samacharsecretary.com

बिना शादी के बच्चों की संख्या में ये देश सबसे आगे, भारत और एशिया की स्थिति जानें

नईदिल्ली  शादी, परिवार और संतान… जिन्हें कभी समाज की स्थायी नींव माना जाता था, लेकिन बदलते समय में दुनिया के कई हिस्सों में ये अवधारणाएं नए सिरे से परिभाषित हो रही हैं। बदलती जीवनशैली, कानूनी व्यवस्था और सामाजिक स्वीकृति के कारण विवाह के बाहर बच्चों का जन्म कुछ देशों में सामान्य हो चुका है, जबकि कहीं यह अभी भी सामाजिक कलंक बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई देशों में विवाह के बाहर बच्चों का जन्म अब आम बात हो गई है। हालांकि एशिया और कुछ अन्य क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति अभी भी बहुत कम है। ये बदलाव सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं, जहां विवाह हर जगह संतान प्राप्ति की शर्त नहीं रहा। यूं कहें तो बिना शादी के परिवार बसाना कई जगहों पर 'न्यू नॉर्मल' बन गया है। ओईसीडी (OECD) के नए आंकड़ों के अनुसार, विश्व के कई देशों में औसतन लगभग 43% बच्चे विवाह के बाहर पैदा हो रहे हैं। यानी बिना शादी के महिलाएं मां बन रही हैं। आइए जानते हैं कि इस मामले में कौन-से देश सबसे आगे हैं… सबसे आगे लैटिन अमेरिका लैटिन अमेरिकी देश इस मामले में सबसे आगे हैं। कोलंबिया में 87% बच्चे विवाह के बाहर जन्म ले रहे हैं। इसके बाद चिली (78.1%), कोस्टा रिका (74%) और मैक्सिको (73.7%) का नंबर आता है। यहां लिव-इन रिलेशनशिप लंबे समय से सामाजिक और कानूनी रूप से स्वीकार्य है, जिससे औपचारिक शादी की जरूरत कम हो गई है। ऐतिहासिक असमानता और कानूनी पहुंच की कमी ने भी इन बदलावों को बढ़ावा दिया है। नॉर्डिक देशों में कल्याण व्यवस्था के साथ हाई रेशियो नॉर्डिक देशों ने परिवार के मानदंडों को नए सिरे से परिभाषित किया है। आइसलैंड में 69.4%, नॉर्वे में 61.2%, स्वीडन में 58% (लगभग) और डेनमार्क में 55% के आसपास बच्चे विवाह के बाहर पैदा हो रहे हैं। यहां मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों को माता-पिता की वैवाहिक स्थिति से अलग कानूनी संरक्षण मिलने से विवाह अब व्यक्तिगत चुनाव बन गया है। लिव इन में रहने वाले जोड़ों को विवाहित जोड़ों के बराबर अधिकार प्राप्त हैं। एशिया और पूर्वी भूमध्यसागरीय में न्यूनतम दरें दूसरी ओर एशिया के कई देशों में स्थिति बिल्कुल उलट है। जापान में सिर्फ 2.4%, दक्षिण कोरिया में 4.7%, तुर्की में 3.1%, इजरायल में 8.6% और ग्रीस में 9.7% बच्चे विवाह के बाहर जन्म लेते हैं। यहां सांस्कृतिक मूल्य, धार्मिक परंपराएं और सख्त कानूनी ढांचा विवाह को संतान से जोड़े रखते हैं। एकल माता-पिता को सामाजिक कलंक और कम सहायता मिलने से यह प्रवृत्ति दबाव में रहती है। ओईसीडी भारत जैसे देशों में भी विवाह के बाहर जन्म की दर बहुत कम बनी हुई है। यही विवाद के बाहर बच्चों की जन्म दर एक फीसदी से भी कम है। भारत के पड़ोसी देशों और एशिया में भी यही स्थिति है, जहां सांस्कृतिक और सामाजिक मानदंड विवाह को प्राथमिकता देते हैं। एंग्लो-अमेरिकी और पश्चिमी यूरोप संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और ज्यादातर पश्चिमी यूरोपीय देश बीचों बीच खड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में लगभग 40 प्रतिशत बच्चे विवाह के बाहर पैदा होते हैं, जो ऑस्ट्रिया और इटली के स्तर के करीब है। इन आंकड़ों से साफ है कि विवाह के बाहर बच्चों का जन्म सिर्फ सामाजिक बदलाव नहीं, बल्कि कानूनी संरचना, कल्याणकारी नीतियों और सांस्कृतिक स्वीकार्यता का संयुक्त परिणाम है। आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ सकता है, जिसका असर भारत समेत अन्य एशियाई देशों पर भी पड़ सकता है।

नसरीन शेख मालेगांव की नई मेयर, बुर्के में दिखी और अब जनता जानना चाह रही है उनकी पावर

मालेगांव मालेगांव नगर निगम (MMC) के मेयर चुनाव में इस्लाम पार्टी की नसरीन शेख (Nasreen Sheikh) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. उन्‍हें लेकर सोशल मीडिया पर बुर्के वाली मेयर के रूप में चर्चाएं इन दिनों आम हैं. नसरीन शेख ने शिवसेना (शिंदे गुट) की उम्मीदवार लता घोडके को हराकर यह पद हासिल किया है. नसरीन बानो शेख मालेगांव की सक्रिय राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से जमीनी स्तर पर जुड़ी रही हैं. वह मूल रूप से एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं लेकिन उनका परिवार राजनीति में काफी प्रभावशाली रहा है. • पारिवारिक व्यवसाय और पृष्ठभूमि: नसरीन शेख का परिवार पारंपरिक रूप से पावरलूम (Powerloom) व्यवसाय से जुड़ा हुआ है. मालेगांव एक बुनकर बहुल शहर है जहां उनके परिवार का अच्छा-खासा व्यापारिक आधार है. • शिक्षा: नसरीन शेख की शुरुआती और उच्च शिक्षा मालेगांव में ही हुई है. स्थानीय स्तर पर उन्हें एक शिक्षित और जागरूक महिला के रूप में पहचाना जाता है. नसरीन शेख स्नातक (Graduate) हैं. उन्होंने अपनी शिक्षा मालेगांव के ही शिक्षण संस्थानों से पूरी की है. वह उर्दू और मराठी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं. • राजनीतिक करियर: नसरीन ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत नगरसेवक के रूप में की थी. वह ‘इस्लाम पार्टी’ के टिकट पर चुनाव जीतकर नगर निगम पहुंचीं. उनकी पार्टी ने इस बार मालेगांव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ गठबंधन (मालेगांव सेक्युलर फ्रंट) कर सत्ता हासिल की है. नसरीन शेख दिवंगत पूर्व विधायक रशीद शेख की बहू हैं. उनके पति शेख खालिद भी राजनीति में सक्रिय हैं. उनके परिवार के सदस्य आसिफ शेख (पूर्व विधायक) ने ही ‘इस्लाम पार्टी’ (ISLAM Party) की स्थापना की है. उनकी सास ताहिरा शेख भी 2012 और 2022 के बीच मालेगांव की मेयर रह चुकी हैं. यानी मेयर का पद उनके परिवार के लिए नया नहीं है. जीत का समीकरण: कैसे बनीं मेयर? मालेगांव नगर निगम में कुल 84 सीटें हैं, जहां बहुमत के लिए 43 पार्षदों के समर्थन की जरूरत थी. नसरीन शेख को अपनी पार्टी के 35 पार्षदों के अलावा सपा और कांग्रेस का साथ मिला. उम्मीदवार            पार्टी          मिले वोट नसरीन शेख    इस्लाम पार्टी       43 लता घोडके    शिवसेना (शिंदे)    18 सैलरी और नगर निगम का बजट मालेगांव नगर निगम का बजट शहर के बुनियादी ढांचे और बुनकर समुदाय की जरूरतों पर केंद्रित रहता है. • मेयर की सैलरी: महाराष्ट्र के नगर निगम नियमों के अनुसार, मेयर को सीधा ‘वेतन’ नहीं बल्कि मानदेय (Honorarium) और भत्ते मिलते हैं. यह राशि लगभग 20,000 से 25,000 रुपये प्रति माह के बीच होती है. इसके अलावा उन्हें सरकारी आवास, गाड़ी और अन्य प्रोटोकॉल सुविधाएं प्रदान की जाती हैं. • नगर निगम बजट: मालेगांव नगर निगम का वार्षिक बजट लगभग 700 से 900 करोड़ रुपये के बीच रहता है. यह बजट मुख्य रूप से जलापूर्ति, सड़क निर्माण और सफाई व्यवस्था के लिए आवंटित किया जाता है. नसरीन शेख के साथ नई टीम नसरीन शेख के साथ शान-ए-हिंद निहाल अहमद (समाजवादी पार्टी) को डिप्टी मेयर चुना गया है. यह मालेगांव के इतिहास में पहली बार है जब मेयर और डिप्टी मेयर दोनों ही महिलाएं हैं. नसरीन शेख ने अपनी प्राथमिकता में शहर की सफाई व्यवस्था और हॉस्पिटल्स की स्थिति को सुधारना बताया है.

विदेशी-देसी शादी बनी मिसाल: इटली के युवक ने मुंबई की युवती से रचाई शादी, संस्कृत मंत्रों के साथ

झुंझुनूं  जिले के मंडावा स्थित एक हेरिटेज होटल में 8 फरवरी को इटली के नागरिक माकार्े और मुंबई की जुई वैदिक रीति से विवाह बंधन मेंं बंध गए। शादी में नौ ब्राह्मणों ने संस्कृत मंत्रों के साथ फेरे कराए, जिनका अंग्रेजी में भी अनुवाद किया गया। इटली सहित 13 देशों से आए लगभग 200 मेहमान शादी समारोह के साक्षी बने। शादी दोपहर करीब 3 बजे तक अग्नि के सात फेरे पूरे होने के साथ सम्पन्न हुई। शादी के बाद  रिसेप्शन नहीं रखा गया। रात को ब्रज परंपरा अनुसार फू लों की होली का आयोजन किया गया, जिसमें गुलाल या रंगों के बजाय ताजे फू लों की पंखुड़ियों से होली खेली गई। इस अवसर पर राधा-कृष्ण के जीवन और ब्रज संस्कृति से जुड़े नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें प्रेम और भक्ति का भाव दर्शाया गया। विदेशी मेहमानों को पहले इस परंपरा की जानकारी दी गई, जिससे  वे इसके सांस्कृतिक महत्व को समझ सकें। इसके बाद मेहमानों ने फ ूलों की होली में भाग लिया। समारोह में भारतीय और यूरोपीय संस्कृति का अद्भुत मिश्रण देखा गया। आयोजन को लेकर उपस्थित मेहमान और परिवारजन बेहद खुश और उत्साहित दिखाई दिए। इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से ब्रज की परंपरा और प्रेमभाव को दर्शाया, जिससे विदेशी मेहमान भारतीय संस्कृति की झलक नजदीक से देख और समझ सके। 

भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को मजबूती: मैक्रों दौरे से पहले 114 राफेल खरीद को हरी झंडी

नई दिल्ली  भारतीय रक्षा खरीद बोर्ड (Defence Procurement Board) ने भारतीय वायु सेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के सामने रखा जाएगा। अंतिम मुहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से लगने की उम्मीद है। मेक इन इंडिया पर ज़ोर सूत्रों के मुताबिक, इस डील की सबसे अहम बात यह है कि राफेल विमानों का अधिकतर निर्माण भारत में किया जाएगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत करीब 30 फीसदी स्वदेशी कंटेंट शामिल होगा। शुरुआती चरण में 12 से 18 राफेल जेट सीधे फ्रांस से ‘फ्लाई-अवे कंडीशन’ में भारत लाए जाएंगे, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में निजी कंपनियों की साझेदारी से होगा। 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील भारत और फ्रांस के बीच इस राफेल सौदे की कुल लागत करीब ₹3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है। डील पूरी होने के बाद भारतीय वायुसेना के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी, जिससे वायुसेना की ताकत और रणनीतिक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। हथियारों के इंटीग्रेशन की अनुमति हालांकि इस डील में राफेल का सोर्स कोड भारत को नहीं मिलेगा, लेकिन भारत को अपने स्वदेशी और अन्य हथियारों को राफेल में इंटीग्रेट करने की पूरी छूट होगी। इससे भारतीय वायुसेना अपनी जरूरत के हिसाब से विमानों को और ज्यादा सक्षम बना सकेगी। ऑपरेशन सिंदूर में राफेल की सफलता का प्रदर्शन भारतीय वायुसेना के मौजूदा 36 राफेल जेट पहले ही अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल विमानों ने SCALP मिसाइल, Meteor एयर-टू-एयर मिसाइल और HAMMER बमों के साथ आतंकी ठिकानों और दुश्मन के सैन्य ठिकानों को सटीक निशाना बनाया था। मैक्रों की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले अहम कदम यह पूरा मामला ऐसे समय आगे बढ़ा है, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 15 से 17 फरवरी 2026 के बीच भारत दौरे पर आने वाले हैं। इससे भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को और मजबूती मिलने के संकेत मिल रहे हैं।

उत्तराखंड सरकार ने किए तबादले, प्रशासन में बदलाव

देहरादून उत्तराखंड के देहरादून में से अहम खबर सामने आ रही है। जहां पुलिस विभाग में फेरबदल किया गया है। राजधानी में छह पुलिस उपाधीक्षकों (सीओ/डीएसपी) का तबादला हुआ है। इन अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया हैं। साथ ही उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। एसएसपी अजय सिंह की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों का हुआ तबादला पुलिस उपाधीक्षक विवेक सिंह कुटियाल को क्षेत्राधिकारी प्रेमनगर बनाया गया है। उनके अधीन थाना प्रेमनगर, थाना सेलाकुई, गोपनीय शाखा, एलआईयू व पीएसी रहेंगे। रीना राठौर को क्षेत्राधिकारी डोईवाला की जिम्मेदारी दी गई है। उनके अंतर्गत कोतवाली डोईवाला, थाना रायपुर, शिकायत जांच प्रकोष्ठ, विशेष जांच प्रकोष्ठ, सीसीएम हेल्पलाइन, होमिसाइड सेल, महिला हेल्पलाइन, महिला सुरक्षा हेल्पलाइन 1090 समेत अन्य शामिल किए गए हैं। स्वप्निल मुयाल को क्षेत्राधिकारी नगर नियुक्त किया गया है। उन पर कोतवाली नगर, थाना वसंत विहार, पुलिस लाइन के साथ कुछ अन्य जिम्मेदारियां भी रहेंगी। नीरज सेमवाल को क्षेत्राधिकारी ऋषिकेश बनाया गया है। उन्हें कोतवाली ऋषिकेश, थाना रायवाला, थाना रानीपोखरी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जगदीश चंद्र पंत को क्षेत्राधिकारी यातायात की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनके अधीन यातायात, प्रधान लिपिक, भवन, ऑडिट, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल, स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट, ऑपरेशन स्माइल, ट्रैक मिसिंग चाइल्ड, हाईकोर्ट/सम्मन सेल, लोक सूचना व सीसीओआर/डीसीआरओ रहेंगे।  

पेंशन बढ़ेगी या नहीं? 8th Pay Commission पर राज्यसभा में स्पष्ट संकेत

नई दिल्ली अगर आप केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं या रिटायर हो चुके हैं, तो आपकी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर संसद से एक बड़ी खबर आई है। 8वें वेतन आयोग को लेकर चल रही तमाम अटकलों और पेंशन संशोधन के सवालों पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में स्थिति साफ कर दी है। इस जानकारी से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो 31 दिसंबर 2025 तक रिटायर होने वाले हैं या पेंशन में होने वाले बदलावों को लेकर चिंतित थे। वेतन आयोग की तैयारी: शुरू हुआ फीडबैक का दौर सरकार ने स्पष्ट किया है कि 8th Pay Commission अब कागजों से निकलकर एक्शन मोड में आ गया है। 3 नवंबर 2025 को इसके गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद अब आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च कर दी है। इतना ही नहीं, 'MyGov' पोर्टल के जरिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से उनकी राय और सुझाव मांगे जा रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसके आधार पर वेतन, भत्ते और पेंशन की नई दरों का फैसला होगा। रिटायरमेंट की तारीख और पेंशन का गणित सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले रिटायर होने वाले कर्मचारी 8वें वेतन आयोग के दायरे में आएंगे? सरकार ने साफ किया है कि पेंशन में किसी भी तरह का बदलाव या बढ़ोतरी 'पेंशन नियम 2021' और आयोग की सिफारिशों के आधार पर जारी होने वाले सामान्य आदेशों से तय होती है। फाइनेंस बिल 2025 के जरिए किसी की पेंशन में अपने आप कोई बदलाव नहीं होता, बल्कि यह एक व्यवस्थित कानूनी प्रक्रिया है। क्या फाइनेंस एक्ट से बदल जाएंगे नियम? सांसद आनंद भदौरिया के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि फाइनेंस एक्ट 2025 मौजूदा पेंशन नियमों को सिर्फ मजबूती देता है, वह वर्तमान में मिल रही सिविल या डिफेंस पेंशन के ढांचे में कोई सीधा बदलाव नहीं करता। पेंशन में संशोधन तभी लागू होता है जब सरकार वेतन आयोग जैसी विशेषज्ञ संस्था की सिफारिशों को स्वीकार कर लेती है। यानी, जो भी बदलाव होंगे, वे तय नियमों के तहत सभी पात्र श्रेणियों पर लागू किए जाएंगे। फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान आयोग के जरिए मिलने वाले फीडबैक और डेटा पर है, ताकि आने वाले समय में एक संतुलित और मजबूत वेतन ढांचा तैयार किया जा सके।

मणिपुर के उखरूल में हिंसा: 5 दिन के लिए इंटरनेट बंद, कर्फ्यू लागू

 इंफाल मणिपुर के उखरूल में हिंसा भड़कने की जानकारी सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि कुछ सशस्त्र बदमाशों ने लिटन सारेइखोंग गांव में कई घरों को आग लगा दी. इस घटना के बाद स्थिति बिगड़ने की आशंका में प्रशासन ने पूरे जिले में कर्फ्यू लगा दिया और इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया है, ताकि आगे की हिंसा और अफवाहों को रोका जा सके. अधिकारियों ने बताया कि सशस्त्र समूहों ने पहाड़ी गांव के पास हवा में कई राउंड फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई. कई ग्रामीण आवश्यक सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिले के सुरक्षित क्षेत्रों की ओर भाग गए, जबकि तांगखुल गांव के कई ग्रामीणों के भी इलाका छोड़ने की जानकारी मिली है. '5 दिन के लिए इंटरनेट सेव बंद' बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए मणिपुर सरकार के गृह आयुक्त ने सार्वजनिक सुरक्षा और शांति को खतरा होने के कारण उखरूल जिले में तत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित करने का आदेश जारी किया है.  आदेश में कहा गया है कि हाल की घटनाओं से काफी अशांति फैली है और गलत सूचनाओं के प्रसार से तनाव बढ़ सकता है. इसलिए स्थिति को नियंत्रित करने और अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की जा रही हैं. वहीं, आगजनी की घटनाओं के बाद उखरुल जिले के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया और आगे की हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई. शनिवार को हुई हिंसा की शुरुआत प्रशासन का कहना है कि उखरूल में हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को हुई जब लीटन गांव में सात-आठ लोगों ने तांगखुल नागा समुदाय के एक व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट की. हालांकि, मामला सुलझने की उम्मीद थी, लेकिन रविवार की बैठक नहीं हो सकी. इसके बाद सोमवार आधी रात को कुछ हथियारधारी बदमाशों ने लीटन सारईखोंग में तांगखुल नागा समुदाय के घरों को आग लगा दी, जिसके बाद नाग समुदाय ने कुकी समुदाय के घरों को निशाना बनाया. पुलिस के अनुसार, के. लुंगविराम गांव में भी एक घर को आंशिक रूप से जलाया गया है. पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सोमवार को रात करीब 12:10 बजे के. लुंगविराम गांव में एक छोटी-सी आग लगने की घटना हुई, जिससे एक आवासीय घर को आंशिक नुकसान पहुंचा. सुरक्षाबलों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया. पुलिस ने बताया कि आग लगने के कारण की जांच की जा रही है और स्थिति सामान्य है.

गाजा विवाद पर इजरायल की सख्ती, ट्रंप की मीटिंग में होंगे 8 मुस्लिम देश और पाकिस्तान

गाजा  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने गाजा के मसले पर बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया है और इसकी पहली मीटिंग 19 फरवरी को होने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि इस बैठक में चर्चा होगी कि कैसे गाजा में विकास के काम दोबारा शुरू किए जाएं और वहां जंग समाप्त हो। इस बोर्ड में इजरायल भी सदस्य है, लेकिन उसे ही इसमें झटका भी लगता दिख रहा है। मामला यह है कि वह पाकिस्तान को कभी भी तवज्जो नहीं देना चाहता, लेकिन इस बोर्ड में डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ भी शामिल होंगे। यही नहीं तुर्की भी इसमें शामिल रहेगा, जो फिलिस्तीन के मसले पर खुलकर इजरायल का विरोधी रहा है। ऐसी स्थिति में यदि गाजा के भविष्य को लेकर बन रहे किसी प्लान में यदि शहबाज शरीफ शामिल होंगे तो यह इजरायल के लिए चिंता की बात होगी। वह पहले भी कह चुका है कि हम पाकिस्तान को शामिल नहीं करना चाहते। फिर भी उसकी एंट्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए चिंता की बात है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ 18 फरवरी को ही वॉशिंगटन पहुंच जाएंगे और 19 को होने वाले समिट में हिस्सा लेंगे। यह आयोजन यूएस इंस्टिट्यूट ऑफ पीस में होना है। इस बैठक में चर्चा होगी कि कैसे गाजा में जंग के बाद पुनर्निर्माण शुरू किया जाए। इस बैठक में कई देशों के नेता और कुछ अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट और हस्तियां भी इसमें रहेंगी। इस मीटिंग में पाकिस्तान और तुर्की समेत कुल 8 मुसलमान देश शामिल होंगे। इनमें सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, कतर और यूएई हैं। दरअसल इजरायल की चिंता यह है कि मीटिंग में शामिल सभी मुसलमान देश एकजुट होकर कोई स्टैंड ले सकते हैं। खासतौर पर सीजफायर के उल्लंघन को लेकर इजरायल पर कठिन शर्तें थोपे जाने का खतरा है। इसके अलावा कुछ गारंटी भी उससे ली जा सकती है। मुसलमान देशों का कहना है कि गाजा में पुनर्निर्माण और शांति तभी संभव है, जब इजरायल के ऐक्शन पर कुछ लगाम लग सके। 22 देशों को अमेरिका की ओर से मिला था न्योता अमेरिका की ओर से कुल 22 देशों को बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया है। इनमें से ज्यादातर ने सहमति जताई है, लेकिन फ्रांस जैसे उसके मित्र देश ही दूरी बना रहे हैं। इसके अलावा भारत ने भी फिलहाल देखो और इंतजार करो की नीति अपना ली है। अब तक भारत की ओर से इसमें हिस्सा लेने की पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि भारत नहीं चाहता कि वह ऐसे किसी प्रयास में आगे दिखे, जिसे भविष्य में संयुक्त राष्ट्र संघ के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

तेज भूकंप से नेपाल में दहशत, प्रशासन अलर्ट

ताप्लेजंग, नेपाल पूर्वी नेपाल के ताप्लेजंग जिले में मंगलवार तड़के चार तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NEMRC) के अनुसार, भूकंप मंगलवार सुबह 2 बजकर 47 मिनट पर आया।भूकंप का केंद्र ताप्लेजंग जिले के कंचनजंगा क्षेत्र में स्थित था। झटकों के बाद स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकल आए। अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के झटके ताप्लेजंग के अलावा पूर्वी नेपाल के अन्य जिलों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अब तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या संपत्ति क्षति की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां समय-समय पर इस तरह की गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं।

मस्क और जकरबर्ग की तस्वीरें सामने आईं, एपस्टीन की ‘Wild’ पार्टी में थे शामिल

वाशिंगटन  जेफरी एपस्टीन मामले में हर दिन कोई ना कोई नया खुलासा हो रहा है. एक नई फोटो सामने आई है, जिसमें जेफरी एपस्टीन की लैविश डिनर पार्टी में एलॉन मस्क और मार्क जकरबर्ग नजर आए हैं. ये तस्वीर उस वक्त की है, जब जेफरी एपस्टीन यौन अपराध में दोषी साबित हो चुका था. यानी मस्क और मार्क ये जानते हुए पार्टी में शामिल हुए थे कि जेफरी किस तरह के काम में शामिल था. एपस्टीन ने बाद में दावा किया था कि इस पार्टी में LinkedIn को-फाउंडर रीड हॉफमैन और PayPal को-फाउंडर पीटर थिएल भी शामिल हुए थे. एक अन्य मेल में इस पार्टी को 'वाइल्ड' बताया गया था.  सामने आई तस्वीर में मस्क और जकरबर्ग एक साथ टेबल पर बैठे दिख रहे हैं. टेस्ला और SpaceX के CEO एलॉन मस्क कैमरा पर्सन की ओर देख रहे हैं, जो संभवतः एपस्टीन ने ही क्लिक की हो. वहीं तस्वीर में जकरबर्ग भी हैं, जो थोड़े सीरियस दिख रहे हैं.  मस्क ने क्या किया था दावा? जेफरी ने ये तस्वीर खुद को ही 3 अगस्त 2015 को भेजी थी. इस तस्वीर के आने के बाद इसलिए भी हंगामा मचा है क्योंकि मस्क ने दावा किया था कि वो कभी-भी जेफरी एपस्टीन की पार्टियों का हिस्सा नहीं रहे हैं. इतना ही नहीं मस्क ने जेफरी के साथ क्राइम करने वालों पर भी मुकदमा चलाने की बात कही थी.  मस्क ने इस बारे में 31 जनवरी को ट्वीट किया था. एपस्टीन की पार्टियों में सिर्फ एलॉन मस्क या मार्क जकरबर्ग नहीं बल्कि कई दूसरे बड़े चेहरे भी दिख चुके हैं. यहां तक की माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स भी इन पार्टियों का हिस्सा थे और उन्होंने शादी से बाहर भी लड़कियों से संबंध बनाया था. बिल गेट्स का नाम भी आया है सामने एपस्टीन फाइल्स की मानें तो बिल गेट्स रूसी लड़कियों से मिले थे. इसमें STD का जिक्र भी मिलता है. एक नोट में लिखा है कि एपस्टीन ने गेट्स के लिए दवाओं का इंतजाम किया था, जिससे उन्हें संबंध बनाने के बाद होने किसी बीमारी का सामना ना करना पड़े.  गेट्स के अलावा गूगल के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन का नाम भी एपस्टीन फाइल्स में सामने आया है. डॉक्यूमेंट्स की मानें तो ब्रिन ने एपस्टीन के प्राइवेट आईलैंड का दौरा किया था, जहां उन्होंने घिसलेन मैक्सवेल से मुलाकात की थी. 2003 में भेजे एक ईमेल में मैक्सवेल ने डिनर को सामान्य और आरामदायक बताया था.