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मैक्रों ने किया फैसला, फ्रांस में ड्रैगन की सेक्स डॉल को लेकर भड़का विवाद

पेरिस  बच्चों जैसी दिखने वाली सेक्स डॉल्स की बिक्री को लेकर उठे विवाद के बाद फ्रांस सरकार ने चीनी मूल की फास्ट-फैशन कंपनी शीन (Shein) की वेबसाइट पर कार्रवाई करते हुए उसके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि यह कदम तब तक लागू रहेगा, जब तक कंपनी यह साबित नहीं कर देती कि उसकी ऑनलाइन सामग्री फ्रांसीसी कानूनों के अनुरूप है. मंत्रालय ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया कि इस निर्णय से पेरिस स्थित शीन के पहले स्थायी स्टोर पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं. बता दें कि यह फैसला उस समय आया जब पेरिस में स्थित प्रतिष्ठित बीएचवी मरैस डिपार्टमेंटल स्टोर में शीन के पहले स्टोर के उद्घाटन पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी. उद्घाटन के कुछ ही घंटों बाद सरकार ने यह कदम उठाया. उद्घाटन कार्यक्रम के बाहर कई पर्यावरण संगठनों और बाल संरक्षण समूहों ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कंपनी पर नैतिकता और श्रम उल्लंघन के आरोप लगाते हुए #BoycottShein के नारे लगाए. कंपनी ने दी सफाई विवाद तब भड़का जब यह खुलासा हुआ कि शीन की वेबसाइट पर बच्चों जैसी दिखने वाली सेक्स डॉल्स बिक्री के लिए सूचीबद्ध थीं. आलोचना के बाद कंपनी ने सफाई दी कि उसने ऐसे सभी उत्पादों पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया है और अपने वयस्क उत्पाद सेक्शन को अस्थायी रूप से समीक्षा के लिए हटा दिया है. साथ ही कंपनी ने यह जांच शुरू की है कि प्लेटफॉर्म के फिल्टरिंग सिस्टम को कैसे दरकिनार किया गया. कंपनी की इस सफाई के बावजूद, फ्रांसीसी सरकार ने शीन के ऑनलाइन संचालन पर रोक लगा दी है.  वहीं, बीएचवी मरैस स्टोर के मालिक समूह (SGM) ने इस विवाद को अस्वीकार्य बताया, लेकिन शीन की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की. समूह के सीओओ कार्ल-स्टीफन कॉटेंडिन ने कहा कि हमें खुशी है कि कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी दिखाई. हमने यह सुनिश्चित किया है कि उनके सभी उत्पाद यूरोपीय और फ्रांसीसी नियमों का पालन करें. बता दें, शीन की शुरुआत 2012 में चीन में हुई थी और जिसका मुख्यालय अब सिंगापुर में है. शीन वैश्विक स्तर पर फास्ट-फैशन उद्योग का बड़ा नाम बन चुका है. हालांकि, कंपनी को लंबे समय से पर्यावरण प्रदूषण, सस्ते श्रम शोषण और शिनजियांग प्रांत में जबरन मजदूरी जैसे गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. फ्रांस ने हाल ही में फास्ट-फैशन कंपनियों पर सख्त निगरानी शुरू की है. सरकार एक नए कानून पर काम कर रही है जो सस्ते आयातित उत्पादों पर टैक्स, विज्ञापन प्रतिबंध, और अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को कड़ा करेगा. यह कानून शीन, टेमू और अलीएक्सप्रेस जैसी एशियाई ई कॉमर्स कंपनियों को सीधे प्रभावित करेगा. इस बीच, फ्रांसीसी फैशन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने इस विवाद को उद्योग के लिए काला दिन बताया. फ्रेंच वुमेंस रेडी-टू-वियर फेडरेशन के अधिकारी थिबॉट लेडुनोइस ने कहा कि शीन फ्रांस में अपने लिए एक शानदार शोकेस तैयार कर रहा है, लेकिन यह उन सभी भयावह व्यावसायिक प्रथाओं को वैध ठहराता है जो वह दुनिया भर में लागू कर रहा है. फिलहाल फ्रांस सरकार ने शीन से स्पष्ट जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि यदि कंपनी फ्रांसीसी साइबर और नैतिक मानकों का पालन करने में विफल रहती है, तो उस पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है. 

दिनदहाड़े शर्मनाक हरकत! मेक्सिको की राष्ट्रपति से छेड़खानी की कोशिश, सुरक्षा पर उठे सवाल

मेक्सिको मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम संग सड़क हुई पर छेड़छाड़ के बाद उन्होंने बुधवार को पूरे देश में यौन उत्पीड़न को अपराध घोषित करने की मांग की है। हमले के बाद पूरे देश में महिलाओं के सामने मौजूद खतरों को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। इससे पहले 63 वर्षीय शीनबाम पर हमला तब हुआ जब वे मंगलवार को मेक्सिको सिटी में राष्ट्रपति भवन के पास समर्थकों का अभिवादन स्वीकार कर रही थीं। जानकारी के मुताबिक क्लाउडिया एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जा रही थीं। तभी अचानक एक शराबी शख्स उनके पास आया, उनके कंधे पर हाथ रखा और दूसरे हाथ से उनकी छाती को छुआ, साथ ही उनकी गर्दन को चूमने की कोशिश की। हालांकि राष्ट्रपति सुरक्षा दल के एक सदस्य ने उसे तुरंत दूर खींच लिया। यह घटना कैमरे में कैद हो गई और बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। अब देश भर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। इस मामले में मेक्सिको के रिकॉर्ड भी चिंताजनक हैं। देश में यौन उत्पीड़न आम है और अधिकार समूह गंभीर संकट की चेतावनी दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की लगभग 70 प्रतिशत मेक्सिकन महिलाओं को अपने जीवन में कम से कम एक बार यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मेक्सिको में हर दिन औसतन 10 महिलाओं की हत्या होती है। घटना के बाद अब शीनबाम ने बुधवार को कहा है कि सरकार यौन उत्पीड़न से संबंधित राष्ट्रव्यापी कानून की जल्द से जल्द समीक्षा करेगी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, "मेरी सोच यह है। अगर मैं शिकायत दर्ज नहीं कराउंगी, तो बाकी मैक्सिकन महिलाओं का क्या होगा? अगर राष्ट्रपति के साथ ऐसा हुआ, तो हमारे देश की सभी महिलाओं का क्या होगा?" राष्ट्रपति ने कहा, "यह एक आपराधिक अपराध होना चाहिए और हम इसके लिए एक अभियान शुरू करने जा रहे हैं।"

महादेव ऐप घोटाले में UAE ने दी झटका, आरोपी को सौंपने से इनकार कर भारत को निराश किया

दुबई महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े 6000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य आरोपी रवि उप्पल दुबई से गायब हो गया है। इस घटनाक्रम से भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मजबूत संबंधों पर पहली बार दरार पड़ने के संकेत मिले हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लंबित प्रत्यर्पण याचिका के बावजूद उप्पल की रिहाई और उसके गायब होने से भारतीय जांच एजेंसियां हैरान हैं। यूएई ने उसके ठिकाने को लेकर भी भारत को कोई जानकारी नहीं दी है। बताया जा रहा है कि यूएई ने न तो भारत को उसकी रिहाई के बारे में पहले से जानकारी दी और न ही यह बताया कि वह अब किस देश में चला गया है। रवि उप्पल को भारतीय एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा था, क्योंकि वह महादेव ऐप के अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमुख संचालकों में से एक हैं। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) सहित कई एजेंसियां कर रही हैं। जांच में यह भी सामने आया था कि कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वतें पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल से जुड़ी थीं। दिसंबर 2023 में हुई थी गिरफ्तारी  रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर दुबई पुलिस ने रवि उप्पल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद भारत सरकार ने आधिकारिक राजनयिक चैनलों के माध्यम से यूएई को उनका प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था। परंतु अब यह मामला विवाद में आ गया है। भारत के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, यूएई को प्रत्यर्पण अनुरोध "समय पर और सत्यापनीय प्रमाणों के साथ" भेजा गया था। हालांकि, यूएई अधिकारियों ने बाद में दावा किया कि उन्हें ऐसा कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ, और उन्होंने उप्पल को रिहा कर दिया। भारत हैरान, यूएई की चुप्पी रहस्यमय भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, यह दावा यूएई की ओर से उपलब्ध दस्तावेजों के विपरीत है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि MEA के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद 45 से 60 दिनों के भीतर प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा जाना चाहिए और यदि आरोपी को रिहा भी कर दिया गया हो, तो बाद में दोबारा गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण संभव है। इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने विदेश मंत्रालय (MEA) से अनुरोध किया है कि इस मामले को “सर्वोच्च कूटनीतिक स्तर” पर उठाया जाए ताकि यूएई द्वारा प्रत्यर्पण संधि की शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों को यह समझ नहीं आ रहा कि इतने हाई-प्रोफाइल आरोपी को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित रहते हुए और इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस सक्रिय होने के बावजूद हिरासत से कैसे रिहा कर दिया गया। साथी आरोपी भी है हिरासत में महादेव ऐप सिंडिकेट के दूसरे प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भी इंटरपोल के समान रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक विशेष अदालत ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था, जिसके बाद इंटरपोल नोटिस और प्रत्यर्पण अनुरोध जारी किए गए थे। महादेव ऐप घोटाला महादेव ऑनलाइन बुक ऐप को कथित तौर पर भारत में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसका नेटवर्क भारत के कई राज्यों में फैला हुआ था और करोड़ों रुपये की गैरकानूनी कमाई को विदेशी खातों में ट्रांसफर किया जा रहा था। MEA अब यूएई से औपचारिक स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, भारत इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाने की तैयारी कर रहा है ताकि यूएई यह स्पष्ट करे कि रवि उप्पल को रिहा क्यों किया गया और वह वर्तमान में कहां हैं।

सर्दी ने दी दस्तक: कोहरे से थमी रफ्तार, मौसम विभाग की कड़ी चेतावनी जारी

नई  दिल्ली मौसम विभाग ने अगले 10 दिनों के लिए उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में ठंड तथा कुछ हिस्सों में बारिश-तूफान की चेतावनी (IMD Weather Update) जारी की है। बारिश के बाद कई क्षेत्रों में तापमान में तेज गिरावट की संभावना है और सुबह-शाम सिहरन वाली हवाएं चल रही हैं। UP-बिहार-झारखंड में कोहरा और ठंड, राजस्थान-MP में शुष्क मौसम के साथ पारा घटना और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी व तेज हवाओं की संभावना है। दक्षिण और पूर्वी तटों पर भी अलग-अलग दिनों में वर्षा का प्रभाव दिखेगा। बिहार-झारखंड: सिहरन और घटता तापमान बिहार में ठंड की दस्तक हो चुकी है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार सुबह-शाम सिहरन वाली हवाएँ बहने लगी हैं और रात के न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। आगामी दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना है तथा कई स्थानों पर कोहरा भी छाने लगा है। झारखंड में भी राजधानी रांची समेत कई जिलों में सुबह-शाम ठंड सताने लगी है और न्यूनतम तापमान घट रहा है। मध्य प्रदेश: गरज-चमक के साथ बारिश की आशंका मध्य प्रदेश में भी बिजली कड़कने और गरज-चमक के साथ तूफानी हवाओं की संभावना बनी हुई है; कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय स्तर पर असुविधा रह सकती है। राजस्थान: शुष्क मौसम और तेज ठंड मौसम विभाग ने राजस्थान में आगामी दिनों में मौसम शुष्क रहने और तापमान में गिरावट आने का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश भागों में 5 नवंबर से अगले एक सप्ताह उत्तर-पश्चिम हवाओं के प्रभाव से न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट की उम्मीद है। उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र: बारिश और बर्फबारी के साथ तूफानी हवाएँ विभाग के मुताबिक 5 नवंबर तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश व बर्फबारी हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद क्षेत्रों में बिजली कड़कने और तेज हवाओं का भी खतरा है; हवा की गति 40 से 50 किमी/घंटा तक पहुँचने की संभावना बताई गई है। 4 नवंबर को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है। कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र: 5-6 नवंबर को तूफानी बारिश मौसम विभाग ने 5 और 6 नवंबर को कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में बिजली कड़कने के साथ तूफानी हवा और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जतायी है। आवाम को अस्थिर मौसम के मद्देनजर सतर्क रहने की सलाह दी गयी है। पूर्वोत्तर: नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 5 नवंबर अलर्ट विभाग के अनुसार 5 नवंबर को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बिजली कड़कने और तूफानी हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी जारी है। स्थानीय प्रशासन और लोगों को आवश्यक सतर्कता बरतने को कहा गया है। तमिलनाडु व दक्षिणी तट: 8 नवंबर तक जारी रहेगी बारिश तमिलनाडु में 8 नवंबर तक अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी। साथ ही तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा तथा उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में गरज-चमक के साथ वर्षा का दौर देखा जा सकता है।

जिस मिसाइल से कांपता था पाकिस्तान, अब वही हथियार खरीदने जा रहा इस्लामिक दुनिया का सबसे बड़ा देश

नई दिल्ली दक्षिण एशिया के सबसे घातक हथियारों में शुमार ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में खूब तबाही मचाई थी। मई में भारतीय वायुसेना ने इस सुपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला किया, जिससे दुश्मन की हवाई क्षमता ध्वस्त हो गई। अब इसी मिसाइल को दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने खरीदने का फैसला किया है। लगभग 45 करोड़ डॉलर की इस डील से इंडोनेशिया न केवल अपनी नौसेना को मजबूत करेगा, बल्कि दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने में भी सक्षम हो जाएगा। यह डील भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सौदे पर जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। रक्षा सूत्रों ने बताया कि वार्ता की लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और अब केवल रूसी पक्ष से अंतिम स्वीकृति का इंतजार है, जिसके बाद कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए जा सकेंगे। भारत और इंडोनेशिया के बीच यह सौदा लंबे समय से चर्चा में है। इस वर्ष जनवरी में इंडोनेशिया के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत हुई थी। भारत पहले ही ब्रह्मोस मिसाइलों की बिक्री फिलीपींस को कर चुका है और अब इस अनोखी हथियार प्रणाली के लिए नए बाजार तलाश रहा है। विशेष रूप से मई महीने में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए हालिया संघर्ष के दौरान इस मिसाइल प्रणाली ने खुद को युद्ध के मैदान में साबित भी किया है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, हाल ही में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने इंडोनेशिया का दौरा किया था। उनका यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है। इससे पहले, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की जनवरी में हुई भारत यात्रा ने भी दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को नई दिशा दी थी। भारत ने कुछ वर्ष पहले फिलीपींस के साथ लगभग 3,500 करोड़ रुपये का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा किया था। भारत ने न केवल मिसाइलें बल्कि आवश्यक लॉन्चिंग और समर्थन प्रणाली भी वहां पहुंचाई हैं। यह सौदा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित करने वाला रहा, क्योंकि इसे फिलीपींस द्वारा अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। ब्रह्मोस का जन्म: भारत-रूस की साझेदारी का कमाल ब्रह्मोस का नाम भारत की ब्रह्मपुत्रा नदी और रूस की मॉस्को नदी से लिया गया है। यह मिसाइल भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) और रूस की NPO Mashinostroyeniya के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की गई है। 1998 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का मकसद था एक ऐसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाना जो दुश्मन के जहाजों और जमीन के ठिकानों को चंद सेकंडों में नेस्तनाबूद कर दे। रूस की P-800 ओनिक्स मिसाइल पर आधारित यह हथियार 2005 से भारतीय सेनाओं में शामिल हो चुका है। ब्रह्मोस की खासियत यह है कि यह जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है। इसका वजन 3,000 किलोग्राम (शिप/ग्राउंड वर्जन) है, लंबाई 8.2 मीटर और व्यास 0.67 मीटर। यह 300 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड ले जाती है, जो दुश्मन के कवच को चीर सकता है। सबसे बड़ी ताकत? इसकी 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक- एक बार लॉन्च होने के बाद यह खुद ही टारगेट पर पहुंच जाती है, बिना किसी अतिरिक्त मार्गदर्शन के। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इंडोनेशिया के साथ यह समझौता होता है, तो यह दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रक्षा साझेदारी को मजबूत करेगा और स्वदेशी ब्रह्मोस एयरोस्पेस कंपनी के लिए निर्यात के नए द्वार खोलेगा। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से विकसित की गई है। यह सुपरसोनिक गति से उड़ने वाली, अत्यंत सटीकता वाली मिसाइल है, जो जमीन, समुद्र और वायु से लॉन्च की जा सकती है। अगर सौदा अंतिम रूप लेता है, तो यह न केवल भारत की रक्षा कूटनीति की बड़ी सफलता होगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी एक नया वैश्विक मुकाम दिलाने में मदद करेगा। पाकिस्तान में तबाही: ऑपरेशन सिंदूर का 'फायर एंड फॉरगेट' हमला ब्रह्मोस का असली जलवा तब दिखा जब मई 2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर पहुंच गया। 10 मई को शुरू हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी एयरबेस पर कई ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं। इनमें से कुछ ने भोलारी एयरबेस पर सीधा निशाना साधा, जहां एक AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) विमान तबाह हो गया। पाकिस्तानी रिटायर्ड एयर मार्शल ने खुद माना कि चार ब्रह्मोस मिसाइलों ने उनके हैंगर को उड़ा दिया। यह ऑपरेशन पाकिस्तान के आतंकी हमलों का जवाब था। ब्रह्मोस ने न केवल एयरबेस को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तानी रडार सिस्टम (जैसे चाइनीज HQ-9) को भी चकमा दिया। स्रोतों के मुताबिक, लगभग 15 ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी हवाई लॉन्च क्षमता को ठप कर दिया, जिससे वे काउंटर-अटैक की योजना डालने को मजबूर हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2025 को कानपुर में भाषण देते हुए इसकी पुष्टि की। इंडोनेशिया की सैन्य आधुनिकीकरण यात्रा: ब्रह्मोस से नई ताकत इंडोनेशिया, दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप राष्ट्र और आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। वह अपनी नौसेना को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता, खासकर नटुना द्वीपों पर दावे, ने जकार्ता को चिंतित कर दिया है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, जो पूर्व रक्षा मंत्री रह चुके हैं, उन्होंने सैन्य आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी है। 2025 में इंडोनेशिया ने BRICS में शामिल होकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत की। ब्रह्मोस खरीद इसकी कड़ी है। जनवरी 2025 में प्रबोवो की भारत यात्रा के दौरान (जहां वे गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि थे) बातचीत तेज हुई। इंडोनेशियाई नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद अली ने ब्रह्मोस मुख्यालय का दौरा किया। डील में शोर-बेस्ड और शिप-माउंटेड वर्जन शामिल हैं, जो नटुना सागर में 290 किमी रेंज से चीनी जहाजों को निशाना बना सकेंगे। भारत ने CAATSA (रूस से हथियार खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध) से मुक्त होने का आश्वासन दिया, क्योंकि ब्रह्मोस के मुख्य पार्ट्स भारत में बने हैं।

केरल में POCSO मामला: मां को अपराध के लिए उकसाने का दोषी पाया, अदालत ने कही यह बात

तिरुवनंतपुरम केरल की एक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने महिला और उसके पुरुष साथी को 180 साल की सजा सुनाई है। दरअसल, पुरुष पर महिला की 12 साल की बेटी के साथ बार-बार बलात्कार के आरोप थे। वहीं, महिला पर आरोप थे कि उसने बेटी के खिलाफ रेप में आरोपी की मदद की और उसे अपराध के लिए उकसाया भी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया था कि महिला अपनी बच्ची को शारीरिक संबंध बनाते हुए देखने के लिए मजबूर भी करती थी।  रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने दोनों को 180 साल की सजा और दोनों को ही 11.7 लाख रुपये जुर्माना देने की सजा सुनाई है। जज अशरफ एएम ने पाया है कि दोनों पॉक्सो और आईपीसी और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के कई प्रावधानों के तहत आरोपी हैं। एक ओर जहां आरोपी पलक्कड़ का रहने वाला है। वहीं, पीड़िता की मां और इस केस में दूसरी आरोपी तिरुवनंतपुरम से है। विशेष लोक अभियोजक सोमसुंदरन ए ने कहा कि महिला पति और बच्ची के साथ तिरुवनंतपुरम में रहती थी और फोन पर बातचीत के जरिए 33 साल के आरोपी के संपर्क में आई थी। इसके बाद वह आरोपी के साथ भाग गई थी और दोनों पलक्कड़ और मलप्पुरम में साथ रहे। खास बात है कि इस दौरान बच्ची भी उनके साथ ही थी। महिला की उम्र 30 साल है। अभियोजन ने बताया है कि महिला के साथी ने दिसंबर 2019 और नवंबर 2020 के बीच बच्ची के साथ कई बार यौन हिंसा की। यही सिलसिला दिसंबर 2020 से अक्तूबर 2021 तक चला। केस में मां को यौन उत्पीड़न के लिए उकसाने का दोषी पाया गया है। अभियोजन के आरोप हैं कि आरोपी मां अपराध की गवाह है और वह नाबालिग बच्ची को मजबूर करती थी कि वह दोनों को संबंध बनाते हुए देखे। इसके अलावा महिला पर बच्ची को पोर्न वीडियो दिखाने और बीयर पिलाने के आरोप भी लगाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, सोमसुंदरन का कहना है कि महिला ने बच्ची को धमकाया था कि उसके दिमाग में सीसीटीवी लगाया गया और अगर वह किसी को कुछ बताएगी तो उन्हें पता चला जाएगा। कैसे सामने आया मामला रिपोर्ट के अनुसार, सोमसुंदरन का कहना है कि महिला मलप्पुरम थाने पहुंची थी और उसने माता-पिता पर आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज नहीं देने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा, 'पुलिस ने महिला के पैरेंट्स को सर्टिफिकेट देने के लिए कहा था। जब वह महिला के घर पहुंचे और कहा कि वह पोती को देखना चाहते हैं, तो आरोपी ने इनकार कर दिया।' उन्होंने कहा, 'बाद में पड़ोसियों ने बताया कि घर में बच्ची की हालत खराब है और उसे भोजन भी नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने चाइल्ड लाइन से संपर्क किया और बच्ची को स्नेहिता सेंटर पहुंचाया। यहां बच्ची ने उसके साथ हुई वारदात को बताया।' कोर्ट के आदेश हैं कि जुर्माने की रकम पीड़िता को दी जाए। खास बात है कि जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दोनों पर 20 महीने की सजा और बढ़ जाएगी।

अदृश्य ‘अभिमन्यु’ से बढ़ेगी भारत की शक्ति, S-400 और THAAD को झेलना होगा झटका

नई दिल्ली भारतीय नौसेना अपनी कैरियर एयर विंग्स में अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स को इंटीग्रेट करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. बेंगलुरु स्थित न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (एनआरटी) द्वारा विकसित ‘अभिमन्यु’ ड्रोन इस पहल की अगुवाई कर रहा है. यह ड्रोन नेवल कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयर व्हिकल (एन-सीसीएवी) प्रोग्राम का आधार बन रहा है, जो भारत को वैश्विक ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन्स की तर्ज पर क्रूड फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ तैनाती करने वाला देश बनाने की दिशा में ले जा रहा है. साल 2026 तक उड़ान भरने की योजना वाले इस जेट-पावर्ड स्टील्थ ड्रोन में एआई-ड्रिवन क्षमताएं, मैन्‍ड-अनमैन्ड टीमिंग (एमयूएम-टी) और एयर-टू-एयर किल क्षमता शामिल होगी, जो नौसेना की स्ट्राइक ग्रुप्स को नई ताकत प्रदान करेगी. स्‍टील्‍थ होने की वजह से रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इसे कैच कर पाना काफी मुश्किल होगा. दिलचस्‍प बात यह है कि ‘अर्जुन’ नाम से टैंक पहले से ही इंडियन आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहा है. अब अभिमन्‍यु की बारी की बारी है. अभिमन्यु एक जेट-पावर्ड, लो रडार क्रॉस-सेक्शन (आरसीएस) ड्रोन है, जो विशेष रूप से भारतीय नौसेना के मौजूदा और भविष्य के कैरियर-बेस्ड फाइटर्स जैसे मिग-29K और आने वाले राफेल-M के साथ लॉयल विंगमैन के रूप में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका डिजाइन स्वेप्ट विंग्स, हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर्स, सिंगल वर्टिकल टेल और रियर फ्यूजलाज के दोनों तरफ ट्विन नैरो एयर इंटेक्स से युक्त है. एक खास फीचर है फ्यूजलाज के चारों ओर लपेटी गई कंटीन्यूअस चाइन-लाइन, जो रडार रिफ्लेक्शन्स को कम करके कंटेस्टेड एनवायरनमेंट्स में सर्वाइवेबिलिटी बढ़ाती है. हालांकि, अभिमन्यु में कई स्टील्थ-इंस्पायर्ड फीचर्स हैं, लेकिन यह पूरी तरह लो-ऑब्जर्वेबल प्लेटफॉर्म नहीं है. इसका कॉन्फिगरेशन रडार सिग्नेचर को कम करने और कॉस्ट-इफेक्टिवनेस के बीच संतुलन बनाता है. महंगे इंटरनेशनल समकक्षों की तुलना में यह रैपिड प्रोडक्शन और एक्सपेंडेबिलिटी पर फोकस करता है. एआई-ड्रिवन सिस्टम्स इसे ऑटोनॉमस ऑपरेशन्स के लिए सक्षम बनाते हैं, जबकि एयर-टू-एयर किल क्षमता इसे दुश्मन एयरक्राफ्ट को न्यूट्रलाइज करने में सक्षम बनाएगी. एमयूएम-टी कॉन्फिगरेशन में यह क्रूड पायलट्स के साथ टीम बनाकर काम करेगा, सेंसर रीच बढ़ाएगा और सिचुएशनल अवेयरनेस प्रदान करेगा. ऑपरेशनल रोल और स्ट्रैटेजिक विजन एन-सीसीएवी कार्यक्रम के तहत अभिमन्यु ड्रोन्स भारतीय नौसेना के फाइटर्स के साथ एमयूएम-टी में उड़ान भरेंगे. ये ड्रोन्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की सेंसर रीच बढ़ाएंगे, सिचुएशनल अवेयरनेस को मजबूत करेंगे और कैरियर-बेस्ड तथा ऑनशोर ऑपरेशन्स में टैक्टिकल फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करेंगे. हाई-रिस्क या कॉम्प्लेक्स मिशन्स को संभालकर ये ह्यूमन पायलट्स के एक्सपोजर को कम करेंगे और कैरियर एयर विंग्स की ऑफेंसिव-डिफेंसिव क्षमताओं को बढ़ाएंगे. नौसेना एक फ्लीट ऑफ अभिमन्यु ड्रोन्स को विभिन्न क्षमताओं के साथ तैनात करने की योजना बना रही है, जो इटरेटिव डेवलपमेंट साइकिल्स से हासिल होगी. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इससे सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, स्ट्राइक और स्वार्मिंग मिशन्स के लिए स्पेशलाइज्ड वैरिएंट्स उभर सकते हैं. यह वर्तमान और भविष्य की नौसेना ऑपरेशन्स को सपोर्ट करेगा, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर. अभिमन्यु न केवल फोर्स मल्टीप्लायर बनेगा, बल्कि स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी में आगे की नींव रखेगा. इंडियन नेवी को और मजबूत बनाने की तैयारी है.  डेवलपमेंट स्टेटस और फंडिंग अभिमन्यु प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय की इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) पहल से आंशिक फंडिंग मिल रही है. साथ ही एनआरटी से इंटरनल फंडिंग भी की जा रही है. आईडीईएक्स के तहत वर्तमान फंडिंग सीलिंग करीब 2.85 मिलियन डॉलर है, लेकिन ऑपरेशनल स्टेटस और फ्यूचर वैरिएंट्स के लिए काफी अधिक निवेश की जरूरत होगी. भारतीय नौसेना ने एन-सीसीएवी के ऑपरेशनल रेडीनेस पर पहुंचने पर मिनिमम परचेज क्वांटिटी की प्रतिबद्धता जताई है, जो प्रोडक्शन और डिप्लॉयमेंट के लिए बेसलाइन सुनिश्चित करेगी. 2026 तक पहली उड़ान का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रोजेक्ट की तेज गति को दर्शाता है. अभिमन्यु भारतीय वायुसेना के कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (सीएटीएस) प्रोग्राम के लिए विकसित एचएएल वॉरियर से काफी छोटा और हल्का है. वॉरियर जहां हाई परफॉर्मेंस और ग्रेटर पेलोड कैपेसिटी पर जोर देता है, वहीं अभिमन्यु की ताकत मॉड्यूलैरिटी, कॉस्ट-इफेक्टिवनेस और लार्ज-स्केल डिप्लॉयमेंट में है. इंटरनेशनल स्तर पर यह चीन के जीजे-11 शार्प स्वॉर्ड या यूएस नेवी के एक्सपेंडेबल कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (सीसीए) ड्रोन्स की तुलना में लोअर-एंड सॉल्यूशन है. फिर भी, यह भारत की जरूरतों के अनुरूप प्रैग्मैटिक अप्रोच अपनाता है, जहां अफोर्डेबिलिटी और रैपिड इटरेशन प्राथमिकता हैं. चुनौतियां भी कम नहीं मोमेंटम के बावजूद प्रोग्राम कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. कैरियर एविएशन के डिमांडिंग एनवायरनमेंट में रिलायबल ऑटोनॉमस ऑपरेशन हासिल करना प्रमुख है. हाई-स्पीड, हाई-ऑल्टीट्यूड क्रूड फाइटर्स और अभिमन्यु के बीच परफॉर्मेंस गैप को ब्रिज करना भी जरूरी. इसके अलावा, सस्टेन्ड फंडिंग सुनिश्चित करना और भारत की ऐतिहासिक डिफेंस प्रोक्योरमेंट डिले को पार करना चुनौतीपूर्ण रहेगा. फिर भी अभिमन्यु प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना एविएशन के लिए पिवोटल स्टेप है. यह अनमैन्ड सिस्टम्स को फ्यूचर कॉम्बैट ऑपरेशन्स में इंटीग्रेट करने की नौसेना की कमिटमेंट को सिग्नल करता है. सफल होने पर एन-सीसीएवी प्रोग्राम नौसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी, सर्वाइवेबिलिटी और स्ट्राइक कैपेबिलिटी को काफी बढ़ाएगा. साथ ही, यह स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी में आगे की एडवांसमेंट्स की नींव बनेगा.

1 जनवरी से पैन कार्ड रहेगा गैरमान्य, आयकर विभाग ने दी अहम चेतावनी

नई दिल्ली अगर आपने बार-बार की डेडलाइन के बाद भी अभी तक अपने पैन कार्ड (PAN Card) को आधार कार्ड (Aadhaar Card) से ल‍िंक नहीं कराया है तो यह खबर आपके ल‍िए है. जी हां, ऐसा नहीं करने वालों का पैन (PAN) 1 जनवरी 2026 से काम नहीं करेगा. इनकम टैक्‍स व‍िभाग की तरफ से इसको लेकर बड़ा ऐलान क‍िया गया है. जी हां, आयकर व‍िभाग की तरफ से साफ शब्‍दों में कहा गया है क‍ि यद‍ि आपका पैन कार्ड (PAN Card) आधार कार्ड से नहीं जुड़ा तो 1 जनवरी 2026 से वह काम नहीं करेगा. 31 दिसंबर आधार से ल‍िंक करा लें पैन पैन कार्ड के काम नहीं करने के बाद आपके ल‍िए इनकम टैक्‍स भरने से लेकर रिफंड लेने तक सब मुश्किल हो जाएगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की तरफ से कहा गया क‍ि 1 अक्टूबर 2025 से पहले बने पैन को 31 दिसंबर 2025 तक आधार से ल‍िंक कराया जाना जरूरी है. नहीं तो आपका पैन (PAN) बंद हो जाएगा. आपको बता दें पैन (PAN) 10 ड‍िज‍िट का एक नंबर है. इसे आयकर विभाग की तरफ से जारी क‍िया जाता है. PAN से जुड़ी रहती है सभी टैक्स संबंधी जानकारी पैन (PAN) से आपकी सभी टैक्स संबंधी जानकारी जुड़ी रहती है. इसके जर‍िये आप टैक्स भरना, टीडीएस कटौती और रिटर्न भरने आद‍ि के काम करते हैं. आयकर विभाग की तरफ से फ्रॉड को रोकने के लिए पैन (PAN) को आधार से जोड़ना जरूरी क‍िया गया है. पहले इसको लेकर आयकर व‍िभाग की तरफ से कई बार तारीख बढ़ाने का ऐलान क‍िया गया ताकि लोगों को ज्‍यादा टाइम म‍िल सके. इसमें देरी पर 1000 रुपये का जुर्माना भी है. पैन कार्ड बंद होने से क्‍या नुकसान होगा? > आप टैक्स रिटर्न नहीं भर सकेंगे. > पुराने रिटर्न प्रोसेस नहीं होंगे. > रिफंड नहीं मिलेगा. > गलत रिटर्न के मामले रुक जाएंगे. > ज्यादा टीडीएस कटेगा. ऑनलाइन पैन को आधार से कैसे ल‍िंक करें? > सबसे पहले आयकर व‍िभाग की वेबसाइट www.incometax.gov.in पर जाएं. > इसके बाद क्‍व‍िक लिंक में जाकर 'लिंक आधार' क्लिक करें. > अब पैन (10 अंक) और आधार (12 अंक) दर्ज करें. > यह ध्‍यान रखें क‍ि आप अपना आधार वाला नाम ही लिखें. > 'मैं आधार डिटेल वैलिडेट करने को सहमत हूं' पर टिक करें. > अब वैलिडेट क्लिक करें. 31 दिसंबर के बाद जोड़ने पर 1000 रुपये जुर्माना यद‍ि आप 31 दिसंबर 2025 के बाद पैन और आधार को ल‍िंक कर रहे हैं तो आपको 1000 रुपये जुर्माना देना होगा. ल‍िंक करने का प्रोसेस करने के बाद आपको पॉप-अप आएगा 'पेमेंट डिटेल नहीं मिली'. यहां आप 'ई-पे टैक्स' (E-Pay Tax) पर क्लिक करें. अब अपना पैन नंबर डालकर, मोबाइल नंबर डालें, उसके ऊपर ओटीपी आएगा. अब असेसमेंट ईयर स‍िलेक्‍ट करें. नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड आदि से पेमेंट करें. आपको चालाना म‍िल जाएगा.  

दुनिया पर मंडरा रहा है तापमान संकट, UNEP रिपोर्ट में खुलासा – 2100 तक 2.5°C तक बढ़ेगा पारा

नई दिल्ली अगर सभी देश अपनी जलवायु सुधारने की प्रतिज्ञाओं को पूरी तरह लागू करें, तो भी इस सदी में वैश्विक तापमान 2.3 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. यह आंकड़ा पिछले साल की भविष्यवाणी 2.6-2.8 डिग्री से थोड़ा कम है. लेकिन वर्तमान नीतियां अब भी धरती को 2.8 डिग्री के रास्ते पर ले जा रही हैं, जो पिछले साल के 3.1 डिग्री से कम है. यह बात संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की 'एमिशन गैप रिपोर्ट 2025' में कही गई है. रिपोर्ट कहती है कि दुनिया अभी भी पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री के लक्ष्य से बहुत दूर है. अगले दशक में तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री से ऊपर चला जाएगा, जब तक देश जल्दी कदम न उठाएं. यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि देशों को पेरिस समझौते के तहत तीन मौके मिले हैं वादे निभाने के लिए, लेकिन हर बार वे लक्ष्य से चूक गए. राष्ट्रीय योजनाओं से कुछ प्रगति हुई है, लेकिन यह काफी तेज नहीं है. इसलिए हमें बिना रुके उत्सर्जन कम करने की जरूरत है, खासकर मुश्किल भू-राजनीतिक स्थिति में. यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन से ठीक पहले आई है, जहां विश्व नेता इकट्ठा होंगे. आइए रिपोर्ट की मुख्य बातें समझते हैं. पेरिस लक्ष्य से कितना दूर हैं हम? पेरिस समझौता 2015 का है, जिसमें दुनिया ने तय किया कि तापमान बढ़त को 1.5 डिग्री तक सीमित रखना है. लेकिन रिपोर्ट कहती है कि अगर देश अपनी वर्तमान प्रतिज्ञाओं (एनडीसी) पूरी करें, तो तापमान 2.3-2.5 डिग्री बढ़ेगा. यह थोड़ा बेहतर है, लेकिन अभी भी खतरनाक. वर्तमान नीतियां 2.8 डिग्री का रास्ता दिखा रही हैं. रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगले 10 सालों में तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री पार कर जाएगा. इसे रोकने के लिए बढ़त को सिर्फ 0.3 डिग्री तक सीमित रखना होगा. 2100 तक तापमान को नीचे लाना होगा. अगर ऐसा न हुआ, तो बाढ़, सूखा और चरम मौसम जैसी आपदाएं बढ़ेंगी. देशों की प्रतिज्ञाएं: कितनी पूरी हुईं? पेरिस समझौते के 195 देशों में से सिर्फ एक तिहाई (यानी 65 देश) ने इस साल नई या अपडेटेड राष्ट्रीय प्रतिज्ञाएं (एनडीसी) जमा कीं. ये देश वैश्विक उत्सर्जन का 63 प्रतिशत कवर करते हैं. बाकी देशों ने पुरानी योजनाओं को ही जारी रखा. जी20 देश, जो वैश्विक उत्सर्जन का 77 प्रतिशत हिस्सा हैं. ये भी 2030 के अपने लक्ष्यों को पूरा करने के रास्ते पर नहीं हैं. 2035 तक और गहरी कटौती की जरूरत है, लेकिन वे भी पीछे हैं. रिपोर्ट कहती है कि अमीर देशों ने गरीब देशों को मदद देने का वादा किया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हो रहा. 2024 में उत्सर्जन: रिकॉर्ड स्तर पर 2024 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 57.7 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष (जीटीसीओ2ई) पहुंच गया. यह पिछले साल से 2.3 प्रतिशत ज्यादा है. इस बढ़ोतरी का आधा से ज्यादा हिस्सा जंगलों की कटाई और भूमि उपयोग में बदलाव से आया. जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) से उत्सर्जन भी बढ़ता रहा. शीर्ष उत्सर्जक देशों में भारत और चीन ने सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की. यूरोपीय संघ अकेला बड़ा अर्थव्यवस्था वाला क्षेत्र था, जहां उत्सर्जन कम हुआ. रिपोर्ट कहती है कि अगर 2019 के स्तर से तुलना करें, तो 2030 तक उत्सर्जन 26 प्रतिशत कम और 2035 तक 46 प्रतिशत कम होना चाहिए. तभी 1.5 डिग्री का लक्ष्य संभव है. विशेषज्ञों की राय: जागने का समय जलवायु विशेषज्ञों ने रिपोर्ट को चेतावनी का संकेत बताया है. यूनियन ऑफ कंसर्न्ड साइंटिस्ट्स की रेचल क्लीटस ने कहा कि ये आंकड़े चिंताजनक, गुस्सा दिलाने वाले और दिल तोड़ने वाले हैं. अमीर देशों की कमजोर कार्रवाई और जीवाश्म ईंधन हितों की बाधा इसके लिए जिम्मेदार हैं. एम्बर के रिचर्ड ब्लैक ने कहा कि राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा योजनाएं साफ ऊर्जा संक्रमण की सकारात्मक तस्वीर दिखाती हैं. इंटरनेशनल क्लाइमेट पॉलिसी हब की कैथरीन अब्रेऊ ने जोर दिया कि पेरिस समझौता विफल नहीं हो रहा, बल्कि कुछ शक्तिशाली जी20 देश वादे निभाने में असफल हो रहे हैं. तत्काल कार्रवाई की जरूरत रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बिना तेज और बड़े उत्सर्जन कटौती के, दुनिया आपदा वाली गर्मी में फंस जाएगी. यह गरीब और कमजोर देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी. नवीकरणीय ऊर्जा, जंगलों की रक्षा और जीवाश्म ईंधन छोड़ना जरूरी है.  यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि समय तेजी से निकल रहा है. अगर हम अब नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियां भुगतेंगी. जलवायु परिवर्तन सबकी जिम्मेदारी है, लेकिन अमीर देशों को नेतृत्व करना होगा.  

राष्ट्रीय अध्यक्ष कब चुना जाएगा? अमित शाह ने बता दी टाइमलाइन, अटकलों पर लगा विराम

नई दिल्ली बीजेपी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इस पर लंबे समय से अटकलें लग रही हैं। जल्द ही पार्टी का नया अध्यक्ष चुना जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो सकता है। बिहार चुनाव के बीच 'आजतक' को दिए गए एक इंटरव्यू में जब अमित शाह से पूछा गया कि बीजेपी का अध्यक्ष कब तक चुना जाएगा, तो उन्होंने जवाब दिया, 'अभी चुनाव (बिहार चुनाव) तक तो नहीं होगा, चुनाव के बाद करने का प्रयास करेंगे।' शाह से पूछा गया कि क्या फैसला ले लिया गया है, तो इस पर उन्होंने कहा कि मैं अकेला फैसला नहीं कर सकता, पार्टी करती है। लेकिन मुझे लगता है कि चुनाव के बाद होगा। बता दें कि इस समय जेपी नड्डा बीजेपी की कमान संभाल रहे हैं और इससे पहले उनके कार्यकाल को विस्तार मिल चुका है। कौन कौन रेस में? सूत्रों की मानें तो बीजेपी का अध्यक्ष बनने की रेस में कई नाम हैं। इसमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान आदि के नाम शामिल हैं। हालांकि, पार्टी हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जानी जाती रही है, ऐसे में कोई नया नाम भी इस लिस्ट में शामिल हो सकता है। फिलहाल बीजेपी ने किसी नाम की पुष्टि नहीं की है और अटकलों का दौर जारी है।