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वेल्डिंग मिस्त्री की बेटी सिमरन प्रवीन ने बास्केटबॉल में जीता गोल्ड, राष्ट्रीय स्तर पर चमकी प्रतिभा

बीकानरे  कहा जाता है कि यदि इरादे मजबूत हों और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो रास्ते की हर मुश्किल आसान हो जाती है. इसका एक जीता-जागता और प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली युवा बास्केटबॉल खिलाड़ी सिमरन प्रवीन ने. सिमरन ने अपने परिवार के बेहद सीमित संसाधनों और कमजोर आर्थिक हालातों के बावजूद अपनी कड़ी मेहनत और असाधारण प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान बनाई है. एक साधारण वेल्डिंग मिस्त्री की बेटी सिमरन अब तक दो राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और एक नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर बीकानेर जिले सहित पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर चुकी हैं. वर्तमान में सिमरन प्रवीन 12वीं कक्षा की छात्रा हैं और वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ बास्केटबॉल के मैदान पर भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. बेहद कम समय में राष्ट्रीय फलक पर अपनी चमक बिखेरने वाली सिमरन का अब अगला लक्ष्य भारतीय सीनियर बास्केटबॉल टीम का हिस्सा बनना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीतना है. तीन साल पहले शुरू हुआ था बास्केटबॉल का सफर सिमरन बताती हैं कि उन्होंने करीब तीन वर्ष पहले ही बास्केटबॉल खेलना शुरू किया था. शुरुआत में उन्हें इस खेल के नियमों और तकनीकों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन एक स्थानीय ट्रायल में भाग लेने के बाद बास्केटबॉल के प्रति उनका लगाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने इसे ही अपनी जिंदगी का मुख्य लक्ष्य बना लिया. इसके बाद नियमित कड़े अभ्यास, अनुशासन और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने बहुत ही कम समय में राष्ट्रीय स्तर तक का एक सफर तय कर लिया, जो हर किसी के लिए प्रेरणादायक है. सिमरन ने बताया कि वे अब तक दो नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं. हाल ही में जनवरी माह में राजस्थान के बाड़मेर में आयोजित स्कूली राष्ट्रीय खेलों में भी उन्होंने अपनी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया. इससे पहले आयोजित हुई एक अन्य प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा का लोहा देश भर में मनवाया था. बहन से मिली प्रेरणा, कोच ने तराशा हुनर सिमरन अपनी इस शानदार सफलता का एक बड़ा श्रेय अपने कोच नरेंद्र कस्वा को देती हैं. उनका कहना है कि उनके कोच ने हमेशा उन्हें मैदान पर और मैदान के बाहर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है. वे खिलाड़ियों को केवल खेल की तकनीक और ड्रिबलिंग ही नहीं सिखाते, बल्कि जीवन में अनुशासन और लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण का महत्व भी गहराई से समझाते हैं. सिमरन बताती हैं कि कोच अक्सर सभी खिलाड़ियों से कहते हैं कि “मोबाइल में कुछ नहीं रखा है, खेलो और अपना भविष्य बनाओ.” कोच की यही बातें सिमरन के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गईं. इसके अलावा सिमरन ने बताया कि बास्केटबॉल खेलने की शुरुआती प्रेरणा उन्हें अपनी बड़ी बहन से मिली थी, जिन्होंने उन्हें इस खेल को अपनाने की सलाह दी थी. माता-पिता ने आर्थिक तंगी के बाद भी दिया पूरा साथ एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली सिमरन के पिता यूसुफ अली वेल्डिंग का कार्य करते हैं, जिससे उनके घर का गुजारा चलता है, जबकि उनकी माता मन्नत बानो एक कुशल गृहिणी हैं. चार भाई-बहनों में सिमरन सबसे छोटी और सबकी लाडली हैं. परिवार की आर्थिक परिस्थितियां बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होने के बावजूद उनके माता-पिता ने कभी भी सिमरन के कदमों को रुकने नहीं दिया और अपनी क्षमता से बढ़कर उनकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया. मैदान पर जब सिमरन उतरती हैं, तो अपनी तेज रफ्तार, बेहतरीन बॉल कंट्रोल और शानदार शूटिंग स्किल के दम पर विपक्षी टीम के डिफेंस को पूरी तरह से ध्वस्त कर देती हैं. सिमरन का कहना है कि उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय टीम की आधिकारिक जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना है, जिसके लिए वे रोज घंटों पसीना बहा रही हैं.

राजस्थान सरकार का बड़ा कदम, ऊर्जा बचाने वाले भवनों और ई-वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

 जयपुर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में ऊर्जा दक्ष भवनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित राजस्थान एनर्जी कंजर्वेशन सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड को अधिसूचित करने की प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए हैं। इससे भवनों में ऊर्जा की खपत को कम किया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने इस कोड के अनुपालन मैकेनिज्म को भी प्रभावी बनाने के निर्देश दिए ताकि प्रदेश में भवन निर्माण के क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहन दिया जा सके। मुख्य सचिव ने यह निर्देश गुरूवार को शासन सचिवालय में प्रदेश में एनर्जी ट्रांजिशन पर गठित राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदान किए।  कोड तथा इससे संबंधित रूल्स के प्रारूपों की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा सहित नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिए जाने से ऊर्जा परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आया है और राजस्थान इसमें निरन्तर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने पीएम ई— ड्राईव योजना के अन्तर्गत प्रदेश के प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स, ग्रिड स्थिरता और एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्थान मजबूत एवं स्थिर ग्रिड तंत्र विकसित करने की दिशा में भी पूरी तरह प्रतिबद्धता से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन को और गति प्रदान करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सरकारी भवनों में रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के कार्य की समीक्षा करते हुए कहा कि इससे राजकीय कार्यस्थलों पर बिजली की बचत को प्रोत्साहन मिला है। बैठक में ऊर्जा सचिव सुश्री आरती डोगरा ने ग्रिड की स्थिरता, सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन सहित ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।

Haryana High Court का बड़ा फैसला, 396 दिन अनुपस्थित पुलिसकर्मी की अनिवार्य रिटायरमेंट कायम

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति दंड नहीं बल्कि जनहित में लिया गया प्रशासनिक निर्णय होता है और इसके लिए कर्मचारी के पूरे सेवा रिकॉर्ड को आधार बनाया जा सकता है। अदालत ने कहा कि पहले दी गई विभागीय सजा के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश अपने आप में दोहरी सजा नहीं माना जा सकता। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने करनाल निवासी हरियाणा पुलिस के एक कर्मचारी की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारी के लंबित सेवा लाभ तीन माह के भीतर जारी किए जाएं। पुलिस कर्मी ने एकल पीठ के 11 फरवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई थी। उनका तर्क था कि उन्हें पहले ही 396 दिन तक ड्यूटी से गैर-हाजिर रहने के मामले में दंडित किया जा चुका है, इसलिए उसी आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देना दोहरी सजा के समान है। हाई कोर्ट ने अस्वीकार की दलील हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि कानून स्पष्ट है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, बल्कि जनहित में यह तय करने का अधिकार नियोक्ता के पास है कि किसी कर्मचारी को आगे सेवा में बनाए रखना उचित है या नहीं। इसके लिए कर्मचारी के पूरे सेवा रिकॉर्ड का मूल्यांकन किया जा सकता है। अदालत ने पाया कि याची को अतीत में कई बार चेतावनी और निंदा जैसी सजाएं मिल चुकी थीं। वर्ष 2017 में उन्हें समय पर अदालत और महाधिवक्ता कार्यालय में उपस्थित नहीं होने पर निंदा की सजा दी गई थी। इसके अलावा 2018 और 2019 में भी विभिन्न मामलों में चेतावनी और निंदा के दंड दिए गए थे। रिपोर्ट में ईमानदारी पर उठे सवाल अदालत ने उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्टों का भी उल्लेख किया, जिनमें उन्हें कई अवसरों पर औसत से नीचे दर्ज किया गया था। एक रिपोर्ट में उनकी ईमानदारी को संदिग्ध बताया गया, जबकि व्यवहार, नेतृत्व क्षमता और सरकारी कार्यों में रुचि को भी संतोषजनक नहीं माना गया था। रिपोर्ट में उन्हें लापरवाह, गैर-जिम्मेदार और अविश्वसनीय कर्मचारी तक कहा गया था। खंडपीठ ने कहा कि इन सभी तथ्यों को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी के पास यह निष्कर्ष निकालने के पर्याप्त आधार थे कि कर्मचारी की आगे की सेवा जनहित में नहीं है और वह विभाग के लिए ''डेडवुड'' बन चुका है। अदालत ने माना कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का निर्णय उचित सामग्री पर आधारित था, इसलिए इसमें न्यायिक हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इसी के साथ अपील को खारिज कर दिया गया।

वायरल वीडियो पर CM भगवंत मान का जवाब, बोले- ‘बचपन के कट का निशान नहीं, इसलिए वीडियो फेक’

चंडीगढ़. पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीरवार को दावा किया है कि सोशल मीडिया पर जो कथित वीडियो प्रसारित हो रहा है, उसमें वे नहीं, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति को उनके चेहरे का मास्क पहनाकर वीडियो बनाया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल दो वीडियो मीडिया को दिखाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी कद काठी से मिलते व्यक्ति को उनके चेहरे का मास्क पहनाकर वीडियो शूट किए गए। मान ने कहा कि उनके गले के पास बचपन से ही कट का निशान है, लेकिन उनका फर्जी वीडियो बनाने वाले इस पर ध्यान देने से चूक गए। साजिश बेनकाब होगी। साजिश में जगमन समरा का है हाथ भगवंत मान ने एक और वीडियो दिखाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि इस साजिश में कनाडा में रहने वाले जगमन समरा का हाथ है, जिसने कार में मास्क की डिलीवरी ली और फिर हाथ में मास्क डालकर फेस ते फेस बोलता सुनाई दे रहा है। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि वीडियो पूरी तरह फर्जी है और उन्हें धार्मिक तौर पर बदनाम करने की विपक्षी पार्टियों की सोची-समझी साजिश है। उन्होंने कहा कि वीडियो की सच्चाई सामने आने के बाद मुझे नहीं लगता कि अब इस बारे में कोई सफाई देने की जरूरत है। अब नानक नाम लेवा संगत का जो भी फैसला होगा, वह उन्हें मंजूर होगा। मान 2016 के बाद नहीं गए कनाडा मोहाली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मान ने दावा किया कि 2016 के बाद वे कभी कनाडा नहीं गए। वीडियो में दिखाया गया कमरा कनाडा के एबाट्सफोर्ड स्थित एक होटल का है। कमरे का डिजाइन दर्शाता है कि वह वर्ष 2017-18 के बाद का है। उन्होंने कहा कि विरोधियों ने कनाडा में एक होटल का कमरा बुक कर उनकी कद काठी से मेल खाते व्यक्ति को मेरे चेहरे का मास्क पहनाकर इस वीडियो को शूट किया। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के कई वीडियो उसी दिन यहां तैयार किए गए।

Cyber Fraud Case: केरल कनेक्शन वाले तीन आरोपी गिरफ्त में, ठगी गिरोह का भंडाफोड़

दंतेवाड़ा. दंतेवाड़ा जिले के गीदम में 61 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी का खुलासा करते हुए पुलिस ने अंतर्राज्यीय गिरोह के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग लोगों के नाम से बैंक खाते संचालित कर ठगी की रकम जमा करते थे और बाद में उसे क्रिप्टो करेंसी के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था. विशेष टीम ने केरल पहुंचकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया. पूछताछ में कई बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े अहम सुराग मिले हैं. एक आरोपी गिरफ्तारी के बाद फरार भी हुआ, लेकिन अगले ही दिन दोबारा पकड़ लिया गया. पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है. यह कार्रवाई साइबर अपराध के बढ़ते नेटवर्क पर बड़ी सफलता मानी जा रही है. साइबर ठगों के पास ₹7.5 लाख कैश ज्ञात हो कि रामपुर जिले के थाना पटवाई क्षेत्र में पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया था. इसी दौरान सोहना पुल रोड पर एक संदिग्ध थार गाड़ी को रोककर उसकी तलाशी ली गई. गाड़ी में सवार तीन व्यक्तियों की गतिविधियां संदिग्ध लग रही थीं, जब पुलिस ने गहनता से पूछताछ की तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए. गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मुरादाबाद निवासी कैलाश सिंह और रामपुर निवासी विवेक कुमार और हरविंदर सिंह के रूप में हुई है. आरोपियों के कब्जे से करीब साढ़े सात लाख रुपये की नकदी बरामद की गई. इसके अलावा एक लैपटॉप, एक एटीएम कार्ड स्वाइप मशीन, छह मोबाइल फोन, विभिन्न कंपनियों की छह मोहरें, चार बिल बुक, 18 एटीएम कार्ड, 15 चेकबुक, चार अलग-अलग बैंकों की पासबुक, एक भारतीय पासपोर्ट और आधार और पैन कार्ड सहित कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं.

Badnagar Van Blast: पटाखों से किया धमाका, ‘फिर आ गए’ मैसेज की गुत्थी सुलझाने में जुटीं ATS और फोरेंसिक टीम

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है। मोहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से एक वैन को लटकाकर उसमें ब्लास्ट किया गया है। वीडियो बड़नगर के अडान मोहल्ले का बताया जा रहा है। इसके बाद उज्जैन पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। 23 जून का है वीडियो घटना 23 जून की रात की बताई जा रही है। उज्जैन के बड़नगर स्थित अडान मोहल्ले से निकले जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। जुलूस में एक वैन को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर लटकाया गया। वैन पर दो युवक खड़े होकर लाल झंडे लहराते रहे। इसके बाद वैन में विस्फोट कर उसे उड़ा दिया गया। मुहर्रम के जुलूस के दौरान वैन को क्रेन से लटकाकर विस्फोट करने का वीडियो देखने के बाद सुरक्षा एजेंसियां एक्शन में आ गई हैं। जिले की बड़नगर पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार कर वैन और क्रेन को जब्त कर लिया है। आरोपियों का कहना है कि 8 हजार के पटाखों से विस्फोट किया। उज्जैन, उन्हेल, नागदा और महिदपुर पहले से संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए जांच में स्थानीय पुलिस के साथ एटीएस, यानी एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड भी शामिल हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां अब तीन बड़े सवालों के जवाब ढूंढ रही हैं-     विस्फोट के पीछे मकसद क्या था?     गाड़ी पर ‘ले, फिर आ गए’ क्यों लिखा था?     विस्फोटक कौन सा था और उसे कहां से लाया गया था? 40 फीट ऊंचाई पर हवा में लटकाकर उड़ाई थी वैन दरअसल, 23 जून की रात बड़नगर के अडान मोहल्ले से मोहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था। इसमें टाटा मैजिक गाड़ी को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर हवा में लटकाया गया था। इसकी छत पर दो युवक खड़े होकर लाल झंडे लहरा रहे थे। वैन पर ‘ले, फिर आ गए’ लिखा था। जुलूस में शामिल कुछ लोगों के हाथों में मौजूद तख्तियों पर भी यही मैसेज लिखा था। कुछ देर बाद वैन में विस्फोट कर दिया गया। इसका वीडियो भी सामने आया है। मामले में शोएब पिता गब्बू, जाहिद पिता भूरा खां और तपसील उर्फ तस्लीम को अरेस्ट किया गया है। वहीं, क्रेन के मालिक पर भी केस किया गया है। जाहिद-तपसील ने लहराए थे झंडे पुलिस के मुताबिक, शोएब ने अडान अखाड़े के बैनर तले मुहर्रम का जुलूस निकाला था। उसी ने कबाड़ में रखी गाड़ी को क्रेन पर लटकवाया था। विस्फोट के समय जाहिद और तपसील गाड़ी की छत पर मौजूद थे। वे ही झंडे लहराते दिखाई दिए थे। ब्लास्ट के पहले दोनों नीचे उतर आए थे। पुलिस को आरोपियों ने करीब 8 हजार रुपए के पटाखे खरीदने का बिल भी दिया है, जिसकी तस्दीक की जा रही है। 2500 रुपए किराए पर ली गई थी क्रेन क्रेन मालिक गोपाल राठौर ने पुलिस को बताया कि अडान अखाड़े के सदस्यों ने पुष्प वर्षा के लिए क्रेन किराए पर लेने की बात कही थी। 2500 रुपए किराया तय होने के बाद ड्राइवर समेत क्रेन भेज दी थी। राठौर का कहना है कि उन्हें वाहन में विस्फोट करने की कोई जानकारी नहीं थी। शुक्रवार को उज्जैन की फोरेंसिक टीम और बम निरोधक दस्ता (BDS) बड़नगर पहुंचकर वैन से सेंपल इकट्‌ठा करेंगे। भीड़भाड़ वाले इलाके में किया गया ब्लास्ट एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि बड़नगर के जय स्तंभ चौक पर भीड़भाड़ वाले इलाके में ये विस्फोट किया गया था। ब्लास्ट के बाद गाड़ी के पार्ट्स, कांच और दूसरी चीजें नीचे गिरीं। इससे लोगों की जान को गंभीर खतरा पैदा हुआ। कांच बंद होने के कारण गैस बनने से विस्फोट मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करनदीप सिंह क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) के साथ बड़नगर पहुंचे और संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला। उन्होंने कहा- प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गाड़ी में रॉकेट और सुतली बम लगाए गए थे। इसके कांच बंद होने के कारण गैस बनने से विस्फोट जैसी स्थिति बनी। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा फैसला, 75 सीएम श्री स्कूलों में मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के 75 सीएम श्री स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ सरकार ने उसका चेहरा बदलने का भी फैसला किया है। सीएम रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक्सपेंडिचर एंड फाइनेंस कमिटी (ईएफसी) की बैठक में इसके लिए करीब 264.90 लाख रुपये की मंजूरी दे दी है। इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर पर सुधार के साथ सीसीटीवी कैमरे आधुनिक सभागार, विज्ञान एवं आईटी पार्क और विशेष कैटिगरी के बच्चों के लिए खास सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी। सीएम रेखा गुप्ता के साथ शिक्षा मंत्री आशीष सूद, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह भी इस बैठक में मौजूद रहे। यह पूरा काम अगले साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने क्या कहा? सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल स्कूल भवनों की मरम्मत कराना नहीं, बल्कि ऐसा शिक्षण वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ, आधुनिक परिसर मिले। इस योजना के अंतर्गत स्कूलों के प्रवेश द्वारों का आधुनिक स्वरूप में निर्माण और सौंदर्याकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत सीएम श्री स्कूलों की जर्जर इमारतों की समस्या दूर करना, वॉटरप्रूफिंग, बाहरी पेंटिंग, नया प्लास्टर, बाउंड्री वॉल एवं फेंसिंग का निर्माण व मरम्मत, टॉयलेट, पानी की व्यवस्था, सीवर एवं ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ खेल सुविधाओं का विकास, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, मल्टीपरपज हॉल विकसित किए जाएंगे। खराब एलईडी लाइट, सीलिंग फैन, एग्जॉस्ट फैन और पीए (पब्लिक एड्रेस) सिस्टम को बदला जाएगा, ताकि पूरे परिसर में घोषणाएं और आपातकालीन सूचनाएं तेजी से प्रसारित की जा सकें। रेखा गुप्ता ने कहा कि स्कूल परिसरों का स्वरूप भी पूरी तरह बदला जाएगा। आधुनिक डिजाइन वाले सीएम श्री प्रवेश द्वार विकसित किए जाएंगे। खेल मैदानों में आधुनिक आउटडोर गैलरी विकसित की जाएगी, जिसका उपयोग आउटडोर कक्षाओं, मनोरंजन, इंटरैक्टिव गतिविधियों तथा सहयोगात्मक शिक्षण के लिए किया जा सकेगा। बास्केटबॉल कोर्ट में नया टर्फ बिछाया जाएगा। यह सारा कार्य अगल साल के अंत तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।  

लखनऊ में कुर्सी रोड होगा छह लेन, पांच लाख लोगों की सफर की परेशानी होगी खत्म

पटना यूपी की राजधानी लखनऊ में लाखों लोगों के लिए राहत की खबर है। कुर्सी रोड पर बसे लोगों को आए दिन लगने वाले जाम से निजात मिलने वाली है। डंडहिया चौराहा से बेहटा तक 12.5 किमी लंबा यह मार्ग मौजूदा समय में चार लेन का है, जिसे शीघ्र ही छह लेन का किया जाएगा। सर्विस रोड पर हुए अवैध कब्जे भी हटाए जाएंगे। छह लेन की सड़क होने पर सरगम अपार्टमेंट से लेकर डंडहिया चौराहे तक अक्सर लगने वाले जाम से लोगों को निजात मिलेगी। उनकी आवाजाही आसान हो जाएगी। कुर्सी रोड(लखनऊ-महमूदाबाद मार्ग) स्टेट हाईवे है। चार लेन के इस हाईवे के चौड़ीकरण की मांग क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की तरफ से सालों से उठाई जा रही है। इस बार पीडब्ल्यूडी ने अपनी कार्ययोजना में चौड़ीकरण का प्रस्ताव शामिल करते हुए शासन की स्वीकृति के लिए भेज दिया है। सहमति मिलते ही चौड़ीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस मार्ग के दोनों तरफ पचासों की संख्या में कॉलोनियां सहित सहित एलडीए के और निजी अपार्टमेंट बन चुके हैं। नहरिया रोड से भी इस मार्ग पर काफी संख्या में लोगों का आनाजाना होता है। चार लेन वाली इस सड़क पर ट्रैफिक का बोझ बढ़ा है, जिससे आए दिन पीक ऑवर में जाम की स्थिति बनती है। चौड़ीकरण से इस समस्या से राहत मिलेगी। 60 करोड़ की लागत से होगा चौड़ीकरण कुर्सी रोड के चौड़ीकरण का काम लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाएगा। निर्माण कार्य का खाका पीडब्ल्यूडी ने तैयार कर लिया है। प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया है। स्वीकृति का इंतजार है। दोनों तरफ 10.5-10.5 मीटर चौड़ी होगी सड़क कुर्सी रोड अभी फोर लेन है, जो कि 07-07 मीटर चौड़ी है। दोनों ही तरफ गुडंबा थाना तक सर्विस लेन भी है, जिस पर ठेलों और रेहड़ी वालों ने कब्जा कर रखा है। चौड़ीकरण के बाद यह सड़क दोनों तरफ 10.5-10.5 मीटर की हो जाएगी। इसके अतिरिक्त सर्विस लेन होगा। अधिकारियों के अनुसार मौजूदा समय में वहां सीवर और पेयजल पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है। सड़क चौड़ीकरण के दौरान दोनों तरफ के अवैध कब्जे हटाए जाएंगे। पांच लाख से अधिक होंगे लाभांवित छह लेन की सड़क बनने के बाद कुर्सी रोड के दोनों तरफ बसी 50 से अधिक कॉलोनियों में रहने वाले, अपार्टमेंट के निवासियों सहित नहरिया रोड के लोगों को मिलाकर लगभग पांच लाख से अधिक की शहरी आबादी लाभांवित होगी। इसके अतरिक्त बेहटा तक के लोगों की लखनऊ तक आवाजाही आसान हो जाएगी।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, नालों की सफाई की निगरानी अब IAS और HCS अधिकारियों के जिम्मे

चंडीगढ़. हरियाणा में मानसून की तैयारियों तथा जमीनी स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आईएएस एवं एचसीएस अधिकारियों को नालों का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान प्री-मानसून डी-सिल्टिंग (गाद निकासी) कार्यों की गुणवत्ता की जांच भी की जाएगी। सभी 87 शहरी स्थानीय निकायों में चल रहे नालों के सफाई कार्यों की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने नगर निगम आयुक्तों तथा उपायुक्तों को निर्देश दिए कि अगले तीन दिन के भीतर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से अपने क्षेत्रों में जल निकासी अवसंरचना का मौके पर जाकर निरीक्षण कराया जाए। विशेष निगरानी अभियान के तहत प्रत्येक आईएएस और एचसीएस अधिकारी को अपने अधिकार क्षेत्र में कम से कम पांच किलोमीटर लंबाई के नालों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को निरीक्षण से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट, फोटोग्राफ तथा स्थलीय अवलोकन सहित शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, ताकि कार्यों की वास्तविक समय में निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। मुख्य सचिव ने कहा कि मानसून की तैयारियां केवल कार्यालय में बैठकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं मौके पर जाकर डी-सिल्टिंग कार्यों की गुणवत्ता का सत्यापन करना होगा। संवेदनशील स्थानों की पहचान करनी होगी। कमियों का पता लगाना होगा तथा आवश्यकतानुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नाले का निरीक्षण सुनिश्चित कर सभी रुकावटें दूर की जाएं। लंबित कार्यों को मानसून शुरू होने से पहले पूरा किया जाए, ताकि शहरी क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके। बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा और पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मकरंद पांडुरंग ने भी अपनी बात रखी।

तरनतारन में ASI ने सर्विस रिवॉल्वर से की आत्महत्या, पुलिस विभाग में मचा हड़कंप

तरनतारन. विधानसभा हलका पट्टी के गांव कैरो पुलिस चौकी के प्रभारी एएसआई अमरजीत सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। अमृतसर निवासी अमरजीत सिंह का शव कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि अभी तक आत्महत्या की वजह का पता नहीं चल पाया। एएसआई अमरजीत सिंह करीब 4 माह से पुलिस चौकी में पत्थर प्रभारी तैनात थे। उनके साथ चौकी में तीन अन्य कर्मचारी भी तैनात थे। गुरुवार की शाम को नाकाबंदी के बाद खाना खाकर 9:30 बजे रात अपने क्वार्टर में गए वहां विश्राम के दौरान कमरे से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। क्योंकि मैं तैनात आने कर्मी ने मौके पर जाकर देख के ऐसी अमरजीत सिंह लहू लुहान पड़े थे और हाथ में उनके सर्विस पिस्टल थी। अमरजीत ने खुद की कनपटी पर पिस्टल लगाकर गोली चलाई जो उनकी मौत का कारण बनी। सूचना मिलते ही डीएसपी रविशेर सिंह मौके पर पहुंचे आशी का कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल के शव ग्रह में रखवा दिया गया है। कम नफरी के बीच ड्यूटी का था बोझ एएसआई अमरजीत सिंह ने खुद को गोली क्यों मारी इस बाबत अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पुलिस चौकी में नौकरी की कमी के चलते एएसआई अमरजीत सिंह कई बार अपना तबादला करवाने लिए अधिकारियों को कह चुके थे। एक ही सब डिवीजन में दूसरी घटना अभी 15 जून को पट्टी की अदालती परिसर में सुरक्षा में तैनात एएसआई गुरमीत सिंह ने खुद को गोली मारी थी जिनकी 7 दिन बाद अमृतसर के निजी अस्पताल में मौत हुई है।डीएसपी रविशेर सिंह ने बताया कि सब कब्जे में लेकर विभिन्न पहलुओं पर पड़ताल की जा रही है।