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अनोखी शादी: अंगारों पर चलकर दूल्हा-दुल्हन ने पूरी की रस्में, सदियों पुरानी परंपरा बरकरार

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक ऐसी अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन ने पारंपरिक सात फेरों के साथ-साथ जलते अंगारों पर चलकर विवाह की रस्में पूरी कीं। यह परंपरा कोई नई नहीं, बल्कि दशकों से आदिवासी समाज में चली आ रही है, जिसे आज भी पूरी आस्था और विश्वास के साथ निभाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित बिलासपुर गांव में राठिया परिवार के गंधेल गोत्र में यह अनोखी परंपरा आज भी जीवित है। शादी के बाद जब दुल्हन को घर लाया जाता है, तो घर के देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद मंडप में जलते अंगारे बिछाए जाते हैं। इसके बाद दूल्हा-दुल्हन के साथ परिवार के सदस्य नंगे पांव इन अंगारों पर चलकर रस्में पूरी करते हैं। घर के मुखिया पर देवता सवार होने की मान्यता परंपरा के अनुसार, मंडप में बकरे की बलि देने के बाद घर के मुखिया पर देवता सवार होने की मान्यता है। इसके बाद वे नाचते-गाते हुए मंडप में अंगारे बिछाते हैं और पूरे अनुष्ठान का नेतृत्व करते हैं। इस दौरान दूल्हा-दुल्हन समेत कई लोग अंगारों पर चलते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी के पैरों में जलन या चोट नहीं होती। परिवार के सदस्य रखते हैं उपवास परिवार के सदस्यों का कहना है कि इस परंपरा के दौरान कई लोग उपवास रखते हैं और पानी तक ग्रहण नहीं करते। दुल्हन के घर आने के बाद सबसे पहले एक बकरे की बलि देकर उसके खून से तिलक लगाया जाता है, फिर घर में प्रवेश कराया जाता है। इसके बाद मंडप में दूसरी बलि दी जाती है और फिर अंगारों पर चलने की रस्म पूरी होती है। परंपरा नहीं निभाई गई, तो देवी-देवता होंगे नाराज गांव के बुजुर्गों के अनुसार, यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। हर शादी में इस रस्म को निभाना अनिवार्य माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर यह परंपरा नहीं निभाई गई, तो देवी-देवता नाराज हो सकते हैं और परिवार पर विपत्ति आ सकती है। अनोखी शादी को देखने उमड़ती है भीड़ इस अनोखी शादी को देखने के लिए न केवल गांव, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जलते अंगारों पर चलते दूल्हा-दुल्हन का यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का केंद्र बना हुआ है। फिलहाल यह अनोखी शादी सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है और लोग इस परंपरा को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

AAP को बड़ा झटका: 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से बदला राजनीतिक समीकरण

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्य सभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इसको लेकर राज्य सभा सचिवालय ने भी अधिसूचना जारी कर दी है। इसी के साथ उच्च सदन में भाजपा की ताकत भी बढ़ी है और सांसदों की संख्या 113 हो गई है। जिन सात सांसदों ने बीजेपी का दामन थामा है, उनमें से 6 पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं और स्वाती मालिवाल दिल्ली से है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य सभा सांसदों का बीजेपी में जाना अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, दिल्ली हारने के बाद अब आम आदमी पार्टी की पंजाब में ही सरकार है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली चुनाव हारने के बाद पूरा ध्यान पंजाब पर लगा दिया है। AAP के बागी सांसदों के शामिल होने से बीजेपी खुश नजर आ रही है। दरअसल, राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने विधासनभा चुनाव 2022 में AAP की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। जो सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं उनमें- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजिंदर गुप्ता और स्वाति मालीवाल शामिल है। क्या बीजेपी को मिलेगा फायदा? AAP के सातों राज्य सभा सांसदों के विलय के बाद उच्च सदन में भले ही बीजेपी का संख्या बल बढ़ा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर फायदा कम होता नजर आ रहा है। अपनी रणनीति से 2022 में राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने AAP को जीत दिलाई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नेताओं का कोई जनाधार नहीं है। ऐसे में बीजेपी के लिए इनका कितना उपयोगी साबित होना संभव है, यह आने वाला समय बताएगा। पंजाब में चड्ढा का इस्तेमाल करेगी बीजेपी वहीं पंजाब में बीजेपी अब राघव चड्ढा का इस्तेमाल करेगी, क्योंकि प्रदेश में कायदे से पार्टी अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं करा पाई है। इसके अलावा बीजेपी पर पंजाब में किसान विरोधी होने का आरोप भी लगता है। खासकर केंद्र के कृषि कानूनों के विवाद के बाद। संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने बीजेपी पर किसानों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसलिए अकाली दल भी अब बीजेपी के साथ नहीं है। चड्ढा के सामने भी होगी चुनौती राघव चड्ढा AAP की तरफ से राज्य सभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे, लेकिन अब बीजेपी में जाने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां होगी। दरअसल, इससे पहले तक वे बीजेपी के मुखर विरोधी रहे है और कई मौके पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। खासतौर पर कृषि कानूनों को लेकर। ऐसे में प्रदेश की जनता और बीजेपी में अपनी जगह कैसे बनाते है, यह आने वाला समय बताएगा। उन्हें न केवल पार्टी की विचारधारा के साथ तालमेल बैठाना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा भी जीतना होगा।  

उद्योग की मांग के अनुसार ट्रेड्स का प्रशिक्षण देकर प्लेसमेंट सुनिश्चित करें: मंत्री टेटवाल

उद्योग की मांग के अनुसार ट्रेड्स का प्रशिक्षण देकर प्लेसमेंट कराना सुनिश्चित करें : मंत्री टेटवाल मंत्री टेटवाल ने ‘आईटीआई चले हम’ प्रवेश 2026 का किया शुभारंभ भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने ‘आईटीआई चले हम’ प्रवेश 2026 अभियान का शुभारंभ करते हुए प्रदेशभर में कौशल आधारित शिक्षा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया। मंत्री टेटवाल ने इस अवसर पर आयोजित समीक्षा बैठक में विभिन्न जिलों के आईटीआई संस्थानों की प्रगति, प्रशिक्षण व्यवस्था, प्लेसमेंट और विद्यार्थियों की सहभागिता का समग्र मूल्यांकन किया। मंत्री टेटवाल ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल प्रवेश प्रक्रिया नहीं, बल्कि युवाओं को कौशल, आत्मनिर्भरता और रोजगार से जोड़ने का व्यापक प्रयास है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी आईटीआई संस्थानों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा प्राचार्यों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित हों, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार हो सके। समीक्षा के दौरान प्लेसमेंट की स्थिति पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए मंत्री टेटवाल ने कहा कि उद्योगों की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रमों को अद्यतन किया जाए और प्रशिक्षण को पूरी तरह प्रैक्टिकल एवं जॉब-ओरिएंटेड बनाया जाए। मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ब्यूटी पार्लर, फूड प्रोसेसिंग सहित अन्य उभरते सेक्टर्स में रोजगारोन्मुख कोर्सेस को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए, जिससे अधिकाधिक युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही अवसर मिल सकें। विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मंत्री टेटवाल ने हॉस्टल सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन, जरूरतमंद विद्यार्थियों को सहयोग उपलब्ध कराने तथा ड्रॉपआउट युवाओं को पुनः प्रशिक्षण से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने आईटीआई में बेटियों के प्रवेश को बढ़ावा देने और उनके लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी आई टी आई में शत प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करें। मंत्री टेटवाल ने निर्देशित किया कि प्रशिक्षण के साथ सॉफ्ट स्किल्स, कम्युनिकेशन और इंटरव्यू प्रिपरेशन को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, जिससे विद्यार्थी रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। साथ ही, जिन संस्थानों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और सहभागिता कम है, वहां सुधार के लिए जवाबदेही तय कर नियमित समीक्षा की जाए। प्रशिक्षण की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के मॉड्यूल्स और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स (एसडीपी) को प्रभावी रूप से लागू करने, सेमिनार और ट्रेनिंग सेशन्स की नियमितता सुनिश्चित करने तथा उत्कृष्ट संस्थानों के मॉडल को अन्य स्थानों पर अपनाने के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए डिजिटल माध्यमों के उपयोग को बढ़ाते हुए पोस्टर, फिल्म और अन्य डिजिटल कंटेंट के जरिए अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, कौशल विकास को स्कूल शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी कार्य करने की बात कही गई। मंत्री टेटवाल ने कहा कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें मुख्यमंत्री से भेंट का अवसर दिया जाएगा, जिससे युवाओं में प्रेरणा और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी। मंत्री टेटवाल ने कार्यक्रम में पहुंचे विद्यार्थियों का मिठाई खिलाकर स्वागत किया और उन्हें आईटीआई से जुड़कर अपने भविष्य को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित किया। बैठक में डायरेक्टर बसंत कुर्रे और सीईओ गिरीश शर्मा ने जानकारी दी कि विगत वर्ष आई टी आई में 96.4 प्रतिशत सीटों पर विद्यार्थियों का पंजीयन हुआ था। इस वर्ष सीटों की संख्या बढ़ाकर उन पर शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनमें प्रशिक्षण शुल्क प्लेसमेंट के बाद लिया जाना, फीस की किस्तों में भुगतान की सुविधा तथा विभिन्न प्रकार के अनुदान शामिल हैं। ग्लोबल स्किल पार्क में 13 राज्यों के बच्चे भी विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण ले रहे हैं। जल्दी ग्लोबल स्किल पार्क में कट सिस्को और द्रोण का प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ड्रॉपआउट, दिव्यांग एवं अनाथ आश्रम के बच्चों को भी आईटीआई में पंजीयन कराकर कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है, जिससे वे रोजगार के अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। मंत्री टेटवाल ने आईटीआई के प्रतिभावान प्रशिक्षणार्थियों की सफलता की कहानियों पर आधारित फिल्म का विमोचन किया। साथ ही ऑटोमोबाइल सेक्टर में बालिकाओं की सफलता पर आधारित ग्लोबल स्किल्स पार्क द्वारा निर्मित फिल्म का अवलोकन किया। इसके बाद उन प्रशिक्षणार्थियों की प्रेरणादायक फिल्म प्रदर्शित की गई जो प्रशिक्षण के साथ पार्ट टाइम जॉब कर रहे हैं।  

कुएं, तालाब और नदियों की सफाई से जल सुरक्षा की ओर मजबूत पहल

भोपाल  मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान 19 मार्च से प्रारंभ होकर 30 जून तक संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जनभागीदारी को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत कुएँ, तालाब, बावड़ी और नहरों की सफाई, गहरीकरण, पुनर्जीवन, पौधरोपण, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग तथा जल गुणवत्ता सुधार जैसे कार्य किए जा रहे हैं। यह अभियान अब जन-आंदोलन का रूप ले रहा है, जिसमें ग्रामीण और शहरी स्तर पर सामूहिक श्रमदान और जागरूकता गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं। डिंडोरी जिले में जारी है नर्मदा घाटों पर साप्ताहिक सफाई अभियान डिंडोरी जिले में “जल गंगा संवर्धन अभियान” और “मैया अभियान” के तहत प्रत्येक रविवार को नर्मदा घाटों पर व्यापक सफाई की जा रही है। कलेक्टर मती अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संगठनों और नागरिकों द्वारा श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है। इससे नर्मदा घाटों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। देवास में किया जा रहा जल संरचनाओं का निर्माण और गहरीकरण का कार्य देवास जिले में कलेक्टर  ऋतुराज सिंह के निर्देशन में जल संरचनाओं का निर्माण, गहरीकरण और मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम नानूखेड़ा में सामुदायिक कूप गहरीकरण तथा ग्राम गुसट में तालाब गहरीकरण जनसहयोग से किया गया। इसके अलावा छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड में तालाबों की सफाई और श्रमदान कार्य किए गए। साथ ही, दीवार लेखन, स्कूल गतिविधियों और विद्यार्थियों के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश फैलाया जा रहा है। तालाब और प्राचीन बावड़ियों की सफाई कर संरक्षण कार्यों को मिली गति जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत छतरपुर में फुटेरा तालाब और प्राचीन बावड़ियों की सफाई कर संरक्षण कार्यों को गति दी गई। अभियान के तहत “हर बूंद का संरक्षण-जीवन का संरक्षण” का संदेश दिया जा रहा है। इसी तरह उमरिया जिले में भी अभियान के तहत दीवार लेखन और जनजागरूकता कार्यक्रमों के साथ-साथ ग्राम बरदढार में बोरी बंधान का कार्य किया गया, जिससे जल संचयन और भूजल स्तर में वृद्धि होगी। टीकमगढ़ में ईदगाह स्थित कुएं की सफाई के लिए श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलेक्टर  विवेक श्रोत्रिय ने नागरिकों से जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की। दीवार लेखन, पोस्‍टर और निबंध प्रतियोगिता के माध्‍यम से जागरूकता पांढुर्णा जिले में दीवार लेखन, पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताओं के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। विद्यार्थियों ने “जल ही जीवन है” जैसे संदेशों के जरिए लोगों को प्रेरित किया। इसके अतिरिक्‍त अभियान के तहत शहडोल में नाग तलैया की सफाई के लिए श्रमदान कार्यक्रम आयोजित कर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई और नागरिकों को सामूहिक शपथ दिलाई गई। “जल गंगा संवर्धन अभियान” मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल बनकर उभर रहा है, जिसमें शासन और समाज मिलकर जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।  

भाई ने निभाई परंपरा, बहन के घर 11 लाख का मायरा लेकर निकली भव्य यात्रा

भीलवाड़ा लग्जरी गाड़ियों के दौर में एक किसान भाई ने 11 ऊंट गाड़ियों और 51 ट्रैक्टर पर भात भरण की अनूठी शोभायात्रा निकाली. भीलवाड़ा के जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र के पंडेर गांव से टिठोडी गांव तक 7 किलोमीटर की यात्रा की. ग्रामीणों ने भी खूब पुष्प वर्षा की. भात यात्रा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. किसान परिवार ने पुरानी परंपरा को न‍िभाया. बहन के घर पहुंचकर 11 लाख का मायरा भरा. "बहन को पिता की कमी महसूस न हो" किसान मुकेश जाट ने कहा क‍ि पिता के देहांत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी. उन्होंने यही कोशिश की कि बहन को कभी पिता की कमी महसूस न हो, जो भी किया है, वह अपने पिता के सपनों को पूरा करने और बहन के चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए किया है.   "हमारी पुरानी परंपराएं ही असली पहचान" उन्होंने कहा,  "हमारी पुरानी परंपराएं ही हमारी असली पहचान है, इसलिए मैंने उसी परंपरा को जीवित रखने का प्रयास किया है." बदलते आधुनिक दौर में जहां एक ओर परंपराओं को जिंदा रखा, वहीं भाई ने 11 लाख रुपये का भात भरा. पुरानी परंपराओं को जीवंत करते हुए मायरा भरने की परंपरा को पुनर्जीवत किया.   मुकेश जाट की पत्नी माया पंचायत प्रशासक हैं. पिता के निधन के बाद भाई की अनूठी भात शोभायात्रा को देखकर बहन भी भावुक हो गई. नाचते-गाते हुए करीब 7 किलोमीटर का सफर तय क‍िया.

बिहटा टेक्नोलॉजी सेंटर उद्घाटन: बिहार के विकास को लेकर सरकार का नया रोडमैप

पटना मंगलवार को पटना से सटे बिहटा में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की ओर से बनाए गए टेक्नोलॉजी सेंटर का उद्घाटन किया गया है। उस उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मौजूद थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में इस टेक्नोलॉजी सेंटर को बिहार के विकास में एक अहम मोड़ बताया। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने बताया कि 28 नवंबर 2027 को नई सरकार के एक साल पूरा होने पर उनका टारगेट क्या है। सीएम ने इस दौरान उनकी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों का जिक्र भी किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार बदल रहा है। अगर बिहार को समृद्ध बनाना है तो सबसे पहले एमएसएमई की पूरी व्यवस्था खड़ी करनी होगी। एमएसएमई ने जितना काम किया है उसे देखकर मैं अचंभित हूं। बिहार में 1 करोड़ 86 लाख लोग MSME से जुड़े और लगभग एक लाख करोड़ का बाजार है। ये बिहार है। अब तक बिहार को कोई नहीं देखता था। लोग सोचते थे कि यहां जनसंख्या अधिक है तो यहां गरीबी इसी वजह से है। लेकिन अब भारत की अर्थव्यवस्था में 14 करोड़ बिहारी एक उपभोक्ता के तौर पर इस देश को जीएसटी देने का काम कर रहे हैं। इसलिए आज बिहार बदल रहा है और जब बिहार बदलेगा तब ही तो हम समृद्ध हो पाएंगे। सम्राट चौधरी ने आगे कहा, 'मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने सड़क, बिजली और घरों तक पानी पहुंचाने का काम किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पूरी ताकत से बिजली से जुड़ी चीजों को मजबूती देने का काम किया है। लेकिन हमारा टारगेट है कि अगले 20 नवंबर को जब इस सरकार के एक साल पूरे हो तो हम जरुर आश्वस्त करते हैं कि हमारा प्रयास है कि बिहार में जो निवेश नहीं होता है तो सबसे पहले 5 लाख करोड़ का निवेश इसी बिहार की धरती पर लाने का काम किया जाएगा और सभी लोग उद्योग से जुड़ेंगे। ' सम्राट चौधरी ने गिनाए तीन बड़े फैसले इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन बड़े फैसले हमलोगों ने ली है। पहला- डिग्री कॉलेज। जिन बच्चों को पढ़ने के लिए दूसरे अनुमंडल या ब्लॉक में जाना पड़ता था। इस बार हमलोगों ने तय किया है कि जुलाई माह जितने भी बिहार में वैसे ब्लॉक हैं जो बिना डिग्री कॉलेज के हैं उन सभी ब्लॉक में डिग्री कॉलेज खोलने का काम किया जाएगा। इसके बाद सीएम ने कहा कि बिहार में लोग चिंतित रहते थे हमारे बच्चे अच्छे स्कूल में कैसे पढ़ेंगे। हमलोगों ने तय किया है कि 533 ब्लॉक में एक-एक मॉडल स्कूल खोलेंगे ताकि वहां के बच्चे वहीं पढ़ाई करेंगे उन्हें बाहर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। तीसरे बड़े फैसले के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इसके बाद मैंने कहा कि एक सहयोग कार्यक्रम चलाइए। इसके तहत हम महीने में 2 कैंप लगाएंगे। 2 कैंप लगाकर ब्लॉक, अंचल और थाने की समस्या को ऑन स्पॉट हमारे पदाधिकारी समाप्त करने का काम करेंगे।

6 गायों से शुरू हुआ डेयरी का सफर, आज 25 उन्नत पशुओं के साथ लिख रहे सफलता की इबारत

रायपुर दंतेवाड़ा जिले में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में हो रही अभूतपूर्व वृद्धि बस्तर संभाग में एक नई 'श्वेत क्रांति' का संकेत दे रही है। कभी संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले इस अंचल में अब पशुपालन और डेयरी व्यवसाय ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मुख्य आधार बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है, बल्कि यह पहल स्थानीय स्तर पर कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई में भी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है। मजदूरी से 'मल्टी-फार्मिंग' तक का प्रेरणादायक सफर दंतेवाड़ा के गीदम विकासखंड के ग्राम गुमड़ा के रहने वाले 36 वर्षीय ललित यादव की कहानी अटूट साहस और संघर्ष की मिसाल है। एक समय था जब ललित अपनी आजीविका के लिए दूसरों के खेतों और निर्माण कार्यों में मजदूरी करने को विवश थे। वर्ष 2013 में उन्होंने महज 6 गायों के साथ पशुपालन की शुरुआत की। आज उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कड़ी मेहनत का परिणाम है कि उनके पास 25 गायों का एक विशाल और आधुनिक डेयरी फार्म है। तकनीक और आधुनिक नस्लों से आया बड़ा बदलाव ललित की सफलता का मुख्य आधार पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक का समावेश है: •    उन्नत नस्लें: पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने जर्सी और एचएफ (HF) क्रॉस जैसी उन्नत नस्लों को अपनाया। •    उत्पादन: वर्तमान में उनके फार्म से प्रतिदिन 70 से 80 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जो ₹70 प्रति लीटर की दर से बाजार में बिक रहा है। •    लागत में कमी: चारे की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने नेपियर घास की खेती शुरू की, जिससे पशुओं को साल भर पौष्टिक चारा उपलब्ध रहता है और बाहरी खर्चों में भारी कटौती हुई है। 'मल्टी-फार्मिंग' मॉडल: आय के विविध स्रोत ललित ने केवल डेयरी तक सीमित न रहकर 'मल्टी-फार्मिंग' का एक सफल मॉडल तैयार किया है: •    विविधता: डेयरी के साथ-साथ वे कुक्कुट (मुर्गी) पालन और सब्जी उत्पादन भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित नकद आय प्राप्त होती है। •    मूल्य संवर्धन (Value Addition): दूध की अधिकता होने पर वे उच्च गुणवत्ता वाला पनीर तैयार करते हैं, जो 400 प्रति किलो की दर से हाथों-हाथ बिक जाता है। •    जैविक खाद: उनके फार्म के गोबर की इतनी मांग है कि अन्य जिलों के किसान 3000 से 3500 प्रति ट्रैक्टर की दर से जैविक खाद खरीदने उनके घर तक पहुँचते हैं। शासन की योजनाओं और पारिवारिक संस्कारों का संगम ललित की इस प्रगति में शासन की कल्याणकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का विशेष योगदान रहा। उन्होंने डेयरी शेड और फेंसिंग के लिए लिए गए 3 लाख के बैंक ऋण को समय से पूर्व चुकाकर अपनी विश्वसनीयता और व्यावसायिक कुशलता का परिचय दिया है। ललित अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ के संघर्षों और संस्कारों को देते हैं। उनकी माँ ने एक आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में विपरीत परिस्थितियों में उन्हें शिक्षा दिलाई। आज ललित न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक 'प्रेरक प्रकाश स्तंभ' बनकर उभरे हैं। उनकी कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, ईमानदारी और मेहनत से ग्रामीण अंचलों में भी खुशहाली का नया अध्याय लिखा जा सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: हरियाणा के भिवानी और पलवल में नए PHC खोलने की तैयारी

चंडीगढ़. चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) खोलने की मंजूरी दी है। इनमें एक पीएचसी पलवल जिला के गांव अमरपुर में और दूसरी पीएचसी भिवानी जिला के गांव सूई तथा खोली जाएगी। पलवल जिला के गांव अमरपुर में खुलने वाली पीएचसी के निर्माण पर 439.33 लाख रुपए और भिवानी जिला के गांव सूई में खुलने वाली पीएचसी के निर्माण पर 466.35 लाख रुपए खर्च होंगे। सिविल सर्जन डॉ. सतेन्द्र वशिष्ठ ने बताया कि हरियाणा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने पलवल जिला के गांव अमरपुर में प्राथमिकता चिकित्सा केंद्र के लिए नई बिल्डिंग बनाने को मंजूरी प्रदान की गई है। यह नई बिल्डिंग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नजदीक ही दो एकड़ भूमि में बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने बताया कि प्राथमिक चिकित्सा केंद्र की नई बिल्डिंग तैयार होने बाद न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी, बल्कि बड़े अस्पतालों पर भी दबाव कम होगा। इससे लोगों को समय पर इलाज मिल सकेगा और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने, नई सुविधाएं जोड़ने और हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार द्वारा प्राथमिक चिकित्सा केंद्र की नए बिल्डिंग के लिए सरकार ने बजट को मंजूरी प्रदान की गई है। इसके लिए सरकार का धन्यवाद करते है। नई बिल्डिंग में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होगी।

पंजाब में सियासी हलचल तेज, AAP विधायकों को लेकर पार्टी अलर्ट मोड में

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के 7 राज्य सभा सांसदों द्वारा बीजेपी में जाने के बाद पार्टी में हलचल तेज है। इन सात में से 6 सांसद पंजाब से थे, जबकि एक दिल्ली से थी। पार्टी से सातों सांसद के बागी होने पर पंजाब में पार्टी की टूट रोकने के लिए प्रदेश प्रभारी मनीष सिसोदिया एक्टिव हो गए है। उन्होंने बुधवार को सभी विधायकों को जालंधर बुलाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान सीएम भगवंत मान और मनीष सिसोदिया सभी विधायकों के साथ बातचीत करेंगे। एजेंडा नहीं हुआ सार्वजनिक हालांकि आम आदमी पार्टी द्वारा यह बैठक क्यों बुलाई गई है, इसका एजेंडा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के 7 राज्य सभा सांसदों द्वारा बीजेपी में विलय होने के बाद विधायकों का मन टटोला जाएगा। 65 AAP विधायक मारेंगे पलटी- कांग्रेस राघव चड्ढा समेत 4 सांसदों द्वारा बीजेपी में जाने के बाद कांग्रेस की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई थी। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा था कि प्रदेश में आम आदमी पार्टी के करीब 65 विधायक पलटी मारने की तैयारी में है। उन्होंने यह भी कहा था कि भगवंत मान भी एकनाथ शिंदे की तरह हो सकते है। पंजाब में AAP को लगा झटका पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। इससे पहले पार्टी के 7 राज्य सभा सांसदों का दूसरी पार्टी में जाना अरविंद केजरीवाल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इन सात में से 6 सांसद उच्च सदन में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे। वहीं राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने 2022 में प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इतने बड़े स्तर पर सांसदों का पार्टी छोड़ना किसी भी दल के लिए गंभीर चुनौती होती है। इससे यह संदेश जाता है कि पार्टी के अंदर समन्वय और संवाद की कमी है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर AAP पर तीखा हमला बोला और इसे पार्टी के टूटने की शुरुआत बताया। AAP ने बताई साजिश दूसरी ओर, AAP नेतृत्व ने इसे साजिश करार देते हुए कहा कि उनके नेताओं पर दबाव बनाया गया। पार्टी ने अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं।

रीवा से सूरत जा रही बस में आग, इंदौर-भोपाल हाईवे पर मची अफरा-तफरी

देवास मप्र के रीवा से गुजरात के सूरत जा रही यात्री बस एआर20ई2424 में भोपाल-इंदौर राजमार्ग पर देवास जिले के नेवरी फाटा क्षेत्र में मंगलवार शाम करीब पांच बजे अज्ञात कारणों के चलते आग लग गई। आग का पता चलते ही चालक ने बस को रोक दिया। जैसे ही यात्रियों को पता चला कि आग लग गई है तो अफरा-तफरी व चीख पुकार मच गई। यात्री दरवाजे की ओर भागने लगे, कई यात्री खिड़कियों से नीचे कूद गए। सूचना मिलने पर सोनकच्छ, टोंकखुर्द से फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए गए। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यात्री बस सोमवार रात में सूरत के लिए रवाना हुई थी, बस में 40 से अधिक यात्री सवार थे। यात्री रामदास पटेल निवासी शहडोल ने बताया आग कैसे लगी, यह नहीं पता। जैसे ही पता चला हम जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे। किसी को सामान निकालने का मौका नहीं मिल पाया। कुछ यात्रियों ने बताया बस में कुछ किमी पहले ही डीजल डलवाया गया था जिससे बाद डीजल लीकेज हो रहा था, आशंका है कि इससे ही आग फैली हो। बस में मप्र, उप्र, गुजरात के यात्री सवार थे। कुछ लोग प्रयागराज क्षेत्र से रीवा पहुंचे थे फिर वहां से सूरत के लिए बस में सवार हुए थे। हादसे के बाद नेवरी फाटा की ओर से देवास की ओर आने वाले मार्ग का यातायात दूसरी ओर डायवर्ट कर दिया गया था। भौंरासा में फायर ब्रिगेड नहीं होने से आग बुझाने में लगा समय … घटनास्थल के समीप भौंरासा नगर परिषद में फायर ब्रिगेड नहीं है। ऐसे में सोनकच्छ से फायर ब्रिगेड बुलवाई गई जो करीब 15 किमी से भी अधिक दूर पड़ता है। इसमें समय अधिक लग गया और आग फैलती चली गई जिससे नुकसान अधिक हुआ। हालांकि गनीमत यह रही कि इसमें किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। यात्रियों ने यह भी बताया कि बस में चढ़ने-उतरने का एक ही दरवाजा था।