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उप मुख्यमंत्री शुक्ल के निर्देश, स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्तापूर्ण दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करें

स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्तायुक्त दवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए: उप मुख्यमंत्री शुक्ल दवाओं की मांग, भंडारण, गुणवत्ता परीक्षण, वितरण एवं मरीज तक वास्तविक उपलब्धता को प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के दिए निर्देश मेडिकल सप्लाई चेन कार्ययोजना की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश की मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था की कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तायुक्त दवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। दवाओं की मांग, भंडारण, गुणवत्ता परीक्षण, वितरण एवं मरीज तक वास्तविक उपलब्धता की पूरी प्रक्रिया को प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि दवाओं की समय पर टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए तथा गुणवत्ता परीक्षण उपरांत ही दवाओं का वितरण किया जाए। सभी स्तरों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे और डिमांड-सप्लाई गैप की स्थिति निर्मित न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि मरीजों को दवाओं का वितरण सहजता से हो तथा दवा उपलब्धता के संबंध में किसी भी स्तर पर अनावश्यक कठिनाई न आए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि तकनीक आधारित मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था से दवाओं की उपलब्धता और वितरण की सतत निगरानी संभव होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय की गुणवत्ता सुदृढ़ और अधिक प्रभावी होगी। आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस ने मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था की प्रस्तावित कार्ययोजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों पर 10 वेयरहाउस स्थापित किए जाएंगे। इन वेयरहाउसों में दवाओं के सुरक्षित एवं व्यवस्थित भंडारण की व्यवस्था की जाएगी। हाई-एंड टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस का उपयोग कर दवाओं की रियल टाइम ट्रैकिंग तथा स्टॉक की स्थिति की सतत निगरानी की जाएगी। इससे मेडिकल सप्लाई चेन में एंड-टू-एंड इंटीग्रेशन सुनिश्चित होगा। दवाओं की उपलब्धता, स्टॉक की स्थिति, मांग एवं वितरण की जानकारी वास्तविक समय में प्राप्त हो सकेगी। आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस ने बताया कि यह व्यवस्था क्षेत्रवार, केंद्रवार एवं स्वास्थ्य संस्था स्तर पर दवाओं की मांग का आकलन करने में भी सहायक होगी। इसके आधार पर आवश्यकता अनुरूप बेहतर योजना बनाते हुए दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे अंतिम उपयोगकर्ता अर्थात मरीज तक गुणवत्तायुक्त दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दवाओं की खरीदी की जाएगी। आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दवाएं वेयरहाउस तक पहुंचाई जाएंगी। वेयरहाउस में दवाओं का उचित भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा और दवाओं की समय पर गुणवत्ता जांच कराई जाएगी। एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण उपरांत ही दवाओं को वितरण के लिए भेजा जाएगा। गुणवत्ता परीक्षण के बाद दवाओं का वितरण मेडिकल कॉलेजों, जिला चिकित्सालयों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालयों के औषधि भंडार, सिविल अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक किया जाएगा। आगामी चरण में इस व्यवस्था का एकीकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक किया जाएगा। साथ ही मरीज को दवा के वास्तविक वितरण की जानकारी भी रियल टाइम में दर्ज करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। बैठक में मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक मयंक अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पत्नी की हत्या कर रचा था ‘कोबरा कांड’, साढ़े छह साल बाद आरोपी बैंककर्मी को मिली उम्रकैद

इंदौर इंदौर के बहुचर्चित शिवानी हत्याकांड में जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पति अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को उम्रकैद की सजा दी है। साल 2019 में बैंक अधिकारी अमितेष ने अपनी पत्नी शिवानी की हत्या के लिए एक बेहद खौफनाक और सुनियोजित साजिश रची थी। वह इंदौर से लगभग 620 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर जिले से ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का एक खतरनाक कोबरा 30 हजार रुपए में खरीदकर लाया था। आरोपी ने इस सांप को 11 दिनों तक अपने घर में छिपाकर रखा। इसके बाद जब उसे सही मौका मिला, तो उसने तकिए से अपनी पत्नी का गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया। हत्या को प्राकृतिक रूप देने के लिए उसने कोबरा को मार डाला और उसके दांतों को अपनी मृत पत्नी के हाथ में जबरन गड़ा दिए, ताकि पुलिस और डॉक्टर्स इसे सर्पदंश से हुई सामान्य मौत समझें। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया और फोरेंसिक साक्ष्यों के साथ डॉक्टरों के बयानों ने अदालत के सामने सच्चाई लाकर रख दी। करीब साढ़े छह साल तक चली लंबी अदालती सुनवाई के बाद कोर्ट ने अमितेष को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा संरक्षित वन्यजीव कोबरा की हत्या करने के मामले में तीन साल के कारावास व 25 हजार रुपए के जुर्माने और साक्ष्य मिटाने के जुर्म में दो साल की सजा भी सुनाई गई है। सर्पदंश की झूठी कहानी रची यह पूरी घटना इंदौर के संचार नगर में 1 दिसंबर 2019 को घटित हुई थी। 35 वर्षीय शिवानी पटेरिया को उसका पति अमितेष और उनका एक किरायेदार निखिल गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों को ससुराल पक्ष द्वारा यह जानकारी दी गई कि शिवानी की मौत सांप के काटने की वजह से हुई है लेकिन शिवानी के मायके पक्ष के लोगों ने घटना की सूचना मिलते ही इसे पूरी तरह संदेहास्पद बताया। जब कनाडिया थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर जांच के लिए पहुंचे, तो उन्हें घर के अंदर एक मरा हुआ कोबरा सांप पड़ा मिला। उस दौरान शिवानी के चाचा प्रभात दीक्षित ने पुलिस के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि उनकी भतीजी की सोची-समझी रणनीति के तहत हत्या की गई है। बिस्तर पर ही मरा हुआ था सांप शिवानी अपने घर के पलंग पर मृत अवस्था में पाई गई थी और उसी बिस्तर पर वह सांप भी मरा हुआ मिला था। चाचा का कहना था कि कुछ समय पहले अमितेष ने शिवानी से तलाक लेने का प्रयास किया था, क्योंकि वह दिल्ली की किसी अन्य युवती के लगातार संपर्क में था और हर हाल में शिवानी को अपने जीवन से हटाना चाहता था। मायके पक्ष का यह भी आरोप था कि पति ने पहले भी हत्या का प्रयास किया था, जिसमें एक बार गला दबाने और घटना से दो दिन पहले जहर देने की कोशिश शामिल थी। घटना की सुबह भी यह अफवाह फैलाई गई कि पार्लर में सांप ने काटा है, लेकिन जब बात कराने को कहा गया तो मना कर दिया गया और शाम को मौत की सूचना दी गई। उस वक्त घर में ससुर ओमप्रकाश और ननद ऋचा भी मौजूद थे। बहन भी साजिश में शामिल थी शिवानी के पिता आनंद दीक्षित ने पुलिस को दिए अपने बयानों में स्पष्ट कहा था कि उनके दामाद ने अपनी बहन के साथ मिलकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित योजना के तहत घटना वाले दिन आरोपी की बहन दोनों बच्चों को अपने साथ लेकर मॉल चली गई थी ताकि घर खाली रहे। शाम को जब बच्चे वापस लौटे तब तक शिवानी को अस्पताल ले जाया जा चुका था। दिल्ली में दूसरी महिला के साथ रहता था  अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने पिता को बताया कि शिवानी की मृत्यु लगभग 10 से 12 घंटे पहले ही हो चुकी थी। पिता ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया कि बेटी का शरीर जहर के कारण काला पड़ने के बजाय पूरी तरह पीला था, जिससे साफ था कि मौत सांप के काटने से नहीं हुई थी। पिता ने बताया कि 9 साल पहले उन्होंने बड़े अरमानों से बेटी की शादी की थी, लेकिन शादी के बाद से ही दामाद दिल्ली में किसी दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रह रहा था। इस बात की जानकारी मिलने पर जब वे दिल्ली गए तो दामाद उस महिला के साथ ही मिला, जिसके बाद वे उसे समझा-बुझाकर वापस इंदौर लेकर आए थे। इसके बावजूद वह लगातार दहेज के नाम पर शिवानी को प्रताड़ित करता रहा और मायके पक्ष की ओर से समय-समय पर करीब 25 लाख रुपए दिए जा चुके थे। पिता ने शुरुआत में ही मांग की थी कि जिस सांप के डसने का दावा किया जा रहा है, उसका किसी वेटरनरी डॉक्टर से पोस्टमॉर्टम कराया जाए ताकि सच सामने आ सके। पुलिस तफ्तीश के बाद अदालत ने सजा सुनाई इन बयानों और घटनास्थल के परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को देखते हुए पुलिस का शक गहराता चला गया। कनाड़िया पुलिस ने अमितेष पटेरिया को हिरासत में लेकर दो दिनों तक कड़ी पूछताछ की। शुरुआती दौर में वह पुलिस को लगातार गुमराह करता रहा, लेकिन सख्ती बरतने पर वह टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने स्वीकार किया कि शिवानी से उसका आए दिन विवाद होता था, जिससे तंग आकर उसने तकिए से उसका मुंह दबाकर उसे मार डाला। इससे पहले वह योजना के मुताबिक अलवर से कोबरा लाया था, जिसे मारकर उसने पत्नी के शव के पास रख दिया ताकि यह एक हादसा लगे। पुलिस ने जांच पूरी कर अमितेष, उसके पिता ओमप्रकाश पटेरिया और बहन ऋचा चतुर्वेदी के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था। 24 जून 2026 को अदालत ने अपने फैसले में माना कि अमितेष ने ही तकिए से मुंह दबाकर हत्या की और इसे प्राकृतिक रूप देने के लिए सांप के काटने का नाटक रचा था। पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच से खुला राज इस पूरे आपराधिक मामले में सबसे निर्णायक मोड़ पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट से आया। डॉक्टरों … Read more

PM उदय योजना को नहीं मिल रहा रिस्पॉन्स, प्रॉपर्टी नियमितीकरण शुल्क कम करने की तैयारी

नई दिल्ली  1511 अनाधिकृत कॉलोनियों में जैसा है वैसे ही के आधार पर लोगों को उनकी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक देने के लिए नए सिरे से पीएम उदय योजना की शुरुआत की गई थी। नियमों को आसान बनाते हुए यह प्रक्रिया DDA की बजाय MCD को दी गई थी। इसके बावजूद इसे रिस्पांस नहीं मिल रहा है। अब MCD की मांग पर DDA इस योजना के तहत रेगुलराइजेशन शुल्क कम करने पर विचार कर रही है। अधिकारी के अनुसार MCD की तरफ से यह मांग मिली है जिस पर अधिकारी विचार कर रहे हैं। अभी तक पीएम उदय योजना को कोई खास रिस्पांस नहीं मिला है। पोर्टल पर दी जा रही जानकारी के अनुसार अभी तक 50 से भी कम आवेदन मिले हैं। हालांकि प्रक्रिया को सरल करने के बाद इसमें बड़ी संख्या में आवेदन आने की उम्मीद थी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि इसके नियमतीकरण का शुल्क अधिक है। आवेदन न मिलने और इस शुल्क में कमी के लिए अप्रैल में MCD ने DDA को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि इस शुल्क को कम किया जाए। MCD को उम्मीद है कि DDA इस शुल्क को कम करे तो बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर सकते हैं। 2019 में शुरु हुई पीएम उदय योजना दिल्ली में पीएम उदय योजना 2019 में लाई गई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य 1731 कॉलोनियों में रहने वाले करीब 45 लाख प्रॉपर्टी मालिकों को उनके घर का स्वामित्व का अधिकार देना था। हालांकि तय मानकों से अतिरिक्त निर्माण करने के व दूसरी प्रक्रियाएं जटिल होने की वजह से छह साल में मात्र 40 हजार लोग ही इसका लाभ ले सके थे। DDA से मिले कम रिस्पांस के बाद केंद्र सरकार ने नए बदलावों व आसान प्रक्रिया के साथ अप्रैल 2026 में इन कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा कर मालिकाना हक देने की बात कही थी। इस बार प्रक्रिया को आसान किया गया और MCD को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि कोर्ट में चल रहे मामलों की वजह से करीब 200 कॉलोनियों को इसमें से हटा लिया गया। फिलहाल 350 AFR की ही अनुमति फिलहाल यहां पर संपत्तियों की खरीद फरोख्त जनरल पावर अटॉर्नी के आधार पर होती है। इसलिए MCD ने DDA से अपील की है कि इसके रेगुलराइजेशन का शुल्क एक तिहाई कम करे। अभी तक 350 फ्लोर एरिया रेशियो (AFR) की ही अनुमति है। अभी तक रेगुलराइजेशन के लिए यदि किसी 100 गज की जमीन पर बनी चार मंजिला इमारत के ऊपर किसी ने दो मंजिल और बना रखी है तो उसे करीब सात से 10 लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बाकी खर्चे अलग हैं। ऐसे में निगम ने मांग की है कि इस शुल्क को भी घटाया जाए। क्योंकि अतिरिक्त FAR लेने पर 11 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क है, वह तीन गुणा अधिक देना पड़ता है। यही वजह है कि लोग अप्लाई नहीं कर रहे हैं। अनधिकृत कॉलोनियों में अधिकांश निर्माण नियमों के तहत नहीं है। इसलिए तीन गुणा अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।  

पटना कोर्ट में खान सर की जमानत याचिका पर सुनवाई, फैसला 8 जुलाई तक टला

पटना  खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज के डायरेक्‍टर फैजल खान (खान सर) की अग्र‍िम जमानत एवं उनके दो गार्डों प्रदीप कुमार एवं तालेबर सिंह जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश रूपेश कुमार देव ने करीब 40 मिनट तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद पक्ष के वकील के आरोपों पर फैजल खान के आपराध‍िक इतिहास का ब्‍योरा कोर्ट ने मांगा। खान के वकील बोले- उस मामले में बरी हो चुके हैं खान सर के अधिवक्ता का कहना था कि उस केस में वे बरी हो गए हैं। इस पर अदालत ने अधिवक्ता को एक पूरक आवेदन देने को कहा और सुनवाई की तिथि 8 जुलाई को रखी है। इससे पूर्व जिला जज के छुट्टी पर रहने के कारण खान सर और अन्य आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई की तिथ‍ि 7 जुलाई तय की गई थी। इससे पहले 30 जून को कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का आदेश दिया था।  उस दिन लोक अभ‍ियोजक ने कोर्ट में कहा था क‍ि फैजल खान के दोनों गार्ड के पास अवैध हथ‍ियार थे। 30 जून को डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का द‍िया था निर्देश दहशत फैलाने के उद्देश्‍य से 2 जून की रात फायरिंग की गई थी। बचाव पक्ष के वकील अरविंद मौआर ने हथ‍ियारों के लाइसेंसी होने की बात कही थी। उन्‍होंने दावा किया था कि दोनों के हथ‍ियार के दस्‍तावेज पुलिस ने जब्‍त कर लिए हैं।   इसके बाद कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॅक्‍यूमेंट जमा करने को कहा था। तीन जुलाई सुनवाई की तिथ‍ि तय की थी।  अब 7 जुलाई पर सबकी नजर टिक गई है।   2 जून की रात हुई थी फायरिंग पुलिस जांच में सामने आया था क‍ि जून की रात खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज कोचिंग सेंटर पर पथराव और मारपीट के बाद चार राउंड गोली गार्डों ने चलाई थी। फैजल खान के कहने पर ही गार्डों ने ऐसा किया था। इस आरोप में पूर्व में दर्ज एफआईआर में बाद में खान सर का नाम भी जोड़ा गया था।   उससे पूर्व ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद व उनके दो अन्‍य सहयोग‍ियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बाद में वे जमानत पर बाहर आए।

बिहार के वैशाली में अस्पताल पर गंभीर आरोप, इलाज के बदले महिला के शोषण और अश्लील वीडियो की जांच शुरू

 वैशाली बिहार के वैशाली जिले के राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि अस्पताल के एक्स-रे रूम के भीतर एक महिला के साथ अस्पताल के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर यौन शोषण किया. हालांकि, इस पूरे मामले की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं।  मामले को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, एक महिला अपनी सास का एक्स-रे कराने राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी. आरोप है कि एक्स-रे कराने के नाम पर उससे पैसे मांगे गए. महिला ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए असमर्थता जताई. इसके बाद उसकी मजबूरी का कथित तौर पर गलत फायदा उठाया गया और अस्पताल के एक्स-रे कक्ष में उसके साथ अनुचित हरकत की गई. इसी कथित घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है।  वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में पहले से अवैध वसूली या अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही थीं, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई. हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।  उधर, मामले को गंभीरता से लेते हुए वैशाली के सिविल सर्जन ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो कब का है, उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं और घटना वास्तव में राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ही है या नहीं. इन सभी पहलुओं की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर अस्पताल भेजी गई है।  स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच टीम वीडियो की प्रामाणिकता, घटना के स्थान और समय सहित सभी तथ्यों की पड़ताल करेगी. रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचें. अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सके कि वायरल वीडियो के पीछे की सच्चाई क्या है।   

VIP नंबर का जबरदस्त क्रेज! जालंधर में एक्टिवा के लिए ₹8.52 लाख खर्च, 9 नंबरों की ई-ऑक्शन से 25 लाख की कमाई

जालंधर  जालंधर में फैंसी नंबरों का क्रेज किसी से छिपा नहीं है। रीजनल परिवहन कार्यालय (RTO) की ओर से आयोजित ऑनलाइन ई-ऑक्शन में इस बार PB 08 GA सीरीज के 0001 नंबर के लिए सबसे अधिक 8 लाख 52 हजार 500 रुपए की बोली लगी। यह नंबर किसी लग्जरी कार नहीं, बल्कि एक्टिवा स्कूटर का है।  अभी एक्टिवा का ऑन रोड प्राइस करीब 1.10 लाख रुपए है। यानी बोली लगी रकम से करीब 8 एक्टिवा खरीदी जा सकती थीं। वहीं, ई-ऑक्शन में 0007 नंबर 3 लाख 11 हजार रुपए, 0005 नंबर 2 लाख 83 हजार रुपए, 0008 नंबर 2.50 लाख रुपए, जबकि 0002, 0003, 0006 और 0009 नंबर 2-2 लाख रुपए में बिके। 000 सीरीज के नंबर लाखों रुपए में बिक रहे पिछले महीनों से लगातार 000 सीरीज के नंबर लाखों रुपए में बिक रहे हैं। हालांकि ऑक्शन में 8 लाख रुपए से ज्यादा कीमत में भी नंबर बिके हैं, लेकिन पिछले महीनों के मुकाबले यह ऑक्शन सबसे बेहतर रहा। इससे पहले PB 08 FZ सीरीज का 0001 नंबर 8 लाख 61 हजार रुपए में नीलाम हुआ था। 0001 नंबर 8,500 रुपए कम कीमत पर बिका मौजूदा सीरीज का 0001 नंबर उससे महज 8,500 रुपए कम कीमत पर बिका। आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, इच्छुक वाहन मालिक पोर्टल पर बोली लगाते हैं। सबसे अधिक बोली लगाने वाले को संबंधित नंबर आवंटित किया जाता है। तीन दिन ऐसे होती है ई-ऑक्शन… हर सप्ताह शनिवार, रविवार और सोमवार तक फैंसी नंबरों के लिए ऑनलाइन आवेदन लिया जाता है। मंगलवार और बुधवार को आवेदक परिवहन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन बोली लगाते हैं। हर क्लिक के साथ बोली 500 रुपए बढ़ती है। 0001 से 0010 तक के नंबरों का रिजर्व प्राइस 5 लाख रुपए है। रिजर्व प्राइस 1 लाख रुपए है इनमें भाग लेने के लिए 1 लाख रुपए सिक्योरिटी अमाउंट और 2,000 रुपए आवेदन शुल्क जमा करना होता है। 0011 से 0099 तक के नंबरों का रिजर्व प्राइस 1 लाख रुपए है। नीलामी पूरी होने के बाद सफल बोलीदाता को निर्धारित समय सीमा के भीतर पैसे जमा कराने होते हैं।

‘न पद की चाह, न सिद्धांतों से समझौता’, मंत्री अनिल विज ने 5 दशक की राजनीति पर कही बड़ी बात

चंडीगढ़. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज का राजनीतिक व्यक्तित्व जितना बेबाक और स्पष्टवादी माना जाता है, उतना ही उनका संगठन के प्रति समर्पण भी चर्चा का विषय रहा है। करीब पांच दशक से भाजपा और उसके वैचारिक परिवार से जुड़े विज का कहना है कि उन्होंने जीवन में कभी पद, मंत्रालय या राजनीतिक लाभ की इच्छा नहीं की। पार्टी ने जब जो जिम्मेदारी सौंपी, उसे बिना किसी 'अगर-मगर' के स्वीकार किया। सात बार विधायक रहे विज का दावा है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत न धनबल है, न बाहुबल और न ही जातीय समीकरण, बल्कि जनता का विश्वास और संगठन के संस्कार हैं। 'भाजपा में मुझसे ज्यादा आज्ञाकारी शायद ही कोई होगा' अनिल विज ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी पार्टी के निर्णयों पर सवाल नहीं उठाया। बैंक की नौकरी छोड़ने से लेकर चुनाव लड़ने और पार्टी के निर्देश पर अलग होकर फिर दोबारा लौटने तक हर निर्णय उन्होंने संगठन के आदेश को सर्वोपरि मानकर लिया। उनके अनुसार, उन्होंने कभी किसी आदेश पर 'इफ एंड बट' नहीं किया और जहां जिम्मेदारी मिली, वहीं पूरी निष्ठा से काम किया। 'संगठन के संस्कार मेरी नस-नस में हैं' विज ने कहा कि उनका पूरा राजनीतिक जीवन संगठन की पाठशाला में बीता है। उन्होंने बताया कि संगठन ने उन्हें हमेशा 'डिजर्व, नॉट डिजायर' का संस्कार दिया। यही कारण है कि उन्होंने कभी किसी पद, मंत्रालय या राजनीतिक जिम्मेदारी की मांग नहीं की। सरकार बनने के बाद भी वे अन्य नेताओं की तरह दिल्ली जाकर पैरवी करने के बजाय अपने विधानसभा क्षेत्र अंबाला छावनी में जनता के बीच ही रहे। 'भाजपा लोकतांत्रिक पार्टी है, जुगाड़ की राजनीति नहीं करती' भाजपा की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए विज ने कहा कि उनकी पार्टी किसी परिवार या व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की लोकतांत्रिक पार्टी है। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा में निर्णय एक तय प्रक्रिया के तहत होते हैं और संगठन का अधिकार सर्वोपरि होता है। उन्होंने स्वयं को पार्टी का सच्चा सिपाही बताते हुए कहा कि जहां भी संगठन खड़ा करेगा, वहीं पूरी निष्ठा से सेवा करते रहेंगे। 'कांग्रेस पहले भी मेरे सवालों से डरती थी, आज भी डरती है' विज ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने सदन में तथ्यों और आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा, इसलिए उन्हें सबसे अधिक बार सदन से बाहर निकाला गया। उनका दावा है कि आज भी कांग्रेस तथ्यात्मक बहस से बचती है और इसी कारण उनके सवालों से असहज रहती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण होती है, लेकिन कांग्रेस दोनों भूमिकाओं में असफल रही है। 'सबसे वरिष्ठ विधायक होने के नाते मेरे अनुभव का लाभ पार्टी को मिलना चाहिए' अनिल विज का कहना है कि लोकतंत्र में अपनी राय रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा पार्टी और सरकार के मंचों पर अपनी बात रखते हैं। कई बार उस पर सहमति बनती है और कई बार नहीं, लेकिन विचार रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है। उनका मानना है कि सात बार विधायक और सबसे वरिष्ठ विधायकों में शामिल होने के कारण उनके अनुभव का लाभ संगठन और सरकार को मिलना चाहिए। 'न धनबल, न बाहुबल, न जात-पात- मेरी ताकत सिर्फ जनता का प्यार' अनिल विज ने कहा कि उनकी राजनीति कभी धन, बाहुबल या जातीय समीकरणों पर आधारित नहीं रही। उन्होंने कहा कि वे पहले जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं और आगे भी बेबाकी से अपनी बात कहते रहेंगे। उनके अनुसार, यदि कोई ताकत उन्हें सात बार विधानसभा तक लेकर आई है तो वह केवल जनता का विश्वास, स्नेह और सहयोग है।

फर्जी मार्कशीट से नौकरी का खुलासा, रायपुर में GST विभाग के दो कर्मचारी हुए बर्खास्त

रायपुर. फर्जी अंकसूची के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जीएसटी विभाग ने दो कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा ने मंगलवार को किशोर पटेल और भागवत पटेल को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए। दोनों कर्मचारियों पर वर्ष 2013 की भृत्य भर्ती में कक्षा आठवीं की फर्जी अंकसूची प्रस्तुत कर नौकरी हासिल करने का आरोप था। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में हुई भृत्य भर्ती के दौरान दोनों अभ्यर्थियों ने कक्षा आठवीं की अंकसूची में 96 प्रतिशत से अधिक अंक दर्शाए थे। इसी मेरिट के आधार पर उनका चयन हुआ। बाद में दोनों की पदोन्नति होकर सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति हो गई। मामले में किशोर पटेल का नाम उस समय भी चर्चा में आया था, जब वह कर्मचारी संघ का नेता बन गया था। बताया जाता है कि तत्कालीन विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव के समन्वय कक्ष में पदस्थापना के दौरान टाइपिंग कार्य को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद किशोर पटेल ने कर्मचारी संघ और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी थी। यह मामला मीडिया में भी प्रमुखता से सामने आया था। बलौदाबाजार के कुछ लोगों ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि किशोर पटेल और भागवत पटेल की कक्षा आठवीं की अंकसूचियां फर्जी हैं। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित मिडिल स्कूल की परीक्षा परिणाम पंजी को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में सामने आया कि समतुल्यता परीक्षा में अनुपस्थित परीक्षार्थियों के रोल नंबर का उपयोग कर कथित रूप से फर्जी अंकसूचियां तैयार की गई थीं। आरोप है कि इस पूरे मामले में तत्कालीन प्रधान पाठक, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सारंगढ़ और जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया। शिकायत मिलने पर जीएसटी आयुक्त की ओर से अंकसूचियों के सत्यापन के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा गया था। उस समय अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में अंकसूचियों को सही बताया था। हालांकि बाद में विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी और अंततः दोनों कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिन शिक्षा अधिकारियों पर फर्जी दस्तावेजों को सत्यापित करने और कथित संरक्षण देने के आरोप हैं, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल बर्खास्तगी ही नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने का भी प्रावधान है। फिलहाल इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

मोहन सरकार ने ₹3,600 करोड़ का नया लोन लिया, 18 और 30 साल में होगी अदायगी

भोपाल मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को बाजार से 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठाया है। यह राशि दो अलग-अलग किश्तों में 18 वर्ष और 30 वर्ष की अवधि के लिए जुटाई गई है। इस नई उधारी के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 17,400 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर करीब 5.6114 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है। वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह राशि बॉन्ड जारी कर और सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की नीलामी के माध्यम से जुटाई जाएगी। ऋण की राशि का उपयोग राज्य में उत्पादक विकास कार्यक्रमों और विभिन्न सार्वजनिक विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाएगा। इस उधारी के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त कर ली गई है। 18 और 30 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया ऋण अधिसूचना के मुताबिक, पहली किश्त 1,600 करोड़ रुपए की है, जिसे 18 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया है। इस पर ब्याज का भुगतान निर्धारित अवधि तक प्रत्येक वर्ष किया जाएगा। दूसरी किश्त 2,000 करोड़ रुपए की है, जिसकी परिपक्वता अवधि वर्ष 2056 तक रहेगी। दोनों ऋणों पर राज्य सरकार 7.90 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर का भुगतान करेगी। ब्याज का भुगतान प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल और 15 अक्टूबर को किया जाएगा, जबकि ऋण राशि का भुगतान बुधवार को होगा। ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए हुई नीलामी राजपत्र के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी आयोजित की गई, जिसमें पात्र और संस्थागत निवेशकों ने भाग लिया। गैर-प्रतिस्पर्धी निवेशकों के लिए भी निर्धारित सीमा तक निवेश की सुविधा उपलब्ध कराई गई। 31 मार्च तक प्रदेश पर था 4.88 लाख करोड़ का कर्ज सरकार के अनुसार, 31 मार्च 2026 की स्थिति में मध्यप्रदेश पर कुल 4,88,714.17 करोड़ रुपए का ऋण था। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 3,33,278.21 करोड़ रुपए के मार्केट लोन का है। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों, केंद्र सरकार, राष्ट्रीय लघु बचत निधि और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋण भी कुल देनदारियों में शामिल हैं। विकास कार्यों पर खर्च होगा ऋण राज्य सरकार का कहना है कि इस ऋण का उपयोग सिंचाई, कृषि, ऊर्जा, सड़क, संचार, पेयजल, सहकारी संस्थाओं के विकास और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। सरकार ने यह भी दावा किया है कि राज्य की परिसंपत्तियों का मूल्य उसकी कुल देनदारियों से अधिक है, जिससे वित्तीय स्थिति संतुलित बनी हुई है।

योगी का चुनावी मोड, मंत्रियों और विधायकों को विकास योजनाओं पर फोकस करने की हिदायत

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में अगले छह महीने में विधानसभा चुनाव होना है। इससे पहले योगी सरकार चुनावी मोड में आ गई हैं। सीएम योगी ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिपरिषद की बैठक ली। मंत्रियों को शासन की योजनाओं को अंतिम पायदान पर खड़े लोगों और जरूरतमंदों तक पहुंचाने का निर्देश दिया। इसके बाद विधायकों और जनप्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल बैठक करके पौधरोपण महाभियान-2026' के लिए निर्देश दिया। कहा कि दो दिनों के अंदर अपने-अपने इलाके में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक करके स्थान तय करें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की 25 करोड़ जनता हमारा परिवार है। प्रदेश सरकार द्वारा अन्तिम पायदान पर खड़े समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक जरुरतमन्द तक आवश्यक सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जाए। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी रहे मौजूद मुख्यमंत्री सोमवार को यहां अपने सरकारी आवास पर मंत्रिमण्डल के सदस्यों के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि राज्य का चहुंमुखी विकास प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। मंत्री प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं का जमीनी स्तर पर जायजा लेते रहें। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से प्रत्येक मुद्दे पर विचार-विमर्श करते हुए गांवों तथा कस्बों में विद्यालयों, अस्पतालों आदि की स्थिति और वहां प्रदान की जा रही जनसुविधाओं की पड़ताल करें। प्रत्येक जनपद के महिला स्वयं सहायता समूहों से संवाद बनायें। जल जीवन मिशन के अन्तर्गत रोड कटिंग से जुड़े मामलों का तय समय में निस्तारण किया जाना चाहिए। अभिभावकों के साथ बैठक करें मंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनीफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे आदि प्रदान कर रही है। मंत्री इन स्कूलों में जाकर अभिभावकों के साथ बैठक करें। बच्चों के रिपोर्ट कार्ड देखते हुए स्कूलों में प्रदान की जा रही अन्य सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 जुलाई को वाराणसी में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारम्भ किया जाएगा। इस योजना से बेसिक तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक, शिक्षा मित्र, अनुदेशक आदि तथा उनके परिवार के सदस्य पांच लाख रुपये तक का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवर प्राप्त कर सकेंगे। जनपद स्तर पर मंत्री तथा प्रत्येक विधान सभा स्तर पर विधायक इस कार्यक्रम को सम्पन्न कराएंगे। 12 जुलाई को वृक्षारोपण अभियान मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 जुलाई को प्रदेश में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण महाअभियान संचालित किया जाएगा। इस वृक्षारोपण महाअभियान के पश्चात प्रदेश 275 करोड़ पौधे रोपित करने का रिकार्ड बनाने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के सकारात्मक प्रयासों से प्रदेश की आधी आबादी राज्य के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रही है। जनपद सिद्धार्थनगर की एक महिला उद्यमी ने मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का लाभ उठाकर दो वर्षों में छह लाख रुपये की आमदनी प्राप्त की है। वह अन्य महिलाओं के लिए मिसाल बनी हैं। कोविड कालखण्ड में आशा वर्करों ने अच्छा कार्य किया है, उनका मानदेय बढ़ाने की आवश्यकता है। दो दिनों में बैठक करें विधायक और सभी जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री ने पौधे लगाने और उसकी सुरक्षा पर भी ध्यान देने की अपील की है। सोमवार को 'पौधरोपण महाभियान-2026' को लेकर जनप्रतिनिधियों से वर्चुअली संवाद के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अगले दो दिनों में अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक कर वृक्षारोपण स्थलों का चयन करें तथा पौधों की आवश्यकता का प्रस्ताव जिला प्रशासन एवं वन विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी की जा सकें। इस संवाद में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों, पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों के पार्षद भी जुड़े। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों, संगठनों और नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर सहभागिता का आह्वान किया।