' कार्यक्रम के दौरान विधानसभा के नवनिर्मित आधिकारिक प्रतीक चिह्न का विमोचन किया गया और साथ ही विधानसभा परिसर के विभिन्न ऐतिहासिक द्वारों का नामकरण भी किया गया। इस समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। नए लोगो में खेजड़ी और ऊंट को मिला स्थान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की कल्पना से तैयार इस नए प्रतीक चिह्न में राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। नए लोगो में दो सबसे खास तत्वों को शामिल किया गया है, जो पूरे मरुस्थल का सम्मान हैं। राजस्थान के कल्पवृक्ष खेजड़ी को लोगो में किया शामिल राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हरा-भरा रहने और जीवन को बनाए रखने की क्षमता का प्रतीक है। ग्रामीण जीवन और पर्यावरण संतुलन की रीढ़ माने जाने वाले इस वृक्ष को लोगो में शामिल कर राज्य की पर्यावरणीय विरासत को सलाम किया गया है। रेगिस्तान का जहाज ऊंट भी लोगो में शामिल राज्य पशु ऊंट मरुधरा की जीवटता, अटूट धैर्य और मजबूती से आगे बढ़ने के स्वभाव को दर्शाता है। यह राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का सबसे मजबूत स्तंभ है। ऊंट सदियों से राजस्थान के शूरवीरों और राजा-महाराजाओं का न केवल युद्ध के मैदान में विश्वसनीय साथी रहा है, बल्कि मरुधरा के व्यापारिक कारवानों की मुख्य जीवनरेखा भी रहा है। बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने विश्व प्रसिद्ध 'गंगा रिसाला' का गठन किया था, जिसने प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वैश्विक स्तर पर अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया। 1913 का इतिहास और नेहरू की 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' का जिक्र समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने राजस्थान की प्राचीन लोकतांत्रिक जड़ों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में लोकतंत्र नया नहीं है। पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रसिद्ध किताब 'The Discovery of India' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में प्राचीन काल से ही लोकतांत्रिक परंपराएं मौजूद रही हैं। राज्यपाल ने एक बेहद दिलचस्प ऐतिहासिक तथ्य साझा करते हुए बताया कि आजादी से बहुत पहले, साल 1913 में ही बीकानेर रियासत में 'प्रतिनिधि सभा' हुआ करती थी, जहां बाकायदा बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराया जाता था।

मेट्रो और डीटीसी बस में सफर कर सीएम का संदेश, Delhi Metro से ईंधन बचाने की अपील

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकार के ‘मेट्रो मंडे’ अभियान के तहत सोमवार को अपने दफ्तर जाने के लिए मेट्रो और डीटीसी बस में सफर किया। साथ ही उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों और अधिकारियों ने भी सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल किया। दिल्ली सरकार ने कब की थी इसकी घोषणा दिल्ली सरकार ने पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए पिछले हफ्ते 90 दिवसीय ‘मेरा भारत मेरा योगदान’ अभियान की घोषणा की थी और कहा था कि हर सोमवार को मंत्री व अधिकारी ‘मेट्रो मंडे’ मनाएंगे और दफ्तर आने-जाने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल करेंगे। इसी अभियान के तहत सोमवार को कई मंत्रियों और अधिकारियों ने दफ्तर पहुंचने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल किया। सीएम ने आईटीओ तक मेट्रो में किया सफर एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, सीएम रेखा गुप्ता राज निवास मार्ग पर स्थित अपने सरकारी आवास ‘जन सेवा सदन’ से लोक निवास में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के लिए पैदल पहुंचीं और इसके बाद मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक कार के माध्यम से कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन तक यात्रा की और वहां से आईटीओ मेट्रो स्टेशन तक दिल्ली मेट्रो सेवा का उपयोग किया। सीएम ने मेट्रो के बाद बस में किया सफर आईटीओ मेट्रो स्टेशन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने दिल्ली सचिवालय स्थित अपने कार्यालय जाने के लिए डीटीसी की फीडर बस सेवा का उपयोग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री प्रवेश सिंह और रविन्द्र इंद्राज भी मौजूद थे। सीएम ने दिल्ली के लोगों से किया आग्रह सीएम रेखा गुप्ता ने आईटीओ मेट्रो स्टेशन पर पत्रकारों से कहा, “मैं दिल्ली के सभी निवासियों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का आग्रह करती हूं जिससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि प्रदूषण और यातायात जाम से निपटने में भी मदद मिलेगी। दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और अंतिम छोर तक ‘कनेक्टिविटी’ की समस्याओं को दूर करने के लिए काम कर रही है।” मेट्रो मंडे पहल पर बोलीं सीएम रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री ने कहा, “‘मेट्रो मंडे’ के अंतर्गत जो आह्वान किया गया था, उसके तहत मैं, मेरे सभी साथी मंत्री, विधायक और अधिकारियों ने प्रयास किया है कि आज मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। इसी क्रम में आज हम भी मेट्रो से यहां पहुंचे हैं। यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि दिल्ली के बहुत सारे लोगों ने भी आज मेट्रो के माध्यम से यात्रा करने का निर्णय लिया है।” मंत्रियों ने मेट्रो में किया सफर उनके अलावा मंत्री आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा, कपिल मिश्रा और पंकज सिंह ने भी अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल किया। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने 'मेट्रो मंडे' के तहत दिल्ली मेट्रो से रामकृष्ण आश्रम मार्ग स्टेशन तक यात्रा की।