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दुष्यंत चौटाला–CIA टीम विवाद में नया मोड़, ADGP–JJP आमने-सामने) GJU

हिसार  हरियाणा के हिसार में दुष्यंत चौटाला और सीआईए टीम से जुड़े विवाद पर बड़ा अपडेट सामने आया है. हिसार रेंज के एडीजीपी केके राव ने पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराते हुए क्लीन चिट दे दी है. हालांकि, इस मुद्दे को लेकर अब एसपी और पूर्व डिप्टी सीएम के बीच वार पलटवार भी देखने को मिला है. सोमवार शाम 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने एडीजीपी से उनके कार्यालय में मुलाकात की. इस दौरान हिसार की कमिश्नर भारती भी मौजूद रहीं. खास बात यह रही कि इस प्रतिनिधिमंडल के साथ दुष्यंत चौटाला भी बैठक में शामिल हुए. मुलाकात का करीब 50 सेकंड का वीडियो हिसार पुलिस द्वारा जारी किया गया, जिसमें बातचीत के कुछ अंश साझा किए गए हैं. वीडियो में क्या दिखा? जारी वीडियो में एडीजीपी केके राव पुलिस का पक्ष लेते नजर आए. उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मामले की बारीकी से जांच की है और पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह सही है. एडीजीपी ने यह भी कहा कि पुलिस को सिविल एरिया में जाकर चेकिंग करने का अधिकार है. इस पर दुष्यंत चौटाला ने तंज कसते हुए कहा, “आप तो एसपी के भी गुरु बन गए.” इसके जवाब में ADGP ने कहा, “मैं एसपी का गुरु हूं, इसलिए यहां बैठा हूं.” दुष्यंत चौटाला ने सवाल उठाया कि कहीं भी यह नहीं लिखा कि पुलिस सादी वर्दी में जाकर रेड कर सकती है. इस पर एडीजीपी ने जवाब दिया कि पुलिस का मुख्य काम कानून व्यवस्था बनाए रखना और न्याय दिलाना है. उन्होंने कहा कि अगर पुलिस कार्रवाई करना बंद कर दे, तो अपराध बढ़ सकते हैं. इस मामले में अभी तक जननायक जनता पार्टी (JJP) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. उधर, पुलिस को क्लीन चिट मिलने के बाद यह मामला फिलहाल शांत होता दिख रहा है, लेकिन राजनीतिक और कानूनी बहस जारी रहने की संभावना है. महापंचायत में क्या हुआ उधऱ, हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी (GJU) शुरु हुए इस विवाद को लेकर सोमवार को क्रांतिमान पार्क में जननायक जनता पार्टी (JJP) की ओर से ‘छात्र हित महापंचायत’ आयोजित की गई. महापंचायत में कई अहम फैसले लिए गए और सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम दिया गया. महापंचायत में तय किया गया कि 21 सदस्यीय कमेटी कमिश्नर और एडीजीपी से मुलाकात कर छात्रों और पार्टी का पक्ष रखेगी. साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि 5 दिन में मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को तेज किया जाएगा. महापंचायत की प्रमुख मांगें     महापंचायत में छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए. इस 21 सदस्यीय कमेटी में 10 छात्र ओर 11 खापों के प्रधान शामिल है.     मुख्य मांगों में सस्पेंड किए गए सभी छात्रों की तुरंत बहाली.     कुरुक्षेत्र और हिसार में छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी.     यूनिवर्सिटी परिसर में सभी छात्र संगठनों को कार्यक्रम करने की अनुमति शिक्षा शुल्क नियंत्रण के लिए रेगुलेटरी बोर्ड का गठन छात्रों के लिए एक्टिविटी सेंटर का निर्माण.     मेस के भोजन की गुणवत्ता की जांच, छात्र-पुलिस विवाद की निष्पक्ष जांच के लिए SIT का गठन. महापंचायत में पहुंचे पूर्णिया (बिहार) से सांसद पप्पू यादव ने कहा कि हरियाणा का यह मुद्दा संसद में उठाया जाएगा. उन्होंने दुष्यंत चौटाला के समर्थन में कहा कि इस संघर्ष में “पूरा बिहार और देश साथ खड़ा है. उधर, पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर आरोप लगाया कि परिसर में आरएएस और भाजपा की विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है. गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी में विवाद यह पूरा विवाद 15 अप्रैल को GJU में शुरू हुआ, जब कार्यक्रम की अनुमति न मिलने पर दिग्विजय चौटाला के नेतृत्व में JJP कार्यकर्ताओं ने वीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. इस दौरान तोड़फोड़ के आरोप में दिग्विजय समेत 8 नेताओं पर केस दर्ज हुआ और 6 को गिरफ्तार किया गया, हालांकि अगले दिन उन्हें जमानत मिल गई. 17 अप्रैल को एफआईआर के विरोध में दुष्यंत चौटाला गिरफ्तारी देने जा रहे थे, तभी रास्ते में उनका सीआईए इंचार्ज पवन कुमार से विवाद हो गया. दुष्यंत ने आरोप लगाया कि उनका काफिला रोककर धमकाया गया, जबकि पुलिस अधिकारी का कहना था कि एस्कॉर्ट गाड़ी के ड्राइवर की लापरवाही के चलते उसे रोका गया. मामले की जांच कर रही SIT ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है. सूत्रों के मुताबिक, सीआईए इंचार्ज पवन कुमार को क्लीन चिट दे दी गई है. महापंचायत के अल्टीमेटम के बाद अब नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर है. यदि तय समय में मांगें पूरी नहीं होतीं, तो हरियाणा में यह आंदोलन और तेज हो सकता है, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा सकता है.

शहरी स्व-सहायता समूहों की बहने ‘सोलर दीदीयाँ’ बनकर लिखेंगी नारी सशक्तिकरण की नई गाथा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण मिशन को एक नई ऊंचाई प्रदान की जा रही है, जिसके अंतर्गत "शहरी स्व-सहायता समूह की बहनें" अब 'पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना' में "सोलर दीदी" के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को संवहनीय आजीविका से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत भोपाल, इंदौर, जबलपुर और सतना के नगर पालिक निगमों से की जा रही है, जहाँ पंजीकृत कुल 17,426 स्व-सहायता समूहों और 593 एरिया लेवल फेडरेशन की वे बहनें जो कक्षा 10वीं या उससे अधिक शैक्षणिक योग्यता रखती हैं, उन्हें "सोलर दीदी" के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त होगा। यह अभिनव पहल भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त अभिसरण कार्यक्रम द्वारा पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना अंतर्गत किया जा रहा है जिसके प्रथम चरण में देश के 12 राज्यों के 40 चयनित निकायों को शामिल किया गया है। योजना के में दीनदयाल अन्त्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को "सोलर दीदी" के रूप में संलग्न कर कार्य संपादित करने की पहल की जा रही है, जो प्रदेश में महिला समूहों की बढ़ती महत्ता और उनकी कार्यक्षमता को रेखांकित करता है। नगरीय आवास एवं विकास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय एवं राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी द्वारा नारी सशक्तिकरण की इस दूरगामी पहल के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे और अपर आयुक्त सह मिशन संचालक,  शिशिर गेमावत इस परियोजना को प्रदेश में एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में स्थापित करने के लिये प्रतिबद्ध हैं, जिससे इन समूहों के माध्यम से आजीविका प्रदाय की दिशा में मध्यप्रदेश देश का सबसे अग्रणी और प्रगतिशील राज्य बनेगा।  

29 अप्रैल को होगा खेल कौशल का परीक्षण, आज पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन, मेडिकल और शारीरिक दक्षता का हुआ परीक्षण

रायपुर 29 अप्रैल को होगा खेल कौशल का परीक्षण, आज पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन, मेडिकल और शारीरिक दक्षता का हुआ परीक्षण राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित आवासीय खेल अकादमी में प्रवेश के लिए 28 अप्रैल से 1 मई तक चयन ट्रायल का आयोजन किया गया है। चयन ट्रायल के पहले दिन आज रायपुर के कोटा स्थित स्वामी विवेकानंद स्टेडियम में तीरंदाजी, फुटबॉल और वेटलिफ्टिंग के खिलाड़ी शामिल हुए। इसमें छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों के तीरंदाजी में 68 बालक और 27 बालिका, फुटबॉल में 91 बालिका, वेटलिफ्टिंग में 7 बालक और 11 बालिका सहित कुल 204 खिलाड़ियों ने हिस्सेदारी की।  चयन ट्रायल के पहले दिन आज खिलाड़ियों का पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन, मेडिकल और शारीरिक दक्षता का परीक्षण किया गया। ट्रायल के दूसरे दिन 29 अप्रैल को खिलाड़ियों के खेल कौशल का परीक्षण किया जाएगा। यह चयन ट्रायल 13 वर्ष से 17 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों के लिए आयोजित है। इसमें चयनित खिलाड़ी खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित आवासीय खेल परिसर में निःशुल्क प्रशिक्षण हासिल करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान अकादमी में खिलाड़ियों को निःशुल्क आवास, भोजन, शैक्षणिक व्यय, खेल परिधान, प्लेइंग किट और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। 

देशमुख अनिल और आदर्श सिद्धू को BSF में मिली तैनाती, केंद्र में बढ़ी जिम्मेदारी

जयपुर राजस्थान कैडर के पुलिस महकमे से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है. राज्य सरकार और केंद्र के बीच तालमेल के साथ तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों के कार्यभार में फेरबदल किया गया है. इनमें से दो अधिकारियों को केंद्र में डेपुटेशन (Deputation) पर भेजा गया है, जबकि एक अधिकारी को महत्वपूर्ण शैक्षणिक जिम्मेदारी सौंपी गई है. DIG देशमुख पेरिस अनिल अब संभालेंगे BSF की कमान राजस्थान पुलिस में स्पेशल ऑपरेशन्स (Special Operations) के पद पर तैनात DIG देशमुख पेरिस अनिल अब केंद्र में अपनी सेवाएं देंगे. उन्हें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) में DIG के तौर पर पोस्टिंग दी गई है. अपनी कार्यकुशलता के लिए पहचाने जाने वाले देशमुख का बॉर्डर सिक्योरिटी में जाना एक अहम कदम माना जा रहा है. IPS आदर्श सिद्धू को भी केंद्र में मिली बड़ी जिम्मेदारी देशमुख पेरिस अनिल के साथ ही IPS आदर्श सिद्धू को भी केंद्र सरकार ने डेपुटेशन पर बुलाया है. उन्हें भी BSF में DIG के पद पर नियुक्त किया गया है. सिद्धू का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है, और अब वे देश की सीमाओं की सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएंगे. IPS देवेंद्र कुमार बिश्नोई को मिली अतिरिक्त जिम्मेदारी वहीं, राज्य के भीतर भी एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है. IPS देवेंद्र कुमार बिश्नोई को जोधपुर स्थित सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ पुलिस सिक्योरिटी एंड क्रिमिनल जस्टिस के प्रो-वाइस चांसलर (Pro-VC) का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है. बिश्नोई अब पुलिसिंग के साथ-साथ पुलिस यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को भी गति देंगे.

वैवाहिक सीजन में गन्ना किसानों को मिली बड़ी राहत

रायपुर वैवाहिक सीजन में गन्ना किसानों को मिली बड़ी राहत वैवाहिक सीजन एवं आगामी फसल की तैयारियों के बीच गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना, राम्हेपुर (कवर्धा) द्वारा किसानों को 13.80 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके साथ ही चालू पेराई सत्र में अब तक कुल 71.29 करोड़ का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।              कलेक्टर एवं कारखाने के प्राधिकृत अधिकारी  गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में भुगतान प्रक्रिया लगातार जारी है। समयबद्ध भुगतान से सहकारी व्यवस्था में किसानों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। चालू पेराई सत्र में कारखाने ने उपलब्धि हासिल की है, जिसमें 2,55,818 मीट्रिक टन गन्ना पेराई एवं 3,09,120 क्विंटल शक्कर उत्पादन किया गया है। यह सफलता किसानों के सहयोग, प्रशासनिक मार्गदर्शन और कारखाने की कुशल कार्यप्रणाली का परिणाम है।           भोरमदेव शक्कर कारखाना किसानों और श्रमिकों के हित में निरंतर कार्य कर रहा है। इसमें एफआरपी के अतिरिक्त रिकवरी आधारित भुगतान, शासन द्वारा प्रदत्त बोनस वितरण, रियायती दर पर शक्कर उपलब्धता, उन्नत बीज एवं कृषि मार्गदर्शन, नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत किसानों के लिए सर्वसुविधायुक्त “बलराम सदन” तथा मात्र 5 रूपए में गरम भोजन की कैंटीन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।                    भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना जिले की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनकर उभरा है। यह किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी, फसल विविधता को बढ़ावा, हजारों लोगों को रोजगार तथा पीडीएस के लिए सस्ती दर पर शक्कर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। समय पर भुगतान, बेहतर प्रबंधन और किसान-केंद्रित योजनाओं के चलते यह कारखाना सहकारी मॉडल की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ जिले के समग्र विकास को भी गति मिल रही है।

29 अप्रैल को रायपुर में प्राचीन “सोमनाथ ज्योतिर्लिंग छत्तीसगढ़ वासियों के जनदर्शन हेतु कार्यक्रम

रायपुर पूज्य गुरु देव श्री श्री रविशंकर जी के आर्ट ऑफ लिविंग रायपुर परिवार की ओर से राजधानी रायपुर में एक भव्य एवं दिव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम “एक शाम शिव के नाम” का आयोजन किया जा रहा है।  कार्यक्रम में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पावन प्रेरणा से तैयार प्रतिरूप के दर्शन, रुद्राभिषेक एवं सत्संग का आयोजन किया जाएगा, जिससे श्रद्धालु शिव भक्ति में लीन होकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर सकेंगे। वैदिक धर्म संस्थान की राज्य समन्वय श्रीमती रचना चतुर्वेदी ने बताया यह  यह कार्यक्रम दिनांक 29 अप्रैल 2026 (बुधवार) को मुक्त आकाश मंच, घड़ी चौक, रायपुर में सायं 5:00 बजे से 8:00 बजे तक आयोजित होगा। आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन शहरवासियों के लिए एक दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर है, जिसमें सभी श्रद्धालुओं को सपरिवार आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम के माध्यम से शांति, प्रेम और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। पूजा संकल्प एवं अधिक जानकारी के लिए इच्छुक श्रद्धालु निम्न संपर्क नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं: 📞 8889082111, 7879041460, 8085751001, 9300834800  

सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी पहल

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वृद्धजनों के लिए एक मजबूत और संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा तंत्र विकसित किया है, वहीं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभागीय योजनाएँ प्रभावी रूप से धरातल पर क्रियान्वित हो रही हैं। इन प्रयासों से वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। सरल प्रक्रिया, सहज लाभ राज्य में वरिष्ठ नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए किसी अलग “सीनियर सिटीजन कार्ड” की आवश्यकता नहीं है। आधार कार्ड एवं अन्य वैध दस्तावेजों के माध्यम से आयु और पात्रता का सत्यापन कर सीधे लाभ प्रदान किया जा रहा है, इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और सुलभ बनी है। वृद्धाश्रम :- सम्मानजनक जीवन का आधार प्रदेश के राजधानी रायपुर सहित विभिन्न जिलों में संचालित 27 वृद्धाश्रम निराश्रित एवं असहाय वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित आश्रय बनकर उभरे हैं। वर्तमान में यहां 675 वृद्धजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहाँ निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सुविधाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर मिल रहा है। पैलिएटिव केयर (प्रशामक गृह) :- विशेष देखभाल की व्यवस्था गंभीर रूप से बीमार एवं बिस्तर पर आश्रित वृद्धजनों के लिए राज्य में 13 प्रशामक गृह संचालित हैं। वर्तमान में रायपुर, कबीरधाम, दुर्ग, बालोद, रायगढ़ एवं बेमेतरा में 140 वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। इन केंद्रों में निरंतर देखभाल, उपचार सहयोग और आवश्यक सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जिससे संवेदनशील स्थिति में भी उन्हें मानवीय और सम्मानजनक जीवन मिल सके। वृद्धावस्था पेंशन :- आर्थिक संबल का आधार सामाजिक सुरक्षा के तहत पात्र वृद्धजनों को नियमित पेंशन दी जा रही है। बीपीएल एवं एसईसीसी वंचन समूह के वृद्धजनों को 500 रुपए प्रतिमाह तथा 80 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को 680 रुपए प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है। यह सहायता उनके दैनिक जीवन में आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को मजबूती देती है। सहायक उपकरण और तीर्थ यात्रा :- नई ऊर्जा का संचार वरिष्ठ नागरिक को सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निराश्रित वृद्धजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के तहत चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर अधिकतम 6900 रुपए तक के उपकरण जैसे व्हीलचेयर, वॉकर, बैसाखी, छड़ी, श्रवण यंत्र, चश्मा, ट्राइसाइकिल सहित अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है, जिससे उनका जीवन अधिक सहज बन सके। 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक संतुलन का अवसर मिल रहा है, जो उनके जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14 यात्राओं के माध्यम से 10 हजार 694 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। समग्र कल्याण की दिशा में निरंतर प्रयास छत्तीसगढ़ शासन का लक्ष्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल, आवास, सहायक सुविधाओं और सामाजिक जुड़ाव के माध्यम से राज्य अपने वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सशक्त, संवेदनशील और समग्र सामाजिक सुरक्षा तंत्र स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय और मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में यह प्रयास आने वाले समय में और अधिक प्रभावी रूप से वृद्धजनों के जीवन को गरिमामय बनाने की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।  

PET परीक्षा में बड़ी सफलता: बिहार पुलिस ड्राइवर भर्ती में 11,847 उम्मीदवार पास

पटना. केंद्रीय चयन पार्षद (CSBC)ने 28 अप्रैल को बिहार कॉन्स्टेबल ड्राइवर पद के लिए आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के परिणाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिए हैं। वे सभी उम्मीदवार जो इस शारीरिक परीक्षा में शामिल हुए थे, अब अपना रिजल्ट csbc.bihar.gov.in पर जाकर देख सकते हैं। बता दें कि शारीरिक दक्षता परीक्षा में कुल 14,624 उम्मीदवार उपस्थित हुए थे और 888 उम्मीदवार अनुपस्थित थे। इसके साथ ही वाहन चालन दक्षता परीक्षा के लिए कुल 11,847 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। अगला चरण: ड्राइविंग टेस्ट इस सूची में उन सफल उम्मीदवारों के रोल नंबर दिए गए हैं जिन्होंने शारीरिक परीक्षा (PET) पास कर ली है। अब ये अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया के अगले चरण, यानी ड्राइविंग दक्षता परीक्षा (Driving Efficiency Test) के लिए पात्र माने जाएंगे। अपना रिजल्ट कैसे चेक करें? सफल उम्मीदवारों की सूची देखने के लिए आप इन आसान चरणों का पालन कर सकते हैं: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले csbc.bihar.gov.in पोर्टल खोलें। सही लिंक चुनें: होमपेज पर 'Bihar Police' टैब के अंदर "Results: List of Successful Candidates in PET (Advt. No. 02/2025)" वाले लिंक पर क्लिक करें। PDF डाउनलोड करें: क्लिक करते ही एक पीडीएफ फाइल खुलेगी, जिसे आप अपने डिवाइस में सेव कर लें। रोल नंबर खोजें: इस फाइल में अपना Roll Number सर्च करें। यदि आपका नंबर लिस्ट में है, तो इसका मतलब है कि आपने PET पास कर लिया है और अब आपको ड्राइविंग टेस्ट की तैयारी करनी होगी।

बिल्डिंग नियमों पर बड़ा फैसला: कोर्ट की रोक के बाद पंजाब सरकार ने बायलॉज लिए वापस

लुधियाना. पंजाब में बिल्डिंग बनाने वालों को नियमों में छूट नहीं मिलेगी जिसके तहत सरकार ने नए बाईलॉज वापस ले लिए हैं। यहां बताना उचित होगा कि शहरी विकास विभाग द्वारा पिछले साल दिसम्बर के दौरान यूनिफाइड बिल्डिंग बाईलॉज जारी किए गए थे। जिसमें नगर निगम के एरिया में भी कमर्शियल व रिहायशी बिल्डिंग बनाने वालों को कवरेज के मामले में काफी छूट दी गई थी लेकिन यह बाईलॉज जारी होने के कुछ देर बाद ही कोर्ट द्वारा उसे लागू करने पर रोक लगा दी गई। अब भी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस चल रहा है। इसी बीच सरकार द्वारा 2025 के यूनिफाइड बिल्डिंग बाईलॉज वापस लेने का फैसला कर लिया गया है। इस संबंध में नोटिफिकेशन सोमवार को अर्बन डिवैल्पमैंट विभाग के प्रिंसीपल सैक्रेटरी के हवाले से जारी किया गया जिसके मुताबिक अगले आदेश तक पंजाब की नगर निगम में 2018 और पुडा के एरिया में 2021 के बिल्डिंग बाईलॉज लागू होंगे। कमर्शियल व रिहायशी कैटेगरी को यह दी गई थी राहत  – टी.पी. स्कीम के एरिया में 60 फुट रोड पर नगर निगम के जरिए सरकार कमर्शियल रोड डिक्लेयर करवाने की लंबी प्रक्रिया से छूट। – कोर एरिया में 3 लाख प्रति ई.सी.एस. के हिसाब से पेड पार्किंग की शर्त पर 21 मीटर तक कवरेज की सुविधा। -ऑल अराउंड सेट बैक छोड़ने के लिए बिल्डिंग की ऊंचाई की सीमा 15 से बढ़ाकर 21 मीटर की गई थी। -किसी भी कमर्शियल बिल्डिंग में 20 फीसदी फ्रंट सैटबैक छोड़ने की शर्त को 20 मीटर अधिकतम पर किया गया था फिक्स। – 40 फुट रोड पर स्थित 200 गज के रिहायशी मकान की ग्राऊंड फ्लोर पार्किंग के छोडने के बाद 21 मीटर उंचाई तक 4 मंजिला निर्माण करने का प्रावधान। कोर्ट केस में 93 वर्षीय याचिकाकर्त्ता द्वारा यह उठाए गए थे मुद्दे  इस मामले को लेकर कोर्ट में चल रहे केस में याचिकाकर्त्ता 93 वर्षीय महिला हैं जिनके द्वारा मुद्दा उठाया गया है कि नए बिल्डिंग बाईलॉज इससे पहले से लागू फायर प्रिवैंशन एक्ट व नैशनल बिल्डिंग कोड के प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत हैं। इसके अलावा जिस रियल एस्टेट एडवायजरी कमेटी की सिफारिशों को आधार बनाकर नए बिल्डिंग बाईलॉज तैयार किए गए हैं, उस कमेटी में बिल्डर व डिवैल्पर शामिल हैं और उनकी सुविधा का ध्यान रखा गया है जिससे रिहायशी इलाके में बडी संख्या में कर्मिशयल बिल्डिंगों का निर्माण करने का रास्ता साफ हो गया है लेकिन यह फैसला लेने से उन इलाकों में रहने वाले लोगों को विश्वास में नही लिया गया।

राज्यपाल के समक्ष जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाओं पर हुई चर्चा

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं को संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि जनजातीय कल्याण, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनजातीय सशक्तिकरण के लिए सरकार के दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। जनजातीय विकास से संबद्ध विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय अत्यंत आवश्यक है।     प्रदेश के परिदृश्य में हो नवाचारों का अध्ययन।      विकास कार्य, जनजातीय क्षेत्र फोकस्ड हों।     अन्तर्विभागीय समन्वय जरूरी।     क्रियान्वयन में जवाबदारी बढ़ाए।     स्कूलों की गुणवत्ता में पेसा समितियों को जोड़े।  राज्यपाल  पटेल मंगलवार को लोकभवन में जनजातीय प्रकोष्ठ के साथ जनजातीय कार्य विभाग की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जनजातीय सशक्तिकरण और विकास के लिए प्रावधानित बजट का जनजाति उन्मुख उपयोग हो। राशि को लक्षित उद्देश्य पर ही खर्च किया जाए। राज्यपाल  पटेल ने मैदानी भ्रमण कर जनजातीय विकास प्रयासों की जमीनी हकीकत जानने के और अधिक सघन प्रयासों पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या वाला विस्तृत क्षेत्र है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में निवासरत जनजातियों के विकास एवं कल्याण के कार्य और अधिक क्षेत्र फोकस्ड होना जरूरी है। कार्यशाला में प्राप्त देश के जनजातीय बाहुल्य राज्यों द्वारा जनजातीय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि के क्षेत्र में किए गए नवाचारों का प्रदेश की आवश्यकता के संदर्भ में अध्ययन किया जाए, उन्हें समझ कर अपनाने के प्रयास किए जाने चाहिए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि कमजोर वर्गों के कल्याण प्रयासों में संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण है। समानुभूति की भावना के साथ किए गए आत्मीय प्रयास सदैव सुफल देते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय कल्याण प्रयासों में जन प्रतिनिधियों और शासकीय सेवकों की और अधिक संवेदनशीलता तथा सक्रियता जरूरी है। पात्र हितग्राहियों का चयन, योजना का प्रभावी क्रियान्वयन, बजट राशि के समुचित उपयोग की प्रक्रियाओं में और अधिक जवाबदारी होनी चाहिए। जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा, प्रगति का मार्ग सुनिश्चित करती है। जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण में शिक्षा के प्रसार की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए जरूरी है कि जनजाति क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। पेसा निगरानी समिति के माध्यम से शिक्षकों, शिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ताओं आदि की निगरानी और मूल्यांकन के प्रयास किए जाए।  राज्यपाल  पटेल को बैठक में जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव  गुलशन बामरा ने विगत 16 और 17 अप्रैल 2026 को आयोजित जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाओं की विस्तार से जानकारी दी। लोकभवन के जवाहर खण्ड सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष  दीपक खाण्डेकर, राज्यपाल के उप सचिव  सुनील दुबे, जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त सह संचालक डॉ. सतेन्द्र सिंह, जनजातीय कार्य विभाग, जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य और लोकभवन के अधिकारी उपस्थित थे।