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हाथों में बार-बार झुनझुनी और सुन्नपन को न करें नजरअंदाज, यह शरीर में छिपी इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

क्या आपके हाथों में बार-बार झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है? कई लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह शरीर का एक संकेत भी हो सकता है, जिसे समझना जरूरी है.  अक्सर यह समस्या तब महसूस होती है जब हम गलत पोजीशन में सो जाते हैं या लंबे समय तक एक ही स्थिति में हाथ रखते हैं. ऐसे में नसों पर दबाव पड़ता है या खून का प्रवाह कुछ समय के लिए कम हो जाता है, जिससे झुनझुनी होने लगती है. कब होती है दिक्कत? लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसके पीछे कोई खास कारण भी हो सकता है. theheartysoul की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे आम वजहों में से एक है कार्पल टनल सिंड्रोम, जिसमें कलाई की नस दब जाती है और अंगूठे, उंगलियों में झुनझुनी या दर्द होने लगता है. कभी-कभी समस्या कलाई में नहीं, बल्कि कोहनी या गर्दन से भी जुड़ी हो सकती है. नसों में कहीं भी दबाव आने से हाथ तक इसका असर पहुंच सकता है, जिससे झुनझुनी और कमजोरी महसूस होती है. ब्लड सर्कुलेशन और डायबिटीड भी कारण खराब ब्लड सर्कुलेशन भी इसका एक कारण हो सकता है.  ठंड में या अचानक तापमान बदलने पर उंगलियां सुन्न पड़ सकती हैं और रंग भी बदल सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, डायबिटीज जैसी बीमारियां भी नसों को प्रभावित कर सकती हैं. जब नसें कमजोर होने लगती हैं, तो हाथ-पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है. विटामिन B12 की कमी विटामिन B12 की कमी भी एक अहम कारण है, जो धीरे-धीरे नसों को नुकसान पहुंचा सकती है. कई बार लोग थकान या कमजोरी को नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन यह संकेत हो सकता है कि शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी है. कुछ मामलों में थायरॉयड की समस्या भी हाथों में झुनझुनी का कारण बन सकती है. शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ने से नसों पर असर पड़ता है और यह समस्या बढ़ सकती है. ये भी होता है कारण कंधे और गर्दन के बीच नसों या ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ने से भी हाथों में झुनझुनी हो सकती है. खासतौर पर जब हाथ लंबे समय तक ऊपर रखा जाए या भारी वजन उठाया जाए.  अगर झुनझुनी के साथ कमजोरी, चीजें गिरना, या दर्द बढ़ने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह संकेत हो सकता है कि नसों पर लगातार दबाव पड़ रहा है या कोई गंभीर समस्या विकसित हो रही है. अचानक एक तरफ हाथ सुन्न हो जाना, बोलने में दिक्कत या चक्कर आना जैसी स्थिति स्ट्रोक का संकेत भी हो सकती है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

LPG की किल्लत में इलेक्ट्रिक चूल्हा है तगड़ा विकल्प, जानें 1 घंटे इस्तेमाल करने पर कितना आएगा बिजली बिल

 LPG सिलेंडर की कमी के बीच अब लोग खाना बनाने के लिए अलग-अलग ऑप्शन तलाश रहे हैं. कई लोगों ने इंडक्शन कुकटॉप खरीद लिए हैं तो कुछ इंफ्रारेड चूल्हों से काम चला रहे हैं. गैस स्टोव का एक सस्ता ऑप्शन इलेक्ट्रिक चूल्हा भी है. यह एक इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर होता है, जो बिजली की मदद से चलता है. इसकी कीमत भी एकदम सस्ती होती है और इससे करंट आने का भी डर नहीं रहता. आज हम आपको बताएंगे कि यह काम कैसे करता है और एक घंटे तक यूज करने पर कितनी बिजली की खपत करता है. कोयले की मदद से काम करता है इलेक्ट्रिक चूल्हा इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर यानी बिजली की मदद से कोयले को जलाकर काम करने वाला चूल्हा. यह एक तरह का इलेक्ट्रिक स्टोव होता है, जो कोयले को गर्म करने के लिए बनाया गया है. यह बिजली से कोयले को गर्म करता है. कोयला गर्म होने पर यह हीट जनरेट करने लगता है, जिससे चाय बनाने से लेकर खाना तक पकाया जा सकता है. 1 घंटे में कितनी बिजली की खपत करेगा इलेक्ट्रिक चूल्हा? इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली खपत उसके बर्नर पर निर्भर करती है. मोटे तौर पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि मीडियम से बड़े बर्नर वाले चूल्हे लगातार एक घंटे तक चलने पर एक यूनिट बिजली की खपत करते हैं. अगर ज्यादा बड़ा बर्नर होगा तो उसकी बिजली खपत भी बढ़ जाएगी. ऐसे में अगर आप एक यूनिट के 8 रुपये दे रहे हैं तो यह एक घंटे में 8 रुपये की बिजली की खपत करेगा. इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली की खपत का हिसाब देखते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बहुत ही कम मौकों पर ये लगातार एक घंटे तक चलते हैं. आमतौर पर 5-7 मिनट में कोयला गर्म हो जाता है, जिसके बाद चूल्हे को बिजली की जरूरत नहीं रहती. इसी तरह हीट सेटिंग को कम कर भी बिजली की बचत की जा सकती है. इस तरह देखा जाए तो इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर पर खाना बनाना काफी सस्ता होता है. कम लागत के अलावा और भी हैं इलेक्ट्रिक चूल्हे के फायदे इलेक्ट्रिक चूल्हे पर इंडक्शन की तरह अलग से बर्तनों की जरूरत नहीं पड़ती. इस पर हर प्रकार के बर्तनों को यूज किया जा सकता है. इसे यूज करते समय आग की लपटें नहीं निकलती तो इसे यूज करना एकदम आसान है. कोयले का यूज होने के बावजूद इससे धुआं नहीं निकलता और यह खाना भी जल्दी पका देता है. हल्का होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना आसान है.

पेट के मोटापे की समस्या: भारत में 10 में से 6 महिलाएं शिकार, कमर के साइज से जानें खतरा

भोपाल  भारत में 30 से 49 साल की हर दस में पांच-छह महिलाओं को पेट की चर्बी की समस्या है. पुरुषों से कहीं ज्यादा महिलाएं इससे जूझ रही हैं. डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण. BMI से बेहतर कमर नापना जरूरी, क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. भारत में मोटापे की परिभाषा बदल रही है क्योंकि एक्सपर्ट अब सिर्फ वेट मशीन पर दिखने वाले वजन से ही लोगों को ओवरवेट या मोटापे का शिकार नहीं मान रहे हैं, बल्कि वे अब कमर के बढ़ते साइज से भी मोटापे का पता लगा रहा हैं।  डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं 'एब्डोमिनल ओबेसिटी' यानी पेट के मोटापे का ज्यादा शिकार हो रही हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि 30 से 49 साल की उम्र वाली 10 में से करीब 6 महिलाएं इस समस्या से घिरी हुई हैं।  एक्सपर्ट्स इसे एक मेटाबॉलिक इमरजेंसी मान रहे हैं।  क्या कहती है रिसर्च? आमतौर पर हम मोटापे को बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से नापते हैं, लेकिन यह स्टडी बताती है कि BMI शरीर की असल स्थिति छुपा सकता है क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. कई बार वजन सामान्य होने के बावजूद पेट पर जमी चर्बी अंदरूनी अंगों के लिए खतरनाक होती है इसलिए कमर की माप मापना सही रहेगा।  स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण है।  स्टडी बताती है कि भारत में महिलाओं में एब्डॉमिनल ऑबेसिटी पुरुषों से ज्यादा है. NFHS-5 (2019-21) डेटा से पता चलता है कि भारत में 40% महिलाएं और 12% पुरुष पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं. महिलाओं के लिए 80 सेमी और पुरुषों के लिए 94 सेमी से अधिक कमर का घेरा इस खतरे की श्रेणी में आता है. यह समस्या अब गांवों और मिडिल क्लास तक फैल चुकी है।  फोर्टिस C-DOC के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा कहते हैं, 'कमर नापना आसान है. हर डॉक्टर को मेजरमेंट टेप रखना चाहिए. यह डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर का संकेत देता है. BMI एशियंस के लिए सटीक नहीं इसलिए वेस्ट सर्कम्फरेंस (कमर का घेरा) पर फोकस करें. यह ट्रेंड टीनएजर्स में भी दिख रहा, जो बचपन की कुपोषण के बाद फास्ट लाइफस्टाइल से प्रभावित हैं।  कारण और जोखिम रिसर्च के मुताबिक, उम्र बढ़ना, शहरों में रहना, अधिक कमाई और नॉन-वेज खाना महिलाओं में पेट की चर्बी बढ़ा रहा. लीवर-पैंक्रियास के आसपास फैट मेटाबॉलिक रिस्क बढ़ाता है. स्टडी चेतावनी देती है इससे टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी और यहां तक कि ब्रेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।  खासकर मिड एज की लड़कियों में यह ट्रेंड अधिक देखा जा रहा है जो कम उम्र में खराब न्यूट्रिशन और फिर अचानक बदली हुई लाइफस्टाइल का नतीजा है।  कैसे रोक सकते हैं इस समस्या को एक्सपर्ट्स कहते हैं, टेप से कमर नापें और रूटीन चेकअप कराएं. हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज से इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. अब जनरल ऑबेसिटी नहीं बल्कि एब्डॉमिनल पर भी ध्यान देने की जरूरत है. ये समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रही है इसलिए शहरी महिलाओं को खास ध्यान देने की जरूरत है. एक्सपर्ट्स अब सलाह दे रहे है कि वजन चेक करने के साथ-साथ अपनी कमर का घेरा नापना भी उतना ही जरूरी हो गया है। 

14 साल के सफर के बाद टेस्ला मॉडल एस और एक्स की विदाई, अब रोबोटैक्सी और ऑटोनोमस कारों पर होगा फोकस

Tesla के लिए 1 अप्रैल 2026 सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि एक युग के खत्म होने का दिन है. कंपनी ने आधिकारिक रूप से अपने मॉडल एस और मॉडल एक्स के प्रोडक्शन को बंद कर दिया है. एलॉन मस्क ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि कंपनी अब इन कारों के ऑर्डर नहीं ले रही है. मस्क ने बताया कि उनके पास इन्वेंट्री में सिर्फ 600 यूनिट्स ही बची हैं. अपने ट्विट के साथ मस्क ने एक तस्वीर शेयर की है, जो ओरिजनल मॉडल एस की है. इस कार को टेस्ला ने 14 साल पहले जून 2012 में लॉन्च किया था. एलॉन मस्क ने अपने ट्विट में लिखा, 'टेस्ला मॉडल एस और एक्स के कस्टम ऑर्डर अब पूरे हो चुके हैं. अब स्टॉक में केवल कुछ ही गाड़ियां बची हैं. एक युग के अंत के लिए हम एक आधिकारिक सेरेमनी आयोजित करेंगे. मुझे ये गाड़ियां बेहद पसंद हैं.' टेस्ला की इन गाड़ियों के प्रोडक्शन को बंद करने की जानकारी जनवरी में ही आ गई थी. कंपनी ने 2025 की चौथे क्वार्टर की अर्निंग कॉल में इसकी जानकारी दी थी. उस वक्त ब्रांड ने दोनों इलेक्ट्रिक कार्स के लिए इसे 'सम्मानजनक निर्वहन' बताया था. कंपनी ने उस वक्त जानकारी दी थी कि इन गाड़ियों के फैक्टरी स्पेस को ऑप्टिमम रोबोट्स को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. 14 साल का सफर मॉडल एस टेस्ला की पहली मास मार्केट कार थी, जिसे कंपनी ने जून 2012 में लॉन्च किया था. ग्लोबली ये कार 2015 और 2016 में टॉप सेलिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल थी. सिर्फ 2015 में ही कंपनी ने इसकी 50 हजार से ज्यादा यूनिट्स को बेचा था. मॉडल एक्स को कंपनी ने 2015 में इंट्रोड्यूस किया था, जिसे अपनी फाल्कन-विंग डोर के लिए जाना जाता था. अपने पूरे प्रोडक्शन के दौरान इन दोनों गाड़ियों की 610,000 यूनिट्स को बेचा गया है. रिपोर्ट्स की मानें, तो टेस्ला के पास अभी भी 295 नई मॉडल एस और 301 मॉडल एक्स गाड़ियां हैं. टेस्ला की वेबसाइट से इन दोनों गाड़ियों को हटा दिया गया है. कंपनी इन गाड़ियों के प्रोडक्शन को बंद करने के साथ ही ऑटोनोमस कार के फ्यूचर पर फोकस करेगी. टेस्ला अपनी टू-सीटर साइबरकैब रोबोटैक्सी का प्रोडक्शन शुरू करने की तैयारी कर रही है. इस कार में कोई स्टीयरिंग व्हील और पैडल नहीं होंगे.

न्यूरोलॉजिस्ट ने बताए बादाम खाने के 4 सबसे सही तरीके, दिमाग की ताकत और याददाश्त बढ़ाने के लिए ऐसे करें सेवन

न्यूरोलॉजिस्ट होने की वजह से अक्सर लोग मुझसे दिमाग को ताकतवर बनाने वाले फूड के बारे में पूछते रहते हैं। अधिकांश बार मेरा जवाब बादाम होता है। इसमें ब्रेन प्रोडक्टिविटी, मेमोरी पावर और ब्रेन हेल्थ का लेवल सही रखने वाले महत्वपूर्ण विटामिन और मिनरल होते हैं। लेकिन दिक्कत तब आती है, जब लोगों को इसे खाने का सही तरीका मालूम नहीं होता। आप 4 प्रमुख तरीकों से बादाम खाकर इस ड्राई फ्रूट का न्यूट्रिशन पा सकते हैं। ये तरीके बेहद आसान है और मिनटों में शरीर बादाम के न्यूट्रिएंट्स का मेटाबॉलिज्म शुरू कर देता है। मैं बादाम को कॉग्निटिव फंक्शन के लिए बढ़िया मानता हूं, जो मेंटल क्लीयरिटी को भी सुधारता है। अधिकतर लोग बादाम को भिगोकर खाते हैं, लेकिन इसके अलावा भी कई तरीके हैं, जो स्वाद को बनाए रखते हुए फायदा पहुंचाते हैं। ये तरीके बदल-बदलकर भी आजमा सकते हैं, जिससे बोरियत भी महसूस नहीं होगी। बादाम खाने के 4 बेस्ट तरीके बादाम के फायदे मिलेंगे या नहीं, यह इन्हें खाने के तरीके पर निर्भर करता है। आप इन 4 तरीकों को फॉलो करके दिमाग को स्वस्थ, तेज और मजबूत बना सकते हैं। 1. सबसे लोकप्रिय तरीका – भीगे बादाम रातभर बादाम को भिगोकर रखना और सुबह इनका सेवन करना फायदों को पाने का बढ़िया तरीका है। भिगोने से बादाम का बाहरी भूरा छिलका उतर जाता है। यह छिलका टैनिन से भरा होता है, जो बादाम के पोषण को पाने में बाधा बनता है। इस तरीके से बादाम का पाचन भी आसान हो जाता है।     भीगे बादाम खाने का सही तरीका – रात में 5 से 10 बादाम एक कटोरी पानी में भिगो दें। सुबह छिलका उतारकर खाली पेट खाएं। 2. बादाम का पेस्ट या दूध बादाम को ब्लेंड करके पेस्ट या दूध के रूप में सेवन कर सकते हैं। यह तरीका बुजुर्गों और बच्चों के लिए बहुत सुरक्षित है। इससे बादाम के ढंग से ना चबाने या गले में फंसने का खतरा टल जाता है।     बादाम का दूध बनाने का तरीका – भीगे बादाम को गुनगुने दूध या पानी के साथ ब्लेंड करें। इससे पोषण का बेहतर अवशोषण होगा और लंबे समय तक एनर्जी मिलेगी। 3. रोस्टेड बादाम बादाम को ड्राई-रोस्ट करके खाना सबसे आसान तरीका है। आप एक बार तैयारी करके इसे स्टोर कर सकते हैं और स्नैक की तरह कभी भी खा सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि ज्यादा तापमान पर देर तक रोस्टिंग करने से पोषण की मात्रा कम हो सकती है।     भुने बादाम खाने का सही तरीका – हल्के रोस्ट किए हुए और नमक रहित बादाम की संख्या 5 से 10 के बीच ही रखें। 4. दूसरे ब्रेन फूड्स के साथ बादाम खाना बादाम को अखरोट, बीज या फल के साथ खाने पर न्यूट्रिशन और फायदे दोनों बढ़ जाते हैं। इससे आपके दिमाग को संपूर्ण ताकत और मजबूती मिलती है। बादाम खाते हुए कुछ सावधानियां बरतें? फायदेमंद होने के बावजूद बादाम खाने के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।     पोर्शन कंट्रोल – एक दिन में 5 से 10 बादाम ही खाएं। यह हाई कैलोरी फूड है और ज्यादा मात्रा में खाने पर वजन बढ़ा सकता है।     एलर्जी – नट्स एलर्जी के शिकार लोगों को बादाम बिल्कुल नहीं खाने चाहिए।     पेट की दिक्कतें – ज्यादा बादाम या भिगोए बिना खाने पर ब्लोटिंग, अपच जैसी पेट की समस्याएं हो सकती हैं।     किडनी स्टोन – बादाम के अंदर ऑक्सालेट होता है। इसलिए जिन लोगों को किडनी स्टोन का खतरा रहता है, उन्हें इसे खाने से पहले डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। जो बादाम नहीं खा सकते, वो क्या खाएं? नट्स एलर्जी से परेशान लोगों को बादाम खाने से मना किया जाता है। ऐसे में वो इस ड्राई फ्रूट के अल्टरनेटिव ऑप्शन को चुन सकते हैं। जैसे-     अखरोट – ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होता है और ब्रेन हेल्थ को सपोर्ट करता है।     अलसी के बीज या चिया सीड्स – ओमेगा-3 और फाइबर के बढ़िया प्लांट बेस्ड सोर्स माने जाते हैं।     कद्दू के बीज – मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर और नर्व फंक्शन के लिए फायदेमंद होते हैं।     सूरजमुखी के बीज – विटामिन ई का बढ़िया सोर्स होते हैं और इस मामले में बादाम जितने फायदेमंद होते हैं।     ब्लूबेरी जैसे फल – कॉग्निटिव फंक्शन को सपोर्ट करने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स देते हैं। दिमाग को कौन से न्यूट्रिएंट्स देता है बादाम?     विटामिन ई – ब्रेन सेल्स को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने वाला ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट     ओमेगा-3 फैटी एसिड्स – न्यूरोनल कम्युनिकेशन और ब्रेन प्लास्टिसिटी सपोर्ट करने वाला न्यूट्रिएंट     मैग्नीशियम – नर्व ट्रांसमिशन, मेमोरी, लर्निंग के लिए महत्वपूर्ण न्यूट्रिएंट     प्रोटीन और हेल्दी फैट्स – ब्रेन को एनर्जी देने वाले, थकान दूर करने वाले और फोकस बढ़ाने वाले न्यूट्रिएंट     पोलीफेनोल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स – इंफ्लामेशन कम करने और न्यूरोडीजनेरेटिव चेंज से बचाने के लिए महत्वपूर्ण दिमाग को बादाम से मिलने वाले फायदे     याददाश्त में सुधार – ब्रेन सेल्स की इंटेग्रिटी मेंटेन करने और मेमोरी रिटेंशन बढ़ाने में प्रभावशाली     फोकस में बढ़ोतरी – दिमागी थकान दूर करके फोकस बढ़ाने में मददगार     कॉग्निटिव डिक्लाइन से बचाव – उम्र बढ़ने के साथ दिमागी ताकत कम होने की स्पीड में गिरावट लाने के लिए जरूरी     नर्व फंक्शन को सपोर्ट – नर्व सिग्नलिंग और ब्रेन कम्युनिकेशन में मददगार पोषक तत्वों की सप्लाई बादाम को सबसे आसान, मगर सबसे ताकतवर ब्रेन हेल्दी फूड्स की लिस्ट में शामिल किया जाता है। सही मात्रा में सेवन करने पर यह याददाश्त सुधारने, फोकस बढ़ाने, न्यूरोलॉजिकल हेल्थ को बेहतर बनाने और बच्चों के दिमागी विकास को तेज करने में मदद करता है। लेकिन दिमाग को तेज बनाने के लिए बादाम खाने के साथ डाइट का बैलेंस होना, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी और स्लीप क्वालिटी का अच्छा होना और मेंटल हेल्थ को सही रखना जरूरी है।  

Google Pixel 10a पर मिल रही है भारी छूट और अब बेहद कम कीमत में घर ले आएं गूगल का यह प्रीमियम 5G स्मार्टफोन

अगर आप एक प्रीमियम फीचर्स वाला स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, लेकिन बजट थोड़ा कम है, तो यह मौका आपके लिए खास हो सकता है. Google का नया Pixel 10a इस समय भारी डिस्काउंट के साथ मिल रहा है. कीमत में कटौती और बैंक ऑफर्स मिलाकर यह फोन अब पहले से काफी सस्ता हो गया है, जिससे यह डील और भी आकर्षक बन गई है. कीमत और ऑफर की पूरी जानकारी Google Pixel 10a का 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वाला वेरिएंट इस समय अमेजन पर 47,999 रुपये में लिस्टेड है. अगर आप HDFC बैंक के क्रेडिट कार्ड से EMI पर खरीदारी करते हैं, तो आपको 2,500 रुपये का सीधा डिस्काउंट मिल सकता है. इस ऑफर के बाद फोन की प्रभावी कीमत घटकर 45,499 रुपये रह जाती है. दिलचस्प बात यह है कि यह फोन अपनी लॉन्च कीमत 49,999 रुपये के मुकाबले करीब 4,500 रुपये सस्ता मिल रहा है. डिस्प्ले और परफॉर्मेंस इस स्मार्टफोन में 6.3 इंच की pOLED डिस्प्ले दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आती है. स्क्रीन की ब्राइटनेस 3000 निट्स तक जाती है, जिससे धूप में भी डिस्प्ले साफ दिखाई देता है. फोन Android 16 पर काम करता है और इसमें Google का Tensor G4 प्रोसेसर दिया गया है, जो रोजमर्रा के काम से लेकर गेमिंग तक स्मूथ परफॉर्मेंस देता है. कैमरा क्वालिटी फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए Pixel 10a एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. इसके रियर में 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा OIS सपोर्ट के साथ दिया गया है, जिससे फोटो शार्प और स्टेबल आती हैं. इसके साथ 13 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड कैमरा भी मिलता है. वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. बैटरी और चार्जिंग फोन में 5,100mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो पूरे दिन आराम से चल सकती है. इसके साथ 30W वायर्ड और 10W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है, जिससे फोन को जल्दी चार्ज किया जा सकता है. सिक्योरिटी और अन्य फीचर्स Pixel 10a में Titan M2 सिक्योरिटी चिप दी गई है, जो डेटा को सुरक्षित रखने में मदद करती है. फोन IP68 रेटिंग के साथ आता है, यानी यह धूल और पानी से सुरक्षित रहता है. इसके अलावा, इसमें फिंगरप्रिंट सेंसर और फेस अनलॉक जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G, Wi-Fi 6E, Bluetooth 6, NFC और USB Type-C जैसे सभी जरूरी ऑप्शन मौजूद हैं.

बदलते मौसम में पेट दर्द से राहत पाने के 6 अचूक आयुर्वेदिक उपाय, रसोई में मौजूद इन चीजों से मिलेगा तुरंत आराम

मौसम बदलने पर पेट दर्द और पाचन संबंधी समस्याएं होना आम बात है। मौसम बदलने पर तापमान के बढ़ने या घटने, वातावरण में नमी और बैक्टीरिया के स्तर में बदलाव के कारण गट हेल्थ प्रभावित होती है। आयुर्वेद में अजवाइन, जीरा, सौंफ, अदरक, हींग, त्रिफला जैसी घरेलू औषधियों द्वारा पेट दर्द का उपचार किया जाता है। मौसम के अनुसार खानपान और लाइफस्टाल में बदलाव करके पेट दर्द की समस्या से बचा जा सकता है। इस लेख में हम पेट दर्द के आयुर्वेदिक उपचार , खानपान और लाइफस्टाइल की सही आदतों के बारे में बता रहे हैं। पेट दर्द के 6 आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के सेवन से पेट दर्द से राहत पाई जा सकती है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है। नीचे दिए गए उपाय ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित हैं, लेकिन जिन लोगों को पुरानी बीमारी है, गर्भवती महिलाएं या जो लोग दवाएं ले रहे हैं, उन्हें ये उपचार नहीं करने चाहिए। जिन लोगों को लगातार गंभीर पेट दर्द रहता है, उन्हें अपना इलाज खुद नहीं करना चाहिए। नॉर्मल केस में पेट दर्द के लिए निम्नलिखित जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जा सकता है-     अजवाइन– अजवाइन में थाइमोल होता है जो पाचक एंजाइम बनाने में मदद करता है। इसके सेवन से गैस व पेट फूलने से राहत मिलती है। पाचन में गड़बड़ी के कारण पेट में दर्द हो रहा है तो आधा चम्मच भुनी हुई अजवाइन को एक चुटकी काले नमक के साथ मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करें। इसे दिन में एक या दो बार भोजन के बाद लिया जा सकता है।     जीरा- जीरा भोजन पचाने में मदद करता है और पेट दर्द को भी कम करता है। पेट दर्द से राहत पाने के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा उबालें। फिर छानकर गर्म पानी को भोजन के बाद पी लें।     सौंफ- भोजन के बाद एक चम्मच सौंफ चबाएं या सौंफ का पानी पिएं। सौंफ ठंडक प्रदान करती है जिससे पाचन क्रिया शांत होती है और पेट में एसिड का स्तर कम होता है।     अदरक– अदरक के रस में नींबू के रस की कुछ बूंदें और एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर पीने से मतली और पेट दर्द से राहत मिल सकती है। अदरक में मौजूद जिंजरोल सूजन कम करने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक है।     हींग– अगर गैस के कारण पेट दर्द हो रहा है तो हींग का उपचार फायदेमंद हो सकता है। एक चुटकी हींग को गर्म पानी में मिलाकर या नाभि के आसपास पेस्ट बनाकर लगाने से पेट दर्द से तुरंत आराम मिल सकता है।     त्रिफला– त्रिफला यानी आंवला, बहेड़ा, हरड़ का मिश्रण पेट दर्द को कम करने और गट हेल्थ सुधारने में सहायक है। पेट दर्द से राहत पाने के लिए इसे रात में गर्म पानी के साथ लें। पेट दर्द से राहत के लिए आयुर्वेदिक आहार पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में आहार की महत्वपूर्ण भूमिका है। सही आहार पाचन तंत्र को उसकी प्राकृतिक अवस्था में वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुर्वेद हल्के और गर्म भोजन के सेवन पर जोर देता है, जिसे आसानी से पचाया जा सके। पेट दर्द से राहत के लिए निम्नलिखित आयुर्वेदिक आहार का सेवन किया जा सकता है, साथ ही कुछ चीजों से परहेज करना चाहिए-     खिचड़ी, वेजीटेबल सूप और कम मसालों में पकी सब्जियां     भुना हुआ जीरा मिलाकर तैयार की गई छाछ     एसिडिटी है तो नारियल पानी, उबले चावल खाएं     दिन भर गर्म पानी का सेवन     तली-भुनी मसालेदार चीजें न खाएं     प्रोसेस्ड फूड से परहेज करें     समय पर भोजन करें     अधिक मात्रा और देर रात में भोजन करने से बचें     कैफीन और कार्बोनेटेड ड्रिंक से दूरी बनाएं     चीनी का सेवन सीमित मात्रा में करें पेट दर्द से राहत के लिए लाइफस्टाइल बदलें आयुर्वेदिक में इस बात पर जोर दिया जाता है कि रोज की आदतें और लाइफस्टाइल बदलकर पाचन क्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है, जिससे पेट दर्द की समस्या से भी राहत मिल सकती है। इसके लिए-     शांत वातावरण में बैठकर भोजन करें। खाते समय मोबाइल या किसी भी तरह की स्क्रीन से दूरी बनाएं। भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं।     रोज नियमित समय पर भोजन करें। इससे पाचन क्रिया सुचारू रूप से चलती है और पेट संबंधी समस्याओं से बचाव होता है।     शरीर को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ की जरूरत होती है इसलिए पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं। कोल्ड ड्रिंक की बजाय गुनगुना पानी पीना फायदेमंद है।     तनाव पाचन संबंधी समस्याओं का मुख्य कारण है। इससे बचने के लिए योग, ध्यान और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।     भोजन के बाद टहलना जरूरी है, इससे भोजन अच्छी तरह पचता है और पेट फूलने की समस्या नहीं होती।     रात का भोजन करने के बाद कुछ भी खाने से बचें, इससे नींद अच्छी आती है। पर्याप्त नींद ( 7 से 8 घंटे) लेने से मेटबॉलिज्म अच्छा रहता है। अच्छी सेहत के लिए पहल जरूरी आयुर्वेद रोगों से बचाव करना सिखाता है। इसके लिए शरीर के संकेतों को समझना जरूरी है। आयुर्वेदिक नुस्खों से हल्के पेट दर्द का उपचार किया जा सकता है, लेकिन लगातार पेट दर्द, उल्टी, अचानक वजन कम होना, मल में खून आना और बहुत ज्यादा दर्द जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में रोगी की तुरंत जांच जरूरी है। अच्छी सेहत के लिए अच्छी दिनचर्या की पहल जरूरी है। खान-पान की सही आदतें, नियमित योग-ध्यान, पर्याप्त नींद, एक्टिव लाइफस्टाइल से पेट दर्द की समस्या से आसानी से बचा जा सकता है।  

Vodafone Idea का नया पोस्टपेड प्लान लॉन्च, सिंगल यूजर्स के लिए ₹451 का ‘सुपर पैक’, मिलेगा भरपूर एंटरटेनमेंट

Vodafone Idea ने ₹451 का नया पोस्टपेड प्लान पेश किया है जिसमें सिंगल यूजर्स को 50GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलती है. इस पैक में Sony Liv और JioHotstar में से किसी एक का फ्री सब्सक्रिप्शन चुनने का विकल्प भी दिया गया है. इसे Vi की ऑफिशियल वेबसाइट या स्टोर से खरीदा जा सकता है. Vodafone Idea (Vi) ने अपने पोस्टपेड पोर्टफोलियो में एक ऐसा प्लान शामिल किया है जो खासतौर पर सिंगल यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है. यह पैक डेटा, कॉलिंग और OTT सब्सक्रिप्शन का पूरा फायदा देता है और इसकी कीमत भी किफायती रखी गई है. कीमत और वैधता की बात Vi का यह पोस्टपेड प्लान ₹451 प्रति माह में उपलब्ध है. इसे कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट या स्टोर से खरीदा जा सकता है. डेटा और कॉलिंग बेनिफिट्स इस प्लान में यूजर्स को 50GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है. इसके साथ ही अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा दी गई है, जिससे किसी भी नेटवर्क पर बिना अतिरिक्त खर्च के कॉल की जा सकती है. OTT सब्सक्रिप्शन इस पैक की खासियत यह है कि इसमें यूजर्स को Sony Liv और JioHotstar में से किसी एक का फ्री सब्सक्रिप्शन चुनने का विकल्प मिलता है. इसके अलावा अन्य डिजिटल बेनिफिट्स भी शामिल हैं. किसके लिए है यह प्लान? यह पैक उन यूजर्स के लिए आदर्श है जो सिंगल कनेक्शन पर ज्यादा डेटा इस्तेमाल करते हैं और OTT प्लैटफॉर्म्स पर कंटेंट देखना पसंद करते हैं. कम कीमत में ज्यादा डेटा और एंटरटेनमेंट चाहने वालों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है.

सावधान! डायबिटीज में जहर बन सकते हैं ये 5 फल, अचानक बढ़ाते हैं शुगर लेवल, भूलकर भी न करें ये गलती

डायबिटीज में खान-पान का संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. फल स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं लेकिन कुछ फलों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स इतना अधिक होता है कि वो अचानक ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकते हैं. इसलिए डायबिटीज के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के इन फलों को नहीं खाना चाहिए. डायबिटीज में दवाई से ज्यादा डाइट जरूरी होती है. इस बीमारी में खानपान का खास ख्याल रखा जाता है क्योंकि जरा सी लापरवाही शुगर लेवल को बिगाड़ सकती है. फल स्वास्थ्य के लिए खजाना होते हैं और इनमें मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर शरीर के लिए जरूरी होते हैं. लेकिन शुगर के मरीजों के लिए हर फल अच्छा नहीं होता. फलों में प्राकृतिक रूप से फ्रुक्टोज शुगर पाई जाती है जो कुछ फलों में इतनी अधिक होती है कि वो खून में ग्लूकोज के स्तर को अचानक बढ़ा सकते हैं. ऐसे में एक डायबिटीज रोगी के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन से फल उनकी सेहत के लिए सुपरफूड हैं और कौन से नुकसानदायक. सही चुनाव और सीमित मात्रा में ही फल खाने से आपकी शुगर को नियंत्रित रखने और फलों का पोषण पाने में मदद मिल सकती है. फलों का राजा आम स्वाद में लाजवाब है, लेकिन इसमें शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है. एक मध्यम आम में लगभग 45-50 ग्राम शुगर हो सकती है जो अचानक स्पाइक पैदा करती है. इसलिए शुगर के मरीजों को इसे खाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए. चीकू: चीकू बहुत मीठा होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी हाई होता है. यह खून में ग्लूकोज के स्तर को बहुत तेजी से बढ़ाता है. इसलिए शुगर के मरीजों को इसे भी खाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए. अंगूर: अंगूर के छोटे दानों में भारी मात्रा में नेचुरल शुगर होती है. डायबिटीज के मरीजों के लिए अंगूर पर नियंत्रण रखना मुश्किल होता है, जिससे शुगर लेवल गड़बड़ा जाता है. लीची: लीची में कैलोरी और शुगर दोनों ही ज्यादा होते हैं. इसके सेवन से ग्लूकोज लेवल में तत्काल बढ़ोतरी देखी जा सकती है. केला: खासकर पूरी तरह पका हुआ केला. पके हुए केले में स्टार्च शुगर में बदल जाता है जिसका GI बढ़ जाता है. इसलिए शुगर के मरीजों को इसे खाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए.

गर्मियों का रामबाण इलाज है ‘मसाला छाछ’, लू और एसिडिटी से मिलेगी तुरंत राहत, घर पर बनाएं बाजार जैसा स्वाद

गर्मियों के दस्तक देते ही शरीर को ठंडक की जरूरत होती है. ऐसे में मसाला छाछ से बेहतर और क्या हो सकता है. यह न केवल ताजगी देने वाली ड्रिंक है बल्कि पाचन के लिए भी काफी अच्छी होती है. चिलचिलाती धूप और लू से बचने के लिए छाछ एक रामबाण इलाज है. इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं, शरीर को हाइड्रेटेड रखते हैं और भारी भोजन के बाद होने वाली एसिडिटी से राहत दिलाते हैं. घर पर बनी शुद्ध और चटपटी मसाला छाछ आपको बाजार के मिलावटी कोल्ड ड्रिंक्स को भूलने पर मजबूर कर देगी. यहां हम आपको बाजार में मिलने वाली मसाला छाछ को घर बनाने का तरीका बता रहे हैं. छाछ के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें ताजा दही: 2 कप ठंडा पानी: 3-4 कप भुना जीरा पाउडर: 1 चम्मच काला नमक: ½ चम्मच सेंधा नमक या सादा नमक: स्वादानुसार बारीक कटी हरी मिर्च ताजा हरा धनिया और पुदीना के पत्ते चाट मसाला: ½ चम्मच बर्फ के टुकड़े (Ice Cubes) बनाने का तरीका पेस्ट तैयार करें: सबसे पहले एक ओखली या ब्लेंडर में हरा धनिया, पुदीना और हरी मिर्च को थोड़े से पानी के साथ पीसकर पेस्ट बना लें. दही फेंटें: एक बड़े बर्तन में दही लें और इसे मथानी (whisk) या ब्लेंडर की मदद से तब तक फेंटें जब तक वह चिकना न हो जाए. मसाले मिलाएं: अब दही में भुना जीरा पाउडर, काला नमक, सादा नमक, चाट मसाला और तैयार किया हुआ धनिया-पुदीना पेस्ट डालें. पानी डालें: इसमें ठंडा पानी मिलाएं. बाजार जैसा पतला टेक्सचर पाने के लिए दही और पानी का अनुपात 1:2 या 1:3 रखें. तड़का: अगर आप इसे और भी शाही बनाना चाहते हैं, तो एक छोटे चम्मच तेल में राई और करी पत्ता चटकाकर ऊपर से तड़का लगा सकते हैं. मिट्टी के कुल्हड़ या कांच के गिलास में बर्फ के टुकड़े डालकर परोसें. ऊपर से थोड़ा भुना जीरा छिड़कें.