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डिजिटल रिकॉर्ड की रफ्तार तेज: एसआईआर के दूसरे चरण में 47.5 करोड़ फॉर्म अपलोड, 11 दिसंबर तक कर सकेंगे ई-एफ सबमिट

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण ने एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है। आयोग द्वारा दी गई ताजा जानकारी के अनुसार, देशभर में 47.5 करोड़ से अधिक यानी 93 प्रतिशत से ज्यादा एन्यूमरेशन फॉर्म (ईएफ) का डिजिटलाइजेशन पूरा हो चुका है। इस अभियान के तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे व्यापक मतदाता सत्यापन कार्य में 99.83 प्रतिशत यानी 50.88 करोड़ से भी अधिक मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं। आयोग ने बताया कि एन्यूमरेशन फॉर्म भरने और जमा करने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर है। यानी मतदाताओं के पास अब भी कुछ दिन बचे हैं, जिसमें वे अपने विवरण की पुष्टि, सुधार या बदलाव करा सकते हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दैनिक बुलेटिन के अनुसार, लक्षद्वीप, गोवा, अंडमान-निकोबार जैसे छोटे राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी 99 प्रतिशत से अधिक फॉर्म वितरित हो चुके हैं। डिजिटलाइजेशन में सर्वाधिक प्रगति लक्षद्वीप, गोवा और अंडमान-निकोबार में दिखी है, जहां 97 से 100 प्रतिशत तक फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं। सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश में 13.27 करोड़ फॉर्म (85 प्रतिशत) डिजिटलाइज्ड हो चुके हैं, जबकि फॉर्म वितरण 99.87 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। देशभर में 5,32,828 बीएलओ और 12 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट्स इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। ईसीआई का स्पष्ट उद्देश्य है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो, अनुचित/दोहराई गई प्रविष्टियां हटें और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और मजबूत बने। आयोग ने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया है कि वे अधिक बीएलओ नियुक्त करें ताकि फॉर्म की समीक्षा और सत्यापन में सहयोग किया जा सके। मतदाता अपने बीएलओ या ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपने विवरण सत्यापित कर दें ताकि आने वाले चुनावों के लिए सूची पूरी तरह तैयार हो सके।

दुनिया की सबसे बड़ी एयर मिस्ट्री: MH370 की खोज 11 साल बाद फिर सुर्खियों में!

कुआलालंपुर विमान हादसों की रहस्यमयी कड़ी में मलेशिया का MH370 आज भी सबसे अनसुलझा रहस्या बना हुआ है, जिसमें एक पूरा विमान आसमान से अचानक गायब हो गया था। हादसे को 11 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद आज तक इसका कोई पुख्ता जवाब नहीं मिला है। अब मलेशिया सरकार ने इसकी तलाश फिर से शुरू करने का फैसला किया है। मलेशियाई अधिकारियों ने घोषणा की है कि मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान MH370 के मलबे की खोज 30 दिसंबर 2025 से एक बार फिर शुरू हो रही है। उस विमान में 227 यात्री और 12 क्रू मेंबर सहित कुल 239 लोग सवार थे। कुआलालंपुर से बीजिंग जा रही मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 8 मार्च 2014 की सुबह टेकऑफ के कुछ ही देर बाद बिना किसी डिस्ट्रेस कॉल या संकेत के रडार से गायब हो गई। इसके बाद विमानन इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और लंबा सर्च ऑपरेशन चला, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। कई तरह के सिद्धांत और षड्यंत्रकारी थ्योरी भी सामने आईं। अब मलेशिया के परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिकी कंपनी ओशन इन्फिनिटी दक्षिणी हिंद महासागर के तल पर फिर से व्यापक खोज शुरू करेगी। यह नया सर्च अभियान 30 दिसंबर 2025 से शुरू होकर रुक-रुक कर लगभग 55 दिन तक चलेगा। इस साल मार्च में ही मलेशिया सरकार ने ओशन इन्फिनिटी के साथ नया करार किया था। पीड़ित परिवारों को मिलेगी मानसिक सुकून विमान में सवार 239 लोगों में सबसे ज्यादा 153 यात्री चीन के थे। इन परिवारों ने पिछले कई सालों से मलेशिया सरकार पर खोज फिर शुरू करने का दबाव बनाए रखा है। कई रिश्तेदार आज भी इंतजार में हैं कि कम से कम उनके प्रियजनों के अवशेष या मलबा मिल जाए, ताकि उन्हें यह समझ आए कि आखिर उनके अपनों के साथ क्या हुआ। सरकार इस खोज को परिवारों को अंतिम जवाब देने की कोशिश मान रही है। मलेशिया को कोई वित्तीय बोझ नहीं यह सर्च ऑपरेशन 'No Find, No Fee' आधार पर होगा, यानी अगर विमान या उसका विश्वसनीय मलबा नहीं मिला तो मलेशिया सरकार को एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। कंपनी को 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर तभी मिलेंगे जब MH370 का मुख्य मलबा या ठोस सबूत मिलेगा। यह वही शर्त 2018 के असफल अभियान में भी थी। इस बार ज्यादा सटीक जगह पर तलाश ओशन इन्फिनिटी ने 2018 के बाद लगातार नए सैटेलाइट डेटा, समुद्री धाराओं के मॉडल और ड्रिफ्ट एनालिसिस का अध्ययन किया है। इसके आधार पर अब खोज क्षेत्र को और छोटा व सटीक कर दिया गया है, जहां विशेषज्ञों के अनुसार विमान के मिलने की सबसे ज्यादा संभावना है। अब तक क्या-क्या हो चुका है? 2014-2017: मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और चीन ने मिलकर 1,20,000 वर्ग किमी क्षेत्र खंगाला था, लेकिन कुछ मिला नहीं। 2018: ओशन इन्फिनिटी ने 25000 वर्ग किमी क्षेत्र खोजा। एक बार फिर असफलता हाथ लगी

भारत को रोकने की भूल भारी पड़ेगी: जयशंकर का तीखा बयान—‘दीवार खड़ी की तो सबसे बड़ा नुकसान US-Europe का’

नई दिल्ली  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को दो टूक कहा कि वैसे देश सबसे बड़े लूज़र होंगे, जो सीमा पार प्रोफेशनल्स के फ्लो में बहुत ज़्यादा रुकावटें डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में दूसरे देशों को यह समझाने की ज़रूरत है कि टैलेंट (प्रतिभाओं) का इस्तेमाल आपसी फायदे के लिए ही है। मोबिलिटी पर एक कॉन्क्लेव के इंटरैक्टिव सेशन में उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार की इमिग्रेशन पॉलिसी पर सख्ती के बीच आई है। ट्रंप प्रशासन ने नई नीति के तहत H-1B वीज़ा पर भारी भरकम फीस लगा दी है और इमिग्रेशन नियमों को कड़ा कर दिया है ताकि विदेशी प्रोफेशनल्स अमेरिका न पहुंच सकें।   जयशंकर ने कहा कि सीमाओं के पार पेशेवरों के प्रवाह में बहुत अधिक बाधाएं पैदा करने वाले देशों को “कुल मिलाकर नुकसान” ही होगा। गतिशीलता पर एक सम्‍मेलन में आयोजित संवादात्मक सत्र के दौरान दिए गए उनके बयान ट्रंप प्रशासन की आव्रजन पर सख्ती के अनुरूप अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा पर नया शुल्क लगाने के फैसले की पृष्ठभूमि में आए हैं। जयशंकर ने कहा, “अगर वे प्रतिभा के प्रवाह में बहुत ज्यादा रुकावटें खड़ी करते हैं, तो उन्हें कुल मिलाकर नुकसान होगा। खासकर अगर आप उन्नत विनिर्माण के युग में प्रवेश कर रहे हैं, तो आपको और ज्यादा प्रतिभा की जरूरत होगी।” वह एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर चिंताओं सहित आव्रजन से जुड़े व्यापक मुद्दों पर पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। किसी देश का नाम लिए बगैर जयशंकर ने कहा कि भारत को अन्य देशों को यह समझाने की जरूरत है कि “सीमा पार प्रतिभा का इस्तेमाल हमारे पारस्परिक लाभ के लिए है”। उन्होंने कहा, “अक्सर उद्यमिता और प्रौद्योगिकी के अग्रणी लोग ही गतिशीलता के पक्ष में दलील देते हैं। इसके विपरीत, वे लोग जिनके पास कोई राजनीतिक आधार या संबोधित करने के लिए एक निश्चित मतदाता वर्ग होता है, वे इसका विरोध कर सकते हैं। हालांकि, अंततः वे किसी न किसी प्रकार के समझौते पर पहुंच ही जाएंगे।” जयशंकर ने कुछ देशों में प्रतिभाओं की गतिशीलता के लिये प्रतिरोध को कुछ कंपनियों द्वारा चीन से अपने विनिर्माण केंद्र स्थानांतरित करने के प्रयासों से भी जोड़ा। एच-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत, कंपनियां अमेरिका में काम करने के लिए विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों की भर्ती करती हैं, शुरुआत में यह अवधि तीन साल के लिए होती है, जिसे तीन और वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के अनुसार, हाल के वर्षों में स्वीकृत सभी एच-1बी आवेदनों में से लगभग 71 प्रतिशत आवेदन भारतीयों के थे। जयशंकर ने कहा, “यदि कई विकसित देशों में नौकरियों पर दबाव है, तो उसका कारण यह नहीं है कि उन क्षेत्रों में लोग बाहर से आए। असल वजह यह है कि उन्होंने अपनी विनिर्माण गतिविधियां बाहर जाने दीं – और आप जानते हैं, कहां।” उन्होंने कहा, “यदि लोगों के लिए यात्रा करना कठिन हो जाता है, तो भी काम रुकने वाला नहीं है। यदि लोग यात्रा नहीं करेंगे, तो काम बाहर जाएगा।” जयशंकर ने कानूनी गतिशीलता के महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “एक वैश्वीकृत दुनिया में, मुझे लगता है कि जब हम अपने बाहरी संबंधों, खासकर आर्थिक संबंधों की बात करते हैं, तो हम अक्सर व्यापार पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।” उन्होंने कहा, “लेकिन हम अक्सर काम और उससे जुड़ी गतिशीलता की उपेक्षा करते हैं। आपको यह समझाने के लिए कि हम किस चीज पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। पिछले साल, भारत में 135 अरब अमेरिकी डॉलर का धन प्रेषण हुआ। यह अमेरिका को हमारे निर्यात का लगभग दोगुना है।” इसके साथ ही जयशंकर ने अवैध आवाजाही के प्रति भी आगाह किया और इसके संभावित परिणामों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “यदि आप मानव तस्करी और इससे जुड़े सभी अपराधों को देखें, तो अक्सर इसमें विभिन्न प्रकार के एजेंडे वाले लोग शामिल होते हैं, जैसे राजनीतिक एजेंडा, अलगाववादी एजेंडा, वे सभी इसके अवैध कारोबार में शामिल हो जाते हैं।”  

एयरपोर्ट सर्वर फेल! बेंगलुरु में उड़ानें रुकीं, दिल्ली सहित कई शहरों में यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली  बुधवार सुबह देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर चेक-इन सिस्टम अचानक ठप्प होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामने करना पड़ा। इसके अलावा कुछ टेक्नीकल खराबी के चलते भी बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 42 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। Microsoft आउटेज की आशंका पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी एयरपोर्ट पर एक नोटिस जारी कर बताया गया कि यह समस्या Microsoft Windows की ग्लोबल आउटेज के कारण आई है, जिससे एयरपोर्ट के आईटी और चेक-इन सिस्टम प्रभावित हुए हैं। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट या एयरलाइंस की ओर से इस पर तत्काल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। तकनीकी गड़बड़ी के चलते कई जगह एयरलाइंस को मजबूरन मैनुअल चेक-इन और बोर्डिंग प्रक्रिया पर निर्भर होना पड़ा। वाराणसी में इंडिगो, स्पाइसजेट, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस सहित कई एयरलाइनों की सेवाएं प्रभावित हुईं। हैदराबाद और बेंगलुरु में अफरा-तफरी का माहौल     हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल रहा, जहाँ सुबह-सुबह हेल्पडेस्क के सामने यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। यहाँ 7 डिपार्चर और 12 अराइवल उड़ानें रद्द हुईं।     बेंगलुरु में भी कई उड़ानें देरी से चलीं। इंडिगो ने परिचालन संबंधी चुनौतियों का हवाला देते हुए कुल 42 उड़ानें रद्द कीं, जिनमें 22 अराइवल और 20 डिपार्चर शामिल थे।     दिल्ली एयरपोर्ट ने भी सोशल मीडिया पर एक एडवाइजरी जारी कर बताया कि कुछ घरेलू एयरलाइंस परिचालन संबंधी चुनौतियों से जूझ रही हैं, जिससे शेड्यूल प्रभावित हो सकता है। एयरलाइंस का अपडेट और राहत के प्रयास एयर इंडिया ने जानकारी दी कि थर्ड-पार्टी सिस्टम अब बहाल कर दिया गया है और सभी एयरपोर्ट्स पर चेक-इन सामान्य रूप से चल रहा है। वहीं इंडिगो ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से तकनीकी दिक्कतें, भीड़भाड़ और ऑपरेशनल आवश्यकताओं के कारण देरी और कैंसलेशन बढ़े हैं। प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक उड़ान या रिफंड की सुविधा दी जा रही है।   बता दें कि पिछले महीने भी दिल्ली एयरपोर्ट पर AMSS सिस्टम में खराबी के कारण 800 से ज़्यादा उड़ानें देर से चली थीं, जिससे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को मैनुअली काम करना पड़ा था।

रेलवे की नई सुविधा: सिर्फ 20 रुपये में यात्रियों को मिलेगा बेडरोल पैक, देखें पूरी गाइडलाइन

नई दिल्ली  ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा बदलाव शुरू किया है। अब तक बेडरोल की सुविधा केवल एसी कोच तक ही सीमित थी, लेकिन अब रेलवे इस सुविधा को स्लीपर कोच तक भी पहुंचाने जा रहा है। इससे वे यात्री भी लंबी दूरी के सफर में आराम पा सकेंगे, जो बिना तैयारी के यात्रा पर निकलते हैं या भारी सामान लेकर चलना नहीं चाहते। रेलवे ने इस सुविधा को ऑन-डिमांड सर्विस के तौर पर शुरू करने का फैसला किया है। यानी आपको बेडरोल तभी मिलेगा, जब आप चाहेंगे और उसके लिए एक छोटा सा चार्ज देंगे। स्लीपर क्लास में बेडरोल अब ऑन-डिमांड स्लीपर कोच में बेडरोल फ्री में नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसकी अलग से कीमत तय की गई है। इसका फायदा उन यात्रियों को होगा जो: अचानक यात्रा पर निकलते हैं अपना बेडरोल घर से नहीं लाना चाहते हल्के सामान के साथ यात्रा करना पसंद करते हैं रेलवे का उद्देश्य है कि किराया बढ़ाए बिना स्लीपर यात्रा को और आरामदायक बनाया जाए। यदि यात्रियों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला, तो यह सुविधा धीरे-धीरे और ट्रेनों में बढ़ाई जाएगी। 20 रुपये में क्या मिलेगा? रेलवे ने स्लीपर बेडरोल के लिए तीन अलग विकल्प तय किए हैं: सिर्फ चादर – 20 रुपये एक साफ-सुथरी चादर कंबल, तकिया या कवर इसमें शामिल नहीं यह विकल्प उनके लिए सही है जिन्हें सिर्फ सोने के लिए चादर चाहिए। सिर्फ तकिया कवर 30 रुपये एक तकिया पिलो कवर यदि चादर घर से लाई है तो यह पैक काफी उपयोगी होगा। कहां से शुरू हो रही है यह सुविधा? फिलहाल रेलवे इसे ट्रायल बेसिस पर कुछ खास ट्रेनों में शुरू कर रहा है। अभी कुल 10 ट्रेनें इस लिस्ट में शामिल हैं: 12671/12672 – नीलगिरी सुपरफास्ट एक्सप्रेस 12685/12686 – मैंगलोर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 16179/16180 – मन्नारगुड़ी एक्सप्रेस 20605/20606 – तिरुचेंदुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 22651/22652 – पालघाट एक्सप्रेस 20681/20682 – सिलंबु सुपरफास्ट एक्सप्रेस 22657/22658 – तांबरम–नागरकोइल सुपरफास्ट एक्सप्रेस 12695/12696 – त्रिवेंद्रम सुपरफास्ट एक्सप्रेस 22639/22640 – अल्लेप्पी एक्सप्रेस 16159/16160 – मैंगलोर एक्सप्रेस  

समावेशी भारत का संकल्प: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं, विकास तभी पूरा जब दिव्यांग बनें बराबरी के हिस्सेदार

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को विश्व दिव्यांग दिवस के मौके पर राष्ट्रपति भवन में साल 2025 के राष्ट्रीय पुरस्कार वितरित किए। ये सम्मान उन लोगों और संस्थाओं को दिए गए जिन्होंने दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने में बेहतरीन काम किया। समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने साफ कहा, “दिव्यांगजन दया के नहीं, बराबरी के हकदार हैं। समाज और देश का विकास तभी पूरा माना जाएगा, जब हर दिव्यांग व्यक्ति उसमें बराबर का हिस्सेदार बने। ये कोई एहसान या दान का काम नहीं, बल्कि हम सबका फर्ज है।” इस साल की थीम है – “सामाजिक प्रगति के लिए दिव्यांगता-समावेशी समाज को बढ़ावा देना”।  राष्ट्रपति ने कहा कि ये थीम बिल्कुल सही दिशा दिखाती है। भारत अब पुरानी कल्याण वाली सोच से निकलकर अधिकार और सम्मान वाली सोच अपना रहा है। 2015 में “दिव्यांगजन” शब्द को अपनाकर सरकार ने यही संदेश दिया था कि ये लोग कमजोर नहीं, बल्कि दैवीय शक्ति वाले हैं। राष्ट्रपति ने सरकार की कोशिशों की तारीफ की। उन्होंने बताया कि देश में साइन लैंग्वेज रिसर्च, मेंटल हेल्थ रिहैबिलिटेशन और स्पोर्ट्स ट्रेनिंग के लिए कई राष्ट्रीय संस्थान बनाए गए हैं। अब तक लाखों दिव्यांगजनों को यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड मिल चुका है, जिससे उन्हें नौकरी, शिक्षा और यात्रा में आरक्षण व सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि सरकार अकेले सब कुछ नहीं कर सकती। हमें अपने घर, मोहल्ले, स्कूल और ऑफिस में दिव्यांगजनों को साथ लेकर चलना होगा। उनकी इज्जत और आत्मनिर्भरता बढ़ाना हर नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रपति ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और कहा, “आप सबने साबित कर दिया कि अगर मौका मिले तो दिव्यांगजन किसी से पीछे नहीं रहते। आप सब समाज के लिए मिसाल हैं। इस मौके पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, राज्य मंत्री रामदास आठवले और प्रतिभा पाटिल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

दिल्ली में अलर्ट मोड: पुतिन का खाना साथ लाने का फैसला, NSG–SWAT और रूसी कमांडो संभालेंगे सुरक्षा

नई दिल्ली  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को चार साल बाद भारत आ रहे हैं, और इस हाई-प्रोफाइल यात्रा के लिए दिल्ली को पूरी तरह हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में बदल दिया गया है। रूस के लगभग 130 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आने वाले पुतिन के लिए भारतीय और रूसी सुरक्षा एजेंसियां मिलकर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी कवच तैयार कर चुकी हैं। दिल्ली किले में बदली  हाल ही में दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद सुरक्षा पहले ही अलर्ट पर थी, अब पुतिन के दौरे को देखते हुए इसे और सख्त किया गया है। मुख्य सुरक्षा एजेंसियां NSG कमांडोज, SWAT टीमें, पैरामिलिट्री फोर्सेज, दिल्ली पुलिस स्पेशल यूनिट्स, रूसी स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप, रूसी एडवांस टीम के 50 से अधिक कमांडोज पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और उन्होंने रूट, होटल, वेन्यू और सिक्योरिटी प्वाइंट्स की माइक्रो-इंस्पेक्शन की है। रूसी राष्ट्रपति की पर्सनल सिक्योरिटी  पुतिन की सुरक्षा दुनिया की सबसे एडवांस मानी जाती है, और भारत में भी उसी प्रोटोकॉल को लागू किया जा रहा है। उनका खाना रूस से ही आएगा, कई सुरक्षा जांचों के बाद ही परोसा जाएगा। पुतिन की टीम के पास पोर्टेबल सिक्योरिटी किट है, जो हमेशा कार व होटल में साथ रहेगी। सबसे अंदरूनी सुरक्षा घेरा मास्को से आए सुरक्षा अधिकारी संभालेंगे।  टेक्नोलॉजी बेस्ड सिक्योरिटी      दिल्ली में सुरक्षा का सारा फोकस हाई-टेक मॉनिटरिंग पर है      एंटी-ड्रोन गन्स की तैनाती     हवा में लगातार उड़ते निगरानी ड्रोन     हजारों सीसीटीवी कैमरे     पुतिन के काफिले को ट्रैक करने के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम     दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम से 24×7 रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन     खुफिया एजेंसियां भी किसी संभावित खतरे की निगरानी में लगातार लगी हुई हैं। ट्रैफिक और एरिया सैनिटाइजेशन  दिल्ली पुलिस के टॉप अफसर पूरे रूट को सैनिटाइज कर रहे हैं। पुतिन की मूवमेंट के दौरान कुछ रास्तों पर टेम्परेरी डायवर्जन किया है। आम लोगों का ध्यान रखते हुए पहले से ट्रैफिक एडवाइजरी जारी।  जिस स्थान पर पुतिन रुकेंगे, उसकी लोकेशन सुरक्षा कारणों से गोपनीय  रखी गई है। दौरे का एजेंडा     रक्षा,ऊर्जा, स्पेस और S-400 जैसे बड़े सौदे     भारत–रूस वार्ता में   प्रमुख मुद्दे शामिल होंगे      S-400 मिसाइल सिस्टम की नई डील     Su-57 फाइटर जेट पर बातचीत     ऊर्जा क्षेत्र में तेल आयात बढ़ाना     असैन्य परमाणु सहयोग में विस्तार     स्पेस और ट्रेड पर नई साझेदारी हाई अलर्ट क्यों?  यह यात्रा यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन का पहला भारत दौरा है, इसलिए वैश्विक स्तर पर भी यह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर थीं।पुतिन की यात्रा को देखते हुए एक बार फिर अतिरिक्त प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश न रहे। ोपुतिन का यह दौरा केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत-रूस साझेदारी के नए दौर की तैयारी माना जा रहा है।सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक कड़ी है और पूरे 30 घंटे तक दिल्ली एक किलाबंद राजधानी की तरह काम करेगी। दोनों देशों की नज़रें अब इस बात पर हैं कि पुतिन की यात्रा में कौन से बड़े रणनीतिक फैसले सामने आते हैं  

Shocking! पुतिन बोले—यूरोप नहीं चाहता युद्ध खत्म हो, यूक्रेन को गुमराह कर रहा है

रूस  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों पर कीव के साथ उसके लगभग चार साल से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयासों को बाधित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भेजे गए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से ठीक पहले यह टिप्पणी की। रूसी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास क्रेमलिन में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर के साथ बातचीत से पहले पुतिन ने यूरोपीय देशों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘उनके पास शांति का एजेंडा नहीं है, वे युद्ध के पक्ष में हैं।'' उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप शांति प्रस्तावों में रूस के लिए "पूरी तरह से अस्वीकार्य मांगों" को जोड़कर समग्र शांति प्रक्रिया को अवरुद्ध कर रहा है। पुतिन ने यह भी दोहराया कि रूस की यूरोप पर हमला करने की कोई योजना नहीं है, लेकिन चेतावनी दी कि यदि यूरोप ने युद्ध शुरू किया, तो रूस "पूरी तरह तैयार" है। दूसरी ओर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की वार्ता के परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।   आयरलैंड की राजधानी डबलिन में उन्होंने कहा कि अमेरिकी दूतों की रिपोर्ट पर ही आगे की बातचीत और बैठकें निर्भर करेंगी। जेलेंस्की ने कहा, "बातचीत हो रही है, लेकिन हमें परिणाम चाहिए। हमारे लोग हर दिन मर रहे हैं।" मॉस्को में अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के बीच बंद कमरे में यह बैठक लगभग पांच घंटे तक चली। दोनों पक्षों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।    

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 32,000 शिक्षकों की सेवाएं बरकरार, नहीं जाएगी नौकरी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के 32 हजार प्राथमिक विद्यालय के टीचरों को बुधवार को बड़ी खुशखबरी मिली है। कलकत्ता हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने बुधवार को एकल पीठ के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल में 32,000 प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। इससे अब इन टीचरों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा खत्म हो गया है। इन शिक्षकों की भर्ती 2014 की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के माध्यम से की गई थी। जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखने के लिए इच्छुक नहीं है, क्योंकि सभी भर्तियों में अनियमितताएं साबित नहीं हुई हैं। न्यायालय ने कहा कि नौ वर्ष के बाद नौकरी समाप्त करने से प्राथमिक शिक्षकों और उनके परिवारों पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसमें कहा गया है कि सीबीआई, जिसे उच्च न्यायालय द्वारा मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया था, ने शुरू में 264 नियुक्तियों की पहचान की थी जिनमें अनियमितताएं हुई थीं, जिसके बाद अन्य 96 शिक्षकों के नाम एजेंसी की जांच के दायरे में आए। अदालत ने कहा कि इसे देखते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता। तत्कालीन न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल पीठ ने 12 मई, 2023 को इन 32,000 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्यु बसु ने प्राथमिक विद्यालयों के 32,000 शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द करने वाले एकल पीठ के फैसले को निरस्त करने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ की सराहना करते हुए बुधवार को कहा कि सच्चाई की जीत हुई है क्योंकि शिक्षकों की नौकरियां ‘‘सुरक्षित’’ बनी हुई हैं। बसु ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को भी बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘‘प्राथमिक विद्यालय के 32,000 शिक्षकों की नौकरियां पूरी तरह सुरक्षित हैं। शिक्षकों को मेरी शुभकामनाएं। सच्चाई की जीत हुई है।’’  

FBI ने जारी किया रेड अलर्ट: भारतीय मूल की मां-बेटे की हत्या का आरोपी नजीर हमीद फरार, अमेरिका ने भारत से किया प्रत्यर्पण अनुरोध

न्यू यॉर्क  अमेरिका में 2017 में एक भारतीय महिला शशिकला नर्रा (38) और उनके 6 वर्षीय बेटे अनीश नर्रा की नृशंस हत्या के मामले में फरार आरोपी भारतीय नागरिक नजीर हमीद की तलाश तेज हो गई है।  FBI ने नजीर को मोस्ट वांटेड लिस्ट में डालते हुए उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 50,000 डॉलर (लगभग 42 लाख रुपये) पुरस्कार देने का ऐलान किया है। 23 मार्च 2017 को अमेरिका के न्यू जर्सी में स्थित उनके अपार्टमेंट से मां-बेटे के शव बरामद हुए थे।  दोनों की हत्या चाकू से की गई ।अनीश का सिर धड़ से अलग मिला और शरीर पर कई घावों के निशान थे। यह अमेरिका की सबसे क्रूर हत्याओं में से एक मानी गई। जांच में पता चला कि आरोपी नजीर हमीद उसी अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहता था और वह मृतकों के पति/पिता का पीछा करता था । घटनास्थल पर मिला खून का धब्बा नजीर के DNA से मैच हुआ। हत्या के छह महीने बाद वह भारत भाग आया और तब से यहीं छिपा है।    न्यू जर्सी के गवर्नर फिल मर्फी ने भारत के राजदूत विनय क्वात्रा को फोन कर कहा कि हमीद को तुरंत अमेरिका भेजने में सहयोग किया जाए।बर्लिंगटन काउंटी की अभियोजक लाचिया ब्रैडशॉ ने भी कहा कि “न्याय की कोई सीमा नहीं होती  यह अपराधी सजा से बचना नहीं चाहिए।” FBI और अमेरिकी अधिकारी लगातार भारत से संपर्क में हैं ताकि नजीर को जल्द से जल्द अमेरिका लाया जा सके। फरवरी 2025 में उस पर आधिकारिक तौर पर हत्या सहित छह गंभीर आरोप दर्ज किए गए।