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सिंधु जल संधि स्थगित, पाक को सुधारने की शर्त पर रखी गई स्थिति

संयुक्त राष्ट्र   भारत ने दोहराया है कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक “आतंक का वैश्विक केंद्र” पाकिस्तान अपने तरीकों में सुधार नहीं करता। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने गुरुवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान को “संधियों की पवित्रता बनाए रखने की बात करने से पहले मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “भारत हमेशा एक जिम्मेदार उच्च जलधारा वाला राज्य रहा है लेकिन जिम्मेदारी दोतरफ़ा रास्ता है। पाकिस्तान को अपनी राज्य नीति के उपकरण के रूप में आतंकवाद का उपयोग करना पूरी तरह से छोड़ना होगा।” हरीश का यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को ऐसा प्रस्तुत किया मानो वह हताहत पक्ष हो, जबकि कार्यक्रम का विषय था सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सभी के लिए पहुंच सुनिश्चित करना, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) से जुड़ा है। हरिश ने कहा, “भारत ने इस संधि पर 1960 में सद्भाव और मित्रता की भावना में हस्ताक्षर किए लेकिन पाकिस्तान ने इस भावना का उल्लंघन करते हुए भारत पर तीन युद्ध और हजारों आतंकी हमले किए।” उन्होंने कहा, “दसियों हजार निर्दोष भारतीय पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवादी हमलों के शिकार बने।” पिछले साल द रेजिस्टेंस फ्रंट द्वारा पहलगाम में धर्म आधारित आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारी सहनशीलता और उदारता ने पाकिस्तान के तरीकों को नहीं बदला। अंततः हमें घोषणा करनी पड़ी कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान, जो आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है, सभी प्रकार के आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं करता।” उन्होंने कहा कि तकनीकी, जनसांख्यिकीय और पारिस्थितिक बदलावों के कारण पिछले 65 वर्षों में क्षेत्र में मौलिक बदलाव हुए हैं, जिसके लिए पाकिस्तान चर्चा करने से इंकार करता रहा। उन्होंने कहा, “संधि में संशोधन पर पाकिस्तान के साथ हमारी सभी कोशिशें ठुकरा दी गईं।” कार्यक्रम के विषय पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि इस साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस रविवार को पड़ रहा है और भारत ने सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सार्वभौमिक पहुंच के सतत विकास लक्ष्य को उच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, “जल जीवन मिशन के माध्यम से भारत ग्रामीण घरों में पाइप से पीने के पानी की आपूर्ति कर दुनिया के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक को लागू कर रहा है।” 2019 में शुरू हुए इस मिशन ने अब तक ग्रामीण घरों के 81.76 प्रतिशत घरों (कुल 1.58 करोड़) तक सुरक्षित नल का पानी पहुंचाया है। उन्होंने कहा, “सामुदायिक भागीदारी इस प्रयास की आधारशिला है, जिसमें गांव जल समितियां, जिनमें से कई महिलाओं द्वारा नेतृत्व की जाती हैं, स्थानीय जल प्रणालियों की योजना, निगरानी और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।” उन्होंने जोड़ा, “संयुक्त राष्ट्र में हमारे सामूहिक प्रयास तब सबसे प्रभावी होंगे जब वे ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित हों जो हमें जोड़ते हैं, जैसे कि राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करना, विशेष रूप से विकासशील देशों में, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाना।”

धामी सरकार में कैबिनेट विस्तार, 5 विधायकों को मिला मंत्री पद

देहरादून   उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार के कैबिनेट का आज विस्तार हुआ। कैबिनेट विस्तार में 5 मंत्रियों को राज्यपाल गुरमीत सिंह ने शपथ दिलाई। कैबिनेट में मंत्री की शपथ लेने वाले विधायकों में मदन कौशिक प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, भरत सिंह चौधरी और खजान दास शामिल रहे। इन विधायकों के शपथ के साथ ही पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट में अब मुख्यमंत्री समेत 12 सदस्य हो गए हैं। अभी कैसा है धामी कैबिनेट का स्वरूप उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट में अब मुख्यमंत्री समेत12 सदस्य हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज 5 नए मंत्रियों को शपथ दिलाने के बाद कैबिनेट सदस्यों की संख्या 7 से अब 12 हो गई। इन पांच विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ  1    मदन कौशिक 2. खजान दास 3. राम सिंह कैडा 4. प्रदीप बत्रा 5. भरत चौध ये रहे धामी सरकार के नए सिपाही खजान दास (अनुसूचित जाति): देहरादून जिले की राजपुर सीट से लगातार दो बार चुनाव जीतने वाले खजान दास भुवन खंडूरी सरकार में शिक्षा राज्यमंत्री रह चुके हैं. साल 2007 में टिहरी जिले से जीते थे चुनाव. संगठन के पदों पर भी रह चुके हैं खजान दास. फिलहाल बीजेपी के प्रवक्ता भी हैं खजानदास. प्रदीप बत्रा (पंजाबी समाज): हरिद्वार जिले में रुड़की विधानसभा से तीन बार के विधायक प्रदीप बत्रा पंजाबी समाज से आते हैं. हरीश रावत सरकार के दौरान जिन कांग्रेसी विधायकों ने बगावत करके बीजेपी का दामन थामा था, उसमें बत्रा भी शामिल रहे हैं. बीजेपी संगठन में बत्रा की अच्छी पकड़ मानी जाती है. मदन कौशिक (ब्राह्मण): हरिद्वार से पांच बार के विधायक मदन कौशिक, बीजेपी का बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं। पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे, कौशिक बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सदस्य हैं. कौशिक 2002 में पहली बार हरिद्वार से विधायक चुने गए थे. तब से लगातार हरिद्वार से विधायक हैं कौशिक. राम सिंह कैड़ा (ठाकुर): नैनीताल जिले की भीमताल सीट से दो बार के विधायक राम सिंह कैड़ा पहली बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बने हैं। 2017 में कैड़ा, निर्दलीय के तौर पर भीमताल से जीते थे. छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले राम सिंह कैड़ा लंबे समय तक कांग्रेस से भी जुड़े रहे. भरत चौधरी (ठाकुर): रुद्रप्रयाग जिले की रुद्रप्रयाग विधानसभा से दो बार के बीजेपी विधायक भरत चौहान राजनीति में चार दशक से हैं. इनको मंत्री बनकर बीजेपी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने का मैसेज दिया है. भरत चौधरी ने संस्कृत भाषा में शपथ लिया.

ईरानी ड्रोन अटैक से कुवैत की रिफाइनरी में लगी भीषण आग, तीन को फांसी की सजा

तेहरान  अमेरिका–ईरान युद्ध अपने 20वें दिन पूरे होने के साथ ही पूरे क्षेत्र में हमले तेज हो गए हैं. हालांकि इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि वह “कहीं भी सेना तैनात करने” पर विचार नहीं कर रहे हैं. वहीं इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दावा किया है कि वो यह जंग जीत रहे हैं और ईरान युद्ध में पूरी तरह तबाह हो गया है. नेतन्याहू ने कहा कि यह अभियान “जब तक आवश्यक होगा” तब तक जारी रहेगा। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी सेना के एक F-35 लड़ाकू विमान पर हमला किया है जिससे उसे नुकसान पहुंचा है. जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि फिलहाल अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने ग्राउंड ट्रूप्स नहीं भेज रहा है। कुवैत की रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक कुवैत ने जानकारी दी है कि मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर रात में ड्रोन हमला हुआ, जिससे कुछ यूनिट्स में आग लग गई. KPC के अनुसार, दमकल टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने की कार्रवाई की और सुरक्षा के मद्देनजर कुछ यूनिट्स को बंद कर दिया गया। ईरान पर अचानक हमला करना सरप्राइज था- डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई. बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने 1941 के पर्ल हार्बर हमले का उल्लेख किया, जिस पर प्रधानमंत्री ताकाइची कुछ असहज दिखाई दीं। ट्रंप ने कहा कि ईरान पर हालिया हमलों से पहले किसी को जानकारी नहीं दी गई क्योंकि अमेरिका सरप्राइज देना चाहता था. उन्होंने आगे कहा कि सरप्राइज के महत्व को जापान से बेहतर कौन समझ सकता है, जैसे कि पर्ल हार्बर हमले से पहले भी कोई सूचना नहीं दी गई थी। ईरान ने मोजतबा खामेनेई का ‘रेयर वीडियो’ किया जारी अमेरिका-इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद से ही जंग जारी है, लेकिन अभी तक जंग थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं. इस बीच ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने मोजतबा खामेनेई का एक रेयर वीडियो जारी किया है। ट्रंप को कौन बता सकता है कि क्या करना है? – बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यह दावा खारिज किया है कि उन्होंने अमेरिका को इजरायल-ईरान संघर्ष में शामिल किया है. नेतन्याहू ने कहा, “क्या सच में कोई सोचता है कि कोई राष्ट्रपति ट्रंप को बता सकता है कि उन्हें क्या करना है?” ईरान पर किए गए हमले का आज 20वां दिन है. इस दौरान युद्ध में कोई कमी नहीं आई है. साथ ही युद्ध थमने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं. अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर लगातार हमले जारी है. इसी क्रम में ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री इस्माइल खतीब के भी मारे जाने की ताजा खबर सामने आई है. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसकी पुष्टि की है. इस तरह पिछले दो दिनों में ईरान के तीन ताकतवर लोग मारे गए. इससे पहले मंगलवार को इजराइल के हवाई हमलों में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और बासिज अर्धसैनिक बल के प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी भी मारे गए थे. इस बीच ईरान ने लारिजानी के मारे जाने के बदले में इजराइल और खाड़ी देशों में हमले तेज कर दिए. अबु धाबी मीडिया ऑफिस ने बताया कि अबु धाबी में हबशान गैस प्लांट को हाल ही में रोकी गई मिसाइलों के मलबे से हुई एक घटना के बाद इसे बंद कर दिया गया है। ऑफिस ने आगे बताया कि अधिकारी बाब ऑयलफील्ड और गैस प्लांट में हुई घटनाओं पर भी कार्रवाई कर रहे हैं. मीडिया ऑफिस ने पुष्टि की, गैस प्लांट में काम रोक दिया गया है, और किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है. कतर में बीती रात फारसी खाड़ी में अहम ऊर्जा इंफ़्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की चेतावनियों के बाद कतर की एक बड़ी फैसिलिटी में आग लगने की खबरें आई और सऊदी अरब के ऊपर हवाई खतरों को रोका गया. कतर के गृह मंत्रालय ने बुधवार को पर एक पोस्ट में बताया कि सिविल डिफेंस की टीमें रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में आग लग गई। यह जगह प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का एक अहम केंद्र है और कतर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. सऊदी अरब, कुवैत और अन्य अरब देशों को भी बुधवार को ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार का सामना करना पड़ा, जिन्हें हवाई सुरक्षा प्रणालियों द्वारा बीच में ही रोक दिया गया. वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, एक ईरानी अधिकारी ने कहा कि तेहरान का होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग पर अपनी कड़ी पकड़ छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. यह जलडमरूमध्य तेल परिवहन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। यूरोपियन देशों और जापान ने होर्मुज में जहाजों पर ईरानी हमलों की निंदा की लंदनः यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और जापान के नेताओं ने गुरुवार को खाड़ी में बिना हथियार वाले कमर्शियल जहाजों और तेल और गैस प्लांट समेत सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरानी हमलों की निंदा की, क्योंकि इस इलाके में संघर्ष बढ़ रहा है. एक जॉइंट स्टेटमेंट में, देशों ने ईरानी सेना द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को असल में बंद करने पर चिंता जताई और तेहरान से धमकियों, माइन बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों, और स्ट्रेट को ब्लॉक करने वाली दूसरी कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की अपील की, और यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2817 का पालन करने की अपील की। बयान में कहा गया, "नेविगेशन की आज़ादी इंटरनेशनल कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसमें यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी भी शामिल है." बयान में ईरान की कार्रवाइयों के दुनिया भर में असर पर ज़ोर दिया गया, खासकर सबसे कमज़ोर आबादी पर, और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले हमलों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई. देशों ने होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता पक्का करने की कोशिशों में मदद करने की तैयारी जताई और दूसरे देशों की तैयारी की प्लानिंग का स्वागत किया। बयान में आगे कहा गया, "UNSC रेज़ोल्यूशन 2817 के मुताबिक, हम इस बात पर ज़ोर देते हैं … Read more

Eid-ul-Fitr 2026: ईद की तारीख भारत में कंफर्म, जानिए ईद-उल-फितर के आयोजन का तरीका

 नई दिल्ली Eid-ul-Fitr 2026: ईद उल फितर इस्लाम धर्म का बहुत ही पवित्र और खुशियों वाला त्योहार है, जो रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है. यह त्योहार नए चांद (शव्वाल महीने की शुरुआत) के दिखने पर मनाया जाता है. ईद का मतलब होता है 'खुशी' और 'उल-फितर' का मतलब है 'रोजा खोलना'. यानी यह त्योहार रोजों के पूरा होने की खुशी में मनाया जाता है. इस दिन लोग अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें रोजे रखने की ताकत दी। इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर में दो बड़ी ईद मनाई जाती हैं. पहली ईद-उल-फितर, जो रमजान के अंत में आती है. दूसरी ईद-उल-अजहा होती है, जो इस्लामी साल के आखिरी महीने जिलहिज्जा की 10, 11 और 12 तारीख को मनाई जाती है. तो आइए अब जानते हैं कि ईद-उल-फितर भारत में कब मनाई जाएगी और कैसे मनाई जाएगी। भारत में कब मनाई जाएगी ईद-उल-फितर? इस्लाम जानकारों के मुताबिक, वैसे तो ईद 20 मार्च को मनाई जानी चाहिए थी. लेकिन, 19 मार्च को शव्वाल का चांद ना दिखने के कारण अब 21 मार्च, शनिवार को भारत में ईद का त्योहार मनाया जाएगा. वहीं, सऊदी अरब में 20 मार्च को ईद मनाई जा रही है.  कितने दिनों तक मनाई जाती है ईद-उल-फितर? ईद-उल-फितर आमतौर पर एक दिन का त्योहार होता है. इस्लामी कैलेंडर हिजरी के अनुसार, ईद-उल-फितर शव्वाल महीने के पहले दिन मनाई जाती है. इस दिन ईद की नमाज अदा की जाती है. हालांकि, कई मुस्लिम देशों में ईद का जश्न 2 से 3 दिनों तक चलता है. इन दिनों में छुट्टी रहती है, लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं और रोजे खत्म होने का जश्न मनाते हैं. ईद-उल-फितर, ईद-उल-अजहा से अलग होती है, क्योंकि ईद-उल-अजहा तीन दिन तक मनाई जाती है. ईद-उल-फितर पर क्या करें? ईद की नमाज पढ़ें- हर मुसलमान को चाहिए कि वह मस्जिद या ईदगाह में जाकर मिलकर ईद की नमाज अदा करें और अल्लाह का शुक्रिया करें. आने-जाने का रास्ता बदलें– सुन्नत के अनुसार, ईद की नमाज के लिए जाते समय और वापस आते समय अलग-अलग रास्ता अपनाना अच्छा माना जाता है. साफ सुथरे और नए कपड़े पहनें- इस दिन साफ-सुथरे होकर, अच्छे कपड़े पहनकर ही नमाज के लिए जाना चाहिए. तोहफे और मुबारकबाद दें– ईद उल फितर के दिन अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को ईद मुबारक' कहें और गले लगाकर एक दूसरे के साथ खुशियां बांटें. दुआ और इबादत करें– इस दिन अल्लाह से दुआ करें और ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, क्योंकि यह दिन खास बरकत वाला होता है. ईद-उल-फितर के पीछे की कहानी ईद-उल-फितर की शुरुआत पैगंबर हजरत मुहम्मद ने 624 ईस्वी में मदीना में की थी. यह हिजरत के बाद दूसरा साल था, जब मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया था. जब वे मदीना पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि लोग दो खास दिनों पर जश्न मनाते हैं. इसके बाद उन्होंने बताया कि मुसलमानों के लिए दो ईद होंगी- ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा. 

ईरान-इजरायल से लेकर पाक-अफगान तक युद्ध, करोड़ों बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा गहरा असर, सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट

  नई दिल्ली आज दुनिया के नक्शे पर एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां स्कूलों की घंटी नहीं बल्कि धमाकों का शोर सुनाई दे रहा है. ईरान-इजरायल, रूस-यूक्रेन, पाक-अफगान से लेकर दुन‍िया के कई देश इस आग में झुलस रहे हैं. लेकिन इस सनक का सबसे ज्यादा खामियाजा अगर कोई भुगत रहा है या भुगतने वाला है तो वो आज के बच्चे यानी कल के युवा…  दुनिया की सबसे बड़ी बाल अधिकार संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' की ताजा और डराने वाली रिपोर्ट ने इस खतरे को सामने रखा है. रिपोर्ट कहती है कि मिडिल ईस्ट और उसके आसपास के देशों में जारी हिंसा ने करीब 5.2 करोड़ बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप कर दी है। यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे एक 'एजुकेशन इमरजेंसी' कहा जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के डेटा पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि 5 से 17 साल के करोड़ों बच्चे अब स्कूल जाने के बजाय अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं। ईरान में 65 स्कूल मलबे में तब्दील ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी के हवाले से खबर है कि अकेले ईरान में हवाई हमलों ने 65 स्कूलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है. जिन कमरों में बच्चे पहाड़े और कविताएं याद करते थे, वहां अब सिर्फ ईंट-पत्थर और धुआं बचा है। स्कूल नहीं, अब 'शेल्टर होम' कहिए रिपोर्ट में उन 12 देशों का जिक्र है जहां शिक्षा व्यवस्था आईसीयू (ICU) पर है. इनमें ईरान, इजरायल, जॉर्डन, सऊदी अरब, फिलिस्तीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में दो बड़ी चुनौतियां सामने आई हैं। स्कूलों पर हमला: कई स्कूल बमबारी में क्षतिग्रस्त हो गए हैं. मजबूरी में शरण: जो स्कूल बच गए हैं, उन्हें बंद कर दिया गया है क्योंकि वहां बेघर हुए हजारों परिवार शरण लिए हुए हैं. यानी क्लासरूम अब रहने के ठिकानों में बदल गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई भी फेल! हालांकि कुछ देशों ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी और बार-बार कटते इंटरनेट ने इस उम्मीद को भी तोड़ दिया है. कई इलाकों में बिजली और सुरक्षित इंटरनेट न होने के कारण बच्चे महीनों से अपनी किताबों से दूर हैं. बता दें कि इस क्षेत्रीय अस्थिरता का असर सिर्फ युद्ध लड़ रहे देशों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी इस हिंसा का 'रिपल इफेक्ट' (लहर जैसा असर) दिख रहा है. वहां भी अस्थिरता की वजह से बच्चों की नियमित पढ़ाई में बाधा आ रही है।

EPS Pension Update: सरकार ने न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर दिया जवाब, जानें क्या कहा

देश  कर्मचारी पेंशन योजना यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत मिलने वाली पेंशन बढ़ाने की लंबे समय से चल रही मांग एक बार फिर संसद में उठी, लेकिन सरकार ने इस पर फिलहाल कोई ठोस राहत देने के संकेत नहीं दिए हैं। EPFO: न्यूनतम पेंशन बढ़ोतरी पर सरकार ने दिया जवाब, कर्मचारियों के लिए खबर EPFO Pension: कर्मचारी पेंशन योजना यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत मिलने वाली पेंशन बढ़ाने की लंबे समय से चल रही मांग एक बार फिर संसद में उठी, लेकिन सरकार ने इस पर फिलहाल कोई ठोस राहत देने के संकेत नहीं दिए हैं। लोकसभा में श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने साफ कहा कि अभी न्यूनतम पेंशन बढ़ाने या किसी नई सिफारिश को लागू करने की योजना नहीं है। क्या है डिटेल दरअसल, यह मुद्दा सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन ने लोकसभा में उठाया था। उन्होंने सरकार से पूछा था कि क्या उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों पर कोई कार्रवाई होगी, क्या न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर विचार हो रहा है, और क्या पेंशनर्स को ज्यादा समय दिया जाएगा ताकि वे उच्च पेंशन के लिए जरूरी रकम जमा कर सकें। सरकार ने क्या कहा सरकार ने अपने जवाब में कहा कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) एक “परिभाषित अंशदान-परिभाषित लाभ” स्कीम है। इसका मतलब है कि पेंशन फंड कर्मचारियों के नियोक्ता के 8.33% योगदान और केंद्र सरकार के 1.16% योगदान से बनता है (जो अधिकतम ₹15,000 सैलरी तक लागू है)। इसी फंड से सभी पेंशन दी जाती है, इसलिए इसकी वित्तीय स्थिति को संतुलित रखना जरूरी है। न्यूनतम पेंशन पर बातचीत न्यूनतम पेंशन को लेकर सरकार ने फिर दोहराया कि अभी भी ₹1,000 प्रति महीने की पेंशन दी जा रही है, जो बजट से अतिरिक्त सहायता के रूप में दी जाती है। हालांकि, इसे बढ़ाने को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की गई। पेंशनर्स की मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम ₹7,500 किया जाए, क्योंकि महंगाई के इस दौर में ₹1,000 बेहद कम मानी जा रही है। उच्च पेंशन के मामले में सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया। 31 जनवरी 2025 तक करीब 15.24 लाख आवेदन मिले थे, जिनमें से 99% से ज्यादा मामलों का निपटारा हो चुका है। पात्र लोगों को डिमांड लेटर भेजे जा चुके हैं और जिन्होंने पैसे जमा कर दिए हैं, उन्हें PPO भी जारी किया जा रहा है। जहां तक अतिरिक्त समय देने की बात है, सरकार ने साफ किया कि डिमांड लेटर मिलने के बाद पेंशनर्स को केवल 3 महीने का समय दिया जाता है, और फिलहाल इस अवधि को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। कुल मिलाकर, सरकार का रुख यही है कि पेंशन बढ़ाने से पहले फंड की दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखना जरूरी है।

गुजरात के यूनिफॉर्म सिविल कोड में एक से ज्यादा शादी पर 7 साल की सजा, लिव इन के कई नए नियम

देहरादून  उत्तराखंड के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित गुजरात में भी अब यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होने जा रहा है। बुधवार को हुई गुजरात कैबिनेट की बैठक में यूसीसी विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गई और विधानसभा सचिवालय को भेज दिया गया है। सरकार मौजूदा सत्र में ही इसे पारित कराना चाहती है। यूनिफॉर्म सिवल कोड 2026 बिल सदन से पारित होने के बाद राज्य में सभी समुदायों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव इन रिलेशनशिप के नियम एक जैसे होंगे। हालांकि, आदिवासियों की अच्छी आबादी वाले राज्य में अनुसूचित जनजाति (STs) को इसके दायरे से बाहर रखा जा सकता है। शादी की रस्में धार्मिक रीति-रिवाजों के मुताबिक होंगी, लेकिन प्रस्तावित विधेयक में विवाह और तलाक के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किया जाएगा। इसका पालन नहीं करने पर 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है। उत्तराखंड की तरह ही गुजरात में भी लिव इन रिलेशनशिप को कानूनी दायरे में लाने की व्यवस्था की जाएगी। लिव इन पर और क्या नियम जिला रजिस्ट्रार के पास लिव इन के दोनों पार्टनर को अपने रिश्ते को पंजीकृत करना होगा। ना सिर्फ लिव-इन में साथ रहने को बल्कि अलग होने के फैसले को भी नोटिफाई करना होगा। ऐसे रिश्ते से यदि किसी बच्चे का जन्म होगा तो उसे वैधता होगी और सभी अधिकार प्राप्त होंगे। यदि किसी महिला को उसका लिव इन पार्टनर छोड़ता है तो वह गुजरा भत्ता मांगने की हकदार होगी। शादी की उम्र एक, बहुविवाह पर सजा सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी की उम्र भी समान होगी। मसौदे के मुताबिक, पुरुषों के लिए यह उम्र न्यूनतम 21 और महिलाओं के लिए 18 रखी गई है। यदि दोनों भागीदारों में से कोई एक भ्रामक जानकारी प्रदान करता है तो विवाह को रद्द करने योग्य माना जाएगा। यूसीसी में बहुविवाह पर रोक का प्रावधान भी किया गया है। यदि कोई शख्स कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी या तीसरी शादी करता है, अथवा एक से अधिक पत्नियां रखता है तो उसे सात साल तक की जेल हो सकती है। उत्तराधिकार पर क्या उत्तराधिकार को लेकर भी सभी धर्मों के लोगों के लिए एक जैसे नियम होंगे। मौसदे में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति वसीयत नहीं बनाता है तो उस स्थिति में उत्तराधिकारियों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी, द्वितीय श्रेणी के उत्तराधिकारी और अन्य रिश्तेदार। प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों में पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता शामिल होंगे। द्वितीय श्रेणी के उत्तराधिकारियों में सौतेले माता-पिता, दादा-दादी और नाना-नानी शामिल होंगे। अन्य रिश्तेदारों में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के व्यक्तियों के अलावा अन्य व्यक्ति शामिल होंगे।

नई FASTag नियमों के तहत टोल न कटने पर दोगुना जुर्माना, सरकार ने कड़ा फैसला लिया

नई दिल्ली हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार ने FASTag rules में बदलाव करते हुए नया सख्त नियम लागू किया है। अब अगर टोल प्लाजा पर किसी कारण से FASTag से भुगतान नहीं हो पाता है, तो वाहन मालिक को तय समय में भुगतान करना जरूरी होगा, वरना दोगुना जुर्माना देना पड़ेगा। 72 घंटे में भुगतान नहीं किया तो देना होगा डबल चार्ज नए नियम के अनुसार, अगर कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए बैरियर-फ्री टोल प्लाजा से गुजर जाता है और 72 घंटे के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाता, तो उस पर दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यानी अगर आपने समय पर भुगतान नहीं किया, तो आपको मूल टोल से दो गुना रकम चुकानी पड़ेगी। क्यों लाए गए ये नए नियम? सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बिना भुगतान के टोल पार करने वालों पर रोक लगे और डिजिटल टोल सिस्टम को और मजबूत किया जा सके। नियमों का पालन सुनिश्चित हो। यह बदलाव नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन के तहत लागू किया गया है। टोल एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि टोल एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर किसी उपभोक्ता की शिकायत पर टोल एजेंसी 5 दिनों के अंदर कार्रवाई नहीं करती है तो उस मामले में बकाया टोल की मांग अपने आप खत्म हो जाएगी। यानी अगर गलती एजेंसी की है और समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आपको राहत मिल सकती है। क्या है 'अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क'? संशोधित नियमों में 'अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यह वह टोल है जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली द्वारा वाहन के गुजरने की पुष्टि के बावजूद प्राप्त नहीं होता है। ऐसे मामलों में, पंजीकृत वाहन मालिकों को एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें वाहन का विवरण, टोल पार करने की तारीख और स्थान, और देय राशि की जानकारी होगी। ये नोटिस एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से भेजे जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन डेटाबेस 'वाहन' से जोड़ा जाएगा, ताकि बकाया राशि वाले वाहनों की आसानी से पहचान की जा सके। FASTag यूजर्स के लिए जरूरी सलाह FASTag में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें। ट्रांजैक्शन अलर्ट चेक करते रहें। कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। 72 घंटे के अंदर भुगतान जरूर करें। कुल मिलाकर, सरकार ने टोल वसूली को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इससे जहां नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, वहीं सही यूजर्स को भी सुरक्षा और राहत मिलेगी।

ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का सुनहरा मौका: पीएम मोदी ने दुनियाभर के निवेशकों से की अपील

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक निवेशकों से भारत के बिजली क्षेत्र में 'उत्पादन, निवेश, नवाचार और विस्तार' करने का आह्वान किया। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026' के पहले दिन केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल द्वारा पढ़े गए एक लिखित संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "मैं वैश्विक समुदाय को भारत में निर्माण करने, नवाचार करने, निवेश करने और भारत के साथ आगे बढ़ने के लिए आमंत्रित करता हूं। मुझे विश्वास है कि यह समिट सार्थक संवाद और मजबूत साझेदारी को बढ़ावा देगा, जो भारत की प्रगति को ऊर्जा देगा।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस समिट का उद्देश्य पूरे पावर और एनर्जी सेक्टर को एक मंच पर लाना है ताकि विचारों का आदान-प्रदान हो, सहयोग बढ़े और क्षेत्र के विकास के लिए साझा दिशा तय की जा सके। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सतत विकास के साथ आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाने, वैश्विक कनेक्टिविटी मजबूत करने और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है और सभी तक भरोसेमंद बिजली पहुंच सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने पहले ही 50 प्रतिशत से ज्यादा गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल कर ली है और 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। पीएम मोदी ने 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' जैसी पहल का जिक्र करते हुए कहा कि यह वैश्विक सहयोग की दिशा में भारत के विजन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत मजबूत सप्लाई चेन, बैटरी निर्माण, ग्रीन जॉब्स और सुधारों के जरिए एक भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बन रहा है। 'शांति एक्ट 2025' से न्यूक्लियर एनर्जी के नए अवसर खुल रहे हैं, जबकि 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के जरिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है और टिकाऊ खपत को प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने लिखित संदेश में कहा कि बिजली वितरण क्षेत्र में हुए सुधारों से नुकसान (एटी एंड सी लॉस) कम हुआ है और वित्तीय स्थिति में सुधार आया है, जिससे यह सेक्टर और अधिक मजबूत और निवेश के लिए आकर्षक बन गया है।

कतर गैस प्लांट हमला: फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों अलर्ट, ईरान के विदेश मंत्री ने जताया दुख

तेहरान ईरान में सैन्य संघर्ष को 20 दिन हो गए हैं। 19वें दिन इजरायल ने पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर के गैस प्लांट पर हमला किया। कई देशों ने इसकी निंदा की। फ्रांस के राष्ट्रपति ने भी इस पर फिक्र जाहिर की और ऐसा न करने की अपील भी की। उनके इस आग्रह में कुछ ऐसा था जो ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने मैक्रों के रवैये को 'दुखद' करार दिया। अराघची ने लिखा, "मैक्रों ने ईरान पर इजरायल-यूएस के हमले की निंदा में एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने इजरायल की तब भी निंदा नहीं की थी, जब उसने तेहरान में ईंधन के गोदाम को उड़ा दिया था, जिससे लाखों लोग जहरीले पदार्थों के संपर्क में आ गए थे। अभी भी जो उन्होंने चिंता जाहिर की है उसमें गैस ठिकाने का जिक्र तक नहीं है, जिसके बाद हमने (ईरान) जवाबी कार्रवाई की। ये वाकई दुखद है!" ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इमैनुएल मैक्रों की उस पोस्ट का जवाब दिया जिसमें उन्होंने बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने की अपील की थी। मैक्रों ने अपने पोस्ट में कहा था, " ईरान और कतर में गैस उत्पादन सुविधाओं पर हुए हमलों के बाद, मैंने कतर के अमीर और राष्ट्रपति ट्रंप से बात की।" उन्होंने बुनियादी ढांचों को निशाना बनाए जाने को गलत ठहराते हुए आगे कहा, "बुनियादी ढांचे—विशेष रूप से ऊर्जा और जल आपूर्ति सुविधाओं—को निशाना बनाने वाले हमलों पर बिना किसी देरी के रोक लगाना हमारे साझा हित में है। आम लोगों और उनकी बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को भी सैन्य तनाव से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।" दरअसल, 18 मार्च को इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट 'रास लफान' पर हमला किया था, जिसे दुनिया के कई देश गलत मान रहे हैं। वहीं, 12 मुस्लिम देशों ने खुलकर इसकी आलोचना की। सऊदी की राजधानी रियाद में हुई बैठक के बाद बयान जारी किया गया, जिसमें सऊदी अरब, कतर और यूएई समेत कई देश शामिल हुए। इन देशों ने कहा कि रियाहशी इलाकों पर ईरान का हमला बिल्कुल गलत है और इसे किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। वहीं, सऊदी ने भी ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। सऊदी के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने दावा किया कि उनका देश ईरान को जवाब देने की पूरी ताकत रखता है। ईरान हमारे सब्र का इम्तिहान न लें।