samacharsecretary.com

वायुसेना विमान का गियर फेल, पुणे एयरपोर्ट पर हार्ड लैंडिंग; रनवे बंद

पुणे   देर रात भारतीय वायुसेना (IAF) के एक लड़ाकू विमान से जुड़ी घटना के बाद पुणे हवाई अड्डे का रनवे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। हालांकि घटना के करीब 11 घंटे बाद पुणे हवाई अड्डे का रनवे अब बहाल कर दिया गया है और परिचालन के लिए चालू घोषित कर दिया गया है। क्या हुआ था? हवाई अड्डे के अधिकारियों के अनुसार, यह घटना रात करीब 10:25 बजे हुई। लैंडिंग के दौरान एक लड़ाकू विमान का लैंडिंग गियर फेल हो गया, जिसकी वजह से विमान रनवे पर ही रुक गया और रनवे ब्लॉक हो गया। एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि विमान की हार्ड लैंडिंग हुई थी। IAF की पुष्टि भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि पुणे का रनवे वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण अस्थायी रूप से अनुपलब्ध है। चालक दल (एयरक्रू) सुरक्षित है और किसी भी नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। उड़ानों पर असर और यात्रियों की परेशानी इस घटना के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पुणे आने वाली कम से कम आठ उड़ानों को सूरत, गोवा, नवी मुंबई, चेन्नई और कोयंबटूर सहित अन्य हवाई अड्डों पर डायवर्ट किया गया। पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के अधिकारियों ने पहले बताया कि इस घटना के कारण इंडिगो, एअर इंडिया, स्पाइसजेट, अकासा और एअर इंडिया एक्सप्रेस समेत विभिन्न विमानन कंपनियों की कुल 91 उड़ानें प्रभावित हुईं। अब सब ठीक अब परिचालन फिर से शुरू हो गया है। वायुसेना ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'पुणे हवाईअड्डे का रनवे, जो भारतीय वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण अस्थायी रूप से अनुपलब्ध था, अब बहाल कर दिया गया है और परिचालन के लिए चालू घोषित कर दिया गया है। सभी आवश्यक सुरक्षा जांच और मंजूरियां पूरी कर ली गई हैं। उड़ान संचालन चरणबद्ध तरीके से फिर शुरू किया जा रहा है।' केंद्रीय मंत्री का बयान इससे पहले नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और रनवे के अस्थायी निलंबन की पुष्टि की। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा- राहत की बात यह है कि एयरक्रू सुरक्षित हैं और नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है। सभी एयरलाइंस को इसकी सूचना दे दी गई है, और रनवे को सामान्य रूप से चालू करने में लगभग 5 घंटे का समय लग सकता है। उन्होंने आगे कहा कि मैं जल्द से जल्द स्थिति को सुलझाने के लिए एयरपोर्ट निदेशक और वायुसेना के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं।

नासिक धर्मांतरण कांड पर TCS का बयान: निदा खान HR मैनेजर हैं या नहीं?

 नासिक हाल ही में आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक इकाई में यौन दुर्व्यवहार और धर्मांतरण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कई अफवाहों का खंडन किया है और अपनी आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तार से बताया है। साथ ही कंपनी ने ये भी स्पष्ट किया है कि नासिक में निदा खान नाम की कर्मचारी का HR मैनेजर पद से कोई लेना-देना नहीं है। 'एचआर मैनेजर' की भूमिका पर कंपनी की सफाई दरअसल इस विवाद में एक महिला (निदा खान) का नाम बार-बार उछाला जा रहा था और उसे नासिक यूनिट की एचआर मैनेजर बताया जा रहा था। टीसीएस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उक्त महिला न तो एचआर मैनेजर है और न ही उसका कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया से कोई लेना-देना है। वह केवल एक 'प्रोसेस एसोसिएट' के रूप में काम कर रही थी और उसके पास लीडरशिप या मैनेजमेंट से जुड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं थी। नासिक यूनिट बंद होने की अफवाहें झूठीं ऐसी खबरें फैल रही थीं कि इस बड़े विवाद के बाद टीसीएस ने अपनी नासिक फैसिलिटी को बंद कर दिया है। कंपनी ने इन दावों को पूरी तरह से असत्य और निराधार बताया है। यूनिट का कामकाज पहले की तरह ही जारी है। 'जीरो-टॉलरेंस' नीति और सुरक्षा का आश्वासन टीसीएस ने अपने बयान में कहा कि वह कर्मचारियों के कल्याण और संस्थागत आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करती है। कंपनी ने दोहराया कि वह अपने हर एक कर्मचारी की सुरक्षा, सम्मान और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार के दबाव या दुर्व्यवहार के खिलाफ कंपनी की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति है, यानी ऐसे मामलों में कोई भी कोताही नहीं बरती जाएगी। टाटा संस के चेयरमैन की कड़ी प्रतिक्रिया इससे पहले इसी सप्ताह, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने भी इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी। उन्होंने नासिक ब्रांच से सामने आ रहे इन आरोपों को बेहद चिंताजनक और दुखद बताया था। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है और आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आंतरिक चैनलों पर कोई शिकायत नहीं मिली कंपनी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात यह बताई है कि उनके पास कर्मचारियों की शिकायत सुनने के लिए जो आंतरिक व्यवस्थाएं हैं, वहां इस मामले की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। शुरुआती जांच से पता चला है कि कंपनी की 'एथिक्स कमेटी' या POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) चैनलों पर इस तरह के आरोपों से जुड़ी कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। जांच के लिए बाहरी एजेंसियों की नियुक्ति मामले की गंभीरता को देखते हुए और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए टीसीएस ने कड़े कदम उठाए हैं। कंपनी ने एक विशेष निगरानी पैनल का गठन किया है। आंतरिक जांच को सही तरीके से आगे बढ़ाने के लिए दो बड़ी बाहरी एजेंसियों को स्वतंत्र सलाहकार के रूप में काम पर रखा गया है: मशहूर कंसल्टेंसी फर्म डेलॉयट और जानी-मानी लॉ फर्म ट्राईलीगल। टीसीएस ने पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी जांच में पूरा सहयोग देने का वादा किया है ताकि मामले की पारदर्शी जांच हो सके और दोषियों को सजा मिल सके।

चीन द्वारा ईरान को हथियार भेजने का शक, रहस्यमय विमान पहुंचे तेहरान – क्या ले आए?

तेहरान  मध्य एशिया में जारी तनाव के बीच एक नई घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कमेंटेटर मारियो नॉफाल ने दावा किया है कि चीन के चार कार्गो विमान ईरान में गुपचुप तरीके से उतरे हैं। उन्होंने दावा किया कि लैंडिंग से पहले विमानों ने अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए जिससे उनकी जानकारी किसी को हासिल ना हो सके। एक दिन पहले ही शी जिनपिंग ने अमेरिका से वादा किया था कि वह ईरान को हथियारों की कोई सप्लाई नहीं करेंगे। अब इस मामले के जानकारों कहना है कि चारों विमानों का इस तरह से लैंडिंग से पहले ट्रांसपॉन्डर बंद करना कोई तकनीकी खामी नहीं हो सकती है। हालांकि इन विमानों को लेकर ना तो ईरान की तरफ से और ना ही चीन की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। चीन ने ईरान को किसी तरह के सहयोग देने के आरोपों को खारिज किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को कहा कि इस तरह की रिपोर्ट एकदम झूठी हैं। चीन ने ईरान को कोई सैटलाइट हेल्प भी नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि पड़ोसी देशों में अमेरिका के बेस ध्वस्त करने के लिए चीन उनसकी सहायता कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को धमकी दी थी कि वह अगर किसी भी रूप में दखल देता है तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से विमानों का ट्रांसपॉन्डर बंद कर लेना सामान्य तो नहीं है। हो सकता है कि किसी ऑपरेशनल या फिर सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो। चीन का क्या कहना है? रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को साफ कहा कि सैटेलाइट जानकारी देने का दावा ‘पूरी तरह मनगढ़ंत’ हैं और अगर अमेरिका ने इन आधारहीन आरोपों के आधार पर कोई कार्रवाई की, तो जवाब दिया जाएगा. दूसरी तरफ, अमेरिका पहले ही संकेत दे चुका है कि अगर कोई देश ईरान की सैन्य मदद करता पाया गया, तो उसके खिलाफ आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं।  ट्रांसपोंडर बंद करना क्या संकेत है? विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसपोंडर बंद करना असामान्य जरूर है, लेकिन हमेशा गलत इरादे का संकेत नहीं होता. कभी-कभी यह सुरक्षा या तकनीकी कारणों से भी हो सकता है. लेकिन यहां एक साथ कई विमानों का ऐसा करना और वह भी कम समय में संदेह को बढ़ाता है. इस बीच, जमीन पर कूटनीति भी जारी है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू होने के संकेत हैं और लेबनान सीजफायर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य भी आंशिक रूप से खुल चुका है।  जानकारों का कहना है कि लगातार कई विमानों का एक ही पैटर्न पर लैंड करना संदेह बढ़ाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच थोड़ा तनाव इस बात से कम होता नजर आ रहा है कि दोनों ही देशों ने दावा किया है कि कमर्शल जहाजों के लिए होर्मुज को खोल दिया गया है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि ईरान के लिए उनकी नाकेबंदी जारी रहेगी। वाशिंगटन और तेहरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। अब वार्ता और युद्ध को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। होर्मुज की खबर आने के बाद वैश्विक बाजार में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है।

BJP का देशव्यापी प्रदर्शन: महिला आरक्षण बिल के खिलाफ आज से सड़कों पर उतरेंगे कार्यकर्ता

नई दिल्ली लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका, जिससे केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा। बिल को पारित करने के लिए जरूरी बहुमत से यह 54 वोट पीछे रह गया। कुल 352 सदस्यों की मौजूदगी में 230 वोट इसके खिलाफ पड़े, जिसके चलते विधेयक गिर गया। सरकार ने इस पर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। अमित शाह ने विपक्ष पर महिलाओं के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे “महिला विरोधी रुख” करार दिया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए संविधान संशोधन बिल पारित नहीं हो सका. ऐसे में बीजेपी की महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए संविधान संशोधन बिल की हार के विरोध में बाद बीजेपी बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी में है।  बीजेपी महिला सांसदों ने शुक्रवार को मकर द्वार पर 'कांग्रेस पार्टी हाय-हाय के नारे' लगाए. वहीं, अब बीजेपी शनिवार 18 अप्रैल से देशभर में कई प्रदर्शन आयोजित करेगी. इन प्रदर्शनों में एनडीए के सहयोगी दल भी हिस्सा लेंगे।  बता दें कि महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी. इस बिल पर कुल 528 वोट पड़े. बिल पारित कराने के लिए सरकार को 352 वोट की जरूरत थी, लेकिन इसके पक्ष में 298 वोट ही पड़े।  संसद के निचले सदन में महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) पास नहीं हो पाया। बिल पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा, 352 से 54 वोट पीछे रह गई। कुल मौजूद सदस्य 352 में बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े। पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। विपक्षी दल इसे मोदी सरकार की हार के तौर पर देख रही है। वहीं, इस बिल के सदन में पारित न होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा,"देश की आधी आबादी, 70 करोड़ महिलाओं को धोखा देने और उनका विश्वास खोने के बाद कोई कैसे विजय का जश्न मना सकता है?" उन्होंने आगे लिखा,"विपक्ष का यह जश्न हर उस महिला का अपमान है, जो दशकों से अपने अधिकार का इंतजार कर रही है। कांग्रेस और उसके सहयोगी कितनी बार महिलाओं के साथ विश्वासघात करेंगे? कई बार विजय जैसी प्रतीत होने वाली अहंकार की खुशी, असलियत में छिपी हुई एक बड़ी पराजय होती है, जिसे कुछ लोग समझ नहीं पाते।" सोशल मीडिया से भड़के जेपी नड्डा पूर्व बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस बिल के पारित न होने पर निराशा जाहिर की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 का पारित नहीं होना कांग्रेस, TMC, DMK, समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन की महिला विरोधी मानसिकता को दिखाता है।  जेपी नड्डा ने दावा किया कि नारी शक्ति का अपमान विपक्ष को बहुत भारी पड़ेगा. उन्होंने कहा, 'ये आक्रोश अब रुकने वाला नहीं है. 2029 के लोकसभा चुनाव से लेकर हर छोटे-बड़े चुनाव तक, देश की बहनें अपने सपनों को रौंदने वालों को कड़ा सबक सिखाएंगी. याद रखिए, शक्ति का ये क्रोध आपके राजनीतिक अंत की शुरुआत है।  अमिता शाह ने विपक्ष को चेताया वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि शुक्रवार को लोकसभा में बहुत अजीब मंजर दिखा. नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया. महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है।  अमित शाह ने लिखा, 'मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि नारी शक्ति के अपमान की ये बात यहां नहीं रुकेगी, दूर तक जाएगी. विपक्ष को महिलाओं का आक्रोश न सिर्फ 2029 लोकसभा चुनाव में, बल्कि हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा।  देवेंद्र फडणवीस ने भी पोस्ट में लिखा, 'पूरे देश ने विपक्ष का पाखंड देखा. उनके पास हमारी ना रीशक्ति के साथ खड़े होने का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन वो इसमें असफल रहे. उनके लिए महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों और नारों तक ही सीमित है. उन्होंने प्रगति की जगह राजनीति को चुना. नारी शक्ति वंदन विधेयक के प्रति उनके विरोध ने ये उजागर कर दिया है कि वो वाकई में किसके हितों की सेवा करते हैं. भारत की महिलाएं देख रही हैं और वो इसे नहीं भूलेंगी।  नितिन नवीन ने क्या कहा? वहीं, इस बिल के पारित न होने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों की कड़ी आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि इन दलों ने ’’महिला विरोधी रुख’’ अपनाया और देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत में नवीन ने कहा कि यह दिन ’’सुनहरे अक्षरों में लिखा जा सकता था’’ लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों के ’’घोर विश्वासघात’’ ने सब बेकार कर दिया। उन्होंने कहा,"कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी तथा उनकी टीम के नेतृत्व वाले उसके महिला विरोधी गठबंधन ने देश की आधी आबादी के साथ घोर विश्वासघात किया है।" नवीन ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं की अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम हो सकता था, लेकिन समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सहित विपक्षी दलों ने महिलाओं को उनके ’’उचित अधिकारों एवं हिस्सेदारी’’ से वंचित कर दिया। उन्होंने कहा, ’’इस पूरे घटनाक्रम से कांग्रेस गठबंधन का महिला विरोधी चरित्र पूरी तरह से उजागर हो गया है।’’ भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी और प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह ’’श्रेय की लड़ाई नहीं’’ बल्कि महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने की लड़ाई है। लोकतंत्र के लिए 'काला दिन’: शिवराज सिंह चौहान वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) पर हमला करते हुए 17 अप्रैल को देश की महिलाओं और लोकतंत्र के लिए ’’काला दिन’’ करार दिया। इस बीच, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की गारंटी देने से संबंधित इस विधेयक को न सिर्फ खारिज किया गया, बल्कि चौंकाने वाली बात यह है कि इस … Read more

FSSAI ने जारी किए सख्त निर्देश, केमिकल से फल पकाने पर होगी कड़ी कार्रवाई

 नई दिल्ली FSSAI ने फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने को लेकर सख्त कदम उठाए हैं. 16 अप्रैल 2026 को जारी निर्देश में साफ कहा गया है कि खतरनाक केमिकल्स के जरिए फलों को पकाना पूरी तरह गैरकानूनी है और अब इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. खासतौर पर कैल्शियम कार्बाइड जैसे जहरीले पदार्थों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक है. बता दें कि कई जगहों पर फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया जा रहा था, जिस पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है।  भारत सरकार की खाद्य सुरक्षा संस्था (FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों, क्षेत्रीय निदेशकों और लाइसेंसिंग अधिकारियों को चेतावनी दी है कि आम, केला, पपीता समेत अन्य फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड (जिसे बाजार में 'मसाला' के नाम से जाना जाता है) का इस्तेमाल बिल्कुल वर्जित है।  FSSAI ने अपने पुराने निर्देशों को दोहराते हुए कहा है कि कैल्शियम कार्बाइड से पके फल खाने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. इनमें निगलने में तकलीफ, उल्टी, पेट दर्द और त्वचा पर अल्सर (घाव) जैसी शिकायतें शामिल हैं. दरअसल, यह पदार्थ फलों पर लगाने से उनमें जहरीली गैस निकलती है जो इंसान के लिए खतरनाक है।  नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि फलों को सीधे एथेफॉन घोल में डुबोकर पकाना अवैध है. FSSAI की गाइडलाइन के अनुसार, एथिलीन गैस का इस्तेमाल तो किया जा सकता है, लेकिन फलों या सब्जियों के साथ उसका सीधा संपर्क (पाउडर या लिक्विड रूप में) पूरी तरह प्रतिबंधित है।  बाजारों और गोदामों में बढ़ेगी छापेमारी      FSSAI ने सभी राज्यों से कहा है कि फल मंडियों, स्टोरेज गोदामों, थोक विक्रेताओं और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर नजर रखी जाए.     मौसमी फलों (खासकर आम के मौसम में) जहां 'मसाला' का शक हो, वहां विशेष अभियान चलाए जाएं.     अगर किसी जगह कैल्शियम कार्बाइड, मोम या नकली रंग मिले तो तुरंत कार्रवाई की जाए.     कैल्शियम कार्बाइड मिलने पर FSS Act की धारा 59 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.     एसीटिलीन गैस की जांच के लिए स्ट्रिप पेपर टेस्ट का इस्तेमाल किया जाए. FSSAI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. अमित शर्मा ने साफ कहा है कि अवैध तरीके से फल पकाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी. लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। 

भारत का बड़ा कदम: अमेरिकी छूट के बाद भी रूसी तेल और LPG की खरीद जारी रखेगा

नईदिल्ली  भारत कहां से और किससे तेल खरीदेगा? यह अमेरिका तय नहीं करेगा. भारत खुद तय करेगा. जी हां, अमेरिका ने रूसी तेल पर 30 दिनों की छूट खत्म कर दी. ऐसे में सवाल है कि क्या भारत अब रूसी तेल खरीद पाएगा? तो इसका जवाब है हां. रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी 30 दिन की छूट खत्म होने के बाद भी भारत रूसी तेल खरीदता रहेगा और एलपीजी आयात जारी रखेगा. अमेरिका का यह फैसला उसके अपने लिए है. इससे भारत की रणनीति का कोई लेना-देना नहीं।  दरअसल, ईरान जंग जुड़ी वैश्विक आपूर्ति में रुकावटों की चिंताओं के बीच अमेरिका ने मार्च की शुरुआत में रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी थी. यह ढील उन रूसी तेल पर थी, जो पहले से ही रास्ते में थे. हालांकि, अमेरिका ने रूसी तेल वाली वो छूट खत्म कर दी है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को कहा कि रूसी तेल पर इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. ईरानी तेल को लेकर भी अमेरिका का यही फैसला है।  रूस से तेल खरीदता रहेगा भारत अंग्रेजी अखबार मिंट ने एक अधिकारी को कोट कर लिखा कि रूसी तेल पर प्रतिबंधों में छूट पर अमेरिका का फैसला उसका अपना अधिकार है और यह भारत की आयात रणनीति तय नहीं करेगा. मिंट के अनुसार, उस शख्स ने कहा, ‘रूस से तेल और LPG खरीदने के प्रयास जारी हैं. साथ ही जिन संस्थाओं पर प्रतिबंध नहीं हैं, उनसे कच्चा तेल और एलपीजी दोनों का आयात जारी रहने की संभावना है।  और किससे बात हो रही मिंट ने बताया कि भारतीय रिफाइनर हाल ही में रूस, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से कुल 800000 टन LPG की आपूर्ति हासिल करने के बाद अब भविष्य के कार्गो के लिए बातचीत कर रहे हैं. उसी सूत्र ने आगे कहा कि अब तक रूस से LPG की जितनी मात्रा का सौदा हुआ है, वह अभी भी सीमित है और खेप अभी तक भारत नहीं पहुंची है. मिंट के अनुसार उस व्यक्ति ने कहा, ‘अभी भी, रूस से आयात की जो मात्रा तय हुई है, वह बहुत ज़्यादा नहीं है, और ज़्यादा LPG आपूर्ति के लिए बातचीत जारी है।  अमेरिका ही रहेगा एलपीजी का बड़ा सप्लायर एक और सूत्र ने मिंट को बताया कि मौजूदा माहौल में अमेरिका ही भारत का मुख्य LPG सप्लायर बना रह सकता है. कनाडा से भी भारत को LPG सप्लाई की उम्मीद है, जबकि अतिरिक्त कुकिंग गैस इंपोर्ट के लिए अंगोला के साथ भी बातचीत चल रही है।  कच्चे तेल के मामले में सरकारी अधिकारियों ने मिंट को बताया कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले भारत के कुल इंपोर्ट में पश्चिम एशिया का हिस्सा लगभग 60% था. मिंट ने बताया कि फिनलैंड स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (Crea) के डेटा से पता चला है कि अब यह हिस्सा घटकर लगभग 30% रह गया है, जबकि मार्च में रूसी कच्चे तेल का इंपोर्ट महीने-दर-महीने दोगुना हो गया।  मिंट ने CREA के डेटा का हवाला देते हुए बताया कि मार्च में चीन के बाद भारत रूसी फॉसिल फ्यूल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था, जिसने 5.8 बिलियन यूरो मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का इंपोर्ट किया. भारत सरकार ने हमेशा यह कहा है कि वह कमर्शियल फायदे और सप्लायर्स की एक विस्तृत श्रृंखला के आधार पर ऊर्जा प्राप्त करती है. वैसे भी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को कहा था कि हम अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीद रहे हैं। 

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, दिहाड़ी मजदूरों के लिए दाल-रोटी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी

नई दिल्ली नोएडा में फैक्‍ट्री कामगारों के उग्र हिंसक प्रदर्शन के बाद अब सरकार न्‍यूनतम दिहाड़ी मजदूरी को दोगुने से भी ज्‍यादा करने पर विचार कर रही है. सबकुछ ठीक रहा तो मजदूरों को जल्‍द ही यह खुशखबरी मिल जाएगी. केंद्र सरकार की तरफ से दिहाड़ी मजदूरी बढ़ाने के बाद राज्‍य सरकारों की तरफ से भी इस दिशा में कदम उठाए जा सकेंगे. बता दें कि दिल्‍ली-एनसीआर के प्रमुख शहर में से एक नोएडा में फैक्‍ट्री में काम करने वालों का गुस्‍सा वेतन को लेकर फूट पड़ा था. इन कामगारों का आरोप है कि उन्‍हें सरकार की ओर से निर्धारित सैलरी भी नहीं दी जा रही है. इस मामले के व्‍यापक प्रभाव को देखते हुए सरकार अब मजदूरों के हित में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है।  केंद्र सरकार देश में न्यूनतम मजदूरी को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. ‘हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार राष्ट्रीय स्तर पर दैनिक न्यूनतम वेतन को मौजूदा ₹176 से बढ़ाकर करीब ₹450 तक करने पर विचार कर रही है. यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में मजदूरों के विरोध के बाद वेतन बढ़ाने की मांग तेज हुई है. श्रम मंत्रालय सभी श्रेणियों (कुशल, अर्ध-कुशल (सेमी स्किल्‍ड) और अकुशल) के कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करने की दिशा में काम कर रहा है. एक बार राष्ट्रीय फ्लोर वेज (बेस वेज या मजदूरी) तय हो जाने के बाद राज्यों को भी अपने-अपने न्यूनतम वेतन में संशोधन करना होगा. प्रस्तावित ढांचे के अनुसार मासिक वेतन दैनिक मजदूरी के 26 गुना के बराबर होगा।  अंतिम चरण में चर्चा सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर राज्यों, उद्योगों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा अंतिम चरण में है और जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है. गौरतलब है कि मौजूदा राष्ट्रीय फ्लोर वेज वर्ष 2017 में तय किया गया था. यह पहल ऐसे समय में अहम मानी जा रही है जब मजदूरी वृद्धि और कॉर्पोरेट मुनाफे के बीच अंतर बढ़ता दिख रहा है. आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कंपनियों का एबिट्डा मार्जिन (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) करीब 22% के आसपास स्थिर रहा है, जबकि वेतन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ी है. खासकर आईटी सेक्टर के शुरुआती स्तर के कर्मचारियों के वेतन में ठहराव की समस्या सामने आई है।  आर्थिक असमानता दूर करने में मदद केंद्र सरकार यह बदलाव नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के तहत कर रही है. ‘कोड ऑन वेजेस, 2019’ राष्ट्रीय फ्लोर वेज और समान वेतन परिभाषा प्रदान करता है, जबकि अन्य श्रम कोड श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल की परिस्थितियों में सुधार पर केंद्रित हैं. सरकार का मानना है कि इस कदम से देशभर में मजदूरों की आय में सुधार होगा और आर्थिक असमानता को कम करने में मदद मिलेगी। 

नेतन्याहू का बयान: सीजफायर के तहत इजरायल दक्षिणी लेबनान में 10 किमी सुरक्षा जोन बनाए रखेगा

यरूशलम  इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायल दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर का सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा। उनका यह बयान उस समय आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा की। यह समझौता नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के बीच हुआ है और इसे अमेरिकी पूर्वी समय के अनुसार शाम 5 बजे से लागू किया जाना है। नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने हिजबुल्लाह की उस मांग को ठुकरा दिया, जिसमें इजरायली सेना को अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पीछे हटने के लिए कहा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना लेबनान के अंदर बनाए गए इस सुरक्षा क्षेत्र में ही तैनात रहेगी। उनका कहना है कि यह सुरक्षा क्षेत्र उत्तरी इजरायल के इलाकों को हमलों और टैंक रोधी हथियारों से बचाने में मदद करेगा। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि लेबनान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता करने का मौका है। उन्होंने बताया कि ट्रंप इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्हें और लेबनान के राष्ट्रपति को बातचीत के लिए आमंत्रित करना चाहते हैं। नेतन्याहू के अनुसार, यह मौका इसलिए बना है क्योंकि इजरायल ने लेबनान में ताकत का संतुलन अपने पक्ष में बदल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक महीने में लेबनान की ओर से सीधे शांति वार्ता के संकेत मिले हैं। उन्होंने बताया कि इन बातचीतों में इजरायल की दो मुख्य शर्तें होंगी- पहली, हिजबुल्लाह को पूरी तरह हथियार छोड़ने होंगे, और दूसरी, एक स्थायी शांति समझौता होना चाहिए। ईरान के मुद्दे पर नेतन्याहू ने दावा किया कि ट्रंप ने उन्हें भरोसा दिया है कि वे समुद्री नाकेबंदी जारी रखेंगे और ईरान की बची हुई परमाणु क्षमता को खत्म करने के लिए दृढ़ हैं। नेतन्याहू ने इन कदमों को बहुत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इससे आने वाले वर्षों में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। इस बीच, ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा की, जिसका उद्देश्य तनाव को कुछ समय के लिए कम करना है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू और जोसेफ आउन से बातचीत के बाद दोनों पक्ष 10 दिन के युद्धविराम पर सहमत हुए हैं, जो वाशिंगटन समय के अनुसार शाम 5 बजे से शुरू होगा। यह युद्धविराम उस संघर्ष को रोकने की कोशिश है, जो तब बढ़ गया था जब इजरायल ने ईरान से जुड़े हिजबुल्लाह के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया था। हालांकि लेबनान और इजरायल के बीच औपचारिक युद्ध नहीं है, लेकिन हिजबुल्लाह दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है और उसने इज़राइल पर कई हमले किए हैं, जिसके जवाब में इजराइल ने भी कार्रवाई की है।

TCS नासिक कांड: निदा खान की प्रेग्नेंसी का खुलासा, गिरफ्तारी से बचने के लिए रचा नया जाल

नासिक  नासिक टीसीएस धर्मांतरण कांड पर बड़ा खुलासा हुआ है. टीसीएस नासिक कांड की मास्टरमाइंड मानी जा रही निदा खान ने जेल जाने से बचने के लिए नया दांव खेला है. पहले कहा ग या कि निदा खान कंपनी की एचआर है. मगर परिवार का दावा है कि वह कंपनी की एचआर हेड नहीं है. वह कंपनी में एक टेलीकॉलर थी. बहरहाल, उस पर आईटी की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट में जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप है. उसके परिवार वालों का कहना है कि निदा खान प्रेग्नेंट है और मुंबई में हैं।  आरोपी निदा खान अभी टीसीएस के नासिक यूनिट में कथित धर्मांतरण मामले में फरार चल रही है. सूत्रों का कहना है कि आरोपी निदा खान ने अग्रिम जमानत के लिए स्थानीय अदालत में अर्जी दाखिल कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, निदा खान अपनी गर्भावस्था को मुख्य आधार बनाकर अग्रिम जमानत की मांग करेगी।  सूत्रों के मुताबिक, 26 वर्षीय निदा खान ने पिछले साल जनवरी में शादी के बाद मुंबई शिफ्ट किया था. उसने कंपनी के मुंबई ब्रांच में ट्रांसफर लिया था. निदा खान गर्भावस्था के शुरुआती चरण में है. उसे अग्रिम जमानत के लिए मुख्य तर्क के रूप में पेश किया जाएगा. वहीं, अभियोजन पक्ष जमानत का विरोध कर सकता है. उनका कहना है कि निदा खान इस मामले की ‘मास्टरमाइंड’ हैं, जिन्होंने पीड़ितों को धार्मिक गतिविधियों के लिए मजबूर किया।  अब तक फरार निदा खान को लेकर कंपनी ने खुद दिया बड़ा अपडेट आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टीसीएस (TCS) नासिक के बीपीओ सेंटर में हुआ कांड अब चर्चा का विषय बन गया है. ऑफिस के अंदर धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न जैसे मामले आने के बाद सबसे चर्चित नाम वहां की HR हेड बताई जा रही निदा खान का है. इस पूरी केस के खुलासे के बाद से ही वह फरार चल रही है. उसकी तलाश में महाराष्ट्र पुलिस और एसआईटी टीम लगी है. हालांकि अभी तक उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा है. इस बीच TCS की तरफ से निदा खान को लेकर कुछ जानकारियां दी गई है।  टीसीएस से पूछे गए कुछ सवालों के जवाब में वहां से जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक TCS सूत्रों का कहना है कि निदा खान वहां HR हेड या मैनेजर के तौर पर काम नहीं करती थी. वह वहां सिर्फ टेलीकॉलर के रूप में काम करती थी. नासिक में दर्ज नौ एफआईआर में पहली रिपोर्ट से ही निदा खान का नाम सामने आया था. आरोपों के मुताबिक, वह उन लोगों के समूह का हिस्सा थी, जिन पर महिला और पुरुष कर्मचारियों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं. मामले सामने आने के बाद से ही निदा खान फरार बताई जा रही है. महाराष्ट्र पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) उसकी तलाश में जुटी है, लेकिन अब तक उसका कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है. जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही कई अहम पहलुओं से पर्दा उठ सकता है खासकर यह कि वह इस पूरे नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका थी।    मुंबई में निदा खान के परिवार का क्या दावा?     निदा खान BPO की ह्यूमन रिसोर्स टीम के लिए काम नहीं करती है. उसका पद टेली-कॉलर का है और वह सेल्स टीम का हिस्सा है. उसने दिसंबर 2021 में BPO जॉइन किया था और वह इसके सीनियर कर्मचारियों में से नहीं हैं।      वह कभी भी HR टीम से जुड़ी नहीं रही है.     उसका परिवार मुंबई में लकड़ी का कारोबार करता है.     निदा खान और उसके दो भाई-बहन हैं. एक छोटा भाई और एक बड़ी बहन. सबने नासिक में पढ़ाई की है.     निदा ने कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया है और अभी काम करने के साथ-साथ कॉरेस्पोंडेंस के जरिए MBA की पढ़ाई भी कर रही है.     निदा खान मुंबई में है और अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रही है. अग्रिम जमानत के लिए अर्ज़ी दी गई है. टीसीएस नासिक धर्मातंरण मामला क्या है? दरअसल निदा खान उन आठ कर्मचारियों में शामिल है, जिन पर टीसीएस के नासिक बीपीओ में अपने सहकर्मियों के साथ कथित बलात्कार, यौन उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और अन्य प्रकार के उत्पीड़न का आरोप है. इस मामले ने कॉरपोरेट कल्चर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. आठ में से सात आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि निदा खान अभी भी फरार है।  कैसे सामने आया पूरा मामला यह मामला तब सामने आया, जब नासिक पुलिस ने 23 वर्षीय बीपीओ कर्मचारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की. पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके सीनियर सहकर्मी दानिश शेख ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. यह केस भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें धारा 69 (शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना), 75 (यौन उत्पीड़न) और 299 (धर्म या धार्मिक आस्था का अपमान) शामिल हैं. पीड़िता ने क्या आरोप लगाए पीड़िता ने आरोप लगाया कि दानिश और एक अन्य सहकर्मी तौसीफ ने उसे इस्लाम धर्म हिंदू धर्म से बेहतर है, यह समझाने की कोशिश की. उसने दावा किया कि तौसीफ और निदा खान ने एक हिंदू देवी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की. इस मामले ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है. शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि आरोपी एक गैंग की तरह काम करते थे और 18 से 25 साल की महिला कर्मचारियों को निशाना बनाते थे. कौन-कौन अरेस्ट अब तक इस मामले में आठ लोगों दानिश शेख, तौसीफ अत्तर, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसार, शाहरुख शेख और एक महिला को गिरफ्तार किया जा चुका है.

भारत ने अरब सागर में 400 किलोमीटर का नो फ्लाई जोन घोषित किया, ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान में खलबली

मुंबई  ईरान जंग की वजह से दुनियाभर में उथल-पुथल की स्थिति है. होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण एनर्जी सप्‍लाई चेन भी चरमरा गई है. इसके चलते एशिया से यूरोप तक में पेट्रोल-डीजल और गैस की आपूर्ति में बाधा आई है. इन सबके बीच अरब सागर में अलग ही घमासान मचा हुआ है. पहले पाकिस्‍तान ने मिसाइल टेस्टिंग को लेकर नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) जारी किया. इसके बाद भारत ने अरब सागर में ही पाकिस्‍तान से दोगुने दायरे तक के लिए NOTAM जारी कर दिया. भारत के इस कदम से पड़ोसी देश में खलबली मच गई है. भारत की तरफ से कुछ सप्‍ताह पहले अंडमान सागर क्षेत्र में भी NOTAM जारी किया गया था. यह 1500 से 3500 किलोमीटर तक के लिए था. अब अरब सागर में नो फ्लाई जोन का नोटिस इश्‍यू किया गया है।  अरब सागर एक बार फिर रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनता दिख रहा है, जहां भारत और पाकिस्तान ने मिसाइल परीक्षणों को लेकर लगातार नेविगेशनल चेतावनियां (NOTAM) जारी की हैं. दोनों देशों द्वारा जारी इन अलर्ट्स से क्षेत्र में समानांतर सैन्य गतिविधियों का संकेत मिलता है, जिसने सुरक्षा विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है. आधिकारिक सूचनाओं के मुताबिक, पाकिस्तान ने 20 अप्रैल को सुबह 3 बजे से 21 अप्रैल दोपहर 3 बजे तक मिसाइल परीक्षण के लिए समय निर्धारित किया है. इसके तुरंत बाद भारत ने भी 22 अप्रैल सुबह 9:30 बजे से 25 अप्रैल रात 9:30 बजे तक अपने मिसाइल टेस्टिंग प्रोग्राम की घोषणा की है. NOTAM और समुद्री एडवाइजरी आमतौर पर नागरिक विमानों और जहाजों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए जारी की जाती हैं, ताकि सैन्य अभ्यास के दौरान किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।  पाकिस्‍तान 200 तो भारत का 400 किलोमीटर का NOTAM इन परीक्षणों के लिए चिन्हित क्षेत्र अरब सागर में एक-दूसरे की समुद्री सीमाओं के काफी करीब बताए जा रहे हैं. पाकिस्तान का परीक्षण क्षेत्र लगभग 200 किलोमीटर तक फैला है, जबकि भारत का क्षेत्र करीब 400 किलोमीटर का है, जो अपेक्षाकृत बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास की ओर इशारा करता है. हालांकि, भारत और पाकिस्तान दोनों ही नियमित रूप से अपनी सैन्य तैयारियों के तहत मिसाइल परीक्षण करते रहे हैं, लेकिन इस बार इनका लगभग एक साथ होना विशेष महत्व रखता है. दोनों देश परमाणु क्षमता से लैस मिसाइल सिस्टम रखते हैं और इस तरह के परीक्षण पूर्व-निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत किए जाते हैं, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या तनाव की स्थिति से बचा जा सके।  अरब सागर में भारत का सर्विलांस शिप इसी बीच, क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियों के बढ़ने की भी खबरें सामने आई हैं. बताया जा रहा है कि भारत ने अरब सागर में निगरानी के लिए अपने सर्विलांस पोत (INS ध्रुव) तैनात किए हैं, जबकि पाकिस्तान की नौसेना के फ्रिगेट्स इस समय श्रीलंका के आधिकारिक दौरे पर हैं. हालांकि ये गतिविधियां सामान्य सैन्य संचालन का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन मिसाइल परीक्षणों के साथ इनका समय मेल खाना दोनों देशों की सतर्कता को दर्शाता है. इस तरह की समानांतर सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन स्थापित संचार तंत्र और पारदर्शिता के चलते स्थिति नियंत्रण में रहती है. यह घटनाक्रम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लगभग एक साल बाद सामने आया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देश अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत करने और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में सक्रिय हैं।