samacharsecretary.com

ऐसे मिनटों में लगाएं अपने चोरी हुए फोन का पता

मौजूदा समय में हमारे ज्यादातर काम स्मार्टफोन पर होते हैं फिर चाहे वो ऑफिशियल काम हो या फिर पर्सनल काम। स्मार्टफोन पर हमारी निजी जानकारी जैसे फोटोज, वीडियोज, सोशल मीडिया अकाउंट और बेंकिग जैसी जानकारियां मौजूद रहती हैं। ऐसे में फोन का खो जाना या फिर चोरी हो जाना किसी भी यूजर के लिए बूरे सपने से कम नहीं है। फोन के चोरी होने या फिर खो जाने पर गूगल का एक फीचर आपके काम आ सकता है। दरअसल एप्पल के फाइंड माय फोन फीचर की तरह एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में यूजर्स को फाइंड माय फोन फंक्शन मिलता है। फाइंड माय फोन फंक्शन की मदद से आप अपने फोन की पुरानी लोकेशन से लेकर मौजूदा लोकेशन तक की जानकारी पा सकते हैं। गूगल मैप्स की मदद से आप अपने खोए हुए फोन को मिनटों में ढूंढ सकते हैं। तो जानते हैं इन स्टेप्स के बारे में जो आपके काम आ सकते हैं। Step 1: अपने स्मार्टफोन या फिर पीसी पर ब्राउजर को ओपेन करें और डब्लूडब्लूडब्लू डॉट मैप्स डॉट गूगल डॉट को डॉट इन पर जाएं। Step 2: अपने उस गूगल अकाउंट से लॉग-इन करें जिससे खोया या फिर चोरी हुआ फोन लिंक था। Step 3: ऊपर दाई ओर बने तीन डॉट्स पर क्लिक करें। Step 4: इसके बाद योर टाइमलाइन ऑप्शन पर क्लिक करें। Step 5: यहां उस साल, महीना या फिर दिन की जानकारी इंटर करें जब से आप अपने खोए हुए फोन की लोकेशन का पता लगाना चाहते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपका फोन 14 अगस्त को चोरी हुआ है या फिर खोया है, तो टाइम लाइन में 14 अगस्त 2018 इंटर करें। Step 6: मैप आपको फोन की पुरानी लोकेशन से लेकर मौजूदा लोकेशन तक की पूरी जानकारी देगा।  

ठंड आते ही बढ़ जाता है हार्ट अटैक रिस्क, डॉक्टर बोले— बस 40 पैसे की यह दवा बचा सकती है जान

नई दिल्ली  सर्दियों ने दस्तक दे दी है और हर कोई जानता है कि इन दिनों हार्ट अटैक के केस काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं। खासतौर से जिन लोगों को पहले से ही हार्ट से जुड़ी कोई बीमारी है, बीपी, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उनके लिए तो खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरत है कि अपने लाइफस्टाइल और डाइट में जरूरी बदलाव किए जाएं और साथ ही किसी इमरजेंसी वाली सिचुएशन के लिए भी तैयार रहा जाए। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ साकेत गोयल ने एक ऐसी ही 20 से 40 पैसे वाली गोली के बारे में बताया है, जो हार्ट अटैक में मौत के रिस्क को 28 प्रतिशत तक कम कर सकती है। ये ठीक उतनी ही इफेक्टिव है, जितना हॉस्पिटल में दिया जाने वाला इंजेक्शन। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा? सर्दियों में हार्ट अटैक के केस काफी बढ़ जाते हैं। दरअसल ऐसा इसलिए है क्योंकि सर्दियों में हमारी ब्लड वेसल्स यानी नसें थोड़ी सिकुड़ जाती हैं। इस वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा फोर्स लगाना पड़ता है, जिससे हार्ट पर लोड बढ़ जाता है। जिन लोगों को पहले से ही हार्ट से जुड़ी प्रॉब्लम्स हैं या बीपी और कोलेस्ट्रॉल की शिकायत है, उनके लिए तो खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। इमरजेंसी के लिए जरूर रखें ये गोली डॉ साकेत कहते हैं कि किसी भी इमरजेंसी सिचुएशन के लिए आपको एक डिस्प्रिन (एस्पिरिन) की गोली जरूर रखनी चाहिए। ये 20-40 पैसे की एक गोली अगर सही समय पर दी जाए, तो लाइफ सेविंग साबित हो सकती है। अगर आपको कोई भी हार्ट अटैक से जुड़ा लक्षण दिखता है जैसे सीने में तेज जकड़न या दबाव, दोनों बांहों में जकड़न होना, छाती में जलन होना, तेज पसीना आना, जबड़े में अकड़न महसूस होना; तो तुरंत डिस्प्रिन की गोली लें। इसे चबाकर खाना है और उसके बाद पानी पी लेना है। डॉक्टर कहते हैं कि ये गोली लेने का कोई नुकसान नहीं है। अगर मरीज को गैस या एसिडिटी भी बन रही है, तो ये गोली ली जा सकती है। ये हार्ट अटैक से मौत में 25 से 28 प्रतिशत तक बचाव कर सकती है, जो हार्ट अटैक में दिए जाने वाले इंजेक्शन जितना ही है। गोली देने के बाद तुरंत अस्पताल ले जाएं डॉक्टर कहते हैं कि जैसे ही आप ये दवा मरीज को दे दें, उसके बाद तुरंत किसी अच्छे हॉस्पिटल लेके जाएं। वहां जितना जल्दी हो सके ECG कराएं और हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर को दिखाएं।  

क्यों किया सेना ने एंड्रॉयड को प्रतिबंधित? अब अनिवार्य होगा iPhone का इस्तेमाल

इजरायल इजरायल की सेना (IDF) ने अपने बड़े अफसरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब लेफ्टिनेंट कर्नल और उससे ऊपर के रैंक के सभी कमांडर सिर्फ आईफोन ही इस्तेमाल कर सकेंगे। एंड्रॉयड फोन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सेना का कहना है कि एंड्रॉयड फोन में हैकिंग का खतरा ज्यादा है। दुश्मन आसानी से इन फोन्स को हैक करके निजी जानकारी चुरा सकते हैं। पिछले कुछ सालों में इजरायल के सैनिकों को 'हनी ट्रैप' का शिकार बनाया गया है। इसमें खूबसूरत लड़कियों के फेक अकाउंट से चैट शुरू की जाती है और फिर फोन में वायरस डाल दिया जाता है। इससे सैनिकों की लोकेशन और दूसरी जरूरी जानकारी लीक हो जाती है। सिर्फ आईफोन ही क्यों? यह खबर इजरायल के आर्मी रेडियो ने सबसे पहले दी, जिसे जेरूसलम पोस्ट ने भी छापा। रिपोर्ट में बताया गया कि आईफोन को सेना ज्यादा सुरक्षित मान रही है क्योंकि यह एक क्लोज सिस्टम है। इसमें बाहर के ऐप आसानी से नहीं डाले जा सकते। ऐपल कंपनी हर चीज पर सख्ती से नजर रखती है। जबकि एंड्रॉयड में हजारों कंपनियां फोन बनाती हैं और कोई भी ऐप डाउनलोड करना आसान है। इसी वजह से वायरस और स्पाईवेयर का खतरा ज्यादा रहता है। इजरायल को गूगल पिक्सल भी रास नहीं आया हाल ही में गूगल ने बड़ा दावा किया था कि उसका पिक्सल फोन आईफोन से भी ज्यादा सुरक्षित है। अमेरिका की सेना ने भी पिक्सल फोन को मंजूरी दे दी थी। गूगल ने कहा था कि उसके फोन में खास सुरक्षा फीचर हैं जो सरकारी काम के लिए बेस्ट हैं। लेकिन इजरायल की सेना ने इन दावों को नजरअंदाज कर दिया और सिर्फ आईफोन को चुना। पहले से चल रही थी तैयारी यह फैसला एकदम से नहीं लिया गया। पहले भी सेना ने अपने अफसरों को ट्रेनिंग दी थी कि फेक मैसेज और कॉल से कैसे बचें। हिजबुल्लाह जैसे दुश्मन संगठनों के हनी ट्रैप का ड्रामा भी करवाया गया था ताकि सैनिक सतर्क रहें। अब फोन का नियम और सख्त कर दिया गया है। निजी इस्तेमाल में छूट, सरकारी काम में सख्ती नए नियम के मुताबिक एंड्रॉयड फोन पूरी तरह बैन नहीं हुए हैं। अफसर अपना निजी फोन एंड्रॉयड ही रख सकते हैं। लेकिन सेना के किसी भी काम, मीटिंग या गोपनीय बात के लिए सिर्फ आईफोन इस्तेमाल करना जरूरी होगा। सेना की तरफ से दिए जाने वाले फोन भी अब सिर्फ आईफोन ही होंगे। एंड्रॉयड ने बहुत सुधार किया, फिर भी पीछे पिछले दो साल में गूगल ने एंड्रॉयड को काफी सुरक्षित बनाया है। अब अगले साल से बाहर के ऐप डालने पर और सख्ती आने वाली है। फिर भी आईफोन का बंद इकोसिस्टम अभी भी सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। खासकर सेनाओं और सरकारी कामों के लिए। एंड्रॉयड से कहीं आगे है आईफोन? यह फैसला सिर्फ इजरायल की सेना तक सीमित नहीं है। दुनिया की दूसरी सेनाएं और खुफिया एजेंसियां भी देख रही हैं। अगर कोई देश अपने टॉप अफसरों के लिए सिर्फ आईफोन चुनता है तो यह ऐपल के लिए बड़ी जीत है और गूगल के लिए झटका। स्मार्टफोन की सुरक्षा की जंग में आईफोन अभी आगे निकल गया लगता है।

चेहरे पर पीरियड ब्लड लगाने का ट्रेंड: काम करता है या नुकसानदायक? जानें डॉक्टरों की राय

नई दिल्ली पहले के जमाने में जब महिलाओं को पीरियड्स आते थे तो घर में किसी को भी पता नहीं चलता था, लेकिन अब जमाना काफी बदल गया है। अब महिलाएं इसे छुपाने में कोई शर्म नहीं करती। वहीं, हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड वायरल हो रहा है, जिसमें कई महिलाएं चेहरे पर अपना पीरियड ब्लड लगाती हुई दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि चेहरे पर अपना पीरियड ब्लड लगाने से त्वचा ग्लोइंग, यंग और हेल्दी दिखने लगती है। इसे Menstrual Masking का नाम दिया गया है। वहीं, इसके बारे में ObGyn और फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मानसी नारलकर ने अपने इंस्टाग्राम पर इस ट्रेंड पर एक विस्तृत वीडियो शेयर किया। डॉ. मानसी नारलकर ने बताया कि ट्रेंड के पीछे जो लॉजिक बताया जा रहा है वह पूरी तरह सही नहीं है। दावा किया जाता है कि पीरियड ब्लड में स्टेम सेल्स और साइटोकाइन्स होते हैं, जो स्किन रिपेयर करने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टर मानसी कहती हैं कि ये सिर्फ थ्योरी है, इसे लेकर अभी कोई मजबूत वैज्ञानिक रिसर्च नहीं है। चेहरे की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है। ऐसे में अनस्टेराइल चीज़ें लगाने से फंगल इन्फेक्शन, बैक्टीरियल इन्फेक्शन, स्किन एलर्जी, पिंपल्स और रैशेज लंबे समय में स्किन डैमेज हो सकता है। डॉक्टर्स साफ चेतावनी देते हैं कि यह ट्रेंड हानिकारक है। इसे चेहरे पर लगाने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है डॉक्टरों के मुताबिक पीरियड ब्लड में एंडोमेट्रियल टिश्यू (गर्भाशय की परत), वेजाइनल डिस्चार्ज, बैक्टीरिया, फंगस और माइक्रो ऑर्गेनिज्म होता है क्योंकि यह खून वेजाइना से होकर बाहर आता है, इसलिए यह स्टेराइल नहीं होता। यही कारण है कि इसे चेहरे पर लगाने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, बता दें कि पंजाब केसरी इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

Nvidia CEO खुलासाः क्यों AI चिप बनाने में खर्च होते हैं अरबों रुपये

नई दिल्ली जितनी तेजी से AI हम सभी की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है, उतनी ही तेजी से इनके पीछे लगी कंपनियों की लागत आसमान छू रही है। अगर आपको इस बारे में कोई अंदाजा नहीं कि AI चिप बनाने में क्या खर्च आता है, तो बता दें कि यह सारा खेल अरबों-खरबों रुपये का है। इस बारे में खुद AI चिप बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी NVIDIA के सीईओ जेनसेन हुआंग बता चुके हैं। उनके अनुसार, एक नई AI-चिप आर्किटेक्चर को डिजाइन और बनाने की शुरुआत में ही 5.5 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो जाते हैं। यह मोटी रकम चिप की पहली यूनिट के फैक्ट्री से बाहर आने से पहले ही खर्च हो जाती है। चलिए चिप बनाने के पूरे प्रोसेस और उस पर आने वाली लागत के बारे में जेनसेन हुआंग के जरिए समझते हैं। इतनी बड़ी राशि की जरूरत क्यों? किसी नई जेनरेशन की AI चिप बनाने के लिए उस चिप का डिजाइन, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर डेवलपमेंट, सिमुलेशन, टूल चेन, आदि सब कुछ पूरी तरह तैयार करना पड़ता है। हुआंग के मुताबिक (ref.), इन डिजाइन और इंजीनियरिंग के खर्चों पर बी 5 से 6 बिलियन डॉलर खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा चिप का डिजाइन तैयार हो जाने के बाद उसे फैब्रिकेट कराने के लिए एक मास्क सेट बनाना पड़ता है। इस पर आमतौर पर 500 मिलियन डॉलर का खर्च आ जाता है। कहने का मतलब है कि इससे पहले एक भी चिप बन पाए लगभग 5.5 बिलियन डॉलर यानी कि 4,914 करोड़ का खर्च उठाना पड़ता है। प्रति चिप आता है कितना खर्च चिप बनाने के लिए शुरू में होने वाला खर्च बहुत ज्यादा लग सकता है लेकिन यह लागत प्रित चिप पर आने वाले खर्च से काफी अलग है। इसे समझने के लिए आप AI-चिप Blackwell B200 की कीमत देख सकते हैं। यह प्रति चिप 30,000 से 40,000 यूएस डॉलर के आसपास बैठती है। देखा जाए तो यह कीमत इस चिप के पिछले जेनरेशन H100 की कीमत के आस-पास ही है। कहने का मतलब है कि एक चिप की कीमत में भारी-भरकम R&D या शुरुआती खर्च को शामिल नहीं किया जाता। यह सिर्फ उस एक चिप की मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और वितरण खर्च और प्रॉफिट मार्जिन को बताता है। इतने महंगे चिप बनाना क्यों है जरूरी? आपके मन में सवाल उठ सकता है कि इतने महंगे AI चिप बनाना क्यों जरूरी है। दरअसल साधारण सीपीयू या जीपीयू के मुकाबले हाई एंड AI चिप्स जैसे कि Blackwell B200 काफी शक्तिशाली होते हैं। इनकी कंप्यूटेशनल कैपेसिटी, मेमोरी और एफिशिएंसी इतनी ज्यादा होती है कि यह सैंकड़ों नॉर्मल प्रोसेसर और जीपीयू की जगह काम कर सकते हैं। इससे उर्जा, समय और ऑपरेशन कॉस्ट में काफी बचत हो सकती है।

सोशल मीडिया पर छाया MOM गैजेट, बेंगलुरु के शख्स ने बनाया AI जो भूख लगते ही खाना मंगाए

 नई दिल्ली सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के फूड हैक्स और किचन ट्रिक्स मिल जाते हैं, लेकिन एक भारतीय इंजीनियर का नया आइडिया लोगों को हैरान कर रहा है. इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक ऐसा अनोखा डिवाइस दिखाया गया है, जो आपकी भूख पहचान कर अपने-आप खाना ऑर्डर कर देता है. कंटेंट क्रिएटर @zikiguy की सीरीज़ “Inventions You Will Never Think Of” में दिखाया गया यह गैजेट लोगों की एक आम परेशानी समय पर खाना भूल जाना का मजेदार और अनोखा समाधान पेश करता है. ऐसा गैजेट जो भूख पहचान लेता है वीडियो में दिखाया गया डिवाइस का नाम MOM (Meal Ordering Module) है, इसे बेल्ट पर लगाया जाता है. यह पेट से आने वाली भूख की आवाज सुनकर पहचान लेता है और जैसे ही आवाज मिलती है, यह ज़ोमैटो के ज़रिए अपने-आप खाना ऑर्डर कर देता है. क्रिएटर मज़ाक में कहते हैं, “इसका नाम MOM इसलिए है, क्योंकि ये मुझे माँ की तरह समय पर खाना खाने के लिए मजबूर करता है.” भूख पहचानने वाला यह गैजेट कैसे काम करता है? इस अनोखे डिवाइस को बनाने के लिए इंजीनियर ने अपनी बहन का स्टेथोस्कोप इस्तेमाल किया. उन्होंने पेट की आवाज रिकॉर्ड करने के लिए एक छोटा माइक्रोफोन, एक साउंड सेंसर, छोटी बैटरी और ESP32 माइक्रोकंट्रोलर लगाकर अंदर की पूरी सिस्टम तैयार की. यह गैजेट पेट की आवाजें सुनकर उनका डेटा वाई-फाई के जरिए एक लोकल सर्वर तक भेज देता है. डिवाइस को पूरा रूप देने के लिए उसने एक 3D-प्रिंटेड बॉडी बनाई और एक ऑन/ऑफ स्विच भी लगाया. इंजीनियर के मुताबिक, इस डिवाइस का कोड पेट की गुर्राने की तीव्रता और कितनी देर तक आवाज चलती है, इसका विश्लेषण करता है अगर पेट की आवाज ज्यादा तेज और लंबी होती है, तो यह मानता है कि भूख ज्यादा है — और ऐसे में डिवाइस दो पिज़्ज़ा या पूरी बिरयानी जैसा बड़ा ऑर्डर कर देता है. ज़ोमैटो से अपने-आप खाना ऑर्डर करने की क्षमता ( डिवाइस) MOM की सबसे रोचक खासियत है इसका ज़ोमैटो के MCP सर्वर से कनेक्शन है. इससे यह गैजेट अपने आप आसपास के रेस्टोरेंट्स को तलाश सकता है, उनकी रेटिंग देख सकता है, दामों के हिसाब से फिल्टर कर सकता है, और फिर यूज़र की पिछली पसंद के आधार पर एक डिश चुनकर ऑर्डर कर देता है. वीडियो में, क्रिएटर दिखाता है कि कैसे डिवाइस ने अपने आप खाना ऑर्डर कर दिया और जब वह दरवाजा खोलता है, तो कई पिज्जा बॉक्स देखकर दंग रह जाता है. सोशल मीडिया पर जमकर कर रहे कमेंट एक यूजर ने लिखा, “इसे अनावश्यक आविष्कारों की लिस्ट में डाल देना चाहिए. जब किसी ने पूछा कि “आपने इसे टेस्ट कैसे किया?”, तो क्रिएटर ने मज़ाक में कहा कि उसे पूरा दिन बिना खाना खाए बैठना पड़ा. एक ने लिखा, “भाई, तुम तो मेरा बैंक बैलेंस ही खत्म कर दोगे. दूसरे ने कहा, “लगता है, तुम्हारी इंजीनियरिंग की डिग्री आखिर काम आ ही गई.” एक मजाकिया कमेंट था, “ये वीडियो खास उन लोगों के लिए बना है जिनकी फुल-टाइम नौकरी है, नियम और शर्तें लागू।” क्या यह गैजेट सच में भविष्य में आएगा? अभी यह साफ नहीं है कि MOM जैसे उपकरण कभी असली प्रोडक्ट बन पाएंगे या नहीं. लेकिन एक बात तय है—यह गैजेट इंटरनेट पर लोगों को खूब हंसी और मनोरंजन दे रहा है। खाने के शौकीनों और टेक्नॉलजी पसंद करने वालों, दोनों को यह आइडिया काफी मजेदार लगा।

पेट की फैट और किडनी स्वास्थ्य का कनेक्शन: स्टडी में बताया गया सही कमर माप

मुंबई   मोटापा की स्थिति तब मानी जाती है, जब शरीर में फैट इस सीमा तक बढ़ जाता है कि वह स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने लगता है और उसके कारण आप अपनी डेली लाइफस्टाइल के काम नहीं कर पाएं. एक्सपर्ट के मुताबिक, बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अगर 30 या इससे अधिक है, तो इसे मोटापा माना जाता है. वैसे तो मोटापे के कारण कई बीमारियां हो सकती हैं लेकिन हाल ही में BMC Nephrology जर्नल में पब्लिश स्टडी में दावा किया गया है कि सिर्फ वजन बढ़ना या मोटापे तक सीमित नहीं है बल्कि आपके कमर की चर्बी आपकी किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकती है. क्या कहती है स्टडी? स्टडी में वैज्ञानिकों ने इस बात को जानने की कोशिश की कि कमर और ऊंचाई का अनुपात (Waist-to-Height Ratio, WHtR), किडनी की कार्यक्षमता में तेजी से गिरावट (Rapid Kidney Function Decline, RKFD) और गुर्दे की दीर्घकालीन बीमारी (Chronic Kidney Disease, CKD) के बीच क्या संबंध है. इस स्टडी में 4374 लोगों को शामिल किया गया था जिनकी किडनी की स्थिति स्टडी से पहले नॉर्मल थी. फिर हर इंसान की कमर और ऊंचाई का अनुपात निकाला गया और उन्हें लगभग चार साल तक फॉलो किया गया. स्टडी के दौरान देखा गया कि किन लोगों की किडनी की प्रोडक्टिविटी में गिरावट (RKFD) आई है और किन लोगों को क्रोनिक किडनी डिसीज (CKD) की समस्या हुई है. रिसर्च के रिजल्ट में सामने आया कि जिन लोगों का कमर और ऊंचाई का अनुपात अधिक था, उनमें किडनी फंक्शन गिरने का खतरा 30% तक बढ़ गया और CKD का खतरा लगभग 50% अधिक था. वहीं जिन लोगों की कमर का अनुपात सबसे अधिक था, उनमें CKD का रिस्क कमर के सबसे कम कमर वाले ग्रुप के मुकाबले करीब 4 गुना अधिक पाया गया था. रिसर्चर्स ने यह भी बताया कि कमर और ऊंचाई का अनुपात, किसी व्यक्ति में किडनी डिजीज का खतरा जानने के लिए बीएमआई से कहीं ज्यादा सटीक है. क्या पाया वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिकों को पता चला कि पेट की चर्बी सिर्फ मोटापे का नहीं बल्कि किडनी डिजीज का भी बड़ा कारण बन सकती है. चीन में की गई इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि अगर आपकी कमर आपकी ऊंचाई के मुकाबले ज्यादा है तो आपकी किडनी की प्रोडक्टिविटी धीरे-धीरे घट सकती है और आगे चलकर CKD जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. बीएमआई नहीं है सटीक पैमाना वैज्ञानिकों के मुताबिक, आम तौर पर लोग अपने स्वास्थ्य का आकलन BMI से करते हैं लेकिन बीएमआई केवल वजन और लंबाई के हिसाब से मोटापा बताता है, वह यह नहीं बताता कि शरीर में फैट कहां जमा है. अब ऐसे में यदि किसी के पेट के चारों ओर अधिक चर्बी जमा है तो वह सबसे नुकसान पहुंचाती है क्योंकि इसके कारण हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर को बढ़ाने की क्षमता होती है और यह मेटाबॉलिक सिस्टम को बिगाड़ देती है. कितना होना चाहिए कमर का साइज? स्टडी में यह भी देखा गया कमर और ऊंचाई का अनुपात और किडनी की प्रोडक्टिविटी में कमी के बीच सीधा-सीधा संबंध है. यानी जैसे-जैसे पेट की चर्बी बढ़ेगी, वैसे-वैसे किडनी की सेहत गिरती जाएगी. वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि अगर किसी व्यक्ति का कमर और ऊंचाई का अनुपात 0.50 से ज्यादा है यानी आपकी कमर आपकी ऊंचाई के आधे से अधिक तो उसे अपनी लाइफस्टाइल और डाइट पर तुरंत ध्यान देना चाहिए. उदाहरण के लिए यदि आपकी ऊंचाई 170 सेमी है तो आपकी कमर 85 सेमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. यह छोटा-सा पैमाना आपकी किडनी की उम्र बढ़ा सकता है. हालांकि यह रिसर्च केवल चीन की आबादी पर आधारित थी और इसकी अवधि करीब चार साल की थी इसलिए इसे पूरी दुनिया की जनसंख्या पर लागू नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद, यह एक मजबूत सबूत देता है कि पेट की चर्बी से शरीर के अंदर की हेल्थ पर भी लागू होती है.

11 इंच स्क्रीन वाला सैमसंग Galaxy Tab A11+ 5G भारत में हुआ लॉन्च, जानें कीमत

नई दिल्ली सैमसंग ने भारत में अपना नया टैबलेट बेहद खामोशी के साथ लॉन्‍च किया है। इसका नाम Samsung Galaxy Tab A11+ है। ग्‍लोबल मार्केट्स में इसे सितंबर में ही ले आया गया था। अब भारत के लिए इसे लाया गया है। इस टैब में 11 इंच का टीएफटी डिस्‍प्‍ले दिया गया है। हालांकि बैटरी 7040 एमएएच की है जो 25 वॉट की वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। बैटरी के मामले में यह टैब कमतर द‍िख रहा है क्‍योंकि आजकल स्‍मार्टफोन्‍स में इससे बड़ी बैटरी दी जा रही है। इस टैब को 4 वेरिएंट्स में लिया जा सकेगा। शुरुआती कीमत 22999 रुपये है। नया सैमसंग टैबलेट 4 वेरिएंट्स में आता है। इसे वाईफाई के अलावा वाईफाई और सेल्‍युलर मॉडल में लाया गया है ताकि लोग सिम कार्ड लगाकर भी इसे इस्‍तेमाल कर पाएं। इसके 6GB RAM + 128GB मॉडल को सिर्फ वाईफाई ऑप्‍शन के साथ 22,999 रुपये (ref.) में लिया जा सकेगा। वाईफाई और सेल्‍युलर मॉडल के दाम 26,999 रुपये हैं। कंपनी 8GB RAM + 256GB वेरिएंट भी लाई है, जिसके वाईफाई मॉडल के दाम 28,999 रुपये हैं, जबकि वाईफाई और सेल्‍युलर मॉडल की कीमत 32999 रुपये है। यह टैब ग्रे और सिल्‍वर कलर्स में आता है। अच्‍छी बात यह है कि सेल्‍युलर कनेक्‍ट‍िविटी 5जी है। जैसाकि हमने बताया, इस टैब में 11 इंच का टीएफटी एलसीडी डिस्‍प्‍ले दिया गया है, जो 90 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट ऑफर करता है। इस टैब में मीडियाटेक डाइमें‍सिटी प्रोसेसर दिया गया है। यह 5जी कनेक्‍ट‍िविटी ऑफर करता है। नया सैमसंग टैब लेटेस्‍ट एंड्रॉयड 16 पर चलता है, जिसमें वनयूआई 8 की लेयर है। इस टैब में 8 मेगापिक्‍सल का बैक और 5 मेगापिक्‍सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। वीडियो कॉल से ऑनलाइन मीटिंग तक ठीकठाक होने की उम्‍मीद है। इसमें सैमसंग का डेक्‍स मोड भी मिलता है, जिससे टैबलेट को पीसी की तरह इस्‍तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि इसकी बैटरी 7040 एमएएच है जो कई लोगों को इसलिए कम लग सकती है, क्‍योंकि आजकल स्‍मार्टफोन कंपनियों ने इससे बड़ी बैटरी अपने स्‍मार्टफोन में देना शुरू कर दिया है। सैमसंग टैब ए11 प्‍लस की 7040 एमएएच बैटरी 25 वॉट की वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। यह आईपी52 रेटिंग के साथ आता है, जिससे टैब को धूल और छींटों से सुरक्षा मिलती है। इस टैब का वजन 477 से 482 ग्राम तक है।

फोन के एक बटन पर पाएं तीन फीचर, जानें कैसे

नई दिल्ली अगर आपने फीचर फोन चलाया होगा तो आपको मालूम होगा कि फीचर फोन की ‘हार्ड की’ यानी बटन पर ढेरों शॉर्टकट दिए जाते थे। लेकिन वर्तमान समय में आने वाले स्मार्टफोन में शॉर्टकट काफी कम होते हैं। अगर आप चाहें तो गूगल प्लेस्टोर पर मिलने वाले कुछ खास एप की मदद से खुद के शॉर्टकट तैयार कर सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में। बटन रीमैपर गूगल प्लेस्टोर पर मौजूद इस एप की मदद से आप जितना चाहें उतने शॉर्टकट तैयार कर सकते हैं। साथ ही इसके दो वर्जन उपलब्ध हैं जिसमें से प्रीमियम वर्जन है। प्रीमियम वर्जन के लिए शुल्क अदा करना होता है। मुफ्त में मिलने वाले बटन रीमैपर (नो रूट) एप को डाउनलोड करें। इसे ओपन करने के बाद जब सबसे पहले एप खुलेगा तो स्क्रीन पर ऊपर की तरफ एक खास तरह का विकल्प आएगा। इसे एक्टिवेट करना होगा। इसके बाद शॉर्टकट तैयार करने के लिए सबसे पहले एप को खोलें, उसके बाद नीचे दाईं ओर दिए गए प्लस के निशान पर क्लिक करें। इसके बाद दो विकल्प मिलेंगे। इसमें से ऊपर वाले विकल्प का चुनाव करें। फिर ‘न्यू एक्शन’ नाम का पॉपअप खुलेगा। इसके अंदर की लिखा मिलेगा, उस पर क्लिक करते ही आपके सामने उन सभी विकल्पों की सूची आ जाएगी, जहां पर आप शॉर्टकट सेट कर सकते हैं। किसी एक का चुनाव करने के बाद नीचे लॉन्ग एक्शन का विकल्प दिखेगा। उसे एक्टिवेट करने के लिए, उस पर क्लिक कर दें। यहां तक कि लॉन्ग एक्शन का समय भी बदला जा सकता है। फिर ओके पर क्लिक कर दें। इस प्रक्रिया को अपनाकर आप जितने चाहें उतने शॉर्टकट तैयार कर सकते हैं। इसकी मदद से आप होम बैक, रिसेंट एप, कैमरा और वॉल्यूम की पर अपने मनमुताबिक शॉर्टकट तैयार कर सकते हैं। यहां तक कि इस पर एक बटन पर दो शॉर्टकट सेट हो सकते हैं। एक साधारण क्लिक पर और दूसरा लॉन्ग क्लिक कर। मेन्यू की रीमैपर बटन रीमैपर से ज्यादा मेन्यू की रीमैपर (नो रूट) एप पर शॉर्टकट सेट किए जा सकते हैं। इस एप में बटन के चार क्लिक विकल्प दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर एक क्लिक पर एक एप खुलेगा। दो क्लिक पर दूसरा एप खुलेगा। साथ ही तीन बार बटन को क्लिक करने पर तीसरा एप सामने आ जाएगा। वहीं जरूरत पड़ने जल्दी-जल्दी चार क्लिक करने पर चौथा विकल्प खुलकर सामने आएगा। इन विकल्प में आप फोन सेटिंग या एप को शामिल कर सकते हैं। यह एप गूगल प्लेस्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध है।  

आँखों के नीचे झुर्रिया को दूर करने के घरेलू नुस्खों

आंखे वो चीज है जिसे लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। लेकिन अगर आँखों के नीचे झुर्रिया या काले घेरे हो तो चेहरे की खूबसूरती फीकी पड जाती है। आंखों के नीचे की त्वचा काफी नाजुक होती है। आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल आजकल आम बात हो गई है। महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी ये समस्या बढ़ती जा रही है और इसकी अहम वजह भागदौड़ की दिनचर्या है, जिसमें आराम नहीं है। ऐसे में आंखों के नीचे होने वाले काले घेरे खूबसूरती और स्मार्टनेस को कम कर सकते हैं। कभी-कभी यह समस्या आनुवांशिकता के कारण भी आती है। यह डार्क सर्कल्स आपके सौन्दर्यता में ग्रहण लगा देते हैं। वैसे तो बहुत सारे क्रीम के इस्तेमाल से भी इससे राहत पाया जा सकता है। कई बार आंखों के नीचे होने वाले काले घेरे, अनहेल्दी लाइफस्टाइल का परिणाम होते हैं। बहुत ज्यादा काम करने, तनाव लेने, नींद न पूरी हो पाने और अन्य कारणों से आंखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं। डार्क सर्कल की समस्या से बचने के लिए घरेलू नुस्खों का कोई जवाब नहीं है। इसकी मदद से बिना किसी दुष्प्रभाव के आप डार्क सर्कल से छुटकारा पा सकते हैं। डार्क सर्कल से कैसे बचें आंखों के नीचे पड़ने वाले डार्क सर्कल आपकी खूबसूरती बिगाड़ सकते हैं। यह समस्या कई वजहों जैसे शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना, नींद न आना, मानसिक तनाव या फिर बहुत ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करने के कारण भी हो सकती है। इन डार्क सर्कल की वजह से आपकी सुंदरता तो कम होती ही है साथ ही व्यक्ति थका हुआ और उम्रदराज भी नजर आता है। आइए जानें डार्क सर्कल को दूर करने के घरेलू नुस्खों के बारे में। टमाटर टमाटर के रस में, नींबू का रस, चुटकीभर बेसन और हल्दी  मिला लें। इस पेस्ट  को अपनी आंखों के चारों ओर लगाएं और 20 मिनट के बाद चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में 3 बार जरुर करें। इससे डार्क सर्कल धीरे-धीरे कम होने लगेगा। आलू यह बहुत ही असरकारी नुस्खा है। रात में सोने से पहले चेहरा को अच्छे से साफ करें। इसके बाद आलू की पतली स्लाइस काटकर उन्हें आंखों पर 20 से 25 मिनट रखें। इसके बाद चेहरा को अच्छे से साफ कर लें। गुलाब जल गुलाब जल की मदद से डार्क सर्कल की समस्या से निजात पा सकते हैं। बंद आंखों पर गुलाब जल में भिगोई हुई रूई को आंखों पर रखें। ऐसा केवल 10 मिनट तक करें। ऐसा करने से आंखों के आस पास की त्वहचा चमक उठेगी। बादाम का तेल काले घेरे से छुटकारा पाने के लिए बादाम के तेल बहुत फायदेमंद है। बादाम के तेल को आंखों के आस-पास लगाकर कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। फिर उंगलियों से 10 मिनट तक हल्की मालिश करें। इसके बाद चेहरा साफ कर लें। चाय का पानी चायपत्ती को पानी के साथ उबाल लें और फिर ठंडा होने के लिए रख दें। इसके बाद रुई के फाहे को उसमें भिगोकर आंखों के नीचे और आस-पास लगाएं। थोड़ी देर बाद पानी से चेहरा साफ कर लें। नियमित रूप से ऐसा करने से चेहरे के काले घेरे तेजी से कम हो जाएंगे। टी बैग डार्क सर्कल्स को दूर करने के लिए प्रयोग किए गए ठंडे टी-बैग्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। टी-बैग्स में मौजूद तत्व टैनिन आंखों के आसपास की सूजन और काली त्वचा को पहले जैसे करता है और आपको डार्क सर्कल से निजात मिलता है। शहद और बादाम का तेल बादाम के तेल और शहद को अच्छी तरह मिलाकर सोने के पहले आंखों के आसपास लगाएं और सारी रात लगा रहने दें। सुबह उठकर सामान्य पानी से चेहरा धो लें। हर रोज इस नुस्खे को आजमाने से कुछ ही दिनों में डार्क सर्कल दूर हो जाएगा। पुदीना पत्ताछ पुदीने की पत्तिीयों को पीस लें और आंखों के आस पास लगा लें। इसे कुछ देर तक इस पेस्ट को ऐसे ही छोड़ दें और फिर आंखों को पानी से धो लें। इससे आपको डार्क सर्कल से निजात पाने में काफी सहायता मिलेगी। संतरे का रस और ग्लिसरीन संतरे का रस विटामिन सी से भरपूर होता है जो कि त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है। संतरे के रस में ग्लिसरीन की कुछ बूंदे मिलाएं और इस पेस्ट को हर रोज आंखों और आस पास के एरिया पर लगाएं। यह डार्क सर्कल से निजात दिलाने का प्रभावशाली तरीका है। जैतून तेल जैतून का तेल सौंदर्य से जुड़ी कई समस्याओं में काफी फायदेमंद है। इससे आंखों के आसपास हल्के हाथों से मालिश करें, इससे रक्त संचार ठीक रहता है और आंखों की थकान कम होती है जिससे डार्क सर्कल की समस्या दूर होती है।