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Haryana News: इंडस्ट्रियल प्लॉट केस में भूपेंद्र हुड्डा पर कसा शिकंजा, जांच तेज

पंचकूला. हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। CLP लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में उनके खिलाफ केस चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, यह मामला औद्योगिक प्लॉट के आवंटन से जुड़ा हुआ है, जिसमें अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। अब इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है और केस चलाने की अनुमति मिल गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में HUDA (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) के दो अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की आगे की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में ईडी की अभियोग शिकायत में हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया गया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि उसने अवैध आवंटन की वास्तव में योजना बनाई और चयनित आवंटियों के हित में पात्रता मानदंडों में बदलाव किया। आरोपी आवंटियों को हुडा से जोड़ते हुए, ईडी ने कहा कि रेनू हुड्डा और नंदिता हुड्डा उनके पैतृक गांव सांघी की रहने वाली थी। कंवर प्रीत सिंह संधू उनके सहपाठी डीडी संधू के बेटे थे। मोना बेरी उनके ओएसडी बलदेव राज बेरी की बहू थी। डॉ. गणेश दत्त रतन उनके साथ टेनिस खेलते थे और प्रदीप कुमार उनके निजी सचिव सिंह राम के बेटे थे। ईडी ने आगे दावा किया कि आवंटन पाने वाले अशोक वर्मा के ससुर, अशोक काका, कांग्रेस शासन के दौरान एचएएफईडी के अध्यक्ष थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। अमन गुप्ता के पिता रमेश गुप्ता थानेसर के पूर्व विधायक थे और हुड्डा से अच्छी तरह परिचित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल ओपी दहिया (रिटायर) पूर्व कांग्रेस विधायक करण दलाल के रिश्तेदार हैं। डागर कात्याल के पिता सुनील कात्याल हरियाणा सेवा अधिकार आयोग में आयुक्त रह चुके थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। मनजोत कौर न्यायमूर्ति एमएस सुल्लर (रिटायर) की बहू हैं, जो हुड्डा की परिचित थी। सिद्धार्थ भारद्वाज के पिता संजीव भारद्वाज 2004 में एचपीसीसी सचिव थे, 2005 में पार्टी छोड़ दी और 2016 में फिर से पार्टी में शामिल हो गए।

सैदा गोदाम में पीडीएस चावल चोरी का बड़ा खुलासा, प्रबंधन और ट्रांसपोर्टर पर मिली भगत के गंभीर आरोप

सैदा गोदाम में पीडीएस चावल चोरी का बड़ा खुलासा, प्रबंधन और ट्रांसपोर्टर पर मिली भगत के गंभीर आरोप   सकरी   सैदा क्षेत्र के शासकीय गोदाम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के लिए आने वाले चावल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और चोरी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यह अवैध गतिविधि कोई एक-दो दिन की नहीं, बल्कि विगत कई वर्षों से लगातार संचालित हो रही है, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, नियम स्पष्ट है कि गोदाम में चावल का भंडारण होने के बाद उसे सीधे उचित मूल्य दुकानों तक पहुंचाया जाना चाहिए। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। आरोप है कि चावल से भरी गाड़ियों को रात के समय जानबूझकर सुनसान स्थानों, पेट्रोल पंपों या अंधेरे इलाकों में खड़ा किया जाता है, जहां से धीरे-धीरे चावल की चोरी कर ली जाती है। इस पूरे मामले में “लेवर मजदूरों” का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है, जबकि स्थानीय दुकानदारों का मानना है कि यह एक संगठित और सुनियोजित गोरखधंधा है। इसमें बाहर से आए कुछ  ड्राइवरों  की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जो इस अवैध गतिविधि हिस्सा बनकर के जरिए तेजी से लाभ कमा रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि हर महीने स्टॉक मिलान के दौरान 1से2 क्विंटल चावल कम निकलता है जिससे स्टेज (स्टॉक घाटा) बन जाता है नियम के दबाव के घाटे की भरपाई दुकानदारो को अपनी जेब से करनी पड़ती है जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही इस गोरखधंधे पर लगाम लग पाई। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है? उठ रहे बड़े सवाल: क्या गोदाम प्रबंधन इस पूरे मामले में शामिल है? ट्रांसपोर्टरों की भूमिका कितनी संदिग्ध है? संबंधित अधिकारी क्यों चुप्पी साधे हुए हैं? वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्थानीय दुकानदारों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि गरीबों के हक का अनाज खुलेआम लूटा जा रहा है और जिम्मेदार लोग मूकदर्शक बने हुए हैं। दुकानदारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके और पीडीएस प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वर्षों से चल रहे इस कथित घोटाले पर कोई निर्णायक कार्रवाई हो पाती है या नहीं।

Bank Fire News: शॉर्ट सर्किट से लगी आग, जिला सहकारी बैंक के जरूरी रिकॉर्ड नष्ट

बालोद. छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आज सुबह जिला सहकारी बैंक में आग लगने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में कंप्यूटर सिस्टम, कैश काउंटर और जरूरी दस्तावेज जलकर खाक हो गईं। समय रहते कैश को सुरक्षित बचा लिए गए। यह घटना गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम ओटेबंद स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग की शाखा की है। जानकारी के मुताबिक, बैंक की छत पर बंदरों का झुंड उछल-कूद कर रहा था। इसी दौरान बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे बैंक में आग भड़क उठी। आग लगते ही स्थानीय ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। वहीं सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया गया। गुंडरदेही पुलिस के अनुसार, आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। फिलहाल नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। फायर ब्रिगेड ने आग पर पाया काबू इसी दौरान बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे आग भड़क उठी। आग लगते ही स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया गया। मामले की जांच की जाएगी गुंडरदेही पुलिस के अनुसार, आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। फिलहाल नुकसान का आंकलन किया जा रहा है, जिसके बाद ही कुल क्षति स्पष्ट हो पाएगी।

Punjab Assembly Update: बेअदबी के खिलाफ नया कानून, स्पीकर कुलतार संधवां ने बढ़ाया कदम

पटियाला/समना. पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां आज समना में चल रहे धर्म युद्ध मोर्चा में पहुंचे। इस मौके उन्होंने गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी को लेकर नए प्रस्तावित बिल के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह गुरु का कानून है जिसका संदेश पूरी दुनिया से अलग है। यह संदेश सभी का सम्मान करने की शिक्षा देता है। संधवां ने कहा कि उन्होंने यहां अपने पिछले दौरे में कहा था कि वह सरकारी बिल की कापी लेकर आएंगे और उन्होंने आज यह वादा पूर्ण किया है। बहरहाल धर्म युद्ध मोर्चा के संयोजकों का कहना है कि जब तक इस बिल को राज्यपाल से स्वीकृति नहीं मिल जाती, तब तक टावर पर चढ़े बाबा गुरजीत सिंह फौजी नीचे नहीं उतरेंगे और यह मोर्चा जारी रहेगा। न्याय और रोकथाम के प्रति प्रतिबद्धता बेअदबी के संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए संधवां ने कहा कि पिछली घटनाओं ने सिख संगत के मन में गहरा दुख पैदा किया है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार दोषियों को सजा दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है।” जांच की स्थिति स्पीकर ने बताया कि: लगभग सभी मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। एक मामले को छोड़कर बाकी सभी में चालान अदालत में पेश किए जा चुके हैं। मामले अब न्यायालय में विचाराधीन हैं। आलोचकों को जवाब एसजीपीसी द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर पूछे जाने पर संधवां ने कहा कि अतीत में इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उनके पास पर्याप्त अवसर थे। उन्होंने कहा कि जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान न्याय नहीं दिलाया, उन्हें अब मौजूदा प्रयासों में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। एकता की अपील अंत में, स्पीकर ने आशा व्यक्त की कि पंजाब विधानसभा के सभी सदस्य, पार्टी लाइन से ऊपर उठकर, इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कानून आपसी भाईचारे, शांति और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बिहार में सम्राट चौधरी होंगे अगले सीएम, बीजेपी ने चुना विधायक दल का नेता, कल शपथ ग्रहण समारोह

पटना बिहार की राजनीति के लिए 14 अप्रैल 2026 का दिन ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना है. करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार के बाद  सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो चुका है. शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को होने जा रहा है. राजनीति के जानकारों की नजर में भाजपा के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि बिहार में लंबे समय बाद वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होगी. स्पष्ट है कि इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच बिहार की बदलती सियासी तस्वीर में सम्राट चौधरी एक बेहद अहम चेहरा बनकर उभरे हैं।  सम्राट चौधरी होंगे बिहार के अगले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ही बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे. उन्हें ​बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है. पटना में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में हुई बीजेपी विधानमंडल की बैठक में विजय सिन्हा, मंगल पांडे और दिलीप जायसवाल ने भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा. सम्राट चौधरी थोड़ी देर में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन से मुलाकात करेंगे और सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।  बिहार में अब नई सरकार काम करेगी- नीतीश कुमार उन्होंने आगे कहा, 'इन दिनों काम को और आगे बढ़ाया गया है. अगले पांच वर्षों यानि 2025 से 2030 के लिए 7 निश्चय-3 का गठन किया गया है. इससे और ज्यादा काम होगा जिससे बिहार काफी आगे बढ़ेगा. बिहार के विकास में केन्द्र का भी पूरा सहयोग मिल रहा है. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नमन करते हैं. बिहार और तेजी से विकसित होगा और देश के टॉप राज्यों में शामिल हो जाएगा तथा देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा. हमने बिहार के लोगों के लिए बहुत काम किया है. इतने दिनों से हमने लगातार लोगों की सेवा की है. हमने तय किया था कि अब मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे और इसलिए आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद माननीय राज्यपाल से मिलकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया. अब नई सरकार यहां का काम देखेगी. नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा. आगे भी बहुत अच्छा काम होगा तथा बिहार बहुत आगे बढ़ेगा. सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं तथा शुभकामनाएं देता हूं।  हमने बिहार के लोगों के लिए बहुत काम किया- नीतीश कुमार नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ बिहार में एक राजनीतिक युग का अंत हो गया है. उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं. इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने X पर एक पोस्ट में अपने कार्यकाल की उप​लब्धियों का जिक्र किया. उन्होंने लिखा, 'आप जानते हैं कि 24 नवंबर, 2005 को राज्य में पहली बार एनडीए सरकार बनी थी. तब से राज्य में कानून का राज है और हम लगातार विकास के काम में लगे हुए हैं. सरकार ने शुरू से ही सभी तबकों का विकास किया है चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, अपर कास्ट हो, पिछड़ा हो, अति पिछड़ा हो, दलित हो, महादलित हो- सभी के लिए काम किया गया है. हर क्षेत्र में काम हुआ है चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सड़क हो, बिजली हो, कृषि हो. महिलाओं एवं युवाओं के लिए भी बहुत काम किया गया है।  बता दें कि कभी राजद और जदयू के सिपाही रहे सम्राट आज भाजपा के उस ‘किंग’ की भूमिका में नजर आएंगे, जिन्होंने नीतीश कुमार के साथ सत्ता की साझेदारी में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है।  विरासत और शुरुआती संघर्ष सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे. सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और महज 31 साल की उम्र में 1999 में कृषि मंत्री बनकर अपनी धमक दिखाई. परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से उनकी जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में स्थापित कर दिया। राजनीतिक करियर की मुख्य उपलब्धियां     19 मई 1999: बिहार सरकार में कृषि मंत्री के पद की शपथ ली.     2000-2010: परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव लड़ा और जीता.     2010: बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के मुख्य सचेतक बनाए गए.     2 जून 2014: शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री पद की शपथ ली. बदलता राजनीतिक पाला और भाजपा में उदय इसके बाद सम्राट चौधरी ने भाजपा का रास्ता चुना. राजद और जदयू में रहने के बाद सम्राट चौधरी का भाजपा में शामिल होना उनके करियर का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ. वर्ष 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया. उन्होंने विधान परिषद में भी विरोधी दल के नेता की भूमिका निभाई. 2023 के मार्च महीने में वे भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए, जो इस बात का संकेत था कि आलाकमान उन पर बड़ा दांव खेलने जा रहा है. फिर जनवरी 2024 में उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया गया. इसके बाद दुबारा 20 नवंबर 2025 को उन्होंने फिर से डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।  मुरैठा (पगड़ी) की प्रतिज्ञा बता दें कि भाजपा में आने के बाद शुरुआती दौर में वह नीतीश कुमार के विरोधी नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर नहीं करेंगे, वे अपनी पगड़ी नहीं खोलेंगे. हालांकि, बदलते समीकरणों के साथ वे आज नीतीश सरकार में ही डिप्टी सीएम की भूमिका निभाते रहे हैं.सम्राट चौधीरी ने जब नीतीश कुमार को हटाने का संकल्प लिया था और मुरेठा नहीं उतारने का वचन लिया था तो वह काफी चर्चा में रहे थे।  मौजूदा दौर की राजनीति में क्यों हैं खास? बता दें कि सम्राट चौधरी लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण के ‘कुश’ समुदाय से आते हैं. भाजपा उनके जरिए बिहार के एक बड़े पिछड़ा वर्ग वोट बैंक को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है. वे विपक्ष और सहयोगियों, दोनों के सामने अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते हैं।  सत्ता में दोहरा कार्यकाल यहां यह भी बता दें कि पहली बार जनवरी 2024 और फिर 20 नवंबर 2025 को दोबारा डिप्टी सीएम बने थे. भाजपा की राजनीति की दृष्टि से देखिये तो यह दर्शाता है कि भाजपा के भीतर और … Read more

झारखंड बोर्ड 11वीं का रिजल्ट जारी, 3.55 लाख छात्र सफल

रांची झारखंड अकैडमिक काउंसिल (JAC) ने आज कक्षा 11वीं परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल कुल 3,58,533 स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 3,55,399 छात्र पास हो गए. जैक बोर्ड 11वी कक्षा का पासिंग प्रतिशत 99.12% रहा. झारखंड के स्टूडेंट्स ने किया शानदार प्रदर्शन झारखंड बोर्ड के अनुसार, इस साल सभी प्रमंडलों और जिलों में स्टूडेंट्स का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा. कुल 3,61,683 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 3,58,533 परीक्षा में शामिल हुए. कैसे देखें JAC 11वीं रिजल्ट?     सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट jacresults.com पर जाएं     होम पेज पर “JAC 11th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें     अपना रोल नंबर और रोल कोड डालें     सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिख जाएगा     इसे डाउनलोड करें और प्रिंट निकाल लें 3 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने किया था अप्लाई परिषद के अनुसार, इस साल सभी प्रमंडलों और जिलों में छात्रों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा. कुल 3,61,683 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 3,58,533 परीक्षा में शामिल हुए. JAC अध्यक्ष ने स्कूल, शिक्षक और स्टूडेंट्स को दी बधाई रिजल्ट जारी करते हुए अध्यक्ष डॉ. नटवा हंसदा ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को बधाई दी. उन्होंने परीक्षा को सफलतापूर्वक आयोजित कराने में जुटे जिला शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की. साथ ही जो छात्र सफल नहीं हो सके, उनसे अगली बार बेहतर प्रदर्शन करने की अपील भी की. फरवरी में हुई थी परीक्षा यह परीक्षा 25 से 28 फरवरी 2026 के बीच राज्यभर में आयोजित की गई थी. रिजल्ट की घोषणा रांची स्थित परिषद मुख्यालय में जैक के अध्यक्ष की मौजूदगी में की गई, जहां सचिव, परीक्षा नियंत्रक और वरिष्ठ सूचना अधिकारी भी मौजूद रहे.

विरासत का सम्मान : विश्व धरोहर दिवस पर बागपत से शुरू होगी पहली हेरिटेज ट्रेल

'श्री कृष्ण की लीला और पांडवों के पराक्रम' की देखिए अमिट छाप विरासत का सम्मान : विश्व धरोहर दिवस पर बागपत से शुरू होगी पहली हेरिटेज ट्रेल चार हजार वर्ष पुरानी सभ्यता से परिचित होने का मिलेगा मौका प्रदेश को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक विरासत से वैश्विक पहचान दिलाने में योगी सरकार का बड़ा कदम द्वापर युग के ऐतिहासिक स्थलों को देख सकेंगे देश-विदेश के पर्यटक बरनावा, सिनौली, लाक्षागृह से लेकर प्राचीन धार्मिक स्थलों तक जोड़ी जाएगी ऐतिहासिक श्रृंखला युवाओं को गाइड, गांवों को होमस्टे और स्थानीय व्यंजनों को मिलेगा बढ़ावा लखनऊ ‘श्री कृष्ण की लीला और पांडवों के पराक्रम’ की कहानी आप सभी ने सुनी होगी। अब इसकी अमिट छाप भी देख सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर देश दुनिया के लिए विश्व धरोहर दिवस पर 18 अप्रैल को बागपत से हेरिटेज ट्रेल शुरू की जा रही है। यहां द्वापर युग के ऐतिहासिक स्थलों से देश-विदेश के पर्यटक परिचित हो सकेंगे। इसके अंतर्गत बरनावा, सिनौली, लाक्षागृह से लेकर प्राचीन धार्मिक स्थलों तक ऐतिहासिक श्रृंखला जोड़ी जा रही है। इसकी एक और खास बात है कि युवाओं को यहां गाइड, गांवों को होमस्टे और स्थानीय व्यंजनों को योगी सरकार बढ़ावा भी देने जा रही है। हेरिटेज ट्रेल के माध्यम से पर्यटक बरनावा स्थित लाक्षागृह और पांडवकाल की गुफाओं जैसे स्थलों का अवलोकन कर सकेंगे, जहां महाभारतकालीन इतिहास और उस दौरान के कई प्रसंगों की अमिट छाप देखी जा सकेगी। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक 4000 वर्ष पुरानी सभ्यता के बारे में जान सकेंगे और इतिहास के अनदेखे पहलुओं को देखकर अभिभूत होंगे। महाभारत से जुड़ा है बागपत का गौरवशाली संबंध बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मांगे गए पांच गांवों में से एक गांव वर्तमान बागपत जिले के बरनावा क्षेत्र में माना जाता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है तथा इसे हेरिटेज ट्रेल का प्रमुख केंद्र बनाया गया है। हेरिटेज ट्रेल में बरनावा का लाक्षागृह, सिनौली पुरातात्विक स्थल, खंडवारी के प्राचीन अवशेष, पुरा महादेव मंदिर, जोहड़ी मंदिर परिसर, बरौत का ऐतिहासिक क्षेत्र, त्रिलोक तीर्थ धाम तथा यमुना तट के प्राचीन अवशेषों को शामिल किया गया है। बागपत के सिनौली में प्राचीन रथ, तलवार और ढाल मिले हैं, जिनका विशेष पौराणिक महत्व है। युवाओं को मिलेगा रोजगार, गांवों में विकसित होंगे होमस्टे हेरिटेज ट्रेल के तहत स्थानीय युवाओं को पर्यटन गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही गांवों में होमस्टे विकसित कर स्थानीय भोजन, लोक संस्कृति और पारंपरिक आतिथ्य को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पारंपरिक कलाओं को मिलेगा मंच इस पहल के अंतर्गत पॉटरी, पीतरा ड्यूरा, ब्लॉक प्रिंटिंग, इत्र निर्माण सहित पारंपरिक एवं लुप्तप्राय कलाओं की कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण भी होगा। विरासत बनेगी नई पहचान बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि हेरिटेज ट्रेल के माध्यम से बागपत को एक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा। हेरिटेज वॉक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के जरिए जिले की विरासत को नई पहचान दी जाएगी तथा लोगों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना मजबूत होगी।

हरियाणा का नया प्लान: बैंक्वेट हॉल से लेकर गार्डन तक, एक ही जगह पूरी शादी की व्यवस्था

गुरुग्राम हरियाणा के गुरुग्राम में वेडिंग सिटी विकसित करने की तैयार शुरू हो चुकी है। इसके लिए एचएसआईआईडीसी के प्लानिंग विंग की ओर से फाजिलवास गांव की 186 एकड़ जमीन की पहचान की गई है। मुख्यालय इस परियोजना पर काम कर रहा है। हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) की योजना के मुताबिक इन वेडिंग सिटी में सगाई से लेकर विदाई तक की सभी रस्मों के लिए एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसमें बैंक्वेट हॉल, ओपन गार्डन, कैटरिंग जोन, डेकोरेशन सेवाएं, गेस्ट हाउस, ट्रांसपोर्ट, शापिंग एरिया और मनोरंजन जोन शामिल होंगे। शादी से जुड़े हर कार्यक्रम एक ही परिसर में हो सकेगा। अधिकारियों ने कहा कि अभी गुरुग्राम में ग्लोबल सिटी विकसित किया जा रहा है। इसके बाद विजन सिटी परियोजना पर काम शुरू होगा। इसके साथ वेडिंग सिटी की तैयारियों को लेकर काम किया जा रहा है। रोजगार के अवसर पैदा होंगे एचएसआईआईडीसी प्रबंध निदेशक सुशील सरवन ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य शादी जैसे बड़े आयोजनों को एक ही स्थान पर सुव्यवस्थित करना है। इससे स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देना और रोजगार के नये अवसर पैदा करेगा। लोगों को अपने ही राज्य में डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए रोके रखना है। यह वेडिंग सिटी वोकल फार लोकल की अवधारणा को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएंगे, ताकि राज्य की संस्कृति को बढ़ावा मिल सके। गुरुग्राम के अलावा खरखौदा और पिंजौर में भी वेडिंग सिटी विकसित किया जाएगा। कारोबार को बढ़ावा मिलेगा वेडिंग सिटी विकसित होने से वोकल फार लोकल को सीधा लाभ मिलेगा। इसमें स्थानीय कारीगरों, बुटीक, ज्वेलर्स और सजावट को स्थायी बाजार मिलेगा। छोटे व्यापारियों को बड़े आयोजनों से जुड़ने का मौका मिलेगा। इनमें हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। इवेंट मैनेजमेंट, होटल, ट्रांसपोर्ट और फूड सेक्टर में नौकरियां बढ़ेंगी। स्थानीय युवाओं को कौशल विकास के अवसर मिलेंगे। गुरुग्राम को पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना अधिक होगा। इससे स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

झारखंड भर्ती घोटाल,166 गिरफ्तार, करोड़ों की उगाही का खुलासा

रांची झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा (Jharkhand Excise Constable Recruitment Examination) पास कराने के नाम पर सॉल्वर गैंग ने अभ्यर्थियों से 10-10 लाख रुपये में डील की थी। इसके तहत हर अभ्यर्थी से एडवांस के तौर पर तीन लाख रुपये भी वसूले गए थे। साथ ही परीक्षा पास करने के बाद बाकी के सात लाख रुपये लिए जाने थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने सोमवार को रांची पुलिस की पूछताछ में यह खुलासा किया। पुलिस द्वारा पूछताछ के बाद रांची के तमाड़ से गिरफ्तार 164 आरोपियों समेत 166 को जेल भेज दिया गया। इस मामले में अब तक कुल 179 के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि सॉल्वर गैंग ने 159 अभ्यर्थियों से तीन-तीन लाख रुपये के हिसाब से 4.77 करोड़ रुपये की उगाही की थी। इसके अलावा कई और अहम जानकारी सामने आई है। यह भी पता चला कि तमाड़ के रणगांव से सात किमी की दूरी पर स्थित अर्द्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज में अभ्यर्थियों को लाने के लिए गैंग ने वाहनों का भी इंतजाम किया था। इधर, पुलिस टीम सॉल्वर गैंग के अन्य गुर्गों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस को प्रश्न पत्र के उत्तर रटवाने की सूचना मिली थी बता दें कि, पुलिस को उत्पाद सिपाही परीक्षा के प्रश्न पत्र के उत्तर रटवाने की सूचना मिली थी, जिसके बाद रविवार सुबह रणगांव में छापेमारी कर गिरोह के 5 सदस्यों समेत 159 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया था। इस दौरान डिजिटल समेत कई साक्ष्य मिले थे। हालांकि, बाद में जेएसएससी ने मीडिया को जानकारी दी थी कि प्रश्न पत्र के मिलान में कुछ प्रश्न ही आंशिक रूप से मिले। अर्द्धनिर्मित भवन के मालिक व ठेकेदार भी मिले हुए थे पुलिस जांच में सॉल्वर गैंग के साथ तमाड़ नर्सिंग कॉलेज का निर्माण कर रहे ठेकेदार और मालिक की मिलीभगत पाई गई है। आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि ठेकेदार ने अर्द्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज में अभ्यर्थियों के ठहरने व खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की थी। इसके बदले गैंग के गुर्गों ने मोटी रकम भी दी थी। इसे लेकर एक महीने पहले ही ठेकेदार और गैंग में सौदा पक्का हुआ था। गिरफ्तार अभ्यर्थियों में 152 पुरुष, 7 महिलाएं इस मामले में अब तक 166 गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें 152 पुरुष और सात महिला अभ्यर्थी समेत गैंग के सात गुर्गे हैं। गिरोह के सदस्यों में तीन बिहार के और झारखंड के रामगढ़ निवासी आशीष कुमार, योगेश प्रसाद, रांची के रमीज अंसारी, रांची के ही अपर हटिया निवासी इल्फाज खान शामिल हैं।

प्रदेश में राइस मिल उद्योग संकट में, 700 मिलें बंद होने से बढ़ी चिंता!

 भोपाल  मध्य प्रदेश का राइस मिल उद्योग इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। प्रदेश की करीब 1200 राइस मिलों में से लगभग 700 मिलें बंद हो चुकी हैं या बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। मिलर्स का आरोप है कि सरकार द्वारा तय अपग्रेडेशन राशि, कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) और अन्य मदों की बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण उनकी आर्थिक हालत बिगड़ गई है। बैंक ऋण, बिजली बिल, मजदूरी और अन्य खर्चों का भार उठाना मुश्किल हो गया है, जिससे बड़ी संख्या में मिलर्स डिफाल्टर हो रहे हैं। बकाया भुगतान न मिलने से बढ़ा संकट मध्य प्रदेश चावल उद्योग महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2024-25 के धान अपग्रेडेशन (साफ-सफाई) का लगभग 170 करोड़ रुपये अब तक नहीं मिला है। इसके अलावा बारदाने की उपयोगिता व्यय, मिलिंग, परिवहन, हम्माली और अन्य खर्चों की करीब 30 करोड़ रुपये की राशि भी बकाया है। इस देरी ने मिलर्स की वित्तीय स्थिति को पूरी तरह कमजोर कर दिया है। सरकार से मुलाकात, समाधान का आश्वासन सोमवार को महासंघ के प्रतिनिधियों ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि मिलर्स के सुझावों और समस्याओं का परीक्षण कर उचित समाधान निकाला जाएगा। महासंघ ने ज्ञापन सौंपकर जल्द भुगतान की मांग की है। मिलिंग नीति और रेशो पर उठे सवाल महासंघ के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने बताया कि भारतीय खाद्य मंत्रालय की टेस्ट मिलिंग रिपोर्ट में चावल की झड़ती 67 प्रतिशत से कम और टूटन 25 प्रतिशत से अधिक पाई गई है। इसके बावजूद 67 प्रतिशत चावल जमा करने का नियम लागू है, जिससे मिलर्स को नुकसान हो रहा है। टूटे चावल को कम कीमत पर बेचना पड़ता है, जिसकी भरपाई के लिए अपग्रेडेशन राशि दी जानी थी, लेकिन वह भी नहीं मिली। मिलिंग में गिरावट, शासन को बढ़ता नुकसान वर्तमान स्थिति के चलते प्रदेश में मिलिंग कार्य प्रभावित हुआ है और अब तक केवल पांच प्रतिशत मिलिंग ही हो सकी है। मिलर्स की अनिच्छा के कारण वर्ष 2025-26 की धान मिलिंग भी प्रभावित होने की आशंका है। इससे शासन को हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ब्याज, भंडारण शुल्क और सूखत का नुकसान उठाना पड़ रहा है। धान के खराब होने का खतरा बढ़ा मिलिंग कार्य धीमा होने से ओपन कैप में रखी हजारों करोड़ रुपये की धान पर सड़ने का खतरा मंडरा रहा है। बारिश के मौसम में यह संकट और गहरा सकता है। इससे न केवल मिलर्स बल्कि शासन को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उद्योग बचाने के लिए जल्द निर्णय जरूरी महासंघ का कहना है कि यदि जल्द बकाया राशि का भुगतान और नीति में सुधार नहीं किया गया तो राइस मिल उद्योग पूरी तरह ठप हो सकता है। इससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।