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पति का दर्द: ‘दूसरी पत्नी और बेटे के साथ फरार हो गई’, रोते हुए सुनाई आपबीती

 बीड महाराष्ट्र के बीड जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी दूसरी पत्नी पर अपने पहले विवाह से हुए नाबालिग बेटे के साथ फरार होने का आरोप लगाया है. इस संबंध में पीड़ित व्यक्ति ने रविवार को कैज थाने में शिकायत दर्ज कराई।  शिकायतकर्ता के अनुसार, उसकी पहली पत्नी से दो बेटे और दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है. करीब चार साल पहले उसने दूसरी शादी की थी. उसने पुलिस को बताया कि वह इस सप्ताह की शुरुआत में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुंबई गया हुआ था, इसी दौरान उसकी दूसरी पत्नी और उसका नाबालिग बेटा अचानक घर से गायब हो गए. पीड़ित व्यक्ति ने कहा, 'सर मेरी दूसरी पत्नी नाबालिग बेटे के साथ फरार हो गई है।  मामले में एक नया मोड़ तब आया जब उसके दामाद को हैदराबाद यातायात पुलिस द्वारा जारी एक ई-चालान मिला, जो सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा था. इसके बाद शिकायतकर्ता ने आशंका जताई कि उसकी दूसरी पत्नी और नाबालिग बेटा दामाद की मोटरसाइकिल लेकर फरार हुए हैं।  पुलिस के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और महिला तथा नाबालिग की तलाश के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 

आप अनपढ़ हैं, शक्तियां नहीं जानते: HC ने कलेक्टर को कड़ी फटकार लगाई

भरूच गुजरात हाई कोर्ट ने  भरूच के जिला कलेक्टर को जबरदस्त फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आप कलेक्टर हैं, लेकिन आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आपको उन नियमों की जानकारी नहीं है जिनका पालन आपको करना चाहिए। आपको तो अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी पता नहीं है। मामला एक जनहित याचिका के जवाब से जुड़ा था। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक जनहित याचिका के जवाब में एक अस्पष्ट हलफनामा दायर करने के लिए गुजरात हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भरूच के जिला कलेक्टर को फटकार लगाई। याचिका में अमोनियम नाइट्रेट भंडारण इकाइयों द्वारा सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन राय की बेंच ने कहा कि कलेक्टर अनपढ़ हैं। उन्हें संबंधित नियमों की जानकारी नहीं हैं। यहां तक कि उन्हें अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी कोई ज्ञान नहीं था। अमोनियम नाइट्रेट के भंडारण से जुड़ा मामला चीफ जस्टिस ने कहा कि तो आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आप कलेक्टर हैं, लेकिन आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आपको उन नियमों की जानकारी नहीं है, जिनका पालन आपको करना चाहिए। आपको अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी पता नहीं है। कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिले में अमोनियम नाइट्रेट (विस्फोटक पदार्थ) के भंडारण और प्रोसेसिंग में लगी औद्योगिक इकाइयां जरूरी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इस मामले के केंद्र में मौजूद इस केमिकल को भारतीय कानून के तहत लंबे समय से एक खतरनाक पदार्थ माना जाता रहा है। इसे खतरनाक रसायनों के निर्माण, भंडारण और आयात नियम, 1989 के तहत सूचीबद्ध किया गया है, जिन्हें भोपाल गैस त्रासदी के बाद बनाया गया था। यह अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 द्वारा भी शासित होता है। किसी भी तरह की चूक के विनाशकारी परिणाम होंगे याचिका के अनुसार, इन नियमों में सख्त लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही इसके निर्माण, भंडारण, परिवहन और संचालन के लिए विस्तृत सुरक्षा उपाय निर्धारित किए गए हैं, क्योंकि यह अत्यधिक विस्फोटक पदार्थ है। याचिका के अनुसार, इन नियमों का प्रवर्तन मुख्य रूप से पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) के अधीन कार्यरत मुख्य विस्फोटक नियंत्रक, जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) और स्थानीय पुलिस के अधीन है। याचिका में चेतावनी दी गई कि नियमों के पालन में किसी भी तरह की चूक के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। विशेष रूप से उन सघन औद्योगिक क्षेत्रों में जहां अमोनियम नाइट्रेट की बड़ी मात्रा को अन्य खतरनाक कार्यों और रिहायशी इलाकों के बेहद करीब ही संभाला जाता है। कलेक्टर द्वारा पेश किया गया हलफनामा खारिज कोर्ट ने कलेक्टर द्वारा पेश किए गए हलफनामे को खारिज कर दिया और यह टिप्पणी की कि 2012 के नियमों से पहले भी अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक नियम 2008 के नियामक दायरे में आता था। पुरानी इकाइयों के लिए सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी नहीं की जा सकती थी। कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि क्या राज्य ने उन पिछली रिपोर्टों पर कोई कार्रवाई की थी, जिनमें मानदंडों के उल्लंघन का खुलासा हुआ था। हलफनामे में दिया गया यह बयान अस्पष्ट है, क्योंकि इसमें यह साफ नहीं है कि कौन सी इकाई निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही थी। ऐसा लगता है कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है और न ही जिला कलेक्टर के शपथ-पत्र में ऐसा कुछ है जिससे यह पता चले कि 19 मार्च 2025 और 23 मार्च 2026 की रिपोर्टों पर जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर द्वारा कोई कार्रवाई की गई हो। कोर्ट ने वकील की आलोचना की कोर्ट ने अधिकारियों द्वारा पेश एक नई रिपोर्ट पर संदेह व्यक्त किया, क्योंकि यह बिना किसी उचित स्पष्टीकरण के उल्लंघन से संबंधित पिछली निष्कर्षों के उलट थी। इसके अलावा, कोर्ट ने राज्य के एक वकील की आलोचना की, जिन्होंने उसके समक्ष इतना अस्पष्ट हलफनामा दायर किया था। कोर्ट ने कहा कि आप अधिकारियों के मुखपत्र नहीं हैं। इस तरह का हलफनामा दायर करके आप अधिकारियों के मुखपत्र बन जाते हैं, जबकि आप एक वकील हैं। आप हमें हल्के में ले नहीं सकते कोर्ट ने कहा कि हम सब्र रख रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमें हल्के में ले सकते हैं। जब वकील ने हलफनामा वापस लेने और उसकी जगह नया हलफनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी तो अदालत ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हम आपको इसे यूं ही वापस लेने की अनुमति नहीं देंगे। मुख्य मुद्दा केवल यह नहीं था कि कौन से नियम लागू होते हैं, बल्कि यह था कि क्या विस्फोटक के भंडारण के लिए निर्धारित सुरक्षा मानदंडों का वास्तव में पालन किया जा रहा था। कलेक्टर को निर्देश दिया इसके बाद कोर्ट ने अंकलेश्वर के मामलतदार और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे समय-समय पर लागू नियमों को ध्यान में रखते हुए प्रतिवादी इकाइयों का एक नया निरीक्षण करें। कोर्ट ने कलेक्टर को यह भी निर्देश दिया कि वे इन निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से जांच करें। यदि कोई उल्लंघन पाया जाता है तो की गई कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ एक नया हलफनामा दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई जून में होगी।

भारत को मिला बड़ा खजाना, तेल संकट के बीच 42.5 टन सोने का भंडार और डॉलर की बारिश का अनुमान

नई दिल्‍ली  भारत में सोने के प्रति दीवानगी सदियों पुरानी है. भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ताओं में से एक है. हम हर साल 800 टन से अधिक सोना विदेशों से आयात (Import) करते हैं. सोने के मामले में देश को आत्‍मनिर्भर बनाने के प्रयास कई सालों से हो रहे हैं. इसमें सफलता भी मिली है. इसी कड़ी में अब आंध्र प्रदेश के कर्नूल (Kurnool) जिले में देश की पहली प्राइवेट गोल्‍ड माइन मई में शुरू होने वाली है. जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Geomysore Services India Pvt Ltd) की जोन्नागिरी गोल्ड परियोजना भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी सोने की खान है।  इस परियोजना का प्रोसेसिंग प्लांट (Processing Plant) मई के पहले सप्ताह में पूरी तरह सक्रिय होने जा रहा है. वर्तमान में यहां प्री-कमर्शियल ऑपरेशंस चल रहे हैं. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किए जाने की उम्मीद है. राज्य के खनन एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मीना ने इसे भारत की व्यापक स्वर्ण खनन महत्वाकांक्षाओं के लिए एक ‘ऐतिहासिक क्षण’ करार दिया है।  42.5 टन सोना होने का अनुमान एक रिपोर्ट के अनुसार, जोन्नागिरी, एर्रागुडी (Erragudi) और पागिदिरायी (Pagidirayi) गांवों में 598 हेक्टेयर क्षेत्र में सोने का 13.1 टन प्रमाणित भंडार (Certified Reserves) है. यहां कुल 42.5 टन तक होने सोना होने की संभावना जताई गई है. जब यह खदान अपनी पीक क्षमता (Peak capacity) पर होगी, तब यहां से हर साल करीब 1,000 किलोग्राम शुद्ध सोना निकाला जा सकेगा. यह सिलसिला अगले 15 वर्षों तक निरंतर जारी रहने की उम्मीद है।  400 करोड़ का निवेश इस पूरे प्रोजेक्ट में 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है. इसे त्रिवेणी अर्थमूवर्स एंड इंफ्रा (Thriveni Earthmovers & Infra) और डेक्कन गोल्ड (Deccan Gold) जैसी दिग्गज कंपनियों का समर्थन प्राप्त है. जोन्नागिरी परियोजना अकेले इस विशाल आयात को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती, लेकिन यह घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक बहुत बड़ा संरचनात्मक बदलाव है।  हुट्टी गोल्ड माइंस (Hutti Gold Mines) जैसे वर्तमान सरकारी संयंत्र सालाना केवल 1.5 टन उत्पादन कर पाते हैं, जबकि प्रसिद्ध कोलार गोल्ड फील्ड्स (Kolar Gold Fields – KGF) साल 2000 में ही बंद हो चुके हैं. ऐसे में जोन्नागिरी जैसी निजी परियोजनाओं का सफल होना एक सकारात्मक संदेश है।  अत्याधुनिक तकनीक से खनन जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स में इन दिनों आधुनिक मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों की गूंज सुनाई देती है. महज 13 महीनों के रिकॉर्ड समय में इस प्रोसेसिंग प्लांट को तैयार किया गया है. त्रिवेणी अर्थमूवर्स के प्रबंध निदेशक बी. प्रभाकरन का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत में ‘जिम्मेदार और प्रतिस्पर्धी खनन’ का एक वैश्विक मॉडल पेश करता है. जियोमैसूर के निदेशक हनुमा प्रसाद मोदाली का कहना है कि इस सफलता से भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी निजी निवेश का रास्ता साफ होगा। 

Google Chrome यूजर्स सावधान! एक क्लिक से हो सकता है सिस्टम हैक, जारी हुआ हाई अलर्ट

नई दिल्ली  भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने Google Chrome उपयोगकर्ताओं के लिए गंभीर अलर्ट जारी किया है। एजेंसी ने ब्राउजर में पाई गई कई तकनीकी कमजोरियों को “हाई रिस्क” श्रेणी में रखा है। इन खामियों का फायदा उठाकर साइबर अपराधी किसी भी यूजर के सिस्टम पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और संवेदनशील डेटा तक पहुंच बना सकते हैं। ऐसे में यह चेतावनी हर इंटरनेट यूजर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। यह खतरा खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा गंभीर है जो विंडोज, मैकओएस और लिनक्स जैसे डेस्कटॉप प्लेटफॉर्म पर ब्राउजर का उपयोग करते हैं। व्यक्तिगत यूजर्स के साथ-साथ कंपनियां और संस्थाएं भी इस जोखिम के दायरे में हैं। यानी जो भी व्यक्ति अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर इंटरनेट ब्राउजिंग करता है, उसे तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। कैसे होता है साइबर अटैक? एजेंसी के मुताबिक, ब्राउजर (Google Chrome) के कई अहम हिस्सों में गंभीर कमजोरियां पाई गई हैं। इनमें वेब ऑडियो, वेबआरटीसी और मीडिया कंपोनेंट्स में ‘यूज-आफ्टर-फ्री’ जैसी त्रुटियां शामिल हैं। इसके अलावा V8 JavaScript Engine और CSS प्रोसेसिंग में ‘टाइप कन्फ्यूजन’ जैसी समस्याएं सामने आई हैं। साथ ही रेंडरिंग इंजन Blink में ‘आउट-ऑफ-बाउंड्स रीड/राइट’ जैसी खामियां पाई गई हैं, जो सिस्टम की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं। इन कमजोरियों का असर डाउनलोड, डेवलपर टूल्स और नेविगेशन जैसे फीचर्स पर भी देखा गया है। इन खामियों का फायदा उठाने के लिए हैकर्स को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। वे यूजर को किसी फर्जी या संदिग्ध वेबसाइट पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे ही यूजर उस लिंक पर जाता है, ब्राउजर की कमजोरियां सक्रिय हो जाती हैं और हमलावर सिस्टम में घुसपैठ कर सकता है। इसके बाद डेटा चोरी, सिक्योरिटी बायपास या सिस्टम क्रैश जैसी घटनाएं हो सकती हैं। तुरंत उठाएं ये जरूरी कदम साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि सभी यूजर्स तुरंत अपने ब्राउजर (Google Chrome) को अपडेट करें। कंपनी ने इन खामियों को ठीक करने के लिए नया अपडेट जारी कर दिया है। यूजर्स ब्राउजर की सेटिंग्स में जाकर “Check for Updates” विकल्प के जरिए लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल कर सकते हैं। साथ ही ऑटोमैटिक अपडेट को चालू रखना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य के सुरक्षा पैच समय पर मिलते रहें। तकनीकी अपडेट के अलावा डिजिटल व्यवहार में सावधानी भी जरूरी है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और संदिग्ध वेबसाइट्स से दूरी बनाए रखें। साइबर खतरों के इस दौर में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बन सकती है।

इजरायल का सोमालीलैंड में राजनयिक प्रतिनिधि नियुक्त करने का कदम, 16 मुस्लिम देशों ने किया विरोध

यरुशलम कतर, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की सहित 16 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को दोहा में एक संयुक्त बयान जारी कर सोमालीलैंड में इजरायल द्वारा राजनयिक प्रतिनिधि की नियुक्ति की कड़ी निंदा की है. इन देशों ने कहा है कि इजरायल का यह फैसला सोमालिया संघीय गणराज्य की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सीधा उल्लंघन है।  इस्लामिक देशों ने अपने बयान में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के खिलाफ उठाया गया यह कदम एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है. मंत्रियों ने दोहराया कि केवल सोमालिया के वैध राज्य संस्थान ही वहां की जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करते हैं।  इस विरोध में कतर, कुवैत, सऊदी अरब, मिस्र, सोमालिया, सूडान, लीबिया, बांग्लादेश, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, तुर्की, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मॉरिटानिया, जॉर्डन और ओमान के विदेश मंत्री शामिल रहे. उन्होंने किसी भी ऐसे एकतरफा कदम को खारिज कर दिया जो राज्यों की एकता को कमजोर करता है।  'क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा…' संयुक्त बयान में जोर दिया गया है कि इजरायल का यह फैसला अफ्रीकी संघ के संविधान अधिनियम का उल्लंघन करता है. देशों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की कार्रवाइयों से हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. 16 देशों ने सोमालिया की एकता के प्रति अपने अटूट समर्थन को फिर से दोहराया है।  सोमालीलैंड को लेकर इजरायल के इस कदम ने राजनयिक गलियारों में कड़वाहट पैदा कर दी है. कतर के विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, सोमालीलैंड को 'तथाकथित' क्षेत्र बताते हुए इजरायली दूत की नियुक्ति को अवैध माना गया है. मुस्लिम देशों का तर्क है कि यह एकतरफा कार्रवाई सोमालिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है और वैश्विक मंच पर इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।  हॉर्न ऑफ अफ्रीका में शांति की अपील विदेशी मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे सोमालिया की संप्रभुता का सम्मान करें. उन्होंने कहा कि इजरायल की इस पहल से क्षेत्र में चल रही शांति की कोशिशों को धक्का लग सकता है. इन 16 देशों ने एकजुट होकर कहा कि वे सोमालिया की अखंडता को बचाने के लिए हर मुमकिन कूटनीतिक कोशिश जारी रखेंगे और ऐसे किसी भी दूत को मान्यता नहीं दी जाएगी। 

चुनाव प्रचार के दौरान PM मोदी ने लिया झालमुड़ी का स्वाद, बोले—‘भाई, कितने की है?’

बिष्णुपुर. पश्चिम बंगाल में ताबड़तोड़ चुनावी रैलियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थानीय लोकप्रिय स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का आनंद लिया। पुरुलिया, झाड़ग्राम, मेदिनीपुर और बिष्णुपुर में लगातार चार रैलियों के बाद वह झाड़ग्राम में एक छोटी सी दुकान के पास रुके, जहां उन्होंने झालमुड़ी खाई और आसपास मौजूद लोगों को भी यह नाश्ता बांटा। इस दौरान पीएम मोदी का यह सहज अंदाज लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया। दुकान पर मौजूद नमकीन और मुरमुरे से भरे कंटेनरों के बीच जैसे ही उनके रुकने की खबर फैली, वहां भीड़ उमड़ पड़ी। आसपास मौजूद लोग उत्साह के साथ इस पल को देखते नजर आए और कई लोग अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो बनाते दिखे। प्रधानमंत्री ने एक्स पर शेयर किया वीडियो पीएम मोदी ने इस पल की झलक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा की। उन्होंने लिखा, 'पश्चिम बंगाल में व्यस्त रविवार के बीच चार रैलियों के दौरान झाड़ग्राम में स्वादिष्ट झालमुड़ी का आनंद लिया।' इस दौरान वह अपने पारंपरिक परिधान (सफेद कुर्ता, नीली जैकेट और बीजेपी के प्रतीक कमल वाले लाल गमछे) में नजर आए। वीडियो में दिख रहा है कि पीएम मोदी दुकान पर पहुंचते हैं और कहते हैं कि भाई हमें अपना झालमुड़ी खिलाओ। कितने का है? अच्छे वाला कितने का है? इस पर दुकानदार जवाब देता है कि 10, 20 रुपये में है। पीएम मोदी कहते हैं कि जो भी है उसे बना दो। प्रधानमंत्री उसे 10 रुपये देते हैं मगर दुकानदार लेने से मना करता है और अंत में उनके कहने पर नोट रख लेता है। इसके बाद वह आसपास मौजूद लोगों को भी झालमुड़ी खिलाते हैं।

ईरान का ट्रंप पर हमला, खामेनेई के आदेश पर होर्मुज खोला जाएगा, न कि ‘इडियट’ के कहने पर

तेहरान  ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक विवाद अब व्यक्तिगत हमलों और सोशल मीडिया वॉर में बदल गया है। दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने एक वायरल समुद्री ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इडियट (मूर्ख) करार दिया है। इस तीखे हमले ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत एक वायरल वीडियो और ऑडियो क्लिप से हुई, जो कथित तौर पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना और समुद्र में मौजूद जहाजों के बीच रेडियो संचार की है। इस रिकॉर्डिंग में ईरानी नौसेना का एक अधिकारी इडियट शब्द का इस्तेमाल करता सुनाई दे रहा है। शुरुआत में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि ईरानी अधिकारी ने अपने ही विदेश मंत्री के लिए इस शब्द का प्रयोग किया है। ईरानी दूतावास का तीखा पलटवार इन दावों को खारिज करते हुए दक्षिण अफ्रीका में ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद कड़ा और सीधा पोस्ट किया। दूतावास ने लिखा, "ओ बेवकूफ, उसका मतलब तुम्हारे 'इडियट' राष्ट्रपति ट्रंप से था। बस गूगल पर 'इडियट' सर्च करके देख लो, तुम्हें समझ आ जाएगा कि वह कौन है।" दूतावास का यह बयान सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाता है, जो अक्सर सोशल मीडिया के जरिए अपनी विदेश नीति और घोषणाएं साझा करते रहते हैं। ऑडियो क्लिप में क्या था? मैरीटाइम चैनल 16 पर प्रसारित इस रेडियो संदेश में IRGC नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों को सख्त चेतावनी दी थी। संदेश में कहा गया, "यह चैनल 16 पर ईरानी सिपह नौसेना की कॉल है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी बंद है। हम इसे हमारे इमाम खामेनेई के आदेश पर खोलेंगे, न कि किसी 'इडियट' के ट्वीट्स के आधार पर।" यह संदेश स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति ट्रंप के उन हालिया ट्वीट्स और बयानों पर कटाक्ष था, जिनमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह खुले होने का दावा किया था। आम तौर पर दूतावास और राजनयिक मिशन इस तरह की अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल से बचते हैं, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी ने ईरान के रुख को और अधिक आक्रामक बना दिया है। ईरान का यह हमला दर्शाता है कि वह कूटनीतिक मेज के साथ-साथ नैरेटिव की लड़ाई में भी पीछे नहीं हटना चाहता। इस निजी हमले के बाद फिलहाल वाइट हाउस या राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कमला हैरिस का आरोप, नेटन्याहू ने ट्रंप को ईरान युद्ध में घसीटा, ‘एपस्टीन फाइल्स’ से ध्यान भटकाने की कोशिश

वॉशिंगटन  अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ सैन्य संघर्ष में 'खींच लिया' और इसे 'एपस्टीन फाइल्स' से ध्यान भटकाने की एक 'कमजोर कोशिश' बताया।  मिशिगन डेमोक्रेटिक वीमेन कॉकस द्वारा शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कमला हैरिस ने इन शत्रुताओं को एक ऐसे युद्ध के रूप में बताया जिसे 'अमेरिकी लोग नहीं चाहते.' डेट्रॉइट में अपने संबोधन के दौरान, हैरिस ने प्रशासन के इरादों की और भी कड़ी आलोचना की और ट्रंप पर 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का इस्तेमाल घरेलू विवादों से ध्यान भटकाने के लिए करने का आरोप लगाया. उन्होंने मौजूदा नेतृत्व को अमेरिका के इतिहास का 'सबसे भ्रष्ट, संवेदनहीन और अक्षम' प्रशासन करार दिया।  प्रेसिडेंट के लीडरशिप स्टाइल के बारे में बताते हुए हैरिस ने कहा कि ट्रंप 'ऐसे घूमना चाहते हैं जैसे वह मजबूत हों और जिसे चाहें उसके खिलाफ अमेरिका की मिलिट्री की ताकत का इस्तेमाल करेंगे.' उन्होंने कहा कि यह तरीका विदेश नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव दिखाता है और दावा किया कि वह 'दूसरे विश्व युद्ध के बाद से किसी भी पार्टी के अमेरिका के पहले प्रेसिडेंट हैं जिन्होंने अमेरिका की जिम्मेदारी छोड़ दी है. हमारे गठबंधनों, हमारी दोस्ती को बढ़ावा देने और बचाने की।  पूर्व उप-राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक मानकों की अनदेखी करने वाले प्रशासन ने देश की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप ऐसे पहले नेता हैं जिन्होंने 'अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों, जैसे कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के महत्व का दिखावा भी नहीं किया और असल में उसे नजरअंदाज कर दिया।  हैरिस के अनुसार इन कदमों ने अमेरिका को उसके सहयोगियों की नजर में 'अविश्वसनीय' बना दिया है और कुछ खास मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए हमारे पास जो भी प्रभाव था, उसे छीन लिया है.' विदेश नीति और सैन्य भागीदारी से हटकर उन्होंने अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और प्रजनन अधिकारों जैसे घरेलू मुद्दों पर भी बात की।  चुनावी राजनीति की ओर बढ़ते हुए हैरिस ने डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावनाओं पर भरोसा जताया और कहा कि उन्हें विश्वास है कि पार्टी नवंबर में होने वाले आगामी मध्यावधि चुनावों में जीत हासिल करेगी। 

तमिलनाडु हादसा: विरुधुनगर की पटाखा फैक्ट्री में भीषण ब्लास्ट, 18 जिंदगियां बुझीं

नई दिल्ली. तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 1 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे में अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। कैसे हुआ हादसा? एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विस्फोट फैक्ट्री के अंदर अचानक हुआ, जिसके बाद तेज धमाकों की आवाज दूर-दूर तक सुनी गई। विस्फोट इतना जोरदार था कि फैक्ट्री का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया और आग तेजी से फैल गई। राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम जारी है। कैसे हुआ हादसा? शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि पटाखा बनाने के दौरान सुरक्षा मानकों में लापरवाही या केमिकल के गलत हैंडलिंग के कारण यह विस्फोट हो सकता है। हालांकि, घटना के असल कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने घटना पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच की जा रही है। तमिलनाडु में विरुधुनगर और शिवकाशी क्षेत्र पटाखा उद्योग के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां पहले भी कई बार इस तरह के हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है।

BJP का बड़ा कदम, दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का नया उच्चायुक्त नियुक्त किया

नई दिल्ली  भारत सरकार बांग्लादेश में अपने नए उच्चायुक्त के तौर पर वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को नियुक्त कर सकती है. सूत्रों के अनुसार मौजूदा उच्चायुक्त प्रणय वर्मा का तबादला ब्रसेल्स किया जा सकता है और उनकी जगह त्रिवेदी को ढाका भेजने की तैयारी है. यह नियुक्ति ऐसे समय में सामने आई है जब भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को लेकर कई अहम मुद्दों पर बातचीत जारी है और दोनों देश रिश्तों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।  द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार बताया जा रहा है कि इस नियुक्ति की घोषणा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले हो सकती है. दिनेश त्रिवेदी का पश्चिम बंगाल से गहरा राजनीतिक जुड़ाव रहा है, ऐसे में इस फैसले को कूटनीतिक के साथ-साथ राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।  क्यों अहम है यह नियुक्ति?     दिनेश त्रिवेदी लंबे समय तक पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्होंने लोकसभा व राज्यसभा दोनों में प्रतिनिधित्व किया है. वे पूर्व में रेल मंत्री और स्वास्थ्य राज्य मंत्री भी रह चुके हैं. तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी भूमिका और भी अहम मानी जाती है।      भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले कुछ समय में कई घटनाओं के कारण चर्चा में रहे हैं. शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद बदले राजनीतिक हालात और नई सरकार के आने से दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है. हालांकि हाल के दौर में दोनों पक्ष संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।  क्या संदेश देना चाहती है सरकार? सरकार का यह कदम दो स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक तरफ यह बांग्लादेश के साथ कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में पहल है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी समझी जा रही है।  दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति कब तक हो सकती है? सूत्रों के अनुसार, इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है, और संभावना है कि यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले हो. हालांकि सरकार की ओर से अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।  क्या यह एक सामान्य कूटनीतिक नियुक्ति है? आमतौर पर ऐसे पदों पर करियर राजनयिकों की नियुक्ति होती है, लेकिन कभी-कभी सरकार राजनीतिक नेताओं को भी यह जिम्मेदारी देती है. इस कारण यह नियुक्ति विशेष मानी जा रही है।  भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इसका क्या असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि एक अनुभवी राजनीतिक नेता की नियुक्ति संवाद को नया आयाम दे सकती है. इससे दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और लंबित मुद्दों को सुलझाने में मदद मिल सकती है।  क्या इसका असर पश्चिम बंगाल चुनाव पर पड़ेगा? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह फैसला चुनावी माहौल में भाजपा के लिए सकारात्मक संदेश दे सकता है. इससे यह दिखाने की कोशिश होगी कि पार्टी बंगाल के नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दे रही है।