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CES 2026 में Dreame का नया स्मार्ट होम सिस्टम, सीढ़ियों तक सफाई करेगा रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर

 नई दिल्ली स्मार्ट होम डिवाइस अब सिर्फ रोबोट वैक्यूम या एयर प्यूरीफायर तक सीमित नहीं रह गए हैं. CES 2026 में Dreame Technology इसी बदलते ट्रेंड को सामने लाने की तैयारी में है. कंपनी इस साल पहली बार अपना इकोसिस्टम एक साथ पेश कर रही है जिसमें सफाई से लेकर किचन, एयर कंडीशनिंग और पर्सनल केयर तक के प्रोडक्ट शामिल हैं.  अब तक Dreame को एक प्रीमियम स्मार्ट क्लीनिंग ब्रांड के तौर पर जाना जाता था, लेकिन CES 2026 में कंपनी खुद को सिर्फ वैक्यूम बनाने वाली कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि एक कनेक्टेड होम ब्रांड के तौर पर पेश कर रही है. Dreame का फोकस ऐसे सिस्टम पर है जो बैकग्राउंड में काम करें और यूज़र को रोज़मर्रा के कामों से राहत मिले, बिना बार-बार मैनुअल कंट्रोल के. इस साल Dreame की मौजूदगी CES में पहले से कहीं बड़ी है. कंपनी पहली बार दो बड़े वेन्यू पर अपने प्रोडक्ट्स दिखाए हैं.. Las Vegas Convention Center में इसका मेन इकोसिस्टम शोकेस हुआ, जबकि Venetian Expo में स्मार्ट क्लीनिंग से जुड़े प्रोडक्ट्स पर फोकस किया गया. यह Dreame का अब तक का सबसे बड़ा CES सेटअप है.  CES 2026 में Dreame कुछ नए और अहम प्रोडक्ट्स भी दिखाए गए हैं.  इनमें सबसे ज्यादा चर्चा X60 Series रोबोट वैक्यूम को लेकर है. कंपनी का दावा है कि यह अब तक का सबसे पतला फ्लैगशिप रोबोट वैक्यूम होगा, जिसकी मोटाई सिर्फ 7.95 सेंटीमीटर है. इसे खास तौर पर लो-हाइट फर्नीचर के नीचे बेहतर सफाई के लिए डिजाइन किया गया है. CES 2026 में Dreame ने एक और ऐसी टेक्नोलॉजी भी दिखाई, जिस पर खास ध्यान रहा. कंपनी ने एक स्टेयर क्लाइंबिंग रोबोट का डेमो दिया, जिसे खास तौर पर मल्टी स्टोरी घरों के लिए तैयार किया गया था. अब तक रोबोट वैक्यूम सीढ़ियों के पास रुक जाते थे, लेकिन Dreame का यह नया कॉन्सेप्ट सीढ़ियां चढ़ने और उतरने में सक्षम बताया गया. इसका मकसद उन घरों को टारगेट करना था जहां एक से ज्यादा फ्लोर हैं और हर मंज़िल के लिए अलग-अलग सफाई समाधान इस्तेमाल करने पड़ते हैं. अगर यह टेक्नोलॉजी आगे चलकर प्रैक्टिकल साबित होती है, तो यह रोबोट वैक्यूम कैटेगरी में बड़ा बदलाव ला सकती है. स्मार्ट होम की दिशा में आगे बढ़ते हुए Dreame अब किचन और कूलिंग कैटेगरी में भी एंट्री कर रही है. CES में कंपनी एक नया D-Wind Series एयर कंडीशनर शोकेस किया है, जिसे कमरे के कोने में फिट करने के हिसाब से डिजाइन किया गया है. इसके साथ एक स्मार्ट रेफ्रिजरेटर भी पेश किया है, जो इंस्टेंट स्पार्कलिंग वॉटर देने की सुविधा के साथ आता है.  पर्सनल केयर सेगमेंट में भी Dreame कुछ नया कर रही है. कंपनी CES में AirStyle Pro HI नाम का नया 2-in-1 हेयर ड्रायर और स्टाइलिंग टूल दिखाया. इसे घर पर प्रोफेशनल-लेवल स्टाइलिंग के लिए बनाया गया है और इसमें नए अटैचमेंट्स जोड़े गए हैं. CES के दौरान Dreame एक खास लॉन्च इवेंट भी करेगी, जहां पूरे इकोसिस्टम को एक साथ डेमो किया जाएगा. कंपनी की कोशिश यह दिखाने की है कि अलग-अलग डिवाइस मिलकर एक सिंगल स्मार्ट होम एक्सपीरियंस कैसे दे सकते हैं, न कि अलग-अलग गैजेट्स की तरह काम करें. भारत के संदर्भ में देखें तो Dreame ने यहां 2023 में अपने ऑपरेशन शुरू किए थे और फिलहाल उसके प्रोडक्ट्स ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये उपलब्ध हैं. CES में किया जा रहा यह बड़ा शोकेस इस बात का संकेत देता है कि आने वाले समय में कंपनी भारत समेत दूसरे बाजारों में भी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और बढ़ा सकती है. कुल मिलाकर, CES 2026 में Dreame का यह कदम सिर्फ नए प्रोडक्ट दिखाने तक सीमित नहीं है. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि स्मार्ट होम का अगला चरण अलग-अलग डिवाइस नहीं, बल्कि एक जुड़े हुए सिस्टम पर आधारित होगा, जहां टेक्नोलॉजी दिखे कम और काम ज़्यादा करे.

अंतरिक्ष स्टेशन पर खोजा गया कैंसर का नया इलाज, पेम्ब्रोलिजुमाब का इंजेक्शन बनेगा क्रांतिकारी

 नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर की गई वैज्ञानिक रिसर्च ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. नासा और दवा कंपनी मर्क की टीम ने मिलकर स्पेस में प्रोटीन क्रिस्टल ग्रोथ की स्टडी की, जिससे कैंसर की एक प्रमुख दवा का नया रूप विकसित हुआ. अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने सितंबर 2025 में इस नए इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है. अब मरीजों को 2 घंटे लंबी इन्फ्यूजन की जगह सिर्फ 1-2 मिनट का इंजेक्शन लगेगा. यह खबर कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी है, क्योंकि इलाज आसान, तेज और सस्ता हो गया है. क्या है यह नया इलाज? यह नया इलाज कंपनी मर्क की दवा पेम्ब्रोलिजुमाब (Pembrolizumab) का सबक्यूटेनियस इंजेक्शन रूप है. यह दवा इम्यूनोथेरेपी की श्रेणी में आती है. कुछ खास तरह के कैंसर (जैसे मेलानोमा, लंग कैंसर आदि) के इलाज में इस्तेमाल होती है. पहले यह दवा कैसे दी जाती थी?     मरीज को अस्पताल या क्लिनिक जाना पड़ता था.     नस में इन्फ्यूजन (IV ड्रिप) से दवा दी जाती थी.     इसमें 1-2 घंटे लगते थे.     बाद में इसे 30 मिनट तक कम किया गया था. अब नया तरीका     त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) सिर्फ एक इंजेक्शन.     लगाने में 1 से 2 मिनट लगते हैं.     हर तीन हफ्ते में एक बार.     मरीज का समय बचता है. अस्पताल का खर्च कम होता है. जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है. स्पेस स्टेशन की रिसर्च ने कैसे मदद की? अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) बहुत कम होता है – इसे माइक्रोग्रेविटी कहते हैं. पृथ्वी पर ग्रेविटी की वजह से क्रिस्टल बनाते समय कई समस्याएं आती हैं, जैसे क्रिस्टल छोटे, असमान या कम गुणवत्ता वाले बनते हैं. लेकिन स्पेस में…     क्रिस्टल बड़े, एकसमान और ज्यादा परफेक्ट बनते हैं.     इससे वैज्ञानिक दवा के अणुओं की संरचना को बेहतर समझ पाते हैं. मर्क कंपनी 2014 से ISS पर प्रयोग कर रही है. उन्होंने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (लैब में बनी प्रोटीन जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है) के क्रिस्टल स्पेस में उगाए. इन क्रिस्टल से पता चला कि दवा के कणों का सबसे अच्छा आकार और संरचना क्या होनी चाहिए, ताकि वे आसानी से घुलकर इंजेक्शन के रूप में दिए जा सकें. यह रिसर्च ISS नेशनल लेबोरेटरी के सपोर्ट से हुई. नासा स्पेस स्टेशन को निजी कंपनियों और वैज्ञानिकों के लिए खुला रखता है, ताकि माइक्रोग्रेविटी का फायदा उठाकर नई खोजें हों. स्पेस रिसर्च के फायदे क्या हैं?     पृथ्वी पर दवाओं का विकास तेज और बेहतर होता है.     कैंसर जैसे जटिल रोगों का इलाज आसान बनता है.     अंतरिक्ष यात्री के लिए लंबी स्पेस मिशन (चंद्रमा और मंगल) की तैयारी भी होती है.     कॉमर्शियल स्पेस इकोनॉमी बढ़ती है – निजी कंपनियां स्पेस में निवेश करती हैं. नासा का कहना है कि स्पेस स्टेशन पर किया गया काम न सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत सुधारता है, बल्कि पृथ्वी पर लाखों लोगों की जिंदगी बेहतर बनाता है. यह उदाहरण दिखाता है कि अंतरिक्ष की खोजें कैसे आम लोगों तक पहुंच रही हैं. भविष्य में स्पेस रिसर्च से और भी कई नई दवाएं और इलाज सामने आ सकते हैं. कैंसर मरीजों के लिए यह नया इंजेक्शन एक बड़ी उम्मीद है.  

हेयर फॉल का असली कारण आपकी थाली में! इन 4 चीजों को खाते ही बाल होने लगते हैं कमजोर

नई दिल्ली आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण और खराब खान-पान के कारण बाल झड़ने की समस्या एक आम बात हो गई है। हम अक्सर महंगे शैम्पू, तेल और हेयर ट्रीटमेंट्स पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन अपनी डाइट पर ध्यान देना भूल जाते हैं। जी हां, हो सकता है आपके हेयर फॉल की असली वजह आपकी डाइट में ही छिपी हो। दरअसल, हम जो भी खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे बालों की सेहत पर पड़ता है। इसलिए अगर आप भी गिरते बालों से परेशान हैं, तो आपको अपने किचन में मौजूद कुछ चीजों को तुरंत बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। आइए जानें इन्हीं फूड्स के बारे में, जो बालों के लिए दुश्मन साबित हो सकते हैं। चीनी चीनी सिर्फ वजन ही नहीं बढ़ाती, बल्कि यह बालों के झड़ने का एक मुख्य कारण है। जब आप बहुत ज्यादा मीठा खाते हैं, तो शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ इंसुलिन लेवल पुरुष और महिला दोनों के शरीर में 'एंड्रोजन' हार्मोन को एक्टिव कर देता है। यह हार्मोन बालों के फॉलिकल्स को सिकोड़ देता है, जिससे बाल पतले होकर झड़ने लगते हैं। इसके अलावा, चीनी स्कैल्प में सूजन पैदा करती है, जिससे बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। हाई-ग्लाइसेमिक फूड्स मैदा से बनी चीजें जैसे पिज्जा, पास्ता, सफेद ब्रेड और रिफाइंड कार्ब्स शरीर में शुगर की मात्रा को तेजी से बढ़ाते हैं। इन फूड्स से शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है। जो लोग अपनी डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ज्यादा लेते हैं, उनमें समय से पहले बाल झड़ने और गंजेपन की समस्या ज्यादा हो सकती है। इनकी जगह होल ग्रेन को डाइट में शामिल करना एक बेहतर ऑप्शन है। डाइट सोडा और आर्टिफिशियल स्वीटनर कई लोग वजन घटाने के चक्कर में सामान्य चीनी की जगह 'डाइट सोडा' या 'शुगर-फ्री' ऑप्शन को चुनते हैं। इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर होता है, जो बालों के फॉलिकल्स को नुकसान पहुंचा सकता है और स्कैल्प की हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आप सोडा या ज्यादा कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, तो यह आपके बालों की चमक छीन सकता है और उन्हें जड़ों से कमजोर बना सकता है। शराब और कैफीन शराब शरीर को डिहाइड्रेट करती है। शरीर में पानी की कमी होने पर बाल सूखे और बेजान होकर टूटने लगते हैं। इसके अलावा, शराब शरीर में जिंक के स्तर को कम कर देती है। जिंक बालों की ग्रोथ के लिए एक जरूरी मिनरल है। इसी तरह, बहुत ज्यादा मात्रा में चाय या कॉफी पीना भी शरीर में पोषक तत्वों के अब्जॉर्प्शन में बाधा डालता है। इनकी जगह क्या खाएं? सिर्फ इन चीजों को छोड़ने से काम नहीं चलेगा, आपको अपनी डाइट में कुछ अच्छी चीजें जोड़नी भी होंगी-     प्रोटीन- अंडे, दालें और पनीर।     आयरन- पालक, मेथी और अनार।     ओमेगा-3- अखरोट और अलसी के बीज।  

असफलता का सबसे बड़ा कारण है लोकलाज और मृत्यु का भय

आचार्य चाणक्य अपनी नीतियों में जीवन के कठोर सत्य सिखाते हैं। वे कहते हैं कि सफलता पाने के लिए साहस और निडरता जरूरी है। कुछ लोग दो चीजों से इतना डरते हैं कि जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते हैं। चाणक्य की चेतावनी है कि इन दो चीजों से डरने वाला इंसान कभी सफल नहीं होता है। ये दो चीजें हैं – लोक लाज (लोग क्या कहेंगे) और मृत्यु का भय। इनसे डरने से व्यक्ति अवसर चूक जाता है और जीवन में असफल रहता है। चाणक्य नीति सिखाती है कि इन भयों को त्यागकर ही बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। आज के समय में भी यह नीति बहुत प्रासंगिक है। आइए जानते हैं चाणक्य की यह चेतावनी और इसका महत्व। लोक लाज का डर आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लोक लाज से डरने वाला कभी बड़ा काम नहीं कर पाता है। लोग क्या कहेंगे, इस डर से व्यक्ति नए रास्ते नहीं चुनता है। व्यापार शुरू करने, नौकरी बदलने या सपने पूरे करने में हिचकिचाता है। समाज की बातों से डरकर वह अपनी क्षमता का उपयोग नहीं करता है। चाणक्य की चेतावनी है कि लोक लाज का डर सफलता का सबसे बड़ा शत्रु है। जो लोग इस डर को त्याग देते हैं, वे ही इतिहास बनाते हैं। आज कई लोग इसी डर से रिस्क नहीं लेते और जीवन भर पछताते हैं। चाणक्य नीति सिखाती है कि अपनी बुद्धि और मेहनत पर भरोसा करें, लोगों की बातों पर नहीं। लोक लाज त्यागें, तो सफलता जरूर मिलेगी। मृत्यु का भय मृत्यु से डरने वाला जीते जी मर जाता है। मृत्यु का भय व्यक्ति को जोखिम लेने से रोकता है। बड़ा काम करने, यात्रा करने या नई शुरुआत करने में डर लगता है। चाणक्य की चेतावनी है कि मृत्यु निश्चित है, लेकिन उससे डरकर जीवन व्यर्थ करना मूर्खता है। जो लोग मृत्यु का भय त्याग देते हैं, वे निडर होकर मेहनत करते हैं और सफल होते हैं। योद्धा, व्यापारी या नेता सभी मृत्यु भय त्यागकर ही महान बने हैं। चाणक्य नीति सिखाती है कि मृत्यु को स्वीकार करें और जीवन को पूर्ण जीएं। इस भय से मुक्त होने पर ही बड़ी सफलता मिलती है। इन भयों से मुक्ति ही सफलता का राज आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लोक लाज और मृत्यु भय से डरने वाला कभी सफल नहीं होता है। ये दो भय व्यक्ति को बांधे रखते हैं और अवसर चूक जाते हैं। चाणक्य नीति का सार है कि निडर बनें, साहस रखें। लोग क्या कहेंगे, इसकी चिंता छोड़ें और मृत्यु को निश्चित मानकर जीवन को हर पल जीएं। इन भयों को त्यागने से मन मजबूत होता है और सफलता के द्वार खुलते हैं। चाणक्य की यह चेतावनी आज भी लागू होती है – जो इनसे डरते हैं, वे असफल रहते हैं, जो त्याग देते हैं, वे इतिहास बनाते हैं। चाणक्य की नीति अपनाएं – लोक लाज और मृत्यु भय त्यागें तो जीवन में सफलता और सम्मान मिलेगा। साहस से ही बड़ा मुकाम हासिल होता है।

खर्च घटाने का OPPO का दांव: Realme बनेगा सब-ब्रैंड, यूज़र्स के मन में उठे सवाल

नई दिल्ली स्मार्टफोन बनाने वाली चीनी कंपनी Realme को ओप्पो की सब-ब्रांड के तौर पर शामिल किया जा रहा है। बुधवार को रियलमी ने बताया कि उसे BBK Electronics के तहत आने वाली एक और चीनी कंपनी Oppo की सब-ब्रांड बनाया जा रहा है। खर्चों में कटौती करने के लिए कंपनियों ने ये बड़ा फैसला लिया है। इससे दोनों कंपनियों को अपने संसाधनों को एक साथ लाने और खर्चों को कम करने में मदद मिलेगी। बता दें कि भारत समेत कई देशों में रियलमी के स्मार्टफोन्स को काफी पसंद किया जाता है। ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल जरूर आएगा कि क्या अब मार्केट में Realme के स्मार्टफोन आना बंद हो जाएंगे। आइये, इसके बारे में डिटेल में जानते हैं। Oppo की सब ब्रांड के तौर पर काम करेगी रियलमी Reuters की खबर के अनुसार, रियलमी को ओप्पो की सब-ब्रांड बनाया जा रहा है। भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप में इस कंपनियों के स्मार्टफोन बेचे और पसंद किए जाते हैं। बता दें कि रिलमी, चीनी कंज्यूमर हार्डवेयर दिग्गज BBK इलेक्ट्रॉनिक्स की कंपनी है। इसके तहत ही Oppo और Vivo स्मार्टफोन ब्रांड भी आते हैं। क्या बंद हो जाएंगे रियलमी के स्मार्टफोन? अगर आपको लग रहा है कि अब मार्केट में रियलमी के स्मार्टफोन आना बंद हो जाएंगे तो ऐसा नहीं है। रियलमी के स्मार्टफोन अभी भी लॉन्च किए जाएंगे और वे रियलमी के नाम से ही मार्केट में एंट्री लेंगे। लेकिन, रियलमी अब एक स्वतंत्र ब्रांड नहीं बल्कि ओप्पो की सब ब्रांड के तौर पर काम करेगी। यह नथिंग की सब ब्रांड CMF और वीवो की सब ब्रांड IQOO की तरह ही हो जाएगी। हालांकि, इसके फोन, टैबलेट और ऑडियो प्रोडक्ट रियलमी के नाम से ही मार्केट में बिकेंगे। क्यों लिया गया ये फैसला? रियलमी ने अपना पहला स्मार्टफोन सबसे पहले भारत में ही लॉन्च किया था। इसके बजट और मिड रेंज स्मार्टफोन को काफी पसंद किया जाता है। इसके बाद भी एक सब ब्रांड के तौर पर काम करने का फैसला लेना लोगों को चौंका रहा है। ऐसा कंपनी ने कॉस्ट कटिंग करने यानी पैसा बचाने के लिए किया है। ओप्पो की सब ब्रांड के तौर पर काम करने से ओप्पो और रियलमी दोनों ब्रांड्स का पैसा बचेगा। वे एक दूसरे के रीसोर्स का इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे पैसे बचाने और कंपनी को प्रॉफिट करने में मदद मिलेगी। सैमसंग और वीवो को मिलेगी चुनौती ITC की 2025 की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार भारत में दूसरी सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी ओप्पो थी। इस लिस्ट में वीवो पहले और तीसरे नंबर पर सैमसंग थी। वहीं, रियलमी छठे नंबर पर थी। अब ओप्पो की सब ब्रांड बनने के बाद ये दोनों ब्रांड मिलकर भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी बन सकती हैं। इससे सैमसंग और वीवो को बड़ी चुनौती मिलेगी।

सल्फोनिल्यूरिया दवा से डायबिटीज कंट्रोल करने में दिक्कत, नई रिसर्च में आया बड़ा खुलासा

 नई दिल्ली डायबिटीज को शुगर की बीमारी कहा जाता है. इसमें शरीर में शुगर यानी ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है. यह दुनिया के साथ-साथ भारत में भी सबसे तेजी से बढ़ती बीमारियों में से एक है. टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाती है. इंसुलिन अग्न्याशय की बीटा कोशिकाएं बनाती हैं जो ब्लड शुगर कंट्रोल करती हैं. लेकिन हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना की रिसर्च में सामने आया है कि टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए आमतौर पर जो दवा दी जाती है, वही दवा लंबे समय में टाइप 2 डायबिटीज को और भी बदतर कर सकती है. क्या कहती हैं रिसर्च? Diabetes, Obesity and Metabolism में पब्लिश हुई रिसर्च के मुताबिक, टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में सल्फोनिल्यूरिया कैटेगरी की दवाएं जैसे ग्लिबेनक्लामाइड सालों से उपयोग की जा रही हैं. स्टडी के लीड प्रोफेसर एडुआर्ड मोंटान्या ने समझाया, 'टाइप 2 डायबिटीज में सालों से सल्फोनिल्यूरिया दवाएं दी जाती रही हैं जो बीटा कोशिकाओं को अधिक इंसुलिन रिलीज के लिए स्टिम्युलेट करती हैं.' 'ग्लिबेनक्लामाइड इन्हीं में से एक कॉमन दवा है जो कई देशों में जेनरिक फॉर्म में उपलब्ध है. लेकिन हमारी रिसर्च बताती है कि जब बीटा कोशिकाएं लंबे समय तक ऐसी दवा के संपर्क में रहती हैं तो उनकी सेहत और पहचान दोनों पर नेगेटिव असर पड़ सकता है.' बीटा सेल्स खो रहे हैं अपनी पहचान प्रोफेसर मोंटाण्या के अनुसार, बीटा कोशिकाएं दवाओं के कारण मरती नहीं हैं बल्कि वे अपनी पहचान खो देती हैं. टेस्टिंग में पाया गया है कि ग्लिबेनक्लामाइड के लंबे समय तक प्रयोग से उनकी जीन एक्टिविटी कम हो जाती है जो इंसुलिन प्रोडक्शन के लिए जरूरी होते हैं.' 'रिसर्च में पाया गया कि यह दवाएं कोशिकाओं के भीतर 'एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम' में तनाव पैदा करती है, जिससे उनकी पहचान खत्म होने लगती है.' दवा का असर कम होने की मिली वजह! प्रोफेसर मोंटाण्या ने कहा, 'अक्सर देखा जाता है कि शुरुआत में बेहतर असर दिखाने वाली दवाएं बाद में बेअसर हो जाती हैं और मरीजों को उसके बाद हैवी खुराक या नई दवाएं देनी पड़ती हैं.' 'दरअसल, कोशिकाओं की पहचान खोने से धीरे-धीरे ब्लड शुगर पर कंट्रोल कम होने लगता है जिससे शुगर और बढ़ने लगती है. सेल्स आइडेंटिटी लॉस, सेल डेथ की तरह स्थायी नहीं होती यानी सही ट्रीटमेंट से बीटा कोशिकाओं की पहचान और इंसुलिन बनाने की क्षमता दोबारा लौटाई जा सकती है. दवा की डोज बढा़ने का कारण आया सामने विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना बंद न करें लेकिन यह रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक सल्फोनिल्यूरिया इस्तेमाल करने से ब्लड शुगर कंट्रोल धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है. यही वजह है कि कई मरीजों को समय के साथ दवा की खुराक बढ़ानी या दूसरी दवा जोड़नी पड़ती है.

ग्लूकोमा: बिना दर्द के आंखों को बना सकता है अंधा, जानिए किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा

ग्लूकोमा, जिसे आम भाषा में 'काला मोतिया' कहा जाता है, आंखों की एक गंभीर स्थिति है जो ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाती है। इसे अक्सर साइलेंट थीफ कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती स्टेज में इसके कोई साफ लक्षण नहीं दिखाई देते। इसलिए अगर समय पर इसका पता न चले, तो यह स्थायी अंधापन का कारण बन सकता है। इसलिए इस बारे में लोगों को जानकार बनाने के लिए हर साल जनवरी को Glaucoma Awareness Month की तरह मनाया जाता है। इसलिए हमने डॉ. पवन गुप्ता (सीनियर कैटेरेक्ट एंड रेटिना सर्जन, आई 7 हॉस्पिटल लाजपत नगर एंड विजन आई क्लीनिक नई दिल्ली) से ग्लूकोमा के लक्षण और रिस्क फैक्टर्स के बारे में जानने की कोशिश की। आइए जानें उन्होंने क्या बताया। ग्लूकोमा के लक्षण कैसे होते हैं? ग्लूकोमा की सबसे खतरनाक बात यह है कि ज्यादातर मरीजों को तब तक पता नहीं चलता जब तक कि उनकी दृष्टि काफी हद तक कम न हो जाए। इसके लक्षणों को स्टेज के अनुसार समझा जा सकता है- शुरुआती और मीडियम स्टेज     कोई लक्षण नहीं- शुरुआत में आंखों में न तो दर्द होता है और न ही दृष्टि में कोई अचानक बदलाव आता है।     पेरिफेरल विजन का कम होना- इसमें सबसे पहले पेरिफेरल विजन यानी साइड का दिखना कम होने लगता है। मरीज को सामने की चीजें तो साफ दिखती हैं, लेकिन अगल-बगल का हिस्सा धुंधला या काला दिखाई देने लगता है।     कंट्रास्ट में कमी- रंगों और परछाइयों के बीच अंतर कर पाना मुश्किल होने लगता है।     अंधेरा महसूस होना- मरीज को ऐसा लग सकता है कि उनके आसपास रोशनी कम हो गई है। एक्यूट स्टेज जब आंखों का दबाव बहुत तेजी से बढ़ता है, तो ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं-     आंखों में तेज दर्द और रेडनेस।     सिर में तेज दर्द और जी मिचलाना।     रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुष जैसे घेरे दिखाई देना।     दृष्टि का अचानक धुंधला हो जाना। एडवांस्ड स्टेज     अगर इलाज न मिले, तो टनल विजन (सिर्फ सामने का थोड़ा सा हिस्सा दिखना) की स्थिति बन जाती है और फिर आंखों की रोशनी पूरी तरह जा सकती है। ग्लूकोमा के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? हालांकि, ग्लूकोमा किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।     पारिवारिक इतिहास- अगर आपके परिवार में किसी को ग्लूकोमा है, तो आपको इसका खतरा काफी बढ़ जाता है।     उम्र- 40 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है।     आंखों की बीमारियां- हाई मायोपिया वाले लोगों को इसका खतरा रहता है।     मेडिकल कंडीशन- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को नियमित जांच करानी चाहिए।     स्टेरॉयड का इस्तेमाल- लंबे समय तक स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स या दवाओं के इस्तेमाल से आंखों का दबाव बढ़ा सकता है।     चोट या सर्जरी- आंखों में पुरानी चोट या आंखों की बार-बार हुई सर्जरी भी ग्लूकोमा का कारण बन सकती है। बचाव के लिए क्या करें?     ग्लूकोमा से होने वाला नुकसान ठीक नहीं किए जा सकते, यानी जो दृष्टि चली गई उसे वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए, जल्दी पहचान ही एकमात्र बचाव है।     40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार आंखों के डॉक्टर से 'प्रेशर चेक' और 'फंडस जांच' जरूर करवाएं।  

Realme Pad 3 और Redmi Pad 2 Pro भारत में लॉन्च, 12000mAh बैटरी के साथ जानें कीमत और फीचर्स

नई दिल्ली  भारत में पहली बार 12 हजार एमएएच बैटरी वाले 2 टैबलेट लॉन्‍च हुए हैं। खास बात है कि रियलमी और रेडमी ने इन टैबलेट को लॉन्‍च किया है। दोनों कंपनियां एक दूसरे की प्रतिद्वंदी हैं और इन्‍होंने एक ही दिन अपने प्रोडक्‍ट पेश किए हैं। realme Pad3 में 12200mAh बैटरी है, जबकि Redmi Pad 2 Pro में 12000mAh बैटरी दी गई है। रियलमी ने अपने टैब में मीडियाटेक का चिपसेट लगाया है और रेडमी पैड में स्‍नैपड्रैगन प्रोसेसर मिलता है। इनकी कीमतें भी आसपास हैं। आइए दोनों टैबलेट के दाम और इनके फीचर्स को जानते हैं। Redmi Pad 2 Pro की शुरुआती कीमत 22,999 रुपये है। यह इसके 8GB + 128GB स्टोरेज वाले वाईफाई वेरिएंट की है। टॉप वेरिएंट 27,999 रुपये में आया है। ध्यान रखें कि ये कीमतें 2000 रुपये के बैंक डिस्काउंट के साथ हैं। इसकी सेल 12 जनवरी से शुरू हो जाएगी। realme Pad3 की शुरुआती कीमत 24999 रुपये है। यह 8GB+128GB Wifi मॉडल के दाम हैं। इसी रैम और स्‍टोरेज के साथ 5जी मॉडल की कीमत 27999 रुपये है। अगर आप 8 जीबी और 256 जीबी स्‍टोरेज मॉडल लेना चाहते हैं तो वह 5जी कनेक्‍ट‍िविटी में आएगा और कीमत 29999 रुपये है। याद रहे क‍ि यह कीमत 2 हजार रुपये के बैंक ऑफर के साथ है। realme Pad3 फीचर्स, स्‍पेसिफ‍िकेशंस realme Pad3 को स्‍टूडेंट्स, प्रोफेशनल्‍स और रोजाना इस्‍तेमाल के लिए तैयार किया गया है। डिजाइन इसकी बड़ी ताकत है। यह कॉम्‍पैक्‍ट होने के साथ-साथ बुक स्‍टाइल डिस्‍प्‍ले ऑफर करता है। दावा है कि यह किसी लैपटॉप की तरह काम करता है और एआई की तरह सोच सकता है। realme Pad3 में 2.8K बुक व्‍यू डिस्‍प्‍ले दिया गया है। यह 11.6 इंच की स्‍क्रीन है। शार्प टेक्‍स्‍ट और क्‍लीयर विजुअल्‍स पेश करती है। टीयूवी रीनलैंड सर्टिफ‍िकेशन डिस्‍प्‍ले को मिला है यानी यह आंखों को नुकसान पहुंचाने वाली ब्‍लू लाइट का कम उत्‍सर्जन करता है। दावा है कि यह डिस्‍प्‍ले पढ़ाई के साथ-साथ एंटरटेनमेंट में भी जबरदस्‍त रहने वाला है। realme Pad3 में 12200mAh की टाइटन बैटरी लगी है। यह 45W की फास्‍ट चार्जिंग के साथ 10 वॉट की रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इतनी बड़ी बैटरी के बावजूद यह टैब सिर्फ 6.6mm स्‍ल‍िम है और इसका वजन 560 ग्राम है। realme Pad3 में मीडियाटेक डाइमेंस‍िटी 7300 मैक्‍स चिपसेट की ताकत है। क्‍वाड स्‍टीरियो स्‍पीकर्स दिए गए हैं। यह 5जी मोबाइल कनेक्‍ट‍िविटी को सपोर्ट करता है। Redmi Pad 2 Pro फीचर्स, स्‍पेसिफ‍िकेशंस Redmi Pad 2 Pro का डिस्‍प्‍ले साइज रियलमी के टैब से अधि‍क है। यह 12.1 इंच डिस्‍प्‍ले के साथ आता है, जो 2.5K रेजॉलूशन ऑफर करता है। डिस्‍प्‍ले में 120 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट दिया गया है। डॉल्‍बी विजन सपोर्ट है। यह डिस्‍प्‍ले भी टीयूवी रीनलैंड सर्टिफाइड है और 600 निट्स की ब्राइटनैस ऑफर करता है। Redmi Pad 2 Pro में स्‍नैपड्रैगन 7एस जेन 4 चिपसेट की ताकत दी गई है। इस टैब में 12 हजार एमएएच की बैटरी लगी है जो 27 वॉट की रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इस टैब में भी कुल 4 स्‍पीकर्स दिए गए हैं जो डॉल्‍बी एटमॉस साउंड को सपोर्ट करते हैं। यह वाईफाई और 5जी कनेक्‍ट‍िविटी में आता है। दावा है कि इसके 5जी वेरिएंट को सिर्फ इंटरनेट नहीं, बल्कि कॉलिंग के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। रेडमी टैब में ढेर सारे एआई फीचर्स लाए गए हैं। कंपनी इस टैब के साथ कीबोर्ड और स्‍टायलस पेन भी लेकर आई है, ज‍िन्‍हें आपको अलग से खरीदना होगा।

सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है खजूर, अगर आप इन 5 में से हैं

खजूर एक ऐसा ड्राई फ्रूट है, जो खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी होता है। खजूर में विटामिन-बी6, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो सेहत को कई लाभ पहुंचाते हैं। इसके नियमित सेवन से इम्यूनिटी बूस्ट हो सकती है। साथ ही, यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने से लेकर हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार होता है। लेकिन इतने फायदों के बावजूद कुछ लोगों को खजूर का सेवन करने से बचना चाहिए। जी हां, कुछ लोगों के लिए खजूर का सेवन नुकसानदायक साबित हो सकता है। जरूरत से ज्यादा खजूर का सेवन करने से शरीर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। तो आइए, डाइट्रीफिट की डायटीशियन अबर्ना माथीवानन से जानते हैं किन लोगों को खजूर का सेवन नहीं चाहिए? किडनी से जुड़ी समस्या से ग्रसित लोग जिन लोगों को किडनी से जुड़ी कोई बीमारी है, उन्हें खजूर का सेवन करने से बचना चाहिए। दरअसल, इसमें पोटैशियम की अधिक मात्रा पाई जाती है, जो किडनी रोगियों के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए अगर आपको किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करें। मोटापे से जूझ रहे लोग मोटापे से ग्रस्त लोगों को भी खजूर का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। दरअसल, इसमें कैलोरी और शुगर की मात्रा काफी अधिक होती है, जिससे आपका वजन बढ़ सकता है। इसके अलावा, अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपको इसका सेवन करने से बचना चाहिए। कमजोर पाचन वाले लोग पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों को भी खजूर का सेवन नहीं करना चाहिए। दरअसल, इसमें लैक्सेटिव गुण होता है, जो मल त्याग को बढ़ावा देता है। ऐसे में, इसका सेवन करने से डायरिया की समस्या हो सकती है। इसमें ज्यादा फाइबर की मौजूदगी और तासीर गर्म होने के कारण पेट की समस्याएं बढ़ सकती हैं। डायबिटीज के मरीज डायबिटीज के मरीजों को भी खजूर का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। दरअसल, इसमें प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है। ऐसे में, इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करने से आपका ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है। अगर आपको शुगर है, तो खजूर का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। एलर्जी कुछ लोगों को खजूर का सेवन करने से एलर्जी की समस्या हो सकती है। इसके कारण उन्हें त्वचा पर खुजली, रैशेज, बार-बार छींक आना और आंखों में खुजली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, जिन लोगों को खजूर से एलर्जी है, उन्हें इसका सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

108MP कैमरा से लेकर कर्व्ड AMOLED स्क्रीन तक: भारत में आया Redmi Note 15 5G, जानें कीमत

नई दिल्ली   शाओमी के सब ब्रैंड रेडमी ने अपना नया स्‍मार्टफोन Redmi Note 15 5G भारत में लॉन्‍च कर दिया है। यह खूबसूरत डिजाइन, स्‍ल‍िम बॉडी के साथ आता है। फोन कर्व्‍ड एमोलेड डिस्‍प्‍ले दिया गया है। क्‍वॉलकॉम स्‍नैपड्रैगन 6 जेन 3 चिपसेट इसमें मिलता है। 5520mAh की बैटरी है, जिसे लेकर दावा है कि यह 5 साल चलने के बाद भी 80% लाइफ साइकल के साथ डटी रहती है। Redmi Note 15 5G में 108 मेगापिक्‍सल का डुअल एआई कैमरा है। दावा है कि इस सेंसर को सैमसंग ने खास शाओमी के लिए बनाया है। फोन में 20 मेगापिक्‍सल का सेल्‍फी कैमरा मिलता है। आइए जानते हैं इसके प्रमुख फीचर्स, स्‍पेसिफ‍िकेशंस। भारत में प्राइस, उपलब्‍धता Redmi Note 15 5G स्मार्टफोन की कीमत 19,999 रुपये से शुरू है। इसमें 8GB RAM के साथ 128GB स्टोरेज दिया गया है। वहीं, 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 21,999 रुपये है। बता दें कि ये कीमतें बैंक डिस्काउंट के साथ हैं। फोन की सेल 9 जनवरी से शुरू हो जाएगी। फीचर्स और स्‍पेसिफ‍िकेशंस Redmi Note 15 5G कंपनी का अबतक का सबसे स्‍ल‍िम और लाइटवेट स्‍मार्टफोन है। यह 7.35mm स्‍लीक है और इसका वजन 178 ग्राम है। Redmi Note 15 5G में 6.77 इंच का कर्व्‍ड एमोलेड डिस्‍प्‍ले है, जो 120 हर्त्‍ज के रिफ्रेश रेट के साथ आता है। इसमें 3200 निट्स की ब्राइटनैस मिलती है। इन-डिस्‍प्‍ले फ‍िंगरप्रिंट सेंसर की सुविधा है। यह डिस्‍प्‍ले टीयूवी ट्रिपल सर्टिफाइड है और आंखों को कम नुकसान पहुंचाता है। रेडमी का कहना है कि इस डिस्‍प्‍ले को गीली उंगल‍ियों से भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। प्रोसेसर, ओएस Redmi Note 15 5G में क्‍वॉलकॉम स्‍नैपड्रैगन 6 जेन 3 चिपसेट दिया गया है। यह फोन एंड्रॉयड 15 पर बेस्‍ड शाओमी हाइपर 2 ओएस पर रन करता है। कंपनी ने 4 ओएस अपग्रेड और 6 साल के सिक्‍यो‍रिटी अपडेट्स का वादा किया है। फोन में डॉल्‍बी एटमॉस साउंड सपोर्ट, एआई कॉल नॉइस रिडक्‍शन, आईआर रिमोट कंट्रोल जैसे फीचर्स दिए गए हैं। यह गूगल के जेमिनी एआई की खूबियों से भी पैक है।  बैटरी, कैमरा Redmi Note 15 5G में 5520mAh की बैटरी दी गई है। यह 45 वॉट की फास्‍ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। कंपनी दावा कर रही है कि 5 साल इस्‍तेमाल किए जाने के बाद भी फोन की बैटरी हेल्‍थ 80 फीसदी बनी रहेगी। रेडमी के इस फोन में 108MP का सैमसंग ISOCELL HM9 कैमरा सेंसर है। यह ऑप्टिकल इमेज स्‍टैबलाइजेशन और 4K वीडियो सपोर्ट के साथ आता है। 20 मेगापिक्‍सल का सेल्‍फी कैमरा इस डिवाइस में दिया गया है। कंपनी ने बताया है कि 108MP का यह सेंसर किसी और ब्रैंड के स्‍मार्टफोन में नहीं मिलेगा, क्‍योंकि इस सेंसर को शाओमी-रेडमी फोन्‍स के लिए बनाया गया है, जो अच्‍छी क्‍वॉलिटी की फोटो ले सकता है।