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भारत-कनाडा संबंधों को नई रफ्तार: मोदी-कार्नी वार्ता में 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य तय

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भारत और कनाडा के रिश्तों में एक अंतराल के बाद फिर से आई प्रगाढ़ता को दोहराते हुए कहा कि दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर सहमत हुए हैं। यह फिलहाल लगभग 13 अरब डॉलर है। प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में भारत-कनाडा सीईओ मंच को संबोधित करते हुए कहा, ''हम अपने द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं और उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''इसीलिए, हमने दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का निर्णय लिया है।''दोनों देशों के बीच 2025 के जनवरी-अक्टूबर के दौरान द्विपक्षीय व्यापार लगभग आठ अरब डॉलर रहा है। पीएम ने कहा कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था पर दबाव है। ऐसे कठिन समय में भारत और कनाडा के उद्योगपतियों के बीच विचार-विमर्श द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के लिए खाका तैयार करने में सहायक होगा। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि मजबूत घरेलू खपत, बड़े पैमाने पर निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था ने वृद्धि में योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके अलावा, सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने और कारोबार सुगमता ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद की है। बुनियादी ढांचे के विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने 2026-27 के बजट में 130 अरब अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड आवंटन किया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को जल्द अंतिम रूप देने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं के बीच यहां हुई बातचीत के दौरान रक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, छोटे एवं मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर (एसएमआर), शिक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत एवं कनाडा के द्विपक्षीय संबंध अब 'नई ऊर्जा, आपसी विश्वास और सकारात्मकता' से भरे हुए हैं। कनाडा 2.6 अरब डॉलर के यूरेनियम आपूर्ति समझौते के तहत भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का समर्थन करेगा। मोदी ने कहा, "असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति पर ऐतिहासिक समझौता हुआ है। हम छोटे मॉड्यूलर और उन्नत रिएक्टरों पर भी साथ काम करेंगे।" महत्वपूर्ण खनिजों पर समझौता ज्ञापन से स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और उन्नत विनिर्माण के लिए सुरक्षित आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिलेगी। कनाडा के पास दुर्लभ खनिजों का बड़ा भंडार मौजूद है। दोनों पक्षों ने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को साझा एवं गंभीर चुनौती बताते हुए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''इन चुनौतियों के खिलाफ हमारा करीबी सहयोग वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।'' मोदी और कार्नी ने बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की। मोदी ने कहा, "पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारत सभी विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है और क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।" कार्नी ने रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की घोषणा करते हुए कहा कि यह समझौते दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक अवसर पैदा करेंगे। उन्होंने कहा, "आज हम एक रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की शुरुआत कर रहे हैं, जिसमें द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। हमने महत्वपूर्ण खनिजों पर एक नई साझेदारी पर हस्ताक्षर किए हैं, जो विकास, प्रसंस्करण और स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन एवं उन्नत विनिर्माण के लिए सुरक्षित आपूर्ति शृंखला को समाहित करती है।" कार्नी ने कहा कि दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा कर रहे हैं, जिसमें पवन, सौर और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार शामिल है। उन्होंने यूरेनियम आपूर्ति समझौते को स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए कहा, "एक ही पृथ्वी के तहत हुए ये सभी समझौते एक नए और समृद्ध संबंध की शुरुआत हैं, जो दोनों देशों के श्रमिकों और व्यवसायों के लिए पीढ़ीगत अवसर पैदा करेंगे और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पृथ्वी की रक्षा करेंगे।" कनाडा के प्रधानमंत्री रविवार को नयी दिल्ली पहुंचे थे। इसके पहले वह मुंबई में थे जहां पर उन्होंने उद्योग जगत के दिग्गजों से मुलाकात की। भारत एवं कनाडा के संबंध 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर उपजे विवाद के बाद तनावपूर्ण हो गए थे। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में संबंध सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं और दोनों देशों ने एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्त तैनात कर दिए हैं।

पानी पर बढ़ा तनाव: भारत की योजना से घबराया पाकिस्तान, समाधान नहीं सूझ रहा

इस्लामाबाद पलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसे रणनीतिक कदम उठाए हैं जो कि उसकी टेंशन बढ़ाते ही चले जा रहे हैं। झेलम और चिनाब के बहाव कम करने को लेकर शहबाज सरकार एकदम से बिलबिला गई है। हाल ही में पाकिस्तान में प्रांतीय स्तर की एक बड़ी बैठक हुई और इसमें वॉटर ऐंड पावर डिवेलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन मोहम्मद सईद ने कहा कि भारत झेलम और चिनाब प्रोजेक्ट पर 60 अरब डॉलर खर्च कर रहा है और इससे पाकिस्तान में हाहाकार मचने वाला है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद इन निदियों के जल रोकने की कैपिसीटी 15 दिन से बढ़कर सीधे 60 दिन हो जाएगी। घबरा गया पाकिस्तान पाकिस्तान भारत के इस प्रोजेक्ट से बुरी तरह घबराया हुआ है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को सूखे का डर सताने लगा है। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि जब फसलों की पानी की जरूरत होगी तो नदियों का बहाव बेहद कम हो जाएगा। वहीं मॉनसून में भारत ज्यादा पानी छोड़ सकता है इससे पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा डूब जाएगा। भारत के इस कदम से परेशान पाकिस्तान के अधिकारियों ने सरकार को सलाह दी है कि वहां भी बड़े बांध बनाने की जरूरत है जिससे पानी को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि समस्या यही है कि ये नदियां भारत से ही होकर पाकिस्तान में जाती हैं। ऐसे में बांध बनाने के बाद भी उसकी मुसीबत कम होने वाली नहीं है। पाकिस्तान का जल मंत्रालय नदियों के पानी को लेकर बेहद परेशान है। महीने भर पहले पाकिस्तान ने इसको लेकर भारत से जवाब मांगने शुरू कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने बगलिहार डैम पर पानी रोक लिया है दिसंबर महीने में देखा गया था कि बगलिहार में पानी की कमी हो गई है। झेलम और चिनाब में कम हआ पानी पाकिस्तान का कहना है कि भारत झेलम और चिनाब का पानी कभी रोकता है और कभी छोड़ता है। इससे पाकिस्तान में पानी की कमी देखी जा रही है। सिंधु जल पर पाकिस्तान के एक अधइकारी ने कहा कि पाकिस्तान में मंगला बांध तक पानी का बहाव काफी कम हो गया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक शहबाज सरकार झेलम के बहाव पर नजर रख रही है। परेशान पाकिस्तान बार-बार पत्र भेजकर भारत के आगे गिड़गिड़ा रहा है। बता दें कि पहलगाम महले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता निलंबित करदिया था। यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा घाव साबित हो रहा है। जानकारी के मुताबिक भारत अब रावी का पानी भी रोकने का प्लान बना रहा है। जानकारी के मुताबिक शहपुर कंडी डैम का काम भी जल्द पूरा होने वाला है। इससे रावी का पानी रोककर इसे कठुआ और सांबा भेजा जाएगाय़ पाकिस्तान को जाने वाला ज्यादातर पानी रोक लिया जाएगा। पाकिस्तान की लगभग 90 फीसदी खेदी सिंदु नदी सिस्म पर ही निर्भर है। पाकिस्तान के पास पानी रोकने की क्षमता ना के बराबर है।

मिडिल-ईस्ट तनाव के बीच ओमान में बड़ा हमला, तेल टैंकर पर ड्रोन अटैक में भारतीय की जान गई

नई दिल्ली मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध में एक भारतीय व्यक्ति की मौत हो गई है। ओमान में सोमवार को मार्शल द्वीपों के झंडे वाले तेल टैंकर MKD VYOM पर बम से लैस ड्रोन से हमला किया गया, जिसमें जहाज पर सवार एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। ओमान न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह हमला मस्कट के तट से दूर हुआ। हमले के चलते जहाज में आग लग गई और इंजन रूम में विस्फोट हुआ। जहाज पर कुल 21 क्रू मेंबर्स थे, जिनमें 16 भारतीय शामिल थे। बाकी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के निकट हुआ, जो फारस की खाड़ी का पतला रास्ता है। वैश्विक तेल व्यापार के लिए यह काफी अहम है। ओमान के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर ने बताया कि टैंकर पर लगभग 59,463 मीट्रिक टन कार्गो था और हमला मस्कट से करीब 52 नॉटिकल मील दूर हुआ। यह घटना मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के विस्तार का हिस्सा मानी जा रही है। इजरायल और अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक आने वाले जहाजों को धमकी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने कई हमलों को अंजाम दिया है, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल शामिल है। इस हमले को ईरान समर्थित ताकतों से जोड़ा जा रहा है, हालांकि अभी तक किसी ने स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी नहीं ली है। यह क्षेत्र पहले भी समुद्री हमलों का गवाह रहा है, लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण तनाव और बढ़ गया है। इस हमले में भारत के व्यक्ति की मौत को अमेरिका-ईरान संघर्ष में पहली भारतीय हानि के रूप में देखा जा रहा है। ओमान ने हमले के बाद जहाज के चालक दल को सुरक्षित निकाल लिया है और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं और तेल की सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं। यह हमला क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा करने वाला है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव से समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। ओमान जैसे तटवर्ती देशों को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर गंभीर असर पड़ सकता है।  

स्टेशन पर अफरा-तफरी: कन्फर्म टिकट न मिलने से जनरल कोचों की ओर दौड़े यात्री, RPF की अपील बेअसर

  होली के मौके पर यात्रियों की भारी भीड़ के कारण धनबाद रेलवे स्टेशन पर बीते रविवार रात अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सीट कन्फर्म नहीं होने से परेशान लोग जनरल डिब्बों की ओर दौड़ पड़े, जिससे हालात बेकाबू हो गए। बीते रविवार रात करीब 9:50 बजे जैसे ही हटिया-गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर पहुंची, जनरल बोगियों में चढ़ने के लिए यात्रियों में होड़ मच गई। लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण जिन लोगों की सीट कन्फर्म नहीं हो सकी, वे भी किसी तरह ट्रेन में चढ़ने की कोशिश करने लगे। हालात ऐसे थे कि जनरल डिब्बों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। कई यात्री स्लीपर कोच में घुस गए, जिससे वहां भी जनरल जैसी भीड़ हो गई। लोग सीटों के बीच फर्श पर, दरवाजों पर और शौचालय के पास खड़े होकर सफर करने को मजबूर दिखे। वहीं दर्जनों यात्री ट्रेन में चढ़ नहीं सके और प्लेटफॉर्म पर ही रह गए। RPF की टीम करती रही अपील भीड़ का असर महिला और दिव्यांग कोच पर भी पड़ा। महिला कोच में पुरुषों के घुसने से हंगामा हुआ, जबकि दिव्यांग बोगी में आम यात्रियों के चढ़ जाने से दिव्यांग यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान आरपीएफ की टीम लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील करती रही, लेकिन त्योहार पर घर पहुंचने की जल्दबाजी में कई लोग नियमों की अनदेखी करते नजर आए। होली के कारण ट्रेनों में बढ़ी भीड़ ने रेलवे प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।  

ईरान में सियासी हलचल तेज! खामेनेई को लेकर अटकलें, IRGC गार्ड्स पर मंत्री का बड़ा बयान

ईरान ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद वहां के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) अब स्वतंत्र होकर बदले की कार्रवाई कर रही है और हमले कर रही है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघाची ने दावा किया है कि ओमान पर हमला करना देश की प्राथमिकता और च्वाइस में शामिल नहीं था लेकिन IRGC ने उस पर हमले किए। इससे इस बात की संभावना जोर पकड़ने लगी है कि क्या ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद IRGC के सैनिक बेकाबू हो चले हैं। बता दें कि IRGC ईरान का सबसे शक्तिशाली और विशिष्ट सैन्य संगठन है, जिसे ईरानी क्रांति के बाद 1979 में स्थापित किया गया था। ईरान के पास दो अलग-अलग सेनाएं हैं। एक पारंपरिक सेना (Artesh) जो सीमाओं की रक्षा करती है, और दूसरी IRGC, जिसका मुख्य कार्य ईरान की 'इस्लामिक व्यवस्था' और क्रांति की रक्षा करना है। यह संगठन सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) के प्रति जवाबदेह होता है। इसकी अपनी थल सेना, नौसेना और वायु सेना (एयरोस्पेस फोर्स) है। इसके अलावा, इसमें दो महत्वपूर्ण इकाइयाँ कुद्स फोर्स और बसीज शामिल हैं। सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है IRGC IRGC ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है, यह पद अयातुल्लाह अली खामेनेई के पास था, जब तक कि वह US-इज़राइल हमले के दौरान मारे नहीं गए। इसका मतलब है कि IRGC अब बिना हेड के है और स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री का बयान भी इस बात की तस्दीक कर रहा है। "हमारी पसंद नहीं" ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघाची ने अल जज़ीरा के साथ एक इंटरव्यू के दौरान यह चौंकाने वाली बात कही है। ओमान पोर्ट को टारगेट करके किए गए स्ट्राइक के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, "ओमान में जो हुआ वह हमारी पसंद नहीं थी। हमने पहले ही अपनी सेना को बता दिया है कि वे अपने चुने हुए टारगेट के बारे में सावधान रहें।" उन्होंने कहा, “असल में, हमारी मिलिट्री यूनिट अब असल में इंडिपेंडेंट और किसी तरह अलग-थलग हैं, और वे पहले से दिए गए इंस्ट्रक्शन – आप जानते हैं, जनरल इंस्ट्रक्शन – के आधार पर काम कर रही हैं।” अऱाघाची का यह बयान अहम है। इसका सीधा मतलब है कि IRGC ईरानी सरकार के ऑर्डर पर काम नहीं कर रहा है, बल्कि खामेनेई के अपनी हत्या से पहले दिए गए निर्देशों के अनुसार काम कर रहा है। एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अराघाची की बातों को हमलों के बहाने के तौर पर भी देखा जा सकता है, क्योंकि तेहरान खाड़ी में अपने पड़ोसियों के साथ तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। ईरानी क्रांति के बाद बनी थी IRGC IRGC, जिसे ईरानी क्रांति के बाद मई 1979 में रूहोल्लाह खुमैनी ने बनाया था, पारंपरिक ईरानी आर्मी से अलग है। BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1979 में राज बदलने के बाद, ईरान के रूलिंग मौलवियों ने एक नया संविधान पेश किया था, जिसमें ईरान की सीमाओं की रक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक रेगुलर मिलिट्री (आर्टेश) और ईरान में इस्लामिक सिस्टम की रक्षा के लिए एक अलग रिवोल्यूशनरी गार्ड (पासदारन) दोनों का इंतजाम किया गया था।  

युद्ध की आंच UAE तक: Apple ने सुरक्षा कारणों से ऑफिस और रिटेल स्टोर्स बंद किए

संयुक्‍त अरब अमीरात ईरान-अमेरिका-इस्राइल की जंग में घ‍िरे मिड‍िल ईस्‍ट में हालात को देखते हुए दिग्‍गज कंपनी ऐपल ने UAE (संयुक्‍त अरब अमीरात) में अपने कॉरपोरेट ऑफ‍िस और सभी ऐपल स्‍टोर्स को अस्‍थायी तौर पर बंद कर दिया है। MacRumours की रिपोर्ट में बताया गया है क‍ि कंपनी ने अपने स्‍टोर्स को कम से कम मंगलवार 3 मार्च तक के लिए बंद किया है। आगे की स्‍थ‍ित‍ि को देखते हुए स्‍टोर्स खोलने पर फैसला लिया जाएगा। दिलचस्‍प यह है कि कंपनी इस हफ्ते अपने कई नए गैजेट लॉन्‍च करने वाली है, जिनमें iphone 17e को भी शामिल बताया जा रहा है। UAE में 3 मार्च तक बंद रहेंगे ऐपल स्‍टोर्स रिपोर्ट के अनुसार, UAE में ऐपल स्‍टोर्स को 3 मार्च तक बंद रखा जाएगा। यूएई में बड़ी संख्‍या में भारतीय रहते हैं और ऐपल स्‍टोर्स उनके लिए तब पसंदीदा जगह हाे जाती है, जब उन्‍हें नया ऐपल गैजेट खरीदना होता है। ऐपल इस सप्‍ताह अपने कई नए गैजेट लेकर आने वाली है। इनमें नया आईपैड, आईफोन 17e, मैक शामिल हो सकता है। अगर ऐपल स्‍टोर्स को अधिक दिनों तक बंद रखा गया तो कंपनी की बिक्री पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। इन जगहों पर बंद रहेंगे ऐपल स्‍टोर्स     दुबई मॉल     मॉल ऑफ द ऐमिरेट्स     यास मॉल     अल जिमी मॉल     अल मरिया आईलैंड SIM स्‍कैम का खतरा बढ़ा मिडिल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच यूएई में सिम स्‍कैम के मामलों का खतरा भी बढ़ गया है। दुबई पुलिस ने इसको लेकर अपने लोगों को चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि कुछ लोग क्राइसि‍स मैनेजमेंट अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बचने के लिए लोगों से उनकी पर्सनल डिटेल्‍स ना बताने की हिदायत दी गई है। साथ ही किसी संदिग्‍ध कॉल या मैसेज पर ना रिप्‍लाई करने को कहा गया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि मदद के नाम साइबर धोखेबाज लोगों की जरूरी जानकारी चुरा सकते हैं। भारत के संदर्भ में यह खबर इसलिए महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि दुबई में बड़ी संख्‍या में भारतीय रहते हैं। अगर आपका भी कोई जानकार, करीबी इन जगहों पर है तो उसे सिम स्‍कैम के बारे में सतर्क अवश्‍य करें।

इजरायल में बड़ा हमला? नेतन्याहू के दफ्तर को निशाना बनाने का ईरान का दावा, जानें कितना नुकसान

ईरान ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस पर हमला किया है। साथ ही, इजरायली वायु सेना के कमांडर के मौजूद स्थान को भी निशाना बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, IRGC के पब्लिक रिलेशंस डिपार्टमेंट ने यह जानकारी दी है कि यह हमला टारगेटेड था, जिसमें खैबर शेकन बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट में नेतन्याहू की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। फार्स न्यूज एजेंसी की ओर से जारी उनके बयान में कहा गया है कि ज़ायोनी शासन के अपराधी प्रधानमंत्री का कार्यालय और शासन की वायु सेना कमांडर का मुख्यालय निशाना बनाया गया। यह दावा ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान की ओर से लगातार जवाबी कार्रवाई हो रही है। इजरायली पक्ष ने इन हमलों की पुष्टि नहीं की है। ट्रू प्रॉमिस 4 ऑपरेशन अमेरिका और इजरायल की ओर से शनिवार को किए गए हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित कई सैन्य व राजनीतिक लीडर मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने ईरान में 2000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, कमांड सेंटर्स और वायु रक्षा प्रणालियां शामिल थीं। ईरान ने इसे अवैध करार देते हुए जवाबी हमले शुरू किए, जिनमें इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों में यूएस बेस को निशाना बनाया गया। IRGC ने इसे ट्रू प्रॉमिस 4 ऑपरेशन का हिस्सा बताया है। अमेरिकी संपत्तियों पर ड्रोन हमला इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। लेबनान में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच भी गोलीबारी बढ़ गई है, जबकि ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी संपत्तियों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक सभी उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते। इजरायल ने तेहरान के केंद्र में हमलों को बढ़ाने की बात कही है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है कि यह युद्ध व्यापक क्षेत्रीय या वैश्विक संघर्ष में बदल सकता है। अब खुलकर हो रहा युद्ध ईरान के हमलों से इजरायल में सायरन बजे और यरुशलम के ऊपर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। आईआरजीसी का यह दावा प्रचार का हिस्सा भी हो सकता है, क्योंकि इजरायल की आयरन डोम जैसी रक्षा प्रणालियां अधिकांश मिसाइलों को रोकने में सक्षम हैं। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व की जटिल भू-राजनीति को दर्शाता है, जहां ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से छिपा युद्ध अब खुलकर सामने आ गया है। नेतन्याहू के कार्यालय पर हमले का दावा ईरान की ओर से मजबूत जवाब देने की कोशिश को दिखाता है, लेकिन वास्तविक क्षति और नतीजे अभी साफ नहीं हैं।  

पढ़ाई का तरीका हुआ आधुनिक, NEP 2020 पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान

नई दिल्ली केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि वर्ष 2047 तक, जब देश आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। उनका कहना था कि भारत की ताकत उसकी युवा आबादी है। बड़ी संख्या में युवा पढ़ रहे हैं, नए विचार ला रहे हैं और नई तकनीक पर काम कर रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान नई दिल्ली में आयोजित स्टडी इन इंडिया एजु-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में बोल रहे थे। यहां उन्होंने 50 से अधिक देशों के राजनयिकों को संबोधित किया। यहां बताया गया कि सरकार चाहती है कि दुनिया के बड़े विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर खोलें। इसके लिए नियम बनाए गए हैं ताकि प्रक्रिया साफ और समय पर पूरी हो। गौरतलब है कि अगर विदेशी संस्थान भारत आएंगे तो भारतीय छात्रों को बाहर जाए बिना ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई करने के अवसर मिल सकेंगे। नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में यह बड़ा शिक्षा सम्मेलन हुआ। इसमें 50 से ज्यादा देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और अलग-अलग देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुलकर भारत की शिक्षा व्यवस्था और उसके भविष्य के बारे में बात की। शिक्षा मंत्री ने विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों से भारत की तेजी से विकसित हो रही, नवाचार-आधारित शिक्षा प्रणाली के साथ सहयोग करने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम का मकसद दुनिया को यह बताना था कि भारत अब सिर्फ पढ़ाई करने की जगह नहीं, बल्कि एक बड़ा शैक्षणिक केंद्र बन रहा है। भारत चाहता है कि न केवल विदेशी संस्थान बल्कि दूसरे देशों के छात्र भी यहां आएं, पढ़ें, शोध करें और मिलकर आगे बढ़ें। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 आने के बाद देश की पढ़ाई का ढंग बदल गया है। अब छात्रों को केवल किसी एक विषय तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। छात्र एक साथ अलग-अलग विषय पढ़ सकते हैं। वहीं युवाओं के कौशल पर भी जोर दिया जा रहा है, यानी पढ़ाई ऐसी हो जो सीधे तौर पर भविष्य में काम आए। शिक्षा से सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि काम करने की क्षमता भी मिले। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यूजीसी ने एक पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढांचा तैयार किया है, जिससे विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने में मदद मिलेगी। ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक महीने के भीतर मंजूरी दे दी गई है। सम्मेलन में कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को दुनिया तक पहुंचाना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीक का शिक्षा के क्षेत्र में उपयोग करना शामिल है। इसके अलावा, विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए नियम, कौशल शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ना, और भारत नवाचार 2026 पहल पर भी यहां चर्चा की गई। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दुनिया में चाहे जितनी अनिश्चितता हो, शिक्षा हमेशा देशों को जोड़ने का काम करती है। पढ़ाई, शोध और ज्ञान का आदान-प्रदान ही असली साझेदारी बनाता है। उन्होंने सभी देशों के प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने छात्रों और संस्थानों को भारत से जोड़ें। शिक्षाविदों के मुताबिक इस आयोजन का संदेश यह रहा कि भारत अब वैश्विक शिक्षा मंच पर मजबूत दावेदार बनना चाहता है। भारत दुनिया से कह रहा है कि आइए, यहां पढ़िए, शोध कीजिए, नए विचार लाइए और मिलकर आगे बढ़िए।

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पीएम मोदी की अपील, वैश्विक स्थिरता पर जताई चिंता

ईरान ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले के बाद पूरा मिडिल ईस्ट युद्ध की जद में आ चुका है। सोमवार को भी दोनों पक्षों ने एक दूसरे के ठिकानों को निशाना बनाया है और युद्ध के और भयावह होने का खतरा बना हुआ है। एक तरफ ईरान ने इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले में अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने का संकल्प लिया है तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने अपने B-2 बॉम्बर्स उतार दिए हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तहत अमेरिका के खाड़ी देशों मे मौजूद ठिकानों और इजरायल को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया है। इजरायल में, मिसाइल हमलों या उन्हें रोके जाने के कारण हुए जोरदार धमाकों की आवाजें तेल अवीव में सुनने को मिलीं। वहीं इजराइल की बचाव सेवाओं ने बताया कि मध्य शहर बेत शेमेश में एक यहूदी प्रार्थना स्थल पर हुए हमले में आठ लोग मारे गए और 28 घायल हो गए, जिससे देश में मरने वालों की कुल संख्या 10 हो गई है। कतर, कुवैत जैसे शहरों में भी धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। ईरान पर बमबारी जारी वहीं अमेरिका और इजराइल ने भी रविवार को भी बमबारी जारी रखी। ईरान की राजधानी तेहरान में हुए धमाकों से आसमान में धुएं का विशाल गुबार उठता दिखा, खासकर उस इलाके में जहां सरकारी इमारतें स्थित हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं की हत्या करने वाले अमेरिकी और इजराइली हमलों की शुरुआत से अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इस बीच ईरानी स्कूल पर हुए हमले में मौत का आंकड़ा 180 तक पहुंच गया है। पीएम मोदी ने नेतन्याहू से की फोन पर बात इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की है और हालिया घटनाक्रम को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत कराया। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार रात संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी बात की थी। पीएम ने खाड़ी देश पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि भारत इस कठिन समय में यूएई के साथ एकजुटता से खड़ा है।

रोटी की तलाश में गए, अब जिंदगी बचाने की जंग: विदेश में फंसे भारतीयों की पुकार

नई दिल्ली इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद से पूरा मध्य-पूर्व क्षेत्र धधक रहा है। इस आग में हजारों भारतीय भी झुलस रहे हैं। इनमें कुछ विद्यार्थी तो कुछ टूरिस्ट हैं। सबसे ज्यादा वो लोग हैं, जो रोजी-रोटी की तलाश में खाड़ी देशों में गए थे लेकिन हवाई हमलों की वजह से एयरस्पेस बंद हो चुके हैं। ऐसे में ये लोग वहां फंस गए हैं। लिहाजा, बढ़ते तनाव ने हजारों भारतीयों को अनिश्चितता और भय के बीच ला खड़ा किया है। दुबई, अबू धाबी जैसे विश्व-प्रसिद्ध शहरों में भी अब सायरन बजने और मिसाइल हमले की खबरें आम हो गई हैं। बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले भारतीयों के बीच भय का माहौल है। ऐसे हालात में इन देशों में फंसे भारतीय नागरिक सोशल मीडिया पर भारत सरकार से फौरन निकालने की गुहार लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी अपीलों की बाढ़ आ गई है, जिनमें से कई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय (MEA) से निकालने की अपील की है। हालांकि, MEA ने प्रभावित देशों में भारतीयों के लिए इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जो मेडिकल इमरजेंसी, सुरक्षा और निकासी से जुड़े सवालों के लिए मदद देते हैं। मिडिल-ईस्ट में फंसे भारतीय क्या लिख रहे? दुबई में एक वर्कर ने इंस्टाग्राम रील पर पोस्ट किया, "मैं यहां रोजी-रोटी के लिए आया था, लेकिन अब मैं बम से बचने की जगह तलाश कर रहा हूं। मैं मोदी जी और भारत सरकार से अनुरोध करता हूं कि हमें यहां से निकालें।" सैकड़ों टूरिस्ट भी दुबई और अबू धाबी में फंसे हुए हैं। मिडिल ईस्ट के कई संस्थानों में पढ़ने वाले MBA और मेडिकल के स्टूडेंट भी सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर रहे हैं, जिसमें भारत सरकार से मदद मांगी जा रही है। छात्र और पर्यटक भी संकट में स्थिति केवल खाड़ी देशों में कमाने गए कामगारों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में पर्यटक और छात्र भी इस संकट में फंसे हुए हैं। खासकर तेहरान में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों ने भावुक अपीलें की हैं। एक छात्रा ने कहा, “यहां हालात बहुत खराब और अनिश्चित हैं। हमें नहीं पता अगला पल क्या होगा। कृपया जल्द से जल्द हमें सुरक्षित निकाला जाए।” एक अन्य छात्र ने बताया कि लगातार हो रहे हमलों के कारण सभी छात्र भयभीत हैं और सरकार से तत्काल मदद की उम्मीद कर रहे हैं। बड़ी संख्या में भारतीय प्रभावित बता दें कि मध्य पूर्व में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें अधिकांश मजदूर वर्ग से हैं। इनके अलावा विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के लगभग 2000 छात्र हैं, जो ईरान में पढ़ाई कर रहे हैं और गंभीर जोखिम में हैं। उनके लिए जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने भी प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। सरकार की पहल इस संकट के बीच विदेश मंत्रालय भारत ने प्रभावित देशों में फंसे भारतीयों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की है। ये हेल्पलाइन चिकित्सा सहायता, सुरक्षा और संभावित निकासी से जुड़ी जानकारी प्रदान कर रही हैं। साथ ही, मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील करता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि इस संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। एक बयान में, MEA ने ईरान और खाड़ी में हो रहे डेवलपमेंट पर गहरी चिंता जताई है। मंत्रालय ने कहा, "ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम से भारत बहुत चिंतित है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से बचने और आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हैं।" मंत्रालय ने तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी और संप्रभुता का सम्मान करने पर ज़ोर दिया। MEA ने जारी की हेल्पलाइन MEA ने इस इलाके में भारतीयों के लिए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स की एक लिस्ट जारी की है: – रामल्लाह (फ़िलिस्तीन): फ़ोन: +970592916418; ईमेल: repoffice@mea.gov.in / cons.ramallah@mea.gov.in – दोहा (क़तर): फ़ोन: 00974-55647502; ईमेल: cons.doha@mea.gov.in – रियाद (सऊदी अरब): फ़ोन: 00-966-11-4884697; WhatsApp: 00-966-542126748; टोल फ़्री: 800 247 1234; ईमेल: cw.riyadh@mea.gov.in – तेल अवीव (इज़राइल): फ़ोन: +972-54-7520711 / +972-54-2428378; ईमेल: cons1.telaviv@mea.gov.in – तेहरान (ईरान): फ़ोन: +989128109115 / +989128109109 / +989128109102 / +989932179359 – अबू धाबी (UAE): टोल फ़्री: 800-46342; WhatsApp: +971543090571; ईमेल: pbsk.dubai@mea.gov.in / ca.abudhabi@mea.gov.in – कुवैत: फ़ोन: +96565501946; ईमेल: community.kuwait@mea.gov.in – बहरीन: फ़ोन: 00973-39418071 – मस्कट (ओमान): टोल फ़्री: 80071234; WhatsApp: +96898282270; ईमेल: cw.muscat@mea.gov.in / cons.muscat@mea.gov.in – जॉर्डन: फ़ोन: 00962-770 422 276 – बगदाद (इराक): फ़ोन: +964 771 651 1185 / +964 770444 4899