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जम्मू में ‘बर्मा कॉलोनी’ की स्थापना और रोहिंग्याओं का असर, CJI की चेतावनी हुई सच

श्रीनगर  सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कड़ी टिप्‍पणी करते हुए कहा था कि भारत में घुसपैठियों के लिए किसी तरह का ‘रेड कार्पेट वेलकम’ नहीं होना चाहिए.” यह टिप्पणी भारत की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के प्रति उसके सख्त रुख को दर्शाती है. लेकिन, जम्मू की जमीन पर तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है. म्यांमार से आए रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के लोग न सिर्फ यहा आकर बसे हैं बल्कि अब कई इलाकों में उनकी स्थायी बसावट, कारोबार और यहां तक कि समानांतर ढांचे तक बनते दिखाई दे रहे हैं. यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के संदेश और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई पैदा करती है.  कासिम नगर बना बर्मा बस्ती पहले रोहिंग्या समुदाय के लोग जम्मू शहर और आसपास के इलाकों में अस्थायी कैम्पों तक सीमित थे. लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. कई क्षेत्रों में इनकी परमानेंट बस्तियां बस गई हैं. झुग्गियों का विस्तार हुआ है और यहां तक कि छोटी-छोटी दुकानें व बाजार भी खड़े हो चुके हैं. ये अब सिर्फ अस्थायी रूप से रहने के मकसद से नहीं आए हैं बल्कि उनका इरादा यहीं बस जाने का लगता है. सरकारी और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, जम्मू के नरवाल, सुंजवां, भठिंडी और अन्य इलाकों में रोहिंग्या परिवारों ने ढांचों का स्थायी रूप लेती बस्तियां खड़ी कर ली हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1994 में दो बच्चों समेत एक रोहिंग्या परिवार जम्मू पहुंचा था. इसके बाद 2009 के बाद इनकी उपस्थिति में तेज उछाल आया. 2007 से 2015 के बीच बड़ी संख्या में रोहिंग्या भारत आए और जम्मू में बसने लगे. पहले इस जगह का नाम कासिम नगर हुआ करता था. 2007 में इसे रोहिंग्या बस्ती के नाम से जाना जाने लगा. 2020 के बाद रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय ने अपने संगठन को इतना मजबूत कर लिया कि स्थायी रूप से बसने की चाह में इस जगह को ‘बर्मा बस्ती’ का नाम भी दे दिया गया है. यह नामकरण अपने आप में उनकी बढ़ती पकड़ और स्थायी पहचान की तलाश को दर्शाता है. टीचर तक बन गए रोहिंग्या घुसपैठी रोहिंग्या समुदाय अब सिर्फ़ रहने तक सीमित नहीं है. आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, रोहिंग्या परिवारों के बच्चे स्थानीय स्कूलों में दाख़िल हैं. कुछ संस्थानों में रोहिंग्या मूल का शिक्षक सादिक बच्चों को पढ़ाने तक पहुंचाहुआ है. यही नहीं, रोहिंग्या बच्चों के लिए अलग से मदरसे भी चल रहे हैं. इन मदरसों के संचालन पर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर निगरानी बढ़ाती रही हैं. यह उनके समुदाय के भीतर एक समानांतर ढाँचा विकसित होने का संकेत है. आर्थिक मोर्चे पर भी ये सक्रिय हो रहे हैं. कुछ लोग कबाड़ इकट्ठा करने, मजदूरी और रेहड़ी-फड़ी का काम करते हैं. वहीं, कुछ छोटी-बड़ी कपड़ों की दुकानों से कमाई करते नज़र आ रहे हैं. यह सब उनकी अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी रूप से यहीं बसने की मंशा को दर्शाता है. जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंता पिछले कुछ सालों में इनकी आबादी में लगातार वृद्धि देखी गई है. इसने क्षेत्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलावों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार पहचान सत्यापन अभियान चलाए हैं. इन अभियानों में दस्तावेजों की कमी, संदेहास्पद पहचान और अवैध बसावट के मामले सामने आए. 2021 में महिलाएं और बच्चे सहित कई रोहिंग्या हिरासत में लिए गए थे. जम्मू में रोहिंग्या की बढ़ती और अब लगभग स्थायी होती मौजूदगी, सुरक्षा, कानून और स्थानीय प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुकी है. संवेदनशील बॉर्डर जोन में ऐसी बिना अनुमति और बिना दस्तावेज वाली बसावट को जारी रहने दिया जा सकता है या नहीं, यह सबसे बड़ा सवाल है. सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश और जमीनी हालात के बीच का यह विरोधाभास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता का विषय है.

एशिया में तनाव चरम पर: रूस-चीन की संयुक्त उड़ानें, जापान ने दिखाई अमेरिकी समर्थन की ढाल

टोक्यो/बीजिंग जापान और चीन के बीच तल्खी 7 नवंबर से सुर्खियां बटोर रही है। जमीन पर बिगड़े संबंध अब आसमान तक पहुंच गए हैं। हाल ही में जापान ने चीन पर अपने एयरक्राफ्ट को लॉक करने का आरोप लगाया। बीजिंग ने इससे साफ इनकार भी किया। अब खबर है कि रूसी बॉम्बर चीनी एयर पेट्रोलिंग का हिस्सा बन गए हैं तो वहीं अमेरिका ने भी जापान के कदम को सही करार दिया है। जापानी रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार देर रात कहा कि जापान ने देश भर में जॉइंट पेट्रोलिंग कर रही रूसी और चीनी एयर फोर्स पर नजर रखने के लिए जेट भेजे हैं। दो रूसी टीयू-95 न्यूक्लियर-कैपेबल स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स ने जापान सागर से पूर्वी चीन सागर की ओर उड़ान भरी ताकि दो चीनी एच-6 बॉम्बर्स से मिल सकें और एक "लंबी दूरी की जॉइंट फ्लाइट" कर सकें। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने बुधवार को एक्स पोस्ट में कहा कि रूस और चीन का संयुक्त अभ्यास “साफ तौर पर हमारे देश के खिलाफ ताकत दिखाने के इरादे से किया गया था, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता की बात है।” वहीं पहली बार अमेरिका ने भी जापानी फाइटर जेट्स पर चीनी सेना के रडार इस्तेमाल की आलोचना की। जापानी मीडिया हाउस ने इसकी पुष्टि की है। उसके मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बुधवार को ईमेल के जरिए 'द जापान टाइम्स' को बताया, "चीन की हरकतें इलाके की शांति और स्थिरता के लिए सही नहीं हैं।" "अमेरिका-जापान अलायंस पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और एकजुट है। हम अपने साथी जापान के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं, और हम इस और दूसरे मुद्दों पर करीबी संपर्क में हैं।" जापान के चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा ने टिप्पणियों का स्वागत करते हुए कहा कि ये "यूएस-जापान के मजबूत गठबंधन को दिखाते हैं"। चीनी विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। शनिवार की घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की यह आलोचना पहली टिप्पणी थी। 6 दिसंबर को लियाओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर से भेजे गए चीनी फाइटर जेट्स ने एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के जेट्स को दो बार रडार लॉक किया था; टोक्यो ने इस हरकत को "खतरनाक" बताया था। रडार की यह घटना ऐसे समय में हुई जब टोक्यो और बीजिंग प्रधानमंत्री साने ताकाइची के 7 नवंबर के बयान के बाद दोनों देश आपस में उलझे हुए हैं। ताकाइची ने डाइट में कहा था कि सेल्फ-डिफेंस फोर्स को कुछ “सबसे विपरीत स्थितियों” में तैनात किया जा सकता है, जैसे कि ताइवान पर चीनी नौसेना की नाकाबंदी, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह जापान के “अस्तित्व के लिए खतरे” वाली स्थिति होगी।

इस्लामाबाद में PTI प्रदर्शन बेकाबू, पुलिस ने इमरान खान की बहन पर चलाया वाटर कैनन; पार्टी ने कहा— लोकतंत्र का गला घोंटा गया

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की सियासत गरमाई हुई है। इन दिनों पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का गतिरोध देखने को मिल रहा है। पीटीआई के चीफ इमरान खान को लेकर बीते कुछ दिनों से अलग-अलग खबरें सामने आ रही हैं। दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान से मुलाकात पर बैन जारी रखने का ऐलान किया। इस पर पीटीआई चीफ की बहन आलीमा खान भारी संख्या में समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गईं। जेल के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहीं आलीमा खान और अन्य प्रदर्शनकारियों पर ठंड की रात में पानी की बौछार कर दी गई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने पीटीआई की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा बयान के हवाले से बताया कि पार्टी ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इमरान खान की बहन और पीटीआई कार्यकर्ताओं की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अदियाला जेल के बाहर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि कोर्ट ने इमरान खान से मिलने की इजाजत दी थी। इसमें कहा गया, "शांतिपूर्ण धरने पर यह बेरहमी से की गई कार्रवाई बुनियादी मानवाधिकारों और ठंड के मौसम में इकट्ठा होने की आजादी का उल्लंघन है।" इसके अलावा, पार्टी ने एक्स पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें लोगों को मौके से भागते और वॉटर कैनन का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया। पीटीआई ने कहा, "पंजाब पुलिस की फासीवादी हरकतें एक बार फिर शुरू हो गई हैं। बहुत ज्यादा ठंड में अदियाला जेल के बाहर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं पर वॉटर कैनन से हमला किया गया। ये कायरतापूर्ण हरकतें न तो हमारी आवाज दबा पाएंगी और न ही हमारा हौसला कम कर पाएंगी।" एक और पोस्ट में, इमरान खान की पार्टी ने कहा, "उनके परिवार को उनसे मिलने की इजाजत नहीं मिलने की वजह से धरना दिया गया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना न सिर्फ इमरान खान के कैदी अधिकारों का बेशर्मी से उल्लंघन है, बल्कि सरकार के अत्याचारों का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर भी सीधा हमला है।" पीटीआई ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान की बहन अलीमा खान और पीटीआई के सदस्यों ने मंगलवार को रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर धरना देना शुरू कर दिया। अलीमा खान ने बताया कि इमरान खान को पिछले 14 महीनों से अपने पर्सनल डॉक्टर से मिलने की इजाजत नहीं दी गई है।

1952 में नेहरू ने कराया था देश का पहला SIR, अमित शाह का बड़ा बयान

नई दिल्ली  लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सदन में इस चर्चा के लिए न बोलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि वे (विपक्ष) विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर चर्चा मांग रहे थे। एसआईआर पर इस सदन में चर्चा नहीं हो सकती, क्योंकि एसआईआर की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है। भारत का चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त, ये सरकार के तहत काम नहीं करते हैं। अगर चर्चा होती, और कुछ सवाल किए जाते तो इसका जवाब कौन देगा? अमित शाह ने कहा कि सबसे पहला एसआईआर 1952 में हुआ। उस समय कांग्रेस पार्टी से देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे।  दूसरा एसआईआर 1957 में हुआ। उस समय भी कांग्रेस पार्टी से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। तीसरा एसआईआर 1961 में हुआ। उस समय भी कांग्रेस पार्टी से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। 1965-66 में एसआईआर हुआ, उस समय भी कांग्रेस से लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे। 1983-84 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। 1987-89 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। 1992-95 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव थे। 2002-03 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। 2004 में एसआईआर समाप्त हुआ, उस समय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह थे। अमित शाह ने चुनाव आयोग की शक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग का गठन, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, इन सभी चुनावों का संपूर्ण नियंत्रण चुनाव आयोग को दिया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 में मतदाता की पात्रता, योग्यता, और मतदाता होने की शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहली शर्त है, मतदाता भारत का नागरिक होना चाहिए, विदेशी नहीं होना चाहिए। ये (विपक्ष) कह रहे हैं कि चुनाव आयोग एसआईआर क्यों कर रहा है? अरे, उसका (चुनाव आयोग) दायित्व है, इसलिए करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के संविधान के अनुच्छेद 324 से चुनाव आयोग की रचना हुई। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। संविधान में चुनाव आयोग का गठन, उसकी शक्तियां, चुनावी प्रक्रिया, मतदाता की परिभाषा और मतदाता सूची को तैयार करने तथा उसे सुधारने का प्रावधान किया गया, और प्रावधान जब किया गया तब हमारी पार्टी बनी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 327 के तहत, मतदाता सूची तैयार करने, परिसीमन करने और चुनाव कराने की जिम्मेदारियां, जिसमें संबंधित कानून की सिफारिश करने का अधिकार भी शामिल है, चुनाव आयोग को सौंपी गई हैं। गृह मंत्री ने कहा कि हाल ही में, एक कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि, अनुच्छेद 327 की व्याख्या के अनुसार, चुनाव आयोग को इस उद्देश्य के लिए मतदाता सूची तैयार करने का पूरा अधिकार है।

IndiGo की दिक्कतों का फायदा? दूसरी कंपनी ने बढ़ाई 100 डेली फ्लाइट्स, जानें पूरा प्लान

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) पर छाए संकट और यात्रियों की बढ़ती मांग के बीच स्पाइसजेट एयरलाइन (SpiceJet Airline) ने एक बड़ा फैसला लिया है। एयरलाइन ने मौजूदा सर्दियों के मौसम में प्रमुख रूटों पर बढ़ती मांग को देखते हुए अपनी सेवाओं को व्यापक रूप से बढ़ाने की योजना बनाई है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय विमानन बाज़ार में पर्याप्त क्षमता सुनिश्चित करना है। हर रोज़ 100 अतिरिक्त उड़ानें स्पाइसजेट ने नियामक अनुमोदन (Regulatory Approval) मिलने पर मौजूदा विंटर शेड्यूल के दौरान हर रोज़ 100 अतिरिक्त फ्लाइट्स (Additional Flights) शुरू करने की योजना बनाई है। एयरलाइन ने पिछले दो महीनों में 17 विमानों को अपने सक्रिय संचालन (Active Operation) में शामिल किया है। यह विस्तार डैम्प-लीज (Damp-Lease) पर लिए गए विमानों और अपने खुद के विमानों को सेवा में वापस लाकर किया गया है। इस बढ़ी हुई खेप की उपलब्धता से स्पाइसजेट को ज्यादा मांग वाले रूटों पर अतिरिक्त क्षमता तैनात करने में मदद मिलेगी। स्पाइसजेट ने कहा है कि वह सर्दियों में मज़बूत और बढ़ती मांग देख रही है और इस विस्तार से भारतीय विमानन बाज़ार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।     प्रमुख एयरपोर्ट्स पर आज 100 से ज़्यादा फ्लाइट्स रद्द भले ही स्पाइसजेट ने विस्तार की योजना बनाई हो लेकिन देश के दो प्रमुख हवाईअड्डों पर आज बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है:     चेन्नई एयरपोर्ट (Chennai Airport): यहां आज कुल 70 फ्लाइट्स रद्द की गई हैं जिनमें 37 आगमन (Arrival) की और 33 प्रस्थान (Departure) की उड़ानें शामिल हैं।     बेंगलुरु एयरपोर्ट (Bengaluru Airport): यहां  कुल 61 उड़ानें रद्द हुई हैं जिनमें 35 आगमन और 26 प्रस्थान की फ्लाइट्स शामिल हैं। चेन्नई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर इतनी बड़ी संख्या में उड़ानों का रद्द होना यात्रियों के लिए एक गंभीर समस्या खड़ी कर रहा है जिसके कारण स्पाइसजेट जैसे एयरलाइनों का विस्तार करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।  

बंगाल में शाहजहां केस का गवाह निशाने पर, हमले में दो की हत्या – बढ़ी राजनीतिक हलचल

कोलकाता  भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन में हो रही घटनाओं का जिक्र करते हुए शेख शाहजहां केस से जुड़े एक गवाह के साथ हुए हादसे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह घटना राज्य में न्याय की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ी करती है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली इलाके में एक दुखद हादसा हुआ, जिसमें शेख शाहजहां केस का मुख्य गवाह बुरी तरह घायल हो गया।  इस हादसे में दो अन्य लोगों की जान चली गई। घटना सुबह करीब सात बजे नजात इलाके में हुई, जब गवाह अपने बेटे के साथ कोर्ट में गवाही देने के लिए बसंती रोड पर जा रहा था। अचानक दूसरी दिशा से आ रहे एक ट्रक ने उसकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि भोला घोष के बेटे और ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई। भोला घोष को पहले स्थानीय मिनाखान अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए उन्हें कोलकाता के एक बड़े अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में दावा किया कि ट्रक को शेख शाहजहां का करीबी अब्दुल हलीम मोल्ला चला रहा था, जो अपने साथी नजरुल मोल्ला के साथ मौजूद था। मालवीय के मुताबिक, अब्दुल हलीम मोल्ला लंबे समय से सीबीआई की वांछित सूची में भगोड़े के रूप में दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल में बंद शेख शाहजहां गवाहों को एक-एक करके निशाना बना रहा है ताकि केस कमजोर हो जाए। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस सबके पीछे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का संरक्षण है, क्योंकि राज्य की पुलिस और प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

अमित शाह का विपक्ष पर वार: SIR मुद्दे पर झूठ की राजनीति बंद करें

नई दिल्ली  सांसद में शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह विपक्ष पर गरजे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष SIR को लेकर झूठ फैला रहा है। EC एक संवैधानिक संस्था है और यह तब बनी थी, जब BJP नहीं बनी थी। अपनी बात को जारी रखते हुए शाह ने कहा कि विपक्ष के सदस्य बार- बार इस मुद्दे पर अपने विचार रख रहे थे, इसलिए उन्हें जवाब देना था। उन्होंने पहले के सभी एसआईआर (SIR) का गहन अध्ययन किया है और कांग्रेस की ओर से फैलाए गए "झूठ" का अपने तर्कों के आधार पर जवाब देना चाहते हैं। SIR पर चर्चा से इनकार का कारण अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि बीते दो दिनों तक संसद की कार्यवाही ठीक से नहीं चल सकी और विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार चर्चा नहीं चाहती। इस पर उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की। गृह मंत्री ने कहा, "हमने चर्चा के लिए 'ना' कहा, इसके पीछे कारण थे। विपक्ष की मांग थी SIR पर चर्चा की।" उन्होंने तर्क दिया, "यह (एसआईआर) चुनाव आयोग का काम है। अगर इस पर चर्चा होगी, तो जवाब कौन देगा?" शाह ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है।   इसके अलावा शाह ने  बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हो रही चर्चा का जवाब देते हुए, सदन की कार्यवाही बाधित होने और चर्चा से इनकार करने के आरोपों पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ किया कि बीजेपी और एनडीए के लोग कभी भी बहस से पीछे नहीं हटते। उन्होंने बताया कि उन्होंने SIR पर चर्चा करने से मना क्यों किया था। चुनाव सुधार पर चर्चा को मिली सहमति गृह मंत्री ने बताया कि जब विपक्ष चुनाव सुधार के व्यापक मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हुआ, तब सरकार ने सहमति दी। अमित शाह ने कहा कि चर्चा चुनाव सुधार पर तय हुई थी, लेकिन विपक्ष के सदस्यों ने बार-बार SIR पर ही अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जवाब तो उन्हें देना ही था।  अमित शाह ने यह स्पष्ट किया कि सरकार संसद को देश की सबसे बड़ी पंचायत मानती है और चर्चा के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन विषय संवैधानिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए।  

सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, भारतीय रेलवे ने आरओबी/आरयूबी निर्माण को बढ़ाकर तीन गुना किया

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे पर रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज (आरओबी/आरयूबी) के कार्यों की मंजूरी और क्रियान्वयन एक सतत् प्रक्रिया है। ऐसे कार्यों को ट्रेन संचालन में सुरक्षा और गतिशीलता पर प्रभाव और सड़क उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव के आधार पर प्राथमिकता दी जाती है और उन्हें शुरू किया जाता है।   मालदा डिवीजन के अजीमगंज-न्यू फरक्का खंड में किमी 239/9-10 पर एलसी नंबर 43/एसपीएल/ई के बदले आरओबी के निर्माण कार्य को मंजूरी दे दी गई है। जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) और विस्तृत अनुमान तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में स्वीकृत 302 आरओबी/आरयूबी कार्यों में से, 99 आरओबी/आरयूबी कार्य राज्य सरकार के कारण विलंबित हैं। विवरण इस प्रकार हैं:    आरओबी/आरयूबी कार्यों का पूरा होना और चालू होना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जैसे एलसी को बंद करने के लिए सहमति देने में राज्य सरकारों का सहयोग, एप्रोच अलाइंमेंट को ठीक करना, सामान्य व्यवस्था ड्राइंग (जीएडी) की मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाना, उल्लंघनकारी उपयोगिताओं का स्थानांतरण, विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरी, परियोजना/कार्य स्थलों के क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति, जलवायु की स्थितियों के चलते विशेष परियोजना/क्षेत्र के लिए एक वर्ष में काम करने वाले दिनों की अवधि आदि। ये सभी कारक परियोजनाएं/कार्यों को पूरा होने के समय को प्रभावित करते हैं। रेलवे ने आरओबी/आरयूबी कार्यों में तेज़ी तेजी लाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं: (i) सुचारू कार्यान्वयन करने के लिए जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) को अंतिम रूप देने से पहले, संबंधित राज्य सरकार/सड़क स्वामित्व प्राधिकरण के साथ संयुक्त सर्वेक्षण किया जाता है। (ii) आरओबी/आरयूबी कार्यों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए रेलवे और राज्य सरकार के अधिकारियों की समय-समय पर बैठकें की जाती हैं। (iii) डिजाइन अनुमोदन के दौरान देरी से बचने के लिए रेलवे के हिस्सों पर सड़क के विस्तार, तिरछापन और चौड़ाई के विभिन्न संयोजनों के लिए सुपरस्ट्रक्चर ड्राइंग का मानकीकरण किया गया है। इसे एक सार-संग्रह के रूप में जारी किया गया है, जिसे शीघ्र योजना के लिए सीधे रेलवे लाइनों पर रोड ओवर ब्रिज के लिए अपनाया जा सकता है। (iv) जहां भी मुमकिन हो, रेलवे द्वारा आरओबी/आरयूबी कार्यों को एकल इकाई के आधार पर क्रियान्वयन करने की योजना है। अगर कोई सड़क स्वामित्व प्राधिकारी/राज्य सरकार चाहे तो रेलवे उन्हें एकल इकाई के आधार पर कार्य करने की अनुमति दे सकता है। यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में सवालों के लिखित जवाब में दी।

सऊदी अरब में मौसम की मार! मक्का–मदीना में भीषण बारिश से कयामती नज़ारा, रेड अलर्ट

रियाध  सऊदी अरब के मक्का, जेद्दा और आसपास के इलाकों में मंगलवार को अचानक इतनी तेज बारिश हुई कि कुछ ही मिनटों में सड़कें झील जैसी बन गईं। आमतौर पर गर्म और रेगिस्तानी माने जाने वाले इन क्षेत्रों में ऐसा दृश्य बहुत कम देखने को मिलता है। मंगलवार सुबह से ही काले बादल छाए हुए थे। दोपहर तक भारी बारिश शुरू हुई और पानी सड़कों पर भरने लगा। निचले इलाकों में हालात सबसे खराब रहे। कई जगह ट्रैफिक रुक गया और गाड़ियाँ पानी में डूबती नजर आईं। कई इलाकों में बिजली भी गुल हो गई।   सऊदी मौसम विभाग NCM ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मक्का, जेद्दा, रबिघ, खुलाईस और आसपास के शहरों में बहुत तेज बारिश, ओले, तेज हवाएं और अचानक बाढ़ आने का खतरा है। अलर्ट के मुताबिक रात 1 बजे से दोपहर 1 बजे तक बारिश सबसे ज्यादा होने वाली थी और वैसा ही हुआ। कई लोगों को 2009 और 2011 की वही बादल फटने वाली भयंकर बाढ़ याद आ गई, जिसने बड़ी तबाही मचाई थी। इस बार भी बारिश ने हालात काफी बिगाड़ दिए। स्कूल बंद करने के आदेश  स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सोमवार रात ही स्कूलों को बंद कर ऑनलाइन क्लास का आदेश दे दिया था। सिविल डिफेंस ने लोगों से साफ कहा है कि निचले इलाकों में न जाएं और बिना वजह बाहर न निकलें।सोशल मीडिया पर लोगों ने वीडियो शेयर कर बताया कि पानी कुछ ही मिनटों में कारों की बोनट तक पहुंच गया। जेद्दा में साल में कुछ बार ही बारिश होती है, इसलिए शहर की व्यवस्था अचानक इतनी बारिश संभाल नहीं पाती।   अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स रद्द जेद्दा में चल रहे रेड सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल को अचानक रोकना पड़ा। निर्देशक डैरेन एरोनोफ्स्की स्टेज पर थे तभी बाहर तेज गर्जन शुरू हो गई। इसके बाद शाम के सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। हॉलीवुड एक्टर रिज़ अहमद का सत्र भी रद्द करना पड़ा।अमेरिकी दूतावास ने भी सुरक्षा कारणों से अपना गाला इवेंट रद्द किया।   आगे का मौसम कैसा रहेगा? मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम अभी खत्म नहीं हुआ है। बुधवार और गुरुवार को मदीना, तबुक, अल जौफ और उत्तरी सीमाओं तक बारिश फैलने की संभावना है। कई जगह ओले और धूलभरी हवाएं भी चल सकती हैं।  

VIDEO वायरल: पाक आर्मी स्पोक्सपर्सन ने प्रेस ब्रीफिंग में महिला पत्रकार से की अभद्र हरकत

इस्लामाबाद  पाकिस्तानी सेना के जनरल का एक वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। दरअसल इस वीडियो में पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के डायरेक्टर जनरल और सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी एक महिला पत्रकार को आंख मारते नाराज आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरल वीडियो कथित तौर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकार अबसा कोमल जनरल चौधरी से पाक के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सवाल पूछ रही थीं। पत्रकार ने कहा, “आपने आज कहा कि वह (इमरान खान) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, देश विरोधी हैं और दिल्ली के इशारों पर काम कर रहे हैं। यह पहले से कैसे अलग है या क्या हम आगे इस पर कोई डेवलपमेंट की उम्मीद करें?” इस गंभीर सवाल का मजाकिया जवाब देते हुए जनरल ने कहा, "और एक चौथा पॉइंट जोड़ लें वह एक ‘जेहनी मरीज’ (मानसिक रोगी) भी हैं।" इसके बाद वह मुस्कुराए और पत्रकार को देख कर आंख मारी, जिसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया। हालांकि लाइव हिन्दुस्तान स्वतंत्र रूप से वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। भड़के लोग पाकिस्तानी जनरल का वीडियो वायरल होते ही यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने इस पर आश्चर्य जताया है कि कोई वर्दी पहना हुआ शख्स, सार्वजनिक रूप से इस तरह की हरकत कैसे कर सकता है। एक यूजर ने लिखा, “ये कूल बनने की कोशिश कर रहे हैं। इनको ये नहीं पता कि इनको कोई सीरियसली नहीं लेता।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह दिखाता है कि उनकी सेना कितनी गैर-पेशेवर है। वर्दी में कोई इस तरह सार्वजनिक रूप से किसी को आंख कैसे मार सकता है?" वहीं एक अन्य ने लिखा कि इस तरह के लोग पाकिस्तान सेना के जनरल हैं तो कोई आश्चर्य नहीं है कि उनका देश किस स्थिति में हैं।