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प्रदेश में 6 लाख घरों पर लगेंगे सौर ऊर्जा संयंत्र : मंत्री शुक्ला

भोपाल.  नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया है कि मध्यप्रदेश में 6 लाख घरों पर पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्र लगाये जायेंगे। इसके लिये वेंडर्स से डिजिटल एग्रीमेंट भी किया जायेगा। इससे सौर संयंत्र की स्थापना लागत में कमी आयेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये सरकार कृत-संकल्पित होकर कार्य कर रही है। मंत्री शुक्ला ने बताया कि हितग्राही एवं वेंडर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा विभिन्न शुल्कों में कमी लाने के लिये डिजिटल एग्रीमेंट किये जाने संबंधी याचिका मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग में लगाई थी। रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग शुल्क, मीटर जांच शुल्क और इंस्टॉलेशन/कमीशनिंग शुल्क एवं अलग-अलग भौतिक अनुबंधों के स्थान पर डिजिटल एग्रीमेन्ट लागू करने के संबंध में मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने याचिका की सुनवाई के बाद डिजिटल एग्रीमेंट के लिये आदेश पारित कर दिया है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा भौतिक अनुबंधों के स्थान पर डिजिटल एग्रीमेन्ट करने संबंधी आदेश पारित करने से घरों की छत पर सौर संयंत्र स्थापना लागत में कमी आएगी। साथ ही स्थापना संबंधी कार्य शीघ्र गति से हो सकेगा।  

निशांत कुमार का सियासी सफर शुरू, जेडीयू संगठन पर रहेगा फोकस

पटना बिहार में इन दिनों सबसे ज्यादा सियासी चर्चा में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार है, जो सियासत के पिच पर कदम तो रख दिए हैं, लेकिन सरकार में कोई भी जिम्मेदारी न लेने का फैसला किया है. निशांत कुमार 3 मई से बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं, लेकिन उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला जून में होगा. इसके बाद ही तय होगा कि उनका भूमिका सत्ता में होगा या फिर संगठन में होगा अहम रोल? निशांत कुमार 3 मई से बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं और इसकी शुरुआत पश्चिमी चंपारण से करेंगे. यह वही क्षेत्र है, जहां से पहले भी नीतीश कुमार अपनी कई प्रमुख यात्राएं शुरू करते रहे हैं. चंपारण से यात्रा शुरू करना निशांत के लिए सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रयोग माना जा रहा है. निशांत कुमार अपने पिता के राजनीतिक मॉडल को ही आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. नीतीश कुमार लंबे समय तक 'यात्रा' के जरिए सीधे जनता से जुड़ते रहे हैं, और अब निशांत कुमार उसी रास्ते पर चल रहे हैं. यात्रा के एक महीने गुजर जाने के बाद निशांत के सियासी भविष्य और रोल को लेकर फैसला होगा? निशांत यात्रा से तैयार करेंगे 'पावर ग्राउंड' नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 3 मई से राज्यव्यापी यात्रा पर निकलेंगे. खास बात यह है कि वे इस दौरे पर किसी बड़े पदाधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक साधारण जेडीयू कार्यकर्ता के रूप में उतरेंगे. उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क स्थापित करना है. निशांत कुमार यात्रा के दौरान पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे और संगठन की जमीनी हकीकत को समझने की कोशिश करेंगे. बताया जा रहा है कि यह यात्रा तीन से चार महीने तक चलेगी, जिससे उन्हें पूरे राज्य में संगठन की स्थिति का व्यापक अनुभव मिल सके.इसलिए यह यात्रा उनके लिए पावर से पहले ग्राउंड तैयार करने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है. राजनीतिक जानकारों की नजर में यह सिर्फ एक सामान्य यात्रा नहीं है, बल्कि राजनीतिक लॉन्च का अगला चरण, संगठन को मजबूत करने की कोशिश और बिहार में नए नेतृत्व की तैयारी है.  नीतीश कुमार ने पिछले कई दशकों में देश-प्रदेश की राजनीति में अपनी जो साख बनाई है, निशांत कुमार उसे ही आगे बढ़ाने की तैयारी पर बढ़ रहे हैं. जून होगा निशांत के राजनीति का डिसाइडर नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद से चर्चा थी कि निशांत कुमार को बिहार सरकार में कोई बड़ा पद मिल सकता है. सम्राट सरकार में डिप्टीसीएम बनाने के भी कयास लगाए जा रहे थे, जिसके लिए तैयार नहीं हुए. निशांत ने फिलहाल सरकार में कोई ज़िम्मेदारी न लेने का फैसला किया है. सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय उनका व्यक्तिगत है और वे किसी पद को संभालने से पहले खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहते हैं. इसीलिए उन्होंने यात्रा के जरिए संगठन और जमीनी काम पर फोकस करने का रास्ता चुना है. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार जून महीने में विधान परिषद के सदस्य बन सकते हैं. जून में बिहार में 9 एमएलसी की सीटों पर चुनाव हैं, जिसमें से तीन सीटें जेडीयू के खाते में आ सकती हैं. इन्हीं में से एक सीट को निशांत कुमार को एमएलसी के लिए चुना जा सकता है. इसके बाद  निशांत कुमार खुद यह तय करेंगे कि उनकी भूमिका सरकार में होगी या संगठन में रोल अदा करेंगे. पहले संगठन पर फोकस करेंगे निशांत निशांत कुमार जिस तरह से कोई पद लेने से पहले यात्रा का रास्ता चुना है, उससे उनके राजनीतिक प्लान को बहुत आसानी से समझा जा सकता है. सत्ता के बजाय संगठन शक्ति पर भरोसा. निशांत का मानना है कि अगर जनता के बीच सीधे पैठ बना ली जाए, तो सत्ता खुद-ब-खुद कदम चूमेगी. चंपारण से शुरुआत करना यह बताता है कि वे अपने पिता के उसी 'गांधीवादी और विकासवादी' मॉडल को 2.0 वर्जन में पेश करने जा रहे हैं. नीतीश कुमार की नक्शेकदम पर चलते हुए निशांत कुमार तीन से चार महीने तक बिहार के अलग-अलग इलाके की यात्रा करेंगे. जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि निशांत पार्टी का भविष्य हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका बेहद अहम हो सकती है. ऐसे में सरकार और संगठन में किसी पद को लेने से पहले अपनी सियासी जमीन को तैयार करने का प्लान बनाया है. एनडीए में मंत्रिमंडल का फॉर्मूला तय सम्राट चौधरी के अगुवाई में बिहार सरकार बनने के बाद अभी सीएम और दो डिप्टीसीएम है. बिहार में अधिकतम 36 मंत्री बन सकते हैं. ऐसे में सम्राट के कैबिनेट विस्तार को लेकर भी हलचल तेज है. सूत्रों के मुताबिक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद कैबिनेट विस्तार हो सकता है. इसके लिए 4 से 10 मई के बीच मंत्रिमंडल विस्तार संभव है बिहार में एनडीए की सरकार है, मंत्रिमंडल में 16-16 सीटें बीजेपी और जेडीयू को मिल सकती हैं. इसके अलावा 2 पद चिराग पासवान की पार्टी को, जबकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को एक-एक पद दिए जाने की संभावना है.राज्य की राजनीति में इन घटनाक्रमों को आगामी चुनावों से पहले बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.

महिला सामर्थ्य योजना से अवध में डेढ़ हजार से ज्यादा गांवों का कायाकल्प

लखनऊ.  योगी सरकार की महिला सामर्थ्य योजना अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाली बड़ी पहल बनकर उभरी है। अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, फतेहपुर और कानपुर नगर के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना के तहत एक लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं हैं। वहीं, लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी में योजना का विस्तार किया जा रहा है। इस योजना की सबसे बड़ी बात यह है कि इस पहल के जरिए एक लाख से अधिक महिलाएं डेयरी नेटवर्क से जुड़ चुकीं हैं और अब तक 1380 करोड़ रुपये से अधिक सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर भी किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री का फोकस : आत्मनिर्भर महिला, सशक्त परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती ही मजबूत परिवार और समृद्ध समाज की नींव है। महिला सामर्थ्य योजना इसी सोच का विस्तार है, जहां महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार और भुगतान तक सीधे जोड़ा गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनीं महिलाएं अवध क्षेत्र के इन जिलों में आज महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रहीं हैं। रोज करीब 4 लाख लीटर दूध का संग्रह इस बात का प्रमाण है कि डेयरी अब केवल परंपरागत काम नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि बन चुकी है। यह नेटवर्क गांव-गांव में रोजगार, आय का नया आधार तैयार कर रहा है। व्यवसाय की रफ्तार : 8000 से एक लाख पार का सफर मार्च 2023 में 340 गांवों और 8000 महिलाओं से शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों और एक लाख से भी अधिक महिलाओं तक पहुंच चुका है। दुग्ध व्यवसाय का तेजी से हुआ यह विस्तार दर्शाता है कि योगी सरकार की योजनाएं अब सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं। बिचौलिया खत्म, सीधे खाते में पैसा जाने से बढ़ा भरोसा योजना की सबसे बड़ी ताकत है डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी)। महिलाओं को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में मिल रहा है, जिससे पर्ची-खर्ची और बिचौलिया तंत्र पूरी तरह खत्म हो गया है। इस पारदर्शिता ने महिलाओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। सुल्तानपुर की अनीता वर्मा बनीं सफलता का मॉडल सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक के मुकुंदपुर गांव की अनीता वर्मा इस योजना की सफलता की सशक्त मिसाल हैं। दो गायों से उन्होंने छोटा सा प्रयास शुरू किया। गत वर्ष उन्हें  करीब साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। उनकी कहानी न सिर्फ आर्थिक बदलाव की है, बल्कि यह दिखाती है कि सही अवसर और समय पर योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं कैसे अपने परिवार और समाज का भविष्य बदल सकती हैं।

न्यू एज मीडिया में दक्ष बनें जनसंपर्क अधिकारी : आयुक्त रजत बंसल

रायपुर.  जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने आज नवा रायपुर स्थित संवाद कार्यालय में जनसंपर्क संचालनालय और जिला जनसंपर्क अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि वर्तमान दौर में जनसंपर्क अधिकारियों को न्यू एज मीडिया की सभी विधाओं में दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ तकनीक और संचार के नए माध्यमों को अपनाना ही प्रभावी जनसंपर्क की कुंजी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जनसंपर्क का कार्य अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण है, इसलिए इसे पूरी गंभीरता के साथ किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की कोताही से बचना जरूरी है। जनसंपर्क अधिकारी शासन और जनता के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं, ऐसे में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि परिणाम के अनुरूप हर अधिकारी के कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा।  बैठक में उन्होंने निर्देशित किया कि मंत्रिगणों, विभागीय सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिले के कलेक्टरों के साथ नियमित संपर्क और समन्वय बनाएं। इससे सूचनाओं का समयबद्ध और प्रभावी आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा, जो शासन की योजनाओं के सही क्रियान्वयन और प्रचार के लिए अत्यंत आवश्यक है। जनसंपर्क आयुक्त ने आगामी एक मई से शुरू हो रहे प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के प्रचार-प्रसार की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर माध्यम का प्रभावी उपयोग कर योजनाओं की पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।  उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि राज्य में हो रहे विकास कार्यो और योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के वास्तविक अनुभवों को वीडियो पोस्ट और समाचारों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए। इससे अन्य लोगों को भी इनका लाभ लेने के लिए प्रेरणा मिलती है। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ सतत संपर्क और समन्वय बनाए रखा जाए, ताकि योजनाओं की उपलब्धियों और सरकार के कार्यों का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जा सके। जनसंपर्क आयुक्त ने कहा कि सभी अधिकारी सक्रिय और जिम्मेदार तरीके से कार्य करें ताकि शासन की योजनाएं आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंच सकें वहीं उन्होंने प्रचार-प्रसार कार्य में लापरवाही बरतने पर तीन जिला जन संपर्क अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए है। बैठक में अपर संचालक सर्वउमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव और श्रीमती हर्षा पौराणिक सहित संचालनालय और जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – दसवीं बोर्ड टॉपर कु. प्रतिभा सोलंकी को प्रोत्साहनस्वरूप मिलेंगे एक लाख रुपये

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दसवीं बोर्ड की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली होनहार छात्रा पन्ना की कु. प्रतिभा सिंह सोलंकी को माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 500 में से 499 अंक प्राप्त करने पर एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटी कु. प्रतिभा और उनके माता-पिता को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटी कु. प्रतिभा को सुशासन की प्रतीक लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर माँ की मूर्ति भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट तथा आशीर्वाद प्राप्त करने प्रतिभा, परिजन सहित समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) आईं थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिभा को आशीर्वाद देते हुए कहा कि 'प्रतिभा जैसी बेटियां प्रदेश की शान हैं। प्रतिभा की सफलता लाखों बेटियों और अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है। बिटिया की उपलब्धि पर पूरे प्रदेश को गर्व है।' मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कु. प्रतिभा और उनके परिजन ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिवादन किया।  

पंजाब में प्राइवेट स्कूलों के लिए किताबों की सीधी सप्लाई, बिचौलियों का खेल खत्म, अभिभावकों को मिली बड़ी राहत

 चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों के लिए पाठ्य-पुस्तकों के वितरण में एक बड़ा सुधार किया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) से संबंधित निजी स्कूलों में पढ़ रहे पहली से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को किताबों की सप्लाई सीधे तौर पर बोर्ड द्वारा की जाएगी। इस पहल से न केवल अधिकृत एजेंसियों और किताबें बेचने वाली दुकानों की एकाधिकार व्यवस्था खत्म होगी, बल्कि विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी राहत मिलेगी। नए सुधार की घोषणा करते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि यह निर्णय पारदर्शिता को बेहतर बनाने, परिवारों का खर्च कम करने और बिचौलियों पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ पाठ्य-पुस्तकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि स्कूल सख्ती से यह सुनिश्चित करेंगे कि पुस्तकों के लिए छपी हुई कीमत से अधिक पैसा न लिया जाए। यह केवल पुस्तकों के वितरण की सुविधा होगी, न कि राजस्व जुटाने का माध्यम। इससे निजी स्कूलों के दस लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि 15 प्रतिशत छूट, जो पहले पुस्तक बेचने वालों को मिलती थी, अब सीधे तौर पर विद्यार्थियों को मिलेगी। 10 लाख से ज़्यादा छात्रों को होगा फायदा एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "स्कूल इस बात का सख्ती से ध्यान रखेंगे कि बिल पर छपी रियायती कीमत से ज़्यादा कोई भी रकम न ली जाए. वे बिना कोई मुनाफा कमाए, सिर्फ किताबों के वितरण में मदद करेंगे. इससे निजी स्कूलों के 10 लाख से ज़्यादा छात्रों को फायदा होगा।  शिक्षा मंत्री ने बताया कि 15 प्रतिशत की जो छूट पहले किताब बेचने वालों को दी जाती थी, अब उसका सीधा फायदा स्कूलों के जरिए छात्रों को मिलेगा. उम्मीद है कि इस कदम से परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा और साथ ही व्यवस्था में ज़्यादा जवाबदेही आएगी।  शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का बयान शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस सुधार की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना, परिवारों पर वित्तीय दबाव घटाना और किताबों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह जनहित में है और इससे निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। पारदर्शिता और सख्त नियम लागू मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी स्थिति में पुस्तकों पर अंकित मूल्य से अधिक शुल्क नहीं लिया जाए। यह व्यवस्था केवल वितरण को सरल बनाने के लिए है, न कि अतिरिक्त आय का साधन बनने के लिए। सरकार के अनुसार, इस नई प्रणाली से राज्य के लगभग 10 लाख से अधिक निजी स्कूल छात्रों को फायदा होगा। इसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताते हुए, मंत्री बैंस ने जानकारी दी कि PSEB ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक खास ई-कॉमर्स पोर्टल बनाया है. छात्र मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए पाठ्यपुस्तकों की मांग कर सकेंगे, जबकि स्कूल कक्षा और विषय के हिसाब से अपनी ज़रूरतें डिजिटल रूप से अपलोड करेंगे. उन्होंने आगे कहा, "हर छात्र को अलग से लॉगिन क्रेडेंशियल (पहचान पत्र) दिए जाएंगे, ताकि ज़रूरत पड़ने पर माता-पिता सीधे ऑर्डर दे सकें।  पंजाब सरकार द्वारा सुलभ और किफायती शिक्षा पर दिए जा रहे प्रयासों को दोहराते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि 15% की छूट, जो पहले केवल पुस्तक विक्रेताओं को दी जाती थी, अब स्कूलों के माध्यम से सीधे छात्रों को लाभ पहुंचाएगी। इस कदम से परिवारों पर वित्तीय बोझ काफी कम होने की उम्मीद है और साथ ही व्यवस्था में जवाबदेही भी बढ़ेगी। परिचालन ढांचे के बारे में विस्तार से बताते हुए मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने जानकारी दी कि पीएसईबी ने प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक समर्पित ई-कॉमर्स पोर्टल विकसित किया है। छात्र मोबाइल एप्लिकेशन या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पाठ्यपुस्तकों की मांग कर सकेंगे, जबकि स्कूल कक्षावार और विषयवार आवश्यकताओं को डिजिटल रूप से अपलोड करेंगे। उन्होंने आगे कहा, “प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत लॉगिन क्रेडेंशियल प्रदान किए जाएंगे, जिससे आवश्यकता पड़ने पर अभिभावक सीधे ऑर्डर दे सकेंगे।” पीएसईबी के अध्यक्ष डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि पोर्टल को सुरक्षित ऑनलाइन भुगतान गेटवे से एकीकृत किया गया है ताकि निर्बाध, पारदर्शी और कुशल लेनदेन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विशेष रूप से अधिक शुल्क लेने की किसी भी संभावना को खत्म करने और पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिज़ाइन की गई है।  

भजनलाल सरकार का बड़ा एक्शन, तय समय में पूरे होंगे सभी प्रोजेक्ट

 जयपुर राजस्थान की भजनलाल सरकार विकास कार्यों में किसी भी तरह की देरी नहीं चाहती है. ऐसे में अब प्रदेश के अधिकारी-पदाधिकारी और कर्मचारी सभी नपेंगे. राजस्थान में विकास कार्यों की रफ्तार को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साफ कर दिया है कि तय समय पर काम नहीं हुआ तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय है. मुख्यमंत्री कार्यालय में आज ‘राज उन्नति' की चौथी बैठक में प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की गई और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए. शुक्रवार (24 अप्रैल) को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री कार्यालय में ‘राज उन्नति' की चतुर्थ बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में राज्य सरकार की चयनित परियोजनाओं, विभिन्न कार्यक्रमों और परिवेदनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी प्रोजेक्ट्स को तय समय सीमा में पूरा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर निर्देश दिए कि कार्यों में देरी या लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए. साथ ही, जहां भी ढिलाई सामने आए, वहां सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए. ‘राज उन्नति' कार्यक्रम के जरिए कार्यों की मॉनिटरिंग बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आमजन से जुड़ी योजनाओं और परिवेदनाओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचे. ‘राज उन्नति' कार्यक्रम के जरिए सरकार अब विकास कार्यों की मॉनिटरिंग को और सख्त करने के संकेत दे रही है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार को भारतीय विदेश सेवा के वर्ष 2025 बैच के चार प्रशिक्षु अधिकारियों ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को उज्जवल भविष्य की आत्मीय शुभकामनाएं देकर स्मृति चिन्ह भी दिए। इस अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के संचालक मुजीबुर्रहमान ख़ान सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

राज्य में नहीं है खाद की कमी, पंजीकृत रकबे के मुताबिक सभी किसानों को मिलेगी समय पर खाद: कृषि मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर.  पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका – इज़राइल और ईरान के बीच तनाव के बीच आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार द्वारा 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आबंटित हुआ है। जिसमें यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में गोदामों एवं समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी किसानों को पारदर्शिता के साथ पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद का आबंटन सुनिश्चित हो।  मंत्री नेताम ने बताया कि 30 मार्च की स्थिति में राज्य में कुल 7.48 लाख मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक में मौजूद है, जिसमें यूरिया 2,43,717 मीट्रिक टन, डीएपी 1,05,631 मीट्रिक टन, एनपीके 1,69,109 मीट्रिक टन, एमओपी 50,431 मीट्रिक टन और एसएसपी 1,78,657 मीट्रिक टन  इस तरह कुल 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद स्टॉक में मौजूद है। मंत्री नेताम ने बताया कि पश्चिमी एशियाई संकट के चलते रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए विभाग द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत एनपीके 12ः32ः16, 20ः20ः0ः13, हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।  मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर उर्वरकों में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।  कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने रायपुर और दुर्ग संभाग के विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर आगामी खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर अधिकारियों से कहा है कि पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों के पंजीयन तेजी से पूर्ण कर लिया जाए। बीज एवं उर्वरक वितरण के लिए नई ई-वितरण प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। वही रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में हरी खाद, जैव उर्वरक और नील-हरित काई के उपयोग के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।  उन्होंने रासायनिक उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी और डायवर्जन रोकने के लिए जिलों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (प्राइस सपोर्ट स्कीम) के तहत दलहन और तिलहन फसलों के उपार्जन को भी प्राथमिकता में रखा गया है। उन्होंने हर जिले में सुगंधित धान की प्रजाति के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही दलहन-तिलहन फसलों तथा उद्यानिकी क्षेत्र में ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार के निर्देश दिए हैं।

राजधानी में गूंजेगी महिला शक्ति: 986 आरक्षियों की पासिंग आउट परेड में CM योगी लेंगे सलामी

लखनऊ. आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती-2025 के तहत चयनित 60,244 आरक्षियों में से पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की आरटीसी में प्रशिक्षण प्राप्त 986 महिला रिक्रूट आरक्षियों की दीक्षांत परेड 26 अप्रैल को रिजर्व पुलिस लाइंस, महानगर, लखनऊ में आयोजित होगी। परेड का निरीक्षण कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सलामी लेंगे। प्रशिक्षण के दौरान इन महिला आरक्षियों को आधुनिक पुलिसिंग से लेकर साइबर क्राइम तक का प्रशिक्षण दिया गया है। कार्यक्रम सुबह करीब 8 बजे शुरू होगा और इसे प्रदेश के सभी जनपदों के पुलिस लाइंस, पीएसी वाहिनियों व प्रशिक्षण संस्थानों में लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा। इससे एक साथ पूरे प्रदेश में महिला सशक्तीकरण के साथ-साथ पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी मजबूत संदेश जाएगा। 2017 के बाद महिलाओं की रिकॉर्ड भर्ती 1947 से लेकर 2017 तक यूपी पुलिस में सिर्फ 10 हजार महिलाओं की भर्ती हुई थी, जबकि 2017 के बाद यह संख्या 44 से 45 हजार पहुंच गई है। अब प्रदेश में पुलिस भर्ती होने पर 20 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती को अनिवार्य कर दिया गया है। फिजिकल ट्रेनिंग के साथ कानून, तकनीक, अनुशासन और व्यावहारिक पुलिसिंग पर फोकस आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती-2025 के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं महिला आरक्षियों को फिजिकल ट्रेनिंग के साथ-साथ आधुनिक पुलिसिंग के सभी जरूरी पहलुओं में प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण में सोशल पुलिसिंग, साइबर क्राइम की रोकथाम, आधुनिक तकनीक, सीसीटीएनएस, फॉरेंसिक साइंस व मेडिसिन, हथियार संचालन, अपराध नियंत्रण, विवेचना, पुलिस अभियोजन, सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, यातायात प्रबंधन और पुलिस रेडियो संचार प्रणाली जैसे विषय शामिल रहे। आधुनिक, संवेदनशील और सक्षम पुलिस कर्मी के रूप में किया गया तैयार  इसके साथ ही भारतीय संविधान, मानवाधिकार, लैंगिक संवेदनशीलता, पुलिस की कार्यप्रणाली, अनुशासन, नैतिकता और जवाबदेही पर भी विशेष जोर दिया गया। व्यावहारिक प्रशिक्षण के तहत आरक्षियों को गार्ड ड्यूटी, बंदी एस्कॉर्ट, हवालात ड्यूटी, वर्दी पहनने के नियम, अधिकारियों की वर्दी पहचान, सैल्यूट की विधि, योग, खेल और श्रमदान जैसी गतिविधियों में भी दक्ष बनाया गया। यह प्रशिक्षण महिला आरक्षियों को आधुनिक, संवेदनशील और सक्षम पुलिस कर्मी के रूप में तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।