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Health Alert: छोटी बच्चियों में समय से पहले पीरियड्स बढ़ने के मामले, डॉक्टर बोले- इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

 नई दिल्ली कई दशकों तक लड़कियों में पीरियड्स की शुरुआत की उम्र आमतौर पर 11 से 13 साल की उम्र के बीच देखी जाती रही है लेकिन आज डॉक्टर्स इस पैटर्न में एक बड़ा बदलाव महसूस कर रहे हैं जिसमें लड़कियों में प्यूबर्टी (यौवन) के लक्षण बहुत कम उम्र में ही दिखने लगे हैं. अब कई लड़कियों को 8 या 9 साल की उम्र या उससे भी पहले पीरियड्स शुरू हो रहे हैं जो बेहद चिंता वाली बात है. कई बार माता-पिता अक्सर इसे सामान्य मानकर यह सोच लेते हैं कि उनका बच्चा दूसरों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस शारीरिक बदलाव को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।  कुछ मामलों में यह इस बात का संकेत हो सकता है कि प्यूबर्टी बहुत जल्दी शुरू हो गई है. इस कंडीशन को प्रीकोशियस (Precocious Puberty) प्यूबर्टी कहा जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि समय से पहले प्यूबर्टी आने से न केवल बच्चे का शारीरिक और कद-काठी बढ़ने से रुक सकती है बल्कि यह कंडीशन उनकी इमोशनल और मेंटल हेल्थ को भी बुरी तरह प्रभावित करती है. इसके अलावा यह कंडीशन आगे चलकर लंबे समय तक रहने वाली कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है।  अगर माता-पिता को अपनी बच्ची में तय उम्र से बहुत पहले ही प्यूबर्टी के लक्षण दिखने लगें तो उन्हें इस पर खास ध्यान देना चाहिए. ऐसी स्थिति में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. समय पर डॉक्टर से जांच कराने से न सिर्फ इसके सही कारणों का पता लगाया जा सकता है बल्कि यह भी पक्का किया जा सकता है कि बच्ची को सही समय पर सही इलाज, देखभाल और मानसिक सहायता मिल सके।  क्यों बच्चियां हो रहीं जल्दी जवान? भारत और कई अन्य देशों के शोधकर्ताओं ने देखा है कि पिछले कुछ दशकों में प्यूबर्टी की औसत उम्र धीरे-धीरे कम हो गई है. हालांकि इस प्रवृत्ति के पीछे कोई एक कारण नहीं है लेकिन विशेषज्ञों का मानना ​​है कि कई जीवनशैली और पर्यावरणीय कारक इसमें योगदान दे सकते हैं।  भारत और दुनिया के कई देशों के रिसर्चर्स ने यह देखा है कि पिछले कुछ दशकों में लड़कियों में प्यूबर्टी की औसत उम्र धीरे-धीरे काफी कम हुई है. हालांकि, इस बदलाव के पीछे कोई एक इकलौता कारण नहीं है बल्कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि हमारी बदलती लाइफस्टाइल और पर्यावरण से जुड़े कई फैक्टर्स इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।  समय से पहले प्यूबर्टी आने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है बचपन में बढ़ता मोटापा. शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी (फैट्स) एस्ट्रोजेन हार्मोन के प्रोडक्शन को बढ़ा देती है जो लड़कियों के शारीरिक और यौन विकास के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है. शरीर में एस्ट्रोजेन का यह हाई लेवल तय समय से काफी पहले ही प्यूबर्टी की प्रक्रिया को ट्रिगर करता है।  अलर्टी प्यूबर्टी के कई और कारण भी हैं रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी की कमी स्क्रीन टाइम बढ़ाना नींद की खराब आदतें प्रोसेस्ड फूड और मीठे ड्रिंक्स का बार-बार इस्तेमाल प्लास्टिक, कॉस्मेटिक्स और कुछ घरेलू प्रोडक्ट्स में पाए जाने वाले एंडोक्राइन को खराब करने वाले केमिकल्स के संपर्क में आना फैमिली हिस्ट्री या जेनेटिक कारण हालांकि इन कारणों से जल्दी प्यूबर्टी होने की संभावना बढ़ सकती है लेकिन हर बच्चा अलग होता है और जल्दी प्यूबर्टी वाली सभी लड़कियों को कोई अंदरूनी मेडिकल प्रॉब्लम नहीं होती है।  इन संकेतों पर ध्यान दें माता-पिता जल्दी प्यूबर्टी अक्सर 8 साल की उम्र से पहले दिखने वाले शारीरिक बदलावों से शुरू होती है. इनमें कुछ आम चेतावनी संकेत शामिल हैं।  8 साल की उम्र से पहले ब्रेस्ट का विकास हाइट में तेजी से बढ़ोतरी शरीर में टीनएजर्स जैसी बॉडी महक आना मुंहासें प्यूबिक या अंडरआर्म बालों का बढ़ना मूड स्विंग या इमोशनल बदलाव पीरियड्स का नॉर्मल उम्र से पहले शुरू होना डॉक्टरों का कहना है कि कुछ बच्चे दूसरों की तुलना में नैचुरली जल्दी मैच्योर हो जाते हैं लेकिन इन संकेतों की हमेशा एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल से जांच करवानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वो नॉर्मल रेंज में हैं या नहीं।  जल्दी पीरियड्स का मतलब सिर्फ पीरियड्स जल्दी आना नहीं है. रिसर्च से पता चलता है कि जिन लड़कियों को बहुत कम उम्र में पीरियड्स आते हैं, उन्हें आगे चलकर कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं. जैसे- मोटापा पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) टाइप 2 डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी कुछ हॉर्मोन से जुड़े कैंसर बचपन में इमोशनल और साइकोलॉजिकल चुनौतियां जल्दी प्यूबर्टी एक लड़की की आखिरी एडल्ट हाइट पर भी असर डाल सकती है. एक बार पीरियड्स शुरू होने पर हड्डियां ज्यादा तेजी से मैच्योर होती हैं जिससे ग्रोथ प्लेट्स वक्त से पहले बंद हो जाती हैं. इस वजह से कुछ लड़कियों का लंबाई बढ़ना जल्दी रुक सकता है और उनकी कद-काठी अपनी जेनेटिक क्षमता से भी छोटी रह सकती है।  बहुत जल्दी बड़े होने की इमोशनल चुनौतियां शारीरिक बदलाव कहानी का सिर्फ एक हिस्सा हैं जो लड़कियां अपनी क्लासमेट्स से पहले प्यूबर्टी का अनुभव करती हैं, उन्हें इमोशनली भी परेशानी हो सकती है।  उन्हें अपने शरीर में हो रहे बदलावों को लेकर शर्मिंदगी महसूस हो सकती है, स्कूल में दूसरे बच्चों द्वारा उनका मजाक उड़ाने या चिढ़ाने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, उन्हें कन्फ्यूजन और एंग्जायटी हो सकती है क्योंकि वे पीरियड्स के लिए इमोशनली तैयार नहीं होती हैं।  एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर पर खुलकर बातचीत करना जरूरी है. माता-पिता को उम्र के हिसाब से सही भाषा में प्यूबर्टी के बारे में समझाना चाहिए. सवालों का ईमानदारी से जवाब देना चाहिए और बच्चों को भरोसा दिलाना चाहिए कि उनकी भावनाएं नॉर्मल हैं।  स्कूल भी पीरियड्स के बारे में जल्दी जानकारी देकर एक जरूरी भूमिका निभाते हैं ताकि लड़कियां अपने पहले पीरियड्स से पहले समझ सकें कि क्या उम्मीद करनी है।  क्या जल्दी प्यूबर्टी को रोका जा सकता है? जल्दी पीरियड्स आने के हर मामले को रोका नहीं जा सकता. खासकर जब जेनेटिक्स शामिल हों. हालांकि, हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतें नॉर्मल ग्रोथ और पूरी सेहत को सपोर्ट कर सकती हैं। 

Fatty Liver Alert: AIIMS डॉक्टर बोले- तुरंत छोड़ दें ये 4 चीजें, शराब जितना पहुंचाती हैं लिवर को नुकसान

 नई दिल्ली शराब पीने से लिवर खराब होता है ये बात तो अधिकतर लोग जानते हैं, लेकिन खाने की कुछ ऐसी चीजें भी हैं जो लिवर को शराब की तरह ही नुकसान करती हैं. इनके कारण लिवर खराब हो सकता है. फैटी लिवर जैसी बीमारी भी हो रही है. शराब न पीने से लिवर के खराब होने को नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहते हैं. देश में बीते कुछ सालों में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसका प्रमुख कारण कुछ फूड हैं।  मेडिकल जर्नल द लैंसेट की स्टडी बताती हैं कि भारत में हर 10 में से लगभग 4 वयस्क नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज से पीड़ित हैं . द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित इस रिसर्च में  7,764 वयस्कों का फैटी लिवर का टेस्ट किया गया. इसमें से 39 प्रतिशत को नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) थी. रिसर्च में कहा गया है कि अगर फैटी लिवर के बढ़ते मरीजों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में सिरोसिस, लिवर कैंसर के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।  शराब न पीने वालों का लिवर क्यों हो रहा खराब इस बारे में डिटेल में जानने के लिए आजतक.इन ने दिल्ली AIIMS में  Department of Gastroenterology and Human Nutrition विभाग में प्रोफेसर डॉ. शालीमार से बातचीत की है. वह कहते हैं कि जब लिवर में 5 फीसदी से अधिक फैट जमा हो जाता है तो उसको फैटी लिवर कहते हैं. फैटी लिवर की बीमारी इस अंग के खराब होने की शुरुआत है. फैटी लिवर दो प्रकार का होता है. एक है अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज ( शराब पीने से लिवर का फैटी होना) और दूसरी है नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज. अब देखा जा रहा है कि नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज भी तेजी से बढ़ रही है. यह वह लोग हैं जो शराब नहीं पी रहे हैं, लेकिन फिर भी लिवर खराब हो रहा है. इसका प्रमुख कारण गलत खानपान है।  कौन से ऐसे फूड हैं जो लिवर को नुकसान कर रहे हैं अगर कोई व्यक्ति खाने में बहुत अधिक तेल का इस्तेमाल करता है और मीठा जरूरत से ज्यादा खाता है तो उसको फैटी लिवर के होने का खतरा होता है. भले ही वह शराब नहीं पीता है तो भी उसको यह हो सकता है. आजकल एक और बड़ी समस्या यह भी देखी जा रही है कि लोग कई तरह की दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के खा रहे हैं. कुछ लोग ऐसा सालों से कर रहे हैं. इससे लिवर पर गंभीर असर हो रहा है. बिना जरूरत के दवाएं खाना लिवर को खराब करता है .सिर्फ फैटी लिवर ही नहीं ये लिवर की कई बीमारियों का कारण बन सकता है।  डॉ. शालीमार कहते हैं कि अब कई लोग फास्ट फूड भी ज्यादा खाते हैं. जैसे बर्गर, पिज्जा और दूसरी ऐसी चीजें. ये आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं. जब इन बैक्टीरिया को नुकसान होता है तो फिर इसका असर लिवर पर भी होता है. कुल मिलाकर ज्यादा तेल, मीठा, फास्ट फूड और बिना वजह दवाएं खाने की आदत लिवर को शराब जितना नुकसान कर सकती हैं।  पतले लोगों को भी क्यों हो रहा फैटी लिवर अगर किसी व्यक्ति का खानपान ठीक नहीं है तो भले ही वह पतला है तो भी उसको लिवर की बीमारी हो सकती है. ऐसा गलत खानपान से होता है. बीते कुछ सालों में इस तरह के मामले सामने आ भी रहे है. लोग कहते हैं कि वह पतले हैं और शराब भी नहीं पीते हैं फिर भी उनको लिवर की बीमारी क्यों हो रही है. इसका जवाब यही है कि ये लोग खानपान का ध्यान नहीं रख रहे हैं. फास्ट फूड, तेल और चीनी को जरूरत से ज्यादा खा रहे हैं।  लिवर को फिट रखना है तो इन बातों का रखें ध्यान तेल, मैदा, चीनी का सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें  लंबे समय तक भूखा न रहें.  शराब का सेवन न करें.  डॉक्टर की सलाह के बिना खुद से कोई दवाएं न खाएं 

क्या फोन को नियमित Restart करना जरूरी है? जानें RESTART फीचर क्यों दिया जाता है

 नई दिल्ली आपने अपना स्मार्टफोन आखिरी बार कब रीस्टार्ट किया था? आम तौर पर जब तक फोन सही काम कर रहा होता है लोग उसे रीस्टार्ट नहीं करते हैं. कई बार लोगों को लगता है कि फोन खराब हो गया और एक रीस्टार्ट से काम बन जाता है और फोन ठीक चलने लगता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? आज ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को हफ्तों या महीनों तक बंद ही नहीं करते. फोन हमेशा ऑन रहता है और लगातार ऐप्स, नोटिफिकेशन, बैकग्राउंड प्रोसेस और सिस्टम सर्विसेज चलते रहते हैं. इसी वजह से टेक एक्सपर्ट समय-समय पर फोन को रीस्टार्ट करने की सलाह देते हैं।  सवाल यह है कि आखिर फोन को कितने दिन में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए? क्या इससे सच में कोई फायदा होता है या यह सिर्फ एक पुरानी आदत है? कई लोगों को लगता है कि फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी तेजी से ड्रेन होती है और फोन की लाइफ कम होने लगती है।  एक कॉमन मिथ ये भी है कि लोगों को लगता है फोन रीस्टार्ट करने से अच्छा है ऐप्स को मैनुअली बंद कर दिया जाए. लेकिन ऐप स्वाइप करके बंद करने से प्रोसेस चलता ही रहता है. रीस्टार्ट करने से पूरी तरह बंद होता है. फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी पर असर नहीं पड़ता. यहां तक की एक्सपर्ट्स का मानना है कि रीस्टार्ट या फोन रीबूट करने से बैटरी रीकैलिब्रेशन प्रोसेस होता है और बैकग्राउंड ऐप्स बंद होते हैं जिससे हीटिंग इश्यू नहीं होती।  हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना सबसे बेहतर माना जाता है सैमसंग समेत कई टेक कंपनियां और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्मार्टफोन को कम से कम हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए. अगर आप बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जैसे गेम खेलते हैं, वीडियो एडिट करते हैं या दिनभर कई ऐप्स चलाते हैं, तो 3-4 दिन में एक बार रीस्टार्ट करना भी अच्छा माना जाता है।  रीस्टार्ट करने से फोन का डेटा डिलीट नहीं होता और न ही कोई फोटो या ऐप हटती है. यह सिर्फ ऑपरेटिंग सिस्टम को नए सिरे से शुरू करता है।  रीस्टार्ट करने से क्या फायदा होता है? फोन लगातार चलने पर कई ऐप्स बैकग्राउंड में खुले रहते हैं. इनमें से कुछ ऐप्स जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करने लगते हैं. रीस्टार्ट करने पर ये सभी एक्स्ट्रा प्रोसेस बंद हो जाते हैं और रैम खाली हो जाती है. इससे फोन पहले से ज्यादा स्मूद चल सकता है।  अगर किसी ऐप में कोई छोटी तकनीकी गड़बड़ी आ गई हो या सिस्टम किसी वजह से अटक गया हो, तो रीस्टार्ट के बाद यह समस्या कई बार अपने आप ठीक हो जाती है. यही वजह है कि कस्टमर केयर भी अक्सर सबसे पहले फोन रीस्टार्ट करने की सलाह देता है।  रीस्टार्ट करने से बैटरी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. जब बेवजह बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स बंद हो जाते हैं, तो प्रोसेसर पर दबाव कम होता है और बैटरी की खपत भी कम हो सकती है।  सिर्फ स्पीड ही नहीं, सिक्योरिटी में भी मदद फोन रीस्टार्ट करना सिर्फ परफॉर्मेंस के लिए ही नहीं, बल्कि सिक्योरिटी के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. अमेरिका की National Security Agency (NSA) भी पहले सलाह दे चुकी है कि समय-समय पर फोन रीस्टार्ट करना कुछ तरह के साइबर हमलों और मेमोरी में चल रहे संदिग्ध प्रोसेस को रोकने में मदद कर सकता है. हालांकि यह किसी वायरस का इलाज नहीं है, लेकिन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जरूर बन सकती है।  Google और Apple ने भी हाल के समय में अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसा फीचर जोड़ा है कि अगर फोन कई दिनों तक लॉक रहे तो वह खुद ही Restart हो जाता है. इसका मकसद फोन के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना है. रीस्टार्ट के बाद फोन First Unlock मोड में चला जाता है, जहां PIN या पासकोड डाले बिना डेटा एक्सेस नहीं किया जा सकता।  किन लोगों को ज्यादा जरूरत है? अगर आपका फोन दो-तीन साल पुराना है, उसमें स्टोरेज लगभग भर चुकी है या आप दिनभर सोशल मीडिया, बैंकिंग, कैमरा और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो नियमित रीस्टार्ट आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।  जो लोग कभी भी फोन बंद नहीं करते, उनके फोन में छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें जमा होती रहती हैं. रीस्टार्ट इन अस्थायी समस्याओं को काफी हद तक साफ कर देता है।  क्या रोज Restart करना चाहिए? रोज रीस्टार्ट करना जरूरी नहीं है. इससे कोई खास एक्स्ट्रा फायदा भी नहीं मिलता. ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना नॉर्मल यूजर के लिए काफी है। अगर आपका फोन पहले से बिल्कुल स्मूद चल रहा है, तब भी हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना अच्छी आदत मानी जाती है।  ऑटो रीस्टार्ट फीचर भी है कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन, खासकर सैमंसग, में ऑटो रीस्टार्ट या ऑटो ऑप्टिमाइजेशन का फीचर मिलता है. इसमें आप तय कर सकते हैं कि फोन रात में किसी तय समय पर अपने आप रीस्टार्ट हो जाए. इससे आपको अलग से याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके फोन में यह फीचर मौजूद है, तो उसे हफ्ते में एक बार रात के समय के लिए सेट किया जा सकता है। 

मानसून स्पेशल: कम समय के लिए मिलने वाला जामुन सेहत के लिए क्यों है फायदेमंद

मानसून का मौसम आते ही बाजार में कई तरह के ताजे फल दिखाई देने लगते हैं. आम और लीची के बीच एक ऐसा फल भी होता है, जिसकी उपलब्धता बहुत कम समय के लिए रहती है. यह फल स्वाद के साथ-साथ अपने पोषण गुणों के लिए भी जाना जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसके सीजन में इसका सीमित मात्रा में सेवन शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचा सकता है. सिर्फ कुछ समय के लिए मिलता है जामुन जामुन एक मौसमी फल है, जो आमतौर पर साल में केवल एक-दो महीने के लिए ही बाजार में उपलब्ध रहता है. यही वजह है कि इसके मौसम में इसे खाने की सलाह दी जाती है. जामुन में विटामिन-सी, फाइबर, पोटैशियम, आयरन और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद करते हैं. जामुन का रंग क्यों माना जाता है खास? जामुन का गहरा बैंगनी रंग उसमें मौजूद एंथोसायनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट के कारण होता है. यह तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है. साथ ही यह कोशिकाओं को स्वस्थ बनाए रखने और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को सपोर्ट करने में भी सहायक माना जाता है. ब्लड शुगर और पाचन के लिए कैसे फायदेमंद है? जामुन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. इसके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है और पाचन प्रक्रिया को भी सहारा मिलता है. कुछ अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि जामुन में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व ब्लड शुगर के संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि, इसे किसी भी बीमारी की दवा नहीं माना जाना चाहिए. बीपी, लीवर और इम्यूनिटी को भी मिल सकता है लाभ जामुन में मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट हृदय स्वास्थ्य और ब्लड प्रेशर के सामान्य स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. वहीं विटामिन-सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करता है. कुछ शोधों के अनुसार, जामुन का सेवन लीवर की कार्यप्रणाली को भी सहयोग दे सकता है. वजन घटाने वालों के लिए भी अच्छा विकल्प कम कैलोरी और अधिक फाइबर होने के कारण जामुन वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है. संतुलित आहार के साथ इसका सेवन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है.

Samsung Galaxy A27 5G लॉन्च, 6 साल तक मिलेगा Android अपडेट और दमदार फीचर्स

सैमसंग ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम Samsung Galaxy A27 5G है. साथ ही कंपनी ने ऐलान किया है कि इसके साथ 6 साल के लिए एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर का अपडेट मिलेगा. इसमें क्वालकॉम स्नेपड्रैगन 6 जेन का इस्तेमाल किया है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं. Samsung Galaxy A27 5G की पहली सेल 3 जुलाई से शुरू होगी. इसको मल्टीपल कलर वेरिएंट में लॉन्च किया है और कीमत का अभी ऐलान नहीं किया है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं. Samsung Galaxy A27 5G में पंच होल कैमरा कटआउट दिया गया है. वहीं A सीरीज में 6.7 इंच का फुल एचडी प्लस सुपर AMOLED इनफिनिटी ओ डिस्प्ले दिया गया है. इसमें 120Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलता है. Samsung Galaxy A27 5G का प्रोसेसर Samsung Galaxy A27 5G में क्वालकॉम का स्नेपड्रेगन 6 जेन 3 चिपसेट का इस्तेमाल किया है, जो 4nm पर प्रोसेस करके तैयार किया गया है.  इसमें मैक्सिमम 8GB Ram और 256GB स्टोरेज मिलती है. इसकी मदद से ज्यादा ऐप्स, गेम्स और मीडिया फाइल्स को फोन में स्टोर कर सकेंगे. इसमें 2TB तक का माइक्रोएसडी कार्ड लगा सकते हैं. Samsung Galaxy A27 5G का कैमरा Samsung Galaxy A27 5G में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलता है, जिसमें 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा मिलता है, जो OIS के साथ आता है. 5 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड एंगल का लेंस मलता है. 2 मेगापि्सल का मेक्रो लेंस दिया है, जो क्लोज शॉट्स के काम आएगा. 12 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. Samsung Galaxy A27 5G की बैटरी और अन्य फीचर्स Samsung Galaxy A27 5G में 5000mAh की बैटरी दी जाएगी, जो 25W के फास्ट चार्जर के साथ आता है. इस हैंडसेट के साथ कई स्मार्ट फीचर्स मिलेंगे. यह फोन एंड्रॉयड 16 के साथ One UI 8.5 के साथ आता है. साथ ही कंपनी ने वादा किया है का आने वाले 5 साल तक तक एंड्रॉयड ओएस का अपडेट दिया जाएगा.

गर्मियों में स्किन के लिए खीरे के 3 फेस मास्क, टैनिंग और रूखेपन से मिलेगी राहत

गर्मियों के मौसम में तेज धूप और पसीने की वजह से स्किन से जुड़ी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं. इसके कारण चेहरे पर टैनिंग, रूखापन और जलन जैसी परेशानियां होने लगती हैं. ऐसे में इस मौसम में स्किन की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. इस मौसम में स्किन को अंदर से ठंडक और पोषण देने के लिए खीरा सबसे बेस्ट और नेचुरल उपाय है. खीरे में भरपूर मात्रा में पानी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो चेहरे को हाइड्रेट करने के साथ-साथ चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में भी मदद करते हैं. अगर आप भी इस सीजन में टैनिंग, स्किन में जलन या रूखेपन से परेशान हैं तो महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय घर पर खीरे से बने कुछ आसान फेस मास्क ट्राई कर सकते हैं. आइए जानते हैं इन्हें बनाने और इस्तेमाल करने का सही तरीका, ताकि आपकी स्किन गर्मियों में भी खिली-खिली और फ्रेश बनी रहे. टैनिंग को दूर करता है अगर गर्मियों में धूप की वजह से चेहरे पर टैनिंग हो गई है तो खीरा और दही का फेस मास्क आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए 2 इंच खीरे को कद्दूकस कर लें और उसे आधी कटोरी दही में मिला दें. अब इसमें आधा चम्मच बेसन मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 10 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर नॉर्मल पानी से चेहरा धो लें. चेहरे की जलन कम करने में मदद करता है स्किन में जलन या रेडनेस की समस्या होने पर एलोवेरा और खीरे का फेस मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए 1 चम्मच एलोवेरा जेल में 2 चम्मच कद्दूकस किया हुआ खीरा और आधा चम्मच मुल्तानी मिट्टी मिलाएं. इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर 15 मिनट तक लगाकर रखें. इसके बाद चेहरा धोकर जेल-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं. ग्लोइंग स्किन पाने में करता है मदद अगर आप नेचुरल तरीके से ग्लोइंग स्किन पाना चाहते हैं तो खीरे में बादाम का तेल और शहद मिलाकर फेस मास्क तैयार करें. इसे चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें और 5 से 7 मिनट बाद धो लें. इससे स्किन सॉफ्ट बनी रहती है और चेहरे पर कुदरती निखार आता है. इन बातों का रखें ध्यान     किसी भी फेस मास्क का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, खासकर अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है.     बेहतर रिजल्ट के लिए इन फेस मास्क का इस्तेमाल हफ्ते में कम से कम 2 बार जरूर करें.  

स्मार्टफोन को हर हफ्ते रीस्टार्ट करना क्यों है जरूरी, जानिए इसके बड़े फायदे

आपने अपना स्मार्टफोन आखिरी बार कब रीस्टार्ट किया था? आम तौर पर जब तक फोन सही काम कर रहा होता है लोग उसे रीस्टार्ट नहीं करते हैं. कई बार लोगों को लगता है कि फोन खराब हो गया और एक रीस्टार्ट से काम बन जाता है और फोन ठीक चलने लगता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? आज ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को हफ्तों या महीनों तक बंद ही नहीं करते. फोन हमेशा ऑन रहता है और लगातार ऐप्स, नोटिफिकेशन, बैकग्राउंड प्रोसेस और सिस्टम सर्विसेज चलते रहते हैं. इसी वजह से टेक एक्सपर्ट समय-समय पर फोन को रीस्टार्ट करने की सलाह देते हैं. सवाल यह है कि आखिर फोन को कितने दिन में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए? क्या इससे सच में कोई फायदा होता है या यह सिर्फ एक पुरानी आदत है? कई लोगों को लगता है कि फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी तेजी से ड्रेन होती है और फोन की लाइफ कम होने लगती है. एक कॉमन मिथ ये भी है कि लोगों को लगता है फोन रीस्टार्ट करने से अच्छा है ऐप्स को मैनुअली बंद कर दिया जाए. लेकिन ऐप स्वाइप करके बंद करने से प्रोसेस चलता ही रहता है. रीस्टार्ट करने से पूरी तरह बंद होता है. फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी पर असर नहीं पड़ता. यहां तक की एक्सपर्ट्स का मानना है कि रीस्टार्ट या फोन रीबूट करने से बैटरी रीकैलिब्रेशन प्रोसेस होता है और बैकग्राउंड ऐप्स बंद होते हैं जिससे हीटिंग इश्यू नहीं होती. हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना सबसे बेहतर माना जाता है सैमसंग समेत कई टेक कंपनियां और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्मार्टफोन को कम से कम हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए. अगर आप बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जैसे गेम खेलते हैं, वीडियो एडिट करते हैं या दिनभर कई ऐप्स चलाते हैं, तो 3-4 दिन में एक बार रीस्टार्ट करना भी अच्छा माना जाता है. रीस्टार्ट करने से फोन का डेटा डिलीट नहीं होता और न ही कोई फोटो या ऐप हटती है. यह सिर्फ ऑपरेटिंग सिस्टम को नए सिरे से शुरू करता है. रीस्टार्ट करने से क्या फायदा होता है? फोन लगातार चलने पर कई ऐप्स बैकग्राउंड में खुले रहते हैं. इनमें से कुछ ऐप्स जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करने लगते हैं. रीस्टार्ट करने पर ये सभी एक्स्ट्रा प्रोसेस बंद हो जाते हैं और रैम खाली हो जाती है. इससे फोन पहले से ज्यादा स्मूद चल सकता है. अगर किसी ऐप में कोई छोटी तकनीकी गड़बड़ी आ गई हो या सिस्टम किसी वजह से अटक गया हो, तो रीस्टार्ट के बाद यह समस्या कई बार अपने आप ठीक हो जाती है. यही वजह है कि कस्टमर केयर भी अक्सर सबसे पहले फोन रीस्टार्ट करने की सलाह देता है. रीस्टार्ट करने से बैटरी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. जब बेवजह बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स बंद हो जाते हैं, तो प्रोसेसर पर दबाव कम होता है और बैटरी की खपत भी कम हो सकती है. सिर्फ स्पीड ही नहीं, सिक्योरिटी में भी मदद फोन रीस्टार्ट करना सिर्फ परफॉर्मेंस के लिए ही नहीं, बल्कि सिक्योरिटी के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. अमेरिका की National Security Agency (NSA) भी पहले सलाह दे चुकी है कि समय-समय पर फोन रीस्टार्ट करना कुछ तरह के साइबर हमलों और मेमोरी में चल रहे संदिग्ध प्रोसेस को रोकने में मदद कर सकता है. हालांकि यह किसी वायरस का इलाज नहीं है, लेकिन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जरूर बन सकती है. Google और Apple ने भी हाल के समय में अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसा फीचर जोड़ा है कि अगर फोन कई दिनों तक लॉक रहे तो वह खुद ही Restart हो जाता है. इसका मकसद फोन के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना है. रीस्टार्ट के बाद फोन First Unlock मोड में चला जाता है, जहां PIN या पासकोड डाले बिना डेटा एक्सेस नहीं किया जा सकता. किन लोगों को ज्यादा जरूरत है? अगर आपका फोन दो-तीन साल पुराना है, उसमें स्टोरेज लगभग भर चुकी है या आप दिनभर सोशल मीडिया, बैंकिंग, कैमरा और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो नियमित रीस्टार्ट आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. जो लोग कभी भी फोन बंद नहीं करते, उनके फोन में छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें जमा होती रहती हैं. रीस्टार्ट इन अस्थायी समस्याओं को काफी हद तक साफ कर देता है. क्या रोज Restart करना चाहिए? रोज रीस्टार्ट करना जरूरी नहीं है. इससे कोई खास एक्स्ट्रा फायदा भी नहीं मिलता. ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना नॉर्मल यूजर के लिए काफी है. अगर आपका फोन पहले से बिल्कुल स्मूद चल रहा है, तब भी हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना अच्छी आदत मानी जाती है. ऑटो रीस्टार्ट फीचर भी है कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन, खासकर सैमंसग, में ऑटो रीस्टार्ट या ऑटो ऑप्टिमाइजेशन का फीचर मिलता है. इसमें आप तय कर सकते हैं कि फोन रात में किसी तय समय पर अपने आप रीस्टार्ट हो जाए. इससे आपको अलग से याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके फोन में यह फीचर मौजूद है, तो उसे हफ्ते में एक बार रात के समय के लिए सेट किया जा सकता है.

Orient Aero O2 फैन रिव्यू: क्या सच में हवा में ऑक्सीजन बढ़ाता है या सिर्फ मार्केटिंग है

आजकल मार्केट में सिर्फ कूलिंग देने वाले फैन नहीं, बल्कि हेल्थ बेचने वाले फैन भी आ गए हैं. ऐसा ही एक फैन है Orient का Aero O2, जिसे कंपनी इंडिया का पहला ऑक्सीजन एनरिचिंग फैन कहती है. मैंने इस फैन को कुछ समय तक अपने घर में इस्तेमाल किया और अब आपको बता रहा हूं कि असल में ये फैन कितना काम का है और क्या ये सिर्फ मार्केटिंग है या सच में फर्क महसूस होता है. यह भी पढ़ें: Haier 475L डबल डोर फ्रिज रिव्यू: डिजाइन और परफॉर्मेंस का शानदार कॉम्बो, LG-Samsung को मिलेगी टक्कर Aero O2 डिजाइन सबसे पहले डिजाइन की बात करें तो Aero O2 का लुक काफी प्रीमियम और मॉडर्न है. सफेद रंग में आने वाला ये फैन किसी भी मॉडर्न घर में आसानी से फिट हो जाता है. इसका मोटर हाउसिंग थोड़ा अलग दिखता है क्योंकि इसमें वही टेक्नोलॉजी लगी है जो कंपनी का सबसे बड़ा दावा है. फैन को देखते ही समझ आता है कि ये कोई साधारण सीलिंग फैन नहीं है. कॉन्वर्सेशन स्टार्टर कहा जा सकता है, यानी कोई भी देख कर पूछेगा कि आखिर इस फैन में क्या खास है? क्योंकि इसकी बनावट अगल तरह की है. इसके साथ जो रिमोट मिलता है वो RF बेस्ड है, यानी आपको फैन की तरफ सीधा पॉइंट करने की जरूरत नहीं होती. ये एक छोटी लेकिन बहुत काम की चीज है. रिमोट में अलग-अलग स्पीड कंट्रोल, टाइमर, रिवर्स मोड और एक खास बूस्ट मोड भी दिया गया है. मैंने खुद इसका इस्तेमाल किया और ये फीचर काफी काम का लगा, खासकर जब कमरे में जल्दी ठंडक चाहिए होती है. Aero O2 में क्या टेक है? अब आते हैं इसकी सबसे बड़ी बात पर, यानी प्लाज्मा आयन टेक्नोलॉजी. कंपनी का दावा है कि ये टेक्नोलॉजी हवा में मौजूद माइक्रोब्स को 99.99% तक न्यूट्रलाइज करती है और कमरे में ऑक्सीजन लेवल को बेहतर बनाती है. इसके अलावा यह भी कहा गया है कि 8 घंटे में ऑक्सीजन लेवल 90% तक रिस्टोर हो सकता है और जहरीली गैसों को 75% तक कम किया जा सकता है. फैन में एलईडी लगी है जो इसे और प्रीमियम टच देती है. ऑक्सीजन फीचर ऑन और ऑफ करने का ऑप्शन है जिससे लाइट का भी कलर चेंज होता है, ताकि आपको पता रहे कि फैन कौन से मोड पर चल रहा है. फैन के नीचे दी गई लाइट आंखों को ज्यादा नहीं चुभती है और ये इस फैन के ऐस्थेटिक को बेहतर भी करता है. सवाल यह है कि क्या ये सच में काम करता है? मैंने जब इसे इस्तेमाल किया तो ऐसा कोई तुरंत 'ऑक्सीजन बढ़ गई' जैसा एहसास नहीं होता, जैसा कि अक्सर मार्केटिंग में दिखाया जाता है. लेकिन लंबे समय तक कमरे में रहने पर एक चीज नोटिस हुई कि हवा थोड़ी फ्रेश लगती है, खासकर बंद कमरे में.  यह पूरी तरह साइंटिफिक तरीके से मापना तो आसान नहीं है, लेकिन जो फर्क है, वो महसूस होता है. इसके अलावा अगर आपके घर में AQI खराब रहता है या शहर में पॉल्यूशन ज्यादा है, तो यह फैन एक एक्स्ट्रा लेयर देता है. लेकिन यह एयर प्यूरीफायर का रिप्लेसमेंट नहीं है, यह समझना जरूरी है. यह फैन हवा को पूरी तरह साफ नहीं करेगा, लेकिन थोड़ा बेहतर जरूर बनाता है. Aero O2: जबरदस्त परफॉर्मेंस और फीचर पैक्ड परफॉर्मेंस की बात करें तो यह फैन 250 CMM एयर डिलीवरी देता है और करीब 290 RPM की मोटर स्पीड के साथ आता है. इस्तेमाल के दौरान मुझे इसकी एयर थ्रो काफी अच्छी लगी. कमरे में हवा अच्छे से फैलती है और स्पीड भी स्मूद रहती है. सबसे अच्छी बात इसका व्हिस्पर-क्वाइट ऑपरेशन है. यह फैन बहुत कम आवाज करता है. रात में सोते समय बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं करता. यह फीचर आजकल बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि कई फैन तेज आवाज करते हैं जो नींद खराब करते हैं. इसमें ऑल सीजन फैन का फीचर भी दिया गया है, यानी इसमें रिवर्स मोड है. सर्दियों में आप इसे उल्टा घुमा सकते हैं जिससे कमरे की गर्म हवा नीचे आती है. यह फीचर भारत में ज्यादा लोग यूज नहीं करते, लेकिन जिनको पता है उनके लिए यह काफी काम का है. एक और चीज जो मुझे पसंद आई वो है इसका टाइमर फीचर. आप इसे 2, 4, 6 या 8 घंटे के लिए सेट कर सकते हैं. रात में सोते समय यह बहुत काम आता है क्योंकि आपको उठकर फैन बंद नहीं करना पड़ता. अब बात करते हैं इसकी सबसे बड़ी चिंता वाली चीज की, यानी कीमत. Aero O2 एक प्रीमियम फैन है और इसकी कीमत नॉर्मल फैन से काफी ज्यादा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या यह पैसा वसूल है? किसके लिए है ये फैन? अगर आप सिर्फ कूलिंग के लिए फैन खरीद रहे हैं तो यह फैन आपके लिए नहीं है. मार्केट में इससे सस्ते और अच्छे एयर थ्रो वाले फैन मिल जाएंगे. लेकिन अगर आप हेल्थ, एयर क्वालिटी और टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर खरीदना चाहते हैं, तो यह फैन एक अलग कैटेगरी में आता है. यह फैन उन लोगों के लिए ज्यादा सही है जो मेट्रो सिटी में रहते हैं, जिनके घर में बच्चे हैं या जिन्हें हवा की क्वालिटी को लेकर चिंता रहती है. खासकर अगर आप AC और बंद कमरे में ज्यादा समय बिताते हैं, तो यह फैन थोड़ा बेहतर माहौल बनाने में मदद करता है. लेकिन यहां एक बात साफ कर देना जरूरी है. यह कोई जादू नहीं करता. यह आपके कमरे को जंगल जैसी ताजी हवा नहीं देगा. यह बस हवा को थोड़ा बेहतर बनाता है, जो लंबे समय में फायदा दे सकता है. कुल मिलाकर मेरा तजुर्ब  यह रहा कि Orient Aero O2 एक अलग तरह का प्रोडक्ट है. यह सिर्फ फैन नहीं है, बल्कि एक हेल्थ-फोकस्ड डिवाइस बनने की कोशिश करता है. इसका डिजाइन अच्छा है, परफॉर्मेंस बढ़िया है, और कुछ फीचर्स जैसे रिमोट, टाइमर और साइलेंट ऑपरेशन इसे और बेहतर बनाते हैं.  

फालसे का ठंडा शरबत: गर्मी में लू से राहत देने वाली आसान और नेचुरल रेसिपी

गर्मी में पारा चढ़ते ही शरीर को हाइड्रेटेड और एक्टिव रखने के लिए हम अक्सर फ्रिज में रखे ठंडे ड्रिंक्स, लस्सी या छाछ की तरफ भागते हैं. लेकिन रोज वही छाछ और नींबू पानी पीकर मन भर जाता है. अगर आप इस चिलचिलाती गर्मी में कोई ऐसा ड्रिंक ढूंढ रहे हैं जो पूरी तरह नेचुरल हो और जिसका स्वाद बेहद चटपटा और लाजवाब हो तो आपको मशहूर शेफ कुणाल कपूर की रेसिपी से घर पर फालसे का शरबत जरूर बनाना चाहिए. छोटे-छोटे जामुनी बेर जैसे दिखने वाले फालसे गर्मियों के मौसम का एक बेहतरीन सुपरफूड हैं. जब इन्हें काले नमक, भुने जीरे और पुदीने के साथ मिलाकर ठंडे-ठंडे शरबत का रूप दिया जाता है तो यह न सिर्फ आपके गले को तर करता है, बल्कि लू और पेट की गर्मी से भी तुरंत राहत दिलाता है. आइए जानते हैं इसे बनाने की एकदम आसान विधि. फालसा शरबत बनाने की साम्रगी ताजा फालसा: 500 ग्राम चीनी या मिश्री: 100 ग्राम (आप स्वादानुसार कम या ज्यादा भी कर सकते हैं) काला नमक और सफेद नमक भुना हुआ जीरा पाउडर: आधा छोटा चम्मच पुदीने की पत्तियां: 5-6 (सजावट और खुशबू के लिए) ठंडा पानी और बर्फ के टुकड़े बनाने का तरीका सबसे पहले फालसा को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें. एक बाउल या परात में फालसा लें और उसमें चीनी और दोनों नमक डालकर उन्हें हाथों से मसलें (मिक्सर का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे बीज पिस सकते हैं जो स्वाद कड़वा कर देते हैं). अब इसे एक छलनी में डालकर मसलें. बीच-बीच में ठंडा पानी मिलाते रहें और तब तक उसे मसलते रहें जब तक कि फालसे का सारा गूदा रस के रूप में निकल आ जाए. अच्छी तरह मिक्स करें. जब पूरा रस निकल आए तो गिलास में बर्फ के टुकड़े डालें, ऊपर से शरबत डालें और पुदीने की पत्तियों से सजाकर ठंडा-ठंडा सर्व करें. फालसा शरबत के फायदे विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फालसा शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू से बचाने का एक प्राकृतिक तरीका है. उत्तर भारत में इसका शरबत बनाकर पीने का खूब चलन है. जाने-माने सेलिब्रिटी शेफ कुणाल कपूर ने कुछ समय पहले अपने यूट्यूब चैनल पर इसकी आसान रेसिपी बताई थी जिसे हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं.

मानसून हेल्थ अलर्ट: बारिश में बढ़ते संक्रमण से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

 देश के कई हिस्सों में मानसून की एंट्री के साथ लोगों को भीषण गर्मी और लू से राहत मिलने लगी है. बारिश का मौसम जहां ठंडक और सुकून लेकर आता है, वहीं यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है. मौसम में अचानक बदलाव होने पर वायरल इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम, बुखार, एलर्जी और पेट से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में खानपान और साफ-सफाई को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है. साफ पानी पीना है सबसे जरूरी बारिश के मौसम में पानी दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पीना चाहिए. इससे पेट के संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. बाहर का खाना खाने से बचें मानसून में खुले में रखी खाने की चीजें जल्दी खराब हो सकती हैं. कटे हुए फल, चाट-पकौड़ी और अन्य स्ट्रीट फूड संक्रमण का कारण बन सकते हैं. घर का ताजा और स्वच्छ भोजन बेहतर विकल्प माना जाता है. हाथों की सफाई पर दें ध्यान खाना खाने से पहले और बाहर से घर लौटने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए. यह आदत कई प्रकार के संक्रमण से बचाने में मदद करती है. भीगने के बाद तुरंत बदलें कपड़े बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़े पहनकर रहने से सर्दी-जुकाम और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहन लेना चाहिए. इम्यूनिटी मजबूत रखें मौसमी फल, हरी सब्जियां, विटामिन-सी से भरपूर खाद्य पदार्थ और ड्राई फ्रूट्स शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा पर्याप्त नींद और नियमित पानी पीना भी जरूरी है. मच्छरों से करें बचाव बारिश के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है. डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचने के लिए मच्छरदानी, रिपेलेंट और पूरे कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए. छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप मानसून के मौसम में खुद को और अपने परिवार को स्वस्थ रख सकते हैं.