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सलाखों के पीछे गूंजेगी साहित्य की आवाज, पंजाब की 27 जेलों में होगा साहित्य उत्सव

 चंडीगढ़  जेल की सलाखें भले ही बंदियों की बाहरी दुनिया से दूरी तय करती हों, लेकिन अब उनकी कलम को अभिव्यक्ति की आजादी देने की तैयारी है। पंजाब की 27 जेलों में बंद कैदियों और बंदियों को अपनी भावनाओं, अनुभवों और कल्पनाओं को शब्दों में ढालने का अवसर देने के लिए जेल साहित्य उत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित इस उत्सव में प्रदेश की सभी 27 जेलों के बंदी हिस्सा ले सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें सकारात्मक दिशा देना और पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है। बंदियों को रचनात्मक रूप से व्यस्त रखना इस पहल के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। जेल में रहने के दौरान बंदियों के पास अपनी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के सीमित अवसर होते हैं। ऐसे में लेखन उनके लिए अपनी बात कहने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। कहानी, कविता और अन्य रचनात्मक विधाओं के माध्यम से बंदी अपने भीतर चल रहे विचारों और भावनाओं को कागज पर उतार सकेंगे। ‘गुलदस्ता’ परियोजना से मिलेगा साहित्यिक माहौल इस पहल को ‘गुलदस्ता’ परियोजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। बेल्बा फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इस परियोजना के माध्यम से जेलों में साहित्यिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। बंदियों को विभिन्न प्रकार की साहित्यिक सामग्री पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें अपनी रचनाएं लिखने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। जेल प्रशासन का मानना है कि पढ़ने और लिखने की आदत बंदियों को सकारात्मक गतिविधि से जोड़ सकती है। जेल में खाली समय का इस्तेमाल केवल समय बिताने के बजाय रचनात्मक कार्यों में किया जा सकेगा। बंदी अपने जीवन की घटनाओं, अनुभवों, यादों, सपनों और भविष्य की उम्मीदों को कहानी या कविता का रूप दे सकेंगे। इससे उन्हें अपने जीवन और परिस्थितियों को नए नजरिये से देखने का अवसर मिल सकता है। पुनर्वास की दिशा में अलग तरह का प्रयोग जेल साहित्य उत्सव को केवल साहित्यिक आयोजन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसे बंदियों के सुधार और पुनर्वास से जोड़कर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेखन व्यक्ति को अपने विचारों और भावनाओं पर आत्ममंथन करने का अवसर देता है। बंदी अपने अतीत की घटनाओं को शब्दों में व्यक्त करते हुए भविष्य को लेकर नई सोच विकसित कर सकते हैं। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें बंदियों को अपनी कहानी खुद लिखने का मंच दिया जाएगा। जेल में बंद व्यक्ति के लिए यह अवसर इसलिए भी अहम है क्योंकि समाज से दूरी के बीच उसकी आवाज अक्सर सीमित हो जाती है। साहित्य उस आवाज को अभिव्यक्ति देने का माध्यम बन सकता है। कलम के जरिये दूसरी तरह की आजादी पंजाब की सभी 27 जेलों को इस साहित्यिक पहल से जोड़ना इसे व्यापक स्वरूप देता है। जेल प्रशासन के लिए यह प्रयोग बंदियों को अनुशासन और रचनात्मकता के साथ जोड़ने का अवसर भी है। वहीं बंदियों के लिए यह अपनी प्रतिभा को पहचानने और उसे सामने लाने का माध्यम बन सकता है। सलाखों के पीछे बाहरी दुनिया की आजादी भले सीमित हो, लेकिन विचारों और कल्पनाओं पर कोई पहरा नहीं होता। ऐसे में एक कलम बंदी को उसकी यादों, कल्पनाओं और आत्ममंथन की दुनिया तक पहुंचाने का रास्ता खोल सकती है। जेल साहित्य उत्सव इसी सोच के साथ बंदियों को शब्दों की दुनिया से जोड़ने की एक नई पहल के रूप में सामने आ रहा है।

MP Transco में 351 युवाओं को मिली नौकरी! ऊर्जा मंत्री तोमर ने नियुक्ति पत्र देकर किया स्वागत

एमपी ट्रांसको ने 351 नए कार्मिकों को दी नियुक्ति : ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार ऊर्जा विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा विभिन्न श्रेणियों के पदों पर चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर प्रथम चरण में अब तक कुल 351 नए कार्मिकों को नियुक्तियां दी गई है। इनमें द्वितीय श्रेणी के 55 अधिकारी, तृतीय श्रेणी के 173 कर्मचारी तथा चतुर्थ श्रेणी के 123 कर्मचारी शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री तोमर ने सभी नवनियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समर्पण, दक्षता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन के जुड़ने से प्रदेश की ट्रांसमिशन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। चरणबद्ध तरीके से की जा रही है नियुक्तियां ऊर्जा मंत्री ने बताया कि कंपनी द्वारा ट्रांसमिशन तंत्र के प्रभावी संचालन, रखरखाव तथा विस्तार कार्यों को गति देने के लिए चरणबद्ध रूप से रिक्त पदों पर भर्ती की जा रही है। इन नियुक्तियों से कंपनी की तकनीकी एवं संचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी तथा प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत पारेषण व्यवस्था सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। नए कार्मिकों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता (मानव संसाधन एवं प्रशासन) धीरेंद्र सिंह ने बताया कि नियुक्त किए गए 351 कार्मिकों में 55 सहायक अभियंता, 166 कनिष्ठ अभियंता(पारेषण), 7 कनिष्ठ अभियंता (सिविल), 89 उपकेंद्र परिचारक, 24 सिविल परिचारक तथा 10 सर्वेयर परिचारक शामिल हैं। सभी नवनियुक्त कार्मिकों को आवश्यक तकनीकी एवं कार्यात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।  

बिहार वाला फॉर्मूला यूपी में आजमाएगी BJP? तावड़े ने मिशन-2027 के लिए कसी कमर

   लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक लगाने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान मिशन-2027 के लिए पार्टी के रणनीतिक खाके यानी ब्लूप्रिंट की नींव रखी. बिना किसी भारी तामझाम और सादगी के साथ लखनऊ पहुंचे तावड़े ने जीत की हैट्रिक लगाने के लिए संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने से लेकर नैरेटिव सेट करने तक कई अहम दिशा-निर्देश दिए।  बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को परखा. इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ दोनों उप-मुख्यमंत्रियों से मुलाकात और बातचीत भी की. इसके अलावा संगठन के लोगों के साथ मंथन कर सारा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।  विनोद तावड़े ने पार्टी पदाधिकारियों को विधानसभा चुनाव 2027 के लिए टारगेट दिया. उन्होंने कहा कि हमें हर बूथ को मजबूत करना होगा, कोई बूथ छूटना नहीं चाहिए और उसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाएं. इसके साथ ही उन्होंने सभी जातियों को साधने का मंत्र भी दिया और कहा कि संख्या चाहे कम हो या ज्यादा, लेकिन कोई जाति छूट न जाए, हमें सबको जोड़ना होगा।  यूपी फतह का खाका खींच गए तावड़े बिहार चुनावों में एनडीए के चुनावी प्रबंधन और तालमेल के सफल फार्मूले को यूपी की जमीन पर उतारने का काम तावड़े ने शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश के बीजेपी प्रभारी बनने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने 2027 का विधानसभा चुनाव मजबूत संगठन के बलबूते और पीएम मोदी व सीएम योगी के नाम और काम पर लड़ने के संकेत दिएच इस तरह सरकार और संगठन दोनों के साथ समन्वय बनाकर 2027 के चुनाव में उतरने का खाका खींच गए।  विनोद तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद दिनभर पार्टी दफ्तर में क्षेत्रीय पदाधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने प्रदेश के महामंत्रियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ बैठक की. बीजेपी संगठन के नेताओं से मुलाकात के दौरान विनोद तावड़े ने साफ कहा कि बूथ की मजबूती ही 2027 के चुनाव की जीत का आधार बनेगी।  तावड़े ने पदाधिकारियों से कहा कि वे हर बूथ के अनुसार कार्ययोजना बनाएं. किस बूथ पर जीत की क्या स्थिति है, इसकी ठीक से समीक्षा करें. इसके अलावा जहां कमी नजर आए, उसे दुरुस्त करें. इस तरह हारी हुई बूथों को चिह्नित करते हुए वहां पार्टी को मजबूत करने के निर्देश भी दिए।  सपा के पीडीए का काउंटर प्लान तैयार अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड की काट के लिए तावड़े ने 'परफॉर्मेटिव नैरेटिव' पेश किया. उन्होंने सपा के पीडीए पर तंज कसते हुए इसे 'पराया धन अपना' करार दिया और जमीन पर अवैध कब्जे तथा महिला सुरक्षा (स्त्रीधन) जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को घेरने का संकेत दिया. इसके साथ ही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने का खाका भी खींचा।  तावड़े ने कहा कि हमें सभी वर्गों का साथ चाहिए, ऐसी कोई भी जाति न हो जो अछूती रह जाए. यूपी बड़ा प्रदेश है और हर क्षेत्र में अलग-अलग जातियों का प्रभाव है. यदि किसी जाति के वोटरों की संख्या कम है, तो भी हमें उसे छोड़ना नहीं है, उनसे संपर्क करके उन्हें पार्टी से जोड़ने का प्रयास करना है. इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष की तैयारी पर नजर रखकर अपनी रणनीति बनाने की नसीहत दी।  विपक्ष के प्रत्याशी का तोड़ तलाशने का टास्क बीजेपी प्रभारी ने कहा कि विपक्षी तैयारियों पर हमें पूरी नजर रखनी होगी. विपक्ष का कोई नेता या प्रत्याशी मजबूत है, तो उसकी मजबूती का आधार पता करना होगा और फिर उसी के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करके मजबूत होना होगा. पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने विपक्ष के मजबूत प्रत्याशियों पर खास नजर रखने और उनका तोड़ निकालने के लिए कहा है. इसका यह संदेश भी है कि यदि विपक्ष के मजबूत प्रत्याशी को अपने पाले में लाकर जीत मिलती है, तो आखिर में यह भी एक विकल्प हो सकता है।  बीजेपी संगठन को निर्देश दिए गए कि 2022 के चुनाव में गंवाई गई 57 सीटों और एनडीए की हारी हुई 130 सीटों की गहन समीक्षा की जाए और बूथ स्तर पर शक्ति केंद्रों में युवाओं को जोड़ा जाए. इस तरह से विनोद तावड़े 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की हैट्रिक लगाने ही नहीं, बल्कि बिहार की तरह क्लीन स्वीप करने का प्लान बना रहे हैं।  वीआईपी कल्चर से दूरी बनाकर दिया संदेश बीजेपी के प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद विनोद तावड़े ने उत्तर प्रदेश आने से पहले ही साफ कर दिया था कि उनके स्वागत की एक भी होर्डिंग शहर में नहीं लगनी चाहिए और न ही उनका नाम दिखाई देना चाहिए. ऐसे में जिन लोगों ने विनोद तावड़े के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाए थे, उन्हें रातों-रात उन्हीं लोगों ने हटा लिया।  अब विनोद तावड़े ने नया मंत्र दिया और पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लखनऊ में समय बिताने के बजाय अपने-अपने आवंटित विधानसभा क्षेत्रों में जाएं, रात को वहीं प्रवास करें और स्वागत-सत्कार के चक्कर में न पड़ें. मार्च 2027 तक, यानी विधानसभा चुनाव होने तक सभी पदाधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं और चुनावी अभियानों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए।  संगठन-सरकार के साथ मजबूत समन्वय प्रदेश प्रभारी तावड़े ने भाजपा के सभी प्रदेश मोर्चों के अध्यक्षों से भी संवाद किया. इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द अपनी कार्यसमिति बनाएं. सूत्रों के अनुसार हफ्तेभर के अंदर कार्यकारिणी गठित करने के लिए उन्होंने कहा है. यह भी कहा गया कि जब कार्यकारिणी गठित हो जाए, तो उन्हें आगे का टारगेट दिया जाएगा जिसे पूरा करने के लिए सभी को मिलकर जुटना होगा।  तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की. सूत्रों के अनुसार उन्होंने सरकार के कामकाज की जानकारी ली और कल्याणकारी योजनाओं पर बात की. सरकार और संगठन में समन्वय के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई।  सीएम के साथ बैठक में संगठन के सहयोग से सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और विकास को मुद्दा बनाने पर सहमति बनी. इससे पहले उन्होंने शनिवार … Read more

छत्तीसगढ़ से जुड़ेंगे 3 बड़े राज्य, रायपुर-रांची दूरी होगी महज 7 घंटे; बिलासपुर समेत कई शहरों को फायदा

रायपुर  रायपुर से रांची और धनबाद तक का सफर अब आसान होने वाला है. क्योंकि छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच बन रहा रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के बीच गेंमचेंचर होने वाला है. इसके बनने के बाद रायपुर से रांची का सफर महज 7 घंटे में पूरा हो जाएगा. जबकि रायपुर से धनबाद का सफर भी 8 से 9 घंटे के बीच में पूरा हो जाएगा. इस हाईवे के बनने से छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों से और तेज हो जाएगी. 707 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का काम अलग-अलग चरणों में पूरा किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ के लिहाज से यह प्रोजेक्ट बेहद अहम माना जा रहा है. क्योंकि इससे न केवल पश्चिम की तरफ रोड कनेक्टिविटी मजबूत होगी. बल्कि ईधन और समय की भी अच्छी बचत होनी शुरू हो जाएगी।  रायपुर से रांची 7 घंटे में  रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर (EC-07) के बनने के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और झारखंड की राजधानी रांची के बीच सफर आसान हो जाएगा. अभी दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करने में 13 से 14 घंटे का समय लग जाता है, क्योंकि टू-लेन रास्तों से होकर जाना पड़ता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर 7 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. वहीं दोनों शहरों के बीच 30 किलोमीटर तक का फर्क आएगा।  रायपुर से धनबाद का सफर 9 घंटे में  छत्तीसगढ़ और झारखंड के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से रायपुर और धनबाद की दूरी में भी बड़ा अंतर आएगा. अभी दोनों शहरों के सफर में 14 से 16 घंटे का समय लगता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने से दोनों शहरों के बीच का सफर 8 से 9 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह एक्सप्रेसवे पुराने घुमावदार रास्तों के बजाय कई जगह बिल्कुल नया और सीधा रास्ता बना देगा. रायपुर से धनबाद के बीच बनकर तैयार होने वाला है यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे एक्सेस-कंट्रोल्ड से लेस होगा. जिससे यहां 100 किलोमीटर रफ्तार से गाड़ियां दौड़ सकेगी।  छत्तीसगढ़ की तीन राज्यों तक कनेक्टिविटी     छत्तीसगढ़: रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर तक जाएगा.      झारखंड: गुमला, रांची, बोकारो और धनबाद तक जाएगा.     यहां से आगे का यह सफर छत्तीसगढ़ को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी कनेक्ट कर देगा. छत्तीसगढ़ में 384 किलोमीटर का हिस्सा  रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे का 384 किलोमीटर का हिस्सा छत्तीसगढ़ में बनाया जा रहा है. प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की तरफ से प्रेस रिलीज जारी करके बताया गया कि NHAI ने पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा तक NH-43 पर इस प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया है. यह राजमार्ग सीधे तौर पर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक केंद्रों को झारखंड के धनबाद से जोड़ देगा. रायपुर से बिलासपुर के बीच का पुराना मार्ग 6-लेन के ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो रहा है. जबकि बिलासपुर से आगे धनबाद तक यह पूरी तरह से एक नया रूट होगा. यह टोटल 104.25 किलोमीटर लंबा रूट है।  ट्रैफिक का दवाब नहीं होगा  इस एक्सप्रेसवे की खास बात यह है कि रास्ते में पड़ने वाले बड़े शहरों जैसे रायपुर, कोरबा, जशपुर, गुमला, रांची, बोकारो के बाहर से बायपास और ओवरब्रिज दिए गए हैं. जिससे शहर के अंदर का लोकल ट्रैफिक और जाम सफर को धीमा नहीं करेगा. इस पूरे रूट पर 382 से अधिक स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं. जिसमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर्स और जंगली जानवरों को पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर अंडरपास शामिल हैं. जिससे ट्रैफिक का दवाब कम रहेगा।  2027 तक शुरू करने की तैयारी फिलहाल एनएचएआई की तरफ से छत्तीसगढ़ और झारखंड में अलग-अलग चरणों में इसका काम शुरू हो चुका है. एक्सप्रेसवे का ज्यादातर हिस्सा 2026 के दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जबकि 2027 तक इसे शुरू करने की तैयारी है. यह एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद लॉजिस्टिक्स लागत को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देगा. जिससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी हो जाएगी। 

MP में 12 और सड़कों पर टोल की तैयारी, बढ़ेगा सफर का खर्च; सरकार को सालाना 3 हजार करोड़ की उम्मीद

भोपाल  मध्यप्रदेश में आने वाले समय में सड़क से सफर करना महंगा हो सकता है। राज्य सरकार सड़कों से होने वाली आय बढ़ाने के लिए टोल व्यवस्था का विस्तार करने की तैयारी में है। कम से कम 12 और सड़कों को टोल के दायरे में लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य सड़कों को भी भविष्य में इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। फिलहाल प्रदेश में मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) की अलग-अलग योजनाओं के तहत 93 सड़कों पर 139 टोल प्लाजा संचालित हो रहे हैं। विभाग का मानना है कि नई सड़कों को टोल व्यवस्था से जोड़कर सरकार की आय में बड़ा इजाफा किया जा सकता है। अभी 400 करोड़, लक्ष्य 3 हजार करोड़ तक पीडब्ल्यूडी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के टोल से सालाना करीब 4 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। इसके मुकाबले पीडब्ल्यूडी और एमपीआरडीसी की टोल से कमाई करीब 400 करोड़ रुपये सालाना है। इसी अंतर को देखते हुए विभाग अगले 10 से 15 साल में टोल से होने वाली आय को बढ़ाकर 2 हजार से 3 हजार करोड़ रुपये सालाना तक पहुंचाना चाहता है। इसके लिए नई सड़कों का निर्माण टोल आधारित मॉडल पर करने पर जोर दिया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार टोल आधारित नई सड़कों से विभाग की आय बढ़ेगी। इससे सड़क क्षेत्र में निवेश के साथ राज्य के राजस्व में भी विभाग का योगदान बढ़ाया जा सकेगा।  निजी कंपनियों के बजाय सरकार के पास आएगा टोल सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी अब हाइब्रिड एन्युटी मॉडल यानी एचएएम को ज्यादा बढ़ावा देने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य यह भी है कि सड़क बनने के बाद टोल से मिलने वाली राशि सरकार के पास आए। बीओटी मॉडल में सड़क बनाने वाली निजी कंपनी निवेश करती है और तय अवधि तक टोल से अपनी लागत और मुनाफा वसूलती है। वहीं एचएएम में सड़क निर्माण की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार देती है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत राशि निजी कंपनी लगाती है। इस मॉडल में सड़क बनने के बाद टोल वसूली पीडब्ल्यूडी के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। यही वजह है कि विभाग नई परियोजनाओं के लिए एचएएम मॉडल को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहा है।  एमपीआरडीसी के टोल आधारित सड़क प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक हाल में कुछ सड़कों को एचएएम के तहत मंजूरी दी गई है। इनमें सिवनी-बालाघाट, विदिशा-भोपाल और दमोह-कटनी सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इन सड़कों पर टोल प्लाजा बनाए जाने की योजना है। इसके अलावा आने वाले समय में एचएएम के तहत और सड़क परियोजनाएं मंजूर किए जाने की तैयारी है।  वाहन चालकों पर बढ़ेगा खर्च नई सड़कों को टोल नेटवर्क में शामिल किए जाने का सीधा असर वाहन चालकों पर पड़ेगा। इन सड़कों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को निर्धारित शुल्क देना होगा। सरकार जहां इसे सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए अतिरिक्त आय का जरिया मान रही है, वहीं यात्रियों और माल परिवहन करने वाले वाहनों के लिए यात्रा की लागत बढ़ने की संभावना है। नई सड़कों पर टोल लागू होने से पहले शुल्क की दर और वसूली की व्यवस्था तय की जाएगी। 

सात जिलों में 35 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण

भोपाल  लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह एवं विभाग के प्रमुख सचिव  सुखवीर सिंह के निर्देशानुसार प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण व्यवस्था के तहत 5 सितंबर को सात जिलों में 35 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया। मुख्य अभियंताओं के सात दलों ने विदिशा, बालाघाट, मुरैना, झाबुआ, मैहर, नीमच एवं निवाड़ी जिलों में यादृच्छिक आधार पर चयनित कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण किए गए कार्यों में लोक निर्माण विभाग के सड़क एवं पुल संबंधी 21, पीआईयू के चार भवन, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के छह, मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के तीन तथा राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित एक कार्य शामिल है। औचक निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। अधिकारियों को नोटिस, ठेकेदार के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई विदिशा जिले में चटोली मुख्य सड़क से हबीबगंज-कैथोरा तक चार किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाए जाने पर संबंधित अनुविभागीय अधिकारी एवं उपयंत्री को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। साथ ही ठेकेदार मेसर्स अनादि कंस्ट्रक्शन कंपनी, सिरोंज के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई करने के निर्देश मुख्य अभियंता, भोपाल को दिए गए। विदिशा जिले के नटेरन में मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा निर्माणाधीन शासकीय एक्सीलेंस हाई स्कूल भवन की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। संबंधित कंसल्टेंट, इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर एवं आर्किटेक्ट को नोटिस जारी करने तथा ठेकेदार मेसर्स एसेंट कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार, 20 अगस्त को नरसिंहपुर जिले में निरीक्षण किए गए मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के करेली-सिंहपुर-डांगीढाना मार्ग की स्थिति संतोषजनक नहीं पाए जाने पर ठेकेदार मेसर्स गैनन डंकरली एंड कंपनी लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने और राशि राजसात करने के निर्देश मुख्य अभियंता, एमपीआरडीसी को दिए गए। निरीक्षण किए गए अन्य 23 कार्यों में पाई गई कमियों को दूर करते हुए आवश्यक आंशिक सुधार निर्धारित समय-सीमा में कराने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए। लोकपथ की शिकायतों का चार दिन में हो निराकरण प्रबंध संचालक  यादव ने औचक निरीक्षण में सामने आई कमियों को समय-सीमा में दूर कराने और मुख्य अभियंता कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का शिकायतकर्ता की संतुष्टि के साथ एल-1 स्तर पर निराकरण कराने तथा मुख्य अभियंताओं एवं अधीक्षण यंत्रियों को इसकी नियमित समीक्षा करने को कहा। लोकपथ ऐप पर प्राप्त शिकायतों का निराकरण अनिवार्य रूप से चार दिवस में करने के निर्देश भी दिए गए। वर्षाकाल में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत को दें प्राथमिकता सड़क मरम्मत के साथ सड़क सुरक्षा, जंगल सफाई, रोड मार्किंग एवं पेंटिंग के कार्य समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। सड़क एवं पुल-पुलियों के आवश्यक संधारण, वर्षाकाल में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत तथा चिन्हित ब्लैक स्पॉट के शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म सुधार कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने को कहा गया। परफॉर्मेंस गारंटी वाले कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर वर्षाकाल समाप्त होते ही कार्य प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में विभागीय परिसंपत्तियों से संबंधित किसी भी घटना की जानकारी तत्काल इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम में दर्ज करने, एमपीआरडीसी के एआरएस सिस्टम के सूचना बोर्ड लगाने, सेफ स्कूल जोन मॉडल के प्रस्ताव भेजने तथा लोक कल्याण सूचकांक पोर्टल पर विभागीय जानकारी नियमित रूप से अद्यतन करने के निर्देश दिए गए। लोक कल्याण सरोवर एवं पौधारोपण के नवीन लक्ष्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने को भी कहा गया। इसके अतिरिक्त बिटुमिन के बिलों का संबंधित रिफाइनरी के पोर्टल पर सत्यापन, जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई तथा औचक निरीक्षण व्यवस्था की गंभीरता एवं प्रभावशीलता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। आगामी 15 सितंबर को आयोजित होने वाले अभियंता दिवस की सभी तैयारियां भी समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा गया।  

पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना से सरगुजा में बढ़ रही ऊर्जा आत्मनिर्भरता

रायपुर प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना सरगुजा जिले में परिवारों को बिजली खर्च से राहत देने के साथ उन्हें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। घरों की छतों पर स्थापित रूफटॉप सोलर संयंत्र अब केवल घरेलू बिजली की जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हितग्राही अतिरिक्त बिजली का उत्पादन कर विद्युत ग्रिड में भी योगदान दे रहे हैं। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत आमदरहा निवासी आलम साय रजवाड़े इसकी प्रेरणादायी मिसाल हैं। बिजली उपभोक्ता से बने बिजली दाता  आलम साय ने अपने घर की छत पर प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर संयंत्र स्थापित कराया। उन्होंने बताया कि संयंत्र लगने से पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग 1,500 से 2,000 रुपये तक आता था। सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू होने के बाद पिछले लगभग साढ़े तीन महीने से उनका बिजली बिल शून्य है। इससे परिवार के मासिक खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली है।  आलम साय कहते हैं, “पहले मैं बिजली उपभोक्ता था, लेकिन अब बिजली दाता बन गया हूं।” उन्होंने बताया कि सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली से पहले घर की जरूरत पूरी होती है और इसके बाद बचने वाली अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है। साढ़े तीन माह में 850 यूनिट अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी  आलम साय के अनुसार उनके घर में स्थापित सोलर संयंत्र से घरेलू खपत के बाद अतिरिक्त बिजली का भी उत्पादन हो रहा है। लगभग साढ़े तीन महीने की अवधि में करीब 850 यूनिट अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा चुकी है। इस तरह उनका परिवार बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में भी भागीदार बन गया है। 1.08 लाख रुपये की डबल सब्सिडी से कम हुआ आर्थिक भार  आलम साय ने बताया कि सोलर संयंत्र स्थापित करने के लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। इस तरह कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी मिलने से सोलर संयंत्र स्थापित करने का आर्थिक भार काफी कम हुआ। उन्होंने बताया कि योजना के तहत आवेदन से लेकर संयंत्र स्थापना तक की प्रक्रिया सुविधाजनक रही। योजना से मिले लाभ से उत्साहित आलम साय ने अन्य पात्र बिजली उपभोक्ताओं से भी प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने की अपील की। “बिजली बिल से मिली राहत, योजना से बहुत खुश हूं”  आलम साय ने कहा, “मेरा बिजली बिल लगभग साढ़े तीन महीने से शून्य है। योजना का मुझे बहुत फायदा मिला है और मैं इससे बहुत खुश हूं।” उन्होंने आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने और इसके लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। लक्ष्य के करीब पहुंचा सरगुजा, 1,733 घरों में लगे सोलर संयंत्र विभागीय जानकारी के अनुसार सरगुजा जिले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल 2,000 सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 1,733 घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें शहरी क्षेत्र के 1,360 तथा ग्रामीण क्षेत्र के 373 संयंत्र शामिल हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से सरगुजा में घरों की छतें अब ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन रही हैं। योजना से जहां परिवारों के बिजली खर्च में कमी आ रही है, वहीं स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी जिले की भागीदारी मजबूत हो रही है।  

स्वच्छ वायु प्रबंधन में मध्यप्रदेश का स्वर्णिम प्रदर्शन: इंदौर द्वितीय, जबलपुर तृतीय और भोपाल चौथे स्थान पर, वार्ड श्रेणी में भोपाल का वार्ड-60 अलंकृत

भोपाल  पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जनभागीदारी की दिशा में मध्यप्रदेश ने स्वर्णिम उपलब्धि अर्जित की है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में देश के शीर्ष पाँच स्वच्छ वायु शहरों में प्रदेश के तीन प्रमुख नगरों ने अनुपम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय पटल पर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस' के अवसर पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में 10 लाख से अधिक आबादी वाली श्रेणी में इंदौर एवं जबलपुर तथा वार्ड स्तरीय श्रेणी में भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार द्वारा प्रदान किया गया। दस लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी में प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले महानगरों की प्रतिस्पर्धा में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। इस वर्ग में इंदौर ने संपूर्ण देश में द्वितीय, जबलपुर ने तृतीय तथा राजधानी भोपाल ने चतुर्थ स्थान अर्जित कर स्वच्छ वायु प्रबंधन में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। इसी श्रेणी में ग्वालियर ने 39वाँ स्थान प्राप्त किया। वहीं, 3 से 10 लाख जनसंख्या वर्ग में उज्जैन ने 16वाँ और सागर ने 21वाँ स्थान प्राप्त किया, जबकि 3 लाख से कम जनसंख्या श्रेणी में देवास ने 7वाँ स्थान हासिल किया। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संचालित इस सर्वेक्षण में देश के 130 प्रमुख शहरों के मध्य निर्धारित मापदंडों पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए रैंकिंग जारी की जाती है। इंदौर एवं जबलपुर की अनुकरणीय उपलब्धियां स्वच्छता के क्षेत्र में निरंतर नवमानक स्थापित करने वाले इंदौर नगर ने धूल नियंत्रण, मैकेनाइज्ड सड़क सफाई, हरित क्षेत्र के विस्तार तथा नागरिक सहभागिता के बल पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। समारोह में इंदौर नगर निगम की ओर से महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल एवं एमआईसी सदस्य श्री अश्विनी शुक्ला ने यह सम्मान ग्रहण किया। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण एवं सुनियोजित पर्यावरण संरक्षण कार्यों के दम पर तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले जबलपुर नगर निगम की ओर से महापौर श्री जगत बहादुर सिंह 'अन्नू', आयुक्त श्री राम प्रसाद अहिरवार, श्री कमलेश श्रीवास्तव, श्री संभव अयाची एवं श्री जी.एस. मरावी ने पुरस्कार प्राप्त किया। भोपाल के वार्ड क्रमांक-60 को मिला राष्ट्रीय गौरव वार्ड स्तरीय वायु गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार और नवाचारों के लिए भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से सराहा गया। स्थानीय स्तर पर हरित पहल, सघन पौधारोपण तथा नागरिक जागरूकता के प्रभावी प्रयासों के लिए अपर आयुक्त श्री अमन मिश्रा एवं एमआईसी सदस्य श्री आर. के. सिंह बघेल ने यह प्रतिष्ठित सम्मान स्वीकार किया। सतत् विकास और दूरदर्शी नेतृत्व की सुखद परिणति यह राष्ट्रीय गौरव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत' के पावन संकल्प तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में संचालित पर्यावरण संरक्षण अभियानों का फलश्रम है। प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा धूल नियंत्रण, जल छिड़काव, खुले में कचरा जलाने पर रोकथाम, निर्माण स्थलों की निगरानी एवं व्यापक जनचेतना के जो प्रयास किए गए हैं, आज उन्हीं की परिणति स्वरूप मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय वायु संरक्षण पटल पर यह सफलता अर्जित की है।  

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  दयालदास बघेल ने आज मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर में खाद्य विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली । उक्त बैठक में सचिव खाद्य मती रीना बाबा साहेब कंगाले, संचालक खाद्य डॉ. फरिया आलम, प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम  विलास भोसकर संदीपन, प्रबंध संचालक विपणन संघ  जितेन्द्र शुक्ला, महाप्रबंधक भारतीय खाद्य निगम  दीपक शर्मा एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।  मंत्री  बघेल ने सिटी गैस वितरण योजना के विभागीय वेबसाइट का शुभारंभ किया गया। मंत्री   बघेल ने बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में भारतीय खाद्य निगम एवं नागरिक आपूर्ति निगम में कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन की गति बढ़ाये जाने के निर्देश दिये गये। माह सितंबर एवं अक्टूबर 2026 के 2 माह के चावल का समयानुसार भंडारण एवं वितरण कराये जाने के निर्देश दिये। आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान उपार्जन की तैयारियों यथा -बारदानों की व्यवस्था, नवीन खरीदी केन्द्रों में धान खरीदी की समुचित व्यवस्था आदि के संबंध में निर्देश दिये गये। मंत्री   बघेल ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसान पंजीयन के संबंध में शेष किसानों के एग्रीस्टेक पंजीयन कार्य में तेजी लाये जाने के निर्देश दिये ।  उन्होंने खरीदी केन्द्रों एवं संग्रहण केन्द्रों में शॉर्टेज की मात्रा में कमी लाये जाने के संबंध में निर्देश दिये गये।   खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री ने राज्य भण्डार गृह निगम के गोदाम निर्माण प्रगति की समीक्षा की एवं निर्माणाधीन गोदामों के समयानुसार निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये। नापतौल विभाग की की समीक्षा करते हुए धरमकांटा का सत्यापन धान खरीदी प्रारंभ होने के पूर्व किये जाने के निर्देश दियेे। बैठक में जिला खाद्य नियंत्रक/खाद्य अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम, प्रबंधक राज्य भण्डार गृह निगम एवं नापतौल के जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

संदिग्ध अवैध शराब की घटना पर जिला दंडाधिकारी ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

भोपाल  कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सागर प्रतिभा पाल ने सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध अमानक/अवैध शराब के सेवन से हुई घटना को गंभीरता से लेते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। विगत दिनों सागर जिले की शाहगढ़ तहसील के ग्राम नौराज एवं गूगरा खुर्द तथा बंडा तहसील के ग्राम बमूरा आदि में 4 एवं 5 सितंबर की दरम्यानी रात संदिग्ध अमानक/अवैध शराब के सेवन के बाद ग्रामीणों के बीमार होने तथा कुछ मरीजों की मृत्यु की घटना सामने आई थी। प्रभावित ग्रामीणों ने उल्टी, बेहोशी एवं शरीर में झटके जैसे लक्षणों की शिकायत के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बंडा पहुंचकर उपचार कराया। चिकित्सकों द्वारा मरीजों का उपचार किया गया, लेकिन उपचार के दौरान कुछ मरीजों की मृत्यु हो गई। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने घटना की वास्तविक परिस्थितियों एवं कारणों का तथ्यात्मक रूप से पता लगाने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 196 के तहत मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतकों द्वारा शराब का सेवन किया गया था, जिसे संदिग्ध अमानक/अवैध शराब बताया गया है। मजिस्ट्रियल जांच के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी, जैसीनगर, जिला सागर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच में घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसका वास्तविक कारण क्या था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इन सभी पहलुओं की विस्तृत जांच की जाएगी। मजिस्ट्रियल जांच में यह भी निर्धारित किया जाएगा कि मृतकों की मृत्यु का वास्तविक कारण संदिग्ध अमानक/अवैध शराब का सेवन था अथवा कोई अन्य कारण। साथ ही शराब के निर्माण, भंडारण एवं वितरण से संबंधित तथ्यों की भी जांच की जाएगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि इसमें कौन-कौन संलिप्त थे। इसके अतिरिक्त, संबंधित नियामकीय विभागों द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई या नहीं, घटना के लिए मुख्य रूप से कौन-कौन से व्यक्ति जिम्मेदार हैं तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन-कौन से प्रशासनिक एवं कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं, इसकी भी जांच की जाएगी। जिला प्रशासन ने जांच अधिकारी को निर्धारित सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक जांच कर स्पष्ट अभिमत सहित जांच प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।