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ईरान जंग के बीच मोजतबा खामेनेई रूस पहुंचे, पुतिन ने उन्हें विमान से उड़ा लिया

मॉस्को अब तक ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर रूस की भूमिका को लेकर सिर्फ बातें की जा रही थीं लेकिन अब एक ऐसी खबर आ रही है, जो सच निकली तो ये युद्ध की दिशा बदलने वाला मोड़ होगा. डोनाल्ड ट्रंप से लेकर नेतन्याहू तक उस दिन से मोजतबा खामनेई के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं, जब से उन्हें अपने पिता की जगह ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया है. उनके घायल होने की भी खबरें आईं और ईरान की ओर से इससे इनकार भी किया गया. हालांकि अब कुवैती अखबार अल जरीदा ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई अपने देश में ही नहीं हैं।  अल जरीदा रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा को स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से एक बेहद गुप्त अभियान में रूस ले जाया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें रूसी सैन्य विमान से मॉस्को पहुंचाया गया, जहां उनका ऑपरेशन किया गया और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. बताया गया कि यह कदम उनकी खराब सेहत और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उठाया गया. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हालिया हमलों में उन्हें चोटें आई थीं, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वह सुरक्षित और ठीक हैं और उनका इलाज जारी है।  कैसे तेहरान छोड़े पहुंच गए मॉस्को? रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुरुवार को ही रूस के सैन्य विमान मोजतबा खामेनेई को लेकर मॉस्को आ गया. कहा ये भी जा रहा है कि उन्हें राष्ट्रपति भवन में मौजूद अस्पताल में भर्ती कराया गया. बमबारी और हवाई हमलों के बीच उनका इलाज असंभव होने के कारण उन्हें ईरान से निकालने का निर्णय लिया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया कि पुतिन ने उन्हें अपने यहां शरण देने की पेशकश की, जिसके बाद वे वहां पहुंचे और जाते ही उनकी सफल सर्जरी हुई. सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरानी सिक्योरिटी एजेंसीज को खामनेई की लोकेशन लीक होने का खतरा सबसे ज्यादा था, इसीलिए उन्हें मॉस्को में शिफ्ट किए जाने की सिफारिश पर सहमति जताई गई. दावा किया गया है कि खुद पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के साथ बातचीत के दौरान ये प्रस्ताव रखा था।  डोनाल्ड ट्रंप ने कहा – ‘मैंने सुना मर गए मोजतबा’ इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर सवाल उठाए उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं या नहीं. ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बीच उनके घायल होने की खबरें आईं. एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा – ‘मुझे नहीं पता कि वह जिंदा भी हैं या नहीं. अभी तक किसी ने उन्हें दिखाया नहीं है. मैं सुन रहा हूं कि शायद वह जिंदा नहीं हैं. अगर वह जिंदा हैं तो उन्हें अपने देश के लिए समझदारी दिखाते हुए आत्मसमर्पण कर देना चाहिए.’ इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि खामेनेई किसी भी रूप में जिंदा हो सकते हैं लेकिन उनकी चोटों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। 

अहमदाबाद विमान दुर्घटना: अमेरिकी एजेंसी का दावा, विमान पहले से ही खराब था

अहमदाबाद अमेरिका के एक हवाई सुरक्षा संगठन का दावा है कि अहमदाबाद विमान दुर्घटना से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज जांच अधिकारियों को दिए ही नहीं गए थे। ऐसे में इसकी जांच पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। बता दें कि जून 2025 में हुई इस दुर्घटना में कम से कम 260 लोगों की जान चली गई थी। जांचकर्ताओं को भेजे गए ईमेल में एविएशन सेफ्टी फाउंडेशन के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर ईडी पियरसन ने कहा कि उसके हाथ कई ऐसे गुप्त दस्तावेज हाथ लगे हैं जिनसे पता लगता है कि विमान दुर्घटना के पीछे इलेक्ट्रिक फेल्योर कारण था। पियरसन ने कहा कि बोइंग 787 ड्रीमलाइनर रजिस्ट्रेशन वीटी-ANB के बारे में दस्तावेजों से पता चला है कि इसके इलेक्ट्रिक सिस्टम में पहले से ही खराबी चल रही थी। उन्होंने दावा किया कि इस विमान में लंबे समय से ही शॉर्ट सर्किट, धुआं निकलने और वायरिंग में दिक्कतें आ रही थीं। पियरसन ने कहा कि दुर्घटना का शिकार हुआ विमान कई बार इलेक्ट्रिक फाल्ट की वजह से उतारा जा चुका था। कई बार इसका पी100 पावर पैनल भी बदला गया था। विमान में बाएं इंजन से इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई होती थी। पियरसन ने कहा कि इस विमान को डिजाइन मोडिफिकेशन और सॉफ्टवेयर प्रोटेक्शन की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि एएआईबी ने घटना से नौ महीने पहले से ही कोई सिफारिश नहीं की थी। उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं ने भी ऐसा नैरेटिव बना दिया जिससे कि सारी जिम्मेदारी पायलट्स पर आ गई।

तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद आसिम मुनीर के साथ पहलगाम में मचाई तबाही, अब मोस्ट वांटेड आतंकी

नई दिल्ली. दो दशक पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हाथ लगे दो आतंकवादी अब एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गए हैं. ये दोनों तिहाड़ जेल में सजा काट कर रिहा हुए थे. जांच एजेंसियों के अनुसार, ये दोनों आतंकी अब लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के मोस्ट वांटेड ऑपरेटिव बन चुके हैं और भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. खतरनाक बात यह है कि इनमें से एक लश्‍कर आतंकवादी पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों का नरसंहार करने वाले आतंकी संगठन का सरगना है. इस कहानी की शुरुआत 9 मई 2002 की एक रात से होती है. उस रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को खुफिया सूचना मिली थी कि राजधानी में बड़ा आतंकी हमला हो सकता है. खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने हुमायूं के मकबरे के पास और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन इलाके में विशेष निगरानी शुरू कर दी थी. मुंबई से आने वाली पंजाब मेल ट्रेन से उतर रहे यात्रियों की भीड़ के बीच पुलिस ने तीन संदिग्ध आतंकियों (सज्जाद, मेहराजुद्दीन और फिरोज) को गिरफ्तार कर लिया. तलाशी के दौरान इनके पास से लगभग 5 किलो RDX, एक AK-47 राइफल, दो पिस्तौल, चार डेटोनेटर, प्लास्टिक विस्फोटक सामग्री और नकदी बरामद की गई थी. दो पाकिस्‍तानी आतंकवादियों का एनकाउंटर ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आतंकियों ने पुलिस को पास में खड़ी एक मारुति कार के बारे में जानकारी दी, जिसमें दो पाकिस्तानी आतंकवादी उनका इंतजार कर रहे थे. इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की. उस समय के डीसीपी अशोक चंद, एसीपी राजबीर सिंह और इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की टीम ने मुठभेड़ में दोनों पाकिस्‍तानी आतंकियों (अबू बिलाल और अबू जाबीउल्लाह) को मार गिराया. इस मामले में गिरफ्तार सज्जाद और उसके सहयोगियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए तिहाड़ जेल भेज दिया था. लेकिन ठहरिए… यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. पांच साल बाद… करीब पांच साल बाद जुलाई 2007 में स्पेशल सेल को फिर सूचना मिली कि एक आतंकी ऑपरेटिव दिल्ली भेजा गया है. इसके बाद पुलिस ने शब्बीर अहमद लोन नामक आतंकी को गिरफ्तार किया. उसके पास से ग्रेनेड, हथियार, गोला-बारूद, 280 अमेरिकी डॉलर और एक लाख रुपये बरामद हुए थे. इसके बाद लगभग एक दशक तक सज्जाद और शब्‍बीर अहमद लोन तिहाड़ जेल में बंद रहे. दोनों की रिहाई 2018 और 2019 के आसपास हुई. जेल से बाहर आने के बाद इन दोनों की गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया. एक पाकिस्‍तान तो दूसरा गया बांग्‍लादेश जांच एजेंसियों के मुताबिक, रिहाई के बाद शब्बीर अहमद लोन पाकिस्तान भाग गया. वहां से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने उसे बांग्लादेश भेजा, जहां उसने एक नया आतंकी नेटवर्क खड़ा करना शुरू किया. हाल ही में उसके नेटवर्क के लोगों ने दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय AI शिखर सम्मेलन से पहले भड़काऊ पोस्टर चिपकाया था. इसके बाद जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए थे. सूत्रों के अनुसार, शब्‍बीर लोन इस समय बांग्लादेश में रहकर ISI के समर्थन और वित्तीय मदद से काम कर रहा है और उसका मुख्य लक्ष्य बांग्लादेशी युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलकर भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों में शामिल करना है. फिर बन गया पहलगाम हमले का मास्‍टरमाइंड दूसरी ओर, सज्जाद उर्फ शेख सज्जाद गुल भी पाकिस्तान पहुंच चुका है और अब लश्कर के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का प्रमुख ऑपरेटिव या सरगना माना जा रहा है. इसी संगठन को कई आतंकी हमलों के पीछे जिम्मेदार बताया गया है, जिनमें पहलगाम हमला भी शामिल है. इस अटैक में 27 पर्यटकों की निर्मम तरीके से हत्‍या कर दी गई थी. 1974 में जन्मे सज्जाद ने कश्मीर में शुरुआती शिक्षा प्राप्त की थी. उसने नगर से BSc. की पढ़ाई की, इसके बाद केरल में लैब टेक्नीशियन का कोर्स किया और 1996 में बेंगलुरु में एमबीए की पढ़ाई शुरू की थी. बाद में उसने कश्मीर में एक डायग्नोस्टिक सेंटर भी खोला, लेकिन इसी दौरान वह लश्कर के लिए ओवरग्राउंड वर्कर के तौर पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो गया. आसिम मुनीर के गढ़ में सज्‍जाद का ठिकाना सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पहलगाम हमले के बाद सज्जाद इस समय पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है और उसे ISI की सुरक्षा भी दी गई है. रावलपिंडी में ही पाकिस्‍तान आर्मी का मुख्‍यालय भी है, जहां आसिम मुनीर रहते हैं. भारतीय एजेंसियों ने सज्जाद और लोन दोनों को कैटेगरी-A का बेहद खतरनाक आतंकवादी घोषित किया है. दोनों पर भारी-भरकम इनाम घोषित किया गया है और इनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों आतंकियों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही है और भारत के खिलाफ किसी भी आतंकी साजिश को विफल करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां एकसाथ मिलकर लगातार कार्रवाई कर रही हैं.

बंगाल सहित 5 राज्यों में चुनावी तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग करेगा घोषणा

नई दिल्ली असम, पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों की चुनाव तारीखों का ऐलान आज हो सकता है. चुनाव आयोग ने आज शाम 4 बजे विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है. इस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पांच राज्यों की चुनाव तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। जिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई, केरल का 23 मई, तमिलनाडु का 10 मई, पश्चिम बंगाल का 7 मई और पुडुचेरी का 15 जून को खत्म हो रहा है. यानी 7 मई से पहले-पहले पांचों राज्यों में चुनाव खत्म हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी राज्यों का किया दौरा पिछले कुछ हफ्तों में चुनाव आयोग की टीम ने इन सभी राज्यों का दौरा किया था. फरवरी में असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी, 6-7 मार्च को केरल और 9-10 मार्च को पश्चिम बंगाल में तैयारियों का जायजा लिया गया. इन दौरों में राजनीतिक दलों, पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से मीटिंग हुई. आयोग ने हिंसा रोकने, मतदाता सूची सुधारने, EVM-VVPAT की जांच और CAPF तैनाती पर खास फोकस किया. मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, यह ऐलान आज ही होगा क्योंकि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के खिलाफ अपील की आखिरी तारीख 15 मार्च (आज) है और बाकी राज्यों में यह समयसीमा पहले ही खत्म हो चुकी है. राज्यों का कार्यकाल कब खत्म हो रहा है?     पश्चिम बंगाल: 7 मई 2026     तमिलनाडु: 10 मई 2026     असम: 20 मई 2026     केरल: 23 मई 2026     पुडुचेरी: 15 जून 2026   पिछली बार क्या रहे थे नतीजे?     असम: 126 सीटों के लिए पिछली बार तीन चरणों में चुनाव हुए थे. एनडीए ने 75 सीटें जीती थीं. लगातार दूसरी बार असम में बीजेपी की सरकार बनी थी।     पश्चिम बंगाल: राज्य की 294 सीटों के लिए पिछली बार 8 चरणों में चुनाव हुए थे. टीएमसी ने 215 और बीजेपी ने 77 सीटें जीती थीं. ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी थीं।     तमिलनाडु: 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में वोट डाले गए थे।  डीएमके ने 133 सीटें जीती थीं. अन्नाद्रमुक ने 66 और बीजेपी ने 5 सीटें जीती थीं. एमके स्टालिन सीएम बने थे।     केरल: 140 सीटों के लिए एक ही चरण में वोटिंग हुई थी. एलडीएफ ने 99 और यूडीएफ ने 41 सीटें जीती थीं. पिनराई विजयन लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।     पुडुचेरी: 30 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में वोट पड़े थे. एनडीए ने 16 और यूपीए ने 9 सीटें जीती थीं. एनडीए के एन. रंगास्वामी मुख्यमंत्री बने थे।  

बादशाह को मिली बिश्नोई गैंग से धमकी, लॉरेंस ने कहा- अगली बार गोली माथे पर

चंडीगढ़  पिछले कुछ समय से कई सेलेब्स को धमकियां मिल रही हैं। अब खबर आ रही है कि इंडियन रैपर और सिंगर बादशाह को जान से मारने की धमकी मिली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह धमकी, लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ से मिली है और फोन कॉल के जरिए धमकी मिली है। फेसबुक पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है। रंदीप मलिक अनिल पंडित नाम का अकाउंट है जिसमें यह दावा किया गया है कि वो बिश्नोई गैंग से हैं। इसी पोस्ट में सिंगर को धमकी दी गई है। पोस्ट में क्या धमकी दी गई है उसी पोस्ट में बिश्नोई गैंग ने गैरी और शैंकी के पानीपत ऑफिस में शटिंग की जिम्मेदारी भी ली। शूटिंग के पीछे की वजह बताते हुए उस पोस्ट में दावा किया गया कि वो हवाला में शामिल थे। उन्होंने फिर बाकी सबको वॉर्न किया जो हवाला एक्टिविटीज में शामिल हैं। 2024 में बादशाह के क्लब में हुए हमले पर भी कहा पोस्ट में लिखा गया है, सिंगर बादशाह ने हरियाणा के कल्चर को खराब करने की कोशिश की। इससे पहले 2024 में हमने आपको एक ट्रेलर दिखाया था आपके क्लब में, इस बार हम आपको डायरेक्टली आपके माथे पर शूट करेंगे। क्यों हो रहा है विवाद ऐसा कहा जा रहा है कि बादशाह को उनके हाल ही में रिलीज हुए हरियाणा गाने टटीरी को लेकर धमकी दी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गाने की एक लाइन को लेकर विवाद हो रहा है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि लिरिक्स में महिलाओं के लिए गलत शब्दों का यूज किया गया है। सिंगर के खिलाफ हरियाणा में एक्शन हरियाणा में सिंगर के खिलाफ लीगल एक्शन भी लिया गया है। वहीं अब गाने को प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया है। बादशाह ने मांगी माफी वहीं बादशाह ने फिर विवाद के बाद सोशल मीडिया पर माफी भी मांगी है। उन्होंने कहा कि वह काफी दुखी हैं कि उनके गाने से हरियाणा के लोगों की फीलिंग्स काफी हर्ट हुई है। वह बोले, आप हरियाणा का बेटा समझ कर माफ करेंगे। पुलिस कर रही है जांच पुलिस इन्वेस्टिगेशन कर रही है इस धमकी को लेकर। ऑफिशियल्स का कहना है कि वे चेक कर रहे हैं कि ये बिश्नोई गैंग के मेंबर का ही मैसेज है। सिक्योरिटी एजेंसी भी सोशल मीडिया पोस्ट को मॉनिटर कर रहे हैं। वैसे बता दें कि बादशाह ने अब तक इस धमकी को लेकर कोई स्टेटमेंट नहीं दिया है। देखते हैं सिंगर क्या कहते हैं।

उरी में सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में पाकिस्तानी आतंकी ढेर, भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद

 जम्मू जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में सुरक्षाबलों ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ की एक बड़ी साजिश को विफल कर दिया है. 'ऑपरेशन डिग्गी 2' (OP DIGGI 2) के तहत चलाए गए एक संयुक्त अभियान में सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक पाकिस्तानी आतंकवादी को मार गिराया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिली सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर 14 और 15 मार्च 2026 की दरमियानी रात उरी सेक्टर के बुच्छर (Buchhar) इलाके में सेना और पुलिस ने घेराबंदी शुरू की। घने जंगलों का फायदा उठाकर घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों को सतर्क जवानों ने समय रहते भांप लिया. जब आतंकी को रुकने की चुनौती दी गई, तो उसने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में एक पाकिस्तानी आतंकी ढेर हो गया। मारे गए आतंकी के पास से एक एके-राइफल (AK Rifle), पिस्तौल और भारी मात्रा में कारतूस सहित युद्ध जैसे अन्य सामान बरामद हुए हैं. सुरक्षाबलों का मानना है कि यह आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के इरादे से सीमा पार से आया था. फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और आतंकी छिपे न हों। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में मुठभेड़ जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा के पास सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की एक कोशिश को नाकाम कर दिया. इस दौरान एक संदिग्ध आतंकी मारा गया, जबकि उसके एक साथी की तलाश जारी है. सेना के अनुसार यह घटना मंगलवार 10 मार्च को हुई. इंडियन आर्मी को खुफिया जानकारी मिली थी कि कुछ लोग सीमा पार से घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं. इसके बाद सेना ने इलाके में निगरानी और तलाशी अभियान शुरू किया. जम्मू स्थित रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि दो संदिग्ध आतंकियों को दोपहर करीब 3 बजे झांगर के पास देखा गया. यह इलाका नौशेरा सेक्टर में LoC के करीब है। खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू हुआ ऑपरेशन भारतीय सेना के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस से घुसपैठ की संभावित कोशिश को लेकर मिली विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर 14 और 15 मार्च 2026 की दरमियानी रात उरी सेक्टर के बुच्छर इलाके में संयुक्त अभियान चलाया गया. ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने इलाके में घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया. इसी दौरान सैनिकों ने झाड़ियों के पास एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि देखी, जिसके बाद उसे चुनौती दी गई। आतंकवादी ने की अंधाधुंध फायरिंग सुरक्षा बलों द्वारा चुनौती दिए जाने पर संदिग्ध व्यक्ति ने अचानक अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. इसके जवाब में सेना और पुलिस के जवानों ने भी मोर्चा संभाला और मुठभेड़ शुरू हो गई. कुछ देर चली गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों ने आतंकवादी को मार गिराया। सुरक्षा बलों  के साथ मुठभेड़ सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. इस दौरान एक संदिग्ध आतंकी मारा गया. दूसरे आतंकी की तलाश के लिए इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. सेना के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बल पूरे इलाके में तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और घुसपैठिया छिपा हुआ न हो।

पाकिस्तान ने कंधार में एयरस्ट्राइक की, ड्रोन हमलों के बाद सैन्य ठिकाना हुआ निशाना

कंधार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कंधार इलाके में तालिबान से जुड़े सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है. पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में उसके शहरों के ऊपर देखे गए ड्रोन हमलों के जवाब में की गई। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में कई ड्रोन पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों के ऊपर देखे गए थे. सुरक्षा एजेंसियों ने इन ड्रोन को समय रहते रोक लिया, इसलिए वे अपने निशाने तक नहीं पहुंच पाए. हालांकि कुछ जगहों पर ड्रोन के मलबे गिरने से नुकसान हुआ. क्वेटा में मलबा गिरने से दो बच्चे घायल हो गए, जबकि कोहाट और रावलपिंडी में भी कुछ लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। ड्रोन की गतिविधि सामने आने के बाद एहतियात के तौर पर इस्लामाबाद के आसपास का हवाई क्षेत्र कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया. इसके बाद पाकिस्तान ने कहा कि नागरिक इलाकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना "रेड लाइन पार करने" जैसा है। कंधार में मौजूद ठिकाने से ड्रोन हमले की प्लानिंग का दावा पाकिस्तान का आरोप है कि इन ड्रोन हमलों की योजना अफगानिस्तान के कंधार में मौजूद ठिकानों से बनाई गई थी. इसी वजह से पाकिस्तान ने वहां एयरस्ट्राइक करते हुए तकनीकी ठिकानों और हथियारों के भंडार को निशाना बनाया. समा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इन ठिकानों का इस्तेमाल तालिबान से जुड़े लड़ाके करते थे। UN के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्यूल डिपो पर PAK का हमला इस बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं. काबुल का कहना है कि शुक्रवार को पाकिस्तान ने राजधानी काबुल और पूर्वी अफगानिस्तान के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम छह आम लोगों की मौत हो गई और करीब 15 लोग घायल हो गए। अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी विमानों ने कंधार एयरपोर्ट के पास मौजूद निजी एयरलाइन Kam Air के फ्यूल डिपो को भी निशाना बनाया. उनके मुताबिक यह ईंधन नागरिक और संयुक्त राष्ट्र की उड़ानों के लिए इस्तेमाल होता है। ड्रोन हमलों के बीच बम धमाका पाकिस्तान ने आम लोगों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है. पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई सिर्फ पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के लड़ाकों और उनके नेटवर्क के खिलाफ है. इसी बीच पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी जिले लक्की मरवत में सड़क किनारे हुए एक बम धमाके में सात पाकिस्तानी पुलिसकर्मियों की मौत हो गई. इस घटना ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को X पर दावा किया कि पूर्वी प्रांत कुनार और नंगरहार में सीमा पर तैनात उसकी सेना ने पाकिस्तान की एक चौकी पर कब्जा कर लिया और 14 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया. हालांकि इस्लामाबाद में पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इस दावे को बेबुनियाद बताया और कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

घर में PNG कनेक्शन है तो अब नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर, सरकार का अहम निर्णय

  नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से दुनियाभर में ऊर्जा संकट का खतरा मंडरा रहा है. भारत में भी गैस सिलेंडर को लेकर शहर-शहर कालाबाजारी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है. इस बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू गैस कनेक्शन को लेकर नया और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. इस आदेश के अनुसार, जिन लोगों के घर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन उपलब्ध है, वे अब एक साथ घरेलू LPG कनेक्शन नहीं रख सकेंगे. इसका मतलब यह है कि ऐसे उपभोक्ताओं को अपना LPG सिलेंडर कनेक्शन तुरंत सरेंडर करना होगा। मंत्रालय ने साफ किया है कि जिनके पास PNG कनेक्शन है, वे सरकारी तेल कंपनियों या उनके डिस्ट्रीब्यूटर्स से LPG सिलेंडर का रिफिल नहीं प्राप्त कर सकेंगे. यह कदम घरेलू गैस के बेहतर प्रबंधन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को ऑर्गेनाइज्ड और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि PNG और LPG दोनों कनेक्शन एक साथ रखने से गैस की आपूर्ति में असमानता, दुर्व्यवहार और संसाधनों के अनावश्यक दोहरे उपयोग की समस्या उत्पन्न होती है. इसलिए, इस प्रतिबंध के माध्यम से उपभोक्ताओं को एक ही स्रोत से गैस की व्यवस्था करने पर मजबूर किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति में पारदर्शिता और बचत सुनिश्चित हो सके। यह आदेश खासतौर से उन उपभोक्ताओं के लिए है जिनके घरों में पहले से ही PNG का कनेक्शन है. उनकी सहूलियत के लिए मंत्रालय ने कहा है कि वे जल्द से जल्द अपने घरेलू LPG कनेक्शन को सरेंडर करें, अन्यथा उन्हें LPG सिलेंडर की आपूर्ति रोक दी जाएगी। भारत में गैस संकट: कारण, सरकार की तैयारी और आगे की राह मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया, जिससे भारत के लिए LPG और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है. भारत अपनी घरेलू जरूरतों का भारी मात्रा में एलपीजी आयात करता है, जिसकी वजह से स्टॉक तेजी से कम हो रहा है. दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं और कई रेस्टोरेंट गैस की कमी के कारण बंद हो रहे हैं. हालांकि, अभी PNG और CNG की आपूर्ति सही स्थिति में है, लेकिन इनकी स्थिति भी संकटग्रस्त है। सरकार ने चिंता कम करने के लिए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के माध्यम से आश्वासन दिया है कि घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता दी जा रही है और उनके पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. मंत्री ने बताया कि 70-80 फीसदी इंडस्ट्री को गैस मिल रही है और आयात के स्रोतों को दूसरे देशों की ओर शिफ्ट कर दिया गया है. साथ ही, ईंधन संकट को लेकर फैल रही अफवाहों को निराधार बताया गया. इसके अलावा, सरकार ने PDS के तहत केरोसिन की आपूर्ति भी बढ़ा दी है ताकि ग्रामीण और बीपीएल परिवारों की जरूरतें पूरी की जा सकें। सरकार ने संकट से निपटने के लिए छह बड़े कदम उठाए हैं, जिनमें रिफाइनरियों से LPG उत्पादन बढ़ाना, बुकिंग और सप्लाई सिस्टम को बेहतर बनाना, और जमाखोरी पर रोक लगाना शामिल है. नया 'प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश 2026' भी लागू किया गया है, जिसके तहत आवश्यक गैस आपूर्ति के लिए रिफाइनरियों और GAIL के बीच समन्वय बढ़ाया गया है. साथ ही, एलएनजी के लिए अल्जीरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास जारी हैं. एक तीन सदस्यीय मॉनिटरिंग पैनल गठित किया गया है जो स्थिति पर कड़ी नजर रखेगा। कमर्शियल सेक्टर में गैस की कमी के कारण रेस्टोरेंट संचालन में 20-30 फीसदी गिरावट देखी गई है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार ने LPG के विकल्प के रूप में PDS के तहत केरोसिन की मात्रा बढ़ाई है, जो ख़ासतौर से ग्रामीण और बीपीएल परिवारों को दी जाएगी. स्थानीय स्तर पर कोयला और बायोमास का उपयोग भी बढ़ाने को कहा गया है. पर्यवेक्षण बढ़ाकर कालाबाजारी रोकने के प्रयास भी तेज किए गए हैं।

अवैध धर्मांतरण से हुई शादी में पैदा हुआ बच्चा किस धर्म का होगा? सरकार तैयार कर रही है कानून

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा में  'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026' पेश किया गया। राज्य में अवैध और सामूहिक धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए लाए गए इस प्रस्तावित कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं, जो हाल के वर्षों में अन्य राज्यों द्वारा बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों से भी ज्यादा सख्त और विस्तृत हैं। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो महाराष्ट्र धार्मिक धर्मांतरण को विनियमित करने वाला देश का 10वां राज्य बन जाएगा। इससे पहले झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और राजस्थान ऐसे कानून बना चुके हैं। बच्चे के धर्म और अधिकारों से जुड़ा अहम नियम यह इस विधेयक का सबसे अनूठा पहलू है, जो इसे अन्य राज्यों के कानूनों से अलग बनाता है। बच्चे का धर्म: यदि कोई विवाह अवैध धर्मांतरण के माध्यम से हुआ है, तो उस विवाह से पैदा होने वाले बच्चे का धर्म वही माना जाएगा जो विवाह से पहले उसकी मां का धर्म था। उत्तराधिकार और भरण-पोषण: धर्म के निर्धारण के बावजूद, बच्चे को दोनों माता-पिता की संपत्ति में कानूनी रूप से उत्तराधिकार का अधिकार होगा। इसके अलावा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 के तहत बच्चा भरण-पोषण का भी हकदार होगा। कस्टडी: जब तक अदालत कोई अन्य निर्देश न दे, बच्चे की कस्टडी मां के पास ही रहेगी। धर्मांतरण के लिए तय की गई कानूनी प्रक्रिया इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, धर्म बदलने की इच्छा रखने वाले किसी भी व्यक्ति को अब एक सख्त प्रक्रिया से गुजरना होगा। धर्म बदलने से कम से कम 60 दिन पहले जिलाधिकारी को लिखित नोटिस देना होगा। इसमें उम्र, पेशा, वर्तमान धर्म और अपनाए जाने वाले धर्म की जानकारी देनी होगी। नोटिस मिलने के बाद जिलाधिकारी या पुलिस यह जांच करेगी कि यह धर्मांतरण स्वेच्छा से हो रहा है या किसी दबाव/धोखे से। धर्मांतरण के बाद, धर्म बदलने वाले व्यक्ति और समारोह आयोजित करने वाली संस्था दोनों को 60 दिनों के भीतर जिला प्रशासन को एक घोषणा पत्र सौंपना होगा। ऐसा न करने पर धर्मांतरण अमान्य माना जा सकता है। 'अवैध' धर्मांतरण और 'प्रलोभन' की नई और व्यापक परिभाषा विधेयक में प्रलोभन, धोखा, जबरदस्ती या शादी का झांसा देकर किए गए धर्मांतरण को अवैध माना गया है। इसकी परिभाषाओं का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। इसमें अब केवल पैसा, नौकरी, मुफ्त शिक्षा या दैवीय चमत्कार ही शामिल नहीं हैं, बल्कि एक धर्म को दूसरे से श्रेष्ठ बताना या दूसरे धर्म के रीति-रिवाजों को बुरा साबित करना भी 'प्रलोभन' के दायरे में आएगा। इसमें दैवीय नाराजगी का डर दिखाना, सामाजिक बहिष्कार, जान-माल की धमकी, या किसी भी तरह का शारीरिक और मानसिक दबाव शामिल है। अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर या धोखा देकर शादी करना अवैध होगा। केवल धर्मांतरण के लिए की गई शादी को अदालत शून्य घोषित कर सकती है। सजा और जुर्माने के सख्त प्रावधान यह अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा, जिसकी जांच सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक का अधिकारी करेगा। सामान्य मामले: 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना। कमजोर वर्ग (महिला, नाबालिग, SC/ST): अगर धर्मांतरण इनका किया जाता है, तो जुर्माना बढ़कर 5 लाख रुपये हो जाएगा। सामूहिक धर्मांतरण: दो या अधिक लोगों का एक साथ धर्मांतरण कराने पर 7 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना। बार-बार अपराध करने पर 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना। अगर कोई संस्था इसमें शामिल पाई जाती है, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है और उसकी सरकारी फंडिंग रोकी जा सकती है। शिकायत कौन कर सकता है? धर्म बदलने वाला व्यक्ति खुद, उसके माता-पिता, भाई-बहन, या खून, शादी या गोद लेने से जुड़ा कोई भी रिश्तेदार एफआईआर (FIR) दर्ज करा सकता है। पुलिस इस मामले में स्वतः संज्ञान भी ले सकती है। यह साबित करने की जिम्मेदारी कि धर्मांतरण बिना किसी दबाव या लालच के स्वेच्छा से हुआ है, उस व्यक्ति या संस्था पर होगी जिसने धर्मांतरण कराया है। पीड़ित लोगों के पुनर्वास और उनकी सुरक्षा के लिए भी विधेयक में प्रावधान किए गए हैं।

AI और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा सेंटरों की बिजली मांग 800% तक बढ़ेगी, 2031-32 तक 13.56 गीगावॉट की जरूरत

नई दिल्ली देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेटा सेंटरों की बिजली मांग तेजी से बढ़ने का अनुमान है। 2031-32 तक डेटा सेंटरों से बिजली की मांग 13.56 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। अभी देश में डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ रही है। यह 2020 में 375 मेगावॉट थी, जो 2025 तक बढ़कर करीब 1,500 मेगावॉट हो गई है। अगले करीब 7 सालों में बिजली मांग 800% बढ़ने का अनुमान है। सरकार के अनुसार AI विकास को बढ़ावा देने के लिए 14 सेवा प्रदाताओं और डेटा सेंटरों के जरिए 38,231 जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हें स्टार्टअप, शोध संस्थानों और शिक्षण संस्थानों को औसतन 65 रुपए प्रति घंटे की सब्सिडी दर पर दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि देश के प्रमुख डेटा सेंटर मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर में स्थित हैं। 65% भारतीय AI का इस्तेमाल कर चुके हैं भारत में AI का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट की 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 65% भारतीय लोगों ने कम से कम एक बार जनरेटिव AI (जैसे चैटबॉट या AI ऐप) का इस्तेमाल किया है। देश की आबादी लगभग 140 करोड़ है। इसका करीब 65% यानी लगभग 90–95 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में AI टूल का उपयोग कर चुके हैं। भारत में AI ऐप डाउनलोड तेजी से बढ़े हैं और 2025 में भारतीयों ने लगभग 0.6 अरब (60 करोड़) AI ऐप डाउनलोड किए। लोग AI का इस्तेमाल पढ़ाई, सवालों के जवाब, ट्रांसलेशन, काम की उत्पादकता बढ़ाने और कंटेंट बनाने के लिए कर रहे हैं। संसद में अन्य मंत्रालयों के सवाल-जवाब… देश में 16 साल में 4 गुना बढ़े सी-सेक्शन प्रसव भारत में 16 साल में सी-सेक्शन प्रसव 4 गुना से ज्यादा बढ़े। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि 2008-09 में 12.03 लाख ऑपरेशन से प्रसव हुए थे, जो 2024-25 में 54.35 लाख हो गए। कुल प्रसव 1.88 करोड़ से 1.98 करोड़ हुए। 2024-25 में 27.46% प्रसव सी-सेक्शन रहे। इसी अवधि में मातृ मृत्यु दर 212 से 88 और शिशु मृत्यु दर 57 से 25 हो गई। बांग्लादेश में फरवरी 2026 तक 3100 हिंसक घटनाएं विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर 3,100 घटनाओं में हिंसा हुई। मानवाधिकार संगठनों के इन आंकड़ों में घरों, संपत्तियों, कारोबार और पूजा स्थलों पर हमले भी शामिल हैं। ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर संशोधन बिल लोकसभा में पेश सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 पेश किया। इस बिल का उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में बदलाव करना है, ताकि ट्रांसजेंडर लोगों की स्पष्ट परिभाषा तय की जा सके और उन्हें बेहतर कानूनी सुरक्षा मिल सके। मौजूदा कानून में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा साफ नहीं है, इसलिए नई परिभाषा तय करने का प्रस्ताव है। बिल में जरूरत पड़ने पर सलाह देने के लिए एक विशेष अथॉरिटी बनाने की बात कही गई है। ट्रांसजेंडर लोगों को सरकारी दस्तावेजों में जरूरी बदलाव कराने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। अपहरण या जबरन नुकसान जैसे गंभीर अपराधों पर कड़ी और अलग-अलग सजा देने की बात भी बिल में है।