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अनानास के छिलकों से बनाएं हेल्दी ड्रिंक ‘टेपाचे’, गर्मियों में मिलेगा गजब का फायदा

अनानास खाने में बहुत अच्छा लगता है और गर्मियों में लोग उसका जूस भी खूब पीते हैं. मगर अनानास के छिलकों को अक्सर लोग कूड़ा समझकर फेंक देते हैं. अनानास के छिलके असल में पोषण से भरपूर होते हैं और यह हमारी गट हेल्थ के लिए गर्मियों में किसी जादू की तरह काम करते हैं. अगर आप भी अनानास के छिलकों को कचरा समझकर फेंक देते थे, तो अब से गलती न करें. अनानास के छिलकों से आप समर स्पेशल ड्रिंक बना सकते हैं, जो टेस्टी होने के साथ-साथ पेट के लिए भी फायदेमंद साबित होगी. अनानास के छिलकों से बनने वाली इस ड्रिंक को टेपाचे (Tepache) कहते हैं. यह मैक्सिकन फर्मेंटेड ड्रिंक अनानास के छिलकों और उसके सख्त हिस्से यानी कोर से बनाई जाती है. यह ड्रिंक हल्की फिजी होती है और कई लोग इसे सोडा का हेल्दी ऑप्शन मानते हैं. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए अनानास का वो हिस्सा इस्तेमाल होता है जिसे लोग अक्सर फेंक देते हैं. कैसे बनाते हैं टेपाचे अनानास के छिलकों, पानी और गुड़ से इस ड्रिंक को तैयार किया जाता है, इसे कुछ दिनों तक फर्मेंट होने दिया जाता है, जिससे इसमें हल्की नेचुरल गैस बन जाती है. इसका स्वाद हल्का मीठा, खट्टा और बेहद रिफ्रेशिंग होता है. टेपाचे के लिए सामग्री 1 अनानास के छिलके और कोर 2 लीटर पानी 1 कप गुड़ 1 दालचीनी स्टिक झटपट इस तरीके से बनाएं टेपाचे     सबसे पहले अनानास के छिलकों को अच्छी तरह धो लें.     एक बड़े कांच के जार में पानी, गुड़, दालचीनी और अनानास के छिलके डालें.     जार को ढककर 2-3 दिन के लिए कमरे के तापमान पर रखें.     जब इसमें हल्की फिज आने लगे, तब इसे छानकर फ्रिज में ठंडा करके पिएं. सेहत के लिए फायदेमंद है टेपाचे अनानास के छिलकों से बनने वाली ड्रिंक टेपाचे पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम देती है. अनानास में ब्रोमेलिन नाम का एंजाइम पाया जाता है, जो डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है.वहीं फर्मेंटेशन प्रोसेस इस ड्रिंक में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाती है, जो गट हेल्थ के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. गर्मियों में भारी या गैस वाली ड्रिंक्स की जगह इसे पीना शरीर को हल्का महसूस करा सकता है. प्रो टिप: टेपाचे बनाते समय कांच के जार का ही इस्तेमाल करें और इसे सीधा धूप में न रखें. 2-3 दिन बाद जब इसमें छोटे बुलबुले दिखने लगें, तो समझ जाइए कि आपकी प्रोबायोटिक ड्रिंक तैयार है.

गंजेपन से परेशान लोगों के लिए नुस्खा: प्याज और सरसों तेल से उग सकते हैं नए बाल

 गिरते बाल और गंजापन आजकल हर उम्र के लोगों के लिए काफी बड़ी समस्या बना हुआ है. इससे बचने के लिए या फिर बालों को वापिस उगाने के लिए लोग महंगे ट्रीटमेंट और शैंपू के पीछे भागते हैं लेकिन फिर भी मनमुताबिक रिजल्ट नहीं मिलते. सेलिब्रिटी हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने एक इंटरव्यू के दौरान इस समस्या के बारे में बताया कि यदि आपके बाल झड़ रहे हैं या आप नए बाल उगाना चाहते हैं तो महंगे प्रोडक्ट्स के बजाय अपनी रसोई में मौजूद चीजों पर भरोसा करें. उनके अनुसार, बालों की ग्रोथ के लिए सही पोषण और सही तेल का चुनाव सबसे जरूरी है. प्याज और लहसुन का जादू हेयर स्टाइलिस्ट ने बताया कि बालों को दोबारा उगाने के लिए प्याज का रस सबसे ज्यादा असरदार हो सकता है. प्याज में मौजूद सल्फर स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और हेयर फॉलिकल्स को एक्टिव करता है. उन्होंने लहसुन के इस्तेमाल पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक, जिन चीजों में 'आग' यानी थोड़ी तेजी या तीखापन होता है, वे स्कैल्प को स्टिमुलेट करने में मदद करती हैं. लहसुन का अर्क बालों की जड़ों में जाकर उन्हें मजबूती देता है और नए बाल उगने की प्रोसेस को तेज करता है. सरसों तेल की अहमियत आजकल लोग फैंसी और खुशबूदार तेलों के पीछे भागते हैं लेकिन स्टाइलिस्ट के अनुसार सरसों का तेल बालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह तेल नेचुरल कंडीशनर की तरह काम करता है और बालों को अंदरूनी पोषण देता है. अगर आप रोज बाल धोते हैं तो हल्का तेल रोज लगाना चाहिए. हालांकि उन्होंने साफ किया कि प्याज के रस और सरसों तेल का कॉम्बिनेशन हफ्ते में कम से कम 2 बार जरूर इस्तेमाल करना चाहिए. इससे बालों का झड़ना बंद होता है और उनकी चमक वापस आती है. फॉलो करें ये रूटीन इंटरव्यू में जावेद ने सलाह दी कि बालों की केयर को लेकर आपको डिसिप्लिन बनाना होगा. हफ्ते में 2 बार प्याज का रस और लहसुन का पेस्ट बालों की जड़ों में अच्छे से लगाएं. इसके बाद सरसों तेल से मसाज करें. यह रूटीन न केवल नए बाल उगाने में मदद करेगा बल्कि जो बाल मौजूद हैं उन्हें भी घना और काला बनाए रखेगा. अगर आप भी बालों की समस्या से जूझ रहे हैं तो यह घरेलू और सस्ता नुस्खा आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है.  

कई रोगों की अचूक दवा है फलों और सब्जियों का रस

प्रकृति ने ऐसी कई सब्जियां और फल हमें दिये हैं जिनके रस के निरन्तर प्रयोग से कैंसर, कुष्ठ रोग जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति मिल जाती है बशर्ते हम उनका सेवन विशेषज्ञों के परामर्श से करें। हर व्यक्ति मौसमी फल और सब्जियों के रस से स्वस्थ रह सकता है। आंवले का रस आंवले में विटामिन सी सबसे अधिक पाया जाता है। आंवले का ताजा रस मूत्र संबंधी सभी शिकायतों में उपयोगी रहता है। दो-तीन महीनों तक आंवलों का ताजा रस पीने से दीर्घ की निर्बलता में लाभ मिलता है। आंखों की रोशनी बढ़ाने, बहरापन दूर करने में भी यह रस लाभप्रद है। साथ ही एसिडिटी कम करने, गठिया, सफेद बालों का बढना रोकने, रक्त विकार, पीलिया, एवं हृदय रोगों में भी आंवले का जूस बहुत फायदेमंद होता है। चुकन्दर का रस चुकन्दर में पाया जाने वाला बिटिन नामक खास तत्व टयूमर एवं कैंसर की प्रकृति को शरीर से नष्ट करता है। यह तत्व शरीर में रोगों से लडने की क्षमता बढ़ाता है। इसीलिए खून की कमी होने पर एक कप की मात्रा में दिन में तीन बार इसके रस को पीने से लाभ होता है। गुर्दे संबंधी रोगों को दूर करने के लिए एक कप चुकन्दर का रस पीने से फायदा होता है। यह दिमागी गर्मी में भी फायदा करता है। गाजर का रस गाजर में विटामिन ए बहुतायत से पाया जाता है। इसीलिए गाजर का रस आंखों हेतु काफी फायदेमंद होता है। दो किलो गाजर का जूस एक-एक कप करके दिन में कई बार पीने से प्राथमिक अवस्था का कैंसर ठीक हो जाता है। गाजर के पत्तों का चार-चार बूंद रस गरम करके कान एवं नाक में डालने से सिरदर्द ठीक हो जाता है। निम्न रक्तचाप वाले रोगों के लिए भी यह रस फायदेमंद होता है। टिंडे का रस उच्च रक्तचाप वाले रोगों के लिए टिंडे के रस का सेवन करने से रक्तचाप सामान्य रहता है। हरी सब्जियों का रस बथुवा, पालक, मैथी, चैलाई, मूली इत्यादि सब्जियों में आयरन के अलावा कैल्शियम के लिए कच्चा ही प्रयोग में लाना ठीक रहता है। मिक्सी में थोड़े पानी के साथ पीसकर रस निकाला जाता है। मूली का रस पीलिया, बथुए का रस पथरी, पालक का रस पित्त और मैथी का रस पेचिश रोगों में काफी लाभदायक होता है। पेट संबंधी रोग भी उक्त रसों से दूर होते हैं। टमाटर का रस पके हुए टमाटरों का रस सुबह और शाम 20 ग्राम ताजे और कुनकुने पानी के साथ पीने से फोड़े फुंसी, एवं खुजली इत्यादि में लाभ होता है। इस रस के सेवन से मधुमेह रोगी के मूत्र में शक्कर की मात्रा सामान्य हो जाती है। इसके रस का बुखार में सेवन करने से बुखार ठीक हो जाता है। मुंह के छालों तथा मसूड़ों से रक्त बहने पर टमाटर के रस को पानी में मिलाकर कुल्ला करते रहने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं और मसूड़ों से ख्ूान आना भी रूक जाता है। फूलगोभी का रस फूलगोभी के पत्तों को पकाकर खाने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है। इसके पत्तों को आंखों पर लगाने से आंखों की लाली ठीक हो जाती है। गला बैठ गया हो तो इसके पत्तों और डंठल को पानी में उबालकर गरारे करने से गला ठीक हो जाता है। प्याज का रस एक छोटे चम्मच प्याज के रस में बराबर पानी मिलाकर छोटे बच्चों को दिन में तीन बार पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। बीस ग्राम प्याज के रस में पचास ग्राम मिसरी मिलाकर प्रातः काल बीस दिन तक सेवन करने से पथरी गलकर निकल जाती है। प्याज के रस की दो बूंदें कान में डालते रहने से बहरापन दूर हो जाता है। पीलिया रोग में दस ग्राम सफेद प्याज का रस, पांच ग्राम हल्दी, दस ग्राम गुड़ मिलाकर सुबह-शाम खिलाने से लाभ होता है। सेब का रस सेब में विटामिन बी, फास्फोरस एवं लौह तत्व अधिक पाये जाते हैं। इसका रस पेट के रोगों में फायदा करता है। बुखार, अरूचि, अजीर्ण, हृदय एवं उदर रोगों में काफी लाभकारी होता है।  

हर उम्र में अलग होती है Vitamin-D की जरूरत, डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें

क्या आप जानते हैं कि भारत में लगभग 80% आबादी विटामिन-डी की कमी से जूझ रही है? हमारी भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और धूप से बढ़ती दूरी इस समस्या का मुख्य कारण है। शरीर में विटामिन-डी की कमी से सिर्फ हड्डियां ही कमजोर नहीं होतीं, बल्कि बाल झड़ना, कमजोर इम्युनिटी और डिप्रेशन जैसी कई गंभीर बीमारियां भी घेरने लगती हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि एक दिन में हमारे शरीर को कितने विटामिन-डी की जरूरत होती है। आइए विटामिन-डी की सही मात्रा और इसकी कमी पूरी करने वाले फूड्स के बारे में जानें। रोज कितनी मात्रा में विटामिन-डी चाहिए? विटामिन-डी की जरूरत उम्र के हिसाब से हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है। इसकी मात्रा को आमतौर पर IU में मापा जाता है।     शिशु (0 से 1 वर्ष)- छोटे बच्चों को हर दिन लगभग 400 IU की जरूरत होती है।     बच्चे और वयस्क (1 से 70 वर्ष)- इस  उम्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को हर दिन लगभग 600 IU विटामिन-डी लेना चाहिए।     बुजुर्ग (70 वर्ष से ज्यादा)- उम्र बढ़ने के साथ शरीर की विटामिन अब्जॉर्ब करने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए उन्हें ज्यादा विटामिन-डी, लगभग 800 IU की जरूरत होती है। शरीर में विटामिन-डी बढ़ाने के लिए डाइट हालांकि, विटामिन-डी का सबसे बेहतरीन सोर्स सूरज की रोशनी ही है, लेकिन कुछ फूड्स भी विटामिन-डी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं-     फैटी फिश- मछली विटामिन-डी के सबसे बेहतरी सोर्स में से एक है। ट्राउट और साल्मन न केवल ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर है, बल्कि विटामिन-डी का भी पावरहाउस है।     अंडे- अंडे का पीला भाग विटामिन-डी का अच्छा सोर्स है। शाकाहारी लोग जो अंडा खाते हैं, उनके लिए विटामिन-डी बढ़ाने का यह एक बेहतरीन तरीका है।     सफेद मशरूम- मशरूम एकमात्र ऐसा प्लांट बेस्ड सोर्स है, जिसमें प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी होता है। हालांकि, मशरूम खरीदते समय UV-treated या High in Vitamin D लेबल वाले मशरूम चुनें, क्योंकि ये सूरज की रोशनी या यूवी किरणों के संपर्क में आने के कारण ज्यादा पोषक होते हैं।     फोर्टिफाइड दूध- बहुत कम फूड आइटम्स में प्राकृतिक रूप से यह विटामिन होता है, इसलिए कई डेयरी और नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स को फोर्टिफाई किया जाता है यानी ऊपर से विटामिन-डी मिलाया जाता है। ऐसे डेयरी प्रोडक्ट्स चुनें, जिनपर फोर्टिफाइड होने का लेबल हो।     ग्रीक योगर्ट- दही या ग्रीक योगर्ट न केवल प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, बल्कि कई ब्रांड इसे विटामिन-डी के साथ फोर्टिफाई भी करते हैं। यह पाचन के साथ-साथ हड्डियों की मजबूती के लिए भी शानदार है।  

फेक ऐप, फ्रॉड कॉल और मोबाइल चोरी पर Google का बड़ा वार, यूजर्स को मिलेगी ट्रिपल सुरक्षा

 नई दिल्ली गूगल ने एंड्रॉयड शो:आईओ एडिशन का लाइवस्ट्रीम किया है, जो कंपनी के एनुअल कॉन्फ्रेंस गूगल आईओ 2026 से करीब एक सप्ताह पहले किया है. गूगल ने एंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए आने वाले अपकमिंग फीचर और टूल्स की जानकारी दी है. गूगल की एनुअल कॉन्फ्रेंस 19-20 मई को होगी।  गूगल अब बैंकिंग स्कैम कॉल्स से बचाने के लिए न्यू फीचर तैयार कर रहा है. बैंकिंग स्कैम  में साइबर ठग खुद की पहचान बैंक का कर्मचारी बताकर लोगों से अकाउंट की जानकारी हासिल करते हैं, ताकि उनके पैसे चुरा सकें. स्पूफिंग टेक्नोलॉजी की मदद से अक्सर लोगों को लगता है कि शायद बैंक से ही कॉल है।  गूगल ने अपने टूल को बेहतर करने के लिए कुछ चुनिंदा बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ पार्टनरशिप कर रहा है. बैंकिंग फ्रॉड को रोकने के लिए कंपनी स्पूफिंग प्रोटेक्शन फीचर लेकर आ रही है।  फर्जी कॉल्स को खुद का काट देगा  यह फीचर पार्टनर बैंक के नाम पर यूज होने वाले फर्जी कॉल्स को अपने आप काट देगा. साथ ही यूजर्स को एक नोटिफिकेशन भी मिलेगा कि वह संभवतः एक स्कैम कॉल्स थी।   गूगल का यह न्यू फीचर सिर्फ उन यूजर्स को मिलेगा, जिनका स्मार्टफोन एंड्रॉयड 11 और उससे ऊपर के डिवाइसों के लिए रोलआउट किया जाएगा. कंपनी ने बताया है कि इस साल के अंत तक कई बैंकों को शामिल कर लिया जाएगा।  लाइव थ्रेड डिटेक्शन फीचर  गूगल अपने लाइव थ्रेड डिटेक्शन फीचर को भी एक्सपेंड करने का ऐलान कर चुका है. यह फीचर ऐप्स के व्यवहार को एनालाइज करेगा और अगर कोई संदिग्ध एक्टिविटी मिलेगी तो उसे पकड़ा जा सकेगा. ऐसे में साइबर ठगों के ऐप्स पर लगाम लगेगी।  गूगल इसके लिए डाइनेमिक सिग्नल मॉनिटरिंग नाम की तकनीक का इस्तेमाल करती हैं. ये टेक्नोलॉजी किसी भी ऐप के द्वारा किए गए संदिग्ध पैटर्न और गतिविधियों को पहचान सकता है. साथ ही SMS फॉरवर्डिंग जैसी एक्टिविटी को भी देखता है।  डिवाइस चोरी होने से बचाएगा  गूगल एक और नया फीचर लेकर आ रहा है, जिसकी मदद से डिवाइस को चोरी से बचाया जा सकेगा. एक बार फोन को लोस्ट मार्क कर दिया गया तो चोर तब तक फोन का यूज नहीं कर पाएंगे जब तक उसको बायोमेट्रिक तरीके से अनलॉक नहीं किया जाता है. यह फीचर Android 17 डिवाइसों में डिफॉल्ट रूप से ऑन मिलेगा।  ऐप परमिशन और लोकेशन कंट्रोल करेगा  गूगल एक नया प्राइवेसी फीचर भी ला रहा है, जिसमें एक बटन होगा, जिसकी मदद से यूजर किसी ऐप को केबल तक अपनी सटीक लोकेशन देगा जब तक वह ऐप ओपन रहेगा। 

WhatsApp Plus: नया सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च

WhatsApp अब सिर्फ मैसेज भेजने वाला ऐप नहीं रहना चाहता. कंपनी अब इसे एक प्रीमियम प्लेटफॉर्म में बदलने की तैयारी कर रही है. अब कंपन WhatsApp Plus ला रही है. ये दरअसल एक सब्सक्रिप्शन सर्विस है जिसके लिए यूजर्स को पैसे देने होंगे. फिलहाल ये सब्सक्रिप्शन प्लान चुनिंदा आईफोन यूजर्स के लिए रोलआउट होना शुरू हो गया है. पिछले कई महीनों से इसकी चर्चा बीटा वर्जन में हो रही थी, लेकिन अब पहली बार कुछ यूजर्स को इसका एक्सेस मिलने लगा है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि काफी समय तक एक फर्जी WhatsApp Plus वायरल होता रहा था. ये ऐप यूजर्स को एक्स्ट्रा फीचर्स दिलाने का दावा करता था, लेकिन बाद में य स्कैम ऐप निकला. लेकिन अब कंपनी खुद ही WhatsApp Plus ला रही है. कंपनी खुद ही लोगों को पहले WhatsApp Plus यूज करने से मना करती रही. कई यूजर्स के अकाउंट परमानेंट ब्लॉक भी हो गए. बहरहाल, कंपनी का नया WhatsApp Plus फीचर सिर्फ कुछ आईफोन यूजर्स को दिख रहा है और धीरे-धीरे बाकी लोगों तक पहुंचाया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन लोगों के पास WhatsApp का लेटेस्ट iOS वर्जन है, उन्हें सेटिंग्स में इसका ऑप्शन दिख सकता है. पैसे देकर मिलेगा क्या? व्हाट्सऐप प्लस का पूरा फोकस ऐप को ज्यादा पर्सनल और कस्टमाइज्ड बनाने पर है. यानी मैसेजिंग और कॉलिंग जैसी बेसिक सुविधाएं अभी भी मुफ्त रहेंगी, लेकिन जो लोग ऐप का लुक और फीचर्स बदलना चाहते हैं, उन्हें एक्स्ट्रा चीजें मिलेंगी. इस नए प्लान में यूजर्स को 18 नए थीम कलर मिलेंगे. अभी व्हाट्सऐप का ज्यादातर इंटरफेस हरे रंग का होता है, लेकिन प्लस सब्सक्रिप्शन के बाद लोग पर्पल, ब्लू, रेड, यलो और कई दूसरे रंग चुन पाएंगे. ऐप के आइकन भी बदले जा सकेंगे. कंपनी करीब 14 नए ऐप आइकन देने वाली है. नए थीम्स, नए स्टिकर्स इसके अलावा प्रीमियम स्टिकर्स भी मिलेंगे जिनमें एनिमेटेड इफेक्ट होंगे. यानी स्टिकर भेजने का एक्सपीरियंस थोड़ा ज्यादा इंटरैक्टिव और विजुअल होगा. कंपनी नए रिंगटोन भी दे रही है ताकि व्हाट्सऐप कॉल बाकी ऐप्स से अलग महसूस हो. एक बड़ा बदलाव पिन चैट्स में देखने को मिलेगा. अभी आम यूजर्स सिर्फ 3 चैट पिन कर सकते हैं, लेकिन WhatsApp Plus लेने के बाद 20 चैट तक पिन की जा सकेंगी. जिन लोगों के पास बहुत ज्यादा काम या बिजनेस चैट्स होती हैं, उनके लिए यह फीचर उपयोगी माना जा रहा है. व्हाट्सऐप ग्रुपिंग और चैट मैनेजमेंट पर भी काम कर रहा है. उदाहरण के लिए अगर किसी ने ऑफिस नाम से एक चैट लिस्ट बनाई है, तो वह एक साथ सभी ऑफिस चैट्स का थीम, नोटिफिकेशन साउंड और कॉल ट्यून बदल सकेगा. अभी यह सब अलग-अलग करना पड़ता है. 300 रुपये प्रति माह सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कीमत को लेकर हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोप में इसकी कीमत करीब 2.49 यूरो प्रति महीना रखी गई है. यानी भारतीय रुपये में लगभग 280 रुपये के आसपास. अलग-अलग देशों में कीमत अलग हो सकती है. कुछ जगहों पर कंपनी ट्रायल भी दे सकती है. हालांकि अभी भारत में इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट सामने नहीं आई है. लेकिन टेक रिपोर्ट्स मान रही हैं कि आने वाले हफ्तों या महीनों में यह ज्यादा यूजर्स तक पहुंच सकता है. दिलचस्प बात यह भी है कि मेटा अब धीरे-धीरे अपने सभी प्लेटफॉर्म पर पेड फीचर्स बढ़ा रहा है. इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पहले से सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रहे हैं. अब व्हाट्सऐप भी उसी दिशा में जाता दिख रहा है. फ्यूचर में जरूरी फीचर्स भी पेड कर सकती है कंपनी इस नए मॉडल को लेकर बहस भी शुरू हो गई है. कुछ लोग मानते हैं कि आज थीम और स्टिकर्स पैसे में मिल रहे हैं, लेकिन फ्यूचर में कहीं जरूरी फीचर्स भी पेड न हो जाएं. आम तौर पर कंपनियां पैसे कमाने के लिए ये स्ट्रैटिजी अपनाती आई हैं. नया सब्सक्रिप्शन ला कर फ्री में मिलने वाले जरूरी फीचर्स पेड कर देती हैं.

AI डीपफेक पर सरकार सख्त, 2 घंटे में कंटेंट हटाने का नया नियम लागू

दरअसल पिछले कुछ सालों में AI डीपफेक और फर्जी इंटीमेट तस्वीरों का मामला तेजी से बढ़ा है. कई लोगों की तस्वीरों को मॉर्फ करके अश्लील फोटो और वीडियो बनाए गए. सरकार सख्त, लेकिन कंपनियां अब भी कर रहीं हैं लापरवाही! खासकर महिलाओं और लड़कियों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. कई मामलों में ब्लैकमेलिंग, ऑनलाइन ट्रोलिंग और मानसिक उत्पीड़न तक की शिकायतें सामने आईं. AI टूल्स की वजह से अब किसी की तस्वीर लेकर कुछ ही मिनटों में नकली वीडियो या फोटो बनाना आसान हो गया है. इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने 2026 में आईटी रूल्स को और सख्त किया. नए नियमों के तहत अगर कोई यूजर किसी प्लेटफॉर्म पर गैर-सहमति वाली इंटीमेट फोटो या डीपफेक कंटेंट की शिकायत करता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को बहुत तेजी से कार्रवाई करनी होगी. कई मामलों में 2 घंटे के अंदर कंटेंट हटाने की बात कही गई है, जबकि सरकारी या कोर्ट ऑर्डर वाले मामलों में 3 घंटे के अंदर एक्शन लेना पड़ सकता है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक सराकरी ऑफिशियल्स ने कहा है कि अब करीब 75% ऐसे कंटेंट को शिकायत मिलने के दो घंटे के अंदर हटाया जा रहा है. पहले यही प्रक्रिया कई बार 24 घंटे से लेकर कई दिनों तक चलती थी. अब प्लेटफॉर्म्स को तेज मॉडरेशन सिस्टम, AI डिटेक्शन टूल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम बनानी पड़ रही है. सरकार ने AI कंटेंट पर लेबल भी किया था मैंडेटरी नए नियम सिर्फ कंटेंट हटाने तक सीमित नहीं हैं. सरकार चाहती है कि AI से बने कंटेंट को साफ तौर पर लेबल भी किया जाए ताकि लोग समझ सकें कि फोटो या वीडियो असली नहीं है. कई नियमों में यह भी कहा गया है कि सिंथेटिक या AI जनरेटेड मीडिया पर मार्किंग जरूरी होगी. एक बड़ा बदलाव यह भी है कि अब प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है. अगर कोई कंपनी शिकायत के बाद भी ऐसे कंटेंट को हटाने में लापरवाही करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. भारत सरकार का फोकस अब पहले हटाओ, बाद में जांच करो वाले मॉडल पर दिख रहा है क्योंकि डीपफेक कंटेंट बहुत तेजी से वायरल हो जाता है. रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पुराने नियमों में दिया गया समय बहुत लंबा था और तब तक ऐसा कंटेंट तेजी से वायरल हो जाता था. रिपोर्ट के मुताबिक नए नियमों के बाद इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स और दूसरे प्लेटफॉर्म्स ने अपनी मॉडरेशन टीम और AI सिस्टम को और मजबूत किया है ताकि डीपफेक, मॉर्फ्ड फोटो और रिवेंज पोर्न जैसे कंटेंट को जल्दी पकड़ा जा सके. सरकार का फोकस खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने वाले कंटेंट पर है. अधिकारियों ने यह भी माना कि सिर्फ AI पर भरोसा करना आसान नहीं है क्योंकि कई मामलों में गलत तरीके से भी कंटेंट फ्लैग हो सकता है. इसलिए कुछ मामलों में मानव समीक्षा भी की जाती है, जिससे थोड़ी देरी हो सकती है. लेकिन सरकार चाहती है कि ज्यादातर मामलों में तुरंत कार्रवाई हो ताकि पीड़ित को कम से कम नुकसान पहुंचे. ब्रिटेन में कंपनियों पर जुर्माना का प्रोविजन सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई देश अब इस तरह के कंटेंट पर सख्ती बढ़ा रहे हैं. ब्रिटेन में भी सरकार ने टेक कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर रिवेंज पोर्न या डीपफेक इंटीमेट कंटेंट को तय समय में नहीं हटाया गया तो भारी जुर्माना या प्लेटफॉर्म ब्लॉक तक हो सकता है. एक और बड़ी चिंता यह है कि AI टूल्स अब आम लोगों तक पहुंच चुके हैं. रिसर्च में सामने आया है कि हजारों ऐसे मॉडल इंटरनेट पर मौजूद हैं जिनसे किसी की फर्जी तस्वीरें बनाई जा सकती हैं. कई टूल इतने आसान हो चुके हैं कि बिना टेक्निकल जानकारी वाला व्यक्ति भी इन्हें इस्तेमाल कर सकता है. यही वजह है कि सरकारें अब सोशल मीडिया कंपनियों से सिर्फ शिकायत सुनने की उम्मीद नहीं कर रहीं, बल्कि पहले से ऐसे कंटेंट को पकड़ने वाली टेक्नोलॉजी लगाने का दबाव बना रही हैं. आने वाले समय में इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे प्लेटफॉर्म पर AI आधारित मॉनिटरिंग और ज्यादा बढ़ सकती है. हालांकि इस पर बहस भी शुरू हो गई है. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बहुत तेजी से कंटेंट हटाने के नियम का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है और इससे फ्री स्पीच पर असर पड़ सकता है. लेकिन दूसरी तरफ साइबर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि डीपफेक और गैर-सहमति वाले इंटीमेट कंटेंट को रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं क्योंकि इस

प्याज-अदरक शैंपू नहीं रोकते बाल झड़ना, जावेद हबीब ने बताई असली वजह

मार्केट में आजकल हेयर फॉल कंट्रोल करने के नाम पर अदरक, प्याज और नींबू वाले शैंपू की बाढ़ आई हुई है. हम लोग इन विज्ञापनों के झांसे में आकर महंगे प्रोडक्ट्स खरीद लेते हैं क्योंकि वो सोचने लगते हैं कि शैंपू में नेचुरल तत्व मिले हुए हैं जिससे रातों-रात बालों का झड़ना बंद हो सकता है. हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने इस बारे में एक पॉडकास्ट में बताया है कि क्या सच में ऐसे शैंपू काम करते हैं? उनके मुताबिक, अगर आप सही तरीके से बाल धोते हैं तो कोई भी प्रोडक्ट यूज कर सकते हैं. क्या कहते हैं जावेद हबीब? जावेद हबीब के अनुसार, लोग अक्सर यह गलती कर बैठते हैं कि किसी शैंपू में प्याज या अदरक है तो वह जादुई असर करेगा.लेकि बाल गिरना तब रुकता है जब आपका स्कैल्प साफ हो. यदि आप इन महंगे शैंपू की जगह साधारण साबुन का इस्तेमाल भी सही तरह से करें तो भी वैसा ही असर दिखेगा. आप बालों की नियमित सफाई करें भले ही आप महंगा शैंपू इस्तेमाल करें या सस्ता, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. फर्क पड़ता है कि आप अपने बालों को कितना साफ रखते हैं. क्या कहती हैं रिसर्च? इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स और रिसर्च भी जावेद हबीब की बात से काफी हद तक एग्री करती हैं. बालों के झड़ने के पीछे अक्सर स्कैल्प पर जमी गंदगी, तेल और इंफेक्शन होता है. जब आप बाल धोते हैं तो यह लेयर हट जाती है जिससे फॉलिकल्स बेहतर तरीके से सांस ले पाते हैं. Healthline के अनुसार, हालांकि क्लिनिकल स्टडीज में सीधे स्कैल्प पर प्याज का रस लगाने से बालों के दोबारा उगने की संभावना देखी गई है, लेकिन शैंपू जैसे धोए जाने वाले प्रोडक्ट्स में एक डाइल्यूटेड इंग्रीडिएंट के रूप में इसकी प्रभावशीलता पर एकमत नहीं है. अधिकतर शैंपू स्कैल्प पर इतने समय तक नहीं टिकते कि ऐसे तत्व गहराई तक जा सकें. Medical News Today के अनुसार, रिसर्चर्स का सुझाव है कि शैंपू का प्राइमरी फंक्शन स्कैल्प को साफ करना है. बालों का झड़ना अक्सर जेनेटिक्स, हार्मोन या मेडिकल कंडीशंस से जुड़ा होता है. सरफेस-लेवल के सफाई वाले प्रोडक्ट्स केवल तभी मदद कर सकते हैं जब समस्या स्कैल्प की हाइजीन या डैंड्रफ से जुड़ी हो. सफाई है असली चाबी अंत में, जावेद हबीब का मैसेज साफ है कि स्कैल्प की हेल्थ ही हेयर हेल्थ है. किसी भी चमत्कारिक इंग्रीडिएंट के पीछे भागने के बजाय, अपने बालों को रेगुलर धोने और उन्हें साफ रखने पर ध्यान दें. यदि आपका स्कैल्प साफ है तो बालों की जड़ें मजबूत रहेंगी. किसी भी शैंपू को चुनने से पहले यह देखें कि वह आपके बालों से धूल-मिट्टी और एक्स्ट्रा तेल को कितनी अच्छी तरह निकाल पा रहा है, न कि उसमें कौन सा मसाला डाला गया है.

खरबूजे के बीज नहीं कचरा, जानें ‘मगज’ के फायदे और कीमत

अक्सर ज्यादातर लोग फल खाते समय उसके छिलकों और बीजों को कचरा समझकर फेंक देते हैं. चाहे कोई तरबूज खा रहा हो या फिर खरबूजा उसके छिलकों और बीजों को फेंक ही देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि खरबूजे के जिन बीजों को आप डस्टबिन के हवाले कर देते हैं, वे असल में वाइट गोल्ड हैं? जी हां, बाजार में यही बीज 'खरबूजे के मगज' के नाम से 600 से 800 रुपये किलो तक बिकते हैं. इन बीजों को मिठाइयों से लेकर ग्रेवी बनाने तक में इस्तेमाल किया जाता है. इनका इस्तेमाल करके मिठाइयों और सब्जी की ग्रेवी में एक रॉयल टेक्शचर आता है, जो स्वाद को दोगुना कर देता है. ऐसे में खरबूजे के मगज को मिठाइयों और ग्रेवी की शान कहा जाता है. जिन बीजों को आप साफ करना झंझट भरा काम समझते हैं, उन्हें घर पर साफ करना बेहद आसान है. चलिए जानते हैं कि आप कैसे बेकार समझे जाने वाले इन बीजों से मगज बनाकर आप अपनी रसोई के खर्च को कम कर सकते हैं और पकवानों का स्वाद बढ़ा सकते हैं.   खरबूजे के बीजों से मगज निकालने का आसान तरीका घर पर मगज तैयार करने का तरीका बहुत आसान है, बस आपको इन स्टेप्स को फॉलो करना होगा: 1. बीजों को इकट्ठा करें: खरबूजा काटते समय चम्मच की मदद से बीजों वाले हिस्से को एक अलग कटोरे में निकाल लें. इसमें थोड़ा गूदा लगा रहे तो घबराएं नहीं, जब आप इन्हें साफ करेंगे तो वो आसानी से निकल जाएगा. 2. पानी से चिपचिपाहट दूर करें: बीजों वाले बर्तन में पानी भरें और हल्के हाथों से मसलकर उन्हें धोएं. हाथों से मसलने पर गूदा पानी के ऊपर तैरने लगेगा और बीज नीचे बैठ जाएंगे. इसके बाद बीजों को एक बारीक छलनी में डालकर नल के नीचे अच्छी तरह धोएं ताकि उनकी पूरी चिपचिपाहट खत्म हो जाए. 3. धूप में सुखाना है सबसे जरूरी: धुले हुए बीजों को एक सूती कपड़े या बड़ी प्लेट पर फैला दें. इन्हें कम से कम 1 से 2 दिन तक तेज धूप में सुखाएं. बीज जितने अच्छे से सूखेंगे, उनका छिलका उतनी ही आसानी से उतरेगा. 4. छिलका उतारने की जादुई ट्रिक: जब बीज सूखकर एकदम कड़क हो जाएंगे, तो उन्हें एक साफ कपड़े के बीच में रख लें. अब बेलन की मदद से बहुत हल्का दबाव देते हुए उन पर बेलन चलाएं. ध्यान रहे कि जोर नहीं लगाना है, वरना अंदर का मगज चूरा हो जाएगा. बस इतना दबाव दें कि ऊपर का छिलका चटक जाए. 5. मगज को करें स्टोर: छिलके हटाने के बाद उन्हें थाली में लेकर फटक लें. हल्का छिलका उड़ जाएगा और आपके पास सफेद मगज बच जाएंगे. इसे लंबे समय तक स्टोर करने के लिए हल्का सा ड्राई रोस्ट कर लें और एयरटाइट डिब्बे में भर कर रखें. मगज को इस तरह करें इस्तेमाल शाही ग्रेवी: अगर आप होटल जैसी गाढ़ी और क्रीमी ग्रेवी तैयार करना चाहते हैं, तो काजू के साथ इन बीजों को पीसकर डालें. ये शाही पनीर और मलाई कोफ्ता का स्वाद दोगुना कर देती है. हलवाई जैसी मिठाइयां: बेसन के लड्डू हों या गाजर का हलवा, अगर आप ऊपर से खरबूजे के बीज डालें तो उसे देखने और खाने दोनों में लाजवाब बना देते हैं. देसी एनर्जी ड्रिंक: गर्मियों में ठंडाई या शेक बनाते समय इसमें मगज पीसकर डालें, ये शरीर को ठंडक और ताकत देता है. रोस्टेड स्नैक्स: हल्का नमक और काली मिर्च डालकर भुने हुए मगज एक बेहतरीन और हेल्दी स्नैक का काम करते हैं.