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मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान के एक्शन से अमेरिका बैकफुट पर, जानें कौन से 10 फैसले लिए

ईरान अमेरिका को भी अब इन हालातों में अपने सुरक्षाकर्मियों, राजदूतों और अन्य नागरिकों की चिंता सताने लगी है। उसने आनन-फानन में इजरायल, सऊदी अरब से लेकर बहरीन तक अपनी सुरक्षा के लिहाज से कुछ कदम उठाए हैं। कई देशों में दूतावास ही उसे बंद करने पड़े हैं। ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए हैं। इजरायल और अमेरिका की ओर से तेहरान समेत ईरान के अलग-अलग शहरों में हमले किए जा रहे हैं। इसके बाद भी ईरान के हौसले गिरे नहीं हैं। उसने ताबड़तोड़ हमले अब भी जारी रखे हैं। इजरायल के अलावा ईरान की ओर से मिडल ईस्ट के देशों पर भी लगातार हमले किए जा रहे हैं। यही नहीं अमेरिका को भी अब इन हालातों में अपने सुरक्षाकर्मियों, राजदूतों और अन्य नागरिकों की चिंता सताने लगी है। उसने आनन-फानन में इजरायल, सऊदी अरब से लेकर बहरीन तक अपनी सुरक्षा के लिहाज से कुछ कदम उठाए हैं। 1. यरूशलम में स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को निईकालने में मदद पर हाथ खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी दूतावास ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे इजरायल के पर्यटन मंत्रालय की मदद से किसी भी तरह बाहर निकलें। दूतावास ने कहा कि फिलहाल हम स्थिति में नहीं हैं कि आप लोगों को बाहर निकाल सकें। 2. अमेरिकी कंपनी अमेजन के डेटा सेंटर को संयुक्त अरब अमीरात में हुए ईरानी हमले में नुकसान पहुंचा है। इस डेटा सेंटर पर ईरान के ड्रोन्स ने हमला किया। इसके चलते पूरे मिडल ईस्ट में अमेजन की क्लाउड सर्विस प्रभावित हुई है। बहरीन में भी अमेजन के एक फैसिलिटी सेंटर को ड्रोन अटैक से नुकसान पहुंचा है। 3. अमेरिका ने सऊदी अरब में अपनी कौंसुलर सर्विसेज को बंद कर दिया है। सोमवार को ही उसके एक दफ्तर पर हमला हुआ था। यह ड्रोन अटैक था और खामेनेई की हत्या के बाद किया गया था। इसी डर के चलते कनाडा ने भी फिलहाल सऊदी अरब में स्थित दूतावास को बंद कर दिया है। 4. इराक में स्थित अपने दूतावास से अमेरिका ने सभी सरकारी कर्मचारियों से निकलने को कहा है। इसके अलावा ट्रैवल को लेकर भी एडवाइजरी जारी की गई है। 5. इस तनाव को देखते हुए कुवैत में भी अमेरिका अलर्ट है। उसने यहां अपने दूतावास को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। ईरान के हमले के बाद यहां दूतावास से धुआं उठता देखा गया था। दूतावास के लिए सभी तरह के अपॉइंटमेंट्स भी कैंसिल कर दिए गए हैं। 6. ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी एयरबेस को भी टारगेट किया गया है। यहां पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन अटैक हुए हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार 20 ड्रोन्स और तीन मिसाइलों के जरिए यहां हमला किया गया था। 7. दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई के सबसे अहम रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बंद करने का ऐलान किया है। इससे अमेरिका के मित्र देशों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा, जो इस रास्ते के माध्यम से तेल सप्लाई करते हैं। 8. एक दिलचस्प घटना कुवैत में हुई है, जहां अमेरिका के तीन फाइटर जेट्स मार गिराए गए। गलती से कुवैत ने ही यह हमला कर दिया। 9. अमेरिका ने सभी मिडल ईस्ट देशों को लेकर एक साझा बयान जारी किया है। अपने नागरिकों से तत्काल निकलने को कहा है। 10. सबसे बड़ा झटका अमेरिका यह लगा है कि उसे उम्मीद थी कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान पर उसकी पिट्ठू सरकार होगी। वहां के स्थानीय लोग खुद ही सत्ता बदल की मांग करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका है।  

हवाई सफर के बीच खतरे की घंटी! मुंबई से दुबई जा रही फ्लाइट को मिसाइल अलर्ट, प्रशासन हरकत में

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान में जारी जंग के बीच एक विमान हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गया। जानकारी के मुताबिक मुंबई से दुबई के लिए उड़ान भरने वाली इस फ्लाइट को रास्ते में अचानक मिसाइल का अलर्ट मिला, जिसके बाद एक अप्रत्याशित कदम उठाना पड़ा। मिसाइल हमले का अलर्ट मिलने के तुरंत बाद एमिरेट्स के विमान को UAE एयरस्पेस में रेयर गतिविधि करते देखा गया। Flightradar24 के डेटा के मुताबिक EK501 नाम का विमान मंगलवार सुबह UAE एयरस्पेस के बाहर रोक दिया गया। रक्षा मंत्रालय ने अलर्ट भेजा कि देश के एयर डिफेंस ईरान की तरफ से लॉन्च की गई बैलिस्टिक मिसाइलों का जवाब दे रहे हैं और विमान को खतरा हो सकता है। इसके बाद लाइव प्लेन ट्रैकर के मुताबिक विमान को दुबई में लैंड करने से पहले डबल रिवर्स करते देखा गया, जिसे बेहद ‘दुर्लभ’ कदम बताया जा रहा है। फ्लाइट को पहले मुंबई वापस जाते देखा गया था। हालांकि बाद में अधिकारियों द्वारा रोके जाने से पहले विमान वापस दुबई की ओर जाने लगी। चुनिंदा उड़ानें शुरू इससे पहले तनाव के बीच भारतीय विमान सेवा कंपनियों ने मंगलवार से पश्चिम एशिया के चुनिंदा शहरों के लिए नियमित और विशेष उड़ानें शुरू करने की घोषणा की है। निजी विमान सेवा कंपनी स्पाइसजेट ने बताया है कि वह आज और अगले कुछ दिनों के लिए संयुक्त अरब अमीरात के फूजैराह से दिल्ली और कोच्चि के लिए एक-एक और मुंबई के लिए दो विशेष उड़ानों का परिचालन करेगी। इसके अलावा 4 मार्च से वह फूजैराह से दिल्ली और मुंबई के लिए अपनी नियमित उड़ानें शुरू करेगी। वहीं अकासा ने भी 3 मार्च से मुंबई और सऊदी अरब के शहर जेद्दा के बीच अपनी नियमित उड़ान शुरू करने की घोषणा की है। वह बुधवार से मुंबई और अहमदाबाद से जद्दा के लिए नियमित उड़ानों का परिचालन करेगी। हालांकि अबू धाबी, दोहा, कुवैत और रियाद को जाने वाली उसकी सभी उड़ानें 4 मार्च तक रद्द रहेंगी। इंडिगो जेद्दा से आज मुंबई, हैदराबाद और अहमदाबाद के लिए चार उड़ानों का परिचालन कर रही है। उसने बताया है कि इन उड़ानों का परिचालन उन यात्रियों के लिए किया जा रहा है जिन्होंने पहले से इंडिगो की फ्लाइट में टिकट बुक कराये हुए थे। एयर इंडिया ने भी शुरू की सेवाएं इसके अलावा एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी आज से ओमान की राजधानी मस्कट से दिल्ली, कोच्चि, कोझीकोड, बेंगलुरु, मुंबई और तिरुचिरापल्ली के लिए नियमित उड़ानें शुरू करने की घोषणा की है। हालांकि बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को जाने वाली उसकी सभी उड़ानें आज आधी रात तक रद्द रहेंगी। वहीं एयर इंडिया ने अमेरिका, कनाडा, यूरोप और ब्रिटेन को जाने वाली अपनी सभी उड़ानें आज से नियमित रूप से चलाने की घोषणा की है। उसने बताया है कि आज आधी रात तक पश्चिम एशिया को जाने वाली उसकी सभी उड़ानें रद्द है।  

‘उत्तराखंड का स्वर्णिम दौर शुरू’ – पुष्कर सिंह धामी बोले, तीसरा दशक होगा प्रदेश के नाम

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विकास को लेकर बड़ा संकल्प दोहराया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बाबा केदारनाथ धाम से किए गए ऐलान के अनुसार 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा, और राज्य सरकार इसी दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सब मिलकर, एकता और आपसी मेलजोल से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेंगे। यह दशक विकास, सुशासन और जनभागीदारी का दशक होगा।” विकास, एकता और जनसहभागिता पर जोर धामी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए बुनियादी ढांचे, पर्यटन, रोजगार सृजन और निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे आपसी सहयोग और समन्वय के साथ राज्य निर्माण में भागीदार बनें। ‘उत्तराखंड का दशक’ बनाने का संकल्प मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प है। सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुए। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।

सीमा पर सतर्कता बढ़ी: राजौरी में ‘PIA’ लिखे हवाई जहाज जैसे गुब्बारे से सनसनी

राजौरी जिला राजौरी के थाना धर्मसाल के अंतर्गत आने वाले सरहोटी क्षेत्र में सोमवार दोपहर करीब दो बजे एक हवाई जहाज के आकार का गुब्बारा मिलने से क्षेत्र में कुछ समय के लिए हलचल मच गई। लाल और सफेद रंग के इस गुब्बारे पर उर्दू भाषा में कुछ शब्द लिखे हुए थे तथा उस पर पीआईए भी अंकित पाया गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गुब्बारे को अपने कब्जे में ले लिया। एहतियातन सीमांत इलाकों में अलर्ट जारी करते हुए स्थानीय लोगों को हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए कहा। किसी भी तरह की संदिग्ध हलचल दिखने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन में संपर्क करने की सलाह भी दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने सरहोटी गांव के समीप खुले क्षेत्र में हवाई जहाज की आकृति वाला गुब्बारा पड़ा देखा। गुब्बारा लाल और सफेद रंग का था और उस पर उर्दू में लिखावट के साथ पीआईए शब्द स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। संदिग्ध वस्तु को देखकर कुछ लोगों ने एहतियातन तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में लिया गुब्बारा सूचना मिलते ही पुलिस पोस्ट त्रियाठ की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक जांच के बाद गुब्बारे को सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में ले लिया गया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र का भी निरीक्षण किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां कोई अन्य संदिग्ध वस्तु तो नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गुब्बारा हवा के साथ उड़कर इस क्षेत्र में आ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गुब्बारा कहां से आया और किस उद्देश्य से छोड़ा गया था। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सतर्क रहने की दी सलाह घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गईं। हालांकि प्रारंभिक तौर पर इसे साधारण गुब्बारा बताया जा रहा है, फिर भी एहतियात के तौर पर इसे कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की अफवाह से बचने की आवश्यकता है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। इस घटना के बाद कुछ समय के लिए स्थानीय लोगों में जिज्ञासा और हल्की चिंता देखी गई, लेकिन पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई किए जाने से स्थिति सामान्य हो गई। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु दिखाई दे तो वे तुरंत इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाना, सेना या प्रशासन को दें और स्वयं उससे छेड़छाड़ न करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच जारी है और यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित एजेंसियों से भी सहयोग लिया जाएगा। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और जनजीवन सामान्य रूप से चल रहा है।  

ड्रैगन की एयर डिफेंस पर सवाल! साल भर में फिर फुस्स हुआ HQ-9B

चीन भले ही ईरान पर हमले इजरायल और अमेरिका ने किए हो लेकिन इस हमले में चीन की भारी भद्द पिटी है। दरअसल, ईरान ने हमलों से सुरक्षा के लिए तेल के बदले हथियार योजना के तहत पिछले साल चीन से HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे थे लेकिन शनिवार को जब ईरान पर हमले हुए तो ये डिफेंस सिस्टम घंटे भर भी ईरान की रक्षा करने में नाकाम साबित हुए। ऐसे में चीन का यह मिलिट्री हार्डवेयर न सिर्फ चर्चा के केंद्र में आ गया है बल्कि अब इसकी अग्नि परीक्षा की घड़ी आ चुकी है क्योंकि एक साल के अंदर लगातार दो लड़ाइयों में यह फेल साबित हुआ है। ईरान से पहले पड़ोसी पाकिस्तान ने भी HQ-9B सिस्टम को तैनात किया था, लेकिन मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी भारतीय फायरिंग के सामने यह चीनी डिफेंस सिस्टम फुस्स साबित हुआ था। HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम की वास्तविक क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों में ईरान के 30 से अधिक प्रांतों में से 20 से ज्यादा प्रभावित हुए हैं। राजधानी तेहरान समेत कई संवेदनशील ठिकानों को इजरायली और अमेरिकी सैन्य बलों ने निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, HQ-9B सिस्टम को तेहरान के साथ-साथ नतांज और फोर्दो जैसे परमाणु स्थलों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था, लेकिन यह आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को घंटे भर भी रोकने में विफल रहा। लिहाजा, इन हमलों में भारी तबाही हुई और सैकड़ों नागरिकों की मौत की खबरें सामने आई हैं। पाकिस्तान में भी हुआ था फुस्स यह पहली बार नहीं है जब HQ-9B पर सवाल उठे हों। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भी यह सिस्टम चर्चा में आया था। पाकिस्तान में तैनात HQ-9B भारतीय हमलों को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, उस संघर्ष में पाकिस्तान की एयर डिफेंस प्रणाली धीरे-धीरे निष्क्रिय हो गई थी और कई महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान हुआ। क्या है HQ-9B सिस्टम? HQ-9B चीन का लंबी दूरी का सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है, जिसे रूस के S-300 और अमेरिका के पैट्रियट सिस्टम से प्रेरित माना जाता है। लगभग 260 किलोमीटर तक इसकी मारक क्षमता है। यह 50 किमी तक ऊंचाई पर टारगेट को भेदने में सक्षम है। इसके अलावा यह एक साथ 100 लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता रखता है। इतना ही नहीं HQ-9B सिस्टम 6–8 लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाने की क्षमता रखता है, बावजूद इसके वह साल भर में दो बार फेल साबित हुआ है। इसे चीन ने अपने रणनीतिक क्षेत्रों, जैसे बीजिंग और दक्षिण चीन सागर, की सुरक्षा के लिए भी तैनात किया है। क्यों नहीं कर पाया असरदार बचाव? विशेषज्ञों के अनुसार HQ-9B की नाकामी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मसलन, अत्याधुनिक स्टेल्थ विमान और प्रिसिशन मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया हो, जिसे यह इंटरसेप्ट नहीं कर पाया। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से रडार सिस्टम का कमजोर कर दिया गया होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक साथ कई हमलों से सिस्टम ओवरलोड हो गया होगा, इस वजह से भी यह फेल हुआ हो सकता है। इसके अलावा अलग-अलग एयर डिफेंस सिस्टम के बीच समन्वय की कमी को भी एक वजह बताया जा रहा है। जुलाई 2025 में खरीदे थे HQ-9B सिस्टम ईरान ने पिछले साल जून में इजरायल के साथ सीजफायर के बाद अपने आसमान को मजबूत करने के लिए, चीन के साथ तेल के बदले हथियार की डील के तहत जुलाई 2025 में HQ-9B मिसाइल हासिल किए थे। इजरायल ने जून में ऑपरेशन राइजिंग लायन में, ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने के लिए ईरानी इलाके में अंदर तक घुसकर हमला किया था। इज़रायली ऑपरेशन के आखिर में US ने भी ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी की थी। तब ईरान ने दावा किया था कि इन हमलों से उसके परमाणु ठिकानों पर कोई असर नहीं पड़ा है लेकिन इस बार ईरान दावा कर रहा है कि उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जबकि IAEA का कहना है कि इसके ठोस सबूत नहीं मिल सके हैं। बता दें कि ईरान ने अपने रक्षा तंत्र में HQ-9B के साथ रूसी और घरेलू सिस्टम भी जोड़े थे, लेकिन संयुक्त हमलों के सामने यह “लेयर्ड डिफेंस” भी कमजोर पड़ गया।  

तालिबानी सजा से गई जान: ओडिशा में कथित कंगारू कोर्ट ने छात्र को मौत के घाट उतारा

अनुगुल ओडिशा में ‘कंगारू कोर्ट’ का बढ़ता चलन अब सीधे मासूमों की जान लेने लगा है। ताजा और दर्दनाक मामला मयूरभंज जिले से सामने आया है, जहां कंगारू कोर्ट की कथित सुनवाई के बाद भीड़ ने कक्षा नौ के छात्र को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। घटना इंदकोली गांव, थाना तिरिंग थाना क्षेत्र की है। मृतक 15 वर्षीय रायरांगपुर ग्रामीण थाना क्षेत्र का निवासी था। बकरी चोरी के शक में ‘फैसला’ और फिर भीड़ का कहर: बताया गया कि मृतक नाबालिग इन दिनों बसिंगी गांव में अपने चाचा के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह बसिंगी सरकारी हाई स्कूल में कक्षा नौ का छात्र था। सोमवार दोपहर इंदकोली गांव में कथित बकरी चोरी के आरोप में स्थानीय लोगों ने दो नाबालिगों को पकड़ लिया और गांव में ही अनौपचारिक ‘अदालत’ लगा दी। ग्रामीणों ने स्वयं ही ‘जांच’ और ‘सुनवाई’ कर डाली। इसके बाद भीड़ ने दोनों नाबालिगों की बेरहमी से पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, गुस्साई भीड़ ने उसकी साइकिल को भी आग के हवाले कर दिया। अस्पताल में तोड़ा दम: सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को भीड़ से बचाकर पहले स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें रायरांगपुर उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान संबित ने दम तोड़ दिया। दूसरे किशोर की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे बेहतर इलाज के लिए पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बारीपदा रेफर किया गया है। 11 गिरफ्तार, और धरपकड़ संभव: पीड़ित के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और अन्य संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था: राज्य के विभिन्न हिस्सों में कंगारू अदालतों के नाम पर हो रही ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। चोरी के महज शक में एक स्कूली छात्र की जान चली जाना इस बात का संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता और पुलिस की सक्रियता दोनों पर और काम किए जाने की जरूरत है। क्या होती है ‘कंगारू अदालत’? ‘कंगारू अदालत’ (Kangaroo Court) उस अवैध और अनौपचारिक न्याय प्रणाली को कहा जाता है, जिसमें कुछ लोग बिना किसी कानूनी अधिकार के स्वयं ही अदालत बन बैठते हैं, आरोप तय करते हैं और सजा सुना देते हैं। इसमें न तो निष्पक्ष जांच होती है, न आरोपी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलता है और न ही कानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। ऐसी ‘अदालतें’ भारतीय कानून में पूरी तरह अवैध हैं। किसी भी अपराध की जांच और सजा देने का अधिकार केवल विधिवत स्थापित न्यायालयों को है। ग्रामीण क्षेत्रों में कभी-कभी सामाजिक दबाव या अफवाहों के आधार पर इस तरह की भीड़तंत्र वाली व्यवस्था खड़ी हो जाती है, जो कई बार हिंसा और जानलेवा घटनाओं में बदल जाती है।  

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी: पुष्कर सिंह धामी ने कहा- हर नागरिक की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी

देहरादून ईरान और इजरायल में बढ़ते तनाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है और सभी एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मंगलवार को हरिद्वार पहुंचे मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार लगातार विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के संपर्क में है। धामी ने कहा कि विदेशों में मौजूद उत्तराखंडियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहां रह रहे लोगों से भी संपर्क साधा जा रहा है। उन्हें सुरक्षित भारत लाने की व्यवस्था जल्द की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सबको सुरक्षित निकाला जाएगा। इस दौरान गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय और डीएम मयूर दीक्षित ने अब तक की तैयारियों से अवगत कराया। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने यातायात-पार्किंग व्यवस्था की रूपरेखा रखी। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष किरन चौधरी, मेयर किरन जैसल, प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार, प्रदेश महासचिव अनिल गोयल, विधायक मदन कौशिक, आदेश चौहान और प्रदीप बत्रा, दर्जाधारी ओम प्रकाश जमदग्नि, अजीत चौधरी, जयपाल सिंह चौहान, देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, आईजी-गढ़वाल राजीव स्वरूप, एडीजी एपी अंशुमन, महानिदेशक-सूचना बंशीधर तिवारी, एमडी-सिडकुल सौरव गहरवार, एसपी-अभिसूचना मणिकांत मिश्रा, सीडीओ ललित नारायण मिश्रा, एडीएम पीआर चौहान, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, सचिव एचआरडीए मनीष कुमार, एसडीएम जितेंद्र कुमार, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह और सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी मौजूद रहे। सात मार्च से पहले हरिद्वार में हाई अलर्ट केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सात मार्च को प्रस्तावित हरिद्वार दौरे से पहले प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को बैरागी कैंप पहुंचकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी हों।

एलनाज नौरोजी का बड़ा डर, खामेनेई की मौत पर जश्न मनाने के बाद कहा- “मुझे मार डालेंगे”

नई दिल्ली एलनाज नौरोजी बीते कुछ वक्त से चर्चा में हैं। वह अपने देश ईरान के शासकों के खिलाफ खुलकर बोल रही हैं। एलनाज ने अली खामेनेई की मौत पर खुशी जाहिर की थी। इसके बाद एक वीडियो शेयर करके कहा था कि वहां जो भी हो रहा है, वहां के हुक्मरान इसके जिम्मेदार हैं। अब एक इंटरव्यू में एलनाज ने यह भी कहा है कि जब तक वो सरकार है, वह अपने देश वापस नहीं जा सकतीं। उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इजराइल से अच्छे थे ईरान के रिश्ते एलनाज ने बॉम्बे टाइम्स से बातचीत में बताया कि वह यूएस और इजराइल का सपोर्ट क्यों कर रही हैं। वह बोलीं, 'जब हम ईरान के बारे में बात करते हैं तो मैं इस्लामिक रिपब्लिक को अलग कर देना चाहती हूं जिन्होंने ईरान के लोगों पर कब्जा कर रखा है। ईरान के ज्यादातर लोग स्मार्ट और पढ़े-लिखे हैं और उनके विचार इस्लामिक रिपब्लिक से नहीं मिलते। एक वक्त था जब ईरान और इजराइल के रिश्ते अच्छे थे। अगर आप सायरस द ग्रेट को देखें, जिस इंसान ने दुनिया का पहला मानवाधिकार लिखा, वो पर्शियन (ईरान का) था। उसने उसने यहूदियों को बेबीलोन से मुक्त करवाया था। शाह (मोहम्मद रजा पहलवी) के वक्त में भी हमारे यूएस से अच्छे रिश्ते थे। सिर्फ इस्लामिक रिपब्लिक ही है जो लगातार कह रहा है कि नक्शे से इजराइल को मिटाना चाहता है।' एलनाज ने बताया क्यों कर रहीं विरोध एलनाज आगे बोलीं, 'एक महीने पहले जो ईरानी इन शासकों का विरोध कर रहे थे, उन्हें मार दिया गया। मैं ईरान में पैर भी नहीं रख सकती। अगर मैंने ऐसा किया तो वे लोग मुझे भी मार देंगे। 2022 मूवमेंट में जो हुआ उसकी वजह से मैं ईरान नहीं जा पाई हूं, जहां उन्होंने माहसा अमीनी (22 साल की लड़की) को मार दिया था। सितंबर 2022 में पुलिस कस्टडी में जिसकी मौत होने के बाद जबरदस्त विरोध हुआ था। उस लड़की को इसलिए गिरफ्तार किया गया था कि उसने हिजाब गलत तरीके से पहना था। मैंने खामेनेई के खिलाफ बोला तो मेरे परिवार को मेरी सुरक्षा की चिंता हो गई। अगर युद्ध में लोग मारे जाते हैं तो मैं अयातुल्ला को दोष दूंगी क्योंकि लोग कई बार आए और उन्होंने कहा कि वे उन्हें नहीं चाहते लेकिन वे लोग नहीं हटे। ये डिक्टेटरशिप है।' बचपन में ही ईरान से चली गई थीं एलनाज एलनाज का जन्म ईरान में हुआ था लेकिन वह 8 साल की हुईं तो उनके परिवार ने ईरान छोड़ दिया और जर्मनी चली गईं। उनके कुछ रिश्तेदार अभी भी वहां रहते हैं। जर्मनी में एलनाज ने मॉडलिंग की फिर 20 साल की उम्र में भारत आईं। वह कई साल से ईरान नहीं गई हैं।

खामेनेई की मौत पर ईरान में जश्न, लेकिन भारत में क्यों छाया मातम?

नई दिल्ली ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मिसाइल हमले में हत्या की खबर सामने आने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है और पूरे इलाके में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए इस हमले के बाद जहां एक तरफ कई देशों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं और शिया मुस्लिम समुदाय के बीच गहरा शोक छा गया है. वहीं दूसरी तरफ ईरान और दुनिया के कुछ हिस्सों में लोगों ने इसे ‘फ्री ईरान' की दिशा में पहला कदम बताते हुए जश्न भी मनाया है. इसी बीच भारतीय सिनेमा में काम कर रहीं ईरानी एक्ट्रेस एलनाज नोरौजी का सोशल मीडिया रिएक्शन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है. ईरान से आई दो तस्वीरों ने पहले विरोध की आग दिखाई थी, अब वही तस्वीरें जश्न की कहानी बन गई हैं. कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में एक युवती देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगाती नजर आई थी. यह दृश्य ईरान में महिलाओं के गुस्से और सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती का प्रतीक बना. अब खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद उसी तरह की महिलाएं ‘चीयर्स’ करती और जश्न मनाती दिखाई दे रही हैं. इन तस्वीरों ने दुनिया भर में बहस छेड़ दी है कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है या फिर दशकों से सख्त सामाजिक और धार्मिक पाबंदियों में जी रही ईरानी महिलाओं की आजादी की शुरुआत? ईरान में महिलाओं का संघर्ष क्यों बना वैश्विक मुद्दा?     पिछले कुछ सालों में ईरान में महिलाओं के अधिकार सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनकर उभरे हैं. ड्रेस कोड, सार्वजनिक जीवन में पाबंदियां और मोरल पुलिसिंग के खिलाफ लगातार आंदोलन होते रहे हैं. कई बार इन आंदोलनों को सख्ती से दबाया गया, लेकिन विरोध की आवाज पूरी तरह खत्म नहीं हुई. महसा अमिनी की मौत के बाद आंदोलन और तेज हो गया.     खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संरचना में संभावित बदलाव महिलाओं के आंदोलन को नई दिशा दे सकता है. हालांकि यह भी सच है कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, इसलिए तुरंत बड़े बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. खामेनेई की मौत पर भारत में मातम क्यों  तेहरान में अमेरिका और इजरायल ने जिस तरह से ताबड़तोड़ हमले किए और इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने जान गंवाई, उसे लेकर हंगामा मचा हुआ है। खामेनेई की मौत को लेकर भारत के मुस्लिम समुदाय में कुछ वर्गों के बीच खास प्रतिक्रिया नजर आई। लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और अलीगढ़ में शोक सभाओं, अंतिम संस्कार की प्रार्थना और ऑनलाइन संदेशों से संकेत मिलता है कि यह एक रेयर मूमेंट है। ऐसा पहली बार है जब शिया और सुन्नी, धार्मिक मतभेदों के लंबे इतिहास के बाद भी एक नेता के निधन पर साथ में शोक जताते नजर आए। खामेनेई 1989 से कर रहे थे ईरान का नेतृत्व     खामेनेई, जिन्होंने अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद 1989 से ईरान का नेतृत्व किया।     वो एक शिया धर्मगुरु थे और सुन्नियों के लिए कोई धार्मिक प्राधिकारी नहीं थे।     उनकी मृत्यु पर प्रतिक्रियाएं सांप्रदायिक सीमाओं को पार कर गईं।     कई सुन्नियों के लिए, यह भावना ईरान से कम और फिलिस्तीन से अधिक जुड़ी है।     ये एक ऐसा मुद्दा है जो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक विभाजनों को भी पार कर जाता है। खामेनेई पर क्यों आए शिया सुन्नी साथ? जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि खामेनेई का जीवन धार्मिक अधिकार के साथ-साथ राजनीतिक दृढ़ विश्वास को भी दर्शाता था। एक बयान में कहा गया कि रमजान के पवित्र महीने में खामेनेई की शहादत ने मुस्लिम जगत के लाखों लोगों को गहरा शोक पहुंचाया है। कुछ सुन्नी मौलवियों में शोक के साथ-साथ उन मुस्लिम सरकारों की आलोचना भी शामिल थी जिन्हें चुप्पी साधे हुए देखा गया।  सुन्नियों की इस प्रतिक्रिया पर क्या कह रहे जानकार विद्वान बशारत अली ने कहा कि शिया राजनीतिक कल्पना में, शहादत एकता और राजनीतिक शक्ति का स्रोत बन जाती है। भारत में कई शियाओं के लिए, ईरान का धार्मिक महत्व है क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा शिया-बहुसंख्यक देश है। ये कोम और मशहद जैसे धार्मिक केंद्रों का घर है। सुन्नियों के लिए प्रतिक्रिया काफी हद तक राजनीतिक रही है, जो फिलिस्तीन और इजरायल के विरोध के इर्द-गिर्द केंद्रित है।  

खामेनेई की मौत के बाद भारत में बढ़ा हाईअलर्ट, कानून-व्यवस्था के उल्लंघन पर सख्त कदम उठाने की चेतावनी

नई दिल्ली  मध्य पूर्व के हालात को देखते हुए भारत में हाईअलर्ट जारी किया गया है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने सभी राज्यों को संदिग्ध लोगों पर नजर रखने और प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स तैनात करने का निर्देश दिया है, जिससे देश में शांति व्यवस्था बनी रहे। अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन में देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, राज्यों में पुलिस-प्रशासन ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त चेतावनी दी है।  नागरिकों से कहा गया है कि वे किसी भी तरह का आपत्तिजनक, भड़काऊ या अनचाहा कंटेंट पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करने से बचें। अफवाहें और भ्रामक संदेश माहौल को बिगाड़ सकते हैं और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। पुलिस-प्रशासन ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान किया जाता है लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सुरक्षा बलों के साथ टकराव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ऐसी घटनाओं से जान-माल का नुकसान होता है और पूरे समाज को परेशानी होती है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल तत्वों, भड़काने वालों और असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में कर्नाटक के बांदीपुरा जिले में मौजूदा हालात को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने आम नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। पुलिस-प्रशासन ने कहा है कि क्षेत्र में शांति व सुरक्षा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए लोग किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहें जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो। पुलिस की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि लोग तोड़फोड़, दंगा-फसाद, पत्थरबाजी या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल न हों। ऐसा करना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता, व्यापारियों, विद्यार्थियों और दिहाड़ी मजदूरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हिंसा और अशांति की वजह से शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने, आवाजाही में रुकावट और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।