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प्रभास पाटन में भव्य सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, 72 घंटे चलेगा ओंकार नाद; प्रधानमंत्री मोदी होंगे शामिल

गांधीनगर गुजरात के प्रभास पाटन में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' आयोजित किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। इस पर्व का मकसद है सोमनाथ मंदिर की हजारों साल पुरानी विरासत को याद करना और उसकी महत्ता को सलाम करना। सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की अडिग भावना और संस्कृति का प्रतीक है। यह भारत की उस सभ्यता की आत्मा का प्रतीक है, जो हजारों साल पुरानी है, जिस पर बार-बार हमले हुए, लेकिन जिसे कभी पूरी तरह तोड़ा नहीं जा सका। यही वजह है कि यह मंदिर हमेशा से देशवासियों की श्रद्धा और विश्वास का केंद्र रहा है। साल 1026 से लेकर अब तक सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमले हुए, लेकिन आज भी यह पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। इस साल सोमनाथ मंदिर के प्रति अटूट आस्था के 1000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' मनाया जा रहा है। इसके तहत मंदिर परिसर में 8 से 11 जनवरी तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि इस आयोजन के तहत 8 से 11 जनवरी तक प्रभास पाटन में 72 घंटे का अखंड ओंकार नाद होगा। इसका मतलब है कि लगातार तीन दिनों तक सोमनाथ मंदिर परिसर में ‘ॐ’ की आवाज निरंतर गूंजती रहेगी। हर्ष संघवी ने लोगों को इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पल का हिस्सा बनने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि आइए हम सब मिलकर इस खास आयोजन में जुड़ें और सोमनाथ मंदिर की महिमा को महसूस करें। सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को गुजरात दौरे पर रहेंगे। इस दौरान पीएम मोदी खुद भी 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पहुंचेंगे। 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। गुरुवार से 72 घंटे का अखंड ओंकार नाद शुरू हो जाएगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के मंदिर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

वेनेजुएला के करीब रूस की पनडुब्बी की एंट्री, अमेरिकी कार्रवाई से भड़का अंतरराष्ट्रीय तनाव

काराकास पिछले दिनों अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर हमले करके उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को कब्जे में ले लिया, जिसकी रूस समेत दुनिया के कई देशों ने निंदा की। तनावपूर्ण माहौल के बीच, रूस ने वेनेजुएला के पास संभावित अमेरिकी जब्ती से टैंकर को बचाने के लिए पनडुब्बी तैनात की है। रूस कई दशकों से वेनेजुएला का समर्थक रहा है और अब रूसी पनडुब्बी की तैनाती से इलाके में तनाव और बढ़ सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया गया है कि रूस ने उत्तरी अटलांटिक में एक खराब तेल टैंकर को एस्कॉर्ट करने के लिए एक पनडुब्बी और अन्य नौसैनिक संपत्ति की तैनाती की है। यह टैंकर, जो अब मरीनरा नाम से चल रहा है, वेनेजुएला के पास के पानी से निकलने के हफ्तों बाद से ही यूनाइटेड स्टेट्स कोस्ट गार्ड की निगरानी में है। हालांकि, जहाज खाली है और साफ तौर पर खराब हो रहा है, लेकिन इसकी यात्रा ने अमेरिकी अधिकारियों का ध्यान खींचा है, जो उस ग्लोबल नेटवर्क पर शिकंजा कसना चाहते हैं, जिसे वे रूस और अन्य प्रतिबंधित देशों से जुड़े अवैध तेल की तस्करी करने वाला बताते हैं। बेला 1 से मरीनरा तक पहले बेला 1 के नाम से जाना जाने वाला यह टैंकर दो हफ्तों से ज्यादा समय से वेनेजुएला के पास प्रतिबंधित तेल शिपमेंट को निशाना बनाने वाली अमेरिकी नेतृत्व वाली नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जहाज अटलांटिक में जाने से पहले डॉक करने और कच्चा तेल लोड करने में विफल रहा। तेल न होने के बावजूद, टैंकर का पीछा अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने किया। यह दुनियाभर में ब्लैक-मार्केट एनर्जी सप्लाई, जिसमें पश्चिमी प्रतिबंधों के बाहर रूस द्वारा बेचा गया तेल भी शामिल है, को ले जाने वाले बेड़ों को रोकने के बड़े प्रयास का हिस्सा था। जहाज का नाम बदलकर रूस में करवा लिया रजिस्ट्रेशन दिसंबर 2025 में, जहाज के चालक दल ने खुले पानी में जाने से पहले अमेरिकी अधिकारियों द्वारा जहाज पर चढ़ने की कोशिश को नाकाम कर दिया। भागने के दौरान, चालक दल ने जहाज के बाहरी हिस्से पर मोटा-मोटा रूसी झंडा बनाया, जहाज का नाम बदलकर मरीनरा कर दिया, और इसका रजिस्ट्रेशन रूस में करवा लिया। इन कदमों ने किसी भी संभावित जब्ती से जुड़े कानूनी माहौल को काफी जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों ने टैंकर को बिना किसी निरीक्षण या सामान्य औपचारिकताओं के अपने झंडे के तहत रजिस्टर करने की रूस की अनुमति को बहुत असामान्य बताया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम अवैध रूसी तेल ले जाने का आरोप लगने वाले जहाजों पर हाल ही में अमेरिकी जब्ती को लेकर मॉस्को की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

अब और सुरक्षित होगा भारतीय पासपोर्ट! e-Passport में लगी होगी चिप, जानिए कितना खर्च और कैसे करें अप्लाई

नई दिल्ली भारत में अब पासपोर्ट सेवा का नया दौर शुरू हो चुका है। अब हर नए या रिन्यू किए जाने वाले पासपोर्ट के साथ आपको e-passport मिलेगा, जो पुराने पासपोर्ट से कहीं अधिक सुरक्षित और आधुनिक है। यह बदलाव ‘पासपोर्ट सेवा 2.0’ के तहत लागू किया गया है। ई-पासपोर्ट क्या है? e-passport सामान्य पासपोर्ट की तरह दिखता है, लेकिन इसके अंदर एक स्मार्ट चिप लगी होती है। यह चिप आपकी फोटो, उंगलियों के निशान और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तिगत जानकारी को डिजिटल तरीके से सुरक्षित रखती है। चिप की वजह से इसे नकली बनाना या इसमें छेड़छाड़ करना बेहद मुश्किल हो गया है। फीस और चार्जेस e-passport की फीस सामान्य पासपोर्ट के बराबर रखी गई है। -36 पन्नों वाला ई-पासपोर्ट: सामान्य प्रक्रिया के लिए 1,500 रुपये, जबकि तत्काल पासपोर्ट के लिए 3,500 रुपये (1500 फीस + 2000 तत्काल चार्ज)। -60 पन्नों वाला ई-पासपोर्ट: सामान्य प्रक्रिया के लिए 2,000 रुपये, और तुरंत पासपोर्ट चाहने पर 4,000 रुपये। कौन कर सकता है आवेदन? e-passport के लिए पात्रता वही है जो सामान्य पासपोर्ट के लिए होती है। यानी कोई भी भारतीय नागरिक, चाहे बच्चा, किशोर या बुजुर्ग, आवेदन कर सकता है। 75 साल से ऊपर उम्र वाले नागरिकों को कुछ मामलों में प्राथमिकता भी मिलती है।   पहली बार पासपोर्ट बनवाने वाले या पुराने पासपोर्ट के एक्सपायर होने, खो जाने या पन्नों के भर जाने पर ई-पासपोर्ट जारी किया जाएगा। वर्तमान साधारण पासपोर्ट वैध होने तक मान्य रहेगा, इसलिए तुरंत बदलना जरूरी नहीं है। विदेश में रहने वाले भारतीय भी अपने नजदीकी दूतावास के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त या लंबित मुकदमे वाले नागरिकों को पासपोर्ट मिलने में परेशानी हो सकती है। जरूरी दस्तावेज ई-पासपोर्ट बनवाने के लिए कुछ प्रमाण पत्र जरूरी हैं: पहचान पत्र जैसे आधार या पैन कार्ड पते का प्रमाण जन्म तिथि का प्रमाण (जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट) ई-पासपोर्ट न केवल सुरक्षा में बेहतर है, बल्कि यह भारत की डिजिटल पहल का हिस्सा भी है, जिससे पासपोर्ट प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बनती है।  

कोर्टरूम में गरमाया माहौल: महिला ने जज से कहा ‘जब तक हम उठ न जाएं खड़ी रहो’, मीलॉर्ड हुए नाराज़

अगरतला त्रिपुरा हाई कोर्ट ने एक अवमानना मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एक महिला को आदेश दिया कि वह पूरे दिन कोर्ट उठने तक अदालत कक्ष में खड़ी रहे। यह मामला वैवाहिक विवाद और तलाक समझौते की शर्तों का पालन न करने से जुड़ा है। महिला पर हाई कोर्ट के जज पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने और आरोप लगाने के आरोप हैं। जस्टिस टी अमरनाथ गौड़ और जस्टिस बिस्वजीत पालित की डिवीजन बेंच एक महिला के खिलाफ तलाक समझौते की शर्तों का पालन न करने और आदेश देने वाले जजों पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने के लिए अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही थी।   हाई कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को दिए गए आदेश में महिला के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा, “यदि कोई पक्षकार किसी आदेश से असंतुष्ट है, तो उसके लिए कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। मीडिया में जाकर बयान देना या प्रेस विज्ञप्ति जारी करना कोई स्वीकार्य उपाय नहीं है।” अदालत ने महिला को सजा सुनाते हुए कहा, “दंड के तौर पर यह अदालत निर्देश देती है कि कोर्ट उठने तक अदालत में खड़ी रहें। महिला होने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए और नरमी बरतते हुए यही सजा दी जा रही है।” क्या है पूरा मामला? यह मामला 2023 के एक तलाक समझौते से जुड़ा है। उस समझौते के तहत पत्नी ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह अपनी दो बेटियों के नाम कुछ संपत्तियां गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर करेगी। इसके बदले में, पति ने उसके लिए एक नया फ्लैट खरीदने और बढ़ा हुआ मासिक भरण-पोषण भत्ता देने पर सहमति व्यक्त की थी। आरोप है कि पत्नी तलाक के फैसले की शर्तों का पालन करने में विफल रही और उसने संपत्ति ट्रांसफर नहीं किया। महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स भी की थी शर्तों का पालन न करने पर पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ कोर्ट के सामने दिए गए वचन का जानबूझकर उल्लंघन करने के लिए अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की। याचिकाकर्ता पति के वकील ने तर्क दिया कि 2025 में पत्नी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें इस हाई कोर्ट के दो जजों पर बेबुनियाद आरोप लगाए, जो पहले इस मामले को देख रहे थे, जिसे विभिन्न समाचार चैनलों पर प्रसारित किया गया था। महिला ने अपने हस्ताक्षर से एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी करवाई थी। उन्होंने आगे तर्क दिया कि वह डीड, जिसे पत्नी के नाम पर निष्पादित किया जाना था, निष्पादित नहीं किया जा सका क्योंकि वह उस समय मौजूद नहीं थी। पत्नी की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनकी क्लाइंट अपने बर्ताव के लिए पछता रही है और कोर्ट से बिना शर्त माफ़ी मांगती है, और वह याचिकाकर्ता के साथ मिलकर संबंधित प्रमोटरों से याचिकाकर्ता द्वारा अपने नाम पर एक फ्लैट खरीदने के एग्रीमेंट को पूरा करने में सहयोग करने के लिए सहमत है। अदालत का फैसला रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह साफ है कि अवमानना ​​करने वाली महिला ने ऐसे बयान दिए थे जिनमें आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन जस्टिस अरिंदम लोध अपने न्यायिक कर्तव्यों को ठीक से नहीं निभा रहे थे, पक्षपात कर रहे थे और गलत इरादे से पक्षपातपूर्ण फैसले सुनाए थे, जिससे न्याय की भावना को नुकसान पहुंचा। कोर्ट ने महिला को आरोपों का दोषी पाया और अवमानना ​​करने वाली महिला को सजा देने का फैसला किया और उसे अदालत में खड़े रहने की सजा सुनाई।  

ईरान पर मंडराया अमेरिकी खतरा, कहा– वेनेजुएला से ज्यादा भयावह होगा संकट

वाशिंगटन बीते सप्ताह लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड, कोलंबिया, नाइजीरिया और ईरान समेत कई अन्य देशों को भी खुली धमकी है। उनकी इस धमकी के बाद प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने अमेरिका की विदेश नीति पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि अमेरिका में कानून महज एक काल्पनिक कहानी बन गई है। उन्होंने आशंका जताई कि अमेरिकी राष्ट्रपति का अगला निशाना ईरान हो सकता है। बता दें कि सैक्स ने हाल ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गवाही दी थी। उन्होंने मीडिया के साथ इंटरव्यू में अमेरिका की मौजूदा स्थिति को लेकर आगाह किया है। जेफ्री सैक्स ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं और अमेरिका एक ऐसे डीप स्टेट सैन्य तंत्र से चल रहा है, जो संविधान से परे काम कर रहा है। क्या बोले जेफ्री सैक्स? जेफ्री सैक्स ने ईरान में अमेरिका के संभावित हमले पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करेगा तो हालात वेनेजुएला से भी ज्यादा खराब होंगे। उन्होंने कहा है कि नए साल से ठीक पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में ट्रंप से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों ने संकेत दिए कि अगला नम्बर ईरान का हो सकता है। जेफ्री सैक्स के मुताबिक इजरायल ईरान को लेकर जुनूनी है और वहां की सरकार को गिराना चाहता है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका किसी ना किसी वजह से इजरायल के दबाव में काम करता दिखता है और कई बार वही युद्ध लड़ता है, जो इजरायल चाहता है। उन्होंने इसे बेहद खराब स्थिति बताई। वहीं ईरान में मौजूदा प्रदर्शनों पर ट्रंप की धमकी को लेकर उन्होंने कहा है कि यह डीप स्टेट की पुरानी रणनीति है, जहां मानवाधिकारों का हवाला देकर किसी देश पर हमला करने की जमीन तैयार की जाती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ युद्ध विश्व युद्ध की वजह भी बन सकती है।

चार्जशीट नहीं मानेंगे—हादी संगठन की खुली चेतावनी, हिंसा की धमकी के साथ भारत का जिक्र

ढाका बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता और राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में नया राजनीतिक घमासान खड़ा हो गया है। उनके संगठन इंकलाब मंच ने ढाका पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट को खारिज करते हुए आरोप लगाया है कि इस हत्या में केवल स्थानीय राजनीतिक तत्व नहीं, बल्कि पूरी आपराधिक साठगांठ और राज्य तंत्र शामिल है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो जनआंदोलन और तेज होगा।   पुलिस की चार्जशीट पर संगठन का कड़ा ऐतराज ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच ने मंगलवार को इस हत्याकांड में 17 लोगों के खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस के अनुसार, हादी की हत्या राजनीतिक प्रतिशोध में की गई और इसके पीछे सत्तारूढ़ आवामी लीग से जुड़े वार्ड पार्षद तैजुल इस्लाम चौधरी उर्फ बप्पी का हाथ था। मुख्य आरोपी के तौर पर फैसल करीम मसूद का नाम शामिल किया गया है। हालांकि, इंकलाब मंच के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी समझदार व्यक्ति यह नहीं मानेगा कि एक राष्ट्रीय स्तर के नेता की हत्या केवल एक वार्ड पार्षद के निर्देश पर हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार्जशीट में असली साजिशकर्ताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। ‘मार्च फॉर जस्टिस’ के बाद तीखी चेतावनी ढाका में ‘मार्च फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के समापन के बाद जाबेर ने कहा कि संगठन ने अब तक शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग की, लेकिन सरकार जनता की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो जिन लोगों ने खून बहाया है, जरूरत पड़ी तो उनसे खून लिया भी जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि हादी की हत्या के पीछे 'भारतीय प्रभुत्व' से जुड़ा बड़ा राजनीतिक संदर्भ है। हालांकि उन्होंने इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए। कौन थे शरीफ उस्मान हादी? 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी जुलाई–अगस्त 2024 के जनआंदोलन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए थे, जिसने तत्कालीन हसीना-नेतृत्व वाली सरकार के पतन की राह बनाई। वे आगामी 12 फरवरी के चुनाव के लिए संसदीय उम्मीदवार भी थे। 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान उनके सिर में गोली मार दी गई थी। हालत गंभीर होने पर उन्हें सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया, लेकिन 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा और राजनीतिक कड़ियां पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी मसूद सीधे तौर पर आवामी लीग की छात्र शाखा छत्र लीग से जुड़ा था। आरोप है कि वार्ड पार्षद बप्पी ने हत्या के बाद मसूद और एक अन्य आरोपी आलमगीर शेख को फरार होने में मदद की। बप्पी पहले पल्लबी थाना छत्र लीग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। गौरतलब है कि यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरका ने पिछले साल आवामी लीग और उसकी छात्र इकाई पर प्रतिबंध लगा दिया था। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर हादी की हत्या ने बांग्लादेश में नया राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है और भारत-बांग्लादेश संबंध भी इसकी चपेट में आए हैं। कुछ समूहों ने हत्या में भारतीय कड़ी होने का आरोप लगाया, जिसे नई दिल्ली ने सिरे से खारिज किया। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था वहां की सरकार की जिम्मेदारी है और भारत को गलत तरीके से घसीटने वाली झूठी कहानी को नकारा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश में शांति और स्थिरता का समर्थक है। सीमा पार भागने के दावे पर विवाद 28 दिसंबर को ढाका पुलिस ने दावा किया कि आरोपी मसूद और शेख हल्लुआघाट सीमा से मेघालय में घुस गए। हालांकि भारत के सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे को भ्रामक और निराधार बताया। बीएसएफ और मेघालय पुलिस- दोनों ने कहा कि सीमा पार करने या गारो हिल्स क्षेत्र में आरोपियों की मौजूदगी के कोई सबूत नहीं मिले हैं। फिलहाल इंकलाब मंच ने साफ कर दिया है कि जब तक कथित राज्य तंत्र और बड़े साजिशकर्ताओं को कटघरे में नहीं लाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में बहस: सिब्बल बोले– नसबंदी जरूरी, जज साहब ने ली चुटकी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को 'मराठी मानुस' और 'पशु प्रेम' जैसे भावुक मुद्दों से ऊपर उठकर जन सुरक्षा पर जोर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने दोटूक कहा कि सड़कों, स्कूलों और सरकारी संस्थानों को कुत्तों से मुक्त करना जरूरी है। सुनवाई के दौरान जब वकीलों ने कुत्तों के अधिकारों और उन्हें वापस उसी इलाके में छोड़ने की बात की तो बेंच ने कहा, "कोई नहीं जान सकता कि कुत्ते का मूड कब काटने का है और कब नहीं। इलाज से बेहतर बचाव है।" कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अगर कोई ऐसा कुत्ता है जो शरारती है और किसी को काट सकता है तो लोग एक सेंटर पर कॉल कर सकते हैं जहां कुत्ते को ले जाकर उसकी नसबंदी की जा सकती है और फिर उसे उसी इलाके में वापस छोड़ दिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने कहा, “बस एक ही चीज की कमी है, वह है कुत्तों को काउंसलिंग देना ताकि वापस छोड़े जाने पर वे काटें नहीं।” अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि हर कुत्ता नहीं काटता, लेकिन कोर्ट ने एक नया पहलू सामने रखा। बेंच ने कहा, 'सड़कों पर गाड़ियों के सामने अचानक कुत्तों का आना गंभीर हादसों का कारण बनता है। सड़कों को कुत्तों से साफ और मुक्त रखना होगा ताकि वाहन चालक सुरक्षित रहें। स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक संस्थानों में कुत्तों की मौजूदगी की कोई जरूरत नहीं है।' सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रिहाइशी सोसायटियों (RWA) को अधिकार देने की वकालत की। उन्होंने मजाकिया लेकिन तार्किक अंदाज में कहा, "हम सब पशु प्रेमी हैं, लेकिन इंसानों से भी प्यार करना चाहिए। कल को कोई ताजा दूध पीने के लिए सोसाइटी में भैंस लाना चाहेगा, तो क्या उसे अनुमति मिलनी चाहिए? इससे दूसरों को परेशानी होगी।" सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने रुख को और कड़ा करते हुए कहा कि दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते रेबीज के मामलों को देखते हुए आवारा कुत्तों को रिहाइशी इलाकों से हटाकर शेल्टर होम भेजना अनिवार्य है। सड़कों या सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए नगर निकायों को अलग से फीडिंग स्पेस बनाना होगा। जो भी व्यक्ति या संस्था नगर निगम को कुत्ते पकड़ने से रोकेगी, उसके खिलाफ कोर्ट सख्त कार्रवाई करेगा। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक सुस्ती से ज्यादा सिस्टम की विफलता माना है। बेंच ने आदेश दिया कि नगर निगमों को नियमित जांच करनी चाहिए कि किसी संस्थान के भीतर कुत्तों का जमावड़ा तो नहीं है। आक्रामक और रेबीज संदिग्ध कुत्तों को किसी भी हाल में वापस नहीं छोड़ा जाएगा।  

भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती, वित्त वर्ष 2026 में 7.4% विकास का अनुमान

 नई दिल्‍ली भारत की अर्थव्‍यवस्‍था तेजी से भाग रही है . 7 जनवरी को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था पिछले वित्त वर्ष के 6.5% की तुलना में 7.4% की दर से बढ़ने का अनुमान है. यह उछाल वैश्विक दबाव और अमेरिकी निर्यात में रुकावट के बीच है. अर्थव्‍यवस्‍था में यह उछाल भारत के मजबूत निवेश और निवेशकों के भरोसे को दिखाता है. साथ ही देश के नीतिगत बदलाव, कंजम्‍पशन और घरेलू इंफ्रा के मजबूती को भी दिखाता है.  अर्थव्‍यस्‍था में इस तेजी को मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने सपोर्ट किया है, जिसने इस वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी राष्ट्रीय आय के पहले एडवांस अनुमानों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट हासिल होने का अनुमान है.  इन सेक्‍टर्स में सामान्‍य ग्रोथ का अनुमान  MoSPI ने कहा कि सर्विस सेक्टर में अच्छी ग्रोथ FY 2025-26 में अनुमानित रियल GVA (ग्रॉस वैल्‍यू असेट) ग्रोथ रेट 7.3 प्रतिशत का एक प्रमुख कारण रही है. हालांकि, एग्रीकल्‍चर और संबंधित क्षेत्र और 'बिजली, गैस, पानी की सप्लाई और अन्य यूटिलिटी सेवाओं के क्षेत्रों में 31 मार्च को खत्म होने वाले मौजूदा वित्त वर्ष में सामान्य ग्रोथ रेट रहने का अनुमान है. नॉमिनल जीडीपी 8 फीसदी से ग्रो करेगी मंत्रालय ने आगे कहा कि नॉमिनल GDP या मौजूदा कीमतों पर GDP में 2025-26 के दौरान 8 प्रतिशत की ग्रोथ होने का अनुमान है. एडवांस अनुमानों के डेटा का इस्तेमाल केंद्रीय बजट तैयार करने में किया जाता है, जिसे 1 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है.  निवेश से मजबूत हुई ग्रोथ  आर्थिक उछाल का एक प्रमुख कारण निवेश गतिविधि थी.सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) वित्त वर्ष 2026 में 7.8% बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 7.1% से अधिक है. यह व्यवसायों द्वारा बुनियादी ढांचे, मशीनरी और दीर्घकालिक परियोजनाओं पर अधिक खर्च को दर्शाता है. पॉलिसी चेंज से बढ़ी मांग  विकास को गति देने में सरकारी उपायों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है . आयकर में राहत और जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के फैसले ने  उपभोक्ता मांग को बढ़ाने में मदद की, भले ही वैश्विक परिस्थितियां अनिश्चित बनी रहीं. वैश्विक व्यापार तनाव और टैरिफ संबंधी चुनौतियों के कारण निर्यात की संभावनाएं भले ही प्रभावित हुईं, लेकिन मजबूत घरेलू मांग ने इस प्रभाव को कम करने और विकास को पटरी पर लाने में मदद की है. 

ISRO की 2040 तक चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की योजना, पूर्व प्रमुख ने किया खुलासा

अहमदाबाद भारत 2040 तक चंद्रमा पर अपने अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना बना रहा है, यह जानकारी पूर्व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) प्रमुख ए. एस. किरण कुमार ने बुधवार को दी।कुमार, जो वर्तमान में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) के प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष हैं, यह बयान 5वें भारतीय खगोलशास्त्र समाज (ASI) सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान दे रहे थे। कुमार ने कहा, "अब से 2040 तक कई अंतरिक्ष मिशन होंगे। 2040 तक हमारा लक्ष्य भारतीयों को चंद्रमा पर भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है। इसके अलावा, भारत 2040 तक एक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।" इस कार्यक्रम के दौरान, कुमार ने मीडिया से बात करते हुए भारत के अंतरिक्ष रोडमैप के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा, "निकट भविष्य में चंद्रयान का एक अनुसरण मिशन होगा, और जापान के साथ मिलकर लैंडर और रोवर पर काम चल रहा है। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में कुछ विशिष्ट जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करेंगे। यह केवल शुरुआत है, इसके बाद कई गतिविधियाँ होंगी। भारत अंतरिक्ष अवलोकन और ब्रह्मांड को समझने के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने आगे कहा कि यह मिशन भारतीय शैक्षिक संस्थानों, इंजीनियरिंग संस्थानों और निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण में योगदान देने के कई अवसर खोलेगा।कुमार ने अपने उद्घाटन भाषण में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बारे में कहा, "भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने मुख्य रूप से समाजिक लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का निर्माण किया और न कि सैन्य उपयोग के लिए।" उन्होंने डॉ. विक्रम साराभाई के योगदान की भी सराहना की, जिनके प्रयासों से देश के स्वतंत्रता के 10 वर्षों बाद अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास हुआ था। साराभाई ने यह समझने की कोशिश की कि कैसे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से प्रसारण संचार और मौसम निगरानी में सुधार किया जा सकता है। यह तीन दिवसीय सत्र खगोलशास्त्र, अंतरिक्ष विज्ञान, ग्रह विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान और उभरते हुए क्षेत्रों, जैसे क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकियों में ऑप्टिक्स और उन्नत उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका पर केंद्रित है। उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय रेडियो एस्टोफिजिक्स केंद्र के निदेशक प्रोफेसर यशवंत गुप्ता, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बैंगलोर की निदेशक प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमणियम और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के निदेशक प्रोफेसर अनिल भारद्वाज भी उपस्थित थे।  

पराली से प्रगति तक: कृषि अपशिष्ट पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि खेतों में बचने वाले कृषि अपशिष्ट को देश का एक उपयोगी राष्ट्रीय संसाधन बनाया जा सकता है। उन्होंने यह बात बुधवार को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के 'टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सेरेमनी' में कही। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि बायो-बिटुमेन बनाना 'विकसित भारत 2047' के सपने को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। खेती से निकलने वाले कचरे का उपयोग करने से खेतों में पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण कम होगा और पुनः उपयोग वाली अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि सड़कों में 15 प्रतिशत बायो-बिटुमेन मिलाया जाए, तो भारत को करीब 4,500 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है। इससे देश की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता भी कम होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत ने सड़क निर्माण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है। देश दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने बायो-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों को बधाई दी और सहयोग के लिए राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का धन्यवाद किया। गडकरी ने कहा कि यह नई तकनीक किसानों को सशक्त बनाएगी, गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि चावल की पराली से बने जैव बिटुमेन का सफल परीक्षण किया गया है, जो पेट्रोल से बने बिटुमेन से बेहतर साबित हुआ है। इससे पराली जलाने की समस्या भी कम होगी। अब समय आ गया है कि कृषि अपशिष्ट, फसल अवशेष, बांस और जैव पदार्थों को हरित ईंधन और उपयोगी उत्पादों में बदला जाए। पिछले साल एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि भारत को हर साल 22 लाख करोड़ रुपए का जीवाश्म ईंधन आयात करना पड़ता है। पराली जलाने और वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण बढ़ा रहा है, इसलिए भारत को ऊर्जा आयातक से ऊर्जा निर्यातक देश बनना चाहिए। इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) द्वारा हाल ही में जारी एक बयान के अनुसार, किसानों द्वारा हर साल 73 लाख टन धान की पराली जलाई जाती है। अगर इसे संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) और बायोएथेनॉल में बदला जाए, तो देश को 1,600 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है और प्रदूषण भी कम होगा। बयान में आगे कहा गया है कि इस नीति से देश में करीब 37,500 करोड़ रुपए का निवेश आने की उम्मीद है और 2028-29 तक 750 सीबीजी परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं।