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Middle East तनाव: ईरान पर खतरा बढ़ा, F-35 और US बेड़े की मौजूदगी, सऊदी झटका और ट्रंप की उकसावे वाली नीति

तेहरान  ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है. फिलहाल दोनों देशों में सीधी जंग तो नहीं, लेकिन हालात उससे कम भी नहीं हैं. सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक टकराव चल रहा है. अमेरिका, ईरान पर परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय मिलिशिया को समर्थन और मानवाधिकारों के आरोप लगा रहा है, वहीं ईरान अमेरिका को मध्य-पूर्व में दखल देने वाला और प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला देश कहता है. पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में विमानवाहक पोत, युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. जिसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले को पूरी जंग मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा. दोनों देशों के बीच बयानबाजी सैन्य तैयारियां, प्रतिबंध, साइबर और खुफिया कार्रवाइयां इस टकराव को और तेज कर रही हैं. ईरान की ओर बढ़ रही विनाश की खेप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका का एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें उम्मीद है कि इसका इस्तेमाल करने की नौबत नहीं आएगी. ट्रंप ने एक बार फिर तेहरान को चेतावनी दी कि वह प्रदर्शनकारियों की हत्या या अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने जैसी किसी भी कार्रवाई से बचे. उन्होंने ईरान को व्यापार समझौता करने या परिणाम भुगतने की चेतावनी दी. सऊदी अरब ने दिया अमेरिका को झटका ईरान भी अमेरिका के इस कदम को लेकर अपनी तैयारी पूरी रख रहा है. ईरान की ओर से UAE से बातचीत की गई थी, जिसके बाद इस देश ने स्पष्ट कहा कि यह अपनी हवा, जमीन या पानी किसी भी हमला-सक्रियता के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा. ऐसी ही बातचीत ईरान की सऊदी अरब से भी हुई है. इस देश ने भी अमेरिका को झटका देते हुए कहा है कि तेहरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए वो अपने हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा. सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेश्चकियान से बातचीत के बाद ये बात कही है. दोनों देश साफ कर चुके हैं कि वे किसी भी सैन्य हमले के लिए अपने देश को लॉन्चपैड नहीं बनने देगा. सैन्य अभ्यास की तैयारी में है अमेरिका समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अमेरिकी एयर फोर्स के सेंट्रल कमांड ने बयान में कहा कि यह अभ्यास मिडिल ईस्ट में लड़ाकू हवाई ताकत को तैनात करने, फैलाने और बनाए रखने की क्षमता दिखाएगा. यहां बताना जरूरी है कि सेंट्रल कमांड ही इस इलाके में अमेरिकी सेनाओं की जिम्मेदारी संभालती है. लेकिन अभ्यास की तारीख या सटीक जगह का खुलासा नहीं किया गया है. इससे रहस्य और बढ़ गया है. क्या यह ईरान की सीमा के करीब होगा? या सिर्फ दिखावा है? अमेरिकी जंगी बेड़े में क्या-क्या मौजूद?     अमेरिका के जंगी बेड़े में USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर और उसके साथ चलने वाले युद्धपोत मौजूद हैं.     अमेरिका के मशहूर फाइटर जेट F-35 को यहां तैनात किया गया है, जो अपनी सटीक मारक क्षमता और छिपकर वार करने में सिद्धहस्त है.     इसके अलावा Growler इलेक्ट्रॉनिक विमान और विध्वंसक युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद हैं. जो ईरान पर कभी भी हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं.     अमेरिका ने डेमो ऑफ फोर्स यानी ताकत दिखाने के लिए तैयारी पूरी कर ली है, वहीं ईरान ने जवाबी चेतावनियों, युद्ध-तैयारी, समुद्री और तट सुरक्षा बढ़ाई है. अमेरिका के जमावड़े पर क्या है ईरान का रिएक्शन? ईरान ने अमेरिका की चेतावनियों का कड़ा जवाब दिया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी तरह का हमला क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाएगा. ईरान ने चेताया कि किसी भी सैन्य प्रयास का जवाब पहले से भी ज्यादा दर्दनाक और निर्णायक होगा. तेहरान के एक केंद्रीय चौक में एक विशाल पोस्टर भी दिखाई दिया, जिसमें दिखाई गया- ‘आप हवा बोओगे, तूफान काटोगे’, जिसका सीधा संकेत अमेरिकी कैरियर ग्रुप को है. ईरान-अमेरिका के बीच क्यों बढ़ा तनाव? वैसे तो परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर ईरान-अमेरिका में पहले से ही असहमति है, लेकिन ट्रंप ने इस कार्यकाल में ईरान पर परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए दबाव डाला है. पिछले दिनों ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिसमें प्रदर्शनकारियों की मौत पर दुनिया भर में ईरान की आलोचना हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को मारता रहा, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में हजारों लोगों की मौत हुई है. प्रदर्शन तो फिलहाल शांत है लेकिन अमेरिका का सैन्य जमावड़ा क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है.

अजित पवार के निधन की खबरों पर सस्पेंस, बारामती विमान हादसे से जुड़ा बताया जा रहा मामला

  नई दिल्ली महाराष्ट्र के बारामती में हुए भीषण विमान हादसे में राज्य के डिप्टी सीएम और एनसीपी नेता अजित पवार का निधन हो गया. यह हादसा उस वक्त हुआ, जब उनका चार्टर्ड विमान बारामती में लैंडिंग की कोशिश कर रहा था. DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) ने पुष्टि की है कि विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई है और कोई भी जीवित नहीं बचा. इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को फोन कर हालात की जानकारी ली. हादसे की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर बात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. महाराष्ट्र सरकार की ओर से बताया गया कि पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों ने मुख्यमंत्री से संपर्क कर हादसे पर दुख जताया. प्रधानमंत्री मोदी ने अजित पवार के निधन पर गहरा शोक जाहिर किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अजित पवार जननेता थे और उनका लोगों से गहरा जुड़ाव था. वह महाराष्ट्र के लोगों की सेवा में हमेशा आगे रहने वाले मेहनती नेता के रूप में जाने जाते थे. प्रशासनिक मामलों की उनकी समझ और गरीब व वंचित वर्ग को सशक्त करने का उनका जज़्बा सराहनीय था. उनका असमय निधन बेहद चौंकाने वाला और दुखद है. उनके परिवार और असंख्य समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं. ओम शांति. इस बीच, शरद पवार परिवार में भी शोक का माहौल है. जानकारी के मुताबिक, सुप्रिया सुले, अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हो रहे हैं. तीनों शरद पवार के आवास पर एक साथ मौजूद थे. अजित पवार के निधन पर नेताओं ने जताया शोक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन पर दुख जताया. राष्ट्रपति ने एक पोस्ट में कहा, "महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार समेत कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है. अजित पवार का असामयिक निधन एक अपूरणीय क्षति है. उन्हें महाराष्ट्र के विकास में, विशेषकर सहकारी क्षेत्र में, विशेष योगदान के लिए सदैव याद रखा जाएगा. मैं उनके परिवार, समर्थकों एवं प्रशंसकों के प्रति गहन शोक-संवेदना व्यक्त करती हूं. ईश्वर इस दुर्घटना में मारे गए अन्य सभी लोगों के परिवारों को भी इस आघात को सहन करने की शक्ति प्रदान करें."     महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री, श्री अजित पवार समेत कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। अजित पवार जी का असामयिक निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्हें महाराष्ट्र के विकास में, विशेषकर सहकारी क्षेत्र में, विशेष योगदान के लिए सदैव…      राजनीतिक जगत से लगातार शोक संदेश आ रहे हैं. शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने कहा, "बारामती के विकास में अजित पवार की बड़ी भूमिका रही. पूरे पवार परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं." कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने भी उनके निधन को महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बड़ा नुकसान बताया. शिवसेना (UBT) MP अरविंद सावंत ने कहा, "मैंने हमेशा वही किया जो उन्होंने (अजित पवार) कहा" वह एक हिम्मत वाले आदमी थे. बारामती इलाके के विकास में उनका बड़ा रोल था. मैं पूरे पवार परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं जाहिर करता हूं." सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, "महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का विमान दुर्घटना में निधन, अत्यंत दुःखद ! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं. भावभीनी श्रद्धांजलि."     महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम श्री अजीत पवार जी का विमान दुर्घटना में निधन, अत्यंत दुःखद !     ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।     शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने एक्स पोस्ट में कहा, "अजीत पवार साहब की विमान दुर्घटना में मौत की ख़बर बेहद अफ़सोसनाक है. ख़ुदा उनके परिवार को इस दुख की घड़ी में सब्र अता करे, भारत सरकार दुर्घटना की गहन जॉंच करवाये ताकि दुर्घटना के कारणों का पता चल सके." पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा, "महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत की खबर से गहरा सदमा लगा है. यह एक बेहद दुखद घटना है. शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं." डीएमके सांसद टी शिवा ने कहा, "यह बहुत दुखद है. मेरे पास अपने शोक को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं. वह एक बेहद ऊर्जावान नेता थे." केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इसे "बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर" बताया. वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "यह देश के लिए अपूरणीय क्षति है." केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "यह सच में एक बुरी घटना है…खबरें आ रही हैं कि अजित पवार भी विमान में थे. अगर यह सच है, तो यह बहुत बुरा दिन है…यह दिल दहला देने वाली घटना है. भगवान पीड़ित परिवारों को हिम्मत दे…वह सिर्फ़ महाराष्ट्र के डिप्टी CM ही नहीं, बल्कि देश के जाने-माने नेता भी थे. यह एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती." DGCA के मुताबिक, "विमान में कुल 5 लोग सवार थे, जिनमें 3 यात्री और 2 क्रू मेंबर शामिल थे. यात्रियों में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार, उनके एक पीएसओ और एक अटेंडेंट मौजूद थे. वहीं क्रू में पायलट-इन-कमांड (PIC) और फर्स्ट ऑफिसर (FO) शामिल थे."

अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत, बारामती में शोक की लहर, रोते-बिलखते पहुंचे समर्थक

 बारामती महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का बुधवार को एक विमान क्रैश में निधन हो गया. यह हादसा उनके गृह जिले बारामती में हुआ. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक विमान में सवाल सभी छह लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि बारामती में लैंडिंग के वक्त यह हादसा हुआ. अजीत पवार बारामती से ही विधायक हैं. यह पूरा इलाका पवार परिवार का गढ़ कहा जाता है. हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया. आसमान में धुंए के गुब्बारे देखे गए. शुरू में कहा गया कि इस क्रैश में अजीत पवार गंभीर रूप से जख्मी हुए. उनको बारामती के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. लेकिन थोड़ी देर बार उनको मृत बता दिया गया. विमान में अजीत पवार अपने सहयोगियों के साथ मौजूद थे. इस हादसे में पायलट की भी मौत हो गई है. यह विमान सुबह 8 से 9 बजे के बीच मुंबई से उड़ान भरा था. यह एक चार्टर प्लेन था. डॉक्टरों की एक टीम उनका इलाज कर रही थी लेकिन उनको नहीं बचाया जा सका. हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया. अजीत पवार बारामती में आज कई कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले थे. बारामती की सांसद और उनकी बहन सुप्रिया सुले बारामती के लिए रवाना हो गई हैं. दिल्ली से पवार परिवार बारामती के लिए रवाना हो रहे हैं. उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद हादसा रिपोर्ट के बाद मुंबई से उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद यह हादसा हुआ. यह एक प्राइवेट जेट था. हादसे के बाद पूरे बारामती में शोक की लहर है. अजीत पवार कई बार राज्य के डिप्टी सीएम रहे थे. राज्य की राजनीति में वह एक बहुत बड़े कद के नेता थे. मौजूदा वक्त में उनके कद का बहुत कम सक्रिय नेता हैं. पवार परिवार में शोक की लहर अजीत पवार इस वक्त एनसीपी के प्रमुख थे. उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से राजनीति के गुर सीखे थे. लेकिन करीब तीन साल पहले अजीत पवार और शरद पवार के रास्ते अलग-अलग हो गए थे. एनसीपी दोफाड़ हो गई और मूल एनसीपी पर उनका कब्जा हो गया. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं. उनकी चचेरी बहन सप्रिया सुले बारामती से सांसद हैं. वह एनसीपी-शरद गुट की नेता है. महाराष्ट्र की राजनीति खासकर मराठा राजनीति पर पवार परिवार का गहरा प्रभाव है. पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर महाराष्ट्र में अजीत पवार को दादा कहा जाता था. महाराष्ट्र की राजनीति में वह एक अपने चाचा की तरह ही सभी दलों के प्रिय नेता थे. सभी दलों में उनके दोस्त हैं. हर कोई उनके निधन पर शोक जता रहा है. बीते विधानसभा में चुनाव में अपने दम पर अपनी पार्टी को खड़ा कर साबित कर दिया था कि वह राजनीति के माहिल खिलाड़ी हैं. एनसीपी संगठन पर पकड़ अजीत पवार एनसीपी संगठन के नेता था. शरद पवार के उत्तराधिकारी के तौर पर अजीत पवार के साथ उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले दावेदार थीं. लेकिन, शरद पवार ने एनसीपी के अध्यक्ष के तौर पर सुप्रिया सुले के हाथ में कमान दे दी. इसके बाद करीब तीन साल पहले एनसीपी दोफाड़ हो गया. अजीत पवार गुट ने राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हो गया. वह देवेंद्र फडणवीस सरकार में डिप्टी सीएम बने. पीएम मोदी ने ली हादसे की जानकारी हादसे के बाद पीएम नरेंद्र ने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से बात की है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस हादसे की जानकारी ली है. पीएम ने इस बारे में सीएम से बातचीत की है.

श्रीनगर में सैलानियों का सैलाब, सुहावने मौसम ने खींचा पर्यटकों को

जम्मू, जम्मू-कश्मीर में मंगलवार सुबह से बर्फबारी तेज हो गई है। साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में कुछ जगहों पर तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और बर्फबारी की संभावना है। ट्रैफिक विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “नवयुग टनल के अंदर और आसपास ताजा बर्फबारी के कारण जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (एनएच-44) बंद है। जम्मू से श्रीनगर और इसके विपरीत किसी भी गाड़ी को जाने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा, मुगल रोड, एसएसजी रोड और सिंथन रोड पहले से ही बंद हैं।” लोगों को सलाह दी गई है कि जब तक ये सड़कें पूरी तरह से ठीक नहीं हो जातीं और ट्रैफिक के लिए सुरक्षित घोषित नहीं हो जातीं, तब तक इन सड़कों पर यात्रा न करें। सर्दियों की तेज ठंड का 40 दिन का समय, जिसे स्थानीय रूप से ‘चिल्लई कलां’ कहा जाता है, 21 दिसंबर को शुरू हुआ था और 30 जनवरी को खत्म होगा। चिल्लई कलां के आखिर में हुई बर्फबारी ने कश्मीरियों की आने वाले महीनों में पानी के स्रोतों के बने रहने की चिंताओं को दूर कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में एक पर्यटक ने कहा, “कश्मीर में आकर बहुत अच्छा लग रहा है और बर्फ गिर रही है। लोगों को जरूर यहां आना चाहिए और इस जगह को देखना चाहिए। बर्फबारी की वजह से मौसम बहुत अच्छा हो गया है। हम अपने परिवार के साथ घूमने आए हैं, लेकिन कई रास्ते बंद होने की वजह से हम लोगों को परेशानी भी हो रही है।” एक और पर्यटक ने कहा, “बहुत समय बाद फिर से बर्फबारी हो रही है। यह हमारे लिए बहुत खुशी का पल है, हम इसी के लिए यहां आए थे, ट्रैफिक पुलिस हमारी बहुत सहायता कर रही है। लोगों को परेशानी न हो इसका विशेष ध्यान दिया जा रहा है।” एक पर्यटक ने कहा, “मैंने कश्मीर के बारे में बहुत कुछ सुना था और इसे देखा भी था। यह जगह सच में जन्नत है। कल तक बर्फ नहीं थी, और मुझे लगा कि मेरी किस्मत खराब है। लेकिन आज सुबह मैंने हर जगह भारी बर्फबारी देखी, सब कुछ बर्फ से ढक गया है। सच में, कश्मीर जन्नत है।”  

आज से संसद का बजट सत्र शुरू, मनरेगा–SIR पर घमासान तय, विपक्ष ने बैठक में बनाई सरकार घेरने की रणनीति

नई दिल्ली संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है, जिसके हंगामादार होने के आसार हैं। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने मंगलवार को कहा कि मनरेगा, मोदी सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट, वायु प्रदूषण और जनहित के कई अन्य विषयों को उठाया जाएगा। बताया जा रहा है कि विपक्ष SIR पर और चर्चा चाहता है। सरकार की ओर से आज बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में बजट सत्र को लेकर चर्चा की गई, हालांकि कांग्रेस ने इसे लेकर विरोध दर्ज कराया कि सरकार ने कोई विधायी एजेंडा सामने नहीं रखा है।   सरकार का कहना है कि एजेंडा बाद में दिया जाएगा, क्योंकि सत्र का पहला भाग राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए जाने वाले धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा और केंद्रीय बजट पर चर्चा पर केंद्रित होगा। राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार संविधान से मिले अधिकारों को खत्म कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष विदेश नीति का विषय भी उठाएगा। हमारी विदेश नीति कहां पहुंच गई? कोई हमारे साथ खड़ा नहीं है। हमें यह भी नहीं पता चल रहा कि किसके साथ चलें, कौन हमारे साथ चलेगा।’’ प्रमोद तिवारी का कहना था कि सरकार की आर्थिक नीति की बात करें तो रुपया सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका की ओर से लगातार टैरिफ जारी है और रूसी तेल (की खरीद) का मुद्दा भी है। दिल्ली और दूसरी जगहों पर हमने वायु प्रदूषण का जो सबसे भयानक रूप देखा है, उसे देखते हुए हम यह मुद्दा भी उठाएंगे… हम इंदौर में दूषित पानी से होने वाली मौतों का मुद्दा भी उठाएंगे।’’ सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस नेता ने क्या कहा कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा का मुद्दा भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस योजना की जगह नया कानून लाकर न केवल इसके नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है, बल्कि ‘ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार खत्म किया जा रहा है।’ उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली, वोट चोरी और बेरोजगारी के मुद्दों को भी इस सत्र के दौरान उठाया जाएगा। कांग्रेस सांसद कोडिकुनिल सुरेश ने कहा कि विपक्ष की मांग है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बहाल किया जाए। तेलुगू देसम पार्टी (तेदेपा) के सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायालू ने कहा कि भारत जिन अलग-अलग मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर कर रहा है, उन पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने हैदराबाद की तर्ज पर अमरावती को "कानूनी दर्जा" देने की भी मांग की। बीजू जनता दल के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी ओडिशा में किसानों की परेशानी और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का विषय उठाएगी।  

टोल प्लाजा पर अब नहीं होगी देरी! FASTag को लेकर 1 फरवरी से बदलने जा रहा बड़ा सिस्टम

नई दिल्ली भारत में FASTag सिस्टम को और सरल बनाने की दिशा में National Highways Authority of India (NHAI) ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऐलान किया है कि 1 फरवरी 2026 से कार, जीप और वैन के लिए जारी किए जाने वाले नए FASTag पर Know Your Vehicle (KYV) वेरिफिकेशन प्रोसेस लागू नहीं होगी। इस बदलाव का मकसद FASTag जारी होने और उसके इस्तेमाल के दौरान होने वाली देरी, बार-बार दस्तावेज मांगने की परेशानी और यूजर्स की शिकायतों को कम करना है। अब तक FASTag जारी होने के बाद वाहन की पुष्टि के लिए KYV जरूरी होता था। इस प्रक्रिया में कई बार वैध दस्तावेज होने के बावजूद वाहन चालकों को बार-बार RC अपलोड करनी पड़ती थी, फोटो भेजने पड़ते थे और टैग को दोबारा वेरिफाई कराने की जरूरत पड़ती थी। इससे FASTag एक्टिवेशन में देरी होती थी और यूजर्स को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। नए नियमों के तहत NHAI ने यह जिम्मेदारी पूरी तरह बैंकों को सौंप दी है। अब बैंक FASTag जारी करने से पहले ही वाहन से जुड़ी सभी जानकारियों की जांच करेंगे। वाहन का सत्यापन VAHAN डेटाबेस के जरिए किया जाएगा और अगर वहां जानकारी उपलब्ध नहीं होती है, तो Registration Certificate (RC) के आधार पर जांच पूरी की जाएगी। इसका मतलब यह है कि टैग एक्टिव होने के बाद अलग से किसी KYV प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ेगी। KYV क्या था और इसे क्यों हटाया गया? Know Your Vehicle (KYV) FASTag सिस्टम का एक अतिरिक्त वेरिफिकेशन चरण था, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाता था कि टैग सही वाहन से जुड़ा है और किसी गलत या डुप्लीकेट टैग का इस्तेमाल नहीं हो रहा। हालांकि, व्यवहार में यह प्रक्रिया अक्सर देरी और तकनीकी दिक्कतों की वजह बन रही थी, जिस कारण NHAI ने इसे हटाने का फैसला लिया। नए नियमों में क्या बदला है? 1 फरवरी 2026 के बाद नए कार FASTag पर KYV अनिवार्य नहीं होगा। सभी जरूरी जांच टैग जारी करने से पहले ही पूरी कर ली जाएगी। पहले से जारी FASTag धारकों को भी अब नियमित तौर पर KYV कराने की जरूरत नहीं होगी। केवल उन्हीं मामलों में दोबारा जांच होगी, जहां कोई विशेष शिकायत सामने आए, जैसे टैग का गलत वाहन से जुड़ना, दुरुपयोग, ढीला टैग या गलत तरीके से जारी किया गया FASTag। आम वाहन चालकों को क्या फायदा होगा? नए नियमों से FASTag खरीदने और इस्तेमाल करने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएगी। अब टैग लेते ही उसे सीधे इस्तेमाल किया जा सकेगा। बार-बार दस्तावेज अपलोड करने या बैंक और कस्टमर केयर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिर्फ शिकायत आधारित मामलों में ही अतिरिक्त जांच की जाएगी, जिससे अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।  

धार्मिक विवाद: गंगोत्री में गैर हिंदुओं पर प्रतिबंध, इमाम ने दी ठोस वजह

देहरादून उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की तैयारी है। बद्रीनाथ, केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी हितधारकों के साथ इस पर सहमति बना ली है। जल्द ही बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा। गंगोत्री मंदिर समिति ने निर्णय कर लिया है। हालांकि सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत जारी रहेगा। इस घटनाक्रम पर मुस्लिम उलेमा की अलग-अलग राय सामने आई है। मुस्लिमों का वहां कोई काम नहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि यह धर्म और आस्था का विषय है। यदि मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू अंदर नहीं आ सकते हैं तो इस फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हर जगह के अपने नियम होते हैं। वैसे भी मुस्लिमों का गंगोत्री में कोई काम नहीं है। ऐसे में यदि कोई मुस्लिम वहां जाता है तो इससे टकराव होगा। मक्का और मदीना में भी तो ऐसे ही नियम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने आगे कहा कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। खासकर जिन जगहों पर हिन्दुओं की आस्था और सनातन का विषय है तो वहां से मुसलमानों को बचना बेहतर है। हमारे यहां मक्का और मदीना में भी गैर-मुसलमानों के प्रवेश की इजाजत नहीं है। यह वहां का नियम है। इस पर भी तो किसी को आपत्ति नहीं है। पवित्र जगहों के अपने नियम कायदे डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने तिरुपति बाला जी मंदिर में भी यही नियम हैं। इसी तरह अन्य धर्म स्थल हैं जहां गैर समुदाय के लोगों के जाने की मनाही है। सभी पवित्र जगहों के अपने नियम कायदे हैं। यह आस्था का विषय है। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस पर कोई राजनीति भी नहीं की जानी चाहिए। सभी को दूसरे धर्मों के पवित्र स्थलों के नियम कायदों का पालन करना चाहिए। गैर हिंदुओं का प्रवेश रोकने का फैसला बता दें कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित हो जाएगा। इस मुद्दे पर बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति ने आम सहमति बना ली है। प्रस्ताव अब बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। वहीं गंगोत्री मंदिर समिति ने पूरी तरह निर्णय कर लिया है। यमुनोत्री मंदिर समिति का फैसला अभी नहीं आया है। वहीं हरिद्वार में हर की पौड़ी का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा ने भी गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित किए जाने की मांग की है। सियासत गर्म, कांग्रेस ने किया विरोध, भड़के इमरान मसूद इस प्रकरण पर सियासत गर्म है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि मंदिर समितियों की बात सुनने के बाद उक्त मुद्दे पर फैसला लेगी। वहीं फैसले का कांग्रेस नेता विरोध कर रहे हैं। उत्तराखंड कांग्रेस ने कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार जनसमस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार के काम कर रही है। वहीं कांग्रेस के स्थानीय सांसद इमरान मसूद ने कहा कि गंगोत्री धाम हिंदुओं का पवित्र स्थल है वहां पहले से कोई मुसलमान नहीं जाता है लेकिन पहचान साबित करने जैसी शर्तें लगाकर समाज में जहर धोला जा रहा है।

ममता बनर्जी दे रही BJP को जवाब, अखिलेश का डबल स्ट्राइक; कांग्रेस की चिंता बढ़ी

कोलकाता उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार (27 जनवरी) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि इस देश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हमलों का मुकाबला सिर्फ ‘दीदी’ ही कर सकती हैं। अपनी पत्नी और लोकसभा सांसद डिंपल यादव के साथ अखिलेश यादव कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ पहुंचे, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी से लगभग 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की।   बैठक के बाद ममता बनर्जी के साथ मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ममता बनर्जी ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ भाजपा की नीतियों और राजनीतिक दबावों का सामना किया है, वह पूरे देश के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा, “सिर्फ दीदी ही हैं जो भाजपा के हर राजनीतिक हमले का मजबूती से जवाब दे सकती हैं।” उन्होंने कहा, “भाजपा वाले हमारे देश के सेकुलरिज्म से खिलवाड़ कर रहे हैं और वह भी इलेक्शन कमीशन से मिलकर। यहां तो हो ही रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश में इससे ज्यादा वोट काटने का काम कर रहे हैं।” NRC और वोटर लिस्ट संशोधन पर आरोप अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में हुए मतदाता सूची संशोधन के दौरान करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए, जिससे आम लोगों को परेशान किया गया।अखिलेश ने कहा, “मतदाता सूची के बहाने लोगों को डराने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।” लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में समर्थन समाजवादी पार्टी प्रमुख ने साफ कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में ममता बनर्जी को पूरा समर्थन देगी। उन्होंने कहा, “हम ममता बनर्जी के साथ हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर सहयोग करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की यह मुलाकात विपक्षी दलों के बीच बढ़ती नजदीकियों और आगामी चुनावों से पहले संभावित रणनीतिक तालमेल का संकेत मानी जा रही है। हालांकि, बैठक में किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई, लेकिन दोनों नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि भाजपा के खिलाफ साझा मोर्चे की जमीन तैयार की जा रही है। कांग्रेस पर भी निशाना और संदेश अखिलेश का यह बयान तब आया है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस TMC के खिलाफ ताल ठोक रही है। राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि अखिलेश ने कोलकाता से कांग्रेस को भी बड़ा संदेश दिया है। यानी उन्होंने एक बयान से दो दलों को साधने की कोशिश की है। पहले तो ममता और टीएमसी का साथ देने और उसे अपना समर्थन दिया है, वहीं दूसरी ओर अखिलेश ने कांग्रेस को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर और उन्हें तवज्जो देकर ही चुनावी राजनीति में आगे कदम बढ़ाए। चूंकि अगले साल यूपी में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए ऐसे बयान से अखिलेश ने कांग्रेस को संदेश कम टेंशन ज्यादा देने की कोशिश की है।  

UGC Equity नियमों की सिफारिश किस समिति ने की? दिग्विजय सिंह की कमेटी और उसके 29 सांसद सदस्य

नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसके मुताबिक सभी यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थानों के अंदर एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी उस संस्थान के अंदर SC/ST या OBC कैटगरी के छात्रों, शिक्षकों या गैर शिक्षण कर्मियों के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनेंगी और तय समय-सीमा में उसका निपटारा करेगी। देश भर का सवर्ण समाज UGC के इस नियम का विरोध कर रहा है। बड़ी बात यह है कि जिस संसदीय समिति की सिफारिश पर UGC ने यह कानून बनाया है, उसके अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह है। उनके साथ इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं जो संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं। इनमें कई भाजपा के सांसद हैं और सवर्ण समाज से आते हैं।   दरअसल, यह सिफारिश शिक्षा, महि्ला, बच्चों, युवा और खेल पर संसद की स्थाई समिति ने की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति में 21 लोकसभा और 9 राज्यसभा के सांसद हैं। कुछ नाम तो चौंकाने वाले हैं। दलगत संख्या और प्रतिनिधित्व की बात करें तो इस समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं। इसे यूं कहें तो इस समिति में सत्ताधारी भाजपा के सदस्यों की संख्या 50 फीसदी से अधिक है। समिति के सदस्यों में कौन-कौन? संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध नामों के मुताबिक इस समिति में राज्यसभा से दिग्विजय सिंह के अलावा भीम सिंह (भाजपा नेता, बिहार से राज्यसभा के सांसद) बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM नेता और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद), घनश्याम तिवाड़ी(भाजपा नेता, राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद), रेखा शर्मा (भाजपा नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष), सी. सदानंदन मास्टर (केरल भाजपा के उपाध्यक्ष और केरल से राज्यसभा सांसद), सिकंदर कुमार (भाजपा नेता, हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद), सुनेत्रा पवार (एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद) और स्वाती मालीवाल (AAP की पूर्व नेता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद) हैं। लोकसभा से 21 चेहरे कौन-कौन? इस समिति में लोकसभा सांसदों में कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज अभिजित गंगोपाध्याय (भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल से सांसद), पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद और भाजपा के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता, प्रवक्ता और ओडिशा की पुरी सीट से सांसद संबित पात्रा भी हैं। इनके अलावा बांसुरी स्वराज (भाजपा नेता और नई दिल्ली सीट से सांसदष, अमर शरदराव काले (एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता), अंगोमचा बिमोल अकोईजाम (कांग्रेस पार्टी के नेता और मणिपुर से सांसद), बृजमोहन अग्रवाल (छत्तीसगढ़ से भाजपा के नेता और रायपुर लोकसभा सीट से सांसद), दग्गुबाती पूरनदेश्वरी(आंध्र प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता और राजमुंद्र सीट से सांसद) दर्शन सिंह चौधरी (भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की होशंगाबाद सीट से सांसद) के नाम भी शामिल हैं।   अन्य चेहरों का हाल इनके अलावा अन्य सांसदों में डीएन कुरियाकोसे(कांग्रेस नेता और केरल की इडुक्की सीट से सांसद) वर्षा एकनाथ गायकवाड़ (कांग्रेस नेता और मुंबई की उत्तर-मध्य सीट से सांसद), हेमांग जोशी (भाजपा नेता और गुजरात की वडोदरा सीट से सांसद), जितेंद्र कुमार दोहरे (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की इटावा सीट से सांसद), जियाउर्रहमान बर्क (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की संभल सीट से सांसद), राजीव राय( समाजवादी पार्टी के नेता, यूपी की घोसी सीट से सांसद), कालिपाड़ा सरेन खेरवाल (तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की झारग्राम सीट से सांसद), कामाख्या प्रसाद तासा (भाजपा नेता और असम की काजीरंगा सीट से सांसद), करण भूषण सिंह (भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से सांसद), रचना बनर्जी (TMC नेता और पूर्व अभिनेत्री, पश्चिम बंगाल की हुगली सीट से सांसद), शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया (भाजपा नेता, गुजरात की साबरकांठा सीट से सांसद) और थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि. (तमिलनाडु में डीएमके नेता और चेन्नई दक्षिण सीट से सांसद) के नाम शामिल हैं।  

प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़: एंटोनियो कोस्टा हैं पुर्तगाल में गांधी, बोले- मुझे गर्व है प्रवासी भारतीय होने पर

नई दिल्ली भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों में एक नए ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो गई है। इस मौके पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच न केवल कूटनीतिक बल्कि व्यक्तिगत और भावनात्मक रिश्ते भी देखने को मिले। इस मौके पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद थीं।   'भारत से मेरा रिश्ता व्यक्तिगत है': एंटोनियो कोस्टा समझौते की घोषणा के दौरान, यूरोपीय नेता एंटोनियो कोस्टा ने अपनी भारतीय जड़ों को याद करते हुए एक भावुक बयान दिया। उन्होंने गर्व से कहा- 'मैं यूरोपियन काउंसिल का प्रेसिडेंट हूं, लेकिन मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं। तो, जैसा कि आप सोच सकते हैं, मेरे लिए इसका एक खास मतलब है।' कोस्टा ने अपने गोवा कनेक्शन का जिक्र करते हुए कहा- 'मुझे अपनी जड़ों पर गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आता है। इसलिए, यूरोप और भारत के बीच का कनेक्शन मेरे लिए बहुत पर्सनल है।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनने को अपना सौभाग्य मानते हैं। कोस्टा ने कहा, 'इस खास मौके पर हमारा स्वागत करने के लिए प्यारे प्रधानमंत्री मोदी, आपका धन्यवाद। कल गणतंत्र दिवस समारोह में आपके मुख्य अतिथि बनकर हम सम्मानित महसूस कर रहे थे। भारत की क्षमताओं और विविधता का यह बहुत प्रभावशाली प्रदर्शन था। आज एक ऐतिहासिक क्षण है। हम व्यापार, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों में अपने रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।' पीएम मोदी ने बताया 'पुर्तगाल का गांधी' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंटोनियो कोस्टा का गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके विचारों और सादगी की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें 'पुर्तगाल का गांधी' कहकर संबोधित किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- मुझे अपने दो करीबी दोस्तों, प्रेसिडेंट कोस्टा और प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन का इस अभूतपूर्व भारत की यात्रा में स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। कोस्टा जी अपनी सलर जीवनशैली और समाज के प्रति प्यार के आधार पर 'लिस्बन के गांधी' के नाम से जाने जाते हैं। प्रेसिडेंट उर्सुला जर्मनी की पहली रक्षा मंत्री ही नहीं, यूरोपीय यूनियन कमीशन की भी पहली महिला अध्यक्ष बनकर पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा हैं।' कौन हैं एंटोनियो कोस्टा? एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री (2015-2023) और एक वरिष्ठ यूरोपीय नेता हैं। वर्तमान में वे यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। कोस्टा का जन्म 1961 में लिस्बन में हुआ था, लेकिन उनका खून भारतीय है। उनके पिता, ओरलैंडो द कोस्टा गोवा के एक प्रसिद्ध लेखक और कवि थे। गोवा में उनके पिता के परिवार के लोग उन्हें प्यार से 'बाबुश' बुलाते हैं, जिसका कोंकणी में अर्थ होता है- छोटा बच्चा या प्यारा लड़का। वे उन गिने-चुने पश्चिमी नेताओं में से हैं जिनके पास OCI कार्ड है। उन्हें 'लिस्बन का गांधी' क्यों कहा जाता है? उन्हें यह उपाधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में उनकी भारत यात्रा के दौरान दी थी, लेकिन इसके पीछे की वजह उनके लिस्बन के मेयर रहने के दौरान किए गए काम और उनकी जीवनशैली है। गांधीजी की तरह ही कोस्टा को अपनी सादगी के लिए जाना जाता है। जब पुर्तगाल आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब मेयर रहते हुए उन्होंने फिजूलखर्ची कम करने और बहुत ही साधारण जीवन जीने की मिसाल पेश की थी। उन्होंने सरकारी तामझाम से दूर रहकर जनता के बीच काम करना पसंद किया। 'इतेंदेंते' का कायाकल्प – यह सबसे बड़ा कारण है। लिस्बन में 'इतेंदेंते' नाम का एक इलाका था, जो ड्रग्स, वेश्यावृत्ति और अपराध के लिए बदनाम था। लोग वहां जाने से डरते थे। कोस्टा ने वहां पुलिस भेजने के बजाय एक गांधीवादी कदम उठाया। उन्होंने अपना मेयर कार्यालय ही उस बदनाम इलाके में शिफ्ट कर दिया। उनका मानना था कि अगर प्रशासन वहां बैठेगा, तो सुधार अपने आप होगा। यह कदम सफल रहा और वह इलाका लिस्बन का एक सुरक्षित और जीवंत पर्यटन केंद्र बन गया। इस 'हृदय परिवर्तन' वाली नीति ने उन्हें 'गांधी' की छवि दी। उनकी राजनीति को आक्रामक नहीं, बल्कि धैर्यवान और सबको साथ लेकर चलने वाला माना जाता है। यूक्रेन संकट पर पीएम मोदी से मांगी मदद यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने कहा- हमारी समिट में, हमने यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए प्रयासों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह से सम्मान करती है। यह एक महत्वपूर्ण क्षण है। हम न्यायपूर्ण और स्थायी शांति तक पहुंचने के सभी प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। यूक्रेन ने मुश्किल समझौते की कीमत पर भी अपनी तत्परता दिखाई है। मुझे पता है, प्रिय प्रधानमंत्री कि हम बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांति के लिए स्थितियां बनाने में आपकी मदद पर भरोसा कर सकते हैं…