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अब पूछताछ काउंटर की झंझट खत्म, IPIS सिस्टम बताएगा ट्रेनों का पूरा स्टेटस

जमालपुर (मुंगेर) भारतीय रेल यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इस क्रम में मालदा रेल मंडल अंतर्गत आने वाले ए श्रेणी के जमालपुर जंक्शन पर इंटीग्रेटेड पैसेंजर इनफारमेशन सिस्टम (IPIS) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली के लागू होने से रेल यात्रियों को ट्रेनों से संबंधित अपडेट या जानकारी एक ही स्थान पर आडियो-विजुअल माध्यम से मिल सकेगी, जिससे उनकी यात्रा और भी आसान एवं सुविधाजनक हो जाएगी। रेल अधिकारियों के अनुसार आइपीआइएस के माध्यम से यात्रियों को डिजिटल पैटर्न पर ट्रेन की लाइव स्थिति, आगमन-प्रस्थान समय, प्लेटफार्म नंबर सहित अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं प्रदर्शित की जाएंगी। अब यात्रियों को बार-बार पूछताछ काउंटर या अनाउंसमेंट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। स्टेशन परिसर में लगाए गए डिस्प्ले बोर्ड और स्वचालित उद्घोषणा प्रणाली के जरिए सभी जानकारियां स्पष्ट रूप से उपलब्ध होंगी। क्या है आइपीआइएस तकनीक इंटीग्रेटेड पैसेंजर इनफारमेशन सिस्टम (एकीकृत यात्री सूचना प्रणाली) एक कंप्यूटर आधारित आधुनिक तकनीक है, जो रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ट्रेनों से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां एकीकृत रूप से उपलब्ध कराती है। इस प्रणाली के तहत स्टेशन पर लगे इलेक्ट्रानिक डिस्प्ले बोर्ड और अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए ट्रेनों के आगमन-प्रस्थान समय, प्लेटफार्म नंबर, रनिंग स्टेटस और अन्य सूचनाएं प्रसारित की जाती हैं। आइपीआइएस एक सिंगल कंट्रोल यूनिट से संचालित होता है, जिससे पूरे स्टेशन परिसर में एक साथ सूचनाओं का प्रसारण संभव होता है। इसमें ऑटोमेटिक घोषणाएं, रिकॉर्डेड मैसेज और रियल टाइम अपडेट शामिल होते हैं, जो यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होते हैं।   इस प्रकार मिलेगी यात्रियों को जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आइपीआइएस लागू होने के बाद यात्रियों को स्टेशन पर लगे डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से ट्रेन की लाइव लोकेशन की जानकारी मिलेगी। यात्री यह भी जान सकेंगे कि उनकी ट्रेन कितनी देर में स्टेशन पहुंचेगी। यदि ट्रेन विलंब से चल रही है तो उसके संभावित आगमन समय की सटीक जानकारी भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा ट्रेन किस प्लेटफार्म पर आएगी, उसका रनिंग स्टेटस क्या है और किस कोच की स्थिति प्लेटफार्म पर किस स्थान पर होगी, यह जानकारी भी यात्रियों को मिलेगी। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों को विशेष सुविधा होगी। उन्होंने बताया गया कि जमालपुर रेलवे स्टेशन होकर प्रतिदिन लगभग तीन दर्जन ट्रेनों का परिचालन होता है। अभी तक यात्रियों को डायवर्टेड ट्रेनों की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती थी, लेकिन आइपीआइएस के लागू होने के बाद डायवर्टेड ट्रेनों से जुड़ी सूचना भी तुरंत उपलब्ध कराई जा सकेगी। इन स्थानों पर होगा सिस्टम लागू रेल अधिकारियों ने बताया कि मालदा रेल मंडल अंतर्गत मालदा, साहिबगंज, भागलपुर, जमालपुर, बांका और गोड्डा स्टेशनों पर चरणबद्ध तरीके से आइपीआइएस प्रणाली लागू की जाएगी। जमालपुर स्टेशन पर इस नई व्यवस्था के लिए स्टेशन परिसर और सर्कुलेटिंग एरिया में उपयुक्त स्थान की तलाश की जा रही है। रेल प्रशासन का मानना है कि इस नई तकनीक के लागू होने से न सिर्फ यात्रियों की असुविधाएं कम होंगी, बल्कि स्टेशन प्रबंधन भी अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से कार्य कर सकेगा।

तेल कुएं से गैस लीक होते ही मची अफरा-तफरी, आंध्र प्रदेश के पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित

नई दिल्ली आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले में ONGC के एक चालू तेल कुएं से बड़े पैमाने पर गैस लीक हो गई। इससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। घटना तब हुई, तब कुएं में कुछ समय के लिए प्रोडक्शन बंद होने के बाद वर्कओवर रिग का इस्तेमाल करके मरम्मत किया जा रहा था। मरम्मत के दौरान एक जौरदार धमाका हुआ और कच्चे तेल के साथ मिली हुई गैस भारी मात्रा में मिली और हवा में बहुत ऊपर तक चली गई। यह तेल का कुआं कोनासीमा के राजोल इलाके के इरुसुमंडा गांव में है। गैस लीक होते ही लगी आग स्थानी अधिकारियों के मुताबिक, लीक हुई गैस में तुरंत आग लग गई। ये देखकर आस-पास रहने वाले लोग और अधिकारी भी घबरा गए। गैस और धुएं का बादल सुमंडा और आसपास के इलाकों में घने कोहरे की तरह फैल गया। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत पास के गांव खाली करवा लिए। कई लोग पहले ही घरों से भाग गए। वे अपने मवेशियों को भी सुरक्षित जगह पर ले गए। लोगों से बिजली का इस्तेमाल न करने, बिजली के उपकरण चालू न करने और चूल्हा न जलाने को कहा गया है। ONGC के कर्मचारी लीक को कंट्रोल करने और आग बुझाने के लिए मौके पर मौजूद हैं। अधिकारियों ने पूरे इलाके को घेर लिया और हालात पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

तेल उत्पादन बढ़ाने में जूझेगा वेनेजुएला, इस देरी से भारत की ऑयल कंपनियों को हो सकता है फायदा

नई दिल्ली वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, लेकिन इसके बावजूद वहां तेल का उत्पादन बहुत कम है। इसकी मुख्य वजहें तकनीकी ज्ञान की कमी, कम निवेश, राजनीतिक दखल, खराब प्रबंधन, भ्रष्टाचार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन कारणों की वजह से वेनेजुएला अपने तेल भंडार का सही उपयोग नहीं कर पा रहा है। नए साल की शुरुआत में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला करने के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। पीएल कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि मादुरो वर्ष 2013 में राष्ट्रपति बने थे और तब से वे ज्यादातर फैसले अध्यादेशों के जरिए लेते रहे हैं। हालिया घटनाक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कुछ समय के लिए अस्थिरता देखने को मिल सकती है। पीएल कैपिटल के रिसर्च एनालिस्ट स्वर्णेंदु भूषण ने कहा कि वेनेजुएला के पास सबसे बड़ा तेल भंडार है, जो अनुमानित 303.8 अरब बैरल (2020) है। इसके बाद सऊदी अरब का स्थान आता है, जिसके पास लगभग 297.5 अरब बैरल तेल का भंडार है। इसके बाद कनाडा, ईरान और इराक के पास क्रमशः 168.1 अरब बैरल, 157.8 अरब बैरल और 145 अरब बैरल तेल है, जो वेनेजुएला और सऊदी अरब से काफी कम हैं। वहीं, अगर तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो दुनिया में सबसे ज्यादा तेल खपत करने वाला देश अमेरिका है, जिसके पास मात्र 68.8 अरब बैरल का तेल भंडार है, जो बहुत कम है। इतना बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला का तेल उत्पादन निराशाजनक है। नवंबर 2025 में वेनेजुएला में प्रतिदिन केवल 10 लाख बैरल तेल का उत्पादन हुआ। इसके मुकाबले अमेरिका में रोजाना लगभग 1 करोड़ 37 लाख बैरल और सऊदी अरब में 97 लाख बैरल तेल का उत्पादन हुआ। भूषण ने कहा कि वेनेजुएला का मौजूदा उत्पादन, एक दशक पहले के उत्पादन का केवल एक-तिहाई रह गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1970 में वेनेजुएला दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल था। उस समय वहां प्रतिदिन 37 लाख बैरल तेल का उत्पादन होता था, जो उस दौर में अमेरिका के 117 लाख बैरल प्रति दिन और तत्कालीन सोवियत संघ के 71 लाख बैरल प्रति दिन से पीछे था, लेकिन उस समय भी सऊदी अरब के 39 लाख बैरल प्रति दिन के बाद वेनेजुएला का अहम स्थान था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा कोई जादुई तरीका नहीं है जिससे वेनेजुएला का तेल उत्पादन अचानक बढ़ जाए। उत्पादन में सुधार के शुरुआती संकेत दिखने में भी कम से कम तीन से छह महीने लग सकते हैं। कम समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकता है। रूस और चीन की प्रतिक्रिया के आधार पर तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी भी संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल होने के कारण मौजूदा हालात में भारत की तेल खोज और उत्पादन करने वाली कंपनियों ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को फायदा हो सकता है। वहीं, तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) कम तेल कीमतों के कारण अपनी कमाई बनाए रख सकती हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि हाल ही में सिगरेट पर टैक्स बढ़ाए जाने के बाद पेट्रोल और डीजल पर भी टैक्स बढ़ाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो तेल कंपनियों को इसका बोझ उठाना पड़ सकता है। इसलिए मौजूदा स्थिति में निवेश को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

तोरखम सीमा बंद होने से नाराज़ लोग सड़कों पर, खैबर पख्तूनख्वा में विरोध

इस्लामाबाद पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के लांडी कोटल इलाके में अपनी मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लोगों की मांग है कि तोरखम बॉर्डर को फिर से तुरंत खोल दिया जाए। स्थानीय मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार रविवार को ऑल बॉर्डर्स कोऑर्डिनेटर्स काउंसिल के बैनर तले लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसमें व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, कबीलाई बुजुर्ग, दिहाड़ी मजदूर, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और सिविल सोसायटी के लोग शामिल रहे। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अक्टूबर से अफगानिस्तान के साथ बॉर्डर बंद होने से सीधे तौर पर प्रभावित हुए अलग-अलग संगठनों और ग्रुप्स के प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए, लोगों ने कहा कि तोरखम बॉर्डर बंद होने की वजह से हजारों लोगों की आर्थिक रूप से हत्या हुई है। इनमें से ज्यादातर वो लोग थे जो पूरी तरह से बॉर्डर पार के व्यापार पर निर्भर थे। उन्होंने तोरखम बॉर्डर को मध्य एशिया का एक जरूरी बिजनेस गेटवे बताया और कहा कि यह बॉर्डर क्रॉसिंग हजारों परिवारों के लिए एक आर्थिक हब का काम करता था और इसी से उनकी रोजी-रोटी जुड़ी हुई थी। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, बॉर्डर बंद होने से शहर में सभी कमर्शियल गतिविधियां बंद हो गई हैं। लोगों ने कहा कि बॉर्डर बंद होने से सैकड़ों परिवारों को बहुत ज्यादा गरीबी और आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों को अपना गुजारा करने के लिए लोन लेने पर मजबूर होना पड़ा। स्थानीय लोगों ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान से अपील की है कि वे आपसी व्यापार को राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों से न जोड़ें और लोगों को बॉर्डर के दोनों तरफ बार-बार आने-जाने दें। उन्होंने कहा, "हम यह भी मांग करते हैं कि प्रभावशाली कबायली बुजुर्गों और व्यापार प्रतिनिधियों को भविष्य में पाक-अफगान शांति और व्यापार बातचीत का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने पहले भी दोनों देशों के बीच मुश्किल मुद्दों को सुलझाने में हमेशा मदद की है।" पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पिछले साल दिसंबर में यह खबर आई थी कि पाकिस्तान में दिहाड़ी मजदूरों और कुलियों को तोरखम बॉर्डर के लगातार बंद होने की वजह से आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव के कारण इन लोगों की पार्ट-टाइम नौकरियां चली गई थीं। इनमें से ज्यादातर मजदूर पंजाब और सिंध में नौकरी ढूंढ रहे हैं, जबकि दूसरों ने अपने रोज के खर्चों को चलाने के लिए रिश्तेदारों और दोस्तों से पैसे उधार लिए हैं। स्थानीय मीडिया ने बताया कि उनके पास फीस देने के लिए पैसे नहीं हैं। इसकी वजह से उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ रहा है और कुछ लोगों ने हालात से उबरने के लिए ड्रग्स लेना शुरू कर दिया है। डॉन के अनुसार, मंसूर अली ने कहा कि गरीबी की वजह से उसने अपना एफएससी कंप्यूटर साइंस कोर्स बीच में ही छोड़ दिया। शख्स ने थोड़े से पैसे में बॉर्डर पॉइंट और टैक्सी स्टैंड के बीच अफगान और पाकिस्तानी नागरिकों का सामान ढोना शुरू कर दिया। तोरखम लेबरर्स एंड पोर्टर्स एसोसिएशन के नेता अली शिनवारी को डर है कि युवा बेरोजगार मजदूर प्रतिबंधित आतंकवादी समूह में शामिल हो सकते हैं। आतंकी संगठन ऐसे निराश युवाओं की खराब हालत का फायदा उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "हमें यह भी डर है कि कुछ युवाओं को ड्रग पेडलर के तौर पर काम पर रखा जाएगा क्योंकि नारकोटिक्स डीलर उन्हें अच्छी तनख्वाह देते हैं।" पिछले साल अक्टूबर में, पाकिस्तानी सेना के डूरंड लाइन के पास हमले करने के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ सभी व्यापार रूट बंद कर दिए थे। पाकिस्तान के हमलों के जवाब में, अफगान सेना ने भी हमले किए। व्यापार का रूट बंद होने के बाद, अफगानिस्तान के आर्थिक मामलों के उपप्रधानमंत्री, मुल्ला अब्दुल गनी बरादर अखुंद ने उद्योगपतियों और व्यापारियों से पाकिस्तान के बजाय दूसरे व्यापारिक मार्ग का इस्तेमाल करने की अपील की।

हिमाचल में रैगिंग पर सख्ती: मुख्यमंत्री ने पीड़ित छात्रा के लिए न्याय का किया वादा

शिमला हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को धर्मशाला के सरकारी डिग्री कॉलेज की एक छात्रा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता दर्शाते हुए मुख्यमंत्री ने छात्रा के माता-पिता से फोन पर बात की और गहरी संवेदना और समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि एसोसिएट प्रोफेसर अशोक कुमार और तीन अन्य छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक उपाय के तौर पर, एसोसिएट प्रोफेसर को जांच के नतीजे आने और अनुशासनात्मक कार्रवाई होने तक निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने परिवार को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार पारदर्शी, गहन और समयबद्ध जांच के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि सरकार परिवार के साथ पूरी तरह से खड़ी है और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी दोषियों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाए। एक दिन पहले, सरकार ने विभागीय जांच के नतीजे आने तक एसोसिएट प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया था। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं और हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम, 2009 की धारा 3 के तहत अशोक कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आदेशों में कहा गया है कि निलंबन की अवधि के दौरान अशोक कुमार का मुख्यालय शिमला स्थित उच्च शिक्षा निदेशालय में रहेगा और वे उच्च अधिकारियों से पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।

इतिहास और राष्ट्रगौरव की चेतना का स्रोत बनेगा पीएम मोदी का लेख: स्वामी अवधेशानंद गिरि

नई दिल्ली पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने सोमवार को सोमनाथ विध्वंस के 1,000 साल पूरे होने पर पीएम मोदी के पोस्ट पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आपका यह लेख आने वाली पीढ़ियों में इतिहास-बोध और राष्ट्र-गौरव के जागरण का सबल माध्यम सिद्ध होगा। पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री, आपका यह आलेख स्मरण कराता है कि सोमनाथ केवल एक तीर्थ ही नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा का प्रतीक है। समय-समय पर आए प्रहारों के बीच भी जिस श्रद्धा और समर्पण ने इसे पुनः उठाया, वही हमारी सभ्यता का अदम्य साहस है। आपका यह लेख आने वाली पीढ़ियों में इतिहास-बोध और राष्ट्र-गौरव के जागरण का सबल माध्यम सिद्ध होगा।" उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले विदेशी आक्रमणकारी गजनी के महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था। ये आक्रमण हमारे मंदिर पर नहीं था, ये हमारी संस्कृति और उस संस्कृति पर था जो पूरा देश अपना मानता है। तब से मंदिर निर्माण के अनेक प्रयास हुए हैं। लगभग 75 वर्ष पहले इसका निर्माण हो पाया था। आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लेख भारत के गौरवशाली अतीत का स्मरण करता है। मशहूर आध्यात्मिक गुरु और पद्म भूषण से सुशोभित श्री एम ने कहा कि सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग शुद्ध प्रकाश से बना है और उसे कोई भी नष्ट नहीं कर सकता। लगभग 1,000 वर्ष पूर्व, महमूद गजनी ने सोमनाथ को तोड़ा और उजाड़ा था, जिस दिन को हम आज पीड़ा के साथ स्मरण करते हैं। लेकिन क्या सोमनाथ को, जो स्वयं एक ज्योति है, नष्ट किया जा सकता है? आज भी हम गुजरात में सोम के भगवान को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। मैं प्रधानमंत्री मोदी के विचार से सहमत हूं। 1299 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति अलाफ खान ने फिर मंदिर को नष्ट किया और मूर्ति के टुकड़े दिल्ली ले गया। कुछ सालों बाद हिंदू शासकों ने इसे फिर से खड़ा किया। 1394 में गुजरात के गवर्नर मुजफ्फर खान ने मंदिर को तोड़ा। 1459 में महमूद बेगड़ा ने भी सोमनाथ को अपवित्र किया। इसके बावजूद मंदिर किसी न किसी रूप में विद्यमान रहा। बता दें कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाने के लिए गुजरात के सोमनाथ मंदिर में सालभर कई कार्यक्रम होंगे। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि 8 से 11 जनवरी तक मंदिर परिसर में कई आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम होंगे। प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।

पीएम की ओर से अजमेर दरगाह में चादर चढ़ाने पर नहीं लगेगी रोक, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सालाना उर्स के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की ओर से चादर चढ़ाने की परंपरा को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस फैसले का अजमेर कोर्ट में चल रहे मामले पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत फैसला नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों का अजमेर की अदालत में दरगाह द्वारा शंकर मोचन महादेव मंदिर पर कथित "अवैध कब्जे" के संबंध में लंबित मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1947 में पहली बार अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाने की परंपरा शुरू की थी और इसके बाद हर साल यह परंपरा निभाई जाती रही, लेकिन यह प्रथा ना तो किसी कानून में लिखी है और ना ही यह संविधान के अनुरूप है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि इस दरगाह के स्थान पर पहले एक प्राचीन शिव मंदिर था। इस विषय पर पहले ही अजमेर कोर्ट में एक मामला विचाराधीन है। ऐसे में याचिकाकर्ता का तर्क था कि पेंडिंग केस के दौरान चादर चढ़ाने की परंपरा उस मामले को प्रभावित कर सकती है। गौरतलब है कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स पर 22 दिसंबर को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार की ओर से अजमेर दरगाह में चादर और फूल चढ़ाए। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने सम्मान के प्रतीक के रूप में पवित्र दरगाह पर चादर चढ़ाई। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की तरफ से अलग चादर चढ़ाई थी।

पेरिस में भारतीय संस्कृति की झलक: एस. जयशंकर ने विरासत प्रदर्शनी का किया उद्घाटन

पेरिस/नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 4 जनवरी से दो देशों के विदेश दौरे पर हैं। पहले चरण में जयशंकर फ्रांस पहुंचे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने पेरिस में 'से क्वी से ट्रैम' नामक एक प्रदर्शनी का दौरा किया। इसमें भारत की पुरानी कपड़ा विरासत और शानदार कारीगरी को पेश किया गया, जो यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध कितने गहरे और मजबूत हैं। इस सिलसिले में ईएएम जयशंकर ने भारतीय समयानुसार सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, "आज शाम पेरिस में 'से क्वी से ट्रैम' प्रदर्शनी देखी। यह प्रदर्शनी भारत की टेक्सटाइल विरासत, सवोइर-फेयर और क्रिएटिविटी को दिखाती है। यह भारत-फ्रांस के मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव की भी याद दिलाती है।" बता दें, एस जयशंकर 4-9 जनवरी तक फ्रांस और लक्जमबर्ग के आधिकारिक दौरे पर हैं। फ्रांस के अपने दौरे के दौरान, वह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के साथ विदेश मंत्री, जीन नोएल बैरोट के साथ बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "वे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के तहत हुई प्रगति और वैश्विक महत्व के मामलों पर चर्चा करेंगे। ईएएम गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर फ्रेंच एम्बेसडर कॉन्फ्रेंस के 31वें एडिशन को भी संबोधित करेंगे।" इसके बाद लक्समबर्ग के दौरे पर विदेश मंत्री जयशंकर उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बातचीत करेंगे। लक्जमबर्ग में मौजूद भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी वह बातचीत करेंगे। पिछले साल नवंबर में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में जी20 समिट के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की थी। मीटिंग के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "जोहान्सबर्ग जी20 समिट के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों से मिलकर खुशी हुई। हमने अलग-अलग मुद्दों पर अच्छी बातचीत की। भारत-फ्रांस के रिश्ते दुनिया की भलाई के लिए एक ताकत बने हुए हैं।" दोनों नेताओं ने पिछले साल सितंबर 2025 में फोन पर बात की थी, जिसमें यूक्रेन में लड़ाई खत्म करने की कोशिशों पर विचार साझा किए गए थे। इसके साथ ही उन्होंने इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान और पूरे इलाके में जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए भारत के लगातार समर्थन को दोहराया था। इससे पहले दोनों नेताओं ने 21 अगस्त, 2025 को भी फोन पर बात की थी। इस समय भी यूक्रेन को लेकर बातचीत हुई थी। पिछले कुछ महीनों में अपनी बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अर्थव्यवस्था, रक्षा, विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष समेत अलग-अलग क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हुए विकास की समीक्षा की। उन्होंने होराइजन 2047 रोडमैप, इंडो-पैसिफिक रोडमैप और डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप के हिसाब से इंडिया-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

टाटा मेमोरियल अस्पताल को मिली बम धमकी, मुंबई पुलिस अलर्ट मोड पर

मुंबई मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अस्पताल को एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल में दावा किया गया था कि अस्पताल परिसर में बम रखा गया है। सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने तुरंत मुंबई पुलिस को इसकी जानकारी दी। मुंबई पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, अस्पताल में बम होने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गईं। सूचना पाकर मुंबई पुलिस की कई टीमें, बम निरोधक दस्ता (बम स्क्वॉड) और अन्य सुरक्षा इकाइयां मौके पर पहुंची। फिलहाल अस्पताल में सघन सर्च ऑपरेशन जारी है। बम स्क्वॉड द्वारा बारीकी से जांच की जा रही है। मुंबई पुलिस ने बताया कि धमकी भरा ईमेल किसने भेजा, उसका मकसद क्या है और यह किसी शरारत का हिस्सा है या किसी बड़ी साजिश से जुड़ा है। इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। साइबर सेल भी ईमेल की तकनीकी जांच में जुट गई है ताकि मेल भेजने वाले की पहचान की जा सके। जानकारी के अनुसार, अभी तक किसी संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर हर पहलू से जांच की जा रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मुंबई या देश के अन्य हिस्सों में इस तरह की धमकियां सामने आई हैं। इससे पहले, 18 दिसंबर को मुंबई के बांद्रा कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। धमकी भरे ईमेल के बाद मुंबई पुलिस, बम निरोधक दस्ता समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंची। काफी देर तक चली जांच के बाद कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ। इसी तरह, 1 दिसंबर को मुंबई के सांताक्रूज इलाके में स्थित एक स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी भेजी गई थी। उस समय स्कूल प्रशासन ने तुरंत मुंबई पुलिस और बम निरोधक दस्ते को इसकी सूचना दी थी। मौके पर पहुंची टीमों ने स्कूल परिसर की गहन तलाशी ली, लेकिन वहां भी कोई विस्फोटक नहीं मिला था। पुलिस ने उस मामले में भी धमकी को झूठा बताया था।

ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनने की राह पर भारत, 11 वर्षों में 6 गुना बढ़ा प्रोडक्शन

नई दिल्ली केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि भारत पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम यानी डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लीकेशन, मटेरियल और इक्विपमेंट में आने वाले समय में बड़ा खिलाड़ी बनेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एप्पल ने 2025 में भारत से 50 अरब डॉलर मूल्य के मोबाइल फोन को शिप किया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया और हमारे उत्पादन केंद्रित अर्थव्यवस्था बनने की तरफ एक बड़ा मील का पत्थर है। वैष्णव ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बीते 11 वर्षों में छह गुना बढ़ा है। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 8 गुना बढ़ा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स देश की ओर से किए जाने वाले शीर्ष तीन निर्यातों में शामिल हो गया है।" उन्होंने आगे कहा कि 46 कंपोनेंट निर्माण परियोजनाएं, लैपटॉप, सर्वर और ऑडियो डिवाइस निर्माताओं के जुड़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख चालक बन रहा है। केंद्रीय मंत्री के कहा कि इस वर्ष चार सेमीकंडक्टर संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अब कुल रोजगार की संख्या 25 लाख हैं, जिनमें से कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में एक ही स्थान पर 5,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। कुछ यूनिट्स में तो एक ही स्थान पर 40,000 तक कर्मचारी कार्यरत हैं। इससे पहले, केंद्र सरकार ने रविवार को डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (डीएलआई) के तहत भारतीय सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने वाले उद्योग को मजबूत करने के लिए 24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी। ये प्रोजेक्ट्स वीडियो निगरानी, ड्रोन का पता लगाने, एनर्जी मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और आईओटी सिस्टम ऑन-चिप्स (एसओसी) जैसे क्षेत्रों में हैं। सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन चिप बनाने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा मूल्य जोड़ने वाला हिस्सा है। यह आपूर्ति श्रृंखला में 50 प्रतिशत और फैबलेस सेगमेंट के माध्यम से वैश्विक सेमीकंडक्टर बिक्री में 30-35 प्रतिशत का योगदान देता है। सरकारी बयान में कहा गया कि डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) समर्थित योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। स्कीम के तहत अब तक 16 टेप-आउट, 6 एएसआईसी चिप्स, 10 पेटेंट और 1,000 से ज्यादा इंजीनियर शामिल हो चुके हैं। साथ ही निजी निवेश भी तीन गुना तक बढ़ा है।