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भूकंप से थर्राया नेपाल, तेज झटकों ने उड़ा दी लोगों की नींद

नेपाल  नेपाल के सुदूरपश्चिम (Sudurpashchim) प्रांत में रविवार सुबह हल्के से मध्यम तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र के अनुसार झटके सुबह 8:28 बजे महसूस किए गए और इसकी तीव्रता 4.6 रिक्टर स्केल मापी गई।भूकंप का केंद्र दार्चुला जिले के घुसा क्षेत्र में स्थित था, जो पहाड़ी इलाकों में आता है और जहां सामान्यतः भूकंपीय गतिविधि अधिक दर्ज की जाती है। आसपास के जिलों बझांग, बैतड़ी और डोटी में भी झटके महसूस किए गए, लेकिन किसी भी तरह के नुकसान या हताहत की जानकारी नहीं मिली है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि भूकंप अल्प अवधि का था और लोगों में घबराहट की स्थिति नहीं बनी। नेपाल का पश्चिमी हिस्सा भूकंप संवेदनशील माना जाता है।इसी प्रांत में पिछले महीने 30 नवंबर को 4.4 तीव्रता का भूकंप सैपाल पर्वतीय क्षेत्र (बझांग जिला) में दर्ज हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र भारतीय टेक्टोनिक प्लेट की निरंतर गतिशीलता के कारण ‘हाई सीस्मिक जोन’ में आता है, इसलिए हल्के झटके अक्सर महसूस किए जाते हैं। 

भारत का गौरव बढ़ा ऑस्ट्रेलिया में, कर्नल प्रतीक रॉय को मिला सबसे बड़ा सैन्य पुरस्कार

नई दिल्ली  भारतीय सेना के कर्नल प्रतीक रॉय को ऑस्ट्रेलियन डिफेंस कॉलेज में डिफेंस स्ट्रैटेजिक एंड स्टडीज़ कोर्स पूरा करने पर प्रतिष्ठित Geddes Gavel Award से सम्मानित किया गया है। ऑस्ट्रेलिया स्थित भारतीय उच्चायोग ने शनिवार को यह जानकारी साझा की। यह पुरस्कार उस अधिकारी को दिया जाता है, जो क्षेत्रीय संबंधों, निर्णय प्रक्रिया, तथा राजनीतिक, कूटनीतिक, सैन्य, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं की सबसे गहरी समझ प्रदर्शित करता है। भारतीय उच्चायोग ने X पर लिखा,“भारतीय सेना के कर्नल प्रतीक रॉय को Australian Defence College में Defence Strategic and Studies Course पूरा करने पर Commander Australian Defence College Award / Geddes Gavel Award मिलने पर बधाई। यह पुरस्कार उत्कृष्ट सामरिक ज्ञान और क्षेत्रीय समझ के आधार पर दिया जाता है।”भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंध हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं।   नवंबर में, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत रक्षा, व्यापार, विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बैठकें की थीं।अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई अहम रक्षा समझौते भी किए। ऑस्ट्रेलियाई उप-प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने इसे दोनों देशों की सेनाओं के बीच “गहरी सामरिक समझ और भरोसे” को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।  

गुजरात को मिला नया तोहफा: अमित शाह ने पीएमएवाई के ईडब्ल्यूएस आवासों का शुभारंभ किया

गांधीनगर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को अहमदाबाद में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत बने 800 से ज्यादा नए ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) घरों का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने गरीबों को मुफ्त घर देने के मोदी सरकार के वादे को दोहराया, ताकि सभी को सम्मानजनक और इज्जतदार जिंदगी मिल सके। गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अहमदाबाद के थलतेज वार्ड में बने 861 नए ईडब्ल्यूएस घरों के उद्घाटन की तस्वीरें भी शेयर कीं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मोदी सरकार गरीबों को मुफ्त आवास देकर उन्हें गौरवपूर्ण जीवन देने का काम कर रही है। इसी दिशा में आज अहमदाबाद के थलतेज वार्ड में पीएम आवास योजना के तहत बने 861 नवनिर्मित ईडब्ल्यूएस आवासों का उद्घाटन किया। अहमदाबाद नगर निगम द्वारा निर्मित ये अत्याधुनिक और सुविधा-संपन्न आवास क्षेत्रवासियों के सुगम और सुरक्षित भविष्य के मजबूत आधार बनेंगे।" इस मौके पर कुछ लाभार्थियों ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से ​​बात करते हुए अपनी खुशी साझा की। निखिलेश बेन ने कहा, "सरकार ने अच्छे घर और फ्लैट बनाए हैं। इससे हमें समाज में सम्मान मिला है। हमें घर गिफ्ट करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का दिल से शुक्रिया।" रंजीत ने केंद्र सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा, "हमें झुग्गी से बाहर निकाल दिया गया है। सरकार की कोशिशों की वजह से मुझे अपने सपनों का घर मिल गया है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरे घर पर पक्की छत होगी, लेकिन यह मुमकिन हो गया है। आंगनवाड़ी, आयुष्मान भवन और बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल जैसी सभी बेसिक सुविधाएं यहां मौजूद हैं।" लाभार्थी शंभू भाई ने कहा कि वह पहले एक झुग्गी में रहते थे, लेकिन अब उनके पास एक सुरक्षित और अच्छी सुविधाओं वाला घर है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम सच में तारीफ के काबिल है। घर के अंदर सभी सुविधाएं दी गई हैं, जिसके लिए हम बहुत शुक्रगुजार हैं।" नानाजी देसाई ने कहा कि लगभग 25 साल की कड़ी मेहनत के बाद, आखिरकार हमारे पास हमारे घर हैं। घर बहुत अच्छे से बने हैं। हम इसके लिए सरकार के शुक्रगुजार हैं।

कांगड़ा की धरती पर जनआक्रोश, कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने की हुंकार: डॉ. राजीव बिंदल

शिमला भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि 4 दिसंबर को धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम में विधानसभा के बाहर प्रदेश सरकार के तीन वर्षों के कुशासन के खिलाफ जो ऐतिहासिक और विशाल प्रदर्शन हुआ, उसने कांग्रेस सरकार और पूरी कांग्रेस पार्टी को झकझोर कर रख दिया है। यह प्रदर्शन उस स्वयंभू सरकार के खिलाफ जनाक्रोश का प्रतीक है, जिसके तीन साल पूरी तरह से व्यवस्था पतन के रहे हैं। डॉ. बिंदल ने कहा कि कांगड़ा की पवित्र धरती और धौलाधार की वादियों से हजारों की संख्या में उमड़े नर-नारियों ने एक स्वर में कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया है।  जिस उत्साह, जोश और दृढ़ संकल्प के साथ जनता प्रदर्शन में शामिल हुई, वह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आज समाज का हर वर्ग सरकार की जनविरोधी कार्यशैली के खिलाफ मजबूती से खड़ा हो चुका है। कांगड़ा से उठी यह जनआवाज अब पूरे हिमाचल प्रदेश में गूंजेगी। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की जनता के साथ धोखा किया है, अन्याय किया है और हर वर्ग को ठगा है। बेरोजगार युवाओं को रोजगार के नाम पर छलावा दिया गया, बहनों के साथ किए गए वादे पूरे नहीं किए गए, प्रदेश के अनेक संस्थानों को बंद किया गया और हिमाचल प्रदेश के विकास को पूरी तरह से बाधित कर दिया गया। अब प्रदेश की जनता पूरी एकजुटता के साथ इस निरंकुश सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है। डॉ. बिंदल ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक यह संकल्प ले कि कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी और जनता से किए गए हर अन्याय का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि धर्मशाला में यह संकल्प भी लिया गया कि प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था, लगातार हो रही गोलीकांड की घटनाओं और बढ़ते अपराध से हिमाचल को बाहर निकाला जाएगा। जिस प्रकार प्रदेश आज आतंक और असुरक्षा के माहौल में धकेला जा रहा है, उससे मुक्ति दिलाना भाजपा की प्राथमिकता है। डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश को बचाने का एक जनसंकल्प है, जो अब पूरे प्रदेश में निरंतर मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा।

मौत का सफर बना समुद्री सफर: ग्रीक तट के पास पलटी नाव, 17 प्रवासियों की जान गई

नई दिल्ली ग्रीक के क्रीट द्वीप से एक बार फिर से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। क्रीट द्वीप के पास शनिवार को प्रवासियों को ले जा रही एक नाव पलट गई, जिसमें कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई। हालांकि, नाव पर सवार दो लोग जिंदा थे और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। ग्रीक स्टेट ब्रॉडकास्टर ईआरटी के अनुसार सभी शव नाव के अंदर से मिले हैं। क्रेटन पोर्ट इरापेट्रा के मेयर, मनोलिस फ्रैंगोलिस ने कहा कि सभी लोग युवा थे। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी है कि नाव की हवा दो तरफ से निकल गई थी, जिससे यात्रियों को एक सीमित जगह में रहना पड़ा। ईआरटी ने बताया कि कोरोनर इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इन लोगों की मौत पानी की कमी/डिहाइड्रेशन की वजह से हुई। ग्रीक के अधिकारियों ने बताया कि यह नाव क्रीट के दक्षिण-पश्चिम में 26 नॉटिकल मील या 48 किलोमीटर दूर मिला। वहीं ग्रीक न्यूज एजेंसी एना के मुताबिक, एक तुर्किए कार्गो जहाज ने बहती हुई नाव को देखा और अधिकारियों को बताया। मामले की छानबीन के लिए दो कोस्टगार्ड जहाज और यूरोपीय सीमा तटरक्षक एजेंसी फ्रोंटेक्स का एक जहाज, एक फ्रोंटेक्स एयरक्राफ्ट और एक सुपर प्यूमा हेलीकॉप्टर उस इलाके में गए। कोस्टगार्ड ने कहा कि बचे हुए लोगों ने बताया कि खराब मौसम की वजह से नाव अस्थिर हो गई थी और उनके पास रहने की कोई जगह या खाना या पानी नहीं था। इससे पहले भी ग्रीक में ऐसी घटनाएं हुई हैं। हाल ही में ग्रीक के गावदोस द्वीप के पास एक प्रवासी नाव पलटने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, इस घटना में 56 लोगों को बचा लिया गया। ग्रीक के तटरक्षक बल ने बताया कि मंगलवार को खराब मौसम के बीच बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लापता लोगों को खोजा जा सके। सिन्हुआ ने सरकारी प्रसारक ईआरटी के हवाले से बताया कि जीवित बचे लोगों से यह नहीं पता चल पा रहा है कि नाव में कुल कितने लोग सवार थे। घटना की जांच में फ्रोंटेक्स ने यूनानी अधिकारियों की मदद की। गावदोस, क्रीट द्वीप के दक्षिण में स्थित है, और यह वह मार्ग है जिसका इस्तेमाल अक्सर उत्तर अफ्रीका से यूरोप पहुंचने की कोशिश करने वाले प्रवासी करते हैं। यह साल 2015 से यूनान में यूरोपीय संघ में प्रवेश करने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों का प्रमुख रास्ता रहा है। 10 लाख से ज्यादा लोगों ने, मुख्य रूप से तुर्किए से इसकी सीमाओं को पार किया था। पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों लोग भूमध्य सागर में यूरोप पहुंचने की कोशिश में डूबकर जान गंवा चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार अपील की है कि समुद्री बचाव को और मजबूत किया जाए और प्रवास के लिए सुरक्षित रास्ते बनाए जाएं। इस हादसे से एक दिन पहले यूनान के लेसवोस द्वीप के पास एक और प्रवासी नाव डूब गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और सात लोगों को बचाया गया। अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि नाव में कितने लोग सवार थे, क्योंकि बचे हुए सभी लोग सूडान के नागरिक हैं और वे अंग्रेजी नहीं बोल पाते, जिससे बातचीत में दिक्कत हो रही है।

इंडिगो में उड़ान संकट: पायलटों ने प्रबंधन की बदइंतजामी पर उठाए सवाल

नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों बड़े परिचालन संकट से जूझ रही है। इसी बीच सोशल मीडिया पर इंडिगो पायलटों का एक कथित ओपन लेटर आया है, जिसमें सीईओ पीटर एल्बर्स समेत कई शीर्ष अधिकारियों पर एयरलाइन को डूबने की कगार पर पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। यह पत्र किसी अनाम कर्मचारी द्वारा लिखा दावा किया गया है, जो खुद को वर्षों से इंडिगो की अंदरूनी स्थिति का गवाह बताता है। पत्र में कहा गया है कि इंडिगो एक दिन में नहीं गिरी, यह गिरावट कई वर्षों से बन रही थी। क्या कहा गया है इस खुले पत्र में? कथित खुले पत्र की शुरुआत 2006 में इंडिगो की स्थापना के जिक्र से होती है। लेखक का दावा है कि वर्षों के साथ कंपनी की शुरुआती ग्रोथ लालच में और गौरव अहंकार में बदल गई। पत्र के अनुसार, एयरलाइन की बदहाली की जड़ वहीं से शुरू हुई, जब प्रबंधन ने अनुभव और योग्यता की अनदेखी करते हुए ऐसे लोगों को बड़े पद सौंप दिए, जिनके पास न विशेषज्ञता थी और न ही संचालन की समझ। पत्र में आगे कहा गया है कि पायलटों और कर्मचारियों की थकान, सुरक्षा और ड्यूटी नियमों को लगातार नज़रअंदाज़ किया गया। थकान और ओवरवर्किंग पर आपत्ति जताने वाले कई पायलटों को दफ्तर में बुलाकर डांटा, डराया और अपमानित किया गया। हालात यह तक पहुंच गए कि बिना किसी अतिरिक्त वेतन के नाइट ड्यूटी, शिफ्ट और काम का बोझ कई गुना बढ़ा दिया गया। कथित कर्मचारी के अनुसार, स्टाफ से अपमानजनक भाषा में कहा गया आप नौकरी पाकर खुश रहिए… भिखारी चुन नहीं सकते। पत्र में आरोप है कि समय के साथ एयरलाइन में एक ऐसा टॉक्सिक वर्ककल्चर विकसित हुआ जिसमें टैलेंट से ज्यादा टाइटल और पदों की चमक को महत्व दिया जाने लगा। यह पूरा विवरण इस बात की ओर इशारा करता है कि इंडिगो के अंदर कथित तौर पर वर्षों से असंतोष, अव्यवस्था और कर्मचारियों में बढ़ती थकान को नजरअंदाज किया गया, जिसका असर अब परिचालन संकट के रूप में सामने आ रहा है। किन अधिकारियों को जिम्मेदार बताया गया? कथित ओपन लेटर में इंडिगो के प्रबंधन स्तर पर आठ शीर्ष अधिकारियों को मौजूदा संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। सूची में सबसे ऊपर CEO पीटर एल्बर्स का नाम है, जिन पर आरोप लगाया गया है कि संकट के दौरान वे अपने मूल देश नीदरलैंड में छुट्टी पर थे। पत्र में जिन अन्य अधिकारियों को संकट का कारण बताया गया है, उनमें जेसन हर्टर, अदिति कुमारी, तपस डे, राहुल पाटिल, इसिडोर पोरक्वेरास (COO), असीम मित्रा (SVP फ्लाइट ऑपरेशंस) और अक्षय मोहन शामिल हैं। पत्र का दावा है कि इन अधिकारियों के निर्णय, आंतरिक अव्यवस्था और कथित बदइंतजामी ने मिलकर स्थिति को उस स्तर पर पहुंचाया, जहां एयरलाइन पिछले एक सप्ताह से परिचालन संकट झेल रही है।

गोवा नाइट क्लब हादसा: आग में लोगों की मौत पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने व्यक्त किया शोक

नई दिल्ली  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार देर रात गोवा के नाइट क्लब में आग लगने से लोगों की मौत होने पर गहरा दुख व्यक्त किया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। गोवा की राजधानी पणजी से 25 किलोमीटर दूर अरपोरा गांव में स्थित लोकप्रिय पार्टी स्थल ‘बर्च बाय रोमियो लेन' नाइट क्लब में आग लगने से कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘उत्तरी गोवा जिले में हुई आग लगने की इस दुखद घटना से मुझे गहरी पीड़ा हुई है।    इस घटना में कई लोगों की जान चली गई। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। ईश्वर उन्हें इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करे। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं।'' दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एवं पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी और तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया। गुप्ता ने कहा, ‘‘गोवा के अरपोरा में हुई दुर्घटना का समाचार अत्यंत दुःखद है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे और उनके परिजनों को इस कठिन समय में संबल दे। मैं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी प्रार्थना करती हूं।'' गोवा में आम आदमी पार्टी की प्रभारी आतिशी ने ‘एक्स' पर कहा कि गोवा सरकार को इस घटना में हुई चूक की तत्काल जांच कर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने लिखा, ‘‘गोवा में अरपोरा के एक नाइट क्लब में लगी भीषण आग की खबर अत्यंत दर्दनाक है। इस विनाशकारी हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।'' राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की उपनेता सागरिका घोष ने इस घटना को गोवा में ‘‘डबल इंजन'' शासन मॉडल की पूरी तरह विफलता करार दिया। घोष ने लिखा, ‘‘गोवा के अरपोरा में लगी आग में हुई मौतों की दुखद खबर से स्तब्ध और व्यथित हूं। दिवंगतों के लिए प्रार्थना करती हूं और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करती हूं।'' तृणमूल के राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले ने भी घटना में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘‘गोवा के अरपोरा में बीती रात आग लगने से लोगों की मौत होने की खबर से अत्यंत व्यथित हूं। मृतकों के परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना।‘‘ 

विदेश में भी ‘सेवा ही संकल्प’: श्रीलंका में भारतीय सेना ने किया सैकड़ों का मुफ्त इलाज

नई दिल्ली चक्रवात दित्वाह के बाद भारतीय सेना श्रीलंका में मानवीय सहायता मुहैया करा रही है। भारतीय सेना का फील्ड हॉस्पिटल यहां अब तक 1,250 से अधिक प्रभावित नागरिकों का उपचार कर चुका है। इनमें सेना के डॉक्टर्स द्वारा की गई पांच बड़ी आपातकालीन सर्जरी भी शामिल हैं। गौरतलब है कि श्रीलंका भयंकर चक्रवात ‘दित्वाह’ से प्रभावित हुआ है। चक्रवात से श्रीलंका में जान माल की हानि हुई है। कई सड़क मार्ग नष्ट हुए थे। कई स्थानों पर लोगों के घर बाढ़ और बरसात के पानी में डूब गए थे। बच्चें, बुजुर्ग, महिलाएं, युवा, बाढ़ के पानी से जूझ रहे थे। इस सब के कारण सैकड़ों लोगों को चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी। कई लोग बुरी तरह जख्मी भी हुए हैं जिनकी सर्जरी की जा रही है। ऐसी स्थिति में भारतीय सेना अपने फील्ड हॉस्पिटल की मदद से यहां लोगों की सहायता कर रही है। 2 दिसंबर को भारतीय सेना की 73 सदस्यीय चिकित्सा टीम श्रीलंका पहुंची थी। इसके बाद 5 दिसंबर से महियंगनाया में एक पूरी तरह कार्यात्मक फील्ड हॉस्पिटल स्थापित कर दिया गया। अब इस अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की टीमें तैनात हैं। इनकी सहायता से यहां ओपीडी सेवाएं, आपातकालीन चिकित्सा, छोटी सर्जरी, चोटों, संक्रमणों और आपदा से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार किया जा रहा है। सेना के मुताबिक इस अस्पताल को वायुसेना के सी-17 एमसीसी विमान द्वारा 78 सदस्यीय मेडिकल टीम के साथ श्रीलंका एयरलिफ्ट किया गया है। सेना के अनुसार राहत अभियानों को गति देने और प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने के लिए भारत ने श्रीलंका को तीन बेइली ब्रिज भी उपलब्ध कराए हैं। श्रीलंकाई प्रशासन के समन्वय से इन पुलों के निर्माण के लिए उपयुक्त स्थलों की पहचान कर ली गई है, जिससे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सड़क संपर्क पुनर्स्थापित करने में तेजी आएगी। इस बीच श्रीलंका सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल लसन्था रोड्रिगो ने महियंगनाया में स्थापित भारतीय फील्ड हॉस्पिटल का दौरा किया। उन्होंने यहां भारतीय चिकित्सा दल के साथ बातचीत भी की। उन्होंने भारत सरकार और भारतीय सेना के त्वरित सहायता प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारत की तीव्र एवं समयबद्ध मदद ने हजारों लोगों तक महत्वपूर्ण चिकित्सीय सहायता पहुंचाई है। हम भारत के इस सहयोग के लिए आभारी हैं। चक्रवात दित्वाह के बाद श्रीलंका में जारी राहत कार्यों में भारतीय सेना का योगदान दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मित्रता, मानवीय सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी को और सुदृढ़ कर रहा है। भारतीय सेना के मुताबिक उनका यह फील्ड हॉस्पिटल आने वाले दिनों में भी प्रभावित समुदायों को आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करता रहेगा। दरअसल श्रीलंका में आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए भारतीय सेना के विशेष दल श्रीलंका पहुंचे हैं। भारतीय थलसेना द्वारा भेजा गया यह विशेष दल मुख्यत चिकित्सा, इंजीनियरिंग और सिग्नल्स से संबंधित विशेषज्ञ इकाइयों से मिलकर बना है। इनका उद्देश्य श्रीलंका के आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और पुनर्वास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाना है। भारतीय सेना यहां पीड़ितों को जीवन रक्षक चिकित्सा सहायता प्रदान कर रही है। भारतीय सेना का चिकित्सा दल यहां जीवन रक्षक सहायता मुहैया करा रहा है। इसमें भारतीय सेना की मेडिकल यूनिट शामिल हैं। इस ग्रुप में जख्मी व्यक्तियों के लिए एडवांस्ड ड्रेसिंग स्टेशन व मोबाइल सर्जिकल टीमें बनाई गई हैं। सेना के मुताबिक इनके पास पूर्ण सुसज्जित ऑपरेशन थिएटर है, जो बड़े और छोटे दोनों तरह के ऑपरेशन व चिकित्सा करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही चिकित्सा दल के पास एक ऐसी सुविधा भी है जिसमें एक समय में 20 से 30 मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा सकता है। 

हथियार डालने का संकेत! हमास के ऐलान से बढ़ी उम्मीदें, क्या इज़रायल मानेगा शर्त?

गाजा  गाजा में युद्धविराम समझौता लागू होने के बावजूद इजरायल और हमास के बीच आए दिन टकराव की खबरें आती रहती हैं। इसी बीच हमास ने एक बड़ा बयान जारी किया है। हमास ने कहा है कि वह गाजा पट्टी में अपने हथियार उस फिलिस्तीनी प्राधिकरण को सौंपने को तैयार है जो इस क्षेत्र पर शासन करेगा, बशर्ते इजरायली कब्जा पूरी तरह समाप्त हो जाए।   हमास के मुख्य वार्ताकार और गाजा में इसके प्रमुख खलील अल-हय्या ने एक बयान में कहा कि हमारे हथियार कब्जे और आक्रामकता के अस्तित्व से जुड़े हुए हैं। यदि कब्जा खत्म हो जाता है, तो ये हथियार राज्य के अधीन चले जाएंगे। हय्या के कार्यालय ने बताया कि उनका इशारा एक संप्रभु और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की ओर था। हय्या ने आगे कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र के सैन्य बलों की तैनाती को एक 'पृथक्करण बल' (सेपरेशन फोर्स) के रूप में स्वीकार करते हैं, जिनका काम सीमाओं की निगरानी करना और गाजा में युद्धविराम का पालन सुनिश्चित करना होगा। इस तरह हमास ने उस अंतरराष्ट्रीय बल की तैनाती को साफ तौर पर खारिज कर दिया जिसका मिशन गाजा पट्टी को पूरी तरह निरस्त्रीकरण करना हो। इस बीच खबर है कि अमेरिका की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम समझौते के अगले चरण के तहत वर्ष के अंत तक गाजा के संचालन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय निकाय की घोषणा होने की संभावना है। युद्धविराम समझौते के अनुसार, 'शांति बोर्ड' नाम का यह निकाय, जिसकी अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे, दो वर्ष के संयुक्त राष्ट्र जनादेश के तहत गाजा के पुनर्निर्माण की निगरानी करेगा। नाम न छापने की शर्त पर अरब अधिकारियों और पश्चिमी राजनयिकों ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) को बताया कि इस बोर्ड में पश्चिम एशिया और पश्चिमी देशों के करीब एक दर्जन अन्य नेता भी शामिल होंगे। साथ ही, युद्ध के बाद गाजा के दैनिक प्रशासन के लिए फिलिस्तीनियों की एक समिति की भी घोषणा की जाएगी। काहिरा से फोन पर एपी से बात करने वाले एक पश्चिमी राजनयिक ने कहा कि इसकी घोषणा संभवतः इस महीने के अंत में ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात के दौरान की जाएगी। युद्धविराम समझौते के तहत सुरक्षा व्यवस्था कायम रखने और हमास के निरस्त्रीकरण को सुनिश्चित करने के लिए एक सशस्त्र अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल भी गठित किया जाएगा। यह घोषणा ट्रंप की 20-सूत्री युद्धविराम योजना के कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। यह समझौता 10 अक्टूबर को लागू हुआ था। एक अरब अधिकारी ने बताया कि गाजा के लिए अंतरराष्ट्रीय बल में किन-किन देशों की सेनाएं शामिल होंगी, इस पर अभी बातचीत चल रही है, लेकिन तैनाती 2026 की पहली तिमाही में शुरू होने की संभावना है।

बिना सूचना के हमला? अमेरिकी कार्रवाई में 11 मरे, ट्रंप और हेगसेथ पर गंभीर सवाल

वाशिंगटन  वेनेजुएला से ड्रग्स के अमेरिका आने के खिलाफ अभियान चला रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। यह पूरा मामला 2 सितंबर को एक नाव पर अमेरिकी हमले के साथ शुरू हुआ। अमेरिका सरकार के मुताबिक इस नाव पर ड्रग्स लदे हुए थे और वह अमेरिका आ रही थी। लेकिन अब इस मामले पर सामने आई नई रिपोर्ट के मुताबिक वह नाव अमेरिका आ ही नहीं रही थी, जिस पर हमला करके ट्रंप ने सोशल मीडिया साइट पर पोस्ट किया था। खबर के मुताबिक, इस ऑपरेशन की कमान संभालने वाले एडमिरल ने सीनेटर्स को बताया कि यह नाव एक बड़े जहाज की तरफ जा रही थी, जो कि दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम की तरफ जा रहा था। गौरतलब है कि अमेरिकी नौसेना की तरफ से किए गए इस हमले में नाव पर सवार 11 लोग मारे गए थे। ट्रंप ने इस स्ट्राइक का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा था, 'यह स्ट्राइक तब की गई जब वेनेज़ुएला से आए ये पुख्ता तौर पर पहचान लिए गए नर्को-टेररिस्ट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ड्रग्स (जो अमेरिकियों को मारने वाला ज़हर है!) अमेरिका की ओर ले जा रहे थे। ये हिंसक ड्रग-तस्कर कार्टेल अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और महत्वपूर्ण अमेरिकी हितों के लिए खतरा हैं। स्ट्राइक में 3 पुरुष आतंकवादी मारे गए।' रिपोर्ट के मुताबिक, एडमिरल ने बताया कि नाव दूसरे जहाज की तरफ जा रही थी, लेकिन नौसेना उसका पता नहीं लगा सकी। हालांकि, इस बात की संभावना है कि नाव सूरीनाम से अमेरिका की तरफ जा सकती थी, लेकिन सामान्यता सूरीनाम से जाने वाले ड्रग्स के रास्ते यूरोप की तरफ जाते हैं। ट्रंप और हेगसेथ पर दबाव इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद रक्षा सचिव पीट हेगसेथ की भूमिका अब जांच के दायरे में आ गई है। क्योंकि उन्होंने ही इस नाव को उड़ाने का आदेश दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, एडमिरल ने सांसदों को बताया कि उसके समझ के मुताबिक मिशन का लक्ष्य सभी 11 लोगों को मारना और नाव को डुबो देना था। इस कारण हेगसेथ पर अब “पूरी वीडियो फुटेज जारी करने” का भारी दबाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि हेगसेथ इस समय सिग्नल चैट के माध्यम से अमेरिका सैनिकों की लोकेशन को हूती विद्रोहियों के सामने सार्वजनिक करने के आरोप का भी सामना कर रहे हैं। ऐसे में इस मामले के खुलासे ने उनकी परेशानियों को बढ़ा दिया है।