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20 साल का रिवाज खत्म, रेलवे रिटायरों को गोल्ड-प्लेटेड चांदी का मेडल नहीं देगा

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे में सामने आए चांदी के नकली सिक्के (मेडल) घोटाले के बाद बड़ा असर देखने को मिला है। रेलवे बोर्ड ने इस मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देने की 20 साल पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। रेलवे की ओर से अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विदाई उपहार के रूप में गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने इस संबंध में  औपचारिक आदेश जारी किया। आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि रिटायर होने वाले रेलवे अधिकारियों को सोने की परत वाले चांदी के मेडल देने की प्रथा को बंद करना है। यानी, सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारियों को गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल देने की प्रथा को समाप्त किया जाता है।  दरअसल, रेलवे ने मार्च 2006 से अपने रिटायर होने वाले कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप लगभग 20 ग्राम वजन का स्वर्ण मढ़ा चांदी का सिक्का देना शुरू किया था। बीते करीब 20 वर्षों में हजारों कर्मचारियों को यह चांदी का सिक्का विदाई उपहार के रूप में दिया गया। यह परंपरा रेलवे में सम्मान और सेवा के प्रतीक के तौर पर देखी जाती रही है। हालांकि, इस फैसले के पीछे भोपाल मंडल में सामने आया मेडल घोटाला एक बड़ी वजह माना जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि रिटायरमेंट पर कर्मचारियों को दिए गए कई मेडल नकली थे और उनमें चांदी की मात्रा महज 0.23 प्रतिशत पाई गई। यानी जिन सिक्कों को चांदी का बताकर दिया गया, वे नाम मात्र के लिए भी चांदी के नहीं थे। मामला सामने आने के बाद रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। साथ ही, रेलवे के पास मौजूद मौजूदा मेडल स्टॉक का उपयोग अब रिटायरमेंट उपहार के तौर पर नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें अन्य प्रशासनिक या वैकल्पिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार, यह नया नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले अधिकारियों पर भी लागू होगा। यानी अब जो कर्मचारी इस तारीख या इसके बाद सेवानिवृत्त होंगे, उन्हें यह गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं मिलेगा।

FASTag में बदलाव: NHAI ने KYV का झंझट हटाया, 1 फरवरी से नए नियम लागू

  नई दिल्ली  FASTag KYV New Rule: टोल प्लाज़ा पर गाड़ी रुकी है, FASTag लगा है, पैसे भी हैं, फिर भी मशीन बीप करती है और आगे से आवाज आती है – KYV अपडेट कराइए. ड्राइवर भौंहें सिकोड़ता है, पीछे लाइन बढ़ती जाती है और मन में सवाल उठता है कि जब सब सही है तो यह झंझट क्यों. अब इसी झंझट पर NHAI ने कैंची चला दी है. नए FASTag वालों के लिए वह नियम हटा दिया गया है, जिसने लाखों निजी वाहन चालकों का बीपी बढ़ाया हुआ था. 1 फरवरी 2026 से टोल पर प्लाजाओं पर अब आसानी से गाड़ी दौड़ेगी. दरअसल नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI ने नए FASTag जारी करने के प्रोसेस को और आसान बनाने का फैसला लिया है. अथॉरिटी ने प्राइवेट वाहनों के लिए FASTag जारी होने के बाद होने वाली अनिवार्य Know Your Vehicle यानी KYV प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. इसका सीधा फायदा यह होगा कि टोल प्लाज़ा पर रुकावटें कम होंगी, कागजी झंझट घटेगा और टोल भुगतान पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा. ये नया नियम 1 फरवरी 2026 से लागू होगा. क्या कहता है NHAI नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि,  1 फरवरी 2026 या उसके बाद जारी होने वाले सभी नए FASTag में KYV की जरूरत नहीं होगी. अथॉरिटी ने नए जारी किए गए फास्टैग वाली कारों (कार, जीप, वैन) के लिए 'नो योर व्हीकल' (केवाईवी) की प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया है. पहले ऐसा होता था कि FASTag चालू होने के बाद भी वाहन मालिकों से दोबारा दस्तावेज, फोटो या सत्यापन मांगा जाता था. इससे लोगों को बार-बार बैंक या कस्टमर केयर के कॉल झेलने पड़ते थे और कई बार सही डॉक्यूमेंट देने के बावजूद फास्टैग सस्पेंड कर दिया जाता था. अब यह परेशानी खत्म होने वाली है. नए नियमों के तहत FASTag जारी करने से पहले ही सारी जांच पूरी कर ली जाएगी. बैंक अब VAHAN डेटाबेस के जरिए वाहन के रजिस्ट्रेशन की पुष्टि करेंगे. यह प्रक्रिया अनिवार्य होगी. कुछ खास मामलों में आरसी का इस्तेमाल क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिए किया जा सकता है. यानी जिम्मेदारी अब बैंकों की होगी कि टैग जारी करते वक्त सारी जानकारी सही हो. किन हालात में हो सकती है KYV हालांकि KYV को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है. यह सिर्फ विशेष परिस्थितियों में लागू होगी. जैसे अगर FASTag किसी गलत वाहन से जुड़ा पाया जाता है, टैग सही तरीके से चिपका न हो, किसी तरह के दुरुपयोग या धोखाधड़ी की आशंका हो, या टोल प्लाज़ा पर कोई विवाद हो जाए. सामान्य हालात में वाहन मालिकों को किसी अतिरिक्त प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. मौजूदा FASTag यूज़र्स पर नहीं होगा असर जो लोग पहले से FASTag इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. जब तक किसी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आती, तब तक उनसे भी रेगुलर KYV नहीं मांगी जाएगी. इससे टोल प्लाज़ा पर बेवजह की रुकावटें और परेशानियां नहीं होंगी. NHAI का मानना है कि इस बदलाव से निजी कार मालिकों का ड्राइविंग एक्सपीरिएंस काफी बेहतर होगा. पहले कई बार सही दस्तावेज देने के बाद भी बार-बार KYV की मांग की जाती थी, जिससे लोग परेशान हो जाते थे. नए सिस्टम से कागजी काम कम होगा, टोल पर विवाद घटेंगे, FASTag जल्दी जारी और एक्टिव होगा और नेशनल हाईवे पर सफर और भी आसान होगा. कमर्शियल वाहनों पर नहीं बदला नियम यह छूट सिर्फ प्राइवेट वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए है. बस, ट्रक और मल्टी-एक्सल जैसे कमर्शियल वाहनों के लिए KYV प्रक्रिया पहले की तरह लागू रहेगी. इसके अलावा FASTag की अनिवार्यता भी सभी वाहनों के लिए बनी रहेगी. NHAI का कहना है कि डिजिटल सिस्टम और VAHAN इंटीग्रेशन के मजबूत होने के बाद पुरानी KYV प्रक्रिया से लोग परेशान थे और शिकायत कर रहे थे. वाहन मालिकों को सलाह दी गई है कि वे अपना FASTag सही मोबाइल नंबर और बैंक खाते से लिंक रखें और समय पर रिचार्ज करें, ताकि ब्लैकलिस्टिंग या डबल टोल जैसी समस्याओं से बचा जा सके.

छोटे रनवे का बाहुबली सुपरजेट-100: रूस के साथ समझौते से भारत में बनेगा नया विमान

बेंगलुरु  फाइटर जेट ‘तेजस’ और ‘सुखोई-30 MKI’ से आसमान में अपनी ताकत का लोहा मनवाने वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अब एक नई उड़ान भरने को तैयार है. एचएएल ने रूस की कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) के साथ बड़ी डील की है. अब भारत रूस के साथ मिलकर सुखोई की ड‍िजाइन वाला ‘सुपरजेट-100’ बनाएगा. वही सुखोई, जिसका नाम सुनते ही दुश्मनों के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन सुपरजेट-100 से लोग सफर कर सकेंगे. यह डील भारत में हवाई सफर की तस्‍वीर बदलने वाली है. क्‍योंक‍ि इस विमान को छोटे रनवे का ‘बाहुबली’ कहा जाता है. यह वहां भी उतर सकता है, जहां बड़े विदेशी विमानों के पहिए थम जाते हैं. इस मेगा डील पर UAC के सीईओ वादिम बादेहा और HAL के चेयरमैन डॉ. डी.के. सुनील ने हस्ताक्षर कर द‍िए हैं. इस समझौते के तहत एचएएल को भारत में सुपरजेट-100 बनाने का लाइसेंस मिलेगा. सिर्फ निर्माण ही नहीं, बल्कि बिक्री, मरम्मत और रखरखाव का जिम्मा भी एचएएल के पास होगा. रूसी कंपनी तकनीकी मदद और डिजाइन सर्विसेस देगी, ताकि एचएएल की फैक्ट्रियों में इस वर्ल्ड-क्लास विमान का उत्पादन हो सके. क्यों कहलाता है छोटे रनवे का ‘बाहुबली’?     मुश्किल जगहों पर लैंडिंग: भारत में शिमला, कुल्लू या पूर्वोत्तर के कई हवाई अड्डे ऐसे हैं जहां रनवे छोटे हैं और बड़े बोइंग या एयरबस वहां नहीं उतर सकते. सुपरजेट-100 को खासतौर पर छोटे रनवे से उड़ान भरने और उतरने के लिए डिजाइन किया गया है. यह पहाड़ी और कठिन इलाकों का असली ‘बाहुबली’ है.     फाइटर जेट वाला डीएनए: इसे उसी ‘सुखोई’ कंपनी ने डिजाइन किया है, जो दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमान बनाती है. इसलिए इसकी बॉडी बेहद मजबूत और एयरोडायनामिक्स फाइटर जेट्स जैसी है. यानी हवा चीरकर आगे बढ़ने की क्षमता बिल्‍कुल फाइटर जेट की तरह होगी.     खराब मौसम का साथी: इसमें आधुनिक एवियोनिक्स लगे हैं जो इसे घने कोहरे और खराब विजिबिलिटी में भी सुरक्षित लैंडिंग करने में मदद करते हैं. साफ है क‍ि इसकी वजह से जो अक्‍सर हादसे हो जाते हैं, उनमें कमी आएगी. 100 सीटों वाले जेट की खूबि‍यां     भारत में अभी 70 सीटर वाले टर्बोप्रॉप यानी पंखे वाले विमान और 180 सीटर वाले बड़े जेट विमान चलते हैं. इनके बीच 100 सीटों वाले जेट की भारी कमी है.     यह विमान अधिकतम 0.81 मैक यानी लगभग 870 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है. यह स्पीड इसे अपने श्रेणी के अन्य विमानों से काफी तेज बनाती है. यानी दिल्ली से पटना या मुंबई से इंदौर का सफर अब और कम समय में पूरा होगा.     भारत में बनने के कारण इसकी लागत कम होगी, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को सस्ती टिकट के रूप में मिल सकता है.     इकोनॉमी क्लास में ‘लग्जरी’ का अहसास अक्सर छोटे विमानों में यात्रियों को जगह की कमी महसूस होती है, लेकिन सुपरजेट-100 में ऐसा नहीं है.     इसका केबिन अपनी श्रेणी के अन्य विमानों से ज्यादा चौड़ा है. सीटें 18.3 इंच चौड़ी हैं, जो यात्रियों को खुला और आरामदायक सफर देती हैं. बड़े ओवरहेड डिब्बे हैं, ताकि भारतीय यात्री अपना सामान आसानी से रख सकें. व‍िमान पर ल‍िखा होगा मेड इन इंड‍िया यह समझौता सिर्फ एक विमान बनाने का नहीं, बल्कि तकनीक हासिल करने का है. अब तक हम पैसेंजर विमानों के लिए पूरी तरह अमेर‍िका की बोइंग या फ्रांस की एयरबस पर निर्भर थे. एचएएल की यह पहल भारत को सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग के ग्लोबल मैप पर खड़ा कर देगी. यानी जल्द ही वह दिन आएगा जब आप टिकट बुक करेंगे और विमान के दरवाजे पर लिखा होगा- मेड इन इंडिया. क‍िराया सस्‍ता होगा या महंगा? लेग स्‍पेस क‍ितना होगा? जान‍िए हर सवाल का जवाब सुपरजेट-100: आखिर क्यों खास है यह विमान? सुखोई सुपरजेट-100 दुनिया के सबसे आधुनिक रीजनल जेट्स में से एक है, जिसे रूस की मशहूर कंपनी ‘सुखोई’ ने डिजाइन किया है. इसे बनाने वाले इंजीनियर वही हैं जिन्होंने दुनिया के बेहतरीन फाइटर जेट्स डिजाइन किए हैं. लेकिन, सुपरजेट-100 एक सिविलियन विमान है. इस व‍िमान की रेंज क‍ितनी होगी? सुपरजेट-100 के दो वर्जन हैं… बेसिक और लॉन्ग रेंज. बेसिक वर्जन करीब 3,000 किलोमीटर और लॉन्ग रेंज वर्जन 4,500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है. इसका मतलब है कि यह विमान दिल्ली से चेन्नई, मुंबई से कोलकाता या बेंगलुरु से गुवाहाटी तक बिना रुके उड़ान भर सकता है. क‍ितनी ऊंचाई तक उड़ने में माह‍िर यह 40,000 फीट की ऊंचाई पर क्रूज कर सकता है, जिससे यह खराब मौसम और टर्बुलेंस के ऊपर से निकल सकता है, जो यात्रियों को एक आरामदायक सफर देता है. पैसेंजर्स के ल‍िए इसमें नया क्‍या होगा? अक्सर रीजनल जेट्स यानी छोटे विमानों में यात्रियों को तंग जगह की शिकायत होती है, लेकिन सुपरजेट-100 को यात्रियों के आराम को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसकी केबिन की चौड़ाई 3.2 मीटर है, जो कि एम्ब्रेयर या बॉम्बार्डियर जैसे विमानों से ज्यादा है. सुपरजेट-100 में सीटिंग अरेंजमेंट कैसा है? इसमें आमतौर पर 2+3 की सीटिंग होती है. यानी एक तरफ दो सीटें और दूसरी तरफ तीन. इसका फायदा यह है कि बीच वाली सीट कम होती हैं. इसकी सीटें 18.3 इंच चौड़ी हैं, जो बड़े विमानों की इकोनॉमी क्लास के बराबर या उससे ज्यादा हैं. गलियारा इतना चौड़ा है कि केबिन क्रू और यात्री आसानी से आ-जा सकते हैं. एक साथ क‍ितने लोग बैठ सकते हैं? हमारे पास 70 सीटर टर्बोप्रॉप विमान हैं और सीधे 180 सीटर जेट हैं. इन दोनों के बीच 100 सीटों वाले जेट की भारी कमी है. लेकिन सुपरजेट-100 में 87 से 98 यात्रियों के बैठने की जगह है. एयरलाइन कंपन‍ियों के ल‍िए कैसे फायदे का सौदा? कई रूट्स पर 180 सीटर विमान उड़ाना एयरलाइंस के लिए घाटे का सौदा होता है क्योंकि सीटें नहीं भरतीं. वहीं, टर्बोप्रॉप विमान धीमे होते हैं. सुपरजेट-100, 100 यात्रियों को लेकर जेट की स्पीड से उड़ सकता है. यह एयरलाइंस के मुनाफे को बढ़ा सकता है. HAL और मेक इन इंडिया के लिए इसके क्‍या मायने? यह समझौता सिर्फ एक विमान खरीदने का नहीं, बल्कि तकनीक हासिल करने का है. UAC, HAL को डिजाइन और निर्माण की तकनीक देगा. इससे भारत में सिविल एविशन मैन्युफैक्चरिंग का इकोसिस्टम तैयार होगा. … Read more

भारतीय वायुसेना को जल्द मिलेगी ताकत, 5 तेजस MK1A जेट तैनाती के लिए तैयार

बेंगलुरु  स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk1A की डिलीवरी में लंबे समय से देरी हो रही थी. लेकिन अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने बड़ा अपडेट दिया है. HAL चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डीके सुनील ने हाल ही में बताया कि पांच तेजस Mk1A विमान पूरी तरह तैयार हैं. फायरिंग और मिसाइल ट्रायल्स भी सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं. कंपनी भारतीय वायु सेना (IAF) से इनकी स्वीकृति के लिए जल्द बातचीत करेगी. इन्हें इस वित्तीय वर्ष में ही डिलीवर करने की तैयारी है. इंजन सप्लाई की समस्या अब खत्म पहले तेजस Mk1A की डिलीवरी में मुख्य समस्या GE Aerospace से F404 इंजन की सप्लाई में देरी थी. लेकिन अब इंजन उपलब्ध हैं. HAL ने पांच विमानों को इंजन फिट करके तैयार कर लिया है. HAL का कहना है कि ट्रायल्स के बाद बाकी कुछ छोटे टेस्ट भी जल्द पूरे हो जाएंगे. उसके बाद IAF को ये विमान सौंप दिए जाएंगे.  वायु सेना की बढ़ती जरूरत और स्क्वाड्रन की कमी भारतीय वायु सेना को नए लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है. वर्तमान में IAF के पास स्वीकृत 42 फाइटर स्क्वाड्रन की बजाय सिर्फ 31 स्क्वाड्रन ही हैं. पुराने MiG-21 जैसे विमान रिटायर हो रहे हैं, जिससे लड़ाकू ताकत पर असर पड़ रहा है. एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कई बार कहा है कि वे तेजस Mk1A का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. पिछले साल एयरो इंडिया में भी उन्होंने प्रोग्राम की धीमी गति पर खुलकर नाराजगी जताई थी. तेजस Mk1A के आधुनिक फीचर्स तेजस Mk1A पुराने Mk1 से काफी बेहतर है. इसमें AESA रडार, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बेहतर एवियोनिक्स और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की क्षमता है. ये फीचर्स इसे ज्यादा घातक और आधुनिक बनाते हैं. IAF के लिए ये विमान भविष्य की रीढ़ बनेंगे. HAL ने 83 तेजस Mk1A की डील पहले ही हासिल की है. कुल 180 तक के ऑर्डर हैं. राफेल डील से बीच का रास्ता तेजस की डिलीवरी में देरी के कारण वायु सेना ने फ्रांस से और राफेल लड़ाकू विमानों की डील पर बात शुरू की है. पहले 36 राफेल से वायु सेना की ताकत बहुत बढ़ी है. नई डील से स्क्वाड्रन की संख्या जल्दी बढ़ाई जा सकेगी, जब तक तेजस पूरे जोश से उत्पादन में नहीं आ जाता. आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम स्वदेशी प्लेटफॉर्म जैसे तेजस लंबे समय में भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगे. लेकिन समय पर डिलीवरी सबसे जरूरी है. HAL का यह अपडेट दिखाता है कि प्रोग्राम अब सही ट्रैक पर है. अगर IAF संतुष्ट हुई और ट्रायल्स पूरे हुए, तो मार्च 2026 तक पहले पांच तेजस Mk1A वायु सेना में शामिल हो सकते हैं. 

भारत के विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी ने HD देवगौड़ा की तारीफ की

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा से मुलाकात की। इस मुलाकात की जानकारी पीएम मोदी ने खुद दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। सोशल मीडिया पर शेयर की गई दो तस्वीरों में से एक में पीएम मोदी देवगौड़ा को पुष्पगुच्छ देते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में देवगौड़ा के हाथों को पकड़कर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी ने एचडी देवगौड़ा के साथ हुई वार्ता की जानकारी देते हुए कहा, "एचडी देवेगौड़ा के साथ बातचीत हुई। अहम मुद्दों पर उनके सार्थक विचार काफी ध्यान देने लायक हैं। भारत के विकास के लिए उनका उत्साह भी उतना ही सराहनीय है।" एचडी देवेगौड़ा 1996-1997 तक भारत के प्रधानमंत्री थे और वर्तमान में वे जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख हैं। उनकी पार्टी एनडीए गठबंधन का हिस्सा है और कर्नाटक में भाजपा के साथ मिलकर काम करती है। देवेगौड़ा लंबे समय से कृषि, ग्रामीण विकास और जल संसाधनों जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखते आए हैं। वे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और अभी राज्यसभा सदस्य हैं। उनकी उम्र और राजनीतिक अनुभव के कारण उनकी सलाह राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हाल के वर्षों में दोनों नेताओं के बीच कई बार मुलाकातें और बातचीत हुई हैं, जो एनडीए के सहयोगी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करने का संकेत देती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने अतीत में भी प्रधानमंत्री मोदी की कई योजनाओं की सराहना की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ सौजन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी है। खासकर कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण राज्य में जहां जद(एस) का प्रभाव अभी भी बना हुआ है, और आगामी विधानसभा या अन्य चुनावों को देखते हुए गठबंधन की मजबूती जरूरी है।

यूएसएस अब्राहम लिंकन तेहरान के पास, अमेरिका की तैयारी इराक के बाद ईरान पर

वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर से बड़े स्ट्राइक की धमकी दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि इस बार का हमला पिछली बार से भी बड़ा होगा। अमेरिका ने हिंद महासागर में घातक यूएसएस अब्राहम लिंकन को उतारा है, जो ईरान के करीब पहुंच रहा है। अमेरिकी मीडिया ने बताया कि यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप सोमवार को हिंद महासागर में दाखिल हुआ और ईरान के करीब जा रहा है। यह ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित ऑपरेशन में मदद कर सकता है, चाहे वह हमलों में मदद करना हो या ईरान के संभावित जवाबी हमले से क्षेत्रीय सहयोगियों की रक्षा करना हो। अमेरिकी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान इस महीने की शुरुआत में मैसेज का लेन-देन कर रहे थे, जिसमें ओमानी डिप्लोमैट्स के जरिए और ट्रंप के विदेशी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच मैसेज का लेन-देन शामिल था। इस बातचीत में अमेरिकी हमले को रोकने के लिए एक संभावित मीटिंग के बारे में बात हो रही थी। दरअसल, यह उस अमेरिकी हमले की बात हो रही है, जिसकी धमकी ट्रंप प्रदर्शनकारियों की मौत के जवाब में दे रहे थे। ट्रंप ने हाल के दिनों में सैन्य कार्रवाई की अपनी धमकियां बढ़ा दी हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यूएस की सेना इस इलाके में एयर डिफेंस सिस्टम भेज रही है, जिसमें एक्स्ट्रा पैट्रियट बैटरी भी शामिल हैं, ताकि वहां मौजूद यूएस फोर्स को ईरान के संभावित जवाबी हमले से बचाया जा सके। अमेरिकी मीडिया ने कई सोर्स के हवाले से बताया कि अमेरिका इस इलाके में एक या ज्यादा थाड मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी तैनात किया है। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एएफसीईएनटी कमांडर और कंबाइंड फोर्सेज एयर कंपोनेंट कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डेरेक फ्रांस ने एक बयान में कहा, "अमेरिकी एयर फोर्स मिडिल ईस्ट में कई दिनों की एयर एक्सरसाइज करने वाली है, जिससे एयरमैन यह साबित कर सकेंगे कि वे मुश्किल हालात में भी सुरक्षित, सही तरीके से और अपने पार्टनर्स के साथ बेहतर तालमेल के जरिए काम को अंजाम दे सकते हैं।” दूसरी ओर ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर चेतावनी दे दी है कि फ्लीट ईरान की तरफ बढ़ रहा है। इसे अब्राहम लिंकन लीड कर रहा है, जो बहुत तेजी से, बहुत ताकत और मकसद के साथ आगे बढ़ रहा है।

सुरक्षित यात्रा का वादा: मचैल माता यात्रा में वैष्णो देवी जैसी आधुनिक सुविधाएं

जम्मू-कश्मीर मचैल माता की पवित्र यात्रा को अब और ज्यादा सुरक्षित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पिछले साल की दर्दनाक घटना से सीख लेते हुए प्रशासन ने एक अहम कदम उठाने का फैसला किया है। अब मचैल यात्रा में आरएफआईडी (RFID) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि हर श्रद्धालु की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। दरअसल, 14 अगस्त 2025 को मचैल यात्रा के दौरान बादल फटने से भारी तबाही हुई थी। इस हादसे में 60 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, 100 से अधिक लोग घायल हुए थे और कई लोग लंबे समय तक लापता रहे। राहत और बचाव कार्य करीब एक महीने तक चला। इस घटना ने साफ कर दिया कि पुरानी व्यवस्थाएं अब पर्याप्त नहीं हैं और नई तकनीक अपनाना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब मचैल यात्रा को वैष्णो देवी यात्रा की तरह आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना चाहता है। नई व्यवस्था के तहत हर श्रद्धालु को यात्रा के दौरान एक RFID कार्ड दिया जाएगा। इस कार्ड से यह पता लगाया जा सकेगा कि श्रद्धालु किस समय कहां मौजूद है। अगर किसी तरह की आपात स्थिति आती है, तो राहत और बचाव टीम को तुरंत सही जानकारी मिल सकेगी। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि अप्रैल से सितंबर के बीच, मानसून से पहले, आपदा से निपटने की पूरी तैयारी कर ली जाए। खास तौर पर बाढ़, भूस्खलन और खराब मौसम से जुड़ी घटनाओं को लेकर प्रशासन हमेशा सतर्क रहे। राज्य में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और मौसम विभाग के साथ लगातार तालमेल रखा जा रहा है। मौसम की पहले से चेतावनी, लगातार निगरानी और सही समय पर जानकारी पहुंचाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। RFID सिस्टम के साथ-साथ मचैल यात्रा मार्ग पर सुरक्षित शरण स्थल और सहायक ढांचे बनाने की भी योजना है, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया जा सके। इसके अलावा, वैष्णो देवी समेत सभी बड़े तीर्थ स्थलों पर नियमित मॉक ड्रिल कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। किश्तवाड़ जिला प्रशासन का कहना है कि मचैल हादसे से मिले अनुभवों के आधार पर एक पूरा आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किया गया है। प्रशासन का साफ संदेश है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उम्मीद है कि नई तकनीक, बेहतर योजना और अलग-अलग एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल से मचैल माता की यात्रा आने वाले समय में आस्था के साथ-साथ सुरक्षा की मिसाल बनेगी।

जापानी पीएम ने कसी कड़ी भाषा, कहा- ताइवान संघर्ष में अमेरिका पर हमला बर्दाश्त नहीं

टोक्यो जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने ताइवान को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि अगर ताइवान में कोई बड़ा संकट पैदा होता है और वहां अमेरिकी सेना पर हमला किया जाता है, तो जापान मूकदर्शक नहीं बनेगा, बल्कि दखल देगा। टोक्यो में एक टीवी कार्यक्रम के दौरान ताकाइची ने कहा कि ऐसी स्थिति में अगर जापान ने कुछ नहीं किया तो अमेरिका के साथ उसका सुरक्षा गठबंधन कमजोर पड़ जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ताइवान का मामला सिर्फ एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि जापान की सुरक्षा और उसके अंतरराष्ट्रीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। निक्केई एशिया के मुताबिक, ताकाइची ने यह भी कहा कि आपात स्थिति में ताइवान में फंसे जापानी और अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिकी सेना पर हमला होता है और हम दूरी बनाते हैं, तो फिर हमारे गठबंधन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”प्रधानमंत्री ने यह भी साफ किया कि सैन्य हमले जैसी इमरजेंसी में जापान हालात का आकलन करेगा और मौजूदा कानूनों के दायरे में रहकर जवाब देगा। उनका कहना था कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।ताकाइची का यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन लगातार ताइवान पर अपना नियंत्रण जताने के संकेत दे रहा है। इससे ताइवान पर संभावित चीनी सैन्य कार्रवाई की आशंका और गहरी हो गई है।   गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में भी ताकाइची ने जापानी संसद में कहा था कि ताइवान के खिलाफ चीन की नाकेबंदी या सैन्य कार्रवाई जापान के अस्तित्व के लिए खतरा हो सकती है। उस बयान पर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी और दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया था।चीन के दबाव के बाद ताकाइची ने दिसंबर में कहा था कि जापान का ताइवान पर रुख 1972 से नहीं बदला है, लेकिन अब उनके ताजा बयान से साफ है कि टोक्यो ताइवान के मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। इससे एक बार फिर चीन-जापान रिश्तों में तल्खी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।  

एक हफ्ते में दूसरी बड़ी दुर्घटना: दक्षिण अफ्रीका में 11 की जान गई

दक्षिण अफ्रीका दक्षिण अफ्रीका में एक बार फिर दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पूर्वी क्वाज़ुलु-नताल प्रांत में एक मिनीबस टैक्सी और ट्रक की जोरदार टक्कर में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक स्कूली बच्चा भी शामिल है। प्रांतीय परिवहन विभाग के अधिकारी सिबोनिसो डूमा ने बताया कि यह आंकड़ा शुरुआती जानकारी पर आधारित है और मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है। हादसा इतना भीषण था कि कई यात्रियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। निजी आपातकालीन सेवा ALS पैरामेडिक्स के प्रवक्ता गैरिथ जेमिसन के अनुसार, हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मिनीबस का ड्राइवर टक्कर के बाद मलबे में फंस गया था, जिसे बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब एक हफ्ते पहले ही दक्षिण अफ्रीका में मिनीबस टैक्सी और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर में 14 स्कूली बच्चों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रहे इन हादसों ने देश में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा, तेज रफ्तार और लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और लोगों से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।  

SC ने आवारा कुत्तों के विवाद में सुरक्षित किया फैसला, वकीलों को दिए 7 दिन

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिनमें आवारा कुत्तों के मामले में दिए गए पहले के आदेश में बदलाव की मांग की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करने को कहा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सभी राज्यों के सभी पक्षों, नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) द्वारा दी गई दलीलों के आखिरी दौर की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।   इससे पहले कुत्ते पालने वालों, कुत्ते के काटने की घटनाओं के पीड़ितों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पेश हुए वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने कल कुछ राज्यों द्वारा दायर किए गए अस्पष्ट हलफनामों पर नाराजगी जताई थी। बार एंड बेंच के मुताबिक, स्वतः संज्ञान मामले में कोर्ट ने आज NHAI से एक ऐप बनाने का भी आग्रह किया, जिसके ज़रिए लोग हाईवे पर आवारा जानवरों को देखने की रिपोर्ट कर सकें। कोर्ट ने कहा, "आप एक ऐप क्यों नहीं बनाते ताकि कोई भी जानवर को देखकर उसकी तस्वीर खींचकर अपलोड कर सके? आपके पास विज़ुअल्स होंगे।" इस पर NHAI के वकील ने जवाब दिया, "हम ऐसा करेंगे।" देश में सिर्फ 76 मान्यता प्राप्त स्टेरिलाइज़ेशन सेंटर खास बात यह है कि जैसे ही सुनवाई खत्म होने वाली थी, AWBI के वकील ने कोर्ट को बताया कि देश में सिर्फ 76 मान्यता प्राप्त स्टेरिलाइज़ेशन सेंटर हैं, जबकि विभिन्न राज्यों के डेटा से पता चलता है कि 883 आवारा कुत्तों के स्टेरिलाइज़ेशन सेंटर हैं। वकील ने कहा, “कुछ आवेदन पेंडिंग हैं। 250 से ज़्यादा आवेदन हैं… राज्यों द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार 883 चल रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक हमारी तरफ से मान्यता नहीं दी गई है।” कोर्ट ने आखिर में पूछा, "जिन सेंटरों को आपने (AWBI) मान्यता नहीं दी है, उनमें क्या हो रहा है?" इससे AWBI के वकील ने स्टेरिलाइज़ेशन के कुछ डेटा में विसंगति की ओर इशारा किया, जिससे शायद यह पता चलता है कि संख्या उतनी सटीक नहीं थी जितनी दावा किया गया था। इससे यह चिंता भी बढ़ी कि स्टेरिलाइज़ेशन के लिए तय फंड उन लोगों द्वारा लिया जा रहा था जो असल में ऐसा काम नहीं कर रहे थे। कई राज्यों ने इस बारे में जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई है। जहां कुत्ते कम वहां स्टेरिलाइज़ेशन ज्यादा वकील ने कहा, "आश्चर्यजनक डेटा है। जहां कुत्तों की आबादी कम है जैसे उत्तराखंड में, वहां स्टेरिलाइज़ेशन ज़्यादा है (रिपोर्ट किए गए स्टेरिलाइज़ेशन की संख्या कुत्तों की आबादी की संख्या से ज़्यादा है)।" इस पर कोर्ट ने कहा, “कारण साफ हैं। हर कोई इसके बारे में जानता है। कितनी ग्रांट दी जाती है।” इसके बाद वकील ने कहा, "जितना कम कहा जाए, उतना अच्छा।" इस पर कोर्ट ने कहा, "हां। कम कहना ही बेहतर है।" कोर्ट ने आगे कहा, "AWBI से बस यही अनुरोध है कि जो भी आवेदन पेंडिंग हैं, आप उन्हें प्रोसेस करें, और या तो उन्हें रिजेक्ट करें या एक तय समय के अंदर उन्हें मंज़ूरी दें।"