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रोबोटिक्स में क्रांति: NVIDIA के वर्ल्ड मॉडल से रोबोट पाएंगे इंसानी जैसी समझ

नई दिल्ली रोबोट समय के साथ-साथ स्मार्ट होते जा रहे हैं। अब वो दिन भी ज्यादा दूर नहीं जब रोबोट इंसानों की तरह सोच-समझ पाएंगे। जी हां, NVIDIA ने कॉसमॉस पॉलिसी  पेश की है। यह कुछ और नहीं बल्कि रोबोट को कंट्रोल करने का एक नया तरीका है। यह NVIDIA के उस बड़े प्लान का हिस्सा है, जिसमें वे फिजिकल AI सिस्टम के लिए कुछ ऐसे मॉडल बना रहे हैं, जिनकी मदद से फिजिकल एआई सिस्टम दुनिया को समझ पाएं। यह फ्रेमवर्क इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कंट्रोल और प्लानिंग टास्क के लिए बड़े वीडियो प्रेडिक्शन मॉडल को अडैप्ट करके रोबोट आसानी से तय कर पाएं कि उन्हें कौन सी हरकत करनी है। रोबोट्स के लिए पॉलिसी क्या होती है? बता दें कि रोबोटिक्स में, 'पॉलिसी' का मतलब उस दिमाग से होता है, जो तय करता है कि क्या करना चाहिए। यह रोबोट को मिलने वाली जानकारी जैसे कैमरे की फोटोज और सेंसर के डेटा को रोबोट की हरकत में बदलता है। पुराने रोबोट की पॉलिसी अक्सर खास काम के लिए बनाए गए न्यूरल नेटवर्क होती थीं। इनमें अलग-अलग हिस्से जैसे चीजों को समझना, प्लान बनाना और कंट्रोल करना शामिल होते थे। इन सिस्टम को हर रोबोट या माहौल के लिए बहुत सारा लेबल किया हुआ डेटा चाहिए होता था और खास तौर पर ट्यूनिंग करनी पड़ती थी। कैसे काम करती है Cosmo Policy? Cosmos Policy इससे काफी अलग है। NVIDIA शुरू से एक नया कंट्रोल मॉडल बनाने के बजाय, डेमोंस्ट्रेशन डेटा पर पहले से सीखे हुए वीडियो वर्ल्ड मॉडल को पोस्ट-ट्रेन यानी फिर से ट्रेन करती है। इसे Cosmos Predict कहते हैं। यह मॉडल पहले से ही जानता है कि फिजिकल दुनिया समय के साथ कैसे बदलती है, क्योंकि इसने बड़े पैमाने पर वीडियो डेटा से सीखा है। इस अतिरिक्त ट्रेनिंग के दौरान, रोबोट के एक्शन, फिजिकल स्टेट और टास्क के नतीजों को मॉडल के इंटरनल टेम्परल रिप्रेजेंटेशन का हिस्सा माना जाता है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि रोबोट को आगे क्या करना चाहिए और इसके नतीजे क्या होंगे। अलग-अलग मॉडल जोड़ने की नहीं होती जरूरत इस डिजाइन की वजह से Cosmos Policy एक ही आर्किटेक्चर में एक साथ हरकतें, भविष्य की स्थितियां और काम के सफल होने की उम्मीद का अंदाजा लगा पाता है। सिर्फ एक बार की ट्रेनिंग पर निर्भर रहने से, यह फ्रेमवर्क आर्किटेक्चर की जटिलता को कम करता है और परसेप्शन व कंट्रोल के लिए कई अलग-अलग मॉडल को जोड़ने की जरूरत नहीं होती है। ये इमेज NVIDIA की ऑफिशियल साइट से ली गई है। क्या असकरदार है यह नई पॉलिसी? बेंचमार्क के नतीजे बताते हैं कि यह तरीका असरदार है। रोबोटिक मैनिपुलेशन के स्टैंडर्ड बेंचमार्क पर Cosmos Policy ने उन मल्टी-स्टेपकामों में, जिनमें लंबे समय तक सोचने की जरूरत होती है, बहुत अच्छे सक्सेस रेट हासिल किए। कुछ मामलों में, इसने मौजूदा तरीकों के बराबर या उनसे बेहतर परफॉर्म किया, जबकि ट्रेनिंग के लिए बहुत कम डेमो का इस्तेमाल किया। यह डेटा एफिशिएंसी रोबोटिक्स में बहुत जरूरी है, क्योंकि असली दुनिया का ट्रेनिंग डेटा इकट्ठा करना महंगा और समय लेने वाला होता है। बड़े वीडियो मॉडल में पहले से मौजूद जानकारी का फायदा उठाकर Cosmos Policy भरोसेमंद कंट्रोल बिहेविअर सीखने के लिए रोबोट के खास डेटा की जरूरत को कम करता है। पॉलिसी की खास बात Cosmos Policy की एक और खास बात यह है कि यह इन्फेरेंस टाइम पर प्लानिंग कर सकता है। सिर्फ अगली तुरंत होने वाली हरकत बताने के बजाय, मॉडल कई संभावित एक्शन सीक्वेंस बना और उनका मूल्यांकन कर सकता है। इन सीक्वेंस के भविष्य में नतीजों और रिवॉर्ड का अंदाजा लगाकर, रोबोट ऐसी हरकतें चुन सकता है, जिनके लंबे समय तक सफल होने की ज्यादा संभावना हो। यह प्लानिंग क्षमता रोबोट को ज्यादा रिएक्टिव होने के बजाय ज्यादा स्ट्रेटेजिक बनने में मदद करती है, खासकर जब वे मुश्किल काम कर रहे हों। सोच-समझकर ले पाएंगे सही फैसला यह एक बहुत ही अच्छा और जरूरी डेवलपमेंट है। रोबोट सिर्फ वही नहीं करेंगे, जो उन्हें सिखाया गया है। बल्कि वे खुद सोच-समझकर, प्लान बनाकर बेहतर फैसले ले पाएंगे। यह सब इसलिए मुमकिन हो रहा है क्योंकि NVIDIA ने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो वीडियो देखकर दुनिया को समझता है, ठीक वैसे ही जैसे हम इंसान देखते और सीखते हैं।

टेनिस खिलाड़ियों ने अंडरवियर में पहन लिया फिटनेस ट्रैकर, जानें क्यों बैन हुआ हाथ पर पहनना

टेनिस के सबसे बड़े टूर्नामेंट ऑस्टेलियन ओपन 2026 में एक बहुत ही अजीब मुद्दा विवाद का विषय बन गया है। बता दें कि विवाद किसी खिलाड़ी के व्यवहार को लेकर नहीं बल्कि हाथ में फिटनेस बैंड पहनने को लेकर है। दरअसल पिछले दिनों दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी कार्लोस अल्काराज और एरिना सबालेंका जैसे दिग्गजों को अंपायरों ने बीच मैच में अपना फिटनेस बैंड उतारने को कहा था। बता दें कि यह विवाद Whoop नाम की कंपनी के फिटनेस बैंड को लेकर हुआ है। इस कंपनी का फिटनेस बैंड खुद विराट कोहली भी पहनते हैं। हालांकि अचानक यह फिटनेस बैंड ग्रैंड स्लैम के नियमों की भेंट चढ़ गया है। एक र‍िपोर्ट के अनुसार, अब Whoop ने खिलाड़ियों के लिए बैंड पहनने के लिए खास अंडरवियर लॉन्च किया है, ताकि किसी को उनका बैंड हाथों में दिखे नहीं। क्यों हुआ विवाद? बता दें कि ATP और WTA के अन्य टूर्नामेंट्स में टेनिस खिलाड़ी Whoop जैसे फिटनेस बैंड का इस्तेमाल आराम से करते आए हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलियन ओपन जैसे ग्रैंड स्लैम के नियम थोड़े अलग और सख्त हैं। X पर दावे किए गए हैं कि इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (ITF) ने दिसंबर 2025 में इस डिवाइस को टेनिस खेलते हुए पहनने की मंजूरी दी थी, फिर भी टूर्नामेंट अधिकारियों ने सुरक्षा और डेटा नियमों का हवाला देते हुए इसे कलाई पर पहनने से मना कर दिया। खिलाड़ियों के लिए काफी चौंकाने वाला मामला था क्योंकि खेल के दौरान अपनी परफॉर्मेंस से जुड़ा डेटा इक्ट्ठा करना खिलाड़ियों के लिए आम बात है। अंडरवियर में लगेगा फिटनेस ट्रैकर ऑस्टेलियन ओपन 2026 में हाथों में Whoop फिटनेस ट्रैकर पहनने को लेकर हुए विवाद के बाद कंपनी ने एक खास स्टाइल का अंडरवियर लॉन्च कर दिया है, ताकि खिलाड़ी अंडरवियर में ट्रैकर पहनकर खेल के दौरान अपना डेटा कलेक्ट कर सकें। बता दें कि WHOOP एक ऐसा फिटनेस ट्रैकर है जिसमें कोई डिस्प्ले नहीं होता और यह सिर्फ शरीर की रिकवरी और स्ट्र्रेन यानी कि तनाव को मापने के काम में लिया जाता है। इसका डिजाइन और ट्रैकिंग की सटीकता के चलते कई मशहूर खिलाड़ी इसका इस्तेमाल करते हैं। टेनिस स्टार्स के लिए हाथों में फिटनेस ट्रैकर पहनने की मनाही के बाद कंपनी ने 'WHOOP Body' कलेक्शन खिलाड़ियों को भेजी है। इस कलेक्शन में खास अंडरवियर भी शामिल है, जिसमें ट्रैकर फिट करने के लिए पॉकेट बनी होगी। अब आगे क्या? अंपायर्स द्वारा हाथों में बैंड पहनने से मना करने और कंपनी द्वारा बैंड को छिपा कर पहनने वाले कपड़े बनाने के बाद भी खिलाड़ियों के लिए खेल के दौरान डिवाइस का इस्तेमाल जोखिम भरा हो सकता है। दरअसल फिलहाल नियम यही है कि टेनिस खेलते समय खिलाड़ी के शरीर पर डेटा इक्ट्ठा करने वाला कोई डिवाइस नहीं हो सकता। ऐसे में खिलाड़ी अगर अंडरवियर में भी डिवाइस पहनते हैं, तो इसे नियमों का उल्लंघन ही माना जाएगा। ऐसा करने पर खिलाड़ियों पर भारी जुर्माना या पेनल्टी लग सकती है। अब जब तक अधिकारियों की ओर से बैंड के इस्तेमाल को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं आती, तब तक खिलाड़ियों को ऐसे डिवाइसेज से दूरी बना कर रखनी होगी।

अल्कोहल के साथ ये चीजें खाना है खतरे की घंटी, जानिए कौन-से फूड्स हैं सबसे खतरनाक

जाम का आनंद लेने वाले अक्सर इस बात पर तो ध्यान देते हैं कि वे क्या पी रहे हैं, लेकिन बोतल के साथ रखी प्लेट में क्या है, इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जिसे हम बड़े चाव से 'चखना' कहते हैं, वही कभी-कभी हमारे शरीर के लिए एक 'साइलेंट किलर' बन सकता है। शराब खुद शरीर के लिए एक चुनौती है, और गलत भोजन के साथ इसका मेल सेहत के लिए दोहरी मार साबित हो सकता है। अक्सर पार्टियों में हम बेधड़क होकर कुछ भी खाने लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि गलत फूड पेयरिंग लिवर और पाचन तंत्र पर बुरा असर डालती है। आयरन से भरपूर चीजें (दाल, बीन्स और मूंगफली) सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सेहतमंद मानी जाने वाली दालें और बीन्स भी शराब के साथ घातक हो सकती हैं। खासकर रेड वाइन के साथ आयरन वाली चीजें खाने से बचना चाहिए। वाइन में मौजूद 'टेनिन' शरीर को आयरन सोखने से रोकता है, जिससे पेट में ऐंठन और पोषण की कमी हो सकती है। मीठा और चॉकलेट मिठाई या चॉकलेट के शौकीनों के लिए यह बुरी खबर है। चॉकलेट में पाया जाने वाला कैफीन और अधिक चीनी, शराब के साथ मिलकर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं को जन्म देती है। यह न केवल आपके नशे को अनियंत्रित तरीके से बढ़ा सकती है, बल्कि अगले दिन गंभीर हैंगओवर का कारण भी बनती है। फास्ट फूड (पिज्जा और बर्गर) मैदे से बने ये भारी भोजन पेट में एसिड रिफ्लक्स की समस्या पैदा करते हैं। पिज्जा में इस्तेमाल होने वाला सॉस और टमाटर, अल्कोहल के साथ मिलकर सीने में जलन और गैस्ट्रिक अल्सर जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। यह मिश्रण आपके पाचन तंत्र को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकता है। सॉल्टी और स्पाइसी स्नैक्स: प्यास और पेट की आफत अत्यधिक नमक वाले चिप्स या मसालेदार कुरकुरे स्नैक्स शराब के साथ सबसे लोकप्रिय विकल्प हैं। लेकिन ये 'सोडियम बम' आपके शरीर को तेजी से डिहाइड्रेट करते हैं। शराब वैसे ही शरीर से पानी सोखती है, ऊपर से नमक की अधिक मात्रा प्यास बढ़ाती है और एसिडिटी का कारण बनती है।  बेकरी उत्पाद (ब्रेड और सैंडविच) अगर आप शराब के साथ सैंडविच या पिज्जा बेस जैसी ब्रेड वाली चीजें खा रहे हैं, तो रुक जाइए। ब्रेड में मौजूद यीस्ट और शराब का मेल पेट में 'गैंडिडा' जैसे बैक्टीरिया को बढ़ा सकता है। इससे न केवल पाचन धीमा होता है, बल्कि पेट फूलने और लिवर पर दबाव पड़ने की समस्या भी हो सकती है।

Chrome में नया फीचर, Google करेगा ऑटो टिकट बुकिंग और फॉर्म फीलिंग की सुविधा

 नई दिल्ली सोचिए, आप किसी वेबसाइट पर टिकट बुक कर रहे हैं. फॉर्म भरना है, सीट चुननी है, पेमेंट करना है. अब तक ये सब आपको खुद करना पड़ता था. लेकिन अब Google एक ऐसा फीचर ला रहा है, जहां Chrome ब्राउज़र खुद ये काम करने में मदद करेगा. वेब ब्राउजिंग का तरीका बदलने वाला है. अगर आपने Perplexity का Comet ब्राउजर यूज किया है तो पता होगा. नहीं किया तो बता दें कि ये Comet एजेंटिक ब्राउजर है. इसमें एक इनबिल्ट Assistant दिया गया है. आपको सिर्फ कमांड लिखना है और ये ब्राउजर खुद से ही सबकुछ करेगा. ऐसे में आपका टाइम भी बचेगा और प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी.  Perplexity के अलावा OpenAI का भी एजेंटिक ब्राउजर ATLAS चर्चा में रहता है. हालांकि ये फिलहाल एक्सपेरिमेंटल ब्राउजर है, लेकिन ये भी एजेंटि ब्राउजर है. यहां भी आपको सिर्फ कमांड डालना है और ये खुद से ही आपके लिए ब्राउजिंग करता है और तमाम जरूरी काम करता है. एजेंटिक वेब ब्राउजिंग का फ्यूचर एजेंटिक वेब ब्राउजर का बूम आने ही वाला है और गूगल इस रेस में पीछे नहीं रह सकता. गूगल ने Chrome में Gemini ऐड कर दिया है और काफी हद तक ये फीचर रोल आउट होने के बाद ये एजेंटिक ब्राउजर की तरह बन कर तैयार हो जाएगा.  Google ने Chrome में अपने Gemini AI को जोड़ना शुरू कर दिया है. इसका मतलब है कि अब ब्राउज़र सिर्फ वेबसाइट खोलने का टूल नहीं रहेगा, बल्कि एक छोटा डिजिटल असिस्टेंट बन जाएगा, जो आपकी तरफ से वेब पर काम कर सकेगा. ब्राउजर बिना आपके ही करेगा ब्राउज टेक दुनिया में इसे Auto Browse या AI एजेंट फीचर कहा जा रहा है. आसान भाषा में समझें तो, अगर आप Chrome से कहेंगे – 'इस वेबसाइट से मेरा ट्रेन टिकट बुक कर दो'… तो AI पेज को समझेगा, बटन पहचानेगा, जरूरी जानकारी भरेगा और प्रोसेस को आगे बढ़ाएगा. यानी वेबसाइट चलाने की मेहनत कम, काम ज्यादा तेज. Google की तरफ से बताया गया है कि Gemini AI अब Chrome के अंदर सीधे काम करेगा. अभी तक AI टूल सिर्फ चैट तक सीमित थे. आप सवाल पूछते थे, जवाब मिलता था. लेकिन अब Gemini वेब पेज के साथ इंट्रैक्टर भी करेगा. वो स्क्रीन पर दिख रहे टेक्स्ट, बॉक्स और बटन को पहचान सकेगा और आपके निर्देश पर काम करेगा. उदाहरण के तौर पर अगर आप इंटरनेट पर कोई रिसर्च कर रहे हैं तो आप Assistant में लिख सकते हैं. या फिर अगर शॉपिंग कर रहे हैं और आपको प्रोडक्ट समझ नहीं आ रहा है तो भी आप लिख सकते हैं. ब्राउजर खुद से ही आपके पसंद का सामान ढूंढ देगा. कोडिंग में भी ये काफी फायदेमंद होने वाला है. इसका सीधा फायदा उन लोगों को होगा, जो टेक्निकल वेबसाइट्स या ऑनलाइन फॉर्म्स से घबराते हैं. बुजुर्ग यूजर्स, पहली बार इंटरनेट चलाने वाले लोग, या जिन्हें ऑनलाइन प्रोसेस जटिल लगता है… उनके लिए ये फीचर गेमचेंजर हो सकता है. अब सवाल उठता है कि क्या ये सुरक्षित रहेगा? Google का कहना है कि AI सिर्फ तभी काम करेगा जब यूजर अनुमति देगा. यानी बिना पूछे कोई फॉर्म नहीं भरेगा, ना कोई पेमेंट करेगा. हर अहम स्टेप पर यूजर का कंट्रोल रहेगा. साथ ही कंपनी दावा कर रही है कि डेटा ब्राउज़र के अंदर ही प्रोसेस होगा और आपकी निजी जानकारी बिना इजाजत कहीं शेयर नहीं होगी. फिलहाल ये फीचर टेस्टिंग फेज में है. कुछ चुनिंदा यूजर्स के लिए इसे धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है. आने वाले महीनों में Chrome यूजर्स को इसका अनुभव मिलने लगेगा. अगर ये टेक्नोलॉजी ठीक से काम करती है, तो इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका बदल सकता है. अभी हम वेबसाइट चलाते हैं. आने वाले समय में हम AI को बताएंगे क्या करना है..और ब्राउज़र खुद काम करेगा. सीधे शब्दों में कहें तो, Chrome अब सिर्फ ब्राउज़र नहीं रहेगा. वो आपका वेब वाला असिस्टेंट बन जाएगा. और यही वजह है कि टेक इंडस्ट्री में इस अपडेट को लेकर काफी चर्चा है. क्योंकि ये सिर्फ नया फीचर नहीं, बल्कि इंटरनेट इस्तेमाल करने की नई शुरुआत मानी जा रही है.

अब दूरी नहीं बनेगी बाधा: TeamViewer से रिमोट कंट्रोल करें PC और मोबाइल

दूरी को पाटने में ऐप बड़े मददगार हो रहे हैं। कहीं दूर बैठकर अगर आप किसी और के कंप्यूटर या स्मार्टफोन का ऐक्सेस चाहते हैं या किसी दूर बैठे शख्स को अपने कंप्यूटर या स्मार्टफोन का ऐक्सेस देना चाहते हैं, तो टीमव्यूअर ऐप आपकी मदद कर सकता है। हो सकता है, कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ हो। आपके कंप्यूटर में कोई खास सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने या थोड़ी जटिल किस्म की सेटिंग्स करने आया कंप्यूटर इंजिनियर फोन पर अपने सीनियर से बात करता है और आप देखते हैं कि वह कंप्यूटर पर एक नया सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करता है, जिसके बाद आपके कंप्यूटर का कंट्रोल दूर से ही उसका सीनियर करने लगता है। थोड़ी देर में वह खुद जरूरी सेटिंग्स कर देता है और आपका काम हो गया। वास्तव में यह संभव होता है टीमव्यूअर सॉफ्टवेयर की मदद से। कंप्यूटर इंजिनियरों के बीच टीमव्यूअर रिमोट ऐक्सेस सॉफ्टवेयर बेहद लोकप्रिय है। यह फ्री और पेड, दोनों रूपों में मिलता है। हालांकि फ्री संस्करण में कनेक्शन सिर्फ पांच मिनट चलता है, लेकिन पांच-पांच मिनट के तीन-चार प्रयासों में अक्सर कंप्यूटर सपोर्ट टीम का काम हो जाता है। अच्छी बात यह है कि यह सिर्फ विंडोज तक सीमित नहीं है, बल्कि मैक, लाइनक्स कंप्यूटरों और ऐंड्रॉयड (स्मार्टफोन) पर भी काम करता है। पहले करें डाउनलोड:- 1. अगर आप टीमव्यूअर को आजमाना चाहते हैं तो टीमव्यूअर डॉट कॉम से इसे डाउनलोड और इंस्टॉल कर लें। 2. पूछे जाने पर बेसिक इंस्टालेशन और पर्सनल/नॉन कर्मशियल यूज को चुनें। कुछ ही सेकंड में टीमव्यूअर इंस्टॉल हो जाएगा। 3. इसी तरह इस सॉफ्टवेयर को दूर मौजूद दूसरे कंप्यूटर पर भी इंस्टॉल करना होगा, जिससे आप अपने कंप्यूटर को जोड़ना चाहते हैं। 4. दोनों तरफ ऐसा हो जाने पर अपने कंप्यूटर में टीमव्यूअर को चलाएं। 5. यहां दो ऑप्शन दिखेंगे। पहला अलॉ रिमोट कंट्रोल, यानी आपका कंप्यूटर किसी और व्यक्ति द्वारा दूर से ऐक्सेस किया जाना है। दूसरा ऑप्शन है कंट्रोल रिमोट कंप्यूटर, यानी आप खुद किसी अन्य कंप्यूटर को रिमोट ऐक्सेस करेंगे। जब कंट्रोल किसी और को देना हो:- आप देखेंगे कि अलॉ रिमोट कंट्रोल कॉलम में यूर आईडी और पासवर्ड के सामने दो डिजिट वाला नंबर दिखाई देगा। इनका प्रयोग करके दूर मौजूद कंप्यूटर पर बैठा व्यक्ति आपके कंप्यूटर को ऐक्सेस कर सकता है। इन्हें फोन, एसएमएस या ईमेल आदि के जरिए उन्हें बता दें। आपको सिर्फ इतना ही करना है। जैसे ही वह व्यक्ति अपने कंप्यूटर में मौजूद टीमव्यूअर में आपकी आईडी और पासवर्ड डालेगा, टीमव्यूअर का काम शुरू हो जाएगा और आपके कंप्यूटर का नियंत्रण उनके पास चला जाएगा। जब दूसरे कंप्यूटर को कंट्रोल करना हो:- ऐसा करने के लिए कहीं दूर मौजूद कंप्यूटर पर दिखाई गई आईडी और पासवर्ड पूछ लें। अब अपने टीमव्यूअर पर कंट्रोल रिमोट कंप्यूटर खंड में जहां पार्टनर आईडी पूछा जा रहा है, वहां उनकी आईडी लिखें और नीचे रिमोट कंट्रोल रेडियो बटन पर क्लिक करें। अब कनैक्ट टू पार्टनर बटन दबाएं। आप देखेंगे कि आपके कंप्यूटर की स्क्रीन और उस पर दिखने वाली फाइलें बदल गई हैं। वास्तव में यह उस कंप्यूटर की स्क्रीन है, जिसे आप दूर से ऐक्सेस करना चाहते थे। अब आप जो कुछ भी कर रहे हैं (फाइल बनाना, कॉपी-पेस्ट, सॉफ्टवेयर चलाना, सेटिंग करना आदि) वह आपके कंप्यूटर पर नहीं, बल्कि उस दूर रखे कंप्यूटर पर घटित हो रहा है। याद रखेंः रिमोट ऐक्सेस में माध्यम के रूप में इंटरनेट का प्रयोग होता है। इसके लिए जरूरी है कि दोनों तरफ के कंप्यूटर चालू (ऑन) हों और दोनों पर इंटरनेट कनेक्शन ऑन हो। टीमव्यूअर के फ्री संस्करण को कंप्यूटर इंजिनियरों द्वारा रिपेयर और अन्य सपोर्ट के लिए इस्तेमाल करना उसकी शर्तों का उल्लंघन है। बहरहाल, आम लोगों द्वारा, गैर-व्यावसायिक कामों के लिए इसके इस्तेमाल में कोई रुकावट नहीं है। स्मार्टफोन के लिए:- अब स्मार्टफोन और टैबलट के रिमोट ऐक्सेस के लिए भी टीमव्यूअर ऐप्लिकेशन आ चुके हैं। न सिर्फ ऐंड्रॉयड, बल्कि आइओएस गैजट्स (आईपैड, आईफोन) को भी अपने कंप्यूटर से नियंत्रित करने के लिए आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। तरीका लगभग वही कंप्यूटर जैसा है। उम्मीद है कि आपने ऊपर के स्टेप्स का इस्तेमाल करते हुए अपने कंप्यूटर में टीमव्यूअर को पहले ही इंस्टॉल कर लिया है। अब जरूरत है, अपने स्मार्टफोन/टैबलट में यही काम करने की। इसके लिए:- 1. अगर आप ऐंड्रॉयड गैजट इस्तेमाल करते हैं तो गूगल प्ले स्टोर पर और आईपैड/आईफोन का प्रयोग करते हैं तो एप्प स्टोर पर जाकर टीमव्यूअर क्वीक सपोर्ट ऐप को डाउनलोड और इंस्टॉल कर लें। 2. अब कंप्यूटर में टीमव्यूअर चलाएं और दूसरी तरफ अपने स्मार्टफोन/टैबलट में भी टीमव्यूअर क्विकसपोर्ट ऐप लॉन्च करें। 3. आपके मोबाइल गैजट में टीमव्यूअर लॉन्च होते ही एक आइडी (यूर आईडी) उपलब्ध कराई जाएगी। आप जितनी बार इस ऐप्लिकेशन को चलाते हैं, हर बार नई आइडी मुहैया कराई जाती है। 4. मोबाइल गैजट पर दिखने वाली आइडी को अपने कंप्यूटर में चल रहे टीमव्यूअर सॉफ्टवेयर में कंट्रोल रिमोट कंप्यूटर सेक्शन में जहां पार्टनर आईडी पूछा जा रहा है, वहां लिखें। अब नीचे रिमोट कंट्रोल रेडियो बटन पर क्लिक करें और कनैक्ट टू पार्टनर बटन दबाएं। 5. दूसरी तरफ आपके स्मार्टफोन/टैबलट पर मेसेज आएगा कि कोई कंप्यूटर उसे दूर से ऐक्सेस करना चाहता है। अलॉ रिमोट कंट्रोल? सवाल आने पर अलॉ ऑप्शन को चुनें। ऐसा करते ही दूर मौजूद कंप्यूटर पर आपके स्मार्टफोन का चित्र दिखाई देगा। माउस और कीबोर्ड का प्रयोग करते हुए आप उस पर मौजूद फाइलों, फोल्डरों, ऐप्स आदि को एक्सेस कर सकेंगे।  

प्याज के चमत्कारी फायदे: औषधीय गुणों का खजाना

प्याज का प्रयोग हर घर में होता है। प्याज का तड़का लगाने से खाना ओर भी अधिक स्वादिष्ट बन जाता है। प्याज सिर्फ खाने के स्वाद को ही नहीं ब्लकि हमारे शरीर को भी कई रोगों से राहत दिलवाता है। प्याज में क्रोमियम पाया जाता है। ये हमारे शरीर को स्वास्थ्य रखने में मदद करता है। इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते है। यें बालों की समस्या को दूर करने में, सेक्स क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक है। प्याज चाहें हरा हो, लाल या सफेद तीनों ही कई गुणों से भरपूर है। प्याज खाने के फायदे। 1.प्याज का सेवन करने से बाल गिरने की समस्या से राहत मिलती है। 2.हरे प्याज का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हो जाती है। 3.प्याज सेक्स क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है। 4.प्याज का सेवन करने से चेहरे की झुर्रियों दूर हो जाती है। 5.प्याज गठिया और अस्थमा के रोगियों के लिए भी लाभदायक है। 6.हरा प्याज के सेवन से हमारी पाचन क्रिया भी ठीक रहती है। कब्ज से छुटकारा मिलता है। 7.प्याज का रस और शहद मिलाकर लेने से मासिक धर्म में होने वाली दर्द से राहत मिलती है। 8.प्याज रोज खाने से गर्मियों में लू लगने से बचा जा सकता है। 9.भोजन के साथ प्याज को सलाद के रूप में खाने से हमारा स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। 10.प्याज आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी मदद करता है।  

iPhone में नेटवर्क की जरूरत नहीं, Starlink से डायरेक्ट सैटेलाइट इंटरनेट संभव

 नई दिल्ली Apple के लेटेस्ट iPhones में सैटेलाइट कनेक्टिविटी दी जाती है. इमरजेंसी में जहां नेटवर्क ना हो वहां इसे यूज किया जाता है. लेकिन अभी भी ये हर देश के लिए एवेलेबल नहीं है.  रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple आने वाले iPhone 18 Pro सीरीज़ में एक नया सैटेलाइट-कनेक्टिविटी फीचर जोड़ने पर काम कर रहा है. दावा है कि फ्यूचर के iPhone सीधे Starlink सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़कर डेटा कनेक्शन बना पाएंगे. गौरतलब है कि Starlink सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस है. ये कंपनी अरबति एलॉन मस्क की है और भारत में इसकी पहले से ही टेस्टिंग हो रही है. हाल ही मेंं वेबसाइट्स पर प्लान भी देखे गए थे, लेकिन बाद में बताया गया कि इसके प्लान बाद में आएंगे. भारत में लोग इसे यूज कब से कर पाएंगे फिलहाल साफ नहीं है.  IPhone 18 Pro में मिलेगा Starlink सपोर्ट?  अभी तक यह सिर्फ रिपोर्ट और इंडस्ट्री सूत्रों पर आधारित जानकारी है. Apple ने कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. आम तौर पर ऐसे रिपोर्ट्स को कभी ऐपल वेरिफाई नहीं करता है. लेकिन लॉन्च से पहले तक के ज्यादातर लीक्स और रूमर्स सही ही हो जाते हैं.   इस खबर ने इसलिए ध्यान खींचा है क्योंकि Apple पहले से ही iPhone में सैटेलाइट फीचर दे चुका है, लेकिन लिमिटेशन के साथ.  अभी iPhone में सैटेलाइट फीचर कैसे काम करता है? मौजूदा iPhone मॉडल्स में सैटेलाइट कनेक्शन सिर्फ Emergency SOS और सीमित टेक्स्ट मैसेजिंग के लिए इस्तेमाल होता है. यानी अगर मोबाइल नेटवर्क नहीं है, तब भी आप इमरजेंसी मैसेज भेज सकते हैं. लेकिन इससे इंटरनेट ब्राउज़िंग, वीडियो कॉल या ऐप्स चलाना संभव नहीं होता. नई रिपोर्ट्स का कहना है कि Apple अब डेटा-लेवल सैटेलाइट कनेक्टिविटी पर रिसर्च कर रहा है, जहां फोन सिर्फ SOS नहीं, बल्कि लिमिटेड इंटरनेट डेटा भी सैटेलाइट से भेज-रिसीव कर सके. Starlink से जुड़ने की चर्चा क्यों हो रही है Starlink, SpaceX का सैटेलाइट नेटवर्क है जो Low-Earth Orbit सैटेलाइट्स के ज़रिये इंटरनेट कवरेज देता है. अभी यह सर्विस डिश-बेस्ड टर्मिनल से चलती है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Apple ऐसे हार्डवेयर और मॉडेम डिजाइन पर काम कर रहा है जो भविष्य में डायरेक्ट-टू-सैटेलाइट कनेक्शन को सपोर्ट कर सके. इसी वजह से Starlink का नाम चर्चाओं में है. हालांकि अभी तक Apple और SpaceX के बीच किसी पक्के कमर्शियल डील की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. इसलिए फिलहाल इसे टेक-इंडस्ट्री प्लानिंग और ट्रायल स्टेज की खबर माना जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो फायदा क्या होगा? अगर फ्यूचर में iPhone में लिमिटेड सैटेलाइट डेटा सपोर्ट आता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों में होगा जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर है,  जैसे पहाड़ी क्षेत्र, समुद्र में सफर या रिमोट एरिया. लेकिन एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि सैटेलाइट डेटा स्पीड और लागत अभी मोबाइल नेटवर्क जैसी नहीं है. इसलिए शुरुआती दौर में यह फीचर बैकअप कनेक्टिविटी की तरह इस्तेमाल हो सकता है, न कि रेगुलर 5G रिप्लेसमेंट के तौर पर.

AI की रेस में चीन का Kling आगे? जानिए क्यों दुनियाभर में मचा रहा है तहलका

नई दिल्ली AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से वीडियो बनाने का ट्रैंड इन दिनों काफी चल रहा है। क्रिएटर्स के लिए AI एक जरूरी टूल बन गया है। चीन की कंपनी Kuaishou का Kling प्लेटफॉर्म भी Google के Veo और OpenAI के Sora जैसे बड़े एआई वीडियो एडिटिंग टूल को कड़ी टक्कर दे रहा है। अब इसका नाम भी टॉप एआई एडिटिंग टूल की लिस्ट में शामिल हो गया है। बता दें कि Kling को जून, 2024 में लॉन्च किया गया था। इसके बाद इसने लगभग 1.2 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स का बेस बना लिया है। इसकी सालाना आय लगभग 24 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। इसके बारे में डिटेल में जानते हैं। वीडियो जनरेशन बेंचमार्क में बदली रैंकिंग आजकल एलियन का हमला और डिजिटल इंसानों द्वारा लाइव स्ट्रीमिंग होस्ट करना आम बात हो गई है। वीडियो जनरेशन बेंचमार्क में रैंकिंग बदल रही है। Kling, Google के Veo और OpenAI के Sora के साथ टॉप टियर में अपनी जगह बना चुका है। Kuaishou का Kling समय के साथ-साथ हिट होता जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि इसकी लोकप्रियता इतनी क्यों बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 में ही इसने 2 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की कमाई की थी। इससे इसकी साल भर की कमाई 14 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गई थी। जनवरी 2025 में, रोजाना की औसत कमाई पिछले महीने की तुलना में लगभग 30% बढ़ गई। तीन कारण से सफल हुआ टूल Kuaishou के अनुसार, Kling जनरेटिव-एआई युग का नया मॉडर्न अवतार बता रहा है। कंपनी ने अप्रैल 2025 में इस टूल के लिए एक अलग बिजनेस यूनिट बनाई। पिछले साल की अर्निंग कॉल्स में कंपनी के अधिकारी बार-बार इसके बढ़ते यूजर बेस और कमाई का जिक्र करते रहे। Kling के ऑपरेशन हेड Zeng Yushen के अनुसार, इस वीडियो जनरेटर की सफलता के पीछे तीन मेन कारण हैं। इसमें बेहतरीन एआई मॉडल, मजबूत इंटरैक्टिव डिजाइन और क्रिएटर्स के इकोसिस्टम के साथ जुड़ाव शामिल है।

फोन से आधार वेरिफिकेशन हुआ आसान: फुल वर्जन ऐप लॉन्च, क्या-क्या बदला और कैसे करें इस्तेमाल

 नई दिल्ली UIDAI ने आखिरकार आधार ऐप का फुल वर्जन लॉन्च कर दिया है। इस फुल वर्जन में ऐप में कुछ नए फीचर्स को जोड़ा गया है। बता दें कि अपडेट के बाद ऐप का लुक भी काफी बदल गया है और ऑप्शंस की जगह में भी बदलाव हुआ है। बता दें कि कुछ दिन पहले X पर UIDAI की ओर से पोस्ट कर जानकारी दी गई थी कि 28 जनवरी को आधार ऐप का फुल वर्जन लॉन्च किया जाएगा। बता दें कि अभी तक आधार ऐप में यूजर के पास अपना आधार डिजिटली शेयर करने का ऑप्शन तो था लेकिन किसी और का आधार वेरिफाई नहीं किया जा सकता था। चलिए आधार के फुल वर्जन ऐप के बारे में डिटेल में जानते हैं। करें 28 जनवरी तक का इंतजार UIDAI की ओर से आधार ऐप के फुल वर्जन के आने की जानकारी 28 जनवरी के लिए दी गई थी। ऐसे में यह अपडेट एक दिन पहले आया है। संभव है कि 28 जनवरी को भी UIDAI की ओर से अपडेट पुश किया जाए और जिन कुछ फीचर्स के ऑप्शन ऐप से हटाए गए हैं, उन्हें एक्टिवेट करके फिर से पेश किया जाए। ऐसे में आधार ऐप के लिए अपडेट को चेक करते रहें। क्या कुछ बदल गया नए आधार ऐप में? आधार ऐप के फुल वर्जन में काफी नए बदलाव देखने को मिले हैं। सबसे पहले तो इस ऐप के लुक्स और फीचर्स में बदलाव देखने को मिले हैं। इसके अलावा सबसे बड़ा अपडेट ऐप में QR कोड स्कैनर का मिलना है। इसकी मदद से आप किसी के भी डिजिटल आधार को स्कैन कर वेरिफाई कर पाएंगे कि आधार असली है या नकली। इसके बाद आप चाहें, तो सामने वाले की आधार से जुड़ी डिटेल्स को भी चेक कर पाएंगे। इस फीचर का इस्तेमाल उन जगहों पर होगा, जहां लोगों की पहचान वेरिफाई करने की जरूरत पड़ती है जैसे कि होटल। इसके बाद अब लोगों को आधार की फिजिकल कॉपी कहीं भी सबमिट नहीं करनी पड़ेगी। घट गए कुछ ऑप्शन आधार ऐप में नए अपडेट के बाद सिर्फ फीचर शामिल ही नहीं हुए हैं बल्कि कुछ फीचर्स को हटा भी लिया गया है। इसमें नाम और ईमेल आईडी को अपडेट करने के ऑप्शन शामिल हैं, जो कि नए ऐप पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। बता दें कि पुराने ऐप में सर्विसेज सेक्शन में ये दोनों फीचर दिखाई देते थे लेकिन अपडेट के बाद से सर्विसेज सेक्शन में सिर्फ मोबाइल नंबर अपडेट, पता अपडेट करने का ऑप्शन दिख रहा है। UIDAI ने आधार की फुल वर्जन ऐप के लिए 28 जनवरी का समय दिया था। ऐसे में हो सकता है कि ये ऑप्शन 28 जनवरी को एक्टिवेट करके ऐप में शामिल किए जाएं। बता दें कि पुराने आधार ऐप में ये दो ऑप्शन सिर्फ दिखाई देते थे। इन पर टैप करके लिखा आता था कि फीचर जल्द ऐप में शामिल किए जाएंगे। कैसे पाएं नया आधार ऐप? नया आधार ऐप इस्तेमाल करने के लिए मौजूदा आधार ऐप यूजर्स को अपने फोन में इस ऐप को अपडेट करना होगा। इसके लिए एंड्रॉयड यूजर्स प्ले स्टोर और आईफोन यूजर्स ऐप स्टोर पर जाकर Aadhaar सर्च कर सकते हैं और उसके सामने मौजूद अपडेट के ऑप्शन पर टैप कर सकते हैं। इसके बाद आधार ऐप को खोल कर आप उसके नए लुक्स और ऑप्शंस का अनुभव ले सकेंगे। बता दें कि अगर आप अभी तक आधार ऐप इस्तेमाल नहीं कर रहे थे, तो ऐप स्टोर या प्ले स्टोर से ऐप इंस्टॉल करने पर आपके फोन में उसका अपडेटेड वर्जन ही इंस्टॉल होगा। कैसे वेरिफाई करें दूसरों की पहचान या आधार? जैसा कि हमने बताया आधार ऐप के फुल वर्जन में सबसे बड़ा बदलाव दूसरों के आधार को वेरिफाई करने के ऑप्शन का शामिल होना था। इसे इस्तेमाल करने के लिए अपने फोन पर आधार ऐप को खोल लें। इसके बाद:     होम पेज पर दिखाई दे रहे QR कोड स्कैन करने के ऑप्शन पर क्लिक करें।     इसके बाद किसी के आधार QR कोड को अपने फोन से स्कैन करें।     किसी के आधार को स्कैन करते ही आपको दिखाई देगा कि सामने वाले का आधार वैलिड है या नहीं?     इसके बाद अगर आप चाहें तो View Details बटन पर क्लिक करके सामने वाले की डीटेल्स चेक कर सकते हैं।

Windows 11 यूज़र्स के लिए Microsoft Paint और Notepad में AI फीचर्स का आगाज

मुंबई   Microsoft ने Windows 11 इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स के लिए Paint और Notepad में कई नए और दिलचस्प फीचर्स जोड़ने शुरू कर दिए हैं. ये अपडेट फिलहाल Windows Insider प्रोगाम Canary और Dev चैनल में शामिल टेस्टर्स को मिल रहे हैं, लेकिन आने वाले महीनों में इन्हें सभी यूज़र्स के लिए रोलआउट किया जाएगा. इसकी खास बात यह है कि इन नए फीचर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया है. सबसे ज्यादा चर्चा Microsoft Paint में आए नए AI Colouring Book फीचर को लेकर हो रही है. इस फीचर की मदद से यूज़र सिर्फ टेक्स्ट लिखकर अपनी पसंद का कलरिंग पेज बना सकते हैं. जैसे ही यूज़र पेंट खोलकर Colouring Book ऑप्शन चुनते हैं, वहां एक टेक्स्ट बॉक्स दिखाई देता है. इसमें मनचाहा प्रॉम्प्ट टाइप करते ही AI अपने आप बच्चों की कलरिंग बुक जैसा सिंपल लाइन आर्ट तैयार कर देता है. इस आर्ट को यूज़र डिजिटल तरीके से कलर कर सकते हैं या फिर प्रिंट निकालकर हाथ से रंग भर सकते हैं. हालांकि, यह फीचर सिर्फ Copilot+ PCs पर ही उपलब्ध होगा और इसे इस्तेमाल करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट से साइन-इन करना जरूरी है. माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा जारी किए गए आधिकारिक ब्लॉग के मुताबिक, Paint में एक और छोटा लेकिन काम का अपडेट Fill Tolerance Slider के रूप में आया है. इसकी मदद से यूज़र यह कंट्रोल कर सकते हैं कि Fill Tool रंग को कितनी सटीकता से भरे. स्लाइडर को एडजस्ट करके यूज़र चाहें तो छोटे हिस्से में रंग भर सकते हैं या बड़े एरिया में, जिससे डिटेल्ड आर्टवर्क बनाना आसान हो जाता है. Notebook में भी आए नए एआई फीचर्स वहीं Notepad को भी इस अपडेट में काफी स्मार्ट बनाया गया है. माइक्रोसॉफ्ट ने इसमें Markdown सपोर्ट को और बेहतर किया है. अब नोटबुक में स्ट्राइकथ्रू, नेस्टेड लिस्ट जैसे फीचर्स भी मिलेंगे, जिन्हें कीबोर्ड शॉर्टकट, टूलबार या सीधे मार्कडाउन सिंटैक्स से इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा नोटबुक में एक नया Welcome Experience भी जोड़ा गया है, जो ऐप खोलते ही नए फीचर्स की जानकारी देता है. Notepad के AI फीचर्स जैसे Write, Rewrite और Summarise को भी पहले से तेज बनाया गया है. अब इनका रिज़ल्ट स्ट्रीमिंग प्रीव्यू के रूप में दिखता है, यानी पूरा टेक्स्ट बनने का इंतजार नहीं करना पड़ता. ये एआई फीचर्स लोकल डिवाइस या क्लाउड दोनों पर काम करते हैं, लेकिन इनके लिए भी माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट से लॉग-इन जरूरी होगा.