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बढ़ते प्रदूषण में खांसी ने किया बेहाल? अपनाएं गले की खराश दूर करने के 5 अचूक उपाय

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। राजधानी को चारों ओर से धुंध की चादर घेरे हुए है, जिसके कारण लोगों को सांस लेने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषण के कारण गले में खराश और खांसी की समस्या आम हो गई है। घर के अंदर भी गले में खराश, जलन और खांसी की समस्या बनी रहती है। ऐसे में इन समस्याओं से राहत पाने के लिए प्राकृतिक और घरेलू उपाय कारगर साबित हो सकते हैं। ये उपाय न सिर्फ गले की तकलीफ से राहत दिलाएंगे, बल्कि इम्युनिटी भी बढ़ाते हैं, जिससे प्रदूषण के दुष्प्रभावों से लड़ने में मदद मिलती है। आइए जानें गले की खराश दूर करने के 5 नेचुरल उपाय। गर्म पानी और नमक के गरारे यह सबसे पुराना और भरोसेमंद उपाय है। एक कप गर्म पानी में एक चौथाई चम्मच नमक मिलाकर दिन में 2-3 बार गरारे करें। नमक में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो गले की सूजन कम करते हैं और हानिकारक कणों को साफ करते हैं। गर्म पानी गले की ऐंठन में आराम देता है और बलगम को पतला करता है। शहद और अदरक का कॉम्बो शहद प्राकृतिक एंटीबायोटिक है, तो अदरक एंटी-इंफ्लेमेटरी। एक छोटा टुकड़ा अदरक पीसकर उसे एक चम्मच शहद में मिलाएं और दिन में दो बार खाएं। इसके अलावा, अदरक की चाय बनाकर शहद मिलाकर पी सकते हैं। यह कॉम्बो गले की खराश को शांत करता है और प्रदूषण के कारण जमे हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। हल्दी वाला दूध रात को सोने से पहर एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पिएं। हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी है। यह गले में जलन कम करता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा 10-12 तुलसी के पत्ते, 5-6 काली मिर्च के दाने और एक चम्मच मुलेठी को दो कप पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं। तुलसी इम्युनिटी बूस्ट करती है, काली मिर्च बलगम कम करती है और मुलेठी गले की खराश में आराम देती है। प्रदूषण के कारण होने वाली जलन में यह काढ़ा रामबाण की तरह काम करता है। भाप लेना एक बर्तन में गर्म पानी लें, उसमें पुदीने का तेल की 2-3 बूंदें डालकर भाप लें। सिर पर तौलिया रखकर 5-10 मिनट तक भाप लेने से गले और नाक के मार्ग खुलते हैं, जिससे प्रदूषण के फंसे कण बाहर निकलते हैं। यह सूखी खांसी और गले की खराश में तुरंत आराम देता है। इन बातों का रखें ध्यान     दिनभर में भरपूर मात्रा में गर्म पानी पिएं ताकि गले की अंदरुनी परत नरम रहे।     बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें।     विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे, संतरा, आंवला आदि खाएं।     बिना जरूरत के घर से बाहर निकलने से बचें।  

भारतीयों की स्मार्टफोन की लत: ये काम करते वक्त सबसे अधिक होता है फोन का उपयोग

 नई दिल्ली  Vivo ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि माता-पिता और बच्चों में स्मार्टफोन चलाने की आदत इतनी ज्यादा बढ़ चुकी हैं कि अब वे साथ में खाना खाने के दौरान भी मोबाइल का यूज करते हैं. कंपनी ने अपनी एनुअल स्विच ऑफ रिपोर्ट का 7वां एडिशन जारी किया है. रिसर्च के बाद कंपनी ने स्विच ऑफ इनिसिएट की शुरुआत की है.   इस पहले के तहत लोगों को डिजिटल की बजाय रियल लाइफ लाइफ के रिश्ते को ज्यादा मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा. रिपोर्ट में बताया है कि 72 पेरेंट्स और 30 परसेंट बच्चे माता-पिता से बात करने की बजाय खाने की टेबल पर स्मार्टफोन में बिजी रहना पसंद करते हैं. रिपोर्ट में बताया है कि 72 परसेंट बच्चे ऐसे होते हैं, जो डिनर के समय अपने पेरेंट्स के साथ होते हैं.  Vivo के रिसर्च में हुआ खुलासा  Vivo  के रिसर्च में यह समझने की कोशिश हुई है कि परिवार बदलते डिजिटल दुनिया के साथ कैसे तालमेल बैठा रहे हैं. रिसर्च में दो अहम रिजल्ट सामने आए हैं कि पहला खाने का समय परिवार के लिए जरूरी समय बन गया है, जब वे एक दूसरे से बातचीत कर सकते हैं. दूसरा बच्चे अब ये महसूस करते हैं कि उनके माता-पिता बहुत बिजी रहते हैं.      खाना-खाने के दौरान 72 परसेंट पेरेंट्स और 30 परसेंट चिल्ड्रन अपने स्मार्टफोन को चेक करते हैं.        पेरेंट्स 4.4 घंटेऔर बच्चे 3.5 डेली स्मार्टफोन का यूज करते हैं.      पेरेंट्स और बच्चों दोनों अलग-अलग प्रकार से स्मार्टफोन में बिजी रहते हैं, जहां पेरेंट्स थोड़े-थोड़े समय के लिए मोबाइल को चेक करते हैं. वहीं बच्चे इसको एंटरटेनमेंट के लिए यूज करते हैं.      67 परसेंट बच्चे ऐसे हैं, जो अपने माता-पिता के बिजी होने की वजह से AI का यूज करते हैं. AI से बातचीत करते हैं.   रिसर्च में पाया गया है कि 72 परसेंट बच्चे ऐसे हैं जो अपने पेरेंट्स के साथ खाना खाते हैं, लेकिन ज्यादातर समय वे फोन चलाते हुए नजर आते हैं. वहीं, 91% किड्स का कहना है कि जब फोन एक तरफ रख दिए जाते हैं, तो बातचीत ज्यादा आसान और अच्छी हो जाती है. ये समय ऐसा बन जाता है जब परिवार के लोग एक दूसरे पर ध्यान देते हैं और बातचीत करते हैं.  AI टूल्स के प्रति बच्चों का झुकाव  रिपोर्ट में इस साल एक बच्चों का AI टूल्स के प्रति झुकाव भी देखा गया है. बदलते एजुकेशन जरूरतों को देखते हुए 10–16 साल के 54 परसेंट बच्चे AI को डेली यूज में खुलकर यूज कर रहे हैं. इसका यूज वे होमवर्क और खुद के डेवलपमेंट में यूज कर रहे हैं.  बच्चे ले रहे हैं AI चैटबॉट का सहारा आजकल के समय में बच्चे माता-पिता की जगह AI चैटबॉट का सहारा लेने लगे हैं क्योंकि बच्चों के लगता है कि उनके माता-पिता बहुत बिजी रहते हैं और उनके पास समय नहीं है.  4 में से 1 बच्चा साफ-तौर पर कहता है कि AI की वजह से वे अपने माता-पिता से कम बात करते हैं.  वीवो इंडिया के कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी हेड ने बताया है कि उनका मानना है कि तकनीक को रिश्तों को मजबूत करना चाहिए ना कि उनको दूर करने का काम करना चाहिए.  इस साल की Switch Off स्टडी बताती है कि परिवार संतुलन बनाना चाहते हैं.

महिलाओं में पेशाब की नली के इंफेक्शन की वजह, जलन और दर्द से परेशान होने का कारण जानें

युवा महिलाओं में होने वाली सबसे आम स्वास्थ्य दिक्कतों में से एक यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन है। इसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिसमें पेशाब करते समय जलन और बदबू आना भी शामिल है। लोगों को लगता है कि यह समस्या अचानक होती है। अधिकतर महिलाएं इसके पीछे मौसम में होने वाले बदलाव के बारे में नहीं जानती हैं। न्यूरो यूरोलॉजी, एकेडेमिक्स और सीनियर कंसल्टेंट के डीन डॉक्टर का कहना है कि यूटीआई अचानक नहीं होती। यह मौसम में होने वाले बदलाव और हमारी कुछ रोजाना की आदतों की वजह से बढ़ती है। सही रोकथाम के लिए इन कारणों को रोकना जरूरी है, जिससे आप आने वाली समस्या से बच सकती हैं। गर्मी का असर कैसे पड़ता है? गर्मी में ज्यादा पसीना आता है और कई बार महिलाएं पानी कम पीती हैं। इससे शरीर में पानी की कमी होती है और पेशाब भी कम बनता है। पेशाब कम करने की वजह से अंदर बैक्टीरिया बढ़ने का खतरा रहता है। ये बैक्टीरिया गीले या तंग कपड़े पहनने की वजह से भी बढ़ते हैं। सर्दी का असर कैसे पड़ता है? ठंड के दौरान महिलाओं को प्यास कम लगती है। इस वजह से उनका वाटर इनटेक काफी कम हो जाता है। शरीर में पानी की कमी से पेशाब का उत्पादन कम होता है और इस तरह यूटीआई का खतरा बढ़ जाता है। लाइफस्टाइल से जुड़ी वजहें     पेशाब रोककर रखने से ब्लैडर में बैक्टीरिया जमा होते हैं     यौन गतिविधि के बाद पेशाब ना करने से बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट में आ जाते हैं     प्राइवेट पार्ट की साफ-सफाई के गलत तरीके से बैक्टीरिया अंदर जा सकते हैं, साथ ही तेज सुगंध, केमिकल वाले उत्पाद के इस्तेमाल से भी खतरा बढ़ता है​ बचने का तरीका     पूरे दिन में बार बार पानी पीएं     जब भी पेशाब का प्रेशर लगे, टॉयलेट जरूर जाएं     गीले कपड़े ना पहनें और सूती कपड़ों का इस्तेमाल करें​ डॉक्टर से सलाह लें डॉक्टर का कहना है कि इन कारणों से बचकर आप यूरिनरी ट्रैक्ट की हेल्थ को बेहतर बना सकती हैं। लेकिन अगर किसी महिला को पेशाब में जलन, बार बार पेशाब आना या पेशाब में खून आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।  

न्यू ईयर सेल का बड़ा धमाका: JBL के 220W पावरफुल स्पीकर 50% तक सस्ते

2026 New Year पार्टी में धमाल मचाने के लिए दमदार साउंड वाला स्पीकर खरीदने का प्लान है, तो Amazon पर आपके लिए बहुत कुछ है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पॉपुलर ब्रांड JBL के स्पीकर्स भारी डिस्काउंट के साथ मिल रहे हैं। ऑफर में महंगे स्पीकर्स लगभग आधी कीमत में मिल रहे हैं। लिस्ट में साउंडबार और पॉकेट स्पीकर्स भी शामिल हैं। देखें आपके बजट में कौन सा मॉडल फिट बैठ रहा है। 35,999 रुपये एमआरपी वाला यह पार्टी स्पीकर 44 फीसदी छूट के साथ मात्र 19,998 रुपये में मिल रहा है। बैंक ऑफर का लाभ लेकर इसकी कीमत को कम किया जा सकता है। इसमें 160W का पावरफुल साउंड मिलता है। आप इसे उठाकर किसी भी जगह ले जा सकते हैं और उस जगह को पार्टी फ्लोर में बदल सकते हैं। इसमें आगे की तरह RGB लाइट्स लगी हैं, जो इसके लुक को खूबसूरत बना देते हैं। दावा है कि इसमें 12 घंटे तक का प्लेटाइम मिलता है। इसमें गिटार और माइक का इनपुट भी मिलता है। यह पूल पार्टी के लिए भी परफेक्ट है। 13,999 रुपये एमआरपी वाला यह स्पीकर 46 फीसदी छूट के साथ मात्र 7,499 रुपये में मिल रहा है। बैंक ऑफर का लाभ लेकर इसकी कीमत को कम किया जा सकता है। इसमें 30W का साउंड आउटपुट मिलता है। कॉम्पैक्ट साइज होने की वजह से इसे बैग में रखकर कहीं भी ले जा सकते हैं। दावा है कि इसमें 12 घंटे तक का प्लेटाइम मिलता है। वॉटरप्रूफ होने की वजह से यह पूल पार्टी के लिए भी परफेक्ट है। 3,999 रुपये एमआरपी वाला यह स्पीकर 50 फीसदी छूट के साथ मात्र 1,998 रुपये में मिल रहा है। बैंक ऑफर का लाभ लेकर इसकी कीमत को कम किया जा सकता है। इसमें 4.2W का साउंड आउटपुट मिलता है। इसका साइज बेहद कॉम्पैक्ट है और आप इसे जेब में रखकर भी म्यूजिक का मजा सकते हैं। दावा है कि इसमें 5 घंटे तक का प्लेटाइम मिलता है। यह फुली वॉटरप्रूफ और डस्टप्रूफ है। 18,999 रुपये एमआरपी वाला यह साउंडबार 53 फीसदी छूट के साथ मात्र 8,998 रुपये में मिल रहा है। बैंक ऑफर का लाभ लेकर इसकी कीमत को कम किया जा सकता है। इसमें 220W का साउंड आउटपुट मिलता है। इसे टीवी से कनेक्ट करके घर पर ही थिएटर जैसे साउंड का मजा लिया जा सकता है। घर पर होने वाली छोटी मोटी पार्टी के लिए भी यह परफेक्ट है। आप इसे मोबाइस से कनेक्ट करके भी म्यूजिक का मजा ले सकते हैं। इसके साथ रिमोट कंट्रोल मिलता है, जिससे इसे दूर से भी कंट्रोल किया जा सकता है। इसमें वायरलेस सबवूफर है। 18,999 रुपये एमआरपी वाला यह साउंडबार 50 फीसदी छूट के साथ मात्र 9,499 रुपये में मिल रहा है। बैंक ऑफर का लाभ लेकर इसकी कीमत को कम किया जा सकता है। इसमें 200W का साउंड आउटपुट मिलता है। यह डोल्बी एटमॉस साउंडबार है, जिसमें बिल्ट-इन सबवूफर है। इसे टीवी से कनेक्ट करके घर पर ही थिएटर जैसे साउंड का मजा लिया जा सकता है। आप इसे मोबाइस से कनेक्ट करके भी म्यूजिक का मजा ले सकते हैं। घर पर होने वाली छोटी मोटी पार्टी के लिए भी यह परफेक्ट है। इसके साथ रिमोट कंट्रोल मिलता है, जिससे इसे दूर से भी कंट्रोल किया जा सकता है। इसमें वायरलेस सबवूफर है।

ठंड में दिल पर बढ़ता खतरा: सर्दियों में हृदय रोग क्यों होते हैं आम, जानें कौन लोग सबसे ज्यादा रिस्क में

जालंधर  सर्दियों के आगमन के साथ ही देश भर में हृदय रोगों के मामलों में बढ़ौतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में गिरावट दिल की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है और इस वजह से बुजुर्गों को अतिरिक्त सतर्कता रखनी होगी। क्यों बढ़ते हैं हृदय रोग सर्दियों में? रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना : तापमान कम होने के कारण शरीर गर्मी बचाने के लिए रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है, जिससे ब्लड प्रैशर बढ़ जाता है। ब्लड का गाढ़ा होना : सर्दियों में खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे खून का बहाव धीमा पड़ता है और क्लॉट बनने का खतरा बढ़ जाता है। शारीरिक गतिविधि में कमी : ठंड के कारण लोग सुबह-शाम की सैर या व्यायाम कम कर देते हैं, जिससे हृदय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। संक्रमण का बढ़ा खतरा : सर्दियों में वायरल और फ्लू जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं, जो पहले से हृदय रोगियों की स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानी क्यों जरूरी? विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्गों की प्रतिरक्षा क्षमता कम होती है और उम्र बढ़ने के साथ दिल की कार्यक्षमता भी घटती जाती है। ठंड में शरीर पर अचानक बढ़ने वाला दबाव बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। हाई ब्लड प्रैशर, डायबिटीज, कोलैस्ट्रॉल, मोटापा या पहले से हुए हार्ट अटैक वाले लोगों को जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। कैसे रखें अपना हार्ट सुरक्षित? गर्म कपड़े पहनें और सिर, कान व पैर को ठंड से बचाकर रखें। नियमित ब्लड प्रैशर और शुगर मॉनिटरिंग करें। हल्की एक्सरसाइज, योग और स्ट्रेचिंग रोजाना करें। धूम्रपान से पूरी तरह बचें, क्योंकि ठंड और स्मोकिंग का मिलाजुला असर दिल की बीमारी को और बढ़ाता है। संतुलित और गरम भोजन लें जिसमें सब्जियां, सूप, सूखे मेवे और फाइबर युक्त आहार। जल का सेवन ज्यादा करें, क्योकि ठंड में लोग पानी कम पीते हैं जिससे ब्लड गाढ़ा होने का खतरा रहता है। दवाइयां समय पर लें और डाक्टर द्वारा निर्धारित मात्रा को न छोड़ें। हार्ट के लक्षणों को नजरअंदाज करना घातक टैगोर अस्पताल के चेयरमैन डा. विजय महाजन ने कहा कि हृदय रोग से संबंधित लक्षणों को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। जिनमें सीने में दर्द या भारीपन, सांस लेने में दिक्कत, अचानक पसीना आना, चक्कर आना या बेहोशी, हाथों, कंधे या जबड़े में दर्द आदि होने पर तुरंत विशेषज्ञ डाक्टरों से सम्पर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऊपरी पेट में दर्द, साथ में मितली और उल्टी लोग अक्सर इसे अपच समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में यह हार्ट अटैक हो सकता है। गर्दन में दर्द, जो एक या दोनों बाजुओं तक फैल सकता है, इसे लोग आमतौर पर सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस समझ लेते हैं। कुछ मरीजों में, विशेषकर डायबिटीज वाले मरीजों में, हार्ट अटैक का लक्षण केवल सांस फूलना (सांस लेने में तकलीफ) भी हो सकता है।

कॉल रिकॉर्डिंग फीचर के साथ Lyne की नई ब्लूटूथ कॉलिंग वॉच भारत में लॉन्च

 नई दिल्ली Lyne ओरिजनल्स ने अपने स्मार्ट वियरेबल पोर्टफोलियो को एक्सपैंड किया है. कंपनी ने अपनी लेटेस्ट स्मार्टवॉच Lyne Lancer 19 Pro को लॉन्च किया है, जो कम कीमत में दमदार फीचर्स के साथ आती है. इसमें आपको ब्लूटूथ 5.3 कनेक्टिविटी मिलती है. इसकी मदद से यूजर्स वॉच के जरिए ही कॉल कर सकते हैं.  स्मार्टवॉच में हार्ट रेट सेंसर और SpO2 मॉनिटरिंग का फीचर मिलता है. इसमें मल्टीपल स्पोर्ट्स मोड दिए गए हैं. वॉच IPX4 रेटिंग के साथ आती है. सिंगल चार्ज में इसमें 12 दिनों तक का स्टैंडबाय टाइम मिलता है. आइए जानते हैं इसकी कीमत और दूसरी खास बातें.  कितनी है कीमत?  Lyne Lancer 19 Pro को कंपनी ने 1299 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. इस वॉच को आप प्रमुख ऑफलाइन रिटेल आउटलेट से खरीद सकते हैं. ये अभी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है. ये वॉच कम कीमत पर स्मार्ट फीचर्स चाहने वालों के लिए अच्छा विकल्प हो सकती है. हालांकि, इस बजट में बोट, Noise और कई दूसरे ब्रांड्स के भी विकल्प मिलते हैं.  क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स?  Lyne Lancer 19 Pro में 2.01-inch का टच स्क्रीन मिलती है. वॉच ब्लूटूथ 5.3 कनेक्टिविटी के साथ आती है. इसे iOS 12 या उससे ऊपर के वर्जन और Android 9 या उससे ऊपर के वर्जन के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. वॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग का फीचर मिलता है. आप कॉल कर सकते हैं और रिसीव भी कर सकते हैं.  वॉच में बिल्ट-इन माइक्रोफोन और स्पीकर मिलते हैं, जो वॉयस ट्रांसमिशन के लिए दिए गए हैं. Lyne Lancer 19 Pro में हार्ट रेट मॉनिटरिंग और ब्लड ऑक्सीजन सैचुरेशन (SpO2) ट्रैकिंग मिलता है. इसमें स्पोर्ट्स मोड्स दिया गया है. वॉच में मल्टीपल हेल्थ और फिटनेस मॉनिटरिंग फीचर्स मिलते हैं.  Lyne Lancer 19 Pro में कॉल रिकॉर्डिंग का भी फीचर दिया गया है. साथ ही इस पर नोटिफिकेशन अलर्ट भी मिलती है. डिवाइ को पावर देने के लिए 210mAh की बैटरी दी गई है. ब्लूटथ कॉलिंग के साथ ये वॉच तीन से चार दिन इस्तेमाल की जा सकती है. वहीं इसमें 12 दिनों का स्टैंडबाय टाइम मिलेगा.

गले में दर्द, सूजन और खराश? अपनाएं ये आसान आयुर्वेदिक उपाय

भोपाल   मौसम के बदलाव के साथ ही गले में खराश और सूजन एक आम समस्या बन जाती है। यह शुष्क हवा, हीटर का अधिक उपयोग, ठंडी हवा में सांस लेना, प्रदूषण और अनियमित खान-पान जैसे छिपे कारणों से भी ट्रिगर होती है। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में कफ दोष का संचय बढ़ता है, जो गले में जलन और सूजन पैदा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उपाय कफ को संतुलित कर गले को राहत प्रदान करते हैं। सर्दियों में हवा सूखी हो जाती है, जिससे गले की म्यूकस लेयर ड्राई होकर वायरस के प्रवेश को आसान बनाती है। हीटर के सामने बैठना गले को और शुष्क करता है, जबकि सुबह ठंडी हवा और ठंडे-गर्म पेय का मिश्रित सेवन सूजन बढ़ाता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे उपाय प्रभावी हैं जो कफ निकालकर गले को नमी और गर्माहट देते हैं। इनमें हींग-शहद का लेप है। हींग के एंटीवायरल गुण कफ को ढीला कर जलन कम करते हैं। मिश्री-सौंफ-काली मुनक्का को उबालकर काढ़ा बनाएं और इसे पीने से गला नम रहता है, सूजन शांत होती है। गुनगुने पानी में हल्दी और कुचली लौंग मिलाकर गरारा करना भी लाभदायी होता है। हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो सूजन घटाता है, जबकि लौंग दर्द में राहत देता है। अदरक और गुड़ गर्म कर उसका भाप लेने से कफ ढीला होता है और खराश में तुरंत आराम मिलता है। नींबू के छिलके गर्म कर गर्दन पर रखें। इसके लिमोनीन से गला मॉइस्चराइज होता है। तुलसी का चूर्ण शहद में मिलाकर लें। तुलसी के एंटीसेप्टिक गुण वायरस रोकते हैं। इसके साथ ही गुनगुना तिल का तेल नाक में 2-2 बूंद डालें। यह गले के सूखेपन को दूर कर नमी प्रदान करता है। ये उपाय न केवल लक्षणों को कम करते हैं, बल्कि कफ असंतुलन की समस्या भी दूर करते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, इन देसी नुस्खों को मौसम के अनुसार अपनाएं। गंभीर मामलों में डॉक्टर से परामर्श लें।

नई रिसर्च में खुलासा: विटामिन B3 (Nicotinamide) से स्किन कैंसर का खतरा 14% तक घट सकता है

  नई दिल्ली कैंसर का नाम सुनते ही लोग खौफ में आ जाते हैं. इस बीमारी से होने वाले जान के खतरे के साथ ही लोगों को इसके इलाज में खर्च होने वाले पैसे का इंतजाम करने का भी स्ट्रेस होने लगता है. दरअसल, इसका इलाज बहुत महंगा होता है और उसमें लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं. यहां तक कि इसकी टेस्टिंग भी बहुत महंगी होती है.  ऐसे में अक्सर लोग सोचते हैं कि कैंसर से बचने के लिए महंगी दवाइयां, बड़े-बड़े इलाज या मुश्किल थेरेपी की जरूरत होती है. लेकिन अगर हम कहें कि स्किन कैंसर जैसे खतरनाक और दुनिया के सबसे आम कैंसर से बचाव एक सस्ती, रोज ली जाने वाली विटामिन की गोली से हो सकता है, तो? सुनने में हैरानी जरूर होती है, लेकिन एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर, जस्टिन स्टेबिंग के अनुसार, एक नई रिसर्च ने यही साबित किया है. है ना चौंकाने वाली बात? चलिए जानते हैं कौन सा है ये विटामिन और कैसे ये स्किन कैंसर के खतरे को कम करता है.   कौस सा विटामिन करता है स्किन कैंसर से बचाव? Nicotinamide, यानी विटामिन B3 का बहुत ही साधारण और सस्ता रूप, स्किन कैंसर के खतरे को कम कर सकता है. खास बात ये है कि इसका फायदा उन लोगों में और भी ज्यादा है जिन्हें पहले से एक बार स्किन कैंसर हो चुका है. इस स्टडी ने स्किन कैंसर प्रिवेंशन को एक नया मोड़ दे दिया है और डॉक्टरों को अपने पुराने तरीकों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है. कैसे काम करता है Nicotinamide? Nicotinamide विटामिन B3 का एक रूप है, जो शरीर की एनर्जी बनाने में मदद करता है और स्किन को रिपेयर करने की प्रोसेस को तेज करता है. ये UV किरणों से हुए डैमेज को ठीक करने में मददगार होता है और स्किन में होने वाली सूजन को कम करता है. इसके अलावा, ये इम्यून सिस्टम को इतना मजबूत बनाता है कि वो खराब सेल्स को जल्दी पहचान सके. इस तरह, ये विटामिन स्किन को कैंसर बनने से पहले ही लड़ने की ताकत देता है. क्यों बढ़ रहा है स्किन कैंसर? स्किन कैंसर दुनिया में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है और हर साल इसके लाखों नए केस सामने आते हैं. खासकर बेसल सेल कार्सिनोमा और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ये कैंसर ज्यादा धूप में रहने, गोरी स्किन, बढ़ती उम्र और UV किरणों के ज्यादा एक्सपोजर से जुड़ा होता है. सबसे चिंताजनक बात ये है कि जिन्हें एक बार स्किन कैंसर हो चुका हो, उनमें इसके दोबारा होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. कितने लोगों पर की गई रिसर्च? नई रिसर्च 33,000 से ज्यादा अमेरिकी वेटरंस पर की गई थी. इसमें 12,000 लोग Nicotinamide (500 mg, दिन में दो बार) ले रहे थे, जबकि 21,000 लोग कोई सप्लीमेंट नहीं ले रहे थे. इतने बड़े ग्रुप पर की गई स्टडी ने स्किन कैंसर प्रिवेंशन को लेकर बेहद अहम जानकारी सामने रखी. क्या मिला नतीजा? रिसर्च के नतीजे हैरान कर देने वाले थे. Nicotinamide लेने वाले लोगों में नया स्किन कैंसर होने का खतरा लगभग 14% कम पाया गया. यानी सिर्फ एक सस्ती विटामिन की नियमित खुराक स्किन कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है. ये भी सामने आया कि अगर ये सप्लीमेंट पहली बार स्किन कैंसर डाइजनोज होने के तुरंत बाद शुरू किया जाए, तो दूसरी बार ये कैंसर होने का खतरा 54% तक कम हो सकता है. यह फायदा खास तौर पर स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा में सबसे ज्यादा देखा गया. सबसे बड़ा फायदा कब मिलता है? स्टडी ने साफ दिखाया कि इसका प्रभाव तभी सबसे ज्यादा होता है जब Nicotinamide को सही समय पर यानी पहले कैंसर के तुरंत बाद शुरू किया जाए. इससे शरीर को कैंसर बनने से पहले ही उससे लड़ने की ताकत मिलती है. क्या ये सनस्क्रीन का ऑप्शन है?  Nicotinamide स्किन कैंसर रोकने का एक नया और असरदार तरीका जरूर है, लेकिन ये कभी भी सनस्क्रीन का ऑप्शन नहीं हो सकता. डॉक्टर साफ कहते हैं कि आपको अब भी धूप में कम समय बिताना चाहिए, रोज सनस्क्रीन लगानी चाहिए, टोपी और फुल-स्लीव कपड़े पहनने चाहिए और स्किन की नियमित चेकअप करानी चाहिए. Nicotinamide सिर्फ एक extra protection की तरह काम करता है, धूप से बचाव की बुनियादी आदतों को ये रिप्लेस नहीं करता. इतना खास क्यों है ये विटामिन? इस विटामिन की खासियत इसकी आसान उपलब्धता और सुरक्षा में है. ये बेहद सस्ता है, आसानी से मिल जाता है और रोजाना बिना किसी परेशानी के लिया जा सकता है. सबसे बड़ी बात, ये स्किन कैंसर के दोबारा होने के खतरे को कम करने में प्रभावी साबित हुआ है. कई महंगी दवाइयों और बीमारी के इलाज की तुलना में Nicotinamide एक आसान, सुरक्षित और किफायती ऑप्शन है.  कुछ बातें अभी भी पूरी तरह साफ नहीं हैं. ये स्टडी एक ऑब्जर्वेशनल रिसर्च थी, जिसका मतलब है कि इसे मेडिकल रिकॉर्ड्स के आधार पर किया गया था, न कि किसी कंट्रोल्ड ट्रायल की तरह जहां सभी परिस्थितियां तय होती हैं. इसी वजह से कुछ सीमाएं बनी रहती हैं. स्टडी में ज्यादातर गोरी स्किन वाले पुरुष शामिल थे, इसलिए अलग-अलग नस्लों, महिलाओं और युवा लोगों पर इसका असर कैसा होगा, यह अभी पता नहीं है. इसके अलावा, जिन लोगों को कभी स्किन कैंसर नहीं हुआ, उन पर Nicotinamide का क्या प्रभाव होगा, यह भी अभी क्लियर नहीं है.

Hero VIDA ने लॉन्च की बच्चों के लिए इलेक्ट्रिक ऑफ-रोड मोटरसाइकिल VIDA DIRT.E K3, शुरुआती कीमत 69,990 रुपये

मुंबई   इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Hero VIDA ने अपनी पहली ऑफ-रोड मोटरसाइकिल VIDA DIRT.E K3 को लॉन्च कर दिया है. इस मोटरसाइकिल को खास तौर पर 4 से 10 साल के युवा राइडर्स के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसका मकसद बच्चों को बड़ी और ज़्यादा पावरफुल मशीनों पर जाने से पहले, मोटरसाइकिलिंग में एक सुरक्षित, काबिल और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला एंट्री पॉइंट देना है. Vida DIRT.E K3 मोटरसाइकिल की खास चीजों की बात करें तो, इसमें एक थ्री-पोज़िशन एडजस्टमेंट मैकेनिज्म दिया गया है, जिससे आप सिर्फ़ एक एलन-की की मदद से छोटे, मीडियम और बड़े साइज़ के बीच स्विच कर सकते हैं. यह सिस्टम सीट की हाइट और व्हीलबेस दोनों को एडजस्ट करता है, जिससे यह पक्का होता है कि बाइक बच्चे की हाइट के साथ बढ़ाई या कम की जा सकती है और कई सालों तक इस्तेमाल करने के लायक रहती है, बजाय इसके कि वह जल्दी छोटी पड़ जाए. कंपनी ने बाइक को लेकर बताया कि जब बच्चा ऐसे स्किल लेवल पर पहुंच जाता है, जहां फ्रंट और रियर सस्पेंशन की ज़रूरत होती है, तो उन्हें ऑप्शनल एक्सेसरीज़ के तौर पर खरीदा जा सकता है. Vida DIRT.E K3 की बैटरी नई DIRT.E K3 में कंपनी ने 500W की मोटर इस्तेमाल की है, जिससे यह 23-25 ​​किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड तक पहुंच सकती है. इसकी रिमूवेबल बैटरी को 0 से 100 प्रतिशत चार्ज होने में लगभग तीन घंटे का समय लगता है और यह इलाके और राइडर के चलाने के तरीके के आधार पर तीन घंटे तक चलती है. इस मोटरसाइकिल में तीन राइड मोड – बिगिनर, अमेच्योर और प्रो – दिए गए हैं, जो स्पीड को क्रमशः 8 किलोमीटर प्रति घंटे, 16 किलोमीटर प्रति घंटे और 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित करते हैं. माता-पिता एक खास ऐप के ज़रिए इन सेटिंग्स को एक्सेस कर सकते हैं, जिससे वे स्पीड लिमिट सेट कर सकते हैं, कुछ मोड लॉक कर सकते हैं और अपने बच्चे के राइडिंग सेशन पर नज़र रख सकते हैं. चूंकि यह मोटरसाइकिल बच्चों के लिए है, इसलिए VIDA ने इसमें कई सेफ्टी-फोकस्ड एलिमेंट भी शामिल किए हैं. इनमें मज़बूत वायरिंग, छोटे हाथों के लिए ब्रेक लीवर, खास इम्पैक्ट वाली जगहों पर एनर्जी-एब्जॉर्बिंग मटीरियल और एक इमरजेंसी कटऑफ टेदर भी शामिल है, जो राइडर के गिरने पर मोटर को बंद कर देता है. कीमत की बात करें तो VIDA DIRT.E K3 की शुरुआती कीमत 69,990 रुपये रखी गई है, और इसे आंध्र प्रदेश में VIDA के तिरुपति प्लांट में बनाया जाएगा. शुरुआती फेस में इस मोटरसाइकिल की डिलीवरी दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, जयपुर और कालीकट में शुरू की जाएगी.

6 घंटे की नींद से शरीर पर पड़ रहे हैं गंभीर असर, डॉक्टरों ने दी चेतावनी- नींद है शरीर का रीसेट बटन

इंदौर  बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना का एक वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वह बताते हैं कि उनकी नींद अधिकतम छह घंटे ही हो पाती है। यह बात भले ही सामान्य लगे, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ औसतन छह घंटे की नींद युवाओं के लिए गंभीर खतरे का संकेत मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि छह घंटे की नींद को सामान्य मानना एक भ्रम है। कम नींद दिमाग और शरीर पर धीमे जहर की तरह असर डालती है। इसका तात्कालिक प्रभाव एकाग्रता में कमी, कमजोर निर्णय क्षमता, मूड में बदलाव और धीमे रिएक्शन टाइम के रूप में दिखता है, जबकि भीतर ही भीतर इम्यून सिस्टम कमजोर और हार्मोनल संतुलन बिगड़ता जाता है। इसी वजह से आगे चलकर अल्जाइमर, डिमेंशिया और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इंदौर में आयोजित न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी आफ इंडिया की 73वीं राष्ट्रीय कान्फ्रेंस ‘एनएसआइकान-2025’ में सम्मिलित हुए विशेषज्ञों ने कम नींद को चिंताजनक बताया। उनका सुझाव सात से आठ घंटे की औसत नींद का है। शरीर और दिमाग के मरम्मत का समय रात की नींद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में 33 वर्ष सेवाएं दे चुके प्रोफेसर सुरेश्वर मोहंती ने एनएसआईकान में कहा कि शरीर और दिमाग दोनों की मरम्मत का असली समय रात की नींद ही होता है। जब व्यक्ति लगातार छह घंटे से कम या केवल छह घंटे की नींद पर निर्भर रहता है, तो हृदय व मस्तिष्क संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। उनका मानना है कि एक स्वस्थ आदमी को सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लेनी ही चाहिए, ताकि उसका ब्रेन अपनी पूरी क्षमता से काम कर सके और मेटाबालिज्म संतुलित रहे। नींद शरीर का रीसेट बटन फोर्टिस मोहाली में न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. वीके खोसला के अनुसार, लोग समझते हैं कि कम सोने से प्रोडक्टिविटी बढ़ती है, लेकिन यह बिल्कुल गलत है। नींद शरीर का रीसेट बटन है। अगर इसे कम कर देंगे, तो सेहत को नुकसान ही होगा। वह सुझाव देते हैं कि प्रतिदिन सात से नौ घंटे की अच्छी नींद से सेहत भी ठीक रहती है और काम करने की क्षमता भी बेहतर होती है। ऐसे नुकसान पहुंचाती है सिर्फ छह घंटे की नींद     दिमाग में टॉक्सिन : ग्लिम्फेटिक सिस्टम पूरी सफाई नहीं कर पाता।     कमजोर याददाश्त : प्रीफ्रंटल कार्टेक्स की गतिविधि घटती है। इसका असर सोचने-समझने पर पड़ता है। स्मरणशक्ति और निर्णय क्षमता कमजोर हो जाती है।     स्ट्रोक-हार्ट का खतरा : कम नींद लेने वालों में स्ट्रोक का जोखिम कई गुना अधिक होता है।     मूड स्विंग व तनाव : सेरोटोनिन-डोपामिन गड़बड़ाते हैं, एंग्जायटी-डिप्रेशन बढ़ता है।     इम्यून सिस्टम कमजोर : साइटोकाइन्स कम बनते हैं, संक्रमण जल्दी पकड़ता है।     दिमाग जल्दी बूढ़ा होता है : न्यूरान डैमेज और ग्रे मैटर लास तेज होता है। आदर्श नींद कितनी होनी चाहिए?     सामान्य व्यक्ति (18-60 वर्ष): सात से नौ घंटे प्रतिदिन     वरिष्ठ नागरिक (60+): सात से आठ घंटे     किशोर (13-18 वर्ष): आठ से 10 घंटे (स्रोत- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) जिससे प्यार करते हो, उसे सोने दो…     मुझे सोना पसंद है। अगर आप किसी से वाकई प्यार करते हो, तो उसे सोने दो। नींद से उठाने वाला आपका सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है। मैं छह घंटे से ज्यादा नहीं सो पाता हूं। – आयुष्मान खुराना, अभिनेता का कथन