samacharsecretary.com

डॉक्टर दंपति पर 8 वर्षीय बच्ची से मारपीट और दागने का आरोप, पुलिस ने लिया संरक्षण में

शहडोल   शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 7 आशीर्वाद कॉलोनी में जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर के घर में 8 साल की बच्ची के साथ कथित अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। बुधवार शाम बच्ची रोते हुए मोहल्ले में पहुंची और लोगों से मदद की गुहार लगाई। बांदा से लाए थे बच्ची, कराते थे घर का काम स्थानीय लोगों के अनुसार बच्ची उत्तर प्रदेश के बांदा की रहने वाली है। उसके माता-पिता नहीं हैं। आरोप है कि डॉक्टर दंपति करीब 5-6 माह पहले उसे बांदा से शहडोल लाए थे और घर में छोटी बच्ची की देखरेख के नाम पर रखा था। बच्ची का आरोप है कि उससे झाड़ू-पोछा और घर का काम कराया जाता था और विरोध करने पर मारपीट की जाती थी। गर्म चिमटे से दागने का आरोप बच्ची ने डॉक्टर की पत्नी पर गर्म चिमटे और अन्य गर्म वस्तु से दागने का आरोप लगाया है। उसकी पीठ पर जलने और चोट के निशान भी बताए जा रहे हैं। मोहल्ले वालों ने उसे रोते देख पुलिस को सूचना दी। डॉक्टर ने रिश्तेदार बताकर दी सफाई सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को संरक्षण में लेकर थाने लाई। पुलिस ने जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ बीआर प्रजापति को भी पूछताछ के लिए बुलाया । डॉक्टर ने बच्ची को अपनी पत्नी की रिश्तेदार बताते हुए कहा कि वह घूमने के लिए शहडोल आई है।  

शाही मस्जिद की मीनार का हिस्सा गिरने से हड़कंप, प्रशासन ने शुरू कराया मरम्मत काम

उज्जैन  उज्जैन के छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद में गुरुवार को हादसा हो गया। यहां ऊंची मीनार का एक हिस्सा टूटकर मस्जिद की छत पर गिर गया। इससे छत समेत मस्जिद के कुछ हिस्से को नुकसान पहुंचा। प्रशासन छत की मरम्मत करवा रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत कंठाल से गोपाल मंदिर मार्ग को चौड़ा करने की योजना है। शाही मस्जिद की मीनार समेत करीब 6 फीट हिस्सा प्रस्तावित सड़क की जद में आ रहा था। इसे मुस्लिम समुदाय के लोग हाथ से तोड़ने का काम चार दिन से कर रहे थे। प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच बातचीत के बाद इसकी सहमति बनी थी। गुरुवार को निर्माण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान मीनार का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। प्रशासन के मुताबिक, हादसे में किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई। 28 सितंबर को हुआ था विवाद शाही मस्जिद को लेकर 28 सितंबर को भी विवाद हुआ था। सोशल मीडिया पर मस्जिद को पूरी तरह तोड़े जाने से जुड़ी भ्रामक और AI से तैयार सामग्री वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस के मुताबिक, भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया था। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और हलका बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया। मामले में कई FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट्स के साथ CCTV और ड्रोन फुटेज की भी जांच कर रही है। नौ आरोपी जेल भेजे गए 30 सितंबर को मामले में गिरफ्तार नौ आरोपियों को जिला कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी को 12 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। विवाद के बाद शाही मस्जिद और आसपास के इलाके में पुलिस बल तैनात है। बाजार के कुछ हिस्सों में दुकानें भी बंद रहीं। अब तक क्या कार्रवाई हुई     सड़क चौड़ीकरण की योजना: सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत कंठाल से गोपाल मंदिर मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है। शाही मस्जिद का एक हिस्सा प्रस्तावित सड़क की जद में आया।     मस्जिद कमेटी से सहमति: प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच प्रभावित हिस्सा हटाने पर सहमति बनी। हाईकोर्ट में भी मुस्लिम पक्ष की ओर से सहयोग की बात कही गई।     28 सितंबर को बवाल: कार्रवाई के दौरान सोशल मीडिया पर मस्जिद को पूरी तरह तोड़े जाने की भ्रामक/AI सामग्री वायरल होने के बाद बड़ी भीड़ मौके पर पहुंची। पुलिस पर पथराव हुआ। पुलिस ने आंसू गैस और हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया।     पुलिस कार्रवाई: मामले में कई FIR दर्ज हुईं और आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू हुई। सोशल मीडिया अकाउंट्स और CCTV/ड्रोन फुटेज की भी जांच की गई।     9 आरोपी कोर्ट में पेश: 30 सितंबर को 9 आरोपियों को जिला कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी को 12 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।     स्थिति: विवाद के बाद शाही मस्जिद और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है तथा बाजार के कई हिस्सों में दुकानें बंद रहीं। मस्जिद विवाद में उपद्रव फैलाने वाले 100 इंस्टाग्राम ID ब्लॉक उज्जैन में शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के दौरान हुए उपद्रव के बाद पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने उपद्रव से जुड़े भड़काऊ और वायरल कंटेंट वाले 100 से अधिक इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट/पेज ब्लॉक करवाए हैं।

स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति 3 हफ्ते में छोड़ेंगे पद, हाईकोर्ट का निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सोनीपत के कुलपति पद पर पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट के समक्ष संबंधित कुलपति की ओर से कहा गया कि वह व्यक्तिगत कारणों से पद पर बने रहने की स्थिति में नहीं हैं और तीन सप्ताह के भीतर इस्तीफा सौंप देंगे। इसके बाद जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को इस्तीफा स्वीकार करने और कुलपति पद पर अंतरिम व्यवस्था करने के निर्देश दिए। नियुक्ति को यूजीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाकर दी गई थी चुनौती डॉ. डीएस मोर उर्फ देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य याचिकाकर्ता ने याचिका दायर की थी। इसमें संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में अशोक कुमार की नियुक्ति को गैरकानूनी और शुरू से ही अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2018 के नियमों के विपरीत की गई है। इसके अलावा कुलपति के वेतन निर्धारण से जुड़े 15 जुलाई 2024 के पत्र को भी चुनौती दी गई थी। इस्तीफा स्वीकार होने तक वरिष्ठ डीन संभालेंगे जिम्मेदारी हाई कोर्ट ने कहा कि कुलपति अपना इस्तीफा तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करेंगे और राज्य सरकार इस्तीफा मिलने के एक सप्ताह के भीतर उसे स्वीकार करेगी। इस बीच विश्वविद्यालय के कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। अदालत ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के नियमों के नियम-दो में दी गई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि कुलपति का पद इस्तीफे के कारण रिक्त होने की स्थिति में वरिष्ठ डीन को अंतरिम तौर पर कुलपति के कर्तव्यों का निर्वहन कराया जाए। यह व्यवस्था नए कुलपति की नियुक्ति होने तक जारी रहेगी। नई नियुक्ति में यूजीसी के 2018 नियमों का सख्ती से पालन हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय के अगले कुलपति की नियुक्ति यूजीसी के 2018 के नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए की जाए। अदालत ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के डा एस. मोहन बनाम सेक्रेटरी टू द चांसलर, पुडुचेरी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी एवं अन्य मामले में 2026 में दिए फैसले को भी ध्यान में रखने को कहा है। 31 अक्टूबर तक पूरी करनी होगी सभी जरूरी कार्रवाई हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा स्वीकार करने, अंतरिम व्यवस्था करने और नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने समेत सभी आवश्यक कदम 31 अक्टूबर 2026 तक पूरे किए जाएं। मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी के सहयोग की भी पीठ ने सराहना की।

सिविल कोर्ट में अब बिना C.O.P. ड्रेस एंट्री नहीं, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

 रायबरेली उत्तर प्रदेश के रायबरेली सिविल कोर्ट परिसर में वकीलों की पहचान और अनुशासन को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाया है। एसोसिएशन की ओर से जारी सूचना में बिना सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (C.O.P.) के वकीलों की निर्धारित ड्रेस में कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों को चेतावनी दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विधिक कार्रवाई की बात कही गई है। सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र यादव और महामंत्री संजय प्रताप सिंह 'कछवाह' की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि जिन लोगों के पास सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (C.O.P.) नहीं है, वे वकीलों की निर्धारित पोशाक पहनकर न्यायालय परिसर में प्रवेश न करें। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। फर्जी वकीलों पर कार्रवाई को लेकर सख्ती बार एसोसिएशन के इस कदम को कोर्ट परिसर में वकीलों की पहचान और पेशेवर अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। एसोसिएशन की ओर से जारी चेतावनी के बाद ऐसे लोगों पर निगरानी बढ़ने की संभावना है, जो बिना वैध दस्तावेजों के खुद को अधिवक्ता के तौर पर पेश करते हैं। कोर्ट परिसर में आने वाले लोगों के लिए अधिवक्ता की पहचान और वैध दस्तावेजों को लेकर स्पष्टता बनाए रखना इस तरह के निर्देशों का प्रमुख उद्देश्य है।  कचहरी परिसर में चर्चा का विषय बना नोटिस सेंट्रल बार एसोसिएशन की ओर से जारी सख्त सूचना के बाद रायबरेली कचहरी परिसर में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। नोटिस में नियमों के पालन पर जोर देते हुए स्पष्ट किया गया है कि कोर्ट परिसर में अधिवक्ता की निर्धारित ड्रेस का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप ही किया जाए। एसोसिएशन के इस कदम से न्यायालय परिसर में पेशेवर पहचान और अनुशासन को लेकर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। नियम तोड़ने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी एसोसिएशन ने अपने निर्देश में साफ किया है कि C.O.P. के बिना निर्धारित अधिवक्ता ड्रेस में कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जा सकती है। अब इस निर्देश के लागू होने के बाद कोर्ट परिसर में ऐसे लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई किस तरह की जाती है, इस पर नजर रहेगी।

पंजाब कांग्रेस में घमासान के बीच सिंगला ने खोले पत्ते, बोले- हाईकमान लेगा फैसला

चंडीगढ़. 'मुझे दिल्ली क्यों जाना चाहिए?'- पंजाब कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन और संगठन में जारी खींचतान के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और पंजाब कांग्रेस चुनाव प्रबंधन व समन्वय समिति के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला का यह बेबाक बयान सामने आया है। बीती रात से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान पद के लिए चली आ रही खींचतान के बीच ये उनका पहला रिएक्शन है, जो सामने आया है। राज्य इकाई की कमान संभालने की रेस में सबसे आगे चल रहे सिंगला ने दिल्ली जाने और पार्टी हाईकमान से मुलाकात करने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अध्यक्ष पद को लेकर जारी घमासान और दिल्ली दौरों से जुड़े सवालों पर विजय इंदर सिंगला ने साफ लहजे में कहा- भाई, मुझे दिल्ली क्यों जाना चाहिए? मेरे संगरूर के गांवों में पहले से कार्यक्रम तय हैं और मैं उन्हीं में व्यस्त हूं। मैं दिल्ली तभी जाता हूं जब वहां कोई काम होता है या फिर हाईकमान की ओर से कोई बुलावा आता है। फिलहाल दिल्ली जाने का ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं है। पंजाब कांग्रेस में सुगबुगाहट तेजह विजय इंदर सिंगला का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब कांग्रेस में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान वर्तमान अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह किसी नए चेहरे को कमान सौंपने पर विचार कर रहा है। इसके पीछे का मुख्य मकसद 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के धड़ों के बीच राजनीतिक संतुलन स्थापित करना है। हाईकमान के फैसले का इंतजार जारी हिंदू चेहरे और केंद्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले विजय इंदर सिंगला को इस अंदरूनी खींचतान के बीच एक सर्वमान्य और तटस्थ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस बयान से साफ है कि वे फिलहाल अपनी जमीनी राजनीति और संगरूर क्षेत्र के दौरों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं तथा हाईकमान के औपचारिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

महेश्वर नगर परिषद का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने जन्मतिथि मामले में दिया नया निर्देश

महेश्वर  प्रयागराज महाकुंभ के दौरान रुद्राक्ष की माला बेचते हुए वायरल वीडियो से चर्चा में आई युवती को जन्मतिथि विवाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। इंदौर बेंच ने महेश्वर नगर पालिका के सीएमओ की ओर से जन्मतिथि बदलने का आदेश रद्द करते हुए मामले पर युवती को सुनवाई का अवसर देकर नए सिरे से फैसला करने के निर्देश दिए हैं। क्या है पूरा मामला? महेश्वर की युवती मोनालिसा और उसके पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नगर पालिका की ओर से उसके मूल जन्म प्रमाण पत्र में की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचिका के मुताबिक युवती ने मार्च 2026 में केरलम के एक मंदिर में शादी की थी। इसके बाद उसके परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया और युवती के मूल जन्म प्रमाण पत्र को रद्द कर उसकी जन्मतिथि बदलने की प्रक्रिया शुरू की। युवती का दावा है कि उसके जन्म प्रमाण पत्र में जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी। यही तारीख उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में भी दर्ज होने की बात याचिका में कही गई। CMO ने क्यों बदली जन्मतिथि? मामले में युवती के पिता की ओर से जन्मतिथि में सुधार के लिए आवेदन दिया गया था। उनका कहना था कि महेश्वर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मातृत्व रजिस्टर में युवती की जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज है। उनके मुताबिक इस रिकॉर्ड से युवती की शादी के समय नाबालिग होने की बात सामने आती है। यह भी दलील दी गई कि पहले जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र माता-पिता के कथित शपथ पत्र के आधार पर बना था और बाद में अस्पताल के रिकॉर्ड मिलने पर नियमों के तहत उसमें संशोधन किया गया। इसके बाद महेश्वर नगर पालिका के सीएमओ ने 31 मार्च 2026 को आदेश जारी कर पहले दर्ज जन्मतिथि को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने क्या कहा? जस्टिस गजेंद्र सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि युवती को उसके पिता की ओर से जन्मतिथि में बदलाव के लिए दिए गए आवेदन की जानकारी नहीं दी गई और न ही उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन माना और सीएमओ द्वारा जारी आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि युवती के पिता के आवेदन पर कानून के अनुसार दोबारा फैसला किया जाए और इससे पहले युवती को प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए। जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव से पहले उसका पक्ष नहीं सुना गया जन्म प्रमाण-पत्र में किए गए इस बदलाव को चुनौती देते हुए युवती और उसके पति ने हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की थी। इसमें कहा कि वर्ष 2015 में जारी आधार कार्ड में युवती की जन्मतिथि एक जनवरी 2008 ही दर्ज है। पैन कार्ड भी इसी जन्मतिथि के हिसाब से जारी हुआ था। युवती का कहना था कि जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव से पहले उसका पक्ष भी नहीं सुना गया। मप्र हाई कोर्ट की युगलपीठ ने याचिका स्वीकारते हुए कहा कि बगैर किसी को सुने उसके प्रमाण पत्र में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। कोर्ट ने महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 31 मार्च 2026 को जारी आदेश निरस्त करते हुए कहा कि युवती के पिता द्वारा जन्मतिथि में सुधार के लिए दिए गए आवेदन पर युवती को सुनवाई का अवसर देकर कानून के प्रविधानों के अनुसार नए सिरे से निर्णय लें। जन्मतिथि विवाद के बाद पति पर एफआईआर याचिका के अनुसार जन्मतिथि विवाद के बाद युवती के पति के खिलाफ महेश्वर थाने में एफआईआर भी दर्ज हुई। इसमें बीएनएस की विभिन्न धाराओं के साथ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और SC/ST एक्ट की धाराएं लगाए जाने की बात कही गई है। याचिका में आरोप लगाया गया कि बदले हुए रिकॉर्ड के आधार पर पति के खिलाफ कार्रवाई की गई और दोनों की अंतरधार्मिक शादी को लव जिहाद से जोड़कर देखा गया, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है। वहीं राज्य सरकार और युवती के पिता की ओर से इन दलीलों का विरोध किया गया और जन्मतिथि को लेकर अस्पताल के रिकॉर्ड को आधार बताया गया।  महाकुंभ में वायरल हुआ था वीडियो गौरतलब है कि मोनालिसा 2025 के प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी। मेले में रुद्राक्ष की मालाएं बेचते हुए उसका वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद वह रातोंरात सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो गई थी। मामले में युवती और उसके पति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने पैरवी की। हाईकोर्ट के ताजा आदेश से फिलहाल युवती को जन्मतिथि बदलने के नगर पालिका के आदेश पर राहत मिली है, जबकि जन्मतिथि का अंतिम निर्धारण अब युवती की सुनवाई के बाद होगा।

महानदी विवाद पर साय-माझी की बैठक, CM बोले- जो फैसला होगा स्वीकार करेंगे

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दिल्ली रवाना हुए हैं। दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर अहम बैठक होगी। बैठक में दोनों राज्यों के हितों और जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। दिल्ली रवाना होने से पहले सीएम साय ने कहा कि जल विवाद को लेकर केंद्रीय जल आयोग (CWC) को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि दोनों प्रदेशों के हित में जो भी निर्णय होगा, दोनों सरकारें उसे मानेंगी। सिंगापुर दौरे को लेकर भी बोले CM साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने प्रस्तावित सिंगापुर दौरे को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ की विकास उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। सिंगापुर में वे निवेशकों और व्यापारियों से मुलाकात करेंगे तथा प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। सीएम ने कहा कि इस दौरे से कौशल विकास, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

इंदौर में दूध के दाम बढ़े, विक्रेता संघ ने ₹65 तय किया; किसान ₹70 पर अड़े

 इंदौर  आगामी त्योहारों से पहले शहर के परिवारों का मासिक बजट कुछ गड़बड़ा सकता है, क्योंकि एक अक्टूबर से दूध के दाम बढ़ने जा रहे हैं। इंदौर दूध विक्रेता संघ ने दूध उत्पादकों से खरीदी का भाव बढ़ाने के साथ उपभोक्ताओं के लिए भी नए भाव तय किए हैं। अब आमजन को घर पहुंच दूध 65 रुपये लीटर और दुकान-डेयरी से 68 रुपये लीटर मिलेगा। यानी रोज 2 लीटर दूध लेने वाले परिवार को महीने में करीब 120 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। पांच लीटर प्रतिदिन खपत वाले परिवार का अतिरिक्त खर्च करीब 300 रुपये महीना हो सकता है। जानिए दूध के नए भाव वर्तमान में घर पर दूध पहुंचाने के दाम 63 रुपये प्रति लीटर हैं। इसमें 62 रुपये दूध और एक रुपये सेवा शुल्क शामिल है, लेकिन बढ़ोतरी के बाद दूध के दाम 65 रुपये प्रति लीटर हो जाएंगे। वहीं दुकान व डेयरी पर वर्तमान में 66 रुपये प्रति लीटर दूध मिलता है, जो गुरुवार से 68 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। यानी दूध के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी होगी। ये भाव 5.5 से 6 फैट वाले दूध के आधार पर तय किए गए हैं। जिस परिवार की रोजमर्रा की जरूरत में दूध की खपत ज्यादा है, उसके महीने के बजट पर इसका असर सीधे दिखाई देगा। संघ के अध्यक्ष भरत मथुरावाला का कहना है कि दूध के खरीदी और बिक्री दोनों दाम में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। आगे बारिश की कमी बनी रही और कपास्या खली, चापड़ व भूसे जैसे पशु आहार के दाम बढ़े तो दूध के भाव पर दोबारा विचार किया जा सकता है। 9.24 रुपये प्रति फैट के हिसाब से खरीदी दूध उत्पादक किसानों से खरीदे जाने वाले दूध के दाम भी बढ़ाए गए हैं। अब उत्पादकों से दूध की खरीदी 9.23 रुपये प्रति फैट के हिसाब से होगी, जबकि अब तक 8.90 रुपये प्रति फैट खरीदी हो रही थी। इसके अनुसार दूध खरीदी के दाम करीब दो रुपये बढ़ेंगे। उत्पादक किसान लंबे समय से दूध के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में संघ ने दूध के दाम बढ़ाकर किसानों की मांगों को कुछ हद तक माना है। हालांकि किसान 12 रुपये प्रति फैट खरीदी की मांग कर रहे हैं।  इतना बढ़ेगा खर्च दूध के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद विभिन्न परिवारों के मासिक और वार्षिक खर्च में होने वाली वृद्धि इस प्रकार है… एक लीटर रोज: 60 रुपये महीना, 730 रुपये वार्षिक दो लीटर रोज: 120 रुपये महीना, 1460 रुपये वार्षिक पांच लीटर रोज: 300 रुपये महीना, 3650 रुपये वार्षिक दूध मूल्य वृद्धि से जुड़ी मुख्य बातें 33 पैसे प्रति फैट बढ़ाया गया किसानों से खरीदी का भाव। दो रुपये प्रति लीटर खरीदी और बिक्री दोनों के दाम बढ़े। 12 रुपये प्रति फैट से खरीदी की मांग कर रहे थे किसान। 12 लाख लीटर के करीब दूध प्रतिदिन डेयरी और बंदी में होता है विक्रय। किसानों की मांग-खरीद रेट 70 रुपए हो मध्यप्रदेश दूध किसान संघ के अध्यक्ष दिलीप सिंह पंवार ने कहा कि हाल में हुई 3 रुपए की बढ़ोतरी में भी 1 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। किसानों के लिए वास्तविक बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग है कि दूध का खरीद मूल्य 70 रुपए प्रति लीटर किया जाए। फैट के आधार पर भुगतान की व्यवस्था होने पर किसान तैयार हैं, लेकिन इसके लिए 12 रुपए प्रति फैट के हिसाब से भुगतान की मांग है। पंवार ने कहा कि इंदौर में कुछ अन्य दूध व्यापारियों के यहां 65 से 68 रुपए तक खरीद और 70 से 72 रुपए तक बिक्री की बात सामने आती है। ऐसे में किसानों को भी 68 से 70 रुपए तक उचित खरीद मूल्य मिलना चाहिए। विक्रेता संघ बोला- उपभोक्ता पर ज्यादा बोझ नहीं डाल सकते इंदौर दूध विक्रेता संघ के अध्यक्ष भरत मथुरावाला ने बताया कि अभी घर पहुंच दूध के 63 रुपए में 62 रुपए दूध और 1 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। 1 अक्टूबर से यह 64 रुपए दूध + 1 रुपए डिलीवरी होकर कुल 65 रुपए होगा। दुकानों पर खुले दूध की कीमत 68 रुपए प्रति लीटर रहेगी। मथुरावाला ने कहा कि संघ पिछले 38 वर्षों से काम कर रहा है और पंजीकृत संस्था है। संघ की जिम्मेदारी किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप भुगतान दिलाने के साथ उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ नहीं डालना भी है। फैट के हिसाब से भुगतान 9.23 रुपए तक पहुंचा मथुरावाला के मुताबिक किसानों को फैट के आधार पर भुगतान किया जाता है। पहले 8.90 रुपए प्रति फैट दिया जा रहा था, जिसे बढ़ाकर 9.23 रुपए प्रति फैट किया गया है। उनका दावा है कि यह भुगतान सांची से अधिक है। उन्होंने कहा कि देवास, उज्जैन, धार और खंडवा सहित आसपास के क्षेत्रों में भी दूध के दाम में करीब 2 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है। सप्लाई रुकी तो क्या होगा? किसान संगठन ने मांग पूरी नहीं होने पर दूध की सप्लाई रोकने की संभावना जताई है। हालांकि अभी सप्लाई बंद करने का कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए 1 अक्टूबर से तय नए रेट लागू होंगे या नहीं, यह स्थिति आगे की बातचीत पर निर्भर करेगी। किस बात पर टकराव? विवाद मुख्य रूप से दूध के खरीद मूल्य, फैट के हिसाब से भुगतान और किसानों की उत्पादन लागत को लेकर है। दूध विक्रेता संघ का कहना है कि उपभोक्ताओं पर भी कीमत का असर पड़ता है, जबकि किसान संगठन का तर्क है कि मौजूदा खरीद मूल्य उनकी लागत के अनुरूप नहीं है। दोनों पक्ष अपने-अपने स्तर पर किसानों और उपभोक्ताओं के हित की बात कर रहे हैं।  

CM मान आज जारी करेंगे मावां-धीयां योजना की तीसरी किस्त, 36 लाख महिलाओं को फायदा

 चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज गोइंदवाल साहिब में 'मावां-धीयां सत्कार योजना' के तहत महिलाओं को सम्मान राशि की तीसरी किस्त जारी करेंगे। इस किस्त में 36 लाख 87 हजार 677 महिलाओं के खातों में 1,262 करोड़ 54 लाख रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। यह योजना राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। मान सरकार ने अब तक इस योजना के तहत कुल 73 लाख 99 हजार महिलाओं को लाभ पहुंचाया है। इन महिलाओं के खातों में कुल 2,562 करोड़ 33 लाख रुपये की सम्मान राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। यह राशि दो किस्तों में वितरित की गई है।  कार्यक्रम में सरकार की ओर से योजना के तहत महिलाओं और बेटियों से जुड़ी आर्थिक सहायता की किस्त जारी की जाएगी।‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ का उद्देश्य महिलाओं और बेटियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। आज गोइंदवाल साहिब में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान इसी को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां की गई हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कार्यक्रम में शामिल होकर योजना को लेकर जानकारी साझा करेंगे और लाभार्थियों से भी संवाद करेंगे। इस के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह ₹1,000 और अनुसूचित जाति (SC/ST) की महिलाओं को प्रति माह ₹1,500 की वित्तीय सहायता दी जाती है। योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 3,000 रुपये की सम्मान राशि मिलती है। वहीं, अनुसूचित जाति की महिलाओं को 4,500 रुपये की सम्मान राशि दी जाती है। यह पहल महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ना है। 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को लाभ योजना के तहत 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की पात्र महिलाओं को लाभ दिया जाता है। एक परिवार में पात्र महिलाओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं रखी गई है। राशि सीधे बैंक खातों में DBT के जरिए ट्रांसफर की जाती है। पहली किस्त जुलाई 2026 में तीन महीने की राशि एक साथ जारी की गई थी। सामान्य वर्ग की महिलाओं को ₹3,000 और अनुसूचित जाति की महिलाओं को ₹4,500 मिले। ₹9,300 करोड़ का बजट प्रावधान पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए ₹9,300 करोड़ का प्रावधान किया है। सरकार की ओर से करीब 97% महिलाओं को योजना के दायरे में लाने का अनुमान बताया गया है।

233 स्थानों पर अवैध खनन का मामला, पंजाब हाईकोर्ट ने सरकार को 4 सप्ताह का दिया समय

 चंडीगढ़  पंजाब के पठानकोट और गुरदासपुर जिलों में कथित अवैध खनन के मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में राज्य में 233 स्थानों पर अवैध खनन गतिविधियों की पहचान होने के बाद हाईकोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर जिम्मेदार व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने 24 सितंबर 2026 को गुरबीर सिंह पन्नू बनाम भारत संघ तथा इससे संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किए। मामला पठानकोट और गुरदासपुर जिलों में कथित अवैध खनन गतिविधियों से जुड़ा है। 48 घंटे में हलफनामा दाखिल करने का आदेश सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देशों के बावजूद पंजाब के खनन निदेशक की ओर से हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। इस पर अदालत ने 48 घंटे के भीतर हलफनामा दाखिल करने और उसकी अग्रिम प्रति याचिकाकर्ताओं के वकीलों को उपलब्ध कराने का आदेश दिया।  233 स्थानों की रिपोर्ट के बाद बढ़ी सख्ती अदालत ने कहा कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग की तीन जुलाई 2026 की रिपोर्ट में राज्य के 233 स्थानों पर अवैध खनन की पहचान की गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाने और मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारी समय रहते उचित कार्रवाई नहीं करते हैं तो अगली सुनवाई में उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा हलफनामे के माध्यम से अदालत में पेश करना होगा। 16 नवंबर को अगली सुनवाई अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित की है। इस दौरान राज्य सरकार को बताना होगा कि अवैध खनन वाले चिन्हित स्थानों पर क्या कार्रवाई की गई और जिम्मेदार व्यक्तियों व अधिकारियों के खिलाफ कौन-कौन से कदम उठाए गए।