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5000 से अधिक लंबित पदों पर जल्द बहाली के संकेत

पटना बिहार सरकार के नए योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने सोमवार को पटना के घंटाघर स्थित कार्यालय में विभाग का कार्यभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण के दौरान विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यभार संभालने के बाद मंत्री को विभाग की योजनाओं, सांख्यिकी गतिविधियों और विकास कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही विभाग की मौजूदा स्थिति और आगामी कार्ययोजना पर भी प्रस्तुतीकरण किया गया। नौकरी और बहाली को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता कार्यभार संभालते ही मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि विभाग में लंबित बहालियों को पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। मंत्री ने कहा कि बेरोजगार युवाओं को रोजगार देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेत दिया कि लंबे समय से अटकी नियुक्तियों पर जल्द फैसला लिया जाएगा। 5000 से ज्यादा पदों की बहाली पर फोकस मंत्री कुशवाहा ने विभाग में लंबित करीब पांच हजार से अधिक पदों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और कोर्ट के आदेश आने के बावजूद अब तक नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे को वे पहले बिहार विधानसभा और विधान परिषद में भी उठा चुके हैं। अब विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद वे इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाएंगे। LAEO और जिला योजना पदाधिकारियों पर नजर मंत्री ने कहा कि योजना एवं विकास विभाग बिहार के विकास कार्यों में बेहद अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि जिले स्तर पर LAEO-1, LAEO-2 और जिला योजना पदाधिकारी योजनाओं को लागू करते हैं। विभाग की कार्यप्रणाली और जमीनी स्तर की स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग को और मजबूत बनाया जाएगा। अधिकारियों को भी दिखाई सख्ती भगवान सिंह कुशवाहा ने साफ कहा कि सिर्फ सरकार की इच्छा से काम नहीं चलेगा, अधिकारियों को भी गंभीरता दिखानी होगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार हमेशा रोजगार देने के पक्ष में रही है। लेकिन विभागीय स्तर पर तेजी और जवाबदेही जरूरी है, तभी नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी होगी। मंत्री ने कहा कि खाली पदों का आकलन कर जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। तकनीक आधारित मॉनिटरिंग पर जोर अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि विभाग विकास योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि तकनीक आधारित कार्यप्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मंत्री ने भी भरोसा दिलाया कि जो काम अब तक अधूरे रह गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विधायिका और कार्यपालिका के बेहतर समन्वय से ही बिहार के विकास को नई गति मिलेगी।  

मादक पदार्थों के खिलाफ सख्ती, किशनगंज पुलिस ने बनाई विशेष एएनटीएफ टीम

किशनगंज बिहार के किशनगंज जिले में बढ़ते मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से पुलिस कप्तान ने बड़ा कदम उठाया है। किशनगंज पुलिस ने बिहार की पहली एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) का गठन किया है। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि जिले को सूखे नशे के कारोबार से मुक्त कराने के लिए यह विशेष टीम पूरी गंभीरता और रणनीति के साथ काम करेगी। एसपी संतोष कुमार ने बताया कि बिहार में पहली बार किसी जिले में इस प्रकार की विशेष एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों, उनके नेटवर्क, फंडिंग और आकाओं तक पहुंच कर पूरे अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करना है। इस विशेष टास्क फोर्स का नेतृत्व एसडीपीओ मंगलेश कुमार सिंह करेंगे, जबकि इंस्पेक्टर राजू को इसका प्रभारी बनाया गया है। टीम में कुल 12 पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल किए गए हैं, जिन्हें विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जेल से छूटने के बाद भी रहेगी निगरानी पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। एएनटीएफ उन तस्करों की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखेगी जो जेल से छूट चुके हैं या भविष्य में रिहा होंगे। ऐसे लोगों पर प्रिवेंटिव एक्शन लेते हुए दोबारा अपराध में शामिल होने से रोकने की रणनीति तैयार की गई है। एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी करेगी, जिसके माध्यम से आम लोग गुप्त रूप से मादक पदार्थों की तस्करी या सेवन से जुड़ी जानकारी पुलिस तक पहुंचा सकेंगे। एसपी संतोष कुमार ने कहा कि बिहार में पहली बार किसी जिले में इस प्रकार की विशेष एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों, उनके नेटवर्क, फंडिंग और आकाओं तक पहुंच कर पूरे अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करना है। युवाओं को जागरूक करने पर भी रहेगा जोर एसपी संतोष कुमार ने कहा कि पुलिस केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युवाओं और आम लोगों के बीच जागरूकता अभियान भी चलाएगी। स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थलों पर नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा ताकि युवा पीढ़ी को इस जाल में फंसने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि जो लोग नशे के सेवन के आदी हैं, उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती करवाने की दिशा में भी पहल की जाएगी। पुलिस प्रशासन का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून से नहीं बल्कि सामाजिक सहयोग और जागरूकता से भी जीती जा सकती है। एसपी ने जिलेवासियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किशनगंज को सूखे नशे से मुक्त कराना पुलिस की प्राथमिकता है और इस मिशन को हर हाल में पूरा किया जाएगा। एएनटीएफ का मुख्य कार्य जिले और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय मादक पदार्थ तस्करी गिरोहों की पहचान करना, उनके आपराधिक इतिहास का अध्ययन करना तथा उनके नेटवर्क और सप्लाई चैन की पूरी जानकारी जुटाना होगा। पुलिस इन अपराधियों का विस्तृत डोजियर तैयार करेगी ताकि संगठित रूप से इनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। एसपी ने कहा कि यह टास्क फोर्स सूचना संकलन और सत्यापन के बाद छापेमारी करेगी तथा कानूनी कार्रवाई को अंजाम देगी। इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त लोगों की संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस का प्रयास रहेगा कि गिरफ्तार तस्करों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाकर जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए।

27 हजार पदों वाली भर्ती में नया मोड़, संशोधित रिजल्ट के आधार पर नियुक्ति के निर्देश

जयपुर राजस्थान हाई कोर्ट ने श‍िक्षक भर्ती 2022 परीक्षा में एक बड़ा और अहम फैसला दिया है. हाई कोर्ट ने भर्ती परीक्षा में अधिक अंक लाने वाले सभी अभ्यर्थियों को नौकरी देने के निर्देश दिए हैं. जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने यह महत्वपूर्ण आदेश दिया. याचिकाकर्ताओ की ओर से अधिवक्ता आनंद शर्मा ने पैरवी की. उन्होंने कोर्ट को बताया कि भर्ती परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी होने के बाद जिन अभ्यर्थियों के अंक बढ़े, उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई. कम अंक वाले नौकरी कर रहे हैं. कोर्ट ने दलील सुनने के बाद सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए. यह फैसला लेवल-2 भर्ती को लेकर हुआ है. 27 हजार पदों पर निकाली थी भर्ती राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से दिसंबर 2022 में लेवल-1 और लेवल-2 के लिए अध्यापक भर्ती परीक्षा की विज्ञप्ति जारी की गई थी. कर्मचारी चयन बोर्ड ने तृतीय श्रेणी शिक्षकों के 27 हजार पदों पर विभिन्न विषयों में भर्ती निकाली थी, इसके बाद 2023 में भर्ती परीक्षा का आयोजन करवाया गया. भर्ती परीक्षा के बाद 18 मार्च 2024 को प्रथम उत्तर कुंजी जारी की. 9 जून 2024 को अंतिम सूची जारी हुई अभ्यर्थियों की आपत्तियों का निस्तारण कर 9 जून 2024 को अंतिम सूची जारी कर परिणाम घोषित कर दिया. इसके बाद अभ्‍यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि मान्यता प्राप्त पुस्तकों, लेखकों और शिक्षा बोर्ड की पुस्तकों के आधार पर उनके जवाब सही है, लेकिन चयन बोर्ड ने उन्हें सही नहीं माना. इसके बाद भर्ती परीक्षा का रिवाइज्ड रिजल्ट जारी किया गया था.

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने दी चेतावनी, सुप्रीम कोर्ट आदेश का पालन जरूरी

बिलासपुर  हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन को आदेश दिया है कि नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को 15 दिनों के भीतर नियमित पद के अनुरूप वेतन दिया जाए। यह मामला लंबे समय से चल रहे नियमितीकरण विवाद और पूर्व आदेशों के पालन नहीं होने को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं का है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट द्वारा आदेश पारित किए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान सभी लाभ अब तक नहीं दिए हैं। पक्षकारों ने कहा कि 6 मार्च 2023 के आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि संबंधित कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी माना जाएगा तथा उनकी सेवाओं का नियमितीकरण 26 अगस्त 2008 से प्रभावी समझा जाएगा। साथ ही उन्हें नियमित कर्मचारियों के बराबर सभी सुविधाएं और लाभ भी दिए जाने थे। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर निर्देश जानकारी के अनुसार,  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को न तो नियमित किया गया है और न ही देयकों का पेमेंट किया गया है। जिसके खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट SLP और रिव्यू पीटीशन खारिज कर चुका जानकारी के अनुसार, सेंट्रल यूनिवर्सिटी की ओर से दायर एसएलपी और रिव्यू पीटीशन सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। फिर भी अब तक नियमित कर्मचारियों की तहर दैनिभो कर्मियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि, साल 2023 में पारित आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय अब तक कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी के समान पूरा लाभ नहीं दे रहा है। यूनिवर्सिटी ने जबाव में दी सफाई मामले में  यूनिवर्सिटी की ओर से वकील ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारियों का नियमितीकरण कर दिया गया है, लेकिन कुछ दस्तावेजों के सत्यापन की प्रोसेस बाकी है। विश्वविद्यालय ने सफाई दी कि कर्मचारियों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे,जो उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे लाभ देने में देरी हो रही है। इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि संबंधित आदेश और पत्राचार कर्मचारियों को उपलब्ध ही नहीं कराया गया था। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिए दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल 2026 का पत्राचार 12 मई तक सभी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद कर्मचारियों को एक हफ्ते के भीतर जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।  हाईकोर्ट ने कहा- 15 दिन में नियमित पद का वेतन दिया जाए सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी भले नियमितीकरण का दावा कर रही हो, लेकिन अब तक कर्मचारियों को नियमित पद का वेतन नहीं दिया जा रहा है। इस पर विवि की ओर से कहा गया कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी कर ली जाएगी और जो कर्मचारी नियमित पद पर कार्यरत हैं, उन्हें नियमित पद के अनुसार वेतन दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने इस यूनिवर्सिटी के पक्षकार वकीलों के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया और कहा कि नियमित कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे याचिकाकर्ताओं को 15 दिनों के भीतर नियमित पद का वेतन भुगतान किया जाए। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा इस आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका और पुनर्विचार याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है। इसके बावजूद कर्मचारियों को पूरा लाभ नहीं मिल पाया। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कहा गया कि कर्मचारियों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण प्रक्रिया में देरी हुई। इस पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल 2026 का पत्र सभी याचिकाकर्ताओं को 12 मई तक उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे। सुनवाई के दौरान कर्मचारियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि विश्वविद्यालय नियमितीकरण का दावा तो कर रहा है, लेकिन उन्हें अब भी नियमित पद के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा। इस पर विश्वविद्यालय ने अदालत को भरोसा दिलाया कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी और नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को उसी अनुरूप वेतन दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट कर दिया कि जो कर्मचारी नियमित पदों पर कार्य कर रहे हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर नियमित वेतनमान का लाभ दिया जाना अनिवार्य होगा।

राजस्थान-बंगाल के सिस्टम का असर: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन मौसम रहेगा खराब

रायपुर  छत्तीसगढ़ का मौसम इन दिनों काफी बदल चुका है। राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक जो ट्रफ लाइन बनी है और बिहार से आंध्र प्रदेश तक का एक्टिव साइक्लोनिक सर्कुलेशन, इसका सीधा असर हमारे प्रदेश पर देखने को मिल रहा है। इसी कारण शाम और रात के समय कई जगहों पर अचानक बादल छाने, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने में आ रहा है। मौसम विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, और बिजली गिरने का खतर भी बना रहेगा। लोगों को खासतौर पर खुले मैदानों और खेतों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि मौसम के इस बदलाव से अचानक जोखिम बढ़ सकता है। कई जगहों पर हल्की बारिश और थंडरस्टॉर्म जैसी स्थिति बन रही है। हालांकि, मौसम विभाग के मुताबिक 11 मई के बाद इसकी तीव्रता थोड़ी कम होने लगेगी। फिर भी अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी, जिससे मौसम को पूरी तरह स्थिर कहना मुश्किल है। पिछले 24 घंटों में तापमान में कोई खास बदलाव नहीं आया है, लेकिन गर्मी का असर बरकरार है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे गर्म हवाओं का असर फिर से बढ़ेगा। इसी बीच, दुर्ग में कल का तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रहा, जो उस दिन का सबसे गर्म तापमान था। वहीं, पेंड्रा रोड में 19.2 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडी स्थिति रही। रायपुर समेत कई शहरों में दिन के समय बादल छाए रहे और शाम तक मौसम ने करवट ली। राजस्थान से बंगाल तक बनी ट्रफ लाइन और बिहार से आंध्र प्रदेश तक एक्टिव साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण छत्तीसगढ़ का मौसम बदला हुआ है। इसके प्रभाव से शाम और रात में बादल, गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन रही है। इस बीच मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कुछ इलाकों में गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना है, हालांकि आज (11 मई) के बाद से थंडरस्टॉर्म की एक्टिविटी धीरे-धीरे कम होगी। मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में पारा 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर फिर तेज होगा। पिछले 24 घंटे में 39 डिग्री के साथ दुर्ग सबसे गर्म रहा। वहीं 19.2 डिग्री के साथ पेंड्रा रोड सबसे ठंडा रहा। अगर हम राजधानी रायपुर की बात करें, तो यहां दिन में आंशिक बादल छाए रहने की उम्मीद है। अधिकतम तापमान लगभग 40 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। भिलाई और अंबिकापुर जैसे क्षेत्रों में हाल ही में तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई है, जिससे कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ। कुछ स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली की आपूर्ति में बाधा जैसी समस्याएं भी सामने आईं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 5 दिनों तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। कुछ जगहों पर बिजली गिरने और तेज हवाओं का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। हालांकि, 11 मई के बाद धीरे-धीरे थंडरस्टॉर्म की गतिविधियां कम होने लगेंगी। लेकिन तब तक लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खासकर, शाम और रात के समय बाहर निकलते वक्त सावधानी बरतें, क्योंकि मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है।

चांदनी चौक मंदिर में पूजा-अर्चना, ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंजा वातावरण

 नई दिल्ली सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर सोमवार को देश भर में भक्ति और हर्षोल्लास का वातावरण रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर आयोजित इस विशेष उत्सव के क्रम में, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक श्री गौरी शंकर मंदिर (चांदनी चौक) पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और अटूट श्रद्धा का संगम आज का दिन भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। एक ओर जहां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के प्रभास पाटन स्थित सोमनाथ मंदिर में नतमस्तक होकर राष्ट्र की खुशहाली की कामना की, वहीं दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी कैबिनेट के सहयोगियों के साथ देवाधिदेव महादेव की आराधना की। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा और कपिल मिश्रा के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर में सोमनाथ मंदिर के मुख्य आयोजन का लाइव प्रसारण देखा गया, जिससे श्रद्धालु वर्चुअली इस भव्य क्षण के साक्षी बने। 'हर हर महादेव' के जयकारों से पूरा चांदनी चौक और मंदिर प्रांगण गुंजायमान हो उठा। विरासत भी, विकास भी पूजा के उपरांत मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारत की अपराजेय जिजीविषा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अनगिनत आक्रमणों और विध्वंसों के बावजूद सोमनाथ का बार-बार उठ खड़ा होना यह संदेश देता है कि भारत की सनातन चेतना को कोई पराजित नहीं कर सकता। आज प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश 'विकास भी और विरासत भी' के मंत्र पर चल रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ दिल्ली सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंत्रियों ने भी इस अवसर को भारत की सांस्कृतिक एकता का महापर्व बताया और सोमनाथ के 75 गौरवशाली वर्षों को आत्मसम्मान का प्रतीक करार दिया।

नंदिनी नगर कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर गरमाई सियासत, आरोप-प्रत्यारोप जारी

 लखनऊ पहलवान विनेश फोगाट और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। नंदिनी नगर में आयोजित सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब इशारों और शेरो-शायरी तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर दोनों के आरोप-प्रत्यारोप की खेल व राजनीतिक जगत में चर्चा हो रही है। पहलवान विनेश फोगाट ने एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा की है। इसमें लिखा, ‘जिंदगी फंसी है किसी मझधार में, जमाना ढूंढ़ता है खामी मेरे किरदार में… जिंदगी तेरा सर सदा बुलंद रखा है, झुकाने की ताकत नहीं किसी तलवार में…!’ विनेश की इस पोस्ट को उनके समर्थक संघर्ष और आत्मसम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। चर्चा है कि यह पोस्ट गोंडा में रविवार को शुरू हुई प्रतियोगिता और उससे जुड़े घटनाक्रमों की ओर इशारा कर रही है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी दी प्रतिक्रिया विनेश की इस पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक शेर साझा करते हुए लिखा, ‘शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो, वह टूट भी सकती है।’ सोशल मीडिया यूजर इसे विनेश की पोस्ट का जवाब मान रहे हैं। हालांकि, दोनों ने सीधे तौर पर एक-दूसरे का नाम नहीं लिया है, लेकिन समय और संदर्भ को देखते हुए इसे सीधा मुकाबला माना जा रहा है। विवाद की जड़ 10 से 12 मई तक नंदिनी नगर में होने वाली सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता है। हाल ही में विनेश फोगाट ने इस आयोजन स्थल को लेकर अपनी असहजता जताई थी। इसके बाद पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया था कि इस प्रतियोगिता से उनका कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा था कि आयोजन भारतीय कुश्ती संघ की ओर से कराया जा रहा है और वह इसमें हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं। विनेश ने जवाब नहीं दिया तो लगेगा प्रतिबंध : संजय सिंह भारतीय कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा है कि विनेश फोगाट ने अनुशासनहीनता के नोटिस का समय पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो उन पर प्रतिबंध लग सकता है। गोंडा में नंदिनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम में रविवार को आयोजित ओपन सीनियर नेशनल रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर आए संजय सिंह ने कहा कि विनेश हर बात पर आरोप लगाने की आदी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि विनेश के प्रतियोगिता में आने की बात कहने पर सुरक्षित लाने, मुकाबला कराने व वापस छोड़ने की पूरी जिम्मेदारी ली गई थी। संजय सिंह ने बताया कि 2028 ओलंपिक की तैयारी शुरू कर दी गई है। भारत को चार से पांच पदक मिलने की उम्मीद है। देशविरोधी कुछ ताकतें फिर माहौल खराब करने की कोशिश कर सकती हैं।   बृजभूषण शरण सिंह और विनेश के बीच सोशल मीडिया पर शायरी पोस्ट करने को लेकर संजय सिंह ने कोई टिप्पणी नहीं की। वह सिर्फ इतना बोले कि बृजभूषण शायरी के बादशाह हैं। जवाब देने में पूर्वांचल में उनका मुकाबला नहीं है। दोनों के बीच सोशल मीडिया पर जो चल रहा है, वह उनका व्यक्तिगत मामला है। संजय सिंह ने कहा कि नंदिनी नगर स्टेडियम जैसी सुविधाएं देश में कहीं नहीं हैं। प्रतियोगिता में 28 राज्यों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। फ्री स्टाइल कुश्ती में करीब 600 पहलवान मैदान में हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत हरियाणा से हैं। रैंकिंग सीरीज का मकसद नए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय चैंपियनशिप की तरह आगे बढ़ने के लिए मंच देना है।    

Jharkhand University Act 2026 लागू, नियुक्ति और प्रमोशन नियम बदलेंगे

 रांची  झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के लागू होने के बाद उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग इसके अनुपालन के लिए लगभग आधा दर्जन स्टैच्यूट (परिनियम) गठित करने की तैयारी कर रहा है। सारे परिनियम विश्वविद्यालयों में संरचनात्मक सुधार से संबंधित हैं। नए अधिनियम में कुलपतियों से लेकर विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के नियुक्ति, सेवाशर्त एवं प्रोन्नति से संबंधित प्रविधानों में बदलाव हुआ है। सभी से संबंधित अलग-अलग परिनियम लागू किए जाएंगे। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 के तहत विश्वविद्यालयों में पहली बार विभिन्न विभागों के लिए निदेशक पद के प्रविधान किए गए हैं। परिनियम गठित कर इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया भी निर्धारित की जाएगी। विश्वविद्यालयों में विभिन्न बोर्ड के गठन को लेकर भी नीतियां तैयार होंगी। विश्वविद्यालयों में अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मियों की नियुक्ति के लिए झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन की भी प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। इसके लिए भी अलग से परिनियम गठित किया जाएगा। छात्रों तथा शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की शिकायतों के निपटारे के लिए कमेटी और न्यायाधिकरण के भी प्रविधान अधिनियम में पहली बार किए गए हैं। इन सभी निकायों के गठन के लिए भी परिनियम गठित किया जाएगा। छात्रसंघ चुनाव के लिए भी प्रविधान छात्र संघ चुनाव के लिए भी प्रविधान में बदलाव किया गया है। साथ ही पहली बार प्रति कुलाधिपति के पद का प्रविधान किया गया है। गठित होने वाले सारे परिनियम पर कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल की भी स्वीकृति ली जाएगी। परिनियम में विश्वविद्यालयों, अंगीभूत एवं संबद्ध कालेजों तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारों का स्पष्ट रेखांकन किया जाएगा। बताते चलें कि राज्यपाल की स्वीकृति के बाद राज्य में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा अधिनियम अधिसूचित हो चुका है। इस अधिनियम को लागू करने के लिए ही विभिन्न परिनियमों का गठन किया जा रहा है।

रेंट एग्रीमेंट से इमिग्रेशन तक बड़ा बदलाव, चंडीगढ़ प्रशासन ने लागू किए नए कानून

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में पांच नए कानून लागू किए गए हैं. प्रशासन की तरफ से 6 मई से लागू किए गए इन कानूनों के बाद अब रेंट एग्रीमेंट, फायर सेफ्टी, जमीन रिकॉर्ड, स्टांप ड्यूटी और इमिग्रेशन कारोबार से जुड़े नियम पूरी तरह बदल जाएंगे. चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने गुरुवार को यह जानकारी दी है. मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने बताया कि प्रशासन ने पंजाब इंडियन स्टांप (संशोधन) अधिनियम-2001 व 2003, पंजाब आबादी देह (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) अधिनियम-2021, पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ह्यूमन स्मगलिंग एक्ट-2012 व संशोधन अधिनियम-2014, हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट-2022 और असम टेनेंसी एक्ट-2021 को चंडीगढ़ में लागू किया है. उन्होंनेबताया कि तीन कानून पंजाब, एक हरियाणा से और रेंट कंट्रोल व्यवस्था के तहत असम टेनेंसी एक्ट लागू किया गया है. चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट-2021 लागू होने के बाद कौन सा पुराना कानून समाप्त हो गया?     A पंजाब इंडियन स्टांप एक्ट-2001     B ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट-1949     C हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट-2022       D पंजाब आबादी देह रिकॉर्ड ऑफ राइट्स अधिनियम-2021 नए कानून की वजह से अब चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट-2021 लागू होने पर ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट-1949 खत्म हो गया है. रेंट एग्रीमेंट कानूनः चंडीगढ़ मे अब मकान मालिकों को किरायेदारों के साथ रेंट एग्रीमेंट करना अनिवार्य कर दिया है. प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होगा. प्रशासन ने बताया कि पोर्टल अगले एक महीने में शुरू होगा. तब तक लोग फिजिकल दस्तावेज जमा कर पंजीकरण कर सकते हैं. रेंट विवाद के निपटारे के लिए रेंट कंट्रोल अथॉरिटी और ट्रिब्यूनल बनाए जाएंगे और सुनवाई जिला स्तर के जज करेंगे. अहम बात है कि अब मकान मालिक मनमर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे. किराया के विवाद 60 दिन में निपटाए जाएंगे. वहीं, मकान मालिकों को भी अवैध कब्जों से राहत मिलेगी. फर्जी ट्रैवल एजेंटों पर कसेगा शिकंजा चंडीगढ़ मेंने पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ह्यूमन स्मगलिंग एक्ट-2012 और संशोधन अधिनियम-2014 भी लागू कर दिया है. गौर रहे कि बहुत से लोग कबूतरबाजी को लेकर शिकायतें देते हैं. ऐसे में अब बिना  रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के इमिग्रेशन ऑफिस या ट्रैवल एजेंट काम नहीं कर पाएंगे. अगर नियम तोड़ा तो तीन से सात साल तक की सजा होगी. दोषी मिलने पर संपत्ति भी अटैच की जाएगी. सभी ट्रैवल एजेंटों और इमिग्रेशन कंपनियों को अपने स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन करनी होगी. स्टांप चोरी की तो जुर्माना लगेगा पंजाब इंडियन स्टांप संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद चंडीगढ़ में अब प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त में अंडर वैल्यूएशन पर सख्ती की जेगी. नए कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संपत्ति की वास्तविक कीमत छिपाकर कम स्टांप ड्यूटी भरता है तो उस पर संपत्ति की वैल्यू का तीन प्रतिशत जुर्माना लगेगा. गांवों की आबादी देह जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड पंजाब आबादी देह (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) अधिनियम-2021 लागू होने के बाद अब गांवों की आबादी देह वाली जमीनों का रिकॉर्ड लोगों के नाम से तैयार होगा. अभी तक ये जमीनें केवल खसरा नंबरों के आधार पर दर्ज थीं. इसके तहत हर संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. इससे जमीन संबधी विवाद कम हो जाएंगे. फायर सेफ्टी सर्टिफिकेटः चंडीगढ़ ने हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट-2022 को लागू किया है और इससे अब सेफ्टी सर्टिफिकेट की वैधता पांच साल लागू होगी. अब फायर सेफ्टी अप्रूवल टाइम-बाउंड तरीके से होगे. आधुनिक फायर सेफ्टी उपकरणों होने के बाद ही एनओसी मिलेगी.

ठेला-खोमचा पर महंगाई की मार, फास्ट फूड की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी

रांची  शहर में बढ़ती महंगाई के बीच अब ठेला-खोमचा और स्ट्रीट फूड भी आम लोगों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। गैस सिलिंडर की किल्लत और ब्लैक में अधिक कीमत पर गैस खरीदने की मजबूरी ने फास्ट फूड से लेकर पारंपरिक नाश्ते तक की कीमतें बढ़ा दी है। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग, मजदूर, छात्र और रोज कमाकर खाने वाले लोगों पर पड़ रहा है, जो सस्ते और गर्म खाने के लिए ठेला-खोमचा पर निर्भर रहते हैं। शहर के कई इलाकों में एग रोल, चौमिन, पकौड़ी, समोसा, जलेबी, कचौड़ी और कुलचा-नान जैसे खाद्य पदार्थों के दाम में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले 30 से 40 रुपये में मिलने वाला एग रोल अब 60 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं 8 रुपये में बिकने वाला समोसा, आलू चाप और कचौड़ी अब 10 रुपये से लेकर कई जगहों पर 15 रुपये प्रति पीस तक बिक रहा है। गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से दुकानदारों को उठानी पड़ रही परेशानी इसी तरह 10 रुपये प्लेट मिलने वाली पकौड़ी अब 20 रुपये तक पहुंच गई है। जलेबी का भाव भी 30 रुपये पाव से बढ़कर 40 रुपये पाव हो गया है। कुलचा-नान और अन्य फास्ट फूड की कीमतों में भी लगभग 20 रुपये तक का इजाफा देखा जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शहर के कई फास्ट फूड दुकानदारों ने बताया कि जितनी संख्या में गैस सिलेंडर की जरूरत होती है, उतनी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत देकर बाहर से गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। एक गैस सिलिंडर पांच से छह दिनों तक चलता एक फास्ट फूड संचालक ने बताया कि चौमिन, चिल्ली और एग रोल बनाने में रोजाना अधिक गैस की खपत होती है। लेकिन गैस नहीं मिलने से खर्च बढ़ गया है, जिसके कारण खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। वहीं एक समोसा दुकानदार ने कहा कि उनकी दुकान में एक गैस सिलेंडर पांच से छह दिनों में खत्म हो जाता है। समय पर सिलेंडर नहीं मिलने पर उन्हें ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ती है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई छोटे दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यह उनकी मजबूरी बन चुकी है। बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी उधर, ठेला-खोमचा में खाना खाने वाले लोगों का कहना है कि उनकी आय सीमित है और बड़े होटल या रेस्टोरेंट में खाना उनके बजट से बाहर है। ऐसे में ठेला-खोमचा ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा है। लोगों ने बताया कि कम कीमत में ताजा और गर्म खाना मिलने के कारण वे वर्षों से स्ट्रीट फूड पर निर्भर हैं, लेकिन अब यहां भी लगातार बढ़ती कीमतों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।