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World Cup 2026 में इतिहास दोहराया गया, 68 साल बाद एक दिन के सभी मैच बेनतीजा रहे

लॉस एंजिल्स  फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पांचवें दिन का आखिरी मैच ईरान और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया. लॉस एंजिल्स स्टेडियम में ग्रुप G का ये रोमांचक मैच 2-2 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ. जिससे दोनों टीमों को एक-एक अंक शेयर करना पड़ा।  यह मैच न केवल मैदान पर रोमांचक खेल के लिए यादगार रहेगा, बल्कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पांचवें दिन खेले जाने वाले आखिरी मैच के तौर रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज करा दिया, क्योंकि वो दिन का चौथा ड्रा मैच था. जिसके साथ टूर्नामेंट के इतिहास में एक दिन में चार मैच ड्रॉ होने का अनोखा रिकॉर्ड बन गया।  ऐसा फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में केवल दूसरा बार हुआ है. इससे पहले ऐसी घटना 68 साल पहले 1958 में स्वीडन में हुए टूर्नामेंट में देखने को मिला था. जब 15 जून के दिन खेले गए चार मैच ड्रॉ पर समाप्त हुए थे. उन मैच का नतीजा नीचे देख सकते हैं।  फीफा वर्ल्ड कप 1958 (15 जून)     स्वीडन बनाम वेल्स (0-0)     इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया (2-2)     पराग्वे बनाम यूगोस्लाविया (3-3)     वेस्ट जर्मनी बनाम नॉर्दर्न आयरलैंड (2-2) 68 साल बाद फिर हुआ ऐसा अब 68 साल बाद दूसरी बार ऐसा हुआ है जब फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पांचवें दिन यानी कि 15 जून को खेले गए वर्ल्ड कप के चार मुकाबले बिना किसी विजेता के समाप्त हुए. दिन के पहले मैच में केप वर्डे ने स्पेन को बिना किसी गोल के ड्रॉ पर रोका. बेल्जियम और मिस्र का मैच 1-1 से ड्रॉ रहा, जबकि सऊदी अरब और उरुग्वे के बीच भी मुकाबला 1-1 से ड्रॉ रहा और दोनों ने अंक बांटे. दिन के आखिरी मैच में ईरान और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा।  फीफा वर्ल्ड कप 2026 (15 जून)     केप वर्डे बनाम स्पेन (0-0)     बेल्जियम बनाम मिस्र (1-1)     सऊदी अरब बनाम उरुग्वे (1-1)     ईरान बनाम न्यूजीलैंड (2-2)

48 टीमों के वर्ल्ड कप में भी भारत बाहर! जानिए भारतीय फुटबॉल आखिर कहां पिछड़ गया

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), कनाडा और मेक्सिको की सह-मेजबानी में खेला जा रहा है. दुनिया के 48 देश फुटबॉल के इस महाकुंभ में शिरकत कर रहे हैं, मगर अपना भारत वर्ल्ड कप से एक बार फिर गायब है. जब भी फीफा वर्ल्ड कप का आगाज होता है, तो भारत के करोड़ों प्रशंसक उस जुनून से इस टूर्नामेंट को देखते हैं, मानो उनका देश भी इसमें भाग ले रहा हो. सोशल मीडिया पर बहस होती है, घरों में पसंदीदा टीमों के लिए जश्न मनाया जाता है और पूरा देश फुटबॉल के रंग में रंग जाता है. कोई लियोनेल मेसी की टीम को चीयर करता नजर आता है, तो कोई रोनाल्डो के देश पुर्तगाल का समर्थक होता है. लेकिन इस उत्साह के बीच एक सवाल हर बार सामने आ खड़ा होता है- आखिर सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? यह सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि भारत का फुटबॉल से रिश्ता नया नहीं है. देश में लाखों बच्चे फुटबॉल खेलते हैं, करोड़ों लोग इसे देखते हैं और कई राज्यों में यह खेल क्रिकेट जितना ही लोकप्रिय है. इसके बावजूद भारतीय टीम आज तक विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच तक नहीं पहुंच सकी. फीफा के सदस्य देशों की संख्या 211 है, जिसमें भारत भी शामिल है. आपको जानकर ये दुख होगा कि भारत फिलहाल फीफा रैंकिंग में 138वें स्थान पर हैं. केप वर्डे और कुराकाओ जैसे छोटे देश भी फीफा वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं. भारत फीफा वर्ल्ड कप तो कभी खेल नहीं पाया, एशिया में भी उसकी स्थिति अच्छी नहीं हैं. भारतीय टीम अगले साल होने वाले एएफसी एशियन कप के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर सकी, जो किसी शर्मिंदगी से कम नहीं है. वैसे भारत फीफा वर्ल्ड कप खेलने के सबसे करीब 1950 में पहुंचा था. ब्राजील में आयोजित उस वर्ल्ड कप के लिए भारत ने बिना कोई क्वालफाइंग मैच खेले ही क्वालिफाई कर लिया था. एशियाई क्वालिफाइंग ग्रुप की टीमें- बर्मा (अब म्यांमार), इंडोनेशिया और फिलीपींस प्रतियोगिता से हट गई थीं, जिससे भारत को तब डायरेक्ट एंट्री मिल गई. स्वीडन, इटली और पराग्वे जैसी टीमों के साथ भारत को ग्रुप में रखा गया था, लेकिन टीम ब्राजील पहुंच ही नहीं सकी. लंबे समय तक यह कहानी सुनाई जाती रही कि फीफा ने भारतीय खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने की अनुमति नहीं दी, इसलिए टीम ने टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया. हालांकि पूरा सच यह नहीं था. असल वजह आर्थिक और प्रशासनिक थी. आजादी के बाद देश संसाधनों की कमी से जूझ रहा था. टीम को ब्राजील भेजने में काफी ज्यादा खर्च लगता और पर्याप्त तैयारी का समय भी नहीं था. साथ ही उस समय अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ओलंपिक को वर्ल्ड कप से ज्यादा महत्वपूर्ण मानता था. नतीजा यह हुआ कि भारत ने सबसे बड़ा मौका गंवा दिया. 1950 के बाद भारत ने कई बार फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर में हिस्सा लिया, लेकिन कभी भी अंतिम स्टेज तक नहीं पहुंच सका. कई बार टीम ने उम्मीद जगाई, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में अनुभव और गुणवत्ता की कमी साफ नजर आई. बाइचुंग भूटिया, सुनील छेत्री जैसे खिलाड़ियों ने 21वीं सदी में भारतीय फुटबॉल को नई पहचान दी. टीम ने एशियाई स्तर पर कुछ अच्छी जीतें भी दर्ज कीं, लेकिन जापान, साउथ कोरिया, ईरान, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों से भारत अब भी काफी पीछे है. एक समय भारतीय टीम कम से कम एशिया में तो अपना दबदबा बनाने में जरूर सफल रही थी. 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स ने भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को 2-1 के अंतर से हराकर गोल्ड मेडल जीता था. चुन्नी गोस्वामी, पीके बनर्जी और तुलसीदास बलराम की तिकड़ी की वजह से ही भारतीय टीम ने ये ऐतिहासिक सफलता अर्जित की थी. फिर बैंकॉक में आयोजित 1970 के एशियाई खेलों में भारतीय फुटबॉल टीम ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रही. इसके बाद से जो भारतीय फुटबॉल में गिरावट आनी शुरू हुई, वो अब तक जारी है. क्या क्रिकेट जिम्मेदार है? भारत के फुटबॉल वर्ल्ड कप से दूर रहने की बड़ी वजह क्रिकेट को माना जाता है, लेकिन पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा जटिल है. यह सच है कि क्रिकेट भारतीय स्पोर्ट्स पर लगभग एकाधिकार रखता है. पैसा, प्रायोजक, मीडिया कवरेज और लोकप्रियता- सब कुछ क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूमता है. ऐसे में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी फुटबॉल की बजाय क्रिकेट चुन लेते हैं. लेकिन सिर्फ क्रिकेट को दोष देना भी गलत होगा. जापान, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया जैसे देशों में दूसरे खेल भी लोकप्रिय हैं, फिर भी उन्होंने मजबूत फुटबॉल संस्कृति विकसित की है. ऑस्ट्रेलिया तो क्रिकेट में भी हमेशा से एक मजबूत शक्ति रहा है. असली फर्क योजनाओं, निवेश और दीर्घकालिक सोच का है. भारतीय फुटबॉल लंबे समय से प्रशासनिक विवादों से भी जूझता रहा है. एआईएफएफ में नेतृत्व परिवर्तन, कानूनी विवाद और नीतिगत अस्थिरता के कारण कई योजनाएं अधूरी रह गईं. यहां तक इंडियन सुपर लीग (ISL) का 12वां सीजन किसी तरह इस बार आयोजित करवाया जा सका. आखिर कहां पिछड़ गया भारत? भारतीय फुटबॉल में सबसे बड़ी समस्या प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि सिस्टम की कमी है. दुनिया की सफल फुटबॉल टीमें खिलाड़ियों को 8-10 साल की उम्र से तैयार करना शुरू कर देती हैं. उनके पास मजबूत स्कूल लीग, स्थानीय टूर्नामेंट, हजारों कोच और आधुनिक एकेडमी होती हैं. बच्चे हर साल दर्जनों प्रतिस्पर्धी मैच खेलते हैं और धीरे-धीरे प्रोफेशनल लेवल तक पहुंचते हैं. भारत में यह ढांचा अभी भी कमजोर है. कई राज्यों में बच्चों को नियमित रूप से प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका तक नहीं मिलता. कोचिंग की कमी, कमजोर स्काउटिंग सिस्टम और सीमित सुविधाएं भी बड़ी बाधाएं हैं. बिना स्थिर और पेशेवर प्रशासन के किसी भी देश के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना मुश्किल है. वैसे उम्मीद की किरण अभी भी बाकी है. 2026 से फीफा वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई. इससे एशियाई देशों के लिए अधिक स्लॉट उपलब्ध हुए हैं. सैद्धांतिक रूप से भारत की संभावनाएं पहले से बेहतर हुई हैं, लेकिन सिर्फ अतिरिक्त स्थान मिल जाने से बात नहीं बनेगी. भारत को स्कूल स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना होगा, हजारों नए कोच तैयार … Read more

दांबुला में हाई-वोल्टेज ड्रामा: सुपर ओवर में भारत-ए की हार, फिर मैदान पर हुआ विवाद

दांबुला इंडिया-ए को ट्राई सीरीज में श्रीलंका-ए के हाथों सुपर ओवर में हार का सामना करना पड़ा. सोमवार (15 जून) को दांबुला के दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में हुए मुकाबले में श्रीलंका-ए ने सुपर ओवर में 16 रन बनाए थे. जवाब में इंडिया-ए 10 रन ही बना सका. इंडिया-ए की ओर से सुपर ओवर में सूर्यांश शेडगे और वैभव सूर्यवंशी बैटिंग करने उतरे थे, लेकिन दोनों मैच फिनिश नहीं कर पाए. श्रीलंका-ए की इंडिया-ए पर जीत के बाद मैदान पर बखेड़ा हो गया. श्रीलंका के खिलाड़ी जश्न मनाने लगे और यहीं से सब कुछ गड़बड़ होने लगा. वैभव सूर्यवंशी किसी बात से नाराज हो गए और उनका एक श्रीलंकाई फील्डर से झगड़ा हो जाता है. शेडगे अपने साथी 'बेबी बॉस' को वापस खींच लाते हैं, लेकिन 15 साल के वैभव मैदान छोड़ने के मूड में नहीं लगे. दोनों टीमें गर्मजोशी से हाथ मिलाती हैं और यहीं मैच खत्म हो जाता है. बता दें कि कुगाथास मथुलन ने श्रीलंका की ओर से सुपर ओवर में गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभाली थी. सुपर ओवर में पहली गेंद पर सूर्यांश शेडगे ने दो रन लिए. जबकि दूसरी बॉल डॉट रही. इसके बाद तीसरी गेंद पर एक रन बना. अब स्ट्राइक पर वैभव सूर्यवंशी थे. वैभव चौथी बॉल पर सिर्फ 2 रन बना सके और प्रेशर पूरी तरह इंडिया-ए पर आ गया. फिर पांचवीं गेंद पर उन्होंने चौका लगाया और आखिरी गेंद पर कोई रन नहीं बना. मुकाबले में इंडिया-ए ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 49.2 ओवरों में 265 रन बनाए थे. इंडिया-ए के लिए सूर्यांश शेडगे ने 72 और विप्रज निगम ने 51 रनों का योगदान दिया. वैभव सूर्यवंशी कुछ खास नहीं कर पाए और 21 रन बनाकर पवेलियन लौटे. श्रीलंका-ए की ओर से विजयकांत व्यासकांत और मोहम्मद शिराज ने तीन-तीन विकेट झटके. जवाब में श्रीलंका-ए ने निर्धारित 50 ओवरों में 9 विकेट पर 265 रन बनाए और मुकाबला सुपर ओवर में चला गया. श्रीलंका की ओर से सदीरा समरविक्रमा ने शानदार 93 रन बनाए, लेकिन आखिरी ओवर में उनका आउट होना मेजबान टीम को मुश्किल में डाल गया. श्रीलंका की पारी का आखिरी ओवर अरशद खान ने फेंका, जिसमें उन्होंने केवल 4 रन खर्च किए.  

वनडे टीम चयन का काउंटडाउन शुरू, इंग्लैंड दौरे से पहले विराट-हार्दिक को लेकर बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली इंग्लैंड के दौरे पर जुलाई में खेली जाने वाली 3 मैचों की वनडे इंटरनेशनल सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान इसी सप्ताह होने की उम्मीद है। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के अलावा दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली और ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या पर निगाहें रहेंगी। विराट और हार्दिक चोट के कारण अफगानिस्तान के खिलाफ जारी तीन मैचों की वनडे सीरीज से बाहर हैं, जबकि रोहित शर्मा फॉर्म में नहीं हैं। पहले मैच में भी कलाई में चोट लगने के बाद वे थोड़े से असहज नजर आए थे। अगर रोहित पर बोर्ड और सिलेक्टर सख्त होते हैं को उनका अगला विश्व कप खेलने का सपना टूट सकता है। हालांकि, इस बात की संभावना बहुत कम है। टीम इंडिया का चुनाव करते समय सिलेक्टर्स विराट कोहली और हार्दिक पांड्या की फिटनेस रिपोर्ट को भी देखेंगे। विराट कोहली मांसपेशियों में खिंचाव के कारण इस अफगानिस्तान सीरीज का हिस्सा नहीं है, जबकि हार्दिक पांड्या भी चोट की वजह से वनडे सीरीज से बाहर हैं। हार्दिक पांड्या फिट हो गए थे, लेकिन आखिरी की कुछ ड्रिल्स और ट्रेनिंग के दौरान उनके पैर में चोट लगी और वे कुछ सप्ताह के लिए फिर से क्रिकेट ऐक्शन से दूर चले गए। वे अभी भी बेंगलुरु स्थिति बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हैं। सिलेक्टर्स चाहेंगे कि हार्दिक पांड्या और विराट कोहली फिट हो जाएं, ताकि एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन मैनेजमेंट वर्ल्ड कप 2027 के लिए तलाश सके। नंबर 3 पर विराट कोहली की जगह अफगानिस्तान सीरीज में ईशान किशन खेल रहे हैं, जबकि हार्दिक की जगह पर नीतीश कुमार रेड्डी को मौका दिया जा रहा है। हार्दिक पांड्या के लाइक टू लाइक रिप्लेसमेंट इस वक्त रेड्डी ही नजर आते हैं। सिलेक्टर्स चाहेंगे कि हार्दिक को फॉर्म में लौटने और वनडे क्रिकेट से तालमेल बिठाने के लिए पर्याप्त मौके मिल जाएं। नीतीश को भी तैयार किया जा रहा है। रोहित की फॉर्म चिंता का कारण वहीं, अगर बात रोहित शर्मा की करें तो वे फॉर्म में नहीं हैं, जो चिंता का विषय है। सिलेक्टर्स और बोर्ड की ओर से पहले ही ऐसी रिपोर्ट्स आ चुकी हैं कि उन्हें सीरीज दर सीरीज देखा जाएगा। पिछली सीरीज भी उनकी अच्छी नहीं थी, जबकि आईपीएल 2026 भी अच्छा नहीं रहा था। अब अफगानिस्तान के खिलाफ पहला वनडे मैच में उनसे रन नहीं बने। वे रन आउट होने से पहले रनों के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। हालांकि, अभी इस सीरीज के दो मुकाबले बाकी हैं, जिनमें रन बनाकर वह खुद की पोजिशन को मजबूत कर सकते हैं। वे प्रूवन मैच विनर हैं।

265 रन के लक्ष्य और सुपर ओवर के रोमांच के बीच श्रीलंका-ए ने इंडिया-ए को बेहद करीबी मुकाबले में हराया

 दांबुला इंडिया-ए और श्रीलंका-ए की टीम्स ट्राई सीरीज के चौथे मुकाबले में आमने-सामने हुईं. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला दांबुला के रणगिरि दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला गया. यह मुकाबला सुपर ओवर में चला गया, जहां श्रीलंका-ए ने जीत हासिल की. मुकाबले में भारतीय टीम ने श्रीलंका-ए को जीत के लिए 265 रनों का टारगेट दिया था, जिसका पीछा करते हुए वो 9 विकेट पर 264 रन ही बना सकी. सुपर ओवर में श्रीलंका-ए ने 17 रन बनाए थे. ऐसे में इंडिया-ए को जीत के लिए 17 रन चाहिए थे, लेकिन वो गेम फिनिश नहीं कर सका. सुपर ओवर में भारत 10 रन ही बना सका. सूर्यांश शेडगे और वैभव सूर्यवंशी भारत को जीत नहीं दिला पाए. इंडिया-ए ने अपने पहले मुकाबले में श्रीलंका-ए को 8 रनों से पराजित किया था. फिर उसे अफगानिस्तान-ए के खिलाफ बारिश से बाधित मुकाबले में डीएलएस नियम के तहत 4 रनों से हार मिली थी. अब श्रीलंका-ए से हार के बाद इंडिया-ए की फाइनल की राह मुश्किल हो गई है. रनचेज में निरोशन डिकवेला और अविष्का फर्नांडो ने श्रीलंका-ए को अच्छी शुरुआत दिलाई. भारत को पहली सफलता अविष्का फर्नांडो (22 रन) के रूप में मिली, जिन्हें निशांत सिंधु ने आउट किया. फिर विशेन हलंबगे (17 रन) को आयुष बदोनी ने एलबीडब्ल्यू आउट किया. डिकवेला (37 रन) अच्छी बैटिंग कर रहे थे, लेकिन वो विप्रज निगम की फिरकी में फंस गए. सहान अराचिगे (8 रन) और अहान विक्रमसिंघे (6 रन) भी कुछ खास नहीं कर पाए. देखते ही देखते श्रीलंका-ए का स्कोर 143/5 हो गया. इस मुश्किल परिस्थिति में सदीरा समरविक्रमा और वानुजा सहान ने टीम को संभाला. दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 51 रनों की साझेदारी हुई. आयुष बदोनी ने सहान (25 रन) को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा. वानुजा के आउट होने के बाद सदीरा ने विजयकांत व्यासकांत के साथ मिलकर सातवें विकेट के लिए महत्वपूर्ण 35 रन जोड़े. विजयकांत व्यासकांत (18 रन) को अनुकूल रॉय ने अपनी फिरकी में फंसाया. यहां से सदीरा समरविक्रमा और चमिका गुणसेकरा ने 32 रन जोड़कर श्रीलंका-ए की उम्मीद बनाए रखीं. आखिरी ओवर में श्रीलंका को जीत के लिए 5 रन बनाने थे. उस ओवर में अरशद खान ने सदीरा समरविक्रमा (93 रन) को बोल्ड कर दिया, जिसने मैच को पूरी तरह खोल कर रख दिया. आखिरी बॉल पर श्रीलंकाई टीम को दो रन चाहिए थे, लेकिन गुणसेकरा दूसरा रन पूरा करते समय रन आउट हो गए. ऐसी रही है इंडिया-ए की बल्लेबाजी टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए इंडिया-ए ने 49.2 ओवरों में 265 रन बनाए. वैभव सूर्यवंशी और प्रभसिमरन सिंह ने इंडिया-ए की पारी का आगाज किया. लेकिन वैभव 14 गेंदों में 21 रन बनाकर आउट हो गए. 29 रन पर पहला विकेट गिरा. वैभव ने 3 चौके के अलावा एक छक्का जड़ा. 150 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए वह आक्रामक अंदाज में नजर आए, लेकिन अंततः कैच आउट होकर पवेलियन लौट गए. वैभव ने चौथे ओवर की पांचवीं गेंद पर आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश में विकेट गंवा दिया. गेंद की लेंथ सही नहीं थी और उसमें टर्न व डिप था, जिसके चलते उन्होंने गेंद को पॉइंट की ओर काट दिया. शानदार कैच के साथ उनकी पारी 14 गेंदों में 21 रन (3 चौके, 1 छक्का) पर खत्म हुई. सहान अराचिगे की गेंद पर वानुजा सहान ने उनका कैच लपका. प्रभसिमरन सिंह भी लंबी पारी नहीं खेल पाए. वह 11 रन (13 गेंद) बनाकर आउट हुए. 7वें ओवर की दूसरी गेंद पर इंडिया-ए को 39 रनों पर दूसरा झटका लगा. मोहम्मद शिराज की स्लोअर गेंद पर वह शॉट खेलने गए, लेकिन टाइमिंग पूरी तरह चूक गए और गेंद मिड-ऑफ पर कैच हो गई. वानुजा सहान ने शानदार कैच लपका. उनकी पारी में 2 चौके शामिल रहे, लेकिन धीमी गेंद को ठीक से ना खेल पाने के कारण वह जल्दी पवेलियन लौट गए. कप्तान तिलक वर्मा इस मैच में कुछ खास नहीं कर पाए और 23 रनों के निजी स्कोर पर कुगाथास मथुलन का शिकार बने. ऋतुराज गायकवाड़ इस मैच में भी बड़ी पारी खेलने की ओर अग्रसर थे, लेकिन स्पिनर विजयकांत व्यासकांत ने उन्हें पवेलियन रवाना कर दिया. ऋतुराज ने 3 चौके की मदद से 42 बॉल पर 37 रन बनाए. ऋतुराज जब आउट हुए, तब स्कोर 111/4 था. आयुष बदोनी (15 रन) और निशांत सिंधु (6 रन) भी बल्ले से कुछ ज्यादा योगदान नहीं दे सके, जिससे भारतीय टीम मुश्किल में आ गई. ऑलराउंडर अनुकूल रॉय ने भी निराश किया और सिर्फ 8 रन बना सके. यहां से सूर्यांश शेडगे और विप्रज निगम ने आठवें विकेट के लिए 104 रनों की साझेदारी कर भारतीय टीम को अच्छे स्कोर तक पहुंचाया. विप्रज निगम ने 6 चौके की मदद से 49 बॉल पर 51 रन बनाए. वहीं सूर्यांश शेडगे ने 3 चौके और दो छक्के की मदद से 66 बॉल पर 72 रनों का योगदान दिया. श्रीलंका-ए की ओर से विजयकांत व्यासकांत और मोहम्मद शिराज ने तीन-तीन विकेट झटके. इंडिया-ए की प्लेइंग इलेवन: वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), निशांत सिंधु, ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा (कप्तान), आयुष बदोनी, सूर्यांश शेडगे, अरशद खान, विप्रज निगम, अनुकूल रॉय और यश ठाकुर श्रीलंका-ए की प्लेइंग इलेवन: निरोशन डिकवेला (विकेटकीपर), अविष्का फर्नांडो, अहान विक्रमसिंघे, सदीरा समरविक्रमा, सहान अराचिगे (कप्तान), वानुजा सहान, विजयकांत व्यासकांत, विशेन हलंबगे, कुगाथास मथुलन, चमिका गुणसेकरा और मोहम्मद शिराज. ट्राई सीरीज का पूरा शेड्यूल • 09 जून: इंडिया-ए की श्रीलंका-ए पर 8 रनों से जीत • 11 जून: अफगानिस्तान-ए ने इंडिया-ए को 4 रनों से हराया (DLS) • 13 जून: श्रीलंका-ए ने अफगानिस्तान-ए को 8 विकेट से हराया (DLS) • 15 जून: इंडिया-ए vs श्रीलंका-ए • 17 जून: इंडिया-ए vs अफगानिस्तान-ए • 19 जून: अफगानिस्तान-ए vs श्रीलंका-ए • 21-जून: फाइनल

15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने IPL में मचाया धमाल, मेहनत और त्याग से बने भारत के नए क्रिकेट सनसनी

नई दिल्ली आईपीएल के पिछले दो सीजन में अपनी आतिशी और खौफनाक बल्लेबाजी से पूरी दुनिया को हैरान करने वाले 15 साल के वैभव सूर्यवंशी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए 237 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से 776 रन कूटकर ऑरेंज कैप जीतने वाले वैभव को उनके इसी प्रदर्शन के दम पर भारतीय सीनियर टीम के इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के लिए टी20 टीम में शामिल किया गया है। हर कोई वैभव के इस गगनचुंबी बैट स्विंग और पावर-हिटिंग का कायल है, लेकिन वर्ल्ड क्रिकेट के इस सबसे रोमांचक बल्लेबाज को गढ़ने के पीछे 6 साल की मेहनत छिपी है। रोज़ाना 100 ओवर खेलते थे वैभव, थक जाते थे गेंदबाज वैभव के बचपन के कोच मनीष ओझा ने PTI को दिए एक इंटरव्यू में वैभव के बचपन, उसकी ट्रेनिंग और उसके माता-पिता के संघर्ष को लेकर कई चौंकाने वाले और दिलचस्प खुलासे किए हैं। जब वैभव ने टेनिस क्रिकेट से लेदर बॉल क्रिकेट की तरफ रुख किया, तब वह महज 10 साल के थे। कोच मनीष ओझा ने बताया कि पटना में उनकी एकेडमी में वैभव की ट्रेनिंग सुबह 7:30 बजे शुरू होती थी और दोपहर 4:00 बजे तक लगातार चलती थी। इस दौरान वह बिना थके रोजाना कम से कम 600 गेंदों का सामना करते थे। कोच ने इस कड़े रूटीन का पूरा ब्रेक-अप बताते हुए कहा, 'शुरुआत की 200 से 300 गेंदें मैं खुद अकेले उसे थ्रोडाउन देता था। जब मैं थक जाता था, तो हमारा सपोर्ट स्टाफ यह जिम्मा संभालता था। उनके थकने के बाद एकेडमी के नियमित गेंदबाज वैभव को गेंदबाजी करते थे। जब गेंदबाज भी पूरी तरह थक जाते थे, तो हम बच्चों के 2-3 ग्रुप बनाकर उन्हें टास्क देते थे। इसके अलावा वैभव बॉलिंग मशीन का भी सामना करता था। इसी लगातार रिपिटिटिव ट्रेनिंग ने वैभव के भीतर वो मसल मेमोरी पैदा की है, जिससे आज गेंद सीधे बाउंड्री पार जाती है।" समस्तीपुर से पटना का सफर और मां का वो बड़ा त्याग वैभव सूर्यवंशी का घर समस्तीपुर में था, जहां से पटना स्थित एकेडमी की दूरी एक तरफ से ढाई घंटे की थी। वैभव के पिता संजीव जी और मां आरती जी ने अपने बेटे को चैंपियन बनाने के लिए जो त्याग किए, उसकी कहानी बेहद भावुक करने वाली है। कोच मनीष ओझा ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया, 'वैभव की मां आरती जी रोज तड़के 2:00 या 2:30 बजे उठ जाती थीं। वह सिर्फ वैभव, उसके पिता या ड्राइवर के लिए ही नहीं, बल्कि समस्तीपुर से साथ आने वाले गेंदबाजों और हमारी एकेडमी के नेट बॉलर्स के लिए भी खाना बनाती थीं। वह रोज 10-15 लोगों का लंच तैयार करती थीं। जो बच्चे घर से खाना नहीं ला पाते थे या जो गेंदबाज थक जाते थे, वे सब वैभव का खाना शेयर करते थे। रोज सुबह उठकर इतने लोगों का खाना बनाना एक मां का वो योगदान है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।' सुबह 5:00 बजे ही वैभव और उनके पिता समस्तीपुर से गाड़ी चलाकर पटना के लिए निकल जाते थे ताकि सुबह साढ़े सात बजे तक हर हाल में नेट्स पर पहुंच सकें। पूरे देश के माता-पिता के लिए रोल मॉडल बने वैभव वैभव सूर्यवंशी की इस राइज ने देश के खेल जगत में एक नई क्रांति ला दी है। कोच ओझा ने बताया कि वैभव का ग्राफ देखने के बाद अब पेरेंट्स में अपने बच्चों को क्रिकेटर बनाने का एक नया जुनून सवार हो गया है। कोच ने हंसते हुए कहा, 'आप 9-10 साल के बच्चों की बात कर रहे हैं, आज की तारीख में माता-पिता अपने 5-5 साल के बच्चों को उंगली पकड़कर हमारी एकेडमी ला रहे हैं ताकि वे अपने बच्चों को अगला वैभव बना सकें। वैभव आज पूरे भारत के बच्चों के लिए एक प्रेरणा और माता-पिता के लिए रोल मॉडल बन चुका है।'

टेबल टेनिस फेडरेशन का विवादित फैसला: खिलाड़ियों से ट्रायल और यात्रा का खर्च मांग

कराची  पाकिस्तान के शीर्ष पुरुष और महिला टेबल टेनिस खिलाड़ियों को उस समय बड़ा झटका लगा जब पाकिस्तान टेबल टेनिस फेडरेशन (पीटीटीएफ) ने उनसे कहा कि इस वर्ष जापान में होने वाले एशियाई खेलों में अगर वे भाग लेना चाहते हैं तो उन्हें अपनी यात्रा और अन्य खर्च स्वयं वहन करने होंगे। लाहौर में ट्रॉयल्‍स लाहौर में जारी दो दिवसीय राष्ट्रीय ट्रॉयल्स के दौरान जब कुछ खिलाड़ियों ने अपने दैनिक भत्ते और यात्रा भत्ते को लेकर महासंघ के अधिकारियों से जानकारी मांगी तब इस बारे में पता चला। एक खिलाड़ी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि हमें बताया गया है कि ट्रॉयल्स में हिस्सा लेने के लिए कोई भुगतान नहीं मिलेगा। अनुदान नहीं मिला है इसके अलावा, एशियाई खेलों के लिए चयनित खिलाड़ियों को अपने हवाई टिकट और खर्च के लिए प्रतिदिन 50 डॉलर की विदेशी मुद्रा स्वयं व्यवस्था करनी होगी। खिलाड़ी ने कहा कि जब खिलाड़ियों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई तो पीटीटीएफ एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्हें खुश होना चाहिए कि ट्रॉयल का आयोजन हो रहा है क्योंकि महासंघ को पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड (पीएसबी) से कोई कोष या अनुदान नहीं मिला है। कोई पदक नहीं जीता इस खिलाडी ने कहा कि हमें बताया गया कि एशियाई खेलों के लिए भी पीटीटीएफ को पीएसबी से कोई अनुदान नहीं मिलता है। यह खेलों के विकास के लिए चिंताजनक स्थिति है। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने अब तक एशियाई खेलों या एशियाई चैंपियनशिप में टेबल टेनिस में कोई पदक नहीं जीता है। इसका कारण मलेशिया, चीन, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे मजबूत देशों का दबदबा माना जाता है।  

दांबुला में रोमांचक मुकाबला: इंडिया-ए ने बनाए 265 रन, मध्यक्रम हुआ फ्लॉप लेकिन अंत में दमदार फिनिश

  दांबुला इंडिया-ए और श्रीलंका-ए की टीम्स ट्राई सीरीज के चौथे मुकाबले में आमने-सामने हैं. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला दांबुला के रणगिरि दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में है. मुकाबले में इंडिया-ए ने श्रीलंका-ए को जीत के लिए 266 रनों का टारगेट दिया है. इंडिया-ए के लिए विप्रज निगम ने 51 और सूर्यांश शेडगे ने 72 रन बनाए. इंडिया-ए ने अपने पहले मुकाबले में श्रीलंका-ए को 8 रनों से पराजित किया था. फिर उसे अफगानिस्तान-ए के खिलाफ बारिश से बाधित मुकाबले में डीएलएस नियम के तहत 4 रनों से हार मिली थी. अब इंडिया-ए के लिए ये मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण है. इंडिया-ए vs श्रीलंका-ए मैच से जुड़े अपडेट्स के लिए हमारे साथ बने रहिए… ऐसी रही है इंडिया-ए की बल्लेबाजी टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए इंडिया-ए ने 49.2 ओवरों में 265 रन बनाए. वैभव सूर्यवंशी और प्रभसिमरन सिंह ने इंडिया-ए की पारी का आगाज किया. लेकिन वैभव 14 गेंदों में 21 रन बनाकर आउट हो गए. 29 रन पर पहला विकेट गिरा. वैभव ने 3 चौके के अलावा एक छक्का जड़ा. 150 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए वह आक्रामक अंदाज में नजर आए, लेकिन अंततः कैच आउट होकर पवेलियन लौट गए. वैभव ने चौथे ओवर की पांचवीं गेंद पर आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश में विकेट गंवा दिया. गेंद की लेंथ सही नहीं थी और उसमें टर्न व डिप था, जिसके चलते उन्होंने गेंद को पॉइंट की ओर काट दिया. शानदार कैच के साथ उनकी पारी 14 गेंदों में 21 रन (3 चौके, 1 छक्का) पर खत्म हुई. सहान अराचिगे की गेंद पर वानुजा सहान ने उनका कैच लपका.   प्रभसिमरन सिंह भी लंबी पारी नहीं खेल पाए. वह 11 रन (13 गेंद) बनाकर आउट हुए. 7वें ओवर की दूसरी गेंद पर इंडिया-ए को 39 रनों पर दूसरा झटका लगा. मोहम्मद शिराज की स्लोअर गेंद पर वह शॉट खेलने गए, लेकिन टाइमिंग पूरी तरह चूक गए और गेंद मिड-ऑफ पर कैच हो गई. वानुजा सहान ने शानदार कैच लपका. उनकी पारी में 2 चौके शामिल रहे, लेकिन धीमी गेंद को ठीक से ना खेल पाने के कारण वह जल्दी पवेलियन लौट गए. कप्तान तिलक वर्मा इस मैच में कुछ खास नहीं कर पाए और 23 रनों के निजी स्कोर पर कुगाथास मथुलन का शिकार बने. ऋतुराज गायकवाड़ इस मैच में भी बड़ी पारी खेलने की ओर अग्रसर थे, लेकिन स्पिनर विजयकांत व्यासकांत ने उन्हें पवेलियन रवाना कर दिया. ऋतुराज ने 3 चौके की मदद से 42 बॉल पर 37 रन बनाए. ऋतुराज जब आउट हुए, तब स्कोर 111/4 था. आयुष बदोनी (15 रन) और निशांत सिंधु (6 रन) भी कुछ खास नहीं कर पाए, जिससे भारतीय टीम मुश्किल में आ गई. ऑलराउंडर अनुकूल रॉय ने भी निराश किया और सिर्फ 8 रन बना सके. यहां से सूर्यांश शेडगे और विप्रज निगम ने आठवें विकेट के लिए 104 रनों की साझेदारी कर भारतीय टीम को अच्छे स्कोर तक पहुंचाया. विप्रज निगम ने 6 चौके की मदद से 49 बॉल पर 51 रन बनाए. वहीं सूर्यांश शेडगे ने 3 चौके और दो छक्के की मदद से 66 बॉल पर 72 रनों का योगदान दिया. श्रीलंका-ए की ओर से विजयकांत व्यासकांत और मोहम्मद शिराज ने तीन-तीन विकेट झटके. इंडिया-ए की प्लेइंग इलेवन: वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), निशांत सिंधु, ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा (कप्तान), आयुष बदोनी, सूर्यांश शेडगे, अरशद खान, विप्रज निगम, अनुकूल रॉय और यश ठाकुर श्रीलंका-ए की प्लेइंग इलेवन: निरोशन डिकवेला (विकेटकीपर), अविष्का फर्नांडो, अहान विक्रमसिंघे, सदीरा समरविक्रमा, सहान अराचिगे (कप्तान), वानुजा सहान, विजयकांत व्यासकांत, विशेन हलंबगे, कुगाथास मथुलन, चमिका गुणसेकरा और मोहम्मद शिराज. ट्राई सीरीज का पूरा शेड्यूल • 09 जून: इंडिया-ए की श्रीलंका-ए पर 8 रनों से जीत • 11 जून: अफगानिस्तान-ए ने इंडिया-ए को 4 रनों से हराया (DLS) • 13 जून: श्रीलंका-ए ने अफगानिस्तान-ए को 8 विकेट से हराया (DLS) • 15 जून: इंडिया-ए vs श्रीलंका-ए • 17 जून: इंडिया-ए vs अफगानिस्तान-ए • 19 जून: अफगानिस्तान-ए vs श्रीलंका-ए • 21-जून: फाइनल

नेमार बाहर, ब्राजील की ओपनिंग मैच में मोरक्को से कड़ी टक्कर

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच नॉर्थ अमेरिका में लगातार जारी है। शनिवार को टूर्नामेंट में चार ग्रुप-स्टेज मुकाबले खेले जाने हैं, लेकिन सबकी निगाहें जिस महामुकाबले पर टिकी हैं, वह है ब्राजील बनाम मोरक्को। इसके अलावा आज कतर का मुकाबला स्विट्जरलैंड से, हैती का स्कॉटलैंड से और ऑस्ट्रेलिया की भिड़ंत तुर्की से होगी। छठे वर्ल्ड कप खिताब की तलाश में जुटी ब्राजील की टीम के लिए टूर्नामेंट का पहला ही मैच काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है, क्योंकि मोरक्को की टीम उन्हें कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है। नेमार पहले मैच से बाहर, कोच कार्लो एंसेलोटी ने की पुष्टि मैच से ठीक पहले ब्राजील के फैंस के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। टीम के स्टार फॉरवर्ड और पूर्व कप्तान नेमार मोरक्को के खिलाफ इस ओपनिंग मैच में नहीं खेल पाएंगे। ब्राजील के हेड कोच कार्लो एंसेलोटी ने शनिवार को इस खबर की पुष्टि की। टूर्नामेंट की शुरुआत से ठीक पहले नेमार के पैर की पिंडली में चोट लग गई थी, जिसके कारण वह इस मैच से बाहर हो गए हैं। कोच एंसेलोटी ने कहा, 'नेमार जल्द से जल्द फिट होने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि वह अगले हफ्ते से फुल ट्रेनिंग में लौट आएंगे।' ब्राजील को अपना अगला मैच 19 जून को हैती से और 24 जून को स्कॉटलैंड से खेलना है, और कोच को भरोसा है कि नेमार इन दोनों मैचों के लिए उपलब्ध रहेंगे। रैंकिंग में टॉप-10 की एकमात्र जंग यह ग्रुप-स्टेज का एकमात्र ऐसा मुकाबला है जहां फीफा वर्ल्ड रैंकिंग की टॉप-10 में शामिल दो टीमें आपस में भिड़ रही हैं। फिलहाल ब्राजील दुनिया में छठे और मोरक्को आठवें स्थान पर काबिज है। वर्ल्ड कप इतिहास में दोनों टीमें सिर्फ एक बार 1998 में आपस में भिड़ी थीं, जहां ब्राजील ने 3-0 से जीत दर्ज की थी। हालांकि, साल 2023 में खेले गए एक दोस्ताना मैच में मोरक्को ने ब्राजील को 2-1 से हराकर उस हार का बदला ले लिया था। मुकाबला 50-50 का है मोरक्को के कप्तान अशरफ हकीमी से जब पूछा गया कि क्या उनकी टीम इस मैच में अंडरडॉग के रूप में उतरेगी, तो उन्होंने इस बात को पूरी तरह खारिज कर दिया। हकीमी ने कहा, 'वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट के ऐसे बड़े मैच में कोई फेवरेट नहीं होता। यह मुकाबला 50-50 का है। जीत-हार का फैसला बहुत छोटी-छोटी बारीकियों और मौकों को भुनाने से तय होगा। हमें उम्मीद है कि वह टीम हम होंगे।' वहीं ब्राजील के स्टार फॉरवर्ड विनीसियस जूनियर ने भी मोरक्को की तारीफ करते हुए उन्हें एक बेहद मजबूत और किसी भी टीम को हराने में सक्षम टीम बताया है। ब्राजील का अफ्रीकी टीमों के खिलाफ दबदबा इतिहास गवाह है कि वर्ल्ड कप में ब्राजील का प्रदर्शन अफ्रीकी देशों के खिलाफ बेहद शानदार रहा है। ब्राजील ने अफ्रीकी टीमों के खिलाफ खेले अपने 8 मैचों में से 7 में जीत हासिल की है, जबकि उन्हें एकमात्र हार 2022 वर्ल्ड कप में कैमरून के खिलाफ मिली थी। साल 2002 के बाद से ब्राजील की टीम अक्सर क्वार्टर फाइनल में ही बाहर होती आई है। ऐसे में कोच एंसेलोटी को भरोसा है कि उनके पास किसी भी टीम को हराने का अनुभव और क्वालिटी मौजूद है।  

काई हावर्ट्ज के डबल गोल से जर्मनी की 7-1 की बड़ी जीत

हॉस्टन  फीफा विश्व कप 2026 में जर्मनी ने एकतरफा जीत के साथ शुरुआत की है। 4 बार की चैंपियन जर्मनी का मुकाबला कुराकाओ से हुआ। यह फीफा विश्व कप में कुराकाओ का डेब्यू मैच था। मैच को जर्मनी ने 7-1 के अंतर से अपने नाम किया। जर्मनी की तरफ से काई हावर्ट्ज ने दो गोल किए। उन्होंने पहले हाफ इंजरी टाइम में पेनल्टी पर पहला गोल दागा। इसके बाद 88वें मिनट में अपना दूसरा और टीम का सातवां गोल मारा। फीफा विश्व कप 2026 की सबसे बड़ी जीत जर्मनी के लिए हावर्ट्ज के अलावा फेलिक्स नमेचा, निको श्लोटरबेक ने पहले जबकि जमाल मुसियाला, नथानिएल ब्राउन और डेनिज उंडाव ने दूसरे हाफ में गोल दागे। 7-1 की जीत फीफा विश्व कप 2026 में सबसे बड़ी जीत है। फेलिक्स नमेचा ने मैच के छठे मिनट में ही गोल दाग दिया। यह इस बार के टूर्नामेंट में अब तक का सबसे तेज गोल भी है। फीफा विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल रैंक     टीम     गोल 1     जर्मनी     239 2     ब्राजील     238 3     अर्जेंटीना     152 4     फ्रांस     136 5     इटली     128 कुराकाओ के लिए यादगार मैच रहा 22 साल के लिवानो कोमेनेन्सिया ने कुराकाओ के लिए 21वें मिनट में गोल किया। कुराकाओ फीफा विश्व कप में गोल करने वाले सबसे कम जनसंख्या वाला देश बन गया है। इस देश की आबादी सिर्फ 158,000 ही है। नवंबर 2025 में कुराकाओ ने फीफा विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया था। वह टूर्नामेंट में जगह बनाने वाला सबसे कम जनसंख्या वाला देश बना था। इसके लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी उनका नाम दर्ज है। जर्मनी ने गोल की बौछार कर दी जर्मनी ने जल्द ही अपना दबदबा बना लिया और छठे मिनट में फेलिक्स नमेचा के गोल से खाता खोला। मिडफील्डर ने फ्लोरियन विर्ट्ज के साथ अच्छा तालमेल बिठाया और फिर पेनल्टी एरिया के किनारे से शानदार शॉट लगाकर गेंद को नेट में पहुंचा दिया। कुराकाओ की तरफ से 21वें मिनट में ऐतिहासिक पल आया लेकिन 38वें मिनट में निको श्लॉटरबेक ने 38वें मिनट में कॉर्नर पर हेडर से अपना पहला इंटरनेशनल गोल किया और जर्मनी को फिर से आगे कर दिया। पहले हाफ के इंजरी टाइम में कुराकाओ के खिलाफ ने बॉक्स में खतरनाक टैकल किया। इससे जर्मनी को पेनल्टी मिली और काई हावर्ट्ज ने गोल में दागकर स्कोर 3-1 कर दिया। जर्मनी ने दूसरे हाफ में अपना आक्रामक खेल जारी रखा। जमाल मुसियाला ने 47वें मिनट में जोशुआ किमिच के पास पर गोल मारकर टीम को 4-1 से आगे कर दिया।। इसके बाद नथानिएल ब्राउन ने 68वें मिनट में 5वां और 10 मिनट बाद डेनिज उंडाव ने छठा गोल दागा। 88वें मिनट में काई हावर्ट्स ने अपना दूसरा और मैच का 7वां गोल दागा।