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देवास फैक्ट्री ब्लास्ट पर सरकार एक्शन में, डिप्टी CM जगदीश देवड़ा को मौके पर भेजा गया

देवास  पटाखा फैक्ट्री हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है। वहीं, कई लोगों की स्थिति गंभीर है, जिनका अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। सीएम मोहन यादव ने देवास की घटना पर दुख जताया है। साथ ही मृतक के परिजनों को 4-4 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा को मौके पर जाने के निर्देश दिए हैं। हादसे की जांच के निर्देश दिए दरअसल, देवास हादसे पर सीएम मोहन यादव ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। हादसे की जानकारी लगते ही सीएम ने प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को घटना स्थल जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इस हादसे की जांच के आदेश भी दे दिए हैं। डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा को भी भेजा हादसे को लेकर सीएम मोहन यादव ने कहा कि देवास जिले के टोंककला में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में कई लोगों के हताहत होने का समाचार हृदय विदारक है। मैंने जिले के प्रभारी और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, गृह सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को घटना स्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। घटना की जांच के आदेश भी दिए हैं। घायलों का निःशुल्क इलाज करने के लिए निर्देश दिए हैं। बाबा महाकाल से दिवंगतों की शांति, शोकाकुल परिजनों को दुःख सहन करने की शक्ति तथा दुर्घटना में घायलों को त्वरित स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं। हिरासत में फैक्ट्री मालिक वहीं, घटना के बाद फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय को पुलिस ने हिरासत में लिया है। अभी तक तीन मौतों की पुष्टि हुई है। वहीं, कई लोग घायल हुए हैं। 12 घायलों का इलाज देवास जिला अस्पताल, 8 का अमलतास अस्पताल, तीन का एमवॉयएच इंदौर और एक टी चोइथराम अस्पताल में इलाज चल रहा है। कुछ घायलों की स्थिति गंभीर है।

बस्तर के 3056 गाँवों तक पहुँचा मोबाइल नेटवर्क, 425 गाँवों में पहली बार बस सेवा

रायपुर  मुख्य सचिव  विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में नियद नेल्लानार योजना के कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत आगामी कार्य योजना के संबंध में अधिकारियों से विचार-विमर्श भी किया। नियद नेल्लानार योजना के तहत बस्तर क्षेत्र के सुदूर वनांचल गांवों तक बिजली की लाईने पहुंची है। गांवों में मुक्त बिजली कनेक्शन और सोलर लाईट लगायी गई है। मनरेगा से स्थानीय रोजगार, प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के मकान बनाये गए हैं। क्षेत्र के अंदरूनी ईलाकों में अब ग्रामीण को राशनकार्ड, उज्जवला गैस, बैंक पास बुक जैसी अनेक व्यक्तिमूलक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ हितग्राही उठा रहें है।   बैठक में जानकारी दी गई कि पिछले दो वर्षों में 5016 प्राथमिक शालाएं, 8947 आंगनबाड़ी केन्द्र खोले गए है। नियद नेल्लानार योजना में शामिल ग्रामों में आयुष्मान मंदिर बनाकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचायी  गई है। 3056 ग्रामों में मोबाईल नेटवर्क पहुचाया गया हैं। इसी तरह से 85 प्रतिशत बसाहटों में बारह मासी सड़कें बनायी गई है। मुख्यमंत्री बस सेवा योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग के 50 मार्गों पर 52 बसों का संचालन किया जा रहा है। क्षेत्र के 425 गांवों में पहली बार बस सेवाएं प्रारंभ की गई है। बैठक में नियद नेल्लानार योजना 2.0 के संबंधी कार्ययोजना के बारे में अधिकारियों ने विस्तार से चर्चा की।  बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास की अपर मुख्य सचिव मती ऋर्चा शर्मा, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग  भीम सिंह, आयुक्त मनरेगा  तारण प्रकाश सिन्हा सहित ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

भीषण आंधी-बारिश से यूपी में भारी तबाही, योगी सरकार ने 24 घंटे में राहत राशि देने को कहा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में खराब मौसम, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाई है। प्रदेश में पिछले 24 घंटे में आंधी-तूफान व आकाशीय बिजली गिरने से 111 लोगों की मौत हुई है, जबकि 72 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 170 पशुहानि और 227 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को प्रभावित परिवारों से मुलाकात करने और हालात का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को 24 घंटे के भीतर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के भी निर्देश दिए हैं। राहत आयुक्त कार्यालय को खराब मौसम से प्रभावित 26 जिलों से भेजी रिपोर्ट के मुताबिक प्रयागराज में सबसे ज्यादा 21 लोगों की मौत हुई है। मीरजापुर में 19, संत रविदास नगर में 16 और फतेहपुर में 11 लोगों की जान गई। रायबरेली और उन्नाव में छह-छह लोगों की मौत दर्ज की गई है। वहीं बदायूं में पांच लोगों की मौत हुई है। प्रतापगढ़ में चार, सोनभद्र व सीतापुर में तीन-तीन और हरदोई, बहराइच, बरेली,चंदौली, कानपुर देहात व संभल में दो-दो लोगों की मौत हुई है। राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार मीरजापुर में 18, फतेहपुर में 15 व संत रविदास नगर में 11 लोग घायल हुए हैं। वहीं कानपुर देहात में सर्वाधिक 33 पशुहानि हुई है, जबकि संत रविदास नगर में 29, रायबरेली में 24, प्रयागराज में 20 व मीरजापुर में 16 पशुहानि के मामले सामने आए हैं। सोनभद्र में सर्वाधिक 75 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इसके अलावा मीरजापुर में 46, बरेली में 21, बदायूं व प्रयागराज में 16-16 और संत रविदास नगर व सीतापुर में 14-14 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्य करने व 24 घंटे के भीतर मुआवजा जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों व अपर जिलाधिकारियों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं प्रभावित परिवारों से मिलकर आवश्यक मदद उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि राहत आयुक्त कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से निरंतर मानिटरिंग की जा रही है। मौसम विभाग द्वारा जारी खराब मौसम की चेतावनी के उपरान्त राहत आयुक्त कार्यालय स्थित कंट्रोल रूम द्वारा सचेत पोर्टल के माध्यम से आम जनमानस को 34.64 करोड़ रेड एवं आरेंज चेतावनी संदेश भेजे गये हैं। उन्होंने बताया कि राहत आपदा हेल्प लाइन नम्बर 1070 पर काल आते ही तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों को जन प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को सहायता राशि का वितरण कराने का निर्देश दिया है। सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि राहत और बचाव कार्यों में पूरी गंभीरता बरती जाए। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुचारु किया जाए। जनता की सुरक्षा और सहायता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जरूर कराएं पोस्टमार्टम आपदा से होने वाली मौतों के मामले में सरकार द्वारा चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। मुआवजे की यह राशि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के आधार पर दिए जाने की व्यवस्था है। इस व्यवस्था की जानकारी कई लोगों को न होने के कारण पोस्टमार्टम के बिना मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है, इससे संबंधित परिवारों को मुआवजे की राशि नहीं जारी की जाती है।  

मैट्रिमोनियल साइट से शुरू हुई शादी की कहानी, भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत ने खड़े किए कई सवाल

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाना अंतर्गत बाग मुगालिया एक्सटेंशन में रहने वाली ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में तनाव बढ़ गया है. ट्विशा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू थीं. उनकी मौत के दूसरे दिन 14 मई को भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है. अभी शव भोपाल एम्स के मुर्दाघर (मोर्चरी) में रखा हुआ है. इस बीच उत्तर प्रदेश के नोएडा से भोपाल पहुंचे ट्विशा के परिजनों ने महिला थाने के बाहर जमकर हंगामा किया और निष्पक्ष जांच की मांग की।  सास और पति पर हत्या के आरोप भोपाल की कटारा हिल्स पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. प्रारंभिक शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर कई चोटों (मल्टीपल इंजरी) का उल्लेख है, जबकि मौत का तात्कालिक कारण फांसी बताया गया है. ट्विशा के परिजनों ने उनकी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना देने और हत्या करने के आरोप लगाए हैं. मामले की जांच कटारा हिल्स थाना प्रभारी (TI) दुबे कर रहे हैं. परिजनों ने साक्ष्य मिटाने और पुलिस पर दबाव बनाने की आशंका जताते हुए पूरे मामले की फॉरेंसिक जांच की मांग की है।  मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हुई थी शादी पुलिस जांच में सामने आया है कि 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं. मैट्रिमोनियल साइट 'शादी डॉट कॉम' के माध्यम से उनकी जान-पहचान भोपाल के क्रिमिनल लॉयर समर्थ सिंह से हुई थी. दोनों ने 12 दिसंबर 2025 को विवाह किया था. शादी से पहले ट्विशा दिल्ली में नौकरी करती थीं. जांच में यह भी पता चला है कि दो माह पहले उनका गर्भपात (मिसकैरेज) हुआ था. पुलिस अब हर पहलू से इस मामले की तफ्तीश कर रही है।   ट्विशा शर्मा की आखिरी रात की दास्तां 12 मई 2026 ट्विशा की जिंदगी की आखिरी रात साबित हुई. उनके पिता नवनिधि शर्मा के अनुसार, मंगलवार रात करीब 10:05 बजे ट्विशा ने नोएडा में अपनी मां से फोन पर बात की थी. उसने बताया था कि उसे बहुत परेशान किया जा रहा है और अब उससे यह सब सहन नहीं हो रहा. वह बात कर ही रही थी कि तभी उसका पति कमरे में आ गया और ट्विशा ने घबराहट में कॉल काट दिया. इसके बाद मां ने उसे कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. रात 10:20 बजे सास गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मां को सूचना दी कि ट्विशा सांस नहीं ले रही है और उसे भोपाल एम्स ले जाया जा रहा है। 

मोबाइल मालिकों ने जताया पुलिस का आभार

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में आमजन की संपत्ति की सुरक्षा एवं गुम/चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी हेतु लगातार कार्यवाहियां की जा रहीं हैं। आधुनिक तकनीक, CEIR पोर्टल, साइबर विश्लेषण एवं स्थानीय आसूचना के प्रभावी उपयोग से विगत दो सप्‍ताह में मध्‍यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में 1021मोबाईल फोन जिनकी कीमत लगभग 2 करोड़ 26लाख रूपए से अधिक है, नागरिको को लौटाये है। मोबाइल मालिकों ने अपने गुम हुए मोबाइल वापस मिलने पर मध्‍यप्रदेश पुलिस का हार्दिक आभार व्‍यक्‍त किया। प्रमुख कार्यवाही ग्वालियर जिले में ‘’तेरा तुझको अर्पण’’अभियान के तहत ग्वालियर कीसाइबर सेल टीम द्वारा CEIR पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए विभिन्न राज्यों एवं शहरों से 571 गुम मोबाइल फोन जब्‍त किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 41 लाख रूपये है। साथ ही लावारिस मिले मोबाइलों को स्वयं साइबर सेल में जमा कराने वाले जागरूक नागरिकों को पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। सतना पुलिस द्वारा “ऑपरेशन रिंगटोन 2.0” के तहत CEIR पोर्टल की सहायता से 155 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर जब्‍त किए गए, जिनकी कीमत लगभग 29 लाख 31 हजार रूपये है। गुना पुलिस ने तकनीकी दक्षता एवं CEIR पोर्टल की सहायता से 64गुम मोबाइल फोन जब्‍त कर संबंधित धारकों को सुपुर्द किए हैं। जब्‍त मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग 12 लाख 50 हजार रूपये है। जबलपुर जिले में साइबर सेल टीम द्वारा प्रभावी कार्यवाही करते हुए 106 गुम मोबाइल फोन (लगभग 18 लाख रूपए) जब्‍त किए गए। आगर मालवा पुलिस द्वारा “ऑपरेशन रिंगटोन” के तहत 81 गुम मोबाइल फोन जब्‍त कर उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए गए। बरामद मोबाइलों की कुल कीमत 15 लाख रूपये से अधिक है। इस दौरान नागरिकों को साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड एवं यातायात नियमों के प्रति भी जागरूक किया गया। बुरहानपुर जिले के थाना लालबाग पुलिस ने मोबाइल शॉप में चोरी की घटना का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्‍जे से एप्पल एवं अन्य कंपनियों के 3 मोबाइल फोन, 2 टैबलेट, 01 आईपोड एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सहित लगभग 3लाख 20 हजार रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है। रेलवे पुलिस जीआरपी की विभिन्न इकाइयों द्वारा भी मोबाइल चोरी के मामलों में प्रभावी कार्यवाही की गई। जीआरपी कटनी ने शातिर मोबाइल चोर गिरोह का भंडाफोड़ कर 10 मोबाइल फोन सहित लगभग 3 लाख 20 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है। जीआरपी जबलपुर ने आरोपी से 67 हजार कीमत के 4 मोबाइल जप्त किए। वहीं जीआरपी-आरपीएफ उज्जैन ने मोबाइल चोरी का खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार करते हुए 18 मोबाइल फोन, जिनकी कीमत लगभग 1 लाख 88 हजार रूपये है, जब्‍त किए। विदिशा जिले की कोतवाली थाना पुलिस ने मोबाइल चोरी के मामले में त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर 1 लाख 50 हजार रूपए कीमत के चोरी हुए 6मोबाइल फोन जब्‍त किए। इन समस्त कार्यवाहियों में CEIR पोर्टल, सिटीजन कॉप एप एवं साइबर सेल की तकनीकी जांच का महत्वपूर्ण योगदान रहाहै। ऑनलाइन शिकायत प्रणाली के माध्यम से अब आमजन घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज कर पा रहे हैं, जिससे समय कीबचत के साथ-साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो रही है। क्या है? CEIR पोर्टल सी.ई.आई.आर.पोर्टल- सीईआईआर (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) भारत सरकार दूरसंचार विभाग का पोर्टल है। CEIR-Sanchar Saathi की मदद से कोई भी व्यक्ति अपने चोरी अथवा गुम हुए मोबाइल का आईएमईआई नंबर ब्लांक कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसके उपरान्त पुलिस द्वारा इस पोर्टल के माध्यम से मोबाइल को आसानी से खोजा जा सकेगा।  

दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा उपस्थित थे। बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ  क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास  संभावित है।

सर्राफा बाजार में आग! इंदौर में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी छलांग

इंदौर   घरेलू बुलियन बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, भारतीय तो रुपए में लगातार कमजोरी और आयात ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी के चलते सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। इंदौर बाजार में सोने की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी ने लगभग 6.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में आरटीजीएस पर सोना 8000 रुपए महंगा होकर 1,59,000 ने रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी 9000 रुपए उछलकर न 2,78,000 रुपए प्रति किलो रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर सोना 4701.20 डॉलर प्रति औंस और चांदी 87.04 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई। उतार-चढ़ाव रहने की संभावना विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाना, अमरीका-ईरान संघर्ष को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक मुद्रास्फीति (महंगाई) की चिंताओं ने कीमती धातुओं में सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग बढ़ा दी है। बाजार के कारोबारी हाल ही में आयात शुल्क में किए गए बदलावों असर का भी आकलन कर रहे है, जिससे सोने की कीमतों को और समर्थन मिल सकता है।  टैक्स बढ़ने से तस्करी को मिल सकता बढ़ावा वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं के कारण आने वाले कारोबारी सत्रों में बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलाटिलिटी) अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। सरकार का उद्देश्य विदेशी खरीद कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को घटाना बताया जा रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सरकार के इस फैसले को अहम माना जा रहा है। हालांकि, सराफा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि टैक्स बढ़ने से तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। उनका इस संबंध में तर्क है कि पहले जब आयात शुल्क कम किया गया था, तब सोने की स्मगलिंग में कमी आई थी। भारतीय ज्वैलरी के निर्यात को बढ़ावा देने की मांग मध्यप्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश शास्त्री ने कहा कि आयात ड्यूटी बढ़ोतरी से सोने की तस्करी को ड्यूटी में भारी बढ़ावा मिल सकता है। 15 प्रतिशत आयात शुल्क और 3 प्रतिशत जीएसटी मिलाकर सोने पर कुल 18 प्रतिशत का सरकार ने सोने की खरीद कम अतिरिक्त भार पड़ रहा है। करने की अपील भी की है। सरकार को भारतीय कारीगरों और ज्वैलरी उद्योग को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि बेहतर ज्वैलरी का निर्यात बढ़ सके।  

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मध्यप्रदेश में बिना TET योग्यता के शिक्षक नियुक्ति पर रोक

भोपाल   मध्यप्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों को देश की सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के मामले पर सुनवाई करते हुए एक स्पष्ट निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि- पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है, ऐसे में अब बिना परीक्षा पास किए कोई भी शिक्षक नहीं बन सकता है। बता दें कि साल 1998 से 2009 के बीच नियुक्त किए गए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग करते हुए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं। 'बिना परीक्षा पास किए कोई टीचर नहीं बन सकता' बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा में छूट दिए जाने की मांग को लेकर दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले दी जा चुकी है। अब इसमें कोई छूट की गुंजाइश नहीं है और शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में जब नियम लागू हुए थे, उसके बाद 5 साल की रियायत दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। हालांकि इस मामले में अभी कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। क्या है TET परीक्षा ? शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) एक अनिवार्य योग्यता है जिसे NCTE ने 2010 में लागू किया था। यह सुनिश्चित करता है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों में न्यूनतम शैक्षणिक स्तर और कौशल मौजूद है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में स्थिति यह है कि अगर कोर्ट राहत नहीं देता है, तो करीब 1.5 लाख अनुभवी शिक्षकों को फिर से छात्र बनकर परीक्षा देनी होगी। TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है। जातीय और श्रेणीवार विवरण की मांग सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार से शिक्षकों का विस्तृत डेटा मांगा है। अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह के अनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पूर्व शिक्षकों की एक श्रेणीवार (Category-wise) सूची प्रस्तुत की जाए। इसमें सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों की सटीक संख्या स्पष्ट होनी चाहिए। बता दें कि मध्य प्रदेश में लगभग 1.50 लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं की है, उनके भविष्य के लिए यह फैसला निर्णायक साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट के पहले का क्या था आदेश?-सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश के 1.50 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया था। गौरतलब है कि TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है।  

भिंड मामले के बाद KP यादव सतर्क, बड़ा काफिला कैंसिल; सादगी से गुना जाने का ऐलान

भोपाल/गुना  मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों शक्ति प्रदर्शन और बड़े वाहन काफिलों को लेकर संगठन का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। इसी सख्ती का असर अब गुना के पूर्व सांसद केपी यादव पर भी दिखाई दिया है। भोपाल में 500 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ शक्ति प्रदर्शन करने के बाद अब केपी यादव ने अपना प्रस्तावित रोड शो कैंसिल कर दिया है। दरअसल, राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करने भोपाल पहुंचे केपी यादव का भव्य स्वागत हुआ था। राजधानी की सड़कों पर करीब 500 वाहनों का लंबा काफिला, जगह-जगह स्वागत मंच और समर्थकों की भारी भीड़ ने इसे एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी चर्चाओं को तेज कर दिया था। लेकिन अब पार्टी के सख्त रुख के बाद केपी यादव ने खुद कदम पीछे खींच लिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वे गुना में काफिले के साथ नहीं बल्कि एक वाहन से जाएंगे। साथ ही कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि सीमित संख्या में ही उनसे मिलने पहुंचें। सूत्रों की मानें तो भाजपा संगठन भिंड में हुई कार्रवाई के बाद किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन को लेकर बेहद गंभीर है। दरअसल, भिंड में 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ निकाली गई रैली के मामले में भाजपा ने किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी थी। प्रदेश नेतृत्व द्वारा जारी पत्र में कहा गया था कि इस तरह के बड़े काफिले प्रधानमंत्री Narendra Modi की “ईंधन बचत और सादगीपूर्ण जीवनशैली” की अपील के विपरीत हैं। संगठन ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त कार्रवाई की थी। इतना ही नहीं, काफिले के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित होने और आम लोगों को परेशानी होने का भी उल्लेख किया गया था। अब माना जा रहा है कि उसी कार्रवाई और संगठन के कड़े संदेश को देखते हुए केपी यादव ने समय रहते अपना रोड शो रद्द कर दिया। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के “नो पावर शो” संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में बना हुआ है।

अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को जल्द से जल्द काम पूर्ण करने के दिए निर्देश

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने आज रायपुर में  खम्हारडीह-कचना रेल्वे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन रेलवे ओवर-ब्रिज के अंतिम चरण के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को ओवर-ब्रिज का काम जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने ओवर-ब्रिज पर पैदल चलकर अधिकारियों से इसके तकनीकी मानकों की जानकारी ली। उन्होंने यहां लाइटिंग के लिए अच्छी गुणवत्ता के पोल्स और लाइट्स का उपयोग करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल, प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी और सेतु संभाग के मुख्य अभियंता  एस.के. कोरी भी इस दौरान मौजूद थे। उप मुख्यमंत्री  साव ने कचना ओवर-ब्रिज के निरीक्षण के बाद कहा कि इसका 96 प्रतिशत काम पूर्ण कर लिया गया है। थोड़े से बचे कार्यों को जल्द से जल्द पूर्ण कर इसे यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। इस ओवर-ब्रिज के चालू होने से रायपुर शहर और आसपास के गांवों के हजारों लोगों को ट्रैफिक-जॉम और रेलवे फाटक के बंद होने के कारण यातायात बाधित होने की समस्या से मुक्ति मिलेगी।  साव ने कहा कि राज्य शासन लगातार राजधानी के यातायात को सुदृढ़, व्यवस्थित और तेज करने में लगी हुई है। कचना का यह ओवर-ब्रिज भी इसमें काफी महत्वपूर्ण है, जो अब लगभग पूर्णता की ओर है। इस सड़क से आना-जाना करने वालों के लिए यह बहुप्रतीक्षित ओवर-ब्रिज जल्द ही खोल दिया जाएगा। 49 करोड़ की लागत से बन रहा ओवर-ब्रिज इस रूट के यातायात को करेगा व्यवस्थित और तेज लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रायपुर-वाल्टेयर रेलवे लाइन पर खम्हारडीह और कचना के बीच करीब 49 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन इस रेलवे ओवर-ब्रिज का 96 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। पुल के मध्य के रेलवे वाले भाग के साथ ही दोनों छोरों पर पुल एवं पहुंच मार्ग का काम पूर्ण कर लिया गया है। अभी पेंटिंग एवं फिनिशिंग का कार्य प्रगति पर है। इनके पूर्ण होते ही नाली निर्माण और लाइटिंग का काम तत्परता से प्रारंभ किया जाएगा। इस ओवर-ब्रिज के शुरू हो जाने से इस रूट का यातायात व्यवस्थित और तेज होगा।