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तमिलनाडु में दो बसों की आमने-सामने भिड़ंत, 11 की मौत और कई गंभीर

शिवगंगा तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में रविवार को दो बसों के आमने-सामने जोरदार टक्कर में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और करीब 40 लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा तिरुप्पत्तूर के पास कुम्मानगुडी रोड पर हुआ। मृतकों में एक बच्चा भी शामिल है। एक बस तिरुप्पुर से कराईकुड़ी जा रही थी, जबकि दूसरी बस कराईकुड़ी से दिन्दिगुल की ओर जा रही थी। इस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. मौके पर पहुंची आपातकालीन टीम पुलिस ने बताया कि एक बस कराईकुडी जा रही थी जबकि दूसरी मदुरै जा रही थी, तभी तिरुपथुर के पास सड़क पर दोनों बसें आपस में टकरा गईं. टक्कर के बाद कई यात्री गाड़ियों में फंस गए, लेकिन स्थानीय निवासियों और आपातकालीन टीमों ने उन्हें बाहर निकाला. घायलों को शिवगंगा सरकारी अस्पताल ले जाया गया है. अधिकारियों ने बताया कि कुछ यात्रियों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. पुलिस ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी दोनों बसों के आगे के हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिसमें कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. एक हफ्ते दो बड़ी बस दुर्घटना तमिलनाडु में पिछले एक हफ्ते के दौरान दूसरी बार ऐसा हुआ है जब दो बसों की आपस में टक्कर हुई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई. राज्य के तेनकासी जिले में सोमवार (23 नवंबर 2025) को दो बसों की आमने-सामने टक्कर हो गई थी. इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 30 यात्री घायल हुए थे. मरने वालों में 5 महिलाएं और एक पुरुष शामिल थे. मदुरै से सेनकोट्टई जा रही बस और तेनकासी से कोविलपट्टी जा रही बस टकरा गई थी. तब जांच में पता चला था कि गलती ड्राइवर की थी. मदुरै से सेनकोट्टई जा रही बस का ड्राइवर लापरवाही और तेज स्पीड में गाड़ी चला रहा था.

यूक्रेन-रूस टकराव का नया मोर्चा: तेल टैंकरों पर हमले से तुर्की के हितों को खतरा

तुर्की  तुर्की सरकार ने काला सागर में रूसी शैडो फ्लीट के दो तेल टैंकरों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। तुर्की विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओंकू केसेली ने कहा कि केरोस (Koeros) और विराट (Virat) नामक जहाजों पर हुए हमले तुर्की के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) के अंदर हुए थे। इन हमलों से क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा, मानव जीवन, संपत्ति और पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। शनिवार देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट में केसेली ने लिखा कि तुर्की यूक्रेन युद्ध को काला सागर के पार फैलने से रोकने और अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी संबंधित पक्षों से लगातार संपर्क और बातचीत कर रहा है।   ओपनसैंक्शंस डेटाबेस (जो प्रतिबंधों से बचने वाले व्यक्तियों और संगठनों पर नजर रखता है) के अनुसार, ये दोनों जहाज़ उस शैडो फ्लीट का हिस्सा हैं जिसका उपयोग 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण के बाद लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए किया जा रहा है। तुर्की के समुद्री मामलों के महानिदेशालय ने बताया कि शुक्रवार रात तुर्की तट से लगभग 28 समुद्री मील दूर नोवोरोसिस्क (रूस) की ओर जा रहा खाली केरोस टैंकर अचानक बाहरी आघात के कारण जल उठा। जहाज पर सवार सभी 25 क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं और बचाव दल उन्हें वापस लाने की तैयारी कर रहे हैं। तुर्की के यातायात एवं आधारभूत संरचना मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया कि जहाज पर सवार सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। यह जहाज मिस्र से रूस की ओर जा रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो जहाज डूब सकता है। दूसरे जहाज विराट के बारे में महानिदेशालय ने कहा कि टैंकर विराट का चालक दल ने सूचना दी कि तुर्की तट से करीब 35 समुद्री मील दूर जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इंजन रूम में भारी धुआं भर गया था। बचाव दल और एक व्यापारी जहाज को मौके पर रवाना कर दिया गया है। विराट के 20 क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं। गौरतलब है कि यूक्रेन ने स्वीकार किया है कि उसने शुक्रवार दोपहर तुर्की के काला सागर तट के निकट इन दोनों टैंकरों पर लगातार हमले के लिए अपने सर्फेस नौसैनिक ड्रोन का इस्तेमाल किया था। बता दें कि यूक्रेन ने युद्ध के दौरान रूसी नौसेना के जहाजों पर कई सफल ड्रोन हमले किए हैं, खासकर विस्फोटक से लदे समुद्री ड्रोनों के जरिए। हालांकि अब तक यूक्रेनी अभियान मुख्य रूप से उत्तरी काला सागर तक ही सीमित रहे थे।

चक्रवाती तूफान दितवाह का खतरा बढ़ा—भारत के बेहद करीब, श्रीलंका में तबाही से 200 जानें गईं

चेन्नई  श्रीलंका में भारी तबाही मचाने के बाद चक्रवाती तूफान दितवाह भारत पहुंचने वाला है। तमिलनाडु से अभी करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर है। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी के ऊपर चक्रवाती तूफान दितवाह की वजह से 30 नवंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश होने वाली है। 30 नवंबर और एक दिसंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा, तेलंगाना में भी बहुत भारी बरसात की चेतावनी है। श्रीलंका में दितवाह की वजह से करीब 200 लोगों की जान गई है।   चक्रवाती तूफान दितवाह आज सुबह साढ़े आठ बजे पुडुचेरी से 110 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, चेन्नई से 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था और तेज गति से दक्षिण के तटों की ओर बढ़ रहा। अब यह चेन्नई से महज 80 किमी की दूरी पर है। यह आज दोपहर और शाम तक क्रमश: तमिलनाडु-पुडुचेरी तट से न्यूनतम 60 किलोमीटर और 30 किलोमीटर की दूरी पर बंगाल की खाड़ी पर केंद्रित होगा। मौसम विभाग के अनुसार, दितवाह की वजह से 30 नवंबर और एक दिसंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। 30 नवंबर को केरल, माहे में, 30 नवंबर को उत्तरी तटीय तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटी यआंध्र प्रदेश के दक्षिण जिलों में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा, उत्तरी तमिलनाडु में कहीं-कहीं गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट है। बता दें कि मौसम विभाग ने रविवार को उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और आस-पास के दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। IMD के रविवार सुबह 5:30 बजे के अपडेट के अनुसार, साइक्लोन दितवाह पिछले छह घंटों में 7 किलोमीटर की स्पीड से लगभग उत्तर की ओर बढ़ा और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और आस-पास के उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी तटों पर केंद्रित था। श्रीलंका में करीब 200 लोगों की जान ले चुका है तूफान तूफान दितवाह की वजह से आई भयानक बाढ़, लैंडस्लाइड और तबाही के बाद श्रीलंका ने रविवार को भी भारत की मदद से राहत और बचाव का काम जारी रखा। दितवाह में करीब श्रीलंका में 200 से लोग मारे गए हैं। श्रीलंका के डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) द्वारा रविवार दोपहर 12 बजे जारी किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार से अब तक 193 लोग मारे गए हैं और 228 लापता हैं। डीएमसी ने कहा कि खराब मौसम की वजह से 2,66,114 परिवारों के कुल 9,68,304 लोग प्रभावित हुए हैं। इस बीच, भारत की नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के लोग, इंडियन एयर फोर्स के साथ मिलकर, युद्ध स्तर पर कीमती जानें बचाने के लिए श्रीलंकाई अधिकारियों की मदद कर रहे हैं।  

‘T-Dome’ की धमक: ताइवान का नया हथियार चीन की रणनीति में भूचाल लाने को तैयार

ताइवान  ताइवान की सरकार ने चीन के किसी भी संभावित आक्रमण से निपटने के लिए अतिरिक्त 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रक्षा खर्च का प्रस्ताव रखा है। इस भारी-भरकम राशि का बड़ा हिस्सा टी-डोम (T-Dome) नामक एक बहु-स्तरीय (मल्टी-लेयर्ड) वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने पर खर्च होगा। यह प्रणाली ताइवान द्वीप को चीनी लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक/क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोनों के हमलों से बचाने के लिए तैयार की जा रही है।   यह कदम अमेरिका के उस दबाव के बीच उठाया जा रहा है जिसमें वह ताइवान से अपने रक्षा खर्च को लगातार बढ़ाने की मांग कर रहा है। यह विशेष बजट 2026 से 2033 तक आठ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खर्च किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति लाई चिंग-ते पहले ही रक्षा खर्च को जीडीपी के 5% तक ले जाने का वादा कर चुके हैं। वर्तमान में ताइवान ने 2026 के लिए अपना नियमित रक्षा बजट बढ़ाकर 31.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया है, जिससे कुल रक्षा व्यय जीडीपी का 3.3% हो जाएगा। लाई ने बुधवार को ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में प्रकाशित अपने लेख में इस विशेष बजट का पूर्वानुमान देते हुए कहा था कि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अमेरिका से हथियार खरीदने में होगा। रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने बुधवार को स्पष्ट किया कि 40 बिलियन डॉलर इस विशेष बजट की ऊपरी सीमा है। इसका उपयोग सटीक मारक मिसाइलें खरीदने तथा ताइवान-अमेरिका के बीच संयुक्त रूप से हथियार प्रणालियों के विकास और खरीद के लिए होगा। टी-डोम है क्या? राष्ट्रपति लाई ने 10 अक्टूबर को टी-डोम की औपचारिक घोषणा की थी और इसकी तुलना इजरायल की मशहूर 'आयरन डोम' से की थी। हालांकि दोनों में काफी अंतर हैं। ताइपे स्थित रक्षा विश्लेषक जे माइकल कोल के अनुसार, आयरन डोम छोटी दूरी के रॉकेट्स के खिलाफ है, जबकि टी-डोम को खतरों की बहुत व्यापक श्रेणी से निपटना होगा। इसमें पीएलए (चीनी सेना) के लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन सभी शामिल हैं। बता दें कि ताइवान के पास पहले से ही अमेरिकी पैट्रियट पीएसी-3, स्वदेशी स्काई बो तथा तियान कुंग प्रणालियां मौजूद हैं। वह अमेरिका से NASAMS (नेशनल एडवांस्ड सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम) की नई यूनिट्स की डिलीवरी का भी इंतजार कर रहा है। टी-डोम इन सभी मौजूदा प्रणालियों को आधुनिक रडार, सेंसर और कमांड सेंटर से जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क बनाएगा, ताकि 'तेज पता लगाने और प्रभावी अवरोधन' संभव हो सके।    ताइवान को इसकी जरूरत क्यों पड़ी? यूक्रेन युद्ध ने ताइवान को सिखाया है कि मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ही लड़ाकू सेना, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और आम नागरिकों की जान बचा सकती है। पिछले दस साल में ताइवान ने अपनी सेना को आधुनिक बनाने और अमेरिकी हथियार खरीदने में अरबों डॉलर खर्च किए हैं, फिर भी चीन के साथ पूर्ण युद्ध में वह अभी भी हथियारों की संख्या और किस्म में काफी पीछे है। सु त्ज़ु-युन कहते हैं कि अगर अचानक चीनी मिसाइल हमले को 'निष्प्रभावी' करने की क्षमता होगी, तो बीजिंग को आक्रमण करने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा। उनके अनुसार ताइवान के आसपास तैनात चीनी युद्धपोत और मुख्य भूमि पर मौजूद सैकड़ों मिसाइल लॉन्चर तीन मिनट के अंदर ही ताइवान के एयरफील्ड, रडार और सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों मिसाइलें दाग सकते हैं। इसी खतरे से निपटने के लिए एक एकीकृत, तेज़ प्रतिक्रिया वाली वायु रक्षा प्रणाली जरूरी है।

मोहन भागवत का तीखा सवाल: एक शब्द का अंग्रेजी अनुवाद नहीं बता पाए लोग!

नई दिल्ली  आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने मातृ भाषाओं के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि बहुत सारे ऐसे भी भारतीय हैं जिन्हें अपनी भाषा ही नहीं आती है। नागपुर में एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर उन्होने कहा कि हमारी भाषायी विरासत का क्षय हो रहा है। भागवत ने कहा, एक समय था जब रोजामर्रा के जीवन में सारा संचार संस्कृत में होता था। अब हाल यह है कि अमेरिका के प्रोफेसर हमें संस्कृत पढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि भाषायी चेतना को लेकर हमें आत्ममंथन करने की जरूरत है।   भागवत ने कहा कि बहुत सारे बच्चे आज अपनी ही भाषा के शब्द नहीं जानते हैं और वे अंग्रेजी का मिश्रण करके भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, मैं अंग्रेजी माध्यम वाली शिक्षा को दोष नहीं दे रहा हूं लेकिन कम से कम अपनी भाषा को भी तो जानना चाहिए। अगर हम अपने घरों में भी अपनी भाषा बोलें तो भी हमें उसके बारे में पूरी जानकारी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर ने भगवद्गीता को मराठी में प्रचारित किया। भागवत ने कहा, दिक्कत यह है कि अंग्रेजी के शब्द भावों की गहराई को पकड़ नहीं पाते हैं और ऐसे में विचारों का प्रकटीकरण कमजोर पड़ जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कल्पवृक्ष के लिए अंग्रेजी में तरह-तरह के शब्द लिखे जाते हैं लेकिन कोई भी शब्द उसका असली अर्थ नहीं बता सकता है। आप इसे अंग्रेजी में कैसे अनुवादित करेंगे। ऐसे में विदेशी भाषाएं हमारी संस्कृति की गहराई तक नहीं पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को सीखने और मजबूत करने की जरूरत है। भागवत ने कहा कि भारत का दर्शन कहता है कि विविधता में भी एकता होनी चाहिए। एक दिन पहले भागवत ने कहा था कि हात्मा गांधी का यह विचार कि ब्रिटिश शासन से पहले भारतीयों में एकता का अभाव था, औपनिवेशिक शिक्षा से प्रेरित एक गलत विमर्श है। भागवत ने नागपुर में राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में कहा, ‘‘गांधीजी ने (अपनी पुस्तक) हिंद स्वराज में लिखा है कि अंग्रेजों के आने से पहले हम एकजुट नहीं थे, लेकिन यह उनके द्वारा हमें सिखाई गई झूठी कहानी है।’’ गांधीजी द्वारा 1908 में गुजराती में लिखी गई और 1909 में उनके द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित ‘हिंद स्वराज’ में 20 अध्याय हैं और यह पाठक और एक सम्पादक के बीच बातचीत की शैली में लिखा गया है। भागवत ने कहा कि भारत की 'राष्ट्र' की अवधारणा प्राचीन और पश्चिमी व्याख्याओं से मूलतः भिन्न है।  

घने कोहरे की चपेट में उत्तर भारत, आईएमडी ने शीतलहर के तीव्र होने का अलर्ट किया जारी

कश्मीर उत्तर भारत में सर्दी का असर तेज हो गया है। कश्मीर से लेकर राजस्थान तक तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने  की संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को बुलेटिन में देशभर की मौसम स्थिति और आगामी सप्ताह के पूर्वानुमान जारी किए हैं। कश्मीर घाटी इस समय कड़ाके की ठंड से जूझ रही है। बादल छाने से कई स्थानों पर रात के तापमान में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन न्यूनतम पारा अब भी हिमांक से नीचे बना हुआ है। शुक्रवार रात दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के कोनीबाल में तापमान माइनस 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो घाटी का सबसे ठंडा स्थान रहा। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 3.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो एक दिन पहले के माइनस 4.5 डिग्री की तुलना में थोड़ा अधिक है। काजीगुंड में पारा माइनस 3.4, कुपवाड़ा में माइनस 4.9, कोकरनाग में माइनस 1.6, पहलगाम में माइनस 5.2 और गुलमर्ग में माइनस 1.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। घाटी के अधिकांश हिस्सों में सुबह घना कोहरा छाया रहा, खासकर झीलों और नदी किनारे के क्षेत्रों में। आईएमडी ने 10 दिसंबर तक कश्मीर में मौसम शुष्क रहने का अनुमान लगाया है। 1 से 5 दिसंबर के बीच बादल बढ़ सकते हैं और तापमान में और गिरावट की संभावना है। राजस्थान : शुष्क मौसम जारी, तापमान में और गिरावट की भविष्यवाणी राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से शुष्क मौसम बना हुआ है। जयपुर मौसम केंद्र के अनुसार शेखावाटी क्षेत्र (झुंझुनू, सीकर, चुरू) में तापमान 8-9 डिग्री तक गिर चुका है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से ऊपर है, लेकिन अगले तीन दिनों में 2-3 डिग्री की और गिरावट की संभावना है। 2 से 4 दिसंबर के बीच शेखावाटी में रात का पारा 4-5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे ठिठुरन बढ़ेगी। उत्तराखंड : पाला-कोहरे का दौर जारी रहेगा उत्तराखंड में भी तापमान में गिरावट जारी है। उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चमोली और रुद्रप्रयाग के ऊंचाई वाले हिस्सों में पारा लगातार शून्य के आसपास पहुंच रहा है। मैदानों में खासकर हरिद्वार, उधम सिंह नगर सुबह कोहरा घना रहेगा। आईएमडी ने 30 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच राज्य में शीतलहर जैसे हालात बनने की चेतावनी दी है। उत्तर भारत में अधिकतर राज्यों में मौसम शुष्क रहेगा आईएमडी के अनुसार अगले 7-10 दिनों में उत्तर भारत में अधिकतर राज्यों में मौसम शुष्क रहेगा। तापमान में क्रमिक गिरावट होगी, मैदानी इलाकों में कोहरे की स्थिति गंभीर होगी, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिम यूपी में धुंध का असर तेज होगा। दिल्ली-एनसीआर में रात का तापमान धीरे-धीरे कम होगा और सुबह के समय दृश्यता प्रभावित हो सकती है। जम्मू : धूप, लेकिन ठंड बरकरार कश्मीर में जहां तेज पाला पड़ रहा है, वहीं जम्मू में दिन में धूप खिली रही। अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। सुबह-शाम ठंडक तेज है, जबकि रात में हल्का कोहरा छा रहा है। पूर्वोत्तर, मध्य व दक्षिण भारत का मौसम पूर्वोत्तर राज्यों असम, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल में हल्की बारिश के आसार हैं। मध्य भारत (एमपी, छत्तीसगढ़) में रातें ठंडी होंगी, लेकिन दिन में धूप निकलने से थोड़ी राहत रहेगी। दक्षिण भारत में तापमान सामान्य रहेगा, हालांकि तटीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। हिमाचल प्रदेश: ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी के आसार आईएमडी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में दिन और रात के तापमान में लगातार गिरावट हो रही है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा के ऊपरी इलाके कड़ाके की ठंड की चपेट में हैं। कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान हिमांक से नीचे है। अगले एक सप्ताह तक प्रदेश में मुख्यतः शुष्क मौसम, कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई है। 1 से 4 दिसंबर के बीच उच्च पर्वतीय भागों में ठंड और बढ़ सकती है, जबकि मैदानी इलाकों में सुबह-शाम धुंध घनी रहने की आशंका है।  

चमोली के कई इलाकों में भूकंप से हड़कंप, राहत की दौड़

चमोली उत्तराखंड में आज एक बार फिर धरली डोली। चमोली के नारायणबगड़ में भूकंप के झटके महसूस किए गए। इससे लोगों में दहशत फैल गई और लोग घरों से बाहर दौड़ पड़े। जानकारी के अनुसार, भूकंप के झटके 10 बजकर 27मिनट पर, कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली और देवाल में महसूस हुए। भूकंप की तीव्रता 3.7 मापी गई है। आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी नें बताया भूकंप का केंद्र चमोली के आसपास बताया जा रहा है। कहीं से किसी नुकसान की सूचना नहीं है। उत्तराखंड संवेदनशील जोन-छह में शामिल उत्तराखंड को भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील जोन-छह में शामिल किया गया है। इससे पहले राज्य के जिलों को जोन चार और पांच में विभाजित किया गया था। अब भारतीय मानक ब्यूरो ने डिजाइन भूकंपीय जोखिम संरचनाओं के भूकंपरोधी डिजाइन के मानदंड रीति संहिता-2025 में नया भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र जारी किया है। इसमें उत्तराखंड समेत अन्य हिमालीय राज्यों को भी भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन छह में रखा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पूरे राज्य में निर्माण कार्यों के लिए लोगों को अधिक सजग होना होगा। पहले दो जोन में रखा गया था राज्य को पहले भूकंप की दृष्टि से उत्तराखंड को दो जोन में रखा गया था। इसमें सबसे अधिक संवेदनशील जोन पांच में रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ थे। जबकि जोन चार में उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल शामिल थे। 2021 में सबसे अधिक संवेदनशील जिलों में चार जिले शामिल थे लोकसभा में वर्ष-2021 में दिए एक उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री ने भूकंप की दृष्टि से अधिक संवेदनशील 38 शहर और कस्बों की जानकारी दी थी। इसमें अल्मोड़ा, नैनीताल, देहरादून, रुड़की शामिल हैं।

‘सीनियर’ टैग का मतलब यह नहीं कि… सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई दो-टूक हिदायत

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर वकीलों को किसी भी बेंच के समक्ष मामलों का मौखिक उल्लेख करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला हाल के महीनों में अनौपचारिक रूप से अपनाई जा रही प्रथा को औपचारिक रूप प्रदान करने वाला है। कोर्ट ने स्थगन और तत्काल मामलों की लिस्टिंग के लिए प्रक्रिया निर्धारित करने वाला एक सर्कुलर जारी किया है। इसके अनुसार, जमानत या जमानत रद्द करने, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस, विध्वंस या अंतरिम राहत से संबंधित सभी नए मामले अगले 2 कार्य दिवसों के भीतर लिस्ट किए जाएंगे। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि किसी भी कोर्ट के समक्ष मौखिक उल्लेख के लिए किसी सीनियर वकील को इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके बजाय, युवा जूनियर वकीलों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। अत्यंत तत्काल प्रकृति के मामले में क्या होगा अगर कोई मामला अत्यंत तत्काल प्रकृति का हो, जैसे अग्रिम जमानत, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस, बेदखली या विध्वंस से जुड़ा और निर्धारित तारीख पर लिस्टिंग का इंतजार न कर सके, तो प्रोफॉर्मा के साथ एक पत्र अधिकारी को सुबह 10:30 बजे से पहले सौंपना होगा। अनावश्यक स्थगनों को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से भी कोर्ट ने निर्देश दिए। एससी की ओर से कहा गया कि मामले का स्थगन केवल परिवार में मृत्यु, अधिवक्ता या पक्षकार-व्यक्ति की चिकित्सा, स्वास्थ्य स्थिति या कोर्ट को संतुष्ट करने वाले अन्य वास्तविक कारणों के मामलों में ही स्वीकार किया जाएगा। यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया है, जिससे तत्काल मामलों का निपटारा तेजी से हो सके।  

संसद का शीतकालीन सत्र तपा देने को तैयार—FIR से लेकर SIR तक बढ़ेगी राजनीतिक गर्मी

नई दिल्ली  संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। केंद्र तथा विपक्ष के बीच दो बड़े मुद्दों पर गतिरोध पैदा होने की संभावना है। गांधी परिवार के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में नई FIR और चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चल रहा वोटर लिस्ट का विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। चूंकि सत्र 19 दिसंबर को समाप्त हो रहा है, इसलिए संभावित व्यवधानों से सरकार के विधायी एजेंडे पर खतरा मंडरा रहा है।   दिल्ली पुलिस की अपराध नियंत्रण विभाग द्वारा सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज की गई नई FIR में 2,000 करोड़ की संपत्ति वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को यंग इंडियन के माध्यम से धोखाधड़ी से हासिल करने का आरोप है। FIR में यह भी दावा किया गया है कि कुछ अधिकारियों ने हेराफेरी की है। इसके लिए जाली बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और नकली शिक्षण अनुभव प्रमाण पत्र जमा करने की सुविधा दी गई। कांग्रेस अब संसद में इस मुद्दे पर सरकार को निशाना बनाने की तैयारी में है। एसआईआर पर विपक्ष एकजुट तृणमूल कांग्रेस (TMC), DMK और समाजवादी पार्टी (SP) ने विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास का कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया है। टीएमसी का आरोप है कि SIR का दुरुपयोग मतदाता सूचियों में छेड़छाड़ और अगले साल चुनाव वाले पश्चिम बंगाल में बूथों की संख्या को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को केंद्र का "षड्यंत्र" बताया है। डीएमके का कहना है कि अगले साल तमिलनाडु में चुनाव है। इससे पहले एसआईआर के जरिए हेराफेरी की जा रही है। समाजवादी पार्टी ने विशेष अभियान में कथित अनियमितताओं को उठाया है और इस मामले को संसद में जोर-शोर से उठाने की योजना बना रही है। अन्य विपक्षी दलों विशेष रूप से कांग्रेस और CPI(M) ने भी SIR को अराजकता और बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) पर असहनीय दबाव का कारण बताया है, जिसकी वजह से कुछ BLOs की मौत भी हुई है। वहीं, केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR मुद्दा संसद के पटल पर गैर-परक्राम्य है। सरकार का तर्क है कि यह चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जा रही है। सरकार ने सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। सरकार परमाणु ऊर्जा, उच्च शिक्षा, कॉर्पोरेट कानून और प्रतिभूति बाजार से जुड़े 10 प्रमुख विधेयक पेश करने की तैयारी में है। सरकार 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा प्रस्तावित करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने 1937 में गीत की कई पंक्तियों को हटा दिया था। उन्होंने इसे ऐसा कार्य बताया जिसने विभाजन के बीज बोए थे। कांग्रेस ने PM मोदी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह रवींद्रनाथ टैगोर की सिफारिशों पर किया गया था, ताकि गीत की धर्मनिरपेक्ष अपील और समावेशिता बनाए रखी जा सके। मूल गीत के वे छंद हटा दिए गए थे, जिनमें राष्ट्र को हिंदू देवी-देवताओं दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में चित्रित किया गया था।  

सिंधु सभ्यता पर बड़ा खुलासा: IIT शोध में सामने आई विनाश की असली वजह

नई दिल्ली  उन्नत, समृद्ध और बेहद रहस्यमय मानी जाने वाली प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के निशान भारत और पाकिस्तान में पाए जाते हैं। यह आज भी रहस्य बना हुआ है कि आखिर इतनी उन्नत सभ्यता गायब कैसे हो गई? हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल और राखीगढ़ी तक इस सभ्यता के नमूने पाए गए हैं। सभ्यता के खात्मे को लेकर अब तक कई तरह के दावे किए गए हैं। इनमें महामारी, बाढ़, भूकंप और उल्कापात जैसी कई बातें की जाती रही हैं। अब आईआईटी गांधीनगर के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि लंबे समय तक सूखे के प्रकोप के चलते यह सभ्यता नष्ट हो गई।   सिंधु घाटी सभ्यता को सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानते हैं। यह सभ्यता 5000 से 3500 ईसा पूर्व तक फलती-फूलती थी। यह सभ्यता अपने शहरों के लिए जानी जाती है। खुदाई में मिले अवशेषों और शहरों को देखकर पता चलता है कि उनके शहर और पानी निकासी का सिस्टम और सड़कें कितनी उन्नत थीं। इसके अलावा वे धातु का भी उपयोग जानते थे। रोजमर्रा के इस्तेमाल में मिट्टी के बर्तन ही लाए जाते थे। इस सभ्यता के लोग खेती पर निर्भर थे और वे अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी जानते थे। आईआईटी गांधीनगर में विमल मिश्रा की अगुआई में शोध में पाया गया कि इस सभ्यता को लगातार सूखे का सामना करना पड़ा। सभ्यता का पतन अचानक नहीं हुआ बल्कि यह धीरे-धीरे समाप्त हो गई। 11 पन्ने के रिसर्च पेपर में दावा किया गया है कि पानी की कमी की वजह से ही बहुत सारे लोगों की मौत हो गई और कुछ पलायन भी कर गए। सिंधु सभ्यता सिंधु नदी पर ही आधारित थी। इस पानी से वे खेती करते थे। मॉनसून और मौसम की गतिविधियों में परिवर्तन की वजह से बारिश में 10 से 20 फीसदी की गिरावट आ गई थी। वहीं औसत तापमान 0.5 डिग्री बढ़ गया। 85 साल में कम से कम चार बेहद गंभीर सूखे पड़े। एक बार तो 164 साल का सूखा पड़ गया जिसमें सभ्यता नष्ट हो गई। नदियों में पानी की कमी बारिश कम होने की वजह से नदियां भी सूखने लगी थीं। आर्कियो बोटैनिकल तथ्यों के मुताबिक पानी की कमी की वजह से सिंधु सभ्यता के लोगों ने गेहूं और अन्य अनाजों को छोड़कर दूसरी फसलों को उगाने की कोशिश की लेकिन वे नाकामयाब हो गए। पुरानी झीलों और गुफाओं के सर्वे से पता चलता है कि इस क्षेत्र में पानी की तेजी से कमी हो रही थी। लगभग दो शताब्दी तक चले सूखे ने पूरी सभ्यता को हिलाकर रख दिया। धीरे-धीरे बड़े-बड़े शहर छोटे कबीलों में बदल गए। रिसर्च में पाया गया है कि उत्तरी अटलांटिक में ठंड बढ़ने से भारत का मॉनसून कमजोर होने लगा था। प्रशांत और हिंद महासागर का तापमान बढ़ने की वजह से बारिश कम होने लगी। समुद्र गर्म होने की वजह से धरती से तापमान का अंतर कम हो गया और मॉनसून कमजोर होने लगा। ऐसे में मौसम पूरी तरह बदल गया। लोग कम बारिश की वजह से सिंधु नदी के पास ही बसने लगे। धीरे-धीरे कम होती आबादी, कृषि की बर्बादी और खाद्यान्न की कमी की वजह से सभ्यता का पतन होता चला गया।