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iPhone 16 की कीमत में भारी गिरावट — अब बजट यूज़र्स के लिए भी खुल गया Apple का दरवाज़ा

नई दिल्ली Apple का फोन खरीदने की चाहत रखने वालों के लिए खुशखबरी है। अब ऐपल के iPhone 16 पर भारी छूट मिल रही है। इसके लॉन्च के बाद पहली बार इतनी कम कीमत पर यह फोन उपलब्ध है। फ्लिपकार्ट पर इसकी कीमत सिर्फ 57,999 रुपये है, जो अमेजन इंडिया की 66,900 रुपये और ऐपल की आधिकारिक वेबसाइट की 69,900 रुपये की कीमत से काफी कम है। फ्लिपकार्ट पर SBI क्रेडिट कार्ड से खरीदने पर 1,000 रुपये की एक्स्ट्रा मिल रही है। इसके अलावा, फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड से कैशबैक भी मिलेगा। अमेजन पर बैंक कार्ड्स के साथ 4,000 रुपये तक की छूट मिल रही है है। iPhone 16 को खरीदने का यह सबसे अच्छा मौका है। बैंक और एक्सचेंज डिस्काउंट इस ऑफर को और आकर्षक बनाने के लिए बैंक और एक्सचेंज डिस्काउंट हैं। SBI क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 3,500 रुपये का तुरंत डिस्काउंट मिलता है, जिससे कीमत 54,499 रुपये हो जाती है। साथ ही, Flipkart का एक्सचेंज प्रोग्राम पुराने स्मार्टफोन के बदले 46,990 रुपये तक की छूट देता है, जो फोन के मॉडल और उसकी कंडीशन पर डिपेंड करता है। iPhone 16 के शानदार फीचर्स iPhone 16 में ऐपल का नया A18 बायोनिक चिप है, जो पिछले मॉडल की तुलना में तेज़ और बिजली की बचत करने वाला है। इसमें 6.1 इंच का सुपर रेटिना XDR OLED डिस्प्ले है, जिसका रिजॉल्यूशन 2556×1179 पिक्सल है। फोन तेज परफॉर्मेंस और लंबे समय तक चलने वाली बैटरी देता है। ऐपल का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 22 घंटे तक वीडियो चला सकता है। कैमरा और डिज़ाइन में बदलाव iPhone 16 का डिजाइन थोड़ा बदला हुआ है। इसमें अब दो कैमरे वर्टिकली अलाइन्ड हैं। कैमरा सिस्टम में 48 मेगापिक्सल का मैन सेंसर और 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड लेंस है। यह कम रोशनी में भी शानदार और कलरफुल तस्वीरें ले सकता है। फोन का डिजाइन स्टाइलिश और मजबूत है। यह MagSafe वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है, जो 25W की स्पीड से चार्ज करता है। 2024 में लॉन्च हुआ था iPhone 16 फोन 2024 में लॉन्च हुआ था और इसे बहुत पसंद किया जा रहा है। A18 चिप और शानदार कैमरे की वजह से यह फोन यूजर्स की पहली पसंद बन रहा है। अगर आप नया iPhone खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह सही समय है क्योंकि फ्लिपकार्ट और अमेजन पर मिल रही छूट इसे और आकर्षक बनाती है।

5 मिनट की एक्सरसाइज से पाएं स्ट्रेच और यंग गर्दन – झुर्रियाँ अब नहीं आएँगी

अक्सर हम अपने चेहरे का बहुत ध्यान रखते हैं, लेकिन गर्दन को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि गर्दन की त्वचा सबसे पहले ढीली पड़ना शुरू होती है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि आपको घंटों जिम में पसीना बहाने की जरूरत नहीं है। सिर्फ 5 मिनट की आसान नेक एक्सरसाइज आपकी गर्दन की त्वचा को कसकर रख सकती हैं और लकीरों को कम कर सकती हैं। आइए जानते हैं। क्यों जरूरी है गर्दन की एक्सरसाइज? गर्दन की त्वचा बहुत पतली और नाजुक होती है और इस हिस्से की मांसपेशियां जल्दी कमजोर पड़ जाती हैं। जब मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो त्वचा भी ढीली पड़नी शुरू हो जाती है। इसके अलावा, आजकल हम घंटों फोन या लैपटॉप पर देखते हुए अपना सिर नीचे रखते हैं, जिसे 'टेक नेक' कहा जाता है। इससे भी गर्दन के आस-पास गहरी लकीरें बन जाती हैं। रोजाना 5 मिनट की एक्सरसाइज इन मांसपेशियों को मजबूत करती है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और त्वचा में कसाव लाती है। 5 मिनट का सिंपल एंटी-एजिंग रूटीन आप ये तीनों एक्सरसाइज कहीं भी, कभी भी कर सकते हैं। चाहे आप ऑफिस में हों या घर पर आराम कर रहे हों। हर एक्सरसाइज को 10 बार दोहराएं: 'स्काई किस'     सीधे बैठ जाएं या खड़े हो जाएं।     अपने सिर को धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकाएं और छत या आसमान की तरफ देखें।     अब, अपने होठों को ऐसे सिकोड़ें जैसे आप आसमान को चूमने की कोशिश कर रहे हों। आपको अपनी गर्दन के अगले हिस्से और गले के पास खिंचाव महसूस होगा।     इस पोजीशन को 5 सेकंड तक रोकें और फिर धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। 'साइड स्ट्रेच'     सीधे बैठें और अपने कंधों को ढीला छोड़ दें।     धीरे-धीरे अपना सिर दाईं ओर झुकाएं, जैसे आप अपने कान को अपने दाहिने कंधे से छूना चाहते हैं (कंधे को ऊपर न उठाएं)।     जब आपको गर्दन के बाईं तरफ अच्छा खिंचाव महसूस हो, तो 5 सेकंड के लिए रुकें।     अब, यही प्रक्रिया बाईं ओर दोहराएं। 'जबड़ा खींचना'     सीधे बैठें और सामने की तरफ देखें।     अपने निचले जबड़े को धीरे-धीरे आगे की ओर धकेलें, ताकि आपको अपनी ठुड्डी के नीचे और गर्दन के अगले हिस्से में गहरा खिंचाव महसूस हो।     5 सेकंड के लिए रुकें और फिर आराम करें।     यह छोटा सा रूटीन आपकी गर्दन की लकीरों को कम करने में जादुई असर दिखा सकता है। याद रखें, अच्छी मॉइस्चराइजिंग क्रीम लगाना भी उतना ही जरूरी है, जितना एक्सरसाइज करना।  

आंवला और एलोवेरा से पाएं डैंड्रफ और हेयर फॉल से छुटकारा – जानें 4 आसान तरीके

सुंदर और मजबूत बालों की ख्वाहिश तो हर कोई रखता है। लेकिन प्रदूषण, खराब खान-पान और केमिकल के ज्यादा इस्तेमाल के कारण बाल कमजोर, रूखे और बेजान हो जाते हैं। ऐसे में बालों को फिर से हेल्दी और मजबूत बनाने के लिए कुछ प्राकृतिक उपाय अपनाना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसे में आंवला और एलोवेरा बालों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं। ये दोनों ही ऐसे गुणों से भरपूर होते हैं, जो बालों को मजबूत और घना बनाने में मदद करते हैं। आइए जानें बालों को स्वस्थ और चमकदार बनाने के लिए आंवला और एलोवेरा का कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं। क्यों फायदेमंद हैं आंवला और एलोवेरा? आंवला विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। यह बालों को जड़ों से मजबूत बनाता है, रूसी दूर करता है और समय से पहले सफेद होने से रोकता है। वहीं एलोवेरा में मॉइस्चराइजिंग, कूलिंग और हीलिंग गुण होते हैं। यह स्कैल्प को शांत करता है, खुजली और जलन को कम करता है तथा बालों को नेचुरल चमक देता है। आंवला और एलोवेरा का इस्तेमाल कैसे करें? आंवला और एलोवेरा का हेयर मास्क यह मास्क बालों को गहराई से पोषण देकर मजबूत और चमकदार बनाता है। सामग्री-     2 चम्मच ताजा आंवला पाउडर     2 चम्मच ताजा एलोवेरा जेल     1 चम्मच दही या नींबू का रस बनाने की विधि-     सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर एक स्मूथ पेस्ट बना लें।     इस पेस्ट को स्कैल्प और बालों की जड़ों में अच्छी तरह लगाएं।     लगभग 30-45 मिनट तक लगा रहने दें।     ठंडे पानी से बाल धो लें।     हफ्ते में एक बार इस मास्क का इस्तेमाल करें। आंवला और एलोवेरा का कंडीशनिंग हेयर रिन्स यह एक प्राकृतिक कंडीशनर का काम करता है और बालों को मुलायम बनाता है। सामग्री-     1 कप पानी     2 चम्मच आंवला पाउडर     3 चम्मच एलोवेरा जेल बनाने की विधि-     आंवला पाउडर को पानी में उबालकर ठंडा होने दें।     इसमें एलोवेरा जेल मिलाएं और अच्छी तरह मिक्स कर लें।     शैम्पू करने के बाद, इस मिश्रण से बालों को अच्छी तरह रिंस करें।     इसे 5-10 मिनट तक लगा रहने दें, फिर साफ पानी से धो लें। आंवला तेल और एलोवेरा का मिश्रण यह मिश्रण बालों के विकास को बढ़ावा देने और रूसी को दूर करने में मददगार है। सामग्री-     2 बड़े चम्मच आंवला तेल     1 बड़ा चम्मच एलोवेरा जेल बनाने की विधि-     आंवला तेल और एलोवेरा जेल को मिलाकर हल्का गर्म कर लें।     इस मिश्रण से स्कैल्प की 10-15 मिनट तक मालिश करें।     1-2 घंटे के लिए छोड़ दें या रात भर के लिए लगा रहने दें।     माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें।     सप्ताह में दो बार इस्तेमाल कर सकते हैं। ताजे आंवले और एलोवेरा का पैक अगर आपके पास ताजा आंवला उपलब्ध है, तो यह विधि बहुत फायदेमंद रहेगी। सामग्री-     2-3 ताजे आंवले     2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल बनाने की विधि-     आंवलों का रस निकाल लें या उन्हें बारीक पीसकर पेस्ट बना लें।     इसमें एलोवेरा जेल मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें।     इस पेस्ट को स्कैल्प और बालों पर लगाएं।     45 मिनट बाद बाल धो लें। इन बातों का रखें ध्यान     पहली बार इस्तेमाल करने से पहले, एलोवेरा जेल से एलर्जी की जांच करने के लिए त्वचा के एक छोटे से हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर कर लें।     अगर बाल बहुत ज्यादा रूखे हैं, तो इन मास्क में थोड़ा-सा नारियल तेल या जोजोबा ऑयल मिला सकते हैं।     बालों को हेल्दी रखने के लिए सही हेयर केयर देखभाल और हेल्दी डाइट लेना भी उतना ही जरूरी है।  

बाजू की ढीली मांसपेशियों को टोन्ड बनाने के लिए रोज करें ये 5 एक्सरसाइज, बढ़ जाएगी हाथों की ताकत

 क्या आपकी भी बाजुओं की मांसपेशियां कमजोर और ढीली पड़ गई हैं? अगर हां, तो घबराइए मत। कुछ आसान एक्सरसाइज की मदद से आप अपनी बाजुओं को फिर से टोन कर सकते हैं। दरअसल, टोन्ड बाजू न सिर्फ देखने में अच्छे लगते हैं, बल्कि आपकी बाजुओं को मजबूत भी बनाते हैं। आइए जानें बाजुओं की मांसपेशियों को टोन्ड बनाने के लिए 5 असरदार और आसान एक्सरसाइज । ये एक्सरसाइज आपकी बाजुओं को मजबूत बनाएंगे और आपकी हाथों की स्ट्रेंथ बढ़ाने में भी काफी मदद करेंगे।   ट्राइसेप्स डिप्स ट्राइसेप्स डिप्स बाजू के पिछले हिस्से को टार्गेट करती है। इसे करने के लिए एक मजबूत कुर्सी या बेंच का इस्तेमाल करें। कुर्सी के किनारे पर हाथ रखकर, शरीर को सीधा रखते हुए नीचे जाएं और फिर ऊपर उठें। इस दौरान कोहनियां शरीर के पास रखें और शरीर को सीधा रखें। 12-15 के तीन सेट करें। बाइसेप्स कर्ल बाइसेप्स कर्ल बाजू के आगे के हिस्से को मजबूत करती है। डम्बल या रेजिस्टेंस बैंड का इस्तेमाल करके, सीधे खड़े होकर हाथों को नीचे रखें। अब डम्बल को कंधों की ओर ले जाएं और धीरे-धीरे नीचे लाएं। 12-15 रेप्स के तीन सेट करें। इस दौरान शरीर को हिलाएं नहीं और सांस लेते हुए ऊपर उठाएं तथा सांस छोड़ते हुए नीचे लाएं। पुश-अप्स पुश-अप्स एक कंपाउंड एक्सरसाइज है जो बाजू, छाती और कंधों को एक साथ काम करवाती है। पेट के बल लेटकर हाथों को जमीन पर रखें और शरीर को सीधी रेखा में रखते हुए ऊपर-नीचे उठें। शुरुआत में घुटनों को जमीन पर रखकर मॉडिफाइड पुश-अप्स भी कर सकते हैं। 10-12 के तीन सेट करें। ओवरहेड ट्राइसेप्स एक्सटेंशन यह एक्सरसाइज ट्राइसेप्स पर खासतौर से फोकस करती है। सीधे खड़े होकर या बेंच पर बैठकर, दोनों हाथों से एक डम्बल पकड़कर सिर के ऊपर उठाएं। अब कोहनियों को मोड़कर डम्बल को सिर के पीछे ले जाएं और फिर वापस ऊपर लाएं। 12-15 रेप्स के तीन सेट करें। हैमर कर्ल हैमर कर्ल बाइसेप्स और फोरआर्म्स दोनों को टोन करती है। डम्बल को हथेलियां एक-दूसरे के सामने रखते हुए पकड़ें और कंधों तक ले जाएं। इस दौरान कोहनियां शरीर के पास रखें। 12-15 रेप्स के तीन सेट करें। इन एक्सरसाइज को हफ्ते में 3-4 बार करने से आपकी बाजू की मांसपेशियां मजबूत और टोन्ड होंगी। ध्यान रहे, एक्सरसाइज के साथ सही डाइट और भरपूर मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। शुरुआत में हल्के वजन से शुरू करें और धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं। किसी भी एक्सरसाइज का पूरा फायदा पाने के लिए उसे सही फॉर्म में करना जरूरी है, इसलिए शुरुआत में ट्रेनर की सलाह लेना फायदेमंद रहेगा।  

वैज्ञानिकों की अनोखी खोज: नाक नहीं, Butt से भी सांस लेना संभव – जापान में हुआ सफल प्रयोग

टोक्यो  क्या आपने कभी सोचा है कि सांस लेने का रास्ता नाक या मुंह ही क्यों हो? जापान के वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया कि Butt से भी ऑक्सीजन ली जा सकती है. यह सुनने में मजाक लगता है, लेकिन यह एक गंभीर चिकित्सा खोज है. हाल ही में हुए एक क्लिनिकल ट्रायल से पता चला कि यह तरीका सुरक्षित है. अगर यह कामयाब रहा, तो सांस की नलियां बंद होने पर मरीजों के लिए यह एक वैकल्पिक रास्ता बन सकता है. यह तरीका कैसे काम करता है? इस प्रक्रिया का नाम है 'एंटरल वेंटिलेशन'. इसमें एक खास तरल पदार्थ, जिसे पर्फ्लोरोकार्बन कहते हैं, रेक्टम (मलद्वार) में डाला जाता है. इस तरल में बहुत ज्यादा ऑक्सीजन भरी होती है. विचार यह है कि ऑक्सीजन आंतों की दीवारों से गुजरकर खून में चली जाए. इससे मरीज को नाक या मुंह से सांस लेने की जरूरत न पड़े. यह उन मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है जिनकी सांस की नलियां ब्लॉक हो गई हों, जैसे दम घुटने या चोट लगने पर. यह आइडिया नया नहीं है. जानवरों में यह पहले से होता है. सूअर, चूहे, कछुए और कुछ मछलियां मुसीबत के समय पीछे से ही ऑक्सीजन ले लेती हैं. इंसानों के लिए यह रिसर्च पिछले साल फिजियोलॉजी में इग्नोबेल प्राइज जीत चुकी है – जो मजाकिया लेकिन वैज्ञानिक खोजों को सम्मानित करता है. ट्रायल में क्या हुआ? यह पहला मानव ट्रायल था, जो सिर्फ सुरक्षा की जांच के लिए था. प्रभावशीलता की टेस्टिंग अभी बाकी है. जापान में 27 स्वस्थ पुरुष वॉलंटियर्स को चुना गया. उन्हें एक तरल पदार्थ दिया गया, जिसमें ऑक्सीजन नहीं थी (सुरक्षा के लिए). हर व्यक्ति को 25 मिलीलीटर से 1500 मिलीलीटर तक का तरल रेक्टम में रखना था. 60 मिनट तक होल्ड करना था. परिणाम सकारात्मक आए. कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं हुआ. हां, जिन्हें सबसे ज्यादा मात्रा (1500 मिलीलीटर) दी गई, उन्हें पेट में फूलना, असुविधा और हल्का दर्द महसूस हुआ. बाकी के महत्वपूर्ण संकेत जैसे ब्लड प्रेशर, हृदय गति सब सामान्य रहे. सिर्फ 7 लोगों को पूरे घंटे तक होल्ड करने में दिक्कत हुई. बाकी सबने अच्छे से सहन किया. वैज्ञानिकों की राय ओसाका यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल साइंटिस्ट टाकानोरी टेकेबे कहते हैं कि यह पहली बार इंसानों पर डेटा आया है. नतीजे सिर्फ प्रक्रिया की सुरक्षा दिखाते हैं, प्रभावशीलता की नहीं. लेकिन अब सहनशक्ति साबित हो गई है, तो अगला कदम ऑक्सीजन वाली तरल से ब्लड में ऑक्सीजन पहुंचाने की जांच होगा. अगला ट्रायल ऑक्सीजन वाली तरल पर होगा. देखेंगे कि कितनी मात्रा और कितने समय तक रखने से मरीज का ब्लड ऑक्सीजन लेवल सुधरेगा. यह ट्रायल मरीजों पर होगा, जो असल में ऑक्सीजन की जरूरत में होंगे. क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज? सांस की समस्या दुनिया भर में बड़ी बीमारी है. कोविड जैसी महामारी में लाखों लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी. अगर यह तरीका काम कर गया, तो यह बैकअप ऑप्शन बनेगा. खासकर उन जगहों पर जहां पारंपरिक तरीके संभव न हों. लेकिन अभी यह शुरुआती स्टेज में है. ज्यादा ट्रायल्स में समय लगेगा. यह रिसर्च मेड जर्नल में छपी है.

OnePlus का बड़ा ऐलान: अब 6 साल तक मिलेंगे अपडेट, इन मॉडलों की निकल पड़ी!

नई दिल्ली अगर आप भी OnePlus का स्मार्टफोन चला रहे हैं या खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। कंपनी अपने कई स्मार्टफोन्स पर 6 साल तक का सॉफ्टवेयर सपोर्ट प्रदान कर रही है। सॉफ्टवेयर सपोर्ट के मामले में वनप्लस को सबसे बेहतरीन और भरोसेमंद एंड्रॉयड ब्रांड्स में से एक माना जाता है। इसकी ऑक्सीजनओएस कस्टम स्किन ढेरों फीचर्स और कस्टमाइजेशन के साथ एक साफ-सुथरा, मॉडर्न सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस प्रदान करती है, और यह भविष्य के अपडेट के साथ और भी बेहतर होती जा रही है। गिज्मोचाइना की रिपोर्ट के अनुसार, यह ब्रांड न केवल बेहतरीन सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस प्रदान करता है, बल्कि लॉन्ग-टर्म सॉफ्टवेयर सपोर्ट भी प्रदान करता है, खासकर अपने हालिया फ्लैगशिप और मिड-रेंज फोन्स के लिए। यह छह साल तक के सॉफ्टवेयर अपडेट प्रदान करता है, जिससे डिवाइस लंबे समय तक खतरों से सुरक्षित रहता है, और साथ ही यूजर्स को बार-बार अपग्रेड करने की आवश्यकता से भी बचाता है। यहां वनप्लस के ऐसे फोन्स की लिस्ट दी गई है, जो छह साल तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट के साथ आते हैं। आप भी लिस्ट में देखकर पता करें कि क्या आपका फोन भी सबसे लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट पाने वाला है। लिस्ट: – वनप्लस 13 – वनप्लस 13R – वनप्लस 13s – वनप्लस नॉर्ड 5 – वनप्लस नॉर्ड 4 – वनप्लस नॉर्ड CE 5 – वनप्लस पैड 3 अगर आपका वनप्लस डिवाइस ऊपर दी गई लिस्ट में है, तो उसे लॉन्च की तारीख से छह साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट मिलते रहेंगे। इसका मतलब बड़े Android OS अपडेट नहीं, बल्कि सिक्योरिटी पैच से है। सिक्योरिटी अपडेट में नए फीचर या UI में बदलाव शामिल नहीं होते, लेकिन इनमें Android OS और वनप्लस डिवाइस में मौजूद खामियों के लिए पैच शामिल होते हैं, जिससे डिवाइस सुरक्षित बना रहता है। प्रमुख अपग्रेड के लिए, लिस्ट में शामिल सभी फोन चार एंड्रॉयड ओएस अपग्रेड के लिए एलिजिबल हैं, सिवाय OnePlus Pad 3 के, जो चार ओएस अपग्रेड के लिए एलिजिबल है। लिस्ट में शामिल सभी डिवाइस Android 16 पर बेस्ड OxygenOS 16 अपग्रेड के लिए भी एलिजिबल हैं, जिसकी शुरुआत नवंबर में होने वाली है। यह सिर्फ एक और अपग्रेड नहीं, बल्कि एक बड़ा अपग्रेड है जो कई रोमांचक फीचर्स और ढेर सारे अपग्रेड लेकर आएगा।  

थिएटर भूल जाइए! 230 इंच स्क्रीन के साथ ये प्रोजेक्टर अब 17,887 रुपये में

अपने घर में ही थिएटर का फील मिलना कितना अलग और शानदार एक्पीरियंस होगा। आप भी यह फील पाना चाहते हैं तो अभी अच्छा मौका है। 230 इंच की बड़ी स्क्रीन पर थिएटर जैसा मूवी एक्सपीरिंयस आपको बेहद सस्ते में मिल सकता है। आप 1.25 लाख की सुविधा अभी सिर्फ 17,887 रुपये में पा सकते हैं। इस समय फ्लिपकार्ट प्रीमियम ब्रैंडेड प्रोजेक्टर पर धमाकेदार ऑफर दे रहा है। बड़े पर्दे पर 4K क्वालिटी, जबरदस्त साउंड सपोर्ट और स्मार्ट कनेक्टिविटी के साथ यह डील इतनी बेस्ट है कि मिस करना आपको बहुत भारी पड़ सकता है। अगर आप होम थिएटर सेटअप का सपना देख रहे थे, तो यह मौका आपके लिए परफेक्ट हो सकता है। आइये, पूरी डिटेल नीचे पढ़ते हैं। Boss के प्रोजेक्टर पर मालामाल ऑफर लेटेस्ट फुल एचडी एंड्रॉयड स्मार्ट वाई-फाई और ब्लूटूथ प्रोजेक्टर BOSS S13A अभी बेहद सस्ते में मिल रहा है। बता दें कि इसकी MRP 1,25,000 रुपये है। अभी इस प्रोजेक्टर को 17,887 रुपये में खरीदने का मौका मिल रहा है। हालांकि, यह ऑफर सीमित समय के लिए है। फ्लिपकार्ट पर बिग बैंग दिवाली सेल चल रही है। यह सेल अगले लगभग 12 घंटे में खत्म होने वाली है। इसका मतलब है कि आपके पास यह ऑफर पाने के लिए केवल 12 घंटे 52 मिनट का समय है। इसके बाद यह ऑफर खत्म हो जाएगा। प्रोजेक्टर के फीचर्स यह प्रोजेक्टर 4000 Lumens के साथ 250 इंच तक की स्क्रीन की सुविधा देता है। इसका पिक्सल रेजलूशन 1920X1080P है। इसे रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है। इसमें कनेक्टिविटी के लिए 2 HDMI पोर्ट दिए गए हैं। इसकी अधिकतम प्रोजेक्शन दूरी 25 फीट है। इसका साइज भी काफी बड़ा नहीं है। इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है। कम दाम में ये प्रोजेक्टर भी हैं अच्छे ऑप्शन इसके अलावा और भी कई प्रोजेक्टर पर ऑफर्स मिल रहे हैं। अगर आप कम पैसे में अच्छे ऑप्शन देख रहे हैं तो Portronics Beem अच्छा ऑप्शन है। यह फ्लिपकार्ट पर 4,740 रुपये में मिल रहा है। ZEBRONICS Zeb – Pixaplay भी अभी सस्ते में मिल रहा है। 30,999 रुपये वाले इस प्रोजेक्टर को अभी 9,199 रुपये में खरीद सकते हैं। ध्यान रखें कि यह सेल जल्द ही खत्म होने वाली है। आपके पास ऑफर का लाभ उठाने के लिए सीमित समय है। इसके बाद प्रोजेक्टर महंगे हो जाएंगे और आपको अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे।

मलेरिया बीमारी पर विशेषज्ञों की चेतावनी: 2030 तक नौ लाख से अधिक मौतें और लाखों बच्चे प्रभावित

नई दिल्ली सोचिए, एक बीमारी है जो मच्छर से फैलती है, जानलेवा है, और बच्चों को सबसे ज्यादा मारती है. दुनिया का सबसे बड़ा मलेरिया फंडिंग एजेंसी चेतावनी दे रहा है कि अगर इस बीमारी के खिलाफ अब सही समय पर पैसा नहीं लगाया गया, तो 2030 तक लगभग 9,90,000 और लोग मारे जा सकते हैं, जिनमें 7,50,000 बच्चे पांच साल से कम उम्र के हैं. मलेरिया एक ऐसा रोग है जो मच्छरों और पैरासाइट के कारण फैलता है. लेकिन इसके खतरों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है. लोग जरूरी सतर्कता नहीं उठाए तो यही बीमारी को और खतरनाक बनाता है.  विशेषज्ञों की चेतावनी एड्स, टीबी और मलेरिया से लड़ने वाले वैश्विक कोष (Global Fund) के कार्यकारी निदेशक पीटर सैंड्स ने बर्लिन में हुए विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में कहा कि अगर मैं एचआईवी, टीबी और मलेरिया से जुड़ी वर्तमान स्थिति के बारे में सोचूं, तो मुझे रातों में सबसे ज्यादा मलेरिया की बीमारी जगाए रखती है. उन्होंने आगे बताया कि, “मेरे लिए यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इस साल मलेरिया से पिछले साल की तुलना में ज्यादा लोग मरेंगे. यह धन की कमी का असर है, और मलेरिया एक ऐसी बेरहम बीमारी है जो अविश्वसनीय रूप से तेजी से प्रतिक्रिया करती है.” मलेरिया नो मोर यूके के गैरेथ जेनकिंस ने इसे और सरल भाषा में कहा, “विकल्प स्पष्ट है कि मलेरिया को खत्म करने के लिए अभी निवेश करें या जब यह वापस आए तो कहीं ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा.” मलेरिया से मौतों का बड़ा आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मलेरिया से हर साल लगभग 5,97,000 लोग मरते हैं, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं. मौतों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा अफ्रीका में होता है. टीकाकरण और इलाज मौजूद होने के बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि मलेरिया के खिलाफ लड़ाई अभी भी कमजोर पड़ रही है. ग्लोबल फंड और फाइनेंशियल चुनौती दक्षिण अफ्रीका में होने वाले ग्लोबल फंड शिखर सम्मेलन से पहले विशेषज्ञ विभिन्न फंडिंग परिदृश्यों का अनुमान लगा रहे हैं. उम्मीद है कि 2027–2029 तक दाता देशों द्वारा योगदान तय होगा, क्योंकि ग्लोबल फंड मलेरिया नियंत्रण के लिए लगभग 60 प्रतिशत फंडिंग प्रदान करता है. ALMA (African Leaders Malaria Alliance) की कार्यकारी सचिव जॉय फुमाफी ने कहा कि हम वास्तव में मानव इतिहास के एक बहुत ही महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं. ऐसे उपकरण उपलब्ध हैं जो मलेरिया के खत्म करने में मदद कर सकते हैं. इस समय हमारी सबसे बड़ी चुनौती फाइनेंसिंग है. उन्होंने साफ कहा कि मलेरिया को खत्म करने के साधन मौजूद हैं, लेकिन पैसे की कमी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.

मेडिकल क्षेत्र में बड़ी सफलता: यूनिवर्सल किडनी बनी, हर ब्लड ग्रुप के लिए काम आएगी

 नई दिल्ली किडनी की बीमारी से जूझ रहे लाखों लोग रोज नई उम्मीद की तलाश में रहते हैं. लेकिन अब एक अच्छी खबर है. कनाडा और चीन के वैज्ञानिकों ने 10 साल की मेहनत के बाद यूनिवर्सल किडनी बनाई है, जो किसी भी ब्लड टाइप वाले मरीज को दी जा सकती है. इससे वेटिंग लिस्ट छोटी होगी और जिंदगियां बचेंगी. मेडिकल की दुनिया में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। उन्होेंने ऐसी यूनिवर्सल किडनी बना ली है जो हर ब्लड ग्रुप के मरीजों से मैच होगी। ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट करने समय डोनर खोजने का झंझट खत्म हो जाएगा। लाखों लोगों में जगी उम्मीद किडनी की बीमारी से जूझ रहे लाखों लोग रोज नई उम्मीद की तलाश में रहते हैं। अब ऐसे मरीजों के लिए अच्छी खबर आई है। कनाडा और चीन के वैज्ञानिकों ने 10 साल की मेहनत के बाद यूनिवर्सल किडनी बनाई है। यह किसी भी ब्लड ग्रुप वाले मरीज को दी जा सकती है। यह खोज मेडिकल की दुनिया में चमत्कार मानी जा रही है। इससे केवल वेटिंग लिस्ट छोटी होगी बल्कि रोगियों को नई जिंदगी मिलेगी। इस नई खोज से दुनिया भर के डॉक्टर उत्साहित हैं। डॉक्टरों के अनुसार किडनी ट्रांसप्लांट में अभी तक कई जटिलताएं हैं जिससे रोगी को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ट्रांसप्लांट से पहले डोनर की किडनी रिसीवर के ब्लड ग्रुप से मैच करनी पड़ती है। उदाहरण के लिए ओ टाइप का ब्लड यूनिवर्सल डोनर है। यानी ये किसी भी ग्रुप ए, बी, एबी और ओ वाले को अपनी किडनी दे सकता है। समस्या यह है कि ओ टाइप की किडनियां कम हैं, क्योंकि इन्हें हर कोई इस्तेमाल कर सकता है।  वेटिंग लिस्ट हो जाएगी कम वेटिंग लिस्ट के अनुसार आधे से ज्यादा लोग ओ टाइप की किडनी का इंतजार करते हैं। अमेरिका में ही रोज 11 लोग किडनी न मिलने से मर जाते हैं। भारत में भी लाखों मरीज डायलिसिस पर जी रहे हैं। अगर अलग ब्लड ग्रुप की किडनी ट्रांसप्लांट करें तो बॉडी उसे विदेशी समझकर रिजेक्ट कर देती है। मौजूदा तरीके में मरीज को कई महीनों तक दवाओं पर ही निर्भर रहना पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार यह प्रोसेस काफी महंगा, लंबा और जोखिम भरा है। मरीजों की जान बचाने के लिए लिविंग डोनर चाहिए। ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट करने में कई महीने लग जाते हैं। ओ टाइप जैसी किडनी वैज्ञानिकों ने जिस नई किडनी को बनाया है वह ओ टाइप जैसी है। ये किसी भी ब्लड ग्रुप वाले मरीज के बॉडी में घुल-मिल जाएगी। वैज्ञानिकों ने ए टाइप की किडनी को ओ टाइप में बदल दिया। कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के बायोकेमिस्ट स्टीफन विथर्स के अनुसार ये पहली बार इंसानी बॉडी में टेस्ट हुई है। इससे हमें लंबे समय तक काम करने के टिप्स मिले। ये किडनी ब्रेन-डेड यानी मस्तिष्क मृत व्यक्ति के बॉडी में कई दिनों तक काम करती रही। परिवार की सहमति से यह रिसर्च हुई है।  ब्लड टाइप ए,बी और  एबी में किडनी की सतह पर शुगर मॉलिक्यूल्स लगाए जाते हैं। इससे ये बॉडी को बताते हैं कि ये किडनी अपनी है विदेशी नहीं है।  पुरानी कार से रंग हटाने जैसा शोध विथर्स का कहना है कि यह पुरानी कार से रंग हटाने जैसा है। एंटीजेंस हटते ही इम्यून सिस्टम किडनी को अपना समझ लेता है। ये एंजाइम्स पहले से पहचाने गए थे, लेकिन अब इन्हें किडनी पर सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है। यह रिसर्च नेचर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जर्नल में छपी है। वैज्ञानिकों के अनुसार दुनिया भर में किडनी फेलियर बढ़ रहा है। इसका बड़ा  कारण डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर है। ऐसे में दुनियाभर में किडनी के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब इस यूनिवर्सल किडनी के आ जाने से करोड़ों लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा। यूनिवर्सल किडनी क्या है? एक नजर ये नई किडनी 'O टाइप जैसी' है, जो किसी भी ब्लड ग्रुप वाले मरीज के बॉडी में घुल-मिल जाएगी. वैज्ञानिकों ने A टाइप की किडनी को O टाइप में बदल दिया. कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के बायोकेमिस्ट स्टीफन विथर्स कहते हैं कि ये पहली बार इंसानी बॉडी में टेस्ट हुई. इससे हमें लंबे समय तक काम करने के टिप्स मिले. ये किडनी ब्रेन-डेड (मस्तिष्क मृत) व्यक्ति के बॉडी में कई दिनों तक काम करती रही. परिवार की सहमति से ये रिसर्च हुई. कैसे बनाई गई ये किडनी? एंजाइम्स की जादुई कैंची ब्लड टाइप A, B या AB में किडनी की सतह पर शुगर मॉलिक्यूल्स (एंटीजेंस) लगे होते हैं, जो बॉडी को बताते हैं कि ये 'अपनी' है या 'विदेशी'. O टाइप में ये एंटीजेंस नहीं होते. वैज्ञानिकों ने स्पेशल एंजाइम्स (प्रोटीन) इस्तेमाल किए, जो A टाइप के एंटीजेंस को काट देते हैं. विथर्स इसे कार के रंग हटाने से तुलना करते हैं. कहते हैं कि जैसे लाल पेंट हटाकर न्यूट्रल प्राइमर दिखाना. एंटीजेंस हटते ही इम्यून सिस्टम किडनी को अपना समझ लेता है. ये एंजाइम्स पहले से पहचाने गए थे, लेकिन अब इन्हें किडनी पर सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया. रिसर्च नेचर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जर्नल में छपी है. टेस्ट कैसे हुआ? रिजल्ट्स क्या निकले? ब्रेन-डेड व्यक्ति के बॉडी में A टाइप किडनी ट्रांसप्लांट की गई. वो कई दिनों तक काम करती रही – ब्लड फिल्टर किया, वेस्ट हटाया. तीसरे दिन A टाइप के साइन थोड़े दिखे, जिससे हल्का इम्यून रिस्पॉन्स हुआ. लेकिन ये सामान्य से कम था. बॉडी किडनी को सहन करने की कोशिश कर रही थी. विथर्स कहते हैं कि ये बेसिक साइंस का मरीजों तक पहुंचना है. हमारी खोजें अब रियल वर्ल्ड में असर दिखा रही हैं. आगे की चुनौतियां: अभी लिविंग ह्यूमन्स में टेस्ट बाकी ये शुरुआत है. कई मुश्किलें बाकी हैं…     एंटीजेंस पूरी तरह न हटें, तो रिजेक्शन हो सकता है.     लंबे समय तक कैसे चलेगी? अभी सिर्फ कुछ दिन.     लिविंग पेशेंट्स पर ट्रायल कब? अभी दूर है. वैज्ञानिक दूसरे तरीके भी आजमा रहे हैं – जैसे पिग्स की किडनी इस्तेमाल करना या नई एंटीबॉडीज बनाना. लेकिन ये यूनिवर्सल किडनी वेटिंग टाइम कम करके लाखों जिंदगियां बचा सकती है. क्यों महत्वपूर्ण है ये ब्रेकथ्रू?  दुनिया भर में किडनी फेलियर बढ़ रहा है – डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर से. अमेरिका में 1 लाख से ज्यादा … Read more

टेम्पर्ड से लेकर नैनो ग्लास तक: कौनसा स्क्रीन प्रोटेक्टर देता है सबसे बेहतर सुरक्षा?

  नई दिल्ली  आजकल हर किसी के पास स्मार्टफोन है और उसे सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है। फोन गिरने से स्क्रीन पर खरोंच या टूटने का डर रहता है। स्क्रीन प्रोटेक्टर इस समस्या से बचाने में मदद करता है। लोग अलग-अलग रेंज में स्क्रीन प्रोटेक्टर लगवाते हैं, जिनकी कीमत भी अलग-अलग होती है। बाजार में कई तरह के स्क्रीन प्रोटेक्टर उपलब्ध हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ये स्क्रीन प्रोटेक्टर कैसे होते हैं और इनमें से कौनसा स्क्रीन प्रोटेक्टर बेस्ट है। टेम्पर्ड ग्लास टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर सबसे मजबूत होता है। यह फोन को गिरने और खरोंच से अच्छी तरह बचाता है। कुछ टेम्पर्ड ग्लास में खास फीचर्स भी होते हैं, जैसे कि ब्राइटनेस कम करने वाली तकनीक या प्राइवेसी तकनीक, जो दूसरों को आपकी स्क्रीन देखने से रोकती है। इसका नुकसान यह है कि यह थोड़ा मोटा होता है, जिससे फोन की स्क्रीन पर फर्क नजर आ सकता है। थर्मोप्लास्टिक पॉलीयूरेथेन (TPU) टीपीयू एक तरह का प्लास्टिक स्क्रीन प्रोटेक्टर है। यह छोटी-मोटी खरोंच और हल्की रगड़ से स्क्रीन को बचाता है। अगर आपकी चाबी से स्क्रीन पर हल्की खरोंच पड़ जाए, तो टीपीयू उसे समय के साथ ठीक कर सकता है। यह स्क्रीन को किनारे से किनारे तक कवर करता है, लेकिन इसका रंग थोड़ा फीका हो सकता है और यह छूने में बहुत चिकना नहीं होता। पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (PET) पीईटी प्लास्टिक से बने स्क्रीन प्रोटेक्टर हल्के और पतले होते हैं। इन्हें लगाने के बाद आपको शायद ही पता चले कि फोन पर कुछ लगा है। लेकिन ये ज्यादा सुरक्षा नहीं देते। अगर आपके फोन की स्क्रीन घुमावदार है, तो यह पूरे किनारे को कवर नहीं करता। ये सस्ते होते हैं, लेकिन सुरक्षा के मामले में कमजोर हैं। नैनो लिक्विड नैनो लिक्विड स्क्रीन प्रोटेक्टर खास तरह का लिक्विड होता है, जो स्क्रीन पर लगाया जाता है। यह सिलिकॉन डाइऑक्साइड से बना होता है और खरोंच व बैक्टीरिया से बचाता है। इसे किसी भी फोन पर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह ज्यादा सुरक्षा नहीं देता। इसे हटाना भी मुश्किल होता है, क्योंकि यह स्क्रीन पर सूख जाता है। कौनसा स्क्रीन प्रोटेक्टर सबसे अच्छा है? यह आपके बजट, फोन के मॉडल, और आपकी जरूरतों पर निर्भर करता है। अगर आप ज्यादा सुरक्षा चाहते हैं, तो टेम्पर्ड ग्लास सबसे अच्छा है। यह महंगा होता है, लेकिन खरोंच और टूटने से बचाने में सबसे बेहतर है। अगर आप सस्ता और हल्का ऑप्शन चाहते हैं, तो टीपीयू या पीईटी प्लास्टिक प्रोटेक्टर चुन सकते हैं, लेकिन ये कम सुरक्षा देते हैं।