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रेल लॉन्चर से अग्नि-प्राइम का पहला परीक्षण सफल, भारत की मारक क्षमता को नई उड़ान

नईदिल्ली  भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने इंटरमीडिएट रेंज अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण किया. यह नई पीढ़ी की मिसाइल रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर से छोड़ी गई. परीक्षण पूरी तरह सफल रहा. यह पहली बार है जब खास डिजाइन वाली रेल लॉन्चर से मिसाइल दागी गई. इससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास 'कैनिस्टराइज्ड' लॉन्च सिस्टम है, जो रेल नेटवर्क पर चलते हुए मिसाइल छोड़ सकता है.      मिसाइल के सफल टेस्ट की डिटेल्स पर नजर डालें तो यह लॉन्च विशेष रूप से डिजाइन किए गए रेल-बेस्ड मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से किया गया. इस सिस्टम की खासियत है कि यह बिना किसी पूर्व शर्त के देश के रेल नेटवर्क पर कहीं भी मूवमेंट कर सकता है. इससे लॉन्च में कम समय लगता है और दुश्मन की नजर से बचाव आसान होता है. डीआरडीओ यानी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन, स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड (एसएफसी) और सशस्त्र बलों की टीम ने इस परीक्षण को अंजाम दिया है. हालांकि, परीक्षण का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन यह रेल नेटवर्क की मोबिलिटी पर फोकस करता है, जो युद्धकाल में मिसाइल की सरवाइवेबिलिटी बढ़ाता है. क्या है अग्नि प्राइम मिसाइल की खासियत अग्नि प्राइम मिसाइल की विशेषताएं इसे और भी खास बनाती हैं. यह इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है. यह 2000 किलोमीटर तक के टारगेट को हिट कर सकती है. इसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी शामिल हैं. मसलन बेहतर एक्यूरेसी, कैनिस्टराइज्ड कॉन्फिगरेशन और फास्ट ऑपरेशनल रेडीनेस. यह अग्नि सीरीज की नई पीढ़ी की मिसाइल है, जो पुरानी अग्नि-1 और अग्नि-2 को रिप्लेस करने के लिए डिजाइन की गई है. कैनिस्टराइज्ड सिस्टम से मिसाइल को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और लॉन्च के लिए तैयार रखा जा सकता है, जो इसे रोड-मोबाइल, सबमरीन-लॉन्च और साइलो-बेस्ड सिस्टम्स के साथ कंप्लीमेंट करता है. इसकी हाई मोबिलिटी और लो विजिबिलिटी दुश्मन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगी. अब सवाल है कि आखिर यह टेस्ट क्यों खास है? सबसे बड़ा कमाल यह है कि भारत ने पहली बार रेल से मिसाइल लॉन्च की क्षमता हासिल की है. यह दुनियाभर में अपने आप में दुर्लभ कारनामा है. रेल नेटवर्क की विशालता का फायदा उठाते हुए यह सिस्टम मिसाइल को तेजी से डिप्लॉय करने की अनुमति देता है. इससे स्ट्रैटेजिक सरप्राइज एलिमेंट बढ़ता है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन से जुड़ा है, क्योंकि पूरा सिस्टम स्वदेशी रूप से विकसित है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के लिए सिग्नल है, जहां बॉर्डर टेंशन के बीच भारत अपनी मिसाइल क्षमताओं को मजबूत कर रहा है. रेल-बेस्ड लॉन्च से न्यूक्लियर डिटरेंस गेम चेंजर साबित होगा, क्योंकि यह दुश्मन की सैटेलाइट मॉनिटरिंग से बचाव प्रदान करता है. यह टेस्ट इसलिए भी खास है क्योंकि ट्रेन से मिसाइल दागी जाएगी और फिर आगे बढ़ जाएगी. इससे दुश्मन ट्रैक नहीं कर पाएगा. राजनाथ सिंह ने क्या कहा? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘भारत ने इंटरमीडिएट रेंज अग्नि प्राइम मिसाइल का सफल लॉन्च रेल-बेस्ड मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से किया है. यह नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल 2000 किमी तक की रेंज कवर करती है और विभिन्न एडवांस्ड फीचर्स से लैस है. उन्होंने डीआरडीओ, एसएफसी और सशस्त्र बलों को बधाई दी, साथ ही कहा कि यह भारत को रेल नेटवर्क से कैनिस्टराइज्ड लॉन्च सिस्टम विकसित करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल करता है. यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इस तरह से देखा जाए तो यह परीक्षण भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी में मील का पत्थर है. अग्नि-प्राइम क्या है? नई पीढ़ी की सुपर मिसाइल अग्नि-प्राइम अग्नि सीरीज की सबसे आधुनिक मिसाइल है. यह इंटरमीडिएट रेंज (मध्यम दूरी) वाली है, जो 2000 किलोमीटर तक निशाना साध सकती है. इसमें कई एडवांस्ड फीचर्स हैं…     सटीक निशाना: उन्नत नेविगेशन सिस्टम से दुश्मन के ठिकाने को सटीक मार सकती है.     तेज रिएक्शन: छोटे समय में लॉन्च हो सकती है, भले ही कम दिखाई दे.     मजबूत डिजाइन: कैनिस्टर (बंद बॉक्स) में रखी जाती है, जो इसे बारिश, धूल या गर्मी से बचाता है. यह मिसाइल भारत की स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड (एसएफसी) के लिए बनी है. परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया. रेल लॉन्चर की खासियत: कहीं भी, कभी भी हमला इस परीक्षण की सबसे बड़ी बात रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर है. यह खास डिजाइन वाला सिस्टम है, जो…     रेल नेटवर्क पर बिना किसी तैयारी के चल सकता है.     क्रॉस कंट्री मोबिलिटी देता है, यानी जंगल, पहाड़ या मैदान में आसानी से ले जाया जा सकता है.     कम समय में लॉन्च: रुकते ही मिसाइल दाग सकता है.     कम विजिबिलिटी में काम: धुंध या रात में भी सुरक्षित. पहले मिसाइलें फिक्स्ड साइट्स से दागी जाती थीं, लेकिन यह लॉन्चर दुश्मन को चकमा दे सकता है. रेल पर चलते हुए लॉन्च करने की क्षमता से भारत की मिसाइल ताकत कई गुना बढ़ गई. परीक्षण की सफलता: भारत का गौरव डीआरडीओ, एसएफसी और भारतीय सेनाओं ने मिलकर यह परीक्षण किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी. उन्होंने कहा कि अग्नि-प्राइम के सफल टेस्ट से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास रेल नेटवर्क पर चलते हुए कैनिस्टर लॉन्च सिस्टम है. यह परीक्षण भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' योजना का हिस्सा है. अग्नि सीरीज की यह छठी मिसाइल है, जो पहले से ही सेना में तैनात हैं. क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षण?     रणनीतिक ताकत: दुश्मन को कहीं भी, कभी भी जवाब देने की क्षमता.     सुरक्षा बढ़ेगी: सीमाओं पर तेज रिएक्शन, घुसपैठ रोकेगी.     वैश्विक स्तर: अमेरिका, रूस जैसे देशों के साथ भारत की बराबरी.     भविष्य: अग्नि-प्राइम को जल्द सेना में शामिल किया जाएगा.  

विवाद निपटारे की दिशा में बड़ा कदम: वित्त मंत्री ने लॉन्च किया GST अपीलेट ट्रिब्यूनल

नई दिल्ली  देशभर में जीएसटी विवादों के निपटारे के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलीय अधिकरण (GSTAT) का औपचारिक शुभारंभ नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया. इसके साथ ही करदाताओं को अब एक स्वतंत्र और विशेष मंच मिल गया है, जहां वे अपनी अपील प्रस्तुत कर सकेंगे. जीएसटी विवाद निपटारे के लिए समर्पित मंच जीएसटीएटी की स्थापना से करदाताओं को एकसमान, पारदर्शी और सुलभ अपीलीय प्रक्रिया उपलब्ध होगी. यह संस्था जीएसटी अपीलीय प्राधिकरणों के आदेशों के खिलाफ अंतिम अपील सुनने का काम करेगी. जीएसटीएटी का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा, जबकि देशभर में 45 स्थानों पर 31 राज्य स्तरीय पीठें (बेंच) स्थापित की जाएंगी, ताकि करदाताओं को दूर-दराज़ से आकर अपील दायर न करनी पड़े. स्पष्ट भाषा और डिजिटल सुविधा पर जोर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कार्यक्रम में कहा कि जीएसटीएटी का फोकस स्पष्टता और दक्षता पर रहेगा. फैसले आसान और सरल भाषा में लिखे जाएंगे, फाइलिंग की प्रक्रिया डिजिटल-फर्स्ट होगी और सुनवाई तेज़ी से पूरी की जाएगी. साथ ही ‘ई-कोर्ट्स पोर्टल’ भी लॉन्च किया गया है, जिससे अपीलों को ऑनलाइन दायर और ट्रैक किया जा सकेगा. उन्होंने कहा, “जीएसटी विवादों का समयबद्ध समाधान एमएसएमई और निर्यातकों के लिए नकदी प्रवाह को आसान बनाएगा. सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और जीएसटी को सरलता और Ease of Living के सिद्धांतों पर लगातार विकसित किया जाएगा.” ‘वन नेशन, वन फोरम’ की ओर कदम सीतारमण ने बताया कि जीएसटीएटी वास्तव में 2017 में शुरू हुए “वन नेशन, वन टैक्स, वन मार्केट” को आगे बढ़ाते हुए “वन नेशन, वन फोरम फॉर फेयरनेस एंड सर्टेनिटी” की दिशा में एक बड़ा कदम है. उन्होंने कहा कि यह न केवल कारोबार करने की आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देगा बल्कि न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा. संरचना और कार्यप्रणाली हर बेंच में दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य होंगे—एक केंद्र से और एक राज्य से. इस तरह प्रत्येक अपील में कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण का संतुलन बना रहेगा. नेताओं और विशेषज्ञों की राय इस मौके पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, “जीएसटी अपीलीय अधिकरण से हम हर करदाता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि आपकी अपील सुनी जाएगी, आपके अधिकार सुरक्षित रहेंगे और न्याय में देरी नहीं होगी. जीएसटी अब केवल गुड एंड सिंपल टैक्स ही नहीं, बल्कि निष्पक्ष और भरोसेमंद कर प्रणाली बनेगा.” जीएसटीएटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अधिकरण लंबित अपीलों के बोझ को कम करेगा और भविष्य के विवादों के लिए न्यायिक व्याख्या तय करेगा. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग की सराहना की और विश्वास जताया कि यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा. जीएसटीएटी क्यों ज़रूरी? जीएसटीएटी एक सांविधिक निकाय है जो जीएसटी कानूनों के अंतर्गत गठित किया गया है. यह करदाताओं को कर विवादों के समाधान के लिए स्वतंत्र और अंतिम मंच प्रदान करेगा. इसका उद्देश्य न केवल विवाद निपटाना है, बल्कि कारोबारियों और नागरिकों के लिए समय पर, सरल और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित करना भी है.

जनता को मिल सकती है और राहत, PM मोदी ने दिए GST में और कटौती के संकेत

 नोएडा नवरात्रि के पहले दिन (22 सितंबर) गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में भारी कटौती का तोहफा देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और खुशखबरी दी है। पीएम मोदी ने भविष्य में टैक्स में और ज्यादा कमी का संकेत दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ टैक्स कम होता जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 में एक लाख की खरीदारी पर करीब 25 हजार का टैक्स लगता था, जो अब घटकर 5-6 हजार रह गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी इंटरनेशल ट्रेड शो का आगाज करते हुए गुरुवार को जीएसटी में हुई कटौती और इससे हो रही बचत का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने भविष्य में भी इसमें कमी का संकेत देते हुए कहा, 'आज देश जीएसटी बचत उत्सव मना रहा है। मैं आपको बताना चाहता हूं हम यहीं नहीं रुकने वाले। 2017 में हम जीएसटी लाए, आर्थिक मजबूती का काम किया। 2025 में फिर से लाए, फिर आर्थिक मजबूती करेंगे और जैसे-जैसे आर्थिक मजबूती होगी टैक्स का बोझ कम होता जाएगा। देशवासियों के आशीर्वाद से जीएसटी रिफॉर्म का सिलसिला निरंतर चलता रहेगा।' पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले इतने सारे टैक्स थे। एक प्रकार से टैक्स का जंजाल था। उसके कारण बिजनेस की कॉस्ट और परिवार का बजट दोनों ही कभी भी संतुलित नहीं हो पाते थे। एक हजार रुपये की शर्ट पर 117 रुपये टैक्स लगता था। 2017 में जब हम जीएसटी लाए तो पहले जीएसटी में 170 रुपये से कम होकर 50 हो गया और अब 22 सितंबर के बाद उसी शर्ट पर सिर्फ 35 रुपये देने होंगे। 2014 में टूथपेस्ट, तेल शैंपू आदि पर कोई 100 रुपये खर्च करता था तो 31 रुपये टैक्स लगता था। 2017 में टैक्स 18 रुपये रह गया। अब यही सामान 105 रुपये में मिलेगा। 131 रुपये का सामान एक 105 पर आ गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई परिवार 2014 से पहले साल में एक लाख रुपये का सामान खरीदता था तो उसे उस समय में करीब 25 हजार रुपये टैक्स देना पड़ता था। लेकिन अब नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी के बाद करीब 5-6 हजार रुपये टैक्स ही देना पड़ेगा। क्योंकि जरूरत के ज्यादातर सामान पर अब सिर्फ पांच फीसदी जीएसटी हो गया है। ट्रैक्टर से स्कूटर तक सस्ता पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले एक ट्रैक्टर खरीदने पर 70 हजार रुपये से अधिक टैक्स देना पड़ता था। अब उसी ट्रैक्टर पर सिर्फ 30 हजार का टैक्स देना पड़ता है। किसान को एक ट्रैक्टर पर 40 हजार की बचत हो रही है। थ्री व्हीलर पर तब 55 हजार का टैक्स लगता था, अब उसी पर जीएसटी करीब 35 हजार रह गया है। सीधे 20 हजार की बचत। जीएसटी कम होने की वजह से स्कूटर 2014 की तुलना में 8 हजार और मोटरसाइकिल 9 हजार सस्ती हो गई है। गरीब और मिडिल क्लास सबकी बचत हुई है। कांग्रेस पर जोरदार हमला पीएम मोदी ने टैक्स छूट का विस्तार से जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'कुछ राजनीतिक दल देश के लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। 2014 से पहले जो सरकार चला रहे थे उसकी नाकामियां छिपाने के लिए कांग्रेस और उसके साथी दल जनता से झूठ बोल रहे हैं। सच यह है कि कांग्रेस सरकार में टैक्स की लूट थी और लूटे धन में से भी लूट होती थी। आम नागरिक को टैक्स की मार से निचोड़ा जा रहा था। हमारी सरकार ने टैक्स और महंगाई को कम किया है। देश के लोगों की आमदनी और बचत बढ़ाई है। कांग्रेस सरकार में 2 लाख रुपये की आमदनी तक इनकम टैक्स माफ था, आज 12 लाख रुपये की आमदनी टैक्स फ्री है। इनकम टैक्स और जीएसटी में छूट से लोगों को ढाई लाख करोड़ की बचत हुई है।'

रेलवे कर्मियों के लिए खुशखबरी: बोनस पर आया ताज़ा अपडेट

नई दिल्ली  रेलवे कर्मचारियों के बड़ी खुशखबरी है। खबर है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल अपनी आगामी बैठक में दिवाली बोनस के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकता है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि दिवाली और त्योहारी सीजन को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल जल्द ही रेलवे कर्मचारियों के लिए उत्पादकता-आधारित बोनस को मंजूरी दे सकता है। बता दें कि यह बोनस मुख्य रूप से गैर-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों को उनके योगदान और भारतीय रेलवे की दक्षता और प्रदर्शन में सुधार के लिए दिया जाता है। पिछले साल करीब 11 लाख कर्मचारियों को यह बोनस मिला था। इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा बल्कि त्योहारी खर्च में भी बढ़ोतरी हुई थी। क्या है डिटेल एक रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी बैठक में बोनस पर ऐलान संभव है। इस बीच जानकारों का मानना है कि रेलवे कर्मचारियों को बोनस का भुगतान (जो शहरी और अर्ध-शहरी भारत में एक विशाल उपभोक्ता आधार का प्रतिनिधित्व करते हैं) घरेलू खपत को सीधे बढ़ावा दे सकता है। इस साल की दीवाली पर यह कदम हाल ही में लागू जीएसटी कटौती के साथ मिलकर खुदरा और उपभोक्ता मांग को और तेज कर सकता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, त्योहारी मौसम में इस तरह की नकद बढ़ोतरी का गुणक होता है, जिससे वर्ष के अंतिम तिमाही में मांग में निरंतरता बनी रहती है। रेलवे कर्मचारियों के यूनियनों की मांग बता दें कि रेलवे कर्मचारियों के यूनियनों ने भी इस महीने सरकार से उत्पादकता बोनस बढ़ाने और आठवीं वेतन आयोग की स्थापना के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी करने की मांग की है। भारतीय रेलवे कर्मचारी महासंघ (IREF) ने कहा कि अभी तक बोनस छठे वेतन आयोग के न्यूनतम वेतन ₹7,000 के आधार पर दिया जा रहा है, जबकि सातवें वेतन आयोग के अनुसार कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹18,000 है। IREF के राष्ट्रीय महासचिव सर्वजीत सिंह ने इसे “अत्यंत अन्यायपूर्ण” बताया। इसी तरह, अखिल भारतीय रेलवे कर्मचारी संघ (AIRF) ने भी बोनस की गणना में मासिक सीमा ₹7,000 को हटाकर वर्तमान वेतन संरचना के अनुसार बढ़ाने की मांग दोहराई है।

इजरायल को लेकर सीरिया का खुला कबूलनामा, राष्ट्रपति बोले – डरते हैं, समझौते की जरूरत

न्यूयॉर्क संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में संबोधन के लिए अपनी पहली ऐतिहासिक यात्रा पर पहुंचे सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने चेतावनी दी कि यदि इजरायल उनकी अंतरिम सरकार के साथ ऐसा सुरक्षा समझौता नहीं करता, जो सीरिया की संप्रभुता को सुरक्षित रखे, तो पूरा मध्य-पूर्व एक नए दौर की उथल-पुथल में घिर सकता है। हालांकि इस दौरान उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि उनके देश को इजरायल से डर लगता है और वे इजरायल के लिए कोई खतरा नहीं हैं। लंबे समय तक सत्ता में रहे बशर अल-असद को दिसंबर में उखाड़ फेंकने के बाद शरा ने सीरिया की सत्ता संभाली थी। पूर्व जिहादी रह चुके शरा ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता इजरायल के साथ सुरक्षा समझौता है, लेकिन उन्होंने यहूदी देश पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर बातचीत को टाल रहा है और सीरिया की हवाई और जमीनी सीमाओं का उल्लंघन जारी रखे हुए है। शरा ने मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में कहा, “हम इजरायल के लिए कोई समस्या खड़ी नहीं कर रहे हैं। हमें इजरायल से डर है, नाकि इजरायल को हम से। इजरायल की तरफ से बातचीत में देरी और हमारी सीमाओं का उल्लंघन कई तरह के जोखिम खड़े कर रहे हैं।” उन्होंने सीरिया के बंटवारे की किसी भी चर्चा को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार ड्रूज अल्पसंख्यक के हितों की रक्षा कर रही है। शरा ने कहा ने कहा, “जॉर्डन दबाव में है, और सीरिया के बंटवारे की कोई भी बात इराक और तुर्की को भी नुकसान पहुंचाएगी। इससे हम सभी फिर से वहीं लौट जाएंगे, जहां से शुरुआत हुई थी।” उन्होंने याद दिलाया कि सीरिया अभी-अभी डेढ़ दशक लंबे युद्ध से निकला है। अमेरिका की मध्यस्थता और “डि-एस्केलेशन” समझौता अमेरिका के सीरिया मामलों के विशेष दूत टॉम बरैक ने संकेत दिया कि सीरिया और इजरायल एक “डि-एस्केलेशन” समझौते के करीब हैं। इस समझौते के तहत इजरायल सीरिया पर हवाई हमले और घुसपैठ रोक देगा, जबकि सीरिया इस बात पर सहमत होगा कि वह इजरायल सीमा के पास कोई भारी मशीनरी या सैन्य उपकरण नहीं तैनात करेगा। बरैक के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापक सुरक्षा समझौते की दिशा में पहला कदम होगा। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि सभी पक्ष अच्छे विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।” गोलान हाइट्स और ड्रूज समुदाय पर तनाव सीरिया की सरकार चाहती है कि इजरायल हवाई हमले रोके और उन सैनिकों को हटाए जो गोलान हाइट्स के बफर जोन पर काबिज हैं। असद के पतन के बाद इजरायल ने लगातार सैन्य ठिकानों पर हमले किए, ताकि सीरियाई क्षमताओं को कमजोर किया जा सके। साथ ही, दक्षिणी सीरिया में ड्रूज समुदाय पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए भी इजरायल ने हस्तक्षेप किया। ट्रंप प्रशासन की भूमिका और बाधाएं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच समझौते की घोषणा इसी हफ्ते करवाना चाहते थे, लेकिन अब तक पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है। साथ ही, यहूदी नववर्ष रोश हशाना के चलते प्रक्रिया धीमी हो गई है। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इजरायल को बताया कि उभरता हुआ सुरक्षा समझौता “99% तैयार” है और अगले दो हफ्तों में इसकी घोषणा की जा सकती है। इजरायल की सतर्क प्रतिक्रिया इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि सीरिया और लेबनान दोनों के साथ शांति की संभावना का नया अवसर पैदा हुआ है, खासकर इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद जब लेबनानी संगठन हिजबुल्लाह को भारी नुकसान हुआ। हालांकि नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि सीरिया के साथ किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने में अभी समय लगेगा।

कर्फ्यू की गिरफ्त में लेह: इंटरनेट स्पीड कम, सड़कों पर CRPF और पुलिस का सख्त पहरा

लेह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर चला शांतिपूर्ण आंदोलन बुधवार को हिंसा में तब्दील हो गया. लेह की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों ने हालात बिगाड़ दिए. उपद्रव में चार लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हुए. स्थिति काबू से बाहर होती देख प्रशासन ने लेह और करगिल में कर्फ्यू लगा दिया. इंटरनेट स्पीड घटा दी और पुलिस-सीआरपीएफ की भारी तैनाती कर दी. फिलहाल, केंद्र शासित प्रदेश में अब तनावपूर्ण शांति है. लेह पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों पर एक्शन लिया है और 50 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि मामले में जांच चल रही है. दोषियों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया जाएगा.  इससे पहले बुधवार दोपहर उग्र प्रदर्शनकारियों ने लेह में राजनीतिक दल के कार्यालय और सरकारी इमारतों में आग लगा दी. पुलिस वाहनों को फूंक दिया और सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया. घायलों में 40 पुलिस और सीआरपीएफ जवान भी शामिल हैं. फिलहाल, लेह में कर्फ्यू जारी है. प्रशासन की ओर से सख्त निषेधाज्ञा लागू की गई है. लोगों से शांति बहाल करने की अपील की जा रही है. शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और सीआरपीएफ की भारी तैनाती है.  जिन इलाकों में बुधवार को हिंसा हुई थी, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. प्रशासन ने हिंसा भड़कने के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उनके भड़काऊ बयानों ने युवाओं को उकसाया. ऐहतियात के तौर पर लेह में इंटरनेट स्पीड भी धीमी कर दी गई है. गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि आंदोलन के बीच भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के भड़काऊ भाषणों ने भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया. मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक ने 'अरब स्प्रिंग' और नेपाल में Gen-Z विरोध का हवाला देकर लोगों को गुमराह किया. इसी दौरान हिंसा भड़क उठी और वांगचुक ने हड़ताल तोड़ दी. स्थिति को काबू में करने को लेकर प्रयास किए बिना वो एंबुलेंस से अपने गांव लौट गए. सरकार ने कहा कि हम लद्दाख के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संवाद की प्रक्रिया से अब तक कई महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं. इनमें अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% किया गया. परिषदों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित हुआ. भोटी और पुर्गी भाषाओं को आधिकारिक भाषा घोषित किया गया. 1800 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित लोग उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) के जरिए हो रही बातचीत को विफल करने में लगे हैं. घटनाओं के बाद लेह और करगिल दोनों जिलों में कर्फ्यू और बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई.  हिंसा के बाद वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता की मांगों की अनदेखी ही इस संकट का कारण है. CPI(M) और CPI(ML) ने केंद्र पर संवैधानिक अधिकार छीनने और दमन की राजनीति करने का आरोप लगाया. कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेताओं ने भी घटना पर संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने की मांग की. वहीं, बीजेपी ने हिंसा को साजिश करार दिया. लद्दाख में 1989 के बाद यह सबसे गंभीर हिंसक घटना बताई जा रही है. प्रशासन ने बुधवार शाम 4 बजे तक स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया, लेकिन इलाके में तनाव अभी भी बरकरार है.

नरेंद्र मोदी: जीएसटी सुधारों के सूत्रधार और आधुनिक भारत के चाणक्य

जीएसटी सुधार- वर्तमान भारत के चाणक्य नरेंद्र मोदी  वस्तु एवं सेवा कर,जीएसटी,भारत के भूतो न भविष्यति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया। स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण सुधार है। वर्ष 2000 में भी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने जीएसटी का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। तब कांग्रेस ने विरोध किया।10 साल तक कांग्रेस की मनमोहन सरकार भी राज्यों को कर हानि, राजस्व हानि के विरुद्ध गारंटी नहीं दे सकी।राज्यों को एकीकृत कर प्रणाली हेतु आश्वस्त करने में विफल रही। मोदी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने सभी राज्यों को आर्थिक गारंटी दी।फलस्वरूप राज्य सहमत हुए और 1 जुलाई 2017 से संपूर्ण देश में एक समान वस्तु एवं सेवा कर लागू हुआ।एक देश एक कर व्यवस्था आरम्भ हुई।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से 15 अगस्त 2025 को भारत की जनता को संबोधित करते हुए जीएसटी में नई पीढ़ी के सुधारों एवं 22 सितंबर 2025 से नवरात्रि के पुण्यकाल से देश में लागू करने की घोषणा की गई थी।इस संकल्पना में मोदी सरकार का अगली पीढ़ी का सुधार एवं नागरिक देवो भव: के मंत्र का पालन स्पष्ट रूप से झलकता है।जीएसटी टैक्स स्लैब में 12 और 28 प्रतिशत के स्लैब को हटा दिया गया है। प्रमुख रूप से भारत की जनता जनार्दन की दैनिक आवश्यकता की लगभग 99 प्रतिशत वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर, शून्य या 5 प्रतिशत या 18 प्रतिशत कर दिया गया है।सोना,चाँदी आदि मूल्यवान धातुओं पर पूर्व की भाँति 3 प्रतिशत जीएसटी रहेगा।विलासिता एवं सिन आइटम पर 40 प्रतिशत जीएसटी रहेगा।अनेक खाद्य पदार्थ,जीवन बीमा, मेडिकल स्वास्थ्य बीमा, स्वास्थ्य सेवा पर जीएसटी शून्य होने से अत्यधिक लाभ होगा।औषधियों पर टैक्स 12 से कम कर 5 प्रतिशत कर दिया है।कृषि उपकरणों पर 18 प्रतिशत से कम कर 5 प्रतिशत करने से किसानों को भी लाभ होगा।निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट पर टैक्स 28 से कम होकर 18 प्रतिशत हो गया है ।आवास भी सस्ते होंगे ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एस्पिरेशनल इंडिया का उल्लेख जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण कार बाजार में देखने को मिल रहा है। मारुति सुजुकी ने कार बुकिंग का पिछले 35 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हुंडई  के शोरूम में भी 5 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा है। जीएसटी दरों में कटौती के पहले दिन मारुति ने 25,000 कारों की डिलीवरी की। मारुति के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने कहा है कि यह वास्तव में एक ऐतिहासिक क्षण है, पिछले 35 वर्षों में ऐसा पहली बार देखा गया है कि पहले ही दिन 80,000 पूछताछ दर्ज हुईं और 25,000 से अधिक कारें डिलीवर कर दी गई। उन्होंने बताया कि डिलीवरी शीघ्र ही 30,000 तक पहुंच जाएगी। कंपनी को पहले ही दिन 75,000 से 85,000 बुकिंग  प्राप्त हुईं हैं।पिछले वर्ष की तुलना में इस बार का बाजार असाधारण रूप से मजबूत है और जीएसटी सुधार का प्रभाव भी अभूतपूर्व रूप से हुआ है।  नए सुधारों को लागू करवाने में,सभी राज्यों को सहमत करने में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का योगदान भी अतुलनीय है।पूर्व में वर्ष 2025-26 के बजट में मोदी सरकार ने आयकर की सीमा को 12 लाख कर दिया है।इससे भी जनता को धनलाभ हो रहा है।दोनों एतिहासिक कर सुधारों से जनता जनार्दन को प्रति वर्ष 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ होगा।अर्थ व्यवस्था में खपत बढ़ेगी।अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खपत बढ़ेगी।जनता जनार्दन की क्रय शक्ति बढ़ेगी।भारत भी अर्थव्यवस्था के पथ पर तीव्र गति से कुलांचे भरेगा,दौड़ेगा।वर्तमान में भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्यवस्था है।विश्व में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।द्रुत गति से निकट भविष्य में पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य अर्जित कर लेगा।विश्व की तीसरी सर्वाधिक अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा।  वर्ष 2014 में मनमोहन सरकार ने अगले 30 वर्षों में 2045 तक 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को अर्जित करने का अनुमान संसद में बजट सत्र के समय बताया था।मोदी सरकार इस लक्ष्य को लगभग 20 साल पहले ही अर्जित करने जा रही है।  भारतीय स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 35 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान अनेक आर्थिक रेटिंग एजेन्सी लगा रहीं हैं।सैकड़ों आर्थिक सुधारों को लागू करने से, मोदी सरकार ने अर्थ तंत्र को अविश्वसनीय, अद्वितीय, अकल्पनीय गति प्रदान कर सशक्त और समृद्ध बनाया है। भाजपा की अनेक राज्यों की सरकार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को कंधे से कंधा मिला कर पूर्ण कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के पुरूषार्थी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव,भाजपा के संगठन निष्ठ,तपस्वी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल,अनुशासन प्रिय प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा,उपमुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और नेता, जनता जनार्दन से संवाद कर रहे हैं। व्यापारियों से संवाद कर रहे हैं। व्यापारियों को स्वदेशी वस्तुओं के विक्रय एवं जनता को स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करने का आग्रह कर रहे हैं। जिससे भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो। भारत का निर्माण क्षेत्र भी तीव्र गति से समुन्नत हो ,वृद्धि करे।  महानतम अर्थशास्त्री चाणक्य के मंत्र-तस्मान्नित्योत्थितो राजा,कुर्यादर्थानुशासनम् ।अर्थस्य मूलमुत्थानम, अनर्थस्य विपर्ययः । इस मंत्र का पालन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय अर्थव्यवस्था को समुन्नत कर रहे हैं, समृद्ध बना रहे हैं।जनता जनार्दन को आर्थिक लाभ प्रदान कर रहे हैं।अतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधुनिक भारत के चाणक्य हैं, कौटिल्य हैं, विष्णु गुप्त हैं। इति श्री। लेखक- सत्येंद्र जैन  

झारसुगुड़ा दौरे पर पीएम मोदी, 27 सितंबर को युवाओं से करेंगे संवाद

झारसुगुड़ा (ओडिशा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 सितंबर को ओडिशा के झारसुगुड़ा दौरे पर आएंगे। इस दौरान वे युवा सम्मेलन को संबोधित करेंगे। साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। संबलपुर के राजस्व प्रभागीय आयुक्त (आरडीसी) सचिन रामचंद्र जाधव ने पीएम मोदी के दौरे के बारे में जानकारी दी। दरअसल, पीएम मोदी का यह दौरा मूल रूप से ब्रह्मपुर में होना था, लेकिन भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश की संभावना के कारण इस कार्यक्रम को झारसुगुड़ा में स्थानांतरित कर दिया गया। कार्यक्रम का नया स्थान झारसुगुड़ा का अमलीपल्ली मैदान होगा। संबलपुर के राजस्व प्रभागीय आयुक्त (आरडीसी) सचिन रामचंद्र जाधव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 27 सितंबर को झारसुगुड़ा में एक भव्य आयोजन किया जाएगा। हमें जानकारी मिली है कि इस कार्यक्रम में पीएम मोदी भी शामिल होंगे और वे युवाओं को संबोधित भी करेंगे। उन्होंने कहा, “ये कार्यक्रम झारसुगुड़ा के अमलीपल्ली मैदान में आयोजित होगा। पीएम मोदी इस अवसर पर विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। हमें परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास से संबंधित सूचना के जल्द मिलने की उम्मीद है, जिसे मीडिया के साथ साझा किया जाएगा। साथ ही, प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।” मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री बड़ी संख्या में युवाओं को संबोधित करेंगे। इस दौरे के दौरान वे रेलवे पर विशेष जोर देते हुए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं की कुल लागत 1,700 करोड़ रुपए से अधिक है, जो क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी सुधारने और अर्थव्यवस्था को गति देने पर केंद्रित हैं। यह दौरा देशव्यापी ‘सेवा पर्व’ पहल का हिस्सा है। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस उच्च स्तरीय आयोजन के लिए जोरदार तैयारियां शुरू कर चुकी हैं।  

यात्रियों के लिए खुशखबरी, अहमदाबाद से कानपुर तक शुरू हुई दीपावली स्पेशल

कोटा,  दिवाली पर अतिरिक्त यात्रीभार को देखते कानपुर से अहमदाबाद के असारवा स्टेशन के बीच विशेष रेलगाड़ी चलाई जा रही है। कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बुधवार को बताया कि यह रेलगाड़ी राजस्थान में कोटा मंडल के बूंदी और केशोरायपाटन स्टेशन सहित छह स्टेशनों से गुजरेगी और उदयपुर, हिम्मतनगर, ईदगाह आगरा, टुंडला और इटावा सहित 20 स्टेशन पर रुकेगी। उन्होंने बताया कि गाड़ी नंबर 01905 कानपुर सेंट्रल से असारवा तीन नवम्बर तक चलेगी। गाड़ी नंबर 01905 असारवा कानपुर सेंट्रल चार नवंबर तक चलेगी। यह गाड़ी 01905 कानपुर से सोमवार सुबह सवा आठ बजे रवाना होकर उसी दिन अपराह्न तीन बजकर 35 मिनट पर बयाना, चार बजकर 40 मिनट पर गंगापुर सिटी, शाम पांच बजकर 24 मिट पर सवाई माधोपुर, छह बजकर 33 मिनट पर केशोरायपाटन, सात बजकर आठ मिनट पर बूंदी और सात बजकर 58 मिनट पर मांडलगढ़ पहुंचेगी। यह रात 11 बजकर 40 मिनट पर उदयपुर और अगले दिन सुबह पौने छह बजे असारवा पहुंचेगी। इसी तरह गाड़ी संख्या 01906 असारवा से मंगलवार सुबह सवा नौ बजे रवाना होकर उदयपुर, मांडलगढ़, बूंदी, केशोरायपाटन, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी होते हुए रात 12 बजकर 46 मिनट पर बयाना पहुंचेगी। अगले दिन बुधवार को सुबह सात बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी। श्री जैन ने बताया कि इसमें सामान्य के आठ, स्लीपर के आठ, थर्ड एसी का एक और सेकंड एसी के एक डिब्बे सहित 21 डिब्बे होंगे। यह रेलगाड़ी वापसी में इटावा, फिरोजाबाद, टुंडला, इदगाह आगरा, फतेहपुर सीकरी, रूपबास, बयाना, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, केशोरायपाटन, बूंदी, मांडलगढ़, चंदेरिया, मावली, उदयपुर सिटी, जावर, डूंगरपुर, हिम्मतनगर रूकेगी।  

पुतिन की नीति ने पलटा खेल, रूस को हुआ आर्थिक लाभ – ट्रंप रह गए पीछे

नई दिल्ली  यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के दबाव में अमेरिका और यूरोप लगातार रूस पर नए-नए प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो यहां तक कह चुके हैं कि यूरोपीय संघ पूरी तरह से रूसी तेल खरीदना बंद करे. लेकिन उनकी ये चाल कामयाब नहीं हो पाई. इसके उलट, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा खेल रचा कि देश का खजाना कच्चे तेल की कमाई से भर गया. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का समुद्री कच्चा तेल निर्यात 21 सितंबर तक के 28 दिनों में औसतन 36.2 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया. यह मई 2024 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है. यानी पश्चिमी देशों की सख्ती और लगातार हमलों के बावजूद रूस ने तेल बेचने का नया रिकॉर्ड बना डाला. यूक्रेन की तरफ से किए गए ड्रोन हमलों ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचाया. इसके कारण उत्पादन घटकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे चला गया, जो अप्रैल 2022 के बाद का सबसे कम स्तर है. जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी के अनुमान के अनुसार, अगस्त और सितंबर में रूस सामान्य रूप से 54 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का प्रोसेस करता था. यूक्रेनी ड्रोन हमलों का शोर ज्‍यादा, असर कम यूक्रेन द्वारा रूस की रिफाइनरियों और अन्‍य रणनीतिक ठिकानों पर ड्रोन हमले में बड़े नुकसान के दावे किए गए हैं. लेकिन, असल में उतनी हानि हुई नहीं है. रूस ने पिछले हफ्ते बाल्टिक पोर्ट प्रिमोर्स्क से रिकॉर्ड 12 टैंकर कच्चा तेल लेकर निकले. यह दिखाता है कि पंपिंग स्टेशनों पर हमलों के बावजूद रूस की सप्लाई लाइन मजबूत बनी हुई है. बंदरगाहों पर मौजूद स्टोरेज टैंकों ने भी काम आसान कर दिया. पंप स्टेशनों की मरम्मत होने तक इन टैंकों से तेल की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रही. रूस ने अपनी रणनीति में भी बदलाव किया. रिफाइनिंग कम होने के बाद भी रूस ने कच्चे तेल को घरेलू खपत में लगाने के बजाय सीधे निर्यात टर्मिनलों पर भेज दिया. इससे विदेशों में कच्चे तेल की आपूर्ति और बढ़ गई और रूस की जेब भी भर गई. यूरोपीय संघ की दुविधा यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए रूस पर नए प्रतिबंधों की संभावना अभी दूर दिखती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि आगे कोई नया कदम तभी उठाया जाएगा जब यूरोपीय संघ पूरी तरह रूसी तेल की खरीद बंद करे. डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दबाव बना रहे हैं कि यूरोपीय संघ पूरी तरह से रूसी तेल खरीद बंद करे. लेकिन ऐसा होना अभी मुश्किल है. हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देश रूस के तेल पर निर्भर हैं और वे इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. इसी कारण यूरोपीय संघ प्रतिबंध लगाने के बजाय अब टैरिफ जैसे व्यापारिक उपायों पर विचार कर रहा है. यह भी पुतिन के लिए राहत की बात है क्योंकि इसका असर सीमित होगा.