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टेक्नोलॉजी में साझेदारी बढ़ा रहे भारत और इजरायल, बोले नेतन्याहू—भविष्य इसी का

यरूशलम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन द्विपक्षीय बैठक की और कई समझौतों पर मुहर लगाई। पीएम नेतन्याहू ने बाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य नई तकनीक का है। नई तकनीक को लेकर नेतन्याहू ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीक और एआई की मदद से हर छात्र तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और उसे उसकी पूरी क्षमता तक आगे बढ़ने का मौका दिया जा सकता है। पहले जो परेशानियां और सीमाएं थीं, अब वे नहीं रहीं।  उन्होंने आगे कहा कि भविष्य उन्हीं देशों का है जो नई सोच और नए कार्य करने में सक्षम हैं। इजरायल और भारत दोनों ही नए विचार और तकनीक पर जोर दे रहे हैं। दोनों देश बहुत पुरानी और महान सभ्यताएं हैं, जिन्हें अपने इतिहास पर गर्व है, लेकिन वे भविष्य को बेहतर बनाने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल मिलकर यह काम और बेहतर तरीके से कर सकते हैं। अपने संबोधन की शुरुआत इजरायली बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी के दिल छूने वाले अंदाज को बयां कर की। उन्होंने कहा, "यह एक शानदार दौरा है, एक शानदार विजिट का शानदार अंत। यह छोटी लेकिन बहुत ज्यादा फलदायी और दिल को छूने वाली मुलाकात थी। मुझे लगता है कि कल नेसेट में आपके दिल को छूने वाले बयान के बाद इजरायल में सभी भावुक होंगे। मैं आपको बता सकता हूं कि तब से हमें न केवल अपने दिलों में गहराई से देखने का मौका मिला है, बल्कि हमारे दोनों देशों में मौजूद शानदार दिमागों को देखने का भी मौका मिला है।" इसके साथ ही नेतन्याहू ने अपने मित्र पीएम मोदी के काम को भी काबिल-ए-तारिफ करार दिया। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि आपकी सरकार बेहद कुशल है। आप एक मंत्री और एक राजदूत के साथ जो काम कर सकते हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। दोनों देशों के बीच जो सोच और दिलों का जुड़ाव यहां देखने को मिला है, वह आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार-से-सरकार सहयोग, जिसका लंबे समय से इंतजार था, अब नई गति पकड़ेगा और इससे दोनों देशों को एक-दूसरे से पहुंचने वाले फायदों में इजाफा होगा। इजरायली प्रधानमंत्री के बाद भारत के पीएम ने कहा कि भारत जल्द ही इजरायल के साथ पारस्परिक लाभ वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देगा। इजरायल में भी अब भारत का यूपीआई पेमेंट सिस्टम चलेगा, इसे लेकर द्विपक्षीय बैठक में समझौता हुआ है।

दिल्ली दौरे से पहले बड़ा बयान: PM कार्नी ने निज्जर मामले में भारत को दी क्लीन चिट

नई दिल्ली कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने भारत यात्रा से ठीक पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा में होने वाले हिंसक अपराधों से भारत का कोई संबंध नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब हरदीप सिंह निज्जर मामले को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक कूटनीतिक तनाव बना रहा। कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि उनके देश में होने वाले हिंसक अपराधों से भारत का कोई लेना-देना नहीं है।कनाडाई अधिकारियों ने दो टूक कहा कि यदि उन्हें लगता कि भारत कनाडा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय हस्तक्षेप कर रहा है, तो प्रधानमंत्री की यह यात्रा संभव नहीं होती। उन्होंने यह भी दोहराया कि कनाडा अपने आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करता। यह बयान ऐसे समय आया है जब कार्नी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दौरे की शुरुआत भारत से कर रहे हैं। निज्जर विवाद की पृष्ठभूमि खालिस्तानी समर्थक Hardeep Singh Nijjar की हत्या के बाद कनाडा ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे दोनों देशों के संबंधों में भारी खटास आ गई थी। अब कार्नी का यह बयान संकेत देता है कि ओटावा सार्वजनिक तौर पर अपने रुख को संतुलित कर रहा है और सीधे तौर पर भारत को कनाडा के अंदरूनी अपराधों से जोड़ने से बच रहा है। क्यों बिगड़े थे संबंध ? बता दें कि कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री Justin Trudeau ने सितंबर 2023 में कनाडाई संसद में बयान दिया था कि खालिस्तानी समर्थक Hardeep Singh Nijjar की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों की “संभावित संलिप्तता” के विश्वसनीय आरोप मौजूद हैं। निज्जर की जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भारत सरकार ने ट्रूडो के आरोपों को “बेतुका” और “राजनीति से प्रेरित” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने कहा कि कनाडा ने कोई ठोस सबूत साझा नहीं किया है। भारत ने कनाडा पर अपने देश में चरमपंथी तत्वों को पनाह देने का भी आरोप लगाया। व्यापार को दी जा रही प्राथमिकता पिछले कुछ वर्षों में कथित विदेशी हस्तक्षेप और कूटनीतिक तनाव के कारण भारत-कनाडा संबंधों में ठंडापन आया था। लेकिन अब कनाडा व्यापार और आर्थिक साझेदारी को प्राथमिकता देता नजर आ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, भारत सरकार के साथ वरिष्ठ स्तर पर “परिपक्व और ठोस” बातचीत हुई है और आगे की सार्थक चर्चा के लिए आधार मौजूद है। बिगड़े रिश्तों को सुधारने की कोशिश आर्थिक दृष्टि से भारत और कनाडा के संबंध अहम हैं। वर्तमान में भारत, कनाडा का सातवां सबसे बड़ा वस्तु एवं सेवा व्यापार भागीदार है।कनाडाई सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है। विश्लेषकों का मानना है कि कार्नी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच वर्षों से चली आ रही कूटनीतिक परेशानियों को कम करने और आर्थिक संबंधों को नई गति देने का प्रयास है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और मार्क कार्नी के बीच होने वाली संभावित बातचीत को रिश्तों के भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है।

ईरानी विदेश मंत्री का सख्त संदेश: खामेनेई के बाद भी कायम रहेगा सत्ता ढांचा, ट्रंप को दो टूक जवाब

वाशिंगटन अमेरिकी मीडिया में Donald Trump के सामने Ali Khamenei को निशाना बनाने का विकल्प रखे जाने की खबर पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि सुप्रीम लीडर की हत्या से कुछ नहीं बदलेगा, क्योंकि व्यवस्था व्यक्ति नहीं बल्कि सिस्टम पर आधारित है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि देश की इस्लामिक शासन व्यवस्था किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। उन्होंने बताया कि यदि सुप्रीम लीडर Ali Khamenei को हटाने या मारने की कोशिश की जाती है, तब भी सिस्टम के भीतर तय प्रक्रिया से नया नेता चुना जाएगा। उन्होंने 1989 में Ruhollah Khomeini की मृत्यु का उदाहरण देते हुए कहा कि 24 घंटे के भीतर नए सुप्रीम लीडर का चयन कर लिया गया था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि Donald Trump के सामने खामेनेई को निशाना बनाने का विकल्प भी रखा गया। हालांकि, ईरान ने इसे “सिस्टम को न समझने वाली सोच” बताया। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ी हुई है और परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव चरम पर है। ईरान ने कहा है कि वह “युद्ध और शांति दोनों विकल्पों के लिए तैयार” है, लेकिन वह संतुलित परमाणु समझौते की उम्मीद भी रखता है। लेबनान के शिया संगठन Hezbollah ने खामेनेई को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को “रेडलाइन” बताया है। समूह ने संकेत दिया है कि यदि सुप्रीम लीडर पर हमला हुआ तो वह सैन्य कार्रवाई में शामिल हो सकता है।  

UN मंच पर भारत का पलटवार: IMF लोन से ज्यादा J&K पर खर्च, पाकिस्तान को आईना

संयुक्त राष्ट्र भारतीय डिप्लोमैट अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में जोरदार लताड़ लगाई। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि पाकिस्तान सपनों की दुनिया में है। हमारे जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए बजट पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष बेलआउट से भी बड़ा है। ऐसा पहली बार नहीं है जब वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने राग अलाप रहा हो। अक्सर पाकिस्तान एक ही मुद्दे को लेकर भारत पर निशाना साधने की कोशिश करता है। ताजा मामले में जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का राग अलापा, तो यूएन के मंच पर भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने जमकर क्लास लगाई। पाकिस्तान को जवाब देते हुए अनुपमा सिंह ने कहा, "भारत, पाकिस्तान और ओआईसी की हाई-लेवल मीटिंग में भारत के बारे में कही गई बातों के जवाब में अपने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर है। हम इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। ओआईसी, पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को दोहराकर, सिर्फ यह दिखाता है कि उसने खुद को एक सदस्य के कब्जे में कितना गहराई से आने दिया है और खुद को एक देश की राजनीतिक मजबूरियों के लिए एक ईगो चैंबर बना लिया है। पाकिस्तान के लगातार प्रोपेगेंडा से अब जलन की बू आ रही है।" भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा, "शायद पाकिस्तान को यह यकीन नहीं हो रहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ से मांगे गए हालिया बेलआउट पैकेज से दोगुने से भी ज्यादा है। आखिर में, पाकिस्तान की लगातार स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म के जरिए इलाके को अस्थिर करने की कोशिशों के बावजूद, जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर आगे बढ़ रहा है। पाकिस्तान के लिए अच्छा होगा कि वह ऐसे प्लेटफॉर्म पर दिखावा करने के बजाय अपने बढ़ते अंदरूनी संकट को ठीक करने पर ध्यान दे। दुनिया जरूर उसके दिखावे को समझ सकती है।" पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देते हुए अनुपमा सिंह ने कहा, "हम ऐसे प्रोपेगेंडा को बढ़ावा नहीं देना चाहते, लेकिन हम इसे फैक्ट्स के साथ खत्म करने के लिए कुछ बातें जरूर कहेंगे। जम्मू और कश्मीर भारत का एक जरूरी और अटूट हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान की कोई भी मनगढ़ंत बातें या प्रोपेगेंडा इस पक्की बात को नहीं बदल सकता कि जम्मू-कश्मीर का भारत में शामिल होना पूरी तरह से वैध और पक्का था और यह भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक था।" पीओके को लेकर पाकिस्तान पर पलटवार करते हुए भारतीय अधिकारी ने कहा, "इस इलाके से जुड़ा एकमात्र विवाद पाकिस्तान का भारतीय इलाकों पर गैर-कानूनी कब्जा है। हम पाकिस्तान से इन इलाकों को खाली करने की अपील करते हैं, जिन पर उसने जबरदस्ती कब्जा किया हुआ है। ऐसे देश से लोकतंत्र पर भाषण सुनना वाकई मुश्किल है, जहां की सरकारें शायद ही कभी अपना कार्यकाल पूरा करती हैं।" उन्होंने कहा, "ये बातें खोखली लगती हैं। जम्मू-कश्मीर में आम चुनाव और विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग इस बात का सबूत है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने पाकिस्तान की फैलाई आतंकवाद और हिंसा की सोच को नकार दिया है और विकास और लोकतंत्र के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। पिछले साल जम्मू-कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊंचे पुल चिनाब रेल ब्रिज की शुरुआत हुई है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान जरूर भ्रम में है।"

नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: करोड़ों की हशीश-गांजा बरामद

जगदलपुर ओडिशा पुलिस ने नशे के कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए करीब 200 करोड़ रुपये की हशीश और पांच करोड़ रुपये का गांजा जब्त किया है। यह कार्रवाई कोरापुट जिले के झोलापुट जलाशय के पास जंगलों के बीच बने एक गुप्त डिपो में की गई। ओडिशा पुलिस के अनुसार, देश में यह पहली बार है जब एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में गांजा और उससे तैयार की गई हशीश बरामद हुई है। जांच में सामने आया है कि नशे का यह डिपो ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर रणनीतिक रूप से तैयार किया गया था, ताकि पुलिस की निगरानी से बचते हुए कच्चे माल और तैयार उत्पाद की आवाजाही हो सके। यहां गांजे से तेल निकालकर हशीश तैयार की जा रही थी, जिसे देश के कई राज्यों में सप्लाई करने के लिए पूरा नेटवर्क खड़ा किया गया था। इस मामले में हरियाणा से पहुंचे दो पैडलरों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि डिपो चलाने वाले मुख्य आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बस्तर से सटे ओडिशा के मलकानगिरी और कोरापुट जिले लंबे समय से गांजा उत्पादन के लिए कुख्यात रहे हैं। दुर्गम पहाड़ी और जंगल इलाकों में गांजे की फसल उगाई जाती है, जिसे स्थानीय नेटवर्क के जरिए देशभर में भेजा जाता है। इस सप्लाई चेन में जगदलपुर एक प्रमुख ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है, जहां से माल मध्य भारत और उत्तर भारत के बाजारों तक पहुंचाया जाता है। हशीश क्या है? हशीश गांजे से निकाले गए रेज़िन (तेल) से तैयार की जाने वाली एक गाढ़ी और महंगी नशीली वस्तु है। इसकी मात्रा कम होती है, लेकिन नशे की तीव्रता अधिक होती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत काफी ऊंची होती है। गांजे की तुलना में इसे छिपाकर ले जाना आसान होता है, यही वजह है कि तस्कर अब गांजे को प्रोसेस कर हशीश में बदलने लगे हैं।  

बलूचिस्तान में बढ़ा तनाव: ISI ने मुख्यालय के आसपास चलाया बुलडोजर, रात का कर्फ्यू सख्त

इस्लामाबाद पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान के नुश्की जिले के काजियाबाद इलाके में आईएसएआई मुख्यालय के पास कई घर गिरा दिए हैं। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इन घरों में रहने वाले लोगों को कई दिन पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें कहा गया था कि वे घर छोड़ दें। इन नोटिस में लिखा गया था कि तय समयसीमा के भीतर यदि ये लोग घरों से बाहर नहीं निकले तो इमारतों को जमींदोज कर दिया जाएगा। बीते कुछ दिनों में पाकिस्तानी सेना ने कई घरों को गिरा दिया है। इन घरों को विस्फोटक और अन्य भारी उपकरण लगाकर गिराया गया है। माना जा रहा है कि आईएसआई के पास बनी इन इमारतों से हमला होने का खतरा था। इसलिए उन्हें गिरा दिया गया है। कहा जा रहा है कि जिन इमारतों को गिराया गया है, उनमें से एक मकान बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के नेता बशीर जेब बलोच का पैतृक आवास है। इसके अलावा भी कई राजनीतिक लोगों के घरों को गिराया गया है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के ऑपरेशन हेरॉफ के बाद पाकिस्तान ने यह कार्रवाई की है। माना जा रहा है कि इस इलाके में पाकिस्तान को बलूचों से डर सता रहा था। इसी के चलते उसने उनके घर तक गिरा दिए हैं। यही नहीं बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट में तो कहा गया है कि कच्छ और ग्वादर जैसे इलाकों में भी इमारतों को जमींदोज किया गया है। हर दिन शाम 6 बजे के बाद लगेगा कर्फ्यू नुश्की के काजियाबाद के लोगों का कहना है कि प्रशासन ने हर दिन शाम को 6 बजे के बाद यहां कर्फ्यू लगाने का फैसला भी लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार सुरक्षा बलों ने चेतावनी दी है कि जब तक यहां के लोग पाकिस्तान के समर्थन में रैली नहीं निकालते हैं और अपने घरों में पाकिस्तानी झंडा नहीं फहराते हैं। तब तक कर्फ्यू हर दिन लगता रहेगा। वित्तीय संस्थानों पर भी यह बात लागू की गई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने 31 जनवरी को कई शहरों में ऑपरेशन हेराफ लॉन्च किया था। इसमें उसने बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था। उसके बाद ही पाकिस्तान ने यह ऐक्शन लिया है। पूरे नुश्की शहर को ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने घेरा था बता दें कि एक साथ कई शहरों में हमले करके पाकिस्तान को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने करारा झटका दिया है। उसके बाद से ही पाकिस्तानी सरकार और सेना बौखलाए हुए हैं। दरअसल बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने हमलों के दौरान नुश्की शहर को ही घेर लिया था। माना जा रहा है कि इसी के चलते पाकिस्तानी सेना ने यह ऐक्शन लिया है। इसके अलावा आईएसआई के मुख्यालय पर भी हमले का डर है।  

युद्ध क्षमता पर खतरा! चीनी सेना को लेकर चौंकाने वाला खुलासा

बीजिंग चीनी सेना पर एक बड़े संकट ने दस्तक दे दी है। हाल ही में सामने आई कुछ रिपोर्ट्स में उसे लेकर चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। इस दावे के मुताबिक चीन की सेना में चल रही भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई से उसकी सैन्य कमान व्यवस्था में दरार आ रही है और इससे उसकी तेजी से आधुनिक हो रही सैन्य ताकत की तैयारी प्रभावित हो सकती है। यह दावा लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) ने अपनी वार्षिक ‘मिलिट्री बैलेंस’ रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट के मुताबिक व्यापक जांच के कारण पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वरिष्ठ स्तर पर गंभीर कमियां पैदा हो गई हैं और जब तक खाली पद नहीं भरे जाते, तब तक संगठनात्मक स्तर पर दिक्कत बनी रहेगी। चीन की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्रवाई के कारण यह दरार सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC), क्षेत्रीय थिएटर कमांड, हथियार खरीद एजेंसियों और रक्षा अकादमिक संस्थानों तक फैल चुकी है और यह प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब हाल ही में चीन के दो सबसे वरिष्ठ जनरल भी अनुशासनात्मक जांच के घेरे में आए हैं। इसे कई दशकों में चीन की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह की कार्रवाई का निकट भविष्य में असर लगभग तय है। हालांकि IISS ने यह भी कहा है कि यह प्रभाव अस्थायी हो सकता है और सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज गति से जारी रहने की संभावना है। चीन का रक्षा बजट बढ़ा लेकिन चुनौती बरकरार IISS के मुताबिक चीन का रक्षा खर्च एशिया के अन्य देशों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। 2025 में एशिया के कुल रक्षा खर्च में चीन की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत पहुंच गई। रिपोर्ट में इस बात के संकेत है कि जहां चीन अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की रणनीति जारी रखे हुए है, लेकिन कमान ढांचे में आई कमी उसकी संचालन क्षमता को प्रभावित कर सकती है।  

न्यूक्लियर ताकत पर किम जोंग उन का बड़ा बयान, कहा- देश को छेड़ा तो अंजाम होगा भयानक

उत्तर कोरिया उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने चेतावनी दी कि अगर उनकी सुरक्षा को खतरा हुआ तो परमाणु-संपन्न देश दक्षिण कोरिया को 'पूरी तरह से मिटा' सकता है। उन्होंने सियोल के साथ बातचीत करने से एक बार फिर इनकार कर दिया। सरकारी मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी। हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी की एक बैठक के समापन के दौरान उन्होंने अगले पांच वर्षों के लिए अपने नीतिगत लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वॉशिंगटन से बातचीत के लिए अपने रास्ते खुले रखे। हाल के वर्षों में किम ने सियोल के प्रति अपनी बयानबाजी को और तीखा कर दिया है और उसके साथ कूटनीति के प्रति अपनी अस्वीकृति पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सैन्य संघर्ष की आशंका नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक व्यापक रणनीति को आगे बढ़ाना है। इसके तहत किम के परमाणु हथियारों और मॉस्को तथा बीजिंग के साथ संबंधों के बल पर उत्तर कोरिया की अधिक मजबूत और प्रभावशाली भूमिका स्थापित करना है। आधिकारिक न्यूज एजेंसी ने कहा कि किम ने अपनी परमाणु-संपन्न सेना को मजबूत करने के लिए नई हथियार प्रणालियों को विकसित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में उनके परमाणु और मिसाइल के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास ने देश को परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में उभारा है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका लंबे समय से रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करना चाहता है तो उसे उत्तर कोरिया के प्रति अपनी कथित "शत्रुतापूर्ण" नीतियों को छोड़ना होगा। दक्षिण कोरिया ने क्या कहा दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया का अंतर-कोरियाई संबंधों को शत्रुतापूर्ण रूप में परिभाषित किया जाना खेदजनक है और सियोल शांति के प्रयासों को 'धैर्यपूर्वक' जारी रखेगा। ठप है अमेरिका से बातचीत विशेषज्ञों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि किम दक्षिण कोरिया के प्रति अपने कड़े रुख को और संस्थागत रूप दे सकते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ 2019 में वार्ता विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया का अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ कूटनीतिक संवाद ठप है। किम ने दक्षिण कोरिया को 2024 में स्थायी दुश्मन घोषित कर संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया था। किम जोंग उन फिर बने नेता उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को सोमवार को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के शीर्ष पद पर फिर से निर्वाचित किया गया था। उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि हजारों प्रतिनिधियों की 'एकमत इच्छा' से किम को पार्टी का महासचिव चुना गया। वर्ष 2016 से हर पांच वर्ष में आयोजित इस कांग्रेस में शीर्ष नेता का चुनाव होता है।  

धामी का वार—चुनाव आते ही कांग्रेस की ‘टूलकिट राजनीति’ शुरू

सतपुली (पौड़ी) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव का समय निकट आ रहा है, कांग्रेस के अर्बन नक्सल और टूल किट गैंग सक्रिय हो गए हैं। एआइ के माध्यम से सरकार की छवि को खराब करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन जनता कांग्रेस के इस झांसे में नहीं आएगी। उन्होंने कांग्रेस पर राज्य की डेमोग्राफी बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। कहा कि प्रदेश में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में विभिन्न कानूनों को इसलिए लागू किया है, ताकि उत्तराखंड की भावी पीढ़ी भविष्य में स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को बिलखेत (सतपुली) में तीन-दिवसीय नयार घाटी एडवेंचर फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हित में सरकार जो भी फैसले लेती है, कांग्रेस को उन तमाम फैसलों में एतराज होता है। कहा कि कांग्रेस कार्यकाल में राज्य की पूरी डेमोग्राफी बदल गई और कांग्रेस सरकार आंखों पर पट्टी बांधे बैठी रही। वर्तमान सरकार ने जहां घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की, वहीं अवैध रूप से कब्जाई जमीनों को भी अतिक्रमण मुक्त करवाया। कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की भावी पीढ़ी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा विकास की राजनीति कर रही है, जबकि कांग्रेस झूठ और षडयंत्र कर सत्ता तक पहुंचना चाहती है। नयार घाटी की सुंदरता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संपूर्ण क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और साहसिक संभावनाओं के कारण अत्यंत अद्वितीय है। प्रकृति ने इस क्षेत्र को सौंदर्य व रोमांच का अनुपम संगम प्रदान किया है, जिससे यह साहसिक पर्यटन व युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए आदर्श स्थल बन रहा है। कहा कि यहां के विकास के लिए सरकार सकारात्मक रूप से कार्य करेगी, ताकि स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। मुख्यमंत्री ने जिले में हुए विभिन्न विकास कार्यों का भी जिक्र किया। कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास शासन-प्रशासन को जन-जन तक पहुंचाकर जनसमस्याओं का निराकरण करना है। कहा कि राज्य का समग्र सामाजिक विकास सरकार का प्रमुख लक्ष्य व संकल्प है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ राज्य की सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ बनाए रखना, लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना, सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण करना भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सरकार प्रदेश को पर्यटन व एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कहा कि नयार घाटी एडवेंचर फेस्टिवल नयार घाटी की अपार प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और साहसिक पर्यटन की असीम संभावनाओं का सशक्त परिचय है। कहा कि यह महोत्सव स्थानीय स्तर पर रोजगार के द्वार खोलेगा। विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि यह महोत्सव जनपद पौड़ी को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा। इस मौके पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष पं.राजेद्र अणथ्वाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रचना बुटोला, कल्जीखाल की ब्लाक प्रमुख गीता देवी, द्वारीखाल की ब्लाक प्रमुख बीना राणा, जिला पंचायत सदस्य महेंद्र राणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिला पर्यटन विकास अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, डीएसटीओ रामसलोने, भाजपा पौड़ी के जिलाध्यक्ष कमल किशोर रावत, कोटद्वार के जिलाध्यक्ष राजगौरव नौटियाल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जन मौजूद रहा। सतपुली में बनेगा पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण केंद्र गुरुवार को सतपुली पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नयार घाटी में पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना करने की घोषणा की। उन्होंने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकासखंड पोखड़ा में रसल्वांण दीवा मंदिर स्थलीय कार्य, विकासखंड बीरोंखाल में कालिंका मंदिर स्थलीय कार्य, विकासखंड एकेश्वर में एकेश्वर महादेव मंदिर स्थलीय कार्य व विकासखंड पाबौ में चंपेश्वर महादेव मंदिर से जुड़े विकास कार्यों की घोषणा की।  

कोर्ट में पलटा मामला: ‘पाकिस्तानी’ कहे गए व्यक्ति ने दिखाया भारतीय पासपोर्ट, जज ने लगाई फटकार

हैदराबाद तेलंगाना हाई कोर्ट ने बुधवार को एक 33 वर्षीय व्यक्ति को अपनी रिट अपील वापस लेने की अनुमति दे दी। इस व्यक्ति को पहले पाकिस्तानी नागरिक घोषित किया जा चुका था, लेकिन अदालत में उसने अचानक अपना एक भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया, जिसके बारे में उसका दावा था कि यह उसे 2022 में जारी किया गया था। क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट के मुताबिक, हैदराबाद के याकूतपुरा निवासी सैयद अली हुसैन रिजवी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने अदालत से मांग की थी कि हैदराबाद पुलिस की स्पेशल ब्रांच के अधिकारियों द्वारा उसके घर पर की जा रही पूछताछ और दौरों पर रोक लगाई जाए। रिजवी का आरोप था कि पुलिस उसे देश में रहने के लिए लंबी अवधि के वीजा के लिए आवेदन करने को मजबूर कर रही है, जबकि वह हैदराबाद में ही पैदा हुआ, वहीं पला-बढ़ा और उसकी शादी भी एक भारतीय नागरिक से हुई है। सरकार और पुलिस की दलीलें गृह विभाग के सरकारी वकील महेश राजे ने अदालत के सामने कई अहम तथ्य रखे। पाकिस्तानी रिकॉर्ड: रिजवी का जन्म कराची में हुआ था। उसकी मां गोहर फातिमा के पाकिस्तानी पासपोर्ट में उसका नाम 'इमरान आबिद उर्फ इमरान हुसैन' दर्ज था। वे रिजवी के जन्म के तीन साल बाद फरवरी 1994 में भारत आए थे। पासपोर्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं: सरकारी वकील ने बताया कि रिजवी को कभी कोई भारतीय पासपोर्ट जारी नहीं किया गया। यहां तक कि खुद रिजवी ने अपने हलफनामे में यह बात मानी थी कि उसने कभी भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन नहीं किया है। वीजा के लिए खुद किया था आवेदन: सरकार ने बताया कि रिजवी ने 5 जुलाई 2025 को खुद को पाकिस्तानी नागरिक घोषित करते हुए लॉन्ग-टर्म वीजा (LTV) के लिए आवेदन किया था। अदालत में क्या हुआ? बुधवार को सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी. एम. मोहिउद्दीन की डिवीजन बेंच के सामने रिजवी के वकील एस. श्रीधर ने अचानक अपने मुवक्किल का भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया। इस पर सरकारी अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास इस पासपोर्ट का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। जब सरकार ने वीजा आवेदन की बात उठाई, तो रिजवी के वकील ने कहा कि पुलिस ने जबरन उनके मुवक्किल से उस आवेदन पर हस्ताक्षर करवाए थे। बेंच ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या यह 'अहम बात' (जबरन हस्ताक्षर वाली) कभी हलफनामे में बताई गई थी? वकील के पास इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। अदालत ने मौखिक रूप से कहा- अगर उसके पास पासपोर्ट था, तो पुलिस के घर आने पर उसने उन्हें क्यों नहीं दिखाया? वह अब भी उन्हें दिखा सकता है… अगर आप उन्हें पासपोर्ट दिखाते हैं और वे संतुष्ट हो जाते हैं, तो मामला यहीं खत्म हो जाता है। हर दिन नया तथ्य सामने आ रहा है… आप जो पासपोर्ट दिखा रहे हैं, उसमें नाम उसकी मां के पासपोर्ट में दर्ज नाम से अलग है। क्या आप उम्मीद करते हैं कि हम इन सबमें पड़ें और कोई टिप्पणी करें? कोर्ट का अंतिम फैसला अदालत के तीखे सवालों के बाद, याचिकाकर्ता के वकील ने रिट अपील वापस लेने की बात कही। बेंच ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि अदालत इस पासपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच नहीं कर सकती। इसके साथ ही, अदालत ने अधिकारियों को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की छूट दे दी। इससे पहले, पिछले महीने एक सिंगल-जज बेंच ने भी यह कहते हुए मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था कि पुलिस के दौरे वीजा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए थे और इन्हें दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जा सकता।