samacharsecretary.com

ट्रंप का जेलेंस्की को संदेश: रूस की शर्तें मानो या परिणाम भुगतों

यूक्रेन  यूक्रेन शांति वार्ताओं में कोई एकमत नहीं बन पाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कथित तौर पर यूक्रेन के अग्रिम मानचित्र देखकर थक गए हैं। 17 अक्टूबर 2025 को व्हाइट हाउस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के प्रतिनिधिमंडल द्वारा लाए गए नक्शे को ट्रंप ने फेंक दिया। ट्रंप का जोर इस पर था कि यूक्रेन रूस की शर्तें स्वीकार करे और पूर्वी हिस्से डोनबास को रूस को सौंप दे। नक्शों की भूमिका  राजनीतिक भूगोलवेत्ताओं के अनुसार नक्शे शांति वार्ता और क्षेत्रीय संघर्ष में महत्वपूर्ण रणनीतिक उपकरण हैं। बोस्निया, काकेशस और यूक्रेन में यह देखा गया कि नक्शों पर रेखाएं खींचने से ही युद्धविराम या विभाजन की दिशा तय होती है।   भावनात्मक दृष्टिकोण बनाम व्यावसायिक दृष्टिकोण  जेलेंस्की और यूक्रेनी जनता भूमि की अखंडता और भावनात्मक पहचान के पक्षधर हैं, जबकि ट्रंप इसे व्यावसायिक सौदे की तरह देखते हैं। सैनिकों की कुर्बानी और भूमि का प्रतीकात्मक महत्व ट्रंप की नजर में नहीं आता। गलतफहमी और कूटनीतिक बाधाएं  अगस्त 2025 में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने रूसी प्रस्ताव की व्याख्या गलत की, जिससे अमेरिका ने नए प्रतिबंध टाल दिए। अलास्का शिखर सम्मेलन में पुतिन ने भी युद्धविराम की शर्तें ठुकराईं, लेकिन प्रस्ताव दिया कि रूस डोनबास पर कब्जा करे और जापोरिज्जिया-खेरसॉन से पीछे हटे। व्हाइट हाउस बैठक और नक्शा फेंकने की घटना  18 अगस्त 2025 को सात यूरोपीय नेताओं और जेलेंस्की के साथ हुई बैठक में, ट्रंप ने यूक्रेन का मानचित्र फेंक दिया। नक्शे में रूस के कब्जे वाले क्षेत्र नारंगी में दर्शाए गए थे। ट्रंप ने बाद में कहा कि “यूक्रेन का बड़ा हिस्सा पहले ही चला गया है,” जबकि जेलेंस्की इसे राष्ट्रीय अखंडता का मामला मानते हैं। युद्धक्षेत्र को संपत्ति के रूप में देखना  ट्रंप युद्ध को रियल एस्टेट सौदे की तरह देखते हैं। उनका मानना है कि डोनबास को मौजूदा युद्ध रेखाओं के आधार पर बांट देना चाहिए। जेलेंस्की इसे राष्ट्रीय और भावनात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं। इस तरह, मानचित्र और दृष्टिकोण के अंतर ने शांति वार्ता को जटिल बना दिया है, और यूक्रेन के भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है।  

युद्धविराम में शामिल शर्तों की याद दिलाई अफगानिस्तान ने, पाकिस्तान के लिए बढ़ा दबाव

काबुल अफगानिस्तान के तालिबान शासन ने पाकिस्तान को उन शर्तों की याद दिलाई है जो दोनों के बीच हुए समझौते में निहित हैं। एक बयान जारी कर बताया गया कि समझौते में युद्धविराम, आपसी सम्मान और एक-दूसरे के सुरक्षा बलों, नागरिकों और सुविधाओं पर हमलों से बचने पर जोर दिया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ये बयान पोस्ट किया गया। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इसमें कहा, "इस्लामिक अमीरात के रक्षा मंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान के साथ हुए समझौते के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। इसके अलावा और कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह समझौता युद्धविराम, आपसी सम्मान, एक-दूसरे के सुरक्षा बलों, नागरिकों और सुविधाओं पर हमलों से बचने, बातचीत के जरिए सभी मामलों का समाधान करने और एक-दूसरे पर हमले न करने पर पूरी तरह जोर देता है। इन शर्तों से परे कोई भी बयान अमान्य है।" यह बयान अफगान क्षेत्र पर हवाई हमले और अफगान शरणार्थियों के बड़े पैमाने पर निर्वासन के बाद दोनों पड़ोसी देशों में बढ़ते तनाव के बीच आया है। इससे पहले 18 अक्टूबर को, कतर के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि एक सप्ताह से भी ज्यादा समय तक चली भीषण लड़ाई के बाद, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए, अफगानिस्तान और पाकिस्तान तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। कतर के बयान के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान स्थायी शांति और स्थिरता को मजबूत करने के उद्देश्य से तंत्र स्थापित करने पर सहमत हुए हैं, और युद्धविराम की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए फॉलो-अप वार्ताएं निर्धारित हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों के प्रतिनिधिमंडल कतर और तुर्की की मध्यस्थता में वार्ता के लिए दोहा में थे। वार्ता का नेतृत्व दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने किया, और पाकिस्तान ने कहा कि ध्यान "अफगानिस्तान से उत्पन्न सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करने और सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल करने के तत्काल उपायों" पर केंद्रित होगा। यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमले किए। इस्लामाबाद और काबुल दोनों ने हाल के दिनों में एक-दूसरे पर आक्रमण का आरोप लगाया है। पाकिस्तान ने बार-बार दावा किया है कि आतंकवादी समूह अफगान क्षेत्र से हमले कर रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान ने सीमा पार हिंसा के लिए जिम्मेदार ऐसे किसी भी तत्व को पनाह देने से दृढ़ता से इनकार किया है। 18 अक्टूबर को अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में पाकिस्तानी हवाई हमले में तीन अफगान क्रिकेटर मारे गए थे। ये खिलाड़ी एक दोस्ताना क्रिकेट मैच में हिस्सा लेने के लिए उर्गुन से पाकिस्तान सीमा के पास शाराना गए थे। मृतकों की पहचान कबीर, सिबगतुल्लाह और हारून के रूप में हुई थी। इस हमले में पांच अन्य नागरिकों की भी मौत हो गई थी।

अब क्या बचा? इजरायल का गाजा पर भारी हमला — 153 टन बम, ट्रंप की सख्त चेतावनी

इजरायल इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संसद में बताया कि गाजा पट्टी पर 153 टन बम गिराए गए, जो हमास के कथित युद्धविराम उल्लंघन का जवाब था। इस कार्रवाई में दो इजरायली सैनिकों की मौत हुई। नेतन्याहू ने कहा कि अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और हमास की सैन्य व शासन क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करने तक यह जारी रहेगा।नेतन्याहू ने कहा-“हमारे एक हाथ में हथियार है और दूसरा शांति के लिए फैला है। लेकिन शांति के लिए ताकत जरूरी है, और आज इजरायल पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।”उन्होंने युद्धविराम पर भी सवाल उठाते हुए संकेत दिया कि गाजा में अभियान जल्द समाप्त नहीं होगा।   इस बीच,  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि हमास ने युद्धविराम या किसी समझौते का उल्लंघन किया, तो उसे तेज, जबरदस्त और निर्दयी परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने बताया कि कई मध्य पूर्वी देश गाजा में हमास के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ट्रंप ने फिलहाल इंतजार करने का निर्णय लिया है।ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि कई मध्य-पूर्वी सहयोगी गाजा में हमास के खिलाफ भारी फोर्स लगाने को तैयार हैं, पर उन्होंने अभी रोक लगाई है और कहा कि उम्मीद है हमास सही कदम उठाएगा। ट्रंप ने समझौते के उल्लंघन पर कड़े परिणामों की चेतावनी भी दी।ट्रंप ने हमास से सही और जिम्मेदार कदम उठाने की उम्मीद जताई है, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।   रफा क्षेत्र में युद्धविराम के बावजूद इजरायली रक्षा बलों (IDF) पर हमला हुआ था, जिसमें दो सैनिक मारे गए। इजरायल ने इसके लिए हमास को जिम्मेदार ठहराया और दर्जनों ठिकानों पर हवाई हमले किए। हालांकि हमास ने इसमें किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया।अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मंगलवार को इजरायल पहुंचे हैं ताकि युद्धविराम और दीर्घकालिक शांति योजना पर चर्चा कर सकें। यह यात्रा उस समय हुई है जब युद्धविराम को लेकर दोनों पक्षों में तनाव और अविश्वास बना हुआ है।वहीं, हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या ने मिस्र के काहिरा में कहा कि“हम शर्म अल-शेख समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद अंत तक युद्धविराम का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”“हम शर्म अल-शेख समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद अंत तक युद्धविराम का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”  

मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

मुंबई  मुंबई शहर और महानगरीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बेमौसम बारिश हुई. लक्ष्मी पूजन के दौरान अचानक हुई बारिश से खरीदारी करने आए लोगों और सड़क पर सामान बेचने वालों को असुविधा हुई. मुंबई और आसपास के इलाकों में सुबह से ही उमस थी. अचानक हुई बारिश से थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन दिवाली की खरीदारी करने वालों और दुकानदारों को असुविधा भी हुई. दरअसल दादर, बांद्रा, लालबाग, पवई, बायकुला, कुर्ला और कई अन्य क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश हुई. नगर निकाय के अधिकारियों ने बताया कि नवी मुंबई के कई इलाकों में भारी बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की भी खबर है. इस बीच, मौसम विभाग ने अगले दो-तीन दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है. मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में बारिश नेरुल, बेलापुर, वाशी, सीवुड्स, सानपाड़ा और घनसोली सहित कई क्षेत्रों में भारी बारिश हुई. इससे कई सड़कें आंशिक रूप से जलमग्न हो गईं और व्यस्ततम आवागमन समय के दौरान यातायात धीमा हो गया. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आने वाले कुछ घंटों में नवी मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है. लोगों को हुई भारी परेशानी राज्य में एक बार फिर बारिश शुरू हो गई है, मुंबई सहित राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो रही है. दिवाली से ठीक पहले अचानक हुई बारिश के कारण लोगों को खरीदारी के लिए निकलने में दिक्कतें हुईं. मुंबई, कल्याण, ठाणे, पटाखा व्यापारियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. बलदापुर और नासिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है. मुंबई के दादर इलाके में मध्यम बारिश मुंबई में मंगलवार शाम के आसपास बारिश ने दस्तक दे दी. मुंबई के दादर इलाके में हल्की से मध्यम बारिश हुई. बारिश अचानक तब शुरू हुई जब दिवाली के मौके पर खरीदारी के लिए दादर के बाज़ार में भारी भीड़ थी.उधर, ठाणे में भी भारी बारिश हुई है. इस बारिश से खरीदारी के लिए घरों से बाहर निकले नागरिकों को काफी परेशानी हुई. कल्याण में मौसम में अचानक बदलाव आया और उसके कुछ ही देर बाद शहर और आसपास के इलाकों में गरज और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने लगी. तेज हवाओं के कारण वाहन चलाते समय चालकों को काफी तनाव में रहना पड़ रहा है. निचले इलाकों में जलभराव की आशंका कुछ क्षेत्रों में बारिश शुरू होते ही बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे नागरिकों को दिवाली के दौरान अंधेरे में रहना पड़ा. अचानक हुई मूसलाधार बारिश से लोग भी इधर-उधर भागने को मजबूर हो गए. वहीं, अगर बारिश जारी रही तो निचले इलाकों में जलभराव की आशंका है.उधर, बदलापुर में भी बारिश ने दस्तक दे दी है. शहर में हल्की से मध्यम बारिश हुई. इस बारिश से हवा में ठंडक होने के साथ ही नागरिकों को गर्मी से राहत मिली है. नासिक जिले में बारिश दूसरी ओर, मुंबई के अलावा, नासिक जिले के कुछ हिस्सों में भी बारिश हुई है. नासिक के निफाड़ में पिछले कुछ समय से अच्छी बारिश हो रही है और इस बारिश से खेती पर असर पड़ने की संभावना है.  

केंद्रीय मंत्री गोयल करेंगे जर्मनी दौरा, निवेश और व्यापार के नए अवसरों की तैयारी

नई दिल्ली वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ बातचीत के लिए 23 अक्टूबर से जर्मनी के दौरे पर हैं। मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, बर्लिन यात्रा जर्मनी के साथ भारत के जुड़ाव को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वर्ष 2025 भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ का भी वर्ष है, जो द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और दीर्घकालिक मजबूती को उजागर करता है। केंद्रीय मंत्री गोयल की बैठकें दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, इंडस्ट्री लीडर्स और व्यापार संघों के साथ उच्च-प्रभावी बातचीत को आगे बढ़ाएगी। इस यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री गोयल जर्मन संघीय आर्थिक मामले एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे और फेडरल चांसलरी में आर्थिक एवं वित्तीय नीति सलाहकार तथा जर्मनी के जी7 एवं जी20 शेरपा डॉ. लेविन होले के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। बैठक के दौरान गतिशील भारत-जर्मनी आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने और व्यापार एवं निवेश सहयोग बढ़ाने के नए रास्ते तलाशने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय मंत्री गोयल द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने के अलावा, लक्जमबर्ग की आगामी भारत राजकीय यात्रा, वर्तमान क्षेत्रीय घटनाक्रमों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए लक्जमबर्ग के उप प्रधान मंत्री और विदेश मामलों एवं व्यापार मंत्री जेवियर बेटेल के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक भी करेंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अपनी बर्लिन यात्रा के दौरान गोयल तीसरे बर्लिन ग्लोबल डायलॉग (बीजीडी) में एक वक्ता के रूप में भाग लेंगे। यह एनुअल समिट ग्लोबल इकोनॉमी को आकार देने वाले मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए व्यापार, सरकार और शिक्षा जगत के नेताओं को एक साथ लाता है। 'लीडर्स डायलॉग : ग्रोइंग टूगेदर- ट्रे़ एंड अलायंस इन अ चेंजिंग वर्ल्ड' टाइटल के सेशन में केंद्रीय मंत्री गोयल एक पैनलिस्ट होंगे। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री गोयल की इस यात्रा में शेफलर ग्रुप, रेन्क व्हीकल मोबिलिटी सॉल्यूशंस, हेरेनक्नेच्ट एजी, इनफिनियन टेक्नोलॉजीज एजी, एनरट्रैग एसई और मर्सिडीज-बेंज ग्रुप एजी जैसी प्रमुख जर्मन कंपनियों के सीईओ के साथ आमने-सामने की कई बैठकें शामिल होंगी। वे जर्मन मिटेलस्टैंड कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और प्रमुखों के साथ एक राउंडटेबल की अध्यक्षता भी करेंगे और फेडरेशन ऑफ जर्मन इंडस्ट्रीज (बीडीआई) तथा एशिया-पैसेफिक एसोसिएशन ऑफ जर्मन बिजनेस (एपीए) के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे।

छठ पूजा के लिए 12000 स्पेशल ट्रेनें? रेलवे का बड़ा फैसला और तैयारी, देखें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली त्योहारी सीजन के दौरान रेलवे की तैयारी पर, रेलवे बोर्ड के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक, दिलीप कुमार ने कहा, “भारतीय रेलवे ने इस वर्ष दिवाली और छठ पूजा के अवसर पर 12,000 से अधिक ट्रेनों के संचालन की व्यापक योजना बनाई है. पिछले कुछ दिनों में, हमने जिन ट्रेनों का संचालन किया है, उनके माध्यम से हमने लगभग 1 करोड़ यात्रियों को विशेष ट्रेनों के माध्यम से सुविधा प्रदान की है. इन ट्रेनों को चलाने का मुख्य उद्देश्य बड़ी संख्या में उन लोगों को सुविधा प्रदान करना है जो त्योहारों के दौरान अपने घरों की यात्रा करना चाहते हैं.” पिछले 4 दिनों मं 15 लाख यात्रियों ने यात्रा की रेलवे के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक ने बताया, “पिछले साल, हमने 7,724 विशेष ट्रेनें चलाईं. इस साल हमने 12,000 ट्रेनें चलाने का फैसला किया है… पिछले 4 दिनों में, लगभग 15 लाख यात्रियों ने नई दिल्ली के विभिन्न स्टेशनों का उपयोग करके अपने-अपने गंतव्य तक यात्रा की है.” यात्रियों सुविधाएं बढ़ाई गईं, 12 लाख रेलवे कर्मचारी कर रहे दिन-रात काम रेलवे के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक ने बताया- “हमने सभी प्रमुख स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया बनाए हैं, सभी स्टेशनों पर टिकट काउंटरों की सुविधाओं में वृद्धि की है. सभी रेलवे व्यवस्थाओं की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है. 12 लाख रेलवे कर्मचारी दिन-रात अथक परिश्रम कर रहे हैं ताकि यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाया जा सके.” पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में स्पेशल और सामान्य ट्रेनों में कुल 46 कोच जोड़े गए हैं, जिससे प्रतिदिन लगभग 12,000 यात्रियों की क्षमता बढ़ी है कई क्षेत्रों से कोलकाता और बेंगलुरु (SMVT बेंगलुरु) के लिए पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं या नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं। पिछले 4 दिनों मं 15 लाख यात्रियों ने यात्रा की रेलवे के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक ने बताया, “पिछले साल, हमने 7,724 विशेष ट्रेनें चलाईं. इस साल हमने 12,000 ट्रेनें चलाने का फैसला किया है… पिछले 4 दिनों में, लगभग 15 लाख यात्रियों ने नई दिल्ली के विभिन्न स्टेशनों का उपयोग करके अपने-अपने गंतव्य तक यात्रा की है.” लालकुआं से कोलकाता के बीच स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है जो यूपी के कई स्टेशनों जैसे भोजीपुरा, पीलीभीत, लखीमपुर, सीतापुर, गोंडा, बस्ती और गोरखपुर से होकर गुजरती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) भी बेंगलुरु से उत्तरी शहरों, जैसे पटना और हावड़ा तक यात्रियों को सुविधा देने के लिए स्पेशल ट्रेनें चला रहा है और अतिरिक्त कोच जोड़ रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए प्लेटफॉर्म पर भीड़ कम करने के लिए होल्डिंग एरिया और अतिरिक्त सुरक्षा बल (RPF) भी तैनात किए गए हैं।आरपीएफ और रखरखाव कर्मचारी हाई अलर्ट पर हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल हमने अधिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं। यात्रियों की सहायता के लिए स्टेशनों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। प्रमुख स्टेशनों पर नियंत्रण कक्षों की निगरानी मंडल अधिकारियों द्वारा चौबीसों घंटे की जा रही है  

गुनाहों का हिसाब अब भारत में! मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को बेल्जियम कोर्ट की हरी झंडी

ब्रसेल्स भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी अब जल्द ही भारत लौटाया जा सकता है. बेल्जियम की एंटवर्प अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसले में उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने साफ कहा कि चोकसी बेल्जियम का नागरिक नहीं बल्कि विदेशी नागरिक है और उसके खिलाफ भारत में दर्ज आरोप गंभीर आपराधिक प्रकृति के हैं. बेल्जियम कोर्ट के अनुसार, मेहुल चोकसी पर धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और जालसाजी जैसे संगीन अपराधों के आरोप हैं. कोर्ट ने माना कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई मिलेगी और जेल की सुविधाएं भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी. धरी रह गईं चोकसी की सारी दलीलें अदालत ने चोकसी की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने दावा किया था कि उसका मामला राजनीतिक प्रतिशोध या धार्मिक भेदभाव से प्रेरित है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि ‘यह मामला न तो राजनीतिक है, न धार्मिक और न ही नस्लीय आधार पर प्रेरित.’ बेल्जियम कोर्ट ने चोकसी द्वारा लगाए गए अपहरण और यातना जैसे आरोपों को भी निराधार करार दिया. अदालत ने कहा कि इन आरोपों का कोई ठोस सबूत नहीं है और ये केवल प्रत्यर्पण प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश हैं. जल्द आया जाएगा भारत सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के बाद भारत सरकार ने चोकसी को जल्द से जल्द भारत लाने की तैयारी शुरू कर दी है. अब बेल्जियम की अदालत के आदेश की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद चोकसी के प्रत्यर्पण की तारीख तय की जाएगी. वर्ष 2018 में पीएनबी लोन घोटाला उजागर होने के बाद मेहुल चोकसी भारत से भाग गया था. उनके अपने भांजे नीरव मोदी के साथ मिलकर बैंक को लगभग 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया था. नीरव मोदी इस समय ब्रिटेन की जेल में बंद है और उसके भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पहले से चल रही है. बेल्जियम अदालत के इस फैसले को भारत के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है. विदेश मंत्रालय और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने इसे ‘न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम’ बताया है.

मोदी-ट्रंप रिश्तों में आएगा नया मोड़? जल्द हो सकती है अहम मुलाकात

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी मलयेशिया के दौरे पर आसियान समिट में जा सकते हैं। यदि वह ASEAN समिट में गए तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात हो सकती है और इस पर दुनिया भर की नजरें होंगी। वह आसियान समिट से इतर डोनाल्ड ट्रंप से मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर इस दौरान बात हो सकती है। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच बीते कुछ महीनों में करीबी बढ़ती दिखी है और ऐसी स्थिति में नरेंद्र मोदी और ट्रंप की मुलाकात के मायने क्या होंगे, यह देखने वाली बात होगी। अमेरिका ने जिस तरह पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को तवज्जो दी है और उन्हें वाइट हाउस तक बुलाया था, उससे कयास लग रहे हैं कि एक बार फिर से शीत युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं। तब भारत गुटनिरपेक्षता की राजनीति करते हुए एक तरह से रूस के ब्लॉक में था। वहीं अमेरिका की गोद में पाकिस्तान बैठा था। एक बार फिर से रूस और भारत का विरोध करते हुए अमेरिका उसी रणनीति पर आगे बढ़ता दिखता है। ऐसे हालात में पीएम नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मीटिंग में क्या निकलता है, यह चर्चा का विषय है। अब तक सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट नहीं किया है कि पीएम नरेंद्र मोदी का ASEAN समिट में जाना तय है या नहीं। लेकिन दौरे से इनकार भी नहीं है। बता दें कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि वह 26 अक्तूबर से होने वाले ASEAN समिट में जाएंगे और पीएम नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की उम्मीद है। इससे पहले दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात इस साल फरवरी में हुई थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी द्विपक्षीय वार्ता के लिए अमेरिका गए थे। लेकिन रिश्तों के बिगड़ने की शुरुआत तब हुई, जब अमेरिका की ओर से भारत पर मोटा टैरिफ लगाया गया। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बार-बार दावे हुए कि उन्होंने जंग रुकवाई है। इस बात ने भी भारत को असहज किया है और दोनों देशों के रिश्ते निचले स्तर पर पहुंचे हैं।

नदीम ने रची थी गुलशन कुमार की हत्या की साजिश? वकील ने बताई अनुराधा पौडवाल से जुड़ी चौंकाने वाली वजह

मुंबई कैसेट किंग गुलशन कुमार की हत्या मेन मास्टरमाइंड नदीम सैफी थी। यह कहना है, लॉयर उज्ज्वल निकम का। 1997 में दिनदहाड़े गुलशन कुमार को गोलियों से छलनी कर दिया गया था। इस हत्याकांड ने हर किसी को झकझोर दिया था। उनकी हत्या की वजह भी अभी तक किसी को ठीक से नहीं पता। कुछ लोग इसे पैसे का लेनदेन बताते हैं। वहीं उज्ज्वल निकम ने इशारा किया है कि दोनों की सिंगर अल्का याज्ञनिक और अनुराधा पौडवाल की वजह से राइवलरी थी। इसीलिए भारत नहीं आ रहा नदीम शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में उज्ज्वल निकम से पूछा गया कि क्या गुलशन कुमार की हत्या में नदीम का हाथ था? इस पर उन्होंने जवाब दिया, 'हां, उसका हाथ था। इसीलिए वह वापस नहीं आ रहा है। वह ट्रायल फेस नहीं कर रहा है। वरना ट्रायल में क्यों नहीं आता।' नदीम कई साल यूके में रहने के बाद अब दुबई में रह रहा है। ट्रायल नहीं फेस करना चाहता नदीम उज्ज्वल ने बताया कि कुछ साल पहले नदीम ने वापस आने की इच्छा जाहिर की थी। वह बोले, 'उसने प्रपोजल दिया था कि वापस आना चाहता हूं। मैंने कहा, 'बिल्कुल वापस आओ और ट्रायल फेस करो।' वह नहीं चहता था।' क्यों हुई गुलशन कुमार की हत्या उज्ज्वल से पूछा गया कि गुलशन कुमार की हत्या क्यों हुई थी? इस पर उन्होंने जवाब दिया, 'वो एकदम अलग कहानी है। अनुराधा पौडवाल इनकी सिंगर थीं। अल्का याज्ञनिक उनकी सिंगर थीं। बस। पुलिस को लगता है कि नदीम इस हत्या का मुख्य षड्यंत्रकर्ता था। उसने ही सब रचा था। पुलिस का मानना है कि हत्या नदीम के कहने पर हुई और साजिश दुबई में रची गई।' कैसे हुई थी हत्या गुलशन कुमार वैष्णो देवी और शिव के परम भक्त थे। 12 अगस्त 1997 को वह मंदिर से पूजा करके वापस आ रहे थे तभी उन पर हमला कर दिया गया। गुलशन कुमार को 16 गोलियां लगी थीं और मौके पर ही उनका निधन हो गया। 30 अगस्त को इस हत्याकांड में नदीम-श्रवण की जोड़ी वाले नदीम का हाथ सामने आया। रिपोर्ट्स थीं कि गुलशन कुमार ने नदीम के अल्बम 'हाय अजनबी' की ठीक से पब्लिसिटी नहीं की तो वह नाराज था। हालांकि काफी पहले से दोनों के बीच काफी मनमुटाव चल रहा था।

क्या है कफाला सिस्टम? सऊदी में ऐतिहासिक बदलाव से प्रवासी मजदूरों को मिला आज़ादी का तोहफा

दुबई  सऊदी अरब में अब पहले के मुताबिक जॉब करना आसान हो गया है क्योंकि इस देश ने गुलामी की जंजीर कही जाने वाली दशकों पुरानी कफाला सिस्टम का अंत कर दिया है। यह लेबर स्पॉन्सरशिप सिस्टम था, जिसके तहत लाखों विदेशी कामगारों के जीवन और अधिकारों को नियंत्रित किया जाता था। जून 2025 में घोषित यह निर्णय अब प्रभावी हो गया है। यह प्रवासी कल्याण और श्रम अधिकारों में सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस सुधार से लगभग 1.3 करोड़ प्रवासी कामगारों को लाभ होने की उम्मीद है, जिनमें से अधिकांश दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया से हैं। इनमें भारतीयों की भी बड़ी संख्या है। कफाला सिस्टम क्या? कफाला, अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ 'प्रायोजन' यानी स्पॉन्सरशिप होता है। यह शब्द खाड़ी देशों में जीवन के एक तरीके को उजागर करता है। इसके तहत कोई भी विदेशी कामगार या श्रमिक वहां किसी नियोक्ता के स्पॉन्सरशिप पर ही काम कर सकता था। इस सिस्टम में नियोक्ताओं का अपने कर्मचारियों पर लगभग पूरा कंट्रोल होता है। कर्मचारी अपने स्पॉन्सरशिप की इजाजत के बिना न तो नौकरी बदल सकते हैं, न देश छोड़ सकते हैं, या यहां तक ​​कि उसे कोई कानूनी मदद भी नहीं मिल सकती है। यह एक तरह से गुलामी की जंजीर थी। 1950 के दशक से ही चला आ रहा यह सिस्टम 1950 के दशक से ही चला आ रहा है। सऊदी अरब के अलावा यह कतर, कुवैत, जॉर्डन जैसे देशों में बहुत प्रचलित सिस्टम है। कफाला सिस्टम मूल रूप से तेल-समृद्ध खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण के लिए आवश्यक सस्ते विदेशी श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उसका प्रबंधन करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस प्रणाली के अनुसार, प्रत्येक प्रवासी श्रमिक एक स्थानीय प्रायोजक, जिसे कफ़ील कहा जाता था, से बंधा होता था, जो उनके निवास, रोजगार और कानूनी स्थिति पर अधिकार रखता था। श्रमिकों के शोषण का जरिया था ये सिस्टम शुरुआत में यह सिस्टम प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए लाया गया था ताकि विदेशी जमीं पर उनके रहमे-सहने, खाने-पीने का इंतजाम उसके स्पॉन्सर करें लेकिन बाद में यह सिस्टम श्रमिकों के शोषण का जरिया बन गया। नियोक्ता श्रमिकों के पासपोर्ट जब्त कर लेते थे, वेतन देने में देरी या इनकार किया करते थे, और उनकी आवाजाही पर बैन लगा रहे थे। बेचारा श्रमिक उनकी मर्जी के बिना अपने घर भी नहीं लौट सकते थे, या दुर्व्यवहार की स्थिति में अधिकारियों से भी संपर्क नहीं कर सकते थे। सऊदी अरब Vision 2030 का हिस्सा हालांकि, कई अधिकार समूह अक्सर कफाला सिस्टम की तुलना 'आधुनिक गुलामी' से करते रहे हैं, और कहते हैं कि इसने श्रमिकों से उनकी बुनियादी स्वतंत्रता छीन ली और उन्हें शोषण के दलदल में धकेल दिया है। लेकिन अब सऊदी अरब के हालिया श्रम सुधारों ने कफाला सिस्टम की जगह कॉन्ट्रैक्ट एंप्लॉयमेंट मॉडल को लागू किया है। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, नए सिस्टम में विदेशी वर्कर्स को मौजूदा कंपनी या कहें कफील की इजाजत लिए बगैर नई कंपनी ज्वाइन करने की अनुमति होगी। बता दें कि सऊदी अरब Vision 2030 के तहत देश में सुधार कर रहा है और कफाला सिस्टम को खत्म करना भी इसी पहल का हिस्सा है।