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Punjab Scheme: महिलाओं को ₹1500 महीना देगी सरकार, जानिए किन 3 डॉक्यूमेंट्स से होगा रजिस्ट्रेशन

जालंधर.  बाबा साहिब अंबेडकर के जन्म दिवस के अवसर पर एक निर्णायक कल्याण अभियान की शुरुआत करते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब में लगभग हर महिला के सशक्तिकरण के लिए एक योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत प्रदेश भर की महिलाओं को 1000 से 1500 रुपये तक की मासिक वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस योजना को बाबा साहिब अंबेडकर के सामाजिक न्याय और समानता के दृष्टिकोण के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए, मुख्यमंत्री ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का शुभारंभ किया, जिसके तहत 18 वर्ष से अधिक उम्र की सभी महिलाएं केवल तीन दस्तावेजों के साथ इस योजना का लाभ ले सकती हैं, जबकि कैंपों और सहायक स्टाफ के एक विशाल नेटवर्क के माध्यम से महिलाओं को उनके घर पर ही सुविधा प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। यह योजना पहले 9 हलकों में शुरू की जाएगी और 15 मई से इसका विस्तार शेष 108 हलकों में किया जाएगा। योजना का भुगतान जुलाई से शुरू होगा और रजिस्ट्रेशन के लिए कोई समय सीमा नहीं होगी। इससे प्रत्येक पात्र महिला को लाभ की गारंटी प्रदान की गई है, चाहे वह कभी भी रजिस्ट्रेशन करवाए। 26,000 रजिस्ट्रेशन केंद्रों और हर गांव और वार्ड में तैनात समर्पित 'महिला सतिकार सखियों' के साथ, इस योजना को बड़े पैमाने पर लागू करने, बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने और निश्चितता प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जो इसे देश में महिलाओं के लिए सबसे व्यापक प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता पहलों में से एक बनाती है। 15 मई से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन वरिष्ठ 'आप' नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया के साथ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की कि यह योजना पायलट आधार पर आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दिड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला देहाती सहित 9 हलकों में शुरू की गई है। उन्होंने कहा, "शेष 108 हलकों में महिलाओं के लिए रजिस्ट्रेशन 15 मई से शुरू होगा। जुलाई 2026 से 1000 या 1500 रुपये का मासिक भुगतान शुरू होगा।" मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने महिलाओं को पहुंच के बारे में आश्वस्त करते हुए कहा, "पंजीकरण के लिए कोई समय सीमा नहीं है और महिलाओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे 15 अप्रैल, 15 मई या 15 अगस्त को पंजीकरण करवाएं।" उन्होंने आगे कहा कि देर से पंजीकरण करवाने से लाभों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा, "उन्हें जुलाई के बाद अपना पूरा भुगतान मिलेगा, इसलिए चाहे वे सितंबर के अंत में पंजीकरण करवाएं, फिर भी उन्हें तीन महीने यानी जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए पूरा भुगतान मिलेगा।" ये दस्तावेज जरूरी दस्तावेज प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए सीएम मान ने कहा, "पंजीकरण के लिए केवल तीन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जिनमें पंजाब के पते वाला आधार, पंजाब का वोटर आईडी और बैंक पासबुक शामिल है। अनुसूचित जातियों की महिलाओं के मामले में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र भी आवश्यक है।" जाति प्रमाण पत्र की कमी वाली महिलाओं की चिंताओं पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "मैं जानता हूं कि मेरी कई अनुसूचित जातियों की बहनों और माताओं के पास जाति प्रमाण पत्र नहीं है, लेकिन उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है और उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना चाहिए।" उन्होंने कहा कि अगर इसमें समय लग रहा है तो भी चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे प्रमाण पत्र के बिना भी इस योजना के तहत पंजीकरण कर सकते हैं और 1000 रुपये मासिक प्राप्त करना शुरू कर सकते हैं। जब भी उनका प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, राज्य सरकार उन्हें जुलाई से 500 रुपये प्रति माह के बकाए का भुगतान करेगी। इस संबंध में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।" मुख्यमंत्री ने व्यापक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर एक पहुंच विधि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 8 साल से अधिक उम्र की सभी महिलाओं की 100 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने और पंजीकरण प्रक्रिया में उनकी मदद करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा राज्य भर के हर गांव और वार्ड में महिला सतिकार सखियों को तैनात किया जाएगा।" क्या होगा प्रोसीजर? मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "एक बार जब वे अपना पंजीकरण फॉर्म भर लेते हैं और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार हो जाते हैं, तो वे अपने नजदीकी पंजीकरण केंद्र पर जा सकते हैं और वहां फॉर्म जमा करवा सकते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने व्यापक बुनियादी ढांचा सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा, "यह सुनिश्चित करने के लिए कि महिलाओं को पंजीकरण में कोई कठिनाई न हो, पंजाब सरकार द्वारा 26,000 से अधिक स्थानों पर पंजीकरण की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिसमें सभी आंगनवाड़ी केंद्र, सभी सेवा केंद्र और शहरी क्षेत्रों में सभी नगर निगम/समिति कार्यालय शामिल हैं।" इस योजना के लाभों का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना हर वर्ग की महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को प्रति माह 1500 रुपये का नकद लाभ सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "यह योजना महिलाओं को स्वतंत्र और सशक्त बनाकर उनके विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगी।" उन्होंने इस पहल के पैमाने पर और जोर देते हुए कहा, “इस योजना के तहत महिलाओं के एक सीमित वर्ग को छोड़कर लगभग उन सभी महिलाओं को कवर किया जाएगा, जो 18 साल और उससे अधिक उम्र की हैं। इसलिए इस योजना से 97 फीसद से अधिक महिलाओं को लाभ होने की उम्मीद है, जो इसे देश में सबसे व्यापक महिला-पक्षधर सामाजिक सुरक्षा पहलों में से एक बनाती है।”

बैसाखी पर खास आयोजन: गुरुद्वारा भगत धन्ना जी में पहली बार महोत्सव, भारी भीड़

चंडीगढ़. बैसाखी और खालसा पंथ के स्थापना दिवस के पावन अवसर पर सोमवार को पटियाला के गांव लाछड़ू खुर्द (घन्नौर) में एक नई परंपरा का आगाज हुआ। यहां स्थित गुरुद्वारा साहिब भगत धन्ना जी में पहली बार भव्य बैसाखी महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें घन्नौर और आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में पहुंची संगत ने अपनी हाजिरी दर्ज करवाई। पूरा वातावरण 'जो बोले सो निहाल' के जयकारों और गुरबाणी के स्वर से आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। खालसा पंथ के स्थापना दिवस को समर्पित इस विशेष समागम में पंथ के प्रसिद्ध रागी और ढाडी जत्थों ने हाजिरी भरी। इंटरनेशनल पंथक ढाडी जत्थे के ज्ञानी लखविंदर सिंह रजौली (अंबाला) ने जोश भरे अंदाज में खालसा पंथ के गौरवशाली इतिहास को संगत के साथ साझा किया। वहीं, श्री दरबार साहिब अमृतसर के हजूरी रागी भाई शुभदीप सिंह ने मधुर गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालुओं को गुरु चरणों से जोड़ा। विभिन्न रागी जत्थों द्वारा प्रस्तुत कीर्तन ने वहां मौजूद संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। सेवा और प्रबंधन का दिखा अनूठा संगम महोत्सव की सफलता के पीछे समाजसेवी भगत सिंह और उनकी टीम का विशेष योगदान रहा। पहली बार आयोजित इस बड़े स्तर के कार्यक्रम को लेकर गांव में खासा उत्साह था। भगत सिंह ने बताया कि हजारों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहले से ही पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि किसी को असुविधा न हो। समागम के दौरान गुरु का लंगर अटूट वितरित किया गया और सेवादारों ने पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं निभाईं। कार्यक्रम के समापन पर अरदास की गई, जिसमें सरबत के भले (विश्व कल्याण) की कामना की गई। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक बल्कि सामुदायिक सौहार्द का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया।

छत्तीसगढ़ में बड़ा हादसा: वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट, 9 मजदूरों की दर्दनाक मौत, 30 घायल

नई दिल्ली.  सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार को हुए भीषण बॉयलर विस्फोट ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। अचानक हुए इस हादसे के बाद प्लांट परिसर में आग और धुएं का गुबार फैल गया, जिससे वहां काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट इतना जोरदार था कि आसपास मौजूद श्रमिक जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हादसे में 9 मजदूरों की मौत हो गई है।  जानकारी के अनुसार, हादसे के समय प्लांट में बड़ी संख्या में मजदूर कार्यरत थे। हादसे में करीब 30 से मजदूरों के घायल होने की सूचना है, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंच गई और तत्काल बचाव कार्य शुरू किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विस्फोट के बाद प्लांट में भगदड़ की स्थिति बन गई थी, कई मजदूर झुलस गए, जबकि कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। बचाव दल द्वारा घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन ने घटनास्थल को घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों की जांच के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है। प्रारंभिक तौर पर बॉयलर फटना कारण माना जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक वजह सामने आएगी। सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। फिलहाल प्रशासन घायलों के बेहतर उपचार और राहत कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है। बॉयलर के ट्यूब फटने हादसा- पुलिस पुलिस अधीक्षक प्रफुल ठाकुर के अनुसार, बॉयलर के ट्यूब फटने की वजह से यह हादसा हुआ है। उन्होंने बताया कि अब तक 9 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दस से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। कुछ मजदूरों के अब भी प्लांट परिसर में फंसे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री ने हादसे पर दुख जताया विष्णु देव साय ने सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से हुई दुर्घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक और हृदय विदारक बताते हुए मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं।  

Fake Medicine Racket: खाद्य एवं औषधि विभाग की रेड, अवैध व्यापार करने वाले पकड़े गए

रायपुर. खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा राज्य में नकली दवाओं के अवैध व्यापार के विरुद्ध सतत अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में कुछ माह पूर्व नागपुर गोल्डन ट्रांसपोर्ट, गोगाँव से नकली दवाओं की जप्ती के प्रकरण में एक बड़ी कार्यवाही की गई थी। जांच के दौरान इस संगठित सप्लाई चेन में संलिप्त आरोपियों—रोचक अग्रवाल (बिजरासन मेडिकोज, इंदौर), सुरेंद्र कामनानी (प्रेम प्रकाश एजेंसी, भाटापारा) एवं खेमराज बानी (सरस्वती मेडिकल स्टोर, सारंगढ़) की भूमिका सामने आई, जिन्हें रायपुर में कल सोमवार को गिरफ्तार किया गया। उक्त प्रकरण की कड़ी में सरस्वती मेडिकल स्टोर, सारंगढ़ में दिनांक दिसंबर माह में  विभाग द्वारा विस्तृत जांच एवं जब्ती की कार्यवाही की गई थी । निरीक्षण के दौरान संदिग्ध एवं नकली औषधियों के भंडारण एवं वितरण से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए थे,  जिन्हें विधिवत जप्त कर जांच में सम्मिलित किया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तथा इस अवैध व्यापार के अन्य राज्यों से जुड़े होने की संभावना के आधार पर विभागीय टीम द्वारा अंतरराज्यीय जांच एवं विवेचना भी की गई। जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर संबंधित आरोपियों एवं नेटवर्क की भूमिका का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है। वर्तमान में प्रकरण में नियमानुसार अभियोजन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। विभाग द्वारा प्रकरण से जुड़े अन्य व्यक्तियों एवं संस्थानों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा आमजन से अपील की जाती है कि वे दवाओं की खरीद केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर्स से ही करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना विभाग को दें। नकली दवाओं के विरुद्ध इस प्रकार की सख्त कार्यवाही भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगी।

पाइपलाइन विछी है तो पीएनजी कनेक्शन जरूर लें : मंत्री राजपूत

भोपाल.  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि पीएनजी पाइपलाइन जिन क्षेत्रों में बिछ चुकी है, उस क्षेत्र के उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन जरूर लें। इससे उन्हें गैस सिलेंडर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गैस की सतत आपूर्ति होगी। उपभोक्ताओं से आग्रह है कि किसी तरह का भ्रम नहीं पालें। पीएनजी पूरी तरह से सुरक्षित है। मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2925 स्थानों पर जांच की गई, 4369 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 753 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 1 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत् रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध है। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भण्डार है, देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल, डीजल, पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय (Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत् रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माइग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kg के सिलेण्डेर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शतन,सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वससहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को उनके यहां रजिस्‍टर्ड 44 कम्‍प्रेस्‍ड बायोगैस (सीबीजी) प्रोजेक्‍ट को चालू करने के निर्देश दिये गये हैं। इसी प्रकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 44 जिलों में 136 बायोगैस प्‍लांट संचालित होना बताया गया है। इन बायोगैस प्‍लांटों को क्रियाशील करने के निर्देश भी दिये गये हैं। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस का प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत् रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाईपलाईन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्त नहीं कर रहे है, ऐसे 1.5 लाख घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस के लिये सभी सीजीडी संस्था एवं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगायें, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिका‍री उपस्थित रहें। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाईन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाईन डालकर कनेक्श‍न का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य् के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शनन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशानुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाईन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शरन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइपलाइन बिछाने की ROU स्वी्कृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्यं प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाईपलाईन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शेन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाईपलाईन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाईयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये हैं। 

नोएडा आंदोलन के बाद श्रमिकों को मिली 10 तक सैलरी, दोगुना ओवरटाइम और बोनस

 नोएडा नोएडा में पिछले कुछ दिनों से आंदोलन कर रहे श्रमिकों की कई मांगों को उत्तर प्रदेश सरकार ने मान लिया है। एक तरफ जहां वेतन में वृद्धि का ऐलान कर दिया गया है तो दूसरी तरफ दोगुने ओवरटाइम से बोनस तक दिलाने का भरोसा दिया गया है। वेतन वृद्धि के अलावा श्रमिकों ने कई मांगें रखीं हैं, जिनमें से अधिकतर को सरकार ने स्वीकार कर लिया है और काम पर लौटने की अपील की है। हालांकि, सोमवार को हिंसा के बाद लगातार दूसरे दिन नोएडा में अधिकतर फैक्ट्रियों में कामकाज बाधित रहा। कई फैक्ट्रियों के बाहर श्रमिक अब भी धरना-प्रदर्शन में जुटे हैं। नोएडा की डीएम मेधा रूपम ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार की उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने वेतन में वृद्धि की सिफारिश करने के लिए सीएम योगी और उच्च अधिकार समिति को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, 'श्रमिकों की जो सबसे प्रमुख मांग थी वेतन वृद्धि की, उसे मान लिया गया है। इसके साथ और भी निर्देश दिए गए हैं कि श्रमिकों का वेतन 10 तारीख से पहले खाते में एकमुश्त पहुंचे। सालाना बोनस नवंबर से पहले मिले। ओवरटाइम के लिए डबल वेतन दिया जाएगा। साप्ताहिक छुट्टी पर काम के लिए भी डबल वेतन दिया जाएगा। यौन उत्पीड़न रोकथाम के लिए समितियां गठित की जाएंगी, जिनकी अध्यक्ष महिलाएं रहेंगी। नोटिस बोर्ड पर इनके नाम प्रदर्शित किए जाएंगे। शिकायत पेटियां और कंट्रोल रूम की व्यवस्था शिकायत पेटियां भी रहेंगी। कॉल सेंटर और कंट्रोल रूम की स्थापनी की गई है जिस पर श्रमिक शिकायत कर सकते हैं। डीएम ने कहा कि वह खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगी। उन्होंने कहा कि कोई शिकायत है तो हमेशा शासन-प्रशासन साथ है। लेकिन हिंसा कोई जवाब नहीं है। डीएम मेधा रूपम ने शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की और श्रमिकों की मांगों को स्वीकार करने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। वेतन में कितना इजाफा आंदोलन के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है और संशोधित दरें एक अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को अब 11,313 रुपये प्रति माह के बजाय 13,690 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी। अन्य नगर निगम क्षेत्रों में संशोधित मासिक वेतन अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किया गया है। शेष जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये प्रतिमाह, अर्धकुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। 20 हजार सैलरी वाली बात झूठी सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन खबरों को 'फर्जी और भ्रामक' करार दिया, जिनमें दावा किया गया था कि श्रमिकों के लिए 20,000 रुपये प्रतिमाह की समान न्यूनतम मजदूरी तय कर दी गई है। सरकार ने कहा कि नई श्रम संहिताओं के तहत राष्ट्रीय स्तर पर 'आधारभूत वेतन' तय करने की प्रक्रिया केंद्र के स्तर पर जारी है और इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। गौरतलब है कि प्रदर्शन के दौरान कई कर्मचारी यह कहते हुए सुने गए कि सरकार ने उनका न्यूनतम वेतन 20 हजार कर दिया है, लेकिन फैक्ट्री मालिक इजाफा नहीं कर रहे हैं।

हेल्पलाइन 1912 बनी विद्युत उपभोक्ताओं का संबल, 2025-26 में 99% शिकायतों का हुआ निस्तारण

हेल्पलाइन 1912 बनी विद्युत उपभोक्ताओं का संबल, 2025-26 में करीब 99% शिकायतों का निस्तारण उपभोक्ताओं की शिकायतें समयबद्ध तरीके से निस्तारित करने के निर्देश लखनऊ  योगी सरकार उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर लगातार सक्रिय है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का समयबद्ध और संतोषजनक निस्तारण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। वहीं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन (यूपीपीसीएल) हेल्पलाइन 1912 ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 98.88% शिकायतों का समाधान किया है। इसके साथ ही यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने जिम्मेदार अधिकारियों को 1912 की निरंतर समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। समाधान होने तक बंद नहीं होगी कोई शिकायत दरअसल उपभोक्ताओं की समस्याओं के तुरंत निस्तारण के लिए उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन प्रबंधन लगातार संवेदनशील है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं पावर कारपोरेशन अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल समीक्षा बैठक में इस बात पर जोर दिया कि 1912 की निरंतर समीक्षा हर अधिकारी अपने स्तर पर सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिया कि उपभोक्ताओं की जो भी शिकायतें आ रहीं हैं, उनको समयबद्ध तरीके से निस्तारित किया जाए। साथ ही कॉल को तब तक समाप्त न माना जाए जब तक उपभोक्ता संतुष्ट न हो जाए।  समस्याओं के निस्तारण के लिए 1912 पर सूचना दें उपभोक्ता इसी तरह स्मार्ट मीटर के संदर्भ में 1912 पर विशेष व्यवस्था बनाई गई है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रतिदिन वह मानीटिंग करें और स्मार्ट मीटर के संदर्भ में आने वाली शिकायतों का तत्काल निस्तारण करें। इस संबंध में डॉ. गोयल ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि इसमें किसी भी तरह की लापरवाही की शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही डॉ. गोयल ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि अपनी समस्याओं के बारे में 1912 पर सूचना दें। उनकी समस्याओं का निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। बिल रिवीजन की 8,68,690 शिकायतों का निस्तारण  हेल्पलाइन 1912 पर आने वाली शिकायतों पर नजर डाले तो 1 अप्रैल 2025 से 11 अप्रैल 2026 तक सभी डिस्कॉम में कुल 95,11,309 शिकायतें आई थी। जिसमें से 94,04,660 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। यह सभी शिकायतें डीवीवीएनएल, एमवीवीएनएल, पीयूवीवीएनएल, पीवीवीएनएल और केस्को डिस्कॉम में दर्ज की गई है। बिल रिवीजन को लेकर साल भर में कुल 8,87,131 शिकायतें आई, जिसमें से 8,68,690 शिकायतों का निस्तारण किया गया है। अलग-अलग श्रेणी की शिकायतों का तेजी से समाधान इसी तरह मीटर से जुड़ी शिकायत भी काफी संख्या में आई थी। आंकड़ों की नजर से देखे तो 13,80,039 शिकायतें आई थी, जिसमें से 13,52,360 शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। स्मार्ट मीटर/प्री-पेड से जुड़ी कुल 2,32,424 शिकायतें दर्ज की गई थी, जिसमें से 2,28,943 शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। इसमें मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एमवीवीएनएल) में स्मार्ट मीटर से जुड़ी 59,488 शिकायतें आई थी। जिसमें से 58,954 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। जबकि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) डिस्कॉम में कुल 56,463 शिकायतें आई थी। जिसमें से 54,832 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। ट्रांसफार्मर, भुगतान और नए कनेक्शन से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान वहीं डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर से जुड़ी कुल 3,00,718 शिकायतें दर्ज की गई थी। जिसमें से 3,00,492 शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। ऐसे ही भुगतान से जुड़ी कुल 1,94,926 शिकायतें आईं थीं, जिसमें से 1,78,637 शिकायतों का समाधान करके बंद कर दिया गया है। नए कनेक्शन से जुड़ी कुल 52,029 शिकायतें आईं थीं। इसमें से 49,591 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। इसी तरह विद्युत आपूर्ति से जुड़ी 54,88,834 शिकायतें आईं थीं, जिसमें से 54,82,015 शिकायतों का समाधान कर लिया गया है।

UPSC की मंजूरी के बाद DPC बैठक जल्द, HPS अफसरों को मिलेगा IPS काडर

 पंचकूला  हरियाणा पुलिस सेवा (एचपीएस) के 22 अधिकारी जल्द ही भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) में शामिल होंगे। एचपीएस अधिकारियों को आइपीएस बनाने के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगले सप्ताह विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक होगी। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अनुरोध पर यह बैठक चंडीगढ़ में किए जाने स्वीकृति दे दी है। प्रदेश में लंबे समय से एचपीएस अफसरों को आइपीएस काडर में पदोन्नति की प्रक्रिया लंबित चल रही है। करीब दो महीने पहले मुख्य सचिव ने 22 एचपीएस अफसरों को इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट जारी किया था। हालांकि, मुख्य सचिव रस्तोगी का स्वास्थ्य खराब होने से डीपीसी की बैठक नहीं हो पाई। अब खुद मुख्य सचिव ने यूपीएससी से जल्द बैठक का आग्रह किया है। हालांकि उन्होंने बैठक दिल्ली के बजाए चंडीगढ़ में करने का अनुरोध किया है। सचिव सहित कुछ नामित व्यक्ति चुने जाते हैं मुख्य सचिव की ओर से कहा गया है कि अभी वह स्वास्थ्य कारणों से यात्रा करने में सक्षम नहीं है ऐसे में यदि डीपीसी चंडीगढ़ में हो तो बेहतर रहेगा। इस पर यूपीएससी ने अपनी सहमति जता दी है। बैठक में आयोग की ओर से सचिव सहित कुछ नामित सदस्य आते हैं, जिसमें मुख्य सचिव और गृह सचिव सुधीर राजपाल मौजूद रहेंगे। दो साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में 13 एचपीएस के प्रमोशन की फाइल की मंजूरी मिली थी। तब गृह विभाग की ओर से तैयार की गई फाइल को तत्कालीन मुख्य सचिव संजीव कौशल ने आपत्ति जताते हुए वापस भेज दिया था। उस समय कई एचपीएस अफसरों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट ही पूरी नहीं थी। इस कारण उनके इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट जारी नहीं हो सके। अब यह प्रक्रिया दोबारा शुरू होने जा रही है।

Haryana Police Recruitment: PMT 20 अप्रैल से शुरू, एडमिट कार्ड 17 अप्रैल को डाउनलोड करें

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने 5500 कॉन्स्टेबल भर्ती के लिए फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट (PMT) की घोषणा कर दी है। यह प्रक्रिया 20 अप्रैल से पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में शुरू हो रही है। एडमिट कार्ड 17 अप्रैल को जारी किए जाएंगे। शुरुआत में, पहले हफ्ते तक हर रोज लगभग एक हजार कैंडिडेट्स को बुलाया जाएगा, और उसके बाद प्रतिदिन 3 हजार तक कैंडिडेट्स बुलाए जाएंगे। सुबह 6:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। भर्ती प्रक्रिया के लिए कमीशन ने कंपनियों के साथ समझौता किया है। युवाओं की हाइट और चेस्ट मापने के लिए कमीशन ने जर्मनी से 25 मशीनें मंगवाई हैं। बताया जा रहा है कि मशीनों में सेंसर लगे हुए हैं। अगर किसी ने एड़ी उठाई, तो स्क्रीन पर जीरो आ जाएगा। ऐसे में कोई भी कैंडिडेट चालाकी नहीं कर पाएगा। इस भर्ती के लिए 2.70 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भरे हैं। रोडवेज बसें करेंगी पिक एंड ड्रॉप पंचकूला पहुंचने वाले कैंडिडेट्स के पिक एंड ड्रॉप सुविधा के लिए चंडीगढ़ व पंचकूला रोडवेज डिपो से 5-5 बसें मांगी गई हैं। जो जीरकपुर व पंचकूला-चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से स्टेडियम के बीच चलेंगी। वहीं प्रदेशभर के डिपो से भी इन दिनों चंडीगढ़ के लिए चलने वाली बसों को वाया पंचकूला करने का आग्रह किया गया है। स्टेडियम पर मैनेजमेंट के लिए पंचकूला डिपो से 4 इंस्पेक्टर/सब-इंस्पेक्टर तथा चंडीगढ़ डिपो से 2 इंस्पेक्टर/सब-इंस्पेक्टर की ड्यूटी लगाई जाएगी। खाना उलपब्ध करवाने की तैयारी पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम में बॉस्केटबॉल और वॉलीबॉल हॉल के साथ-साथ लंबे टेस्ट शेड्यूल के लिए खेल विभाग से कोच भी मांगे गए हैं ताकि ड्यूटी दी जा सके। इसके अलावा, दूसरे विभागों से भी कोच मांगे गए हैं, जिनकी ड्यूटी टेस्ट प्रक्रिया के दौरान स्टेडियम में रहेगी।कमीशन की ओर से सामाजिक संस्थाओं से संपर्क किया जा रहा है, ताकि प्रदेशभर से आने वाले कैंडिडेट्स को स्टेडियम के बाहर ही खाना-नाश्ता उपलब्ध करवाया जा सके। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि युवाओं के लिए बाहर कितनी संस्थाएं कैंप लगाएंगी। फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट की प्रक्रिया के दौरान कमीशन का एक सदस्य हर समय मौके पर मौजूद रहेगा। यदि किसी उम्मीदवार को कोई दिक्कत होती है या कोई समस्या बताई जाती है, तो उसका तुरंत समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।

28199 किसानों से 12 लाख 52 हजार 470 क्विंटल गेहूँ की खरीदी : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक 28 हज़ार 199 किसानों से 12 लाख 52 हजार 470 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 10 करोड़ 23 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 9 अप्रैल से शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि शेष संभागों में 15 अप्रैल से गेहूँ का उपार्जन शुरू किया जायेगा। अभी तक 2 लाख 35 हजार 177 किसानों द्वारा 1 करोड़ 3 लाख 90 हजार 280 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। गेहूँ खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूं में से 7 लाख 69 हजार 720 क्विंटल गेहूं का परिवहन किया जा चुका है। प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।