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हाई ब्लड प्रेशर बना बड़ा खतरा, AIIMS विशेषज्ञ ने बताया हार्ट अटैक से बचने का आसान फॉर्मूला

नई दिल्ली  भारत का हर पांचवां वयस्क उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से पीड़ित है। शहरी क्षेत्र के हर तीसरे और ग्रामीण क्षेत्र के हर चौथे व्यक्ति को हाई बीपी है। देश में यह तेजी से बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है। यही वजह है कि यह तेजी से बढ़ती गैर-संचारी (संक्रामक) बीमारियों में शामिल है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-पांच (एनएफएचएस-पांच) के अनुसार देश में 15 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 24 प्रतिशत पुरुष और 21 प्रतिशत महिलाएं उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं। यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोगों को अपने उच्च रक्तचाप की जानकारी तक नहीं होती। दिल्ली जैसे महानगरों में बदलती जीवनशैली, तनाव, अधिक नमक व जंक फूड का सेवन, शारीरिक गतिविधि में कमी और मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं। 40 साल से अधिक उम्र के पुरुषों का खतरा अधिक दिल्ली पर आधारित हालिया अध्ययन में बड़ी संख्या में लोगों में प्री-हाइपरटेंशन और उच्च रक्तचाप के मामले सामने आए हैं, विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और पुरुषों में इसका खतरा अधिक पाया गया। एम्स के हृदय रोग विशेषज्ञ  डाॅ. ने बताया कि हर साल लाखों लोगों की जान लेने वाली यह बीमारी अधिकांशत: बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाती रहती है और ज्यादातर पीड़ित इससे अनजान रहते हैं। डाॅ.  के अनुसार भारत में 30 करोड़ से अधिक वयस्क हाई बीपी से पीड़ित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर चौथा और शहरी क्षेत्रों में हर तीसरा व्यक्ति हाई पीबी से प्रभावित है। हर साल करीब 16 लाख लोगों की जान इसके कारण जाती है। यह टीबी से होने वाली मौत से कई गुना अधिक है। डाॅके अनुसार यदि लोगों का ब्लड प्रेशर औसतन सिर्फ दो अंक भी कम हो जाए, तो हर साल एक लाख से 1.6 लाख तक मौतों को रोका जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140 से घटकर 138 हो जाए, तो इसे दो अंक (ब्लड प्रेशर नापने वाली इकाई एमएमएचजी) की कमी माना जाएगा। ऐसा होने पर देश में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी के मामलों में बड़ी गिरावट आ सकती है। दिल, दिमाग और किडनी पर भारी पड़ रहा हाई ब्लड प्रेशर अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता सामंथा ओ'कोनेल के मुताबिक, सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोगों में बीमारी के प्रति जागरूकता, इलाज और नियंत्रण, तीनों ही बेहद कमजोर हैं। यह समस्या केवल गरीब देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित देशों में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। आज हाइपरटेंशन हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का सबसे बड़ा कारण है। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ज्यादातर मामलों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। इंसान अंदर ही अंदर बीमार होता रहता है और उसे पता तब चलता है जब पानी सिर से ऊपर गुजर जाता है। यहां तक कि जांच के बाद भी इसे नियंत्रित करना आसान नहीं होता। कई बार डॉक्टर इलाज से जुड़े नवीनतम दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर पाते, जबकि मरीज नियमित रूप से दवाएं लेने और लंबे समय तक जीवनशैली में बदलाव बनाए रखने में संघर्ष करते हैं। अध्ययन में एक और चिंताजनक पहलु यह सामने आया है कि 2020 में दुनिया भर में हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित 20 फीसदी से भी कम लोगों का रक्तचाप नियंत्रित था। अमीर देशों में नियंत्रण की दर 40.2 फीसदी रही, जबकि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्थिति कहीं ज्यादा बदतर है, जहां महज 13.6 फीसदी मरीज ही इसे कंट्रोल कर पा रहे हैं। अध्ययन की वरिष्ठ शोधकर्ता कैथरीन मिल्स का कहना है भले ही इस दिशा में कुछ प्रगति हुई हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर रक्तचाप पर अभी भी बेहद कम नियंत्रण है। विडम्बना यह है कि प्रभावी दवाएं और इलाज मौजूद होने के बावजूद दुनिया इस बीमारी को काबू में नहीं कर पा रही। एशिया और अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित 119 देशों के 60 लाख से ज्यादा वयस्कों के आंकड़ों पर आधारित यह अध्ययन अब तक के सबसे व्यापक विश्लेषणों में से एक माना जा रहा है। नतीजे दर्शाते हैं कि 2020 तक दक्षिण अमेरिका, कैरिबियन और उप-सहारा अफ्रीका में हाइपरटेंशन की दर सबसे अधिक थी। वहीं कुल मरीजों की संख्या के लिहाज से पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र पहले स्थान पर रहे, जबकि दक्षिण एशिया दूसरे स्थान पर रहा। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कमजोर और समृद्ध देशों के बीच असमानता लगातार बढ़ रही है। 2000 में अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर वाले 70 फीसदी लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रह रहे थे, जो 2020 तक बढ़कर 83 फीसदी हो गए हैं। उच्च रक्तचाप से जूझ रहे हैं भारत में 30 फीसदी से ज्यादा वयस्क विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी रिपोर्ट 'ग्लोबल रिपोर्ट ऑन हाइपरटेंशन 2025' से पता चला है कि भारत में 21 करोड़ से ज्यादा वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। मतलब की देश की 30 फीसदी से ज्यादा वयस्क आबादी इस समस्या से जूझ रही है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि इनमें से महज 39 फीसदी (8.22 करोड़) ही जानते हैं कि वो इस समस्या से पीड़ित हैं, जबकि करीब 83 फीसदी मरीजों यानी 17.3 करोड़ से ज्यादा का रक्तचाप नियंत्रित नहीं है। मतलब कि देश में हाई ब्लड प्रेशर के 17 फीसदी मरीजों में ही रक्तचाप नियंत्रित है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इसपर किए अध्ययन में खुलासा किया है कि देश में करीब 34 फीसदी लोग प्री-हाइपरटेंशन का शिकार हैं। वहीं यदि देश में जिलों के आधार पर देखें तो यह आंकड़ा 15.6 फीसदी से 63.4 फीसदी दर्ज किया गया है। सच कहें तो देश में जिस तरह से खानपान की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है और जीवनशैली बदल रही है, उसके चलते स्वास्थ्य से जुड़ी अनगिनत समस्याएं पैदा हो रही हैं, ऊपर से तनाव यह सभी मिलकर भारतीयों को अंदर ही अंदर घुन की तरह खाए जा रहे हैं। कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता आर्थिक बोझ विशेषज्ञों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर अब महज स्वास्थ्य से जुड़ा संकट नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक चुनौती भी बनता जा रहा है। कमजोर देशों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पहले ही संक्रामक रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य … Read more

पूरी दुनिया में ठप पड़ा ChatGPT, यूजर्स के अटके काम; हिस्ट्री और लॉगिन में आ रही दिक्कत

नई दिल्ली OpenAI का AI चैटबॉट ChatGPT इस समय भारत समेत दुनिया भर में अचानक ठप हो गया। इस प्लेटफॉर्म के अचानक डाउन होने से हजारों यूजर्स प्रभावित हुए हैं। यूजर्स को लॉगिन, जवाब मिलने और पुरानी चैट को लोड करने में परेशानी आ रही, जिससे कई लोगों का काम बीच में ही रुक गया। ऑनलाइन आउटेज मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म Downdetector पर अमेरिका में 4,300 से अधिक यूजर्स ने AI प्लेटफॉर्म के साथ समस्याओं की सूचना दी है। वहीं, भारत में अब तक लगभग 470 शिकायतें दर्ज की गई हैं। लगभग 85%, लोगों ChatGPT का यूज करने में परेशानी हो रही है, जबकि 6 प्रतिशत ने लॉगिन में समस्या बताई है। शेष 6 प्रतिशत ने वेबसाइट के साथ समस्याओं की जानकारी दी है। शुक्रवार सुबह लगभग 8 बजे से ही यूजर्स को चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दफ्तर का काम कर रहे प्रोफेशनल्स, कोडिंग सीख रहे इंजीनियर्स और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र जैसे ही अपने सवालों के जवाब के लिए चैटजीपीटी पर गए, उन्हें केवल एक खाली स्क्रीन या फिर एरर मैसेज दिखाई देने लगे। डाउनडिटेक्टर के अनुसार, भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद से सबसे ज़्यादा शिकायतें मिलीं। चैटजीपीटी ठप होते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और लोगों ने अपनी-अपनी दिक्कतों को लेकर शिकायतों की बाढ़ ला दी। OpenAI ने भी माना है कि उनके सिस्टम में गड़बड़ी आई है। कंपनी ने अपने स्टेटस पेज पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ यूजर्स को बातचीत करने या जवाब पाने में दिक्कत हो सकती है। कंपनी ने बताया कि उन्होंने समस्या को कम करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और वे इस सुधार पर लगातार नजर रख रहे हैं। यूजर्स को हो रही ये परेशानी चैटजीपीटी डाउन होने पर यूजर्स को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है: जवाब नहीं मिल रहा और ऐप हो रहे क्रेश जब यूजर कोई सवाल टाइप कर रहा है तो चैटजीपीटी कोई जवाब नहीं दे रहा और स्क्रीन पर केवल ब्लिंक हुआ कर्सर या खाली जगह दिखाई दे रही है। एंड्रॉयड और आईफोन (iOS) दोनों के मोबाइल ऐप्स खुलते ही अपने आप बंद हो रहे हैं या हैंग हो जा रहे हैं। पुरानी चैट गायब और लॉगिन में समस्या स्क्रीन की बाईं तरफ (Left Side) जहां पुरानी सारी बातचीत और प्रोजेक्ट्स सेव रहते हैं, वह हिस्सा पूरी तरह खाली या सफेद दिखाई दे रहा है। कई यूजर्स अपने अकाउंट से अपने आप लॉगआउट हो गए हैं और जब वे दोबारा लॉगिन करने की कोशिश कर रहे हैं, तो पेज लोड ही नहीं हो रहा है। वहीं यूजर्स का चैटजीपीटी खुल तो रहा है, लेकिन वह इतना धीमा चल रहा है कि एक छोटा सा जवाब लिखने में भी कई मिनट लगा रहा है। चैटजीपीटी के बंद होने से उन यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशानी हुई जिनके रोज के काम इसी पर टिके हैं। चाहे पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स हों, दफ्तर में काम करने वाले प्रोफेशनल्स या फिर कंटेंट क्रिएटर्स सबके काम पर अचानक ब्रेक लग गया। इससे यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि अब एआई टूल्स की निर्भरता बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

ऑफिस में बैठकर काम से बढ़ रहा कमर दर्द, सही पोस्टर और ब्रेक से मिल सकती है राहत

आजकल ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है, लेकिन इससे कमर दर्द की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. लगातार एक ही पोजिशन में बैठने से पीठ और कमर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे दिन के अंत में दर्द और जकड़न महसूस होती है. कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या बढ़ सकती है. सही बैठने का तरीका, बीच-बीच में ब्रेक लेना और हल्की एक्सरसाइज करने से इस दर्द से राहत पाई जा सकती है. कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी कमर को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं. 1. सही पोस्टर रखें ऑफिस में बैठते समय हमेशा अपनी पीठ को सीधा रखें और कुर्सी के बैक सपोर्ट से सटाकर बैठें. कोशिश करें कि आपके कंधे ढीले रहें और झुककर काम न करें. पैरों को जमीन पर सीधा टिकाकर रखें, उन्हें हवा में लटकने न दें. गलत पोस्टर में लंबे समय तक बैठने से कमर की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या हो सकती है. 2. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना कमर दर्द का बड़ा कारण है. इसलिए हर 30-40 मिनट में 2-3 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर लें. इस दौरान आप खड़े होकर थोड़ा चल सकते हैं या हल्का स्ट्रेच कर सकते हैं. इससे शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है.  3. आरामदायक कुर्सी का इस्तेमाल करें ऑफिस में काम करते समय ऐसी कुर्सी का चुनाव करें जिसमें अच्छा बैक सपोर्ट हो. कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि आपके पैर आराम से जमीन पर टिक सकें. अगर कुर्सी में लंबर सपोर्ट नहीं है, तो आप कुशन या छोटा तकिया लगाकर अपनी कमर को सपोर्ट दे सकते हैं. सही कुर्सी आपके पोस्टर को सुधारने में मदद करती है.  4. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें कमर दर्द से राहत पाने के लिए रोजाना कुछ आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है. आप forward bend, back stretch और body twisting जैसी एक्सरसाइज कर सकते हैं. ये एक्सरसाइज मांसपेशियों की जकड़न को कम करती हैं और शरीर को लचीला बनाती हैं. दिन में 5-10 मिनट भी स्ट्रेचिंग करने से फर्क महसूस होगा. 5. गर्म सिकाई करें अगर दिनभर काम करने के बाद कमर में दर्द या भारीपन महसूस हो, तो गर्म सिकाई बहुत राहत देती है. आप गर्म पानी की बोतल या हीट पैड का इस्तेमाल कर सकते हैं. 10-15 मिनट तक सिकाई करने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और दर्द कम होता है. यह एक आसान और असरदार घरेलू उपाय है. 6. सही गद्दे का चुनाव करें रात में सोते समय गद्दे का सही होना भी बहुत जरूरी है. बहुत ज्यादा सॉफ्ट गद्दा आपकी कमर को सही सपोर्ट नहीं देता, जबकि बहुत हार्ड गद्दा भी असहज हो सकता है. मीडियम फर्म गद्दा कमर के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को संतुलित सपोर्ट देता है और दर्द से बचाव करता है.  7. पानी और पोषण का ध्यान रखें अक्सर लोग पानी पीने और सही खानपान को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह भी कमर दर्द का एक कारण हो सकता है. शरीर में पानी की कमी से मांसपेशियां जल्दी थक जाती हैं. दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और अपनी डाइट में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन्स शामिल करें, ताकि आपकी मांसपेशियां मजबूत और स्वस्थ बनी रहें.

गर्मी से राहत: पुदीना और गुड़ की लस्सी बनाएगी शरीर को अंदर से ठंडा और तरोताजा

मई-जून की झुलसा देने वाली गर्मी और गर्म हवाओं और लू के कारण शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है जिससे डिहाइड्रेशन, पेट में जलन और थकान जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग बाजार में मिलने वाली कोल्ड ड्रिंक्स पीने लगते हैं जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह होती हैं. इस समर सीजन में खुद को अंदर से कूल और एनर्जेटिक रखने के लिए आप घर पर पुदीना और गुड़ की ठंडी-ठंडी लस्सी ट्राई कर सकते हैं. दही के प्रोबायोटिक्स, पुदीने की प्राकृतिक ठंडक और गुड़ के पोषक तत्व मिलकर एक ऐसा चमत्कारी ड्रिंक बनाते हैं जो आपके डाइजेशन को दुरुस्त रखता है और पेट की गर्मी को शांत करता है. आइए जानते हैं इस देसी और हेल्दी लस्सी को मिनटों में बनाने की बेहद आसान रेसिपी. पुदीना और गुड़ की लस्सी रेसिपी की सामग्री ताजा गाढ़ा दही: 2 कप (चिल्ड) ताजी पुदीना पत्तियां: ½ कप गुड़ का पाउडर या कद्दूकस किया गुड़: 3-4 चम्मच (स्वादानुसार) भुना हुआ जीरा पाउडर: ½ छोटा चम्मच काला नमक: ½ छोटा चम्मच चाट मसाला: ¼ छोटा चम्मच ठंडा पानी या बर्फ के टुकड़े: आवश्यकतानुसार बनाने का आसान तरीका सबसे पहले एक छोटे ब्लेंडर जार में ताजी पुदीने की पत्तियां, गुड़ का पाउडर और 2-3 चम्मच ठंडा पानी डालें. इसे अच्छी तरह ब्लेंड करके एक स्मूथ पेस्ट तैयार कर लें. अब एक बड़े मिक्सिंग जार या ब्लेंडर में ठंडा गाढ़ा दही डालें. इसमें तैयार किया हुआ पुदीना-गुड़ का पेस्ट, भुना जीरा पाउडर, काला नमक और चाट मसाला ऐड करें. सारे मिश्रण को कुछ सेकंड के लिए अच्छी तरह ब्लेंड कर लें या पारंपरिक मथानी से मथ लें ताकि सारे फ्लेवर आपस में मिल जाएं और लस्सी झागदार बन जाए. अगर लस्सी ज्यादा गाढ़ी लगे, तो थोड़ा ठंडा पानी मिला सकते हैं. तैयार लस्सी को सर्विंग गिलासों में निकालें. ऊपर से बर्फ के टुकड़े डालें और पुदीने की पत्ती या चुटकी भर भुने जीरे पाउडर से गार्निश करके तुरंत ठंडी-ठंडी सर्व करें.

7000mAh बैटरी और Android 16 के साथ लॉन्च हुआ Motorola G37 Power, कीमत 15,999 रुपये

आज के समय में फ्लैगशिप ही नहीं, बल्कि बजट स्मार्टफोन्स की कीमतें भी लगातार बढ़ती जा रही हैं. ऐसे में 15 की रेंज में ऐसा फोन ढूंढना आसान नहीं है, जो बैटरी, परफॉर्मेंस, कैमरा और सॉफ्टवेयर हर मामले में अच्छा एक्सपीरियंस दे सके. ज्यादातर बजट फोन्स में कहीं न कहीं कोई बड़ा समझौता देखने को मिल ही जाता है. इसी बीच Motorola ने अपना नया बजट मॉडल Motorola G37 Power 15,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च कर दिया है, जो बड़ी 7000mAh बैटरी, क्लीन Android एक्सपीरियंस, मजबूत बिल्ड क्वालिटी और भरोसेमंद परफॉर्मेंस के साथ एक बैलेंस्ड पैकेज देने का दावा करता है. इस कीमत में इसके फीचर्स काफी दमदार नजर आते हैं, हालांकि असली सवाल यही है कि क्या यह फोन रोजमर्रा के इस्तेमाल में भी उतना ही शानदार साबित होता है? Motorola G37 Power Review: डिजाइन Motorola G37 Power का डिजाइन पहली नजर में काफी अच्छा लगता है. फोन के पीछे सिंथेटिक लेदर फिनिश दी गई है, जिसकी वजह से हाथ में पकड़ने पर ग्रिप बेहतर मिलती है और फोन फिसलता नहीं है. अच्छी बात यह है कि लंबे समय तक इस्तेमाल करने के बाद भी यह ज्यादा भारी नहीं लगता. फोन का बैक डिजाइन काफी साफ-सुथरा और प्रीमियम लगता है. कैमरा मॉड्यूल भी जरूरत से ज्यादा बड़ा नहीं बनाया गया, जिससे फोन का लुक सिंपल लेकिन स्टाइलिश दिखाई देता है. इसमें साइड में फिंगरप्रिंट स्कैनर मिलता है, जो ज्यादातर समय फास्ट और सही तरीके से काम करता है. हालांकि, अगर हाथ गीले या पसीने वाले हों, तो कभी-कभी स्कैनर थोड़ा परेशान कर सकता है. बिल्ड क्वालिटी की बात करें, तो Motorola ने इसमें Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन, MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन और IP64 रेटिंग दी है. यानी फोन रोजमर्रा के हल्के झटकों, धूल और पानी की छींटों से काफी हद तक सुरक्षित रहता है. सबसे अच्छी बात यह है कि कंपनी ने इसमें 3.5mm हेडफोन जैक और microSD कार्ड स्लॉट भी दिया है. यानी आप चाहें तो स्टोरेज को 1TB तक बढ़ा सकते हैं, जो आजकल बजट फोन्स में कम देखने को मिलता है. Motorola G37 Power Review: डिस्प्ले Motorola G37 Power में 6.67 इंच का बड़ा LCD डिस्प्ले मिलता है, जो वीडियो देखने और एंटरटेनमेंट के लिए काफी अच्छा लगता है. हालांकि फोन में HD+ रिजॉल्यूशन दिया गया है, इसलिए डिस्प्ले सबसे ज्यादा शार्प नहीं कहा जा सकता. फिर भी YouTube वीडियो देखना, सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और वेब ब्राउजिंग जैसे काम आराम से हो जाते हैं. बड़ी स्क्रीन की वजह से कंटेंट देखने में मजा आएगा. फोन का 120Hz रिफ्रेश रेट इसकी सबसे अच्छी बातों में से एक है. इसकी वजह से स्क्रॉलिंग और ऐप्स के बीच स्विच करना काफी स्मूद लगता है, जिससे फोन इस्तेमाल करते समय लैग कम महसूस होता है. डिस्प्ले में 1050 निट्स तक की ब्राइटनेस मिलेगी, जिससे धूप में स्क्रीन ठीक-ठाक दिखाई देगा. हालांकि AMOLED डिस्प्ले जैसी ज्यादा ब्राइटनेस और डीप कलर्स यहां नहीं मिलते. फिर भी कीमत के हिसाब से यह ठीक है. Motorola G37 Power Review: परफॉर्मेंस Motorola G37 Power की सबसे मजबूत बात इसकी परफॉर्मेंस है. इसमें MediaTek Dimensity 6400 प्रोसेसर, 8GB तक RAM और 256GB UFS 2.2 स्टोरेज मिलती है. रोजमर्रा के इस्तेमाल में फोन काफी स्मूद चलेगा. कॉलिंग, सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग, ब्राउजिंग और हल्की फोटो एडिटिंग जैसे काम बिना किसी बड़ी दिक्कत के हो जाते हैं. मल्टीटास्किंग भी उम्मीद से बेहतर है. कई ऐप्स के बीच स्विच करने पर फोन ज्यादा स्लो नहीं लगेगा. गेमिंग की बात करें, तो BGMI और Call of Duty Mobile जैसे गेम्स बैलेंस्ड सेटिंग्स पर अच्छे से चल जाते हैं. हालांकि, यह फोन हार्डकोर गेमिंग के लिए नहीं बनाया गया है. लंबे समय तक गेम खेलने पर फोन थोड़ा गर्म जरूर होता है, लेकिन ज्यादा परेशान नहीं करता. Motorola G37 Power Review: सॉफ्टवेयर Motorola हमेशा से अपने क्लीन सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस के लिए जाना जाता है और G37 Power में भी यही देखने को मिलता है. फोन Android 16 पर चलता है और इसमें Hello UI मिलता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें बेवजह के एड्स और बहुत ज्यादा प्री-इंस्टॉल ऐप्स नहीं मिलेंगे. Moto Gestures जैसे फीचर्स रोजमर्रा के इस्तेमाल को आसान बनाते हैं. जैसे कि, फोन को ट्विस्ट करके कैमरा खोलना और chop-chop जेस्चर से टॉर्च ऑन करना काफी काम का लगता है. साथ ही इसमें कंपनी Android 17 अपडेट देने का भी वादा कर रही है. Motorola G37 Power Review: बैटरी Motorola G37 Power की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7000mAh बैटरी है. नॉर्मल इस्तेमाल में फोन आराम से डेढ़ से दो दिन तक चल सकता है. गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और 5G इस्तेमाल के बाद भी बैटरी काफी अच्छी बैकअप देती है. फोन में 30W TurboPower चार्जिंग सपोर्ट मिलता है, जिससे बैटरी को 0 से 100% तक चार्ज होने में करीब 85 मिनट लगते हैं. Motorola G37 Power Review: कैमरा फोन में 50MP प्राइमरी कैमरा दिया गया है. दिन की रोशनी में कैमरा अच्छी डिटेल तस्वीरें क्लिक करेगा. पोर्ट्रेट मोड भी कीमत के हिसाब से अच्छा काम करता है और बैकग्राउंड ब्लर काफी नेचुरल लगता है. सेल्फी कैमरा भी सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए ठीक-ठाक रिजल्ट देता है. हालांकि, कम रोशनी में कैमरा परफॉर्मेंस निराश कर सकती है. रात में फोटो में नॉइज और थोड़ी सॉफ्टनेस देखने को मिल सकती है. क्या खरीदना चाहिए? अगर आप 20 हजार रुपये से कम कीमत में ऐसा स्मार्टफोन चाहते हैं, जो बड़ी बैटरी, भरोसेमंद परफॉर्मेंस, साफ-सुथरा सॉफ्टवेयर और मजबूत बिल्ड क्वालिटी दे, तो Motorola G37 Power एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है. हालांकि, इसका LCD डिस्प्ले सबसे बेहतरीन नहीं है और लो-लाइट कैमरा भी एवरेज है, लेकिन फोन का ओवरऑल बैलेंस इसे बजट सेगमेंट में मजबूत दावेदार बनाता है.

भारत में प्रोटीन डाइट का क्रेज: 2 साल में 150% बढ़े ऑर्डर, बदली खाने की आदतें

भारत में प्रोटीन डाइट लेने वालों की मात्रा दिन-ब-दिन बढ़ रही है. अब सिर्फ जिम जाने वालों या फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स तक सीमित नहीं है बल्कि आम घरों की रसोई में भी अब प्रोटीन प्रोडक्ट्स अपनी जगह बना रहे हैं. क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट के नए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 2 सालों में उनके प्लेटफॉर्म पर प्रोटीन से जुड़े प्रोडक्ट्स के ऑर्डर्स में 150 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. यही नहीं, लोगों द्वारा इन चीजों पर किया जाने वाला खर्च भी अब करीब 3 गुना हो चुका है. बाजार में बदलते इस ट्रेंड को देखते हुए कंपनियों ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है और प्रोटीन वाली चीजों की अधिक पूर्ति करने में लगी है. अंडे और पनीर का दबदबा बरकरार भले ही मार्केट में नए-नए पैकेजों वाले न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स आ गए हों लेकिन आज भी भारतीय घरों में प्रोटीन के पारंपरिक ऑप्शंस ही सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं. ऑनलाइन शॉपिंग कार्ट्स में अंडे और पनीर की जोड़ी नंबर वन बनी हुई है. इसके बाद सबसे ज्यादा डिमांड चिकन और अंडे के कॉम्बिनेशन की देखी जा रही है. इनके अलावा मखाना, ओट्स, प्रोटीन बार्स, ग्रीक योगर्ट और चने की बिक्री में भी काफी तेजी आई है. नए प्रोडक्ट्स की बात करें तो प्रोटीन चिप्स की डिमांड साल-दर-साल करीब 300 प्रतिशत बढ़ी है जबकि प्रोटीन योगर्ट की बिक्री में 280 प्रतिशत का उछाल आया है. आंकड़ों के अनुसार, प्रोटीन उत्पादों के लिए ऑर्डर देने का सबसे व्यस्त समय सुबह 7 बजे से 11 बजे के बीच था, जो मुख्य रूप से नाश्ते से संबंधित खरीदारी के कारण था. पीनट बटर बना नंबर वन सर्च इंटरनेट पर सर्च करने के मामले में भारतीयों की पहली पसंद पीनट बटर बनकर उभरा है. इंस्टामार्ट पर प्रोटीन कैटेगरी में इसे सबसे ज्यादा सर्च किया गया है, जिसके बाद दूसरे नंबर पर ग्रीक योगर्ट रहा. पारंपरिक भारतीय फूड्स की बात करें तो सोया चंक्स की मांग दोगुनी से ज्यादा हो गई है, जबकि टोफू की सेल में 87 प्रतिशत की तेजी आई है. अब लोग सत्तू, बेसन, भुने चने और मिलेट्स (बाजरा) को भी प्रोटीन के नजरिए से देख रहे हैं और इन्हें अपनी डाइट का हिस्सा बना रहे हैं. छोटे शहरों में सबसे तेज रफ्तार यह बदलाव सिर्फ दिल्ली या बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है. हालांकि कुल डिमांड में बेंगलुरु अब भी सबसे आगे है, लेकिन टियर-2 और छोटे शहरों में इसकी रफ्तार सबसे तेज है. नागपुर, जयपुर, चंडीगढ़, भुवनेश्वर, गुवाहाटी और विजाग जैसे शहरों में प्रोटीन प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. इस क्रेज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चेन्नई के एक यूजर ने पीनट बेस्ड प्रोटीन फूड्स पर एक बार में 2 लाख 71 रुपये 385 खर्च कर दिए थए. वहीं बेंगलुरु के एक अन्य यूजर ने सिर्फ प्रोटीन बार्स खरीदने के लिए 2 लाख 09 हजार 626 का ऑर्डर दिया था. पारंपरिक चीजों की ओर लोगों का रुख इस बदलाव से पारंपरिक भारतीय चीजों पर फिर से लोगों का फोकस हो रहा है. सोया चंक्स की मांग दोगुनी से अधिक हो गई, टोफू की मांग में लगभग 87% की वृद्धि हुई, जबकि मखाना, चना सत्तू, बेसन और भुने हुए चने की मांग में भी अच्छी वृद्धि देखी गई क्योंकि उपभोक्ता इन परिचित खाद्य पदार्थों को प्रोटीन के नज़रिए से देखने लगे. अंकुरित बाजरा और ओट्स आधारित नाश्ते के मिश्रण की मांग में भी तेजी से वृद्धि हुई क्योंकि प्रोटीन का सेवन अब एक्सरसाइज के बाद की दिनचर्या से हटकर नियमित भोजन का हिस्सा बन गया है.

बिना स्क्रीन वाला नया फिटनेस बैंड: Fitbit Air बना चर्चा का केंद्र

फिटनेस बैंड की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब Google ने ऐसा डिवाइस पेश किया है, जिसमें न डिस्प्ले है और न ही कोई भारी-भरकम डिजाइन. फिर भी यह हेल्थ ट्रैकिंग के मामले में बड़े-बड़े स्मार्टवॉच को चुनौती देता नजर आ रहा है. नया Fitbit Air उन यूजर्स को टारगेट करता है, जो बिना स्क्रीन के हल्का, आरामदायक और AI फीचर्स से लैस फिटनेस ट्रैकर चाहते हैं. खास बात यह है कि इसमें Google का नया AI हेल्थ कोच भी मिलता है, जो फिटनेस रूटीन को पहले से ज्यादा आसान और स्मार्ट बना सकता है. कम कीमत और प्रीमियम फीचर्स के साथ यह डिवाइस मार्केट में काफी चर्चा बटोर रहा है. बिना स्क्रीन वाला फिटनेस ट्रैकर क्यों बना चर्चा का विषय? Fitbit Air का सबसे बड़ा आकर्षण इसका स्क्रीनलेस डिजाइन है. आज के दौर में जहां हर डिवाइस में डिस्प्ले दिया जा रहा है, वहीं Google ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना है. यह ट्रैकर बेहद हल्का है और पूरे दिन पहनने पर भी भारी महसूस नहीं होता. इसका वजन सिर्फ 12 ग्राम बताया गया है, जिससे यह लगातार इस्तेमाल के लिए काफी आरामदायक बन जाता है. इसका डिजाइन पुराने Fitbit Flex और Jawbone जैसे क्लासिक फिटनेस बैंड्स की याद दिलाता है. डिवाइस को स्ट्रैप के अंदर फिट किया गया है और इसे आसानी से बदला भी जा सकता है. यूजर्स को कई कलर ऑप्शन भी मिलते हैं. Google Health App और AI Coach बना रहे खास Fitbit Air में स्क्रीन नहीं होने की वजह से लगभग पूरा कंट्रोल Google Health ऐप से किया जाता है. यही ऐप आपकी एक्टिविटी, स्लीप, हार्ट रेट और दूसरे हेल्थ डेटा को मैनेज करता है. इसका इंटरफेस काफी साफ और आसान बताया जा रहा है. सबसे ज्यादा चर्चा इसके Gemini AI बेस्ड Health Coach फीचर की हो रही है. यह फीचर यूजर्स की फिटनेस आदतों को समझकर उन्हें पर्सनल सुझाव देता है. वर्कआउट प्लान, स्लीप रूटीन और हेल्थ गोल्स को बेहतर तरीके से मैनेज करने में यह AI काफी मददगार साबित हो सकता है. फिटनेस और हेल्थ ट्रैकिंग में कितना दम? Fitbit Air उन लोगों के लिए खास हो सकता है, जो सिर्फ स्टेप काउंट नहीं बल्कि डीप हेल्थ एनालिसिस चाहते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक यह डिवाइस स्लीप पैटर्न, रिकवरी और एक्टिविटी डेटा को काफी विस्तार से ट्रैक करता है. यही वजह है कि इसे Whoop Strap का किफायती ऑप्शन भी माना जा रहा है. हालांकि इसमें GPS और NFC जैसे फीचर्स नहीं दिए गए हैं. यानी आप इससे कॉन्टैक्टलेस पेमेंट नहीं कर पाएंगे और रनिंग के दौरान फोन के बिना लोकेशन ट्रैकिंग भी सीमित रहेगी. बैटरी और चार्जिंग ने किया प्रभावित Fitbit Air की बैटरी और चार्जिंग स्पीड को इसकी बड़ी ताकत माना जा रहा है. कंपनी के मुताबिक यह डिवाइस तेजी से चार्ज हो जाता है और लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. स्क्रीन नहीं होने का फायदा इसकी बैटरी लाइफ पर भी देखने को मिलता है. यही कारण है कि यह उन यूजर्स के लिए बेहतर विकल्प बन सकता है, जो बार-बार चार्जिंग से परेशान रहते हैं. कम कीमत में प्रीमियम एक्सपीरियंस? Google ने Fitbit Air को बजट सेगमेंट में उतारा है, लेकिन फीचर्स प्रीमियम कैटेगरी वाले देने की कोशिश की गई है. शुरुआती कीमत करीब 100 डॉलर के आसपास रखी गई है, जो Whoop जैसे डिवाइसेज की तुलना में काफी कम है. हालांकि, कुछ एडवांस फीचर्स के लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ सकता है. इसके बावजूद AI हेल्थ कोच और डीप हेल्थ ट्रैकिंग इसे मार्केट में अलग पहचान दिला सकते हैं.

ChatGPT बनाने वाली कंपनी के CEO बोले- AI से खत्म नहीं होंगे रोजगार

 नई दिल्ली पिछले कुछ सालों में AI को लेकर दुनिया भर में सबसे बड़ा डर यही रहा है कि क्या मशीनें इंसानों की नौकरियां छीन लेंगी. चैटजीपीटी और दूसरे एआई टूल्स आने के बाद यह बहस और तेज हो गई. दुनिया भर में कई कंपनियों ने AI के नाम पर हजारों जॉब्स कट की हैं. लेकिन अब टॉप टेक सीईओ के सुर बदले से लग रहे हैं।  कई लोगों को लगने लगा है कि आने वाले समय में लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं. लेकिन अब खुद AI दुनिया के बड़े नाम इस मुद्दे पर थोड़ा अलग सुर में बात करते नजर आ रहे हैं।  OpenAI सीईओ ऑल्टमैन ने मानी अपनी गलती OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में माना कि एआई को लेकर नौकरी खत्म होने का जो डर था, वह अभी तक उतना सच साबित नहीं हुआ है जितना उन्होंने पहले सोचा था।  ऑल्टमैन ने कहा कि उन्हें लगा था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे पहले एंट्री लेवल ऑफिस जॉब्स को तेजी से खत्म कर देगा, लेकिन ऐसा बड़े स्तर पर अभी तक देखने को नहीं मिला. उन्होंने यहां तक कहा कि वह गलत साबित होकर खुश हैं।  ऑल्टमैन का कहना है कि एआई कई काम आसान जरूर कर रहा है, लेकिन इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं ले पा रहा. उन्होंने मिसल देते हुए बताया कि उन्होंने कुछ समय तक अपने मैसेज और जवाब एआई से लिखवाने की कोशिश की, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि इंसानों के बीच बातचीत और जुड़ाव की अहमियत अलग होती है।  सैम ऑल्टमैन के मुताबिक कई नौकरियों में मानवीय हिस्सा ऐसा है जिसे मशीनें आसानी से कॉपी नहीं कर सकतीं।  AI का बहाना बना कर की जा रही छंटनी: Nvidia CEO दूसरी तरफ अमेरिकी टेक कंपनी Nvidia के सीईओ जेनसन हुआंग का बयान भी काफी चर्चा में है. उन्होंने कहा कि जो लोग एआई सीखेंगे और उसके साथ काम करना सीख जाएंगे, वही आगे बढ़ेंगे. लेकिन जो लोग नई टेक्नोलॉजी अपनाने से बचेंगे, उनके लिए खतरा बढ़ सकता है. यानी एआई नौकरी पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, लेकिन काम करने का तरीका जरूर बदल देगा।  जेनसन हुआंग ने उन कंपनियों पर भी सवाल उठाए जो हर छंटनी का कारण एआई को बता रही हैं. उनका कहना है कि कई कंपनियां एआई का नाम लेकर आसान बहाना बना रही हैं. उनके मुताबिक एआई अभी इतना पुराना नहीं हुआ कि वह अचानक पूरी दुनिया की नौकरियां खत्म कर दे।  गूगल सीईओ सुंदर पिचाई क्या कह रहे हैं? गूगल सीईओ सुंदर पिचाई भी लगातार कह रहे हैं कि एआई को डर की तरह नहीं बल्कि एक नए टूल की तरह देखना चाहिए. हाल ही में उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी AI के साथ काम करेगी और उसी के साथ फ्यूचर बनाएगी. पिचाई का मानना है कि AI इंसानों की मदद करेगा, लेकिन लोगों को नई स्किल्स सीखनी होंगी।  हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा बिल्कुल खत्म हो गया है. दुनिया भर की कई कंपनियां अब AI की मदद से कम लोगों में ज्यादा काम करने की कोशिश कर रही हैं।  कुछ जगहों पर एंट्री लेवल और दोहराए जाने वाले काम कम हुए हैं. लेकिन साथ ही नए तरह के काम भी पैदा हो रहे हैं, जैसे एआई ट्रेनिंग, एआई मॉनिटरिंग और एआई आधारित कंटेंट वर्क।  एक नई रिसर्च में भी सामने आया है कि एआई सीधे नौकरी खत्म करने से ज्यादा काम करने के तरीके को बदल रहा है. कंपनियां अब लोगों की भर्ती और काम की जिम्मेदारियां दोनों बदल रही हैं. यानी आने वाले समय में वही लोग ज्यादा सुरक्षित होंगे जो नई तकनीक के साथ खुद को बदल सकेंगे।  धीरे धीरे तस्वीर बगलती हुई दिख रहा है. कुछ साल पहले जहां जॉब एपोकैलिप्स यानी नौकरियों के खत्म होने का डर सबसे बड़ा मुद्दा था, वहीं अब टेक दुनिया के बड़े लोग कह रहे हैं कि एआई इंसानों की जगह लेने नहीं, बल्कि उनके साथ काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

AC और फैन साथ चलाएं: गर्मी में बिजली बिल कम करने का आसान तरीका

तपती गर्मी की वजह से कई लोग एयर कंडिशनर (AC) का यूज कर रहे हैं. हालांकि घर में लगातार AC को चलाने से भारी बिजली बिल का भी सामना करना पड़ता है. AC और फैन दोनों यूज करें AC और सीलिंग फैन का कॉम्बीनेशन की मदद से ना सिर्फ बेहतरीन कूलिंग का आनंद मिलेगा बल्कि बिजली बिल भी काफी कम आएगा. ये बिजली सेविंग में अच्छी मदद करता है. फैन चलाने के फायदे कई एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि AC के साथ फैन का भी यूज करना चाहिए. फैन की मदद से AC की हवा पूरे कमरे में सर्कुलेट होती है, जिससे AC पर लोड कम पड़ता है. ऐसे में बेहतर कूलिंग मिलती है. इतने पर चलाएं AC और पंखा तपती गर्मी के दौरान AC को 26 डिग्री सेल्सियस पर चलाना चाहिए और उसके साथ ही सीलिंग फैन को 1 या 2 नंबर पर चलाना चाहिए. BLDC फैन यूज करें हम सलाह देते हैं कि अपने घर में BLDC मोटर के साथ आने वाले फैन का यूज करना चाहिए. ये लेटेस्ट टेक्नोलॉजी है, जो पावर सेविंग भी करती है AC को लगातार ना चलाएं तपती गर्मी के दौरान अगर AC को लगातार चलाते हैं, तो ऐसा नहीं करना चाहिए. AC कुछ घंटे चलाने के बाद उसके स्विच ऑफ कर दें. घर में लग सकती है आग AC लगातार चलाने की वजह से ओवरहीट हो जाता या फिर तार आदि गर्म होकर शॉट सर्किट में बदल सकता है. इसकी वजह से घर में आग तक लग सकती है. AC की सर्विसिंग कराएं AC से बेहतर कूलिंग पाने के लिए जरूरी है कि उसकी सर्विसिंग रेगुलर कराएं. एयर फिल्टर को हर 4-5 दिन के बाद क्लीन करें. आउटडोर को भी साफ रखें. 

नौतपा में हेल्थ अलर्ट: सुबह 9 बजे के बाद अंडा खाना पड़ सकता है भारी

नौतपा शुरू हो चुके हैं और इन दिनों सुबह 7-8 बजे से ही तेज धूप महसूस होने लगती है. पारा 40 से 45 डिग्री को पार कर रहा है और झुलसती धूप ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. ऐसे मौसम में जरा सी भी लापरवाही सीधे आपके पेट का कबाड़ा कर सकती है. जब बात प्रोटीन डाइट की आती है, तो अंडा सबसे पॉपुलर और आसान ऑपशन माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भीषण गर्मी के महीनों में अंडा खाने की टाइमिंग आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है? यदि आप भी सुबह देर से उठते हैं या ऑफिस की जल्दबाजी में सुबह 9 बजे के बाद हैवी एग ब्रेकफास्ट करते हैं तो यह आदत आपको सीधे डॉक्टर के पास पहुंचा सकती है. सुबह 9 बजे के बाद अंडा क्यों न खाएं? साइंस के अनुसार, अंडे में भरपूर मात्रा में हाई-क्वालिटी प्रोटीन और हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं. जब आप प्रोटीन से भरपूर चीजें खाते हैं तो शरीर को उसे पचाने के लिए अधिक एनर्जी खर्च करनी पड़ती है और इस प्रक्रिया को थर्मिक इफेक्ट ऑफ फूड (TEF) या थर्मोजेनेसिस कहते हैं. प्रोटीन का थर्मिक इफेक्ट (20% से 30%) कार्बोहाइड्रेट और फैट से कहीं ज्यादा होता है जिसका सीधा मतलब है कि प्रोटीन को ब्रेकडाउन करने में शरीर के अंदरूनी तापमान में बढ़ोतरी होती है. सुबह 9 बजे के बाद गर्मी तेज होने लगती है और बाहर का तापमान भी अधिक रहता है. इसलिए यदि आप उस समय अंडा खाते हैं तो शरीर के अंदर का तापमान बढ़ेगा और सूरज की रोशनी से बाहर का. ऐसे में हैवी प्रोटीन आपके डाइजेशन सिस्टम पर डबल लोड डाल देता है, जिससे दिनभर एसिडिटी, ब्लोटिंग और पेट में भारीपन की समस्या मससूस हो सकती है. गर्मियों में अंडा कब खाएं? न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आप गर्मियों में अंडे का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो इसे सुबह 7:00 से 8:30 बजे के बीच ही खा लें. इस समय मौसम में थोड़ी ठंडक रहती है जिससे धूप तेज होने से पहले आपकी बॉडी इसे आसानी से प्रोसेस कर लेती है. WebMD का कहना है, अंडा न्यूट्रिएंट्स का पावरहाउस है लेकिन तपती गर्मी में अंडे के पीले हिस्सों का अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें. क्योंकि इसमें फैट की मात्रा ज्यादा होती है जो शरीर में सबसे ज्यादा हीट जनरेट करता है. गर्मी के महीनों में रोजाना 1 से 2 अंडे खाना सुरक्षित है. बाकी अंडे की मात्रा आपकी फिजिकल एक्टिविटी, गोल आदि पर निर्भर करती है. पानी की कमी से ब्लॉक हो जाएगा पेट गर्मी में अंडा या कोई भी प्रोटीन सप्लीमेंट लेते समय लोग सबसे बड़ी चूक पानी की मात्रा में करते हैं. प्रोटीन मेटाबॉलिज्म के बाद निकलने वाले बाई-प्रोडक्ट्स को शरीर से बाहर फ्लश करने के लिए किडनी को ज्यादा पानी की जरूरत होती है. यदि आप अंडा खाने के बाद दिनभर में 3 से 4 लीटर पानी नहीं पी रहे हैं तो गंभीर डिहाइड्रेशन और कब्ज होना तय है इसलिए सुबह तेज धूप से पहले अपना नाश्ता निपटा लें.