samacharsecretary.com

पंजाब सरकार का ऐतिहासिक कदम, 201 गांवों में किसानों को धान की अग्रिम बिजाई करने की मिली अनुमति

 कलानौर  पंजाब सरकार ने सेमग्रस्त घोषित किए राज्य के 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। इनमें गुरदासपुर जिले के तीन गांव शामिल हैं, जिनके करीब 200 एकड़ जमीन सेमग्रस्त है। पंजाब सरकार ने यह छूट दो साल के लिए दी है। गौर हो कि पंजाब में किसान दस मई से पहले धान की पनीरी की बिजाई नहीं कर सकते हैं। इसका उद्देश्य राज्य में घटते भू-जल स्तर को रोकना है। निकटवर्ती निज्जरपुर गांव के सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि ब्लाक डेरा बाबा नानक से संबंधित सरपंचों की मांग पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब भर में सेमग्रस्त घोषित किए 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। अब इन खेतों के किसान साल भर में कभी भी धान की बिजाई कर सकते हैं। इस फैसले से डेरा बाबा नानक ब्लाक के सेमग्रस्त गांवों के सरपंचों व किसानों में खुशी की लहर है। इस संबंध में गांव निज्जरपुर के सरपंच रणदीप सिंह, प्रकाश सिंह, कुलविंदर सिंह, कर्मजीत सिंह, जगजीत सिंह आदि ने बताया कि पिछले साल अगस्त में सक्की किरण नाले और रावी दरिया के पानी से आई बाढ़ में उनकी धान की फसल तबाह हो गई थी। इसके बाद विभिन्न संगठनों के सहयोग से उन्होंने गेहूं की बिजाई की, लेकिन गेहूं वाले खेतों में सेम आ जाने के कारण उनकी गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई थी। सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव अठवाल, कोटली सूरत मल्ली, अर्लीभन्न के रकबे में सेम पड़ जाने और गेहूं की फसल नष्ट होने पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन सेम प्रभावित खेतों में अग्रिम धान लगाने की मांग की थी। इस मांग के मद्देनजर पंजाब सरकार ने कृषि विभाग और विभिन्न टीमों को सेमग्रस्त खेतों की जांच के लिए भेजा था। टीमों ने जांच के बाद पाया कि इन खेतों में डेढ़ से दो फुट मिट्टी खोदने के बाद सेम का पानी आ जाता है। पंजाब सरकार ने किसानों की मांग स्वीकार करते हुए जिला गुरदासपुर के गांव भुल्लर, अठवाल, कोटली सूरत मल्ली के अलावा पूरे पंजाब के विभिन्न जिलों के कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया है। इनमें श्री मुक्तसर साहिब के 95, फरीदकोट के 19, फाजिल्का के 81, बठिंडा के दो और मानसा के एक गांव शामिल हैं। सरकार ने इन गांवों के क्षेत्र को धारा 3(3)(सी) के तहत 'पंजाब प्रिजर्वेशन ऑफ सब-सायल वाटर एक्ट, 2009' के दायरे से अगले दो सालों की अवधि के लिए छूट दे दी है। इस छूट के बाद अब ये किसान निर्धारित तिथि से पहले अग्रिम धान की बिजाई कर सकेंगे। किसानों का कहना है कि इस फैसले से उनकी आर्थिक को काफी राहत मिलेगी। सरपंच रणदीप सिंह ने सेमग्रस्त जमीनों के मालिक किसानों से अपील की कि वे धान की बिजाई के लिए नर्सरियों की तैयारी करें ताकि सेमग्रस्त खेतों में धान की बिजाई की जा सके। सरपंच रणजीत सिंह और प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले साल अगस्त महीने में बाढ़ के पानी से जहां उनकी धान की फसल पूरी तरह तबाह हो गई थी, वहीं देर से खेतों में किसानों द्वारा बिजाई की गई गेहूं की फसल भी खेतों में सेम की मार पड़ जाने के कारण नष्ट हो गई है। उन्होंने बताया कि कई किसानों के खेतों में से डेढ़ से तीन क्विंटल प्रति एकड़ गेहूं की पैदावार ही निकली है, जो सामान्य से काफी कम है। किसानों ने कहा कि पंजाब सरकार को सेमग्रस्त जमीनों पर खराब हुई गेहूं की फसल का भी किसानों को तुरंत मुआवजा देना चाहिए ताकि समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे किसानों की आर्थिक सहायता हो सके। जिला गुरदासपुर के कृषि अधिकारी डा. ठाकुर रणधीर सिंह से बातचीत में उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा जिला गुरदासपुर के तीन गांवों आदि सहित कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया गया है। इसके तहत इन सेमग्रस्त गांवों के किसानों को अग्रिम धान बिजाई की छूट मिली है, जबकि दूसरी जमीनों में धान की पनीरी की बिजाई और धान की रोपाई पंजाब सरकार के खेतीबाड़ी विभाग के आदेशों पर होगी।

नारी शक्ति वंदन विधेयक पर सियासी संग्राम, भाजपा लाएगी निंदा प्रस्ताव

चंडीगड़ हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शोक प्रस्ताव पढ़ रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार कर दिया है।  नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई। हुड्डा साढ़े 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। भाजपा नारी शक्ति वंदन विधेयक पर कांग्रेस की भूमिका के खिलाफ सदन में निंदा प्रस्ताव लेकर आएगी। कांग्रेस ने इसे नियमानुसार गलत बताते हुए विरोध करने का फैसला किया है। इस मुद्दे पर सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच हंगामा तय है। कांग्रेस विधायक आफताब अहमद के मुताबिक पार्टी देशभर में लोकसभा की 543 सीटों में से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने और यही व्यवस्था सभी राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने का प्रस्ताव लाएगी। भाजपा सरकार कांग्रेस की इसी भूमिका को लेकर निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। सरकार का तर्क है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले ही महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का रास्ता साफ कर चुका है इसलिए कांग्रेस का रुख विरोधाभासी है। सत्र में एक अहम विधेयक भी पेश किया जाएगा। हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026 को कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए क्लर्क पद पर प्रमोशन का कोटा 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी किया जाएगा। साथ ही 5 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति का पात्र माना जाएगा और 5 फीसदी एक्स-ग्रेशिया पद भी अनिवार्य होंगे। निलंबित विधायकों पर नजर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप में निलंबित पांचों विधायक शैली चौधरी, रेनू बाला, मोहम्मद इसराइल, मोहम्मद इलियास और जरनैल सिंह को भी विधायक दल की बैठक में शामिल होने का संदेश भेजा गया है। इन पांचों विधायकों पर बैठक में शामिल होने से लेकर सदन तक में सभी नजर रहेंगी।  

देसी पशुओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी, किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

लखनऊ पहले चरण में अवधी भेड़ व जौनपुरी बकरी, दूसरे चरण में गायों की अलग-अलग प्रजातियों पर काम किया जाएगा। कृषि विश्वविद्यालय जेनेटिक परीक्षण करेंगे। देसी नस्लों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने का काम किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में देसी नस्ल के पशुओं की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत इन नस्लों का जेनेटिक परीक्षण कराया जाएगा। पहले चरण में अवधी भेड़ और जौनपुरी बकरी पर काम शुरू किया गया है, जबकि दूसरे चरण में गायों की विभिन्न देसी प्रजातियों पर शोध और परीक्षण किया जाएगा। सरकार की योजना है कि देसी नस्लों का संरक्षण करते हुए उन्हें समवर्ती (स्थानीय अनुकूल) नस्लों के साथ गर्भाधान कराकर नई और अधिक उपयोगी नस्ल विकसित की जाए। इससे पशुपालकों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा और स्थानीय जलवायु के अनुकूल मजबूत नस्लें भी तैयार होंगी।   प्रदेश में बड़ी संख्या में देसी नस्ल के पशु मौजूद हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में ये तेजी से खत्म हो रहे हैं। अधिक दूध उत्पादन की चाह में विदेशी नस्लों के सीमेन (वीर्य) का उपयोग किया गया, जिससे मिश्रित नस्लें तो तैयार हुईं, लेकिन वे प्रदेश की जलवायु और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिहाज से लंबे समय तक सफल नहीं रहीं। इससे पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसे देखते हुए अब सरकार ने देसी नस्ल सुधार की नई रणनीति बनाई है। भारत सरकार के सहयोग से कृषि विश्वविद्यालयों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वविद्यालय पहले देसी नस्लों का नेटवर्क तैयार करेंगे, फिर उनका जेनेटिक परीक्षण कर राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण और पहचान दिलाएंगे। इसके बाद उनके गुणों, उपयोगिता और अगली पीढ़ी सुधार पर शोध किया जाएगा। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की टीम ने पहले चरण में जौनपुरी बकरी और अवधी भेड़ को चिह्नित कर इन पर काम शुरू कर दिया है। जिलेवार हो रही देसी नस्लों की पहचान जौनपुर जिले के जफराबाद और शाहगंज क्षेत्र की जौनपुरी बकरी को चिह्नित किया गया है। इसी तरह अयोध्या और बाराबंकी क्षेत्र में अवधी नस्ल की गाय की पहचान की गई है। भविष्य में बलिया, गाजीपुर और चंदौली की गंगातीरी गाय को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा बुंदेलखंड की केन नस्ल, लखीमपुर की खेरीगढ़ी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की साहीवाल सहित कई अन्य नस्लों पर भी काम होगा। इसके लिए जिलेवार देसी नस्लों की पहचान की जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बकरियों की नस्ल सुधार पर केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान भी कार्य कर रहा है। नस्ल संरक्षण के साथ पशुपालकों को फायदा देने का प्रयास नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के जेनेटिक विभाग के प्रो. जसवंत सिंह ने बताया कि देसी नस्लों को चिह्नित करने के लिए नेटवर्क परियोजना पर कार्य चल रहा है। इन नस्लों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा और इनके जेनेटिक पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उदाहरण के तौर पर जौनपुरी बकरी के जेनेटिक तत्वों की पहचान कर यह देखा जाएगा कि उसमें इटावा-औरैया क्षेत्र की जमुनापारी नस्ल के साथ क्रॉस ब्रीडिंग का कितना लाभ मिलेगा। पूरी रणनीति का उद्देश्य यह है कि देसी नस्लें भी सुरक्षित रहें और पशुपालकों की आय भी बढ़े। इसके लिए संबंधित क्षेत्र की जलवायु, चारा, खानपान और उत्पादक क्षमता पर भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। देसी बकरी: जौनपुरी, जमुनापारी, बरबरी, बुंदेलखंडी आदि। देसी भेड़- मुजफ्फरनगरी, जालोनी, भदौरी, अवधी आदि। देसी गाय: गंगातीरी, केनकथा, खेरीगढ़, मेवती, पोनवार, हरियाणा, साहीवाल आदि। देसी भैंस: भदवारी, तराई, यूपी मुर्रा आदि। देसी नस्लों को बचाना जरूरी गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि प्रदेश सरकार नंद बाबा दुग्ध मिशन और मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के जरिए देसी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दे रही है। सभी कृषि विश्वविद्यालयों, पशु शोध संस्थानों को भी इस दिशा में कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है। देसी नस्लों को बचाना जरूरी है। इस दिशा में हर स्तर पर कार्य हो रहा है।  

नीना मित्तल का बड़ा बयान: भाजपा के पंजाब में सत्ता में आने की उम्मीदें पूरी नहीं होंगी

लुधियाना  आम आदमी पार्टी की हलका विधायक नीना मित्तल की अगुवाई में  यहां पार्टी के सात पूर्व राज्यसभा सांसदों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। टाहली वाला चौक में हुए इस प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के अनेक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्यों के पुतले फूंके गए और नारेबाजी कर अपना रोष व्यक्त किया गया। इस मौके पर विधायक नीना मित्तल ने कहा कि जिन लोगों ने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है, उन्हें पंजाब के लोग कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल निजी लाभ के लिए उठाया गया है, जिससे जनता के भरोसे को ठेस पहुंची है। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार की सोच पंजाब विरोधी है और उसके मंसूबे कभी भी पंजाब की सत्ता पर काबिज होने के पूरे नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीतियों ने पहले ही पंजाब की किसानी और युवाओं को नुकसान पहुंचाया है, जिसे लोग भली-भांति समझते हैं। विधायक नीना मित्तल ने कहा कि पार्टी अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में राज्य को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा रही है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, जिनका सीधा लाभ जनता को मिल रहा है। विधायक नीना मित्तल ने जनता से अपील की कि सच और विकास की राजनीति का साथ दें और विरोधियों की गुमराह करने वाली नीतियों से सतर्क रहे।

पंजाब में 33 हफ्ते में जन्मी नवजात को ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ से मिली जिंदगी, जीती मौत की जंग

चंडीगढ़  नवजात की पहली किलकारी राहत लेकर आनी चाहिए, लेकिन कई बार यह सन्नाटा भी लेकर आती है. बठिंडा जिले के रामपुरा फूल स्थित अग्रवाल अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन उसके जीवन की जंग अभी शुरू ही हुई थी।  सिर्फ 33 सप्ताह में जन्मी रेशम सिंह और गुरमेल कौर की बेटी समय से पहले बेहद नाजुक हालत में इस दुनिया में आई. उसका वजन केवल 1.926 किलोग्राम था, जो सामान्य पूर्णकालिक जन्म वजन (लगभग 2.5 से 4 किलोग्राम) से काफी कम है. जन्म के पहले ही पल से उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी. बिना चिकित्सकीय सहायता के सांस लेना संभव नहीं था. ऐसे हालात में समय गंवाने की कोई गुंजाइश नहीं थी।  डॉ. सुरिंदर अग्रवाल (एमडी पीडियाट्रिक्स), जिनके पास 24 वर्षों का अनुभव है, ने अपनी टीम के साथ तुरंत उपचार शुरू किया. बच्ची को एनआईसीयू में भर्ती किया गया, जहां मशीनें वह काम कर रही थीं, जो उसके अविकसित फेफड़े नहीं कर पा रहे थे. मॉनिटर पर हर धड़कन और हर सांस पर नजर रखी जा रही थी. हर पल अनिश्चितता और हर पल महत्वपूर्ण था।  इसके बाद 17 दिनों तक लगातार देखभाल और सही उपचार जारी रहा. नवजात को 10 दिनों तक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सहायता दी गई, इसके बाद 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया. इस दौरान बच्ची को पीलिया हो गया, जिसका इलाज फोटोथेरेपी से किया गया. सीमित कंगारू मदर केयर के जरिए सावधानीपूर्वक पोषण दिया गया, ताकि उसकी नाजुक स्थिति प्रभावित हुए बिना उसे गर्माहट और स्थिरता मिल सके।  डॉ. अग्रवाल ने कहा, “एनआईसीयू में सुधार अचानक नहीं आता, यह धीरे-धीरे स्थिर संकेतों के साथ आता है.” धीरे-धीरे सुधार दिखना शुरू हुआ। सांस सामान्य होने लगी. प्रतिक्रियाएं बेहतर हुईं. जो नाजुक शरीर पहले संघर्ष कर रहा था, वह दिन-ब-दिन मजबूत होने लगा. डॉ. अग्रवाल ने कहा, “कई बार बच्चे को बचाना सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि सही समय पर निर्भर करता है. थोड़ी-सी देरी भी सब कुछ बदल सकती है।  इस मामले में कोई देरी नहीं हुई. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत परिवार को कैशलेस इलाज मिला, जिससे डॉक्टर बिना किसी आर्थिक चिंता के पूरी तरह उपचार पर ध्यान केंद्रित कर सके।  17 दिनों के इलाज के बाद बच्ची को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई. अब उसका वजन 2.106 किलोग्राम है. हालांकि वह अभी भी नाजुक है, लेकिन पहले से काफी स्वस्थ है. नवजात अपने माता-पिता की गोद में जीवित, स्थिर और स्वस्थ हालत में अस्पताल से बाहर आई।  एक अन्य मामले में, होशियारपुर के मनिंदर सिंह ने अपना अनुभव साझा किया. उनकी बेटी गुरकीरत कौर, जिसका जन्म इसी वर्ष 14 अप्रैल को हुआ था, को भी जन्म के बाद नवजात देखभाल की जरूरत पड़ी. उन्होंने कहा, “अस्पताल में उसका अच्छा इलाज हुआ और पूरा खर्च मुख्यमंत्री स्वास्थ्य कार्ड के तहत कवर हो गया।  रजिस्ट्रेशन उसी दिन पूरा हो गया और अब परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है।  मनिंदर सिंह ने धन्यवाद देते हुए कहा, “इसलिए ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ बहुत महत्वपूर्ण है. जो व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करता है, वह भी अपने बच्चे के लिए बेहतर इलाज ले सकता है. यह बहुत बड़ी बात है।  पंजाब के एनआईसीयू में अभी भी खामोशी होती है, लेकिन अब वह डर नहीं, बल्कि उम्मीद से भरी होती है।  यह उम्मीद बिल्कुल शांत और स्थिर होती है, जिसमें मॉनिटर हर दिन और मजबूत होती किसी नन्हे दिल की धड़कन दिखाता है, और कई बार यही खामोशी और स्थिरता सब कुछ बदलने के लिए काफी होती है। 

भीषण गर्मी को देखते हुए करौली प्रशासन का बड़ा फैसला, सुबह लगेंगी कक्षाएं

करौली करौली में बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने आदेश जारी कर सभी सरकारी और प्राइवेट स्‍कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल समय में बदलाव किया है. यह आदेश 27 अप्रैल 2026 से 16 मई 2026 तक प्रभावी रहेगा. प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. सुबह 7:30 बजे से चलेंगी कक्षाएं    जिला कलेक्टर के जारी आदेश के अनुसार, अब जिले के सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाएं सुबह 7:30 बजे से 11 बजे तक ही संचालित होंगी. कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए पूर्व निर्धारित समय यथावत रखा गया है. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि गर्मी के बढ़ते प्रभाव और मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ज‍िससे विद्यार्थियों को लू और अत्यधिक तापमान से बचाया जा सके. नियमों का पालन करने के निर्देश जिला कलेक्टर ने यह आदेश आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत जारी किया है. साथ ही सभी विद्यालय संचालकों को सख्ती से निर्देश दिए गए हैं कि वे इस आदेश की पालना सुनिश्चित करें. अगर आदेश की अवहेलना की गई तो स्कूल संचालकों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. सहायक निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के धर्मेंद्र कुमार मीणा ने जानकारी दी है. यह जो फैसला लिया गया, इसलिए क्योंकि जिले में हीट वेब शुरू हो चुकी है, जिसके कारण छोटे-छोटे बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.  स्कूल प्रबंधकों से अपील की गई है क‍ि प्रभावी तरीके से नियमों का पालन करें.

मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, 33 से 36 मंत्री तक बढ़ सकती है संख्या

पटना बिहार को सुंदर बनाना है। समृद्ध और विकसित बनाना है। फैक्ट्री लगानी है। इस दिशा में हरसंभव प्रयास करूंगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन सहित रोजगार को और अधिक बढ़ावा मिल सके, इसके लिए काम किया जायेगा।" मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 अप्रैल को अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर में जब यह बातें कहीं तो स्पष्ट हो गया कि वह लंबी पारी खेलना चाहते हैं। 15 अप्रैल को नई सरकार बनने के बाद से अब तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के काम करने के तौर तरीके और बयानों से स्पष्ट हो गया है कि वह एक नई टीम चाहते हैं। सम्राट चौधरी के करीबी इसे 'नई विकास टीम' का नाम दे रहे हैं। नई टीम में कई चेहरों का नाम फाइल हो चुका है। कुछ पर मंथन चल रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि जल्द ही इस नई टीम की घोषणा भी कर दी जाएगी। एक दिन पहले यानी रविवार को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कहा कि जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा। तारीख उन्होंने नहीं बताई लेकिन कयास लगाया जा रहा है कि चार मई को चुनाव परिणाम आने के बाद पांच मई तक बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार कर लिया जाए। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भाजपा नए चेहरों को मौका जरूर देगी। विजय सिन्हा, मंगल पांडेय, रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल जैसे पुराने दिग्गजों को दुबारा मौका मिल सकता है। युवा और महिलाओं पर सम्राट चौधरी का विशेष फोकस रहेगा। आलाकमान चाहते हैं कि सरकार में सोशल इंजीनियरिंग का खास ख्याल रखा जाए। हर वर्ग को मौका मिले ताकि संतुलन बरकरार रहे। सम्राट चौधरी की नई टीम में क्षेत्रीय और समाजिक समीकरण का समावेश दिख सकता है। जदयू ने अपने दो पुराने चेहरों को उपमुख्यमंत्री बनाकर यह साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार अधिक प्रयोग नहीं करना चाहते हैं। निशांत कुमार फिलहाल सरकार में कोई पद नहीं लेंगे। यह लगभग तय है। अन्य पुराने चेहरे जैसे श्रवण कुमार, जमां खान, मदन सहनी, लेशी सिंह को दुबारा मौका मिल सकता है। हालांकि निशांत के करीबी कुछ युवा विधायक भी मंत्री बनने की कतार में खड़े हैं। इनमें कुछ को जदयू मौका दे सकती है। हाल के दिनों में विपक्ष ने जिन मंत्रियों पर सवाल उठाया है, उनपर  एनडीए विचार कर रहा है। विजय सिन्हा का क्या होगा? 2025 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी तो सम्राट चौधरी के साथ विजय सिन्हा भी उपमुख्यमंत्री बने थे। उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इस विभाग में भ्रष्टाचार अंकुश लगाने के लिए कुछ ऐसे कदम उठाए, जिसकी चर्चा आज तक हो रही है। जनता ने विजय सिन्हा को एक ईमानदार नेता के रूप में देखा। हालांकि, राजस्व सेवा के अधिकारियों ने उनके काम करने की शैली का विरोध किया और हड़ताल पर चले गए। लेकिन, विजय सिन्हा अपने निर्णय पर अडिग रहे और उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही। नई सरकार बनी तो विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री नहीं बने। सोशल मीडिया पर विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी के बीच नोंकझोंक के पुराने वीडियो वायरल होने लगे। चर्चा होने लगी कि विजय सिन्हा अब किनारे कर दिए जाएंगे। तेजस्वी यादव ने भी विधानसभा में कहा कि विजय सिन्हा की नजर सम्राट चौधरी की पगड़ी पर है। हालांकि, सम्राट चौधरी ने विजय सिन्हा के काम की तारीफ की। इसके बाद ऐसा लगा कि विजय सिन्हा को दोबारा मंत्रिमंडल में जगह दिया जाएगा। चर्चा है कि नाराज चल रहे विजय सिन्हा की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें दोबारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ गृह विभाग की भी जिम्मेदारी मिल सकती है। फिलहाल गृह विभाग सम्राट चौधरी के पास है। हालांकि, आखिरी फैसला दिल्ली दरबार में बैठे आलाकमान को ही लेना है। अब वहीं से सारा कुछ तय होगा।   चिराग, उपेंद्र और मांझी के पार्टी से कितने मंत्री बनेंगे? 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद जो सरकार बनी, उसमें 26 मंत्रियों ने शपथ ली थी। उसमें भाजपा से 14 , जदयू से 8, लोजपा (राम) से दो, हम और रालोमो से एक-एक मंत्री शामिल थे। सम्राट चौधरी सरकार में जो खाका तैयार किया गया है उसमें मंत्रियों की संख्या 33 तक जा सकती है। इसमें जदयू के 14 और भाजपा के 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं चिराग की पार्टी से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी से पहले जैसे ही एक-एक मंत्री रहने की बात सामने आ रही है। अगर पूरी संख्या, यानी 36 विधायक रहे तो भाजपा के 17, जदयू के 15, लोजपा रामविलास के 2, रालोमो और हम के एक-एक मंत्री तय फॉर्मूले के तहत बनेंगे। विधानसभा अध्यक्ष पद किसके पास जाएगा? विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के कुछ नेता अपने पाले में चाह रहे हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती है। भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, ऐसा आश्वासन उन्हें पहले ही दिया जा चुका है। इस सूरत में भाजपा विधानसभा अध्यक्ष पद के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देगी। 

नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर टवेरा और ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर, 5 की मौत, 7 घायल

नर्मदापुरम  मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में आधी रात हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. टवेरा कार और अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली की आमने-सामने टक्कर में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 लोग घायल हो गए. हादसा नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर आंचलखेड़ा के पास हुआ, जहां टक्कर इतनी तेज थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. यह घटना उस समय हुई जब कार सवार लोग एक शादी समारोह से लौट रहे थे. अचानक हुए इस हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया।  रात करीब 1 बजे हुए इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद कार के परखच्चे उड़ गए. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जोरदार आवाज के साथ दोनों वाहन आपस में भिड़े और कुछ ही पलों में चीख-पुकार मच गई. आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने का प्रयास किया. हादसे के तुरंत बाद पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ।  आमने-सामने की टक्कर बनी मौत की वजह प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, टवेरा और ट्रैक्टर-ट्रॉली के बीच सीधी भिड़ंत हुई. ट्रॉली में अनाज भरा हुआ था, जिससे उसका वजन ज्यादा था और टक्कर का असर भीषण रहा. कार सवारों को संभलने का मौका नहीं मिला।  शादी से लौट रहे थे सभी लोग बताया जा रहा है कि कार में सवार सभी लोग एक शादी समारोह से लौट रहे थे. खुशी के माहौल में घर लौटते वक्त अचानक यह हादसा हुआ. परिवार और रिश्तेदारों के बीच खुशी का माहौल कुछ ही पलों में शोक में बदल गया।  घायलों का इलाज जारी, कुछ की हालत गंभीर हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के अनुसार, कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है. प्रशासन की ओर से बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है।  तेज रफ्तार और कम दृश्यता का असर पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि हादसे की वजह तेज रफ्तार और रात के समय कम दृश्यता हो सकती है. हाईवे पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण ड्राइवर को सामने से आ रहे वाहन का अंदाजा नहीं लग पाया।  जांच में जुटी पुलिस, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है। 

हीटवेव से झुलस रहा राजस्थान, 48 घंटे के लिए येलो अलर्ट जारी

 जयपुर राजस्थान इस समय भीषण गर्मी और झुलसाने वाली लू (Heatwave) की चपेट में है. मरुधरा के बाड़मेर में रविवार को पारा 46.4 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुँचा, जिसने इसे राज्य का सबसे गर्म शहर बना दिया. फलोदी, जैसलमेर और जालौर जैसे जिलों में भी तापमान 45 डिग्री के ऊपर बना हुआ है. दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और गर्म हवाओं ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. राज्य के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है. अगले 48 घंटे भारी, जारी हुई 'येलो वार्निंग' मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, आगामी 24 से 48 घंटों तक प्रदेश के कई हिस्सों में हीटवेव का दौर जारी रहेगा. नागौर, जोधपुर, जैसलमेर, कोटा, बीकानेर और अजमेर सहित कई जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है. प्रशासन ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक बाहर न निकलने और सावधानी बरतने की सलाह दी है. पश्चिमी विक्षोभ बदलेगा मौसम का मिजाज तपती गर्मी के बीच एक अच्छी खबर भी सामने आई है. मौसम केंद्र जयपुर के मुताबिक, एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है और साथ ही बंगाल की खाड़ी से आने वाली पूर्वी हवाएं भी जोर पकड़ रही हैं. इस दोहरे प्रभाव के कारण अगले 3-4 दिनों में राजस्थान के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. आंधी और बारिश से गिरेगा पारा आगामी दिनों में दोपहर के बाद बादलों की गर्जना के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी आंधी चलने और हल्की बारिश होने की संभावना है. चूरू, झुंझुनू और सीकर जैसे जिलों में भी बूंदाबांदी के आसार हैं. इस मौसमी बदलाव से तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट आएगी, जिससे झुलसाने वाली गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है.

अरुणाचल कनेक्शन से यूपी में लाइसेंस खेल, बिना लर्नर बने DL जारी

बस्ती यूपी के बस्ती जिले में दलालों के सिंडिकेट ने 4500 से अधिक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवा दिए। इनसे करीब 4.75 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। दलालों ने फर्जी तरीके से आवेदकों की बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से करवाकर बस्ती में लाइसेंस बनवाए हैं। इतना ही नहीं अफसरों की शह पर दलालों ने मिर्जापुर, संतकबीनगर, पडरैाना, गोरखपुर और आसपास के जिलों के आवेदकों के डीएल बस्ती से बनवा दिए हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। रामतीरथ मैार्य का डीएल नंबर यूपी63 20180030028 है। जोकि मिर्जापुर आरटीओ का है। उनके डीएल की बैकलॅाग एंट्री सेप्पा(अरुणाचल प्रदेश) से वर्ष 2018 में करवाई और बस्ती में वर्ष 2026 में एड्रेस चेंज की रसीद काटकर डीएल बनाया गया। ऐसे ही मनीष यादव का डीएल नंबर यूपी57 20170098799 है। यह पडरैाना का है। उनके डीएल की भी बैकलॅाग एंट्री सेप्पा से 2017 में हुई और बस्ती में रिन्यूवल करवाया गया। करण गुप्ता का डीएल नंबर यूपी51 20200018137 है, जिसकी बैकलॅाग एंट्री सियांग(अरुणाचल प्रदेश) से हुई और दलालों ने लाइसेंस बस्ती से बनवा दिया। यूपी51 20200034451, यूपी53 20190077236, यूपी57 20170098787, यूपी63 20180030001, यूपी63 20180030028, यूपी53 20190077236 सहित दर्जनों ऐसे फर्जी तरीके से बनवाए गए डीएल हैं, जिनका रिकॅार्ड अमर उजाला के पास है। इन डीएल में दलालों के सिंडिकेट ने अफसरों की शह पर फर्जी तरीके से डीएल बनवाकर आवेदकों से मोटी रकम वसूली है। खास बात यह है कि इन आवेदकों का लर्नर लाइसेंस नहीं बनवाया गया और नियमों को ताक पर रखकर डीएल बनवाए गए हैं। प्रक्रिया: ऐसे बनते हैं डीएल डीएल बनवाने के लिए आवेदक को पहले लर्नर लाइसेंस बनवाना होता है। इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन है। आवेदक को आरटीओ जाने की आवश्यकता नहीं होती है। ऑानलाइन आवेदन कर टेस्ट देने के बाद यह बन जाता है। लर्नर बनने के एक महीने बाद से लेकर छह महीने के बीच परमानेंट डीएल बनता है। इसमें आरटीओ जाकर बायोमेटि्रक और वाहन टेस्ट पास करना पड़ता है। इसके बाद हफ्ते से दो हफ्ते के अंदर डाक से डीएल घर पहुंचता है। हेवी लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदक के पास एक साल पुराना डीएल होना जरूरी है। खेल: अरुणाचल में फीडिंग, बस्ती में रिन्यूवल दलालों का सिंडिकेट बस्ती में अफसरों की शह पर काम कर रहा है। यही वजह है कि डीएल पडरैाना का हो, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर या अन्य किसी जिले का, उसकी बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश के सेप्पा व सियांग से करवाई जाती है। उसके बाद डीएल में पता बदलने या रिन्यूवल का आवेदन बस्ती से करवाकर लाइसेंस बनवा दिया जाता है। इसके एवज में आवेदक से मोटी रकम वसूली जाती है। अफसरों की मिलीभगत से पनपा सिंडिकेट आरटीओ बस्ती परिवहन विभाग का संभाग है। संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर प्रमुख रूप से इसके अंतर्गत आते हैं। बस्ती में आरटीओ फरीदउद्दीन, आरआई सीमा गैातम, एआरटीओ माला बाजपेयी की तैनाती है। लेकिन दलालों का सिंडिकेट खुलेआम काम कर रहा है और अफसरों को इसकी जानकारी तक नहीं। उपरोक्त अफसरों की जवाबदेही भी है। उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लाजिमी हैं। वसूली: आवेदकों से डीएल के एवज में वसूले गए 4.50 करोड़ बस्ती में एक्टिव दलालों के सिंडिकेट ने अफसरों की मिलीभगत से जो रैकेट तैयार किया, उसमें अनुमानित तैार पर 4500 से अधिक डीएल बनवाए गए। आवेदकों से औसतन दस हजार रुपये वसूले गए। इससे करीब 4.75 करोड़ रुपये कमाए गए। सूत्र बताते हैं कि दलालों ने वसूली की इस रकम में अफसरों को भी हिस्सा दिया। सवाल: बैकलॅाग एंट्री क्यों, कहां हैं लर्नर लाइसेंस जनवरी, 2013 से पहले मैनुएली लाइसेंस बनते थे। जिनका रिकॅार्ड रजिस्टर में रखा जाता था। इसके बाद स्मार्ट कार्ड बनने शुरू हो गए। रिकॅार्ड कम्प्यूटर में रखा जाने लगा। वर्ष 2013 के बाद लाइसेंसों का रिकॅार्ड ऑनलाइन ही है। उन्हें रजिस्टर में रखने की आवश्यकता खत्म हो गई। लेकिन दलालों ने अफसरों से मिलीभगत कर बैकलॅाग एंट्री करवाई और एड्रेस चेंज व रिन्यूवल करवाकर डीएल बनवा दिए। ऐसे में सवाल उठता है कि बैकलॅाग फीडिंग की जरूरत क्यों पड़ी। इतना ही नहीं सूत्र बताते हैं कि लर्नर लाइसेंस बनवाए बगैर परमानेंड डीएल बना दिए गए। इतना ही नहीं भारी वाहनों के हेवी लाइसेंस के लिए एक साल पुराना लाइसेंस अनिवार्य है। इस नियम को भी ताक पर रखकर डीएल बनवाए गए। सड़क सुरक्षा की सिर्फ फिक्र, संजीदगी नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से लगातार सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है, लेकिन परिवहन विभाग के अफसर तनिक भी संजीदगी नहीं बरत रहे हैं। यही वजह है कि लखनऊ राजधानी में सड़क हादसे बढ़ रहे हैं, फिर जिलों की स्थिति समझी जा सकती है। फर्जी तरीके से लाइसेंस बनाए जा रहे हैं, ऐसे में सड़क सुरक्षा को अमलीजामा पहनाया जाना नामुमकिन है।-दयाशंकर सिंह, परिवहन मंत्री