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भोजपुरी, अंगिका और मगही विवाद में अटका झारखंड टीईटी 2026 का विज्ञापन

रांची झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा का विज्ञापन रद्द होगा। भाषाई विवाद (भोजपुरी, अंगिका व मगही) नहीं सुलझने की वजह से विज्ञापन रद्द किया जाएगा। 21 अप्रैल से 21 मई तक आवेदन की प्रक्रिया के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने पिछले महीने ही विज्ञापन निकाला था। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति की प्रत्याशा में विज्ञापन निकाला गया था, लेकिन गुरुवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में इस पर सहमति नहीं बन सकी। क्यों रद्द हुआ विज्ञापन झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 को स्थगित रखा गया है। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुमोदन के बाद कैबिनेट की प्रत्याशा में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 की मंजूरी करते हुए अधिसूचना 26 मार्च को ही जारी कर दी थी। इसके साथ संकल्प और आवेदन करने की तिथि भी जारी कर दी गई थी। 21 अप्रैल से 21 मई तक आवेदन लिये जाने थे। नियमावली में क्षेत्रीय भाषाओं में 10 से ज्यादा जिलों में बोली जाने वाली भोजपुरी, अंगिका और मगही को जगह नहीं दी गई थी, जबकि सिर्फ दो जिलों के कुछ क्षेत्रों में बोली जाने वाली उड़िया को क्षेत्रीय भाषाओं में जगह मिली थी। इसका राजनीतिक दलों के साथ-साथ अन्य संगठनों ने विरोध किया। कैबिनेट की बैठक में भी मंत्री राधाकृष्ण किशोर, दीपक बिरुआ और दीपिका पांडेय सिंह ने इसका खुल कर विरोध किया। मंथन के बावजूद अंतिम सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में इस प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया। संशोधन होने पर भी वापस लेगा होगा विज्ञापन राज्य सरकार अगर झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 को प्रस्ताव के अनुसार 20 अप्रैल तक लागू कर देती है तो क्षेत्रीय भाषा में भोजपुरी, मगही और अंगिका के बिना आवेदन लिये जाने लगेंगे। अगर इसमें संशोधन होता है और इन तीनों क्षेत्रीय भाषा को जोड़ा जाता है तो विज्ञापन वापस लेना होगा। 2016 के बाद नहीं हुई है टीईटी झारखंड में अब तक 2012 और 2026 में ही शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई है। पिछले 10 साल से टीईटी का आयोजन नहीं हुआ है। पूर्व में ही नियम बनाया गया था कि हर साल टीईटी का आयोजन होगा, लेकिन अब तक नहीं हो पा रहा है। इसका खामियाजा 2016 के बाद बीएड करने वाले अभ्यर्थियों को उठाना पड़ रहा है। इससे वे न तो शिक्षक पात्रता परीक्षा दे पा रहे हैं और न ही स्थानीय शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में भाग ले पा रहे हैं।

भीषण गर्मी के चलते कलेक्टर का आदेश, अब दोपहर 12 बजे तक ही लगेंगी स्कूल

भोपाल.  राजधानी भोपाल में बढ़ती गर्मी के बीच स्कूलों के टाइमिंग में बड़ा बदलाव किया गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी  ने आदेश जारी कर सभी स्कूलों की कक्षाएं अब दोपहर 12 बजे तक सीमित कर दी हैं। भोपाल में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है और दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाएं चल रही हैं। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया है। नया टाइमिंग क्या रहेगा कक्षा 1 से 12वीं तक की कक्षाएं सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक लगेंगी प्री-प्राइमरी कक्षाएं भी अधिकतम दोपहर 12 बजे तक ही संचालित होंगी यह नियम सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर लागू होगा। सभी बोर्ड के स्कूल शामिल यह आदेश एमपी बोर्ड, सीबीएसई , आईसीएसई समेत सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू किया गया है। स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार समय तय कर सकते हैं, लेकिन 12 बजे के बाद कक्षाएं नहीं चलेंगी। प्रशासन ने साफ किया है कि पहले से तय परीक्षाएं और जरूरी कार्यक्रम अपने निर्धारित समय पर ही आयोजित होंगे। जिला प्रशासन का कहना है कि तेज गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि बच्चों को किसी तरह की परेशानी न हो और वे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर सकें।

एटीएस अधिकारी बनकर साइबर शातिरों ने दंपती को डराया, लगातार कॉल पर रखकर ठगा

 मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित भगवानपुर स्थित एलएन मिश्रा बिजनेस मैनेजमेंट कॉलेज के रिटायर कर्मचारी हरेंद्र कुमार व उनकी पत्नी कांति देवी को लगातार 17 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर शातिरों ने करीब 19 लाख रुपये ठग लिए। 26 मार्च की शाम साढ़े चार बजे से लेकर 11 अप्रैल तक उनको कॉल पर रखा। शातिर लगातार 24 घंटे कॉल पर रहा। इस दौरान मुश्किल से दो घंटे भी दंपती सोए नहीं पाते थे। इस संबंध में हरेंद्र ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया है कि एंटी टेरेरिस्ट स्क्वैड (एटीएस) अधिकारी बनकर साइबर शातिरों ने उन्हें 26 मार्च को पहली बार व्हाट्सअप कॉल की। उसने आधार नंबर बताते हुए झांसा दिया कि आपके इस आधार से एक सिम निकाली गई है। इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधि में की गई है। इसी आधार से केनरा बैंक में एक खाता खोला गया है, जिसमें आतंकी गतिविधि के लिए लेनदेन किए गए हैं। इस तरह एटीएस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की बात बताकर डराने धमकाने लगा। लगातार कॉल पर रखा और इस दौरान वीडियो कॉलिंग भी की। इसके लिए अलग-अलग दो मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर शातिरों ने किया। 25 मार्च से पांच अप्रैल तक हरेंद्र के मोबाइल पर कॉल की गई। वहीं, उनकी पत्नी के मोबाइल नंबर पर पांच से 11 अप्रैल तक लगातार व्हाटसअप कॉल की गई। इस दौरान उसने कहा कि एक आवेदन दीजिए कि केस की जांच कर मुझे माफ कर दिया जाए। तब हरेंद्र ने यह आवेदन भी दिया। उसने कहा कि इसके लिए रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार बैंक खाते में रुपये भेजने होंगे। डर के कारण हरेंद्र कुमार ने आरटीजीएस के माध्यम से साइबर शातिरों को रुपये भेजे। बीते 30 मार्च को हरेंद्र बैंक गए। केरला के कोची शहर में किकोरा एक्सपोर्ट लि. के खाते में 5.60 लाख रुपये लिए। 31 मार्च और एक अप्रैल को बैंक में क्लोजिंग के कारण लेनदेन बंद रहने पर पुन: दो अप्रैल को हरेंद्र को लाइन पर रखकर बैंक ले गया। मुम्बई के गोरेगांव स्थित जेटी शूकर प्रा.लि. के खाते में 7.10 लाख और कर्नाटक के अमीन रोड लाइन एंड इंटरप्राइजेज के खाते में 6.15 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए डालवाए। 18.85 लाख रुपये भेजने के बाद भी केस से निजात दिलाने के नाम पर और रुपये की मांग करने लगा तब हरेंद्र को साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट का आभास हुआ। उन्होंने कॉल काटने के बाद रिश्तेदारों से संपर्क किया और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा बेटों ने बंधाया ढांढ़स ठगी के बाद जब सारी कहानी पुत्रों को बताई तो उन्होंने हरेंद्र और उनकी पत्नी को ढांढ़स बंधाया। उन्हें डर था कि शोक व खौफ में कहीं उनके माता-पिता आत्महत्या न कर लें। बेटों ने कहा, रुपये चला गया तो फिर आ जाएंगे। 17 दिनों तक जान जोखिम में, लगता था कुछ कर लेंगे रिटायर कर्मी हरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें दो पुत्र है। एक इलाहाबाद और एक कोलकाता में बैंक में पोस्टेड है। सभी अपने परिवार के साथ उसी शहर में रहते हैं। वह पति-पत्नी सदर थाना के भगवानपुर यादव नगर के निकट श्रीकृष्ण बिहार कॉलोनी स्थित आवास में रहते हैं। बताया कि 17 दिनों के डिजिटल अरेस्ट के दौरान जान जोखिम में पड़ी रही। साइबर शातिरों के पास उनका केवल आधार कार्ड ही नहीं था। वह पूरे परिवार का ब्योरा लिए हुए थे। इस दौरान किसी रिश्तेदार की कॉल भी आई तो केवल खैरियत वगैर तक ही बात करने दिया। साइबर डीएसपी बोले डिजिटल अरेस्ट की एफआईआर दर्ज कर इंस्पेक्टर आशुतोष प्रसाद को जांच की जिम्मेवारी सौंपी गई है। बैंक खातों का डिटेल लिया जा रहा है। आशंका है कि फर्जी कंपनी के नाम म्यूल एकाउंट खोलकर ठगी की गई है। -हिमांशु कुमार, साइबर डीएसपी

प्रदेश के सभी 75 जिलों में तैयार हो रही ‘साइबर सिंघम’ की फौज

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ अब तकनीक और वैज्ञानिक जांच का शिकंजा और कसने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य की पुलिसिंग को आधुनिक और परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस ( यूपीएसआईएफएस) में बड़े स्तर पर क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार किए जा रहे हैं। संस्थान में पांच चरणों में 500 विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने की योजना पर काम तेजी से चल रहा है, जिनमें अब तक 300 एक्सपर्ट तैयार हो चुके हैं और बाकी दो बैच का प्रशिक्षण जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये प्रशिक्षित अधिकारी केवल अपने तक जानकारी सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपने-अपने कमिश्नरेट और जिलों में जाकर अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे। यानी यूपीएसआईएफएस  में तैयार हो रहे ये एक्सपर्ट आगे पूरे प्रदेश में फॉरेंसिक पुलिसिंग की एक मजबूत श्रृंखला विकसित करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ये अफसर वर्कशॉप आयोजित कर आरक्षी से लेकर निरीक्षक स्तर तक के अफसरों को क्राइम सीन मैनेजमेंट, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण और वैज्ञानिक जांच की बारीकियां सिखाएंगे, जिससे पुलिस बल की समग्र कार्यक्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। घटनास्थल पर पहुंचते ही हर पहलू को सटीक तरीके से सुरक्षित किया जा सकेगा यूपीएसआईएफएस की यह पहल जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को पारंपरिक जांच के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन, साइबर ट्रैकिंग, वैज्ञानिक सैंपलिंग और फॉरेंसिक एनालिसिस की गहन जानकारी दी जा रही है, ताकि घटनास्थल पर पहुंचते ही हर पहलू को सटीक तरीके से सुरक्षित और विश्लेषित किया जा सके। उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक आधारित पुलिसिंग को मिलेगी नई धार : डॉ. जी.के. गोस्वामी संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी के अनुसार, अभी फॉरेंसिक एक्सपर्ट के तीन बैचों के जरिए पुलिस कर्मियों और अफसरों को तकनीकी बारीकियों में दक्ष बनाया गया है। आगे चौथा बैच 27 अप्रैल से शुरू किया जाएगा और इसके बाद पांचवें चरण में बाकी विशेषज्ञ भी तैयार कर लिए जाएंगे। ये विशेषज्ञ प्रदेश के सभी कमिश्नरेट और 75 जिलों के अफसरों को बारीकियां सिखाएंगे। योगी सरकार की इस रणनीति से उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक आधारित पुलिसिंग को नई धार मिलने जा रही है। यह पहल प्रदेश को आधुनिक, तकनीक सक्षम और मजबूत कानून-व्यवस्था वाले राज्य के रूप में और सुदृढ़ करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

रायपुर: जल जीवन मिशन के तहत बुलगा में बदलाव, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा स्वच्छ पेयजल

रायपुर : जल जीवन मिशन से संवरी बुलगा की तस्वीर, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल समय की हो रही बचत, घर-घर पहुंच रहा शुद्ध पेयजल रायपुर जल जीवन मिशन ने छत्तीसगढ़ के बुलगा (Bulga) जैसे गांवों में घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाकर जीवन स्तर को बदल दिया है। बुलगा गाँव में अब हर घर में नल का कनेक्शन है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को दूर से पानी लाने की मेहनत से मुक्ति मिली है।           ग्रामीण अंचलों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संचालित ’जल जीवन मिशन’ अब ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली का नया आधार बन रहा है। कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय करने वाली महिलाओं के आंगन में आज नल से जल की धार बह रही है। इसी बदलाव की एक बानगी सरगुजा जिले के लूण्ड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बुलगा में देखने को मिली है। मीलों का सफर थमा, आंगन में आई खुशहाली           बुलगा निवासी श्रीमती जीवंती बाई ने बताया कि एक समय था जब पीने के साफ पानी का इंतजाम करना दिन का सबसे कठिन कार्य था। पानी के लिए उन्हें घर से काफी दूर जाना पड़ता था, जिससे समय की बर्बादी और शारीरिक थकान होती थी। “पहले पानी लाने के लिए बहुत लंबा लाइन लगाना  पड़ता था, लेकिन अब हमारे घर में नल का कनेक्शन लग गया है। अब सुबह और शाम दोनों वक्त नियमित रूप से शुद्ध पानी घर पर ही मिल जाता है। समय की बचत से खेती- किसानी को मिल रहा बढ़ावा नल कनेक्शन लग जाने से जीवंती बाई के परिवार के समय की बड़ी बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि पानी लाने में जो वक्त खराब होता था, अब उस समय का उपयोग वे खेती-किसानी और अन्य घरेलू कार्यों में कर रही हैं। इससे न केवल उनकी जीवनशैली सुधरी है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अतिरिक्त समय मिल रहा है। शासन की योजना के लिए जताया आभार           गांव के हर घर में पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचने पर जीवंती बाई ने हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस पहल से ग्रामीण महिलाओं का जीवन अब पहले से कहीं अधिक सुगम और सम्मानजनक हो गया है।              जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समन्वित प्रयासों से लुण्ड्रा के दूरस्थ अंचलों में जल जीवन मिशन के लक्ष्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं, ताकि हर ग्रामीण परिवार को ’शुद्ध जल-स्वच्छ पेयजल’ प्राप्त हो सके।

वन क्षेत्रों के पास स्टोन माइनिंग पर सख्ती, हाईकोर्ट ने सरकार का फैसला किया रद्द

रांची झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के जंगलों और वन भूमि के आसपास होने वाली पत्थर माइनिंग (Stone Mining) और स्टोन क्रशर (Stone Crusher) के संचालन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार द्वारा पहले घटा दी गई न्यूनतम दूरी को निरस्त कर दिया है. अब नए आदेश के तहत, वन भूमि की सीमा से स्टोन माइनिंग के लिए 500 मीटर और स्टोन क्रशर के लिए 400 मीटर की न्यूनतम दूरी का पालन करना अनिवार्य होगा. विशेषज्ञ समिति पर उठाए सवाल सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें दूरी को 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर करने का समर्थन किया गया था. कोर्ट ने पाया कि यह निर्णय बिना किसी ठोस वैज्ञानिक अध्ययन के लिया गया था. खंडपीठ ने टिप्पणी की कि सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति में वन और पर्यावरण क्षेत्र के जानकारों की कमी थी. कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि पर्यावरणीय नुकसान को कम करने के लिए ‘सतर्कता का सिद्धांत’ अपनाना जरूरी है. राष्ट्रीय उद्यानों के लिए 1 किमी का सुरक्षा घेरा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks) और वन्यजीव अभ्यारण्यों (Wildlife Sanctuaries) के चारों ओर एक किलोमीटर का ‘इको सेंसिटिव जोन’ (ESZ) पूरी तरह प्रभावी रहेगा. यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्देशों के अनुरूप जारी रहेगी ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप या प्रदूषण न फैले. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिला ‘टास्क’ कोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को एक विस्तृत सर्वे करने का आदेश दिया है. बोर्ड को उन सभी माइनिंग और क्रशर यूनिट्स की सूची तैयार करनी होगी, जिन्हें पहले की रियायती दूरी के आधार पर अनुमति दी गई थी. यह सर्वे रिपोर्ट 1 जून 2026 तक अदालत में जमा करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है, तब तक हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान पाने वाले IPS डॉ. संतोष कुमार सिंह की सराहना, PMO और अजीत डोभाल ने किया सम्मानित

रायपुर  छत्तीसगढ़ कैडर के IPS अफसर और रायपुर पुलिस मुख्यालय के DIG डॉ. संतोष कुमार सिंह (Dr. Santosh Kumar Singh) ने इंटरनेशनल लेवल पर अपनी एकेडमिक अचीवमेंट से छत्तीसगढ़ और देश का मान बढ़ाया है। उनकी हालिया प्रकाशित रिसर्च बुक "Institutionalization of Peacebuilding: Functioning of the United Nations Peacebuilding Commission in Sierra Leone & Burundi" की देश के टॉप ऑफिशियल्स ने जमकर तारीफ की है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने डॉ. सिंह को पत्र लिखकर उनके काम की सराहना की है। डॉ. संतोष कुमार सिंह की यह बुक मुख्य रूप से अफ्रीका के दो देशों सिएरा लियोन और बुरुंडी में संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति स्थापना आयोग की भूमिका पर आधारित है। यह बुक इंटरनेशनल लेवल पर शांति बहाली के लिए किए जा रहे एफर्ट्स और उसमें आने वाले इंस्टीट्यूशनल चैलेंजेस (Institutional Challenges) का एक डिटेल एनालिसिस करती है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने डॉ. संतोष कुमार सिंह को पत्र लिखकर उनके डीप रिसर्च वर्क की तारीफ की है। डोभाल ने लिखा कि यह बुक संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग के काम करने के तरीके को समझने के लिए एक शानदार बैकग्राउंड तैयार करती है। उन्होंने कहा कि आज के संघर्षपूर्ण ग्लोबल सिनेरियो में इस तरह के 'नए दृष्टिकोण' (New Approach) की काफी ज्यादा जरूरत है। 

बलौदाबाजार : डीएव्ही मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में प्रवेश हेतु आवेदन 28 अप्रैल तक

बलौदाबाजार जिले में संचालित डीएव्ही मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में प्री प्राथमिक क़ी प्रारंभिक कक्षा में प्रवेश हेतु आवेदन 28 अप्रैल तक निर्धारित किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार डीएव्ही मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल सकरी, छरछेद एवं टिकुलिया में 8 प्रतिशत निःशुल्क शासकीय कोटा के लिये आरक्षित है जिसमें प्रत्येक स्कूल में 7 सीट अनुसूचित जति एवं जनजाति वर्ग के बीपीएल श्रेणी के लिए आरक्षित है। इन स्कूलों में प्री प्राथमिक क़ी प्रारंभिक कक्षा में प्रवेश हेतु निर्धारित तिथि तक आवेदन सम्बधित स्कूल अथवा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यलय में जमा किया जा सकता है।

सरकारी सहायता से मिला ₹10 लाख का ऋण, प्रिटिंग प्रेस का खड़ा किया सफल कारोबार

‘मुख्यमंत्री युवा योजना’ से मिली स्वरोजगार की राह, इटावा के बिलाल हसन बने सफल उद्यमी सरकारी सहायता से मिला ₹10 लाख का ऋण, प्रिटिंग प्रेस का खड़ा किया सफल कारोबार उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए कारगर साबित हो रहीं योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं स्वरोजगार को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही योगी सरकार लखनऊ योगी सरकार की हितकारी योजनाओं से आज उत्तर प्रदेश का युवा आत्मनिर्भर बन रहा है। यह योजनाएं स्वरोजगार को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है। इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए जनपद इटावा के गाड़ीपुरा निवासी बिलाल हसन ने सरकारी योजना के सहयोग से खुद का कारोबार खड़ा किया है।  बिलाल हसन ने बताया कि उन्होंने जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से पूर्ण जानकारी लेकर ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के तहत ₹10 लाख का ऋण प्राप्त किया। योजना के माध्यम से मिली सरकारी वित्तीय सहायता से उन्होंने अपना प्रिटिंग प्रेस और फ्लेक्स का व्यवसाय शुरू किया। वित्तीय सहायता और सरकारी सहयोग मिलने पर उन्होंने अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक स्थापित किया और लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।  अपने उद्यम के माध्यम से बिलाल हसन न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि आज वे 50 से 60 हजार रूपए महीना कमाई कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने 5 अन्य लोगों को रोजगार देकर उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूती दी है।   योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संचालित ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए एक सशक्त पहल बनकर उभरी है। इस योजना के माध्यम से युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आसान ऋण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि युवा खुद रोजगार देने वाले भी बन रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे प्रदेश के आर्थिक विकास को गति मिल रही है। ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के तहत विनिर्माण क्षेत्र में अधिकतम ₹25 लाख तक का ऋण तथा सेवा क्षेत्र में अधिकतम ₹10 लाख तक का ऋण कुल परियोजना लागत के अनुसार अनुदान भी सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। इच्छुक व्यक्ति जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से पूर्ण जानकारी लेकर इस योजना का लाभ ले सकता हैं और उद्यमी बनने का सपना साकार कर सकता है।

राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश, दोहरी नागरिकता मामले में नया मोड़

लखनऊ कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश आदेश दिया है। हाईकोर्ट की बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। राहुल गांधी पर भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता रखने का आरोप है। इसके खिलाफ विग्नेश शिशिर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और दावा किया था कि राहुल के पास दो देशों के पासपोर्ट हो सकते हैं, जोकि भारतीय कानून का उल्लंघन है। इसी को लेकर लंबे समय से हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने सरकार से रिकॉर्ड पेश करने को कहा था। इससे पहले, लखनऊ की विशेष MP/MLA अदालत के 28 जनवरी राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ शिशिर फिर से कोर्ट पहुंचे थे। MP/MLA अदालत ने कहा था कि वह नागरिकता के मुद्दे पर फैसला करने के लिए सक्षम नहीं है। याचिकाकर्ता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और इस मामले में उनके खिलाफ विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बीएनएस, सरकारी गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत राहुल गांधी पर कई आरोप लगाए हैं। इस मामले की पहले सुनवाई करते हुए, पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा था कि राहुल की ब्रिटिश नागरिकता के खिलाफ मिली शिकायत पर उसने क्या कार्रवाई की है। राहुल गांधी के मुकदमे में सुनवाई फिर टली वहीं, गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जारी मानहानि केस की सुनवाई फिर टल गई है। याची के वकील सन्तोष पाण्डेय ने शुक्रवार को मौका लिया जिस पर एमपी – एमएलए कोर्ट के मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने सुनवाई 22 अप्रैल को सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। राहुल की वायस रिकार्डिंग को विधि विज्ञान प्रयोगशाला से सत्यापित कराने की मांग पर सुनवाई में मुकदमा कई तारीखों से लम्बित है। कर्नाटक के बंगलूरू में आठ मई 2018 को एक जनसभा के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में भाजपा नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के खिलाफ चार अगस्त 2018 को मानहानि का मुकदमा दायर किया था। लखनऊ की अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका यह शिकायत शुरू में रायबरेली की विशेष सांसद-विधायक अदालत में दायर की गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर, इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ ने 17 दिसंबर, 2025 को उक्त आपराधिक शिकायत मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था. लखनऊ की सांसद-विधायक अदालत ने 28 जनवरी, 2026 को उक्त याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्‍च न्‍यायालय का रुख किया था।