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मौसम का कहर: 23 से 27 अक्टूबर तक इन राज्यों में बर्बादी ला सकती है बारिश

नई दिल्ली  इस साल मानसून देरी से आया लेकिन बाद में कसर पूरी कर दी। उत्‍तर भारत से लेकर मध्‍य भारत तक जोरदार बारिश का लंबा दौर चला, जिसके चलते सभी जिलों का बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इधर, दीपावली के पहले से ही हल्‍दी ठंड शुरू हो चुकी थी। अब तापमान में बदलाव नज़र आ रहा है। इस बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने ताजा बुलेटिन में अनुमान जताया है कि अगले तीन से चार दिनों में देश के अलग-अलग राज्‍यों में तेज बारिश होगी। कहीं-कहीं पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। आइये जानते हैं देश भर के मौसम का हाल। उत्तर भारत: अगले 2-3 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट। पश्चिम भारत:     23 अक्टूबर को कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।     अगले 5 दिनों के दौरान कोंकण और गोवा, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में बिजली कड़कने के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। पूर्व और मध्य भारत:     23-27 अक्टूबर के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।     अगले 7 दिनों के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में गरज के साथ छींटे पड़ने और तेज़ हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटे की गति) की संभावना है।     22-26 अक्टूबर के दौरान ओडिशा में और अगले 5 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में बिजली कड़कने की संभावना है।     22 और 23 अक्टूबर को ओडिशा में घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। आईएमडी ने मछुआरों को चेतावनी जारी की     आईएमडी ने लोगों को आंधी-तूफान के दौरान घर के अंदर रहने की सलाह दी है और कोंकण क्षेत्र के मछुआरों और तटीय निवासियों से तेज़ हवाओं के दौरान समुद्र में जाने से बचने का आग्रह किया है।     यात्रियों को भी सावधानी से यात्रा करने की सलाह दी गई है, क्योंकि अचानक बारिश और तेज़ हवाएँ दृश्यता कम कर सकती हैं और सड़क सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।     उत्तर-पूर्वी मानसून के ज़ोर पकड़ने के साथ ही दक्षिण भारत के कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है।     कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बिजली कड़कने के साथ तूफान, हल्की से मध्यम वर्षा, 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने की संभावना है।   दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत:     22 से 24 और 26 से 28 के दौरान तमिलनाडु में कई/कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा/गरज के साथ बौछारें; 22 से 24 तक दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल एवं माहे; 22 से 25 तक तटीय कर्नाटक और तेलंगाना; 24 को उत्तर आंतरिक कर्नाटक; 22 से 28 अक्टूबर के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश और यनम और रायलसीमा; 22 को केरल और माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बहुत भारी वर्षा; 22 और 23 को तटीय कर्नाटक, 23 अक्टूबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा।

खबर: जैश-ए-मोहम्मद ने शुरू किया 500 रुपये में महिलाओं के लिए जिहाद प्रशिक्षण — सुरक्षा एजेंसियाँ चिंतित

इस्लामाबाद  पाकिस्तान से धंधा चलाने वाला जैश-ए-मोहम्मद जिहाद का नया चूरन लेकर आया है. जैश-ए-मोहम्मद अब 500 रुपये में लड़कियों, महिलाओं को जिहाद की ट्रेनिंग दे रहा है. इसके लिए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने नया कोर्स चलाया है. इस कोर्स को आतंकी मसूद अजहर की बहनें और उमर फारुक की बीवी लीड कर रही है. जिहाद के इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए हर लड़की से 500 पाकिस्तानी रुपये लिए जाएंगे.  जैश ए मोहम्मद अब अपने ब्रिगेड में ख्वातिनों यानी की महिलाओं की नियुक्ति बढ़ा दी है.  हाथ ऐसे एक्सक्लूसिव दस्तावेज लगे हैं जिससे पता चलता है कि ये आतंकी संगठन बड़े पैमाने पर महिलाओं को जिहाद की ऑनलाइन ट्रेनिंग देना शुरू कर रहा है. जैश ए मोहम्मद महिलाओं से फंड इकट्ठा कर रहा है. इस कोर्स को 'तुफत अल मुमिनात' नाम दिया गया है.  इससे पहले इस बात की जानकारी सामने आई थी कि संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद ने महिलाओं की नियुक्ति के लिए 'जमात-उल-मुमिनात' का गठन किया है.  महिलाओं को टेरर फैक्ट्री में लाया अजहर इस टेरर संगठन को मजबूत करने और इसकी महिला ब्रिगेड में और ज़्यादा महिलाओं की भर्ती के लिए आतंकियों ने अपने घर की औरतों को सामने लाया है. इसमें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शामिल है. इसके अलावा इसमें जैश के टेरर कमांडरों की महिला सदस्य शामिल हैं. ये महिलाएं जिहाद और मजहब की ट्रेनिंग देंगी.  ऑनलाइन लाइव लेक्चर के ज़रिए भर्ती अभियान 8 नवंबर से शुरू होने वाला है. मसूद अज़हर की दो बहनें सादिया अज़हर और समायरा अजहर, रोज़ाना 40 मिनट के ऑनलाइन मीटिंग प्लेटफ़ॉर्म के जरिए महिलाओं को जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड जमात-उल-मुमिनात में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेंगी. मसूद अजहर की छोटी बहन को मिला चार्ज नए-नए जमात-उल-मुमीनत में मौलाना मसूद अजहर ने इस महिला ब्रिगेड की कमान अपनी छोटी बहन सादिया अजहर को सौंपी है. सादिया का पति आतंकी यूसुफ़ अजहर ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था. मसूद अजहर ने इस काम में अपनी छोटी बहन सफिया और उमर फ़ारूक़ की बीवी अफरीरा फ़ारूक़ को भी शामिल किया है, उमर फारूक ने पुलवामा आतंकी हमला किया था और बाद में भारतीय सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था.  मसूद अजहर की जिहाद की नई कोर्स. आतंकी मसूद अजहर पाकिस्तान में फंड इकट्ठा करने के लिए जकात का प्रोग्राम शुरू कर दिया है और तेजी से इसमें लगा है. 27 सितंबर को अपने ताजा संबोधन में बहावलपुर में उसने मरकज उस्मान अली में जनता से दान की अपील की थी. अब जैश-ए-मोहम्मद महिलाओं को ट्रेनिंग देने वाले इस प्रोग्राम से पैसा जमा कर रहा है. इसके लिए हर महिला से 500 पाकिस्तानी रुपये लिए जा रहे हैं और उनसे ऑनलाइन फॉर्म भरवाया जा रहा है.   इस महीने की शुरुआत में 8 अक्टूबर को मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड जमात उल-मुमीनत के गठन की घोषणा की थी और 19 अक्टूबर को पाक अधिकृत कश्मीर के रावलकोट में महिलाओं को ग्रुप में शामिल करने के लिए 'दुख्तरिन-ए-इस्लाम” नाम का एक कार्यक्रम आयोजित किया था.  ISIS, हमास, लिट्टे की तर्ज पर फिदायीन दस्ता बनाने की कोशिश सूत्रों के अनुसार चूंकि पाकिस्तान में कट्टरपंथी सामाजिक मानदंडों के अनुसार महिलाओं का अकेले बाहर जाना अनुचित माना जाता है, इसलिए जैश-ए-मोहम्मद अब महिलाओं की भर्ती के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा है ताकि वह आईएसआईएस, हमास और एलटीटीई की तर्ज पर अपने पुरुष आतंकवादी ब्रिगेड के साथ-साथ महिला आतंकवादी ब्रिगेड का गठन कर सके और संभवतः उनका इस्तेमाल आत्मघाती/फिदायीन हमलों के लिए कर सके.  जैश की पूरी कार्यप्रणाली के तहत प्रत्येक महिला से 500 रुपये का चंदा लिया जा रहा है. ये पाकिस्तान के पाखंड को भी उजागर करता है जो FATF के नियमों का लागू करने का दावा करता है और कहता है कि वह आतंक से जुड़े किसी भी गतिविधि की फंडिंग नहीं कर रहा है. लेकिन पाकिस्तान मरकज की आड़ में पैसा लेता रहा है और अब खुलकर जिहाद की ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर पैसा ले रहा है. 

शिक्षा की चुनौती: 13 करोड़ से अधिक लड़कियां आज भी नहीं जा पातीं स्कूल, UNESCO की चेतावनी

नई दिल्ली दुनिया में आज भी लड़के और लड़कों बीच भेदभाव देखने को मिलता है. खासकर पढ़ाई के मामले में लड़कों को स्कूल भेजने पर तवज्जो दी जाती है. हालांकि, पिछले कुछ सालों में दुनिया में कहीं ना कहीं यह भेदभाव थोड़ा कम हुआ है, लेकिन अभी भी कई लड़कियां इसका सामना कर रही हैं. यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 30 सालों में दुनिया ने शिक्षा में लड़कियों और लड़कों के बीच बराबरी लाने में काफी प्रगति की है. यानी अब पहले की तुलना में ज़्यादा लड़कियाँ स्कूल जा रही हैं. लेकिन फिर भी समस्या खत्म नहीं हुई है. आज भी दुनिया में करीब 13.3 करोड़ लड़कियां स्कूल नहीं जाती हैं. 1995 में बीजिंग में एक घोषणा हुई थी, जिसमें कहा गया था कि महिलाओं को जीवन के हर क्षेत्र में, खासकर शिक्षा में, बराबर मौका मिलना चाहिए. अब 30 साल बाद, कुछ सुधार तो हुआ है, लेकिन यूनेस्को के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि लैंगिक समानता की यह यात्रा अभी अधूरी है. जीईएम टीम के एक सदस्य ने पीटीआई को बताया, "1995 के बाद से, दुनिया शिक्षा में लैंगिक समानता के करीब पहुंच गई है. अब लड़कियां प्राथमिक, निम्न और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में लड़कों के बराबर नामांकन करा रही हैं. वैश्विक स्तर पर, तीन दशक पहले की तुलना में 9.1 करोड़ अधिक लड़कियां प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और 13.6 करोड़ अधिक लड़कियां माध्यमिक शिक्षा प्राप्त कर रही हैं." 'उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन तीन गुना बढ़कर 4.1 करोड़ से 1.3 करोड़ 90 लाख हो गया है. ये आंकड़े मायने रखते हैं. ये बाधाएं दूर करने और अवसरों का विस्तार करने के दशकों के सामूहिक प्रयासों को दर्शाते हैं. फिर भी, तस्वीर पूरी तरह से अधूरी है. आज, 1.3 करोड़ लड़कियां स्कूल से बाहर हैं.' गरीब लड़कियों को स्कूल नहीं भेजा जाता यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में शिक्षा में लैंगिक समानता की दिशा में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी भेदभाव होता दिखता है. ओशिनिया में पहले लड़के और लड़कियों को एक समान मानते थे लेकिन अब वहां ऐसा नहीं है. वहीं लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों में माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों की तुलना में लड़कों की स्थिति कमजोर है. जब गरीबी और स्थान जैसी सामाजिक परिस्थितियां जेंडर के साथ जुड़ती हैं, तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है जैसे गिनी और माली जैसे देशों में लगभग कोई भी गरीब युवती स्कूल नहीं जाती. रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा में सुधार बहुत कम है. केवल दो-तिहाई देशों में प्राथमिक स्तर पर और लगभग तीन-चौथाई देशों में माध्यमिक स्तर पर ही यौन शिक्षा अनिवार्य है. कई जगहों पर स्कूल की किताबें ऐसी हैं, जिनमें अभी भी पुराने विचार हैं. हालांकि शिक्षकों में महिलाओं की संख्या अधिक है, लेकिन शिक्षा नेतृत्व में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है. उच्च शिक्षा में केवल 30 प्रतिशत महिलाएं ही नेतृत्व की भूमिकाओं में हैं. यह असमानता शिक्षा को समानता और सशक्तिकरण का वास्तविक साधन बनने से रोकती है.

भारत रूस के साथ कर रहा 10,000 करोड़ की बड़ी रक्षा डील, S-400 की कामयाबी के बाद

नई दिल्ली भारत और रूस के बीच S-400 को लेकर जारी डील को और मजबूती देने की तैयारी चल रही है। इसके लिए करीब 10,000 करोड़ मूल्य के एक बड़े शस्त्र पैकेज की खरीद को लेकर काम चल रहा है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह कदम वायु रक्षा क्षमता को और मजबूती देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। इस संबंध में रूस के साथ बातचीत चल रही है। सैन्य सूत्रों ने दावा किया है कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना के S-400 प्रणाली ने पाकिस्तान को परास्त करने में अहम भूमिका निभाई। उसी दौरान पाकिस्तान की 5-6 लड़ाकू विमान व एक जासूसी विमान को 300 किमी से अधिक दूरी पर ही मार गिराने में मदद मिली। अधिकारियों ने S-400 को भारत की वायु रक्षा रणनीति में गेम चेंजर बताया है। रक्षा मंत्रालय जल्द ही इस खरीद प्रस्ताव को मंजूरी के लिये डिफेंस अक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में पेश करने की संभावना रहेगी, जिसकी अगली बैठक 23 अक्तूबर को प्रस्तावित है। सूत्रों का कहना है कि जरूरतों के मद्देनजर मिसाइलों की खरीद बड़ी संख्या में की जाने की योजना है। 2018 में रूस के साथ हुए समझौते के तहत कुल 5 स्क्वाड्रन S-400 प्राप्त करने पर सहमति बनी थीस जिनमें से तीन स्क्वाड्रन अब डिलीवर कर संचालित किए जा चुके हैं। चौथे स्क्वाड्रन की डिलीवरी रूस-युक्रेन युद्ध के प्रभाव से धीमी पड़ी थी। दोनों पक्षों के बीच आगे और S-400 तथा उन्नत S-500 प्रणालियों को शामिल करने पर भी विचार-विमर्श जारी है। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना रूसी निर्मित बीयॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद तथा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और उसके विविध वेरिएंटों को और मजबूत करने के विकल्पों को भी परख रही है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इन कदमों से भारत और मजबूत होगा। रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से अभी तक किसी खरीद अनुबंध की पुष्टि नहीं की है; हालांकि बातचीत और आवश्यक तकनीकी, वित्तीय पहलुओं पर दोनों पक्ष सक्रिय हैं। रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि सीमाओं पर बदलते खतरों और तकनीकी गतिशीलता को देखते हुए देश की वायु रक्षा प्रणालियों का विस्तार आवश्यक बना हुआ है।

APEC से पहले North Korea ने दागी बैलिस्टिक मिसाइलें, ट्रंप दौरे पर सस्पेंस बढ़ा

नॉर्थ कोरिया दक्षिण कोरिया में इस माह के अंत में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन आयोजित होने वाला है। इस सम्मेलन में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 21 प्रमुख देशों के नेता हिस्सा लेंगे। सम्मेलन से ठीक पहले उत्तर कोरिया ने बुधवार को कई शॉर्ट-रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। वहीं, एक्सपर्ट का कहना है कि दक्षिण कोरिया द्वारा एपेक शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारियों के दौरान ऐसे हमले और बढ़ सकते हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, यह परीक्षण चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य वैश्विक नेताओं के ग्योंगजू में एपेक सम्मेलन के लिए इकट्ठा होने से महज एक सप्ताह पहले किया गया। दक्षिण कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार, दक्षिण कोरियाई सेना ने पूर्वी सागर (जापान सागर के नाम से भी जाना जाता है) की ओर दागी गईं कई मिसाइलों का पता लगाया, जो शायद छोटी दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। बाद में सेना ने पुष्टि की कि ये मिसाइलें लगभग 350 किलोमीटर (217 मील) की दूरी तय कर अंतर्देशीय क्षेत्र में गिरीं, जिससे शुरुआती अनुमानों को खारिज कर दिया गया कि वे समुद्री इलाके में पड़ी होंगी। अल जजीरा के अनुसार, दक्षिण कोरिया के संयुक्त स्टाफ चीफ्स ने कहा कि हमारी सेना ने संभावित आगे के प्रक्षेपणों की आशंका को ध्यान में रखते हुए निगरानी बढ़ा दी है और अमेरिका तथा जापान के साथ खुफिया जानकारी साझा करते हुए पूरी सतर्कता बरत रही है। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने मई माह में 8 और 22 तारीख को पूर्वी सागर की ओर लघु दूरी वाली बैलिस्टिक तथा क्रूज मिसाइलें दागी थीं। यह प्रक्षेपण दक्षिण कोरिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ली जे म्युंग के कार्यकाल का पहले था, जिन्होंने जून में पद संभाला था। इस माह की शुरुआत में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने प्योंगयांग में एक भव्य सैन्य परेड के दौरान नई ह्वासोंग-20 लंबी दूरी वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का खुलासा किया, जिसे देश की 'सबसे शक्तिशाली' मिसाइल बताया गया। इस परेड में प्रमुख चीनी, रूसी और अन्य नेता भी मौजूद थे। यह परेड उत्तर कोरिया की सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ पर हुई थी। प्योंगयांग ने वैश्विक प्रतिबंधों को बार-बार चुनौती दी है और दावा किया है कि अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया के संभावित खतरों से रक्षा के लिए हथियार कार्यक्रम जरूरी है। वहीं ट्रंप ( अपने पिछले कार्यकाल में किम से मुलाकात की थी) ने हाल ही में इस वर्ष उत्तर कोरियाई नेता से दोबारा मिलने की उम्मीद जताई है। प्योंगयांग ने संकेत दिया है कि किम ट्रंप के साथ भावी वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन साथ ही जोर दिया है कि उत्तर कोरिया कभी भी अपने परमाणु हथियारों को छोड़ने पर राजी नहीं होगा।

ट्रंप ने 155% टैरिफ लगाया, चीन के साथ अच्छे रिश्तों की राह मुश्किल!

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ वॉर के चलते दुनियाभर के देशों से अपने संबंध खराब कर लिए हैं। इस बीच, उन्होंने एक बार फिर से साफ किया है कि भले ही उनकी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली हो, लेकिन अमेरिका चीन पर 155 फीसदी टैरिफ लगाना एक नवंबर से जारी रखेगा। न्यूज एजेंसी एएनआई के एक सवाल का जवाब देते हुए कि क्या चीन पर टैरिफ लगाने पर विचार किया जाएगा, क्योंकि वह अब भी रूस का सबसे बड़ा तेल इंपोर्टर है, अमेरिकी राष्ट्रपति प्रेसिडेंट ने कहा, "अभी, 1 नवंबर से, चीन पर लगभग 155 परसेंट टैरिफ लगाया जाएगा। मुझे नहीं लगता कि यह उनके लिए टिकाऊ है।" ट्रंप का कहना है कि वह व्यक्तिगत तौर पर चीन के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन सालों से एकतरफा इकोनॉमिक डील की वजह से अमेरिका के पास सख्त ऐक्शन लेने के अलावा कोई और विकल्प बचा नहीं था। ट्रंप ने आगे कहा, ''मैं चीन के साथ अच्छा बर्ताव करना चाहता हूं, लेकिन चीन पिछले कुछ सालों से हमारे साथ बहुत बुरा बर्ताव कर रहा है, क्योंकि हमारे प्रेसिडेंट बिजनेस के जरिए से स्मार्ट नहीं थे। उन्होंने चीन और हर दूसरे देश को हमारा फायदा उठाने दिया।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, “मैंने यूरोपियन यूनियन के साथ एक डील की। ​​मैंने जापान और साउथ कोरिया के साथ एक डील की। ​​इनमें से बहुत सी डील बहुत अच्छी हैं। यह नेशनल सिक्योरिटी के बारे में है। मैं टैरिफ की वजह से ऐसा कर पाया। हमें अमेरिका में सैकड़ों बिलियन, यहां तक कि ट्रिलियन डॉलर मिल रहे हैं, हम कर्ज चुकाना शुरू कर देंगे।” बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अमेरिका तमाम देशों पर भारी भरकम अतिरिक्त टैरिफ लगा रहा है। भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लागू है, जबकि चीन रूस का सबसे बड़ा तेल इम्पोर्टर है। ऐसे में पिछले दिनों ट्रंप ने चीन पर 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस तरह अमेरिका द्वारा चीन पर लगाया जाने वाला कुल टैरिफ 155 फीसदी हो जाएगा। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा था कि इस बात को देखते हुए कि चीन ने यह अनोखा कदम उठाया है, और मैं सिर्फ अमेरिका की तरफ से बोल रहा हूं, न कि उन दूसरे देशों की तरफ से जिन्हें इसी तरह का खतरा था, एक नवंबर, 2025 से अमेरिका चीन पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा, जो अभी चीन दे रहा है, उसके अलावा और भी टैरिफ होगा। साथ ही, एक नवंबर को, हम सभी जरूरी सॉफ्टवेयर पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाएंगे।"

कर्नाटक की राजनीति में हलचल: सिद्धारमैया के आखिरी दौर में CM के बेटे का बड़ा खुलासा

बेंगलुरु कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद में बदलाव को लेकर लंबे समय से अटकलें चल रही हैं। इस बीच, बुधवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह (सिद्धारमैया) अपने पॉलिटिकल करियर के आखिरी फेज में हैं और उन्हें अपने कैबिनेट के साथी सतीश जारकीहोली का मार्गदर्शक बनना चाहिए। कई महीनों से ऐसी अटकलें चल रही हैं कि सिद्धारमैया को हटाकर डीके शिवकुमार को सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि, लगभग हर बार इस बारे में मना किया जाता रहा है, लेकिन कभी विधायक तो कभी सियासी गलियारे में ऐसी अटकलें लगती रही हैं। पिछले महीने ही सिद्धारमैया ने ऐसी रिपोर्ट्स को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि मैं पूरे पांच साल के टर्म के लिए मुख्यमंत्री हूं। एनडीटीवी के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा में एमएलसी और मुख्यमंत्री के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा, ''मेरे पिता अपने पॉलिटिकल करियर के आखिरी दौर में हैं। इस स्टेज पर उन्हें एक मजबूत आइडियोलॉजी और प्रोग्रेसिव सोच वाले नेता की जरूरत है, जिसके वे मार्गदर्शक बन सकें। जारकीहोली ऐसे ही इंसान हैं, जो कांग्रेस पार्टी की आइडियोलॉजी को बनाए रख सकते हैं और पार्टी को लीड भी कर सकते हैं। मेरा मानना है कि ऐसे आइडियोलॉजी वाले लीडर का मिलना बहुत मुश्किल है और मैं चाहता हूं कि यह अपना अच्छा काम जारी रखें।'' जिस समय यतींद्र ने यह बयान दिया, उस समय जारकीहोली भी वहीं कार्यक्रम में थे। 'कैबिनेट में भी अभी नहीं होगा कोई बदलाव' इससे पहले, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न होने तक राज्य मंत्रिमंडल में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। सिद्दारमैया ने संवाददाताओं से कहा, "सरकार तालुक पंचायत और जिला पंचायत सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव कराने के लिए तैयार है। अदालत का आदेश मिलते ही हम चुनाव कराएंगे। सभी चुनाव चरणों में होंगे। चुनावों से लोकतंत्र मजबूत होता है… पहले चुनाव संपन्न हो जाएं, फिर हम मंत्रिमंडल फेरबदल के बारे में सोचेंगे।"  

पति-पत्नी के झगड़े की हद पार, महिला अधिकारी ने नदी में कूदकर की खुदकुशी

बड़वानी जिला मुख्यालय से सटे धार जिले को जोड़ने वाले नर्मदा पर बने बड़े पुल से बुधवार सुबह एक महिला स्वास्थ्य अधिकारी ने छलांग लगा दी। NDRF की टीम ने महिला को नर्मदा से बाहर निकाला। हालांकि इस दौरान उसकी मौत हो गई। महिला अंगूरबाला राजपुर के बोराली गांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीएचओ थीं। वहीं उनके पति डॉ. कृष्णा लोनखेड़े इंदौर में बच्चों के डॉक्टर हैं। दंपती दिवाली मनाने बड़वानी स्थित अपने गांव कल्याणपुरा आए हुए थे। आभूषण को लेकर हुआ विवाद जानकारी के अनुसार छोटी कसरावद स्थित नर्मदा पुल से सुबह 9.30 बजे कल्याणपुरा गांव निवासी सीएचओ अंगूरबाला लोनखेड़े और उसके पति डॉ. कृष्णा लोनखेड़े के बीच आभूषण को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद वे स्कूटी से निकली और नर्मदा पुल पर पहुंचकर छलांग लगा दी। पुल से गुजर रहे लोगों ने उन्हें कूदते देखा और तुरंत नाविकों को सूचना दी। नर्मदा पुल पर तैनात एसडीआरएफ की टीम ने नाव से सीएचओ का रेस्क्यू किया और उन्हें पानी से बाहर निकाला। अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉ. लोनखेड़े ने बताया कि बुधवार सुबह घर में पत्नी से मंगलसूत्र को लेकर विवाद हुआ था। वह मंगलसूत्र न लाने से नाराज होकर स्कूटी लेकर घर से निकली। उन्हें डर था कि पत्नी गुस्से में कोई गलत कदम उठा सकती है, इसलिए उन्होंने तुरंत डायल 100 और पुलिस को सूचना दी और खुद भी गाड़ी से उनके पीछे गए। हालांकि वह उन्हें बचा नहीं पाए। दंपती के दो बच्चे हैं। एक बेटा और एक बेटी। मामला दर्ज कर जांच कर रही पुलिस शहर कोतवाली टीआई दिनेश सिंह कुशवाह ने बताया कि डायल 100 से सूचना मिली थी कि एक महिला कसरावद पुल से सुसाइड करने वाली है। इसकी सूचना पर स्टाफ वहां पहुंचा और एसडीआरएफ टीम को सूचित किया। महिला को तत्काल नदी से बाहर निकाल जिला अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जांच में लिया है।

25 लाख भारतीयों के लिए खुशखबरी: सऊदी अरब ने खत्म किया विवादित ‘कफाला सिस्टम’

नई दिल्ली सऊदी अरब ने इस महीने आधिकारिक तौर पर 50 साल पुरानी कफाला (स्पॉन्सरशिप) सिस्टम को खत्म कर दिया है, जिसे आधुनिक दौर की गुलामी कहा जाता था। इस व्यवस्था के तहत विदेशी कर्मचारियों के जीवन पर उनके नियोक्ता पर पूरा नियंत्रण होता था, वह उसका पासपोर्ट तक रख सकता था और यह तय करता था कि वे कब नौकरी बदल सकते हैं या देश छोड़ सकते हैं। इस निर्णय से करीब 1.3 करोड़ विदेशी मजदूरों को राहत मिलेगी, जिनमें लगभग 25 लाख भारतीय शामिल हैं। यह फैसला क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की 'विजन 2030' सुधार योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद सऊदी अरब की वैश्विक छवि को सुधारना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।   क्या था कफाला सिस्टम? 1950 के दशक में शुरू हुई यह व्यवस्था मूल रूप से विदेश मजदूरों की निगरानी के लिए बनाई गई थी। हर विदेशी श्रमिक को एक कफील से जोड़ा जाता था, जो उसकी नौकरी, वेतन और यहां तक कि रहने की जगह पर भी नियंत्रण रखता था। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि मजदूर अपने ही उत्पीड़क के खिलाफ शिकायत तक नहीं कर सकते थे, जब तक कि वही कफील अनुमति न दे। इस सिस्टम में महिलाओं की स्थिति सबसे खराब रही। कई भारतीय महिलाओं ने शारीरिक और यौन शोषण की शिकायत की। 2017 में गुजरात और कर्नाटक की महिलाओं के साथ हुए अमानवीय व्यवहार के मामले भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद ही सुलझ पाए। एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं ने इसे मानव तस्करी का रूप बताया। क्यों खत्म किया गया कफाला सिस्टम? अंतरराष्ट्रीय दबाव, मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट और विदेशी नागरिकों की नाराजगी इस फैसले के पीछे की बड़ी वजह रही। आखिरकार क्राउन प्रिंस ने देश की वैश्विक साख और निवेश माहौल सुधारने के लिए कफाला सिस्टम को खत्म करने का फैसला लिया। हालांकि, यह व्यवस्था अब भी कुवैत, ओमान, लेबनान और कतर जैसे देशों में जारी है।  

मानवता को शर्मसार करने वाले सैन्य अधिकारी बांग्लादेश में अब जेल में

ढाका   बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने बुधवार को 15 सेवारत सैन्य अधिकारियों को सैन्य हिरासत से अदालत में पेश होने के बाद जेल भेज दिया। इन सैन्य अधिकारियों पर अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के दौरान लोगों को गायब करने, हत्या करने और हिरासत में यातना देने का आरोप है। विशेष न्यायाधिकरण द्वारा 11 अक्टूबर को मानवता के विरुद्ध कथित अपराधों के मुकदमे के लिए इन 15 अधिकारियों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद बांग्लादेश सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। न्यायाधिकरण के मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने कार्यवाही के बाद संवाददाताओं को बताया, “न्यायाधिकरण ने लोगों को गायब करने, हत्या और हिरासत में यातना दिये जाने के संबंध में आज (बुधवार को) पेश किए गए 15 सैन्य अधिकारियों को जेल भेजने का आदेश दिया है।” उन्होंने बताया कि न्यायाधिकरण ने किसी की भी जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं की। इस्लाम ने कहा कि जमानत याचिकाओं के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया है और अधिकारी पांच नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले औपचारिक अर्जी दायर कर सकते हैं।   न्यायमूर्ति एम. गुलाम मुर्तुजा मजूमदार की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने ‘फरार' पूर्व प्रधानमंत्री हसीना और अन्य फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें अदालत में पेश करने का भी आदेश दिया। इससे पहले, 15 अधिकारियों को कड़ी सुरक्षा के बीच एक हरे रंग की बस में ढाका छावनी से लाया गया, जहां उन्हें आठ अक्टूबर को गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद से सैन्य हिरासत में रखा गया था। जेल भेजे गये सैन्य अधिकारियों में एक मेजर जनरल, छह ब्रिगेडियर जनरल, कई कर्नल, लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर शामिल हैं।