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Realme 16T लॉन्च: 8000mAh बैटरी और 144Hz डिस्प्ले के साथ नया मिड-रेंज फोन

रियलमी ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम Realme 16T है. इसमें 8000mAh की बैटरी, 144Hz का रिफ्रेश रेट्स और AI फीचर्स को शामिल किया है. यह एक मिड रेंज हैंडसेट है. यह एक मिड रेंज स्मार्टफोन है. आइए इसके बारे में जानते हैं. रियलमी 16टी की शुरुआती कीमत 29,999 रुपये है, जिसमें 6जीबी रैम और 128 जीबी इंटरनल स्टोरेज मिलती है. बैंक ऑफर के तहत 3 हजार रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है. 31,999 रुपये में 8जीबी रैम और 128 जीबी इंटरनल स्टोरेज वाला हैंडसेट मिलेगा. टॉप एंड वेरिएंट में 8जीबी रैम और 256जीबी इंटरनल स्टोरेज मिलती है, जिसकी कीमत 34,999 रुपये है. रियलमी 16टी के स्पेसिफिकेशन्स रियलमी के न्यू हैंडसेट में 6.8 इंच का एचडी प्लस आईपीएस एलसीडी स्क्रीन दी गई है, जिसके साथ 144 हर्ट्स का रिफ्रेश रेट्स मिलेगा. इसमें 1200 निट्स की पीक ब्राइनेटस दी है.   रियलमी 16टी का प्रोसेसर और अन्य फीचर्स रियलमी के इस हैंडसेट में ऑक्टाकोर मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300 6एनएम प्रोसेसर का यूज किया है. इसके साथ एआरएम माली जी57 एमसी2 जीपीयू का यूज किया है. इसके साथ 6जीबी रैम और 80जीबी रैम का ऑप्शन मिलता है. रियलमी 16टी का कैमरा रियलमी 16टी में 50 मेगापिक्सल का रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें सोनी आईएणएक्स 852 सेंसर का यूज किया है. 2 मेगापिक्सल मोनोक्रोम सेंसर है. इसमें 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया है. रियलमी 16टी की बैटरी रियलमी 16टी में 8000mAh की बैटरी दी है, जो 45W के फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आता है. कंपनी का दावा है कि यह मैक्सिमम 3 दिन की बैटरी बैकअप दे सकती है. इसमें 7 साल के लिए बैटरी हेल्थ की गारंटी दी है. इसमें IP 69 की रेटिंग दी है, जो इसको वॉटर रेसिस्टेंस बनाता है.

कश्मीरी ब्यूटी सीक्रेट्स: केसर और कहवा से पाएं नेचुरल ग्लोइंग स्किन

 कश्मीर अपनी सुंदर वादियों और खूबसूरत नजारों के साथ-साथ वहां के लोगों की खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है. खासकर कश्मीरी महिलाओं की हेल्दी और ग्लोइंग स्किन हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है. वैसे तो इसके पीछे वहां का सुहाना मौसम, साफ पानी और खान-पान बड़ी वजह माने जाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि कश्मीरी महिलाएं अपनी स्किन को बेदाग और खूबसूरत बनाए रखने के लिए कुछ खास घरेलू और पारंपरिक तरीकों का भी अपनाते हैं? आज हम आपको कुछ पांरपरिक कश्‍मीरी स्किन केयर टिप्‍स बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप भी अपनी स्किन पर नेचुरल ग्लो ला सकते हैं. केसर से चेहरे पर आता है निखार कश्मीरी केसर को स्किन के लिए काफी हेल्दी माना जाता है. पहले कश्मीरी महिलाएं केसर को दूध या गुलाब जल में भिगोकर चेहरे पर लगाती थीं. माना जाता है कि इससे चेहरे की चमक बढ़ती है और स्किन फ्रेश नजर आती है. आज के समय में भी केसर का इस्तेमाल फेस मास्क, सीरम, फेस ऑयल और आयुर्वेदिक स्किनकेयर प्रोडक्ट्स में खूब किया जाता है, क्योंकि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. कहवा को माना जाता है ब्यूटी ड्रिंक वहीं कश्मीरी कहवा एक खुशबूदार चाय होती है, जिसे केसर, ग्रीन टी, बादाम, दालचीनी और इलायची से बनाया जाता है. यह शरीर को गर्माहट देने, डाइजेशन को बेहतर रखने और शरीर को तरोताजा महसूस कराने में मदद करती है. आजकल कई लोग इसे ब्यूटी ड्रिंक भी कहते हैं, क्योंकि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाने में मदद कर सकते हैं. बादाम तेल से स्किन होती है सॉफ्ट बादाम का तेल लंबे समय से कश्मीरी ब्यूटी रूटीन का हिस्सा रहा है. पहले कश्मीरी महिलाएं सर्दियों में चेहरे पर बादाम तेल से मसाज करती थीं, ताकि चेहरे में नमी बनी रहे और स्किन सॉफ्ट दिखे. आजकल कोल्ड-प्रेस्ड बादाम तेल काफी पसंद किया जा रहा है. लोग इसका इस्तेमाल फेस मसाज, आंखों के नीचे की ड्रायनेस कम करने और बालों को पोषण देने के लिए करते हैं. अखरोट स्क्रब से हटती है डेड स्किन सेल्स वहीं कश्मीर अखरोट के लिए भी काफी मशहूर है. यहां अखरोट के छिलकों का इस्तेमाल पुराने समय से स्क्रब बनाने में किया जाता रहा है. यह स्क्रब चेहरे से डेड स्किन हटाने और स्किन को साफ व स्मूद बनाने में मदद करता है. खास बात यह है कि इसमें किसी तरह के हार्श केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती. अब कई स्किनकेयर ब्रांड भी अखरोट वाले स्क्रब और फेस क्लेंजर बना रहे हैं.

गर्मी में टिफिन पैकिंग गाइड: खाने को जल्दी खराब होने से बचाने के आसान तरीके

मई में भारत का तापमान 45 डिग्री पार कर चुका है. बाहर हो या घर के अंदर सभी जगह किसी जलती भट्टी की तरह लग रही हैं. ऐसी सड़ी गर्मी में खाने-पीने की चीजों को खराब होने से बचाना सबसे बड़ा चैलेंज बन जाता है. खासकर जब बात स्कूल या ऑफिस के टिफिन की हो, तो थोड़ी सी लापरवाही भी खाने को जल्दी खराब कर सकती है. तेज धूप, बढ़ता तापमान और उमस की वजह से खाने में बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं, जिससे वो जल्दी ही सड़ने लगता है. यहां तक की कई बार तो उसमें बदबू आने लगती है. अगर गलती से किसी भी बच्चे या बड़े ने ये खाना खा लिया तो पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कई बार सुबह बनाया गया खाना दोपहर तक ही खराब होने लगता है, खासकर अगर उसे सही तरीके से पैक न किया गया हो. ऐसे में जरूरी है कि लंच बॉक्स पैक करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए. कुछ छोटी-छोटी आदतें आपके खाने को लंबे समय तक फ्रेश बनाए रख सकती हैं और उसे खराब होने से भी बचा सकती हैं. अच्छी क्वालिटी के डिब्बे का करें इस्तेमाल: गर्मियों में हमेशा अच्छी क्वालिटी के मजबूत लंच बॉक्स का इस्तेमाल करना चाहिए. इंसुलेटेड या एयरटाइट कंटेनर खाने को ज्यादा देर तक ताजा रखने में मदद करते हैं. इससे बाहर की गर्म हवा और नमी खाने तक जल्दी नहीं पहुंचती. गर्म खाना तुरंत पैक न करें: बहुत से लोग खाना बनते ही टिफिन में पैक कर देते हैं, लेकिन ये आदत सही नहीं मानी जाती है. गर्म खाना बंद डिब्बे में रखने से अंदर भाप बनती है, जिससे नमी बढ़ती है और खाना जल्दी खराब हो सकता है. इसलिए खाना थोड़ा ठंडा होने के बाद ही पैक करें. कटे हुए फल ले जाने से बचें: अगर आप टिफिन में फल रख रहे हैं, तो कोशिश करें कि उन्हें पूरा ही रखें. कटे हुए फल जल्दी काले पड़ जाते हैं और लंबे समय तक बाहर रहने पर उनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है. केला, संतरा या सेब जैसे फल पूरे रखना ज्यादा बेहतर माना जाता है. बचा हुआ खाना पैक करने में सावधानी रखें: रात का बचा हुआ खाना अगले दिन टिफिन में रखना सही नहीं होता, खासकर अगर वो जल्दी खराब होने वाली चीज हो. ज्यादा देर रखा खाना इंफेक्शन का कारण बन सकता है. कोशिश करें कि हमेशा ताजा बना खाना ही पैक करें. खाने को दोबारा गर्म करना हो सकता है फायदेमंद: अगर ऑफिस या स्कूल में माइक्रोवेव है, तो खाना खाने से पहले उसे हल्का गर्म जरूर कर लें. इससे खाने में मौजूद बैक्टीरिया खत्म होने में मदद मिलती है और फूड पॉइजनिंग का खतरा कम होता है. गीले और सूखे खाने को अलग रखें: रोटी, सलाद और सूखी सब्जी जैसी चीजों को हमेशा ग्रेवी वाले खाने से अलग पैक करें. इससे खाना गीला नहीं होता और लंबे समय तक स्वाद भी बना रहता है.

भीषण गर्मी में राहत: जानिए ठंडक देने वाली पुदीना कांजी वड़ा की आसान रेसिपी

मई और जून के महीने में जब पारा 45 डिग्री के पार पहुंचने लगता है तो मैदानी इलाकों में चिलचिलाती धूप और गर्म हवाएं इंसानी शरीर को बेहाल कर देती हैं. इस भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है जिससे भूख न लगना, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं काफी कॉमन हो जाती हैं. ऐसे में सुबह के नाश्ते में कुछ ऐसा होना चाहिए जो न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट हो बल्कि पेट को दिनभर के लिए एसी जैसी ठंडक भी दे. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं उत्तर भारत और राजस्थान की पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय रेसिपी पुदीना कांजी वड़ा. पुदीने के एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों और राई के पाचक पानी से तैयार यह कांजी वड़ा गर्मियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. आइए जानते हैं इसे बनाने का बेहद आसान तरीका. पुदीना कांजी के फायदे पुदीने की प्राकृतिक तासीर ठंडी होती है जो भीषण गर्मी में भी पेट की गर्मी को शांत कर शरीर के तापमान को संतुलित रखती है. कांजी के पानी में मौजूद राई और हींग पेट में गुड बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं जिससे गर्मियों में होने वाली गैस, एसिडिटी और बदहजमी से बचाव होता है. सामग्री मूंग दाल: 1 कप (3-4 घंटे भीगी हुई) ताजा पुदीना पत्ती: 1 कप हरा धनिया: आधा कप हरी मिर्च: 2-3 पीली या काली राई (सरसों के दाने): 2 बड़े चम्मच (पीसी हुई) हींग: आधा छोटा चम्मच काला नमक: 1 बड़ा चम्मच सफेद नमक: स्वादानुसार लाल मिर्च पाउडर: 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर: आधा छोटा चम्मच तेल: वड़ा तलने के लिए बनाने का तरीका चटपटी कांजी का पानी तैयार करें: एक बड़े कांच या मिट्टी के बर्तन में 1.5 लीटर उबला और ठंडा किया हुआ पानी लें. मिक्सी जार में पुदीना, हरा धनिया और हरी मिर्च डालकर थोड़ा सा पानी मिलाकर बारीक पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को पानी में मिला दें. अब इस पानी में पिसी हुई राई, हींग, काला नमक, सफेद नमक, हल्दी और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह चम्मच से चलाएं. बर्तन का मुंह एक सूती कपड़े से बांधकर इसे 1 से 2 दिन के लिए धूप में या किसी गर्म जगह पर रख दें ताकि राई के कारण पानी में बढ़िया खट्टापन और पाचक गुण खमीर आ जाएं. भीगी हुई मूंग दाल को बिना पानी या बिल्कुल कम पानी के साथ मिक्सी में दरदरा पीस लें. इस पिसी हुई दाल में एक चुटकी हींग, थोड़ा सा नमक और बारीक कटा पुदीना मिलाएं. दाल को 5 मिनट तक एक ही दिशा में अच्छी तरह फेंटें ताकि वड़े एकदम सॉफ्ट और स्पंजी बनें. कढ़ाई में तेल गर्म करें. हाथों को थोड़ा गीला करके छोटे-छोटे वड़े गरम तेल में डालें और मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तल लें. तले हुए वड़ों को सीधे गुनगुने पानी के एक बर्तन में 10 मिनट के लिए डाल दें ताकि उनका एक्स्ट्रा तेल निकल जाए और वे सॉफ्ट हो जाएं. 10 मिनट बाद वड़ों को हथेलियों के बीच हल्के से दबाकर पानी निचोड़ लें और इन्हें तैयार पुदीना कांजी के खट्टे पानी में डाल दें. आधे घंटे के लिए इन्हें फ्रिज में रख दें. आपका ठंडा-ठंडा, चटपटा पुदीना कांजी वड़ा सर्व करने के लिए तैयार है.  

सांपों से बचाव में मदद करेगा ‘Big 4 Mapper’ ऐप: खतरे वाले इलाकों की मिलेगी जानकारी

सांपों के खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अब एक खास मोबाइल ऐप मददगार साबित हो सकता है. Big 4 Mapper नाम का यह ऐप लोगों को सांपों से जुड़े खतरे को समझने और उससे बचने में मदद करता है. यह ऐप खास तौर पर उन जगहों के लिए यूजफुल है जहां सांपों का खतरा ज्यादा रहता है, जैसे गांव, खेत या जंगल के पास के इलाके. इस ऐप का मकसद लोगों को यह जानकारी देना है कि उनके आसपास किस तरह के सांप पाए जाते हैं और किन जगहों पर सांप देखे गए हैं. इससे लोग पहले से सतर्क हो सकते हैं और ऐसे इलाकों से बच सकते हैं. मैप के जरिए मिलती है सांप की लोकेशन इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मैप के जरिए सांपों की लोकेशन दिखाई जाती है. यानी अगर किसी इलाके में पहले सांप देखा गया है, तो उसकी जानकारी यहां दर्ज रहती है. इससे यूजर को अंदाजा हो जाता है कि कौन-सी जगह ज्यादा जोखिम वाली है. यह फीचर खास तौर पर रात के समय या खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी हो सकता है. सांप कितना जहरीला है ये भी बताएगा ऐप इसके अलावा यह ऐप सांपों की पहचान में भी मदद करता है. कई बार लोग यह समझ नहीं पाते कि सामने दिख रहा सांप जहरीला है या नहीं. ऐसे में यह ऐप अलग-अलग सांपों की जानकारी और तस्वीरों के जरिए यूजर को समझने में मदद करता है. इससे घबराहट कम होती है और सही फैसला लेने में आसानी होती है. ऐप में सांप के काटने की स्थिति में क्या करना चाहिए, इसकी भी जानकारी दी गई है. इसमें आसान भाषा में बताया गया है कि तुरंत कौन-से कदम उठाने चाहिए और क्या गलती नहीं करनी चाहिए. यह जानकारी कई बार जान बचाने में अहम रोल निभा सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां तुरंत अस्पताल पहुंचना मुश्किल होता है. भारत के चार जहरीले सांपों पर फोकस करता है ये ऐप इस ऐप की सबसे खास बात यह है कि यह Big 4 यानी भारत के चार सबसे खतरनाक जहरीले सांपों पर फोकस करता है. इनमें कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं. यही वो सांप हैं जिनकी वजह से देश में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं. ऐप इन सांपों के बारे में आसान तरीके से जानकारी देता है, ताकि आम लोग भी उन्हें पहचान सकें. SERPENT ऐप में मैपिंग फीचर भी दिया गया है, जिससे यूजर यह देख सकते हैं कि उनके आसपास किन इलाकों में सांप देखे गए हैं या कहां ज्यादा खतरा है. यह फीचर खास तौर पर उन लोगों के लिए जरूरी है जो खेतों में काम करते हैं या रात में बाहर निकलते हैं. इससे लोग पहले से सावधान रह सकते हैं और जोखिम वाली जगहों से बच सकते हैं.  कई बार लोग डर के कारण गलत इलाज करने लगते हैं, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है. यह ऐप बताता है कि ऐसे समय में शांत रहना, तुरंत अस्पताल पहुंचना और सही फर्स्ट एड क्या है. SERPENT ऐप सिर्फ एक जानकारी देने वाला प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह एक सेफ्टी टूल की तरह काम करता है. खासकर उन लोगों के लिए जो सांपों के खतरे वाले इलाकों में रहते हैं, यह ऐप जान बचाने में भी मदद कर सकता है. इस तरह के ऐप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह जागरूकता बढ़ाता है. भारत जैसे देश में हर साल कई लोग सांप के काटने की वजह से प्रभावित होते हैं. ऐसे में अगर लोगों को पहले से सही जानकारी मिल जाए और वे सतर्क रहें, तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

बूंदी रायता क्यों हो सकता है वजन बढ़ने की वजह? जानें डाइटीशियन की चेतावनी

गर्मी का मौसम हो और लंच में करारी बूंदी डला हुआ रायता मिल जाए तो दिल खुश हो जाता है. गर्मी के दिन में लोग रायते में काली मिर्च और जीरा मिलाकर काफी चाव से खाते हैं. वहीं कई लोग जो वजन घटा रहे होते हैं वे भी रायते को हेल्दी ऑपशंस मानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, दही और बेसन से बनी बूंदी वाला रायता खाने से आपकी वेट लॉस जर्नी में रुकावट आ सकती है या फिर वो आपका वजन भी बढ़ा सकता है? हाल ही में एक  डायटिशियन ने बूंदी के रायता को हेल्दी समझने वालों की इस धारणा को गलत बताया है. उन्होंने खुलासा किया है कि बूंदी रायता जैसी चीजें, जो ऊपर से बहुत हेल्दी नजर आती हैं, असल में हिडन कैलोरीज देती हैं. क्यों बूंदी रायता सेहत के लिए हेल्दी नहीं? डॉ. गीतिका चोपड़ा ने एक पॉडकास्ट में बताया, लोग अक्सर इंडियन फूड्स में मौजूद हिडन कैलोरीज को पहचान नहीं पाते. बूंदी को डीप फ्राई करके तैयार किया जाता है जिससे इसमें फैट और कैलोरी की मात्रा काफी अधिक होती है. जब आप इसे दही में मिलाते हैं तो यह एक हाई-कैलोरी डिश बन जाती है. यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश्ड रिसर्च के मुताबिक, लोग जब किसी अनहेल्दी या फ्राइड चीज को हेल्दी चीज (दही) के साथ देखते हैं तो उन्हें लगता है कि पूरी डिश ही लो-कैलोरी है. साइकोलॉजी में इसे नेगेटिव कैलोरी इल्यूजन कहा जाता है जो वजन बढ़ने की एक बड़ी वजह बनता है. क्या है बेहतर ऑपशंस? डॉक्टर ने बताया, यदि आप सच में डाइजेशन को बेहतर करना और वेट लॉस करना चाहते हैं तो स्मार्ट न्यूट्रिशन अवेयरनेस बहुत जरूरी है. आप बूंदी रायते की जगह खीरे का रायता, लौकी का रायता या पुदीने का रायता खा सकते हैं. हेल्थलाइन की रिपोर्ट्स भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि खीरे या सब्जियों वाले रायते में वॉटर कंटेंट और फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है. इस तरह के छोटे-छोटे स्मार्ट स्वाइप्स आपको अनहेल्दी ईटिंग मिस्टेक्स से बचाते हैं और वेट लॉस गोल को हासिल करने में मदद करते हैं.

अलग-अलग रोटियों की कैलोरी और पोषण: वजन घटाने के लिए कौन-सी रोटी है सबसे बेहतर?

 भारतीय खाने में रोटी सबसे ज्यादा खाई जाने वाली चीजों में से एक है. देशभर में गेहूं, ज्वार, मक्का और बाजरे जैसे अलग-अलग अनाजों से रोटियां बनाई जाती हैं. हर रोटी का स्वाद और पोषण अलग-अलग होता है. ऐसे में हेल्दी डाइट फॉलो करने वाले या वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता हैं कि कौन-सी रोटी में कितनी कैलोरी होती है और वह वह कितनी हेल्दी है. आज हम आपको अलग-अलग तरह की रोटियों में मौजूद कैलोरी और उनके पोषण के बारे में बताएंगे. गेहूं की रोटी गेहूं की रोटी में फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है. लगभग 40 ग्राम की एक गेहूं की रोटी में लगभग 120 कैलोरी होती है. यह शरीर को बैलेंस पोषण और लंबे समय तक एनर्जी देने में मदद करती है. ज्वार की रोटी ज्वार ग्लूटेन-फ्री अनाज माना जाता है, जिसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. 40 ग्राम ज्वार की रोटी में लगभग 100 कैलोरी होती है. इसमें मौजूद फाइबर डाइजेशन सिस्टम को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. मक्के की रोटी मक्के की रोटी में ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो आंखों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. 40 ग्राम मक्के की रोटी में करीब 110 कैलोरी होती है. यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने में मदद कर सकती है. रागी रोटी रागी में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा इसमें कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन जैसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं. लगभग 40 ग्राम रागी रोटी में करीब 90 कैलोरी होती है. यह हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती है, इसलिए महिलाओं के लिए इसे काफी फायदेमंद माना जाता है. बेसन की रोटी बेसन में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है. लगभग 40 ग्राम बेसन की रोटी में करीब 115 कैलोरी होती है. यह शरीर को प्रोटीन देने के साथ मसल्स रिकवरी में भी मदद करती है. बाजरे की रोटी बाजरा प्रोटीन और कई जरूरी विटामिन व मिनरल्स से भरपूर होता है. इसमें मैग्नीशियम, आयरन और फोलेट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. 40 ग्राम बाजरे की रोटी में करीब 105 कैलोरी होती है. यह शरीर में आयरन की कमी को दूर करने में मदद करती है और सर्दियों में शरीर को गर्म रखने में भी फायदेमंद मानी जाती है.  

‘हाय’ का जवाब भी बन सकता है खतरा: साइबर फ्रॉड को लेकर I4C की चेतावनी

वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और SMS के जरिए कई मैसेज आते हैं. बहुत से लोग हाय-हेल्लो आदि लिखते हैं और उसके बाद चैटिंग शुरू हो जाती है. लेकिन हर एक हाय का जवाब देना जरूरी नहीं है, ये आपको भारी नुकसान पहुंचा सकता है. सरकारी एजेंसी के तहत काम करने वाले साइबर दोस्त I4C ने एक जरूरी पोस्ट किया है. पोस्ट में बताया है कि हाय का रिप्लाई करने से पहले जरा सोचिए. स्कैमर्स अक्सर सिंपल मैसेज करके भी आखिर में जाकर शिकार बना सकते हैं और बैंक खाता तक खाली कर सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि अनजान शख्स से ऑनलाइन दोस्ती करते समय ध्यान रखें कि वह बैंक खाते या पर्सनल डिटेल्स आदि को चोरी भी कर सकता है. साइबर दोस्त ने पोस्ट करके बताया है कि साइबर ठग भोले-भाले लोगों को शिकार बनाने के लिए सिंपल मैसेज, फेक बैंकिंग अलर्ट, रिवॉर्ड्स अलर्ट या फिर साधारण बातचीत के बाद भी जाल में फंसा सकते हैं. साइबर दोस्त I4C का पोस्ट सावधानी के लिए साइबर दोस्त ने बताया है कि अनजान मैसेज और संदिग्ध लिंक से सावधान रहना चाहिए. खतरनाक लिंक आपको फेक पोर्टल पर ले जा सकते हैं, जहां से आपका बैंक खाता तक खाली हो सकता है. साइबर स्कैमर्स इन तरीकों से बनाते हैं शिकार     अनजान नंबर्स से आने वाले मैसेज पर तुरंत विश्वास ना करें.     संदिग्ध लिंक रिसीव होने पर भूलकर भी उसपर क्लिक ना करें.     फ्री गिफ्ट, बैंक अलर्ट और क्लेम अलर्ट जैसे मैसेज को वेरिफाई किए बना ओपन ना करें.     बैंकिंग डिटेल्स, वन टाइम पासवर्ड (OTP) या पर्सनल इन्फॉर्मेशन को शेयर ना करें. साइबर दोस्त ने पोस्ट करके बताया है कि साइबर ठगी होने के बाद उसकी तुरंत रिपोर्ट करें. जितनी जल्दी रिपोर्ट होगी, रकम रिकवरी करने में उतनी ही ज्यादा आसानी होगी.

ऐपल ने लॉन्च किया स्लीप एपनिया नोटिफिकेशन फीचर: अब Apple Watch से मिलेगी नींद की बीमारी की जानकारी

अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी ऐपल ने भारत में न्यू हेल्थ फोक्स्ड फीचर को पेश कर दिया है. इस न्यू फीचर की मदद से यूजर्स को खर्राटे से संबंधित सांस वाली बीमारी की जानकारी मिलेगी, जिसको स्लीप एपनिया कहा जाता है. कंपनी ने अपनी ऐपल वॉच में स्लीप एप्निया नोटिफिकेशन फीचर को शामिल किया है, जो यूजर्स की हेल्थ को ट्रैक करेगा और उसकी जानकारी देगा. साथ ही कंपनी ने बताया है के एयरपॉड्स प्रो 3 में क्लिनिकली वैलिडेटेड हियरिंग टेस्ट फीचर दिया गया है. इसकी मदद से यूजर्स अपने घर बैठे ही सुनने की क्षमता की जांच कर सकेगा. इंसानों की जिंदगी अहम है नींद कंपनी ने बताया है कि नींद इंसानों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है. इसका असर इंसानों की जिंदगी और सेहत दोनों पर ही दिखाई देता है. स्लीप एप्निया क्या होती है? स्लीप एप्निया, एक आम बीमारी है. इसमें सोते समय कुछ पल के लिए सांस रुक जाती है, जिससे शरीर में पर्याप्त आक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती है. जानकारी के मुताबिक, एक अनुमान है कि पूरी दुनिया में इस बीमारी से 1 अरब से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. स्लीप एप्निया की वजह से होने वाले नुकसान स्लीप एप्निया का अगर समय रहते इलाज ना कराया जाए तो यह गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकता है. स्लीप एप्निया की वजह से हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज और दिल से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं. स्लीप एप्निया को कैसे करता है ट्रैक ऐपल वॉच के अंदर एक खास फीचर शामिल किया है, जिसका काम ब्रीदिंग डिस्टर्बेसेज को चेक करना है. यह फीचर एक्सेलेरोमीटर की मदद से कलाई की छोटी-छोटी एक्टिविटियों को पहचानकर नींद के दौरान सांस लेने के दौरान सामान्य पैटर्न में होने वाली रुकावटों को पहचानता है. 30 दिन में ऐपल वॉच इन डेटा का एनालाइज करेगा और अगर स्लीप एप्निया के लगातार संकेत मिलते हैं, तो उसके बाद यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजा जाएगा. इसके बाद शख्स को डॉक्टर से संपर्क करना होगा और आगे की जांच करानी होगी.

भीषण गर्मी में राहत: कोंकण की पारंपरिक ‘फूटी कढ़ी’ बन सकती है नेचुरल कूलर

चिलचिलाती धूप, गर्म हवा के थपेड़े और 45 डिग्री के पार जाता तापमान… देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. घर से बाहर निकलते ही शरीर पसीने से भर जाता है, जिसकी वजह से कुछ ही देर में थकान होने लगती है. धूप गला सुखाकर सारी एनर्जी छीन लेती है. इस तपिश भरे मौसम में लोगों को सिर्फ AC या ठंडा पानी पीने से ही राहत नहीं मिलती है. ऐसे में वो लोग देसी चीजों से शरीर को अंदर से ठंडा रखने की कोशिश करते हैं. अगर आप भी गर्मी से परेशान हैं, तो मशहूर शेफ संजीव कपूर की बताई कोंकण की ट्रेडिशनल ड्रिंक फूटी कढ़ी आपके लिए किसी  नेचुरल कूलर की तरह काम करेगी. शेफ संजीव ने बताया कि पीढ़ियों से कोंकण इलाके में लोग गर्मियों के दौरान इस हल्की खट्टी और रिफ्रेशिंग ड्रिंक को पीते आ रहे हैं. कोकुम से बनने वाली ये देसी ड्रिंक न सिर्फ स्वाद में शानदार होती है, बल्कि शरीर को ठंडा रखने और गर्मी से राहत दिलाने में भी मददगार मानी जाती है. फूटी कढ़ी बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स:     15-20 कोकुम की पंखुड़ियां     2-3 हरी मिर्च बारीक कटी हुई     2-3 बड़े चम्मच ताजा हरा धनिया     1 बड़ा चम्मच चीनी     स्वादानुसार नमक     2 छोटी चम्मच घी     1 छोटी चम्मच राई     आधी छोटी चम्मच हींग बनाने का तरीका:  1. सबसे पहले कोकुम की पंखुड़ियों को एक बाउल में डालें और उसमें 3 कप पानी मिलाकर लगभग 35-40 मिनट के लिए छोड़ दें. 2. अब इस पानी को छान लें. इसमें हरी मिर्च, धनिया, चीनी और नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. 3. एक पैन में घी गर्म करें. उसमें राई डालें. जब राई चटकने लगे तो उसके बाद उसमें हींग डालकर हल्का सा भून लें. 4. इस तड़के को कोकुम वाले मिक्स में डालें और अच्छी तरह मिला लें. 5. अब इसे गिलास में बर्फ डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें. गर्मियों में क्यों फायदेमंद है ये ड्रिंक? 1. कोकुम की तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए ये गर्मी और लू से राहत दिलाकर शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद कर सकता है. 2. गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी ड्रिंक्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती हैं. 3. फूटी कढ़ी एक बहुत ही हल्की ड्रिंक है और पचाने में आसान होती है. इसे खाने के साथ लेने से पेट को आराम मिल सकता है. 4. तेज गर्मी में होने वाली थकान और सुस्ती को कम करने के लिए भी ये ड्रिंक काफी फायदेमंद मानी जाती है.