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एयरपोर्ट ड्रग्स शॉक: साबुन के बॉक्स से मिली 6.8 करोड़ की हेरोइन, यात्री गिरफ्तार

 अहमदाबाद अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक बार फिर नशीले पदार्थों की तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है. एयर इंटेलिजेंस यूनिट और कस्टम्स विभाग की संयुक्त टीम ने एक यात्री के पास से 6.8 किलोग्राम संदिग्ध हेरोइन बरामद की, जिसकी अनुमानित कीमत 6.8 करोड़ रुपये है. कस्टम अधिकारी ने बताया, ये हेरोइन कुदरती और हर्बल साबुन के पैकेट्स में चालाकी से छिपाई गई थी. आरोपी यात्री कुतुब सिहाबुद्दीन अब्बास अली जो चेन्नई का निवासी है, कुआलालंपुर से एयर एशिया की फ्लाइट AK91 से अहमदाबाद पहुंचा था. अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट के इंटरनेशनल टर्मिनल पर उतरने के बाद यात्रियों की प्रोफाइलिंग के दौरान कुतुब ग्रीन चैनल से गुजर रहा था. उसकी हरकतों पर शक होने के कारण कस्टम्स टीम ने उसे रोका. अधिकारियों ने उसे डोर मेटल डिटेक्टर से गुजरने को कहा और पूछताछ की, लेकिन कुतुब ने कोई प्रतिबंधित सामान होने से इनकार कर दिया. हालांकि, जब उसका बैग एक्स-रे स्कैन किया गया तो प्रतिबंधित सामान होने की आशंका बढ़ गई. बैग की गहन जांच में 29 पैकेट मिले जो बाहर से कुदरती और हर्बल साबुन के लग रहे थे. इन पैकेट्स को काटकर जांचने पर अंदर नशीला पदार्थ छिपा हुआ पाया गया. इसके अलावा आरोपी के पास से सिल्वर फॉयल और कार्बन पेपर में लपेटे हुए तीन सफेद कवर भी मिले, जिनमें ड्रग्स का जत्था छिपाया गया था.जिसका सैंपल एफएसएल को भेजा गया है. अधिकारियों ने बताया कि कड़ी पूछताछ के दौरान कुतुब सिहाबुद्दीन ने कबूल किया कि ये पार्सल उसे उसके दोस्त पानीर ने दिया था. उसे इस पार्सल को पहुंचाने के बदले एक बड़ी रकम देने का वादा किया गया था. पुलिस और कस्टम विभाग अब इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क की चेन खंगालने में जुटी है. आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ कर ये पता लगाया जा रहा है कि ये नशे की खेप भारत में किसे सप्लाई की जानी थी.र्ट पर साबुन के बॉक्स से निकली 6.8 करोड़ की हेरोइन, यात्री गिरफ्तार

बीमारी और तंगी में पीड़ा: पहली पत्नी ने लगाया उदित नारायण पर झूठा साजिश का आरोप

सुपौल  मशहूर पार्श्व गायक उदित नारायण झा एक बड़े विवाद में फिर से घिर गए हैं. उनकी पहली पत्नी रंजना नारायण झा ने सुपौल महिला थाना में उनके, उनके दो भाइयों और दूसरी पत्नी के खिलाफ आपराधिक आरोपों सहित एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है. रंजना ने आरोप लगाया कि उनका गर्भाशय आपराधिक साज़िश के तहत इलाज के बहाने बिना जानकारी निकलवा दिया गया और उन्होंने धोखा, उत्पीड़न और वादाखिलाफी जैसे आरोप भी लगाए हैं. रंजना अब बीमारी और आर्थिक तंगी के बीच न्याय की उम्मीद लेकर थाने का दरवाजा खटखटा रही हैं. 1984 की शादी, फिर दूरी उदित नारायण की पहली पत्नी रंजना झा के अनुसार, उनकी शादी 7 दिसंबर 1984 को पारंपरिक रीति रिवाज से उदित नारायण से हुई थी. शादी के कुछ समय बाद उदित अपने करियर के लिए मुंबई चले गए. रंजना का कहना है कि इसके बाद उनके वैवाहिक जीवन में दूरी बढ़ती गई. उन्हें बाद में मीडिया के जरिए पता चला कि उदित ने दूसरी शादी कर ली है. जब उन्होंने इस बारे में सवाल किया तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला. इलाज के नाम पर बड़ा आरोप रंजना झा ने अपने आवेदन में सबसे गंभीर आरोप 1996 की एक घटना को लेकर लगाया है. उनका कहना है कि उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के एक बड़े अस्पताल ले जाया गया. वहां उनके अनुसार बिना उनकी स्पष्ट सहमति के उनका गर्भाशय निकाल दिया गया. उन्हें इस बात की जानकारी बहुत बाद में दूसरे इलाज के दौरान हुई. रंजना इसे एक सुनियोजित साजिश बताती हैं और कहती हैं कि इस घटना ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया. रिश्तों में तनाव और अलगाव रंजना झा का कहना है कि बाद के वर्षों में जब वह मुंबई गईं तो उन्हें पति के घर में सम्मानजनक स्थान नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें घर में प्रवेश तक नहीं करने दिया गया. इसके बाद वह नेपाल स्थित ससुराल पहुंचीं, लेकिन वहां भी उन्हें सहारा नहीं मिला. थक हारकर वह अपने मायके में रहने को मजबूर हो गईं. बीमारी और आर्थिक तंगी का दर्द रंजना झा अब 61 वर्ष की हो चुकी हैं और अब उम्र के इस पड़ाव पर आकर वह स्वास्थ्य समस्याओं और आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं. उनका कहना है कि लगातार आश्वासन के बावजूद उन्हें ठोस सहायता नहीं मिली. इसी कारण उन्होंने एक बार फिर महिला थाना में आवेदन दिया है. उनका कहना है कि वह किसी बदले की भावना से नहीं, बल्कि अपने सम्मान और अधिकार के लिए लड़ रही हैं. सुपौल पुलिस मामले की जांच करेगी! सुपौल महिला थाना में दिए गए आवेदन के बाद अब पुलिस जांच की प्रक्रिया शुरू करेगी. आरोप गंभीर हैं और कानूनी रूप से हर पहलू की जांच जरूरी होगी. दूसरी ओर, उदित नारायण या उनके परिवार की ओर से इस नए आरोप पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है. बहरहाल, इस आरोप की सच्चाई की जांच अब पुलिस प्रक्रिया के तहत होगी. फिलहाल यह एक पक्ष का दावा है और कानूनी रूप से इसकी पुष्टि होना बाकी है. भरोसा, अधिकार और सम्मान जैसे सवाल बता दें कि यह विवाद नया नहीं है. पहले भी परिवार न्यायालय और महिला आयोग में मामला पहुंच चुका है. रंजना का दावा है कि एक समय पर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया गया था और समझौते की बात हुई थी, लेकिन व्यवहार में उन्हें वह सम्मान और सहयोग नहीं मिला जिसकी वह अपेक्षा करती थीं. दरअसल, यह मामला केवल एक सेलिब्रिटी विवाद नहीं है, बल्कि एक ऐसे रिश्ते की कहानी है जिसमें भरोसा, अधिकार और सम्मान जैसे सवाल खड़े हो गए हैं.

राजनीति और उद्योग जगत का मेल: रेवती पवार करेंगी बिजनेसमैन सारंग से शादी

 नागपुर एनसीपी (शरद पवार) की नेता और सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाली हैं. रेवती की शादी नागपुर के प्रतिष्ठित बिजनेसमैन के बेटे सारंग लखानी से तय हुई है. इस खबर की पुष्टि परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों की ओर से सोशल मीडिया पर शेयर किए गए बधाई संदेशों से हुई है. लोकसभा सांसद के बेटे विजय सुले ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर बधाई मैसेज पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बहन रेवती और सारंग की एक फोटो शेयर की, जिसके साथ कैप्शन था, "बधाई हो बहन और जीजाजी," साथ में दिल और अंगूठी वाले इमोजी भी थे. कांग्रेस लीडर सुशील कुमार शिंदे की बेटी स्मृति शिंदे ने भी सोशल मीडिया पर ऐसा ही मैसेज और फोटो शेयर किया. रेवती सुले ने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बैचलर किया और बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की. वहीं, सारंग लखानी अभी विश्वराज ग्रुप में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं, जो उनके पिता की फर्म है. सारंग ने यूनाइटेड स्टेट्स के कोलंबिया बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है. साथ ही सारंग लखानी एक कुशल बैडमिंटन खिलाड़ी भी रह चुके हैं.  खुशी की इस खबर के बीच परिवार के वरिष्ठ सदस्य और दिग्गज नेता शरद पवार के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है. उन्हें सीने में संक्रमण के चलते सोमवार को पुणे के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द स्वस्थ होकर पोती के विवाह समारोहों में शामिल होंगे.

टंबलर रिज स्कूल फायरिंग: कनाडा में बड़ा हमला, कई की जान गई, दर्जनों जख्मी

टंबलर रिज कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया (BC) प्रांत के टंबलर रिज शहर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. मंगलवार को एक माध्यमिक स्कूल और एक रिहायशी घर में गोलीबारी हुई, जिसमें हमलावर समेत कुल 7 लोगों की मौत हो गई. वहीं, इस फायरिंग में 25 लोग घायल भी हो गए.  रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के मुताबिक, दोपहर लगभग 1:20 बजे 'टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल' में एक सक्रिय शूटर के होने की रिपोर्ट मिली. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इलाके में 'पुलिस इनिशिएटेड पब्लिक अलर्ट' (PIPA) जारी किया और स्कूल को चारों ओर से घेर लिया. स्कूल में दाखिल होने पर पुलिस अधिकारियों को 7 लोगों के शव मिले. पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक संदिग्ध के मारे जाने की आशंका है, लेकिन अभी इस बात की जांच की जा रही है कि क्या कोई दूसरा हमलावर भी इस घटना में शामिल है.  स्कूल और घर से 9 शव बरामद जांच में स्कूल से जुड़ी इस घटना के तार एक स्थानीय निवास से भी जुड़ा पाए गए. वहां तलाशी के दौरान पुलिस को दो और लोगों के शव बरामद हुए. स्थिति को काबू में देख पुलिस ने शाम 5:45 बजे पब्लिक अलर्ट वापस ले लिया था और अब आगे की जांच जारी है. पुलिस हमलावर के मकसद पता लगाने की कोशिश कर रही है. लोगों को घरों में रहने की सलाह इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 'BC RCMP मेजर क्राइम' विभाग ने जांच की कमान संभाल ली है. इलाके में इमरजेंसी रिस्पांस टीम और फ्रंटलाइन अधिकारियों के साथ-साथ विक्टिम सर्विसेज को भी तैनात किया गया है, ताकि प्रभावित परिवारों को मानसिक और सामाजिक सहायता प्रदान की जा सके. कस्बे की करीब 2400 की आबादी को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि पड़ोसी इलाकों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है. बंद किए गए सेकेंडरी और एलिमेंट्री स्कूल सुरक्षा के मद्देनजर टंबलर रिज के सेकेंडरी और एलिमेंट्री दोनों स्कूलों को फिलहाल बंद कर दिया गया है. स्थानीय विधायक लैरी न्यूफेल्ड ने जानकारी दी है कि समुदाय की मदद के लिए बड़ी संख्या में पुलिस (RCMP) और एम्बुलेंस की टीमें तैनात की गई हैं. उन्होंने सुरक्षा कारणों से फिलहाल ज्यादा जानकारी साझा करने से मना किया है, ताकि चल रहे ऑपरेशन में कोई परेशानी न आए. 

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनें शबाना महमूद, तो कश्मीर पर असर कैसा होगा?

लंदन   शबाना महमूद यह नाम विश्व की राजनीति पर हाल ही में चर्चा का केंद्र बन गया है, क्योंकि ऐसी संभावना जताई जा रही है कि शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं. शबाना महमूद पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश नागरिक हैं और उन्होंने आर्टिकल 370 को हटाने जाने का विरोध किया था. उन्होंने कश्मीर को लेकर कई बार भारत विरोधी तेवर दिखाया है, ऐसे में उनके प्रधानमंत्री बनने से क्या भारत और यूके के संबंधों पर असर पड़ सकता है? कौन है शबाना महमूद? शबाना महमूद लेबर पार्टी की तेज तर्रार नेता हैं. वह महज 45 साल की हैं. उनका जन्म इंग्लैंड के बर्मिंघम में हुआ है और वे एक पाकिस्तानी मूल के माता–पिता की संतान हैं. शबाना ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है और शुरुआत में पेशे से वकील रही हैं और बाद में उन्होंने राजनेता बनने की ओर कदम बढ़ा दिया. शबाना का परिवार पीओके के मीरपुर से वास्ता रखता है. उनके पिता सिविल इंजीनियर हैं. शबाना ने शादी नहीं की है और अपने 4 भाई-बहनों में वो सबसे बड़ी हैं. 2010 में वे पहली बार संसद सदस्य (MP) के रूप में चुनी गईं. शबाना महमूद लेबर पार्टी की सदस्य हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुकी है. वर्तमान में वो होम सेक्रेटरी के तौर पर कार्यरत हैं. ब्रिटेन में होम सेक्रेटरी को भारत के गृहमंत्री के समकक्ष माना जा सकता है, लेकिन उसकी भूमिका विदेश नीतियों में भी अहम होती है. 2024 में शबाना ने न्याय मंत्री (Justice Secretary) और लॉर्ड चांसलर (Lord Chancellor) के रूप में भी सेवा दी. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की कुर्सी पर खतरा क्यों मंडराया? ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सुपरमेरी जीत(बड़ी जीत) के साथ 5 जुलाई 2024 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन एपस्टीन फाइल्स ने उनके लिए परेशानी खड़ी कर दी है. दरअसल कीर स्टारमर की परेशानी की वजह हैं पीटर मैंडेलसन. पीटर मैंडेलसन को कुछ समय पहले अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत नियुक्त किया गया था और मैंडेलसन के संबंध जेफ्री एपस्टीन से थे. एपस्टीन फाइल्स में यह बताया गया है कि कि मैंडेलसन ने कई संवेदनशील जानकारी एपस्टीन को मेल की थी. इस मुद्दे को लेकर ब्रिटेन में बड़ा बवाल मचा हुआ है और प्रधानमंत्री की इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि आखिर उन्होंने ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति क्यों की. पीटर मैंडेलसन को पद से हटा दिया गया है, लेकिन ब्रिटेन में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग हो रही है. हालांकि कीर स्टारमर ने इस्तीफा देने से मना किया है, लेकिन उनपर इस्तीफे का दबाव बहुत बढ़ गया है. शबाना महमूद अगर ब्रिटेन की पीएम बनी, तो भारत के साथ बिगड़ेंगे संबंध? शबाना महमूद पाकिस्तानी मूल की राजनेता हैं. इसी वजह से एक आम भारतीय के मन में यह सवाल है कि क्या शबाना महमूद के प्रधानमंत्री बनने से भारत के साथ ब्रिटेन के संबंध बिगड़ सकते हैं? इस शंका के बीच हमें कुछ बातों को समझना होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि किसी भी देश की राजनीति और वहां की नीतियां राष्ट्रीय हित के अनुसार तय होती हैं ना कि किसी व्यक्ति के धर्म और उसके सोच के आधार पर. इस स्थिति में अगर शबाना महमूद ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बन भी जाती हैं, तो उनकी व्यक्तिगत राय का असर भारत और ब्रिटेन के संबंधों पर पर पड़ेगा इसकी संभावना शून्य है.

1000 साल बाद सोमनाथ में भव्य महाशिवरात्रि, 5 लाख श्रद्धालुओं का होगा उमड़ा हुजूम

अहमदाबाद महाशिवरात्रि के अवसर पर इस वीकेंड पर गुजरात के विश्वप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. अधिकारियों के मुताबिक, पिछले महीने आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के बाद से मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कैलाश खेर समेत कई कलाकार देंगे प्रस्तुति 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के मद्देनजर सोमनाथ मंदिर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. गिर सोमनाथ जिले के कलेक्टर एनवी उपाध्याय ने सोमवार को बताया कि भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर बड़े पैमाने पर इंतजाम किए जा रहे हैं.गुजरात पर्यटन निगम की ओर से 14, 15 और 16 फरवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर समेत देशभर के कलाकार प्रस्तुति देंगे. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के बाद बढ़ी दर्शनार्थियों की संख्या उन्होंने बताया कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ 8 से 11 जनवरी के बीच आयोजित किया गया था, जो जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले ऐतिहासिक हमले के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रीय आयोजन था. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे. उपाध्याय के अनुसार, पहले जहां रोजाना करीब 20 हजार श्रद्धालु मंदिर आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 75 हजार प्रतिदिन हो गई है. महाशिवरात्रि के मुख्य दिन करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए आने की उम्मीद है. 10 गेटों पर सुरक्षा जांच के प्रबंध भीड़ प्रबंधन के लिए सुरक्षा जांच गेट की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है. दर्शन को सुचारु बनाने के लिए वन-वे एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया जाएगा. आपात स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी. इसके अलावा मंदिर परिसर के पार्किंग क्षेत्र में बड़े स्तर पर भंडारे और प्रसाद वितरण के लिए अतिरिक्त काउंटर लगाए जाएंगे. गुजरात पर्यटन निगम की ओर से 14, 15 और 16 फरवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर समेत देशभर के कलाकार प्रस्तुति देंगे.

Chandrayaan-4: ISRO ने चांद के साउथ पोल पर लैंडिंग साइट चुनी, लैंड रोवर का होगा मिशन

बेंगलुरु  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) अपने अगले बड़े चंद्र मिशन की तैयारी में तेजी से जुट गया है. चंद्रयान-4 मिशन के लॉन्च होने में भले ही अभी करीब दो साल बाकी हैं, लेकिन इसकी सबसे अहम तैयारियों को पूरा कर लिया गया है. इसरो ने चंद्रमा के साउथ पोल में लैंडिंग के लिए एक सुरक्षित जगह भी चुन ली है. केंद्र सरकार पहले ही चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे चुकी है. यह मिशन भारत का पहला लूनर सैंपल रिटर्न मिशन होगा. इसका मतलब है कि इस बार चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के सैंपल को पृथ्वी पर लाया जाएगा. इस कारण से इस मिशन यानी चंद्रयान-4 को अभी तक का सबसे मुश्किल लूनर मिशन यानी चंद्र मिशन माना जा रहा है. इसरो प्रमुख वी नारायणन पहले ही साफ कर चुके हैं कि चंद्रयान-4 को साल 2028 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है. इस मिशन के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के साउथ पोल वाले इलाके में स्थित मॉन्स मूटन क्षेत्र का गहराई से अध्ययन किया. इस क्षेत्र में चार संभावित लैंडिंग साइट्स की पहचान की गई है, जिनके नाम MM-1, MM-3, MM-4 और MM-5 रखे गए. MM-4 साइट सबसे सुरक्षित इन सभी जगहों का अध्ययन इसरो के हाई-रिजॉल्यूशन ऑर्बिटर हाई रेजॉल्यूशन कैमरा की मदद से किया गया है. अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरों और डेटा के आधार पर वैज्ञानिकों ने जमीन की ढलान, ऊंचाई और खतरे की संभावना को परखा. इस जांच में MM-4 साइट सबसे सुरक्षित पाई गई. इसरो अधिकारियों के मुताबिक MM-4 के आसपास एक किलोमीटर के क्षेत्र में खतरे वाली जगहें सबसे कम हैं. यहां जमीन की औसत ढलान करीब 5 डिग्री है, जो लैंडिंग के लिए काफी सुरक्षित मानी जाती है. इस जगह की औसत ऊंचाई 5334 मीटर है और यहां 24 मीटर गुणा 24 मीटर के कई ऐसे ग्रिड मिले हैं, जहां बिना किसी रुकावट के लैंडर उतारा जा सकता है. चंद्रयान-4 मिशन में कुल पांच मॉड्यूल होंगे. इनमें प्रोपल्शन मॉड्यूल, डिसेंडर मॉड्यूल, असेंडर मॉड्यूल, ट्रांसफर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल शामिल हैं. डिसेंडर और असेंडर मॉड्यूल मिलकर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेंगे. इसके बाद सैंपल इकट्ठा किए जाएंगे और उन्हें सुरक्षित तरीके से पृथ्वी तक वापस लाया जाएगा. इस मिशन की सफलता भारत को चंद्र अन्वेषण (Moon Exploration) के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी.

सिंधु नदी पर भारत का नियंत्रण, बांधों का जाल और पाकिस्तान के लिए बर्बादी का काउंटडाउन

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के बाद अगर आपने सोचा होगा क‍ि भारत ने पाक‍िस्‍तान की ओर ध्‍यान देना बंद कर द‍िया है तो रुक‍िये… भारत ने जम्मू-कश्मीर की बर्फीली वादियों से बहने वाली चिनाब, झेलम और सिंधु नदी पर कुछ ऐसा क‍िया है क‍ि अगले कुछ महीनों बाद पाक‍िस्‍तान की सांसें अटक जाएंगी. सिंधु जल संध‍ि पर कंप्‍लीट ब्रेक के बाद मोदी सरकार ने इन नद‍ियों पर बांधों का जाल बिछाना शुरू कर द‍िया है. एक दो नहीं, बल्‍क‍ि कई बड़े बांध बनाए जा रहे हैं. सबको इमरजेंसी मोड में पूरा करने को कहा गया है. बजट पहले से अलॉट कर द‍िया गया है. टाइम फ‍िक्‍स है. साफ है क‍ि भारत अब अपनी नदियों के पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखेगा. पाक‍िस्‍तान के ल‍िए यह क‍िसी सर्जिकल स्‍ट्राइक से कम नहीं. वो प्रोजेक्‍ट जो पाक‍िस्‍तान का हलक सुखा देंगे च‍िनाब नदी सवलकोट हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट     सवलकोट प्रोजेक्‍ट को चिनाब नदी पर भारत का सबसे महत्वाकांक्षी कदम माना जा रहा है. यह प्रोजेक्ट ऊधमपुर और रामबन जिलों में फैला हुआ है. यह चिनाब नदी पर पहले से मौजूद बागलीहार प्रोजेक्ट (अपस्ट्रीम) और सलाल प्रोजेक्ट (डाउनस्ट्रीम) के बीच में स्थित है. इसकी लोकेशन ऐसी है कि यह चिनाब के पानी के बहाव को नियंत्रित करने में भारत को अभूतपूर्व बढ़त देती है. पहले चरण में 1,406 मेगावाट और दूसरे चरण में 450 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा.     इमरजेंसी मोड: NHPC ने फरवरी 2026 में इसके लिए टेंडर जारी किए हैं. दस्तावेजों से पता चलता है कि सरकार इसे जितनी जल्दी हो सके (As early as possible) कमीशन करना चाहती है. मानसून के दौरान भी इसका काम 50% गति से जारी रखने का निर्देश दिया गया है. पाकल दुल परियोजना     किश्तवाड़ जिले में बन रही यह परियोजना पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा दुःस्वप्न है. सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान की ओर बहने वाली पश्चिमी नदियों पर भारत को ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट बनाने की अनुमति थी, लेकिन पाकल दुल भारत की पहली ऐसी परियोजना है जिसमें पानी को स्टोर करने की क्षमता है.167 मीटर की ऊंचाई के साथ यह भारत का सबसे ऊंचा बांध होगा. इसकी मदद से भारत सर्दियों में जब पाकिस्तान को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब पानी के बहाव को रेगुलेट कर सकेगा. सरकार ने इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. कीरू प्रोजेक्‍ट     चिनाब नदी पर किश्तवाड़ में ही एक और महत्वपूर्ण बांध ‘कीरू’ आकार ले रहा है. कीरू को पाकल दुल और अन्य परियोजनाओं के साथ एक ‘चेन’ के रूप में डिजाइन किया गया है. इसका मतलब है कि अगर भारत ऊपर के बांध से पानी रोकता है, तो नीचे के सभी बांधों का प्रबंधन एक साथ किया जा सकेगा. इसे भी दिसंबर 2026 तक पाकल दुल के साथ ही चालू करने का आदेश दिया गया है, ताकि चिनाब पर भारत की पकड़ एक साथ मजबूत हो. क्वार प्रोजेक्‍ट     क्वार परियोजना इंजीनियरिंग का एक नमूना है. जनवरी 2024 में चिनाब नदी का रुख मोड़कर इसके निर्माण के लिए रास्ता बनाया गया था, जिसे पाकिस्तान ने बहुत करीब से ट्रैक किया था. केंद्र ने इसके लिए मार्च 2028 की समयसीमा तय की है. नदी का मार्ग परिवर्तन इस बात का सबूत है कि भारत अब पाकिस्तान के कड़े विरोध की परवाह किए बिना निर्माण कार्य जारी रख रहा है. रतले प्रोजेक्‍ट     रतले प्रोजेक्ट पिछले एक दशक से भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे विवादित मुद्दा रहा है. पाकिस्तान ने इसके डिजाइन, विशेष रूप से इसके स्पिलवे को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक का दरवाजा खटखटाया है. भारत ने इन विरोधों को खारिज करते हुए 2024 में नदी का रुख मोड़ा और बांध के कंक्रीट कार्य की आधारशिला रखी. यह प्रोजेक्ट भी 2028 तक चालू होने की उम्मीद है. दुलहस्ती स्टेज-2     मौजूदा दुलहस्ती-1 के ठीक नीचे स्टेज-2 को भी पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. पाकिस्तान ने इस पर हाल ही में यह कहकर आपत्ति जताई कि उसे सूचित नहीं किया गया था, लेकिन भारत ने इसे संधि के दायरे में बताते हुए आपत्ति को दरकिनार कर दिया है. झेलम नदी     किशनगंगा जलविद्युत परियोजना (330 MW): यह झेलम की सहायक नदी किशनगंगा (पाकिस्तान में नीलम) पर है. भारत ने इसे 2018 में चालू किया था. यह पानी को मोड़कर वुलर झील में डालती है, जिससे पाकिस्तान के नीलम-झेलम प्रोजेक्ट की बिजली क्षमता कम हो जाती है.     उरी स्टेज-II (240 MW): बारामूला जिले में स्थित इस प्रोजेक्ट को सरकार ने अब प्राथमिकता पर रखा है. संधि के स्थगन के बाद इसकी फाइलें तेजी से आगे बढ़ी हैं ताकि झेलम के पानी का अधिकतम उपयोग भारत की सीमा के भीतर हो सके.     तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट: यह वुलर झील के मुहाने पर एक ‘बराज’ है. पाकिस्तान के विरोध के कारण यह सालों से लटका था, लेकिन अब भारत इसे नेविगेशन और पानी के स्‍टोरेज के लिए फिर से जीवित कर रहा है. सिंधु नदी     निमो-बाजगो (45 MW): लेह के पास अलची गांव में स्थित यह बांध सिंधु नदी पर बना है. यह लद्दाख की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सिंधु के मुख्य बहाव पर भारत की कूटनीतिक पकड़ मजबूत करता है.     चुटक प्रोजेक्ट (44 MW): यह सिंधु की सहायक नदी ‘सुरु’ पर कारगिल जिले में स्थित है.     दुर्बुक-शायोक और निमू-चिलिंग प्रोजेक्ट: लद्दाख की इन परियोजनाओं पर भी पाकिस्तान ने हाल ही में आपत्ति जताई थी, लेकिन भारत इन्हें अपनी रणनीतिक जरूरतों के लिए तेजी से आगे बढ़ा रहा है. रावी नदी     शाहपुर कंडी बांध: पंजाब के पठानकोट में रावी नदी पर स्थित इस बांध का मुख्य हिस्सा फरवरी 2024 में तैयार हो गया है. यह रणजीत सागर बांध से निकलने वाले पानी को रोकेगा, जिससे पाकिस्तान जाने वाला पानी पूरी तरह बंद हो जाएगा और जम्मू-कश्मीर व पंजाब के खेतों को सिंचाई मिलेगी.     उझ मल्‍टी परपज प्रोजेक्‍ट: रावी की सहायक नदी ‘उझ’ पर यह प्रोजेक्ट कठुआ में बन रहा है. केंद्र ने हाल ही में यहां नहर प्रणाली को मंजूरी दी है ताकि पाकिस्तान जाने वाले अनियंत्रित पानी को रोककर पंजाब और राजस्थान की … Read 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6th जनरेशन फाइटर प्लेन की तकनीक: 5वीं पीढ़ी के विमानों से क्या होगी बड़ी खासियत?

नई दिल्ली दूसरे विश्व युद्ध के प्रोपेलर वाले एयरक्राफ्ट से लेकर आज के स्टील्थ फाइटर जेट तक पिछले 8 दशकों में हवाई युद्ध में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है. फाइटर जेट्स की पांचवीं पीढ़ी जो रडार से बचने वाले, सेंसर से लैस एयरक्राफ्ट हैं, पहले ही उन सीमाओं को पार कर चुके हैं जिन्हें कभी मुमकिन माना जाता था. लेकिन अब दुनिया की बड़ी ताकतें छठी पीढ़ी के फाइटर जेट पर तेजी से कम कर रही हैं. हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिका के नए F-47 को दुनिया का सबसे विनाशकारी एयरक्राफ्ट बताया था. आपको बता दें कि यह एयरक्राफ्ट भी छठी पीढ़ी का ही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर कैसे होंगे छठी जनरेशन के फाइटर प्लेन. पांचवीं पीढ़ी से छलांग F-35 और F-22 जैसी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स ने स्टील्थ, सेंसर फ्यूजन और एडवांस्ड एविएशन को पेश किए हैं. अब नई पीढ़ी के एयरक्राफ्ट से इससे कहीं आगे जाने की उम्मीद की जा रही है. यह कोई सिंपल अपग्रेड नहीं होगा बल्कि एक क्वांटम छलांग होगी. बिना पायलट और ऑप्शनल पायलट वाला कॉम्बैट  छठी पीढ़ी के जेट्स की सबसे खास विशेषता यह है कि इसमें ऑप्शनल मैनिंग होगी. इन एयरक्राफ्ट को पायलट उड़ा सकता है, रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है, या पूरी तरह से बिना पायलट के ऑपरेट किया जा सकता है. वे ऑटोनॉमस सपोर्ट ड्रोन के झुंड को भी कमांड करेंगे. इन्हें अक्सर लॉयल विंगमैन सिस्टम कहा जाता है. यह मुख्य फाइटर के साथ टोही, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध या हमले के मिशन कर सकते हैं. कोर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम पायलटों की मदद करेंगे, युद्ध के मैदान के भारी मात्रा में डाटा का रियल टाइम में एनालिसिस करेंगे, रडार जैमिंग को मैनेज करेंगे, खतरों को भी प्रायोरिटी पर रखेंगे और यहां तक की तेज गति वाली लड़ाई के दौरान  टैक्टिकल फैसलों की भी सलाह देंगे.  नेक्स्ट लेवल स्टील्थ और रेडिकल डिजाइन स्टील्थ टेक्नोलॉजी में काफी सुधार किया जाएगा. छठी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट को रडार, इंफ्रारेड और इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम में पता लगाना और भी मुश्किल होने की उम्मीद है. कुछ डिजाइन पारंपरिक वर्टिकल स्टेबलाइजर को पूरी तरह से हटा सकते हैं. इससे ड्रैग और रडार रिफ्लेक्शन कम होगा और एफिशिएंसी और सर्वाइवल में काफी ज्यादा सुधार होगा.  लेजर और डायरेक्टेड एनर्जी हथियार  पांचवीं पीढ़ी के जेट्स मुख्य रूप से मिसाइल पर निर्भर करते हैं. लेकिन छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स डायरेक्टेड एनर्जी हथियार ले जाएंगे. इसमें हाई एनर्जी लेजर और माइक्रोवेव सिस्टम शामिल हैं. यह हथियार लाइट की स्पीड से टारगेट को निशाना बना सकते हैं.  

केंद्रीय योजनाओं के 43,000 करोड़ का पैसा राज्यों ने नहीं लगाया, बजट बचे हाथ में

नई दिल्ली वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं पर खर्च की रफ्तार बेहद धीमी रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने अपनी 53 सबसे बड़ी योजनाओं के लिए आवंटित कुल बजट का मात्र 41.2 प्रतिशत हिस्सा ही अब तक जारी किया है। विश्लेषण से पता चलता है कि 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाली इन योजनाओं में से अधिकतर के आवंटन में भारी कटौती की गई है। आशंका जताई जा रही है कि मार्च में वित्त वर्ष खत्म होने तक इन योजनाओं का कुल खर्च शुरुआती बजट के 75 प्रतिशत के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाएगा। प्रमुख योजनाओं के बजट में की जा रही भारी कटौती  रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण की गई 53 योजनाओं में से 47 के बजट को संशोधित कर कम कर दिया गया है। मूल बजट अनुमान जो 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक था, उसे घटाकर अब 3.8 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। सबसे चौंकाने वाली कटौती प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) में देखी गई, जहां बजट 850 करोड़ रुपये से घटाकर मात्र 150 करोड़ रुपये कर दिया गया है। केवल मनरेगा (MGNREGS) और अनुसूचित जनजातियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप जैसी तीन योजनाओं में ही मूल बजट से अधिक खर्च दर्ज किया गया है। सबसे बड़ी गिरावट PM कृषि सिंचाई योजना में बाकी 47 योजनाओं के लिए, RE अलग-अलग मात्रा में BE से कम है। सबसे बड़ी गिरावट PM कृषि सिंचाई योजना में देखी गई, जहां 150 करोड़ रुपये की RE 850 करोड़ रुपये के BE का मुश्किल से छठा हिस्सा है। कुल मिलाकर, इन 53 योजनाओं के लिए BE 5 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज़्यादा था, जिसे संशोधित करके 3.8 लाख करोड़ रुपये से कम, या बजटीय आवंटन का 74.4 प्रतिशत कर दिया गया। 31 दिसंबर को खत्म होने वाले नौ महीनों में जारी किया गया फंड कुल 2 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा था, जो बजट आवंटन का 41.2% और RE का 55.4% था। RE, BE के 40% से कम  पीएमकेएसवाई कमांड एरिया डेवलपमेंट और जल संसाधन, पीएम ई-बस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन/राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश घटक-PMAY शहरी की अन्य मदों के लिए RE, BE के 40% से कम है। इनमें से छह योजनाओं में जारी की गई वास्तविक राशि BE के 10% से कम है। इन बड़ी योजनाओं (2,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा BE) में जल जीवन मिशन/नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर मिशन (BE 67,000 करोड़ रुपये, नौ महीनों में असल खर्च RE 31 करोड़ रुपये), PM स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (BE 7,500 करोड़ रुपये, असल खर्च 473 करोड़ रुपये), और प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (BE 2,140 करोड़ रुपये, असल खर्च 40 करोड़ रुपये) शामिल हैं। अगर कुल 53 योजनाओं पर कुल खर्च की बात करें तो यह 3.8 करोड़ रुपये है। इन योजनाओं पर 5 लाख करोड़ के बजट का ऐलान हुआ था। 31 दिसंबर तक दो लाख करोड़ का बजट रिलीज किया गया था। यह कुल बजट का 41.2 फीसदी था। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, वॉटर मैनेजमेंट, पीएम ईबस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन, कंप्यूटराइजेशन ऑफ प्राइमरी ऐग्रीकस्च्र क्रेडिट सोसाइटी और अन्य कई योजाओं पर बजट का 40 फीसदी ही खर्च हुआ है। इनमें से 6 योजनाएं ऐसी भी हैं जिनके लिए केवल 10 फीसदी ही बजट रिलीज हुआ है। इस बजट सत्र के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटील ने शनिवार को यहां बताया कि देश में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है।पाटिल ने यहां केन्द्रीय बजट को लेकर प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमृत सरोवर योजना और जेजेएम ऐतिहासिक साबित हो रहे हैं और अमृत सरोवर योजना के तहहत देशभर में 69 हजार से अधिक सरोवरों का निर्माण किया गया है, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि जेजेएम के लिए 67 हजार 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है और चार-पांच करोड़ घरों को और पानी देना है तथा इस योजना को वर्ष 2028 तक विस्तारित किया गया है। इससे देश की लगभग नौ करोड़ माताओं-बहनों का करीब 4.5 करोड़ घंटे का समय बचा है। साथ ही जल गुणवत्ता जांच के लिए 24 लाख 80 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया गया है और आठ लाख महिलाओं ने परीक्षण पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट को रखा है। जल जीवन मिशन और पीएम आवास योजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर असर